गुरुवार, 31 अक्तूबर 2013

लौहपुरुष सरदार पटेल,गांधीजी के कारण प्रधानमंत्री नहीं बन पाये




गांधी जी ने नेहरू को ही देश का नेतृत्व क्यों सौंपा? - डा.सतीश चन्द्र मित्तल
http://panchjanya.com/arch/2011/3/6/File22.htm
देश-विदेश के अनेक विद्वानों के मन में आज भी यह प्रश्न जस का तस है कि लोकमान्य तिलक के बाद देश के सर्वोच्च राष्ट्रीय नेता महात्मा गांधी ने देश की बागडोर नेहरू तथा पटेल में से नेहरू को ही क्यों सौंपी? इसके पीछे उनकी कौन-सी मनोभूमिका रही होगी? इस प्रश्न के उत्तर के लिए गांधी जी के नेहरू एवं पटेल के साथ संबंधों को जानना महत्वपूर्ण होगा।

गांधी-नेहरू संबंध

जवाहर लाल नेहरू ने गांधी जी को सर्वप्रथम 1916 में लखनऊ में देखा था। असहयोग आंदोलन में दोनों एक-दूसरे के निकट आए। 1924 में बेलगाम में गांधी जी के कांग्रेस अध्यक्ष बनने पर नेहरू ने उन्हें कांग्रेस का स्थायी सुपर प्रेसीडेंट (नेहरू आत्मकथा, पृ.132) कहा था। फिर धीरे-धीरे उनके संबंध गहरे होते गये थे। परंतु यह भी सत्य है कि दोनों व्यक्तिगत जीवन तथा वैचारिक दृष्टि से एक-दूसरे के विपरीत थे। गांधी जी पूर्ण हिन्दू थे, उनकी हिन्दू धर्म, हिन्दू संस्कृति तथा हिन्दू धर्म ग्रंथों के प्रति गहरी आस्था थी जबकि नेहरू हिन्दू होते हुए ही उसकी विचारधारा से कटे हुए थे। नेहरू का कथन था, "मैं संभवत: एक भारतीय की अपेक्षा अंग्रेज अधिक था। मैं विश्व को अंग्रेजों के दृष्टिकोण से देखता था और जब मैं भारत लौटा तो मैं इंग्लैण्ड के प्रति तथा अंग्रेजों के प्रति ज्यादा हितैषी था।" (जकारिया- ए स्टोरी आफ नेहरू, पृष्ठ 8) नेहरू ने बैरिस्टरी पास की पर उनकी वकालत चली नहीं, अत:राजनीति में प्रवेश किया। नेहरू ने गांधी जी द्वारा संचालित असहयोग आंदोलन तथा बाद में सविनय अवज्ञा आंदोलन में भाग लिया, परंतु दोनों आंदोलन वापस लिए जाने पर नेहरू ने गांधी जी की तीखी आलोचना की थी। 1942 के असहयोग आंदोलन के प्रारंभ में वे विरोधी थे पर बाद में गांधी जी के मनाने पर भाग लेने को तैयार हो गये थे। नेहरू आजादी से पूर्व चार बार कांग्रेस के अध्यक्ष बने थे परंतु प्रत्येक बार गांधी जी की अनुकम्पा से। नेहरू ने स्वयं स्वीकार किया कि "वह मुख्य द्वार या किनारे के द्वार से नहीं बल्कि पीछे के द्वार से आए थे (आत्मकथा पृ.134-135)

गांधी जी और पंडित नेहरू के राजनीतिक और आर्थिक विचारों में भी बड़ा अंतर था। गांधी जी का चिंतन भारतीय प्रजा की सोच पर आधारित था। वे ब्रिटिश संसद को वेश्या तथा बांझ तक कहते थे। वे ब्रिटिश संसद को बहुत महंगा खिलौना मानते थे। उन्होंने रामराज्य की कल्पना की थी जिसमें सभी की भागीदारी हो। जबकि नेहरू ने गांधी जी के हिन्द स्वराज को पढ़ा परंतु उसे पूर्णत: अस्वीकार कर दिया। गांधी जी ग्रामीण समाज के विकास के लिए स्वावलंबन तथा आत्मनिर्भरता पर बल देते, जबकि नेहरू ग्रामीण समाज को "गाय के गोबर का समाज" कहते थे। गांधी जी गोभक्त थे, नेहरू गोहत्या बंदी के लिए कानून के पक्ष में नहीं थे। गांधी जी परम्पराओं को महत्व देते थे जबकि नेहरू आधुनिक तथा पाश्चात्य सभ्यता के पोषक थे तथा वे गांधी जी को रूढ़िवादी तथा पुरानी पीढ़ी की सोच वाला भी मानते थे। गांधी जी आधुनिक साम्यवाद तथा समाजवाद के घोर विरोधी थे तथा वे 1929 तथा 1936 में नेहरू की समाजवाद की वकालत से क्षुब्ध थे। गांधी जी भारत की आत्मा का गांवों में वास मानते थे तथा ग्राम पंचायतों को महत्व देते हुए भारतीय संविधान इसके अनुरूप बनाना चाहते थे। जबकि नेहरू के पत्रों से ज्ञात होता है कि वे इसे हास्यास्पद समझते थे। गांधी जी स्वतंत्रता के पश्चात भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का विघटन चाहते थे परन्तु नेहरू इसके लिए तैयार न थे। अत: दोनों में वैचारिक मतभेद चरम पर थे।

गांधी-पटेल संबंध

वल्लभ भाई पटेल एक गुजराती किसान के पुत्र थे। 1911 में उन्होंने बैरिस्टरी की शिक्षा 36 महीने की बजाय 30 महीनों में पूरी की थी तथा ब्रिटिश साम्राज्य के सभी विद्यार्थियों में प्रथम आए थे। वापस आने पर वे भारत के एक सफल तथा उच्च कोटि के वकील सिद्ध हुए। वे गांधी जी के व्यक्तित्व एवं विचारों से अत्यधिक प्रभावित थे तथा उनके साथ चम्पारण गए थे। उन्होंने बारडोली सत्याग्रह में भी प्रसिद्धि प्राप्त की थी और तभी से सरदार की उपाधि से विभूषित किए गए थे। यरवदा जेल में वे गांधी जी के साथ 16 महीने रहे जहां दोनों को एक-दूसरे को समझने का अवसर मिला। वहीं पटेल ने संस्कृत भी सीखी थी। पटेल भारतीय कृषक की नब्ज को पहचानते थे। उन्होंने एक बार कहा भी था "मैंने कला या विज्ञान के विशाल गगन में कभी उड़ान नहीं भरी, मेरा विकास कच्ची झोपड़ियों में गरीब किसान के खेती की भूमि और शहरों के गंदे मकानों में हुआ है।" उन्हें गांव की गंदगी तथा जीवन से चिढ़ नहीं थी बल्कि स्वतंत्रता के पश्चात उन्होंने देश के नौकरशाहों को आदेश दिया था कि वे जब गांवों में जाएं तो मोटरगाड़ी गांव के बाहर खड़ी करें, नहीं तो उसकी आवाज से गांव के बैल बिगड़ जाएंगे। पटेल का चिंतन गांवों की मिट्टी से रचा-पगा था तथा वे गांधी जी के अनुरूप ऐसे ही भारत के भविष्य का विचार करते थे।

गांधी जी का हस्तक्षेप

1920 से 1946 तक कांग्रेस के कुल 20 अधिवेशन हुए और सभी में (एक को छोड़कर-1939) गांधी जी की इच्छा से ही अध्यक्ष बनाए जाते थे। प्राय: ये सभी संवैधानिक अध्यक्ष होते, परंतु गांधी जी वास्तविक अध्यक्ष रहते थे। इसी भांति कांग्रेस संगठन पर सरदार पटेल का प्रभुत्व था। परंतु यह आश्चर्यजनक है कि गांधी जी सरदार पटेल की राय को उतना महत्व नहीं देते थे, इससे कई बार पटेल क्षुब्ध भी हुए। उदाहरण के लिए 1927 में कांग्रेस अध्यक्ष के लिए सरदार पटेल का नाम आया, पर गांधी जी ने एक हिन्दू की बजाय एक मुसलमान को बनाया जाना उचित बतलाया (कलैक्टेड वक्र्स, भाग 34, पृ.57) 1928 में भी पटेल का नाम अध्यक्षता के लिए प्रस्तुत हुआ पर गांधी के हस्तक्षेप से वे न बन सके। 1929 में प्रांतीय समितियों से अध्यक्ष के लिए गांधी जी के पक्ष में पांच, पटेल के पक्ष में तीन तथा नेहरू के पक्ष केवल दो मत आए, परंतु गांधी जी ने नेहरू का समर्थन किया। गांधी जी ने कहा-पटेल मेरे साथ रहेगा तथा वह अगले वर्ष होगा। आखिरकार सरदार पटेल को अपना नाम वापस लेना पड़ा। 1931 में जबकि कांग्रेस से प्रतिबंध अभी पूरी तरह हटा न था, तब कराची अधिवेशन में सरदार पटेल को अध्यक्ष बनाया गया। मार्च, 1936 में भी सरदार पटेल, डा.अंसारी व राजगोपालाचारी के प्रस्तावित नामों में से अध्यक्ष न बनाकर दूसरी बार नेहरू को अध्यक्ष बनाया। तीसरी बार नवम्बर, 1936 में नेहरू को अध्यक्ष बनाते समय गांधी जी ने एक पत्र में इसे देशहित में बतलाया (कलैक्टेड वक्र्स, भाग 62, पृ.50) कांग्रेस अध्यक्ष की दृष्टि से 1946 का चुनाव अत्यंत महत्वपूर्ण था क्योंकि तब अंतरिम सरकार बननी थी । और जो कांग्रेस अध्यक्ष बनता उसे ही आजाद भारत का प्रधानमंत्री बनाना था । 16 प्रांतीय समितियों में से 13 के मत पटेल के पक्ष में, 2 डा.राजेन्द्र प्रसाद के पक्ष में तथा 1 गांधी जी के पक्ष से आया। परंतु चौथी बार भी अपने प्रभाव का उपयोग करके गांधी जी ने पंडित नेहरू को अध्यक्ष बनाया। सम्पूर्ण कांग्रेस संगठन को गांधी जी की हठ के सामने झुकना पड़ा। पटेल इससे पूर्व 1936 में भी नेहरू के अध्यक्ष बनने तथा कार्यसमिति में दक्षिणपंथियों को हटाकर वामपंथियों को नियुक्त करने से नाराज थे तथा उन्होंने कार्यसमिति से त्यागपत्र दे दिया था। परंतु गांधी जी के कहने पर वे मान गये।

नेहरू को गद्दी क्यों सौंपी?

अब महत्वपूर्ण प्रश्न यही उभरकर आता है कि क्या गांधी जी का नेहरू को देश के भविष्य की बागडोर सौंपना उचित था? तथ्यों से तो यह भी लगता है कि वे नेहरू की मानसिक पृष्ठभूमि तथा तत्कालीन ब्रिटिश सरकार की सोच से भी भलीभांति परिचित थे तथा राष्ट्रहित की बजाय अन्तरराष्ट्रीय जगत की घटनाओं तथा उनके अपेक्षित परिणामों से ज्यादा चिंतित थे। उन्होंने कहा था कि आज जवाहरलाल नेहरू का स्थान कोई अन्य नहीं ले सकता। वह हैरो का छात्र, कैम्ब्रिज का स्नातक तथा एक बैरिस्टर है तथा अंग्रेजों से बातचीत करने के लिए उपयुक्त है। (तेंदुलकर-महात्मा, भाग-आठ पृष्ठ-13) जे.बी.कृपलानी का निश्चित मत था कि गांधी जी पटेल की तुलना में नेहरू को अधिक चाहते थे। गांधी जी को लगता था कि सरकारी गाड़ी को चलाने के लिए दो बैल हैं-इसमें अन्तरराष्ट्रीय कार्य के लिए नेहरू तथा राष्ट्र के अन्तर्गत कार्यों के लिए पटेल होंगे (दुर्गादास, इंडिया फ्राम कर्जन टू नेहरू एंड आफ्टर, पृ.230)। गांधी जी को लगता था कि पं.नेहरू यूरोप, चीन, रूस आदि गये हुए हैं तथा वहां की मनोरचना से परिचित हैं। साथ ही यह भी सम्भव है कि गांधी जी ब्रिटिश सरकार के नेहरू के प्रति उदार विचारों से भी परिचित हों। कांग्रेस नेताओं में नेहरू ही लार्ड वैवल, लार्ड माउंटबेटन तथा भारत मंत्री सर लारेंस के चहेते थे। इंग्लैण्ड के प्रधानमंत्री ऐटली ने नेहरू को गांधी का आध्यात्मिक उत्तराधिकारी कहा था। विश्वविख्यात इतिहासकार अर्नाल्ड टायन्बी से जब इस प्रश्न पर पूछा गया तो उन्होंने भी नेहरू के प्रति अंतरराष्ट्रीय रुचि को इसका कारण बताया। गांधी जी ने अपनी राजनीतिक विरासत सौंपते हुए कहा था "मेरे मरने के पश्चात जवाहर लाल मेरी ही बात बोलेगा।"

संक्षेप में नेहरू की लालसा, ब्रिटिश सरकार की चाहत तथा गांधी जी के नेहरू के प्रति मोह ने उन्हें भारत की भावी बागडोर नेहरू को देने के लिए उद्यत किया। अन्तरराष्ट्रीय राजनीति राष्ट्रीय हितों पर छा गई। गांधी जी के प्रति सम्मान ने राष्ट्र समर्पित लौहपुरुष सरदार पटेल को झुका दिया। अब यह प्रश्न आप सबके सोचने का है कि क्या यह गांधी जी की महान भूल नहीं थी?

देश को वोट बैंक वाला सेक्युलरिज्म नहीं चाहिए : नरेंद्र मोदी



देश को सरदार पटेल वाला सेक्युलरिज्म चाहिए, वोट बैंक वाला नहीं: नरेंद्र मोदी
आज तक वेब ब्यूरो [Edited By: सौरभ द्विवेदी] | भरूच, 31 अक्टूबर 2013 |
http://aajtak.intoday.in/story/we-need-sardar-patels-secularism-narendra-modi-1-745970.html
बीजेपी के पीएम उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को पटेल जयंती पर कहा कि देश को सरदार पटेल के सेक्युलरिज्म की जरूरत है, वोट बैंक के सेक्युलरिज्म की नहीं. वह गुजरात के भरूच में 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' के शिलान्यास कार्यक्रम में बोल रहे थे. प्रस्तावित सरदार पटेल की मूर्ति दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति होगी. इसकी ऊंचाई 182 मीटर होगी और इसका चेहरा नर्मदा बांध की ओर होगा. यह अमेरिका की मशहूर 'स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी' से दोगुना ऊंची होगी. 2500 करोड़ के खर्च वाली इस योजना को मोदी ने बड़ी चालाकी से प्रदेश के विकास, आकर्षण, देश के गौरव और पटेल के सपने से जोड़ा.

उन्होंने संकेतों में कहा कि सरदार पटेल की यह प्रतिमा भारत को वैसा स्थान दिला सकती है जैसा चीन को उसके विकसित शहर शंघाई ने या जापान को बुलेट ट्रेन ने दिलाया. उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत को अब हल्के में लेने के दिन अब लद गए हैं.

पढ़िए उनका भाषण ज्यों का त्यों.

भाइयों-बहनों
नर्मदा के तट पर आज नए इतिहास और नए संकल्प का शिलान्यास हो रहा है. कई सालों से इस सपने को मैंने मन में संजोया था. कई लोगों ने इस सपने में रंग भरे थे, सुझाव दिए थे. कई मनोमंथन के बाद इस योजना गर्भाधान हुआ. अनेक लोगों का मार्गदर्शन, प्रेरणा, आशीर्वाद मिला. उन सबका अभिनंदन-नमन करता हूं. यह हम सबका सपना है.

नर्मदा जिला छोटा जिला है, इसके विकास के लिए और आने वाले दिनों में यह काम और सरलता से हो, इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर कई फैसले हुए हैं. लेकिन सबका मूल्यांकन करने के बाद सरकार को लगा कि अच्छा होगा कि इस काम को गति देने के लिए यहां एक छोटे से तालुका (कस्बा) का निर्माण हो.

मुझे पानी के मुद्दे पर कई सुझाव आए. आदिवासी भाइयों का पूरा अधिकार है, पानी उनको मिलेगा. किसानों को भी पानी मिलेगा. हमने टेक्निकल सॉल्यूशन खोजा है. नर्मदा के बाएं किनारे को भी सिंचाई का लाभ मिले, इसके लिए भी काम किया जाएगा.

नर्मदा नदी पर सरदार सरोवर बांध और इसके जरिये गुजरात-राजस्थान में पानी पहुंचाने का प्रयास सरदार पटेल का सपना था. किसी जमाने में प्यासों के लिए पानी की मटकी भी घर के बाहर रखने वालों को समाज आदर से देखता था. हमारे यहां, खास तौर से गुजरात-राजस्थान में पानी का मू्ल्य है, क्योंकि हमने पानी की तंगी झेली है.

आज भी गुजरात सरकार का सबसे ज्यादा बजट पानी के काम के लिए दिया जाता है. सरदार सरोवर बांध परियोजना के लिए पिछली सरकारों ने जितना खर्च किया, उससे डबल खर्च हमारी सरकार ने पिछले दस सालों में किया. लेकिन इस सारे काम का सपना सरदार पटेल ने देखा. यह उन्हीं के सपने पर सारा काम हो रहा है.

अगर हम पानी की व्यवस्था न कर पाते तो कहां होते, कौन जानता हमें. गुजरात में नेगेटिव ग्रोथ थी, लोग छोड़कर जा रहे थे. आज राजस्थान के किसी भी व्यक्ति से मिलते हैं तो कहता है कि आपने बहुत अच्छा काम किया, जो हमें पानी दिया. इस सबके लिए सरदार पटेल जिम्मेदार हैं.

अब भी गुलामी का इतना बोझ है, आजादी के इतने साल बाद भी. हम गुलामी की छाया से अब तक निकल नहीं पाए हैं. और हमने गुलामी की छाया से निकलने के लिए इस गुलामी के साये को तोड़ने के लिए कुछ ऐसे काम करने होंगे. जिसके कारण हम गर्व के साथ आत्मसम्मान के साथ दुनिया के सामने खड़े हों. आज मैं आपको याद दिलाता हूं. 15-17 साल पहले हिंदु्स्तान में जब बजट पेश किया जाता था, तो उसे शाम को पांच बजे पार्लियामेंट में रखा जाता था. आजादी के पचास साल बाद भी ऐसा होता था. किसी ने सोचा ये क्यों ऐसा था. इसलिए था क्योंकि अंग्रेजों के जमाने से परंपरा थी. जब हमारे यहां शाम के पांच बजते थे, तब ब्रिटेन में 11 बजते थे और उस समय उनके यहां संसद का काम शुरू होता था. जब वाजपेयी जी प्रधानमंत्री बने तब यह परंपरा तोड़ी गई औऱ सुबह 11 बजे बजट रखा जाना शुरू हुआ.

हमारी सोच में पता भी नहीं चलता है कि गुलामी किस कदर दबोच रही है. मित्रों इस सोच के सामने एक स्वाभिमान के साथ खड़े होने की आवश्यकता है. भारत को हीन भाव से देखे जाने की आदत सी हो गई है. भारत से हो, चलो बाजू जाओ. जब वाजपेयी जी ने शासन में आने के कुछ ही समय बाद परमाणु बम विस्फोट किया, तो पूरी दुनिया ने लोहा माना. दुनिया अब हिंदुस्तान का नाम सुनती है, तो कहती है, हां कुछ तो है. मित्रों दुनिया के अंदर हमारे देश का कोई नागरिक क्यों न हो. कोई परंपरा क्यों न हो. आज के युग में समय की मांग की. हिंदुस्तान आजाद होने के बाद भी अगर दूसरे देशों को गौरव से देखा जाता हो, तो हमारे हिंदुस्तान को क्यों न देखा जाए

किसी जमाने में चाइना को कौन देखता था. चाइना ने एक शंघाई बना दिया. दुनिया के सामने पेश कर दिया. लोगों की चाइना की तरफ सोचने की आदत बदल गई. ये जो पुराने पर नया चाइना बना, शांघाई के आसपास बना. जापान ने जब बड़ी स्पीड की बुलेट ट्रेन बनाई तो दुनिया ने कहा, अरे भाई कुछ तो है. अमेरिका ने अरबों डॉलर खर्च कर चांद पर भेजा, दुनिया ने लोहा माना.

हमारा भी एक ग्लोबल पोजिशनिंग करना चाहिए. सवा अऱब का देश एक ताकत बनकर उभरना चाहिए। अनेक मार्ग हो सकते हैं. अनेक क्रिया प्रतिक्रिया हो सकती हैं.

आज ये सरदार पटेल का स्मारक सिर्फ...सरदार सरोवर डैम बना, सरदार साहब का सपना पूरा हुआ. वो हमारे गुजरात के थे. मगर ये सपना बहुत बड़ा है. ये भव्य स्मारक. जिसकी ऊंचाई हिंदुस्तान की तरह देखने के लिए मजबूर करेगी.

इतने बड़े राजे रजवाड़ों को एक करने का काम. अंग्रेजों की कुटिल कूटनीति का पर्दाफाश, ये भारत का सामर्थ हम दुनिया के सामने पेश करना चाहते हैं. अगर इतिहास की धरोहर देखें तो चाणक्य के बाद इस देश को एक करने का काम किसी ने किया, तो वह हैं सरदार पटेल.

क्या हम राणा प्रताप का सम्मान करेंगे. हम छत्रपति शिवाजी महाराज का सम्मान करेंगे. हम भगत सिंह, सुखदेव राजगुरु का सम्मान करेंगे. क्या वो बीजेपी के मेंबर थे क्या. क्या उन्हीं का सम्मान होगा देश में, जो भाजपा का सदस्य हो.

दल से बड़ा देश होता है. और देश के लिए मरने वाला हमारे लिए सबसे बढ़कर है. और इसीलिए सरदार साहब को किसी दल के साथ जोड़ना उनका अपमान है. वो दल उनके इतिहास का हिस्सा है. इससे नरेंद्र मोदी भी इनकार नहीं कर सकता.

हमें विरासत को कभी बांटना नहीं चाहिए. हमारी विरासतें सांझी होती हैं. लेकिन देश आजाद होने के बाद गांधी जी छुआछूत के खिलाफ जीवन भर लड़ते रहे. मगर ये जो नई राजनीतिक छुआछूत बढ़ गई है. हम इसे भी नष्ट करें.

मित्रों मुझे दो दिन पूर्व पीएम से मिलने का अवसर मिला. उन्होंने एक बात बहुत अच्छी कही. मैं आभार व्यक्त करता हूं. मीडिया के मित्र समझ नहीं आए. बात उलटी तरफ चली. हो सकता है उनकी रोजी रोटी की डिमांड थे.

पीएम ने कहा कि सरदार साहब सच्चे सेकुलर थे. हम भी कहते हैं कि देश को सरदार साहब वाला सेकुलरिज्म चाहिए. वोट बैंक वाला नहीं. और इसलिए प्रधानमंत्री जी, सरदार साहब का सेकुलरिज्म चाहिए इस देश को.

भारत एक हुआ. राजे रजवाड़े किसी एक संप्रदाय या समाज के नहीं थे. सब अलग अलग परंपराओँ से थे.

इसलिए मित्रों मैं भारत के प्रधानमंत्री का अभिनंदन करता हूं. आग्रह करता हूं. हम सब मिलकर सरदार साहब का सेकुलरिज्म आगे बढ़ाएं

कुछ लोगों के मन में आता होगा क्यों इतना बड़ा स्मारक. बाबा साहेब आंबेडकर, उनके कई स्मारक हैं. मगर मानना पड़ेगा कि दलित शोषित समाज के लिए वह भगवान का रूप हैं. और जो भी पीड़ित दलितों के लिए भला चाहते हैं, उन्हें बाबा साहेब आंबेडकर को प्रेरणा मिलती है. तब ये नहीं पूछा जाता कि वो किस दल से थे. उनका जीवन हमें प्रेरणा देता है.

ये सांझी विरासत है, हम सबको गर्व होना चाहिए. हम सबका दिल देश के लिए होना चाहिए.

नई पीढ़ी को कहा पता चलेगा कि लौह पुरुष कैसे हुए। वो कौन सी शक्ति थी उनके अंदर. हम सरदार साहब का स्मारक बनाने के साथ साथ हिंदुस्तान के कोने कोने में फिर से एक बार एकता का मंत्र पहुंचाना चाहते हैं. हम इस बात से भली भांति परिचित हैं.कि भारत की प्रगति शांति एकता और सदभाव के बिना नहीं हो सकती. मां के दूध में कभी दरार नहीं हो सकती. प्रांतवाद के झगड़े, भाषावाद के झगड़े, जातिवाद और ऊंच नीच के झगड़े. इन चीजों ने हमारे देश को तबाह कर दिया. किसी दल के किसी राजनेता की झोली तो भर गई होगी, लेकिन मेरी भारत मां का गौरव क्षीण हुआ. अगर हमें वो गौरव फिर से हासिल करना है, तो एकता के मंत्र को घर घऱ तक पहुंचाना होगा. इस स्मारक के जरिए सरदार साहब के सपनों का स्मरण करते हुए, उनकी आवाज जिसे कई बरसों से दबोचा गया था. उसे बुलंद करके. कई लोगों ने सरदार साहब की आवाज पहली बार सुनी होगी. रोंगटे खड़े हो गएं. मन में फीलिंग आता है.

हमने सबसे पहले महात्मा मंदिर बनाया. ये मजे की बात है, जब हमने ये मंदिर बनाया. काम अभी भी चल रहा है. लेकिन उस समय हमें किसी ने चैलेंज किया, कि मोदी तुम तो बीजेपी वाले हो, गांधी बीजेपी में नहीं थे. तो क्यों बना रहे हो. मगर जब सरदार साहब की बात आई, तो परेशानी क्यों हो रही है. मित्रों आज गुजरात गर्व महसूस कर रहा है. पहले 31 अक्टूबर को जो सरकारी एड आते थे, उसमें सरदार साहब कहीं नहीं होते थे. आज ऐसा नहीं है. ये गुजरात इफेक्ट है. हमारे महापुरुषों को भुला कैसे दिया जा सकता है.हमारी भी किसी ने आलोचना की हो, तब भी उनके महान कामों की पूजा करना आगे वाली पीढ़ी का काम होता है. हमारी कोशिश है कि हिंदुस्तान की आने वाली पीढ़ी इतिहास को जिए और जाने ये हमारा प्रयास है.

कोई समाज अपने इतिहास को भूलकर के, अपने इतिहास के ग्रासरूट से अगर बिखर जाता है, तो जैसे मूल से उखड़ा हुआ पेड़ कितना भी बड़ा क्यों न हो. वैसे ही समाज की धारा सूख जाती है, इतिहास से उसको ताकत और प्रेरणा मिलती है. रास्ते खोजने को मिलते हैं. हमारे देश के लिए अगर समाज के मन में आवश्यकता है. तो हमारे समाज का इतिहास बोध होना चाहिए.

ये सरदार साहब की प्रतिमा के माध्यम से हम आने वाली पीढ़ी को वो नजराना देना चाहते हैं. भाइयों बहनों ये मूर्ति कैसे बनेगी. इसमें हम दुनिया भर के एक्सपर्ट लगाएंगे. छोटा काम नहीं है. कितनी धातुओं को मिलना होगा.

ये बता देता हूं कि मूर्ति ऐसी बनेगी, जो सदियों तक सलामत रहे. इस काम को हम हिंदुस्तान की एकता के लिए जोड़ना चाहते हैं. इसलिए तिजोरी से रुपये निकाल मूर्ति बन जाए. ये नहीं चाहते. जन जन को जोड़ना चाहते हैं. क्योंकि सरदार साहब ने एकता का काम किया था, वही सरदार साहब का संदेश बन जाए, इसलिए हर गांव को जोड़ना चाहते हैं. उनसे हम कुछ मांग रहे हैं. क्या मांग रहे हैं. कुछ लोगों ने गंदे शब्द प्रयोग किए। उनके दिमाग में गंदगी है.

किसान, उसके घर में तलवार तोप भी है, तब भी वह सबसे ज्यादा किसी को प्रेम करता है, तो खेती के औजार को करता है. उसके लिए वह सबसे ज्यादा मूल्यवान होता है. सरदार वल्लभ भाई पटेल किसान थे, लौह पुरुष थे. सरदार पटेल ने एकता का काम किया था. इसलिए हिंदुस्तान के हर कोने को जोड़ना है. वह किसान थे, इसलिए किसान को जोड़ना है. वह लौह पुरुष थे, इसलिए लोहे को मांगना है. हमने हर गांव पंचायत से प्रार्थना की है. कि किसान ने खेत के अंदर जिस औजार का प्रयोग किया है. वो औजार जो भारत मां की गोद में खेला है. जिसने गरीब के पेट को भरने के लिए भारत मां के साथ कष्ट झेला है. मुझे तोप नहीं चाहिए. मुझे तलवार चाहिए. मुझे तो मेरे किसान ने खेत में जो औजार इस्तेमाल किया है, उसका टुकड़ा चाहिए. उसे पिघलाएंगे. अच्छे से अच्छा स्टील निकालेंगे. उस लोहे का अर्क उस मूर्ति में जगह पाएगा, तब हिंदुस्तान का हर नागरिक कहेगा, मेरा गांव भी इसमें है.

हम गांव के मुखिया के तस्वीर लेंगे, गांव का छोटा सा इतिहास लेंगे. पूरा स्मारक बनेगा, उसमें एक वर्चुअल वर्ल्ड होगा, जिसमें हिंदुस्तान के सात लाख गांवों की तस्वीर होगी, कथा होगी, कोई पचास साल बाद आएगा, तो अपने गांव का इतिहास देखेगा.ये पवित्र काम हम करेंगे.

आज देश में ताज महल देखने के लिए यात्री आते हैं. अमेरिका में स्टेचू ऑफ लिबर्टी देखने के लिए यात्री जाएंगे. हम चाहते हैं ये पूरे विश्व के लिए महान केंद्र बने. हमारी ऊंचाई को देखे. इस देश की ऊंचाई को नापे. और जब ये पूरा स्मारक बनेगा. हम देशवासियों के लिए वह प्रेरणा का तीर्थ होगा. विश्व भर के लिए प्रवासन का धाम बन जाएगा. हर एक को अपने अपने लिए जो चाहिए वो मिलेगा.

इस स्मारक में भारत के भविष्य को हमने जोड़ा है. देश में आदिवासियों के कल्याण के लिए चाहे जिस सरकार ने जो काम किए हों. उन सबको हम संग्रहित करना चाहते हैं. मेरे आदिवासी भाई बहनों के जीवन में नया उमंग उत्साह कैसे आए, वे संपन्न कैसे बनें. अगुवा कैसे बनें. उसके रिसर्च का काम भी इसी स्मारक के तहत हो.
ये देश गांव का देश है. पटेल किसान पुत्र थे. किसान के कल्याण के लिए कौन से नए विज्ञान की जरूरत है, गांव आधुनिकता की तरफ कैसे बढ़े. किसान आधुनिकता के मार्ग को कैसे आगे बढ़ाए. ये उनको शिक्षा दीक्षा कैसे मिले, एग्रीकल्चर के लिए. गांव गरीब किसान के लिए. ये काम भी हम इससे जोड़ना चाहते हैं.

मित्रों दुनिया में इस काम को करने वाली श्रेष्ठ कंपनियों को बुलाया है. तीन साल पहले उस कल्पना को सामने रखा. उसे साकार करने के लिए एक्सपर्ट आए. तीन साल उसके पहलुओं की बारीकी में लगे. तब जाकर हम इसे आगे बढ़ा रहे है. जब हमने पहली बार कहा था इस काम का. मुझे कच्छ के लोगों ने चांदी से तौलकर भेंट दी थी. मैंने पूछा, भई अभी इतनी जल्दी क्यों दे रहे हो. अभी तो योजना बन रही है. तब कच्छ के लोगों ने जवाब दिया. मोदी जी, अगर सरदार साहब न होते, इस बांध का सपना न देखा होता, तो हमारे कच्छ में पानी न पहुंचता, हम उनके कर्जदार हैं. मुंबई गया. वहां चांदी से तौला, वह भी इसी में लगेगा.

हमें हिंदुस्तान के जन जन को जोड़ना है. शासन, जन देश की शक्ति, भारत सरकार की शक्ति सबको जोड़ना है. धरती भले गुजरात की हो, सपना हिंदुस्तान का है.

हम कई बरसों से कह रहे हैं कि सरदार सरोवर बांध का काम पूरा हो. मगर कुछ लोग हैं, जो बयान नहीं देते, पेट में रोटी नहीं जाते. कुछ मित्रों ने मोदी को समाप्त करने की सुपारी फैलाई है. पता नहीं क्या क्या गंध फैलाते रहते हैं.

मुझे पता कि पीएम की टीम हर शब्द सुनती है, उनके बॉस की टीम सुनती है. इसलिए मैं कहना चाहता हूं, सरदार सरोवर डैम में बस गेट लगाना बाकी है. बाकी काम हो चुका है. गेट के बाद ही सबसे ज्यादा पानी भरेगा. कई बार पीएम से मिला. कहा, तीन साल लगेंगे. बंद मत करने देना, खड़े तो करने तो, मिले पीएम तो बोले कि बात तो आपकी समझने की है. एक साल बाद मिला, तो बोले कि अरे अभी तक नहीं हुआ. फिर मिले तो फिर वही बात.

इतना ही नहीं एमपी वगैरह में पुनर्वास को देखने के लिए पूर्व जजों की अध्यक्षता में कमेटी हो. भले महाराष्ट्र में कांग्रेस की और बाकी दो में हमारी सरकार हो. इन तीनों राज्यों ने पुनर्वास का काम पूरा कर दिया. भारत सरकार की कमेटी ने स्वीकार कर लिया. मौखिक रूप से कहा, अखबारों में छपा. अब बस मीटिंग बुलाकर फाइनल ऑर्डर देना है. गेट बना लीजिए. पिछले आठ महीनों से रुका पड़ा है. मैं अफसरों से कहता हूं. पूछो क्या तकलीफ है.साहब आप समझते तो हैं. मैं खुला बोलूं. समझ गए न. मुझे नहीं बोलना.

इसीलिए काम रुका है. मैं आज फिर नर्मदा मैया के तट से पीएम को आग्रह करता हूं. महाराष्ट्र गुजरात को पानी चाहिए. मध्य प्रदेश को बिजली चाहिए. महाराष्ट्र का चार सौ करोड़ मिल जाएगा.

मैं यहां बड़ा शिलालेख लगाने को तैयार हूं. ये काम केंद्र सरकार ने किया. मोदी का नाम भी मत लो. कम से कम डैम का काम पूरा करने की इजाजत दो. ऐसे काम में राजनीति नहीं होनी चाहिए. भाइयों बहनों मैं आशा करता हं. इस नर्मदा के तट पर, गुजरात के पशुओं की, गरीबों की, किसानों की, पेड़ पौधों की आवाज देश के प्रधानमंत्री तक पहुंचेगी. दल से बड़ा देश होता है, ये भाव उनके मन में जगेगा और भारत के लिए इतना बड़ा अच्छा काम, पूरा करें, गर्व करें, रिबन कटें. वो चाहें तो मैं आऊंगा नहीं. मैं आज कहता हूं आपका है. आप आनंद कीजिए, मगर पूरा कीजिए.

भाइयों बहनों, आज जब हम एकता का मंत्र लेकर चले हैं, तब देश को जोड़ना ये सपना लेकर चले हैं तब, सरदार पटेल के भव्य स्मारक का निर्माण करने जा रहे हैं तब, विश्व का सबसे ऊंचा स्टेचू ऑफ लिबर्टी से दो गुना बड़ा, उसका निर्माण करने जा रहे हैं तब, एकता का स्मारक है, एकता का संदेश है, भाषा अनेक, भाव एक, राज्य अनेक, राष्ट्र एक, पंथ अनेक, लक्ष्य एक. बोली अनेक, स्वर एक, रंग अनेक, तिरंगा एक, समाज अनेक, भारत एक, रिवाज अनेक, संस्कार एक, कार्य अनेक, संकल्प एक, राह अनेक, मंजिल एक, चेहरे अनेक, मुस्कान एक. ये एकता का संदेश हम लेकर चले और भाइयों बहनों. ये भारत की विशेषता है,विविधता में एकता.
हम अनेक संप्रदाय पंथ बोली भाषा होंगे, हम सब एक हैं.हमारी एकता की गारंटी ही. हमारे उज्जवल भविष्य की गारंटी है. इस स्मारक से सदियों तक एकता को बनाए रखने का काम इसी तीर्थ क्षेत्र से मिले.

मैं आदरणीय आडवाणी जी का बहुत आभारी हूं. सरदार साहब से उनका लगाव रहा है. इस महान काम में उनका आशीर्वाद मिले, इसके लिए आभारी हूं. देश से प्रार्थना है, हर गांव मिलकर जिम्मेदारी ले. 15 दिसंबर को उनके जम्मदिन के दिन रन फॉर यूनिटी है, देश के नौजवान दौड़ें. हर स्कूल कॉलेज में भाषण हों. निबंध प्रतियोगिता हों. पूरे देश में एकता का ही माहौल बने.

राष्ट्रयाम जाग्रयाम वयम. एकता के लिए निरंतर जागरण चाहिए. पुण्य स्मरण चाहिए. एकता के लिए एक होकर चलना चाहिए. सोचना चाहिए, इस मंत्र को पहुंचाने के लिए आज पवित्र काम का प्रारंभ हो रहा है.
दोनों हाथ ऊपर कर पूरी ताकत से बोलिए, सरदार पटेल अमर रहें.

बुधवार, 30 अक्तूबर 2013

अमेरिकी में दिवाली








**अमेरिकी में दिवाली**
अमेरिकी कांग्रेस में हिंदू पुजारियों के वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच अमेरिकी कांग्रेस में बुधवार को पहली बार दिवाली मनाई गई। जाने-माने भारतीय अमेरिकियों समेत दो दर्जन से अधिक सांसदों ने कैपिटल हिल पर पारंपरिक दीये जलाए।
कांग्रेशनल कॉकस ऑन इंडिया एंड इंडियन अमेरिकन्स के दो सह अध्यक्षों एवं सांसदों जोए क्राउले और पीटर रोसकॉम ने भारतीय अमेरिकी समुदाय की बढ़ती मौजूदगी को ध्यान में रखते हुए कैपिटल हिल में अपनी तरह का यह पहला कार्यक्रम आयोजित किया। इस अवसर पर भारत-अमेरिकी साझेदारी की महत्ता पर भी प्रकाश डाला गया।
प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेटिक पार्टी की नेता नैन्सी पेलोसी ने कहा कि मैं यहां दिवाली की शुभकामनाएं देने आई हूं। अमेरिका भारत का बहुत आभारी है, क्योंकि हमारा नागरिक अधिकार आंदोलन भारत के अहिंसा आंदोलन से प्रेरित था। क्राउले ने कहा कि यह वास्तव में एक ऐतिहासिक घटना है। रोसकॉम ने कहा कि जब हम भारत और अमेरिका के मजबूत होते संबंधों को देखते हैं तो हम पाते हैं कि ये बेहतरीन संबंध हैं और भविष्य के लिए फायदेमंद हैं।

मंगलवार, 29 अक्तूबर 2013

सरदार वल्‍लभभाई पटेल,प्रधानमंत्री होते तो इतिहास कुछ ओर होता



अहमदाबाद। सरदार वल्‍लभभाई पटेल संग्रहालय के उद्घाटन के अवसर पर भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और गुजरात के मुख्‍यमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक साथ मंच पर अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई। इस दौरान गुजरात की राज्‍यपाल कमला बेनीवाल, केंद्रीय मंत्री प्रफुल्‍ल पटेल और कई पूर्व नेता मौजूद थे। इस अवसर पर मोदी ने कहा कि 'हम प्रधानमंत्री को इस अवसर पर आने के लिए धन्‍यवाद देते हैं और उन्‍होने जो गुजरात सरकार के विकास कार्यों की समय समय पर सराहना की, पुरस्‍कृत किया, उससे हमारा उत्‍साह बढ़ा। मोदी ने कहा कि आज भी हमारे देश के सामने आतंकवाद, नक्‍सलवाद जैसी बड़ी समस्‍याएं है, जिनसे हमें जूझना पड़ रहा है, ऐसे में जरूरी है कि हम अपने देश के युवाओं को सही दिशा दिखाएं जिससे कि वह हिंसा का रास्‍ता छोड़ सकें। हमें युवाओं को बताना होगा कि गोली और बंदूकों से देश और समाज की तरक्‍की नहीं होती है। मोदी ने सरदार पटेल के बारे में कहा कि वह सही मायने में भारत की एकता के प्रतीक हैं। उनके पास देश के विकास का एक मॉडल था। अगर वह देश के पहले प्रधानमंत्री होते तो देश का इतिहास आज कुछ दूसरा होता। हम यहां उनके योगदान को सम्‍मानित करना चाहते हैं। वहीं इस मौके पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि मैं वल्‍लभ भाई पटेल की कांग्रेस में रहकर गर्व महसूस करता हूं।

 

सोमवार, 28 अक्तूबर 2013

पटना : पांच नहीं पांच हजार लोगों को मारने की थी साजिश

हमनें आज सुबह ही कहा था कि मूल योजना हसंदों हजारों को भगदड़ मचा कर मारनें की थी यह भाजपा कि कुशल रणनीति रही कि उन्होंने भगदड़ नहीं मचानें दी। सायंकाल तक इस कि पुष्टि हो गई !! यह एक बहुत बड़ी साजिस हे मोदी की सभाओं को रोकनें की , इसकी पूरी ईमानदारी से जाँच होनी चहिये। इसके अलावा यह भारतीय लोकतंत्र पर हमला है।  उसे प्रभावित करनें कि कोशिस हे।

पांच नहीं पांच हजार लोगों को मारने की थी साजिश, पढ़ें क्या थी योजना!
राजेश कुमार ओझा   |  Oct 28, 2013
http://www.bhaskar.com/article/BIH-PAT-five-hadred-no-plans-to-kill-five-thousand-bihar-patna-news-4417835-PHO.html
पटना। गांधी मैदान में पांच नहीं पांच हजार को मारने की योजना थी। इसलिए आतंकी गांधी मैदान की जगह मैदान के बाहर विस्फोट करा रहे थे। लेकिन नरेंद्र मोदी को देखने और सुनने आए लोगों के उत्साह के कारण इनके मंसूबे पर पानी फिर गया। सीरियल बम ब्लास्ट का मास्टर माइंड इम्तियाज ने गिरफ्तारी के बाद ये बात पटना पुलिस के सामने स्वीकार किया है। अपनी योजना को अंजाम देने के लिए इम्तियाज अपने छह सात साथियों के साथ पिछले कई दिनों से पटना में रूका था। पुलिस सूत्रों के अनुसार घटना को अंजाम देने के लिए आइएम ने दस्ते के सदस्य को पांच-पांच लाख रूपए दिए थे।

इम्तियाज ने पुलिस को बताया कि हम लोग प्रति दिन गांधी मैदान जाया करते थे। अपनी योजना को अंजाम देने के लिए भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ बैठकर उनकी पूरी योजना को जानने के बाद अपनी रणनीति पर मंथन किया करते थे। इसके लिए पटना के कुछ स्थानीय लोगों की हम लोगों ने मदद लिया था। पुलिस को फिलहाल स्थानीय लोगों की खोज है जिसने उनकी मदद की है।

पुलिस सूत्रों की माने तो इम्तियाज के पास से जो कागजात और फोन नंबर मिले हैं वो आइएम की ओर इशारे कर रहे हैं। इसके  साथ हो गिरफ्तार इम्तियाज आतंकी तहसीन और मोनू को भी पहचानता है। उसने पुलिस को कहा भी है कि वो मेमन कहने पर ही इस काम के किया। मेमन शुरू से लेकर घटना के अंत तक इनके संपर्क में भी रहा। इससे भी पुलिस को घटना के पीछे आइएम को जोड़कर अपनी जांच कर रहा है।

बहरहाल पुलिस को घटना का मुख्य आरोपी बकार की तलाश है। जिसने पूरी घटना का अंजाम का नेतृत्वकर्ता था। वो दो दिन पहले से पटना में था और पटना आए आइएम के सदस्यों को घटना को अंजाम देने के लिए फोन पर ही दिशा निर्देश दे रहा था। वे मैदान के अंदर विस्फोट करवाने के पक्ष में नहीं थे।

आइएम का मानना था कि मैदान में विस्फोट कराना ज्यादा खतरनाक है और इससे हताहात भी कम लोग होंगे, लेकिन रैली में आए लोगों को भयभीत करा कर भगदड़ मचा दिया जाए तो कम खतरा लेकर ज्यादा बड़ी घटना को अंजाम दिया जा सकता है। उनकी इस योजना पर ही उनके दस्ते के लोगों ने ये काम किया। संयोगवश भगदड़ नहीं मची जिसके कारण पांच ही लोगों की मौत हुई ।

सुनो केंद्र सरकार,मोदी की जान को खतरा वास्तव में है

सुनो केंद्र सरकार , मोदी की जान को खतरा वास्तव में  है ………………

यह तो सच ही हे कि बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार ने व्यक्तीगत द्वेष के चलते , राजधर्म निभाने में कोताही बरती , जो उन्हें बहुत महंगा पड़ा , आज उनकी निंदा  का मुख्यकारण यही रहा कि , उन्होंने अपनी जिम्मेवारी को गंभीरता से नहीं  लिया !! केंद्र सरकार भी यह कह कर पल्ला नहीं झाड़ सकती कि हमनें एलर्ट जारी कर दिया था , आप पर सूचना थी तो आपनें रोकने के लिए क्या किया !! सो गए या भूल गए !!!
      अब यह भी ध्यान रहे कि " आप राजनैतिक द्वेष में यह मत भूल जाना कि मोदी जी की जान को बाकई में खतरा है और उनकी रक्षा करना आपका राजधर्म है !!!!!"



'मोदी आतंकियों के निशाने पर, 23 को बिहार पुलिस को भेजा गया अलर्ट'
2013-10-28
नई दिल्ली: बिहार में नरेंद्र मोदी की रैली में हुए सीरियल ब्लास्ट को लेकर नीतीश सरकार की पोल खुल गई है। जांच एजेंसी इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के मुताबिक 23 अक्टूबर को बिहार पुलिस को आगाह किया गया था। आईबी के मुताबिक कई आतंकी संगठनों के निशाने पर मोदी हैं। आईबी ने बताया ये सुराग आईएम के पकड़े गए लोगों के जरिए मिले थे। आईबी के मुताबिक मोदी की रैली में गडबड़ी की आशंका पहले से ही थी।
अब सवाल ये है कि अगर बिहार पुलिस को मोदी की रैली के पहले से ही आईबी का अलर्ट था तो पुलिस ने कड़े सरक्षा के बंदोबस्त क्यों नहीं किए। उधर बिहार के मुक्यमंत्री नीतीश कुमार ऐसा क्यों कहा कि केंद्र सरकार की ओर से किसी तरह का कोई अलर्ट नहीं जारी किया गया था।
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धमाकों पर भाजपा ने खोली नीतीश सरकार की पोल
2013-10-28
नई दिल्ली: पटना में भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी की रैली से पहले हुए सीरियल बम ब्लास्ट को लेकर भाजपा ने बिहार की नीतीश सरकार की पोल खोल कर रख दी है। भाजपा के वरिष्ठ नेता अरूण जेटली ने दावा किया है कि नीतीश सरकार को 23 तारीख को ही केंद्र सरकार से सुरक्षा का अलर्ट जारी कर दिया गया था, उसके बावजूद बिहार सरकार ने मोदी की रैली को लेकर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए, जिसकी वजह से इन धमाकों को एक के बाद एक अंजाम दिया गया।

अरूण जेटली ने कहा कि अलर्ट के बाद भी नीतीश कुमार सोते रहे। इससे पहले नीतीश कुमार ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ कहा था कि उनको किसी प्रकार का कोई अलर्ट जारी नहीं किया गया था। लेकिन भाजपा ने नीतीश के इस बयान पर नीतीश सरकार पर हमला करते हुए उनकी पोल खोल दी है। इस घटना में 6 लोगों की मौत और 102 लोग घायल अभी तक घायल हैं।

उन्होंने कहा कि खुफिया ब्यूरो (आईबी) ने 1 अक्तूबर को बिहार के पुलिस महानिदेशक सहित विभिन्न राज्यों को लिखे पत्र में आम चेतावनी जारी की थी कि इंडियन मुजाहिदीन कुछ शहरों पर हमले की योजना बना रहा है। उनके अनुसार, ‘‘23 अक्तूबर को आईबी ने बिहार पुलिस को खासतौर पर चेतावनी दी कि नरेन्द्र मोदी की पटना रैली को इंडियन मुजाहिदीन के आतंकी निशाना बना सकते हैं।’’

‘‘रैली स्थल, गांधी मैदान में ना मेटल डिटेक्टर लगाए गए, ना जैमर और ना ही वहां आने वालों की जामा तलाशी ली गई, जबकि ऐसे बड़े आयोजनों में यह प्रक्रिया अपनाया जाना सामान्य बात है। मोदी की दिल्ली और राजस्थाना रैलियों तक में वहां की सरकारों ने यह प्रक्रिया अपनाई, लेकिन पटना में ऐसा नहीं किया गया।’’ नीतीश सरकार पर उन्होंने मोदी रैली की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर ‘‘संवेदनहीन, लापरवाह और उदासीन रवैया’’ अपनाने का आरोप लगाया।

उधर ब्लास्ट को लेकर सुशील मोदी ने कहा नरेंद्र मोदी को नीतीश राजनीतिक विरोधी नहीं समझते बल्कि उन्हें नीतीश राजनीतिक दुश्मन समझते हैं। सुशील ने कहा आतंकियों का निशाना केवल भीड़ नहीं था बल्कि नरेंद्र मोदी भी आतंकियों के निशाने पर थे। उन्होंने कहा नीतीश का राग द्वेष की राजनीति है। उन्होंने इस मामले को लेकर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से जवाब मांगा।

रविवार, 27 अक्तूबर 2013

पटना हुंकार रैली में : विस्फोट से अप्रभावित नरेन्द्र मोदी



पटना में मोदी ने नीतीश को अवसरवादी कहा
पटना, 27-10-13 एजेंसी
http://www.livehindustan.com
रैली स्थल गांधी मैदान के पास विस्फोट से अप्रभावित नरेन्द्र मोदी ने अपने घोर विरोधी नीतीश कुमार पर करारा प्रहार करते हुए उनपर अवसरवादी तथा प्रधानमंत्री बनने का सपना पूरा करने के लिए जयप्रकाश नारायण, राममनोहर लोहिया तथा राज्य के लोगों को धोखा देने का आरोप लगाया।  
राजग गठबंधन में जदयू के साथ रहने तक नीतीश कुमार द्वारा बिहार से दूर रखे जाने के बाद पहली बार बिहार आने पर भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार ने भाजपा के साथ गठबंधन तोड़ने के लिए नीतीश को बार बार निशाना बनाया और कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री, कांग्रेस के साथ आंख मिचौली खेल रहे हैं जिसके खिलाफ उनके गुरु जयप्रकाश नारायण और लोहिया जीवन भर संघर्ष करते रहे क्योंकि वह प्रधानमंत्री बनने का सपना देख रहे हैं।

लोगों से खचाखच भरे गांधी मैदान में हुंकार रैली को संबोधित करते हुए नरेन्द्र मोदी ने कहा कि जिसने जेपी (जयप्रकाश नारायण) को छोड़ दिया हो, वह बीजेपी को क्यों नहीं छोड़ सकता है। जिस व्यक्ति (जेपी, लोहिया) ने जीवन भर देश को कांग्रेस से मुक्त बनाने के लिए संघर्ष किया और दूसरा (नीतीश) जो
लोहिया का अनुयायी होने का दावा करता हो, उसने पीठ में छुरा घोंपा है और अब वह कांग्रेस के साथ आंख मिचौली खेल रहा है।

मोदी ने कहा कि उनके अनुयायी माफ कर सकते हैं (नीतीश को) लेकिन लोहिया और जेपी की आत्मा उनके कृत्य को कभी माफ नहीं कर सकती। नीतीश का नाम लिए बिना मोदी उन्हें बार बार मेरे मित्र के रूप में संबोधित करते रहे और पिछले विधानसभा चुनाव में प्रचार के लिए नहीं आने देने के लिए निशाना साधते हुए कहा कि वह इसलिए अपमान सहते रहे क्योंकि वह नहीं चाहते थे कि बिहार में जंगल राज दोबारा आए।

भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार ने 40 मिनट के अपने भाषण में भोजपुरी, मैथिली और मगही का भी उपयोग किया जो राज्य की तीन प्रमुख बोलियां हैं। मोदी के संबोधन से पहले पटना में कई विस्फोट हुए जिसमें से पांच रैली स्थल के पास हुए। इसमें पांच व्यक्तियों की मौत हो गई जबकि कई अन्य घायल हो गए। मोदी ने अपने भाषण में विस्फोट का जिक्र नहीं किया लेकिन लोगों से सुरक्षित घर जाने की अपील की।

बिहार के मुख्यमंत्री पर चुटकी लेते हुए मोदी ने एक घटना का जिक्र किया, जब वह उनके साथ दिल्ली में प्रधानमंत्री के समेत टेबल पर बैठे थे और नीतीश खाना नहीं खा रहे थे, असहज थे और इधर उधर देख रहे थे। उन्होंने कहा कि मैं माजरा समझ गया और उनसे (नीतीश) कहा कि यहां कोई कैमरा नहीं है, आप खाना खा सकते हैं। यह पाखंड की हद है।

गुजरात के मुख्यमंत्री ने कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि वह सम्प्रदायिकता के नाम पर लोगों को भ्रमित कर रही है। हिन्दू मुस्लिम एकता की वकालत करते हुए मोदी ने कहा कि उनमें से कोई नहीं चाहता है कि हम एक दूसरे से लड़े। गरीबी को समाप्त करने के लिए हम सबको मिलकर लड़ने की जरूरत है।

राहुल को शहजादा संबोधित करने पर कांग्रेस की आपत्ति का जवाब देते हुए भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार कहा कि अगर कांग्रेस वंशवाद को छोड़ दे तब वह राहुल गांधी को शहजादा कहना छोड़ देंगे। मोदी ने यहां हुंकार रैली को संबोधित करते हुए कहा कि कांग्रेस के मित्र बहुत परेशान है कि मोदी शहजादा क्यों कह रहे हैं। उन्हें नींद नहीं आती है। लेकिन मैं पूछता हूं कि शहजादा कहने की नौबत क्यों आई।

नरेन्द्र मोदी ने कहा कि जितना कांग्रेस इस वाक्य से अपमानित महसूस कर रही है, उतना ही लोग राजशाही शासन को नापसंद करते हैं। उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस वंशवाद को छोड़ने का वायदा करे, तब मैं शहजादा कहना बंद कर दूंगा। मोदी ने कहा कि जयप्रकाश नारायण ने जीवनभर लोकतंत्र के लिए संघर्ष किया और जेल गए। उन्होंने कहा कि आज लोकतंत्र के चार शत्रु हैं- राजशाही राजनीति, जातपात, साम्प्रदायिक राजनीति और अवसरवाद। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि लोकतंत्र के ये चारों शत्रु बिहार की राजनीति और संप्रग में मौजूद हैं।

बिहार के चंपारण से अंग्रेजों को भगाने का आहवान करने के संबंध में महात्मा गांधी को याद करते हुए मोदी ने देश से कांग्रेस और बिहार से जदयू को उखाड़ फेंकने का वादा करने का लोगों से आह्वान किया। भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार ने भ्रष्टाचार, महंगाई, गरीबी तथा विकास नहीं होने और सुरक्षा की खराब स्थिति के लिए संप्रग सरकार पर निशाना साधा।

मोदी ने कहा कि देश बदलाव चाहता है। सभी ओर कीचड़ उछाला गया है। लेकिन मैं आपको बताना चाहता हूं कि जिनता कीचड़ आप उछालेंगे, उतना ही कमल खिलेगा। नीतीश पर हमला जारी रखते हुए उन्होंने कहा कि उनके विचार अच्छे नहीं है। अपने चाटुकारों की सलाह, जिन्होंने उनसे कांग्रेस से हाथ मिलाने को कहा क्योंकि उनके प्रधानमंत्री बनने का मौका था, वह सपना देखने लगे।

मोदी ने उपस्थित लोगों से पूछा, नीतीश ने न केवल भाजपा को धोखा दिया बल्कि बिहार के लोगों को भी धोखा दिया। यह आपसे विश्वासघात है, क्या ऐसा नहीं है लोगों ने हां में जवाब दिया। गुजरात के मुख्यमंत्री ने बताया कि किस तरह से उनकी पार्टी ने 1999 में अधिक विधायक होने के बादजूद जंगल राज के खात्मे के लिए कुमार के पूर्व दल समता पार्टी के पक्ष में मुख्यमंत्री पद का बलिदान किया था।

मोदी ने कहा कि भाजपा ने मेरे मित्र (नीतीश) के पक्ष में बिहार से जंगल राज के खात्मे के लिए सुशील कुमार मोदी को मुख्यमंत्री बनाए जाने के अवसर को कुर्बान कर दिया था। उन्होंने कहा कि बिहार से पार्टी के कई नेताओं के बार बार के आग्रह के बावजूद वह राजग की एकता और राज्य की भलाई के लिए बिहार से दूर रहे और भाजपा ने हमेशा एकजुटता का प्रयास किया।

भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार ने कांग्रेस पर महंगाई का पाप करने का आरोप लगाया जिसके कारण लोगों की कमर टूट गई है। उन्होंने कहा कि योजना आयोग ने रिपोर्ट पेश की है जिसमें कहा गया है कि एक व्यक्ति को 26 रूपये में दो वक्त का खाना मिल सकता है। उन्होंने लोगों से पूछा कि क्या आपको 26 रुपये में दो वक्त का खाना मिल सकता है। 26 रुपये में तो कुछ कप चाय भी नहीं खरीदे जा सकते हैं।

स्वयं को गरीब परिवार से आने का उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा कि सत्तारूढ़ पार्टी के लोगों को गरीबी के बारे में पता ही नहीं है। लेकिन मैं जानता हूं मैं गरीब परिवार में पैदा हुआ हूं, गरीबी देखी है और जिया है, मैंने रेलवे स्टेशन पर, ट्रेनों में चाय बेचा है, जो लोग ट्रेने में चाय बेचते हैं, वे मंत्री से अधिक रेलवे की समस्या समझ सकते हैं।
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मोदी ने बिहार को दिया स्पेशल आर्थिक पैकेज का आश्वासन
27-10-13 पटना, एजेंसी

पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने लोगों को आश्वस्त किया कि उन्हें स्पेशल आर्थिक पैकेज मिलेगा और इस पैकेज के मिलने में महज 200 दिन बचे हैं।
उन्होंने कहा कि भाजपा बिहार के लिए 50 हजार करोड़ के आर्थिक पैकेज की मांग करती आ रही है और अगर देश में भाजपा की सरकार बनी तो यह पैकेज बिहार को मिलकर रहेगा।

नीतीश कुमार ने बिहार की जनता के साथ विश्वासघात किया है और इसकी सजा उन्हें मिलेगी। मोदी ने उनपर टिप्पणी करते हुए कहा कि जो आदमी जेपी यानी जयप्रकाश नारायण को छोड़ दिया, वह बीजेपी को क्यों नहीं छोड़ेगा।

मोदी ने कहा कि मुसलमानों को हिंदुओं के खिलाफ नहीं, बल्कि गरीबी के खिलाफ लड़ाई लड़नी चाहिए और ऐसा तब होकर जब मुसलमान और हिंदू दोनों मिलकर चलेंगे और इस दिशा में काम करेंगे।

नीतीश कुमार पर हमला करते हुए मोदी ने भोजपुरी में भाषण की शुरुआत करते हुए कहा कि बिहार के लोग कुछ अपवादों को छोड़कर अवसरवादी नहीं होते।

भोजपुरी के बाद मोदी ने मैथिली में भाषण देते हुए मिथिला की समस्याओं खासकर बाढ़ का जिक्र किया। उन्होंने बिहार के गौरव का जिक्र किया और कहा कि यह राज्य लोकतंत्र की भी जननी है और इस राज्य ने बड़े बड़े शूरमाओं को पैदा किया।

मोदी ने कहा कि महात्मा गांधी ने भी अपना सत्याग्रह बिहार के चंपारण से ही शुरू किया था।

मोदी ने कहा कि कुछ समय पहले लालू प्रसाद के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद उन्होंने उन्हें फोन किया और कुशलक्षेम पूछा। उन्होंने यादवों को संकेत देते हुए कहा कि कृष्ण के वंशजों का वह खास ख्याल रखेंगे।

उन्होंने कहा कि जिस समय बिहार में नीतीश कुमार की सरकार बनी थी, उस समय भाजपा के पास जदयू की तुलना में दोगुने विधायक थे, लेकिन भाजपा ने नीतीश को मुख्यमंत्री बनाने का फैसला किया। ऐसा इसलिए किया गया ताकि बिहार से लालू प्रसार का जंगल राज खत्म करना था।

उन्होंने कहा कि नीतीश और बीजेपी की मिलीजुली सरकार में अगर कुछ मंत्रियों ने राज्य की तरक्की के लिए काम किया, तो वे भाजपा के मंत्री थे।

उन्होंने कहा कि वह भाजपा के स्थानीय नेताओं के आग्रह के बावजूद वह पिछले चुनावों में बिहार आने से मना कर दिया, क्योंकि उन्हें फिक्र इस बात की थी कि कही बिहार में फिर से जंगल राज नहीं आ जाए। वह चाहते थे कि बिहार में सुशासन जारी रहे और नीतीश का नेतृत्व जारी रहे।

मोदी ने कहा कि नीतीश का भाजपा से संबंध तोड़ना विश्वासघात है और इसकी सजा बिहार की जनता उन्हें देगी। उन्होंने लोगों से कहा कि वह इसकी सजा आने वाले चुनाव में संबंधित व्यक्ति को मिलनी चाहिए।


नरेंद्र मोदी की रैली से पहले पटना में सीरियल ब्लास्ट



यह नितीश सरकार की सबसे बड़ी विफलता है !
दूसरे नितीश और कांग्रेस से निष्पक्ष जाँच की आशा नही की जा सकती।
पूरे मामले की जांच न्यायालय की देख रेख में होनी चाहिए ।
- अरविन्द सिसोदिया




नरेंद्र मोदी की रैली से पहले पटना में सीरियल ब्लास्ट
Published: October 27, 2013
नरेंद्र मोदी की हुंकार रैली से पूर्व रेलवे स्टेशन के परिसर में स्थित शौचालय में पहला धमाका हुआ, जहां घायल हुए शख्स ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। रैली के स्थान गांधी मैदान में एक के बाद एक पांच बम धमाके हए। सभी धमाके देसी बम से किए गए।
रविवार को बिहार में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी की सभा से पहले हुए सीरियल बम ब्लास्ट ने प्रशासन में खलबली मचा दी। किसी अनहोनी की आशंका के चलते प्रशासन सतर्क हो गया। क्षेत्राधिकारी राजेश चौधरी के नेतृत्व में रोडवेज बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और शहर के प्रमुख मंदिर, मस्जिदों की चेकिंग कराई गई। मंदिर-मस्जिदों के बाहर पुलिस फोर्स तैनात कर दिया गया।

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पटना विस्फोट की जांच एनएसजी, एनआईए के जिम्मे
Bhasha, अक्टूबर 27, 2013

नई दिल्ली: केंद्रीय गृह राज्य मंत्री आरपीएन सिंह ने रविवार को कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की टीमें पटना बम विस्फोट की जांच के लिए बिहार की राजधानी रवाना की जा रही हैं।
विस्फोटों को दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए मंत्री ने संवाददाताओं से कहा, "गृह मंत्रालय ने विस्फोटों के पूरे परिदृश्य की जांच के लिए एनएसजी और एनआईए के दल बिहार भेजने का फैसला किया है।" उन्होंने कहा कि ये विस्फोट कम तीव्रता वाले थे। सिंह ने बिहार सरकार को भी आश्वासन दिया कि जांच में केंद्र सरकार पूरी मदद करेगी।
सिंह ने कहा कि सरकार के पास इन विस्फोटों के बारे में कोई खुफिया सूचना उपलब्ध नहीं थी, यद्यपि बड़े त्योहारों के समय किसी दुर्भाग्यपूर्ण घटना की आशंका अवश्य थी। उन्होंने मोदी की रैली में और उसके पहले हुए बम विस्फोटों का राजनीतिकरण न करने का आग्रह किया।

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नीतीश ने शृंखलाबद्ध विस्फोटों की निंदा की, साजिश की जताई आशंका
Bhasha, Last Updated: अक्टूबर 27, 2013
पटना: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी की पटना में आयोजित रैली से पूर्व हुए शृंखलाबद्ध विस्फोटों की निंदा की और अपना मुंगेर का निर्धारित दौरा रद्द कर दिया।
यहां जारी एक आधिकारिक वक्तव्य के अनुसार कुमार ने पुलिस को तुरंत मामले की जांच शुरू करने का निर्देश दिया और कहा कि जांच में राष्ट्रीय जांच एजेन्सी (एनआईए) की सहायता ली जाएगी।

मुख्यमंत्री कार्यालय के सूत्रों के अनुसार कुमार को अंतरराष्ट्रीय योग सम्मेलन के लिए मुंगेर जाना था लेकिन पटना में हुए विस्फोटों को देखते हुए यह यात्रा रद्द कर दी गई। सूत्रों के अनुसार कुमार ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से भी फोन पर बात की और उन्हें विस्फोटों के बारे में जानकारी दी।

सूत्रों ने बताया कि मुख्यमंत्री का काफिला एक अणे मार्ग पर खड़ा था और उन्हें हवाई अड्डे के लिए रवाना होना था लेकिन उनकी यात्रा रद्द कर दी गई। मुख्यमंत्री को मुंगेर से नालंदा जिले के राजगीर जाना था और वहां सोमवार से शुरू हो रहे जनता दल (यू) के सम्मेलन में भाग लेना था।
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पीएम ने पटना विस्फोट की निंदा की, नीतीश से कड़ी कार्रवाई करने को कहा
Bhasha, Last Updated: अक्टूबर 27, 2013
नई दिल्ली: नरेंद्र मोदी की रैली से पहले पटना में हुए सीरियल बम धमाकों की निंदा करते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की और राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से इस घटना के लिए जिम्मेदार लोगों की तेजी से पहचान करने और उन्हें दंडित करने को कहा।

प्रधानमंत्री ने विस्फोट के तत्काल बाद नीतीश से बात की और स्थिति के बारे में जानकारी ली, साथ ही इस बारे में तत्काल ठोस कार्रवाई करने की जरूरत बताई।

मनमोहन सिंह ने बिहार के मुख्यमंत्री को विस्फोटों की जांच के सिलसिले में केंद्र की ओर से हर प्रकार की मदद का अश्वासन दिया। प्रधानमंत्री कार्यालय के बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री ने पटना में विस्फोट की निंदा की है और इस घटना के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान करने और उनके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए तत्काल कदम उठाने को कहा है।

बयान के अनुसार, उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। नीतीश से टेलीफोन पर बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री ने उनसे तत्काल ठोस कार्रवाई करने को कहा।

शुक्रवार, 25 अक्तूबर 2013

राजस्थान की कांग्रेस सरकार में मंत्री रहते हुए बाबूलाल नागर ने , महिला से अबैध संबंध कबूले





राजस्थान की कांग्रेस सरकार में मंत्री रहते हुए बाबूलाल नागर ने , महिला से अबैध संबंध कबूले 
नागर को सीबीआई ने गिरफ्तार कर लिया है
नागर ने कबूला, साढ़े 3 साल से थे रेप पीड़िता से संबंध
आईबीएन-7 | Oct 25, 2013 
जयपुर। बलात्कार के आरोपों से घिरे अशोक गहलोत सरकार के पूर्व मंत्री बाबूलाल नागर को सीबीआई ने गिरफ्तार कर लिया गया है। 6 घंटे की लंबी पूछताछ के बाद सीबीआई ने नागर को गिरफ्तार किया है।
नागर ने गिरफ्तारी के बाद ये मान लिया कि पीड़िता से उसके शारीरिक संबध थे, लेकिन बलात्कार के आरोपों से इंकार किया। सीबीआई शनिवार को नागर को कोर्ट में पेश करेगी। नागर पर पीड़ित महिला के साथ बलात्कार और बाद में धमकी देने का आरोप है।
दरअसल सीबीआई ने शुक्रवार को नागर से जयपुर के सर्किट हाउस में पूछताछ की। पूछताछ की वीडियो रिकार्डिंग की गई है। वहीं नागर का कहना है कि बलात्कार का आरोप गलत है। हालांकि उन्होंने कहा कि करीब साढ़े तीन साल से उनके इस महिला के साथ अवैध संबंध थे।

झांसी में लगाये , राहुल की बॉलिंग पर मोदी ने छक्के ....


कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने गत कुछ आम सभाओं में जितने भी मुद्दे जनता के बिच डाले थे अर्थात क्रिकेट की भाषा में बोलिंग की थी उन सभी पर भाजपा नेता नरेंद्र मोदी ने झांसी की आम सभा में जोरदार जबावी हमले बोले , कटघरे में खड़ा किया अर्थात क्रिकेट की भाषा में छक्के उडाये।

झांसी में लगाये , राहुल की बॉलिंग पर मोदी ने छक्के
http://abpnews.newsbullet.in/ind/34/57888
'ISI कनेक्शन वाले युवकों का नाम बताएं, नहीं तो माफी मांगे राहुल'
एबीपी न्यूज  Friday, 25 October 2013
झांसी. गुजरात के मुख्यमंत्री और बीजेपी की तरफ से पीएम उम्मीदवार नरेंद्र मोदी यूपी के झांसी में राहुल गांधी पर जमकर बरसे. उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत करते हुए कहा कि उनका सौभाग्य है कि उन्हें इस वीरभूमि से आशीर्वाद लेने का मौका मिला है.राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि वह आज रोने नहीं आए हैं. वह आपके आंसू पोछने आया हूं.
कानपुर की रैली में जिस तरह से मोदी ने क्षेत्रीय समस्याओं को तवज्जो दी थी, उसके बाद अब झांसी में भी बुंदेलखंड के स्थानीय मुद्दों को उठाया. उन्होंने कहा कि यहां नदियां बहुत हैं फिर भी किसान आत्महत्या क्यों करते हैं. कांग्रेस को न तो गरीब की परवाह है न किसान की. कांग्रेस रेवड़ियां बांटने में माहिर है. पैकेज नेताओं में बंदरबांट के लिए आया है.
मोदी ने कहा कि यूपी में अकेले इतना ताकत है कि पूरे देश की गरीबी को दूर किया जा सकता है. यूपी अकेले ऐसा राज्य है जहां सारे वाद हैं. कांग्रेस का अंहकारवाद है, सपा का परिवार वाद है. बसपा ब्यक्तिवाद. ये लोग आपके वादों को पूरा नहीं करना चाहते हैं.
मोदी ने कहा कि आपने कांग्रेस को 60 साल दिया है. यदि बीजेपी को 60 महीने का मौका दिया तो हम आपकी तकदीर बदल देंगे. कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए मोदी ने कहा कि राहुल गांधी कहते हैं कि इंदिरा गांधी के मरने पर उनको गुस्सा आया तो क्या केवल गुस्सा आपको आया या सभी कांग्रेसियों को गुस्सा आया. हजारों सिखों को मारा गया तब आपको गुस्सा क्यों नहीं आया. कांग्रेस के गुस्से का शिकार हुए सिख.
इंटेलिजेंस पर सवाल उठाते हुए कहा कि राहुल गांधी तो केवल एमपी हैं फिर ये लोग उनसे सूचना क्यों शेयर करते हैं. राहुल गांधी द्वारा दिए गये इंटेलिजेंस की सूचना पर सवाल उठाते हुए मोदी ने कहा कि सरकार आपकी है फिर आईएसआई मुजफ्फरनगर कैसे पहुंच गई? भारत सरकार क्या कर रही है कि आईएसआई यूपी में पैर पसार रही है. राहुल से मोदी ने सवाल पूछा कि वे कौन युवक हैं जिनसे ISI संपर्क साधी है. नाम बताएं नहीं तो देश से माफी मांगे.
राहुल गांधी पूर्वजों के पराक्रम देखने गरीबों के झोपड़ी में जाते हैं. इनके पूर्वज कहते थे कि आधी रोटी खाएंगे देश बचाएंगे. राहुल गांधी कहते हैं कि पूरी रोटी खाएंगे. 60 साल में आधी से पूरी रोटी तक पहुंचे हैं.
मोदी से पहले बीजेपी नेत्री उमा भारती ने मोदी की जमकर तारीफ की. उन्होंने कहा कि गुजरात में महिलाएं सबसे ज्यादा सुरक्षित हैं. उन्होंने कहा कि मोदी के पीएम बनने के बाद देश में बिना रिश्वत लिए ही काम होगा. आपको बता दें कि मोदी के साथ मंच पर राजनाथ सिंह भी हैं. पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने कहा कि यह जनसभा नहीं जनसैलाब है. राजनाथ सिंह ने कांग्रेस पर तंज कसा और कहा कि यह पार्टी गरीबी की मार्केटिंग कर रही है. कांग्रेस लोगों की आंखों में धूल झोंक रहे हैं. 
गरीबों की चारपाई पर कुछ समय बीता कर मीडिया से फोटो खींचवाते हैं. कांग्रेस ने केवल पेट पर ही लात नहीं मारा है यह आपके स्वाभिमान पर भी चोट पहुंचाते हैं. एसपी और बीएसपी पर कटाक्ष करते हुए कहते हैं यहां दोनों एक दूसरे की पीठ खुजलाते हैं दिल्ली में पीठ सहलाते हैं.
आपको बता दें कि झांसी में 60 फीसदी ओबीसी वोटर हैं. 
झांसी की भौगौलिक स्थिति देखें तो वह तीन तरफ से एमपी से घिरा हुआ है. एमपी के दतिया, टीकमगढ़, छतरपुर और शिवपुरी जिलों की सीमाएं झांसी से जुड़ी हुई हैं. यही कारण है कि शिवराज की तारीफ करने का मौका मोदी नहीं चुके.
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प्रधानमंत्री नहीं मुझे चौकीदार बनाओ: नरेंद्र मोदी
झांसी, एजेंसी  25-10-13 
 http://www.livehindustan.com/news/desh/national/article1-Narendra-Modi-to-address-Vijay-Shankhnaad-rally-in-Jhansi-today-39-39-372769.html
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को यहां कहा कि जनता उन्हें प्रधानमंत्री नहीं, चौकीदार बनाए। वह यहां पार्टी द्वारा आयोजित विजय शंखनाद रैली को संबोधित कर रहे थे। मोदी ने कहा, ''आप लोग मुझे प्रधानमंत्री नहीं चौकीदार बनाएं और मैं देश के खजाने पर कोई भी पंजा नहीं पड़ने दूंगा।'' मोदी ने कहा कि इस देश में गरीबों की झोपड़ी शहजादे (राहुल गांधी) के पूर्वजों के कारनामों के कारण आबाद है।
मोदी ने कहा, ''आधी से पूरी रोटी तक आने में यदि 6० वर्ष का समय लगा तो पूरी से भरपेट रोटी तक आने में 1०० साल का समय लगेगा। आप लोगों ने कांग्रेस को 6० वर्ष तक शासन करने का मौका दिया। भाजपा को 6० महीने का समय दीजिए। हम देश की तकदीर और तस्वीर दोनों ही बदल देंगे।'' मोदी ने कहा कि वह रोने और आंसू बहाने के लिए नहीं आएं हैं। वह गरीबों व किसानों के आंसू पोंछने का संकल्प लेकर आए हैं। मोदी ने रैली में जनता से पूछा कि क्या बुंदेलखंड के लोगों के अंदर विकास करने का दम नहीं है? इसका स्वयं ही जवाब देते हुए मोदी ने कहा कि यहां के किसानों में तो दम है, लेकिन लखनऊ और दिल्ली की सरकारों में दम नहीं है। मोदी ने दिल्ली की केंद्र सरकार से पूछा कि जहां-जहां कांग्रेस की सरकार है, वहीं पर क्यों सबसे अधिक किसानों ने आत्महत्या की। इसका कारण यह है कि कांग्रेस की सरकार को गांव, गरीब और किसान की परवाह नहीं है। कांग्रेस चुनाव में रेवड़ी बांटती है और पैकेज की बात करती है। बुंदेलखंड में यह पैकेज उत्तर प्रदेश के नेताओं का मुंह बंद करने के लिए आया था। मोदी ने इस मौके पर मुसलमानों और सिखों को भी लुभाने की कोशिश की। राहुल गांधी के हाल में दिए गए बयान पर निशाना साधते हुए मोदी ने कहा कि कांग्रेस उपाध्यक्ष उन मुस्लिम नौजवानों का नाम बताएं जो पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के संपर्क में हैं, अन्यथा उन युवकों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगें। मोदी ने कहा कि कांग्रेस के शहजादे राहुल गांधी ने मुजफ्फरनगर दंगे के पीड़ित नौजवानों पर गंभीर आरोप लगाया है कि वहां शिविरों में रह रहे कुछ मुस्लिम युवक आईएसआई के संपर्क में हैं। उन्होंने राहुल से सवाल किया कि केंद्र में उनकी पार्टी की सरकार है। ऐसे में यदि इतना गंभीर मामला आ गया है तो सरकार क्या कर रही है? मोदी ने कहा कि राहुल तत्काल ऐसे लोगों का नाम घोषित करें नहीं तो देश के उन नौजवानों से माफी मांगें। मोदी ने केंद्र सरकार की खुफिया एजेंसियों पर भी सवाल उठाया और कहा कि जो व्यक्ति मात्र सांसद है और जिसने गोपनीयता की कोई शपथ नहीं ली है, खुफिया एजेंसियां उसे देश की गुप्त रिपोर्ट क्यों दे रही हैं। मोदी ने सिख समुदाय की हमदर्दी बटोरने की भी कोशिश की। उन्होंने राहुल गांधी के उस बयान की ओर इशारा किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि जब मेरी दादी (इंदिरा गांधी) मारी गईं थीं तो मुझे बहुत गुस्सा आया था। मोदी ने कहा कि यह सच है कि दादी की हत्या पर राहुल को गुस्सा आया होगा, कांग्रेसियों को भी गुस्सा आया था, लेकिन उसके बाद जब उनके लोगों ने हजारों सिखों को मौत के घाट उतार दिया और नौजवानों को जिंदा जला दिया तो क्या उस पर भी उन्हें गुस्सा आया था? यदि आया होता तो आज तक इस मामले में किसी एक भी दोषी को सजा क्यों नहीं मिली।
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झांसी में मोदी मंत्र
वासिंद्र मिश्र
संपादक, ज़ी रीजनल चैनल्स

http://zeenews.india.com/hindi/news/zee-special/modi-mantra-in-jhansi/193619
बीजेपी की तरफ से प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाए जाने के बाद से नरेंद्र मोदी एक के बाद एक रैलियां करते जा रहे हैं। इन रैलियों में दिए उनके भाषणों के जरिए उनकी रणनीति सामने आने लगी है। एक खास बात और है नरेंद्र मोदी भाषण चाहे कहीं दें, उनकी बातें पैन इंडिया ही होती हैं। झांसी में नरेंद्र मोदी का भाषण अपने आप में उस फिल्म की तरह था जिसमें हर विधा की चीजें मौजूद थी, चाहे वो एक्शन हो, कॉमेडी हो या फिर इमोशन से भर देने वाले सीन।

नरेन्द्र मोदी ने खुद को गरीबी से जोड़ा, उन दिनों की याद दिलाई जब वो ट्रेन में चाय बेचा करते थे। मोदी ने कहा कि ये बीजेपी की महानता है कि एक चाय बेचने वाला व्यक्ति आज प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार है। मोदी ने ना सिर्फ इस बयान के जरिए सियासत में परिवारवाद पर निशाना साधा बल्कि उस हर गरीब के दिल में जगह बनाने की कोशिश की जो मेहनत-मजदूरी कर बड़े होने का ख्वाब देखता है। इसमें कोई संदेह नहीं कि भारत में ऐसे लोगों की तादाद ज्यादा है।

इस रैली में शायद पहली बार मोदी ने लाखों लोगों के सामने खुद को पिछड़ा वर्ग का बताया। झांसी में मोदी ने ये बात यूं हीं नहीं कही, दरअसल बुंदेलखंड का वो इलाका ऐसा है जहां पिछड़े वर्ग के लोगों की तादाद ज्यादा है। मोदी बोले कि वो पिछड़ा वर्ग से आते हैं ताकि पिछड़े वर्ग के तमाम लोग उन्हें अपना रहनुमा समझ सकें। ये बुंदेलखंड के लिहाज से खासा महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां की सियासी बिसात पर पिछड़े वोंटो का अहम योगदान है। इस रैली में मंच पर नेताओं की मौजूदगी भी सियासत के इसी गणित के हिसाब से थी। मंच पर राजनाथ के बगल में कल्याण सिंह को जगह दी गई जो लोध जाति से हैं और बुंदेलखंड में लोध जाति के वोटर्स ज्यादा हैं। मंच पर इसके अलावा उमा भारती और विनय कटियार नज़र आए।

नरेंद्र मोदी अपने भाषण में राहुल गांधी के उस बयान का जिक्र करना नहीं भूले जिसमें उन्होंने अपनी दादी की हत्या के बारे में कहा था। राहुल गांधी के इस बयान के बहाने नरेंद्र मोदी ने 84 में हुए सिख विरोधी दंगों की चर्चा की। कांग्रेस की भूमिका पर सवाल खड़े किए और एंग्री यंगमैन की तरह सवाल किया कि क्या इसी गुस्से की प्रतिक्रिया के तौर पर सिख विरोधी दंगे हुए और आज तक गुनहगारों को सजा नहीं मिली। मोदी ने अपने इस बयान से ना सिर्फ कांग्रेस पर सवाल खड़े किए बल्कि सिख धर्म के लोगों को ये जताने की कोशिश भी की कि बीजेपी उनकी हमदर्द है। दरअसल इसके जरिए नरेन्द्र मोदी ने दिल्ली विधानसभा चुनाव में सिख वोटों को बीजेपी के पक्ष में मोड़ने की कोशिश की है।

नरेंद्र मोदी ने बुंदेलखंड के विकास के लिए अक्सर पैकेज के ऐलान को मुद्दा बनाकर लखनऊ और दिल्ली की सरकार पर भी सवाल खड़े किए। मोदी ने बताया कि पैकेज का जो हिस्सा मध्यप्रदेश में गया उससे विकास हुआ, उत्पादन तीन गुना बढ़ा और सारी व्यवस्था बेहतर हुई, लेकिन यूपी में पड़ने वाले बुंदेलखंड के हिस्से से दिल्ली और लखनऊ में बैठे लोगों की जेबें गर्म हुईं। इस मुद्दे के बहाने मोदी ने मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार की जमकर तारीफ की साथ ही बुंदेलखंड में पड़ने वाले 13 जिलों के मतदाताओं के दिलों में भी जगह बनाने की कोशिश की।

मोदी ने अपने भाषण में शायद पहली बार, भले ही परोक्ष रूप से, मुस्लिम युवकों को भी ये बताना चाहा कि वो उनके हमदर्द हैं। मुद्दा बना राहुल का बयान, जिसमें राहुल ने मुजफ्फरनगर और आईएसआई कनेक्शन की बात की थी। मोदी ने कई सवाल उठाए, मसलन एक सांसद को इंटेलिजेंस इतनी महत्वपूर्ण बातें क्यों बताता है? अगर मुजफ्फरनगर वाली बात सही है तो कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है? और अगर ऐसा नहीं है तो उन नौजवानों को बदनाम क्यों किया जा रहा है?
झांसी में मोदी मंत्र


दरअसल मोदी ने ये बात यूं हीं नहीं कही, मोदी ने इसके जरिए एक साथ दो निशाने साधे, राहुल और इंटेलीजेंस एजेंसी पर सवाल खड़े किए ही, बिना सीधे तौर पर कहे मुज़फ्फरनगर के पीड़ित नौजवानों को भी ये जता दिया कि बीजेपी उनके साथ है। इसके साथ ही मोदी ने खुद पर गोधरा मामले में अल्पसंख्यक विरोधी होने के दाग को धोने की कोशिश भी की। मोदी ने झांसी के इस मंच पर अंग्रेजों के अत्याचार की तुलना कांग्रेस के अत्याचार से की।

मोदी ने कहा कि 1857 में जो नारा झांसी की वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई ने दिया था वही नारा आज भी लोगों को देना चाहिए। लक्ष्मीबाई ने कहा था नहीं देंगे, नहीं देंगे, अपनी झांसी नहीं देंगे, आज लोगों को कहना चाहिए नहीं देंगे, नहीं देंगे, देश बेइमानों को नहीं देंगे। मोदी ने कहा- हम आंसू बहाने नहीं पोंछने आए हैं, जनता ने देश को 60 साल कांग्रेस के हाथ में सौंपा है अब 60 महीने के लिए हमें दे, हम आपकी तकदीर भी बदलेंगे और देश की तस्वीर भी बदलेंगे।
First Published: Friday, October 25, 2013, 21:13

 

 

 

प्याज की बंपर पैदावार, फिर कीमतें क्यों बढ़ीं?



प्याज के बढ़ते दामों के चलते यह आम लोगों की पहुंच से बाहर हो गया है। ओडिशा के पुरी तट पर लोगों के इसी दर्द को सुदर्शन पटनायक ने कुछ यूं दर्शाया। पटनायक रेत पर कलाकृतियां बनाने के लिए मशहूर हैं।



प्याज की बंपर पैदावार, फिर कीमतें क्यों बढ़ीं?
प्याज: उत्पादन तो खूब बढ़ा फिर क्यों बढ़ीं कीमतें?
टाइम्स न्यूज नेटवर्क | Oct 25, 2013,
सुबोध वर्मा
नई दिल्ली।। सच तो यह है कि यह बताना लगभग असंभव है कि प्याज की कीमतें आसमान क्यों छू रही हैं। पिछले 10 सालों में प्याज की पैदावार 42 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) से बढ़कर 163 एलएमटी पर पहुंच चुकी है। इसके बावजूद इसकी कीमतों में ऐसी वृद्धि हैरान करती है। कुल मिलाकर देखें तो एक दशक में प्याज की पैदावार में 300 फीसदी का उछाल आया है।

इसी टाइम पीरियड की बात करें तो भारत की जनसंख्या में हर साल 1.7 फीसदी की वृद्धि हुई है। तो ऐसे में यह साफ है कि यदि पूरा देश केवल प्याज ही खा रहा हो, तो भी देश में पैदा हो रहा इतना प्याज आखिर जा कहां रहा है?

नासिक के नैशनल हॉर्टिकल्चरल रिसर्च ऐंड डिवेलपमेंट फाउंडेशन के डेप्युटी डायरेक्टर एचआर शर्मा ने कहा कि इस साल (2013-14) प्याज का प्रॉडक्शन 10-15% बढ़ने की उम्मीद है। कृषि मंक्षात्रय के ही तहत आने वाली एक और संस्था डायरेक्टोरेट ऑफ अन्यन ऐंड गार्लिक रिसर्च डायरेक्टर जयगोपाल के मुताबिक, एक्सपोर्ट या प्रोसेसिंग इंडस्ट्रीज द्वारा प्याज की खपत भी कीमत बढ़ोतरी की वजह नहीं है। उन्होंने कहा, 'एक्सपोर्ट कुल उत्पादन का 10 फीसदी ही है। प्रोसेसिंग इंडस्ट्री में भी प्याज की खपत उत्पाद का करीब 10% ही है।'
ऐसे में सवाल उठता है कि सारे प्याज कहां जा रहे हैं? सितंबर में बारिश की वजह से ढुलाई में हुई दिक्कत जैसे तात्कालिक कारणों को छोड़ दिया जाए तो प्रमुख समस्या भारत में प्याज की सप्लाई चेन को लेकर है। कॉम्पिटिशन कमिशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) की भारत के प्याज मार्केट पर रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रेडर्स और कमिशन एजेंट्स का मंडियों में कुछ इस तरह का कब्जा है कि उनके चलते किसानों से लेकर आम आदमी तक सभी पिस रहे हैं।

यह रिपोर्ट बेंगलुरु के इंस्टिट्यूट फॉर सोशल ऐंड इकनॉमिक चेंज ने तैयार की है। संस्था ने स्टडी में किसानों, होलसेल ट्रेडर्स, कमिशन एजेंट्स, रीटेलर्स और कंज्यूमर को शामिल किया गया है। कर्नाटक और महाराष्ट्र की करीब 11 मंडियों को केंद्र में रखा गया।

इस रिपोर्ट के मुताबिक, एक किसान औसतन 1.3 एकड़ से भी कम जमीन पर प्याज की खेती कर रहा है। इनमें से ज्यादातर किसानों को प्याज की कीमतों के बारे में कोई खास जानकारी नहीं होती और वे उन्हीं कीमतों पर यकीन करते हैं जो उन्हें कमिशन एजेंट्स और ट्रेडर्स बताते हैं। ऐसे में धांधली की गुंजाइश बहुत ज्यादा होती है। सीसीआई की मेंबर गीता गौरी ने बताया कि रिपोर्ट राज्य सरकारों को भेज दी गई है।

जानकारों को लगता है कि नई मंडियां खोलने, किसानों को डायरेक्ट सेलिंग की सुविधा देने जैसे कुछ खास कदम उठाने से समस्या सुलझ सकती है।


गुरुवार, 24 अक्तूबर 2013

पद्मश्री मन्ना डे के निधन से एक युग का अंत



बेंगलूर में ही होगा मन्ना डे का अंतिम संस्कार
http://www.jagran.com/entertainment/bollywood-legendary-singer-manna-dey-dead-10817004.html

                                                       ऐ मेरी जोहरा जबीं (फिल्म- वक्त)
24 Oct 2013
मन्ना डे के निधन से एक युग का अंत हो गया है। मन्ना डे को 1971 में पद्मश्री और 2005 में पद्म विभूषण से नवाजा जा चुका है। 2007 में उन्हें प्रतिष्ठित दादा साहब फाल्के पुरस्कार प्रदान किया गया। मन्ना डे ने यूं तो बॉलीवुड में हजारों गाने गाए। लेकिन उनके गाए दस गीत ऐसे हैं जिन्हें हमेशा से याद किया जाता रहा है।

बेंगलूर। मन्ना डे का अंतिम संस्कार बेंगलूर में ही होगा। उनके परिवार ने बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की उनका शव कोलकाता लाकर अंतिम संस्कार करने की अपील ठुकरा दी है। मन्ना का पैतृक घर भी कोलकाता में हैं और उनका जन्म भी इसी शहर में हुआ था।
गुजरे दौर के मशहूर गायक मन्ना डे का बुधवार देर रात करीब साढ़े तीन बजे बेंगलूर में निधन हो गया था। आज दोपहर को 2 बजे उनका अंतिम संस्कार कर दिया जाएगा। वह 94 वर्ष के थे। उन्हें छाती में संक्रमण की शिकायत के बाद इस वर्ष जून में अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उन्होंने हिंदी फिल्मों के साथ बांग्ला और अन्य भाषाओं में लगभग चार हजार से ज्यादा गाने गाए। बॉलीवुड में कई बड़े दिग्गजों के ऊपर उनके गाए गाने फिल्माए गए और वह काफी हिट भी हुए। बलराज साहनी, राजकपूर, प्राण, राजेश खन्ना, अमिताभ बच्च्न समेत कई बड़े अभिनेताओं के ऊपर मन्ना डे के गाए गीतों को फिल्माया गया।
 मन्ना डे पिछले काफी वर्षो से बीमार चल रहे थे। उनका बेंगलूर में इलाज चल रहा था। दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित मन्ना डे उन गायकों में रहे, जिनकी एक समय बॉलीवुड में तूती बोलती थी। जब तक वह बॉलीवुड से जुड़े रहे उनका सितारा हमेशा ही बुलंदी पर रहा।

पचास और साठ के दशक में अगर हिंदी फिल्मों में राग पर आधारित कोई गाना होता, तो उसके लिए संगीतकारों की पहली पसंद मन्ना डे ही होते थे। उनके 94 वें जन्मदिन पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने उनसे मुलाकात की उन्हें मुबारकबाद दी थी। बॉलीवुड में हरफनमौला गायक कहे जाने वाले मन्ना डे के निधन से एक युग का अंत हो गया है। मन्ना डे को 1971 में पद्मश्री और 2005 में पद्म विभूषण से नवाजा जा चुका है। 2007 में उन्हें प्रतिष्ठित दादा साहब फाल्के पुरस्कार प्रदान किया गया।

-मन्ना डे के बिखरे मोती

मन्ना डे ने यूं तो बॉलीवुड में हजारों गाने गाए। लेकिन उनके गाए दस गीत ऐसे हैं जिन्हें हमेशा से याद किया जाता रहा है।

1. जिंदगी कैसी है पहेली (फिल्म- आनंद)

2. एक चतुर नार करके श्रृंगार (फिल्म- पड़ोसन)

3. लागा चुनरी में दाग (फिल्म- दिल ही तो है)

4. कसमें वादे प्यार वफा (फिल्म- उपकार)

5. तू प्यार का सागर है (फिल्म- सीमा)

6. तुझे सूरज कहूं या चंदा (फिल्म- एक फूल दो माली)

7. यारी है ईमान मेरा यार मेरी जिंदगी (फिल्म- जंजीर)

8. ये रात भीगी भीगी (फिल्म- चोरी चोरी)

9. ऐ मेरी जोहरा जबीं (फिल्म- वक्त)

10. प्यार हुआ इकरार हुआ है (फिल्म- श्री 420)

बुधवार, 23 अक्तूबर 2013

राजमाता से लोकमाता : आदरणीय विजयाराजे सिंधिया





*** आदरणीय राजमाता सिंधिया की जयंती ***
करबा चौथ  
**** 12 अक्टूबर 1919 *****
**** 25 जनवरी2001 पुण्य तिथि  *****


    सम्मानीया ग्वालियर राजघराने की बहू और फिर देश की लोकप्रिय नेत्रियों में शुमार प्रखर राष्टवादी एवं धर्मनिष्ठ माननीया विजयाराजे जी सिंधिया यानी राजमाता का जन्म करवा चौथ (तिथि के अनुसार) 1919 ई. में, सागर, मध्य प्रदेश के राणा परिवार में हुआ था। सम्मानीया विजयाराजे सिंधिया के पिता श्री महेन्द्रसिंह जी ठाकुर जालौन जिला के डिप्टी कलेक्टर थे, उनका विवाह के पूर्व का नाम "लेखा दिव्येश्वरी" था। उनका विवाह 21 फरवरी 1941 ई में ग्वालियर के महाराजा सम्मानीय जीवाजी राव जी सिंधिया से हुआ था। और 25 जनवरी2001 में राजमाता विजयाराजे सिंधिया का निधन हो गया।| राजमाता साहिबा के पांच संताने हुई, जिसमें प्रथम सम्मानीया पदमावती राजे सिंधिया, द्वितीय सम्मानीया ऊषा राजे सिंधिया, तृतीय सम्मानीय माधवराव सिंधिया, चतुर्थ सम्मानीया वसुंधरा राजे सिंधिया, पंचम सम्मानीया यशोधरा राजे सिंधिया ! राजमाता जी का आदर्श जीवन, सिद्धान्त और लोकसेवा भाव लाखों लोगों को प्रेरित करता रहा है।

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जब राजमाता जी ने अध्यक्ष पद अस्वीकार कर दिया 
पहली बार पार्टी अध्यक्ष बनना - लाल कृष्ण आडवाणी 
मुझे पार्टी अध्यक्ष बनने में बहुत ही संकोच हो रहा था। पार्टी अध्यक्ष बनने का दायित्व मेरे ऊपर कैसे आया, यह एक रोचक कहानी है, जो यहाँ उल्लेख करने योग्य है। मैंने पिछले अध्याय में उल्लेख किया कि फरवरी 1968 में पं. दीनदयाल उपाध्याय की दु:खद मृत्यु के पश्चात् अटलजी पार्टी अध्यक्ष बने थे, वे सन् 1971 के चुनाव के बाद पार्टी अध्यक्ष का पद छोड़ने पर गंभीरतापूर्वक विचार कर रहे थे। 1972 के प्रारंभ में अटलजी ने मुझसे कहा, 'अब आप पार्टी के अध्यक्ष बन जाइए।' इसका कारण पूछने पर उन्होंने कहा, 'मैं इस पद पर अपना चार वर्ष का कार्यकाल पूरा कर चुका हूँ। अब समय है कि कोई नया व्यक्ति दायित्व स्वीकार करे।'
मैंने उनसे कहा, 'अटलजी, मैं किसी जनसभा में भाषण भी नहीं दे सकता हूँ। फिर मैं पार्टी अध्यक्ष कैसे हो सकता हूँ?' उन दिनों मैं जनता के बीच बोलने में भी पटु नहीं था और मुझे बोलने में संकोच भी होता था। मैं यह जरूर स्वीकार करता हूँ कि मेरे अंदर इस ग्रंथि के पनपने का एक बहुत बड़ा कारण अटलजी के साथ मेरा निकट संपर्क था, जो अपनी जादुई भाषण कला से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देते थे।
अटलजी ने जोर देकर कहा, 'लेकिन अब तो आप संसद् में बोलने लगे हैं। फिर यह संकोच कैसा?'
मैंने उनसे कहा, 'संसद् में बोलना एक बात है और हजारों लोगों के सामने भाषण देना अलग बात है। इसके अतिरिक्त पार्टी में कई वरिष्ठ नेता हैं। उनमें से किसी को पार्टी अध्यक्ष बनाया जा सकता है।'
अटलजी ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा, 'किंतु दीनदयालजी भी वक्ता नहीं थे, लेकिन लोग उन्हें बहुत ही ध्यान से सुनते थे; क्योंकि उनके शब्दों में गहन चिंतन मौजूद रहता था। इसलिए पार्टी को नेतृत्व प्रदान करने के लिए बहुत बड़ा वक्ता होना आवश्यक नहीं है।'
मैं इस बात से प्रभावित नहीं हुआ। मैंने कहा, 'नहीं-नहीं, मैं पार्टी अध्यक्ष नहीं बन सकता। कृपया किसी अन्य व्यक्ति को ढूँढ़िए।'
उन्होंने कहा, 'दूसरा व्यक्ति कौन हो सकता है?'
मैंने कहा, 'राजमाता क्यों नहीं?'
विजयाराजे सिंधिया को ग्वालियर की राजमाता* के रूप में जाना जाता था। भारत के विशालतम और संपन्नतम राजेरजवाड़ों में से ग्वालियर एक था। उस रियासत के महाराजा के साथ उनका विवाह हुआ था। अपने पति की मृत्यु के बाद सन् 1962 में कांग्रेस के टिकट पर वे संसद् सदस्य बनीं। पाँच साल के बाद अपने सैध्दांतिक मूल्यों के दिशा-निर्देश पर वे कांग्रेस छोड़कर जनसंघ में शामिल हो गईं। एक राजपरिवार से रहते हुए भी वे अपनी ईमानदारी, सादगी और प्रतिबध्दता के कारण पार्टी में सर्वप्रिय बन गईं। शीघ्र ही वे पार्टी में शक्ति स्तंभ के रूप में सामने आईं।
अटलजी मेरे सुझाव से सहमत हो गए और हम दोनों राजमाता को जनसंघ अध्यक्ष बनने के लिए मनाने के उद्देश्य से ग्वालियर गए। वास्तव में उन्हें काफी मनाना पड़ा, किंतु अंतत: वे मान गईं। हमें राहत और प्रसन्नता मिली। स्वीकृति के लिए हमने उन्हें धन्यवाद दिया। फिर तुरंत उन्होंने कहा, 'किंतु कृपया प्रतीक्षा करें। अपनी अंतिम स्वीकृति के लिए आपको मुझे एक दिन का और समय देना होगा। जैसाकि आप जानते हैं, मैं अपने जीवन में कोई भी महत्त्वपूर्ण निर्णय दतिया में रहनेवाले अपने श्रीगुरुजी की अनुमति और आशीर्वाद के बिना नहीं लेती हूँ।' उसी दिन वे मध्य प्रदेश के उस छोटे से नगर दतिया गईं। किंतु दूसरे दिन वापस लौटकर उन्होंने अप्रिय समाचार सुनाया'मेरे श्रीगुरुजी ने इसकी अनुमति नहीं दी।'
'अब हमें क्या करना चाहिए?' अटलजी ने पूछा।
मैंने कहा, 'हम लोग महावीरजी को क्यों नहीं मनाते हैं?' प्रसिध्द स्वतंत्रता सेनानी भाई परमानंद* के पुत्र डॉ. भाई महावीर जनसंघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और उस समय राज्यसभा के सदस्य थे।
अटलजी इससे सहमत हो गए और हम दोनों जगन्नाथ राव जोशी के साथ महावीरजी से मिलने उनके पंत मार्ग, नई दिल्ली स्थित निवास पर गए। बिना किसी अधिक मान-मनौवल के वे सहमत हो गए। हम अपने मिशन की सफलता पर राहत महसूस करने लगे कि उन्होंने कहा, 'कृपया एक क्षण प्रतीक्षा करें। इस संबंध में मैं अपनी पत्नी से सलाह करना चाहूँगा।'वे घर के अंदर गए और कुछ समय बाद बुरी खबर के साथ वापस लौटे'मेरी पत्नी इससे सहमत नहीं हैं।'
जब हम उनके घर से बाहर निकले तो अटलजी ने मुझसे कहा, 'अब और असफल प्रयास नहीं। अब आपके पास विकल्प नहीं है, बल्कि मैं जो कहता हूँ उसपर 'हाँ' कहना है।' इस प्रकार औपचारिक रूप से मुझे दिसंबर 1972 में भारतीय जनता पार्टी का अध्यक्ष चुना गया। उसके तुरंत बाद मैंने कानपुर में पार्टी के अठारहवें वार्षिक अधिवेशन की अध्यक्षता की।

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भोपाल| भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की मध्य प्रदेश इकाई के अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि विजयराजे सिंधिया (राजमाता सिंधिया) सिद्धांतों के प्रति समर्पित सांस्कृतिक राष्ट्रवाद से ओतप्रोत विदुषी जननायक थीं। उन्होंने महलों के वैभव को छोड़कर जनता के न्याय के लिए संघर्ष का मार्ग स्वीकार किया और सड़कों पर उतरकर राजमाता से लोकमाता बन गईं। प्रदेश कार्यालय में विजयराजे सिंधिया की 95वीं जयंती को मंगलवार को मातृशक्ति दिवस के रूप मनाया गया। इस मौके पर तोमर ने कहा कि राजमाता ने जीवन पर्यन्त आम आदमी की तरह जीवन जिया, सेवा की उनमें ललक थी। सादगी और सरलता उनका स्वभाव था। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक राजमाता महिला मोर्चा के माध्यम से महिलाओं से जुड़ी रहीं और उनके बीच में पहुंचकर महिलाओं को सदैव प्रेरित करती रहीं। राजमाता हमेशा सेवा के लिए समर्पित रहीं। उन्हें पद और सत्ता ने कभी आकर्षित नहीं किया। उन्होंने सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के लिए खुद को पूरी तरह समर्पित कर दिया।

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वर्षपद
1957लोकसभा (दूसरी) के लिए निर्वाचित
1962लोकसभा (तीसरी) के लिए पुन: निर्वाचित
1967मध्य प्रदेश विधान सभा के लिए निर्वाचित
1971लोकसभा (पाँचवी) के लिए तीसरी बार निर्वाचित
1978राज्यसभा के लिए निर्वाचित
1989लोकसभा (नौंवी) के लिए चौथी बार निर्वाचित
1990सदस्य, मानव संसाधन विकास मंत्रालय की परामर्शदात्री समिति
1991लोकसभा (दसवीं) के लिए पाँचवी बार निर्वाचित
 


मंगलवार, 22 अक्तूबर 2013

स्वस्थ प्रजातंत्र के लिए शतप्रतिशत मतदान : परम पूज्य सरसंघचालक डॉ. भागवत


स्वस्थ प्रजातंत्र के लिए शत प्रतिशत मतदान जरूरी : परम  पूज्य सरसंघचालक

Newsbharati      Date: 13 Oct 2013  
http://vskkashi.blogspot.in/2013/10/blog-post.html
नागपुर, अक्टूबर 13 :सामान्य नागरिकों के लिए चुनाव राजनीति नहीं है वरन वह उसके अनिवार्य प्रजातांत्रिक कर्तव्य निभाने का अवसर है। इसलिए मतदान करते समय मतदाता के रूप में नागरिकों द्वारा दलों की नीति व प्रत्याशी के चरित्र का सम्यक् समन्वित दृष्टि से मूल्यांकन करना चाहिए। नागरिकों के लिए चुनाव को महत्वपूर्ण मानते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि सामान्य जनता को किसी छल, कपट अथवा भावना के बहकावे में नहीं आना चाहिए, बल्कि राष्ट्रहित की नीति पर चलनेवाले दल तथा सुयोग्य सक्षम प्रत्याशी को देखकर मतदान करना चाहिए। 100 प्रतिशत मतदान होना प्रजातंत्र के स्वास्थ्य को पोषित करता है। डॉ. भागवत संघ के विजयादशमी उत्सव के कार्यक्रम में सभा को सम्बोधित कर रहे थे।
नागरिकों के चुनावी समय के कर्तव्य पर जोर डालते हुए सरसंघचालक ने कहा कि उदासीनता को त्यागकर इस दिशा में होनेवाले सभी प्रयासों में चुनाव करानेवाली व्यवस्थाओं व व्यक्तियों से हमारा सहयोग होना चाहिए। लेकिन चुनाव में मतदान करनेभर से और सारा भार चुने हुए लोगों के सिर पर डाल देने से हमारा कर्तव्य समाप्त नहीं हो जाता, वरन चुनाव के बाद प्रत्याशी के कार्यों पर नजर रखते हुए उसे सीधे पटरी पर बनाए रखने की जिम्मेदारी भी जनता की होती है।
undefinedउन्होंने कहा कि मतदान के द्वारा अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करने का समय निकट आ गया है। बहुत से नवीन एवं युवा मतदाता होंगे। हम यह अपना कर्त्तव्य निर्वहन कर सकें, इसलिए हमें सर्वप्रथम यह चिन्ता करनी पड़ेगी कि मतदाता सूची में अपना नाम सुयोग्य रीति से प्रविष्ट हुआ है या नहीं।
उल्लेखनीय है कि विजयादशमी का यह कार्यक्रम नागपुर स्थित रेशिमबाग़ परिसर में सम्पन्न हुआ। इस कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि विख्यात लेखक लोकेश चंद्र उपस्थित थे, साथ ही सरकार्यवाह भैयाजी जोशी, नागपुर महानगर के संघचालक दिलीप गुप्ता व सह संघचालक लक्ष्मण पार्डिकर तथा विदर्भ प्रांत के सह संघचालक राम हरकरे व्यासपीठ पर विराजमान थे।
आगे देश की आर्थिक स्थिति पर विचार रखते हुए सरसंघचालक डॉ. भागवत ने कहा कि सामान्य व्यक्तियों के जीवन को त्वरित प्रभावित करनेवाली देश की आर्थिक स्थितियां होती हैं। और, हमारे देश की सामान्य जनता प्रतिदिन बढ़नेवाली महंगाई की मार से त्रस्त है। दो वर्ष पूर्व हमारे देश के आर्थिक महाशक्ति बनने की चर्चा बड़े जोर से चल रही थी, अब रूपये के लुढकने का क्रम जारी है। उन्होंने कहा कि वित्तीय घाटा, चालू खाते का घाटा एवं विदेशी विनियम कोष में निरन्तर कमी की चर्चा चल रही है। आर्थिक विकास दर में बढ़ती गिरावट को देखते हुए स्पष्ट होता है कि हमारे अर्थ तंत्र के संचालन की गलत दिशा हो रहा है। आश्चर्य यह है कि इन सब स्थितियों के बावजूद सरकारी हठधर्मिता नीतियों की दिशा बदलने के लिये बिल्कुल तैयार नहीं है।
शासन की गलत नीतियां 

undefinedसरसंघचालक ने सरकार की गलत नीतियों का ध्यान दिलाते हुए कहा, एक के बाद एक देश के उत्पादन के क्षेत्रों का स्वामित्व अपने देश के लोगों की तिरस्कारपूर्वक उपेक्षा कर विदेशी हाथों में देनेवाली नीतियां चलाई जा जा रही हैं। देश की आय का बड़ा हिस्सा बनानेवाले लघु उद्यमी, छोटे उद्यमी, स्वयं-रोजगार पर आश्रित खुदरा व्यापारी ऐसे सभी को विदेशी निवेशकों के साथ विषम स्पर्धा के संकट में अपने ही शासन द्वारा धकेला जा रहा है। उनके निर्वाह, देश की स्वावलंबिता तथा देशवासियों की उद्यमिता की प्रवृत्ति के भविष्य पर प्रश्नचिन्ह लगाया जा रहा है। रोजगार के अवसर घट गए हैं। गांवों से रोजगार के लिए शहरों की ओर जानेवाली संख्या बढ़ने से शहर व गांव दोनों में कई प्रकार की समस्याएं उत्पन्न हुई हैं। तथाकथित विकास की दिखावटी चमक कितनी भी हो, आर्थिक दृष्टि से सामान्य व पिछड़े वर्गों को उसका लाभ मिलना दूर, जीवन चलना दूभर कर देनेवाली परिस्थितियों का सामना करने की नौबत आ पड़ी है। लगातार उच्चपदस्थों के आर्थिक भ्रष्टाचार के प्रकरण उजागर होने तथा उनके विरूद्ध जनता में पनपा असंतोष आंदोलनों के द्वारा व्यक्त होने के बाद भी ऐसे कांडों के असली अपराधी खुले घूम रहे हैं, ऐसे प्रकरणों के न्याययुक्त निरसन के लिए पर्याप्त प्रभावी कानून बनाने के स्थान पर राज्यतंत्र के द्वारा उन कानूनों को जन्म से ही पंगू बनाने के प्रावधान डालने का प्रयास हो रहा है।
देश की सुरक्षा
डॉ. भागवत ने कहा कि देश की सुरक्षा पर छाए संकटों के बादल भी ज्यों के त्यों बने हैं। भारत की सीमाओं में घुसपैठ, भारत के चारों ओर के देशों में अपने प्रभाव को बढ़ाकर भारत की घेराबंदी करना, भारत के बाजारों में अपने माल को झोंकना आदि का क्रम चीन के द्वारा पूर्ववत चल रहा है। हमारी ओर से पूरी इच्छाशक्ति दृढ़ता व सामर्थ्य के साथ इसका उत्तर दिया जाना चाहिए, पर ऐसी गंभीर घटनाओं को छुपाया जाता है। इधर पाकिस्तान की नीतियों में भारत के प्रति उसका द्वेष का स्पष्ट दिखता है, फिर भी अपनी ओर से पाकिस्तान के दु:साहस को बढ़ानेवाली नीति का वही ढीला-ढाला भोला-भाला रूख हमारे शासन की ओर से होता है। यह बात किसी के समझ में नहीं आती।
उत्तर पूर्वांचल की समस्या का जिक्र करते हुए सरसंघचालक ने कहा कि वहां की देशभक्त जनता की उपेक्षा कर वोट बैंक की राजनीति के चलते अलगाववादी कट्टरपंथी व घुसपैठ कर आई विदेशी ताकतों का बेहूदा तुष्टीकरण दिखाई देता है। वहां के विकास की उपेक्षा पूर्ववत चल रही है। इतने वर्षों में वहां की सीमाओं तक पथनिर्माण, वहां की जनता को रोजगार के अवसर देनेवाली विकास योजनाएं तथा वहां की सीमाओं की चौकसी व मजबूती को चाकचौबंद रखने में कोई संतोषजनक प्रगति नहीं दिखाई दे रही है।
डॉ. भागवत ने कहा कि देश के सुरक्षा की दृष्टि से इन संकटों की बिसात को देखते हुए नेपाल,  तिब्बत, श्रीलंका, बांग्लादेश, अफगानिस्तान, म्यांमार तथा दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों में भारतीय मूल के लोगों के हितों का संवर्धन करते हुए उन देशों से आत्मीय संबंधों में दृढ़ता लाने की आवश्यकता है। पर इस दिशा में सरकार के कार्य में उदासीनता दिखाई देती है। इसलिए इस दृष्टि से अपनी सामरिक तैयारी व स्वयंपूर्णता, सूचनातंत्र तथा सुरक्षाबलों का संख्यात्मक विकास व उनका मनोबल बढ़े ऐसे उपाय होना चाहिए।
आतंरिक सुरक्षा
undefinedदेश की आतंरिक सुरक्षा के सम्बन्ध में सरसंघचालक ने कहा कि देश की अंतर्गत सुरक्षा की स्थिति भी गंभीर है। विदेशी विचारों से प्रेरित, वहां से विविध सहायता प्राप्त कर देश के संविधान, कानून व व्यवस्था आदि की हिंसक अवहेलना करनेवाली सभी शक्तियों का अब एक गठबंधन सा बन गया है, ऐसा दृश्य देश के विभिन्न भागों में दिखाई देता है। सामान्य लोगों के शोषण, अपमान व अभाव की परिस्थिति को शीघ्रतापूर्वक दूर करना, शासन-प्रशासन का व्यवहार अधिक जबाबदेह व पारदर्शी बनाना तथा दृढ़तापूर्वक हिंसक गतिविधियों का मूलोच्छेद करना इसमें आवश्यक शासन की इच्छाशक्ति का अभाव अभी भी यथावत् बना हुआ दिख रहा है। सर्वसामान्य प्रजा इन सब परिस्थितियों से ऊब गयी है, विक्षुब्ध है, वह परिवर्तन चाहती है। परंतु देश की राजनीति वोटों के स्वार्थ के चक्रव्यूह में ही खेलने में धन्यता मानकर चल रही है। इस परिस्थिति का सबसे प्रथम व सबसे अधिक भुक्तभोगी है भारत की प्रजा में बहुसंख्यक परंपरा से इस देश का वासी हिन्दू समाज।
डॉ. भागवत ने बताया कि जम्मू के किश्तवाड़ में बसनेवाले हिन्दू व्यापारियों की संख्या किश्तवाड़ शहर में अत्यल्प (15 प्रतिशत) है। वहां के दुकानों पर सांप्रदायिक विद्वेष से प्रेरित भीड़ ने हमला किया। राज्य सरकार के गृहमंत्री तथा वहां के पुलिस अधिकारियों की उपस्थिति व उकसावे में लूटपाट व विध्वंस का यह षडयंत्र सुनियोजित ढंग से चला। शेष जम्मू क्षेत्र की देशभक्त जनता के त्वरित व प्रभावी विरोध के कारण हिन्दुओं की प्राण रक्षा हुई। कई करोड़ों की उनकी हानि के ऐवज में अब राज्य सरकार हिन्दुओं को कुछ लाख की भरपाई देकर अपने कर्तव्य की इतिश्री मान रही है। उपद्रवकारी व उनके पक्षपाती सूत्रधारों पर कानूनी कारवाई का तो कोई विचार ही नहीं है। यह वही जम्मू कश्मीर राज्य है, जहां के मुख्यमंत्री ने कुछ ही दिन पहले वहां यात्रा पर आए यूरोपीय प्रतिनिधि मंडल को यह कहा कि जम्मू-कश्मीर राज्य का भारत में विलय नहीं, सशर्त जुड़ाव हुआ है। इससे घाटी की राजनीति में सक्रिय उन शक्तियों की मानसिकता प्रगट होती है जो सत्ता में बैठकर तरह-तरह के अवैध कुचक्र चलाकर समूचे जम्मू-लद्दाख-कश्मीर से ही भारत की एकात्मता, अखंडता व राज्य के भारत का अविभाज्य अंग होने के पक्षधरों को क्रमश: बेदखल करना चाहती है। और दुर्भाग्य से केन्द्र की राजनीति पिछले दस वर्षों से उन्हीं का पृष्ठपोषण कर रही है।
undefinedउन्होंने कहा, केवल सत्ता स्वार्थ से मोहित व अंध होकर देश व देशभक्तों की शक्ति कुचलने की इस कुटिल देश घातक राजनीति का दूसरा स्पष्ट उदाहरण है। हाल ही में घटी उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर की घटनाएं। एक ही संप्रदाय विशेष की गुंडागर्दी की लगातार चली घटनाओं की सत्ता के समीकरणों के चलते केवल उपेक्षा ही नहीं की गई, वरन उनको प्रोत्साहन व संरक्षण भी दिया गया। राज्य के चुनावों के पहले से ही कानून संविधान को ताक पर रख तथा कथित अल्पसंख्यक मतों के तुष्टीकरण की स्पर्धा चली ही थी। सत्ता प्राप्ति के बाद सत्तारूढ़ दल के इशारे पर प्रशासन ने अपने अधिकारों की मर्यादा में कानून द्वारा निर्देशित कार्य करने के तथाकथित अपराध पर एक प्रशासकीय अधिकारी को निलंबित कर तथा देशभर के संतों की पुर्णतः वैध व शांततामय अयोध्या परिक्रमा को रोककर विवादित बनाकर अपनी छद्म धर्मनिरपेक्षता की आड में साम्प्रदायिक भावनाओं को भड़काने का खेल भी शुरू किया था। ऐसे पक्षपाती व लोकविरोधी नीति के परिणाम एक भयंकर उद्रेक के रूप में फूट पड़े जिन पर नियंत्रण करने में शासन व प्रशासन असमंजस में पडकर पंगु बना रहा। अब भी सत्य का सामना करने के बजाय सारी बातों का दोष हिन्दू समाज व सत्य बोलने का साहस करने वालों के माथे पर मढने का, माध्यमों के एक वर्ग का सहारा लेकर प्रयास चल रहा है। ऐसे सभी उपद्रवों के पीछे जो कट्टरपंथी असहिष्णु आतंकी प्रवृती है, तथा उनसे साठगांठ रख उनको बल देनेवाली प्रवृत्तियॉं है उनके कारनामे तो नैरोबी के मॉल से लेकर पेशावर के चर्च तक की गई जघन्य हत्याओं जैसी घटनाओं में सर्वत्र उजागर हो रहे है। परन्तु सत्ता के स्वार्थ में अंध राजनीति को यह सूर्य प्रकाश के समान सत्य साक्षात् होकर भी दिखता नहीं।
दुर्भाग्य है कि देश की प्रजा को समदृष्टि से देखकर देश का शासन चलाना जिनका दायित्व है उन्हीं की ओर से मन, वचन और कर्म से हिन्दू समाज के विरोध में अथवा तथाकथित अल्पसंख्यकों के तुष्टीकरण के लिये यह बातें हो रही है। जिस प्रकार देश के गृहमंत्री ने तथाकथित अल्पयंख्यक युवकों के बारे में नरमी बरतने की सूचना राज्यों के शासकों को भेजी तथा जिस प्रकार तमिलनाडु में हाल में ही घटित हिन्दू नेताओं के कट्टरपंथियों द्वारा हत्याओं की उपेक्षाओं की शृंखला पहले उपेक्षा हुई, और बाद में जांच में ढिलाई देखी गई।
शिक्षा नीति में बदलाव आवश्यक 
undefinedसरसंघचालक डॉ. भागवत ने भारत की शिक्षा व्यवस्था पर विचार करते हुए कहा कि केवल व्यापारी वृत्ति से चलनेवाली आज की शिक्षा नीति में मूलभूत परिवर्तन करना आवश्यकता है।  क्योंकि, इस नीति के चलते वर्तमान शिक्षा सर्वसामान्य लोगों के पहुंच से बाहर तो हो ही गई है, उसमें गुणवत्ता तथा संस्कारों का निर्माण भी बंद हो गया है। शिक्षा क्षेत्र में एतद्देशीय लोगों के उद्यम को अनुत्साहित कर, विदेशी शिक्षा संस्थाओं के अनियंत्रित संचार को आमंत्रित कर पूरी शिक्षा को ही विदेशी हाथों में सुपूर्द करने की तैयारियां चल रही है, ऐसा दिखता है। वैभव संपन्न राष्ट्रनिर्माण के लिए नई पीढ़ी को सब प्रकार से सुसज्जित करने के बजाय शिक्षा को भी अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के लिए अर्थार्जन के अवसरों से भरा एक नया बाजार क्षेत्र मानकर उसका विचार करना देश के भविष्य को जिस अँधेरी गर्त में ढकेलेगा, इसका तनिक भी विवेक आज शिक्षा के क्षेत्र को दी जानेवाली दिशा में नहीं दिखता।
देश में महिला पर अत्याचारों के प्रमाण में वृद्धि के पीछे प्रमुख कारणों में संस्कारों का अभाव यह भी एक कारण है। नई पीढ़ी को उत्तम संस्कार मिले इसकी व्यवस्था हमारे समाज की कुटुंब-व्यवस्था में भी है। इसलिए इस दिशा में अपनी कुटुंब-व्यवस्था का अध्ययन व कुछ अनुसरण करने की इच्छा आज विश्वभर में दिखाई देती है। परन्तु उसके इस महत्व को बिल्कुल ही न समझकर विभिन्न अनावश्यक कानूनों को लाकर कुटुंब के अन्तर्गत व्यक्तियों के संबंधों को भी अर्थ व्यवहार में बदलने का प्रयास चला है। वह सदभावना से किया गया हो तो भी उसके पीछे की सोच में कुटुंब-व्यवस्था समाज में सामाजिक सुरक्षा व सामाजिक उद्यम का कितना अहम् उपकरण रहा है, इसके अध्ययन का अभाव निश्चित रूप से दिखाई देता है।
हिन्दू समाज की अवहेलना
undefinedसरसंघचालक ने कहा कि हिन्दू समाज की अवहेलना का क्रम निर्लज्जतापूर्वक चल रहा है। इस मानसिकता के आधार पर साम्प्रदायिक गतिविधि निरोधक कानून-2011 के नाम पर सब प्रकार के गैर कानूनी प्रावधानों को लागू करने का एक प्रयास किया गया था। संविधान के मार्गदर्शन की अवहेलना करते हुए सांप्रदायिक आधार पर आरक्षण दिलाने के प्रावधान किए गए थे। करदाताओं के धन को अपनी ऐसी पक्षपाती योजनाओं तथा भ्रष्टाचार में व्यर्थ करनेवाले लोग देश के रिक्त भंडारों को भरने के लिए स्वर्ण की अपेक्षा हिन्दू मंदिरों से करते हैं। अब संपूर्ण प्रजा की श्रद्धा, पर्यावरण सुरक्षा, सागरी सीमा सुरक्षा, थोरियम जैसे मूल्यवान व दुर्मिल धातूओं के प्राकृतिक भंडारों की सुरक्षा, तटीय निवासी जनता का रोजगार आदि सबकी अपमानजनक अवहेलना की जा रही है, तथा स्वयं ही के द्वारा नियुक्त समिति की अनुसंशा का अधिक्षेप कर केन्द्र शासन में बैठे लोग सत्तास्वार्थ के लिए रामसेतू को तोड़कर ही सेतूसमुद्रम् प्रकल्प पूर्ण करने पर तुले हैं।
उन्होंने कहा कि देश की ये सारी स्थितियां देशवासियों के जीवन को प्रतिदिन प्रतिक्षण प्रभावित करती हैं। राजनीतिक दलों व नेताओं को चुनकर सत्ता में भेजनेवाले मतदाता भी हम सभी सामान्य जन ही होते हैं। इसलिए परिस्थिति की चर्चा भयभीत होने के लिए नहीं, उपाय करने के लिए करनी चाहिए।
समर्थ कुटुंब व्यवस्था
undefinedडॉ. भागवत ने कहा कि समाज का संपूर्ण स्वरूप स्वयं में संजोए हुए सामाजिक संरचना की सबसे छोटी व अंतिम इकाई अपने देश में कुटुंब की मानी जाती है। समाज में जो परिवर्तन हमें अपेक्षित है, हम स्वयं के कुटुंब के आचरण व वातावरण के परिष्कार से प्रारम्भ करें। सादगी, स्वच्छता, पवित्रता, आत्मीयता आदि का दर्शन स्वयं के कुटुंब जीवन में हो सकें। अपने परिवारजनों में महिला वर्ग को हम सामाजिक दृष्टि से प्रबुद्ध व सक्रिय बनाएं। ऊर्जा, जल आदि की बचत, पर्यावरण-सुरक्षा,  स्वदेशी का व्यवहार, अन्यान्य कारणों से कुटुंब के संपर्क आनेवाले सभी से आत्मीय, सम्मान व न्यायपूर्वक आचरण का उदाहरण हमारे कुटुंबियों का बने। रूढि कुरीति तथा अंधविश्वासों से मुक्त,  जाति, पंथ, पक्ष, भाषा, प्रान्तों के भेदों से मुक्त समरसतापूर्ण अहंकार रहित स्रदय से सबका विचार व्यवहार व संचार रहें। अड़ोस-पड़ोस के निवासी जनों के साथ सुख-दु:खों में संवेदनशील व सक्रिय होकर हमारा कुटुंब अनुकरणीय सामाजिक आचरण की प्रेरणा व उदाहरण बनें यह अपना कर्तव्य है।
डॉ. भागवत ने सामाजिक सुधार की चुनौती का आह्वान करते हुए कहा कि अपनी इस सामाजिक पहल में सक्रिय होकर शतकों से चली दम्भ, पाखण्ड व भेद के दानव का अंत क्या हम नहीं कर सकते? हिन्दू समाज के एकरस जीवन का प्रारम्भ करने के लिए सभी हिन्दुओं के लिए सब हिन्दू धर्मस्थान, जल के स्त्रोत व श्मशान खुले नहीं कर सकते? सद्कृति के पक्ष में संपूर्ण समाज परस्पर आत्मीयता व भारतभक्ति के सूत्र में आबद्ध होकर खड़ा हो इसका यही एक उपाय है। देश के तंत्र व व्यवस्था में आवश्यक परिवर्तन तथा उनके स्वास्थ्य के लिए भी यही एकमात्र रास्ता है। ग्राम-ग्राम में व गली मुहल्ले में इस प्रकार के आचरणों के उदाहरणों से ही सामाजिक परिवर्तन की प्रक्रिया की गतिवृद्धि होगी।
पुरुषार्थ का संकल्प
सरसंघचालक के पुरुषार्थ को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि देश के समक्ष बहुत सारी जटिल व विकराल चुनौतियां हैं, उनपर विजय प्राप्त करने के लिए हमें अपनी शक्ति को जागृत कर पुरुषार्थ की पराकाष्ठा करनी पड़ेगी। क्योंकि राष्ट्ररक्षण व पोषण का दायित्व प्रजातांत्रिक व्यवस्था में जिनपर है उनकी क्षमता की बात तो दूर उनके उद्देश्यों पर ही प्रश्नचिन्ह लगने की स्थिति बनी है। इसलिए हम अपने व्यक्तिगत जीवन में शक्तिसंवर्धन व जीवन परिष्कार का प्रारम्भ करें। हम अपनी दिनचर्या में शारीरिक, मानसिक व बौद्धिक बल की वृद्धि करने का नित्य अभ्यास करें। अपने भारत देश के भूतकाल का सत्य इतिहास, गौरव, वर्तमान की यथातथ्य जानकारी प्रामाणिक निष्पक्ष सूत्रों से प्राप्त कर हृयंगम करें। देश के भविष्य के संबंध त्यागी व नि:स्वार्थी महापुरूषों के चिन्तन व उनके द्वारा अपने कर्तव्यों के संबंध में उपदेशों की समान बातों का अनुसरण करें। हम संकल्प करें कि हम जीवन की क्षमताओं को परिश्रमपूर्वक बढ़ाकर जीवन में सब प्रकार का यश व विजय प्राप्त कर उसका विनियोग समाज के हित में परोपकार व सेवा के लिए करेंगे।
देश के नियम व्यवस्था का पालन करवाने का जितना दायित्व शासन-प्रशासन का है उतनाही उस नियम व्यवस्था के अनुशासन को दैनंदिन जीवन में स्वयंप्रेरणा से आग्रहपूर्वक पालन करके चलने का दायित्व समाज का है। भ्रष्टाचारमुक्त शुद्ध सामाजिक जीवन का प्रारंभ भी यहीं से होता है। अनुपयुक्त नियम-कानूनों को बदलने के लिये आंदोलन आदि के अधिकार भी संविधान के दायरे में जनता को दिए गए हैं। अत: अपने सभी नागरिक कर्तव्यों का तथा नियम-व्यवस्था का पालन पूर्ण रूप से करने की आदत भी समाज में डालने का काम हमें अपने से प्रारंभ करना होगा।
स्वामी विवेकानन्द सार्ध शती का स्मरण कराते हुए सरसंघचालक ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने राष्ट्र के पुनर्जागरण की कल्पना की थी। शुद्ध चरित्र, स्वार्थ व भेदरहित अंत:करण, शरीर में वज्र की शक्ति व हृदय में अदम्य उत्साह व प्रेम लेकर स्वयं उदाहरण बन राष्ट्र की सेवा में सर्वस्व समर्पण करनेवाले युवकों के द्वारा ही अपनी पवित्र भारतमाता को विश्वगुरु के पद पर आसीन करने का निर्देश उन्होंने समाज को दिया था।
undefinedउन्होंने कहा कि विजयादशमी के अवसर पर अपने व्यक्तित्व की सारी संकुचित सीमाओं का उल्लंघन कर हृदय में राष्ट्रपुरूष के भव्य स्वरूप की आराधना में सर्वस्व समर्पण का हम संकल्प लें, तथा समाजहित में चलनेवाले सभी कार्यों में विवेकयुक्त व नि:स्वार्थ-बुद्धि होकर हम सामूहिकता से सक्रिय हों।
इसके पूर्व कार्यक्रम के प्रारंभ में ध्वजारोहण के पश्चात मान्यवरों द्वारा शस्त्रपूजन किया गया तथा स्वयंसेवकों ने दंड-व्यायाम योग आदि का प्रदर्शन किया। तत्पश्चात कार्यक्रम के प्रमुख अतिथि डॉ. लोकेश चन्द्र ने अपने संक्षिप्त भाषण में भारत के इतिहास और संघ भूमि की महिमा का बखान किया, और कहा कि शक्ति के साथ भक्ति का समन्वय हो तो हर विपरीत परिस्थिति पर विजय प्राप्त किया जा सकता है।
नागपुर महानगर संघचालक डॉ. दिलीप गुप्ता ने कार्यक्रम की प्रस्तावना तथा आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर हजारों स्वयंसेवकों के साथ ही भारी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।