बुधवार, 26 सितंबर 2012

समुद्र के भी निंगल गये भ्रष्टाचारी : 63 ब्लाकों में से 28 ब्लाक प्रवर्तन निदेशालय के एक पूर्व अधिकारी के परिवार से जुड़ी चार कंपनियों को आवंटित

 CBI begins probe in offshore mining licences scam

समुद्र के भी निंगल गये भ्रष्टाचारी
ई डी के पूर्व अधिकारी अशोक अग्रवाल 


http://www.jagran.com/news/national-cbi-begins-probe-in-offshore-mining-licences-scam-9694831.html
धरती-आकाश के बाद समुद्र में भी घोटाला
25 Sep 2012

 Dainik Jagran Hindi News
नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। आकाश (2जी स्पेक्ट्रम) और धरती (कोयला ब्लाक) के बाद अब समुद्र भी घोटाले से अछूते नहीं रहे। बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में खनिज संपदा की खोज के लिए ब्लाकों में आवंटन में घोटाले की सीबीआइ ने जांच शुरू कर दी है। समुद्र में खनिज की खोज के लिए कुल 63 ब्लाकों में से 28 ब्लाक प्रवर्तन निदेशालय के एक पूर्व अधिकारी के परिवार से जुड़ी चार कंपनियों को आवंटित किए जाने का आरोप है।
सीबीआइ सूत्रों के अनुसार प्रारंभिक जांच के केस में नागपुर स्थित केंद्रीय खनन ब्यूरो और केंद्रीय खान मंत्रालय के अज्ञात अधिकारियों के साथ-साथ चारों निजी कंपनियों और उनके निदेशकों को भी आरोपी बनाया गया है। जिन चार कंपनियों को लगभग आधे खनिज ब्लाक आवंटित किए गए हैं, वे ईडी के पूर्व अधिकारी अशोक अग्रवाल के परिवार से संबंधित हैं। बताया जाता है कि अशोक अग्रवाल ईडी के पहले खान मंत्रालय में भी काम कर चुके हैं। ईडी में काम करते हुए अग्रवाल रक्षा दलाल अभिषेक वर्मा के साथ संबंधों को लेकर सुर्खियों में रहे थे।
समुद्र के भीतर प्रचुर मात्रा में मौजूद खनिज संपदा को निकालने के लिए खान मंत्रालय ने पहली बार 2010 में 63 ब्लाकों के लिए टेंडर जारी किए। कुल 377 कंपनियों ने आवेदन किया। मार्च 2011 में खान मंत्रालय ने आवंटित ब्लाकों की सूची जारी की। इनमें से 28 ब्लाक एक ही परिवार से जुड़ी चार कंपनियों को दिए जाने का विरोध करते हुए कुछ कंपनियों ने मुंबई और हैदराबाद हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाई कोर्ट ने आवंटन प्रक्रिया पर रोक लगाते हुए सीबीआइ को पूरे मामले की जांच का आदेश दिया। हाई कोर्ट के इसी आदेश के तहत सीबीआइ ने प्रारंभिक जांच का केस दर्ज किया है। जांच जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि जल्द ही इस संबंध में खान मंत्रालय और केंद्रीय खनन ब्यूरो के अधिकारियों को पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा। साथ ही खान मंत्रालय को आवंटन से जुड़े सभी दस्तावेज जांच एजेंसी को सौंपने के लिए कहा जाएगा।

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