शुक्रवार, 11 जनवरी 2013

शास्त्रीजी की मौत का रहस्य अनसुलझा ही रहा

यह देश का दुर्भाग्य ही कहा जायेगा की नेताजी सुभाषचंद्र बॊस , जनसंघ के संस्थापक एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री श्यामा प्रशाद मुखर्जी , प्रधान मंत्री लालबहादुर शास्त्री  और जनसंघ के राष्टीय अध्यक्ष पंडित दीनदयाल उपाध्याय हमारे देश के महान  नेता  रहे हें , मगर इनकी मृत्यु संदिग्धता में आज तक अपनी हकीकत तलाश रही है  और हम कुछ भी सही जवाब नहीं दे पाए हें ...यह हमारी त्रासदी ही कही जायेगी



शास्त्रीजी की मौत का रहस्य अनसुलझा ही रहा 

कुछ मौतें ऐसी होती हैं जो तमाम उम्र रहस्य बनी रहती हैं. ऐसी ही मौत लालबहादुर शास्त्री जी ( Lal Bahadur Shastri ) की भी थी जो आज भी रहस्य बनी हुई है. लालबहादुर शास्त्री( Lal Bahadur Shastri ) भारत के दूसरे प्रधानमंत्री थे. लालबहादुर शास्त्री की सादगी ऐसी थी कि उन्हें देखने वाला व्यक्ति उनकी तरफ आकर्षित हो जाता था. लालबहादुर शास्त्री जी( Lal Bahadur Shastri ) का नाम भले ही इतिहास के पन्नों में नजर नहीं आता है पर यह वो नाम है जिसने जय जवान-जय किसान का नारा देकर देश के किसानों और सीमा पर तैनात जवानों का आत्मबल बढ़ाने की नई मिसाल कायम की थी.

Lal Bahadur Shastri Death Mystery
लालबहादुर शास्त्री: क्या सुलझेगी मौत की गुत्थी ?
लालबहादुर शास्त्री की मौत (Lal Bahadur Shastri Death)को जब कई साल बीत चुके थे तब लालबहादुर शास्त्री ( Lal Bahadur Shastri ) के बेटे सुनील शास्त्री ने लालबहादुर शास्त्री के मौत के रहस्य (Lal Bahadur Shastri Death Secret)की गुत्थी सुलझाने को कहा था. पूर्व सोवियत संघ के ताशकंद में 11 जनवरी, 1966 को पाकिस्तान के साथ ताशकंद समझौते पर दस्तखत करने के बाद शास्त्री जी की मौत हो गई थी. लालबहादुर शास्त्री के बेटे सुनील शास्त्री का कहना था कि जब लालबहादुर शास्त्री की लाश को उन्होंने देखा था तो लालबहादुर शास्त्री की छाती, पेट और पीठ पर नीले निशान थे जिन्हें देखकर साफ लग रहा था कि उन्हें जहर दिया गया है. लालबहादुर शास्त्री की पत्नी ललिता शास्त्री का भी यही कहना था कि लालबहादुर शास्त्री की मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई थी.

Lal Bahadur Shastri Life
शास्त्री जी का जीवन और मां के साथ लगाव
भारत माता के लिए भी वो दिन खुशी का रहा होगा जब 2 अक्टूबर, 1904 को मुगलसराय, उत्तर प्रदेश में लालबहादुर शास्त्री( Lal Bahadur Shastri ) ने जन्म लिया होगा. लालबहादुर शास्त्री ( Lal Bahadur Shastri ) का वास्तविक नाम लाल बहादुर श्रीवास्तव था. लालबहादुर शास्त्री बचपन से ही शिक्षा में कुशल थे जिस कारण स्नातकोत्तर की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उन्हें ‘शास्त्री’ की उपाधि से सम्मानित किया गया था.
बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जो अपने व्यस्त जीवन में भी मां की नरम-नरम हथेलियों से प्यार और दुलार लेना नहीं भूलते हैं. लालबहादुर शास्त्री ( Lal Bahadur Shastri ) पर उनके पुत्र सुनील शास्त्री द्वारा लिखी पुस्तक ‘‘लालबहादुर शास्त्री, मेरे बाबूजी’’ में बताया गया है कि शास्त्री जी की मां उनके कदमों की आहट से उनको पहचान लेती थीं और बड़े प्यार से धीमी आवाज में कहती थीं ‘‘नन्हें, तुम आ गये?”  लालबहादुर शास्त्री ( Lal Bahadur Shastri ) का लगाव अपनी मां के साथ इतना था कि वे दिन भर अपनी मां का चेहरा देखे बगैर नहीं रह सकते थे.
लालबहादुर शास्त्री ( Lal Bahadur Shastri ) कहा करते थे कि ‘हम चाहे रहें या न रहें, हमारा देश और तिंरगा झंडा रहना चाहिए’. लालबहादुर शास्त्री ( Lal Bahadur Shastri ) उन राजनेताओं में से एक थे जो अपने पद के दायित्व को भली प्रकार समझते थे. आजादी के बाद उत्तर प्रदेश में गोविंद वल्लभ पंत जब मुख्यमंत्री बने तो लाल बहादुर शास्त्री को उत्तर प्रदेश का गृहमंत्री बना दिया गया. नाटे कद व कोमल स्वभाव वाले शास्त्री को देखकर किसी को कल्पना भी नहीं थी कि वह कभी भारत के दूसरे सबसे सफल प्रधानमंत्री बनेंगे. एक समय ऐसा आया जब लालबहादुर शास्त्री को रेल मंत्री बनाया गया. लाल बहादुर शास्त्री ऐसे राजनेता थे जो अपनी गलती को सभी के सामने स्वीकार करते थे जिसके चलते लालबहादुर शास्त्री( Lal Bahadur Shastri ) ने रेल मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था.

लालबहादुर शास्त्री( Lal Bahadur Shastri ) को 1964 में देश का दूसरा प्रधानमंत्री बनाया गया था. 1966 में  उन्हें भारत का पहला मरणोपरांत भारत रत्न का पुरस्कार भी मिला था. लालबहादुर शास्त्री( Lal Bahadur Shastri ) को चाहने वाले लोगों को वो दिन आज भी याद आता है जब 1965 में अचानक पाकिस्तान ने भारत पर सायं 7.30 बजे हवाई हमला कर दिया था तो उस समय तीनों रक्षा अंगों के चीफ ने लालबहादुर शास्त्री से पूछा ‘सर आप क्या चाहते है आगे क्या किया जाए…आप हमें हुक्म दीजिए’ तो ऐसे में लालबहादुर शास्त्री ( Lal Bahadur Shastri ) ने कहा कि “आप देश की रक्षा कीजिए और मुझे बताइए कि हमें क्या करना है?” ऐसे प्रधानमंत्री बहुत कम ही होते हैं जो अपने पद को सर्वोच्च नहीं वल्कि अपने पद को जनता के लिए कार्यकारी मानकर चलते है. किसी ने सच ही कहा है कि वीर पुत्र को हर मां जन्म देना चाहती है. लालबहादुर शास्त्री ( Lal Bahadur Shastri ) उन्हीं वीर पुत्रों में से एक हैं जिन्हें आज भी भारत की माटी याद करती है.

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