गुरुवार, 11 जुलाई 2013

भ्रष्टाचार में इजाफा : दो गुनी रफ्तार


हमारे देश में दोगुनी रफ्तार से हो रहा है भ्रष्टाचार में इजाफा
एजेंसी | Jul 10, 2013
लंदन. भारत में भ्रष्टाचार विश्व की तुलना में दोगुनी रफ्तार से बढ़ रहा है। विश्व में 27 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्होंने पिछले 12 महीनों में रिश्वत दी है जबकि अकेले भारत में यह 54 प्रतिशत रहा। यानी हर दो में से एक व्यक्ति ने माना कि उसने रिश्वत दी है। भारत में सबसे ज्यादा भ्रष्ट संस्थानों में राजनीतिक दलों का नंबर रहा। इनकी दर 5 के स्केल पर 4.4 रही। इसमें 1 का मतलब सबसे कम भ्रष्ट और 5 का मतलब सबसे ज्यादा भ्रष्ट था। भ्रष्टाचार मुक्त भविष्य के लिए सनक तेजी से बढ़ रही है लेकिन भारत में 45 फीसदी लोगों का कहना है कि वे नहीं समझते कि आम आदमी के कुछ करने से कोई फर्क पड़ेगा। वहीं, 34 फीसदी लोगों ने (यानी हर तीन में से एक ने) बताया कि वे भ्रष्टाचार की शिकायत ही नहीं करते। यह निष्कर्ष ग्लोबल करप्शन बैरोमीटर-2013 का है। यह मंगलवार को जारी हुआ। सर्वे में 107 देशों के 1.14 लाख लोगों को शामिल किया गया। जवाब देने वाले हर चार में से 1 ने माना कि उसने रिश्वत दी है। 54 फीसदी मानते हैं कि उनकी सरकारें आम आदमी की जगह निहित स्वार्थी गुटों की बात ज्यादा मानती हैं।

-हर 2 में से एक व्यक्ति ने कहा उसने दी है रिश्वत
-विश्व में 27 फीसदी लोगों ने रिश्वत दी, भारत में 54 फीसदी
-ज्यादा भ्रष्ट राजनीतिक पार्टियां, 5 में से 4.4 अंक
-हर दूसरा व्यक्ति मानता है कि दो साल में भ्रष्टाचार बढ़ा है
-3 में से 2 लोग का मानना- संपर्कों से जल्द काम होता है
-10 में से 9 उठाएंगे भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज


देशों की स्थिति

36 देशों में पुलिस को सबसे भ्रष्ट माना गया।
20 देशों में न्यायपालिका सबसे भ्रष्ट।
51 देशों में राजनीतिक दलों को सबसे भ्रष्ट (55 प्रतिशत) माना गया।
17 देशों के (जी-20) 59 प्रतिशत लोगों ने माना कि उनकी सरकार भ्रष्टाचार से नहीं लड़ रही।


भारत में लोगों ने किसे कितना भ्रष्ट माना (प्रतिशत में)

पुलिस: 62
रजिस्ट्री और परमिट: 61
शिक्षण संस्थान 48
भू-सेवाएं: 38
न्यायपालिका: 36
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चीन से सीखना होगा भ्रष्टाचार से लडऩा
Matrix News | Jul 10, 2013,
भास्कर न्यूज -!- जालंधर
भारत में इलेक्ट्रॉनिक सहित \'यादातर सामान चीन से ही मंगवाया जा रहा है। चीनी सामान चाहे इतना मजबूत न हो, लेकिन उसके कानून सख्त हैं। भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई ही इसे मिटा सकती है। भारत को भी अब भ्रष्टाचार से लडऩा चीन से ही सीखना पड़ेगा। यह कहना है शहर के लोगों का।
चीन ने पूर्व रेल मंत्री लियो जिझम को 60 करोड़ रुपए की रिश्वत के मामले में फांसी की सजा सुनाई है। इस बारे में बातचीत करने पर शहर के लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उनकी मानें तो भारत में भी अगर ऐसे सख्त कानून बना दिए जाएं, तो भ्रष्टाचार पर रोक लग सकती है। भारत में भ्रष्टाचार को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने होंगे ताकि भ्रष्टाचारी जेलों से बाहर नहीं निकल सकें। लोगों का कहना है कि भारत को चीन की तरह सख्त कानून बनाने चाहिए। हालांकि कुछ लोगों का यह भी मानना है कि फांसी इसका हल नहीं है। उम्रकैद तक की सजा ठीक है। फांसी के बाद लोग आरोपी को जल्द भूल जाएंगे।
चीन से भारत को इम्पोर्ट करने होंगे कानून
पीके ऑटो इंडस्ट्रीज फोकल प्वाइंट के संचालक संजय गुप्ता का कहना है कि इंडिया में भ्रष्टाचार को रोकने के नाम पर ड्रामे ही होते हैं। भारत में \'यादा सामान चीन से ही आ रहा है। अब चीन से कानूनों को भी इम्पोर्ट करना होगा। कॉमनवेल्थ घोटाले में कलमाड़ी जैसे बड़े नाम बाहर घूम रहे हैं। पवन बंसल भी कानूनी दांव पेच से बच निकले। अब वह अपने भांजे को भी छुड़ा लेंगे। संपत्ति जब्त की जाए और उनके अधिकार भी छीन लेने चाहिए।
मंत्रियों पर \'यादा सख्ती और जल्द कार्रवाई हो
भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के जिला प्रधान आरके शंगारी ने कहा कि मंत्रियों पर \'यादा सख्ती होनी चाहिए। क्योंकि आम लोग तो बड़े घोटाले कर भी नहीं सकते। सबसे \'यादा लूट तो मंत्री ही करते हैं। ऐसे में मंत्रियों पर कार्रवाई की जाए तो निचले स्तर पर खुद भ्रष्टाचार खत्म हो जाएगा। देश में भी सख्त कानून बनने चाहिए। ताकि भ्रष्टाचार करने से पहले हर कोई कई बार सोचे।
फांसी इसका हल नहीं है, उम्र कैद सही
हेमकुंट पब्लिक स्कूल के चेयरमैन पीएस जौली ने कहा कि भ्रष्टाचार का हल फांसी नहीं है। क्योंकि फांसी होने के बाद तो लोग कुछ दिन ही याद रख पाएंगे, लेकिन अगर वह जेल में उम्र कैद काटेगा तो लोग उसे ताउम्र देखते और कोसते रहेंगे। फांसी की बजाय उम्र कैद होनी चाहिए। इसी तरह शिकायतकर्ता को हमेशा फंसाने की कोशिश की जाती है। इससे कई लोग शिकायत देने से कतराते हैं।
भ्रष्टाचारी की संपत्ति तुरंत जब्त हो
जिमखाना क्लब के सेक्रेटरी एडवोकेट दलजीत सिंह छाबड़ा कहते हैं कि भ्रष्टाचारी को पकडऩे के तुरंत बाद उसकी सारी संपत्ति जब्त हो जानी चाहिए। व्यक्ति के साथ पारिवारिक सदस्यों की जांच कर मौके पर ही संपत्ति को जब्त
कर सरकारी खाते में डाल देना चाहिए। ताकि पब्लिक का पैसा पब्लिक के पास पहुंच सके। क्योंकि अपराधी ने जो पैसे एकत्र किए होते हैं, उससे ही फिर भ्रष्टाचार करके बच जाते हैं।

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