शनिवार, 21 जनवरी 2012

जवाहर लाल नेहरू : बिशनचंद्र सेठ

= सौजन्य: युधवीर सिंह लाम्बा
बहुत से लोगों का विचार है कि जवाहर लाल नेहरू ने अन्य नेताओं की तुलना में भारत के स्वतन्त्रता संग्राम में बहुत कम योगदान दिया था।
फिर भी गांधीजी ने उन्हे भारत का प्रथम प्रधानमंत्री बना दिया। स्वतंत्रता के बाद कई दशकों तक भारतीय लोकतंत्र में सत्ता के सूत्रधारों ने प्रकारांतर से देश में राजतंत्र चलाया, विचारधारा के स्थान पर व्यक्ति पूजा को प्रतिष्ठित किया और तथाकथित लोकप्रियता के प्रभामंडल से आवेष्टित रह लोकहित की पूर्णत: उपेक्षा की। अपनी अहम्मन्यता को बाह्य शिष्टता के आवरण में छिपाकर हितकर परामर्श देने वालों की बात अनसुनी कर दी तथा अपने आसपास चाटुकारों की सभाएं जोड़कर स्वयं को देवदूत घोषित करवाते रहे और स्वयं अपनी छवि पर मुग्ध होते रहे।
भारत की बहुत सी समस्याओं के लिये नेहरू को जिम्मेदार माना जाता है। इन समस्याओं में से कुछ हैं:
लेडी माउंटबेटन के साथ नजदीकी सम्बन्ध
भारत का विभाजन
कश्मीर की समस्या
चीन द्वारा भारत पर हमला
मुस्लिम तुष्टीकरण
भारत द्वारा संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के लिये चीन का समर्थन
भारतीय राजनीति में वंशवाद को बढावा देना
हिन्दी को भारत की राजभाषा बनने में देरी करना व अन्त में अनन्त काल के लिये स्थगन
भारतीय राजनीति में कुलीनतंत्र को बनाये रखना
गांधीवादी अर्थव्यवस्था की हत्या एवं ग्रामीण भारत की अनदेखी
सुभाषचन्द्र बोस का ठीक से पता नहीं लगाना
भारतीय इतिहास लेखन में गैर-कांग्रेसी तत्वों की अवहेलना
सन १९६५ के बाद भी भारत पर अंग्रेजी लादे रखने का विधेयक संसद में लाना और उसे पारित कराना : 3 जुलाई, 1962 को बिशनचंद्र सेठ द्वारा पंडित जवाहरलाल नेहरू को लिखे गये पत्र का एक हिस्सा निम्नवत है-
राष्ट्रभाषा हिन्दी के प्रति सरकार की गलत नीति के कारण देशवासियों में रोष व्याप्त होना स्वाभाविक है। विदेशी साम्राज्यवाद की प्रतीक अंग्रेजी को लादे रखने के लिए नया विधेयक संसद में न लाइये अन्यथा देश की एकता के लिए खतरा पैदा हो जाएगा।...यदि आपने अंग्रेजी को 1965 के बाद भी चालू रखने के लिए नवीन विधान लाने का प्रयास किया तो उसका परिणाम अच्छा नहीं होगा।
डा. राममनोहर लोहिया ने संसद में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के ऐशो आराम पर रोजाना होने वाले 25 हजार रुपये के खर्च को प्रमुखता से उठाया था। उनका कहना था कि भारत की जनता जहां साढ़े तीन आना पर जीवन यापन कर रही है उसी देश का प्रधानमंत्री इतना भारी भरकम खर्च कैसे कर सकता है।
सन् 1955 में चीन द्वारा किए गए आक्रमण की बात देश से छिपाकर रखी गई।

सौजन्य: युधवीर सिंह लाम्बा
By: Brijesh Patel

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