रविवार, 30 सितंबर 2012

पूर्वजों के लिए श्रद्धा के भाव का पर्व : श्राद्ध पक्ष







  
 17 दिनों का होगा इस बार श्राद्ध पक्ष
Sat, 29 Sep 2012
जागरण संवाद केंद्र, पानीपत : 


Dainik Jagran Hindi News 
     पूर्वजों के लिए सम्मान व श्रद्धा के भाव का पर्व श्राद्ध पक्ष है। कई सालों के बाद श्राद्ध पक्ष इस बार 17 दिनों का होगा। ज्योतिषियों की मानें तो श्राद्ध पक्ष की तिथि का बढ़ना सुख व सौभाग्यदायी है। शहरवासी शनिवार से पूर्वजों को जलअर्पित करेंगे।
पितृपक्ष में पूर्वजों को जल अर्पित करने की परंपरा वर्षो पुरानी है। पूर्वज जिस तिथि को दिवंगत होते है, पितृपक्ष की उसी तिथि को उनके निमित्त विधि विधान से श्राद्ध कार्य संपन्न करने का रिवाज है। शनिवार को चतुर्दशी तिथि सुबह 8.04 बजे तक रहेगी। घरों में अनंत पूजा भी होगा। उसके बाद भाद्र मास की पूर्णिमा तिथि शुरू होगी। ऐतिहासिक नगरी पानीपत में पितृपक्ष 29 सितंबर से लेकर 15 अक्टूबर तक चलेगा। लंबे अरसे के बाद इसबार 17 दिनों का श्राद्ध पक्ष रहेगा। मध्याह्न (11.30 बजे) से अपराह्न बेला में ही पितरों का श्राद्ध कर सुख समृद्धि की कामना करेंगे। पितृपक्ष की सबसे खास बात यह है तिथि की घट-बढ़ से इस बार 3 अक्टूबर को कोई श्राद्ध नहीं हो सकेगा।

गंगाधाम मंदिर के पुजारी व ज्योतिषाचार्य निरंजन पराशर का कहना है कि ऐतिहासिक नगरी पानीपत के लिए सौभाग्य की बात है कि यमुना नदी निकट में स्थित है। जब सूर्य कन्या राशि में हो तो पितरों का श्राद्ध करना चाहिए। शास्त्रों के मुताबिक श्राद्ध पक्ष में दिवंगत पूर्वजों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान, यज्ञ व भोजन का विशिष्ट महत्व है। श्रद्धापूर्वक पकाए हुए शुद्ध पकवान, दूध दही व घी को प्रेम पूर्वक पितरों को दान करने का नाम ही श्राद्ध है। पितर इससे प्रसन्न होकर मनुष्य को पुत्र, धन, विद्या, आयु, आरोग्य, सुख व मोक्ष प्रदान करते हैं। पितृ दोष से भी छुटकारा मिलता है। पितरों की तृप्ति ब्राह्माण के द्वारा ही होती है। ब्राह्माणों को भोजन, वस्त्र व दक्षिणा देकर ही श्राद्ध संपन्न करें।

श्राद्ध की विधि
श्राद्ध कर्म व पूजा में गंगाजल, दूध, शहद, तिल, जौ व कुश का विशेष महत्व है। तांबे व कांसे के पात्र में श्राद्ध करना उत्तम माना गया है। नदी या तालाब में दक्षिणाभिमुख होकर अंजलि में तिल-जौ मिश्रित जल लेकर नभ की तरफ देखकर पितर को जल अर्पित करना चाहिए। तर्पण अपने घर व तीर्थ स्थान में करना चाहिए। श्राद्ध के दौरान कुश व रेशमी आसन का ही उपयोग करें।

नए कार्य वर्जित
श्राद्ध पखवाड़े के दौरान नए कार्य पूरी तरह से वर्जित रहेंगे। देवी देवताओं की प्राण प्रतिष्ठा, उदयापन, भूमि, भवन व विवाह सहित कोई भी नया कार्य नहीं हो सकेगा। इसे शुभ नहीं माना जाता है।

इन पदार्थो का उपयोग न करें
श्राद्ध पखवाड़े के दौरान खट्टे पदार्थ का उपयोग पूरी तरह से वर्जित है। इसके अतिरिक्त चना, मसूर दाल, मूली, काली उड़द, लौकी, खीरा व बासी फल का उपयोग न करें। दही न बिलोएं, आटा न पीसे तथा बाल भी न कटवाएं।

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