शनिवार, 31 मार्च 2012

रामनवमी :Ram Navami : Lord Ram



Ram Navami: Sunday, 1 April 2012

मंगल भवन अमंगल हारी,
दॄवहुसु दशरथ अजिर बिहारि ॥
अगस्त्य संहिताके अनुसार चैत्र शुक्ल नवमी के दिन पुनर्वसु नक्षत्र, कर्क लग्‍न में जब सूर्य अन्यान्य पाँच ग्रहों की शुभ दृष्टि के साथ मेष राशि पर विराजमान थे, तभी साक्षात्‌ भगवान्‌ श्रीराम का माता कौसल्या के गर्भ से जन्म हुआ।

चैत्र शुक्ल नवमी का धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व है। आज ही के दिन तेत्रा युग में रघुकुल शिरोमणि महाराज दशरथ एवं महारानी कौशल्या के यहाँ अखिल ब्रम्हांड नायक अखिलेश ने पुत्र के रूप में जन्म लिया था।
दिन के बारह बजे जैसे ही सौंदर्य निकेतन, शंख, चक्र, गदा, पद्म धारण कि‌ए हु‌ए चतुर्भुजधारी श्रीराम प्रकट हु‌ए तो मानो माता कौशल्या उन्हें देखकर विस्मित हो ग‌ईं। उनके सौंदर्य व तेज को देखकर उनके नेत्र तृप्त नहीं हो रहे थे।

Ram Navami is commemorated in Hindu households by puja (prayer). The items necessary for the puja are roli, aipun, rice, water, flowers, a bell and a conch. After that, the youngest female member of the family applies teeka to all the members of the family. Everyone participates in the puja by first sprinkling the water, roli, and aipun on the Gods, and then showering handfuls of rice on the deities. Then everybody stands up to perform the aarti, at the end of which ganga jal or plain water is sprinkled over the gathering. The singing of bhajans goes on for the entire puja. Finally, the prasad is distributed among all the people who have gathered for worship.


श्रीराम के जन्मोत्सव को देखकर देवलोक भी अवध के सामने फीका लग रहा था। देवता, ऋषि, किन्नार, चारण सभी जन्मोत्सव में शामिल होकर आनंद उठा रहे थे। आज भी हम प्रतिवर्ष चैत्र शुक्ल नवमी को राम जन्मोत्सव मनाते हैं और राममय होकर कीर्तन, भजन, कथा आदि में रम जाते हैं।
रामजन्म के कारण ही चैत्र शुक्ल नवमी को रामनवमी कहा जाता है। रामनवमी के दिन ही गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरित मानस की रचना का श्रीगणेश किया था।
उस दिन जो कोई व्यक्ति दिनभर उपवास और रातभर जागरणका व्रत रखकर भगवान्‌ श्रीरामकी पूजा करता है, तथा अपनी आर्थिक स्थितिके अनुसार दान-पुण्य करता है, वह अनेक जन्मोंके पापोंको भस्म करनेमें समर्थ होता है।



http://bharat.gov.in/knowindia/culture_heritage.php?id=77

रामनवमी

रामनवमी राजा दशरथ के पुत्र भगवान राम की स्‍मृति को समर्पित है। उसे "मर्यादा पुरूषोतम" कहा जाता है तथा वह सदाचार का प्रतीक है। यह त्‍यौहार शुक्‍ल पक्ष की 9वीं तिथि जो अप्रैल में किसी समय आती है, को राम के जन्‍म दिन की स्‍मृति में मनाया जाता है।
भगवान राम को उनके सुख-समृद्धि पूर्ण व सदाचार युक्‍त शासन के लिए याद किया जाता है। उन्‍हें भगवान विष्‍णु का अवतार माना जाता है, जो पृथ्‍वी पर अजेय रावण (मनुष्‍य रूप में असुर राजा) से युद्ध लड़ने के लिए आए। राम राज्‍य (राम का शासन) शांति व समृद्धि की अवधि का पर्यायवाची बन गया है।
रामनवमी के दिन, श्रद्धालु बड़ी संख्‍या में मन्दिरों में जाते हैं और राम की प्रशंसा में भक्तिपूर्ण भजन गाते हैं तथा उसके जन्‍मोत्‍सव को मनाने के लिए उसकी मूर्तियों को पालने में झुलाते हैं। इस महान राजा की कहानी का वर्णन करने के लिए काव्‍य तुलसी रामायण से पाठ किया जाता है।
भगवान राम का जन्‍म स्‍थान अयोध्‍या, रामनवमी त्‍यौहार के महान अनुष्‍ठान का केंद्र बिन्‍दु है। राम, उनकी पत्‍नी सीता, भाई लक्ष्‍मण व भक्‍त हनुमान की रथ यात्राएं बहुत से मंदिरों से निकाली जाती हैं।
हिंदू घरों में रामनवमी पूजा करके मनाई जाती है। पूजा के लिए आवश्‍यक वस्‍तुएं, रोली, ऐपन, चावल, जल, फूल, एक घंटी और एक शंख होते हैं। इसके बाद परिवार की सबसे छोटी महिला सदस्‍य परिवार के सभी सदस्‍यों को टीका लगाती है। पूजा में भाग लेने वाला प्रत्‍येक व्‍यक्ति के सभी सदस्‍यों को टीका लगाया जाता है। पूजा में भाग लेने वाला प्रत्‍येक व्‍यक्ति पहले देवताओं पर जल, रोली और ऐपन छिड़कता है, तथा इसके बाद मूर्तियों पर मुट्ठी भरके चावल छिड़कता है। तब प्रत्‍येक खड़ा होकर आ‍रती करता है तथा इसके अंत में गंगाजल अथवा सादा जल एकत्रित हुए सभी जनों पर छिड़का जाता है। पूरी पूजा के दौरान भजन गान चलता रहता है। अंत में पूजा के लिए एकत्रित सभी जनों को प्रसाद वितरित किया जाता है।

दुर्गा के नौ स्वरुप : नवरात्र की पूजा





नव दुर्गा की आराधना


जिस प्रकार सृष्टि या संसार का सृजन ब्रह्मांड के गहन अंधकार के गर्भ से नवग्रहों के रूप में हुआ , उसी प्रकार मनुष्य जीवन का सृजन भी माता के गर्भ में ही नौ महीने के अन्तराल में होता है। मानव योनि के लिए गर्भ के यह नौ महीने नव रात्रों के समान होते हैं , जिसमें आत्मा मानव शरीर धारण करती है।
नवरात्र का अर्थ शिव और शक्ति के उस नौ दुर्गाओं के स्वरूप से भी है , जिन्होंने आदिकाल से ही इस संसार को जीवन प्रदायिनी ऊर्जा प्रदान की है और प्रकृति तथा सृष्टि के निर्माण में मातृशक्ति और स्त्री शक्ति की प्रधानता को सिद्ध किया है। दुर्गा माता स्वयं सिंह वाहिनी होकर अपने शरीर में नव दुर्गाओं के अलग-अलग स्वरूप को समाहित किए हुए है।
शारदीय एवं चैत्र नवरात्र में इन सभी नव दुर्गाओं को प्रतिपदा से लेकर नवमी तक पूजा जाता है। इन नव दुर्गाओं के स्वरूप की चर्चा महर्षि मार्कण्डेय को ब्रह्मा जी द्वारा इस क्रम के अनुसार संबोधित किया है।

प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी।
तृतीयं चन्द्रघंटेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम् ।।
पंचमं स्क्न्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च ।
सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमम् ।।
नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गाः प्रकीर्तिताः ।।

प्रथम दुर्गा शैलपुत्री :

पर्वतराज हिमालय की पुत्री पार्वती के स्वरूप में साक्षात शैलपुत्री की पूजा देवी के मंडपों में प्रथम नवरात्र के दिन होती है। इसके एक हाथ में त्रिशूल , दूसरे हाथ में कमल का पुष्प है। यह नंदी नामक वृषभ पर सवार संपूर्ण हिमालय पर विराजमान है। शैलराज हिमालय की कन्या होने के कारण नवदुर्गा का सर्वप्रथम स्वरूप शैलपुत्री कहलाया है। यह वृषभ वाहन शिवा का ही स्वरूप है। घोर तपस्चर्या करने वाली शैलपुत्री समस्त वन्य जीव जंतुओं की रक्षक भी हैं। शैलपुत्री के अधीन वे समस्त भक्तगण आते हैं , जो योग साधना तप और अनुष्ठान के लिए पर्वतराज हिमालय की शरण लेते हैं। जम्मू - कश्मीर से लेकर हिमांचल पूर्वांचल नेपाल और पूर्वोत्तर पर्वतों में शैलपुत्री का वर्चस्व रहता है। आज भी भारत के उत्तरी प्रांतों में जहां-जहां भी हल्की और दुर्गम स्थली की आबादी है , वहां पर शैलपुत्री के मंदिरों की पहले स्थापना की जाती है , उसके बाद वह स्थान हमेशा के लिए सुरक्षित मान लिया जाता है ! कुछ अंतराल के बाद बीहड़ से बीहड़ स्थान भी शैलपुत्री की स्थापना के बाद एक सम्पन्न स्थल बल जाता है।

द्वितीय ब्रह्मचारिणी :

नवदुर्गाओं में दूसरी दुर्गा का नाम ब्रह्मचारिणी है। इसकी पूजा-अर्चना द्वितीया तिथि के दौरान की जाती है। सच्चिदानंदमय ब्रह्मस्वरूप की प्राप्ति कराना आदि विद्याओं की ज्ञाता ब्रह्मचारिणी इस लोक के समस्त चर और अचर जगत की विद्याओं की ज्ञाता है। इसका स्वरूप सफेद वस्त्र में लिपटी हुई कन्या के रूप में है , जिसके एक हाथ में अष्टदल की माला और दूसरे हाथ में कमंडल विराजमान है। यह अक्षयमाला और कमंडल धारिणी ब्रह्मचारिणी नामक दुर्गा शास्त्रों के ज्ञान और निगमागम तंत्र-मंत्र आदि से संयुक्त है। अपने भक्तों को यह अपनी सर्वज्ञ संपन्नन विद्या देकर विजयी बनाती है ।

तृतीय चन्द्रघंटा :

शक्ति के रूप में विराजमान चन्द्रघंटा मस्तक पर चंद्रमा को धारण किए हुए है। नवरात्र के तीसरे दिन इनकी पूजा-अर्चना भक्तों को जन्म जन्मांतर के कष्टों से मुक्त कर इहलोक और परलोक में कल्याण प्रदान करती है। देवी स्वरूप चंद्रघंटा बाघ की सवारी करती है। इसके दस हाथों में कमल , धनुष-बाण , कमंडल , तलवार , त्रिशूल और गदा जैसे अस्त्र हैं। इसके कंठ में सफेद पुष्प की माला और रत्नजड़ित मुकुट शीर्ष पर विराजमान है। अपने दोनों हाथों से यह साधकों को चिरायु आरोग्य और सुख सम्पदा का वरदान देती है।

चतुर्थ कूष्मांडा :

त्रिविध तापयुत संसार में कुत्सित ऊष्मा को हरने वाली देवी के उदर में पिंड और ब्रह्मांड के समस्त जठर और अग्नि का स्वरूप समाहित है। कूष्माण्डा देवी ही ब्रह्मांड से पिण्ड को उत्पन्न करने वाली दुर्गा कहलाती है। दुर्गा माता का यह चौथा स्वरूप है। इसलिए नवरात्रि में चतुर्थी तिथि को इनकी पूजा होती है। लौकिक स्वरूप में यह बाघ की सवारी करती हुई अष्टभुजाधारी मस्तक पर रत्नजड़ित स्वर्ण मुकुट वाली एक हाथ में कमंडल और दूसरे हाथ में कलश लिए हुए उज्जवल स्वरूप की दुर्गा है। इसके अन्य हाथों में कमल , सुदर्शन , चक्र , गदा , धनुष-बाण और अक्षमाला विराजमान है। इन सब उपकरणों को धारण करने वाली कूष्मांडा अपने भक्तों को रोग शोक और विनाश से मुक्त करके आयु यश बल और बुद्धि प्रदान करती है।

पंचम स्कन्दमाता :

श्रुति और समृद्धि से युक्त छान्दोग्य उपनिषद के प्रवर्तक सनत्कुमार की माता भगवती का नाम स्कन्द है। अतः उनकी माता होने से कल्याणकारी शक्ति की अधिष्ठात्री देवी को पांचवीं दुर्गा स्कन्दमाता के रूप में पूजा जाता है। नवरात्रि में इसकी पूजा-अर्चना का विशेष विधान है। अपने सांसारिक स्वरूप में यह देवी सिंह की सवारी पर विराजमान है तथा चतुर्भज इस दुर्गा का स्वरूप दोनों हाथों में कमलदल लिए हुए और एक हाथ से अपनी गोद में ब्रह्मस्वरूप सनत्कुमार को थामे हुए है। यह दुर्गा समस्त ज्ञान-विज्ञान , धर्म-कर्म और कृषि उद्योग सहित पंच आवरणों से समाहित विद्यावाहिनी दुर्गा भी कहलाती है।

षष्टम कात्यायनी :

यह दुर्गा देवताओं के और ऋषियों के कार्यों को सिद्ध करने लिए महर्षि कात्यायन के आश्रम में प्रकट हुई महर्षि ने उन्हें अपनी कन्या के स्वरूप पालन पोषण किया साक्षात दुर्गा स्वरूप इस छठी देवी का नाम कात्यायनी पड़ गया। यह दानवों और असुरों तथा पापी जीवधारियों का नाश करने वाली देवी भी कहलाती है। वैदिक युग में यह ऋषिमुनियों को कष्ट देने वाले प्राणघातक दानवों को अपने तेज से ही नष्ट कर देती थी। सांसारिक स्वरूप में यह शेर यानी सिंह पर सवार चार भुजाओं वाली सुसज्जित आभा मंडल युक्त देवी कहलाती है। इसके बाएं हाथ में कमल और तलवार दाहिने हाथ में स्वस्तिक और आशीर्वाद की मुद्रा अंकित है।

सप्तम कालरात्रि :

अपने महाविनाशक गुणों से शत्रु एवं दुष्ट लोगों का संहार करने वाली सातवीं दुर्गा का नाम कालरात्रि है। विनाशिका होने के कारण इसका नाम कालरात्रि पड़ गया। आकृति और सांसारिक स्वरूप में यह कालिका का अवतार यानी काले रंग रूप की अपनी विशाल केश राशि को फैलाकर चार भुजाओं वाली दुर्गा है , जो वर्ण और वेश में अर्द्धनारीश्वर शिव की तांडव मुद्रा में नजर आती है। इसकी आंखों से अग्नि की वर्षा होती है। एक हाथ से शत्रुओं की गर्दन पकड़कर दूसरे हाथ में खड़क तलवार से युद्ध स्थल में उनका नाश करने वाली कालरात्रि सचमुच ही अपने विकट रूप में नजर आती है। इसकी सवारी गंधर्व यानी गधा है , जो समस्त जीवजंतुओं में सबसे अधिक परिश्रमी और निर्भय होकर अपनी अधिष्ठात्री देवी कालरात्रि को लेकर इस संसार में विचरण कर रहा है। कालरात्रि की पूजा नवरात्र के सातवें दिन की जाती है। इसे कराली भयंकरी कृष्णा और काली माता का स्वरूप भी प्रदान है , लेकिन भक्तों पर उनकी असीम कृपा रहती है और उन्हें वह हर तरफ से रक्षा ही प्रदान करती है।

अष्टम महागौरी :

 नवरात्र के आठवें दिन आठवीं दुर्गा महागौरी की पूजा-अर्चना और स्थापना की जाती है। अपनी तपस्या के द्वारा इन्होंने गौर वर्ण प्राप्त किया था। अतः इन्हें उज्जवल स्वरूप की महागौरी धन , ऐश्वर्य , पदायिनी , चैतन्यमयी , त्रैलोक्य पूज्य मंगला शारिरिक , मानसिक और सांसारिक ताप का हरण करने वाली माता महागौरी का नाम दिया गया है। उत्पत्ति के समय यह आठ वर्ष की आयु की होने के कारण नवरात्र के आठवें दिन पूजने से सदा सुख और शान्ति देती है। अपने भक्तों के लिए यह अन्नपूर्णा स्वरूप है। इसीलिए इसके भक्त अष्टमी के दिन कन्याओं का पूजन और सम्मान करते हुए महागौरी की कृपा प्राप्त करते हैं। यह धन-वैभव और सुख-शान्ति की अधिष्ठात्री देवी है। सांसारिक रूप में इसका स्वरूप बहुत ही उज्जवल , कोमल , सफेदवर्ण तथा सफेद वस्त्रधारी चतुर्भुज युक्त एक हाथ में त्रिशूल , दूसरे हाथ में डमरू लिए हुए गायन संगीत की प्रिय देवी है , जो सफेद वृषभ यानि बैल पर सवार है।

नवम सिद्धिदात्री :

 नवदुर्गाओं में सबसे श्रेष्ठ और सिद्धि और मोक्ष देने वाली दुर्गा को सिद्धिदात्री कहा जाता है। यह देवी भगवान विष्णु की प्रियतमा लक्ष्मी के समान कमल के आसन पर विराजमान है और हाथों में कमल शंख गदा सुदर्शन चक्र धारण किए हुए है। देव यक्ष किन्नर दानव ऋषि-मुनि साधक विप्र और संसारी जन सिद्धिदात्री की पूजा नवरात्र के नवें दिन करके अपनी जीवन में यश बल और धन की प्राप्ति करते हैं। सिद्धिदात्री देवी उन सभी महाविद्याओं की अष्ट सिद्धियां भी प्रदान करती हैं , जो सच्चे हृदय से उनके लिए आराधना करता है। नवें दिन सिद्धिदात्री की पूजा उपासना करने के लिए नवाहन का प्रसाद और नवरस युक्त भोजन तथा नौ प्रकार के फल-फूल आदि का अर्पण करके जो भक्त नवरात्र का समापन करते हैं , उनको इस संसार में धर्म , अर्थ , काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है। सिद्धिदात्री देवी सरस्वती का भी स्वरूप है , जो सफेद वस्त्रालंकार से युक्त महा ज्ञान और मधुर स्वर से अपने भक्तों को सम्मोहित करती है। नवें दिन सभी नवदुर्गाओं के सांसारिक स्वरूप को विसर्जन की परम्परा भी गंगा , नर्मदा , कावेरी या समुद्र जल में विसर्जित करने की परम्परा भी है। नवदुर्गा के स्वरूप में साक्षात पार्वती और भगवती विघ्नविनाशक गणपति को भी सम्मानित किया जाता है।


टैट्रा ट्रकों की खरीद में गड़बड़ी ,रक्षा मंत्री एके एंटनी इस्‍तीफा दे...




'एंटनी जवाब दें, नहीं तो इस्‍तीफा दे'

Date: 3/30/2012
रक्षा सौदों में गड़बड़ी की शिकायतों के बारे में एक के बाद एक खुलासे से सरकार की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। एंटनी को रक्षा सौदों में गड़बड़ी के बारे में पहले से जानकारी होने की बात के जरिये सामने आने के बाद बीजेपी ने भी सरकार पर हमला बोल दिया है।
बीजेपी के प्रकाश जावड़ेकर ने कहा, 'मीडिया में आ रही खबरों के मुताबिक 2009 में ही एंटनी को टैट्रा घोटाले की जानकारी मिली थी। यदि अब भी एंटनी के पास कोई जवाब नहीं है तो उन्‍हें इस्‍तीफा दे देना चाहिए। वहीं, बीजेपी प्रवक्‍ता मुख्‍तार अब्‍बास नकवी ने कहा, सरकार इस मुद्दे पर लीपापोती करने में जुटी है।
एक के बाद एक सफाई देने की कोशिश में मसले को उलझा रही है।' चिट्ठी लीक पर मचे बवाल के बाद आर्मी चीफ जनरल वी के सिंह आज पहली बार मीडिया के सामने आए। लेकिन उन्‍होंने इस विवाद पर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया। चिट्ठी  लीक मामले की जांच आईबी कर रही है।
वीके सिंह ने डिफेंस एक्‍सपो में कहा कि सेना चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार है। जनरल ने कहा, ‘सेना के लिए 70 फीसदी उपकरणों का विदेशों से आयात गंभीर मामला है। सैन्‍य साजो सामान के लिए विदेशी कंपनियों पर हमारी निर्भरता कम होनी चाहिए। ’जब जनरल एक्‍सपो से निकलने लगे तो पत्रकारों ने उनसे सवाल पूछे।
इस पर उन्‍होंने बस इतना ही कहा, 'मुझे जो कहना था वो कह दिया है, अब इस मसले पर बोलने के लिए कुछ नया नहीं है।' वहीं दूसरी ओर, रक्षा राज्‍य मंत्री पल्‍लम राजू के आज जनरल के साथ मंच पर सामने नहीं आने से भी सवाल खड़े होने लगे हैं।
अहम सवाल है कि क्‍या सरकार ने जनरल से दूरी बनानी शुरू कर दी है। क्‍योंकि आज डिफेंस एक्‍सपो में जनरल के साथ राजू को भी आना था लेकिन आखिरी वक्‍त में मेहमानों की सूची से रक्षा राज्‍य मंत्री का नाम हटा दिया गया।
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*** खरीद में गड़बड़ी की जानकारी,सोनिया - सिंह को थी........

नई दिल्ली। टैट्रा ट्रकों की खरीद में गड़बड़ी की जानकारी संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल और रक्षा मंत्री एके एंटनी को भी थी। सरकार में शामिल मंत्रियों द्वारा कई बार शिकायत दर्ज कराने के बावजूद एंटनी ने इस पर ध्यान नहीं दिया। यह खुलासा एक अंग्रेजी समाचार पत्र में प्रकाशित रिपोर्ट में किया गया है। इस बीच, सीबीआई ने मामला दर्ज कर वेक्ट्रा समूह के मालिक और टैट्रा ट्रक्स के बहुलांश हिस्सेदार रवि ऋषि को पूछताछ के लिए बुलाया है।रिपोर्ट के अनुसार कर्नाटक के वरिष्ठ नेता डॉ. डी हनुमनथप्पा ने 26 अगस्त 2009 में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र भेजा था। पत्र में उन्होंने आरोप लगाया था कि 6000 करोड़ रुपये का टैट्रा ट्रकों का ठेका सीधे उ***ा निर्माण करने वाली कंपनी को न देते हुए उ***े ब्रिटिश एजेंट को दिया गया। बीईएमएल के सीएमडी वीआर*** नटराजन द्वारा दिया गया यह ठेका रक्षा खरीद से जुड़े दिशा-निर्देशों का सीधा-सीधा उल्लंघन है। पत्र मिलने के बाद सोनिया गांधी की तरफ से स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद द्वारा एक पत्र रक्षा मंत्रालय को भेजा गया था। जि***े जवाब में 22 अक्टूबर को रक्षा मंत्रालय ने कहा था इस पर जांच चल रही है और रिपोर्ट आने में समय लग ***ता है। सोनिया की तरफ से सांसद को कार्रवाई का भरोसा भी दिलाया गया।इस मामले में सांसद से 2 सितंबर को शिकायत मिलने के बाद तत्कालीन कानून मंत्री वीरप्पा मोइली ने जवाब में संबंधित मंत्रालय के सामने मुद्दा उठाने की बात कही थी। सांसद ने बाद में 16 अक्टूबर को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल को भी इस घोटाले की जानकारी दी।हनुमनथप्पा की प्रतिक्रिया-मैं सोनिया व एंटनी से व्यक्तिगत तौर पर मिला था.. मैंने घोटाले के संबंध में कई पत्र लिखे। लेकिन इन नेताओं ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

शुक्रवार, 30 मार्च 2012

जनरल वी के सिंह को घूस का ऑफर प्रकरण , ४० लाख का टाट्रा ट्रक, १ करोड़ से भी अधिक में सेना की सप्लाई में



40 लाख में मिल जाते हैं सेना को एक करोड़ में बेचे गए ट्रक!

- अरविन्द सिसोदिया ,आज का दिन जनरल के पक्ष का रहा , रक्षा मंत्री का यह दावा ख़त्म हो गया की लिखित शिकायत नहीं थी । वैसे तो मंत्री स्तर के व्यक्ती से सेना का मुख्य जनरल कोई बात कह रहा हो तब , यह बात हल्की ही थी की कोई लिखित शिकायत नहीं...मगर लिखित शिकायत तो कई वर्ष पहले से थी...... यह बात सामने आनें के बाद अब रक्षा मंत्री के पास बचाव का कोई साधन नहीं बचा .....इसी कारण अब मंत्री से इस्तीफा  मांगा जा रहा हे....यूँ भी अब इतनी  किरकिरी होने के बाद उन्हें  पद पर बने रहने का हक़ नहीं बचाता ...

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40 लाख में मिल जाते हैं सेना को एक करोड़ में बेचे गए ट्रक!

आईबीएन-7 Mar 30, २०१२
http://khabar.ibnlive.in.com
 नई दिल्ली। सेना में अब तक 7000 टाट्रा ट्रक खरीदे गए हैं। दशकों से ये खरीद चल रही है लेकिन सेनाध्यक्ष वीके सिंह ने एक झटके में इस सारी खरीद पर सवाल उठा दिए। उन्हें घूस का ऑफर करने वाले दलाल ने ये कहकर सारी खरीद को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया कि आपसे पहले भी लोग पैसे लेते थे और आपके बाद भी लोग पैसे लेंगे। जाहिर है ये बयान जनरल वी के सिंह को मनाने की कोशिश में दिया गया था। लेकिन इसके पीछे एक सच्चाई भी छुपी हुई थी।
टाट्रा ट्रकों की पहली डील एक चेक कंपनी ओमनीपोल से 1986 में साइन की गई। चेकोस्लोवाकिया के बंटने के बाद 1992 से ये ट्रक बीईएमएल यानि भारत अर्थ मूवर लिमिटेड ने टाट्रा सिपॉक्स यूके नाम की कंपनी से लेना शुरू किया और यहीं से शुरू हुआ असली खेल, यहीं से टूटा सेना का पहला नियम, पहला कायदा।
आईबीएन7 के पास मौजूद दस्तावेज बताते हैं कि टाट्रा सिपॉक्स यूके लंदन की एक ट्रेडिंग कंपनी है। ये टाट्रा ट्रक खुद नहीं बनाती। किसी भी सौदे में ये सेना का पहला नियम है कि खरीद हमेशा निर्माता से सीधे होनी चाहिए। किसी भी बिचौलिया कंपनी से नहीं। लेकिन इसके बावजूद टाट्रा सिपॉक्स कंपनी से ट्रक खरीदे गए। सार्वजनिक क्षेत्र बीईएमएल ने खरीद जारी रखी। आईबीएन7 के पास उस वक्त की टाट्रा सिपॉक्स कंपनी की बैलेंस शीट है। जिसमें ये साफ होता है कि इस कंपनी की कैपिटल महज 24 करोड़ रुपये की है लेकिन इसे ठेके हजारों करोड़ के मिले।
इस कंपनी के शेयर होल्डर रवि ऋषि और जोसेफ माजेस्की हैं। स्लोवाकियन पेपर्स के मुताबिक ये लोग अवैध तरीके से पैसों के हेरफेर में जेल तक जा चुके हैं। हालांकि रवि ऋषि का दावा है कि उनकी कंपनी कई देशों को ये ट्रक सप्लाई करती है। बीईएमएल ने सिपॉक्स कंपनी के साथ जो समझौता साइन किया उसके मुताबिक सिपॉक्स आध्यात्मकि, धार्मिक और सामाजिक सेवा मुहैया करवाती है। ये कंपनी इसी काम के लिए रजिस्टर्ड हुई है। यानी आध्यात्मिक, धार्मिक और सामाजिक सेवा मुहैया कराने वाली कंपनी भारत को सैन्य ट्रकों की सप्लाई कर रही है।
ये डील हर तरह से सवालों के घेरे में है। 2003 में खुद सेना का इक्विपमेंट ब्रांच सिपॉक्स से ट्रकों की खरीद पर सवाल उठा चुका है। आईबीएन7 के पास इस ब्रांच की लिखी चिट्ठियां मौजूद हैं। इस चिट्ठी में अफसर ने सवाल उठाए हैं कि आखिर इन ट्रकों का वास्तविक निर्माता कौन है, किससे और किस कीमत पर हो रही है इनकी खरीद। इस पूरी खरीद में आखिरकार टाट्रा सिपॉक्स की क्या भूमिका है लेकिन इस खत ने फाइलों में ही दम तोड़ दिया।
इस खत के बाद स्थिति में थोडा़ बदलाव आया। 2003 में बीईएमएल ने टाट्रा और वेक्ट्रा नाम की दो कंपनियों के साथ ज्वाइंट वेंचर साइन किया। खास बात ये थी कि इस बार फिर टाट्रा और वेक्ट्रा के बड़े शेयर होल्डर रवि ऋषि ही थे। 2003 में बीईएमएल ने टाट्रा सिपॉक्स के साथ दस सालों का अग्रीमेंट किया। नियमों के मुताबिक सेनाध्यक्ष को इस डील पर हर साल साइन करना पड़ता है। इस डील पर आखिरी बार फरवरी 2010 में हस्ताक्षर हुए और ये साइन थे जनरल दीपक कपूर के। इसके बाद जनरल वीके सिंह ने इस डील पर ही सवाल उठा दिए।
इस पूरी डील में बीईएमएल की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। 2003 में बीईएमएल ने चिट्ठी लिखकर सरकार से टाट्रा ट्रकों के लिए टाट्रा सिपॉक्स यूके से ज्वाइंट वेंचर करने की इजाजत मांगी। उस वक्त बीईएमएल ने दावा किया था कि टाट्रा सिपॉक्स यूके चेक रिपब्लिक कंपनी एमएस टाट्रा की मेजर शेयरहोल्डर है। सिपॉक्स इस कंपनी के लिए मार्केटिंग का काम करती है लेकिन दस्तावेज बीईएमएल के दावे पर ही सवाल उठाते हैं। इस कंपनी की कोई ओवरसीज खरीद-बिक्री की डिटेल मौजूद नहीं है।
सिपॉक्स यूके की कोई ब्रांच नहीं है। कंपनी को करोड़ों की डील महज 24 करोड़ रुपये के वर्किंग कैपिटल पर मिली। इस कंपनी के शेयरों की कीमत महज एक पाउंड यानि 80 रुपए है। कंपनी के मेजर शेयर होल्डर रवि ऋषि हैं। जिन्होंने बाद में वेक्ट्रा कंपनी बनाई जिसके पास टाट्रा सिपॉक्स के ज्यादातर शेयर हैं। चेक मीडिया में भी इस ट्रक बनाने वाली कंपनी पर सवाल उठ चुके हैं। बहरहाल जो एक ट्रक यूरोप में 40 लाख तक में मिल जाता है। उस एक ट्रक की खरीद के लिए भारतीय सेना को एक करोड़ रुपये तक चुकाने पड़े। सवाल ये है कि आखिर इस नुकसान का जिम्मेदार कौन-कौन है। 



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एंटनी को थी टाट्रा घोटाले की जानकारी!
Friday, March 30, 2012
ज़ी न्यूज ब्यूरो http://zeenews.india.com
    नई दिल्ली: टाट्रा ट्रक पर डीएनए अखबार के नए खुलासे ने खलबली मचा दी है। इस रिपोर्ट के मुताबिक रक्षा मंत्री एके एंटनी को टाट्रा ट्रकों की खरीद में गड़बड़ी की जानकारी वर्ष 2009 से ही थी। सरकार में शामिल मंत्रियों की तरफ से भी इस सिलसिले में कई बार शिकायत दर्ज कराई गई। इसके बावजूद रक्षा मंत्री ने ध्यान नहीं दिया। 
     रक्षा मंत्री एंटनी ने राज्यसभा में कहा था कि सेना प्रमुख जनरल वी के सिंह ने उन्हें घटिया क्वालिटी के 600 टाट्रा ट्रक की फाइल आगे बढ़ाने के लिए 14 करोड़ रुपए की रिश्वत पेशकश की बात मौखिक रुप से बताई थी। लिखित शिकायत करते तो कार्रवाई जरूर होती।  रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि इसकी जानकारी सरकार में शामिल दो केंद्रीय मंत्रियों को भी थी। 
      डीएनए के पास मौजूद दस्तावेजों के मुताबिक कर्नाटक के वरिष्ठ नेता डॉ. हनुमनथप्पा ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र भेजा था। जिसमें उन्होंने कहा था कि बीईएमएल के सीएमडी वीआरएस नटराजन ने 6000 करोड़ रुपए का टाट्रा ट्रकों का ठेका सीधे उत्पादन कंपनी को न देते हुए उसके ब्रिटिश एजेंट को दिया था। 
      यह रक्षा खरीद से जुड़े दिशा-निर्देशों का उल्लंघन था। जिस पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की ओर से स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद ने रक्षा मंत्रालय को पत्र लिखा था। जवाब में रक्षा मंत्रालय ने जांच की बात कही थी। लेकिन यह भी कहा गया था जांच में समय लग सकता है।
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टाट्रा ट्रक सौदे पर गिरी गाज, मामला दर्ज

प्रकाशित Fri, मार्च 30, 2012 , 30 मार्च 2012,आईबीएन-7,नीतीश
http://hindi.moneycontrol.com
नई दिल्ली। केंद्रीय जांच ब्योरो (सीबीआई) ने आज टाट्रा ट्रक सौदा दलाली मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है। सीबीआई सिर्फ आर्मी चीफ की चिट्ठी की सिफारिशों के मुताबिक ही नहीं, बल्कि पूरे मामले की जांच करेगी।
सूत्रों के मुताबिक टाट्रा ट्रक कंपनी चीफ रवि ऋषि से भी सीबीआई पूछताछ करेगी। उनके कार्यालयों की तलाशी भी सीबीआई ले सकती है। सीबीआई ने टाट्रा चीफ को इस संबंध में नोटिस जारी किया है।
भाजपा नेता शाहनवाज हुसैन ने कहा कि टाट्रा डील में बहुत दिन से दाल में काला चल रहा है।
एक सवाल के जवाब में राजीव शुक्ला ने कहा कि रक्षा मंत्री ने पहले ही कह दिया है कि वे जो कुछ कहेंगे संसद में कहेंगे। 
वहीं, भाजपा नेता जसवंत सिंह नें कहा कि प्रधानमंत्री अपना मौन व्रत तोड़ें।
रक्षामंत्री को टाट्रा ट्रक घोटाले की जानकारी थी? 
आखिर क्या है विवादों में घिरी टाट्रा डील?
सेनाध्यक्ष जनरल वी. के. सिंह द्वार कथित तौर पर ट्राटा डील में रिश्वत की पेशकश के आरोप के बाद यह जानना जरूरी हो जाता है कि आखिर यह टाट्रा डील है क्या? 
आरोप है कि ट्रकों की सप्लाई में एक कंपनी बीईएमएल ने भारी मुनाफा कमाया। एक करोड़ रुपए में खरीदे गए ट्रक पूर्वी यूरोप से आधी कीमत पर खरीदे जा सकते थे।
भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड यानी बीईएमएल सेना को 1986 से ही टाट्रा ट्रकों की सप्लाई करती आ रही है। 2010 में बीईएमएल को 632 करोड़ के अनुमानित खर्चे पर 788 और टाट्रा ट्रक की सप्लाई का ऑर्डर दिया गया। सूत्रों के मुताबिक जनरल वी.के. सिंह ने तीन मुद्दों पर गंभीर आपत्तियां जताई थीं।
पहला टाट्रा ट्रकों को बीईएमएल ने खुद न बनाकर आयात किए थे, दूसरा ट्रकों में ड्राइविंग सीट बाईं ओर थी, जबकि भारत में वाहनों की ड्राइविंग सीट दाईं ओर होती है और तीसरा ट्रकों की सप्लाई में बीईएमएल भारी मुनाफा कमा रही थी।
एक करोड़ रुपए में खरीदे गए यही ट्रक पूर्वी यूरोप से आधी कीमत पर खरीदे जा सकते थे। टाट्रा ने साल 1997 में 7000 हजार गाड़ियां सप्लाई की थीं। 1964 से टाट्रा इंडियन आर्मी को अलग-अलग गाड़ियां सप्लाई करते आ रहा है। इन सभी पहलुओं की सीबीआई जांच करेगी। साथ ही टाट्रा के साथ सौदे की मियाद की भी जांच की जाएगी।

सेना प्रमुख सिंह के बयान : जांच न्यायिक हो या जे पी सी करे



- अरविन्द सिसोदिया
टाट्रा ट्रकों की खरीद का निर्णय प्रधान मंत्री राजीव गांधी के कार्यकाल से जुड़ा हे ....सब जानते हें की यह सप्लाई उनके मित्र रवि श्रिशी से १९८६ में हुआ था .., तब ही जब बोफोर्स का हुआ था .., राजस्थान, कोटा  से प्रकाशित राष्ट्रदूत  के अंक दिनांक २९ व ३० मार्च के अंकों में बड़ी रिपोर्ट हे ...
अतः इस पूरे मामले की जांच न्यायिक हो या जे पी सी करे ...सी बी आई की जाँच सिर्फ और सिर्फ लीपापोती करेगी ........
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सेना प्रमुख सिंह के बयान पर विवाद
रक्षा मंत्री ने की सीबीआई जांच की सिफारिश
नई दिल्ली, मंगलवार, 27 मार्च २०१२

थलसेना प्रमुख जनरल वीके सिंह के इन आरोपों के बाद सरकार नए विवाद से घिर गई कि उन्हें एक सौदे को मंजूरी देने के लिए 14 करोड़ रुपए की रिश्वत की पेशकश की गई थी। मामले से सकते में आए रक्षा मंत्रालय ने सीबीआई जांच का आदेश दिया है।

थलसेना प्रमुख के आरोपों पर सोमवार को संसद के दोनों सदनों में हंगामा हुआ और विपक्ष ने इन्हें गंभीर करार देते हुए सरकार पर कोई कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया।

जनरल सिंह ने एक इंटरव्यू में दावा किया था कि एक लॉबीस्ट ने उन्हें 600 घटिया वाहनों की खरीदी से जुड़े सौदे को मंजूरी देने के लिए 14 करोड़ रुपए की पेशकश की थी और पेशकश करने वाला कुछ ही समय पहले सेवानिवृत्त हुआ था।

जनरल सिंह ने कहा कि जरा कल्पना कीजिए, एक व्यक्ति साहस कर मेरे पास आता है और मुझसे कहता है कि यदि मैं सौदे को मंजूरी दे दूंगा तो वह मुझे 14 करोड़ रुपए देगा। वह मुझे यानी थलसेना प्रमुख को रिश्वत की पेशकश कर रहा था। उसने मुझसे कहा कि मुझसे पहले भी लोगों ने पैसा लिया है और बाद में भी लेंगे। उन्होंने कहा कि वह इस बात से हैरान हुए और मामले की जानकारी रक्षा मंत्री एके एंटनी को दी, जिन्होंने चिंतित होते हुए कहा कि ऐसे लोगों को बाहर रखा जाना चाहिए।

जनरल सिंह ने वह समय नहीं बताया जब घटनाक्रम हुआ। उन्होंने रिश्वत की पेशकश करने वाले के नाम का भी खुलासा नहीं किया है। यह खबर सामने आते ही एंटनी ने मामले को गंभीर बताते हुए सीबीआई जांच का आदेश दिया।

आरोपों से इनकार : आरोपों के बाद मामले में शामिल होने की अटकलों में अपना नाम आने पर सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल तेजिंदरसिंह ने आज आरोपों से इनकार किया। इससे पहले तेजिंदर पर रक्षामंत्री के फोनों की जासूसी के बारे में खबरें लीक करने का आरोप लग चुका है। उन्होंने कहा कि मेरा उन वाहनों से कोई लेना-देना नहीं था, जिनके लिए रिश्वत की पेशकश की गई। मैंने किसी निजी या रक्षा कंपनी के लिए काम नहीं किया। उन्होंने कहा कि वे कानूनी कार्रवाई करेंगे, हालांकि यह नहीं बताया कि किसके खिलाफ वह यह कदम उठाएंगे।

रक्षा सौदों को लेकर उनकी जनरल सिंह से बातचीत होने के सवाल पर तेजिंदर सिंह ने कहा कि जहां तक मेरी समझ है, थलसेना प्रमुख को रक्षा सौदों से कोई लेना-देना नही हैं। ये सभी उच्च स्तर के सौदे हैं, जिन्हें रक्षा मंत्रालय देखता है।

जनरल वीके सिंह से जब एक इंटरव्यू में पूछा गया कि उन्होंने रिश्वत की पेशकश करने वाले को गिरफ्तार क्यों नहीं कराया तो उन्होंने कहा कि वे बयान का आशय नहीं समझ सके और इसलिए उन्होंने बयान देने वाले के खिलाफ कार्रवाई नहीं की।

जनरल सिंह ने कहा कि कोई व्यक्ति जो कुछ दिन पहले ही सेवानिवृत्त हुआ है, आपसे कहता है कि यदि आप ऐसा करते हैं तो आपको यह मिलेगा और जब आपने इस तरह की कोई बात नहीं सुनी हो तो आपको हैरानी होगी। उन्होंने कहा कि मुझे समझ नहीं आया कि वह क्या कह रहा था। मैंने उसे जाने के लिए कहा और इस बारे में रक्षा मंत्री को सूचित किया।

जब जनरल से पूछा गया कि उन्होंने उस लॉबीस्ट को तत्काल क्यों नहीं गिरफ्तार कराया। इस पर उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि बेहतर होता यदि मैं उसके खिलाफ शिकायत करता। जिस तरह से बात कही गई उससे समझ नहीं आया कि वह क्या कह रहा था।

सेना प्रमुख ने कहा कि वह महज यह कह रहा था कि यदि इस फाइल को मंजूरी मिल गई तो इतने का भुगतान किया जाएगा। सभी इसे इस तरह देखते हैं कि समस्या क्या है। यह ऐसा नहीं था कि मेरे हाथ में रिश्वत दी जा रही थी। यह अप्रत्यक्ष तरीका था और इसलिए गिरफ्तारी नहीं की गई।

भाजपा का एंटनी पर आरोप : खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा ने सरकार पर और खासतौर पर रक्षा मंत्री एंटनी पर एक गंभीर मुद्दे पर चुप्पी साधने और कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया। भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कहा कि बहुत तेजी से जांच होनी चाहिए और संसद में तत्काल परिणामों की जानकारी दी जानी चाहिए।

पूर्व रक्षा मंत्री और भाजपा नेता जसवंत सिंह ने कहा कि एंटनी की कार्यशैली में चुप्पी, निष्क्रियता और अनिर्णय की स्थिति दिखाई देती है जो देश के लिए बहुत भारी है। हालांकि पार्टी नेता मुरली मनोहर जोशी और वेंकैया नायडू ने आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज नहीं कराने पर थलसेना प्रमुख को ही जिम्मेदार ठहराया।

पहले चुप क्यों थे जनरल : भाकपा ने अलग रुख अख्तियार करते हुए कहा कि जनरल ने यह बात पहले क्यों नहीं बताई। भाकपा नेता गुरुदास दासगुप्ता ने कहा कि वे इतने दिनों तक चुप थे। जब उनकी उम्र पर फैसला हो चुका है तो अब वे सारी बातें कह रहे हैं। उन्होंने पहले यह बात क्यों नहीं की।

कांग्रेस ने आलोचना की : मनीष तिवारी ने जनरल सिंह की आलोचना करते हुए कहा कि रिश्वत की पेशकश करने वाले के खिलाफ मामला दर्ज कराना उनकी जिम्मेदारी थी। सूचना और प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी ने कहा कि जब भी कोई वरिष्ठ अधिकारी इस तरह के आरोप लगाता है तो सरकार सुनिश्चित करती है कि मामला साफ हो। उन्होंने कहा कि जनरल सिंह ने अपने बयान में बहुत गंभीर बात कही है और सबकुछ साफ होना चाहिए। (भाषा)

जनरल सिंह ने देश पर उपकार किया है



- अरविन्द सिसोदिया
***** कोटि - कोटि प्रमाण *****
जनरल सिंह ने सेना के सच के लिये, कोयला और 2जी स्पेक्ट्रम घोटालों में व्यस्त कांग्रेस सरकार को चेता कर देशहित का बडा काम किया है। उन्हे मां भारती की ओर से कोटि - कोटि प्रमाण..........

जनरल सिंह सही हैं और कांग्रेस सरकार गलत है........
आखिर कब होगा सेना का आधुनिकी करण.....?
सेना की गुप्त रिपोटों को तो छोडिये.....रक्षा विभाग से सम्बंधित संसदीय समिति की बैठकों की अनेकानेक रिर्पोटों, कैग की चेतावनीयां और सामरिक उत्पादनों की आत्म निर्भरता के विश्लेषण गवाही देते है। कि भारत सरकार ने सेना की आधुनिकता के साथ गंभीरतम लापरवाहियां की हैं और उसे आज भी विदेशी रक्षा उत्पादकों का मौहताज बना रखा है।

सिंह तुम संघर्ष करो देश तुम्हारे साथ है।
जनरल की बात गौर से सुनो ओर सेना को तुरंत उन्नत करो....!
समय रहते सेना का सच उजागर कर,जनरल सिंह ने देश पर उपकार किया है।



‘हजार फीसदी सच हैं जनरल के दावे’

dainikbhaskar.com (28/03/12)       http://www.bhaskar.com

नई दिल्‍ली. सेना की बदहाली के बारे में आर्मी चीफ जनरल वीके सिंह की ओर से पीएम को लिखी चिट्ठी का मामला गरमाता दिख रहा है। 'दैनिक भास्‍कर' और सहयोगी प्रकाशन ‘डीएनए’ में इससे जुड़ी खबर प्रकाशित होने के बाद रक्षा राज्‍य मंत्री पल्‍लम राजू ने बुधवार को सफाई दी। पत्रकारों से बातचीत में राजू ने कहा, ‘आर्मी चीफ की चिट्ठी को सरकार गंभीरता से ले रही है।’ रक्षा राज्‍यमंत्री ने सेना की तैयारियों में कमी की बात भी कबूल की।  

यह खबर लिखने वाले पत्रकार सैकत दत्‍ता ने कहा है कि जनरल सिंह ने यह चिट्ठी 12 मार्च को पीएम को लिखी थी लेकिन अभी तक इसका जवाब नहीं मिला है।  

पूर्व सेनाध्‍यक्ष जनरल शंकर रॉय चौधरी ने भी जनरल वीके सिंह का समर्थन किया है। उन्‍होंने कहा कि जनरल सिंह ने जो बातें चिट्ठी में कही हैं वो सौ नहीं हजार फीसदी सच हैं। उन्‍हें भी अपने कार्यकाल के दौरान ऐसी दिक्‍कतों का सामना करना पड़ा था। जनरल चौधरी ने यह भी कहा कि सेना की दिक्‍कतों के बारे में मिलिट्री ऑफ डिफेंस को कई वर्षों से जानकारी है।

बुधवार, 28 मार्च 2012

भगवान राम



श्रीराम के पाँच गुण  नीति-कुशल व न्यायप्रिय श्रीराम

भगवान राम विषम परिस्थितियों में भी नीति सम्मत रहे। उन्होंने वेदों और मर्यादा का पालन करते हुए सुखी राज्य की स्थापना की। स्वयं की भावना व सुखों से समझौता कर न्याय और सत्य का साथ दिया। फिर चाहे राज्य त्यागने, बाली का वध करने, रावण का संहार करने या सीता को वन भेजने की बात ही क्यों न हो। 


सहनशील व धैर्यवान 

सहनशीलता व धैर्य भगवान राम का एक और गुण है। कैकेयी की आज्ञा से वन में 14 वर्ष बिताना, समुद्र पर सेतु बनाने के लिए तपस्या करना, सीता को त्यागने के बाद राजा होते हुए भी संन्यासी की भांति जीवन बिताना उनकी सहनशीलता की पराकाष्ठा है। 


दयालु व बेहतर स्वामी 

भगवान राम ने दया कर सभी को अपनी छत्रछाया में लिया। उनकी सेना में पशु, मानव व दानव सभी थे और उन्होंने सभी को आगे बढ़ने का मौका दिया। सुग्रीव को राज्य, हनुमान, जाम्बवंत व नल-नील को भी उन्होंने समय-समय पर नेतृत्व करने का अधिकार दिया। 


दोस्त 

केवट हो या सुग्रीव, निषादराज या विभीषण। हर जाति, हर वर्ग के मित्रों के साथ भगवान राम ने दिल से करीबी रिश्ता निभाया। दोस्तों के लिए भी उन्होंने स्वयं कई संकट झेले।


बेहतर प्रबंधक 

भगवान राम न केवल कुशल प्रबंधक थे, बल्कि सभी को साथ लेकर चलने वाले थे। वे सभी को विकास का अवसर देते थे व उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करते थे। उनके इसी गुण की वजह से लंका जाने के लिए उन्होंने व उनकी सेना ने पत्थरों का सेतु बना लिया था। 


भाई 

भगवान राम के तीन भाई लक्ष्मण, भरत व शत्रुघ्न सौतेली माँ के पुत्र थे, लेकिन उन्होंने सभी भाइयों के प्रति सगे भाई से बढ़कर त्याग और समर्पण का भाव रखा और स्नेह दिया। यही वजह थी कि भगवान राम के वनवास के समय लक्ष्मण उनके साथ वन गए और राम की अनुपस्थिति में राजपाट मिलने के बावजूद भरत ने भगवान राम के मूल्यों को ध्यान में रखकर सिंहासन पर रामजी की चरण पादुका रख जनता को न्याय दिलाया। 
भरत के लिए आदर्श भाई, हनुमान के लिए स्वामी, प्रजा के लिए नीति-कुशल व न्यायप्रिय राजा, सुग्रीव व केवट के परम मित्र और सेना को साथ लेकर चलने वाले व्यक्तित्व के रूप में भगवान राम को पहचाना जाता है। उनके इन्हीं गुणों के कारण उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम राम के नाम से पूजा जाता है। सही भी है, किसी के गुण व कर्म ही उसकी पहचान बनाते हैं।



श्रीराम की गुरु भक्ति  राम नवमी विशेष



मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम अपने शिक्षागुरु विश्वामित्र के पास बहुत संयम, विनय और विवेक से रहते थे। गुरु की सेवा में सदैव तत्पर रहते थे। उनकी सेवा के विषय में भक्त कवि तुलसीदास ने लिखा है- 
मुनिवर सयन कीन्हीं तब जाई। 
लागे चरन चापन दोऊ भाई॥ 
जिनके चरन सरोरुह लागी। 
करत विविध जप जोग विरागी॥ 
बार बार मुनि आज्ञा दीन्हीं। 
रघुवर जाय सयन तब कीन्हीं॥ 
गुरु ते पहले जगपति जागे राम सुजान। 


सीता-स्वयंवर में जब सब राजा धनुष उठाने का एक-एक करके प्रयत्न कर रहे थे तब श्रीराम संयम से बैठे ही रहे। जब गुरु विश्वामित्र की आज्ञा हुई तभी वे खड़े हुए और उन्हें प्रणाम करके धनुष उठाया।


सुनि गुरु बचन चरन सिर नावा। हर्ष विषादु न कछु उर आवा।
गुरुहिं प्रनाम मन हि मन किन्हा। अति लाघव उठाइ धनु लिन्हा॥


श्री सद्गुरुदेव के आदर और सत्कार में श्रीराम कितने विवेकी और सचेत थे, इसका उदाहरण जब उनको राज्योचित शिक्षण देने के लिए उनके गुरु वशिष्ठजी महाराज महल में आते हैं तब देखने को मिलता है। सद्गुरु के आगमन का समाचार मिलते ही सीताजी सहित श्रीराम दरवाजे पर आकर सम्मान करते हैं- 


गुरु आगमनु सुनत रघुनाथा। द्वार जाय पद नावउ माथा॥
सादर अरघ देइ घर आने। सोरह भांति पूजि सनमाने॥
गहे चरन सिय सहित बहोरी। बोले राम कमल कर जोरी॥
इसके उपरांत भक्तिभावपूर्वक कहते हैं- 'नाथ! आप भले पधारे। आपके आगमन से घर पवित्र हुआ। परन्तु होना तो यह चाहिए था कि आप समाचार भेज देते तो यह दास स्वयं सेवा में उपस्थित हो जाता।' इस प्रकार ऐसी विनम्र भक्ति से श्रीराम अपने गुरुदेव को संतुष्ट रखते हैं।
लिंक http://hindi.webdunia.com 

मंगलवार, 27 मार्च 2012

BJP : Time-Line (Chronology)


बी  जे पी राष्ट्रिय अधक्ष 

लिंक http://www.bjp.org  

Bharatiya Jana Sangh
1951 - 1977
Janata Party
1977 - 1979
Bharatiya Janata Party
1980

Chronological List of Bharatiya Jana Sangh Presidents
S.No.
Name
Year
1
Dr. S.P. Mookerjee
1951
2
Dr. S.P. Mookerjee
1952
3
Pt. Mauli Chandra Sharma
1954
4
Pt. Prem Nath Dongra
1955
5
Acharya D.P. Ghosh
1956
6
Acharya D.P. Ghosh
1956
7
Acharya D.P. Ghosh
1958
8
Acharya D.P. Ghosh
1958
9
Shri Pitamber Das
1960
10
Shri A. Rama Rao
1961
11
Acharya D.P. Ghosh
1962
12
Acharya D.P. Ghosh
1963
13
Shri Bachhraj Vyas
1965
14
Shri Balraj Madhok
1966
15
Pt. Deen Dayal Upadhyaya
1967
16
Shri Atal Bihari Vajpayee
1969
17
Shri Atal Bihari Vajpayee
1969
18
Shri Atal Bihari Vajpayee
1971
19
Shri Lal Krishna Advani
1973

Chronological List of Bharatiya Janata Party Presidents
S.No.
Name
Year
1
Shri Atal Bihari Vajpayee
1980
2
Shri Lal Krishna Advani
1986
3
Dr. Murli Manohar Joshi
1990
4
Shri Lal Krishna Advani
1992
5
Late Shri Kushabhau Thakre
1998
6
Shri Bangaru Laxman
2000
7
Late Shri K. Jana Krishnamurthy
2001
8
Shri M. Venkaiah Naidu
2002
9
Shri M. Venkaiah Naidu
2004
10
Shri Lal Krishna Advani
27th Oct. 2004 to 31st Dec.2006
11
Shri Rajnath Singh
1st Jan. 2006 to 26th Nov. 2006
12
Shri Rajnath Singh
26th Nov. 2006 to 19th Dec. 2009
13
Shri Nitin Gadkari
19th Dec. 2009 to 23 jan 2013
 14-      Shri Rajnath Singh                                                                              23 jan 2013 to.................
कालक्रम
भारतीय जनसंघ1951 - 1977
जनता पार्टी1977 - 1979
भारतीय जनता पार्टी1980 से लगातार
भारतीय जनसंघ के अध्यक्षों की कालक्रमिक सूची
क्र. संख्या
नाम
वर्ष
1
डा0 श्यामा प्रसाद मुखर्जी
1951
2
डा0 श्यामा प्रसाद मुखर्जी
1952
3
पं0 मौली चन्द्र शर्मा
1954
4
पं0 प्रेमनाथ डोगरा
1955
5
आचार्य देवी प्रसाद घोष
1956
6
आचार्य देवी प्रसाद घोष
1956
7
आचार्य देवी प्रसाद घोष
1958
8
आचार्य देवी प्रसाद घोष
1958
9
श्री पीताम्बर दास
1960
10
श्री ए0 रामाराव
1961
11
आचार्य देवी प्रसाद घोष
1962
12
आचार्य देवी प्रसाद घोष
1963
13
श्री बच्छराज व्यास
1965
14
श्री बलराज मधोक
1966
15
पं0 दीनदयाल उपाध्याय
1967
16
श्री अटल बिहारी वाजपेयी
1969
17
श्री अटल बिहारी वाजपेयी
1969
18
श्री अटल बिहारी वाजपेयी
1971
19
श्री लालकृष्ण आडवाणी
1973



भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्षों की कालक्रमिक सूची
क्र. संख्या
नाम
वर्ष
1
श्री अटल बिहारी वाजपेयी
1980
2
श्री लालकृष्ण आडवाणी
1986
3
डा0 मुरली मनोहर जोशी
1990
4
श्री लालकृष्ण आडवाणी
1992
5
स्वर्गीय श्री कुशाभाऊ ठाकरे
1998
6
श्री बंगारू लक्ष्मण
2000
7
श्री के. जनाकृष्णामूर्ति
2001
8
श्री एम. वेंकैयानायडू
2002
9
श्री एम. वेंकैयानायडू
2004
10
श्री लालकृष्ण आडवाणी
27 अक्तूबर 2004 से
31 दिसम्बर 2005 तक
11
श्री राजनाथ सिंह
1 जनवरी 2006 से
26 नवम्बर, 2006 तक
12
श्री राजनाथ सिंह
26 नवम्बर, 2006
से 19  दिसम्बर 2009


13 .                   श्री नितिन गडकरी              19  दिसम्बर 2009  से 23 जनवरी 
14.                     श्री राजनाथ सिंह                 23 जनवरी 2013 से अभी तक




स्वतंत्रता संग्राम से जन्मा: हिन्दुत्व का महानायक केशव


राष्ट्रवाद के महानायकपूज्य श्री गुरूजी



शून्य से शिखर तक: भाजपा 


Pandit Deendayal Upadhyaya : ' A Rashtra Dharmaa'


BJP HISTORY : It’s Birth and Early Growth


दीनदयाल उपाध्याय,एक रहस्यमय राजनैतिक हत्या

Atal Bihari Vajpayee : ex Prime Minister of India


पं. दीनदयाल उपाध्याय : राष्ट्रवादी राजनीति का प्रकाश