सोमवार, 30 सितंबर 2013

केन्द्रीय गृहमंत्री का साम्प्रदायिक सोच उजागर



केन्द्रीय गृहमंत्री का साम्प्रदायिक सोच उजागर
कांग्रेस के नेतृत्व में केन्द्र सरकार का कितना भारी पतन हुआ है इसका उदाहरण यह समाचार है।
कोई भी गृहमंत्री किसी धर्म, सम्प्रदाय,पंथ या जाती को लेकर कोई आदेश नहीं दे सकता ।
संविधान भी यही कहता है।
मगर ये केन्द्रीय गृहमंत्री का आदेश है कि मुस्लिम युवकों को अवैध  हिरासत में मत रखो
मतलब कि अन्ययुवकों को पुलिस अवैध हिरासत में रख सकती है।
......
मुस्लिम युवकों को गलत तरीके से न रखें हिरासत मेंर - शिंदे
भाषा| 30,sep,2013,
http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/23301712.cms?google_editors_picks=true&google_editors_picks=true
नई दिल्ली।। केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने सोमवार को सभी मुख्यमंत्रियों से यह तय करने को कहा कि कोई भी बेकसूर मुस्लिम युवक आतंक के नाम पर गलत तरीके से हिरासत में न लिया जाए।

मुख्यमंत्रियों को लिखी एक चिट्ठी में शिंदे ने कहा है कि कानून से जुड़ी एजेंसियों द्वारा बेकसूर मुस्लिम युवाओं को कथित तौर पर प्रताड़ित किए जाने के बारे में केंद्र सरकार को विभिन्न प्रतिनिधित्वों के जरिए बताया जा रहा है।

उन्होंने लिखा है, kuछ अल्पसंख्यक युवाओं को लग रहा है कि उन्हें जानबूझकर निशाना बनाया गया और उन्हें उनके मूलभूत अधिकारों से वंचित किया गया।श् गृह मंत्री ने जोर दिया कि सरकार हर तरह के आतंकवाद से मुकाबला करने के अपने मुख्य सिद्धांत के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने मुख्यमंत्रियों को लिखा है, श्सरकार को यह तय करना है कि कोई भी बेकसूर व्यक्ति बेवजह परेशान न हो।श् शिंदे ने राज्य सरकारों से कहा कि वे आतंकवाद संबंधी मामलों की सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट के परामर्श से विशेष अदालतें स्थापित करें, विशेष सरकारी वकीलों की नियुक्ति करें और अन्य लंबित मामलों की तुलना में ऐसे मामलों को प्राथमिकता दें।

उन्होंने कहा, श्जहां अल्पसंख्यक समुदाय के किसी सदस्य की गलत भावना से गिरफ्तारी हो, गलत तरीके से गिरफ्तारी हो वहां ऐसा करने वाले पुलिस अधिकारी के खिलाफ कड़ी एवं शीघ्र कार्रवाई की जानी चाहिए। गिरफ्तार व्यक्ति को न केवल तत्काल रिहा किया जाए बल्कि उसे समुचित मुआवजा दिया जाना चाहिए और पुनर्वास किया जाना चाहिए ताकि वह मुख्यधारा से जुड़ सके।श्

मई में केंद्र सरकार ने आतंकवाद संबंधी मामलों के लिए एनआईए कानून के तहत 39 विशेष अदालतें स्थापित की थीं। अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री के. रहमान खान ने भी शिंदे को चिट्ठी लिखकर देश के अलग-अलग भागों में मुस्लिम युवकों की आतंकवाद संबंधी मामलों में गलत तरीके से गिरफ्तारी को लेकर चिंता जताई थी।

गैरकानूनी गतिविधियां निरोधक कानून के प्रावधानों को लेकर मुस्लिम निकायों की चिंता से गृह मंत्रालय को अवगत कराते हुए खान ने विशेष अदालतें स्थापित करने का प्रस्ताव रखा था, ताकि आतंकवाद संबंधी सभी मामलों की जल्द सुनवाई हो सके। अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री के सुझाव का समर्थन करते हुए शिंदे ने उन्हें लिखा, श्मैं आपको आश्वासन देता हूं कि ऐसा होगा।

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