शुक्रवार, 22 फ़रवरी 2013

संसद में हैदरावाद आतंकी हमले की निंदा


 

 

हैदराबाद धमाके की जांच में अब तक के अपडेट फोटो 

 आईबीएन-7 Feb 22, 2013

हैदराबाद। हैदराबाद धमाके क्या लापरवाही और सुरक्षा में चूक का नतीजा थे। अगर पिछले कुछ महीनों की खुफिया जानकारियों का विश्लेषण करें तो जवाब मिलता है हां। हैदराबाद पुलिस की सबसे बड़ी चूक ये रही कि उसने धमाके के बारे में दी गई खुफिया जानकारी को नजरअंदाज किया। अक्टूबर 2012 मे दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने हैदराबाद पुलिस को जानकारी दी थी कि आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन के गुर्गों ने हैदराबाद के बेगमपेट और दिलसुखनगर इलाके की रेकी की है। ये जानकारी भी दी गई कि इंडियन मुजाहिदीन के आतंकी यासीन भटकल के भाईयों रियाज और इकबाल भटकल के कहने पर इन इलाकों में गुर्गों ने धमाकों के लिए साफ्ट टार्गेट तलाशे हैं। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को ये सारी जानकारी इंडियन मुजाहिदीन के एक आतंकी मकबूल उर्फ जुबैर ने दी थी। इस सनसनीखेज जानकारी के बाद हैदराबाद पुलिस की एक टीम ने दिल्ली आकर मकबूल उर्फ जुबैर से पूछताछ की और वापस चली गई।
अब सवाल ये है कि जब इन दो खास इलाकों के बारे में साफ जानकारी हैदराबाद पुलिस के पास थी तो इन इलाकों में सुरक्षा को चाक चौबंद क्यों नहीं किया गया? दूसरा सवाल ये कि इन इलाकों में भीड़भाड़ वाली जगहों पर खुफिया तंत्र को मजबूत क्यों नहीं किया गया? तीसरा सवाल ये कि इन इलाकों में लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच क्यों नहीं की गई? हैदराबाद पुलिस ने इस महत्वपूर्ण जानकारी को नजरअंदाज क्यों किया?
सूत्रों का कहना है कि हैदराबाद पुलिस के पास ये जानकारी भी थी कि इसी साल जनवरी में यासीन भटकल और मंजर नाम के आतंकी हैदराबाद में थे। पुलिस ने इन दोनों की तलाश में हैदराबाद के बेगमपेट इलाके की एक लॉज पर छापा भी मारा था। लेकिन 18 जनवरी को छापे से कोई तीन घंटे पहले ही ये दोनों आतंकी फरार होने में कामयाब हो गए। यानी पुलिस को जिस भी सूत्र से इन दोनों आतंकियों के हैदराबाद में होने की जानकीर मिली थी वो सही थी।
अब सवाल ये है कि जब ये तीनों आतंकी पुलिस को चकमा दे गए तो उनकी तलाश में आगे कार्रवाई क्यों नहीं की गई? उनकी तलाश क्यों नहीं जारी रखी गई? सवाल ये भी है कि जब मकबूल से दिल्ली में मिली जानकारी सच साबित हो रही थी तो दिलसुखनगर और बेगमपेट इलाकों में सुरक्षा इंतजाम पुख्ता क्यों नहीं किए गए? सवाल ये भी है कि हैदराबाद पुलिस ने दूसरे राज्यों को यासीन भटकल और मंजर के हाथ से निकल जाने की जानकारी क्यों नहीं दी?
वहीं 11 फरवरी 2013 को मुबंई पुलिस ने गृह मंत्रालय को यह जानकारी दी थी कि इंडियन मुजाहिदीन और लश्कर किसी बडे शहर में विस्फोट की योजना बना रहे हैं। खुफिया विभाग की इस रिपोर्ट के बाद गृह मंत्रालय ने देश भर में अलर्ट जारी किया था और सभी राज्यों को इस साजिश की जानकारी भी थी दी थी। सवाल उठता है कि गृह मंत्रालय के अलर्ट को हैदराबाद पुलिस ने गंभीरता से क्यों नहीं लिया? गृह मंत्री ने खुद माना है कि उन्हें दो दिन पहले पता था कि कहीं धमाके होने जा रहे हैं और इस सूचना को सभी राज्यों को भेजा गया था। सवाल उठता है कि ऐन दो दिन पहले मिली सूचना को भी हैदराबाद पुलिस ने क्यों नजरंदाज कर दिया? सवाल कई हैं और हैदराबाद पुलिस के पास एक का भी जवाब नहीं है।
हैदराबाद धमाके में मरने वालों की संख्या 16 हो गई है। घायलों का इलाज हैदराबाद के अस्पतालों में ही चल रहा है जिनमें 6 लोगों की हालत नाजुक बनी हुई है। आज भी वहां अजीब सा सन्नाटा फैला हुआ है। सुबह सुबह देश के गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे हैदराबाद पहुंचे और वारदात वाली जगह का जायजा लिया। शिंदे ने घायलों से भी मुलाकात थी। धमाके के बाद से ही जांच एजेंसियां सुराग की तलाश में जुट गई हैं। मौका-ए-वारदात से विस्फोटकों के नमूने लिए गए हैं। इन धमाकों ने हैदराबाद पुलिस के निकम्मेपन की भी पोल खोल दी है। धमाकों की जगह के सभी सीसीटीवी बंद पाए गए। इस बीच संसद ने एक सुर में धमाकों की निंदा की और सरकार से पूछा कि जब धमाकों के बारे में सुराग थे तो इन्हें नाकाम क्यों नहीं किया गया। सरकार ने ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की। इस बीच संदिग्ध आतंकियों की तलाश में NIA और राज्य पुलिस जगह-जगह छापे मारे रही है। खबर है कि पुराने हैदराबाद से एक शख्स को हिरासत में लिया है।
हैदराबाद में एक के बाद एक धमाके हुए। इन धमाकों में 16 बेकसूरो की जान गई। करीब 117 लोग घायल हुए जिनमें कई की हालत नाजुक बताई जा रही है। साफ तौर पर ये हमारी खुफिया एजेंसियां और पुलिस की नाकामी है। लेकिन गृह मंत्री सुशील शिंदे लगातार ये साबित करने की कोशिश में लगे हैं कि उनके मंत्रालय की तरफ से कोई चूक नहीं हुई। अब से थोड़ी देर पहले शिंदे ने संसद में बयान दिया। इस बयान में शिंदे ने एक बार फिर आतंकवाद से मुकाबला करने का संकल्प दोहराया। शिंदे ने सदन को ये भी बताया कि इस धमाके की जांच आंध्रप्रदेश पुलिस के सहयोग से एनआईए की टीम करेगी। शिंदे ने शुरुआती जांच का भी ब्यौरा दिया जिसके मुताबिक ब्लास्ट में इस्तेमाल आईईडी के लिए साइकिल का इस्तेमाल किया गया था। लेकिन सवाल ये है कि जब गृह मंत्रालय को दो दिन पहले ही खुफिया एजेंसियों से इस साजिश की भनक लग गई थी वो इसे रोकने में नाकाम क्यों रहा। आतंक के हैदराबाद कनेक्शन की कहानी काफी पुरानी है। 2001 से अब तक शहर में 7 बम धमाके हो चुके हैं। 2007 में 3 महीने में 2 बड़े बम ब्लास्ट कर दहशतगर्दों ने सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया। हाल ही में एक आतंकी ने खुलासा किया है कि हैदराबाद पाकिस्तान में बैठे आतंक के आकाओं का भारतीय मुख्यालय है।
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हैदराबाद धमाकों से सिहर गई संसद


By visfot news network Friday, 22 February  2013
हैदराबाद में गुरुवार को हुए दो बम विस्फोट की आतंकी घटना की लोकसभा में आज सभी दलों ने एक स्वर में निंदा करते हुए कहा कि यह समय आरोप प्रत्यारोप का नहीं है और सबको मिलकर आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई के बारे में एक राय बनाने की आवश्यकता है। सदन में शून्यकाल के दौरान:-
1.1 विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने इस विषय को उठाते हुए कहा कि आतंकवाद को किसी मजहब या किसी रंग की नजर से नहीं देखना चाहिए। इसके खिलाफ लड़ाई के लिए इस सोच को स्वीकार करने के साथ पूरे देश को और सभी दलों को एक होना होगा। ऐसा करके ही आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सफलता पाई जा सकती है । हैदराबाद के बम विस्फोट की घटना को दुर्भाग्यपूर्ण, दर्दनाक और शर्मनाक बताते हुए उन्होंने कहा कि यह दोषारोपण करने का अवसर नहीं है और सबको एकजुट होकर आतंकवाद के खिलाफ लड़ना होगा। हालांकि यह तभी संभव है जब आतंकवाद से लड़ने को लेकर विचारों में समानता हो। यह दुभाग्यपूर्ण है कि देश में ऐसी सोच नहीं बन रही है। उन्होंने कहा कि आतंकवादी घटना की आशंका के बारे में राज्यों को सूचित भर कर देने से केन्द्र के जिम्मदारी की इतिश्री नहीं हो जाती है। उन्होंने इस बात को दुर्भाग्यपूर्ण बताया कि हमले की आशंका की जानकारी दिये जाने के बाद भी आतंकवादी ऐसा करने में सफल हो जाते हैं।

1.2 माकपा के बासुदेव आचार्य ने कहा कि हैदाराबाद में आतंकी हमलों की तीन घटनायें हो चुकी है और इसके बावजूद वहां खुफिया तंत्र बार बार चूक रहा है। उन्होंने कहा कि हैदाराबाद में राष्ट्रीय अपराध निरोधक केन्द्र की मौजूदगी के बावजूद वहां यह घटना कैसे हुई इसका जवाब केन्द्र और राज्य दोनों को देना होगा। उन्होंने कहा कि आतंकवाद का कोई रंग और धर्म नहीं होता और हमें एक होकर इससे लड़ना है।

1.3 समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह यादव ने इस बात पर आश्चर्य जताया कि आतंकवादी हमले की आशंका की खुफिया सूचना मिलने के बावजूद आतंकी अपने कारनामों को अंजाम देने में कैसे सफल हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि जब जब आतंकी हमले हुए हैं पूरा देश और सदन सरकार के साथ होता है। सभी दलों का समर्थन मिलने के बावजूद आतंकी हमलों को सरकार क्यों नहीं रोक पा रही है, इसका वह जवाब दे। वह बताये कि उसकी क्या कमजोरी है। सपा नेता ने सरकार से सवाल किया कि आतंकी हमले की आशंका की खबर होने के बाद भी हमला हो जाये तो देश की सुरक्षा कैसे होगी। बसपा के दारा सिंह चौहान ने जानना चाहा कि केन्द्र द्वारा राज्य को आतंकी हमले की आशंका की सूचना दिये जाने के बावजूद चूक कहां हुई इसकी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आतंकी हमले के दोषियों को दंडित किया जाना चाहिए लेकिन निर्दोष लोगों को नहीं फंसाना चाहिए।

1.4 जदयू के शरद यादव ने कहा कि आतंकी हमलों की आशंकाओं की सूचना मिलने के बावजूद ऐसी घटनायें हो जाना इस बात का द्योतक है कि यह सरकार ‘लुंज-पुंज’ है। उन्होंने कहा कि यह इस बात का भी इशारा है कि न तो सदन के भीतर न ही सदन के बाहर इस सरकार का इकबाल है। तृणमूल कांग्रेस के सुदीप बंदोपाध्याय ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में उनका दल पूरी तरह से सरकार के साथ है और इस बारे में वह जो भी कदम उठायेगी उनकी पार्टी उसका समर्थन करेगी।

1.5 कांग्रेस के अरुण कुमार वुंडावल्ली ने कहा कि आतंकवाद की घटना में मारे गये लोगों को उसी तरह का सम्मान मिलना चाहिए जो सीमाओं की रक्षा करने वाले शहीदों को मिलता है।
1.6 द्रमुक के टीआर बालू ने जानना चाहा कि आतंकी हमले की आशंका के बारे में केन्द्र ने आंध्र प्रदेश सरकार को क्या सूचना दी और राज्य सरकार ने क्या कार्रवाई की।
1.7 बीजू जनता दल के भृतुहरि महताब ने कहा कि जब अमेरिका में एक आतंकी घटना और ब्रिटेन में दो तीन घटना होने के बाद उन देशों में अन्य आतंकी घटना नहीं हुई तो भारत ऐसा करने में क्यों सफल नहीं हो पा रहा है।

1.8 अन्नाद्रमुक के थंबीदुरै ने कहा कि कई सालों से देश को अस्थिर करने का प्रयास हो रहा है और आतंकी हमले इसी साजिश का हिस्सा हैं।

1.9 शिवसेना के अनंत गीते ने कहा कि भारत में होने वाले सारे आतंकी हमलों की जड़ें सीमापार पाकिस्तान में हैं। उन्होंने कहा कि अगर आतंकवाद से लड़ना है तो उसे भावनाओं से नहीं जोड़ना होगा।
1.10 तेदेपा के नमा नागेश्वर राव ने कहा कि 2004 से देश में 30 जगह विस्फोट की घटनायें हुई हैं जिनमें 952 लोग मारे गये और दो हजार से अधिक लोग धायल हुए हैं और अकेले आंध्र प्रदेश में ऐसी आठ घटनायें हुई हैं। उन्होंने जानना चाहा कि सरकार ऐसी घटनाओं को रोक पाने में सफल क्यों नहीं हो पा रही है।

1.11 कम्युनिस्ट पार्टी के गुरूदासदास गुप्ता ने कहा कि अफजल गुरू को फांसी दिये जाने के बाद से ही आतंकवादी संगठन इसका बदला लिये जाने की बात कर रहे थे। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि उसने इस धमकी को गंभीरता से क्यों नहीं लिया। उनका यह भी कहना था कि यह इस बात का भी द्योतक है कि हमारा खुफिया तंत्र और कानून व्यवस्था लागू करने वाली एजेंसियां ऐसी घटनाओं को रोकने में अक्षम हैं।
1.12 नेशनल कांफ्रेंस के एस शारिक ने हैदाराबाद बम विस्फोट की घटना को शैतानी हरकत बताते हुए इसकी निंदा की। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं की केवल निंदा किया जाना ही काफी नहीं है बल्कि ऐसी पुख्ता नीति बनाये जाने की जरूरत है जिससे खुफिया तंत्र की कमियों को दूर किया जा सके और आतंकवाद से सख्ती से निपटा जा सके। उन्होंने सरकार से आतंकवाद से निपटने के मुद्दे पर विचार के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की सलाह दी और कहा कि इस बैठक में खुफिया विशेषज्ञों को बुलाया जाये जिससे यह पता लगाया जा सके कि नीतियों में क्या खामियां हैं।
1.13 राजद के रघुवंश प्रसाद सिंह और
1.14 झारखंड विकास मोर्चा के अजय कुमार ने हैदराबाद बम विस्फोट की घटना को खुफिया तंत्र की विफलता बताया।

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