रविवार, 4 नवंबर 2012

पेट्रोलियम मंत्रालय को कैग की खरी-खरी : रिलायंस ऑडिट मामला


रिलायंस ने जब से रसोई गैस सिलेंडरों को खुले बाजार में बेंचनें की योजना बनाई हे तब से ही कांग्रेस सरकार और पेट्रोलियम मंत्री सहित पेट्रोलियम  कंपनियां , रसोई गैस उपभोक्ताओं पर टूट पड़ी हें , ताकी उपभोक्ता परेशान हो जाये और रिलाइंस का सिलेंडर आते ही हाथों हाथ ख़रीदे ....सत्ता के द्वारा स्वार्थ साधनें का यह खेल कम ज्यादा सभी सभी उद्योग घराने करते हें । सवाल  यह हे की सरकार और उसके कारिंदे बिक क्यों जाते हें  ? शर्मनाक हद यह हे की अब केग को समीक्षा से रोका जा रहा हे ..यानि की दल में कुछ काला जरुर हे .....वह कांग्रेस देश लूटने और लुटवाने के सभी रिकार्ड इसी कार्यकाल में तोड़ोगे
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तेल मंत्रालय को कैग की खरी-खरी
एजेंसी नई दिल्ली
कैग ने कृष्णा-गोदावरी (केजी) बेसिन के डी6 ब्लॉक से जुड़े करार के ऑडिट पर रिलायंस की शर्तों को पेट्रोलियम मंत्रालय के मान लेने पर आपत्ति जताई है। तेल मंत्रालय से यह भी कहा कि उसे सरकार-रिलायंस करार से संबधित दस्तावेजों की जांच का अधिकार है। उसे इससे कोई रोक नहीं सकता।
रिलायंस की शर्तों में कहा गया था कि कैग अपना ऑडिट मंत्रालय के स्तर पर ही रखेगा। रिपोर्ट को परंपरागत प्रक्रिया के तहत सार्वजनिक नहीं करेगा। और न ही संसद के पटल पर रखेगा। रिलायंस की शर्त यह भी है कि ऑडिट उसकी इमारत में ही हो। केजी-डी6 करार के अलावा वह कोई और दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराएगा। मंत्रालय ने भी फर्म को कह दिया है कि वह कैग को अपने सभी दस्तावेज उपलब्ध कराए। रिलायंस ने मंत्रालय से यह आश्वासन चाहा कि कैग की ऑडिट प्रक्रिया में कोई 'अपवाद' नहीं होगा। कैग और रिलायंस के अधिकारियों की बैठक शुक्रवार को तेल मंत्रालय ने रद्द कर दी थी। कैग ने स्पष्ट किया कि उसे किसी ने मीटिंग रद्द करने के लिए नहीं कहा। हालांकि, यह भी कहा कि कैग किसी प्राइवेट कंपनी का ऑडिट नहीं करता। लेकिन वह रिलायंस के करार के संबंध में तेल मंत्रालय के कामकाज की समीक्षा करेगा। जो स्वत: ही उसके ऑडिट के दायरे में आ गया है। कैग के नोट में कहा गया है, 'कैग (डीपीसी) एक्ट के तहत कैग को सभी दस्तावेजों की जांच का अधिकार है।

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