रविवार, 21 जुलाई 2013

हिंदुओं की बात सांप्रदायिक तो मुसलमानों की बात धर्मनिरपेक्ष कैसे? -नारायण मूर्ति



साम्प्रदायिकता या सेकुलरिज्म की आड़ में सिर्फ हिन्दुओ और हिंदूवादीयो को ही क्यों निशाना बनाया जाता - इंफोसिस के चेयरमैन नारायण मूर्ति
गर्व है इंफोसिस के पूर्व चेयरमैन नारायण मूर्ति पर.....जिन्होंने तथाकथित सेकुलरों को करारा जबाब दिया ...उन्होंने कहा की यदि बीजेपी हिन्दुओ के हित की बात करने से साम्प्रदायिक हो जाती है तो फिर मुसलमानों के हित की बात करने वाली कांग्रेस या दूसरी पार्टियां धर्मनिरपेक्ष कैसे हुई ? उन्होंने मीडिया को भी लताड़ा और कहा की भारत की मीडिया नरेंद्र मोदी के खिलाफ किसी साजिश के तहत अभियान चलती है .. क्या भारत में २००२ में पहले और २००२ के बाद दंगे नही भडके ? फिर मीडिया फिर २००२ को ही बार - बार क्यों उछालती रहती है ?
उन्होंने कहा की आसाम दंगो पर कांग्रेस ने अपने मुख्यमंत्री के खिलाफ क्या करवाई की ? कुछ नही ..फिर क्या आसाम के मुख्यमंत्री ने माफी मांगी ? क्या आसाम के मुख्यमंत्री ने दंगो की जिम्मेदारी ली ? नही ंतो फिर वही कांग्रेस और वही मीडिया नरेंद्र मोदी को गुजरात दंगो के लिए जिम्मेदार क्यों ठहरती है ? और उनसे बार - बार माफी की मांग क्यों की जाती है ?
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मीडिया की मोदी के खिलाफ साजिश-नारायण मूर्ति
हिंदुओं की बात सांप्रदायिक तो मुसलमानों की बात धर्मनिरपेक्ष कैसे?
स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम Sunday 21 April 2013
http://www.swatantraawaz.com/headline/1248.htm
नई ‌‌दिल्‍ली। इंफोसिस के पूर्व चेयरमैन नारायण मूर्ति ने एक लेख में देश के सेक्‍यूलरों से जानना चाहा है कि यदि बीजेपी हिंदुओ के हित की बात करने से सांप्रदायिक हो जाती है तो फिर मुसलमानों के हित की बात करने वाली कांग्रेस या दूसरी पार्टियां धर्मनिरपेक्ष कैसे हुईं? भारत में सांप्रदायिकता या सेक्‍यूलरिज्म की आड़ में सिर्फ हिंदुओं और हिंदूवादियों को ही क्यों निशाना बनाया जाता है?
उन्होंने मीडिया को भी कहा कि भारत की मीडिया नरेंद्र मोदी के खिलाफ किसी साजिश के तहत अभियान चलाती है और सवाल किया कि क्या भारत में 2002 के पहले और 2002 के बाद दंगे नहीं भड़के? फिर मीडिया 2002 को ही बार बार क्यों उछालती रहती है?
उन्होंने कहा कि आसाम दंगों पर कांग्रेस ने अपने मुख्यमंत्री के खिलाफ क्या कार्रवाई की? कुछ नहीं की, फिर क्या आसाम के मुख्यमंत्री ने माफ़ी मांगी? क्या आसाम के मुख्यमंत्री ने दंगो की जिम्मेदारी ली? नहीं, फिर वही कांग्रेस और वही मीडिया नरेंद्र मोदी को गुजरात दंगो के लिए जिम्मेदार क्यों ठहराती है? और उनसे बार-बार माफ़ी की मांग क्यों की जाती है?
लेकिन, भारत की मीडिया के दोगलेपन की हद देखिए कि किसी मीडिया ने उनके इस लेख का जिक्र नही किया, लेकिन अगर यही नारायण मूर्ति, मोदी या हिंदुत्व के खिलाफ लिखे होते, तो अब तक मीडिया उस उस लेख का दुनियाभर में प्रचार कर देता।
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नारों से गरीबी नहीं मिटती: नारायण मूर्ति
 Sat, 29 Jun 2013
बेंगलूर। देश से गरीबी मिटाने के नारे तमाम राजनीतिक दल सालों से देते आ रहे हैं। मगर खुद सरकार के आंकड़े कहते हैं कि गरीबों की संख्या में बहुत ज्यादा कमी नहीं आई है। कथनी और करनी के इसी फर्क पर तंज कसते हुए इंडिया इंक के दिग्गज और आइटी कंपनी इंफोसिस के एक्जीक्यूटिव चेयरमैन एनआर नारायण मूर्ति ने कहा है कि सिर्फ नारों से गरीबी नहीं मिटती है। गरीबी दूर करने के लिए देश में उद्योगों और उद्यमिता को बढ़ावा देना होगा।
बेंगलूर चैंबर ऑफ इंडस्ट्री एंड कॉमर्स की बैठक को शुक्रवार रात संबोधित करते हुए मूर्ति ने कहा, 'पिछले 40 सालों में मैंने अपने अनुभवों से सीखा है कि कोई नारा गरीबी दूर नहीं कर सकता। गरीबी की समस्या को केवल उद्योगों को बढ़ावा देकर ही दूर किया जा सकता है। इससे न सिर्फ लोगों को रोजगार के मौके मिलते हैं बल्कि विकास में भी तेजी आती है।' ऑटोमोबाइल और भारी उद्योग से आइटी उद्योग की तुलना करते हुए मूर्ति ने कहा कि इन सेक्टरों को सौ से एक हजार एकड़ जमीन की जरूरत होती है। इन उद्योगों में औसत मासिक वेतन 25 हजार रुपये होती है और केवल 10 हजार लोगों को रोजगार मिल पाता है। वहीं, आइटी उद्योग इतनी ही जगह में पांच गुना लोगों को नौकरियां देता है। यह क्षेत्र छह लाख के निवेश से 30 लाख बना सकता है।
उन्होंने कहा कि विकसित देशों और चीन ने इस बात को समझा और उद्योगपतियों के लिए राहें आसान की हैं। बेंगलूर के आइटी उद्योग ने पांच लाख ऐसी नौकरियां पैदा की हैं, जिनमें औसत मासिक वेतन 50 हजार रुपये है। इसके अलावा अपरोक्ष नौकरियों की संख्या 15 लाख है। बेंगलूर स्थित इलेक्ट्रॉनिक सिटी में बेहतर सुविधाओं की मांग करते हुए उन्होंने कहा कि आइटी इंडस्ट्री के सबसे बड़े हब में एक छोटा एयरपोर्ट, अच्छी सड़कें, बिजली, पानी, साफ हवा और अच्छे अंग्रेजी स्कूलों का इंतजाम होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आइटी उद्योग ने कर्नाटक की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में विशेष योगदान दिया है। सरकार को भी हमारे लिए बेहतर परिस्थितियां बनानी चाहिए। राज्य की कुल जीडीपी में आइटी सेक्टर का 25 फीसद हिस्सा है।
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