सोमवार, 5 अगस्त 2013

गाजी फकीर की हिस्ट्रीशीट न खोलने का दबाव था : एसपी चौधरी





Published on 05 Aug-2013
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गाजी फकीर की हिस्ट्रीशीट न खोलने का दबाव था : एसपी चौधरी
गाजी फकीर कौन
आरोप : विधायक के पिता की हिस्ट्रीशीट खोलने के ४८ घंटे के भीतर हटाया
सफाई : २३ जिलों के एसपी बदले थे, अकेले इन्हें ही नहीं बदला
एसपी को हटाने के विरोध में जैसलमेर में बंद और प्रदर्शन
जैसलमेर से हटाए गए एसपी बोले- ट्रांसफर को हिस्ट्रीशीट खोलने से जोड़कर भी देख सकते हैं
हम क्यों हटाएंगे: सीएम
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि हमने हाल ही सभी एसपी को सर्कुलर भेजकर कहा था कि खुली हिस्ट्रीशीट बंद नहीं होगी और जो बंद हैं, उन्हें खोलना है। सरकार के निर्देश पर ही कोई एसपी काम करता है तो हम उसे सजा कैसे दे सकते हैं? इस विषय को बेवजह मुद्दा बना रहे हैं।
सरकार के दबाव और भय में काम कर रहे हैं अफसर : वसुंधरा
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष वसुंधरा ने कहा कि अधिकारी सरकार के राजनीतिक दबाव व भय में काम कर रहे हैं। निर्भीकता और ईमानदारी से राष्ट्र विरोधी गतिविधियां रोकने के लिए कर्तव्य निभा रहे अधिकारी को यह सरकार पुरस्कृत करने के बजाय राजनीतिक मंसूबे पूरा करने के लिए हटा रही है।
गाजी फकीर पोकरण से कांग्रेस विधायक शालेह मोहम्मद के पिता हैं। वे पाकिस्तान के पीर पगारो के अनुयायी और भारत में प्रतिनिधि के तौर पर हैं। वे पीर पगारो से मिलने जाते रहे हैं। उनके संदेश अपने समाज में प्रचारित करते हैं। उनके इसी रसूख के कारण तस्कर सीकिया को पाकिस्तान में जमानत मिली थी।
क्यों रीओपन की हिस्ट्रीशीट: चौधरी के मुताबिक 26 माह पहले तत्कालीन एएसपी गणपतलाल ने हिस्ट्रीशीट बंद की थी। ऐसा करना तकनीकी रूप से सही नहीं था। एडीजी कपिल गर्ग के जून में आदेश आए कि हिस्ट्रीशीट बंद नहीं की जा सकती।
इसके बाद गाजी फकीर की हिस्ट्रीशीट को दुबारा खंगाला गया तो इसमें उनका आपराधिक रिकॉर्ड, पाकिस्तान से आने वाले संदिग्ध लोगों को संरक्षण देने, सीआईडी व आईबी की रिपोर्ट तथा राष्ट्र विरोधी गतिविधियों की बातें लिखी हुई थी। उन्हें देखते हुए यह हिस्ट्रीशीट री-ओपन की गई है।
भास्कर न्यूज त्न जैसलमेर/जयपुर/जोधपुर
जैसलमेर एसपी पंकज चौधरी के तबादले को लेकर बवाल हो गया है। कांग्रेस विधायक शालेह मोहम्मद के पिता गाजी फकीर की हिस्ट्रीशीट खोलने के 48 घंटे के भीतर हुए चौधरी के तबादले के पीछे सरकार पर राजनीतिक दबाव का आरोप लग रहा है। पंकज चौधरी ने रविवार को कहा कि ट्रांसफर सरकार की पॉलिसी का हिस्सा है। हालांकि ट्रांसफर को हिस्ट्रीशीट खोलने से जोड़ कर भी देखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि हिस्ट्रीशीट री-ओपन नहीं करने का दबाव था, लेकिन उन्होंने नियमानुसार कार्य किया है। उधर ट्रांसफर के विरोध में रविवार को जैसलमेर बंद रहा। विरोध प्रदर्शन हुआ। शेष त्न पेज १४

गाजी फकीर की हिस्ट्रीशिटर...
एसपी पंकज ने ३१ जुलाई को हिस्ट्रीशीट खोली थी। सरकार ने २ अगस्त को उन्हें भी जैसलमेर से हटाकर पुलिस ट्रेनिंग स्कूल किशनगढ़ में कमांडेंट लगा दिया था।
भाजपा भी एसपी के समर्थन में खुलकर उतर आई। मामले की गूंज जयपुर तक रही। प्रदर्शनकारियों ने एसपी के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने जिले में अपराध पर लगाम कसने के लिए हरसंभव प्रयास किए। पिछले पांच माह में जैसलमेर की कानून-व्यवस्था बेहतर हो गई है। शहर भर में यही चर्चा का विषय रहा कि क्या एसपी ने हिस्ट्रीशीट खोलकर गलत किया है। उधर, तबादले के विरोध में व्यापार मंडल ने सोमवार को सांकड़ा गांव में बंद का आह्वान किया है। चौधरी के प्ष में दूसरी बार बंद : कुछ दिन पहले राजनीतिक दबाव में चौधरी के तबादले की आशंका को लेकर भी शहरवासियों ने जैसलमेर बंद रखा था।
चौधरी की 23 मार्च 2013 को जैसलमेर एसपी के पद पर पहली पोस्टिंग हुई थी। इसके दो माह बाद ही उनका फकीर परिवार से विवाद शुरू हो गया। वाराणासी निवासी पंकज 2009 बैच के आईपीएस हैं। वे इससे पहले घाटोल में एएसपी और राजस्थान पुलिस अकादमी में एसपी रह चुके हैं।

विधायक शाले मोहम्मद के खिलाफ मामला दर्ज
एसपी पंकज चौधरी ने भी एसपी ने रिलीव होने से पहले विधायक शाले मोहम्मद के खिलाफ पुलिस कार्रवाई में दखल देने, लपकों को छुड़ाने और अभद्र व्यवहार करने का मुकदमा दर्ज करवा दिया है। मामला 17 मई का है। ऑपरेशन वेलकम टीम बासनपीर के पास सैलानियों की गाड़ी का पीछा कर रहे लपकों को पकडऩे गई थी। लपके भागू का गांव फांटा के पास पेट्रोल पंप पर रुक गए। पुलिस ने इन्हें पकड़कर वाहन में बिठाना चाहा तो शाले मोहम्मद ने पुलिसकर्मी पप्पूराम मीना को पकड़ लिया और गाली गलौच करते हुए धमकियां दी। कांस्टेबल की रिपोर्ट के आधार पर एसपी चौधरी ने शनिवार रात शाले मोहम्मद के खिलाफ केस दर्ज करने के आदेश दे दिए और जांच के लिए पत्रावली सीआईडी अपराध शाखा जयपुर को भिजवा दी। बताया जाता है कि लपकों को पकडऩे और हत्या के एक मामले में विधायक ने एसपी चौधरी पर दबाव बनाया था, लेकिन वे नहीं माने।
जनता की नजर में चौधरी इसलिए बेहतर एसपी
- ऑपरेशन वेलकम शुरू किया। पर्यटकों की सुरक्षा के लिए शहर में लपकों की धरपकड़ की गई। पिछले चार माह में 50 लपकों व 100 गाडिय़ां जब्त।
- पांच माह में 700 से अधिक शराबी पकड़े। रात में 8 बजे के बाद शराब की दुकानें बंद कराने व उत्पात मचाने वाले शराबियों को पकडऩे के लिए स्पेशल टीम का गठन। 2011 में पूरे साल में महज 147 शराबी और 2012 में 250 शराबी ही पकड़े गए थे।
- ट्रैफिक व्यवस्था सुचारू करने के लिए बेहतर प्रयास।
-टाइगर रिजर्व फोर्स का गठन किया। सीमावर्ती जिला होने के चलते यहां तस्करों व अराष्ट्रीय गतिविधियों पर पुलिस की पैनी नजर रही। यह फोर्स ऐसे तत्वों की निगरानी कर रही है।
-परिवादियों की सुविधा के लिए लगातार जनसुनवाई और एसपी ऑफिस के बाहर शिकायत पेटी रखी गई। शिकायत मिलते ही उस पर तुरंत कार्रवाई की व्यवस्था।
- पुलिसकर्मियों में सकारात्मक सोच के लिए उन्हें नशे से दूर रहने के निर्देश। खेल गतिविधियों को बढ़ावा और श्रमदान, पुलिस थानों में परिवादियों के लिए बेहतर व्यवस्था आदि की गई।
फकीर परिवार कई बार करवा चुका है कलेक्टर-एसपी का तबादला
गाजी फकीर व उनके बेटों की राजनीति में अच्छी पकड़ के चलते वे कई बार एसपी व कलेक्टर का तबादला करवा चुके हैं। 1990 में तत्कालीन एसपी सुधीर प्रताप सिंह का 28 दिन के भीतर ही ट्रासंफर करा दिया गया था। उन्होंने गाजी फकीर की 1984 में गायब हुई हिस्ट्रीशीट को 1990 में दोबारा खुलवा दिया था। आरोप है कि इससे पहले कलेक्टर रहे गिरिराजसिंह कुशवाहा व एम.पी स्वामी, जिला परिषद के सीईओ के तबादले में भी इनकी मुख्य भूमिका रही। इसके अलावा कई अन्य छोटे-बड़े अधिकारियों के तबादले में इनका हाथ रहा है।
गाजी के रसूख के आगे सभी बौने
- जैसलमेर पुलिस ने गत 17 मई को लपकों को पकड़ा तो विधायक शाले मोहम्मद ने उन्हें छुड़ा दिया और पुलिस कार्रवाई में बाधा डाली। इस विवाद में भी विधायक एसपी को हटाने के लिए मुख्यमंत्री से मिले थे, मगर जैसलमेर बंद होने पर एक बार ट्रांसफर टल गया।
- जिस एएसपी गणपतलाल ने मई 11 में हिस्ट्रीशीट बंद की थी, उसे हटाने में भी एसपी व आईजी को पसीना आ गया था। दोनों की रिपोर्ट के बावजूद फकीर परिवार के संरक्षण के कारण एएसपी को उस समय नहीं हटाया जा सका था।
- गाजी फकीर की हिस्ट्रीशीट 31 जुलाई 1965 में खुली। यह 1984 में गायब हो गई। इसके बाद 1990 में तत्कालीन एसपी सुधीर प्रतापसिंह ने 31 जुलाई को दुबारा हिस्ट्रीशीट खोली तो एक माह में उनका ट्रांसफर हो गया।
- मुख्यमंत्री का गत 8 जून को जैसलमेर में साइकिल व लैपटॉप वितरण का कार्यक्रम था। सरकार के निर्देश थे कि यह पार्टी का आयोजन नहीं है इसलिए झंडे-बैनर नहीं लगेंगे मगर मंच पर सीएम के साथ गाजी फकीर को प्रोटोकॉल तोड़ कर बैठाया गया।

पुलिस के पास कई महत्वपूर्ण जानकारियां
- कुछ वर्ष पकड़ी गई 58 किलो हेरोइन के मामले में फकीर परिवार की संदिग्ध भूमिका। इनके गांव भागू का गांव का नाम हेरोइन प्रकरण में जुड़ा हुआ था।

- इनके पेट्रोल पंप पर काम कर चु

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