शुक्रवार, 3 फ़रवरी 2012

2 G - फिर कभी इस तरह की लूट न हो इस तरह का कदम उठे......



- अरविन्द सिसोदिया 
फिर कभी इस तरह की लूट न हो इस तरह का कदम उठे......
कांग्रेस और दूरसंचार घोटालों का चोली दामन का साथ है। कांग्रेस की नरसिंहराव सरकार में दूरसंचार मंत्री रहे सुखराम को नोटों के बिस्तर पर पाया गया था और उन्हे भ्रष्टाचार में सजा हुई। अंधा भी यह जान रहा है कि 2 जी आबंटन में जम कर लूट हुई और सरकार ने समर्थन बनाये रखने के लिये इस लूट को होने दिया। यदि हम अन्य उठ रहे सवालों और बातों को मानें तो, सरकार खुद इस लूट में भी शामिल हो गई थी। खैर सर्वोच्च न्यायालय का भला हो कि उसने दूध का दूध और पानी का पानी करते हुये , लायसेस गलत दिये थे यह मान लिया और उन 122 लायसेंसों को रद्द भी कर दिये। सवाल यह है कि इस अवधी में हुई लूट  और सरकारी हानी को भी वसूला जाये...........!!! 
http://www.bhaskar.com/article 

2जी स्पेक्ट्रम के सभी 122 लाइसेंस रद्द, मुसीबत में ग्राहक!
02/02/2012
नई दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय ने गुरुवार को पूर्व केंद्रीय दूरसंचार मंत्री ए. राजा के कार्यकाल में आवंटित किए गए दूसरी पीढ़ी (2जी) के स्पेक्ट्रमों के लिए सभी 122 लाइसेंसों को रद्द करते हुए कहा कि मामले में केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदम्बरम को सह आरोपी बनाने पर फैसला निचली अदालत करेगी।
जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति जी. एस. सिंघवी और ए. के. गांगुली की खंडपीठ ने कहा कि घोटाले की जांच कर रहा केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) अपनी रिपोर्ट केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) को सौंपेगा।
खंडपीठ ने सीबीआई जांच पर नियमित नजर रखने के लिए विशेष जांच टीम (एसआईटी) के गठन की मांग पर कहा कि रिपोर्ट का परीक्षण करने के बाद सीवीसी अपनी रिपोर्ट सील बंद लिफाफे में सर्वोच्च न्यायालय को देगा।
खंडपीठ ने कहा कि स्वच्छ प्रशासन चाहने वाले प्रबुद्ध नागरिक अगर ऐसी पहल नहीं करते तो आम लोगों को कभी भी 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन में हुई गड़बड़ियों का पता नहीं चलता।
अदालत ने कहा कि जिन कम्पनियों के लाइसेंस रद्द होंगे वे चार महीनों तक दूरसंचार सेवा देती रहेंगी और इस अवधि में दूरसंचार नियामक मामले पर विचार करते हुए नए सिरे के नीलामी के लिए सुझाव देगा।
न्यायालय ने यूनिटेक, स्वान टेलीकॉक और टाटा टेलीसर्विसेज पर पांच-पांच करोड़ रुपये का जुर्माना लगाते हुए कहा कि इस राशि का आधा न्यायालय के कानूनी सहायता सेवाओं और बाकी धन रक्षा सेवाओं को दिया जाएगा। अन्य कम्पनियों पर अलग-अलग जुर्माना लगाया गया है।
यह पूरा फैसला स्वामी द्वारा पूरे मामले में चिदम्बरम की भूमिका की जांच की मांग सम्बंधी याचिका पर आया है। वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने भी लाइसेंस रद्द करने के लिए याचिका दायर कर रखी थी।
मुसीबत में ग्राहक
बाजार विशेषज्ञ निशी सहाय ने कहा कि, इस निर्णय का कंपनियों पर बहुत बुरा असर होगा। यह टेलीकाम सेक्टर के लिए बहुत बड़ा झटका है। उनके लाइसेंस रद्द होने से अब ग्राहकों पर सीधा असर पड़ेगा। अब कॉल रेट महंगे होने या नेटवर्क बंद होने का खतरा है। मतलब साफ है कि करेगा कोई, भरेगा कोई।
ट्राई के चेयरमैन जे. एस. शर्मा ने कहा कि, हम कोर्ट के निर्णय का सम्मान करते हैं। पूरी तरह से पढ़ने के बाद उस पर कार्रवाही करेंगे। नए सिरे से निलामी के लिए दिशा-निर्देश तैयार करके सरकार को पहले भेजा जाएगा। उसके बाद आगे की निलामी की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी। इस फैसले से महज 5 फीसदी मोबाइल सब्स्क्राइबर प्रभावित होंगे। प्रभावित होने वाले ग्राहकों को अन्य मोबाइल ऑपरेटरों को ट्रांसफर किया जा सकता है।
इनके लाइसेंस हुए रद्द
जिन कंपनियों के लाइसेंस रद्द होंगे उनमें टाटा के तीन, वीडियोकान के 21, आइडिया के 9, स्वान के 13, लूप के 21, सिस्टेमा श्याम के 21 स्पेक्ट्रम लाइसेंस शामिल हैं।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें