शनिवार, 16 मार्च 2013

आतंकवादी कसाब के शुभ चिंतक


आतंकवादी  कसाब के शुभ चिंतक 



हर्ष मंदर-अरुणा राय ने की थी कसाब को फांसी न देने की मांग
पी7 ब्‍यूरो/ भाषा, नई दिल्‍ली,28 January 2013
 http://www.p7news.com
सरेआम लोगों को मौत के घाट उतारने वाले मुंबई अतांकवादी हमले के आरोपी अजमल कसाब के भारत में कई हमदर्द भी हैं। एनएसी यानी नेशनल एडवायजरी कमेटी के दो मेंबरों ने मुंबई 26/11 के गुनहगार कसाब को बचाने की कोशिश की थी। इसके लिए उन्होंने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के पास अर्जी भेजी थी।
जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रमण्यम स्वामी की ओर से दाखिल एक आरटीआई के हवाले से ये जानकारी सामने आई है कि 203 लोगों ने कसाब की माफी के लिए राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के पास अर्जी दी थी। इनमें से दो नाम हर्ष मंदर और अरुणा राय के हैं। ये दोनों यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी की अध्यक्षता वाली एनएसी के मेंबर भी हैं। राष्ट्पति की ओर से इन अर्जियों को खारिज करने के बाद 21 नवंबर को कसाब को फांसी दे दी गई थी।
इस बारे में जब  हर्ष मंदर से बात की गई तो अपनी सफाई में उन्‍होंने कहा, 'बेशक 26/11 मुंबई अटैक मामले में अजमल कसाब का ट्रायल एकदम फेयर था, लेकिन मुझे लगता है कि उसे फांसी की सजा लोगों के गुस्से को देखते हुए सुनाई गई थी। मैंने सजा माफी की बात नहीं की थी, सिर्फ फांसी की सजा माफ करने की अर्जी दी थी।'

============

एनएसी के सलाहगारों ने की थी कसाब को बचाने की कोशिश: स्वामी

स्रोत: News Bharati Hindi तारीख:28/ 1/ 2013
http://hn.newsbharati.com
नई दिल्ली, जनवरी 28:  जब पुरा देश कसाब को फ़ांसी दिये जाने की मांग कर रहा था तब केंद्र सरकार की राष्ट्रीय सलाहगार समिति (एनएसी) में बैठे कुछ सदस्य कसाब को बचाने की कोशिश में लगे थे। सुब्रह्मण्यम स्वामी ने सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत ये चौंकानेवाला खुलासा किया है। स्वामी के अनुसार एनएसी के कुछ सदस्यों ने राष्ट्रपति से कसाब को माफ़ी दिये जाने की गुहार लगायी थी।
सोनिया गांधी की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय सलाहगार समिति के दो सदस्य- अरुणा रॉय और हर्ष मांदेर ने मुंबई हमलों के गुनहगार अजमल आमिर कसाब को बचाने की कोशिश की थी। आरटीआई के जरिए मिली जानकारी के हवाले से उन्होंने बताया कि कसाब की फांसी माफ करने के लिए जिन 203 लोगों ने राष्ट्रपति के पास अर्जी भेजी थी, उनमें एनएसी के ये दो सदस्य भी थे।
इनके साथ सामाजिक कार्यकर्ता निखिल डे भी कसाब की फांसी की सजा माफ करने की अपील करने वालों में से एक थे, मगर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने इन सभी अर्जियों को खारिज कर दिया था, जिसके बाद बीते साल 21 नवंबर को कसाब को फांसी दे दी गई थी।
शुक्रवार को जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रमण्यम स्वामी ने बताया कि उनकी पार्टी के एक कार्यकर्ता ने इस बारे में आरटीआई के तहत जानकारी मांगी थी। उन्होंने पत्रकारों को आरटीआई के तहत मिले पत्र की कॉपी देते हुए कहा, 'जिन लोगों ने एक आतंकी की सजा माफ करने की मांग की, वही एनएसी में बैठ कर देश का भविष्य तय कर रहे हैं।'
हर्ष मांदेर संसद पर हमला करने वाले आतंकी अफ़जल गुरु के लिये दया याचिका दायर करने के लिये विवादों में फ़ंस चुके है।
इस बारे में जब अरुणा रॉय से संपर्क किया गया तन उन्होंने इस बारे में बात नहीं की। लेकिन निखिल डे ने बताया, 'मैं और अरुणा रॉय किसी को भी मौत की सजा के पक्ष में नहीं है। हमारा मानना है कि किसी को भी फांसी की सजा के बजाए लंबे समय तक जेल में रखना चाहिए।' बता दे की अरुणा रॉय माओवाद की समर्थक है।
पाकिस्तानी आतंकी अजमल कसाब और उसके साथियों ने 26 नवंबर, 2008 को मुंबई में हुए आतंकी हमले (26/11) में 164 लोगों की जान ली थी और करीब 308 लोगों को जख्मी किया था। कसाब को 21 नवंबर 2012 को फांसी की सजा दी गई थी। उसकी क्रूरता को नजरअंदाज करते हुए कई मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने उसने फ़ांसी को “अमानवीय” करार दिया था।
दुर्भाग्यवश बंदूक की नोक पर हिंसा फ़ैलाने वाले इन आतंकीयों और माओवादीयों के मानवाधिकार की चिंता करने वाले और उनका समर्थन करने वाले ये कथित मानवाधिकार कार्यकर्ता इन उग्रवादीयों से देश को बड़े खतरे को आसानी से नजरअंदाज करते है। इससे ज्यादा दुर्भाग्य की बात ये है कि ऐसे लोग केंद्र सरकार के सलाहगार बनकर देश की नीतियां तय करते है।

1 टिप्पणी:

  1. Gita main Krishan Bhagwan nai kha hai, jab jab desh par sankat aaye ga,main aayu ga.Weh aayege, zarur aayainge, desh bahut bade sankat se guzar raha hai,papachar ati par hai, isliye ab unko aana hi ho ga,weh aayain ge, RSS ke roop main.

    उत्तर देंहटाएं