शुक्रवार, 11 अक्तूबर 2013

मानवता का सर्वाधिक उल्लंघन उत्तर प्रदेश में


इंसानों पर जुल्म के मामले में यूपी सबसे आगे
Highest human right voilation in uttar pradesh
Friday, October 11, 2013
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By : टीम डिजिटल  अमर उजाला, द‌िल्‍ली
मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों में उत्तर प्रदेश सबसे आगे है। 1993 में गठित हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के गठन से अब तक सर्वाधिक सात लाख से भी ज्यादा मामले यूपी से दर्ज किए गए।

जबकि दिल्ली, बिहार, हरियाणा, राजस्थान और महाराष्ट्र समेत देश के अन्य राज्यों में मानवाधिकारों के उल्लंघन के मामले लाख के आंकड़े तक भी नहीं पहुंचे हैं।

एनएचआरसी की ओर से 21वें स्थापना दिवस की पूर्व संध्या पर जारी किए गए शिकायतों के आंकड़ों के मुताबिक आयोग ने अब तक 12 लाख 84 हजार 856 मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों पर संज्ञान लिया या शिकायत दर्ज कर कार्रवाई की।

कुल मामलों में से अब तक आयोग की ओर से 12 लाख 59 हजार और 106 मामलों का निपटारा किया जा चुका है। राष्ट्रीय आयोग के मुताबिक इस साल के 30 सितंबर तक उत्तर प्रदेश से सर्वाधिक 7 लाख 14 हजार 477 मामले दर्ज किए गए।

जबकि दिल्ली से 85,009, बिहार से 65,837, हरियाणा से 56,134, राजस्थान से 43,163, महाराष्ट्र से 40,515, उत्तराखंड से 31,137, तमिलनाडु से 29,002 और ओडिशा से 25,201 मामले दर्ज किए गए। अन्य राज्यों के आंकड़े इनसे भी कम रहे।

आयोग के अनुसार स्वत: संज्ञान लेकर उसकी ओर से 1817 मामले दर्ज किए गए। इनमें से 1519 मामलों का निपटारा किया जा चुका है। स्वत: संज्ञान से आयोग ने दिल्ली के 348, उत्तर प्रदेश के 324, आंध्र प्रदेश के 97, बिहार के 91 व अन्य राज्यों के भी मामले दर्ज किए।

आयोग की ओर से जम्मू-कश्मीर में विभिन्न स्तर पर हुए मानवाधिकार के उल्लंघन के 64 मामले स्वत: संज्ञान लेकर दर्ज किए गए। सबसे अधिक मानवाधिकार उल्लंघन के मामले पुलिस की ओर से कानून के मुताबिक कार्रवाई न किए जाने के खिलाफ रहे, जिनकी संख्या दो लाख से अधिक है।

इसके अलावा एक लाख के करीब मामले पुलिस की ओर से अधिकार के दुरुपयोग को लेकर दर्ज किए गए। 70 हजार से ज्यादा मामले पुलिस की ओर से झूठे आरोप लगाए जाने और 61 हजार से ज्यादा मामले राज्य व केंद्र सरकार के प्राधिकारों की ओर से कदम न उठाए जाने के खिलाफ थे।

एनएचआरसी की ओर से दोषी जन प्राधिकारों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की सिफारिश की गई और 84 करोड़ 57 लाख 18 हजार से भी अधिक जुर्माना 3483 मामलों में लगाया गया।

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