मंगलवार, 31 दिसंबर 2013

आपातकाल बाद दूसरा टर्निग पॉइंट हैं विधानसभा चुनाव : आडवाणी



2013 के चुनाव परिणाम
आपातकाल बाद दूसरा टर्निग पॉइंट हैं विधानसभा चुनाव : आडवाणी
 Saturday, December 14, 2013,
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भोपाल। भाजपा के वरिष्‍ठ नेता लाल कृष्‍ण आडवाणी ने मध्‍य प्रदेश के मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के शपथ ग्रहण समारोह में कहा कि विधानसभा चुनाव 2013 देश की राजनीति का दूसरा टर्निंग प्‍वाइंट हैं जबकि पहला टर्निंग प्‍वाइंट आपातकाल के बाद हुए चुनाव थे। उन्‍होने उम्‍मीद जताई है कि आगामी लोकसभा चुनाव में कांग्रेस का सफाया हो जाएगा क्‍योंकि देश की जनता कांग्रेस की न‍ीतियों के खिलाफ है। उन्‍होने कहा कि आपातकाल के बाद देश में पहली गैर कांग्रेसी सरकार बनी थी तब सभी दलों ने मिलकर कांग्रेस के खिलाफ चुनाव लड़ा था। आडवाणी ने उम्‍मीद जताई कि विधानसभा में जो चुनाव परिणाम आये हैं उनका असर लोकसभा के चुनाव में भी पड़ेगा। गौर हो कि आठ दिसंबर को घोषित हुए चुनाव नतीजों में तीन राज्‍यों में भाजपा को बहुमत मिल गया है जबकि दिल्‍ली में भाजपा को 32 सीटें मिली और पार्टी सरकार नहीं बना सकी, जबकि उम्‍मीद की जा रही थी कि भाजपा विधानसभा चुनाव में 4-0 से जीत दर्ज करेगी। दिल्‍ली में कांग्रेस को 8 और आम आदमी पार्टी को 28 सीटें मिली हैं। दिल्‍ली विधानसभा चुनाव परिणाम इन दिनों सर्वाधिक चर्चा में छाये हुए हैं किसी भी पार्टी को स्‍पष्‍ट बहुमत न मिलने से सरकार बनाने को लेकर पार्टियों के बीच कश्‍मकश है। दिल्‍ली में अच्‍छे प्रदर्शन के बाद अब आम आदमी पार्टी लोकसभा चुनाव में भी बेहतर परिणाम की उम्‍मीद कर रही है। भोपाल में आज तीसरी बार शपथ ग्रहण करने के साथ ही मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने तीसरी बार प्रदेश की बागडोर अपने हाथों में ली।


अंग्रेजी केलेण्डर की कहानी

अंग्रेजी केलेण्डर की कहानी 
Baba Ramdev


दुनिया का लगभग प्रत्येक कैलेण्डर सर्दी के बाद बसंत ऋतू से ही प्रारम्भ होता है , यहाँ तक की ईस्वी सन बाला कैलेण्डर ( जो आजकल प्रचलन में है ) वो भी मार्च से प्रारम्भ होना था . इस कलेंडर को बनाने में कोई नयी खगोलीये गणना करने के बजाये सीधे से भारतीय कैलेण्डर ( विक्रम संवत ) में से ही उठा लिया गया था . आइये जाने क्या है इस कैलेण्डर का इतिहास - ------------------------------------------------------------------------------------------------ दुनिया में सबसे पहले तारो, ग्रहों, नक्षत्रो आदि को समझने का सफल प्रयास भारत में ही हुआ था, तारो , ग्रहों , नक्षत्रो , चाँद , सूरज ,...... आदि की गति को समझने के बाद भारत के महान खगोल शास्त्रीयो ने भारतीय कलेंडर ( विक्रम संवत ) तैयार किया , इसके महत्त्व को उस समय सारी दुनिया ने समझा . भारतीय महीनों के नाम जिस महीने की पूर्णिमा  जिस नक्षत्र में पड़ती है उसी के नाम पर पड़ा। जैसे इस महीने की पूर्णिमा चित्रा नक्षत्र में हैं इस लिए इसे चैत्र महीनें का नाम हुआ। श्रीमद भागवत के द्वादश स्कन्ध के द्वितीय अध्याय के अनुसार जिस समय सप्तर्षि मघा नक्षत्र पर ये उसी समय से कलियुग का प्रारम्भ हुआ, महाभारत और भागवत के इस खगोलिय गणना को आधार मान कर विश्वविख्यात डॉ. वेली ने यह निष्कर्ष दिया है कि कलयुग का प्रारम्भ 3102 बी.सी. की रात दो बजकर 20 मिनट 30 सेकण्ड पर हुआ था। डॉ. बेली महोदय, स्वयं आश्चर्य चकित है कि अत्यंत प्रागैतिहासिक काल में भी भारतीय ऋणियों ने इतनी सूक्ष्तम् और सटिक गणना कैसे कर ली।

           क्रान्ती वृन्त पर 12 महीने की सीमायें तय करने के लिए आकाश में 30-30 अंश के 12 भाग किये गये और नाम भी तारा मण्डलों के आकृतियों के आधार पर रखे गये। जो मेष, वृष, मिथून इत्यादी  12 राशियां बनी। चूंकि सूर्य क्रान्ति मण्डल के ठी केन्द्र में नहीं हैं, अत: कोणों के निकट धरती सूर्य की प्रदक्षिणा 28 दिन में कर लेती है और जब अधिक भाग वाले पक्ष में 32 दिन लगता है। प्रति तीन वर्ष में एक मास अधिक मास कहलाता है । 

              भारतीय काल गणना इतनी वैज्ञानिक व्यवस्था है कि सदियों-सदियों तक एक पल का भी अन्तर नहीं पड़ता जब कि पश्चिमी काल गणना में वर्ष के 365.2422 दिन को 30 और 31 के हिसाब से 12 महीनों में विभक्त करते है। इस प्रकार प्रत्येक  चार वर्ष में फरवरी महीनें को लीपइयर घोषित कर देते है फिर भी। नौ मिनट 11 सेकण्ड का समय बच जाता है तो प्रत्येक चार सौ वर्षो में भी एक दिन बढ़ाना पड़ता है तब भी पूर्णाकन नहीं हो पाता है। अभी 10 साल पहले ही पेरिस के अन्तरराष्ट्रीय परमाणु घड़ी को एक सेकण्ड स्लो कर दिया गया फिर भी 22 सेकण्ड का समय अधिक चल रहा है। यह पेरिस की वही प्रयोगशाला है जहां की सी जी एस सिस्टम से संसार भर के सारे मानक तय किये जाते हैं। 

             रोमन कैलेण्डर में तो पहले 10 ही महीने होते थे। किंगनुमापा जुलियस ने 355 दिनों का ही वर्ष माना था। जिसे में जुलियस सीजर ने 365 दिन घोषित कर दिया और उसी के नाम पर एक महीना जुलाई बनाया गया उसके 1 सौ साल बाद किंग अगस्ट्स के नाम पर एक और महीना अगस्ट भी बढ़ाया गया, चूंकि ये दोनो राजा थे इसलिए इनके नाम वाले महीनों के दिन 31 ही रखे गये। आज के इस वैज्ञानिक युग में भी यह कितनी हास्यास्पद बात है कि लगातार दो महीने के दिन समान है जबकि अन्य महीनों में ऐसा नहीं है। यदि नहीं जिसे हम अंग्रेजी कैलेण्डर का नौवा महीना सितम्बर कहते है, दसवा महीना अक्टूबर कहते है, ग्यारहवा महीना नवम्बर और बारहवा महीना दिसम्बर कहते है। इनके शब्दों के अर्थ भी लैटिन भाषा में 7,8,9 और 10 होते है। भाषा विज्ञानियों के अनुसार भारतीय काल गणना पूरे विश्व में व्याप्त थी और सचमूच सितम्बर का अर्थ सप्ताम्बर था, आकाश का सातवा भाग, उसी प्रकार अक्टूबर अष्टाम्बर, नवम्बर तो नवमअम्बर और दिसम्बर दशाम्बर है। 

        सन् 1608 में एक संवैधानिक परिवर्तन द्वारा एक जनवरी को नव वर्ष घोषित किया गया। जेनदअवेस्ता के अनुसार धरती की आयु 12 हजार वर्ष है। जबकि बाइविल केवल 2 हजार वर्ष पुराना मानता है। चीनी कैलेण्डर 1  करोड़ वर्ष पुराना मानता है। जबकि खताईमत के अनुसार इस धरती की आयु 8 करोड़ 88 लाख 40 हजार तीन सौ 11 वर्षो की है। चालडियन कैलेण्डर धरती को दो करोड़ 15 लाख वर्ष पुराना मानता है। फीनीसयन इसे मात्र 30 हजार वर्ष की बताते है। सीसरो के अनुसार यह 4 लाख 80 हजार वर्ष पुरानी है। 

           सूर्य सिध्दान्त और सिध्दान्त शिरोमाणि आदि ग्रन्थों में चैत्रशुक्ल प्रतिपदा रविवार का दिन ही सृष्टि का प्रथम दिन माना गया है। संस्कृत के होरा शब्द से ही, अंग्रेजी का आवर (Hour) शब्द बना है। इस प्रकार यह सिद्ध हो रहा है कि वर्ष प्रतिपदा ही नव वर्ष का प्रथम दिन है। एक जनवरी को नव वर्ष मनाने वाले दोहरी भूल के शिकार होते है क्योंकि भारत में जब 31 दिसम्बर की रात को 12 बजता है तो ब्रीटेन में सायं काल होता है, जो कि नव वर्ष की पहली सुबह हो ही नहीं सकता और जब उनका एक जनवरी का सूर्योदय होता है, तो यहां के Happy New Year वालों का नशा उतर चुका रहता है। सन सनाती हुई ठण्डी हवायें कितना भी सूरा डालने पर शरीर को गरम नहीं कर पाती है। 

          ऐसे में सवेरे सवेरे नहा धोकर भगवान सूर्य की पूजा करना तो अत्यन्त दुस्कर रहता है। वही पर भारतीय नव वर्ष में वातावरण अत्यन्त मनोहारी रहता है। केवल मनुष्य ही नहीं अपितु जड़ चेतना नर-नाग यक्ष रक्ष किन्नर-गन्धर्व, पशु-पक्षी लता, पादप, नदी नद, देवी देव व्यरष्टि से समष्टि तक सब प्रसन्न हो कर उस परम् शक्ति के स्वागत में सन्नध रहते है। लेकिन यह इतना अधिक व्यापक था कि - आम आदमी इसे आसानी से नहीं समझ पाता था , खासकर पश्चिम जगत के अल्पज्ञानी तो बिल्कुल भी नहीं . किसी भी बिशेष दिन , त्यौहार आदि के बारे में जानकारी लेने के लिए विद्वान् ( पंडित ) के पास जाना पड़ता था . अलग अलग देशों के सम्राट और खगोल शास्त्री भी अपने अपने हिसाब से कैलेण्डर बनाने का प्रयास करते रहे . इसके प्रचलन में आने के 57 बर्ष के बाद सम्राट आगस्तीन के समय में पश्चिमी कैलेण्डर ( ईस्वी सन ) विकसित हुआ . लेकिन उस में कुछ भी नया खोजने के बजाये , भारतीय कैलेंडर को लेकर सीधा और आसान बनाने का प्रयास किया था . प्रथ्वी द्वरा 365 / 366 में होने बाली सूर्य की परिक्रमा को बर्ष और इस अबधि में चंद्रमा द्वारा प्रथ्वी के लगभग 12 चक्कर को आधार मान कर कैलेण्डर तैयार किया और क्रम संख्या के आधार पर उनके नाम रख दिए गए . पहला महीना मार्च (एकम्बर) से नया साल प्रारम्भ होना था 1. - एकाम्बर ( 31 ) , 2. - दुयीआम्बर (30) , 3. - तिरियाम्बर (31) , 4. - चौथाम्बर (30) , 5.- पंचाम्बर (31) , 6.- षष्ठम्बर (30) , 7. - सेप्तम्बर (31) , 8.- ओक्टाम्बर (30) , 9.- नबम्बर (31) , 10.- दिसंबर ( 30 ) , 11.- ग्याराम्बर (31) , 12.- बारम्बर (30 / 29 ), निर्धारित किया गया . ( सेप्तम्बर में सप्त अर्थात सात , अक्तूबर में ओक्ट अर्थात आठ , नबम्बर में नव अर्थात नौ , दिसंबर में दस का उच्चारण महज इत्तेफाक नहीं है. लेकिन फिर सम्राट आगस्तीन ने अपने जन्म माह का नाम अपने नाम पर आगस्त ( षष्ठम्बर को बदलकर) और भूतपूर्व महान सम्राट जुलियस के नाम पर - जुलाई (पंचाम्बर) रख दिया . इसी तरह कुछ अन्य महीनों के नाम भी बदल दिए गए . फिर बर्ष की शरुआत ईसा मसीह के जन्म के 6 दिन बाद (जन्म छठी) से प्रारम्भ माना गया . नाम भी बदल इस प्रकार कर दिए गए थे . जनवरी (31) , फरबरी (30 / 29 ), मार्च ( 31 ) , अप्रैल (30) , मई (31) , जून (30) , जुलाई (31) , अगस्त (30) , सेप्तम्बर (31) , अक्तूबर (30) , नबम्बर (31) , दिसंबर ( 30) , माना गया . फिर अचानक सम्राट आगस्तीन को ये लगा कि - उसके नाम बाला महीना आगस्त छोटा (30 दिन) का हो गया है तो उसने जिद पकड़ ली कि - उसके नाम बाला महीना 31 दिन का होना चाहिए . राजहठ को देखते हुए खगोल शास्त्रीयों ने जुलाई के बाद अगस्त को भी 31 दिन का कर दिया और उसके बाद वाले सेप्तम्बर (30) , अक्तूबर (31) , नबम्बर (30) , दिसंबर ( 31) का कर दिया . एक दिन को एडजस्ट करने के लिए पहले से ही छोटे महीने फरवरी को और छोटा करके ( 28/29 ) कर दिया . मेरा आप सभी भारतीयों से निवेदन है कि - नकली कैलेण्डर के अनुसार नए साल पर, फ़ालतू का हंगामा करने के बजाये , पूर्णरूप से वैज्ञानिक और भारतीय कलेंडर (विक्रम संवत) के अनुसार आने वाले नव बर्ष प्रतिपदा पर , समाज उपयोगी सेवाकार्य करते हुए नवबर्ष का स्वागत करें .....

भारतीयाें का कमाल, बैतूल में हाइवे सड़क पर उतरा हवाई जहाज



बैतूल में हाइवे सड़क पर उतरा  हवाई जहाज
टीम डिजिटल/ मंगलवार, 31 दिसंबर 2013 / अमर उजाला, भोपाल

मध्‍यप्रदेश के बैतूल में एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। मंगलवार सुबह खराब मौसम की वजह से हाइवे पर प्लेन की इमरजेंसी लैडिंग करानी पड़ी।

जानकारी के अनुसार अप्रवासी भारतीय सेम वर्मा का प्लेन पायलट कैप्टन जेकब द्वारा शहर में भ्रमण के बाद उतारा जा रहा था। लेकिन हवाई पट्टी पर हवा का दबाव अधिक होने से उसे इमरजेंसी में हवाई पट्टी के नजदीक बने फोरलेन हाईवे पर प्लेन की लैडिंग करना पड़ी।

जानकारी लगते ही बैतूल बाजार पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। बताया गया कि हाइवे पर प्लेन उतरने के बाद खराब हो गया। सुबह लगभग 8 .30 बजे से 11 बजे तक प्लेन फोरलेन पर ही खड़ा रहा। जिसकी वजह से दूसरे तरफ से ट्रैफिक निकालना पड़ा। पुलिस द्वारा मामले की जांच की जा रही है।

विमान की इमरजेंसी लैंडिंग कराने में पायलट की सूझबूझ और हौसला काबिले तारीफ रहा। पायलट ने बहुत ही समझदारी से काम लेते हुए हवाई जहाज को सड़क पर उतारा। लैंडिंग के बाद नजारा देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग जुट गए।

हिन्दुत्व विशाल है




Anshu Nawada
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जिस हिन्दू ने नभ मे जाकर नक्षत्रो को दी है संज्ञा ।
जिसने हिमगिरि का वक्ष चीर ,भू को दी है पावन गंगा ।।

जिसने सागर की छाती पर पाषाणो को तैराया है ।।
हर वर्तमान की पीङा को हर ,जिसने इतिहास बतनाया है ।

जिसके आर्यों ने जयघोष किया कृण्वंतो विश्वमार्यम का ।
जिसका गौरव कम कर न सकी, रावण की स्वर्णमयी लंका ।।

जिसके यज्ञों का एक हव्य, सौ-सौ पुत्रों का जनक रहा ।
जिसके आँगन में भयाक्रांत धनपति बरसाता कनक रहा ।।

जिसके पावन बलिष्ठ तन की रचना तन दे दधीचि ने की ।
राघव ने वन मे भटक भटक ,जिस तन मे प्राण प्रतिष्ठा की ।।

जौहर कुंडों में कूद-कूद, सतियों ने जिसे दिया सत्व ।
गुरुओं-गुरुपुत्रों ने जिसमें चिर बलिदानी भर दिया तत्व ।।

वह शाश्वत हिन्दू जीवन क्या स्मरणीय मात्र रह जाएगा ?
इसकी पावन गंगा का जल क्या नालो मे बह जाऐगा ??

इसके गंगाधर शिव शंकर क्या ले समाधि सो जाएंगे ?
इसके पुष्कर इसके प्रयाग क्या गर्त मात्र हो जाएंगे ??

यदि तुम ऐसा नही चाहते ,तो फिर तुमको जगना होगा ।
हिन्दूराष्ट्र का बिगुल बजाकर ,दानव दल को दलना होगा ।।

सोमवार, 30 दिसंबर 2013

30 दिसंबर 1943 को भारत कि प्रथम स्वतंत्रता



http://arvindsisodiakota.blogspot.in/2013/10/blog-post_9547.html
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान सन 1942 में भारत को अंग्रेजों के कब्जे से स्वतन्त्र कराने के लिये आजाद हिन्द फौज या इन्डियन नेशनल आर्मी (INA) नामक सशस्त्र सेना का संगठन किया गया। इसकी संरचना रासबिहारी बोस ने जापान की सहायता से टोकियो में की।
आरम्भ में इस फौज़ में उन भारतीय सैनिकों को लिया गया था जो जापान द्वारा युद्धबन्दी बना लिये गये थे। बाद में इसमें बर्मा और मलाया में स्थित भारतीय स्वयंसेवक भी भर्ती किये गये। एक वर्ष बाद सुभाष चन्द्र बोस ने जापान पहुँचते ही जून 1943 में टोकियो रेडियो से घोषणा की कि अंग्रेजों से यह आशा करना बिल्कुल व्यर्थ है कि वे स्वयं अपना साम्राज्य छोड़ देंगे। हमें भारत के भीतर व बाहर से स्वतंत्रता के लिये स्वयं संघर्ष करना होगा। इससे गद्गद होकर रासबिहारी बोस ने 4 जुलाई 1943 को 46 वर्षीय सुभाष को इसका नेतृत्व सौंप दिया। 5 जुलाई 1943 को सिंगापुर के टाउन हाल के सामने 'सुप्रीम कमाण्डर' के रूप में सेना को सम्बोधित करते हुए "दिल्ली चलो!" का नारा दिया और जापानी सेना के साथ मिलकर ब्रिटिश व कामनवेल्थ सेना से बर्मा सहित इम्फाल और कोहिमा में एक साथ जमकर मोर्चा लिया ।
21 अक्टूबर 1943 के सुभाष बोस ने आजाद हिन्द फौज के सर्वोच्च सेनापति की हैसियत से स्वतन्त्र भारत की अस्थायी सरकार बनायी जिसे जर्मनी, जापान, फिलीपाइन, कोरिया, चीन, इटली, मान्चुको और आयरलैंड ने मान्यता दे दी। जापान ने अंडमान व निकोबार द्वीप इस अस्थायी सरकार को दे दिये। सुभाष उन द्वीपों में गये और उनका नया नामकरण किया। अंडमान का नया नाम शहीद द्वीप तथा निकोबार का स्वराज्य द्वीप रखा गया। 30 दिसम्बर 1943 को इन द्वीपों पर स्वतन्त्र भारत का ध्वज भी फहरा दिया गया। 4 फरवरी 1944 को आजाद हिन्द फौज ने अंग्रेजों पर दोबारा भयंकर आक्रमण किया और कोहिमा, पलेल आदि कुछ भारतीय प्रदेशों को अंग्रेजों से मुक्त करा लिया।
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 दक्षिण-पूर्वी एशिया के देशों में भारतीय स्वाधीनता के आंदोलन का नेतृत्व उस समय देश भक्त रासबिहारी बोस कर रहे थे। 4 जुलार्इ 1943 को सिंगापुर में आयोजित एक विशाल ऐतिहासिक रैली में श्री रासबिहारी बोस ने इंडियन इंडिपैन्डैंस लींग (Indian Independence League) की कमान सुभाष बाबू जी को सौंप दी। 5 जुलार्इ 1943 को उन्होंने आज़ाद हिंद फ़ौज (I.N.A.) की स्थापना की। इस अवसर पर उन्होंने ‘दिल्ली चलो’ का आह्वान किया और वह ‘नेताजी’ के नाम से सारे विश्व में प्रख्यात हो गए। 21 अक्टूबर 1943 में उनके नेतृत्व में आज़ाद हिंद सरकार का गठन किया गया। जापान के प्रधानमंत्री ने नेताजी का अपने देश की संसद में स्वागत किया और 23 अक्टूबर 1943 को उनके नेतृत्व में भारत को स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में धुरी शक्तियों ने मान्यता प्रदान कर दी। तत्पश्चात इस सरकार ने ‘नेशनल बैंक ऑफ आज़ाद हिंद फ़ौज लिमिटिड’ के नाम से एक बैंक की स्थापना की जिसमें जनता ने अल्पावधि में ही लगभग 13 करोड़ रुपयों की राशि जमा करवार्इ। तत्कालीन ‘बर्मा सरकार’ द्वारा इस बैंक से ऋृण लेने की आवश्यकता इस बैंक की आर्थिक सुदृढ़ता एवं विश्वसनीयता को प्रकट करती है। कालातंर में ब्रिटिश सामा्रज्य द्वारा इस बैंक पर आधिपत्य स्थापित करने के समय इस बैंक में करोड़ों रुपये की राशि जमा थी तथा बैंक की देनदारियां शून्य थी। ‘आज़ाद हिंद सरकार’ द्वारा अनेकों अस्पतालों के अतिरिक्त 80 के लगभग विद्यालयों की स्थापना की गर्इ। सुभाष बाबू जी ने 30 दिसंबर 1943 को अंडमान-निकोबार द्वीप समूह की राजधानी पोर्ट-ब्लेयर में आर्इ.एन.ए. का झंडा लहराया और विश्वभर में बदनाम सैलूलर (Cellular Jail) को देखकर उनका हृदय पसीज उठा। वर्णनीय है कि 1906 में निर्मित ‘काले-पानी’ के नाम से कुख्यात इस जेल की 698 कालकोठरियों में स्वतंत्रता सेनानियों एवं देश भक्तों को ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा क्रूर यातनाएं दी जाती थी। पांव तथा हाथों में बेड़ियों से जकड़े देश भक्तों को जेल की चार दीवारी में बंद कोठरियों में कोल्हू में जोतकर नारियल से छिलका अथवा छाल उतारकर उसकी गिरी से तेल निकालने के लिए विवश किया जाता था। इसके अतिरिक्त उनको दलदल भूमि को समतल करने एवं जंगल में वृक्ष काटने के लिए मजबूर किया जाता था। किसी भी देश भक्त द्वारा इंकार करने पर बड़ी निर्दयता से कोड़े मारे जाते थे। सबसे दु:खदायी बात यह थी कि इतना कठिन परिश्रम करने के बावजूद उन्हें एक वक्त की रोटी भी नसीब नहीं होती थी। वास्तव में ज़ालिम अंग्रेज़़ हकुमत ने अपने अधिकारियों को यह निर्देश दे रखे थे कि कोर्इ भी देश भक्त जीवित बचकर वापस न लौट सके। फिर भी वे अनन्य देश प्रेमी देश के लिए हंसते हुए यह सारे कष्ट सहन करते थे। अंग्रेज़़ अधिकारियों द्वारा रौंगटे खड़े कर देने वाली क्रूर यातनाओं की कहानियों से आज की पीढ़ी परिचित नहीं है। उन्होंने इन द्वीपों को अंग्रेज़़ों से स्वतंत्र करवाकर अंडमान-निकोबार का नाम क्रमश: ‘शहीद एवं स्वराज’ रखा।
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आज ही के दिन 30 दिसंबर, 1943 को माँ भारती के वीर सपूत "नेताजी सुभाष चंद्र बोस" ने भारतीय स्वतंत्रता का जयघोष करते हुए पोर्ट ब्लेयर में स्वतंत्र भारत का ध्वज फहराकर वहाँ अपने मुख्यालय की स्थापना की, और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह को ब्रिटिश शासन से मुक्त पहला भारत शासित प्रदेश घोषित कर दिया था। इसी दिन सिंगापुर से भारत की अस्थायी सरकार के द्वारा राज्य के प्रमुख, प्रधानमंत्री और विदेशमंत्री के रूप में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के हस्ताक्षर के तहत एक घोषणा पत्र जारी किया गया था। स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री, विदेश मंत्री और राज्य के प्रमुख के रूप में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा निम्नलिखित शब्दों में भारत के प्रति निष्ठा की शपथ ली: "मैं सुभाषचन्द्र बोस ईश्वर को साक्षी मानकर अपने देश भारत और मेरे 38 करोड़ देशवासियों की आज़ादी के लिए ये पवित्र शपथ लेता हूँ, कि में सुभाषचंद्र बोस स्वतन्त्रता के इस पवित्र युद्ध को अपने जीवन की अंतिम साँस तक जारी रखूंगा, मैं सदैव भारत का एक दास रहूंगा और मेरे 38 करोड भाई बहनों के कल्याण का ध्यान रखूंगा, मेरे लिए यह मेरा सर्वोच्च कर्तव्य हो जायेगा, आज़ादी मिलने के बाद भी भारत कि स्वतंत्रता के संरक्षण के लिए अपने रक्त कि आखिरी बूंद बहाने के लिए सदैव तत्पर रहूंगा.......जय हिंद।” 1943 में भारत कि अस्थायी सरकार कि केबिनेट के सदस्य: प्रथम पंक्ति में(बाये से दाये): लेफ्टिनेंट कर्नल चटर्जी, लेफ्टिनेंट कर्नल जे.के.भोंसले, डॉक्टर लक्ष्मी स्वामीनाथन, नेताजी सुभाषचन्द्र बोस, ऐ.एम्.सहाय और एस.ए. अय्यर द्वितीय पंक्ति में(बाये से दाये): लेफ्टिनेंट कर्नल गुलजारा सिंह, लेफ्टिनेंट कर्नल शाहनवाज खान, लेफ्टिनेंट कर्नल अज़ीज़ अहमद, लेफ्टिनेंट कर्नल एम.जेड.कियानी, लेफ्टिनेंट कर्नल एन.एस.भगत, लेफ्टिनेंट कर्नल एहसान कदीर, लेफ्टिनेंट कर्नल लोगनाथन। जय हिन्द, जय भारत !!
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कांग्रेस के राज में गरीब बढ़ते गए ....



कांग्रेस ने 6,7 साल पहले एक सर्वे करावा । कि पता करो कि देश में सही में ग़रीबो की संख्या कितनी हैं ? ? ?

क्यों कि पहले कोई कहता था कि 25 करोड- हैं ,कोई कहता था कि 35 करोड- हैं ,कोई कहता था कि 37 करोड- हैं ,

तो सर्वे कराया |सर्वे के लिये अर्जुन सेनगुप्ता को कहा गया ।अर्जुन सेनगुप्ता
भारत के बहुत बड़े अर्थशास्त्री हैं । और इंदिरा गांधी के समय से भारत सरकार
के आर्थिक सलाहकार रहे हैं ।

तो उन्होने 3,4 साल कि मेहनत के बाद संसद मे एक रिपोर्ट प्रस्तुत की ।
रिपोर्ट कहती है देश कि कुल आबादी 115 करोड ।और एक 115 करोड मे से 84
करोड 30 लाख लोग ऐसे है । जो एक दिन 20 रुपये भी खर्च नहीं कर पाते । और 84 करोड 30 लाख में से 50 करोड लोग ऐसे हैं । जो एक दिन में 10 रुपये भी खर्च नहीं कर पाते ।और 15 करोड ऐसे है 5 रुपये भी रोज के नहीं खर्च कर पाते ।और 5 करोड ऐसे है 50 paise भी रोज के नहीं खर्च कर पाते । ये हमारे देश भारत की नंगी वास्विकता है कठोर सच्चाई है !

जब वो रिपोर्ट आई तो सब के रंग उड़ गये । कि आखिर 64 मे हमने किया क्या ? ? ?

इतनी ग़रीबी इतनी बदहाली ।
सबसे अजीब बात ये हैं कि 1947 के बाद जब पंडित नेहरु ने ग़रीबो की संख्या पता करने के लिये सर्वे करवाया । तो पता चला देश में ग़रीबो की कुल संख्या 16 करोड है । 1952 में नेहरु संसद मे खड़ा होकर चिल्ला रहा । एक पंच वार्षिक योजना लागू हो गई तो सारी ग़रीबी मिट जायेगी । तो 1952 में पहले पंच वार्षिक योजना बनाई गई । लेकिन 5 साल बाद देखा गया कि ग़रीबी उलटा और बढ़ गई ।

1957 मे फ़िर बोला एक और पंच वार्षिक योजना बन गई तो ग़रीबी खत्म ।
1963 आ गया ग़रीबी नहीं मिटी । फ़िर पंच वार्षिक योजना बनाई फ़िर ग़रीबी नहीं मिटी ।
फ़िर 1968 मे बनाई फ़िर 1972 में ऐसे करते करते aaj 2007 तक कुल 11 पंच वर्षिक योजनाये बन चुकी है । गरीबी मिटना तो दूर उल्टा गीरबों की सख्या 84 करोड़ 30 लाख हो गयी !

लेकिन क्या आप जानते हैं ??? कि अगर ये खानदानी लूटेरे एक भी पंच वर्षिक योजना ना बनाते । और 110 लाख करोड ग़रीबो को नकद ही बांट दिया होता तो एक एक गरीब को 1 लाख 50 हजार मिल जाते और सारी ग़रीबी खत्म हो जाती ।

इतनी बढ़ी रकम होती 110 लाख करोड ।
कैलकूलेटर पर आप इसे लिख नहीं सकते ।
कैलकूलेटर पर 12 अंक आते है । 110 लाख कारोड में 16 अंक होते हैं ।
110 लाख करोड़ आपके और मेरे tax का पैसा था ।
जो ग़रीबो पर तो लगा नहीं ।

लेकिन कथित तौर पर सोनिया गांधी विश्व की चौथी अमीर बन गयी ।
और एक बात इस साल 2012 में फिर गरीबी दूर करने के लिए 12 वी पंच वार्षिक योजना बनाई गई है और इसके लिए वर्ल्ड बैंक से फिर कर्ज लिया है ! और 7 लाख करोड़ फिर गरीबी दूर करने के लिए खर्च किया जाएगा !!
अब आप बताए गरीबी दूर होगी या खानदानी लूटेरे और अमीर होंगे ??????

_________गरीबी में बढ़ोतरी का कारण _________
जब भारत 1947 मे आज़ाद हुआ था
तो भारत की कुल जनसँख्या 40 करोड़ थी
तथा गरीबों की कुल जनसँख्या केवल 4 करोड़ थी..
40 करोड़ मे से 4 करोड़ गरीब मतलब 10 %

2012 मे जनसख्या हो गई
40 करोड़ की 120 करोड़ !
मतलब 3 गुना बढ़ गई !

तो गरीबी भी 3 गुना बढ़नी चाहिए !

4 करोड़ की गरीबी 12 करोड़ होनी चाहिए !

लेकिन गरीबी 4 करोड़ से 84 करोड़ हो गई !

ऐसा क्या हुआ जो गरीबों की संख्या बढ़कर 84 करोड़ हो गयी ????

इसका एक ही कारण है 65 साल मे इस देश की लूट इतनी हुई की गरीबी 84 करोड़ हो गयी !

तब गरीबी हटाने के लिए पंच वर्षीय योजनायें बनायीं गयीं पर ऐसा क्या हुआ जो 11 पंच वर्षीय योजनाओं के बाद भी गरीबी कम नहीं हुई बल्कि इतनी तेज़ी से बढ़ी......

कारण है देश पर शासन करने वालों की लूट, भ्रष्टाचार और नीचता में ज़बरदस्त बढ़ोतरी हुई और ये तो आप भी जानते हैं इस देश पर शासन करने वाले कौन हैं ?
ये वहीँ जिनका इस देश पर 55 वर्षों तक शासन रहा है और आज भी है.....ये वहीँ हैं जो पीढ़ी दर पीढ़ी इस देश को लूटते आ रहे हैं और आगे भी लूटते रहेंगे l
और जब तक इनका शाशन इस देश पर रहेगा इस देश से गरीबी कभी नहीं मिट सकती....

सीधे शब्दों में कहें तो कारण है "कांग्रेस"....यदि यह जाने के बाद भी आप कांग्रेस को चुनते हैं तो भारत की इस दुर्दशा के कारण आप भी हैं l

अधिक जाने के लिए ये व्याख्यान सुनें : देखे !!
यहाँ जरूर click करे !
http://www.youtube.com/watch?v=HmvMzg5fU5A

रविवार, 29 दिसंबर 2013

सत्तारुढ़ पार्टी देश के लिए बोझ और संकट बन गयी है - नरेंद्र मोदी


रांची में 'संसद' से कांग्रेस पर मोदी का हमला, 'आकाशवाणी करने वाले लोग देश का भला नहीं कर सकते'
Sunday, December 29, 2013

मोदी को सुनने के लिए यहां जन सैलाब सा उमड़ पड़ा है। हालांकि गुजरात के मुख्यमंत्री इस कार्यक्रम के लिए यहां सिर्फ तीन घंटे रुकेंगे। मोदी की रैली के लिए प्रदेश भाजपा ने जमकर तैयारी की है। रैली के लिए बनाए गए स्टेज को संसद का रूप दिया गया है। इससे पहले मोदी के छत्तीसगढ़ में एक रैली में बनाए गए स्टेज को लाल किला के रूप दिया गया था।

इस बीच रैली के आयोजन स्थल धुर्वा में पूरे प्रदेश से लोगों के पहुंचने का तांता लगा हुआ है और बीती रात से ही यहां दूर दराज के जिलों से हजारों की संख्या में बसों और अन्य वाहनों से लोग पहुंचने लगे हैं। धुर्वा इलाके को सुबह देखने से लगता है जैसे यहां बड़ा जनसैलाब उमड़ पड़ा है।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रवीन्द्र राय ने बताया कि दिन के दस बजते बजते पूरे क्षेत्र में तिल रखने की जगह नहीं होगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में देश के अन्य हिस्सों की तरह नरेन्द्र मोदी को लेकर लोगों में भारी उत्साह है और आज की रैली प्रदेश में ऐतिहासिक होगी। मोदी के साथ भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह और केन्द्रीय नेता सौदान सिंह भी यहां आयेंगे।

झारखंड भाजपा के अध्यक्ष रविंद्र राय ने बताया कि जिस स्टेज से मोदी रैली को संबोधित करेंगे उससे लगेगा की वे संसद से लोगों को संबोधित कर रहे हैं। रैली के लिए तीन स्टेज बनाई गई हैं। एक स्टेज से मोदी संबोधित करेंगे और अन्य दो स्टेज पार्टी के नेताओं के बैठने के लिए बनाई गई हैं। भाजपा का दावा है कि इस रैली में 5 लाख लोग जुटेंगे।
ज़ी मीडिया ब्यूरो
रांची: भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने झारखंड की राजधानी रांची में भाजपा की संकल्प रैली को संबोधित करते हुए कहा:-

* 2014 का आम चुनाव जन आंदोलन बन जाएगा-मोदी
* झारखंड के भाग्य का निर्माण भाजपा ही कर सकती है-मोदी
* जनता की आंखों में धूल झोंकने का प्रयास न हो-मोदी
* बेरोजगारों को रोजगार चाहिए, झूठे वादे नहीं-मोदी
* झारखंड दुनिया के समृद्ध देशों की बराबरी कर सकता है-मोदी
* आकाशवाणी करने वाले लोग देश का भला नहीं कर सकते-मोदी
* कांग्रेस देश की जनता से कटी हुई हैं-मोदी
* देश की जनता को विकास चाहिए, विभाजन नहीं-मोदी
* जनता क्या चाहती है यह कांग्रेस को सुनाई नहीं देता-मोदी
* कांग्रेस पार्टी देश पर बोझ बन गई है-मोदी
* झारखंड में नौजवान बेरोजगार क्यों है-मोदी
* झारखंड में बिजली के कारखाने बंद क्यों-मोदी
* झारखंड में कोयले का भंडार, फिर कोयला और बिजली का आयात क्यों-मोदी
* बारिश के बावजूद झारखंड में पानी की किल्लत क्यों-मोदी
* जो सरकार पीने और सिंचाई का पानी नहीं दे सके वो सरकार जनता की भलाई क्या कर सकती है-मोदी
* कुछ लोगा आकाशवाणी करके गायब हो जाते हैं-मोदी
* कुछ लोग सिर्फ भाषण देकर गायब हो जाते हैं-मोदी
* दिल्ली की सरकार को लकवा मार गया है-मोदी
* विकास के लिए नेक इरादे चाहिए-मोदी
* कांग्रेस अपना दायित्व नहीं निभा रही है-मोदी
* ऐसे समय में केंद्र में सही सरकार होना जरूरी-मोदी
*झारखंड को विकास की नई उचाईयों तक ले जाना है-मोदी
* इरादे के लिए सिर्फ वादे नहीं-मोदी
* विकास ही सभी समस्यों का समाधान-मोदी
*2014 ने झारखंड की 14 लोकसभा सीटें भाजपा को दें-मोदी
* झारखंड के विकास के लिए दिल्ली का सहयोग जरूरी है-मोदी
* कांग्रेस को न विकास की चिंता है न सुशासन की-मोदी
* 13 साल में तो बहुत कुछ बदल जाता है-मोदी
* कांग्रेस के भरोसे झारखंड का भाग्य नहीं बदल सकता है-मोदी
* उत्तराखंड, झारखंड में राजनीतिक अस्थिरता है-मोदी
* छत्तीसगढ़ के लोगों ने भाजपा में विश्वास दिखाया-मोदी
*उत्तराखंड, झारखंड विकास में पीछे-मोदी
* अलग राज्य बनाने के बाद विकास में छत्तीसगढ़ आगे-मोदी
* कांग्रेस की नीतियों से झारखंड पिछड़ा-मोदी
*अटल के सपनों का झारखंड बनाना है-मोदी
*अलग राज्य के उम्मीदों को पूरा करना है-मोदी
*अटल जी ने झारखंड के सपने को पूरा किया-मोदी
* दिल्ली ने दबाई झारखंड की आवाज-मोदी
*50 साल तक दिल्ली की सरकार नहीं सुनी-मोदी
* झारखंड में गरीबी क्यों है-मोदी
* झारखंड में अपार खनिज संपदा है, फिर भी विकास में पीछे-मोदी
* झारखंड बलिदान की भूमि है-मोदी
* बिरसा मुंडा की धरती को नमन-मोदी
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सत्तारुढ़ पार्टी देश के लिए बोझ और संकट बन गयी है - नरेंद्र मोदी

 रांची: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर आज राहुल गांधी पर निशाना साधा और कहा कि महंगाई एवं भ्रष्टाचार को थामने के लिए कुछ नहीं किया जा रहा और कांग्रेस नेता बस ‘आकाशवाणी’ कर रहे हैं.  

मोदी ने यहां एक रैली में कांग्रेस उपाध्यक्ष की कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ दिल्ली में शुक्रवार को हुई बैठक का परोक्ष रुप से जिक्र करते हुए यह टिप्पणी की. उस बैठक में राहुल गांधी ने कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों से महंगाई थामने और लोकपाल एवं लोकायुक्त विधेयक की तर्ज पर लोकायुक्त कानून लागू करने का आह्वान किया था.

 कांग्रेस नेता ने आदर्श सोसायटी घोटाले की आयोग द्वारा की गयी जांच की रिपोर्ट खारिज करने के महाराष्ट्र सरकार के फैसले से असहमति जतायी थी. मोदी ने आज राहुल गांधी का नाम लिए बगैर कहा, ‘‘प्राचीन काल में लोग आकाशवाणी सुनते थे और आकाशवाणी इस तरह आती थी कि मानों वे (आकाशवाणी करने वाले) अपने आसपास होने वाली घटनाओं से अनजान हों.... आज भी ऐसी ही आकाशवाणी हो रही है कि मुख्यमंत्री यह करेंगे, मुख्यमंत्री यह नहीं करेंगे. जो लोग भ्रष्टाचार में शामिल हैं...... यदि आकाशवाणी करने वाले लोगों के शब्दों में ईमानदारी है तो उन्हें इस बात का ख्याल करना चाहिए कि झारखंड में कांग्रेस के अंतर्गत ही भ्रष्टाचार कैसे पनपा. ’’ मोदी ने कहा कि आज कांग्रेस नेता भी वही कर रहे हैं. कांग्रेस पर हमला करते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र की सत्तारुढ़ पार्टी देश के लिए बोझ और संकट बन गयी है क्योंकि उसका जनता से संपर्क टूट गया है.    

 उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस पार्टी, उसकी सरकारें और उनके नेता लोगों की आवाज नहीं सुनते..... लोग आज विकास चाहते है विभाजन नहीं, वे मौका चाहते हैं राजनीतिक अवसर नहीं, वे सुरक्षा चाहते हैं सांप्रदायिकता का जहर नहीं. ’’  महंगाई के मुद्दे पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर प्रहार करते हुए गुजरात के मुख्यमंत्री ने कहा कि तीन साल पहले महंगाई पर मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक करने के बावजूद सरकार अबतक इस दिशा में कोई कदम उठाने में विफल रही है. उन्होंने दावा किया कि उन्हें एक समिति का प्रमुख बनाया गया था जिसे महंगाई थामने के लिए उठाये जाने वाले कदमों की सिफारिश करनी थी.

 उन्होंने कहा, ‘‘संप्रग और कांग्रेस शासित राज्यों के दो अन्य मुख्यमंत्री भी उसमें थे. हमने 62 व्यावहारिक बिंदु बताए और 20 पहलों की सिफारिश की. प्रधानमंत्री ने कहा कि हमने अच्छा काम किया. लेकिन ढाई साल बीत गए अब तक कोई कदम नहीं उठाया गया. केंद्र सरकार पंगु हो गयी है.’’ पिछले सप्ताह मुम्बई रैली में मोदी ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर राहुल गांधी पर प्रहार किया किया था.

 दिल्ली में फिक्की के एक कार्यक्रम में राहुल द्वारा दिए गए भाषण का जिक्र करते हुए भाजपा नेता ने कहा था, ‘‘मैंने कल कांग्रेस के एक बडे नेता का भाषण सुना था. वह भ्रष्टाचार के खिलाफ बातें कर रहे थे. उनका साहस तो देखिए. कोई दूसरा ऐसा साहस नहीं कर सकता. ये लोग भ्रष्टाचार में आकंठ डूबे हैं. उसके बावजूद वे निदरेष सा चेहरा लेकर सामने आते हैं और भ्रष्टाचार के खिलाफ बातें करते हैं. ’’   केंद्र में कांग्रेस नीत सरकार पर पृथक झारखंड राज्य बनाने की मांग की अनसुनी करने का आरोप लगाते हुए मोदी ने आज कहा कि जनता की आवाज अनसुनी कर दी गयी और कई बार तो उसे दबा भी दिया गया.

       झारखंड राज्य बनाने का श्रेय पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को देते हुए उन्होंने कहा कि यह राज्य विकास के मामले में पीछे छूट गया. उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ और झारखंड साथ ही बने थे. झारखंड गैर भाजपा सरकार की नीतियों की वजह से विकास में पिछड़ गया. मोदी ने कहा कि यदि झारखंड 2014 के आम चुनाव में अपनी सभी 14 लोकसभा सीटें भाजपा की झोली में डाल देता है तो पार्टी के लिए केंद्र में अगली सरकार बनाना आसान होगा.

  उन्होंने कहा, ‘‘इससे राज्य का विकास सुनिश्चित होगा. ’’ उन्होंने कहा कि केंद्र की वर्तमान सरकार को राज्य के विकास में दिलचस्पी नहीं है. झारखंड कोयला का उत्पादन करता है जबकि यहां बिजली संयंत्र नहीं हैं.भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार ने कहा, ‘‘कोयला बिजली संयंत्रों के लिए राज्य से निर्यात किया जाता है.... झारखंड में बिजली संयंत्र स्थापित किया जाना चाहिए और अन्य राज्यों को बिजली की आपूर्ति की जानी चाहिए. ’’  मोदी ने कहा कि पानी के प्रबंधन के विषय में प्रभात खबर ने विस्तार से  एक रिपोर्ट छापा था जिसकी प्रतियां मुझे झारखंड के नेताओं ने भेजी. मुझे काफी पसंद आयी.  

उन्होंने कहा, ‘‘कोई भी विशेषज्ञ कहेगा कि इस तरह के संसाधनों से संपन्न राज्य किसी विकसित देश के समकक्ष हो सकता है... जबकि ऐसा राज्य अब भी गरीब है. ’’ इससे पहले रैली में भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने जासूसी प्रकरण पर जांच आयोग गठित करने के लिए केंद्र की आलोचना की.

 उन्होंने कहा, ‘‘जैसे ही आरोप लगे, मोदी ने स्वयं ही जांच का आदेश दिया. यह परंपरा रही है कि यदि राज्य पहले ही जांच पैनल घोषित कर देता है, तो केंद्र नया आयोग नहीं बनाता है. ’’ मोदी ने दावा किया कि गुजरात में केवल एक दंगा हुआ लेकिन वे मोदी को सांप्रदायिक बताते रहे अब अहमदाबाद की एक अदालत ने उन्हें पाक साफ करार दिया है.

शनिवार, 28 दिसंबर 2013

मोदी की रांची रैली 29 दिसंबर को : जेवीएम नेता सहित दर्जनों भाजपा में शामिल



मोदी की रांची रैली 29 दिसंबर को
पहले जेवीएम नेता सहित दर्जनों भाजपा में शामिल
 Sat, Dec 28th, 2013

रांची. नरेंद्र मोदी विजय संकल्प रैली को संबोधित करने 29 दिसंबर को रांची पहुंचेंगे. श्री मोदी का विशेष विमान सुबह 12.45 बजे बिरसा मुंडा एयरपोर्ट उतरेगा. यहां से वह हेलीकॉप्टर से सीधे जेएससीए स्टेडियम पहुंचेंगे. एयरपोर्ट से उड़ान भरने के बाद हेलीकॉप्टर दो मिनट में जेएससीए स्टेडियम पहुंचेगा. इसके बाद मोदी व उनके साथ आये अतिथि कार से सभा स्थल पर पहुंचेंगे.

इससे पहले जेवीएम नेता उदय भान सिंह समेत आदिवासी छात्र संघ के कई नेता शुक्रवार को भाजपा में शामिल हुए. प्रदेश कार्यालय में अध्यक्ष डॉ रवींद्र राय ने स्वागत किया. श्री राय ने बताया कि उदय भान सिंह का संबंध रामगढ़ के राजघराने से है. इनके आने से पार्टी और मजबूत होगी. इधर आदिवासी छात्र मोरचा के बेलरस कुजूर के नेतृत्व में ईसाई समुदाय के दर्जनों लोग पार्टी में शामिल हुए. श्री कुजूर इससे पहले चमरा लिंडा की पार्टी से जुड़े हुए थे. पार्टी की सदस्यता ग्रहण करनेवालों में सतीश एक्का, कुंदन टोप्पो, शेफाली खलखो समेत कई लोग शामिल हैं.

सरकार ने की हेलिकॉप्टर की व्यवस्था
उनका काफिला जेएससीए स्टेडियम के सात नंबर गेट से निकलेगा. सरकार ने नरेंद्र मोदी की सुरक्षा को लेकर एयरपोर्ट से स्टेडियम तक हेलीकॉप्टर (यूरो कॉप्टर विमान डॉल्फिन 365 एन-2) की व्यवस्था की है. यहां बता दें कि गुरुवार को भाजपा ने सरकार को पत्र लिख कर हेलीकॉप्टर दिलाने का आग्रह किया था. इसलिए सरकार की ओर से हेलीकॉप्टर की व्यवस्था की गयी है.

हुई मॉक ड्रिल
शुक्रवार को मॉक ड्रिल कर जेएससीए स्टेडियम में हेलीकॉप्टर उतारा गया. रैली को लेकर नरेंद्र मोदी रांची में लगभग ढाई घंटे रहेंगे. सभा स्थल पर दो घंटा रहने के बाद श्री मोदी शाम 3.15 बजे रवाना होंगे. इधर, सुरक्षा-व्यवस्था की कमान संभाल रहे पुलिस अधिकारियों को तब राहत मिली, जब यह फैसला हो गया कि मोदी हेलीकॉप्टर से सभास्थल पहुंचेंगे. इससे पहले पुलिस अधिकारी एयरपोर्ट से धुर्वा स्थित प्रभात तारा मैदान तक उनके कारकेड को ले जाने को लेकर परेशान थी.

वीआइपी के लिए होगा जगन्नाथपुर मंदिर जानेवाला रास्ता
नरेंद्र मोदी की रैली के दौरान वीआइपी (एमएलए, एमपी व अन्य गणमान्य) शहीद मैदान के सामने से जगन्नाथपुर मंदिर जानेवाले रास्ते से जेएससीए स्टेडियम होते हुए रैली स्थल तक पहुंचेंगे. ट्रैफिक एसपी राजीव रंजन सिंह ने बताया कि यह व्यवस्था नरेंद्र मोदी के चौपर से सभा स्थल तक आने का कार्यक्रम तय होने के बाद की गयी. अब रामगढ़ की ओर से आनेवाले वाहन कांटाटोली चौक से मुड़ कर नामकुम सदाबहार चौक , घाघरा पुल, डोरंडा होकर धुर्वा की ओर जायेंगे. पहले रामगढ़ की ओर से आनेवाले वाहनों को शहर के भीड़ को देखते हुए खेल गांव से टाटीसिलवे, नामकुम, घाघरा पुल होते हुए धुर्वा की रूट तय की गयी थी. भाजपा के नेताओं ने रामगढ़ की ओर से रैली में आनेवाले लोगों को होनेवाली असुविधा को देखते हुए जिला प्रशासन से आग्रह किया, उसके बाद यह व्यवस्था की गयी है. नया सराय की ओर से आनेवाले लोग तिरिल रोड होते हुए जेएससीए मोड़ तक आ पायेंगे. कुछ विशेष वाहनों के लिए जिला प्रशासन की ओर से पास जारी किया गया है. पास धारक वाहनों को रैली स्थल से कुछ पहले तक पार्किग करने की व्यवस्था होगी.

एचइसी से सभास्थल तक 12 तोरण द्वार
रैली को लेकर शहर को सजाने-संवारने का काम जारी है. लगभग सभी मार्गो पर भाजपा के झंडे, पोस्टर, बैनर और बड़े-बड़े फ्लैक्स लगाये गये हैं. एचइसी गेट से जगन्नाथ सभा स्थल तक 12 तोरण द्वार बनाये गये हैं. महामंत्री सुनील कुमार सिंह ने बताया कि स्वागत द्वार झारखंड की ऐतिहासिक और बलिदानी परंपरा की याद ताजा करायेंगे.

जरूरी दवाओं के साथ तैनात रहेंगे सिविल सर्जन
मोदी के आगमन से पूर्व सिविल सर्जन को भी एक एंबुलेंस और आवश्यक दवाओं के साथ उपलब्ध रहने का निर्देश दिया गया है. नरेंद्र मोदी का ब्लड ग्रुप ए पॉजिटिव है, इसलिए एसएसपी ने सार्जेट मेजर से ए पॉजिटिव वाले पुलिसकर्मियों को सिविल सजर्न के पास रिपोर्ट करने को कहा है. इधर, भाजपा चिकित्सा व्यवस्था के प्रभारी डॉ समर सिंह व डॉ जीतू चरण राम ने बताया कि रैली स्थल पर 40 चिकित्सक टीम के साथ तैनात रहेंगे.  25 एंबुलेंस, तीन मोबाइल मेडिकल वैन व दवाओं की व्यवस्था है.

9 ज़ोन में बंटा स्टेडियम से लेकर सभा स्थल का इलाका
गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा को लेकर डीसी विनय चौबे और एसएसपी भीम सेन टूटी ने समाहरणालय में शुक्रवार को संयुक्त रूप से बैठक की. इसमें सिटी एसपी, एसडीओ, डीएसपी और ट्रैफिक पुलिस और स्पेशल ब्रांच के अधिकारी शामिल थे. डीसी और एसपी ने मोदी की सुरक्षा को लेकर जेएससीए स्टेडियम, धुर्वा से लेकर सभा स्थल तक के विभिन्न क्षेत्रों को नौ जोन में बांटा गया है. सभी जोन की सुरक्षा के लिए अलग से पुलिस अधिकारी हैं.

रैली से पूर्व हर वस्तु की जांच मेटल डिटेक्टर से
साथ ही ट्रैफिक व्यवस्था संभालने के लिए छह जोन निर्धारित किये है, जिनमें अलग से पुलिस अधिकारियों की तैनाती की गयी है. रैली से पूर्व हर वस्तु की जांच मेटल डिटेक्टर से होगी. सभा स्थल से 500 मीटर की परिधि में निगरानी की विशेष व्यवस्था होगी. एयरपोर्ट और सभा स्थल पर हर वस्तु की स्क्रीनिंग होगी. फोटोग्राफरों के कैमरे में लगे फ्लैश की जांच होगी. इसके साथ ही विभिन्न स्थानों पर सीसीटीवी और और दूरबीन लगाने की भी व्यवस्था की गयी है. डीसी ने कहा कि सुरक्षा में जितने भी अधिकारी तैनात हैं, सबको उनके कार्य से अवगत करा दिया गया है. मोदी की रैली के दौरान सुरक्षा- व्यवस्था में कहीं कोई चूक नहीं होगी.

गुजरात दंगा : नरेंद्र मोदी ने किया दर्द बयां




आईबीएन-7 | Dec 27, 2013

गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2002 दंगों पर 11 साल बाद सफाई दी है। बीते गुरुवार को उन्हें गुलबर्ग सोसायटी दंगा मामले में कोर्ट से राहत मिली है। कोर्ट ने मोदी को मिली एसआईटी की क्लीन चिट बरकरार रखी है। मोदी ने कोर्ट के फैसले को सत्य की जीत बताया, और आज उन्होंने दंगों पर विस्तार से सफाई दी है।
उन दिनों को याद करते हुए मोदी ने कहा कि 2002 दंगों के बाद वे बेहद व्यथित और आहत थे। मोदी के मुताबिक दंगों ने उन्हें भीतर तक हिला दिया था, उस दुख को वो कभी साझा नहीं कर पाए। मोदी ने ब्लॉग पर लिखा है कि वो पहली बार गुजरात दंगों की व्यथा बयां कर रहे हैं।
मोदी के मुताबिक उन्होंने दंगों के दौर की पीड़ा अकेले ही झेली। मोदी कहते हैं कि गुजरात दंगों जैसे क्रूर दिन किसी को देखने नहीं पड़े, और ईश्वर उन्हें ताकत दें इसकी वो कामना करते हैं। मोदी का दावा है कि गुजरात के दंगों के दौरान वो शांति और संयम बनाए रखने की अपील करते रहे। उन्होंने माना कि शांति बनाए रखना सरकार की नैतिक जिम्मेदारी थी।

मोदी का दावा है कि उनकी सरकार ने दंगाइयों से कड़ाई से निपटने की कोशिश की। उसी वक्त उन्हें अंदेशा हो गया था कि उन पर आरोप लगते रहेंगे। मोदी ने लोगों से गुजरात को बदनाम नहीं करने की अपील की है और कहा है कि गुजरात की 12 साल की अग्निपरीक्षा अब खत्म हो गई है।

प्रकृति का ये नियम है कि हमेशा सत्य की जीत होती है- सत्यमेव जयते। अदालत ने कह दिया है, मुझे महसूस हुआ कि अपने विचार और भावनाएं देश के साथ बांटने चाहिए। ये जो अंत हुआ है उसने मुझे शुरुआत की याद दिला दी। 2001 में गुजरात भयानक भूकंप से तबाही और मौत से असहाय पड़ा हुआ था। हजारों लोगों ने जान गवाई। लाखों बेघर हो गए थ। लोगों की रोजी-रोटी खत्म हो गई थी। दुख और सदमे के ऐसे समय में मुझे फिर से पुनिर्निर्माण की जिम्मेदारी दी गई और हमनें हाथ में आई चुनौती को दिल से स्वीकार किया।
मगर 5 महीनों के अंदर 2002 की अंधी हिंसा के रूप में हम पर आफत बनकर टूटी। निर्दोष मारे गए। परिवार बेसहारा हो गए। सालों की मेहनत से बनाई गई संपत्ति बरबाद कर दी गई। जो गुजरात अभी प्राकृतिक आपदा से जूझते हुए अपने पैरों पर खड़ा होने की कोशिश कर रहा था उस पर एक और आफत टूटी।

मोदी ने लिखा ‘मैं भीतर तक हिल गया था। गम, दुख, पीड़ा, क्षोभ, यातना ये सारे शब्द उनके लिए कम हैं जिन्होंने इस अमानवीयता को झेला। एक तरफ भूकंप पीड़ितों का दर्द था तो दूसरी तरफ दंगा पीड़ितों का। इस बड़ी मुसीबत से निपटने के लिए मैंने जो कुछ भी हो सकता था मैंने किया। मुझे ईश्वर ने जो भी ताकत दी थी वो मैंने शांति, न्याय और पुनर्वास में लगाई, अपने दर्द और दुख को छुपाते हुए।

उस चुनौतीपूर्ण वक्त में मैं अक्सर अपने पौराणिक ज्ञान को याद करता था जो ये कहते हैं कि ताकतवर लोगों को अपना दुख और दर्द नहीं व्यक्त करना चाहिए, उन्हें वो अकेले झेलना पड़ेगा। मैं भी उसी गहरे दर्द और दुख के अनुभव से गुजरा हूं। दरअसल, जब भी मैं उन दुख भरे दिनों को याद करता हूं तो ईश्वर से केवल एक प्रार्थना करता हूं कि किसी भी व्यक्ति, समाज, राज्य और देश को ऐसे क्रूर दुर्भाग्यपूर्ण दिन न देखने पड़ें।

हालांकि जिस दिन गोधरा में ट्रेन जली उसी दिन मैंने गुजरात के लोगों से अपील की कि वो शांति बनाए रखे और संयम बरतें ताकि मासूमों का जीवन खतरे में न पड़े। 2002 के फरवरी-मार्च में जब भी मीडिया के सामने आया मैंने बार-बार यही बात दोहराई। कहा कि ये सरकार की राजनीतिक इच्छाशक्ति और नैतिक जिम्मेदारी है कि वो शांति बनाए, न्याय दे और हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों को सजा दे। हाल के सदभावना उपवास के दौरान भी मैंने कई बार अपनी इन गहरी भावनाओं को व्यक्त किया। मैंने बताया कि इस तरह की निंदनीय घटनाएं सभ्य समाज को शोभा नहीं देती।’

वहीं कांग्रेस का कहना है कि मोदी सिर्फ छवि बदलने के ऐसा कर रहे हैं। कांग्रेस का कहना है कि जब मोदी मुख्यमंत्री थे तब तो कुछ किया नहीं, लेकिन अब जब उनकी नजर पीएम की कुर्सी पर है तो सफाई दे रहे हैं। जबकि समाजवादी पार्टी के नेता कमाल फारुकी ने मोदी के बयान को उनकी चुनावी रणनीति करार दिया है और कहा है कि मोदी अच्छी तरह जानते हैं कि खुद का प्रमोशन कैसे किया जाता है।

महंगाई की मार से नहीं मिली राहत


कांग्रेस भयानक महंगाई और मोदी के तूफान में अभी बुरी तरह चुनाव हारी है ,कांगेस शाषित दिल्ली और राजस्थान में वह एक बटा 10 के पास पहुच गई , कांग्रेस  मोदी को तो नहीं रोक सकती मगर महंगाई तो रोक सकती है ! मगर देश की जनता को वो अब भी महंगाई की चक्की में पीसे जा रही है ।
जिसका परिणाम उसे लोकसभा चुनावों में भुगतना होगा ।

महंगाई की मार से नहीं मिली राहत
रणविजय प्रताप सिंह First Published:27-12-2013
http://www.livehindustan.com/news/tayaarinews/tayaarinews/article1-story-67-67-387862.html
बढ़ती महंगाई ने इस साल उपभोक्ताओं की जेब हल्की करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। डॉलर के मुकाबले रुपये में आई रिकॉर्ड गिरावट और आर्थिक वृद्धि दर में लगातार आती कमी पूरे साल परेशानी का सबब बनी रही। हालांकि इस साल आर्थिक जगत में कुछ अच्छे संकेत भी मिले। देश में पहले महिला बैंक की शुरुआत हुई और भारतीय स्टेट बैंक  (एसबीआई) की कमान पहली बार किसी महिला के हाथ में आई। साल 2013 की प्रमुख आर्थिक गतिविधियों पर रणविजय प्रताप सिंह की रिपोर्ट

महंगाई से उपभोक्ता और सरकार परेशान
खाने-पीने के सामान की कीमतें इस साल आसमान पर रहीं। उपभोक्ताओं को इस साल प्याज 100 रुपये प्रति किलो, जबकि टमाटर 80 रुपये प्रति किलो के भाव पर खरीदना पड़ा। खुदरा महंगाई साल की शुरुआत में 10.79 फीसदी थी, लेकिन यह नवंबर में बढ़ कर 11.24 फीसदी के स्तर पर पहुंच गई। वहीं थोक महंगाई दर, जो जनवरी 2013 में 6.62 फीसदी थी, वह नवंबर में करीब एक फीसदी बढ़ कर 7.52 फीसदी दर्ज की गई, जो पिछले 14 महीने का उच्चतम स्तर है। वित्त मंत्री पी. चिदंबरम भी बढ़ती खुदरा महंगाई के सामने लाचार नजर आए। चिदंबरम को यह कहना पड़ा कि खाद्य मुद्रास्फीति पर लगाम लगाने का कोई आसान तरीका नहीं है।

एफडी ने रिटर्न में शेयरों को पछाड़ा
रिटर्न के लिहाज से शेयर बाजार आकर्षक माना जाता है, लेकिन इस साल निवेशकों को इसमें ज्यादा फायदा नहीं हुआ। यहां तक कि सुरक्षित लेकिन कम रिटर्न वाला निवेश माना जाने वाला सावधि जमा (एफडी) ने कमाई के मामले में शेयरों को पीछे छोड़ दिया। साल की शुरुआत में सेंसेक्स 19,581 के स्तर पर था, जबकि यह 09 दिसंबर को कारोबार के दौरान अब तक के सर्वोच्च स्तर 21,483.74 के स्तर पर पहुंच गया था। इसके बावजूद निवेशकों को करीब 8% रिटर्न मिला, जबकि पिछले साल रिटर्न 26% था। वहीं एफडी में निवेशकों को इस साल करीब 9% रिटर्न मिला है।

सोने ने निवेशकों को किया निराश
इस बार इसमें निवेश करने वालों को नुकसान उठाना पड़ा। साल की शुरुआत में सोने की कीमत 31,145 रुपये प्रति 10 ग्राम थी, जो मौजूदा समय में घट कर करीब 30 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम रह गई है। ऐसे में सोने में निवेश करने वाले उपभोक्ताओं को तीन फीसदी से अधिक का नुकसान हुआ है। वहीं चांदी में यह नुकसान 24 फीसदी का रहा।

महंगाई से ज्यादा रिटर्न देने वाला इंफ्लेशन बॉन्ड
रिजर्व बैंक ने छोटे निवेशकों की कमाई को महंगाई से बचाने के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित बचत योजना नेशनल सेविंग सिक्यूरिटी-कम्यूलेटिव (आईआईएनएसएस-सी) बॉन्ड लाने की घोषणा की है। इस पर ब्याज दर की गणना उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित महंगाई दर के मुताबिक होगी। इस पर खुदरा महंगाई की तुलना में सालाना 1.5 फीसदी ज्यादा ब्याज मिलेगा। इसमें आपको न्यूनतम 5,000 निवेश करना होगा, जबकि एक वित्त वर्ष के दौरान अधिकतम 5 लाख रुपये तक का निवेश किया जा सकता है। निवेश पर ब्याज की गणना छमाही और चक्रवृद्धि आधार पर होगी, जबकि इसकी परिपक्वता अवधि 10 साल रखी गई है।

महंगे कर्ज की पड़ी मार
साल की शुरुआत से सितंबर तक रिजर्व बैंक ने नीतिगत दर (रेपो) में 0.75 तक की कटौती की, जिससे यह घट कर 7.25 % रह गई थी, लेकिन बैंकों ने इस कटौती का लाभ उपभोक्ताओं को नहीं दिया। वित्त मंत्री और रिजर्व बैंक के दबाव के बाद बैंकों ने महज 0.25 तक कर्ज सस्ता किया। हालांकि महंगाई पर काबू पाने के लिए रिजर्व बैंक द्वारा अक्तूबर और नवंबर में मौद्रिक समीक्षा में रेपो दर लगातार चौथाई फीसदी बढ़ाने के बाद बैंकों ने कर्ज दोबारा महंगा कर दिया। इसके बावजूद साल की शुरुआत में जो रेपो दर आठ फीसदी थी वह नवंबर तक घट कर 7.75% पर आ गई है। रेपो दर पर बैंक रिजर्व बैंक से कम समय के लिए उधार लेते हैं।

डॉलर के मुकाबले धरातल पर रुपया
एक जनवरी को एक डॉलर 54.83 रुपये का था, जो 28 अगस्त को कारोबार के दौरान 68.85 रुपये पर पहुंच गया था। यह भारतीय मुद्रा का अब तक का सबसे निचला स्तर है। रघुराम राजन ने सितंबर में रिजर्व बैंक के गवर्नर का पद संभालने के बाद रुपये में मजबूती के लिए अदला-बदली (स्वैप) स्कीम शुरू करने और तेल कंपनियों के लिए विशेष व्यवस्था करने जैसे उपाय किए, जिसके बाद मौजूदा समय में एक डॉलर की कीमत घट कर 62 रुपये के करीब पहुंच गई है। एक अनुमान के मुताबिक डॉलर की कीमत एक रुपये बढ़ने पर तेल कंपनियों पर आठ हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ता है।

आर्थिक विकास दर पांच फीसदी से नीचे
सरकार की ओर से निवेश बढ़ाने और अटकी परियोजनाओं को जल्द मंजूरी देने की पहल के बावजूद देश की आर्थिक वृद्धि दर (जीडीपी) ने रफ्तार नहीं पकड़ी। पिछले साल जीडीपी दर पांच फीसदी रही, जो एक दशक का निचला स्तर है। पिछली चार तिमाहियों से देश की जीडीपी पांच फीसदी से नीचे रही है, जो चिंताजनक है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने इस साल भारत की जीडीपी का अनुमान घटा कर 3.8 फीसदी कर दिया है, जबकि संयुक्त राष्ट्र ने इसके 4.8 फीसदी और विश्व बैंक तथा एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने इसके 4.7 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है।

कार खरीदने के मिले ज्यादा विकल्प
देश का वाहन उद्योग दो सालों से सुस्ती के दौर से गुजर रहा है, इसके बावजूद कंपनियों ने इस साल नई कारें पेश कीं। साल के मध्य में निसान ने डटसन गो प्रदर्शित की, जो अगले साल बाजार में आएगी। इसकी कीमत चार लाख रुपये से कम रहने की उम्मीद है। वहीं मारुति स्विफ्ट की टक्कर में हुंडई ने आई 10 ग्रांड को डीजल और पेट्रोल, दोनों में पेश किया। इसी तरह होंडा ने कॉम्पैक्ट सेडान (चार मीटर से छोटी) वर्ग में अमेज पेश करने के साथ ही भारत में अपनी पहली डीजल कार उतारी। फोर्ड ने छह लाख रुपये से कम कीमत में कॉम्पैक्ट स्पोर्ट्स यूटिलिटी व्हीकल (एसयूवी) इको स्पोर्ट उतार बाजार विशेषज्ञों को चौंका दिया। उपभोक्ता इसे काफी पसंद कर रहे हैं। वहीं टाटा मोटर्स ने लखटकिया कार के रूप में मशहूर नैनो और लोकप्रिय मॉडल इंडिका का सीएनजी मॉडल पेश किया।
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शुक्रवार, 27 दिसंबर 2013

राष्ट्रीय जांच एजेंसी : साध्वी प्रज्ञा के खिलाफ केस वापस लेने की तैयारी में



हिन्दू समाज के प्रखर और तेजस्वी व्यक्तित्व के खिलाफ किस तरह सरकारी एजेंसियों का दुरूपयोगह एवं आक्रमण हो रहा है इसका यह एक उदहारण है ! हिन्दू समाज को समझना चाहिए कि देश में उनके  खिलाफ कौन लोग षड़यंत्र रच रहे हें और किस निमित्त यह सब हो रहा है , इनका उत्तर खोजना ही चाहिए ताकी सच की  पहचान हो और समाधान को समाज जागृत हो ? 
जोशी हत्‍याकांड: साध्वी प्रज्ञा के खिलाफ केस वापस लेने की तैयारी में एनआईए
आज तक वेब ब्‍यूरो [Edited by: बबिता पंत] | नई दिल्ली, 27 दिसम्बर 2013
http://aajtak.intoday.in
आरएसएस प्रचारक सुनील जोशी की हत्या के करीब छह साल बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने माना है कि मध्य प्रदेश पुलिस ने इस मामले में साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर सहित अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी कर गलती की है. साध्वी मालेगांव बम धमाके में भी आरोपी हैं. जोशी भी मालेगांव धमाके में आरोपी थे. इसके अलावा जोशी दिल्ली से लाहौर के बीच चलने वाली समझौता एक्सप्रेस में 18 फरवरी, 2007 को हुए धमाके में संदिग्ध थे. जोशी की देवास में 29 दिसंबर, 2007 को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.

महाराष्ट्र में नासिक जिले के मालेगांव में सितंबर, 2008 में हुए बम धमाके में करीब 37 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि सवा सौ से अधिक लोग जख्मी हुए थे. यह धमाका शुक्रवार के दिन एक मस्जिद के पास हुआ था.

एनआईए की जांच के मुताबिक जोशी की हत्या लोकेश शर्मा और राजेंद्र पहलवान ने की थी, जो समझौता ब्लास्ट में आरोपी हैं. इन दोनों ने प्रज्ञा ठाकुर से दुर्व्यवहार के चलते जोशी की हत्या कर दी थी. अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्‍सप्रेस के मुताबिक इस हत्या‍कांड में इन दोनों की मदद दिलीप जगताप और जीतेंद्र शर्मा नाम के दो लोगों ने की थी. ये चारों गिरफ्तार कर लिए गए हैं. यूथ बीजेपी के नेता जीतेंद्र को हाल में मध्य प्रदेश के महू से गिरफ्तार किया गया है. इसकी गिरफ्तारी के बाद एनआईए ने दावा किया कि इस मामले में जांच पूरी हो गई है.

एनआईए सूत्रों के मुताबिक इन लोगों को इस बात का डर था कि जोशी समझौता बम धमाके में इनकी मिलीभगत का भंडाफोड़ कर देंगे. बताया जाता है कि लोकेश और राजेंद्र का जोशी से पैसों के लेन-देन का भी विवाद था. एनआईए ने इन चारों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए गृह मंत्रालय की मंजूरी मांगी है. मंजूरी मिलने के बाद ही इस मामले में चार्जशीट फाइल की जाएगी. जांच एजेंसी मर्डर में इस्तेीमाल किए गए हथियार की फॉरेंसिक रिपोर्ट पर भी गौर कर रही है.

जांच एजेंसी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, हर्षद सोलंकी, वासुदेव परमार, आनंद राज कटारिया और बीजेपी पार्षद रामचरण पटेल के खिलाफ लगे आरोपों को हटाने के लिए मध्‍य प्रदेश स्थित स्पेडशल कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी. मध्य प्रदेश की पुलिस ने इनके खिलाफ आईपीसी की धारा 302 (मर्डर), 120-बी (आपराधिक साजिश) और 201 (सबूत मिटाने) के आरोप में मुकदमा दर्ज किया था. ठाकुर इस वक्त जेल में हैं, जबकि परमार, कटारिया और पटेल जमानत पर रिहा हो चुके हैं.
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NIA set to drop case against Sadhvi Pragya, others arrested by MP Police

Rahul Tripathi : New Delhi, Fri Dec 27 2013
http://www.indianexpress.com
The NIA has concluded that the Madhya Pradesh Police arrested the wrong people, including Sadhvi Pragya Singh Thakur.

Nearly six years after the murder of RSS pracharak Sunil Joshi, the National Investigation Agency (NIA) has concluded that the Madhya Pradesh Police arrested the wrong people, including Sadhvi Pragya Singh Thakur. Joshi, an accused in the 2006 Malegaon blasts and the Samjhauta and Ajmer blasts in 2007, was found dead in Dewas on December 29, 2007.

According to the NIA probe, Joshi was killed by Lokesh Sharma and Rajender Pehalwan, both accused in the Samjhauta blasts case, for allegedly misbehaving with Thakur. The duo were reportedly helped by Dilip Jagtap and Jitender Sharma. All the four have been arrested. Sharma, a BJP youth wing leader, was arrested from Mhow recently, after which the NIA claimed the probe had been completed.

NIA sources said the group also feared that Joshi may expose their alleged involvement in bomb blast cases. Lokesh Sharma and Rajender Pehalwan are also reported to have had a financial dispute with Joshi.

The sources said the agency is seeking the home ministry's sanction to prosecute the four accused, after which a chargesheet will be filed. The agency is also examining the CFSL report on the murder weapon.

The agency then plans to approach the MP special court seeking to drop the charges against Pragya Singh Thakur, Harshad Solanki, Vasudev Parmar, Anand Raj Kataria and BJP councillor Ramcharan Patel, who were booked under IPC Sections 302 (murder), 120 (B) (criminal conspiracy) and 201 (destruction of evidence) by the MP Police.

While Thakur, an accused in the 2008 Malegaon blasts case, is currently in jail, Parmar, Kataria and Patel have been released on bail. Solanki is also still in jail for his alleged role in other crimes. The MP Police, in its chargesheet filed in 2011, had claimed that Joshi was shot by Harshad Solanki. It had said that Joshi was killed because Solanki and the others had started regarding him as a threat.

 

गुरुवार, 26 दिसंबर 2013

नरेंद्र मोदी को PM बनाने के लिए टीम का गठन, वसुंधरा राजे भी शामिल




नरेंद्र मोदी को PM बनाने के लिए टीम का गठन, वसुंधरा राजे भी शामिल
dainikbhaskar.com | Dec 26, 2013,
जयपुर/नई दिल्ली। भाजपा के ‘मिशन 272 प्लस’ को जमीन पर उतारने के लिए राजनाथ सिंह और नरेंद्र मोदी की जोड़ी ने तीन महारथियों का चयन किया है। लोकसभा चुनाव संपन्न होने तक तीनों को प्राथमिकता के आधार पर ‘मोदी फॉर पीएम’ के लिए पसीना बहाना होगा। मध्य प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह और राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे  को यह जिम्मेदारी दी गई है।

भाजपा केंद्रीय चुनाव प्रबंधन समिति की हुई बैठक में इस बात का फैसला किया गया है। बैठक वसुंधरा राजे सिंधिया ने सोशल नेटवर्किंग साइटों के जरिए मतदाताओं तक कैसे पहुंच बनाई, इसका जिक्र किया। तोमर ने मध्य प्रदेश में भाजपा की जीत में संगठनात्मक पहलुओं का बिंदुवार प्रजेंटेशन दिया। इसके बाद रमन सिंह ने प्रजेंटेशन में यह बताया कि कैसे हारी हुई बाजी को जीत में बदला जा सकता है। कैसे उन्होंने छत्तीसगढ़ में प्रथम चरण के चुनाव में पिछडऩे के बाद इसकी भरपाई दूसरे चरण के मतदान में की।

सूत्रों का कहना है कि प्रजेंटेशन के बाद मोदी और राजनाथ ने कहा कि लोकसभा चुनाव संपन्न होने तक तीनों प्राथमिकता के आधार पर ‘मोदी फॉर पीएम’ लक्ष्य के लिए हो रहे कामों की देखरेख करेंगे और जरूरी निर्देश देंगे। संगठनात्मक स्तर पर कहां चूक हो रही है, इसकी समीक्षा तोमर करेंगे जबकि रमन सिंह विभिन्न प्रदेश इकाइयों को यह बताएंगे कि पिछडऩे के बाद भरपाई के लिए क्या और कैसे करना चाहिए। इसी तरह वसुंधरा यह बताएंगी कि कैसे सोशल नेटवर्किंग साइटों के जरिए एक-एक कर मतदाताओं को जोड़ा जा सकता है। साइटों के जरिए कैसे एक पक्का समर्थक चार से पांच वोटों को पार्टी की तरफ ला सकता है, यह तरीका वे बताएंगी।

अदालत ने : गुजरात दंगा केस में मोदी को मिली क्लीन चिट


2002 के साम्प्रदायिक दंगों के मामले में अहमदाबाद की एक अदालत से मिली क्लिन चिट के बाद मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि अंतत: सत्य की ही जीत होती है.

गुजरात दंगा केस में मोदी को मिली क्लीन चिट
नवभारतटाइम्स.कॉम | Dec 26, 2013
अहमदाबाद
2002 में गोधरा कांड के बाद हुए गुजरात दंगा मामले में बीजेपी के पीएम कैंडिडेट नरेंद्र मोदी को बड़ी राहत मिली है। अहमदाबाद मेट्रोपॉलिटन कोर्ट ने एसआईटी की क्लोजर रिपोर्ट और मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को दी गई क्लीन चिट के खिलाफ जकिया जाफरी की याचिका खारिज कर दी है। इसका मतलब यह माना जा रहा है कि मोदी पर अब दंगे का केस नहीं चलेगा। याचिकाकर्ता जकिया जाफरी ने कहा है कि वह इस फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती देंगी। उन्होंने कहा कि उनकी बात कोई न कोई कोर्ट तो सुनेगा।

मेट्रोपॉलिटन मैजिस्ट्रेट बीजे गणत्र ने खुली अदालत में फैसला सुनाते हुए जकिया के वकील मिहिर देसाई से कहा कि उनकी याचिका खारिज की जाती है और उन्हें ऊपरी अदालत में जाने की आजादी है। फैसला सुनते ही वहां मौजूद जकिया रो पड़ीं। गौरतलब है कि विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अपनी रिपोर्ट में गुजरात के मुख्यमंत्री को सारे आरोपों से मुक्त कर दिया था।

याचिकाकर्ता जकिया जाफरी ने फैसले पर निराशा जताते हुए कहा कि वह ऊपरी अदालत में इसे चुनौती देंगी। उनके साथ मौजूद सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाद ने कहा, 'हमारा मानना है कि कोर्ट ने काफी सारे सबूतों की अनदेखी की है। इसलिए हमें फैसले की कॉपी मिलने के बाद हम ऊपरी अदालत जाएंगे। फैसले से हम निराश जरूर हैं, लेकिन हताश नहीं हुए हैं। हमारा संघर्ष जारी रहेगा।'
इस बीच बीजेपी के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली ने अदालती फैसले को बीजेपी की और नरेंद्र मोदी की नैतिक जीत बताया है। उन्होंने कहा, '2002 के दुर्भाग्यपूर्ण दंगों और फर्जी मुठभेड़ों के सहारे मोदी को फंसाने की जितनी भी कोशिशें की गई हैं, एक-एक कर वे सभी नाकाम हो चुकी हैं। आगे भी ऐसी जितनी भी कोशिश की जाए मोदी उससे और मजबूत होकर उभरेंगे।'

जकिया जाफरी के पति अहसान जाफरी उन 68 लोगों में शामिल थे, जिनकी भीड़ ने 28 फरवरी 2002 को अहमदाबाद की गुलबर्ग सोसायटी में हत्या कर दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की जांच के लिए सीबीआई के डायरेक्टर आर. के. राघवन के नेतृत्व में एसआईटी बनाई थी। उन्होंने सन् 2011 को सौंपी अपनी रिपोर्ट में कहा था कि मोदी को आरोपी बनाने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं।

गौरतलब है कि जकिया जाफरी ने एसआईटी की रिपोर्ट को चुनौती देते हुए याचिका दायर की थी, जिस पर चली पांच महीने की सुनवाई के बाद गुरुवार को कोर्ट का अहम फैसला आया। कोर्ट के मोदी को क्लीन चिट वाली एसआईटी की रिपोर्ट को स्वीकार करने से बीजेपी के पीएम पद के उम्मीदवार को बड़ी राहत मिली है।

इस केस में जकिया ने शुरू में नरेंद्र मोदी समते कुल 62 लोगों को आरोपी बनाने की मांग की थी, लेकिन बाद में इस लिस्ट 56 लोगों के नाम रह गए थे। मोदी सहित इन सभी लोगों पर जकिया का आरोप था कि एक साजिश के तहत 2002 के दंगों को भड़कने दिया गया और फिर इन्हें रोकने की असरदार कोशिश नहीं की गई।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत ही 8 फरवरी 2012 को एसआईटी की तरफ से जांच अधिकारी हिमांशु शुक्ल ने अपनी रिपोर्ट अहमदाबाद के मेट्रोपॉलिटन कोर्ट नंबर 11 में पेश की। अदालत की तरफ से कहा गया कि एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में मोदी सहित 58 लोगों के खिलाफ सबूत नहीं होने के आधार पर मामला नहीं चलाने की सिफारिश की थी। एसआईटी की इस क्लोजर रिपोर्ट को जकिया जाफरी की तरफ से चुनौती दी गई और संबंधित दस्तावेजों की मांग की गई।

अदालत के आदेश के आधार पर 7 मई 2012 को जकिया को एसआईटी की 541 पन्नों की क्लोजर रिपोर्ट और करीब 22 हजार पन्नों के दस्तावेजों के साथ ही 14 सीडी भी दी गई। जकिया ने इस मामले में चार प्रोग्रेस रिपोर्ट्स की भी मांग की, जो एसआईटी ने सुप्रीम कोर्ट को सौंपी थी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ये रिपोर्ट्स भी जकिया को मिल गईं।

इन दस्तावेजों के आधार पर जकिया की तरफ से 15 अप्रैल 2013 को जकिया की तरफ से विरोध याचिका दायर की गई। जकिया के वकीलों ने मामले की सुनवाई के दौरान दावा किया कि एसआईटी ने मामले से जुड़े अहम सबूतों की तरफ ध्यान नहीं दिया और क्लोजर रिपोर्ट फाइल करने में जल्दबाजी दिखाई। उन्होंने इस मामले की किसी स्वतंत्र एजेंसी से फिर से जांच कराने की मांग की। एसआईटी ने जकिया के आरोपों को आधारहीन बताया है।
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कुछ प्रतिक्रियाएं
1- जनता तो बहुत पहले अपना फैसला दे चुकी थी अब कोर्ट ने भी सॉफ कर दिया है
२ - Rakesh Gaur, Mumbai का कहना है :
26/12/2013 at 10:12 PM
ज़किया जाफ़रीजी जो कुछ अपने 2002 के दंगों में खोया है उसकी भरपाई इस धरती कोई अदालत नहीं कर सकती, आपके कष्ट में आप सारे देश को शरीक समझें. आपका कष्ट हम सभी समझते हें. परन्तु क्या आपको क्या कभी यह नहीं लगा कि आपके कष्ट को कांग्रेस, संजीव भट्ट, श्रीष्कुमार, मुकुल सिन्हा व तिस्ता शीतलवाड जैसों ने बीजेपी व मोदीजी को बदनाम करने और अपनी राजनीति व धंधा चमकाने का साधन बना लिया. आपको न्याय ना मिलने से किसे कष्ट नहीं होगा? पर जो आपके ये कथित हितैषी हें उनकी दिलचस्पी आपको न्याय दिलाने में है ही नही वे तो आपका इस्तेमाल करके खुद को आगे बढाने का प्रयास कर रहे हें, आपके लिये न्याय उनकी प्राथमिकता है ही नहीं. दुर्भाग्य से अब काफी देर हो चुकी है और में नहीं समझता कि अब आपको न्याय मिल सकेगा. जब आप थक कर बैठ जायेंगी तो आपके ये सहायक कहीं दूर तक भी नजर नहीं आयेंगे, और उनकी तबकी बेरुखी आपके कष्टों को बढाएगी ही. मेरी पूरी संवेदना आपके साथ है.
3-prakash, bangalore का कहना है :
26/12/2013 at 10:09 PM
ज़ाकियाजी हम आपकी भावनाओ की इज्जत करते है | हमे हमारे नेता मोदीजी का निष्कलंक निकलना जितनी खुशी दे रहा है उतना आपके पति खोने का दुख भी है | वास्तव मे दोषी तो गोधरा काण्ड को अंजाम देने वाले है | हमारी दुआएँ आपके साथ |
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मोदी को क्लीन चिट देने का फैसला बिल्कुल सही: राघवन
भाषा | Dec 26, 2013   चेन्नै
नरेंद्र मोदी को 2002 के गुजरात दंगों में क्लीन चिट देने वाली एसआईटी को बंद करने वाली रिपोर्ट के खिलाफ दायर याचिका को अहमदाबाद की एक अदालत द्वारा खारिज किए जाने के बाद एसआईटी प्रमुख और सीबीआई के पूर्व निदेशक आर. के. राघवन ने कहा कि कुछ वक्त से निराशा के बावजूद वह सच्चे खड़े हैं।

राघवन ने कहा, 'हमने पूरा काम किया। मुझे इस बात की खुशी है कि अदालत ने हमारे काम को सही ठहराया। कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान जाफरी की पत्नी जकिया जाफरी द्वारा क्लोजर रिपोर्ट को चुनौती देते हुए दायर याचिका को मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट द्वारा खारिज किए जाने पर प्रतिक्रिया में राघवन ने कहा कि विशेष जांच दल ने अत्यंत प्रतिकूल परिस्थितियों में काम किया। उन्होंने इस बारे में विस्तार में जाने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि मैं सच्चा साबित हुआ। मैं पेशेवर रूप से संतुष्ट हूं और हमारी मेहनत को सही ठहराया गया है।

बुधवार, 25 दिसंबर 2013

भारत का अंतरिक्ष विज्ञान विदेशी निशाने पर - सुरेश चिपलूकर


सुरेश चिपलूकर की कलम से

Suresh Chiplunkar
Monday, December 16, 2013
भारत का अंतरिक्ष विज्ञान विदेशी निशाने पर – प्रोफ़ेसर नम्बी नारायणन मामला...


बहुत वर्ष पहले एक फिल्म आई थी, एक डॉक्टर की मौत. इस फिल्म में पंकज कपूर का बेहतरीन अभिनय तो था ही, प्रमुखतः फिल्म की कहानी बेहतरीन थी. इस फिल्म में दर्शाया गया था कि किस तरह एक प्रतिभाशाली डॉक्टर, भारत की नौकरशाही और लाल-फीते के चक्कर में उलझता है, प्रशासन का कोई भी नुमाइंदा उस डॉक्टर से सहानुभूति नहीं रखता और अंततः वह डॉक्टर आत्महत्या कर लेता है. एक और फिल्म आई थी गोविन्द निहलानी की, नाम था द्रोहकाल, फिल्म में बताया गया था कि किस तरह भारत के शीर्ष प्रशासनिक पदों तथा सेना के वरिष्ठ स्तर तक भ्रष्टाचार और देश के दुश्मनों से मिलीभगत फ़ैली हुई है. दुर्भाग्य से दोनों ही फिल्मों की अधिक चर्चा नहीं हुई, दोनों फ़िल्में हिट नहीं हुईं.

भारत के कितने लोग सचिन तेंडुलकर को जानते हैं, लगभग सभी. लेकिन देश के कितने नागरिकों ने प्रसिद्ध वैज्ञानिक एस नम्बी नारायण का नाम सुना है? शायद कुछेक हजार लोगों ने ही सुना होगा. जबकि नारायण साहब भारत की रॉकेट तकनीक में तरल ईंधन तकनीक को बढ़ावा देने तथा क्रायोजेनिक इंजन का भारतीयकरण करने वाले अग्रणी वैज्ञानिक हैं. ऊपर जिन दो फिल्मों का ज़िक्र किया गया है, वह नम्बी नारायण के साथ हुए अन्याय (बल्कि अत्याचार कहना उचित होगा) एवं भारत की प्रशासनिक मशीनरी द्वारा उनके साथ जो खिलवाड़ किया गया है, का साक्षात प्रतिबिम्ब है. उन दोनों फिल्मों का मिलाजुला स्वरूप हैं प्रोफ़ेसर एस नम्बी नारायण...

आईये पहले जान लें कि श्री नम्बी नारायण कौन हैं तथा इनकी क्या और कितनी बौद्धिक हस्ती है. 1970 में सबसे पहले भारत में तरल ईंधन रॉकेट तकनीक लाने वाले वैज्ञानिक नम्बी नारायण हैं, जबकि उस समय तक एपीजे अब्दुल कलाम की टीम ठोस ईंधन पर ही काम कर रही थी. नम्बी नारायण ने अपनी तीक्ष्ण बुद्धि और दूरदृष्टि से समझ लिया था कि आने वाले वक्त में इसरो को तरल ईंधन तकनीक पर जाना ही पड़ेगा. नारायण को तत्कालीन इसरो चेयरमैन सतीश धवन और यूआर राव ने प्रोत्साहित किया और इन्होने लिक्विड प्रोपेलेंट मोटर तैयार कर दी, जिसे 1970 में ही छोटे रॉकेटों पर सफलतापूर्वक परीक्षण कर लिया गया.


1992 में भारत ने रूस के साथ क्रायोजेनिक इंजन तकनीक हस्तांतरण का समझौता किया. उस समय यह सौदा मात्र 235 करोड़ में किया गया, जबकि यही तकनीक देने के लिए अमेरिका और फ्रांस हमसे 950 करोड़ रूपए मांग रहे थे. भारत की रॉकेट तकनीक में संभावित उछाल और रूस के साथ होने वाले अन्य समझौतों को देखते हुए, यहीं से अमेरिका की आँख टेढ़ी होना शुरू हुई. रूसी दस्तावेजों के मुताबिक़ जॉर्ज बुश ने इस समझौते पर आपत्ति उठाते हुए तत्कालीन रूसी राष्ट्रपति बोरिस येल्तसिन को धमकी दी, कि यदि यह तकनीक भारत को दी गई तो वे रूस को जी-फाइव देशों के क्लब से ब्लैक-लिस्टेड कर देंगे. येल्तसिन इस दबाव के आगे हार मान गए और उन्होंने भारत को क्रायोजेनिक इंजन तकनीक देने से मना कर दिया.


अमेरिका-रूस के इस एकाधिकार को खत्म करने के लिए भारत ने क्रायोजेनिक इंजन भारत में ही डिजाइन करने के लिए वैश्विक टेंडर मंगाए. समिति की छानबीन के बाद भारत की ही एक कंपनी केरल हाईटेक इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड द्वारा सबसे कम दरों पर इस इंजन का निर्माण करवाना तय किया गया. लेकिन क्रायोजेनिक इंजन का यह प्रोजेक्ट कभी शुरू न हो सका, क्योंकि अचानक महान वैज्ञानिक नंबी नारायण को जासूसी और सैक्स स्कैंडल के आरोपों में फँसा दिया गया. नम्बी नारायणन की दो दशक की मेहनत बाद में रंग लाई, जब उनकी ही टीम ने विकास नाम का रॉकेट इंजन निर्मित किया, जिसका उपयोग इसरो ने PSLV को अंतरिक्ष में पहुंचाने के लिए किया. इसी विकासइंजन का उपयोग भारत के चन्द्र मिशन में GSLV के दुसरे चरण में भी किया गया, जो बेहद सफल रहा.

1994 में वैज्ञानिक नंबी नारायण पर झूठे आरोप लगाए गए, कि उन्होंने भारत की संवेदनशील रक्षा जानकारियाँ मालदीव की दो महिला जासूसों मरियम रशीदा और फौजिया हसन को दी हैं. रक्षा सूत्रों के मुताबिक़ यह डाटा सैटेलाईट और रॉकेट की लॉन्चिंग से सम्बंधित था. नारायण पर आरोप था कि उन्होंने इसरो की गुप्त सूचनाएँ करोड़ों रूपए में बेचीं. हालांकि न तो उनके घर से कोई बड़ी राशि बरामद हुई और ना ही उनकी या उनके परिवार की जीवनशैली बहुत खर्चीली थी. डॉक्टर नंबी नारायण को पचास दिन जेल में गुज़ारने पड़े. अपने शपथ-पत्र में उन्होंने कहा है कि आईबी के अधिकारियों ने उनके साथ बहुत बुरा सलूक किया और उन्हें मानसिक रूप से तोड़ने की पूरी कोशिश की, विभिन्न प्रकार से प्रताड़ित किया गया. अंततः वे हवालात में ही गिर पड़े और बेहोश हो गए व् उन्हें अस्पताल में भर्ती करना पड़ा. शपथ पत्र में उनकी प्रमुख शिकायत यह भी थी कि तत्कालीन इसरो प्रमुख कस्तूरीरंगन ने उनका बिलकुल साथ नहीं दिया.


मई 1996 में उन पर लगाए गए सभी आरोप झूठ पाए गए. सीबीआई जांच में कुछ भी नहीं मिला और सुप्रीम कोर्ट ने भी उन्हें अप्रैल 1998 में पूर्णरूप से आरोप मुक्त कर दिया. लेकिन क्रायोजेनिक इंजन प्रोजेक्ट और चंद्रयान मिशन को जो नुक्सान होना था, वह तो हो चुका था. सितम्बर 1999 में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने केरल की सरकार के खिलाफ कड़ी टिप्पणी करते हुए उनका चमकदार कैरियर खराब करने का दोषी ठहराते हुए एक करोड़ रूपए का मुआवजा देने का निर्देश दिया, लेकिन केरल सरकार और प्रशासन के कानों पर जूँ तक नहीं रेंगी, एक पैसा भी नहीं दिया गया. इस बीच वैज्ञानिक नारायण का परिवार तमाम मुश्किलें झेलता रहा. इन सभी आरोपों और झमेले के कारण वैज्ञानिक ससिकुमार और नारायणन को त्रिवेंद्रम से बाहर तबादला करके उन्हेंडेस्क जॉब सौंप दिया गया. अर्थात प्रतिभाशाली और उत्तम वैज्ञानिकों को बाबू बनाकर रख दिया गया. 2001 में नंबी नारायणन रिटायर हुए. हमारे देश की प्रशासनिक मशीनरी इतनी असंवेदनशील और मोटी चमड़ी वाली है कि गत वर्ष सितम्बर 2012 में नंबी नारायण की अपील पर केरल हाईकोर्ट ने उन्हें हर्जाने के बतौर दस लाख रूपए की राशि देने का जो आदेश दिया था, अभी तक उस पर भी अमल नहीं हो पाया है.

इसरो वैज्ञानिक नम्बी नारायण ने केरल हाईकोर्ट में शपथ-पत्र दाखिल करके कहा है कि जिन पुलिस अधिकारियों ने उन्हें जासूसी और सैक्स स्कैंडल के झूठे आरोपों में फंसाया, वास्तव में ये पुलिस अधिकारी किसी विदेशी शक्ति के हाथ में खिलौने हैं और देश में उपस्थिति बड़े षड्यंत्रकारियों के हाथ की कठपुतली हैं. इन पुलिस अधिकारियों ने मुझे इसलिए बदनाम किया ताकि इसरो में क्रायोजेनिक इंजन तकनीक पर जो काम चल रहा था, उसे हतोत्साहित किया जा सके, भारत को इस विशिष्ट तकनीक के विकास से रोका जा सके.

नम्बी नारायण ने आगे लिखा है कि यदि डीजीपी सीबी मैथ्यू द्वारा उस समय मेरी अन्यायपूर्ण गिरफ्तारी नहीं हुई होती, तो सन 2000 में ही भारत क्रायोजेनिक इंजन का विकास कर लेता. श्री नारायण ने कहा, तथ्य यह है कि आज तेरह साल बाद भी भारत क्रायोजेनिक इंजन का सफल परीक्षण नहीं कर पाया है. केरल पुलिस की केस डायरी से स्पष्ट है कि संयोगवश जो भारतीय और रशियन वैज्ञानिक इस महत्त्वपूर्ण प्रोजेक्ट से जुड़े थे उन सभी को पुलिस ने आरोपी बनाया30 नवम्बर 1994 को बिना किसी सबूत अथवा सर्च वारंट के श्री नम्बी नारायण को गिरफ्तार कर लिया गया. नम्बी नारायण ने कहा कि पहले उन्हें सिर्फ शक था कि इसके पीछे अमेरिका की ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए है, लेकिन उन्होंने यह आरोप नहीं लगाया था. लेकिन जब आईबी के अतिरिक्त महानिदेशक रतन सहगल को आईबी के ही अरुण भगत ने सीआईए के लिए काम करते रंगे हाथों पकड लिया और सरकार ने उन्हें नवम्बर 1996 में सेवा से निकाल दिया, तब उन्होंने अपने शपथ-पत्र में इसका स्पष्ट आरोप लगाया कि देश के उच्च संस्थानों में विदेशी ताकतों की तगड़ी घुसपैठ बन चुकी है, जो न सिर्फ नीतियों को प्रभावित करते हैं, बल्कि वैज्ञानिक व रक्षा शोधों में अड़ंगे लगाने के षडयंत्र रचते हैं. इतने गंभीर आरोपों के बावजूद देश की मीडिया और सत्ता गलियारों में सन्नाटा है, हैरतनाक नहीं लगता ये सब?


नम्बी नारायणन के ज़ख्मों पर नमक मलने का एक और काम केरल सरकार ने किया. अक्टूबर 2012 में इन्हें षडयंत्रपूर्वक फँसाने के मामले में आरोपी सभी पुलिस वालों के खिलाफ केस वापस लेने का फैसला कर लिया. इस मामले के सर्वोच्च अधिकारी सिबी मैथ्यू वर्तमान में केरल के मुख्य सूचना आयुक्त हैं. पिछले कुछ समय से, जबसे भारत का चंद्रयान अपनी कक्षा में चक्कर लगा रहा है, इस प्रोजेक्ट से जुड़े प्रत्येक छोटे-बड़े वैज्ञानिक को पुरस्कार मिले, सम्मान हुआ, इंटरव्यू हुए... लेकिन जो वैज्ञानिक इस चंद्रयान की लिक्विड प्रोपल्शन तकनीक की नींव का पत्थर था, अर्थात नंबी नारायणन, वे इस प्रसिद्धि और चमक से दूर रखे गए थे, यह देश का दुर्भाग्य नहीं तो और क्या था?इतना होने के बावजूद बड़ा दिल रखते हुए नम्बी कहते हैं कि “...चंद्रयान की सफलता मेरे लिए बहुत खुशी की बात है, दर्द सिर्फ इतना है कि वरिष्ठ इसरो अफसरों और वैज्ञानिकों ने इस अवसर पर मेरा नाम लेना तक मुनासिब नहीं समझा.... इसरो के अधिकारी स्वीकार करते हैं कि यदि नारायणन को केरल पुलिस ने गलत तरीके से से नहीं फँसाया होता और जासूसी व् सैक्स स्कैंडल का मामला लंबा नहीं खिंचता, तो निश्चित ही नम्बी नारायणन को चंद्रयान का प्रणेता कहा जाता.

आज की तारीख में नम्बी नारायण को गिरफ्तार करने, उन्हें परेशान करने तथा षडयंत्र करने वाले छः वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों में प्रमुख, सीबी मैथ्यू केरल के मुख्य सूचना आयुक्त हैं, जबकि आर श्रीकुमार गुजरात में उच्च पदस्थ रहे. ये आर श्रीकुमार साहब वही सज्जन हैं जो तीस्ता सीतलवाद के साथ मिलकर नरेंद्र मोदी के खिलाफ बयानबाजी और पुलिसिया कार्रवाई करने में जुटे हैं, और सुप्रीम कोर्ट से लताड़ खा चुके हैं.

अमेरिकी लॉबी के हाथ कितने मजबूत हैं, यह इस बात से भी समझा जा सकता है कि स्वयं सीबीआई ने प्रधानमंत्री कार्यालय से उन सभी SIT अफसरों के खिलाफ कार्रवाई करने की अनुशंसा की थी, जो नारायणन को फँसाने में शामिल थे. जबकि हुआ क्या है कि पिछले साल केरल में सत्ता संभालने के सिर्फ 43 दिनों बाद उम्मन चाँडी ने इन अफसरों के खिलाफ पिछले कई साल से धूल खा रही फाईल को बंद कर दिया, केस वापस ले लिए गए. इस बीच कांग्रेस और वामपंथी दोनों प्रकार की सरकारें आईं और गईं, लेकिन नम्बी नारायणन की हालत भी वैसी ही रही और संदिग्ध पुलिस अफसर भी मजे लूटते रहे.

जैसा कि पहले बताया गया सीबी मैथ्यू, वर्तमान में केरल के मुख्य सूचना आयुक्त हैं, आरबी श्रीकुमार को कई पदोन्नतियाँ मिलीं और वे गुजरात में मोदी के खिलाफ एक हथियार बनकर भी उभरे. इसके अलावा इंस्पेक्टर विजयन, केके जोशुआ जैसे पुलिस अधिकारियों का बाल भी बाँका न हुआ. अप्रैल 1996 में में हाईकोर्ट ने और 1998 में सुप्रीम कोर्ट ने इन संदिग्ध अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने हेतु निर्देश दी थे... आज तक कुछ नहीं हुआ. यह फाईलें तत्कालीन वामपंथी मुख्यमंत्री ईके नयनार के सामने भी आईं थीं, उनकी भी हिम्मत नहीं हुई कि एक बेक़सूर वैज्ञानिक को न्याय दिलवा सकें.


किसी भी देश के वैज्ञानिक, इंजीनियर, आर्किटेक्ट, लेखक इत्यादि उस देश की बौद्धिक संपत्ति होते हैं. यदि कोई देश इस बेशकीमती संपत्ति की रक्षा नहीं कर पाए तो उसका पिछड़ना स्वाभाविक है. पिछले वर्ष जब ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े दो वैज्ञानिकों की रहस्यमयी परिस्थितियों में मौत हुई थी, तब ईरान ने समूचे विश्व में तहलका मचा दिया था. सारे पश्चिमी और अरब जगत के समाचार पत्र इन वैज्ञानिकों की संदेहास्पद मृत्यु की ख़बरों से रंग गए थे. इधर भारत का हाल देखिये... अक्टूबर 2013 में ही विशाखापत्तनम के बंदरगाह पर भाभा परमाणु अनुसंधान केन्द्र के दो युवा वैज्ञानिक एके जोश और अभीष शिवम रेल की पटरियों पर मृत पाए गए थे. ग्रामीणों द्वारा संयोगवश देख लिए जाने की वजह से उनके शव ट्रेन से कटने से बच गए. पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला कि दोनों वैज्ञानिकों को ज़हर दिया गया था. उक्त दोनों युवा वैज्ञानिक भारत की परमाणु पनडुब्बी अरिहंत प्रोजेक्ट से जुड़े हुए थे. 23 फरवरी 2010 को BARC से ही जुड़े एक प्रमुख इंजीनियर एम अय्यर की मौत भी ऐसी ही संदिग्ध परिस्थितियों में हुई. हत्यारे ने उनके बंगले की डुप्लीकेट चाबी से रात को दरवाजा खोला और उन्हें मार दिया. स्थानीय पुलिस ने तत्काल से आत्महत्या का मामला बताकर फाईल बंद कर दी. सामाजिक संगठनों की तरफ से पड़ने वाले दबाव के बाद अंततः मुम्बई पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज किया, लेकिन परमाणु कार्यक्रमों से जुड़े इंजीनियर की मौत की जाँच भी भारत की पुलिसिया रफ़्तार से ही चल रही है, जबकि अय्यर के केस में डुप्लीकेट चाभी और फिंगरप्रिंट का उपलब्ध न होना एक उच्च स्तरीय पेशेवर हत्या की तरफ इशारा करता है. इसी प्रकार 29 अप्रैल 2011 को भाभा परमाणु केन्द्र की वैज्ञानिक उमा राव की आत्महत्या को उनके परिजन अभी भी स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं. उनका मानना है कि उमा ऐसा कर ही नहीं सकती, जरूर कुछ गडबड है.


यह बात कोई बच्चा भी बता सकता है कि, एक वैज्ञानिक को रास्ते से हटा देने पर ही किसी प्रोजेक्ट को कई वर्ष पीछे धकेला जा सकता है, भारत के क्रायोजेनिक इंजन, चंद्रयान, मिसाईल कार्यक्रम, परमाणु ऊर्जा और मंगल अभियान इसके प्रत्यक्ष प्रमाण हैं. जो कार्य हमारे वैज्ञानिक और इंजीनियर सन 2000 में ही कर लेते, वह अब भी लडखडाते हुए ही चल रहा है. भारत सरकार ने खुद माना है कि पिछले दो वर्ष के अंदर भाभा केन्द्र और कैगा परमाणु केन्द्र के नौ वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की मृत्यु कोस्वाभाविक मौत नहीं माना जा सकता, लेकिन जहाँ तक पुख्ता जाँच अथवा जिम्मेदारों को पकड़ने की बात है, सभी मामलों में शून्य ही हाथ में है. दिक्कत की बात यह है कि भारत सरकार के शीर्ष लोग यह मानने को ही तैयार नहीं हैं कि इन हत्याओं (संदिग्ध हत्याओं और आत्महत्याओं) के पीछे कोई विदेशी हाथ हो सकता है. जबकि 1994 से ही, अर्थात जब से क्रायोजेनिक इंजन के बारे में भारत-रूस की सहमति बनी थी, तभी से इस प्रकार के मामले लगातार सामने आए हैं. ईरान ने अपने दुश्मनों के कारनामों से सबक लेकर अपने सभी वैज्ञानिकों की सुरक्षा पुख्ता कर दी है, उनकी छोटी से छोटी शिकायतों पर भी तत्काल ध्यान दिया जाता है, उनके निवास और दफ्तर के आसपास मोबाईल जैमर लगाए गए हैं... दूसरी तरफ भारत सरकार नम्बी नारायण जैसे घटिया उदाहरण पेश कर रही है. किसी और देश में यदि इस प्रकार की संदिग्ध मौतों के मामले आते, तो मीडिया और प्रबुद्ध जगत में ख़ासा हंगामा हो जाता. लेकिन जब भारत की सरकार को उक्त मौतें सामान्य दुर्घटना या आत्महत्या ही नज़र आ रही हों तो कोई क्या करे?जबकि देखा जाए तो यदि वैज्ञानिकों ने आत्महत्या की है तो उसकी भी तह में जाना चाहिए, कि इसके पीछे क्या कारण रहे, परन्तु भारत की सुस्त और मक्कार प्रशासनिक मशीनरी और वैज्ञानिक ज्ञान शून्य राजनैतिक बिरादरी को इससे कोई मतलब ही नहीं है. पश्चिमी देशों ने आर्थिक प्रलोभन देकर अक्सर भारतीय प्रतिभाओं का दोहन ही किया है. जब वे इसमें कामयाब नहीं हो पाते, तब उनके पास नम्बी नारायणन के खिलाफ उपयोग किए गए हथकंडे भी होते हैं. 


हाल ही में भारत रत्न से सम्मानित वैज्ञानिक प्रोफ़ेसर राव ने भारत के नेताओं कोबेशर्म और मूर्ख कहा था, वास्तव में प्रोफेसर साहब हकीकत के काफी करीब हैं. देश में विज्ञान, वैज्ञानिक सोच, शोध की स्थितियाँ तो काफी पहले से बदतर हैं ही, लेकिन जो वैज्ञानिक अपनी प्रतिभा, मेहनत और असाधारण बुद्धि के बल पर देश के लिए कुछ करते हैं, तो उन्हें विदेशी ताकतें इस प्रकार से निपटा देती हैं. यह कहना जल्दबाजी होगी कि देश के शीर्ष राजनैतिक नेतृत्व में विदेशी हस्तक्षेप बहुत बढ़ गया है, लेकिन यह बात तो पक्की है कि शीर्ष प्रशासनिक स्तर और नेताओं की एक पंक्ति निश्चित रूप से इस देश का भला नहीं चाहती. पूरे मामले की सघन जाँच किए बिना, अपने एक महत्त्वपूर्ण वैज्ञानिक पर भरोसा करने की बजाय, उन्हें सीधे जेल में डालना छोटे स्तर पर नहीं हो सकता. खासकर जब उस वैज्ञानिक की उपलब्धियाँ और क्रायोजेनिक इंजन पर चल रहे कार्य को ध्यान में रखा जाए. जनरल वीके सिंह पहले ही हथियार लॉबी को बेनकाब कर चुके हैं, इसीलिए शक होता है कि कहीं जानबूझकर तो देश के वैज्ञानिकों के साथ खिलवाड़ नहीं किया जा रहा? हथियार और जासूसी लॉबी इस देश को पिछड़ा ही बनाए रखने के लिए कुछ भी कर सकती हैं, कर रही हैं. अब समय आ गया है कि इनषडयंत्रकारी शक्तियों को बेनकाब किया जाए, अन्यथा भारत की वैज्ञानिक सफलता इसी प्रकार लडखडाते हुए आगे बढेगी. जो काम हमें 1990 में ही कर लेना चाहिए था, उसके लिए 2013 तक इंतज़ार करना क्या एक राष्ट्रीय अपराध” नहीं है? क्या इस मामले की गंभीर जाँच करके सीआईए के गुर्गों की सफाई का वक्त नहीं आ गया है??
Posted by Suresh Chiplunkar at 12:05 PM 0 comments