शुक्रवार, 20 अप्रैल 2012

रामसेतु राष्ट्रीय धरोहर मुद्दा : कांग्रेस नेतृत्व सरकार की विहिप ने आलोचना की




- अरविन्द सिसोदिया
समझा में नहीं आता यह कांग्रेस नेतृत्व वाली मनमोहन सिंह जी की केंद्र सरकार हिन्दू विरोधी है या वह भारत की सरकार है भी  या ..........? यदि इस देश में सबसे पुरातन धर्म स्थल हे और उसकी पूज्यनीयता  है तो वह है , रामसेतु जहाँ भगवान राम ने भगवान शिव की पूजा की थी ..जिसका वैज्ञानिक पक्ष यह कहता है की यह विश्व की अद्भुत  संरचना है..आप उसे ही राष्ट्रिय धरोहर घोषित नहीं करें तो क्या  पाकिस्तान को राष्ट्रिय धरोहर घोषित करोगे..? कुछ लज्जा भी बची है या उसे भी ..............

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रामसेतु पर सरकार की विहिप ने की आलोचना
नई दिल्ली, एजेंसी
First Published:20-04-12
रामसेतु  को राष्ट्रीय धरोहर घोषित  किए जाने के पक्ष में केंद्र सरकार द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में अपना जवाब दाखिल न किए जाने पर विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने शुक्रवार को केंद्र सरकार की आलोचना की। विहिप ने सरकार के इस रुख को हिंदू विरोधी कदम करार दिया है। विहिप दिल्ली के महामंत्री सत्येंद्र मोहन ने संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के इस रुख को हिंदू विरोधी कदम करार दिया।
विहिप के मीडिया प्रमुख विनोद बंसल ने कहा कि रामसेतु को राष्ट्रीय धरोहर घोषित किए जाने के पक्ष में सर्वोच्च न्यायालय में केंद्र सरकार द्वारा जवाब दाखिल न किए जाने से विहिप काफी आहत है। बैठक में केंद्र सरकार के इस रवैये की निंदा की गई।
बंसल के मुताबिक बैठक में पारित प्रस्ताव में कहा गया कि हिंदू समाज आदि काल से ही रामसेतु की पूजा करता आया है और आज भी यह स्थान हिंदू समुदाय के लिए देवता तुल्य है। इस सबके बावजूद केंद्र सरकार ने इसे राष्ट्रीय धरोहर न मानते हुए जो बात न्यायालय को बताई है उससे केंद्र की हिंदू विरोधी मानसिकता जाहिर होती है।
प्रस्ताव में सेतु समुद्रम परियोजना को रद्द करने एवं रामसेतु को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की मांग की गई है। साथ ही रामसेतु के संदर्भ में गठित पचौरी सिमति की सिफारिशों को सार्वजनिक करने की भी मांग की गई है।
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