शुक्रवार, 8 फ़रवरी 2013

संसद अपवित्र करना बंद करें:राज्यसभा के उपसभापति पी जे कुरियन



नैतिक रूप से यह  बहुत गंभीर प्रकरण हे और जब तह पुनः इस का विश्लेषण नहीं हो जाता , तब तक उन्हें संसद में भी नहीं घुसना चाहिए ....................

सूर्यनेल्ली मामला:कुरियन का त्यागपत्र से इनकार
नयी दिल्ली : सूर्यनेल्ली बलात्कार मामले को लेकर हमले झेल रहे राज्यसभा के उपसभापति पी जे कुरियन ने आज यह कहते हुए त्यागपत्र देने से इनकार किया कि वह बेकसूर हैं. कुरियन ने कहा, ‘‘मुझे देश की सर्वोच्च अदालत द्वारा कानूनी और नैतिक तौर पर पूरी तरह से बरी कर दिया गया है. अपने विवेक के आधार पर मैं एक निर्दोष व्यक्ति हूं.’’ 
यह पूछे जाने पर कि इस मामले को लेकर राजनीतिक हंगामे के मद्देनजर क्या वह अपने पद से त्यागपत्र देंगे, उन्होंने पीटीआई से कहा, ‘‘क्या एक निर्दोष व्यक्ति को आरोपों के चलते पद छोडने के लिए कहा जा सकता है? त्यागपत्र देना मेरे द्वारा अपराध सीधे तौर पर स्वीकार करने के बराबर होगा.’’
कुरियन ने कहा कि वर्तमान विवाद और इस मामले में उन पर मामला चलाने की मांगें ‘राजनीतिक रुप से प्रेरित’ हैं जिसका इस्तेमाल ‘मेरे राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों द्वारा मेरी छवि धूमिल करने के लिए किया जा रहा है.’
उन्होंने कहा, ‘‘यह विवाद संभव: इस गलतफहमी में खडा हुआ है कि मैं मुख्य मामले में एक आरोपी हूं जिसके 36 आरोपियों को उच्च न्यायालय द्वारा बरी किया जा चुका है. उच्चतम न्यायालय ने बरी किये जाने को रद्द करके मामले को वापस उच्च न्यायालय को सौंप दिया है. मैं बिल्कुल भी आरोपी नहीं हूं.’’
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सूर्यनेल्ली बलात्कार मामले में कुरियन की मुश्किलें बढ़ीं
Friday, February 08, 2013,

तिरुवनंतपुरम (कोझिकोड) : सूर्यनेल्ली सामूहिक बलात्कार मामले में एक नया मोड़ आ गया है। मामले के अहम गवाह भाजपा के एक स्थानीय नेता के एस राजन ने यह कहकर खलबली मचा दी है कि जांच अधिकारियों ने उनके बयान को गलत दर्ज किया, जिससे राज्यसभा के उप-सभापति पीजे कुरियन को फायदा मिला। राजन के इस बयान से कुरियन की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
गौरतलब है कि कुरियन पर सूर्यनेल्ली सामूहिक बलात्कार मामले में शामिल होने के आरोप लग रहे हैं और उनके इस्तीफे की मांग को लेकर राज्य भर में विरोध-प्रदर्शन का दौर जारी है।
भाजपा के राज्य सचिव के एस राजन के बयान से कुरियन को इस मामले में आरोपमुक्त होने में बहुत मदद मिली थी। लेकिन कोझिकोड में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में राजन ने कहा कि पुलिस की ओर से अदालत में पेश किया गया उनका बयान वह नहीं था जो उन्होंने दर्ज कराया था।
संवाददाता सम्मेलन में राजन के साथ भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वी मुरलीधरन भी मौजूद थे। राजन ने कहा कि 1996 के इस मामले की जांच टीम की अगुवाई कर चुके पूर्व एडीजीपी सिबी मैथ्यूज के खिलाफ वह कानूनी कार्रवाई शुरू करेंगे। (एजेंसी)
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जानिए आखिर क्या है सूर्यनेल्ली सामूहिक बलात्कार कांड
नई दिल्ली, लाइव हिन्दुस्तान

केरल के इदुक्की जिले में सूर्यनेल्ली की एक लड़की का जनवरी 1996 में अपहरण कर लिया गया था। इस वारदात में 40 दिन के दौरान 42 व्यक्तियों ने कथित रूप से 16 साल की लड़की से सामूहिक बलात्कार किया था।छह सितंबर 2000 को विशेष अदालत ने 35 लोगों को दोषी ठहराते हुए विभिन्न शर्तों पर कठोर कारावास की सज़ा सुनाई थी, लेकिन केरल हाईकोर्ट ने 35 लोगों को बरी कर दिया और सिर्फ़ एक व्यक्ति को सेक्स व्यापार का दोषी मानते हुए पांच साल की क़ैद और 50 हज़ार रुपये का जुर्माना लगाया था।
वर्ष 2005 में लड़की के परिजनों ने सुप्रीम कोर्ट में इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील की थी, जहां पिछले आठ साल से ये मामला लटका हुआ था। तीन जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने तीन सप्ताह के अंदर इस मामले की सुनवाई की बात कही थी। सर्वोच्च न्यायालय ने 31 जनवरी को केरल उच्च न्यायालय के उस फैसले को खारिज कर दिया, जिसमें 1996 के सूर्यनेल्ली दुष्कर्म मामले में एक आरोपी को छोड़कर बाकी सभी को दोषमुक्त कर दिया गया था। सर्वोच्च न्यायालय ने मामले की फिर से सुनवाई करने के आदेश दिए हैं।
इस मामले में कुरियन का नाम तब एक बार फिर सामने आया, जब पीड़ित ने 29 जनवरी को दिल्ली में अपने अधिवक्ता को पत्र लिख कर, कुरियन के खिलाफ नए सिरे से जांच के लिए एक पुनरीक्षण याचिका दाखिल करने की संभावनाएं तलाशने को कहा। पीड़िता ने शुक्रवार को संकेत दिया था कि वह कुरियन के खिलाफ मामले को फिर से शुरू करने के कानूनी विकल्प पर विचार कर रही है।
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गैंगरेप: आठ साल बाद सुप्रीम कोर्ट ने सुनी फरियाद
गुरुवार, 31 जनवरी, 2013

केरल के बहुचर्चित सूर्यनेल्ली सामूहिक बलात्कार कांड में सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट को तगड़ा झटका दिया है.हाई कोर्ट ने इस सामूहिक बलात्कार कांड में 35 अभियुक्तों को बरी कर दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने केरल हाई कोर्ट को निर्देश दिया है कि वो इस मामले को नए सिरे से देखे.
जस्टिस एके पटनायक की खंडपीठ ने हाई कोर्ट के फ़ैसले को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई करते हुए ये निर्देश दिया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इस मामले में जो भी अभियुक्त ज़मानत पर हैं, उन्हें फिर से अदालत में ज़मानत के लिए अपील करें.
सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट इस निष्कर्ष पर आश्चर्य व्यक्त किया कि लड़की इस मामले में 'इच्छुक सहभागी' थी.मामला वर्ष 1996 के इस बहुचर्चित सामूहिक बलात्कार कांड में 16 साल की एक लड़की का 40 दिनों तक 42 लोगों ने बलात्कार किया था.
सूर्यनेल्ली के इडुक्की ज़िले की रहने वाली इस लड़की का वर्ष 1996 में अपहरण कर लिया गया था, फिर उसे एक जगह से दूसरी जगह ले जाया गया और बलात्कार किया गया.
छह सितंबर 2000 को विशेष अदालत ने 35 लोगों को दोषी ठहराते हुए विभिन्न शर्तों पर कठोर कारावास की सज़ा सुनाई थी.
लेकिन केरल हाई कोर्ट ने 35 लोगों को बरी कर दिया और सिर्फ़ एक व्यक्ति को सेक्स व्यापार का दोषी मानते हुए पाँच साल की क़ैद और 50 हज़ार रुपए का जुर्माना लगाया था.वर्ष 2005 में लड़की के परिजनों ने सुप्रीम कोर्ट में इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील की थी. जहाँ पिछले आठ साल से ये मामला लटका हुआ था. तीन जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने तीन सप्ताह के अंदर इस मामले की सुनवाई की बात कही थी.

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