गुरुवार, 25 जुलाई 2013

आय से अधिक संपत्ति : सोनिया गांधी के सहयोगी विंसेंट जार्ज को समन : सीबीआई फिर बनी सोनिया जी की बाई



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आय से अधिक संपत्ति : सोनिया गांधी के सहयोगी विंसेंट जार्ज को समन : सीबीआई फिर बनी सोनिया जी की बाई
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भाषा [Edited By: महुआ बोस] | नई दिल्‍ली, 25 जुलाई 2013 |
दिल्ली की एक अदालत ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के करीबी सहयोगी विंसेंट जार्ज को एक आरोपी के रूप में समन जारी किया है. अदालत ने जार्ज के खिलाफ आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति मामले को बंद करने की सीबीआई की रिपोर्ट को खारिज करते हुए कहा कि उनके खिलाफ कार्यवाही के लिए पर्याप्त दस्तावेज हैं.
अदालत ने कहा कि सीबीआई द्वारा दाखिल अंतिम रिपोर्ट स्वीकार्य नहीं है. किसी लोक सेवक द्वारा आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति के संबंध में भ्रष्टाचार निवारण कानून की धारा 13 (1)(ई) के तहत दंडनीय अपराध के लिए विंसेंट जार्ज (संदिग्ध) के खिलाफ कार्यवाही के पर्याप्त दस्तावेज रिकार्ड में है. सीबीआई के विशेष न्यायाधीश जेपीएस मलिक ने कहा, 'उन्हें भ्रष्टाचार निवारण कानून, 1988 की धारा 13 (1)(ई) के तहत दंडनीय अपराध के लिए आरोपी के रूप में 30 अगस्त को समन किया जाए.'

जार्ज के खिलाफ 2000 में प्राथमिकी दर्ज करायी गयी थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि नवंबर 1984 से दिसंबर 1990 के बीच उनकी संपत्ति आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक थी. उनके खिलाफ आरोप है कि पूर्व प्रधानमंत्री और उसके बाद तत्कालीन विपक्ष के नेता राजीव गांधी के निजी सहायक के रूप में बतौर लोक सेवक उन्होंने अपनी पत्नी, बच्चे और करीबी संबंधियों के नाम से 'बेनामी' संपत्ति हासिल की। आरोप के अनुसार वह संपत्ति उनकी आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक थी.

सीबीआई ने आरोप लगाया कि जार्ज ने 1990 के बाद काफी संपत्ति हासिल की जिनमें वाणिज्यिक और रिहायशी संपत्ति भी शामिल हैं. सीबीआई के अनुसार यह संपत्ति दक्षिण दिल्ली के महंगे इलाके के अलावा बेंगलूर, चेन्नई, केरल में थी. इसके साथ सीबीआई ने दिल्ली की सीमा पर कृषि भूमि और बैंक खातों में करीब डेढ़ करोड़ रूपये होने की भी बात की थी. सीबीआई ने इसी साल मई में मामले को बंद करने के संबंध में एक लंबी रिपोर्ट दाखिल की औ कहा कि प्राथमिकी में लगाए गए आरोपों की पुष्टि नहीं हो सकी.

सीबीआई ने मामले को बंद करने के अनुरोध वाली रिपोर्ट (क्लोजर रिपोर्ट) को स्वीकार करने तथा जांच के दौरान एकत्र और जब्त दस्तावेजों को संबंधित लोगों को लौटाने की अपील भी की. क्लोजर रिपोर्ट में जार्ज के 1975 से विभिन्न पदों पर रहने का भी जिक्र किया गया है. इसमें कहा गया है कि जांच में दिखाया गया है कि विदेश से आयी राशि को जार्ज तथा परिवार के सदस्यों की आय श्रेणी में रखा गया था। वह राशि अमेरिका से परिवार के अन्य सदस्यों द्वारा वित्तीय मदद के तौर पर भेजी गयी थी.

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