मंगलवार, 18 दिसंबर 2012

काले धन से भारत को हुआ 123 अरब डॉलर नुकसान




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काले धन से भारत को हुआ 123 अरब डॉलर नुकसान
आईएएनएस Dec 18, 2012

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वाशिंगटन। काले धन के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था को पिछले एक दशक में 123 अरब डॉलर का नुकसान हुआ। अकेले वर्ष 2010 में 1.6 अरब डॉलर मूल्य का काला धन देश से बाहर गया। एक अधिकारी ने कहा कि भारतीय नागरिकों पर यह आंकड़ा प्रभावित करने वाला है। यह खुलासा वाशिंगटन स्थित शोध और एडवोकेसी संगठन 'ग्लोबल फाइनेंशियल इंटेग्रिटी' (जीएफआई) की रिपोर्ट से हुआ है। रिपोर्ट में भारत को आठवां सबसे बड़ा ऐसा देश बताया गया है। जहां से सबसे अधिक पूंजी अवैध तौर पर बाहर गई। इस मामले में भारत का स्थान चीन, मेक्सिको, मलेशिया, सऊदी अरब, रूस, फिलीपीन्स और नाइजीरिया के बाद है।
इलिसिट फाइनेंशियल फ्लोज फ्रॉम डेवलपिंग कंट्रीज: 2001-2010' शीर्षक रिपोर्ट में कहा गया कि वर्ष 2010 में विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं से 858.8 अरब डॉलर की अवैध राशि बाहर गई। जबकि वैश्विक वित्तीय संकट से एक वर्ष पहले वर्ष 2008 में यह राशि 871.3 अरब डॉलर के रिकार्ड स्तर पर थी। जीएफआई के निदेशक रेमंड बेकर ने कहा कि हाल के वर्षों में हालांकि प्रगति हुई है। लेकिन भारत को काले धन की वजह से बड़ी राशि का नुकसान होना जारी है।

उन्होंने कहा कि भारत के काले धन को वापस लाने पर मीडिया में काफी चर्चा हुई है हालांकि भारत इसे खो चुका है। उन्होंने नीति निर्माताओं को सलाह दी कि उन्हें पूंजी के अवैध बहिप्रवाह को रोकने को प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर रखना चाहिए।
रिपोर्ट के सह लेखक और अर्थशास्त्री डेवकर ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए 123 अरब डॉलर का नुकसान एक बड़ा नुकसान है। यह राशि शिक्षा, स्वास्थ्य और देश के बुनियादी ढांचे को उन्नत बनाने के लिए इस्तेमाल में लाई जा सकती थी।
       नवंबर 2010 में जारी जीएफआई रिपोर्ट 'द ड्राइवर्स एंड डायनेमिक्स ऑफ इल्लिसिट फायनेंशियल फ्लोज फ्रॉम इंडिया: 1948-2008' के मुताबिक 1948 से 2008 के बीच देश से 462 अरब डॉलर की पूंजी बाहर गई। रिपोर्ट के मुताबिक भारत की अंडरग्राउंड अर्थव्यवस्था सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की 50 फीसदी है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि विकासशील देशों को काले धन के कारण वर्ष 2001 से 2010 के बीच 58.60 खरब डॉलर का नुकसान हुआ|जीएफआई ने वैश्विक नेताओं को सलाह दी कि अवैध पूंजी बहिप्र्रवाह को रोकने के लिए वैश्विक वित्तीय प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाई जानी चाहिए।

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