शनिवार, 24 मार्च 2012

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रार्थना : नमस्ते सदा वत्सले




नमस्ते सदा वत्सले, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रार्थना है। यह प्रार्थना संस्कृत में है। प्रार्थना की अन्तिम पंक्ति हिन्दी में है। संघ की शाखा या अन्य कार्यक्रमों में इस प्रार्थना को अनिवार्यतः गाया जाता है और ध्वज के सम्मुख नमन किया जाता है।

अनेक भारतीय भाषाओं में , 
राष्ट्रीय स्यंवसेवक संघ की प्रार्थना


प्रार्थना / देवनागरी

नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे
त्वया हिन्दुभूमे सुखं वर्धितोहम् ।
महामङ्गले पुण्यभूमे त्वदर्थे
पतत्वेष कायो नमस्ते नमस्ते ।।१।।
प्रभो शक्तिमन् हिन्दुराष्ट्राङ्गभूता
इमे सादरं त्वां नमामो वयम्
त्वदीयाय कार्याय बध्दा कटीयं
शुभामाशिषं देहि तत्पूर्तये ।
अजय्यां च विश्वस्य देहीश शक्तिं
सुशीलं जगद्येन नम्रं भवेत्
श्रुतं चैव यत्कण्टकाकीर्ण मार्गं
स्वयं स्वीकृतं नः सुगं कारयेत् ।।२।।
समुत्कर्षनिःश्रेयस्यैकमुग्रं
परं साधनं नाम वीरव्रतम्
तदन्तः स्फुरत्वक्षया ध्येयनिष्ठा
हृदन्तः प्रजागर्तु तीव्रानिशम् ।
विजेत्री च नः संहता कार्यशक्तिर्
विधायास्य धर्मस्य संरक्षणम् ।
परं वैभवं नेतुमेतत् स्वराष्ट्रं
समर्था भवत्वाशिषा ते भृशम् ।।३।।
भारत माता की जय ।।

गुजराती
નમસ્તે સદા વત્સલે માતૃભૂમે
ત્વયા હિન્દુભૂમે સુખં વર્ધિતોહમ્
મહામઙ્ગલે પુણ્યભૂમે ત્વદર્થે
પતત્વેષ કાયો નમસ્તે નમસ્તે
પ્રભો શક્તિમન્‌ હિન્દુરાષ્ટ્રાઙ્ગભૂતા
ઇમે સાદરં ત્વાં નમામો વયમ્
ત્વદીયાય કાર્યાય બધ્દા કટીયં
શુભામાશિષં દેહિ તત્પૂર્તયે
અજય્યાં ચ વિશ્વસ્ય દેહીશ શક્તિં
સુશીલં જગદ્યેન નમ્રં ભવેત્
શ્રુતં ચૈવ યત્કણ્ટકાકીર્ણ માર્ગં
સ્વયં સ્વીકૃતં નઃ સુગં કારયેત્
સમુત્કર્ષનિઃશ્રેયસ્યૈકમુગ્રં
પરં સાધનં નામ વીરવ્રતમ્
તદન્તઃ સ્ફુરત્વક્ષયા ધ્યેયનિષ્ઠા
હૃદન્તઃ પ્રજાગર્તુ તીવ્રાનિશમ્‌
વિજેત્રી ચ નઃ સંહતા કાર્યશક્તિર્
વિધાયાસ્ય ધર્મસ્ય સંરક્ષણમ્‌
પરં વૈભવં નેતુમેતત્‌ સ્વરાષ્ટ્રં
સમર્થા ભવત્વાશિશા તે ભૃશમ્
ભારત માતા કી જય

गुरुमुखी
ਨਮਸ੍ਤੇ ਸਦਾ ਵਤ੍ਸਲੇ ਮਾਤ੃ਭੂਮੇ
ਤ੍ਵਯਾ ਹਿਨ੍ਦੁਭੂਮੇ ਸੁਖਂ ਵਰ੍ਧਿਤੋਹਮ੍
ਮਹਾਮਙ੍ਗਲੇ ਪੁਣ੍ਯਭੂਮੇ ਤ੍ਵਦਰ੍ਥੇ
ਪਤਤ੍ਵੇ਷ ਕਾਯੋ ਨਮਸ੍ਤੇ ਨਮਸ੍ਤੇ
ਪ੍ਰਭੋ ਸ਼ਕ੍ਤਿਮਨ੍‌ ਹਿਨ੍ਦੁਰਾ਷੍ਟ੍ਰਾਙ੍ਗਭੂਤਾ
ਇਮੇ ਸਾਦਰਂ ਤ੍ਵਾਂ ਨਮਾਮੋ ਵਯਮ੍
ਤ੍ਵਦੀਯਾਯ ਕਾਰ੍ਯਾਯ ਬਧ੍ਦਾ ਕਟੀਯਂ
ਸ਼ੁਭਾਮਾਸ਼ਿ਷ਂ ਦੇਹਿ ਤਤ੍ਪੂਰ੍ਤਯੇ
ਅਜਯ੍ਯਾਂ ਚ ਵਿਸ਼੍ਵਸ੍ਯ ਦੇਹੀਸ਼ ਸ਼ਕ੍ਤਿਂ
ਸੁਸ਼ੀਲਂ ਜਗਦ੍ਯੇਨ ਨਮ੍ਰਂ ਭਵੇਤ੍
ਸ਼੍ਰੁਤਂ ਚੈਵ ਯਤ੍ਕਣ੍ਟਕਾਕੀਰ੍ਣ ਮਾਰ੍ਗਂ
ਸ੍ਵਯਂ ਸ੍ਵੀਕ੃ਤਂ ਨਃ ਸੁਗਂ ਕਾਰਯੇਤ੍
ਸਮੁਤ੍ਕਰ੍਷ਨਿਃਸ਼੍ਰੇਯਸ੍ਯੈਕਮੁਗ੍ਰਂ
ਪਰਂ ਸਾਧਨਂ ਨਾਮ ਵੀਰਵ੍ਰਤਮ੍
ਤਦਨ੍ਤਃ ਸ੍ਫੁਰਤ੍ਵਕ੍਷ਯਾ ਧ੍ਯੇਯਨਿ਷੍ਠਾ
ਹ੃ਦਨ੍ਤਃ ਪ੍ਰਜਾਗਰ੍ਤੁ ਤੀਵ੍ਰਾਨਿਸ਼ਮ੍‌
ਵਿਜੇਤ੍ਰੀ ਚ ਨਃ ਸਂਹਤਾ ਕਾਰ੍ਯਸ਼ਕ੍ਤਿਰ੍
ਵਿਧਾਯਾਸ੍ਯ ਧਰ੍ਮਸ੍ਯ ਸਂਰਕ੍਷ਣਮ੍‌
ਪਰਂ ਵੈਭਵਂ ਨੇਤੁਮੇਤਤ੍‌ ਸ੍ਵਰਾ਷੍ਟ੍ਰਂ
ਸਮਰ੍ਥਾ ਭਵਤ੍ਵਾਸ਼ਿਸ਼ਾ ਤੇ ਭ੃ਸ਼ਮ੍ ਭਾਰਤ ਮਾਤਾ ਕੀ ਜਯ

बांग्ला
নমস্তে সদা ঵ত্সলে মাতৃভূমে
ত্঵যা হিন্দুভূমে সুখং ঵র্ধিতোহম্
মহামঙ্গলে পুণ্যভূমে ত্঵দর্থে
পতত্঵েষ কাযো নমস্তে নমস্তে
প্রভো শক্তিমন্‌ হিন্দুরাষ্ট্রাঙ্গভূতা
ইমে সাদরং ত্঵াং নমামো ঵যম্
ত্঵দীযায কার্যায বধ্দা কটীযং
শুভামাশিষং দেহি তত্পূর্তযে
অজয্যাং চ ঵িশ্঵স্য দেহীশ শক্তিং
সুশীলং জগদ্যেন নম্রং ভ঵েত্
শ্রুতং চৈ঵ যত্কণ্টকাকীর্ণ মার্গং
স্঵যং স্঵ীকৃতং নঃ সুগং কারযেত্
সমুত্কর্ষনিঃশ্রেযস্যৈকমুগ্রং
পরং সাধনং নাম ঵ীর঵্রতম্
তদন্তঃ স্ফুরত্঵ক্ষযা ধ্যেযনিষ্ঠা
হৃদন্তঃ প্রজাগর্তু তী঵্রানিশম্‌
঵িজেত্রী চ নঃ সংহতা কার্যশক্তির্
঵িধাযাস্য ধর্মস্য সংরক্ষণম্‌
পরং ঵ৈভ঵ং নেতুমেতত্‌ স্঵রাষ্ট্রং
সমর্থা ভ঵ত্঵াশিশা তে ভৃশম্
ভারত মাতা কী জয

तेलुगू
నమస్తే సదా వత్సలే మాతృభూమే
త్వయా హిన్దుభూమే సుఖం వర్ధితోహమ్
మహామఙ్గలే పుణ్యభూమే త్వదర్థే
పతత్వేష కాయో నమస్తే నమస్తే
ప్రభో శక్తిమన్‌ హిన్దురాష్ట్రాఙ్గభూతా
ఇమే సాదరం త్వాం నమామో వయమ్
త్వదీయాయ కార్యాయ బధ్దా కటీయం
శుభామాశిషం దేహి తత్పూర్తయే
అజయ్యాం చ విశ్వస్య దేహీశ శక్తిం
సుశీలం జగద్యేన నమ్రం భవేత్
శ్రుతం చైవ యత్కణ్టకాకీర్ణ మార్గం
స్వయం స్వీకృతం నః సుగం కారయేత్
సముత్కర్షనిఃశ్రేయస్యైకముగ్రం
పరం సాధనం నామ వీరవ్రతమ్
తదన్తః స్ఫురత్వక్షయా ధ్యేయనిష్ఠా
హృదన్తః ప్రజాగర్తు తీవ్రానిశమ్‌
విజేత్రీ చ నః సంహతా కార్యశక్తిర్
విధాయాస్య ధర్మస్య సంరక్షణమ్‌
పరం వైభవం నేతుమేతత్‌ స్వరాష్ట్రం
సమర్థా భవత్వాశిశా తే భృశమ్
భారత మాతా కీ జయ
कन्नड़
ನಮಸ್ತೇ ಸದಾ ವತ್ಸಲೇ ಮಾತೃಭೂಮೇ
ತ್ವಯಾ ಹಿನ್ದುಭೂಮೇ ಸುಖಂ ವರ್ಧಿತೋಹಮ್
ಮಹಾಮಙ್ಗಲೇ ಪುಣ್ಯಭೂಮೇ ತ್ವದರ್ಥೇ
ಪತತ್ವೇಷ ಕಾಯೋ ನಮಸ್ತೇ ನಮಸ್ತೇ
ಪ್ರಭೋ ಶಕ್ತಿಮನ್‌ ಹಿನ್ದುರಾಷ್ಟ್ರಾಙ್ಗಭೂತಾ
ಇಮೇ ಸಾದರಂ ತ್ವಾಂ ನಮಾಮೋ ವಯಮ್
ತ್ವದೀಯಾಯ ಕಾರ್ಯಾಯ ಬಧ್ದಾ ಕಟೀಯಂ
ಶುಭಾಮಾಶಿಷಂ ದೇಹಿ ತತ್ಪೂರ್ತಯೇ
ಅಜಯ್ಯಾಂ ಚ ವಿಶ್ವಸ್ಯ ದೇಹೀಶ ಶಕ್ತಿಂ
ಸುಶೀಲಂ ಜಗದ್ಯೇನ ನಮ್ರಂ ಭವೇತ್
ಶ್ರುತಂ ಚೈವ ಯತ್ಕಣ್ಟಕಾಕೀರ್ಣ ಮಾರ್ಗಂ
ಸ್ವಯಂ ಸ್ವೀಕೃತಂ ನಃ ಸುಗಂ ಕಾರಯೇತ್
ಸಮುತ್ಕರ್ಷನಿಃಶ್ರೇಯಸ್ಯೈಕಮುಗ್ರಂ
ಪರಂ ಸಾಧನಂ ನಾಮ ವೀರವ್ರತಮ್
ತದನ್ತಃ ಸ್ಫುರತ್ವಕ್ಷಯಾ ಧ್ಯೇಯನಿಷ್ಠಾ
ಹೃದನ್ತಃ ಪ್ರಜಾಗರ್ತು ತೀವ್ರಾನಿಶಮ್‌
ವಿಜೇತ್ರೀ ಚ ನಃ ಸಂಹತಾ ಕಾರ್ಯಶಕ್ತಿರ್
ವಿಧಾಯಾಸ್ಯ ಧರ್ಮಸ್ಯ ಸಂರಕ್ಷಣಮ್‌
ಪರಂ ವೈಭವಂ ನೇತುಮೇತತ್‌ ಸ್ವರಾಷ್ಟ್ರಂ
ಸಮರ್ಥಾ ಭವತ್ವಾಶಿಶಾ ತೇ ಭೃಶಮ್
ಭಾರತ ಮಾತಾ ಕೀ ಜಯ

मलयालम
നമസ്തേ സദാ വത്സലേ മാതൃഭൂമേ
ത്വയാ ഹിന്ദുഭൂമേ സുഖം വര്ധിതോഹമ്
മഹാമങ്ഗലേ പുണ്യഭൂമേ ത്വദര്ഥേ
പതത്വേഷ കായോ നമസ്തേ നമസ്തേ
പ്രഭോ ശക്തിമന്‌ ഹിന്ദുരാഷ്ട്രാങ്ഗഭൂതാ
ഇമേ സാദരം ത്വാം നമാമോ വയമ്
ത്വദീയായ കാര്യായ ബധ്ദാ കടീയം
ശുഭാമാശിഷം ദേഹി തത്പൂര്തയേ
അജയ്യാം ച വിശ്വസ്യ ദേഹീശ ശക്തിം
സുശീലം ജഗദ്യേന നമ്രം ഭവേത്
ശ്രുതം ചൈവ യത്കണ്ടകാകീര്ണ മാര്ഗം
സ്വയം സ്വീകൃതം നഃ സുഗം കാരയേത്
സമുത്കര്ഷനിഃശ്രേയസ്യൈകമുഗ്രം
പരം സാധനം നാമ വീരവ്രതമ്
തദന്തഃ സ്ഫുരത്വക്ഷയാ ധ്യേയനിഷ്ഠാ
ഹൃദന്തഃ പ്രജാഗര്തു തീവ്രാനിശമ്‌
വിജേത്രീ ച നഃ സംഹതാ കാര്യശക്തിര്
വിധായാസ്യ ധര്മസ്യ സംരക്ഷണമ്‌
പരം വൈഭവം നേതുമേതത്‌ സ്വരാഷ്ട്രം
സമര്ഥാ ഭവത്വാശിശാ തേ ഭൃശമ്
ഭാരത മാതാ കീ ജയ

तमिल
நமஸ்தே ஸ஦ா வத்ஸலே மாத௃஭ூமே
த்வயா ஹிந்஦ு஭ூமே ஸு஖ஂ வர்஧ிதோஹம்
மஹாமங்஗லே புண்ய஭ூமே த்வ஦ர்஥ே
பதத்வேஷ காயோ நமஸ்தே நமஸ்தே
ப்ர஭ோ ஶக்திமந்‌ ஹிந்஦ுராஷ்ட்ராங்஗஭ூதா
இமே ஸா஦ரஂ த்வாஂ நமாமோ வயம்
த்வ஦ீயாய கார்யாய ஬஧்஦ா கடீயஂ
ஶு஭ாமாஶிஷஂ ஦ேஹி தத்பூர்தயே
அஜய்யாஂ ச விஶ்வஸ்ய ஦ேஹீஶ ஶக்திஂ
ஸுஶீலஂ ஜ஗஦்யேந நம்ரஂ ஭வேத்
ஶ்ருதஂ சைவ யத்கண்டகாகீர்ண மார்஗ஂ
ஸ்வயஂ ஸ்வீக௃தஂ நஃ ஸு஗ஂ காரயேத்
ஸமுத்கர்ஷநிஃஶ்ரேயஸ்யைகமு஗்ரஂ
பரஂ ஸா஧நஂ நாம வீரவ்ரதம்
த஦ந்தஃ ஸ்஫ுரத்வக்ஷயா ஧்யேயநிஷ்஠ா
ஹ௃஦ந்தஃ ப்ரஜா஗ர்து தீவ்ராநிஶம்‌
விஜேத்ரீ ச நஃ ஸஂஹதா கார்யஶக்திர்
வி஧ாயாஸ்ய ஧ர்மஸ்ய ஸஂரக்ஷணம்‌
பரஂ வை஭வஂ நேதுமேதத்‌ ஸ்வராஷ்ட்ரஂ
ஸமர்஥ா ஭வத்வாஶிஶா தே ஭௃ஶம் ஭ாரத மாதா கீ ஜய

IAST
namaste sadā vatsale mātṛbhūme
tvayā hindubhūme sukhaṁ vardhitoham
mahāmaṅgale puṇyabhūme tvadarthe
patatveṣa kāyo namaste namaste ||
prabho śaktiman hindurāṣṭrāṅgabhūtā
ime sādaraṁ tvāṁ namāmo vayam
tvadīyāya kāryāya badhdā kaṭīyaṁ
śubhāmāśiṣaṁ dehi tatpūrtaye
ajayyāṁ ca viśvasya dehīśa śaktiṁ
suśīlaṁ jagadyena namraṁ bhavet
śrutaṁ caiva yatkaṇṭakākīrṇa mārgaṁ
svayaṁ svīkṛtaṁ naḥ sugaṁ kārayet ||
samutkarṣaniḥśreyasyaikamugraṁ
paraṁ sādhanaṁ nāma vīravratam
tadantaḥ sphuratvakṣayā dhyeyaniṣṭhā
hṛdantaḥ prajāgartu tīvrāniśam
vijetrī ca naḥ saṁhatā kāryaśaktir
vidhāyāsya dharmasya saṁrakṣaṇam
paraṁ vaibhavaṁ netumetat svarāṣṭraṁ
samarthā bhavatvāśiśā te bhṛśam || bhārata mātā kī jaya

सरलार्थ :-
हे मातृभूमि, तुम्हें प्रणाम! इस मातृभूमि ने हमें अपने बच्चों की तरह स्नेह और ममता दी है। इस हिन्दू भूमि पर सुखपूर्वक मैं बड़ा हुआ हूँ। यह भूमि महा मंगलमय और पुण्यभूमि है। इस भूमि की रक्षा के लिए मैं यह नश्वर शरीर मातृभूमि को अर्पण करते हुए इस भूमि को बार-बार प्रणाम करता हूँ।
हे सर्व शक्तिमान परमेश्वर, इस हिन्दू राष्ट्र के घटक के रूप में मैं तुमको सादर प्रणाम करता हूँ। आपके ही कार्य के लिए हम कटिबद्ध हुवे है। हमें इस कार्य को पूरा करने किये आशीर्वाद दे। हमें ऐसी शक्ति दीजिये कि हम इस पूरे विश्व को जीत सकें और ऐसी नम्रता दें कि पूरा विश्व हमारे सामने नतमस्तक हो सके। यह रास्ता काटों से भरा हुवा है, इस कार्य को हमने स्वयँ स्वीकार किया है और इसे सुगम कर काँटों रहित करेंगे।
ऐसा उच्च आध्यात्मिक सुख और ऐसी महान ऐहिक समृद्धि को प्राप्त करने का एकमात्र श्रेष्ट साधन उग्र वीरव्रत की भावना हमारे अन्दर सदेव जलती रहे। तीव्र और अखंड ध्येय निष्ठा की भावना हमारे अंतःकरण में जलती रहे। आपकी असीम कृपा से हमारी यह विजयशालिनी संघठित कार्यशक्ति हमारे धर्म का सरंक्षण कर इस राष्ट्र को परम वैभव पर ले जाने में समर्थ हो।
भारत माता की जय।

हिन्दी काव्यानुवाद :-
हे परम वत्सला मातृभूमि! तुझको प्रणाम शत कोटि बार।
हे महा मंगला पुण्यभूमि ! तुझ पर न्योछावर तन हजार।।
हे हिन्दुभूमि भारत! तूने, सब सुख दे मुझको बड़ा किया;
तेरा ऋण इतना है कि चुका, सकता न जन्म ले एक बार।
हे सर्व शक्तिमय परमेश्वर! हम हिंदुराष्ट्र के सभी घटक,
तुझको सादर श्रद्धा समेत, कर रहे कोटिशः नमस्कार।।
तेरा ही है यह कार्य हम सभी, जिस निमित्त कटिबद्ध हुए;
वह पूर्ण हो सके ऐसा दे, हम सबको शुभ आशीर्वाद।
सम्पूर्ण विश्व के लिये जिसे, जीतना न सम्भव हो पाये;
ऐसी अजेय दे शक्ति कि जिससे, हम समर्थ हों सब प्रकार।।
दे ऐसा उत्तम शील कि जिसके, सम्मुख हो यह जग विनम्र;
दे ज्ञान जो कि कर सके सुगम, स्वीकृत कन्टक पथ दुर्निवार।
कल्याण और अभ्युदय का, एक ही उग्र साधन है जो;
वह मेरे इस अन्तर में हो, स्फुरित वीरव्रत एक बार।।
जो कभी न होवे क्षीण निरन्तर, और तीव्रतर हो ऐसी;
सम्पूर्ण ह्र्दय में जगे ध्येय, निष्ठा स्वराष्ट्र से बढे प्यार।
निज राष्ट्र-धर्म रक्षार्थ निरन्तर, बढ़े संगठित कार्य-शक्ति;
यह राष्ट्र परम वैभव पाये, ऐसा उपजे मन में विचार।।



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