रविवार, 8 जनवरी 2012

माया की मूर्ती पुराण




माया की मूर्तियां
बाबा साहब अम्बेडकर और बसपा के संस्थापक काशीराम जी की मूर्तियों की स्थापना तो समझ में आती है, मगर जनता के पैसे को गरीबों पर खर्च करने के बजाये खुद मायावती की और चुनाव चिन्ह हाथी की मूर्तियों पर अनाप सनाप खर्च करना तो, उन मतदाताओं से भी धोका है जिन्होने मायावती को मत दिया था।
-----------------

मायावती की मूर्तियों को ढकने पर बसपा नाराज
लखनऊ. 7 जनवरी २०१२
http://raviwar.com/dailynews
उत्तर प्रदेश में चुनाव तक राज्य की मुख्यमंत्री मायावती और हाथियों की मूर्तियों को पर्दे में रखने के चुनाव आयोग के निर्णय की बसपा ने आलोचना की है. बसपा ने कहा है कि चुनाव आयोग का यह निर्णय तर्कसंगत नहीं है.
शनिवार को देश के मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने उत्तर प्रदेश में चुनाव तक बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो और राज्य की मुख्यमंत्री मायावती और उनकी पार्टी के चुनाव चिन्ह हाथी की तमाम मूर्तियों को ढकने का आदेश दिया है. चुनाव आयोग का तर्क है कि पार्कों में लगी मूर्तियां और पार्टी के चुनाव चिन्ह हाथी प्रचार का एक तरीका है. चुनाव आयोग के अनुसार ये मूर्तियां फरवरी तक ढके रहेंगी.
मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी का कहना था कि हाथी बहुजन समाज पार्टी का चुनाव निशान है और मुख्यमंत्री मायावती की प्रतिमा से राजनीतिक संदेश जाता है, इसलिए इन दोनों का ढका जाना जरुरी है. हालांकि दूसरी प्रतिमाओं के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी को छोड़कर दूसरी तमाम प्रतिमाओं को लेकर समीक्षा की जाएगी.
गौरतलब है लखनऊ में मायावती की डेढ़ करोड़ रुपये की लागत वाली 24 फीट की मूर्ति प्रतिबिंब स्थल में, वहीं की गैलरी में 47.25 लाख रुपये की लागत से 18 फीट ऊंची कांस्य प्रतिमा, परिवर्तन स्थल में ही 20.25 लाख रुपये की लागत से 12 फीट ऊंची कांस्य प्रतिमा, नौ लाख की लागत वाली सात फीट उंची प्रतीमा, मान्यवर कांशीराम स्मारक स्थल पर 47 लाख की लागत वाली 18 फीट ऊंची कांस्य प्रतिमा, डॉ. बी आर अम्बेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल पर पौन करोड़ की लागत वाली तीन प्रतिमायें, कानपुर रोड योजना में 47.25 लाख रुपये की लागत से 15 फीट ऊंची कांस्य प्रतिमा लगी हुई हैं. राज्य के अलग-अलग इलाकों में मायावती की मूर्तियों की संख्या हजारों में है.
चुनाव आयोग द्वारा मुख्यमंत्री मायावती और हाथियों की मूर्तियों को ढकने के आदेश पर टिप्पणी करते हुये बहुजन समाज पार्टी के महासचिव सतीशचंद्र मिश्र ने कहा है कि मूर्तियों को ढ़कने का आदेश तर्कसंगत नहीं जान पड़ता. उन्होंने कहा कि हाथी की मूर्ति तो नॉर्थ ब्लाक और सउथ ब्लॉक में भी लगी है, क्या उसे भी ढ़का जाएगा. उन्होंने आरोप लगाया कि निर्णय लेने से पहले उनकी पार्टी का पक्ष तक नहीं लिया गया.
बसपा ने चुनाव आयोग के निर्णय की आलोचना करते हुये कहा कि क्या चुनाव आयोग साइकिल के चलने पर रोक लगाएगी? क्या चुनाव आयोग राज्य के सरोवरों के कमल के फूल और लोगों के पंजों को भी ढ़ंकने की बात करेगी. बसपा ने चुनाव आयोग से फैसले पर पुनर्विचार का अनुरोध किया है.


 ----------------

http://www.webvarta.com 

अमरीका की एक पत्रिका,
” फारेन पालिसी “ में दुनिया की सबसे कुरूप मूर्तियों में मायावती की 6ठे स्थान पर रखा है।
----------------


यूपी की सियासत में आया भूचाल, 
मायावती ने दिया मूर्तियों को वोट डालने का अधिकार
http://hindi.fakingnews.com 
Sunday, January 08, 2012
लखनऊ. उत्तरप्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने 2012 के विधानसभा चुनावों से ऐन पहले राज्य की सभी मूर्तियों को वोट डालने का अधिकार दे दिया है। जिसके बाद यूपी में आम आदमी के साथ-साथ अब से मूर्तियां भी वोट डाल पाएंगी।
फैसले की जानकारी देते हुए खुद उत्तरप्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने बताया कि कुछ मनु और मनमोहनुवादी ताकतें लगातार मूर्तियां लगवाने के लिए मेरी सरकार की आलोचना कर रही थीं। मूर्तियां लगाने को पैसे की बरबादी बता रही थीं।
लिहाजा मेरी सरकार ने सोचा कि क्यों न इन मूर्तियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जाए। इनका कुछ रचनात्मक इस्तेमाल किया जाए। आख़िरकार लंबे विचार-विमार्श के बाद हमने तय किया कि मूर्तियों को भी वोट डालने का अधिकार दिया जाए। वैसे भी मूर्ति को ईश्वर मान हम उससे इतना कुछ मांग सकते हैं तो क्या उसे एक वोट डालने का हक़ नहीं दे सकते।
माया ने आगे बताया कि आगामी एक नंवबर से आम आदमी के साथ-साथ राज्य की सभी मूर्तियों के वोटर आईडी कार्ड बनाने का काम शुरू कर दिया जाएगा।
मूर्तियां वोट कैसे डालेंगी?
मायावती का कहना था कि मूर्तियां खुद चलकर तो कहीं वोट डालने जा नहीं सकती, इसलिए जो मूर्ति जिस पार्टी के नेता या समाज की होगी, उसका वोट उसी पार्टी के खाते में जोड़ा जाएगा। मसलन बाबा साहेब अम्बेडकर की मूर्ति का वोट बीएसपी में जोड़ा जाएगा और लाल बहादुर शास्त्री का वोट कांग्रेस में।
वैसे भी यूपी में जब जाति अपना दल नहीं बदलती, ये तो फिर भी मूर्तियां हैं। इस बात की संभावना बहुत कम है कि खड़े-खड़े कोई मूर्ति पार्टी बदल ले, जब तक कि वो मूर्ति अजीत सिंह की न हो।
मूर्तिप्रदेश बनाया जाएगा
ऐसे में एक सवाल ये भी उठा कि अगर मूर्तियों को वोट डालने का अधिकार दिया गया तो क्या इससे राज्य में मूर्तियां लगवाने की होड़ नहीं बढ़ेगी?
माया ने तपाक से कहा कि हमने उसका भी हल खोज निकाला है। लंबे समय ये ये मांग उठ रही है कि राज्य के तीन टुकड़े कर इससे दो और राज्य बनाए जाएं। मेरी सरकार ने तय किया है कि अगर हम दोबारा सत्ता में आए तो राज्य के
तीन के बजाए चार टुकड़े करेंगे और एक चौथा राज्य मूर्तिप्रदेश बनाया जाएगा। एक ऐसा राज्य जहां सिर्फ मूर्तियां ही मूर्तियां होंगी।
ऐसे में यूपी पुलिस को भी वहां अपराध रोकने में मदद मिलेंगी। क्योंकि इस बात की संभावना बहुत कम है कि एक मूर्ति दूसरे की तलवार छीन ले या फिर कोई मूर्ति दूसरी किसी मूर्ति का हैंडबैग छीनकर भाग जाए।
हालांकि इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि यूपी पुलिस का कोई सिपाही किसी मूर्ति से छेड़खानी न कर बैठे।
राहुल बाबा की सलाह
वहीं माया के इस फैसले के बाद सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव का कहना है कि मूर्तियां ही क्यों, चुनाव चिन्हों के वोट भी पार्टी के वोट में जोड़े जाएं। बसपा चाहे तो राज्य के सभी हाथियों और हाथियों की मूर्तियों के वोट अपने में जोड़ ले और हम राज्य की सभी साइकिलों को अपना वोट मान लेंगे!
इस पर कांग्रेस के युवा महासचिव श्री राहुल गांधी का कहना था कि अगर ‘हाथी’ और ‘साइकिल’ को वोट डालने का हक दिया जा रहा है तो ‘हाथ’ को भी वोट डालने का अधिकार मिलना चाहिए। हालांकि तभी किसी वरिष्ठ कांग्रेसी ने उनके कान में बताया कि वोट तो पहले ही हाथ से डाला जाता है!

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें