रविवार, 30 जून 2013

Satellite : REVEALS Uttarakhand's real story




Satellite imagery REVEALS Uttarakhand's real story
Last updated on: June 28, 2013
Vicky Nanjappa
Satellite imagery from the Indian Space Research Organisation shows that heavy and unplanned construction work in Uttarakhand was a leading cause for the devastation which claimed thousands of lives in the hill state. Vicky Nanjappa reports.

ISRO, which has been looking at the devastation and analysing it based on its satellite imagery says that there is a reason why it is being called a man-made tragedy. First and foremost, there are several hydel projects that are coming up.
These projects would come up on the tributaries of Ganga-Alaknanda and Mandakini which meet at Rudraprayag which has seen a lot of devastation. It shows that tunnels are being built to divert these rivers.
ISRO's analysis would also show that several hundred new buildings have also caused the problem. There were a few hutments two decades ago. However, today there are 100-odd buildings which have blocked the flow of water in Kedarnath, an official with ISRO told rediff.com.

There was no proper channel for the water to flow and this led to the major flooding and thus, the Kedar dome broke.

It has also been observed that the boom in the tourism industry also led to major constructions in the area. There was a time when no tourist was allowed to stay overnight in Kedarnath.

However, the major boost in the number of tourists led to the construction of new buildings to accommodate them. These were unplanned constructions which ultimately ended up blocking the water flow in the area, thus leading to the calamity.
The imagery shows the disturbances in the Kedar Valley. A new stream which cuts across the green patch is one of the major problems which brought down debris into the Mandakini river, thus causing the destruction.

Images prior to the flood show that there was some snow in the upper areas of the Himalayas. The image after the flood shows that the area under the snow increased and this indicates that there would have been heavy rainfall in the Kedar Valley which would led to flooding.

The ISRO says that they are observing the images and studying the issue.

"There are some more images which would come to us in the next few days and in a week's time a more detailed analysis would be provided," an ISRO official said.

http://navbharattimes.indiatimes.com

नरेंद्र मोदी 'असाधारण नेतृत्व' : अमेरिकी सांसद एफएन फालेओमावेगा



नरेंद्र मोदी  'असाधारण नेतृत्व' :  अमेरिकी सांसद एफएन फालेओमावेगा
फ़रवरी 15, 2013

वाशिंगटन:
अमेरिका के एक सांसद ने अमेरिकी सरकार से गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदृष्टि और विचारों का यह कहते हुए खुले और पूर्ण रूप से समर्थन करने को कहा है कि उनके असाधारण नेतृत्व के चलते ही उनका राज्य अब देश की आर्थिक महाशक्ति है।
अमेरिकी सांसद एफएन फालेओमावेगा ने अमेरिका संसद की प्रतिनिधि सभा में दिए अपने संबोधन में कहा, ऐसी सफलता के साथ मैं यह पूरी उम्मीद करता हूं कि अमेरिका अब गुजरात के प्रति नया नजरिया अपनाएगा और मुख्यमंत्री मोदी के विचारों को पूर्ण और खुले ढंग से समर्थन करेगा, क्योंकि वह पूरे विश्व के लोगों के जीवन स्तर में सुधार के लिए घरेलू और विदेशों में नौकरियां सृजित करके विश्व अर्थव्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में कार्य कर रहे हैं।
अमेरिकी प्रतिनिधिसभा में गैर मतदान प्रतिनिधि फालेओमावेगा अमेरिकी कांग्रेस में अमेरिका सामोआ का प्रतिनिधित्व करते हैं और वह एशिया, प्रशांत और वैश्विक पर्यावरण की हाउस फॉरेन अफेयर्स सबकमेटी में डेमोक्रेटिक रैंकिंग सदस्य हैं। वह अमेरिकी कांग्रेस के एकमात्र सदस्य हैं, जो 113वीं कांग्रेस में गुजरात के मुख्यमंत्री के खुले समर्थन में सामने आए हैं।
फालेओमावेगा ने कहा, मोदी की दूरदृष्टि असामान्य है। उनका नेतृत्व असाधारण है। उन्होंने कहा, उनके असाधारण नेतृत्व के चलते गुजरात अब आर्थिक शक्ति है तथा फोर्ड और जनरल मोटर्स जैसी कंपनियां कारखाने लगा रही हैं। यह एक ऐसा कदम है जो अमेरिका-भारत व्यापार एवं निवेश को मजबूती प्रदान करने का वादा करता है। 

गुरुवार, 27 जून 2013

हटाई माता 'धारी देवी' की मूर्ति तो उत्तराखंड में हुआ 'महाविनाश'




http://aajtak.intoday.in

हटाई माता 'धारी देवी' की मूर्ति तो उत्तराखंड में हुआ 'महाविनाश'
राजू गुसाईं [Translated By: नमिता शुक्ला] |
सौजन्‍य: Mail Today | नई दिल्ली, 27 जून 2013
इसे चाहें तो अंधविश्वास कहें या महज एक संयोग! उत्तराखंड में हुई तबाही के लिए जहां लोग प्रशासन की लापरवाही को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं वहीं उत्तराखंड के गढ़वाल वासियों का मानना है कि माता धारी देवी के प्रकोप से ये महाविनाश हुआ.मां काली का रूप माने जाने वाली धारी देवी की प्रतिमा को 16 जून की शाम को उनके प्राचीन मंदिर से हटाई गई थी. उत्तराखंड के श्रीनगर में हाइडिल-पॉवर प्रोजेक्ट के लिए ऐसा किया गया था. प्रतिमा जैसे ही हटाई गई उसके कुछ घंटे बाद ही केदारनाथ में तबाही का मंजर आया और सैकड़ों लोग इस तबाही के मंजर में मारे गए.

विश्व हिंदू परिषद के अशोक सिंघल ने कहा, 'लोगों ने हाइड्रो पॉवर प्रोजेक्ट के खिलाफ प्रदर्शन किया था और धारी देवी की प्रतिमा को हटाए जाने का विरोध किया था. लेकिन इसके बावजूद 16 जून को धारी देवी की प्रतिमा को हटाया गया. धारी देवी के गुस्से से ही केदारनाथ और उत्तराखंड के अन्य इलाकों में तबाही मची. धारी देवी देश के नास्तिक लोगों को समझाना चाहती थीं कि हिमालय और यहां की नदियों को ना छुआ जाए.'
इस इलाके में धारी देवी की बहुत मान्यता है. लोगों की धारणा है कि धारी देवी की प्रतिमा में उनका चेहरा समय के साथ बदला है. एक लड़की से एक महिला और फिर एक वृद्ध महिला का चेहरा बना.

पौराणिक धारणा है कि एक बार भयंकर बाढ़ में पूरा मंदिर बह गया था लेकिन धारी देवी की प्रतिमा एक चट्टान से सटी धारो गांव में बची रह गई थी. गांववालों को धारी देवी की ईश्वरीय आवाज सुनाई दी थी कि उनकी प्रतिमा को वहीं स्थापित किया जाए. यही कारण है कि धारी देवी की प्रतिमा को उनके मंदिर से हटाए जाने का विरोध किया जा रहा था. यह मंदिर श्रीनगर से 10 किलोमीटर दूर पौड़ी गांव में है.

330 मेगावाट वाले अलखनंदा हाइड्रो पॉवर प्रोजेक्ट का काम अभी भी जारी है. लोगों के विरोध के चलते ही ये प्रोजेक्ट जो 2011 तक पूरा हो जाना चाहिए था अभी तक इस पर काम चल रहा है. जैसे ही धारी देवी की प्रतिमा को स्थानांतरित करने की बात शुरू हुई प्रोजेक्ट को लेकर लोगों का विरोध नए स्तर से शुरू हो गया. बीच का रास्ता निकालते हुए प्रोजेक्ट ने फैसला लिया कि पावर प्रोजेक्ट से दूर धारी देवी के मंदिर को स्थानांतरित किया जाएगा. धारी देवी की प्रतिमा को स्थानांतरित करने के लिए प्लेटफॉर्म बन चुका था लेकिन पॉवर प्रोजेक्ट कंपनी और मंदिर कमिटी के लिए उनकी मूर्ति को विस्थापित करना मुश्किल होता जा रहा था.

16 जून को जब मंदाकिनी नदी में बाढ़ आना शुरू हुई तो मंदिर कमिटी ने धारी देवी की प्रतिमा बचाने के लिए तुरंत एक्शन लिया. धारा देवी मंदिर कमिटी के पूर्व सचिव देवी प्रसाद पांडे के मुताबिक, 'शाम तक मंदिर में घुटने तक पानी भर गया था. ऐसी खबरें थीं कि रात तक बहुत तेज बारिश होने वाली है. तो धारा देवी की प्रतिमा को हटाने के अलावा कोई और रास्ता नहीं था. हमने शाम को 6:30 बजे प्रतिमा को स्थानांतरित किया था.'
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सुनो पूरी सच्चाई - १८८० में इस धारी देवी को हटाने का प्रयास हुआ था, तब भी पुरे केदारनाथ में भयंकर बाढ़ आ गई थी. उसके पश्चात धारी देवी को फिर किसीने ने हटाने का प्रयास नही किया. असल में धारी देवी और केदारनाथ दोनों की स्थापना तंत्र-शाष्त्र पर की गई है, जो पहाड़ो और नदियों की बाढ़ से इस क्षेत्र की रक्षा करती है. पढिये पूरी बात इस लेख में - Vedic energy science behind Dhari Devi explained - http://www.srath.com/jyotiṣa/mundane/vastu/kalis-anger/
http://srath.com



रविवार, 23 जून 2013

कांग्रेस और रुपये में गिरावट : मोदी


कांग्रेस और रुपये में एकसाथ गिरावट : मोदी
(23, Jun, 2013, Sunday
माधोपुर (पंजाब) )| गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कांग्रेस की खिल्ली उड़ाते हुए कहा कि कांग्रेस और रुपये में एकसाथ गिरावट हो रही है।

मोदी ने कहा, "इन दिनों, कांग्रेस और रुपये में गिरावट की प्रतिस्पर्धा चल रही है। हर रोज दोनों में प्रतिद्वंद्विता रहती है कि कौन ज्यादा गिर सकता है।" मोदी ने कांग्रेस पर आरोप लगाया, "देश नष्ट होता जा रहा है, लेकिन सरकार कुछ भी नहीं कर रही है।" गौरतलब है कि रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने सबसे निचले स्तर तक गिर गया है और इसकी कीमत लगभग 60 रुपये प्रति डॉलर पहुंच गई है। कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार पिछले तीन वर्षो से लगातार कई घोटालों के आरोपों से घिरी रही है। मोदी ने कहा कि संप्रग सरकार द्वारा अपनी उपलब्धियों को गिनाने के लिए शुरू किए गए लाखों-अरबों रुपयों वाले विज्ञापन भी पिछले कुछ दिनों से हटा लिए गए हैं।मोदी ने जोर देकर कहा कि उन्होंने इन विज्ञापन अभियानों पर सवालिया निशान उठाए थे।
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दो बॉस चला रहे हैं देश को: नरेंद्र मोदी
पठानकोट, एजेंसी 23-06-2013
एक तरह से वर्ष 2014 के चुनाव के लिए भाजपा के अभियान की शुरुआत करते हुए गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश में दो बॉस है और हम नहीं जानते कि इनमें वास्तविक कौन है। उनका इशारा कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की ओर था।
इस माह के प्रारंभ में भाजपा की प्रचार अभियान समिति के अध्यक्ष बनाए जाने के बाद अपनी पहली जनसभा को संबोधित करते हुए मोदी ने लोगों से कांग्रेस की अगुवाई वाली संप्रग सरकार से मुक्ति पाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि देश संप्रग को अब और सत्ता में बर्दाश्त नहीं कर सकता।
उन्होंने जम्मू कश्मीर पंजाब सीमा पर स्थित इस शहर में संकल्प रैली में कहा कि आपका भविष्य उसके हाथों में सुरक्षित नहीं है। हम अपने युवकों के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं कर सकते। इस संकल्प रैली का आयोजन जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 60 वीं पुण्यतिथि के अवसर यहां आयोजित की गयी थी।
एक ही तंत्र में दो प्रधान के खिलाफ मुखर्जी के नारे का हवाला देते हुए मोदी ने कहा कि आज भी बिल्कुल ऐसी ही स्थिति है। उन्होंने कहा कि देश में दो बॉस है और हम नहीं जानते कि इनमें वास्तविक कौन है। उन्होंने कहा कि इन दोनों से देश को मुक्त कराने का बिल्कुल ही हमारा सपना होना चाहिए।
मोदी ने कहा कि यह पहचानना कठिन हो गया कि कौन देश चला रहा है। उनका इशारा कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की ओर था। डॉलर के मुकाबले रूपए के तेजी से अवमूल्यन पर उन्होंने कहा कि कांग्रेस रूपए से प्रतिस्पर्धा कर रही है कि कौन ज्यादा गिर सकता है।
उन्होंने संप्रग सरकार पर उसकी कश्मीर नीति, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर हमला किया और कहा कि वह सभी मोर्चों पर विफल है। मोदी ने आज कश्मीरियों के जख्मों को भरने और राज्य के विकास के लिए युवाओं को राष्ट्रीय मुख्यधारा में लाने की जरूरत बतायी।
अपने आलोचकों की ओर से अक्सर विभाजनकारी व्यक्तित्व बताये जाने वाले मोदी ने अपने आप को ऐसा नेता बताने की कोशिश की जो लोगों को जोड़ता हो। उन्होंने कहा कि वह दलों को साथ लाने और दिलों को जोड़ने के लिए काम करेंगे।
मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का जिक्र करते हुए कहा कि अगर भाजपा सत्ता में आई तो उनके अधूरे कार्य को पूरा किया जायेगा।  उन्होंने ने कहा कि वाजपेयी ने कश्मीर का दिल प्यार, मोहब्बत और बातचीत के जरिये जीतने का प्रयास किया था़, अगर वह 2004 में सत्ता में आते तो वह अपनी कश्मीर नीति में सफल होते।
मोदी ने कहा कि कश्मीरी युवा विकास और प्रगति करना चाहता है और उन्हें राष्ट्रीय मुख्यधारा में लाने की जरूरत है। गुजरात के मुख्यमंत्री ने कहा कि कश्मीर घाटी के युवा विकास का हिस्सा बनना चाहते हैं। बंदूक खून बहा सकती है लेकिन यह किसी का भला नहीं कर सकती।
मोदी ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी ने कश्मीर मुद्दे के समाधान की दिशा में अहम प्रयास किया। यदि वर्ष 2004 में राजग की सरकार बनती, कश्मीर मुद्दे का हल हो जाता। कश्मीरी पंडितों को इंसाफ मिलता। जम्मू कश्मीर के युवकों को रोजगार मिलता और राज्य ने विकास का मुंह देखा होता।
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मोदी बोले, BJP दिलाएगी कांग्रेस के कुशासन से मुक्ति
माधोपुर, एजेंसी
23-06-2013
लोकसभा चुनाव में उनकी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) देश को कांग्रेस मुक्त शासन देने के प्रति वचनबद्ध है, ताकि लोगों को कांग्रेस के कुशासन से मुक्ति मिल सके। मोदी ने पंजाब तथा जम्मू-कश्मीर की सीमा पर पठानकोट के समीप के माधोपुर में चुनाव प्रचार का आगाज करते हुये आरएसएस के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस को समर्पित रैली को संबोधित करते हुये कहा कि देश की जनता भ्रष्टतम, घपलों तथा घोटालों की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार से मुक्ति चाहती है और भाजपा उन्हें कांग्रेस से मुक्ति दिलाएगी।
मोदी ने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने देश की एकता और अखंडता के लिये बलिदान दिया था, लेकिन विडंबना यह है कि कांग्रेस नीत केन्द्र सरकार किसी के बलिदान को न तो स्वीकार करती और न ही मान्यता देती। उन्होंने कहा कि आरएसएस संस्थापक के बलिदान को भुलाने का प्रयास किया गया तथा श्रीनगर जेल में उनकी रहस्यमयी परिस्थितियों में हुयी मृत्यु की जांच कराने की मांग तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने नहीं मानी थी।
उन्होंने कहा कि यदि बाबा भीमराव अंबेडकर, सरदार बल्लभ भाई पटेल और श्यामा प्रसाद मुखर्जी नेहरू सरकार में रहते तो देश की यह हालत न होती। देश को आज आंतरिक बाहरी ताकतों से खतरा है। बाहरी ताकतें देश को अस्थिर करने में लगी हैं। मोदी ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से सवालिया लहजे में कहा कि पंजाब के नागरिक सरबजीत सिंह को पाकिस्तान की जेल में मार डाला गया, केरल में भरतीय मछुआरों को इटली के जल सैनिकों ने मौत के घाट उतार दिया और भारतीय सैनिक का सिर पाक सैनिक काटकर ले गये और परूलिया में हथियार गिराने वाले विदेश में खुले घूम रहे हैं, लेकिन कांग्रेस सरकार चुप्पी साधे हुई है।
मोदी ने कांग्रेस पर प्रहार करते हुये कहा कि विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद पाक प्रधानमंत्री का जयपुर में मटन-बिरयानी से स्वागत करते हैं। उन्होंने कहा कि देश के लोग जाग जाओ और देश कांग्रेस के हाथों सुरक्षित नहीं और उसे अगले चुनाव में बाहर का रास्ता दिखाना होगा। कांग्रेस मुक्त सरकार का सपना अब हर नागरिक को देखना जरूरी है।
मोदी ने कहा कि कांग्रेस वोट बैंक की राजनीति करती आयी है और अरबों रुपये प्रचार अभियान में उड़ा रही है। कांग्रेस का एक विज्ञापन 'भारत निर्माण हक है मेरा' पर कटाक्ष करते हुये उन्होंने कहा कि अब 'भारत निर्माण शक है मेरा' इसके बाद यह विज्ञापन बंद कर दिया गया। कांग्रेस संप्रग के घटक दलों से आगे निकले की होड़ में है जिसकी तुलना डॉलर के मुकाबले रुपये के अवमूल्यन से करते हुये मोदी ने कहा कि एक दिन रुपया गिरता है तो कांग्रेस की साख गिरती है। भाजपा देश की राजनीति में नयी शुरुआत करने के लिये सभी वर्गों को एकजुट करेगी और अन्य दलों को भी अपने साथ लेगी।
उन्होंने जम्मू-कश्मीर के नौजवानों से देश की मुख्यधारा में शामिल होकर राष्ट्र तथा राज्य और अपने विकास में योगदान देने का आह्वान किया। कांग्रेस की गलत नीतियों के कारण देश विकास की दौड़ में वर्षो ंपिछड़ गया है। बेरोजगार युवकों की लंबी कतारें हर जगह दिखायी देती हैं, लेकिन रोजगार कहीं नहीं।
मोदी ने कहा कि उत्तराखंड में तबाह हुए केदारनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार का काम गुजरात करने को तैयार है। पूरा देश उत्तराखंड के साथ है। वह बाढ़ तथा भूस्खलन से प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण करने के बाद मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा से मिलकर आये हैं। मोदी ने बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित कुछ क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण कर स्थिति का जायजा भी लिया और हर संभव सहायता का आश्वासन दिया है।

शुक्रवार, 21 जून 2013

धारादेवी { माँ काली } मंदिर हटाने से रुष्ट देवी का प्रकोप : देवभूमी उत्तराखण्ड प्रलय






धारी देवी मूलत: काली मां  का ही स्वरूप हे और देवभूमि  यात्रा पर आये श्रधालुओं की रक्षा करती हें  । http://www.downtoearth.org.in 
धारी देवी मूलतः काली मां का ही स्वरूप हैं और उत्तराखंड के लोगों तथा देवभूमि की यात्रा पर आये श्रृद्धालुओं की रक्षा करती हें , यह सिद्धपीठ अलकनंदा नदी पर बन रही एक जल परियोजना की डूब में आ गया है, इसे बचानें के लिये कई वर्षों से बडा जन संर्घष चल रहा है। केन्द्र सरकार सुन नही रही है। इसे बचाने के लिये राष्ट्रपति महोदय और प्रधानमंत्री महोदय से भी भाजपा के वरिष्ठ नेता गण मिल चुके हैं। मगर एक नहीं सुनी गई और भारत सरकार के एक मंत्रालय ने रोक हटवा कर धारा देवी प्रतिमा को हटवा दिया । जिसके चलते इधर धारा देवी की प्रतिमा हटी और उधर उत्तराखंड प्रलय की चपेट में आ गया । देखने वाली बात यह है कि मां काली के इस प्रकोप में मात्र केदारनाथ का शिव मंदिर ही छोडा है। बांकी सब नष्ट हो गया ।
स्वाल यह है कि हिन्दू समाज के इस महत्वपूर्ण मंदिर के साथ इतनी बडी छेडछाड क्यों हुई ?

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धारी देवी पर संतों के तेवर तीखे May 11, 2013
हरिद्वार। धारी देवी मंदिर को बचाने के लिए संतों सहित विभिन्न संगठनों ने आवाज उठाई है। संतों ने ऐलान किया कि धारी देवी मंदिर को डूबने नहीं दिया जाएगा। अगर मंदिर को सरकार ने नहीं बचाया तो आंदोलन किया जाएगा।
गुरुवार को हुई संतों की बैठक में पूर्व गृह राज्य मंत्री स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती ने कहा कि धारी देवी उत्तराखंड की रक्षक है आज उसी पर संकट है। उन्होंने कहा कि मंदिर को बचाकर भी बिजली परियोजना पूरी की जा सकती है। केंद्र सरकार ने पिछले साल मंदिर को बचाने का आश्वासन दिया था। स्वयं प्रधानमंत्री ने भी धारी देवी मंदिर को न डूबने देने की बात कही थी। स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज ने कहा कि सरकार के आश्वासन के बाद भी ऐसी सूचनाएं मिल रही हैं कि सरकार 13 मई को बिजली परियोजनाओं के नाम पर धारी देवी मंदिर का अस्तित्व मिटाने का काम करने वाली है। उन्होंने कहा कि आस्था व विकास में संतुलन कायम करके भी विकास किया जा सकता है। महामंडलेश्वर कैलाशानंद ब्रह्मचारी ने कहा कि बिजली परियोजना की डीपीआर में धारी देवी डूब क्षेत्र में नहीं था। अब सरकार उसे डुबोने जा रही है। संतों ने कहा कि अगर तेरह मई को धारी देवी मंदिर को डुबाया तो उसका तीखा विरोध किया जाएगा। अखंड बोध गंगा आश्रम ने भी धारी देवी मंदिर को डूबने देने का विरोध किया है। साध्वी गंगादास, साध्वी सुशीला उदासीन, स्वामी वेदांतानंद, स्वामी योगेश्वराश्रम, स्वामी विज्ञानानंद, ब्रह्मचारिणी समर्पिता ने कहा कि निजी स्वार्थो के लिए मंदिर को नहीं डूबने दिया जाएगा। पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती की ओर से भी बयान जारी किया गया है। उन्होंने कहा कि विकास के नाम पर केंद्र व प्रदेश सरकार बांध, नहर व सुरंग में गंगा को कैद करने का प्रयास कर रही है। सरकार के फैसले देश के लिए घातक हैं। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक और सामाजिक धरातल पर इस तरह के फैसले गलत हैं।
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धारी देवी मंदिर की अपलिफ्टिंग का रास्ता साफ
Sat, 18 May 2013
जागरण संवाददाता, श्रीनगर गढ़वाल: श्रीनगर जल विद्युत परियोजना के तहत धारी देवी मंदिर अपलिफ्टिंग मामले में नया मोड़ आ गया है। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद केंद्रीय वन पर्यावरण मंत्रालय सात दिन पहले मंदिर के अपलिफ्टिंग पर लगाई रोक हटाने पर तैयार हो गया।
बीती 13 मई को सिद्धपीठ धारी देवी मंदिर का अपलिफ्टिंग प्रस्तावित था, लेकिन इससे पहले ही केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने 10 मई को अपलिफ्टिंग के साथ ही वहां चल रहे तमाम निर्माण कार्यो पर भी रोक लगा दी थी। इस बाबत मंत्रालय के स्तर पर श्रीनगर जलविद्युत परियोजना की निर्माणदायी कंपनी को लिखित आदेश जारी भी कर दिए गए थे। दरअसल, श्रीनगर जल विद्युत परियोजना के निर्माण का रास्ता साफ करने के लिए धारी मंदिर को अफलिफ्ट किए जाने की योजना है।
पर्यावरण मंत्रालय के फैसले के खिलाफ निर्माणदायी कंपनी अलकनंदा हाइड्रो पावर कारपोरेशन लिमिटेड (एएचपीसी) ने उसी दिन यानि 10 मई को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दी थी।
गुरुवार को इस मामले में सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति केएस राधाकृष्ण और दीपक मिश्रा की दो सदस्यीय खंडपीठ ने पर्यावरण मंत्रालय से मंदिर के अपलिफ्टिंग पर रोक लगाने का कारण पूछा। केंद्र सरकार की तरफ से कानून व्यवस्था बिगड़ने की आशंका को इसका कारण बताया गया। दोनों पक्षों के तर्क सुनने के बाद शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार को रोक वापस लेने अन्यथा कोर्ट से रोक निरस्त करने की बात कही। इस पर पर्यावरण मंत्रालय रोक हटाने पर तैयार हो गया। गौरतलब है कि बांध का 90 फीसद कार्य पूरा हो चुका है और क्षेत्रीय लोग बांध का खुलकर समर्थन कर रहे हैं।
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किसी भी कीमत पर बचाएं धारी देवी मंदिर: उमा
Fri, 03 May 2013
लखनऊ| भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और गंगा अभियान की संयोजक उमा भारती ने शुक्रवार को कहा कि उत्तराखंड की रक्षक देवी 'धारी देवी' की मंदिर को हर हालत में बचाया जाना चाहिए। उमा भारती ने शुक्रवार को जारी अपने बयान में धारी देवी मंदिर बचाने की मांग की।
उमा ने कहा कि धारी देवी मंदिर को बचाने का आश्वासन प्रधानमंत्री ने भी दिया था। इस सिलसिले में पिछले साल 7 जुलाई को वरिष्ठ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी के नेतृत्व में सुषमा स्वराज, अरुण जेटली और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी के साथ वह खुद प्रधानमंत्री से मिली थीं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने आश्वासन दिया था कि श्रीनगर बिजली परियोजना के लिए धारी देवी मंदिर से छेड़छाड़ नहीं की जाएगी। हाल में सूचना मिली है कि उत्तराखंड सरकार आगामी 13 मई को परियोजना के नाम पर धारी देवी मंदिर को तोड़ने जा रही है। उमा ने कहा कि प्रधानमंत्री के आश्वासनों और अपेक्षाओं के अनुरूप धारी देवी मंदिर की हर सूरत में रक्षा की जानी चाहिए।
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गंगा नदी को राष्ट्रीय धरोहर घोषित किये जाने की मांग उठी
19 Jun 2013
उमा भारती ने कहा कि उत्तराखंड की रक्षक धारी देवी मंदिर को नष्ट करने का प्रयास करने का दुष्परिणाम देखने को मिला है. आज आयोजित गंगा शिखर सम्मेलन में पारित प्रस्ताव में कहा गया कि गंगा नदी को बिना समय गंवाये राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया जाए। प्रस्ताव के अनुसार, उत्तराखंड में आए जल प्रलय की चेतावनी को समझने और इससे सबक लेने की जरूरत है.
उमा भारती ने सम्मेलन के समापन भाषण में कहा कि उत्तराखंड की रक्षक धारी देवी मंदिर को नष्ट करने का प्रयास करने और गंगा के प्रवाह मार्ग को बाधित करने का दुष्परिणाम हमें देखने को मिला है. उत्तराखंड में इस दुखद घड़ी में हम प्राण प्रण से लोगों के साथ हैं.
गौरतलब है कि उत्तराखंड में धारी देवी मंदिर की सुरक्षा को लेकर उमा भारती ने पिछले वर्ष प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखा था.
गंगा में बढ़ते प्रदूषण और उसकी जलधारा के प्रवाह में बाधा से चिंतित धर्मगुरूओं, चिंतकों एवं नेताओं ने गंगा नदी की पवित्रता को बनाये रखने के लिए मन, वचन और कर्म के साथ प्रतिबद्धतापूर्वक आगे बढ़ने और समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी निभाने पर जोर दिया है.
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धारी देवी मंदिर परिसर में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात
जागरण – मंगल., २८ मई २०१३
श्रीनगर गढ़वाल: धारी देवी मंदिर परिसर में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। मंदिर अपलिफ्टिंग से सम्बन्धित कार्य में कोई व्यवधान नहीं पहुंचे, इसका जिम्मा अतिरिक्त पुलिस बल पर रहेगा। श्रीनगर जलविद्युत परियोजना की निर्माणदायी कंपनी एएचपीसी का कहना था कि मंदिर अपलिफ्टिंग से सम्बन्धित कार्य बार-बार रुकवा दिया जाता है जिससे निर्धारित समय में यह कार्य पूर्ण होने में कठिनाई हो रही है। प्रशासन ने धारी देवी मंदिर परिसर में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करने का निर्णय लिया। कोतवाल अनिल जोशी ने बताया कि एक एसआइ, दो हेड कांस्टेबल और दस सिपाहियों की यह सशस्त्र टुकड़ी 24 घंटे धारी देवी मंदिर परिसर में तैनात रहेगी। कलियासौड़ पुलिस चौकी के अतिरिक्त यह पुलिस बल है। उल्लेखनीय है कि धारी देवी मंदिर अपलिफ्टिंग निर्माण कार्य रोक देने सम्बन्धी अपना आदेश केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के विगत दिवस वापस ले लिए जाने के बाद धारी देवी मंदिर अपलिफ्टिंग सम्बन्धी कार्य कंपनी ने पुन: शुरू कर दिया है। कंपनी का प्रयास है कि आगामी बरसात का सीजन शुरू होने से पूर्व मंदिर अपलिफ्टिंग का कार्य पूर्ण हो जाए।
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प्रधानमंत्री से धारी देवी मंदिर बचाने की अपील
(07/07/2012,8:23 pm)
नई दिल्ली, 7 जुलाई । उत्तराखंड का धारी देवी मंदिर एक विद्युत परियोजना के कारण डूबने के कगार पर है। इस मंदिर को बचाने के मुद्दे को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का एक प्रतिनिधिमंडल पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी के नेतृत्व में शनिवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मिला और उनसे हस्तक्षेप की मांग की। प्रतिनिधिमंडल में भाजपा नेता एवं उत्तर प्रदेश के चरखारी से विधायक उमा भारती भी शामिल थीं। उन्होंने कहा, ‘हम उत्तराखंड में विकास चाहते हैं लेकिन यह भी चाहते हैं कि गंगा को बचाया जाना चाहिए और धारी देवी मंदिर की रक्षा की जानी चाहिए।’
उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘प्रधानमंत्री ने हमें आश्वस्त किया है कि वह इस मामले पर विचार करेंगे।’ प्रतिनिधिमंडल में पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, सुषमा स्वराज, अरुण जेटली एवं उत्तराखंड के तीन पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी, भगत सिंह कोश्यारी और रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ भी शामिल थे। 
भाजपा नेताओं ने कहा कि गंगा में बढ़ते प्रदूषण के मुद्दे को उजागर करने के लिए उमा भारती गंगा सागर से गंगोत्री तक की ‘यात्रा’ करेंगी।
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देहरादून। उत्तराखण्ड के श्रीनगर गढवाल में जलविद्युत परियोजना के कारण यहां अलकनंदा नदी के किनारे स्थित प्राचीन धारी देवी के मंदिर का अस्तित्व खतरे में आ गया है। हालांकि प्रदेश के मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा है कि धार्मिक मान्यता के प्रतीक इस मंदिर को डूबने नहीं दिया जाएगा। आस्था की लड़ाई अलकनंदा नदी के किनारे बने इस प्राचीन मंदिर के अस्तित्व को बचाने की लड़ाई लड़ने के लिए सोमवार को पूर्व मंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता मोहन सिंह गांववासी के नेतृत्व में हजारों साधु-संतों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं पर्यावरणविदों ने मंदिर स्थल पर धरना दिया। आंदोलनरत लोगों का कहना है यह आस्था का विषय है और आंदोलन साधु समाज का है। आश्वासन मोहन सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री ने उन्हें फोन पर बताया कि वे इस मसले पर उच्चस्तरीय जांच कमेटी बनाएंगे। साथ ही वो यह भी कहते हैं मंदिर को डूबने से बचाने के लिए वह हर लड़ाई लड़ने को तैयार हैं। उनकी मांग है कि नदी के जलस्तर को धारी देवी मंदिर स्थल से दस मीटर नीचे लाया जाए। इससे पूर्व एक अगस्त को पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वामी चिन्मयानंद और प्रमुख अर्थशास्त्री डा. भरत झुनझुनवाला भी इस मुद्दे पर धरना दे चुके हैं।

बुधवार, 19 जून 2013

सुधीन्द्र कुलकर्णी: वामपंथी खुराफात कर गया भाजपा में


सुधीन्द्र कुलकर्णी: वामपंथी खुराफात कर गया भाजपा में

सभी राजनैतिक जानकारों को पता होगा कि राजग सरकार में भाजपा में घुसा मार्किस्ट आईडियोलोजी के वामपंथी सुधीन्द्र कुलकर्णी ( कालम लेखक ) बडी पहुंच वाला था। अच्छे - अच्छे मंत्रीयों की नहीं चलती थी और इनके इशारों पर ...! यह तब पुनः प्रसिद्ध हुये जब भाजपा के एक बडे नेता जिन्ना की मजार पर फूल चढ़ाने पहुचे और देश विभाजक जिन्ना को धर्मनिरपक्ष बता आये। इसके बाद यूपीए सरकार ने नोट फोर वोट के मामले में इन्हे मास्टर माइंड ठहराया। इस व्यक्ति की सलाहों ने भाजपा को अंदर और बाहर बहुत नुकसान पहुंचाया है

Sudheendra Kulkarni
From Wikipedia, the free encyclopedia
Sudheendra Kulkarni is an Indian politician and columnist.
Kulkarni was educated at Jadhavji Anandji High School in Athani, a town in Belgaum district, Karnataka, India. He then attended the Indian Institute of Technology Bombay.
A former member of the Communist Party of India (Marxist), Kulkarni joined the Bharatiya Janata Party (BJP) in 1996. Of this ideological switch he said, "People like me were living in an illusory land. I realised very late in my life that the Marxist ideology is not suitable in India - in fact, I would say it is unsuitable for any corner of the world."
Kulkarni worked as executive editor for[when?] Blitz, a Mumbai-based tabloid format weekly that was edited and owned by Russi Karanjia. According to Kulkarni, Karanjia was sympathetic to the communist movement in India but became disillusioned with it and its anti-Hindu secularism. He became a strong sympathiser of the BJP and the Ayodhya movement, which led to Kulkarni being appointed in place of P. Sainath as deputy editor. Kulkarni was tasked with having Blitz reflect Karanjia's new-found sympathies.Kulkarni then transformed Blitz from a left-wing newspaper into a BJP-oriented publication.
As a member of the BJP, he was associated with the India Shining campaign and rode on the inaugural Delhi–Lahore Bus.He helped former Indian Prime Minister Atal Bihari Vajpayee write his speeches and in 2008 was acting as a strategist for Lal Krishna Advani, who had influenced his rise within the party.
Kulkarni resigned from the BJP in 2009. The electoral defeat suffered by the party, led by Advani, had effectively ended his role with the party and he had also become disenchanted with the influence exerted by the Rashtriya Swayamsevak Sangh on party decision-making. In January 2012, he was reported to be once more working full-time for the BJP, on this occasion as an advisor to its president, Nitin Gadkari. He had been working for the Observer Research Foundation, a think tank, prior to this.
Cash for votes scandal [edit]

In 2008, a sting operation was carried out that involved Kulkarni and another BJP activist. Later televised and known as the "cash-for-votes scandal", the operation purported to show a bribe of one crore (10 million) rupees being offered to three BJP MPs on behalf of the Indian National Congress-led United Progressive Alliance government. The alleged bribes were intended to obtain the support of the MPs in the 2008 Lok Sabha Vote of Confidence. Subsequently, both the Kishore Chandra Deo committee — a parliamentary panel — and the police investigated the arrangements and questioned various participants, including Kulkarni. In 2011, Kulkarni was remanded in judicial custody for a period and In November of that year was released on bail.

इस्लामिक क़ानून चाहते है उन्हे ऑस्ट्रेलिया से बाहर जाने के लिए कहा


ऑस्ट्रेलियन प्राइम मिनिस्टर - जूलीया गिलर्ड
को दुनिया की रानी बना देना चाहिए!!


- ऑस्ट्रेलिया प्राइम मिनिस्टर
जूलीया गिलर्ड
सीखो भारत के नेताओ ..
कुछ सीखो इनसे....
" मित्रो एक बार जरुर पढ़िए ऑस्ट्रेलियन प्रधानमंत्री का देश के नाम सन्देश " .... ये पढ़ने के बाद शायद भारतीय मुस्लिमो को कुछ अकल आये , शायद ???????

इस महिला प्राइम मिनिस्टर ने जो कहा है, उस बात को कहने के लिए बड़ा साहस और आत्मविश्वास चाहिए! पूरी दुनिया के सब देशो मे ऐसे ही लीडर होने चाहिए! वो कहती है : "मुस्लिम, जो इस्लामिक शरिया क़ानून चाहते है उन्हे बुधवार तक ऑस्ट्रेलिया से बाहर जाने के लिए कहा हे क्यूकी ऑस्ट्रेलिया देश के कट्टर मुसलमानो को आतंकवादी समझता है.

ऑस्ट्रेलिया के हर एक मस्जिद की जाँच होगी और मुस्लिम इस जाँच मे हमे सहयोग दे जो बाहर से उनके देश मे आए है उन्हे ऑस्ट्रेलिया मे रहने के लिए अपने आप को बदलना होगा और ना की ऑस्ट्रेलियन लोगो को... अगर नही होता है तो मुसलमान मुल्क छोड़ सकते है कुछ ऑस्ट्रेलियन चिंतित है ये सोच के की क्या हम किसी धर्म के अपमान तो नही कर रहे.. पर मई ऑस्ट्रेलियन लोगो को विश्वास देती हू की हम जो भी कर रहे है वो सिर्फ़ ऑस्ट्रेलिया के लोगो के हित मे कर रहे है हम यहा इंग्लीश बोलते है ना की अरब इसलिए अगर इस देश मे रहना होगा तो आपको इंग्लीश सीखनी ही होगी ऑस्ट्रेलिया मे हम JESUS को भगवान मानते है, हम भगवान को मानते है! हम सिर्फ़ हमारे CHRISTIAN RELIGION को मानते है और किसी धर्म को नाही इसका यह मतलब नही की हम संप्रदायिक है ! इसलिए हुमारे यहा भगवान की तस्वीर और धर्म ग्रंथ सब जगह होते है!

अगर आपको इस बात से आपत्ति है तो दुनिया मे आप कही भी जा सकता है ऑस्ट्रेलिया छोड़ के ऑस्ट्रेलिया हमारा मुल्क है, हमारी धरती है, और हमारी सभ्यता है हम आपके धर्म को मानते नही पर आपकी भावना को मानते है! इसलिए अगर आपको नमाज़ पढ़नी है तो ध्वनि प्रदूषण नाकरे हमारे ऑफीस, स्कूल या सार्वजनिक जगहो मे नमाज़ बिल्कुल ना पढ़े! अपने घरो मे या मस्जिद मे शांति से नमाज़ पढ़े जिस से हमे कोई तकलीफ़ ना हो! अगर आपको हमारे ध्वज से, राष्ट्रा गीत से हमारे धर्म से या फिर हमारे रहण सहन से कोई भी शिकायत है तो आप अभी इसी वक़्त ऑस्ट्रेलिया छोड़ दे"

ऑस्ट्रेलिया P.M. जूलीया गिलर्ड सीखो भारत के नेताओ इनसे कुछ....



सही उम्र में यौन संबंध बनाने वाले बन जाते हैं पति-पत्नी : मद्रास उच्च न्यायालय




सही उम्र में यौन संबंध बनाने वाले बन जाते हैं पति-पत्नी : अदालत
Tuesday, June 18, 2013
चेन्नई : मद्रास उच्च न्यायालय ने कहा है कि अगर कोई सही कानूनी उम्र को पूरा करने वाला युगल यौन संबंध बनाता है तब उसे वैध विवाह माना जायेगा और उन्हें पति-पत्नी घोषित किया जा सकता है।
उच्च न्यायालय में न्यायमूर्ति सी एस करनान ने अपने आदेश में कहा, ‘अगर कोई युगल यौन आकांक्षा को पूरा करना तय करता है, तब कानून कुछ अपवादों को छोड़कर उसके बाद उत्पन्न होने वाले सभी परिणामों के अनुरूप पूर तरह से प्रतिबद्ध होता है।’
उन्होंने कहा कि मंगलसूत्र, वरमाला, अंगुठी आदि पहनने जैसी वैवाहिक औपचारिकताएं केवल समाज की संतुष्टि के लिए होती हैं।
कोई भी पक्ष यौन संबंध के बारे में दस्तावेजी सबूत पेश करके वैवाहिक संबंध का दर्जा प्राप्त करने के लिए परिवार अदालत से सम्पर्क कर सकता है।
न्यायाधीश ने कहा कि एक बार ऐसी घोषणा हो जाने के बाद युगल किसी भी सरकारी रिकार्ड में पति पत्नी के रूप में स्थापित हो सकते हैं। उच्च न्यायालय ने कोयंबतूर के एक गुजाराभत्ता संबंधी मामले की सुनवाई करते हुए यह व्यवस्था दी। (एजेंसी)

मंगलवार, 18 जून 2013

संघ के वरिष्ठ प्रचारक डा.अमर सिंह का हृदयाघात से निधन


वाराणसी, 18 जून (विसंके.)। पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक एवं वर्तमान में क्षेत्र कार्यकारिणी के सदस्य डा.अमर सिंह का पार्थिव शरीर मंगलवार को मर्णिकाघाट पर पंचतत्व में विलिन हो गया। मुखाग्नि उनके भतीजे अजीत सिंह ने दी। वे अनेक वर्षो से हृदय की बीमारी से पीडि़त थे। सोमवार को रात्रि 9.05 बजे अचानक दर्द के बाद, हृदयाघात से निधन हो  गया । वे लगभग 75 वर्ष के थे। अचानक अपने प्रचारक डा. अमर सिंह के स्वर्गवासी हो जाने से पूरा संघ परिवार शोकाकुल है।
 डा. अमर सिंह महान कर्मयोगी, ध्येयनिष्ठ व सौम्य व्यक्तित्व के धनी थे। उनके व्यक्तित्व से युवा, किशोर, तरुण व प्रौढ़ हर उम्र के स्वयंसेवक प्रभावित होते थे, उनका जीवन बड़ा ही सहज, सरल व विनोदप्रिय रहा। वे अपने चुटुकिले व हास्यभाव से गमगीन माहौल को भी सहज बना देते थे। उनके इस हास्य व्यवहार से ही युवा पीढ़ी उनसे ज्यादा प्रभावित थी। उनके अचानक निधन से संघ को अपूरणीय क्षति हुयी है।
  श्री सिंह 1969 में दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से भौतिकी में पी-एच.डी करने के बाद अपना पूरा जीवन मां भारती की सेवा के लिए समर्पित कर दिया और सन् 1970 में गोरखपुर से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक निकल गये। वे मुलतः सुलतानपुर के सिंहौली गांव के रहने वाले थे। अपने चार भाइयों में वे सबसे बड़े थे तथा चार बहिनें भी थी। उनकी प्रारम्भिक शिक्षा गांव के प्राथमिक विद्यालय में होने के उपरान्त उच्च शिक्षा के लिए जौनपुर चले गये और तिलकधारी डिग्री काॅलेज से बी.एससी किया, उसके उपरान्त परास्नातक के लिए गोरखपुर विश्वविद्यालय चले गये और वहीं से परास्नातक व पी-एच.डी. करने के बाद संघ के प्रचारक निकले। वे संघ के महानगर, विभाग व सम्भाग प्रचारक के बाद प्रान्त सम्पर्क प्रमुख रहे। सन् 2000 में वे संघ के पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के प्रचारक प्रमुख बनेे। वे कुछ वर्षो तक विद्याभारती में भी संगठन मंत्री रहे।
     मई-जून माह में लगे संघ के प्रशिक्षण वर्ग में उन्होंने उन्नाव, बस्ती, सुलतानपुर, प्रयाग व फतेहपुर में अपने बौद्धिक से स्वयंसेवकों का मार्गदर्शन भी किया। वे हृदय की बीमारी के बावजूद संघ कार्य के लिए निरन्तर गतिशील रहे।
    उनके अंतिम संस्कार में स्व0 श्री सिंह के भाई इन्द्रसेन सिंह, डा0 शिवप्रताप सिंह व राजमणी सिंह व अन्य परिवार के लोग उपस्थित रहे। प्रमुख रुप से क्षेत्र प्रचारक शिवनारायण, क्षेत्र प्रचारक प्रमुख अशोक उपाध्याय, काशी प्रान्त के प्रचारक श्री अभय कुमार, गोरक्ष प्रान्त के प्रान्त प्रचारक श्री अनिल जी, क्षेत्र बौद्धिक प्रमुख श्री मिथीलेश जी, समग्र ग्राम विकास प्रमुख चन्द्रमोहन जी, विभाग प्रचारक रत्नाकर जी, सुनील जी, प्रयाग विभाग प्रचारक मनोज जी, विधायक श्यामदेव राय चैधरी, रविन्द्र जायसवाल, श्रीमती ज्योत्सना श्रीवास्तव, महापौर रामगोपाल मोहले, डा0 दीनानाथ सिंह, मुकेश त्यागी, विभाग कार्यवाह दीनदयाल, डा0 सुखदेव, बीएमएस के संगठन मंत्री अनुपम, समवैचारिक संगठनों के पदाधिकारी व कार्यकर्ताओं समेत सैकड़ो स्वयंसेवक उपस्थित रहे।

भाजपा और मीडिया का नकारात्मक दृष्टिकोण


भाजपा, गोवा और मीडिया

पिछले सप्ताह सभी खबरिया चैनलों और अखबारों पर भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की गोवा बैठक छायी रही। पहले बैठक की तैयारी का समाचार, फिर बैठक में आडवाणी जैसे वरिष्ठ नेता और उनके अतिरिक्त यशवंत सिन्हा, जसवंत सिंह, शत्रुघ्न सिन्हा और उमा भारती जैसे नेताओं की अनुपस्थिति का समाचार, बैठक प्रारंभ होने पर सुषमा स्वराज के तीन घंटे लेट पहुंचने और कार्यक्रम स्थल से काफी दूर एक होटल में ठहरने का समाचार, फिर प्रश्न कि क्या आडवाणी की अनुपस्थिति में यह बैठक गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी का आगामी लोकसभा व विधानसभा चुनावों के प्रचार अभियान समिति के अध्यक्ष पद पर अभिषेक कर पायेगी? यदि अभिषेक हुआ तो भाजपा की कितनी हानि होगी? नरेन्द्र मोदी का व्यक्तित्व कितना विभाजनकारी है? क्यों भाजपा नरेन्द्र मोदी के लिए अपने संस्थापक सदस्य आडवाणी की भावनाओं की उपेक्षा कर रही है? क्यों वह सुषमा स्वराज के इस आग्रह को अनसुना कर रही है कि आडवाणी जी की अनुपस्थिति में कोई निर्णय न लिया जाए?

सिर्फ नकारात्मक दृष्टिकोण

किन्तु जब नरेन्द्र मोदी का अभिषेक हो ही गया और उस निर्णय से पूरे अधिवेशन में उत्साह और हर्ष की लहर दौड़ गई, उसके विरोध में कोई स्वर सुनायी नहीं पड़ा, जिन्हें उस निर्णय के विरुद्ध बताया जा रहा था वे भी मंच पर उपस्थित रहकर उस निर्णय का समर्थन करते दिखायी दिये, तो भी टेलीविजन स्क्रीन पर बार-बार उनके चेहरे दिखाकर कहा गया कि उनके मन की असहमति उनके गुमसुम और उदास चेहरों पर साफ झलक रही है। इसके बाद आया कार्यकर्ताओं को सम्बोधित करने का सत्र। इस सत्र में अरुण जेटली का बहुत ही प्रभावी व सकारात्मक भाषण हुआ। अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने नरेन्द्र मोदी से पहले बोलने की पहल की और राष्ट्रीय कार्यकारिणी के निर्णय की पुष्टि करते हुए कहा कि 'लोकतंत्र में लोकप्रिय नेता ही नेता होता है।' बैठक के इस उत्साहपूर्ण सकारात्मक पक्ष की गहराईयों में प्रवेश करने की बजाय सभी चैनल मंच पर लगे एक पोस्टर में अटल और आडवाणी के चेहरों की अनुपस्थिति का बढ़ा-चढ़ा कर वर्णन करने लगे कि जनसंघ और भाजपा के संस्थापक चेहरे नदारद हैं। जिन आडवाणी ने भाजपा को लोकसभा में 2 से 89 सीटों तक पहुंचाया, जिन्होंने भाजपा को 6 वर्ष तक सत्ता में रहने की स्थिति में पहुंचाया, उन आडवाणी को भाजपा ने पूरी तरह भुला दिया। तभी किसी ने 'कैमरामैनों' का ध्यान अटल और आडवाणी के दो आदमकद 'कटआउटों' की ओर खींचा तो बेचारे सकपका गये और शर्मा-शर्मी में एकाध बार उन्हें भी दिखाने लगे। खबरिया चैनलों को सबसे अधिक रस आया इस बात में कि सुषमा स्वराज देर से पहुंचीं और कार्यकर्ताओं का सम्बोधन सत्र आरंभ होने के पहले ही दिल्ली उड़ गयीं। तीन मुख्यमंत्रियों- शिवराज सिंह, रमन सिंह व मनोहर परर्ीकर के द्वारा नरेन्द्र मोदी का अभिनंदन और समर्थन उन्हें इतना महत्वपूर्ण नहीं लगा।

अच्छा क्यों नहीं देखते?

इस अधिवेशन के समय गोवा के युवा मुख्यमंत्री मनोहर परर्ीकर का हंसमुख चेहरा, उनकी सादगी और निरंहकरिता मीडिया के लिए आकर्षण और चर्चा का विषय नहीं बनी। वे विमानतल पर प्रतिनिधियों के स्वागत से लेकर पाण्डाल और भोजन की व्यवस्था तक सब जगह दिखायी देते थे। उसी हंसमुख चेहरे के साथ, बिना किसी अंगरक्षक या सहायक को साथ लिये, अपनी स्थायी विनम्रता के साथ। किंतु उनके दृढ़ संकल्पी व्यक्तित्व का आभास अधिवेशन प्रारंभ होने के पहले ही मिल गया जब उन्होंने पत्रकारों के सामने पार्टी और राष्ट्र के हित में नरेन्द्र मोदी को ही चुनाव अभियान समिति की कमान सौंपने के अपने मनोभाव को प्रगट कर दिया।

मनोहर परर्ीकर के इस अनुकरणीय पहल और उदाहरण को अपने दर्शकों के सामने लाने की बजाय टीवी चैनलों ने अस्वस्थ आडवाणी को 'शरशय्या पर लेटे भीष्म पितामह' के रूप में दिखाना उचित समझा। उनके ब्लाग पर भीष्म पितामह, हिटलर व मुसोलिनी के नामोल्लेख के चटखारे लेकर अजीबोगरीब व्याख्याएं कर रहे थे। अगले दिन आडवाणी जी के त्यागपत्र ने तो उन्हें स्वर्ण अवसर दे दिया। राजनाथ सिंह के नाम आडवाणी जी के पत्र को बार-बार 'स्क्रीन' पर दिखाया गया। सोनिया पार्टी के ढिंढोरचियों ने उस पत्र को अपना चुनाव पोस्टर बनाने का एलान कर दिया। भाजपा पर व्यंग्य वाण कसने शुरू कर दिये। राजीव शुक्ला, रेणुका चौधरी, राशिद अल्वी, शकील अहमद एक से एक चुने हुए व्यंग्य वाण चलाने लगे। सभी चैनलों पर बहस शुरू हो गयी, तथाकथित भाजपा विशेषज्ञों ने उस त्यागपत्र के अनेक अर्थ लगाने शुरू कर दिये। कहा गया कि आडवाणी ने भाजपा पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 'रिमोट कंट्रोल' के विरुद्ध बगावत का बिगुल बजा दिया है। वे भाजपा पर संघ के 'माइक्रो मैनेजमेंट' से दु:खी थे, परेशान थे। संघ ने उन्हें 2006 में अध्यक्ष पद से त्यागपत्र देने को मजबूर किया था। अब अपने संस्थापक के बिना भाजपा अनाथ हो गयी है। आडवाणी के जाते ही राजग बिखर जाएगा। पर शिवसेना और अकाली दल ने इसे भाजपा का आंतरिक मामला बताया, नरेन्द्र मोदी के नये दायित्व का स्वागत किया। भाजपा प्रवक्ताओं ने आडवाणी जी के प्रति पूरा सम्मान दिखाया, उनके त्यागपत्र पर चिंता प्रगट की, उनको मनाने की पूरी कोशिश की। उनको मनाने के लिए उनके घर पर भाजपा नेताओं का तांता लग गया। भाजपा के संसदीय बोर्ड ने बैठक करके आडवाणी जी के त्यागपत्र को अस्वीकार कर दिया। पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह पहले ही उसे अस्वीकार कर चुके थे। भाजपा नेतृत्व पूरी तरह आडवाणी जी की वरिष्ठता को नमन कर रहा था।

अफवाहों के निहितार्थ

अब भी मीडिया में तरह-तरह की अफवाहें घूम रही हैं। इसमें सबसे रोचक प्रकरण सुषमा स्वराज का था। आडवाणी जी के घर जाते समय कार में बैठे-बैठे उन्होंने कहा, 'आज सायं 4.45 पर उनसे मेरी भेंट का समय तय हुआ था। पर अचानक उनका त्यागपत्र आ गया। मैं उनसे मिलने जा रही हूं, सब ठीक हो जाएगा, आप विश्वास करें, सब ठीक हो जाएगा।' कुछ लोगों ने उनके इस कथन के अर्थ लगाने शुरू कर दिये। क्या सुषमा स्वराज सचमुच अपने को प्रधानमंत्री पद का सहज दावेदार मान चुकी थीं? क्या वे नरेन्द्र मोदी को अपनी राह का रोड़ा समझने लगी थीं? क्या उन्होंने आडवाणी जी को अपनी नरेन्द्र मोदी विरोधी रणनीति का हथियार बनाया? क्या उन्होंने ही शिवराज सिंह को उनके प्रतिद्वंद्वी के रूप में खड़ा करने की बिसात बिछायी, जिसमें शिवराज सिंह नहीं फंसे? क्या उन्होंने ही नरेन्द्र मोदी को रास्ते से हटाने के लिए गडकरी को विधानसभा चुनाव अभियान समिति का अध्यक्ष बनाने के जाल बिछाये, जिसमें गडकरी नहीं फंसे? क्या उनके कहने पर आडवाणी जी गोवा नहीं गये, ताकि सुषमा स्वराज उनकी अनुपस्थिति को आधार बनाकर मोदी के नये दायित्व पर विराम लगाया जा सके? परंतु जब वहां अपने को अकेला पाया और उस घोषणा के समय उनका बुझा हुआ चेहरा टीवी स्क्रीनों पर दिखायी पड़ा, तो वे पहले ही दिल्ली चली आयीं। क्या उनकी प्रेरणा से ही त्यागपत्र का अध्याय प्रारंभ हुआ? किन्तु जब वह भी खाली चला गया तो आडवाणी जी को भाजपा में बनाये रखने का रास्ता खोजना शुरू हो गया। सबसे विचित्र यह हुआ कि जिस संघ के नियंत्रण के विरुद्ध आडवाणी जी का विद्रोह बताया जा रहा था, उसी संघ के सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत से टेलीफोन पर बात करके आडवाणी जी ने अपना त्यागपत्र वापस लिया। अर्थात मीडिया के लाल बुझक्कड़ चक्कर में पड़ गये कि आडवाणी ने संघ के 'रिमोट कंट्रोल' का विरोध करते-करते स्वयं संघ के प्रति समर्पण कर दिया।

नरेन्द्र मोदी ही क्यों?

वस्तुत: इस प्रकरण को लेकर चैनलों और अखबारों में जितनी बहस हुई उससे यह साफ हो गया कि अधिकांश पत्रकार न तो यह समझ पाये कि नरेन्द्र मोदी के पक्ष में पूरे भारत में समर्थन की लहर का कारण क्या है। वे इस लहर को एक गुट के संगठित प्रयास का परिणाम बताते रहे। वे यह नहीं देख पाये कि 2002 से पूरा प्रचार तंत्र नरेन्द्र मोदी पर केन्द्रित रहा है। मुस्लिम वोटों को रिझाने के लोभ में सभी राजनीतिक दल पहले अयोध्या आंदोलन और विवादास्पद बाबरी ढांचे के ध्वंस की घटना को भुनाने की कोशिश में लगे रहे। किंतु 2002 के बाद उन्होंने नरेन्द्र मोदी को मुसलमानों के हत्यारे के रूप में चित्रित करके मुस्लिम मन में उनके और भाजपा के विरुद्ध जहर भरना शुरू कर दिया। बिहार में लालू और पासवान ने तो मोदी को अपना 'पोस्टर ब्वाय' बना लिया। तीस्ता सीतलवाड़, शबनम हाशमी, फादर सैड्रिक प्रकाश, मुकुल सिन्हा, मल्लिका साराभाई जैसे कुछ नाम चौबीसों घंटे मोदी के विरुद्ध षड्यंत्री राजनीति में जुट गये। इन बारह वर्षों में गुजरात के सर्वतोमुखी विकास, वहां के मुस्लिम समाज द्वारा मोदी का समर्थन और दंगा-मुक्त गुजरात के सत्य की उन्होंने उपेक्षा की। पूरा विश्व गुजरात के विकास मॉडल की सराहना करता रहा, पर ये झूठे सेकुलरवादी मोदी निंदा में जुट रहे। इसकी तीव्र प्रतिक्रिया भारत के राष्ट्रवादी मन पर हुई है। पूरे भारत में बिखरा युवा अंत:करण नरेन्द्र मोदी को विकास पुरुष के रूप में एवं मुस्लिम साम्प्रदायिकता को भड़काने की झूठी सेकुलर राजनीति के विरुद्ध नरेन्द्र मोदी को भारतीय राष्ट्रवाद के प्रतीक के रूप में देखने लगा। इसीलिए पूरे भारत में नरेन्द्र मोदी के पक्ष में एक लहर उमड़ी जिस पर सवार होकर मोदी सामने आये हैं। मोदी के इस उभार को राष्ट्रवाद के उभार के रूप में देखा जाना चाहिए।

संघ और भाजपा संबंध

इसी प्रकार मीडिया भाजपा और संघ के रिश्तों और आडवाणी और संघ के संबंधों को समझने में पूरी तरह असमर्थ है। वह यह नहीं जानता कि भाजपा किसी व्यक्ति के द्वारा स्थापित दल नहीं है, वह व्यक्ति पूजा से पूरी तरह मुक्त है। गोवा अधिवेशन में से निकला यह संदेश उन्हें अब समझ लेना चाहिए। भाजपा के जिन कार्यकर्त्ताओं के नाम लेकर कहा जा रहा है कि उन्हें आडवाणी जी ने राजनीतिक क्षेत्र में खड़ा किया, वे लगभग सभी संघ विचार परिवार के सदस्य होने के नाते राजनीतिक क्षेत्र में आये। भाजपा का जन्म 1980 में नहीं 1951 में हुआ था, और तब किसी व्यक्ति विशेष द्वारा नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विचार प्रवाह में से हुआ। जनसंघ अकेला राजनीतिक दल है जिसका विकास ऊपर से नीचे नहीं, नीचे से ऊपर हुआ। व्यक्ति और वंश केन्द्रित राजनीति के वातावरण में पले आज के पत्रकारों को इस इतिहास का ज्ञान नहीं है कि भारतीय जनसंघ की पहले जिला इकाईयां बनीं, फिर प्रांत इकाईयां और अंत में अखिल भारतीय इकाई की स्थापना अक्तूबर, 1951 में हुई। जनसंघ के अध्यक्ष पद के लिये उन्होंने स्व. द्वारिका प्रसाद मिश्र और डा.श्यामा प्रसाद मुखर्जी में से डा.मुखजीर् को अपनाया। जनसंघ की इस निर्माण प्रक्रिया का मैं स्वयं साक्षी रहा हूं।

अगर पत्रकार गहरायी में जाएंगे तो पाएंगे कि जनसंघ और भाजपा का अधिकांश नेतृत्व वर्ग और कार्यकर्ता स्वतंत्र रूप से संघ परिवार के अंग हैं। उनकी मूल निष्ठा संघ विचारधारा के प्रति है। वे व्यक्ति पूजक नहीं, तत्वनिष्ठ हैं। इस सत्य को समझने के लिए वे आडवाणी जी और अटल जी के जीवन चरित्रों को पढ़ें। उन्हें यह स्मरण रखना चाहिए कि 1979 में जनसंघ ने संघ के साथ अपने संबंधों के आधार पर ही जनता पार्टी से संबंध विच्छेद कर लिया था। इसीलिए संघ को भाजपा के 'रिमोट कंट्रोल' के रूप में देखना बचकाना है। संघ का प्रयास राजनीति को राष्ट्रवादी, श्रेष्ठ जीवन मूल्यों और अनुशासित बनाने पर है, न कि सत्ता हथियाने पर। सत्ता हथियाना किसके लिए? 1951 से अब तक संघ नेतृत्व की पांच पीढ़ियां बदल चुकी है। अनेक पीढ़ियों तक सत्ता पाने की आकांक्षा वंशवादी दलों में तो हो सकती है पर राष्ट्रभक्त, विचारनिष्ठ दल में नहीं। वस्तुत: संघ के कारण ही भारतीय राजनीति में भाजपा का अपना वैशिष्ट्य है। यह सत्य है कि चुनावी राजनीति के कारण सभी राजनीतिक दलों का चरित्र विकृत हुआ है, तो भाजपा का भी हुआ है, पर उन विकृतियों से बाहर निकालने का प्रयास ही संघ की ओर से होता है, इस सत्य को आज के पत्रकारों को समझ लेना चाहिए।

केवल हिंदुत्व से सुधरेंगे देश के हालातः मोहन भागवत



केवल हिंदुत्व से सुधरेंगे देश के हालातः मोहन भागवत
भाषा [Edited By: नमिता शुक्ला] दिल्ली आजतक
मेरठ, 18 जून 2013 | राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को बीजेपी में राष्ट्रीय भूमिका दिए जाने का समर्थन करते हुए कहा कि हिंदुत्व ही केवल वह रास्ता है जिससे देश में परिवर्तन लाया जा सकता है.
मोदी का कद बढ़ाए जाने का विरोध कर रहे बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का नाम लिए बिना उन्होंने कहा, ‘कोई पसंद करे या नहीं करे, हिंदुत्व ही केवल वह मार्ग है जो देश में परिवर्तन लाएगा. इसी में देश का सम्मान निहित है.’ भागवत ने कहा, ‘हमने नेता और एजेंडा बदल कर देख लिया, कुछ काम नहीं आया. राजनीति के द्वारा भारत को महाशक्ति नहीं बनाया जा सकता है, ऐसा केवल हिंदुत्व से किया जा सकता है.’
संघ प्रमुख ने देश के वर्तमान हालात पर चिंता जताते हुए कहा कि सीमाएं सुरक्षित नहीं हैं और देश के अंदर भी खतरा मंडरा रहा है. ‘चीन हमारी सीमा में घुस आया और हम उसे सबक सिखाने का साहस नहीं कर पाए. तिब्बत पर कब्जा जमाने के बाद वह भारतीय राज्यों पर भी अपना हक जताने का साहस करता है और अपनी शर्तों पर सीमा छोड़ता है. पाकिस्तान में सरबजीत सिंह की हत्या कर दी गई.’
नक्सली समस्या का जिक्र करते हुए संघ प्रमुख ने कहा कि माओवादी बंदूक के बल पर सत्ता हासिल करने की सोच रहे हैं. उन्होंने कहा कि ऐसे लोग बोली की नहीं, गोली की भाषा समझते हैं और उनसे उसी भाषा में बात होनी चाहिए.
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हिंदू शब्द वैदिक साहित्य में प्रयुक्त ' सिंधु ' का तदभव रूप है | वैदिक साहित्य में " सप्तसिंधु " शब्द का प्रयोग हुआ है | जो स्वात, गोमती, कुम्भा, वितस्ता, चंद्रभागा, इरावती, सिंधु इन सात नदियों से व्यापक प्रदेश का सूचक है |


पुराने समय में विदेशी लोग भारत को उसके उत्तर- पश्चिम में बहने वाले महानद सिंधु के नाम से पुकारते थे, जिसे ईरानियो ने हिंदू और यूनानियो ने हंकार का लोप करके " इण्डोस " कहा | वही कालान्तर में हिंदू बना और व्यापक रूप से प्रचलित है | भारतवर्ष में रहने वाले " समाज " को लोग हिंदू नाम से ही जानते आये है | हज़ार वर्ष से भी अधिक समय हो चूका है, भारतीय समाज, संस्कृति, जाति और राष्ट्र की पहचान के लिये " हिंदू " शब्द सारे संसार में प्रयोग किया जा रहा है |

विदेशियों से अपनी उच्चारण सुविधा के लिये सिंधु का हिंदू या इण्डोस बनाया था, किन्तु इतने मात्र से हमारे पूर्वजों ने इसको त्याज्य नहीं माना | हिंदू जाति ने हिंदू शब्द को न केवल गौरवपूर्वक स्वीकार किया अपितु हिंदुत्व की लाज रखने और उसके संरक्षण के लिये भारी बलिदान भी दिए है |

अद्भुत कोष, हेमंतकविकोष, शमकोष, शब्द-कल्पद्रुम, पारिजात हरण नाटक. शाङ् र्गधर पद्धति, काली का पुराण आदि अनेक संस्कृत ग्रंथो में हिंदू शब्द का प्रयोग पाया जाता है |

ईसा की सातवीं शताब्दी में भारत में आने वाले चीनी यात्री ह्वेंनसांग ने कहा की यह के लोगो को " हिंतू " नाम से पुकारा जाता था | चंदबरदाई के पृथ्वीराज रासो में " हिंदू " शब्द का प्रचुर प्रयोग हुआ है | पृथ्वीराज चौहान को " हिंदू अधिपति " संबोधित किया गया है | बीकानेर के राजकुमार नामक कवि ने जो अकबर के दरबार में रहता था मारवाड़ी बोली में एक कविता के द्वारा महाराणा से अपील की थी की तुम अकेले हिन्दुओ की नाक हो, हिंदू जाति की लाज तुम्हारे हाथ में है | राणा प्रताप ने हिंदू जाति की रक्षा के लिये अनेक कष्ट सहे | इसी प्रकार जब औरगजेब ने हिन्दुओ पर अत्याचार करना शुरू किया तब उदयपुर के महाराजा राजसिंह ने औरंगजेब से चिट्ठी लिखकर कहा की मै हिंदू जाति का सरदार हू इसलिए पहले मुझपे जजिया लगाने का साहस करो |

समर्थ गुरु रामदास ने बड़े अभिमान पूर्वक हिंदू और हिन्दुस्थान शब्दों का प्रयोग किया |

शिवाजी ने हिंदुत्व की रक्षा की प्रेरणा दी और गुरु तेग बहादुर और गुरु गोविन्द सिंह तो हिंदुत्व के लिये जिए और मरे | गुरु गोविन्द सिंह ने अपने सामने महान आदर्श रखा -
सकल जगत में खालसा पंथ गाजे |
जगे धर्म हिंदू सकल भंड भाजे ||

वीर पेशवा, सुजान सिंह, जयसिंह, राणा बप्पा, राणा सांगा आदि इतिहास प्रसिद्ध वीरो और देशभक्तों ने हिंदू कहलाने और हिंदुत्व की रक्षा के लिये जूझने में अभिमान व्यक्त किया | स्वामी विवेकानंद ने अपने को गर्वपूर्वक हिंदू कहा था | तात्पर्य यह है की हमारे देश के इतिहास में हिंदू कहलाना और हिंदुत्व की रक्षा करना बड़े गर्व और अभिमान की बात समझी जातो थी |

आरक्षण पर प्रतिबंध लगाने वाली याचिका स्वीकार






आरक्षण का सच यही कि हर क्षेत्र में वास्तविक व्यक्ति को कोई फायदा नहीं मिला हे , राजनीती में धन सम्पन्न वर्ग का प्रभुत्व हे । इस लिए न्यायालय  ही कुछ कर सकता हे । 

सुप्रीम कोर्ट ने देश में 62 वर्षों से जारी जातिवादी
आरक्षण पर प्रतिबंध लगाने वाली याचिका को स्वीकार कर लिया है। इस मामले पर 1 जुलाई को सुनवाई होनी है। याचिकाकर्ता रामदुलार झा ने बताया कि देश की 543 संसदीय सीटों में से 126 संसदीय और 4920 विधानसभा सीटों में से 1155 विधानसभा सीटें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। इसका उद्देश्य उन लोगों को लाभ पहुंचाना है जो वास्तव में दलित हैं | लेकिन धरातल पर अनुसूचित जाति व जनजाति के संभ्रांत लोग ही इसका फायदा उठाते रहे हैं और चुनाव में सफल होते रहे हैं। इस कारण जो दलित आर्थिक व सामाजिक रूप से पिछड़े हैं उनकी स्थिति ज्यों की त्यों बनी हुई है। उन्होंने बताया कि जिन दलितों को फायदा नहीं मिल रहा है और जो इसके हकदार हैं| उनकी संख्या 95 प्रतिशत से भी अधिक है। दलितों के प्रति यह एक तरह का अन्याय और कानून का दुरुपयोग है। झा के अनुसारए दलितों पर हो रहे अन्याय और कानून के दुरुपयोग के लिए जातिवादी आरक्षण पर प्रतिबंध जरूरी है तभी दलितों को उनका समुचित अधिकार मिल पाएगा।

सोमवार, 17 जून 2013

गंगा दशहरा : हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार



गंगा दशहरा हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है

ज्येष्ठ शुक्ला दशमी को दशहरा कहते हैं

गंगा का पृथ्वी पर आगमन

गंगा दशहरा का पर्व :  18 व 19 जून २ ० १ ३ को
मान्यता है कि राजा भगीरथ को जब अपने पूर्वजों का तर्पण करना था, तो उन्होंने गंगा को पृथ्वी पर लाने के लिए कठोर तप किया था। पुराणों के अनुसार उन्हीं के अनुरोध पर मां गंगा भगवान विष्णु के चरणों से निकली और भगवान शिव की जटाओं में समाई थीं। इसके बाद पुन: तप करने पर भगवान शिव ने अपनी एक जटा को पृथ्वी पर खोला था। तब से मां गंगा का अवतरण पृथ्वी पर माना जाता है। इस दिन गंगा स्नान और दान करने से हजारों अश्वमेघ यज्ञों के समान पुण्य फल मिलता है। ज्योतिष गणना के अनुसार इस बार यह पुण्य फल समान रूप से दो दिनों तक यानि 18 व 19 जून को लिया जा सकता है। शास्त्रों में वर्णित है कि यत्र बहूना योगा: सा ग्राहा।। अर्थात् जहां ज्यादा योग हों वहीं ग्रहण करें, लेकिन इन दोनों दिन ही पांच-पांच योग रहेंगे। इसलिए दोनों दिन समान रूप से पुण्य लाभ कमाया जा सकता है।


        सबसे पवित्र नदी गंगा के पृथ्वी पर आने का पर्व है- गंगा दशहरा

 मनुष्यों को मुक्ति देने वाली गंगा नदी अतुलनीय हैं। संपूर्ण विश्व में इसे सबसे पवित्र नदी माना जाता है। राजा भगीरथ ने इसके लिए वर्षो तक तपस्या की थी। ज्येष्ठ शुक्ल दशमी के दिन गंगा धरती पर आई। इससे न केवल सूखा और निर्जीव क्षेत्र उर्वर बन गया, बल्कि चारों ओर हरियाली भी छा गई थी। गंगा-दशहरा पर्व मनाने की परंपरा इसी समय से आरंभ हुई थी। राजा भगीरथ की गंगा को पृथ्वी पर लाने की कोशिशों के कारण इस नदी का एक नाम भागीरथी भी है। इसमें स्नान, दान, रूपात्मक व्रत होता है। स्कन्दपुराण में लिखा हुआ है कि, ज्येष्ठ शुक्ला दशमी संवत्सरमुखी मानी गई है इसमें स्नान और दान तो विशेष करके करें। किसी भी नदी पर जाकर अर्घ्य (पू‍जादिक) एवम् तिलोदक (तीर्थ प्राप्ति निमित्तक तर्पण) अवश्य करें। ऐसा करने वाला महापातकों के बराबर के दस पापों से छूट जाता है।

रविवार, 16 जून 2013

हिन्दू समाज देश की रीढ़ : दुर्गादास




हिन्दू समाज देश की रीढ़ : दुर्गादास
नागौर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ गत 87 साल से संगठन के माध्यम से हिन्दू समाज में राष्ट्रीय चेतना जगाने का काम कर रहा है। देश का हिन्दू संगठित व शक्तिशाली होगा तो देश मजबूत व शक्तिशाली होगा और हिन्दुओं के कमजोर होने पर देश भी कमजोर होगा। राजस्थान क्षेत्र प्रचारक दुर्गादास ने यह बात कही। वे शनिवार शाम को शारदा बाल निकेतन में 20 दिवसीय संघ शिक्षा वर्ग (प्रथम वर्ष) के समापन समारोह में मुख्य वक्ता के रूप में बोल रहे थे। दुर्गादास ने कहा कि हिन्दू समाज देश की रीढ़ है, देश की राष्ट्रीयता है। संघ देश को बल, वैभव व गुण संपन्न बनाने के कार्य में जुटा है। राष्ट्रीय चेतना को देश की आत्मा बताते हुए उन्होंने कहा कि इसके अभाव में देश में गंभीर परिस्थिति खड़ी हो जाती है।

हाल ही चीनी सेना की ओर से भारत की सीमा में घुसपैठ को चिंताजनक व देश की संप्रभुता के लिए खतरा बताते हुए कहा कि केन्द्र की कमजोर नीतियों के चलते यह स्थिति उत्पन्न हुई है। नदियां किसी एक देश की संपत्ति नहीं होती। ब्रह्मपुत्र नदी पूर्वोत्तर भारत की जीवन रेखा है और इस पर बांध बनाकर चीन पूर्वाेत्तर के लोगों को पानी से वंचित करने की चाल चल रहा है। उन्होंने कहा कि राम सेतु का मामला हो या अमरनाथ श्राइन बोर्ड का मुद्दा, हिन्दू समाज ने हर जगह जागरूक होकर इस पर विजय पाई है। संघ को बदनाम करने की तमाम कोशिशें हुई। मनगढंत आरोप लगाकर इस पर प्रतिबंध लगाने का दुस्साहस किया गया, लेकिन सफलता नहीं मिली।

उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति व परंपराओं पर चोट करने के लिए बड़ी कंपनियां धन देकर प्रायोजित तरीके से ऎसे कार्यक्रम तैयार करवाती है जिसका सीधा प्रभाव देश की संयुक्त परिवार की परंपरा पर पड़ता है। लिव इन रिलेशनशिप को कानून सम्मत बनाया जा रहा है उन्होंने कहा कि आज देश का हिन्दू समाज संगठित होकर अधिकारों प्रति जागरूक हो रहा है। यह संघ की कई सालों की साधना का परिणाम है। इससे पूर्व कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बालकिशन काकड़ा ने कहा कि युवा शक्ति को देखकर लगा कि इसकी शक्ति सही दिशा में लग रही है।

संत हेतमराम महाराज ने कहा कि मनुष्य देह राष्ट्र व संस्कृति की रक्षा के लिए मिली है। जीवन में वास्तव में जो कार्य किया जाना चाहिए उस कार्य की झलक यहां मिली है। वर्ग कार्यवाह रामचन्द्र ने वर्ग का प्रतिवेदन पढ़ा। इससे पूर्व स्वयंसेवकों ने योगासन, व्यायाम, सूर्य नमस्कार, दण्ड प्रदर्शन, नियुद्ध ,सामूहिक समता व्यायाम आदि का प्रदर्शन किया। घोष वर्ग के प्रशिक्षणार्थियों ने भारतीय राग व ताल पर आधाारित रचनाओं का प्रदर्शन किया। मंचस्थ बीकानेर विभाग के संघ संचालक वर्गाधिकारी नरोत्तम व्यास, सह संघ संचालक नंद किशोर सोनी के अलावा संज जाानकी दास, स्वामी रामनिरंजन तीर्थ, संघ के राष्ट्रीय ग्राम विकास प्रमुख दिनेश कुमार, मोहन राम चौधरी, भोजराज सारस्वत, सम्पतमल लूणावत, संघ के पदाधिकारी, शहर के गणमान्य लोग मौजूद थे।

'प्रतिभाओं को ही कुंठित किया जा रहा है'
नागौर. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के राजस्थान क्षेत्र प्रचारक दुर्गादास ने कहा कि हिंदू समाज को बलशाली व गुणशाली बनाने के लिए संघ 85 वर्षों से कार्य कर रहा है। संघ के जोधपुर प्रांत के 20 दिवसीय संघ शिक्षा वर्ग के प्रथम वर्ष के समापन समारोह में शनिवार को शारदा बाल निकेतन विद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में राजस्थान क्षेत्र प्रचारक दुर्गादास ने कहा कि 8वीं तक अनुत्तीर्ण न करना, 10वीं की परीक्षा बोर्ड से करने या न करने का विकल्प रखने जैसी नीतियों से प्रतिभाओं को ही कुंठित किया जा रहा है। शिक्षा के निरंतर गिरते स्तर को लेकर स्थानीय जनता को अपने प्रतिनिधियों से प्रश्न करने चाहिए। उन्होंने कहा कि आज राखी, पिचकारी, छात्रों की पठन सामग्री आदि चीनी वस्तुओं से हमारा बाजार अटा पड़ा है। उन्होंने कहा कि 3 लाख करोड़ की बिक्री कर मुनाफा उस देश को जा रहा है जो हमारी ओर कुदृष्टि से देख रहा है। आज लिव इन रिलेशनशिप के नाम बिना विवाह के साथ रहने की कानूनी सहमत बनाया जा रहा है। मुख्य अतिथि बालकिशन काकड़ा व भादवासी धाम के संत हेतमराम महाराज ने भी विचार व्यक्त किए। इससे पूर्व शिक्षार्थी व घोष प्रशिक्षाणार्थी स्वयंसेवकों ने विभिन्न आसनों का प्रदर्शन किया। सबसे पहले घोष वाहिनी की स्वर लहरी के साथ स्वयंसेवकों द्वारा प्रत्युत प्रचलनम् व प्रदक्षिणा संचलन के माध्यम से भगवा ध्वज को नमन करते हुए प्रदक्षिणा कार्यक्रम संपन्न किया। घोष वाहिनी ने विभिन्न भारतीय शास्त्रीय रचनाओं के साथ वाद्य वादन करके विभिन्न आकृति संरचना बनाई। इसमें योगासन दल द्वारा ताड़ासन, वृक्षासन, चक्रासन, वज्रासन आदि आसनों के प्रदर्शन से बीस दिवसीय प्रशिक्षण कौशल का परिचय दिया। समापन कार्यक्रम में घोष दल ने श्रीराम, सोनभद्र व किरण रचना वादन के साथ रचनाएं बनाई। बाद में घोष वादन की सुमधुर रचना के सहयोग से आकर्षक व अनुशासित सामूहिक क्षमता पेश की। वर्ग कार्यवाह रामचंद्र ने वर्ग प्रतिवेदन पेश किया। कार्यक्रम में सामूहिक गीत वहीं प्रेरणा पुंज हमारे स्वामी पूज्य विवेकानंद का समवेत गान किया। कार्यक्रम में वर्गाधिकारी नरोत्तम व्यास, संघ के विभाग सहसंघ चालक डॉ. नंदकिशोर सोनी मंचासीन थे। इस अवसर पर संत जानकीदास, स्वामी रामनिरंजन तीर्थ, संघ के राष्ट्रीय ग्राम विकास प्रमुख दिनेश कुमार, मोहन राम चौधरी, भोजराज सारस्वत, संपत मल लूणावत सहित आदि उपस्थित थे।

मंगलवार, 11 जून 2013

महाराणा प्रताप जयंती : जेष्ठ शुल्क तृतीय



जेष्ठ शुल्क तृतीय
सही जन्म तिथि
भारत के वीर पुत्र महाराणा प्रताप जयंती आज
Tue, 11 Jun 2013

नई दिल्ली| भारत की धन्य भूमि पर अनगिनत ऐसे वीर पुरुष पैदा हुए जिन्होंने अपने बल, पराक्रम और त्याग से समय-समय पर देशभक्ति के अद्वितीय उदाहरण पेश किए हैं। इन्ही में से एक हैं मेवाड़ की धरती पर जन्मे महारणा प्रताप। महाराणा प्रताप का स्मरण आते ही मातृभूमि के प्रति उनके त्यागं और समर्पण की कहानी याद आती है।

आज 473 साल बाद भी उस वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप का नाम आते ही शूरवीरों के शरीर में दौड़ रहे गर्म खून में देश भक्ति की भावना उफान मारने लगती है। इसी अदम्य साहस एवं वीरता के प्रतीक महाराणा प्रताप की आज जयंती है।

महाराणा प्रताप भारतीय इतिहास में वीरता और राष्ट्रीय स्वाभिमान के पर्याय हैं। वे एक कठिन और उथल-पुथल भरे कालखण्ड में पैदा हुए थे, जब मुगलों की सत्ता समूचे भारत पर छाई हुई थी। मेवाड़ के राजा उदय सिंह के घर जन्मे उनके ज्येष्ठ पुत्र महाराणा प्रताप को बचपन से ही उच्च कोटी के संस्कार प्रदान थे। वीरता तो उनके लहु में थी। बालक प्रताप जितने वीर थे उतने ही पितृ भक्त भी थे। पिता की आज्ञा से महाराणा चित्तौड़ छोड़कर वनवास चले गए लेकिन उन्होंने अपने पिता को कुछ नहीं कहा।

1576 में हल्दीघाटी में महाराणा प्रताप और अकबर के बीच ऐसा युद्ध हुआ जो पूरे विश्व के लिए आज भी एक मिसाल है। अभूतपूर्व वीरता और मेवाड़ी साहस के चलते मुगल सेना के दांत खट्टे कर दिए और सैकड़ों अकबर के सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया गया। अकबर जैसा महान योद्धा भी महाराणा से डरने लगा था। कहतें हैं कि रात को सोते सोते वो डर के उठ जाया करता था। महाराणा की बात की जाये तो उनके साथ उनके प्रिय घोड़े चेतक का नाम ना आये। एक दुसरे के बिना ये दोनों अधुरें हैं। कहतें है कि हल्दी घाटी के युद्ध में बिना किसी सहायक के प्रताप अपने पराक्रमी चेतक पर सवार हो पहाड़ की ओर चल पड़े। उसके पीछे दो मुग़ल सैनिक लगे हुए थे, परन्तु चेतक ने प्रताप को बचा लिया। चेतक ने हर कदम पर उनका साथ दिया।

सम्पूर्ण जीवन युद्ध करके और भयानक कठिनाइयों का सामना करके भी महाराणा प्रताप ने मेवाड़ राज्य के आन, मान और स्वाभिमान को गिरने नहीं दिया और यही कारण है कि आज भी सदियों बाद उन्हें याद किया जाता है। उन्हें शत-शत प्रणाम किया जाता है।

आन-बान-शान और शौर्य स्वाभिमान के प्रतीक, अमर उद्धघोषक वीर-वंश शिरोमणि महाराणा प्रताप के जन्मदिन के 473 जन्म दिन पर देशवासियों को ढ़ेर सारी शुभकामनायें ।

सोमवार, 10 जून 2013

इस्लामी देश ने भेंट की अमेरिका को सरस्वती प्रतिमा



इस्लामी देश ने भेंट की अमेरिका को सरस्वती प्रतिमा
Mon, Jun 10th, 2013
वाशिंगटन. दुनिया में मुस्लिमों की सबसे बड़ी आबादी वाले इंडोनेशिया ने वाशिंगटन डीसी को शिक्षा और ज्ञान की देवी सरस्वती की 16 फीट ऊंची प्रतिमा भेंट की है. कमल के फूल पर खड़ी देवी सरस्वती की यह प्रतिमा भारतीय दूतावास से कुछ ही दूरी पर लगाई गई है. इंडोनेशियाई दूतावास के प्रवक्ता ने कहा, सरस्वती हिन्दुओं की देवी हैं.

मूर्ति का चयन प्रतीकात्मक मूल्यों पर किया गया, जो व्यापक सहयोग के तहत इंडोनेशिया-अमरीका के संबंध, विशेषकर शिक्षा और लोगों के बीच संपर्क, के समानांतर हैं. इंडोनेशिया में हिन्दुओं की संख्या तीन प्रतिशत है.

सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तान हमारा



सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तान हमारा
हम बुलबुले है इसकी ये गुलसिता हमारा ॥धृ॥

घुर्बत मे हो अगर हम रहता है दिल वतन मे
समझो वही हमे भी दिल है जहाँ हमारा ॥१॥

परबत वो सब से ऊंचा हमसाय आसमाँ का
वो संतरी हमारा वो पासबा हमारा ।२॥

गोदी मे खेलती है इसकी हजारो नदिया
गुलशन है जिनके दम से रश्क-ए-जना हमारा ।३॥

ए अब रौद गंगा वो दिन है याद तुझको
उतर तेरे किनारे जब कारवाँ हमारा ॥४॥

मझहब नही सिखाता आपस मे बैर रखना
हिन्दवी है हम वतन है हिन्दोस्तान हमारा ॥५॥

शुक्रवार, 7 जून 2013

माओवादी हिंसा से तंग आ चुके हैं आदिवासी : मोहन भागवत


आदिवासी भी माओवादी हिंसा से तंग आ चुके हैं: मोहन भागवत
Friday, June 7, 2013
नागपुर। राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ के मुखिया मोहन भागवत ने 25 मई को छत्‍तीसगढ़ के बस्‍तर जिले में कांग्रेस नेताओं पर हुए हमले की आलोचना करते हुए कहा है कि अब माओवादियों से कोई बातचीत नहीं की जानी चाहिए क्‍योंकि जो हमला उन्‍होने किया उसे किसी भी तरह से सही नहीं कहा जा सकता है, हमले में 27 लोग मारे गये थे। सच तो यह है कि छत्‍तीसगढ़ में रहने वाले आदिवासी भी अब माओवादियों की हिंसा से तंग आ चुके हैं। संघ प्रमुख मोहन भागवत रेशमीबाग मैदान में संघ के प्रशिक्षण शिविर समारोह में बोल रहे थे। इसके अलावा चीनी सीमा की घुसपैठ पर उन्‍होने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्‍यपूर्ण हैं कि आजादी के 65 वर्षों बाद भी हम सीमा विवाद जैसे मुद्दों का कोई हल नहीं निकाल पाये हैं। हम अभी भी अपनी सीमा रेखा चिन्हित नहीं कर पाये हैं, जिसके कारण चीनी सैनिक हमारी सीमा में काफी अंदर तक घुस आये हैं और हम कुछ भी नहीं कर पाते हैं। उन्‍होने सरकार की नाकामियों की निंदा की और खराब प्रशासन के लिए नीतियों को जिम्‍मेदार ठहराया।

गुरुवार, 6 जून 2013

अपनी भाषा हिन्दी अपनाएं

इतिहास के प्रकांड पंडित डॉ. रघुबीर प्राय: फ्रांस जाया करते थे। वे सदा फ्रांस के राजवंश के एक परिवार के यहाँ ठहरा करते थे। उस परिवार में एक ग्यारह साल की सुंदर लड़की भी थी। वह भी डॉ. रघुबीर की खूब सेवा करती थी। अंकल-अंकल बोला करती थी।
एक बार डॉ. रघुबीर को भारत से एक लिफाफा प्राप्त हुआ। बच्ची को उत्सुकता हुई। देखें तो भारत की भाषा की लिपि कैसी है। उसने कहा - अंकल लिफाफा खोलकर पत्र दिखाएँ। डॉ. रघुबीर ने टालना चाहा। पर बच्ची जिद पर अड़ गई।
डॉ. रघुबीर को पत्र दिखाना पड़ा। पत्र देखते ही बच्ची का मुँह लटक गया - अरे यह तो अँगरेजी में लिखा हुआ है। आपके देश की कोई भाषा नहीं हैडॉ. रघुबीर से कुछ कहते नहीं बना। बच्ची उदास होकर चली गई। माँ को सारी बात बताई। दोपहर में हमेशा की तरह सबने साथ-साथ खाना तो खायापर पहले दिनों की तरह उत्साह चहक-महक नहीं थी।
गृहस्वामिनी बोली - डॉ. रघुबीरआगे से आप किसी और जगह रहा करें। जिसकी कोई अपनी भाषा नहीं होतीउसे हम फ्रेंचबर्बर कहते हैं। ऐसे लोगों से कोई संबंध नहीं रखते।
गृहस्वामिनी ने उन्हें आगे बताया - मेरी माता लोरेन प्रदेश के ड्‍यूक की कन्या थी। प्रथम विश्व युद्ध के पूर्व वह फ्रेंच भाषी प्रदेश जर्मनी के अधीन था। जर्मन सम्राट ने वहाँ फ्रेंच के माध्यम से शिक्षण बंद करके जर्मन भाषा थोप दी थी।
फलत: प्रदेश का सारा कामकाज एकमात्र जर्मन भाषा में होता था,फ्रेंच के लिए वहाँ कोई स्थान न था। स्वभावत: विद्यालय में भी शिक्षा का माध्यम जर्मन भाषा ही थी। मेरी माँ उस समय ग्यारह वर्ष की थी और सर्वश्रेष्ठ कान्वेंट विद्यालय में पढ़ती थी।
एक बार जर्मन साम्राज्ञी कैथराइन लोरेन का दौरा करती हुई उस विद्यालय का निरीक्षण करने आ पहुँची। मेरी माता अपूर्व सुंदरी होने के साथ-साथ अत्यंत कुशाग्र बुद्धि भी थीं। सब ‍बच्चियाँ नए कपड़ों में सजधज कर आई थीं। उन्हें पंक्तिबद्ध खड़ा किया गया था।
बच्चियों के व्यायामखेल आदि प्रदर्शन के बाद साम्राज्ञी ने पूछा कि क्या कोई बच्ची जर्मन राष्ट्रगान सुना सकती हैमेरी माँ को छोड़ वह किसी को याद न था। मेरी माँ ने उसे ऐसे शुद्ध जर्मन उच्चारण के साथ इतने सुंदर ढंग से सुना पाते। साम्राज्ञी ने बच्ची से कुछ इनाम माँगने को कहा। बच्ची चुप रही। बार-बार आग्रह करने पर वह बोली -'महारानी जीक्या जो कुछ में माँगू वह आप देंगी?'
साम्राज्ञी ने उत्तेजित होकर कहा - 'बच्ची! मैं साम्राज्ञी हूँ। मेरा वचन कभी झूठा नहीं होता। तुम जो चाहो माँगो। इस पर मेरी माता ने कहा - 'महारानी जीयदि आप सचमुच वचन पर दृढ़ हैं तो मेरी केवल एक ही प्रार्थना है कि अब आगे से इस प्रदेश में सारा काम एकमात्र फ्रेंच में होजर्मन में नहीं।'
इस सर्वथा अप्रत्याशित माँग को सुनकर साम्राज्ञी पहले तो आश्चर्यकित रह गईकिंतु फिर क्रोध से लाल हो उठीं। वे बोलीं 'लड़कीनेपोलियन की सेनाओं ने भी जर्मनी पर कभी ऐसा कठोर प्रहार नहीं किया था,जैसा आज तूने शक्तिशाली जर्मनी साम्राज्य पर किया है। साम्राज्ञी होने के कारण मेरा वचन झूठा नहीं हो सकतापर तुम जैसी छोटी सी लड़की ने इतनी बड़ी महारानी को आज पराजय दी हैवह मैं कभी नहीं भूल सकती। जर्मनी ने जो अपने बाहुबल से जीता थाउसे तूने अपनी वाणी मात्र से लौटा लिया।
मैं भलीभाँति जानती हूँ कि अब आगे लारेन प्रदेश अधिक दिनों तक जर्मनों के अधीन न रह सकेगा। यह कहकर महारानी अतीव उदास होकर वहाँ से चली गई। गृह स्वामिनी ने कहा - 'डॉ. रघुबीरइस घटना से आप समझ सकते हैं कि मैं किस माँ की बेटी हूँ। हम फ्रेंच लोग संसार में सबसे अधिक गौरव अपनी भाषा को देते हैं। क्योंकि हमारे लिए राष्ट्र प्रेम और भाषा प्रेम में कोई अंतर नहीं...।'
हमें अपनी भाषा मिल गई। तो आगे चलकर हमें जर्मनों से स्वतंत्रता भी प्राप्त हो गई। आप समझ रहे हैं न!
 
हिन्दी अपनाएं ! देवनागरी विश्व की प्राचीनतम लिपी है !
यह सबसे अधिक वैज्ञानिक व समृद्ध भाषा है !
हिन्दी के शब्द भंडार में 70000 से अधिक मूल शब्द हैं !
जो विश्व की किसी भी अन्य भाषा से बहुत अधिक हैं !

राहुल को 500 करोड़ हर्जाने का नोटिस असम गण परिषद ने भेजा

राहुल गांधी को 500 करोड़ रुपये हर्जाने का कानूनी नोटिस

Thursday, June 06, 2013
ज़ी मीडिया ब्‍यूरो
राहुल गांधी को 500 करोड़ रुपये हर्जाने का कानूनी नोटिस
गुवाहाटी : असम गण परिषद की युवा शाखा ने बुधवार को कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी को उनके कथित बयान के लिए कानूनी नोटिस भेजा है और उनको माफी मांगने के लिए 15 दिन का समय दिया है। अगप के अनुसार राहुल गांधी ने कथित तौर पर कहा था कि असम गण परिषद उग्रवादियों के समर्थन से दूसरी बार सत्ता में आई थी।

पार्टी की युवा शाखा के अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने कहा कि यदि कांग्रेस के उपाध्यक्ष माफी नहीं मांगते हैं, तो हम पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाने के लिये उनसे 500 करोड़ का हर्जाना मांगेगे। उन्होंने कहा कि हमने राहुल गांधी को अपने नोटिस का जवाब देने के लिए 15 दिन का समय दिया है और इसमें असफल रहने पर उनके खिलाफ आपराधिक मानहानि का मामला शुरू किया जाएगा।

अगप के अध्यक्ष प्रफुल्ल कुमार महन्त ने भी इससे पहले कहा था कि पार्टी गांधी के बयान की कड़ी निंदा करती है और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई के लिए विशेषज्ञों से सलाह ले रही है। असम के मुख्यमंत्री तरूण गोगोई ने राहुल गांधी के बयान का समर्थन किया था और कहा कि अगप का उग्रवादियों के साथ संपर्क है और कांग्रेस उपाध्यक्ष का यह बयान सही है कि अगप कथित रूप से उल्फा की मदद से सत्ता में आई थी।

बुधवार, 5 जून 2013

सोनिया की एनएसी में माओवादियों के शुभ चिन्तक - नरेंद्र मोदी

मोदी ने सोनिया पर बोला सीधा हमला

नवभारत टाइम्स.कॉम | Jun 5, 2013,

नई दिल्ली ।। गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर यूपीए सरकार और सोनिया गांधी पर सीधा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि माओवादियों को संरक्षण देने का काम यूपीए नेतृत्व कर रहा है। उन्होंने कहा कि सोनिया की अगुवाई वाली एनएसी (राष्ट्रीय सलाहकार परिषद) के सदस्य माओवादियों को अपने एनजीओ का नेतृत्व सोंपने  में भी नहीं हिचकते।
मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन में शिरकत करने दिल्ली आए मोदी ने मीडियाकर्मियों से बातचीत करते हुए कहा कि नक्सल समस्या को देश की सबसे गंभीर समस्या करार देने वाली यूपीए सरकार यह भी नहीं देख पा रही कि उसकी सबसे ताकतवर संस्था ही माओवादियों को संरक्षण देने के काम में इस्तेमाल की जा रही है।

उन्होंने कहा कि पिछली बार जब उड़ीसा में एक जिलाधिकारी को माओवादियों ने किडनैप किया था, तो जिलाधिकारी को छोड़ने की एवज में उन लोगों ने पांच माओवादियों को छोड़ने की मांग की थी। इन 5 माओवादियों में एक पद्मा भी थी जो एक जाने-माने माओवादी नेता की पत्नी भी हैं। उन्होंने कहा कि पद्मा एक एनजीओ की हेड हैं यह एनजीओ सोनिया की अगुवाई वाली एनएसी के एक सदस्य चलाते हैं।

मोदी ने कहा कि सोचने वाली बात है कि जिस माओवादी को जेल से निकलवाने के लिए एक जिलाधिकारी को किडनैप किया जाता है, उस माओवादी को अगर देश की राष्ट्रीय सलाहकार परिषद के सदस्य संरक्षण दें तो इसका क्या अर्थ निकलता है। उन्होंने कहा कि ऐसे में जब प्रधानमंत्री या कांग्रेस के बड़े नेता माओवाद और माओवादियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जरूरत बताते हैं तो उनके बयान की कितनी अहमियत रह जाती है।

उपचुनाव : मोदी का क्लीन स्वीप, नीतीश को झटका


उपचुनावः मोदी का क्लीन स्वीप, नीतीश को झटका
नवभारतटाइम्स.कॉम | Jun 5, 2013,
नई दिल्ली।। पांच राज्यों में लोकसभा की 4 सीटों और विधानसभा की 6 सीटों पर हुए उपचुनाव के नतीजों ने साबित किया कि गुजरात में मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी का जादू सिर चढ़कर बोल रहा है। सत्ताधारी पार्टी बीजेपी ने दोनों (बनासकांठा और पोरबंदर) लोकसभा और चारों विधानभा सीटें कांग्रेस से छीन ली हैं। बिहार में महाराजगंज लोकसभा सीट के उपचुनाव में नीतीश को बड़ा झटका लगा है। सरकार में शिक्षा मंत्री और जेडीयू के उम्मीदवार प्रशांत कुमार शाही आरजेडी के प्रभुनाथ सिंह से 1 लाख 37 हजार वोटों से हार गए हैं। उधर, पश्चिम बंगाल की हावड़ा लोकसभा सीट दोबारा सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के खाते में चली गई है।
गुजरातः गुजरात में दो लोकसभा सीटों- पोरबंदर और बनासकांठा के लिए और चार विधानसभा सीटों - धोराजी, जेतपुर, लिंबरी और मोरवा हड़फ के लिए हुए उपचुनाव में बीजेपी ने शानदार जीत दर्ज की। बीजेपी शासित गुजरात में इन उपचुनावों को विपक्षी कांग्रेस के लिए एक अग्निपरीक्षा माना जा रहा था। ये सभी सीटें कांग्रेस के पास थीं। बनासकांठा लोकसभा सीट कांग्रेस के सांसद मुकेश गढ़वी के निधन की वजह से खाली हुई थी। पोरबंदर सीट विट्ठल रडाडिया के इस्तीफे की वजह से खाली हुई थी। रडाडिया ने फरवरी में कांग्रेस छोड़ी और बीजेपी में शामिल हो गए थे। लोकसभा उपचुनाव के लिए बीजेपी ने उन्हें ही उम्मीदवार बनाया। रडाडिया भारी मतों से यह सीट फिर जीतने में कामयाब रहे।
यूपीः यूपी के हांडिया विधानसभा उपचुनाव में समाजवादी पार्टी ने जीत हासिल की है। समाजवादी पार्टी के प्रशांत सिंह ने 26 हजार से ज्यादा वोटों से जीत हासिल की। इस सीट से कुल 13 प्रत्याशियों ने अपना भाग्य आजमाया था।

ममता के प्रत्याशी की जीतः इसके अलावा पश्चिम बंगाल की हावड़ा लोकसभा सीट के उपचुनाव में ममता की प्रतिष्ठा दांव पर थी। 2009 में कांग्रेस और तृणमूल ने इस सीट पर मिलकर चुनाव लड़ा था। यह सीट तृणमूल के खाते में गई थी। तृणमूल ने इस बार भारतीय फुटबॉल टीम के पूर्व कैप्टन प्रसून बनर्जी को, कांग्रेस ने ऐडवोकेट सनातन मुखर्जी को और सीपीएम ने पार्टी के पूर्व जिला सचिव सुदीप भट्टाचार्य को मैदान में उतारा। बीजेपी ने यहां अपना उम्मीदवार खड़ा नहीं किया, हालांकि बीजेपी नेता रंजन पाल यहां से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर जरूर मैदान में रहे। शारदा चिटफंड घोटाले के बाद हो रहा यह उपचुनाव इसलिए भी अहम था क्योंकि यह राज्य में पंचायत चुनावों से ठीक पहले हो रहा था। और इस चुनाव में तृणमूल प्रत्याशी प्रसून बनर्जी करीब 27000 वोटों से विजयी रहे। दूसरे नंबर पर रहे सीपीएम के सुदीप भट्टाचार्य।

नीतीश के मंत्री की करारी हार: बिहार की महाराजगंज लोकसभा सीट पर दिलचस्प मुकाबला था। यह सीट आरजेडी के सांसद उमाशंकर सिंह के निधन से खाली हुई थी। इस सीट पर सत्तारूढ़ जेडीयू के उम्मीदवार प्रशांत कुमार शाही, आरजेडी के प्रभुनाथ सिंह और कांग्रेस के जितेंद्र स्वामी चुनाव लड़ रहे थे। प्रशांत कुमार शाही राज्य के शिक्षामंत्री भी हैं। मगर, उनकी करारी हार हुई। आरजेडी के प्रभुनाथ सिंह 1 लाख 37 हजार वोटों से जीत गए हैं। इसे नीतीश कुमार के लिए झटका माना जा रहा है।

महाराष्ट्र में यवतमाल का भी नतीजाः महाराष्ट्र में यवतमाल विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव का नतीजा भी आ गया है। कांग्रेस के विधायक नीलेश पारवेकर के निधन के कारण यह सीट खाली हुई थी। उनकी जगह उनकी पत्नी- नंदिनी ने चुनाव लड़ा है। यह सीट अब कांग्रेस ने करीब 15 हजार वोटों से जीत ली है।

लोकसभा उपचुनाव-4 सीटें
राज्य/सीटनतीजे
गुजरात/बनासकांठाबीजेपी के हरिभाई चौधरी जीते
गुजरात/पोरबंदरBJP उम्मीदवार विट्ठल रडाडिया करीब 1 लाख 21 हजार वोटों से जीते
पश्चिम बंगाल/हावड़ातृणमूल कांग्रेस प्रत्याशी प्रसून बनर्जी करीब 27 हजार वोटों से जीते
बिहार/ महाराजगंजआरजेडी के प्रत्याशी प्रभुनाथ सिंह 1 लाख 37 हजार वोटों से जीते
विधानसभा उपचुनाव-6 सीटें
राज्य/सीटरुझान/नतीजे
गुजरात/धोराजीबीजेपी जीती
गुजरात/जेतपुरबीजेपी जीती
गुजरात/लिंबरीबीजेपी जीती
गुजरात/ मोरवा हड़फबीजेपी जीती
यूपी/हांडियासमाजवादी पार्टी के प्रशांत सिंह 26 हजार वोटों से जीते
महाराष्ट्र/यवतमालकांग्रेस जीती

मंगलवार, 4 जून 2013

रक्तपात के बीच ठिठका देश - मृणाल पांडे

रक्तपात के बीच ठिठका देश
मृणाल पांडे
दैनिक भास्कर


और अब, जबकि नक्सली दस्तों के हैबतनाक हौसले बुलंद हैं, कई चूजादिल विद्वान पोथे खोले बैठे हैं कि देश के संघीय ढांचे को चुनौती दिए बिना, सेना भेजे बिना, राज्य के स्वघोषित दुश्मनों के मानवाधिकारों का हनन किए बिना, स्थानीय जनजीवन में खलबली मचाए बिना, अगले चुनाव के संभावित घटक दल को खफा किए बिना कैसे इन हिंसक, अराजकता समर्थक गुरिल्ला जत्थों का जल्द और समूल विनाश हो! एक और छानबीन कमेटी बिठा दी गई है, जो छत्तीसगढ़ नरसंहार पर जब रपट देगी, तब देगी। जमीनी सच्चाई यह है कि अभी नक्सली वारदातें जारी हैं, पर चुनाव भी सर पर हैं। लिहाजा षड्यंत्र की अफवाहों में लिथड़ी समस्या की गेंद राजनीतिक दलों के बीच लतियाई जाने लगी है। गृहमंत्री तथा रक्षामंत्री की तरफ से मिले संकेतों के अनुसार नक्सली जत्थे भले बेगुनाह नागरिकों और सशस्त्र बलों के खून की नदियां बहाते रहें, अपने कैदियों को जेल तोड़कर उड़ा लें, स्कूल बंद करा दें, सड़क निर्माण रोक दें और जिलाधिकारियों का अपहरण कर फिरौती मांगें, लेकिन भारतीय सशस्त्र बल उनसे अंतरराष्ट्रीय शांतिसेना की तरह पेश आते रहेंगे। समस्या का वाजिब हल नहीं खोजा गया इसलिए आज एकाधिक राज्यों (जिनमें छत्तीसगढ़ के अलावा झारखंड, उड़ीसा, आंध्र तथा बिहार भी शामिल हैं) में सशस्त्र खेतिहरों, आदिवासी युवाओं को नक्सली हिंसक गुरिल्ला बना चुके हैं।

तीन दशक तक गठजोड़ सरकारों के तहत लगातार मौकापरस्त बनती गई राजनीति और उदारीकरण के तहत बनी अर्थनीति की असली जरूरतों के बीच आज एक बुनियादी और घातक विरोध नजर आता है। यानी सरकारें बनवाने और कायम रखने की राजनीतिक ताकत पूरी तरह क्षेत्रीय क्षत्रपों को मिल गई है, जिनके लिए क्षेत्रीय तथा पारिवारिक हित राष्ट्रीय हित से कहीं बड़े हैं; लेकिन आर्थिक नीतियों : जल, जंगल और जमीन के वितरण की अंतिम कुंजी केन्द्र सरकार के पास है। ऐसे में प्राथमिकता तय करना पेचीदा हो जाता है। खासकर विकास राशि तथा कुदरती संसाधनों का बंटवारा करने के मौके पर! यह देखकर कि विकास नीतियों को लागू कराने के केन्द्रीय फैसलों या गरीबी उन्मूलन प्रस्तावों के पारित होने से केन्द्र सरकार के शहरी और ग्रामीण वोटबैंकों की तुष्टि संभव है, हर विपक्षी गठजोड़ उन प्रस्तावों की आत्मा से सहमत होते हुए भी, संसदीय सत्रों को बार-बार ठप्प कराता है। इस लामबंदी की वजह से घरेलू टाटा हों या विदेशी पॉस्को जैसे विदेशी स्टील उत्पादक, उनको लाल कालीन से न्योतने के बाद भी न तो मनमोहन सिंह और न ही संबद्ध राज्य के मुख्यमंत्री उनको वादे के मुताबिक जमीन या खदान दिलवाते हैं।

फिर शहर बनाम गांव का चिरंतन द्वैत है। सबसे अधिक मतदाताओं वाले दो राज्य हैं : उत्तरप्रदेश और बिहार। उनके क्षत्रप तथा मतदाता गांवों का विकास पहले चाहते हैं और फैलते शहरी उद्योगों और शहरियों के लिए जंगलों, शामलात की जमीन या जलस्रोतों के बड़े आवंटन को, वह राज्य के आर्थिक विकास की दृष्टि से कितना भी लाभकारी क्यों न हो, राजनीतिक वजहों से रोकते रहते हैं। उधर शहरों के फैलाव और बड़ी शहरी आबादी वाले दिल्ली, कर्नाटक, महाराष्ट्र या झारखंड सरीखे राज्यों में इसका उलट है। शहरी वोटबैंकों का दबाव शहरी गरीबों और बिल्डरों उपक्रमियों को धन तथा जरूरी संसाधन देने और रोजगार सृजन पर है। लेकिन इससे संबंधित प्रस्ताव संसद या उसकी समितियों में पेश होते ही तमाम विपक्षी दल सरकार के खिलाफ, बिना यह सोचे कि कल उनकी सरकार बन भी गई तो यही भस्मासुर उनके पीछे पड़ जाएंगे, रफ्तार पर ब्रेक लगा देते हैं। गठजोड़ राजनीति के भीतरी दबावों के कारण पुलिसिया कार्रवाई पर राज्य और केन्द्र शायद ही कभी समवेत रणनीति बनाने पर राजी दिखते हों। उनके परस्पर आक्षेप आतंकी गुटों को मजबूती देते हैं तथा दुष्पीडि़तों को हर सरकार के खिलाफ लामबंद करना आसान बनाते हैं।

एक समन्वित राष्ट्रीय दृष्टि के अभाव में आज तक अशांत इलाकों में लोकतंत्र स्वतंत्र चयन का पर्याय नहीं बन पाया है। वहां आधुनिकता को, केन्द्र को गरियाने, स्थानीय संस्कृति के प्रतिगामी पक्ष को पोसने, लेकिन खुद भरपूर विदेश भ्रमण करने तथा आधुनिक जीवन जीने के शौकीन अधिनायकवादी नेतृत्व गरीब और अलग-थलग पड़ी जनता के बीच अपने लिए एक नैतिकता-निरपेक्ष अंध आस्था पैदा करते रहते हैं। इससे चुनावी जनाधार तो मजबूत होता है, लेकिन आतंकी गुटों पर समुचित कार्रवाई की घड़ी में हर राजनीतिक पार्टी अगर-मगर पर उतारू हो जाती है। जब छत्तीसगढ़ मध्यप्रदेश का अंग था, तब (1957 में) सामंतवाद विरोधी कांग्रेस भी बस्तर के विवादास्पद झक्की आदिवासी राजा प्रवीणचंद भंदेव से हाथ मिलाकर ही जीती। फिर झगड़ा होने पर (जो कि होना ही था) पहले 1961 में उनको नजरबंद किया गया और जब मार्च 1966 की मुठभेड़ में अनचाहे ही राजा मारे गए तो सत्ता में डैने फैलाने को आतुर विरोधी दल, यहां तक कि घोर सामंतवाद विरोधी कम्युनिस्ट दल भी राजा के पक्ष में सहानुभूति जताने बैठ गए। किसी ने नहीं कहा कि अगर सूबे में भिंड-मुरैना के डाकुओं पर गोली चलाना जायज माना गया, तो राज्य के खिलाफ हथियार उठाने वाले आदिवासियों पर गोली चलाना क्या गलत था?

आतंकवाद के यह छुपे हितू क्या कृपा कर हमको बताएंगे कि बनने के लगभग डेढ़ दशक बाद भी अकूत वन तथा खनिज संपदा का मालिक छत्तीसगढ़ भारत के सबसे अधिक व्यक्तित्व हीन राज्यों में क्यों है? विषमता मिटानी थी तो अब तक उत्तराखंड, हिमाचल या हरियाणा की तरह राज्य का कोई आधुनिक तरक्कीपसंद सूबाई व्यक्तित्व क्यों नहीं बनाया गया? अपने इतिहास को खोए बिना राजस्थान तथा कर्नाटक आधुनिक उद्योग जगत से डोर जोड़ सकते हैं तो छत्तीसगढ़ क्यों नहीं? प्रांत के नेतृत्व और बस्तर की जनता, राज्य में आजादी के बाद से लगातार बाहर से आकर बसे और उसको आधुनिक उपक्रम और लोकतांत्रिक संस्थान देने वालों तथा मूल निवासियों की कोई साझा अखिल भारतीय पहचान, उनके बीच कोई सहज आत्मीयता आज भी क्यों गायब है? क्या कोई इस पर भी सोचेगा?