सोमवार, 18 मार्च 2013

बांग्लादेश के हिन्दू भी इंसान है...




बांग्लादेश के हिन्दू भी इंसान ही तो है
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सुधीर मौर्य 'सुधीर'
 सन 1971 में पूर्वी बंगाल को पकिस्तान के आत्याचार से मुक्ति दिलाने के लिए वहां के हिन्दुओ ने स्फूर्तिदायक स्वतंत्रता युद्ध लड़ा, आजदी मिली पर उन पर होते आत्याचार आज भी कम न हुए।
बंगला देश के उसी स्वतंत्रता संग्राम में कट्टरपंथी दिलावर हुसैन सईदी ने हिन्दुओ को लक्ष्य करके उनकी स्त्रियों के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया और करवाया। वो जमाते इस्लामी का नेता है। पिछली 28 फ़रवरी को उसे 1971 में नरसंहार और दुष्कर्म करने के अपराध में फासी की सज़ा सुनाई गई। बस उसके बाद लगभग साडे पंद्रह करोड़ की आबादी वाले बांग्लादेश जिसमे दस फीसदी हिन्दू रहते हैं उन पर मुस्लिम कट्टरपंथी टूट पड़े। न जाने कितने हिन्दुओ को मौत की घाट उतार दिया गया, उनकी लडकियों के साथ बलात्कार किया गया। न जाने कितने देवालय और मंदिर तोड़ दिए गये, जला दिए गए।
ये वही जमाते इस्लामी के राक्षस है जिन पर पाकिस्तानी सेना के साथ मिलकर साजिश रचने के आरोप हैं। ख़ैर पकिस्तान के बारे में तो बात करना ही बेकार है वहाँ रह रहे ( बचे हुए एक या डेड़ पर्तिशत) उनकी हालत तो और भी बदतर है। पर भारत सरकार भी अपने पडोसी देशो में हिन्दुओ पर हो रहे अत्याचार पर खामोश है, ये बहुत दुःख की बात है।
हम जब तक खामोश रहेंगे पकिस्तान और बांग्लादेश में इंसानियत का क़त्ल होता रहेगा। भारत को अपनी ख़ामोशी तोडनी होगी और अमेरिका की तरह पकिस्तान में घुस कर ओसामा जैसे लोगो को सबक सिखाना होगा।



हिन्दू गान - सुधीर मौर्य 'सुधीर'
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आओ मिलके गाये उन हिन्दुओ की आरती
अभिमान जिनपे करती है अपनी माँ भारती

तक रहा वो हिन्द था पर्शिया को जीत के
अभिमान चूर कर दिया चाणक्य, चन्द्रगुप्त ने
चीन भी थर्राता था उस बर्बरी जाति से
हूणों को विजित किया यूवराज स्कंदगुप्त ने
शत्रुओं की फौज के पाव को उखाड्ती

आओ मिलके याद करे वीर राजा दाहर की
मुक्तपीड और बाप्पा जैसे नाहर की
मेवाड़ के रानाओ तुम्हारे चरणों की वन्दना
सांगा, उदय, प्रताप, अमरसिंह की गर्जना
जौहर में कूदती पद्मनी और मालती

आओ मिलके गाये उन हिन्दुओ की आरती
अभिमान जिनपे करती है अपनी माँ भारती

सुधीर मौर्य 'सुधीर'
गंज जलालाबाद, उन्नाव
209869

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