शनिवार, 30 नवंबर 2013

लिव इन रिलेशनशिप : जनहित के विरुद्ध विरूद्ध




फैसला है या शोषण की मान्यता ?

- स्मृति जोशी
अदालत ने पिछले दिनों एक फैसला दिया और सारे देश में ऐसा हल्ला मचा जैसे इस एक फैसले मात्र से हम सब असभ्य हो जाएँगे। 'हम' सब जो नहीं सोचते लिव इन रिलेशन जैसी बातों के बारे में, 'हम' जो डरते हैं परंपरा और मर्यादा के नाम पर खुलेआम मिलने से। शोर देख-सुन कर लगा जैसे हम अपने आप पर ही नियंत्रण खो देगें और चल पड़ेंगे अपनी पसंद का 'बिना विवाह करने वाला साथी' ढूँढने।

बात बेहद साधारण स‍ी है कि एक पुरुष या स्त्री, स्वतंत्र रूप से जन्म लेता है। परिवार में उसे जीवन के मूल्यों और संस्कारों की शिक्षा मिलती है। घर के सदस्यों के आचरण को देखकर वह अपनी समझ में विस्तार लाता है। जरूरत पड़ने पर आवश्यक संशोधन करता है। अच्छे और बुरे की तमीज उसे इसी परिवार से मिलती है। फिर बारी आती है विद्यालयों की। जहाँ उसे शिक्षक नैतिकता और अनैतिकता का पाठ पढ़ाते हैं।

यहीं उसे दोस्त मिलते हैं जो भिन्न परिवेश से आए होते हैं। उम्र के कच्चेपन में बिगड़ने-बहकने का यही दौर होता है। लेकिन इन सबके बीच एक आम इंसान की तरह उसका परिस्थिति को देखने-समझने का अपना एक नजरिया विकसित होता है। उसका अपने आप पर एक नियंत्रण स्थापित होता है। विवेक जाग्रत होता है। ऐसे में जमाने के आँधी-तूफान से निपटने का हौंसला भी खुद उसमें जन्म लेता है। यहीं जरूरत होती है परिवार के लोगों में एक सहज-संतुलित सोच और विश्वास की। अगर परिवार में उसे सही और सुंदर संस्कार मिलें हैं तो अदालतों के ऐसे फैसले उसे चाह कर भी बहका-भटका नहीं सकते।

फैसला क्या है
मंगलवार को प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति केजी बालकृष्णन, न्यायमूर्ति दीपक वर्मा और न्यायमूर्ति बीएस चौहान की पीठ ने कहा कि दो बालिग लोगों का एक साथ रहना कोई अपराध नहीं है? कोई गुनाह नहीं है। यह अपराध नहीं हो सकता अगर दो लोग अपनी मर्जी से साथ रहते हैं।

विरोध के स्वर
इस फैसले के साथ ही उठा एक बवंडर। पारंपरिक सोच वालों के अनुसार मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के जन्मदिन पर इस तरह का फैसला आना दुर्भाग्यजनक है। हमारा सनातन धर्म इस बात की अनुमति कतई नहीं दे सकता कि दो लोग विवाह नामक पवित्र संस्कार की अवहेलना कर इस तरह साथ रहें और जब जी चाहे अलग हो जाए। इससे पतन की राह पर आगे बढ़ने का युवाओं में दुस्साहस पैदा होगा। अब तक जो युवा परिवार की मर्यादा या कानून के डर से रिश्ते को खुला रूप देने में हिचकिचाते थे उनमें भी इस गलत बात के लिए हिम्मत पैदा होगी। यानी कहीं कोई एक दबाव की जो परत है वह इस फैसले से चटक जाएगी। यूँ भी आज का युवा अब किसी के बस का नहीं रहा। इस फैसले से उसमें आत्मविश्वास की अति का जन्म होगा। जो समय गुजरने पर गर्भपात, हिंसा और बेशर्मी का भी जनक होगा।

लड़के फायदा उठाएँगे
कल तक जो युवा व्यक्तिगत रिश्तों में एक सीमा के बाद आगे नहीं बढ़ते थे अब उन्हें किसी बात का कोई खौफ नहीं रहेगा। भोली-भाली लड़कियों की भावनाओं से खेलना पहले ही जिनका शगल था वे अब देह तक पहुँचने में देर नहीं करेंगे। इस हद तक जो पहले ही पहुँच चुके हैं वे अब मानवीयता के बचे-खुचे धरातल को भी खो देंगे क्योंकि कानूनन उन पर कोई बंधन नहीं होगा।

छली जाएँगी लड़कियाँ
वे लड़कियाँ जो कल तक इस तरह के सहजीवन से अपनी शादी, करियर, भविष्य, कानूनी उलझन और बदनामी के डर से बचती रही वे इस फैसले का गलत शिकार होगी। वे यह सोचकर कि इस तरह साथ जीवन गुजारना कोई गुनाह नहीं है, अपने आपको खुद भी छलेंगी और लड़कों से भी छली जाएँगी। यूँ भ‍ी हम आज बढ़ती तकनीक की कृपा से खुलेपन के ऐसे युग में जी रहे हैं जहाँ कभी भी, किसी भी वक्त कोई भी वाँछित चीज सरलता से पाई जा सकती है। ऐसे में शारीरिक , मानसिक, सांस्कृतिक और सामाजिक मर्यादा व मूल्य बचाए रखने का दायित्व आखिर कौन निभाएगा?

देह को लेकर चाहे हम सामाजिक परिधियों और वर्जनाओं का उल्लंघन कर लें मगर नैसर्गिक रूप से भुगतना तो लड़की को ही है। इस मामले में तो सर्वशक्तिमान ईश्वर ने भी भेदभाव ही किया है उसके साथ। कानून के नाम पर नैतिकता को ताक पर रख भी दिया, तो क्या अनुशासनहीन जीवन के नुकसान कम हो जाएँगे? यौन रोगों की बढ़ती संख्या को देखते हुए जरूरी है कि हम पर हमारा ही नियंत्रण, नियम और शासन रहे। कानूनन चाहे हमें किसी भी रूप में रहने की आजादी मिल जाए लेकिन लड़कियों को कैसा जीवन जीना है यह उनका विवेक ही तय करें बेहतर है।

विवाह का महत्व हमेशा रहेगा
वैदिक ऋचाओं में गुँथे मंत्रों के उच्च स्वर के बीच जब दो मन का मिलन होता है तब वातावरण में पवित्र और सकारात्मक तरंगे लहराती है। ये तरंगे ही एक-दूजे को हमेशा साथ रहने की प्रेरणा और ऊर्जा देती है। माता-पिता और स्नेहीजनों के आशीर्वाद में इतनी शक्ति होती है कि दाम्पत्य जीवन की हर बाधा को निर्विघ्न पार किया जा सकता है। सम्मान, सुरक्षा और प्रतिष्ठा की जो चमक विवाह करने के उपरांत चेहरे पर आती है वह यूँ ही साथ रहने से मलीनता में बदल जाती है।

तय हमें करना है कि हम अपने जीवन में गरिमा और गौरव को वरीयता देते हैं या मात्र कानून के दम पर बनाए अस्तित्वहीन रिश्ते को? एक ऐसा रिश्ता जिसका कोई आधार नहीं, कोई मूल्य नहीं, कोई समर्पण नहीं, कोई सामाजिक सुरक्षा नहीं। जो रिश्ता इनमें से किसी भी प्रकार की गारंटी नहीं लेता वह समाज की नजर में तो दूर खुद की ही नजरों में कितना सम्मानजनक होगा?

यह शोषण है स्वतंत्रता नहीं
इस रिश्ते में छल, कपट, शोषण और एक दूजे को इस्तेमाल करने की भावना अधिक होगी जो बिना किसी सामाजिक बंधनों के बना है। एक दूजे के प्रति सम्मान की भावना भी नदारद होगी। कहीं यह महिलाओं के शोषण की नई राह तो नहीं खोलेगा? तथाकथित स्वतंत्र युवतियों को भी अपने मानस में स्वतंत्रता की इस नई और छद्म परिभाषा को बसाने से पहले सोचना चाहिए कि यह शोषण का ही आधुनिक रूप है। बलात्कार का ही नया और 'सभ्य' तरीका है, जहाँ सिवाय बर्बादी और बदनामी के हासिल कुछ नहीं होगा।

संस्कृति से खेल
हमारी संस्कृति हमारी शान है। हमें अपनी मर्यादा और मूल्यों पर नाज है। लेकिन इस तरह के फैसले हमारी संस्कृति का हनन करते हैं। संस्कृति किसी की संपत्ति नहीं है जो जब चाहे समय के अनुसार और आने वाली पीढि़यों की इच्छानुसार बदली जा सकें। इस खेल में हार मानवता और उसके अनुशासन की है। हार संयम और सभ्यता की है फिर इसे खेला ही क्यों जाए?

डरना मना है
हमारे संस्कारों, अनुशासन, मूल्य और शालीनता की नींव इतनी कमजोर कभी नहीं रही कि एक फैसला होगा और हर युवा लिव इन रिलेशन के सपने देखने लगेगा। व्यावहारिक तौर पर यह संभव ही नहीं है। हर युवा इसके परिणाम-दुष्परिणाम से अवगत है। और फिर भी ना सुने तो फूटने दीजिए सिर और टूटने दीजिए दिल। गिरने दीजिए और संभलने दीजिए। नैतिकता के जो अर्थ हमारे पुराणों में वर्णित है वही अर्थ और वही परिभाषा युवा खुद रचने लगेंगे, जब एक बिखरी हुई जिंदगी उनके सामने होगी।
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स्वच्छंदता का विरोध या पुरुषवादी मानसिकता   

-वेबदुनिया डेस्क
सर्वोच्च न्यायालय ने अपने एक अहम फैसले में कहा है कि महिला और पुरुष बिना शादी के भी एक साथ रह सकते हैं और यौन संबंध बना सकते हैं। इसे आप नैतिक दृष्टि से तो गलत मान सकते हैं और सामाजिक तौर पर भी स्वस्थ परम्परा नहीं कहा जा सकता है, लेकिन इसे अपराध नहीं कहा जा सकता है। यदि कोई समाज के बनाए नियम कायदों को मानने की बजाय स्वच्छंद जीवन जीना चाहता है तो आप उसकी यह आजादी छीन भी नहीं सकते हैं।

ऐसे फैसलों का विरोध मात्र इसलिए ज्यादा होता है कि महिलाओं को अपनी मनमर्जी से किसी के भी साथ रहने को बुरा माना जाता है। देश में करोड़ों महिलाएँ विवाह के बावजूद ऐसे बहुत से तथाकथित सामाजिक और नैतिक बंधनों का शिकार बनी रहती हैं, जिन्हें अनैतिक और असामाजिक कहा जा सकता है, लेकिन इनका विरोध इसलिए नहीं होता है क्योंकि इनसे पुरुष के अहंकार या उसकी श्रेष्ठता को चुनौती नहीं दी जाती है।

दरअसल हम समाज में पाखंड पालने के आदी हो गए हैं। पुरुषों के लिए वेश्यालय तो बन सकते हैं या ऐसी ही अन्य तरह की व्यवस्था हो सकती हैं, लेकिन हम महिलाओं को वेश्यावृत्त‍ि करने का अधिकार भी नहीं देना चाहते हैं? सामा‍ज‍िक और नैतिक मूल्यों की बराबरी का देश में यह आलम है कि पुरुष को तो किसी भी आयु में किसी भी महिला से पत्नी के अतिरिक्त यौन संबंध बनाने की छूट मिलती है और वह चाहे तो वेश्यालय भी जा सकता है, लेकिन जब बात औरतों की आती है तो हमारे सारे संस्कार, धार्मिक विश्वास और संस्कृति‍ चीखने-चिल्लाने लगती है कि महिलाओं को ये अधिकार नहीं मिलने चाहिए? हम यह मानकर चलते हैं कि केवल महिलाओं की नै‍तिकता रक्षा करना जरूरी है पुरुष की नैतिक रक्षा करने की जरूरत ही नहीं है।

आज के समय में महिलाओं ने भी अपनी क्षमताएँ जाहिर की हैं और सिद्ध किया है कि वह किसी भी दृष्टि से पुरुषों से कम नहीं है, लेकिन वे आज भी वे कदम-कदम पर प्रताड़ित होती हैं, अपमानित होती हैं और यदि हम नैतिकता की बात करते हैं तो घरों के अंदर भी लड़कियाँ सुरक्षित नहीं हैं। लड़कियों, महिलाओं के परिजन, संबंधी घरों में ही उनसे बलात्कार तक कर डालते हैं तब उन्हें किसी नैतिकता या सामाजिक मूल्यों की याद नहीं रहती है, लेकिन अगर कोई औरत कह दे कि वह विवाह पूर्व यौन संबंध बनाने में कोई बुराई नहीं देखती है तो इस पर बवाल मच जाता है। हमें लगने लगता है कि एक औरत की ऐसी बातों से हमारी पूरी सभ्यता और संस्कृति नष्ट हो जाएगी। मर्यादाओं का पतन होगा और नैतिक मूल्य रसातल में समा जाएँगे।

इसका कारण यह है कि हम यह मानने को तैयार ही नहीं है कि लड़कियों और महिलाओं में आज किसी तरह की कमी नहीं है। वे भी सही समय पर सही ‍‍‍न‍िर्णय ले सकती हैं और उनमें भी अपना अच्छा भला पहचानने की क्षमता है। इसके बावजूद 3.3 फीसदी महिलाएँ अपने पेशेवर करियर के शीर्ष पर पहुँच ही जाती हैं। 17.8 प्रतिशत महिलाएँ मध्यम दर्जे तक सीमित रहती हैं और 78.9 फीसदी महिलाएँ सुविधाओं के अभाव में निम्न स्तर का ही जीवन गुजारती हैं।

आज भी पुरुषों को अधिकार जहाँ अपने आप मिल जाते हैं वहीं महिलाओं को अपने हकों के लिए लड़ना पड़ना है। कभी समाज, कभी धार्मिक मान्यताओं, कभी सभ्यता-संस्कृति और कभी अन्यान्य कारणों से महिलाओं को पुरुषों से नीचे रखने की संस्थाबद्ध तरीके से कोशिश की जाती रही है। महिला अगर कम कपड़े पहने तो अश्लीलता और पुरुष अगर नंगा घूमे तो फैशन। लड़कों की चार-चार गर्लफ्रेंड हों तो गर्व करने लायक बात होती है, लेकिन लड़की का एक भी बॉयफ्रेंड होना शर्म की बात है।

यदि गे समाज कानूनी मान्यता के लिए लड़ रहा है, तो ऐसे में लिव इन रिलेशन में क्या बुराई है? हमें यह बात भी देखना चाहिए कि अगर पश्चिमी देशों के समाजों में इस तरह की छूट है तो वहाँ परिवार का भी पूरी तरह से अस्तित्व समाप्त नहीं हो गया है। इस बात को समझा जाना चाहिए कि जिस समाज और काल में जिस तरह के विचारों की उपयोगिता रहेगी उसे आप नकार नहीं सकते हैं भले ही आप उसे पसंद करते हों या नहीं।

भारतीय समाज का एक विरोधाभास यह भी है कि वह औरत को देवी का दर्जा देता है लेकिन जब उन्हें अधिकार और सुविधाएँ देने की बात आती है तो हमें लगता है कि वे पुरुषों से आगे निकल जाएँगी और वह सब करने लगेंगी जोकि पुरुष करते रहे हैं। पुरुषवादी मानसिकता की यही समस्या है और इसलिए कोर्ट को भी ऐसे निर्णय देकर हमें बताना पड़ता है कि पुरुष और महिला बराबरी की हद तक स्वतंत्र हैं।

जो कोई बात महिलाओं के लिए गलत है वह जरूरी नहीं है कि वह पुरुष के लिए ठीक हो लेकिन हम तो हम मान बैठे हैं कि महिलाओं को संभालना या काबू में रखना पुरुष का विशेषाधिकार है और उसे यह अधिकार किसी भी सूरत में महिलाओं को नहीं सौंपना है क्योंकि महिलाओं में समाज, देश, काल, सभ्यता, संस्कति और नैतिकता की समझ कम होती है।

शुक्रवार, 29 नवंबर 2013

इंटरनेट की बदमाशियां : बदनाम या बर्बाद करना हो



सोशल मीडिया पर बदनाम करना हो या बर्बाद बस पैसे दो और...!
आईबीएन-7 | Nov 29, 2013
http://khabar.ibnlive.in.com/news/112667/1
नई दिल्ली। खोजी पत्रकारिता करने वाली वेबसाइट कोबरापोस्ट ने सोशल मीडिया के गलत इस्तेमाल पर सनसनीखेज खुलासा किया है। अपने विरोधियों को तबाह करने के लिए आईटी कंपनियों के साथ मिलकर कैसे लोगों की जिंदगी बर्बाद की जा रही है, कैसे किसी को बदनाम किया जा रहा है, कैसे किसी का करियर बर्बाद किया जा रहा है। इसका खुलासा अपने स्टिंग ऑपरेशन में कोबरापोस्ट ने किया है।

खोजी वेबसाइट कोबरापोस्ट ने खुलासा किया है कि पैसे लेकर लोगों को बदनाम करने के लिए आईटी कंपनियां सुपारी ले रही हैं। फेसबुक, ट्विटर और दूसरी सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट्स का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। इस काम के लिए कुछ लाख से लेकर करोड़ों रुपये तक की डील होती है। कोबरापोस्ट ने अपने खुफिया कैमरे में ऐसी 22 कंपनियों का पर्दाफाश किया है। स्टिंग ऑपरेशन के जरिए कोबरापोस्ट ने ये भी खुलासा किया है कि आईटी कंपनियां किन-किन कामों के लिए सुपारी ले रही हैं। इन कंपनियों का काम खतरनाक है जिनसे ये किसी की भी जिंदगी तबाह कर सकती हैं।

-किसी को भी बदनाम करने के लिए फर्जी वीडियो बनाना
-वीडियो बनाकर यूट्यूब के जरिए उसका प्रचार करना
-नेताओं और सरकार के खिलाफ अभियान चलाना
-वोटिंग से पहले अचानक विरोधी नेता पर कीचड़ उछलवाना
-नेता की फर्जी तस्वीरों-वीडियो के जरिए उसे बदनाम करना
-बदनाम करने के लिए SMS अभियान चलाना
-किसी भी तरह की अफवाह फैलाना
-दंगा फैलाने के लिए झूठी बातों-तस्वीरों का प्रचार
-झूठे आरोप लगवाकर नौकरी से निकलवाना
-फर्जी आरोप लगवाकर शादी तुड़वाना।

इन कंपनियों का इस्तेमाल सियासी दल भी अपने हितों के लिए जमकर कर रहे हैं। विरोधी पर कीचड़ उछालने और सोशल मीडिया पर मशहूर बनने के लिए लाखों-करोड़ों खर्च किए जा रहे हैं। कोबरापोस्ट के मुताबिक स्टिंग के दौरान जिन कामों के लिए कंपनियां तैयार हुईं, वो थेः-

-नेता का फेसबुक पेज बनाकर, उसके लाखों फॉलोअर बनाना।
-फर्जी प्रोफाइल बनाकर लाखों like खरीदना।
-ट्विटर पर लाखों फॉलोअर बनवाना।
-मुसलमानों के फर्जी प्रोफाइल बनवाना।
-मुस्लिमों के फर्जी प्रोफाइल से नेता की तारीफ करवाना।
-नेता के खिलाफ पेज पर कोई कमेंट ना आने देना।
-नेता के विरोधी के खिलाफ अभियान चलाना।
-नेता को उसके वोटबैंक के बारे में सारा डाटा देना।

आईटी कंपनियां जानती हैं कि ये काम गैर-कानूनी है। इसलिए नई तकनीक का सहारा लेकर ऐसे इंतजाम किए जाते हैं कि किसी को पता ना चले कि सोशल मीडिया का गलत इस्तेमाल कर कौन रहा है। अपनी पहचान छिपाने के लिए ये कंपनियाः-
-अमेरिका या कोरिया के सर्वर से प्रचार अभियान छेड़ती हैं।
-मकसद ये कि कहां से प्रचार शुरू हुआ, इसका पता ना चले।
-बदनाम करने के बाद कंप्यूटर तोड़ दिया जाता है।
-हर घंटे जगह बदली जाती है ताकि लोकेशन का पता ना लगे।
-दूसरे के कंप्यूटर को हैक किया जाता है।
-बल्क SMS भेजने के लिए इंटरनेट का इस्तेमाल होता है।
-पहचान छिपाने के लिए नई तकनीक अपनाई जाती है।
-ग्राहक की पहचान छिपाने के लिए सिर्फ नकद में पैसा लिया जाता है।
एक अनुमान के मुताबिक देश में 9 करोड़ 10 लाख से ज्यादा लोग इस वक्त सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हैं। इतनी बड़ी आबादी में किसी को बदनाम या मशहूर करना इन कंपनियों के लिए बहुत मुश्किल नहीं। सवाल ये कि इस नए खतरे से आखिर कैसे निपटा जाएगा।

सोमवार, 25 नवंबर 2013

गरीबों की बात करने वाली कांग्रेस पार्टी की : कांग्रेस राज में असलियत



गरीबों की बात करने वाली कांग्रेस पार्टी की : कांग्रेस राज में असलियत

उचित मूल्य की दुकानों पर राशन के गेहूं के लिए भटक रहे हैं लोग
Bhaskar News Network | Nov 25, 2013,
भास्कर न्यूज. बारां
जिलेभर में उचित मूल्य दुकानों पर मिलने वाले गेंहू के लिए उपभोक्ता सप्ताह में भी लोगों को भटकना पड़ रहा है। कई जगह गेहूं वितरण का आदेश नहीं होने की बात कही जा रही है, तो कई जगह पूरा गेहूं नहीं पहुंचने का हवाला देकर लाभार्थियों को वापस लौटाया जा रहा है।
उपभोक्ता सप्ताह शुरू होने से लाभार्थी राशन की दुकानों पर पहुंच रहे हैं, लेकिन उनको गेहूं नहीं मिल रहा है। राशन दुकानदारों का कहना है कि सिर्फ बीपीएल, स्टेट बीपीएल और अंत्योदय श्रेणी के उपभोक्ताओं को अनाज वितरित करना है, लेकिन पर्याप्त स्टाक नहीं होने से परेशानी आ रही है। कई उपभोक्ता दुकानों से निराश होकर लौट रहे हैं। पिछले महीने खाद्य सुरक्षा अधिनियम लागू होने पर रसद विभाग ने सभी उचित मूल्य दुकानों पर गेहूं का पर्याप्त स्टॉक पहुंचाने का दावा किया था। अधिनियम के तहत लाभार्थियों के राशन कार्डों पर सील लगाने एवं कर्मचारियों के समक्ष वितरण का निर्णय वापस ले लिया गया। इस दौरान कई दुकानों पर गेहूं की खेप पहुंची, लेकिन अधिनियम के तहत वितरण का आदेश नहीं मिल सका। वहीं पहले से वितरण का लाभ ले रहे बीपीएल और अंत्योदय श्रेणी के परिवारों को भी योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। इससे लोगों की परेशानी बढ़ी हुई है।
५५३ दुकानों से होता है वितरण
जिलेभर में ५५३ उचित मूल्य दुकानों से राशन का वितरण किया जाता है। इन पर एक लाख ९ हजार ७२२ बीपीएल, स्टेट बीपीएल और अंत्योदय श्रेणी के परिवारों को गेहूं का वितरण किया जाता रहा है। वितरण के लिए हर माह करीब ४४०० मेट्रिक टन गेंहू की सप्लाई जिले में की जाती रही है। इस गेहंू का वितरण चयनित श्रेणियों को निर्धारित दर पर किया जाता है।
ढ़ाई लाख परिवारों को मिलना था लाभ
अक्टूबर के महीने में खाद्य सुरक्षा अधिनियनियम लागू होने पर दो लाख ५० हजार परिवारों को इसमें शामिल किया गया। इस दौरान प्रत्येक माह के अंतिम सप्ताह में उपभोक्ता सप्ताह मनाने की घोषणा की गई थी। उपभोक्ताओं को वितरण के लिए ५४०० मेट्रिक टन गेहूं की आवश्यकता बताई गई थी। बाद में अधिनियम के तहत चयनित परिवारों को गेहूं वितरण पर अस्थाई रोक लगा दी गई। इसके चलते लाभार्थियों को इधर-उधर भटकना पड़ रहा है।

हाडौती में बिजली के कारखाने, फिर भी बिजली नहीं - नरेंद्र मोदी




 25 Nov-2013

अंता में  बिजली के कारखाने, फिर भी बिजली नहीं - नरेंद्र मोदी
एक झलक पाने की युवाओं में रही होड़
सभा में ऐसे गरजे मोदी
नरेंद्र मोदी अंता में कांग्रेस पर बरसे, 37 मिनट के भाषण में जनता से जुड़े मुद्दे उठाए, किसानों की मजबूती पर दिया जोर, भीड़ से सवालों के जरिए हां और ना- कहलवाया,

राहुल के भाषण में गरीब तो मोदी के भाषण में किसान
मोदी ने अंता में अपने 37 मिनट के भाषण में किसानों पर अधिक ध्यान दिया। उन्होंने किसान को समृद्ध करने पर जोर दिया। वहीं इससे पहले 17 सितंबर को बारां में हुई सभा में राहुल गांधी के भाषण के केंद्र में गरीब थे। उन्होंने भाषण में गरीब को संपन्न बनाने पर जोर दिया था।

मतदान की अपील: उन्होंने अंत में नारा दिया कि पहले मतदान, फिर जलपान। उन्होंने सभा में महिलाओं से आह्वान किया कि जब तक अंगुली पर मतदान का निशान नहीं देख लो तब तक घर पर चाय-नाश्ता मत बनाओ।

सबसे पहले मिले कौशल से
मंच पर आते ही नरेंद्र मोदी सबसे पहले पूर्व सांसद रघुवीरसिंह कौशल के पास पहुंचे और पैर छूने लगे। तो कौशल ने उन्हें आत्मीयता से रोक दिया। मोदी ने कौशल से बातचीत के बाद हाथ हिलाकर लोगों का अभिवादन स्वीकार किया।

यह भी रहे मौजूद
मोदी की सभा में भाजपा के राष्ट्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव, सांसद दुष्यंत सिंह, भाजपा जिलाध्यक्ष चंद्रप्रकाश विजय, अंता विधानसभा प्रत्याशी प्रभुलाल सैनी, किशनगंज प्रत्याशी ललित मीणा, बारां प्रत्याशी रामपाल मेघवाल, प्रेमनारायण गालव, निर्मल माथोडिय़ा, भाजयुमो जिलाध्यक्ष राजकुमार नागर, प्रधान संजना मीणा, रामेश्वर खंडेलवाल आदि मौजूद थे। संचालन रामशंकर वैष्णव ने किया।

कौन उगल रहा है जहर
मोदी ने कहा कि मेडम सोनियाजी आई तो कहा कि भाजपा वाले जहर फैलाते हैं, भाजपा वाले जहरीले हैं। मेडम कह रही है कि हम जहर दे रहे हैं। मोदी ने जनता से पूछा कि राजस्थान की क्या विशेषता है कि जब बड़े नेता आते हैं तो जहर की चर्चा करते ही हैं। छह महीने पहले जयपुर में कांग्रेस का अधिवेशन हुआ। शहजादे का राजतिलक किया गया। तब शहजादे ने कहा कि मैं सुबह मां के पास गया तो मां रो रही थी कि बेटा सत्ता जहर होती है। मोदी ने सभा में पूछा कि देश आजाद होने के बाद सबसे ज्यादा समय सत्ता में कौन रहा। सबसे ज्यादा जहर किसने चखा, किसके पेट में जहर पड़ा है, जिसके पेट में जहर है, वही तो उगलेगा।

क्या घटी महंगाई
कांग्रेस ने 2009 के लोकसभा चुनाव में सौ दिन में महंगाई दूर करने को कहा था। क्या महंगाई घटी है। उन्होंने वादा तोड़ा है तो आप उनसे नाता तोड़ लो। मोदी ने कहा कि महंगाई पर कांग्रेस के विद्वान नेता ने यह बयान दिया है कि गरीब दो-दो सब्जी खाता है, इसलिए महंगाई बढ़ रही है। गरीब सब्जी खा रहा है तो कांग्रेस को चिंता हो रही है। यह गरीब का मजाक उड़ा रहे है।

उन्हें मालूम नहीं देश के हालात
मोदी ने कहा कि ज्यादा बारिश हो तो फसल खराब हो जाती है। क्षेत्र में सोयाबीन का सूपड़ा साफ हो गया और सरकार ने किसानों से पूछा तक नहीं। पहले बारिश में पानी गिरा और अब आंखों से आंसू निकल रहे है। दिल्ली से बड़े-बड़े नेता यहां आए थे, शहजादे आए थे। क्या उन्होंने सोयाबीन या किसानों की बात की। उन्हें मालूम ही नहीं है कि देश के क्या हाल है।

भास्कर न्यूज. बारां
भाजपा के प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी व गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि कांग्रेस ने पहले देश तोड़ा, भारत का विभाजन कर दिया। मां भारती की बेडिय़ों की भुजाएं ही काट दी। वंदे मातरम् गीत के दो टुकड़े कर दिए। भाषावाद, प्रांतवाद, संप्रदाय के नाम पर लोगों को लड़ाया। हिन्दू और मुसलमान को एक-दूसरे से लड़ाया। बांटो और राज करो, यही कांग्रेस की राजनीति का हिस्सा है। यह लड़ाई लडऩे से देश को क्या मिला।

मोदी रविवार शाम को अंता कस्बे में चुनावी सभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आज गुजरात जो कार्य कर रहा है, उसका कारण है एता, शांति। वहां सभी मिलकर विकास में जुटे है। कांग्रेस को वोट बैंक की राजनीति के चलते कुछ नहीं सूझता। यहां बिजली के इतने कारखाने हंै, फिर भी बिजली नहीं मिल रही है। मैं गुजरात में पहली बार मुख्यमंत्री बना तो लोग कहते थे कि कुछ करो या मत करो, पर खाना खाने के समय तो बिजली दो। गुजरात में दो हजार मेगावाट बिजली की कमी थी। आज 24 घंटे बिजली मिल रही है। शाम चार बजे मंच पर पहुंचे मोदी ने अपने भाषण में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान की जमकर तारीफ की। वहां उन्होंने कृषि विकास दर दो फीसदी से बढ़ाकर 13 फीसदी कर दी है। गुजरात में भी पहले कृषि विकास दर माइनस में थी। हमने नर्मदा का पानी एक छोर से दूसरे छोर तक पहुंचाया। मध्यप्रदेश के किनारे से नर्मदा का मीठा पानी देश की सीमा तक ले गए। दुनिया की सबसे लंबी पाइप लाइन बिछाई, जिससे नौ हजार गांवों में मीठा पानी पहुंचा। मोदी ने चुटकी लेते हुए कहा कि यह पाइप लाइन ऐसी है कि अशोक गहलोत मारुति कार में बैठकर इसके अंदर परिवार सहित जा सकते हैं।

...तो बदल जाती तस्वीर
मोदी ने भाषण में बारां की जगह झालावाड़ कह दिया। उन्होंने कहा कि झालावाड़ की यह धरती उपजाऊ है। चंबल का पानी है। यदि कोई अच्छी सरकार मिलती तो जिला कहां से कहां पहुंच जाता। हमारे यहां सूरत में तापी नदी के किनारे सात प्रकार से बिजली उत्पादन किया जाता है। यदि यहां इरादा मजबूत होता तो इसकी तस्वीर बदल जाती।

नौजवानों से खिलवाड़
उन्होंने कहा कि कांग्रेस नौजवानों के भविष्य से खिलवाड़ करती है। उन्होंने भीड़ से पूछा कि क्या केंद्र या राज्य की सरकार ने आपको रोजगार दिया है। रोजगार के बिना नौजवान कहां जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि राजस्थान में काम मिलता तो उन्हें घर छोड़कर नहीं जाना पड़ता। उन्होंने कहा कि वसुंधरा राजे के हाथ में प्रदेश सुरक्षित रहेगा। दो सौ दिन बाद दिल्ली में सरकार बदलेगी। दोनों जगह भाजपा सरकार होगी तो विकास होगी ही। बीमारू प्रदेश का कलंक मिटाना है तो एक तारीख को मतदान में बटन दबाकर भाजपा को जिताना है।

गुजरात मॉडल भी समझाया
अपने 37 मिनट के भाषण में मोदी ने गुजरात की उपलब्धियां भी गिनाई। उन्होंने गुजरात मॉडल पर चर्चा करते हुए कहा कि गांव को समृद्ध करना है तो खेती को आधुनिक करना होगा। गुजरात दस प्रतिशत कृषि विकास दर पर पहुंचा, क्योंकि सब जगह पानी पहुंचाया गया। जैसे मनुष्य को हैल्थ कार्ड होता है, वैसे ही गुजरात में किसानों की जमीनों का हैल्थ कार्ड बनाया गया है। इसमें किसान की जमीन कैसी है, कोई कमी तो नहीं है, कोई बीमारी है क्या, कौन-सी फसल हो सकती है, कौनसा खाद व बीज अनुकूल रहेगा, यह सारी जानकारी दी गई है। इससे किसान जमीन की प्रकृति के अनुसार फसल कर रहे है। इस योजना से जमीनें बर्बाद होने से बच गई। उन्होंने कहा कि यदि देश के सभी किसानों को विज्ञान व टेक्नोलॉजी का लाभ मिले तो देश क्या, पूरे यूरोप का पेट भर सकते है। इनको किसानों की परवाह नहीं है। हम मवेशियों का भी ध्यान रख रहे हैं, गुजरात में पशु आरोग्य मेले लगाए जाते हैं। मेले इतनी संख्या में लगाए जाते हैं कि तीन किमी से ज्यादा किसी मवेशी को नहीं चलना पड़े। यहां व्यक्तियों को मोतियाबिंद के ऑपरेशन की सुविधा नहीं मिल पाती, जबकि गुजरात में मवेशियों के मोतियाबिंद के भी ऑपरेशन किए जा रहे हैं। मवेशियों को दर्द ना हो, इसलिए लेजर तकनीक सीखने के लिए डॉक्टरों की टीम को अमेरिका भेजा गया। पशुपालन पर ध्यान देने का परिणाम यह है कि गुजरात में दुग्ध उत्पादन में 85 फीसदी वृद्धि हुई है। आज देश के हर कोने में गुजरात के अमूल का दूध व बटर जाता है। क्या आपके मुख्यमंत्री ने कभी ऐसा सोचा होगा। इनके दिमाग में कुर्सी के सिवा कुछ नहीं है।

> बारां. नरेंद्र मोदी की अंता के स्टेडियम में हुई सभा के दौरान रविवार शाम को उत्साहित युवा नारे लगाते रहे। मोदी ने इनसे सवाल-जवाब भी किए और युवाओं की राय भी जानी।

भास्कर न्यूज. बारां
भाजपा के प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी व गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि कांग्रेस ने पहले देश तोड़ा, भारत का विभाजन कर दिया। मां भारती की बेडिय़ों की भुजाएं ही काट दी। वंदे मातरम् गीत के दो टुकड़े कर दिए। भाषावाद, प्रांतवाद, संप्रदाय के नाम पर लोगों को लड़ाया। हिन्दू और मुसलमान को एक-दूसरे से लड़ाया। बांटो और राज करो, यही कांग्रेस की राजनीति का हिस्सा है। यह लड़ाई लडऩे से देश को क्या मिला।

गुजरात में 1500 रुपए में इंजीनियरिंग - नरेंद्र मोदी



भाजपा नहीं, कांग्रेस फैला रही जहर: मोदी
भाइयों-बहनों,
मैं सबसे पहले भाजपा की ओर से आप सभी से माफी मांगना चाहता हूं, मुझे बताया गया कि भीड़ अधिक होने के कारण स्टेडियम के गेट बंद करने पड़े। मैं अभी रास्ते में आ रहा था, तो हजारों लोग स्टेडियम के बाहर खड़े थे। उन्हें अंदर आने का मौका नहीं मिला। मैं उनसे क्षमता मांगता हूं। मैं कोटा वासियों को कहता हूं। स्टेडियम में जगह हो या न हो, मेरे दिल में आपके लिए भरपूर जगह है।

कोटा : भाइयों-बहनों में कोटा कई बार आया हूं। संगठन के कार्य से भी आया हूं, सार्वजनिक सभाएं करने भी आया हूं, लेकिन कोटा ने आज सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए। मुझे नहीं लगता निकट भविष्य में आपका यह रिकार्ड को कोई तोड़ पाएगा।
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 कोटा में रहकर पढ़ रहे कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक के एक लाख से ज्यादा स्टूडेंट्स नरेंद्र मोदी के भाषण में फोकस रहे। पहली बार वोट दे रहे वोटर्स को लुभाने के लिए मोदी ने शिक्षा, तकनीक, रोजगार और स्किल डवलपमेंट जैसे मुद्दों पर ज्यादा देर बात की। कोटा को पूरे देश के युवाओं का प्रतीक भी उन्होंने बताया। हालांकि कुछ चीजें ऐसी भी दिखीं, जिनमें पूरी तैयारी का अभाव दिखा। वसुंधरा राजे ने कई बार दोहराया कि कोटा के 5 प्रत्याशियों को जिताएं, जबकि कोटा जिले में 6 प्रत्याशी हैं।

शिक्षा की बात हो या स्किल डवलपमेंट की या फिर रोजगार का मुद्दा हो, भाजपा के स्टार प्रचारक गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने बारी-बारी से युवाओं से जुड़े हर मुद्दे को उठाया। कभी गुजरात मॉडल लागू करवाने के बारे में युवाओं से हां बुलवाई तो कभी रोजगार के नाम पर वादा खिलाफी करने पर कांग्रेस से नाता तोडऩे के लिए हाथ उठवाए।

शिक्षा: राजस्थान में इंजीनियरिंग की शिक्षा गुजरात के मुकाबले 30 गुना महंगी बताई और इंजीनियरिंग कॉलेज लगभग दोगुने बताए। यहां फीस 45 हजार बताई। वहीं गुजरात में 1500 रुपए फीस बताई। राजस्थान में सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज 10 बताए, तो गुजरात में 19 बताए।

यूथ: कहा कि पूरे संसार की नजरें देश के यूथ पर हैं। 35 साल तक के युवाओं की संख्या 65 प्रतिशत बताई। भारत को संसार को सबसे नौजवान देश बताया।

रोजगार: कांग्रेस पर निशाना साधते हुए बेरोजगारी का मुद्दा उठाया। आरोप लगाया कि कांग्रेस ने 2009 में 1 करोड़ रोजगार देने का वादा किया था, लेकिन बाद में वादा खिलाफी की। बताया कि पूरे विश्व में इस समय लाखों इंजीनियर, डॉक्टर, नर्स, शिक्षक, क्राफ्टमैन, प्लंबर, फिटर की जरूरत है, लेकिन तैयार नहीं हो पा रहे।

स्किल डवलपमेंट: इस मामले में गुजरात की तुलना अमेरिका, कनाडा, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया से की। कहा कि पूरे देश के लिए इस मद में एक हजार करोड़ रुपए ही खर्च होते हैं, जबकि केवल गुजरात में स्किल डवलपमेंट पर 800 करोड़ रुपए खर्च किए जाते हैं।

कोटा: कहा कि कश्मीर से कन्याकुमारी तक के युवा कोटा में रह रहे हैं। कोटा के माहौल से पूरे देश का मिजाज जाना जा सकता है। स्टूडेंट्स की वजह से कोटा को लघु भारत बताया।

मोदी का भाषण सुनने के लिए जब कई युवाओं को स्टेडियम में घुसने का मौका नहीं मिला, तो वे दीवार फांदकर स्टेडियम में घुस गए।


चुनाव : मैं पहली बार ऐसे चुनाव देख रहा हूं, चुनाव विधायक नहीं लड़ रहे हैं, राजनीतिक दल नहीं लड़ रहे हैं। यह चुनाव जनता जनार्दन लड़ रही है। इमरजेंसी के समय देश के नेता जेल में थे, इंदिराजी ने देश को जेलखाना बना दिया था। मुझे याद है, वह चुनाव भी जनता ने लड़ा था। कांग्रेस को उत्तर भारत से साफ कर दिया था।

गुजरात मॉडल: शिक्षा की स्थिति कैसी होनी चाहिए। हमारे कांग्रेस के मित्र और कुछ कांग्रेस की मदद करने वाले पंडित बार-बार सवाल उठाते हैं। गुजरात का मॉडल गुजरात के बाहर चलेगा क्या। आपको बताना चाहता हूं, राजस्थान में इंजीनियरिंग के दस कॉलेज हैं। गुजरात में 19 हैं। जवाब दो, मॉडल चल सकता है या नहीं। राजस्थान में इंजीनियर कॉलेज की फीस 45 हजार रुपए है। गुजरात में सरकारी इंजीनियरिंग फीस 15 सौ रुपए है। मॉडल चल सकता है, या नहीं।

युवा: देश की 65 फीसदी जनसंख्या 35 साल से कम उम्र की है, हिन्दुस्तान दुनिया का सबसे नौजवान देश है। नौजवान को क्या चाहिए, अवसर चाहिए। आज पूरी दुनिया में लाखों शिक्षक, इंजीनियर और क्राफ्टमैन की जरूरत है। सारे विश्व में मैनपावर चाहिए। भारत पूरी दुनिया को मैनपावर दे सकता है।

सोनिया-राहुल : मैडम सोनिया कल राजस्थान में आई थी, उन्होंने कहा ये भाजपा वाले जहर फैलाते हैं। छह माह पहले जयपुर में कांग्रेस के शहजादे ने जो भाषण दिया था जयपुर में याद होगा। उन्होंने कहा मैं सुबह मां के कमरे में गया, मम्मी रो रही थीं, मम्मी ने कहा बेटा सत्ता जहर होती है। याद है ना। बताइए हिन्दुस्तान में ज्यादा सत्ता में कौन रहा है। यह जहर ज्यादा से ज्यादा किसने डसा है। किसके पेट में ज्यादा में ज्यादा जहर है। गालियां हमें देते हैं।

कांग्रेस: कांग्रेस पार्टी अपना नाम भी बदलती है नीतियां भी बदलती है और निशान भी।
आपने देखा होगा, ये पहले इंडियन नेशनल कांग्रेस थे, फिर इंडिकेट बने, सिंडीकेट बने। आज भी देश में कई सारी कांग्रेस है। समय आने पर जनता को मूर्ख बनाने के लिए वे अपना नाम बदलते रहते हैं। कांग्रेस आई यह आई का मतलब क्या है भाई।

महंगाई : पिछले लोकसभा चुनावों में कहा था कि सौ दिन में महंगाई कम करेंगे। क्या कम हुई। यह वादा खिलाफी नहीं है। मैडम सोनिया यहां आई थीं। उन्होंने महंगाई का 'म' भी नहीं बोला। उनके मुख्यमंत्री महोदय आए, उन्होंने बोला। प्रधानमंत्री आए बोले, शहजादे आए वे बोले। क्यों भाई। गरीब के घर में चूल्हा नहीं जल रहा। कोई उसपर बोलने को तैयार नहीं।

भ्रष्टाचार: कांग्रेस के घर के अंदर करप्शन भरा पड़ा है। जब तक देश कांग्रेस से मुक्त नहीं होगा करप्शन से मुक्त नहीं हो सकता है। आप कभी घर में कोयला ताले में रखते हो। कोई कोयले की चोरी करता है। यह कांग्रेस सरकार कोयला खा गई। कांग्रेस ने जल हो, नभ हो, पाताल हो, आकाश हो पृथ्वी हो। हर लोक में भ्रष्टाचार किया है।

मतदान: दो सौ दिन के बाद लोकसभा का चुनाव होने वाला है। दो सौ दिन के बाद जब दिल्ली सरकार के लिए चुनाव होगा कांग्रेस बचने वाली नहीं है। भाजपा सरकार आने वाली है। आप तय करिए राजस्थान में वसुंधरा जी की सरकार हो, दिल्ली में भाजपा की सरकार हो। आपके तो दोनों हाथ में लड्डू हो जाएंगे। एक दिसंबर को बटन दबाना है। पहले मतदान और फिर जलपान।

रविवार, 24 नवंबर 2013

मोदी ने कांग्रेस को बताया 'जहरीली पार्टी'


मोदी ने साधा सोनिया गांधी पर निशाना
चितौड़गढ़, एजेंसी :  24-11-13
भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस गरीब को गरीब नहीं मानती बल्कि वोट बैंक मानती है। कांग्रेस ने देश में मंहगाई बढ़ाने का काम किया है इसके अलावा कुछ नहीं किया। मोदी ने कांग्रेस के नेताओं पर व्यंग्य करते हुए कहा कि कांग्रेस के लोग कहते है, चाय बेचने वाला प्रधानमंत्री नहीं बन सकता। लेकिन उन्हें नहीं पता यह लोकतंत्र है और लोकतंत्र में चाय वाला, पान वाला, मजदूर या किसान कोई भी प्रधानमंत्री बन सकता है।

मोदी आज विधानसभा चुनाव को लेकर चित्तौड़गढ़ के इन्दिरा गांधी स्टेडियम में आयोजित चुनावी रैली को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि 2009 के घोषणा पत्र में कांग्रेस ने वादा किया था कि केन्द्र में उनकी सरकार आने पर 100 दिन में महंगाई कम करेंगे। लेकिन संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी ने महंगाई कम करना तो दूर, उसका नाम भी नहीं बोला। मोदी ने राहुल गांधी को युवराज और शहजादे संबोधित करते हुए कहा कि वह भी इस धरती पर कुछ दिन पहले आए थे। यहां उन्होंने धरने पर बैठे किसानों का जिक्र तक नहीं किया। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वह कहती है कि भाजपा जहर बांटती है। लेकिन कुछ दिन पहले राहुल ने कहा था कि सत्ता जहर है और सत्ता में सबसे ज्यादा कांग्रेस रही है। उन्होंने जहर भी पचाया है और उनके पेट में भी जहर है, फिर भाजपा कैसे जहर बांट सकती है।

नरेन्द्र मोदी ने दावा किया कि ये चुनाव 1977 के बाद हुए चुनाव जैसा है, यहां चुनाव कोई पार्टी नहीं लड़ रही बल्कि जनता लड़ रही है और जनता सरकार बदलने के लिए ऐड़ी चोटी का जोर लगा रही है। इस चुनाव में भाजपा की हवा नहीं बल्कि आंधी चल रही है। मोदी ने राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने पांच साल में रोजगार नहीं दिया। डेढ़ लाख शिक्षकों के पद खाली रहे और वे कहते रहे हमने अधिकार दिया। उन्होंने दावा किया, राजस्थान को गहलोत ने बीमारू राज्यों में खड़ा कर दिया है जिसे अब प्रदेश और देश में बनने वाली भाजपा की सरकार ही बाहर निकालेगी।


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मोदी ने कांग्रेस को बताया 'जहरीली पार्टी', राहुल को फिर कहा 'शहजादा'
 भाषा  /  Sunday, 24 November 2013

बांसवाड़ा: प्रधानमंत्री पद के लिए भाजपा के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पर पलटवार करते हुए आज कहा कि कोई भी अन्य पार्टी कांग्रेस से अधिक जहरीली नहीं हो सकती क्योंकि वह करीब आधी सदी से उसी पर फल फूल रही है जिसे उन्होंने ‘‘सत्ता का जहर’’ कहा था.

सोनिया ने एक दिन पहले ही कहा था कि भाजपा जहरीले लोगों की पार्टी है. मोदी ने यहां एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कहा कि राहुल गांधी ने एक बार स्मरण करते हुए कहा था कि उनकी मां सोनिया ने सत्ता की तुलना जहर से की थी.

मोदी ने कहा, ‘‘मैडम के शहजादे ने एक बार जयपुर में कहा था कि उनकी मां ने उनसे कहा था कि सत्ता जहर है. उन लोगों ने स्वतंत्रता के बाद देश पर करीब 50 सालों तक शासन किया..तो जहर का स्वाद अधिक समय तक किसने चखा..वह कांग्रेस थी..तब (कांग्रेस से) अधिक जहरीला कौन हो सकता है.’’

मोदी ने कहा कि राहुल गरीबी की बात तभी करते हैं जब मीडिया आसपास होता है. उन्होंने सवाल किया कि राहुल ने अपने घर के पास स्थित झुग्गी में रहने वालों के लिए कुछ भी क्यों नहीं किया.

उन्होंने कहा, ‘‘शहजादे गरीब और गरीबी की बात करते हैं लेकिन तभी जब मीडिया आसपास हो. एक वर्ष में दो या तीन बार यह दिखाने के लिए एक फोटो शूट होता है कि वह गरीबी को लेकर चिंतित हैं.’’

मोदी ने कहा, ‘‘दिल्ली में कल लोगों ने मुझे बताया कि राहुल का बंगला दिल्ली की मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र में है और उनके बंगले के पास ही 800 लोगों वाली झुग्गी है लेकिन वहां पर केवल दो सार्वजनिक शौचालय हैं.’’

उन्होंने कहा, ‘‘800 लोग और मात्र दो शौचालय..एक निवासी को अपनी बारी के लिए महीनों इंतजार करना पड़ेगा. लेकिन यह सभी चीजें कांग्रेस को दिखायी नहीं देती, उन्हें गरीबी तभी नजर आती है जब मीडिया होता है. उन्हें अन्य की चिंता नहीं है.’’

मोदी ने महंगाई को लेकर सरकार पर हमला बोला और कहा कि लोगों को चुनाव में कांग्रेस को भूल जाना चाहिए लेकिन उसे माफ नहीं करना चाहिए क्योंकि उसने वर्ष 2009 के आम चुनाव के दौरान किया अपना वादा आसानी से भुला दिया जिसमें उसने कहा था कि सत्ता में आने के 100 दिन के अंदर वह महंगायी पर काबू पा लेगी.

उन्होंने कहा, ‘‘पिछले चुनाव से पहले कांग्रेस ने महंगाई को 100 दिन के भीतर नियंत्रित करने का वादा किया था लेकिन क्या हुआ? कीमतें आसमान पर चली गईं और आसमान छूती महंगाई पर कोई नियंत्रण नहीं है.’’

उन्होंने कहा, ‘‘सभी तीन नेताओं..सोनिया गांधी, मनमोहन सिंह और राहुल गांधी ने राजस्थान का दौरा किया लेकिन किसी ने भी महंगाई की बात नहीं की और यह नहीं कहा कि उनकी सरकार ने उसे नियंत्रित करने के लिए क्या किया.’’

मोदी ने गुजरात से सटे जनजाति बहुल क्षेत्र में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि जनजातीय समुदाय ने देश के स्वतंत्रता आंदोलन में अहम योगदान किया है.

उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन कांग्रेस यह प्रचारित करती है कि देश के लिए एक ही परिवार ने सभी बलिदान किये. उन्होंने जनजातीय लोगों के बलिदान को नजरंदाज किया लेकिन तथ्य यह है कि उन्होंने जो समय महलों में बिताया वह उनके द्वारा जेलों में बिताये गए समय से अधिक है.’’

भाजपा नेता ने कहा कि वह अटल बिहारी वाजपेयी सरकार थी जिसने आदिवासियों के लिए एक अलग मंत्रालय स्थापित किया और उनके कल्याण के लिए बजट में प्रावधान किया जबकि कांग्रेस आदिवासियों को मात्र वोटर के रूप में देखती है और उनके बारे में बात तभी करती है जब चुनाव नजदीक होते हैं.

उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने बांसवाड़ा के मानगढ़ में गोविंद गुरू का एक स्मारक बनाया जो अब एक पवित्र स्थल बन चुका है.

उन्होंने कहा, ‘‘जलियांवाला बाग नरसंहार जैसी घटना मानगढ़ में हुई. आदिवासियों ने गोविंद गुरू की प्रेरणा से अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी गयी. मैं उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं.’’

शुक्रवार, 22 नवंबर 2013

सिब्बल बताऐं क्या गरीब सब्जी नहीं खा सकता : वसुन्धरा राजे


सिब्बल बताऐं क्या गरीब सब्जी नहीं खा सकता : वसुन्धरा राजे
 Nov 22 2013
 http://www.prabhatkhabar.com/news/64899-Sibal-poor-vegetable-can-not-eat-Raje.html
बासंवाडा: भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश अध्यक्ष वसुन्धरा राजे ने कहा है कि गरीब को भूखे पेट सोने के लिए मजबूर करने वाली कांग्रेस जवाब दे कि क्या सब्जी अमीरों के लिए ही है, गरीबों के लिए नहीं.
राजे ने केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल के सब्जी खाने वाले बयान की चर्चा करते हुए कहा कि महंगाई में सब्जी मिल कहां रही है? गरीब पहले प्याज-टमाटर से रोटी खा लेता था लेकिन ु कांग्रेस ने उसकी थाली से वह भी छीन लिया और तो और गरीब आज फीकी रोटी खाने को मजबूर है, क्योंकि इस कांग्रेस ने नमक महंगा करके उसे भी गरीब जनता से छीन लिया है. राजे ने कहा कि देश के इतिहास में सबसे ज्यादा महंगाई करने वाले कांग्रेस के नेता गरीबों का रोज अपमान कर रहे हैं.
राहुल गांधी ने यह कहकर गरीबों का मजाक उड़ाया कि गरीबी सिर्फ एक मानसिक अवस्था है. केंद्रीय मंत्री पी चिदम्बरम कहते हैं कि लोग फल, सब्जी, दूध तथा मीट ज्यादा खाने लगे हैं इसलिए महंगाई बढ़ी है. मैं कहना चाहती हूं कि ये नेता राजस्थान आकर देखें कि यहां की जनता किस हाल में जी रही है. उन्होने कहा कि जयपुर में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि कांग्रेसी नेता शालीनता रखते हैं और भाजपा नेता अपमानजनक शब्द बोलते हैं. क्या प्रधानमंत्री को पता नहीं कि महिलाओं से दुराचार के मामले में राजस्थान के दो मंत्री एवं एक विधायक जेल में हैं.

सिब्बल ने गरीबों का उड़ाया मजाक, 'दाल के साथ सब्जी खाने से बढ़ी महंगाई'



सिब्बल ने गरीबों का उड़ाया मजाक, 'दाल के साथ सब्जी खाने से बढ़ी महंगाई'
Fri, 22 Nov 2013

नई दिल्ली। जहां एक ओर देश कर जनता बढ़ती सब्जियों की कीमतों से त्रस्त है, वहीं सरकार लोगों के जले पर नमक छिड़कने का काम करने लगी है। कांग्रेस सरकार अपनी मुसीबतें कम करने की जगह बढ़ाती जा रही है। देश के कानून मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने एक बेतुके बयान में कहा कि गरीब सब्जियां खाने लगा है इसलिए महंगाई बढ़ गई है।

ग्वालियर में कपिल सिब्बल ने बढ़ती महंगाई के सवाल पर संवाददाताओं से कहा कि देश के गरीब अब दाल के साथ सब्जी भी खाने लगे हैं जिससे महंगाई बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि पहले गरीब वर्ग दाल रोटी खाता था और अब उसके साथ सब्जी भी खाने लगा है। इससे एक तरफ मांग बढ़ी है और उत्पादन में कमी आई है। इस कारण ही महंगाई बढ़ी है।

इससे पहले कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने कुछ महीने पहले इलाहाबाद में कहा था कि गरीबी एक मानसिक अवस्था है। जिसे लेकर उन्हें आलोचना झेलनी पड़ी थी। कांग्रेस नेता राज बब्बर और रशीद मसूद भी महंगाई को लेकर शर्मनाक बयान देकर फंस चुके हैं। राज बब्बर ने 12 रुपए में और मसूद ने पांच रुपए में भरपेट खाना मिलने की बात कही थी।

कांग्रेसराज न होता तो भारत विश्व में धनवान होता

हालांकि, कपिल सिब्बल जबलपुर में इस बात से मुकर गए। यहां उन्होंने कहा कि महंगाई एक गंभीर मुद्दा है। सब्जी व फलों के दाम बढ़े हैं, अनाज के दाम कम बढ़े हैं। उन्होंने महंगाई के लिए राज्य सरकार को दोषी ठहराया। सिब्बल ने कहा कि बढ़ती कीमतों की जिम्मेदार राज्य सरकार भी है। मांग और आपूर्ति के सिद्धांत पर ध्यान देते हुए उत्पादन बढ़ाने के लिए कोई प्रयास नहीं किए गए। उन्हें केन्द्र को कोसने का हक नहीं है क्योंकि अनाज, सब्जी राज्यों में पैदा होती है।

सिब्बल ने यह बयान सब्जियों के दाम बढ़ने के कारणों का जवाब देते हुए कहा। जिस पर विवाद खड़ा हो गया है। गौरतबल है कि वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने बयान दिया था कि लोग 15 रुपये की पानी की बोतल तो खरीद ही लेते हैं लेकिन अगर अनाज की कीमत में एक रुपये बढ़ा दिया जाता है तो लोगों को समस्या आने लगती है। उनके इस बयान को भाजपा नेताओं ने आड़े हाथों लिया था। यह ध्यान देने योग्य है कि इन दिनों दिल्ली में प्याज की बढ़ी कीमतों के कारण दिल्ली की कांग्रेस सरकार मुश्किल में हैं।

'तहलका' के तेजपाल पर ; मचा 'तहलका'



तेजपाल पर मचा 'तहलका', पुलिस का शिकंजा तेज
आईएएनएस , Nov 22, 2013

पणजी। यौन शोषण के आरोपों में घिरे तहलका के पूर्व एडिटर इन चीफ तरुण तेजपाल की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। इस मामले की जांच कर रही गोवा पुलिस का शिकंजा तरुण तेजपाल पर लगातार कसता जा रहा है। पुलिस ने गोवा के उस फाइव स्टार होटल की सीसीटीवी फुटेज जब्त कर ली है जहां महिला पत्रकार के साथ यौन शोषण का मामला हुआ। अब पुलिस इस सीसीटीवी फुटेज की मदद से आगे की जांच करेगी।
बताया जा रहा है कि पुलिस जल्द ही तरुण तेजपाल को पूछताछ के लिए बुला कर सकती है। गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पार्रिकर ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। गोवा पुलिस ने केस क्राइम ब्रांच को सौंप दिया है। क्राइम ब्रांच ने लड़की की शिकायत पर और जरूरी दस्तावेज मंगवाए हैं। महिला पत्रकार के मुताबिक इसी महीने गोवा में थिंक फेस्ट के दौरान तरुण तेजपाल ने उसका यौन शोषण किया था।
बता दें कि ये फेस्ट तहलका पत्रिका ने ही आयोजित किया था। आरोप के मुताबिक यौन शोषण की ये घटना गोवा में तहलका के थिंक फेस्ट के दौरान लगातार दो दिन हुई थी। इन आरोपों के बाद तेजपाल ने माफी मांगी और छह महीने तक संपादक पद से दूर रहने का फैसला लिया है।
उधर, इस मामले में बीजेपी के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली ने कहा है कि कानून के मुताबिक पुलिस को अपनी कार्रवाई करनी चाहिए। इसमें इस बात को कतई नहीं देखा जाए कि जिस शख्स पर आरोप लगा है, वो कौन है।
तेजपाल पर मचा तहलका
तरुण तेजपाल के खिलाफ लगे सनसनीखेज आरोप सामने आने के बाद से राजनीति और पत्रकारिता जगत में बवंडर खड़ा हो गया है। सामाजिक कार्यकर्ताओं, राजनीतिक दलों और पत्रकारों ने तेजपाल की तीखी आलोचना की है और उन्हें आसानी नहीं छोड़े जाने की अपील की है। एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने एक बयान में कहा है, पूरी तरह से अपराध माने जाने वाले कृत्य के लिए अपने आप जताया गया प्रायश्चित उपचार नहीं हो सकता।
गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर ने कहा कि पीड़िता को उत्तरी गोवा के एक होटल में घटी घटना के बारे में शिकायत दर्ज करानी चाहिए। उसी होटल में तहलका ने इस महीने के शुरू में समारोह का आयोजन किया था। उन्होंने कहा कि जब तक हमारे पास शिकायत नहीं आएगी तब तक हम दोष कैसे साबित करेंगे। पर्रिकर ने घटना की शुरुआती जांच कराने के संकेत दिए और कहा कि राज्य में आपराधिक घटना घटी। हमें जांच करने की जरूरत है और इसके लिए शिकायत की जरूरत नहीं होती।
तहलका की प्रबंधक संपादक शोमा चौधरी ने बुधवार को पत्रिका के सभी कर्मचारियों को तेजपाल का खत ई-मेल किया था। तेजपाल ने इससे पहले शोमा चौधरी को ई-मेल में लिखा था कि समझदारी की चूक और हालातों की गलत समझ कारण यह दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति पैदा हुई, जो हमारे विश्वास और संघर्ष के खिलाफ है। मैं पहले ही अपने दुर्व्यवहार के लिए बिना शर्त क्षमा मांग चुका हूं, लेकिन मुझे लगता है कि अभी प्रायश्चित बाकी है। इसलिए मैं तहलका के मुख्य संपादक के पद से और कार्यालय से अगले छह महीने के लिए हटने की पेशकश कर रहा हूं।
इस बीच राष्ट्रीय महिला आयोग कहा कि समाचार पत्रिका तहलका के मुख्य संपादक तरुण तेजपाल द्वारा एक महिला पत्रकार के साथ कथित यौन उत्पीड़न का मामला अगर उनके सामने उठाया जाता है, तो वह मामले की जांच करेगा। ममता शर्मा ने तेजपाल द्वारा तहलका के मुख्य संपादक के पद से छह महीने के लिए त्यागपत्र देने की घोषणा पर कहा कि तरुण तेजपाल भगवान नहीं हैं, जो खुद अपनी करनी की सजा तय करेंगे।
साल 2001 में तहलका के स्टिंग आपरेशन से शर्मिदगी का सामना कर चुकी भारतीय जनता पार्टी ने कहा कि छेड़खानी करना नई परिभाषा के तहत कानून के तहत दुष्कर्म की श्रेणी में आता है। बीजेपी प्रवक्ता मीनाक्षी लेखी ने कहा कि आज की संशोधित परिभाषा के अनुसार तरुण तेजपाल का काम दुष्कर्म की श्रेणी में आता है।
उन्होंने राष्ट्रीय महिला आयोग और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग दोनों से ही इस मामले की जांच करने की मांग की। लेखी ने मांग की कि तेजपाल के खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज किया जाए और उन्हें तुरंत गिरफ्तार किया जाए।
वहीं पूर्व पुलिस अधिकारी और प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता किरण बेदी ने कहा कि कानून की दृष्टि से इस मामले में दो तरह के कदम उठाए जा सकते हैं, पहला तो यह कि तहलका की यौन उत्पीड़न समिति के सामने यह मामला रखा जाए, अगर तहलका में ऐसी कोई समिति है तो मामले की विस्तृत जांच हो। दूसरा यह कि पुलिस अपने विवेक के आधार पर संज्ञान ले और मामले की पूरी छानबीन करे, उस स्थिति में भी अगर पीड़िता प्राथमिकी दर्ज करने को तैयार न हो।
वरिष्ठ पत्रकार और द हिंदू के पूर्व संपादक सिद्धार्थ वरदराजन ने कहा कि मुझे नहीं लगता कि इस मामले को एक निजी मामले की तरह लिया जाना चाहिए। आरोपी सिर्फ कार्यालय से अपना पद छोड़कर इतनी आसानी से छूट नहीं सकता।
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तहलका ने बदला रुख, शोमा चौधरी ने कहा, पुलिस के पास जाने को स्वतंत्र है पीड़िता
NDTVIndia, Last Updated: नवम्बर 22, 2013

नई दिल्ली: तहलका के प्रधान संपादक तरुण तेजपाल के खिलाफ यौन उत्पीड़न मामले में समाचार पत्रिका की प्रबंध संपादक शोमा चौधरी ने रुख बदलते हुए कहा है कि इस मामले में हमारी ओर से पीड़ित लड़की पर किसी भी तरह का कोई दबाव नहीं है और पुलिस में जाने या न जाने का फैसला करने के लिए वह स्वतंत्र है।
शोमा चौधरी ने अपने पिछले बयानों को लेकर पूछे गए सवालों के जवाब में यह भी कहा कि "हमारी ओर से भी थोड़ी गलती हुई और हमें लग रहा था कि पीड़ित लड़की तरुण तेजपाल द्वारा माफी मांगे जाने से संतुष्ट है। उस समय तक हमें सिर्फ कहानी का तरुण वाला पहलू ही मालूम था।"

शोमा चौधरी ने इसके अलावा यह जानकारी भी दी कि तहलका ने मामले की जांच के लिए आंतरिक समिति का गठन कर दिया है। शोमा ने कहा कि प्रकाशक उर्वशी बुटालिया की अध्यक्षता में शिकायत समिति मामले की जांच करेगी। शोमा ने एक बयान में कहा, तरुण तेजपाल को 20 नवंबर को तहलका के संपादक पद से हटाने की स्वीकृति के बाद तहलका ने अब एक औपचारिक शिकायत समिति बनाई है, जो इस मामले में दिशानिर्देशों के अनुरूप मामले की जांच करेगी।

समिति की प्रमख जानी-मानी महिला अधिकार कार्यकर्ता और प्रकाशक उर्वशी बुटालिया होंगी। शोमा ने कहा, इसके अलावा तहलका महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 की धारा 4 के अनुसार एक औपचारिक शिकायत समिति बनाएगी, जो तहलका में अभी तक नहीं है।

समिति के सामने अब पीड़िता तथा तरुण तेजपाल दोनों का पक्ष रखा जाएगा और हासिल सबूतों के आधार पर समिति अपने निष्कर्ष निकालेगी। शोमा ने यह भी कहा कि मैं इस मामले में कोई निर्णय देने के लिए नहीं आई हूं और आप लोगों से (मीडिया)
 भी यही आग्रह है कि अटकलबाजी न करके समिति को अपना काम करने दें।

सच्चाई के तमाशबीनों का सच : आम आदमी पार्टी के 9 बड़े नेता स्टिंग में फंसे




सच्चाई के दावेदारों पर संकट... स्टिंग में फंसे आप नेता
नई दिल्ली, हिन्दुस्तान टीम : 22-11-2013

आम आदमी पार्टी नेता कुमार विश्वास और आरके पुरम से पार्टी उम्मीदवार शाजिया इल्मी गुरुवार को एक स्टिंग ऑपरेशन में फंसते नजर आए। इस स्टिंग में उन पर आरोप लगे हैं की दोनों ने अवैध तरीके से पैसा लिया है।

एक वेबसाइट मीडिया सरकार ने आप के नौ नेताओं के खिलाफ स्टिंग ऑपरेशन किया है। इनमें से एक स्टिंग में दिखाया गया कि शाजिया से मीडिया टीम के सदस्य ने एक कंपनी को सबक सिखाने के लिए मदद मांगी।
इसके लिए कंपनी के खिलाफ धरना-प्रदर्शन करने का बात कही गई। इस पर पहले तो शाजिया ने कानूनी दस्तावेजों पर बात करने को कहा, लेकिन जैसे ही स्टिंग टीम ने इसके बदले उन्हें डोनेशन देने की बात कही, शाजिया के सुर बदलते नजर आए।

उन्होंने पैसा स्वयंसेवियों की तनख्वाह के नाम पर लेने की बात कही। इसी प्रकार दूसरे स्टिंग में कुमार विश्वास को अपने कवि सम्मलेन के लिए चेक के बदले नकद रुपये मांगने देखा गया। इस स्टिंग पर कुमार विश्वास का कहना है कि मैं अपने कार्यक्रम के लिए पैसे लेता हूं और उस पर टैक्स भी देता हूं। नकद पैसे लेने गैरकानूनी नहीं है।
वहीं आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि हमारे कई विस प्रत्याशियों के स्टिंग ऑपरेशन किए गए हैं। उनकी जांच की जा रही है। अगर किसी के खिलाफ भी आरोप सिद्ध हुए तो उसे चुनाव मैदान से हटा देंगे। भ्रष्टाचार को किसी भी सूरत में सहन नहीं किया जाएगा।
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शाजिया, विश्वास समेत AAP के 9 बड़े नेता स्टिंग में फंसे
नवभारतटाइम्स.कॉम | Nov 21, 2013  नई दिल्ली

आम आदमी पार्टी (AAP) के नौ बड़े नेताओं पर एक स्टिंग ऑपरेशन में अवैध चंदे की उगाही के आरोप लगे हैं। आर.के. पुरम से AAP की प्रत्याशी शाजिया इल्मी और कुमार विश्वास पर किए गए स्टिंग ऑपरेशन में दोनों पर कैश लेने का आरोप है। अपने नेताओं के स्टिंग में फंसने पर AAP ने आनन-फानन योगेंद्र यादव और संजय सिंह की दो सदस्यीय कमिटी को इसकी जांच का जिम्मा सौंपते हुए 24 घंटे के अंदर फैसला सुनाने की बात कही।

दोनों ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सफाई देते हुए शुरुआती जांच में स्टिंग की सीडी में छेड़छाड़ की बात कही। योगेंद्र यादव ने कहा कि उन्होंने चैनल से स्टिंग के मूल टेप मांगे हैं। इसकी जांच के बाद 24 घंटे के अंदर फैसला सुना दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर उम्मीदवार दोषी पाए गए तो उन्हें हटाने से भी नहीं हिचकेंगे। इससे पहले पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी कहा कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

इस मामले में कुमार विश्वास ने भी सफाई दी है। उनका कहना है कि उन्होंने कैश की भी रसीद दी है और उस पैसे की अकाउंट में एंट्री भी है। कुमार विश्वास ने शाजिया इल्मी के बचाव में भी कहा कि शाजिया ने भी कैश देने के एवज में रसीद देने की बात कही है।

दरअसल एक टीवी चैनल के लिए 'मीडिया सरकार' के ओर से कराए गए इस स्टिंग में आरके पुरम से आप की उम्मीदवार शाजिया इल्मी एक धरना प्रदर्शन में शामिल होने के लिए 25 लाख रुपए का बेनामी चंदा लेने की बात करती दिखती हैं। वहीं कुमार विश्वास अपने एक कार्यक्रम के लिए चेक के बजाय कैश की बात कर रहे हैं। कुमार विश्वास के सचिव 50 हजार रुपए कैश भी ले लेते हैं। यह स्टिंग संगम विहार से AAP के उम्मीदवार दिनेश मोहानिया, पालम से भावना गौर और ओखला से इरफान उल्लाह खान समेत पार्टी के कुछ दूसरे कार्यकर्ताओं पर भी किया गया।

स्टिंग में रिपोर्टर शाजिया से एक प्राइवेट कंपनी के कर्मचारी के तौर पर मिलता है और विरोधी कंपनी के खिलाफ ऐक्शन की बात करता है। आरोप है कि शाजिया कुछ दस्तावेजों की एवज में मदद को राजी हो जाती हैं। स्टिंग में शाजिया कैश लेने के लिए भी तैयार हो जाती हैं और विरोधी कंपनी की छवि खराब करने के लिए कैश लेने के तरीके पर बात करती हैं।

इसी तरह दिनेश मोहानिया चुनाव के बाद प्रॉपर्टी और पैसे के विवाद को सैटल करने में मदद का वादा करते दिखते हैं, तो इरफान उल्लाह पैसे के मामले को किसी भी तरीके से सुलझाने को तैयार दिखते हैं। एक और स्टिंग में कोंडली विधानसभा सीट से आप उम्मीदवार मनोज कुमार वोट के बदले अपने चुनाव क्षेत्र के एक व्यक्ति से काला धन दिलवाने का वादा कर रहे हैं।

मंगलवार, 19 नवंबर 2013

मेरे नाम का इस्तेमाल न करें केजरीवाल: अन्ना हजारे



मेरे नाम का इस्तेमाल न करें केजरीवाल: अन्ना
आईबीएन-7 | Nov 19, 2013
नई दिल्ली। दिल्ली में सोमवार के स्याही कांड के बाद आज अन्ना और केजरीवाल के बीच दूरियां खुलकर सामने आ गई हैं। अन्ना ने केजरीवाल के उन आरोपों को नकार दिया है जिसमें कहा गया था कि अन्ना दूसरों के इशारों पर काम कर रहे हैं। अन्ना ने ये भी कहा केजरीवाल की ईमानदारी पर उन्हें शक नहीं है। अन्ना ने कहा कि हम लोग दुश्मन नहीं हैं और वो केजरीवाल के चरित्र पर शक नहीं करते। लेकिन अन्ना ने साफ किया कि वो नहीं चाहते कि उनके नाम का इस्तेमाल चुनावों के दौरान हो।
AAP ने लगाया बीजेपी पर आरोप
उधर आप पार्टी ने साफ तौर पर ये आरोप लगाया है कि बीजेपी अन्ना और उनके बीच की दूरियां बढ़ा रहे हैं। आप के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाया है कि अन्ना के करीबी उन्हें घेरे रहते हैं और उनसे बात नहीं करने देते। वही आप के ही नेता कुमार विश्वास ने एक पूर्व सांसद और पत्रकार संतोष भरतिया पर आरोप लगाया कि उन्होंने अन्ना पर दबाव डालकर चिट्ठी लिखवाई जिसमें अन्ना ने आप पार्टी से तमाम सवाल पूछे थे, विश्वास का कहना है कि ये सब बीजेपी के इशारे पर किया जा रहा है। इससे पहले अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाया था कि अन्ना के करीबी उन्हें घेरे रहते हैं और उनसे बात नहीं करने देते।
अन्ना ने पूछे थे सवाल
दरअसल अन्ना ने कुछ दिनों पहले टीम केजरीवाल से कई सवाल पूछे थे इनका केजरीवाल ने सिलसिलेवार जवाब दिया था। अन्ना ने पूछा था कि रामलीला में मेरे अनशन के दौरान और जंतर-मंतर में जो पैसा जमा हुए, उनका क्या हुआ। मुझे इसके बारे में कुछ पता नहीं है। आंदोलन के नाम पर जो पैसे जुटाए गए उसे चुनाव में खर्च करना सही नहीं है। इस पर केजरीवाल ने जवाब दिया कि अन्ना आपके इस सवाल से मुझे बहुत तकलीफ हुई है। आपकी भेजी गई स्पेशल टीम भी हमारे सभी खातों की जांच कर चुकी है। जांच में संतुष्ट होने के बाद भी सवाल उठता है तो दुख होता है
अन्ना ने पूछा कि आपने मेरे नाम का कार्ड बनाया जिससे पैसे जुटाए गए। मैंने कभी इसकी इजाजत नहीं दी। आप के चुनाव के लिए पैसा जमा करने में मेरे नाम का इस्तेमाल गलत है। केजरीवाल ने बताया कि अन्ना कार्ड से हमारी पार्टी के लिए पैसा जमा करने का सवाल ही नहीं उठता। जब से आपने मना किया है तब से पार्टी ने आपके नाम का इस्तेमाल नहीं किया।
अन्ना ने कहा कि आपने 29 दिसंबर को लोक पाल बिल पास करने का भरोसा दिया है जबकि इसे सिर्फ लोकसभा पास कर सकती है दिल्ली विधानसभा नहीं। केजरीवाल ने जवाब दिया कि 29 दिसंबर को हम वही बिल पास करेंगे जो दिल्ली विधानसभा के अधिकार क्षेत्र में आता है। इसके दायरे में सीएम, मंत्री और विधायक होंगे।
उधर, अन्ना हजारे से मिलकर लौटे कुमार विश्वास का कहना है कि अन्ना और केजरीवाल के बीच जानबूझकर गलतफहमी पैदा करने की कोशिश की गई। विशवास ने कहा कि मुझे पता चला कि वहां कुछ चीजें गलत तरीके से प्रस्तुत की गई हैं। अन्ना ने ये बताया कि मैंने कई बार बात करने की कोशिश की पर हो नहीं पाई। कुमार विश्वास ने कहा कि मैंने भी उन्हें बताया कि हमने भी बात करने की कोशिश की पर हो नहीं पाई। इस पर अन्ना को काफी आश्चर्य हुआ।
विश्वास का कहना है कि नकली पोस्टर छाप कर अन्ना तक पहुंचाए गए। उनके मन में संदेह था। मैंने भी उनके चारो तरफ जिस तरह के लोग है उस बारे में जानकारी दी। हालांकि अन्ना हजारे ने आरोपों को गलत बताया है। उन्होंने कहा कि वो बात करने को हमेशा तैयार रहे हैं।
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अरविंद से नाराज अन्ना...बोले चरित्र ठीक, पर चाल नहीं
नई दिल्ली, एजेंसी 19-11-13
केजरीवाल से अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्‍होंने साथ ही कहा कि उन्‍हें केजरीवाल के चरित्र को लेकर आज भी कोई शक नहीं है।
हालांकि अन्ना ने कहा कि सिम कार्ड से उनका कोई ताल्‍लुक नहीं, फिर भी उन्‍हें आरोपी बनाया गया। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि वह 29 दिसंबर को अन्‍ना का लोकपाल पारित कराने की बात करते हैं। वह मेरे नाम का इस्‍तेमाल क्‍यों कर रहे हैं और लोकपाल को दिल्‍ली में कैसे लागू कर सकते हैं?
अन्ना ने केजरीवाल को चिट्ठी लिखकर उनसे पूछा कि क्या उन्होंने जनलोकपाल आंदोलन के दौरान जमा पैसे का इस्तेमाल अपनी पार्टी के प्रचार के लिए किया। केजरीवाल ने इस पत्र का जवाब देते हुए कहा कि हम आंदोलन का पैसा चुनाव के लिए इस्तेमाल कर ही नहीं सकते। यह कानून का उल्लंघन होगा।
वहीं, आम आदमी पार्टी के मुखिया केजरीवाल सहित आप के नेताओं पर सोमवार को प्रेस कांफ्रेंस के दौरान एक व्यक्ति ने काली स्याही फेंक दी। खुद को अन्ना समर्थक व भाजपा कार्यकर्ता बताने वाले इस शख्स ने केजरीवाल पर अन्ना के साथ ठीक न करने का आरोप लगाया।
तो चुनाव छोड़ दूंगा
केजरीवाल ने कहा कि अन्ना जांच करा लें, अगर जनलोकपाल आंदोलन के हिसाब में कोई हेरा-फेरी हुई या फिर आंदोलन के चंदे का पार्टी के लिए इस्तेमाल हुआ, तो मैं दिल्ली विधानसभा चुनाव से अपनी उम्मीदवारी वापस ले लूंगा।
प्रेस कांफ्रेंस में हंगामा
शाम साढ़े पांच बजे अरविंद केजरीवाल ने संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करना शुरू किया। उनके साथ मनीष सिसौदिया, प्रशांत भूषण, संजय सिंह और शशि भूषण भी बैठे थे। करीब 20 मिनट बाद सामने वाले गेट से नचिकेता नामक व्यक्ति नारेबाजी करता हुआ कमरे में घुसा। इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, उसने काली स्याही से भरी एक छोटी शीशी आप के नेताओं पर फेंक दी। उधर, नई दिल्ली जिले के डीसीपी एसबीएस त्यागी का कहना है कि पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है।

सोमवार, 18 नवंबर 2013

जनता के खजाने पर किसी को 'पंजा' नहीं मारने देंगे: नरेंद्र मोदी




जनता के खजाने पर किसी को 'पंजा' नहीं मारने देंगे: मोदी
ज़ी मीडिया ब्‍यूरो
Monday, November 18, 2013,
छतरपुर/गुना : भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने भरोसा जताया है कि 2014 में लोकसभा चुनाव के बाद देश में उनकी पार्टी की सरकार बनेगी और हम जनता के खजाने की चौकीदारी करेंगे, ताकि उस पर कोई पंजा नहीं मार सके। मोदी ने गुना के दशहरा मैदान पर मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के संदर्भ में एक आम सभा को संबोधित करते हुए कहा कि मैं आपसे वायदा करता हूं कि 2014 में लोकसभा चुनाव के बाद जब हमारी सरकार बनेगी, तो हम वहां चौकीदार की भूमिका निभाएंगे, ताकि आपके खजाने पर कोई पंजा नहीं मार सके। 2014 में केंद्र में सरकार बनने पर गरीबों के पैसे की पूरी सुरक्षा करेंगे। हम किसी `पंजे` को गरीबों का पैसा नहीं छीनने देंगे।

उन्होंने कांग्रेस पर देश को बांटने की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा है कि अब देश में सबको जोड़ने की राजनीति करना पड़ेगी और तोड़ने की राजनीति का युग समाप्त होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने वोट बैंक की खातिर अंग्रेजों की सीख पर काम करते हुए हमेशा तोड़ने और बांटने की राजनीति की है। उन्होंने (कांग्रेस) देश बांटा, सम्प्रदायों को बांटा, गांव-गांव को बांटा, जिससे उबरने में देश को पसीना आ रहा है। कांग्रेस ने हमेशा ‘टुकड़ा फेंको, वोट बटोरो’ की राजनीति की है। मोदी ने कहा कि वह देश में जब भी चुनाव होते हैं, तो उनका बारीकी से अध्ययन करते हैं और इस बार लग रहा है कि पूरे देश में भाजपा की आंधी चल रही है। हवा का रूख हमारे पक्ष में है। चुनाव में अक्सर ‘एंटी इन्कम्बेंसी’ शब्द का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन मध्य प्रदेश में ‘प्रो इन्कम्बेंसी’ की हवा है।

उन्होंने दावा किया कि जब देश और राज्यों में भाजपा को काम करने का मौका मिला है, तो चुनाव के सारे मानक बदल जाते हैं। सरकार के समर्थन में लोग खड़े हो जाते हैं। मोदी ने राहुल का नाम लिए बिना कहा कि वे सत्ता को जहर बताते हैं, लेकिन फिर भी सत्ता छोड़ने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने आम आदमी के मन में सत्ता को जहर बताकर भ्रम फैलाने का प्रयास किया है, ताकि आम आदमी सत्ता से डरे और उसका सपना नहीं देख सके। वे कहते हैं, सत्ता तो जहर है, जो चखेगा, मौत को न्यौता देगा।

उन्होंने कहा कि अब देश में हर चुनाव विकास के मुद्दे पर लड़ा जाना चाहिए। जाति, सम्प्रदाय, बिरादरी और इलाके के नाम पर पचास सालों तक चुनाव हो चुके, अब विकास का मुद्दा होना चाहिए। आम आदमी अपना विकास चाहता है और विकास के बिना देश का भविष्य नहीं है। देश की 65 प्रतिशत आबादी युवाओं की है, जो 35 साल से कम उम्र के हैं। हम दुनिया के सबसे युवा देश हैं और यहां युवाओं को मौका मिले, तो वह देश का भाग्य बदल सकता है। मोदी ने कहा कि चुनाव में कांग्रेस के नेता लुभावने वायदे करने में माहिर होते हैं, वे कल्पना से परे वायदे करते हैं। कांग्रेस ने पिछले लोकसभा चुनाव में 100 दिन में महंगाई घटाने का वायदा किया था, लेकिन उसने लोगों से धोखा किया, उसने हर साल एक करोड़ नौजवानों को रोजगार देने का वायदा किया और धोखा दिया। जिन लोगों ने नौजवानों को राजनीति का हथकंडा बनाया और उनके भाग्य के साथ खिलवाड़ किया, क्या उन्हें माफ किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि दिल्ली से कांग्रेस के नेता मध्य प्रदेश आकर कहते हैं, हमने प्रदेश को इतने रूपये दिए, तो क्या उन्होंने अपने जेब से रुपये दिए। यह रुपया तो जनता का है, उनका अपना नहीं। विकास के लिए पैसे, मोदी और शिवराज के जेब से नहीं आते, वह तो जनता के खजाने के होते हैं, हम तो ‘ट्रस्टी’ मात्र हैं।

मोदी ने एक बार फिर गांधी परिवार पर हमला बोलते हुए कहा कि सत्ता को जहर बताने वाले सामान्य आदमी को डरा रहे हैं मगर खुद सत्ता छोड़ने को तैयार नहीं हैं। मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में पार्टी उम्मीदवारों के पक्ष में प्रचार करने पहुंचे मोदी ने सोमवार को छतरपुर और गुना में जनसभाओं को संबोधित किया। उन्होंने गुना में कहा कि वोट हासिल करने के लिए उन्होंने संप्रदाय, जातियों, बिरादियों को लड़ाया है। गांव को गांव और बिरादरी को बिरादरी के खिलाफ खड़ा किया है।

उन्होंने आगे कहा कि उन्होंने अपने लाभ के लिए देश में ऐसा जहर घोला कि उससे उबारने में पसीना छूट रहा है। आज देश को तोड़ने नहीं जोड़ने की राजनीति की जरूरत है। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने एक मर्तबा अपनी मां सोनिया गांधी के साथ हुई बातचीत का हवाला देते हुए कहा था कि उनकी मां ने कहा है कि सत्ता जहर है। उस बयान पर मोदी ने कहा कि ग्रामीण इलाकों में जैसे किसी इमारत से लोगों को डराने के लिए उसे भुतहा बता दिया जाता है, ठीक उसी तरह सत्ता को जहर बताकर सामान्य आदमी को डराया जा रहा है, ताकि वह सत्ता को जहर मानकर उससे दूर रहे। वहीं सत्ता को जहर बताने वाले उसे छोड़ने को तैयार नहीं हैं। ऐसे लोगों को पहचानना होगा।

मोदी ने इससे पहले छतरपुर के बाबूराम चतुर्वेदी स्टेडियम में कहा कि कांग्रेस अथवा उसके किसी नेता पर आरोप लगाओं तो किसी को परेशानी नहीं होती, मगर एक परिवार पर निशाना साधो तो सभी चांव-चांव करने लगते हैं। मोदी ने कहा कि एक परिवार ने देश को बर्बाद कर दिया है, उसके खिलाफ आवाज उठाना उनका धर्म है। यह तो जनता तय करेगी कि वह जुल्म करने वालों अथवा उन्हें चुनौती देने वालों को स्वीकार करती है। मोदी ने छत्तीसगढ़ में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा भाजपा को चोर बताए जाने का जवाब उनका नाम लिए बगैर अपने अंदाज में दिया और कहा कि हां हमने चोरी की है और वह है कांग्रेस की नींद चुराने की।

मोदी ने कहा कि शहजादे ने छत्तीसगढ़ में भाजपा को चोर बताया। कांग्रेस वालों हमें आपका आरोप मंजूर है, हमने चोरी की है, पूरी कांग्रेस की नींद की। आपकी नींद हराम कर दी है, हर कोने में एक परिवार को ललकारा जा रहा है जो अपको सहन नहीं हो रहा है। मोदी ने रविवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा भाजपा पर बहस का स्तर गिराने के आरोप का भी जवाब दिया। उन्होंने कहा, "बहस, संसद, प्रधानमंत्री पद का किसने अपमान किया है, यह पूरा देश जानता है, यह काम भाजपा ने तो नहीं किया है।

मोदी ने कहा कि राजनीतिक स्तर गिराने का काम हमने नहीं, उन लोगों ने किया है जिस दल के प्रधानमंत्री होने पर आप गर्व करते हैं। कांग्रेस पार्टी के उपाध्यक्ष ने नॉनसेंस कहते हुए अध्यादेश की प्रति को तब फाड़ा, जब आप अमेरिका में थे, हम आपके दर्द को समझ सकते हैं, आप भले ही उनके खिलाफ कुछ मत बोलो, मगर आरोप तो हम पर मत लगाओ।

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा शालीन भाषा के इस्तेमाल की सलाह का भी मोदी ने जवाब दिया। उनका कहना है कि सदन में जब चोर-चोर की आवाज सुनाई दे रही थी, तब आपने आपत्ति दर्ज कराई थी, मगर आज सार्वजनिक तौर पर प्रमुख विपक्षी दल को चोर कहा जा रहा है, आप ही बताइए कि राजनीतिक चर्चा को नीचे लाने का काम किसने किया है। मोदी ने केंद्र सरकार पर मध्य प्रदेश के साथ सौतेला व्यवहार करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राजमार्ग के सुधार तक के लिए केंद्र राशि नहीं दे रहा है, इन मार्गो की हालत खस्ता है, वहीं राज्य सरकार के मार्ग आमजन को सुगम आवागमन मुहैया करा रहे हैं।

मोदी ने मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह का नाम लिए बगैर उन्हें बड़बोले झूठ के कारखाने का चेयरमैन बता डाला। मोदी ने कहा कि वे कहीं भी और कुछ भी बोल जाते हैं, मगर उन्हें शर्म नहीं आती।

रविवार, 17 नवंबर 2013

गुरूनानक देव की जयन्ति अर्थात प्रकाश उत्सव



गुरूनानक देव की जयन्ति अर्थात प्रकाश उत्सव की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनायें !!
गुरू नानक देव जी और उनकी शिक्षाएं

हमारे समाज में गुरू का स्थान माता पिता के समान ही माना जाता है. गुरू की महिमा का व्याखान हमें ग्रंथों और पुराणों तक से मिलता है. भारत के सिक्ख धर्म के पहले गुरू गुरू नानक देव भी अपने धर्म के सबसे बड़े गुरू माने जाते हैं और उन्होंने अपने संपूर्ण जीवन में गुरू की महिमा का व्याख्यान किया और समाज में प्रेम भावना को फैलाने का कार्य किया. गुरू नानकदेव जी ने अपनी शिक्षा से लोगों में एकता और प्रेम को बढ़ावा दिया. आज गुरू नानकदेव जी की पुण्यतिथि है.

गुरु नानक देव जी के जीवन के अनेक पहलू हैं. वे जन सामान्य की आध्यात्मिक जिज्ञासाओं का समाधान करने वाले महान दार्शनिक, विचारक थे तथा अपनी सुमधुर सरल वाणी से जनमानस के हृदय को झंकृत कर देने वाले महान संत कवि भी. उन्होंने लोगों को बेहद सरल भाषा में समझाया कि सभी इंसान एक दूसरे के भाई हैं. ईश्वर सबका साझा पिता है. फिर एक पिता की संतान होने के बावजूद हम ऊंचे-नीचे कैसे हो सकते है.

अव्वल अल्लाह नूर उपाया, कुदरत के सब बंदे एक नूर तेसब जग उपज्या, कौन भले को मंदे

गुरु नानक का जन्म आधुनिक पाकिस्तान में लाहौर के पास तलवंडी में 15 अप्रैल, 1469 को एक हिन्दू परिवार में हुआ जिसे अब ननकाना साहब कहा जाता है. पूरे देश में गुरु नानक का जन्म दिन प्रकाश दिवस के रूप में कार्तिक पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है. नानक के पिता का नाम कालू एवं माता का नाम तृप्ता था.

बचपन से ही गुरु नानक में आध्यात्मिकता के संकेत दिखाई देने लगे थे. बताते हैं कि उन्होंने बचपन में उपनयन संस्कार के समय किसी हिन्दू आचार्य से जनेऊ पहनने से इंकार किया था. सोलह वर्ष की उम्र में उनका सुखमणि से विवाह हुआ. उनके दो पुत्र श्रीचंद और लक्ष्मीचंद थे.

लेकिन गुरु नानक देव जी का मन बचपन से ही अध्यात्म की तरफ ज्यादा था. वह सांसारिक सुख से परे रहते थे. गुरु नानक के पिता ने उन्हें कृषि, व्यापार आदि में लगाना चाहा किन्तु उनके सारे प्रयास निष्फल सिद्ध हुए. घोड़े के व्यापार के निमित्त दिए हुए रूपयों को गुरु नानक ने साधुसेवा में लगा दिया और अपने पिताजी से कहा कि यही सच्चा व्यापार है.

एक कथा के अनुसार गुरु नानक नित्य प्रात: बेई नदी में स्नान करने जाया करते थे. एक दिन वे स्नान करने के बाद वन में ध्यान लगाने के लिए गए और उन्हें वहां परमात्मा का साक्षात्कार हुआ. परमात्मा ने उन्हें अमृत पिलाया और कहा – मैं सदैव तुम्हारे साथ हूं, मैंने तुम्हें आनन्दित किया है. जो तुम्हारे सम्पर्क में आएंगे, वे भी आनन्दित होंगे. जाओ नाम में रहो, दान दो, उपासना करो, स्वयं नाम लो और दूसरों से भी नाम स्मरण कराओ. इस घटना के पश्चात वे अपने परिवार का भार अपने श्वसुर मूला को सौंपकर विचरण करने निकल पड़े और धर्म का प्रचार करने लगे.

 Guru Nanakगुरु जी ने इन उपदेशों को अपने जीवन में अमल में लाकर स्वयं एक आदर्श बन सामाजिक सद्भाव की मिसाल कायम की. उन्होंने लंगर की परंपरा चलाई, जहां अछूत लोग, जिनके सामीप्य से उच्च जाति के लोग बचने की कोशिश करते थे, ऊंची जाति वालों के साथ बैठकर एक पंक्ति में बैठकर भोजन करते थे. आज भी सभी गुरुद्वारों में गुरु जी द्वारा शुरू की गई यह लंगर परंपरा कायम है. लंगर में बिना किसी भेदभाव के संगत सेवा करती है.

इस जातिगत वैमनस्य को खत्म करने के लिए गुरू जी ने संगत परंपरा शुरू की. जहां हर जाति के लोग साथ-साथ जुटते थे, प्रभु आराधना किया करते थे. गुरु जी ने अपनी यात्राओं के दौरान हर उस व्यक्ति का आतिथ्य स्वीकार किया, उसके यहां भोजन किया, जो भी उनका प्रेमपूर्वक स्वागत करता था. कथित निम्न जाति के समझे जाने वाले मरदाना को उन्होंने एक अभिन्न अंश की तरह हमेशा अपने साथ रखा और उसे भाई कहकर संबोधित किया. इस प्रकार तत्कालीन सामाजिक परिवेश में गुरु जी ने इन क्रांतिकारी कदमों से एक ऐसे भाईचारे को नींव रखी जिसके लिए धर्म-जाति का भेदभाव बेमानी था.

जीवन भर देश विदेश की यात्रा करने के बाद गुरु नानक अपने जीवन के अंतिम चरण में अपने परिवार के साथ करतापुर बस गए थे. गुरु नानक ने 25 सितंबर, 1539 को अपना शरीर त्यागा. जनश्रुति है कि नानक के निधन के बाद उनकी अस्थियों की जगह मात्र फूल मिले थे. इन फूलों का हिन्दू और मुसलमान अनुयायियों ने अपनी अपनी धार्मिक परंपराओं के अनुसार अंतिम संस्कार किया.

गुरुनानक देव जी की दस शिक्षाएं
1. ईश्वर एक है.
2. सदैव एक ही ईश्वर की उपासना करो.
3. ईश्वर सब जगह और प्राणी मात्र में मौजूद है.
4. ईश्वर की भक्ति करने वालों को किसी का भय नहीं रहता.
5. ईमानदारी से और मेहनत कर के उदरपूर्ति करनी चाहिए.
6. बुरा कार्य करने के बारे में न सोचें और न किसी को सताएं.
7. सदैव प्रसन्न रहना चाहिए. ईश्वर से सदा अपने लिए क्षमा मांगनी चाहिए.
8. मेहनत और ईमानदारी की कमाई में से ज़रूरतमंद को भी कुछ देना चाहिए.
9. सभी स्त्री और पुरुष बराबर हैं.
10. भोजन शरीर को ज़िंदा रखने के लिए जरूरी है पर लोभ-लालच व संग्रहवृत्ति बुरी है.
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गुरु नानक देव के मूल मंत्र
guru granth sahib
- सतमीत कौर

मूल मंत्र
श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बाणी का आरंभ मूल मंत्र से होता है। ये मूल मंत्र हमें उस परमात्मा की परिभाषा बताता है जिसकी सब अलग-अलग रूप में पूजा करते हैं।

एक ओंकार : अकाल पुरख (परमात्मा) एक है। उसके जैसा कोई और नहीं है। वो सब में रस व्यापक है। हर जगह मौजूद है।

सतनाम : अकाल पुरख का नाम सबसे सच्चा है। ये नाम सदा अटल है, हमेशा रहने वाला है।

करता पुरख : वो सब कुछ बनाने वाला है और वो ही सब कुछ करता है। वो सब कुछ बनाके उसमें रस-बस गया है।

निरभऊ : अकाल पुरख को किससे कोई डर नहीं है।

निरवैर : अकाल पुरख का किसी से कोई बैर (दुश्मनी) नहीं है।

अकाल मूरत : प्रभु की शक्ल काल रहित है। उन पर समय का प्रभाव नहीं पड़ता। बचपन, जवानी, बुढ़ापा मौत उसको नहीं आती। उसका कोई आकार कोई मूरत नहीं है।

अजूनी : वो जूनी (योनियों) में नहीं पड़ता। वो ना तो पैदा होता है ना मरता है।

स्वैभं :( स्वयंभू) उसको किसी ने न तो जनम दिया है, न बनाया है वो खुद प्रकाश हुआ है।

गुरप्रसाद : गुरु की कृपा से परमात्मा हृदय में बसता है। गुरु की कृपा से अकाल पुरख की समझ इनसान को होती है।

कार्तिक पूर्णिमा व्रत कथा महात्मय - नीना शर्मा


Neena Sharma

1 7 नबम्वर 2 0 1 3  रविवार   
   


कार्तिक पूर्णिमा व्रत कथा महात्मय
- नीना शर्मा
    Kartik Poornima Mahatya----हिंदू धर्म में पूर्णिमा का व्रत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा या गंगा स्नान के नाम से भी जाना जाता है । इस पुर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा की संज्ञा इसलिए दी गई है क्योंकि आज के दिन ही भगवान भोलेनाथ ने त्रिपुरासुर नामक महाभयानक असुर का अंत किया था और वे त्रिपुरारी के रूप में पूजित हुए थे। ऐसी मान्यता है कि इस दिन कृतिका में शिव शंकर के दर्शन करने से सात जन्म तक व्यक्ति ज्ञानी और धनवान होता है। इस दिन चन्द्र जब आकाश में उदित हो रहा हो उस समय शिवा, संभूति, संतति, प्रीति, अनुसूया और क्षमा इन छ: कृतिकाओं का पूजन करने से शिव जी की प्रसन्नता प्राप्त होती है। इस दिन गंगा नदी में स्नान करने से भी पूरे वर्ष स्नान करने का फाल मिलता है।इसी दिन भगवान विष्णु ने प्रलय काल में वेदों की रक्षा के लिए तथा सृष्टि को बचाने के लिए मत्स्य अवतार धारण किया था।महाभारत काल में हुए १८ दिनों के विनाशकारी युद्ध में योद्धाओं और सगे संबंधियों को देखकर जब युधिष्ठिर कुछ विचलित हुए तो भगवान श्री कृष्ण पांडवों के साथ गढ़ खादर के विशाल रेतीले मैदान पर आए। कार्तिक शुक्ल अष्टमी को पांडवों ने स्नान किया और कार्तिक शुक्ल चतुर्दशी तक गंगा किनारे यज्ञ किया। इसके बाद रात में दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए दीपदान करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। इसलिए इस दिन गंगा स्नान का और विशेष रूप से गढ़मुक्तेश्वर तीर्थ नगरी में आकर स्नान करने का विशेष महत्व है।मान्यता यह भी है कि इस दिन पूरे दिन व्रत रखकर रात्रि में वृषदान यानी बछड़ा दान करने से शिवपद की प्राप्ति होती है। जो व्यक्ति इस दिन उपवास करके भगवान भोलेनाथ का भजन और गुणगान करता है उसे अग्निष्टोम नामक यज्ञ का फल प्राप्त होता है। इस पूर्णिमा को शैव मत में जितनी मान्यता मिली है उतनी ही वैष्णव मत में भी।गुरुनानक जयंती

    सिख सम्प्रदाय में कार्तिक पूर्णिमा का दिन प्रकाशोत्सव के रूप में मनाया जाता है। क्योंकि इस दिन सिख सम्प्रदाय के संस्थापक गुरू नानक देव का जन्म हुआ था। इस दिन सिख सम्प्रदाय के अनुयायी सुबह स्नान कर गुरूद्वारों में जाकर गुरूवाणी सुनते हैं और नानक जी के बताये रास्ते पर चलने की सौगंध लेते हैं। इसे गुरु पर्व भी कहा जाता है।
    कार्तिक पूर्णिमा महात्मय (Kartik Poornima Mahatya)

    कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा(KartikTripuri Poornima) के नाम से भी जाना जाता है. इस पुर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा की संज्ञा इसलिए दी गई है क्योंकि कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही भगवान भोलेनाथ ने त्रिपुरासुर नामक महाभयानक असुर का अंत किया था और वे त्रिपुरारी के रूप में पूजित हुए थे. ऐसी मान्यता है कि इस दिन कृतिका नक्षत्र में शिव शंकर के दर्शन करने से सात जन्म तक व्यक्ति ज्ञानी और धनवान होता है. इस दिन चन्द्र जब आकाश में उदित हो रहा हो उस समय शिवा, संभूति, संतति, प्रीति, अनुसूया और क्षमा इन छ: कृतिकाओं का पूजन करने से शिव जी की प्रसन्नता प्राप्त होती है.

    मान्यता यह भी है कि इस दिन पूरे दिन व्रत रखकर रात्रि में वृषदान यानी बछड़ा दान करने से शिवपद की प्राप्ति होती है. जो व्यक्ति इस दिन उपवास करके भगवान भोलेनाथ का भजन और गुणगान करता है उसे अग्निष्टोम नामक यज्ञ का फल प्राप्त होता है. इस पूर्णिमा को शैव मत में जितनी मान्यता मिली है उतनी ही वैष्णव मत में भी.

    वैष्णव मत में इस कार्तिक पूर्णिमा को बहुत अधिक मान्यता मिली है क्योंकि इस दिन ही भगवान विष्णु ने प्रलय काल में वेदों की रक्षा के लिए तथा सृष्टि को बचाने के लिए मत्स्य अवतार धारण किया था. इस पूर्णिमा को महाकार्तिकी (Maha kartiki Purnima) भी कहा गया है. यदि इस पूर्णिमा के दिन भरणी नक्षत्र हो तो इसका महत्व और भी बढ़ जाता है. अगर रोहिणी नक्षत्र हो तो इस पूर्णिमा का महत्व कई गुणा बढ़ जाता है. इस दिन कृतिका नक्षत्र पर चन्द्रमा और बृहस्पति हों तो यह महापूर्णिमा कहलाती है. कृतिका नक्षत्र पर चन्द्रमा और विशाखा पर सूर्य हो तो “पद्मक योग” बनता है जिसमें गंगा स्नान करने से पुष्कर से भी अधिक उत्तम फल की प्राप्ति होती है.कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा(KartikTripuri Poornima) के नाम से भी जाना जाता है. इस पुर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा की संज्ञा इसलिए दी गई है क्योंकि कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही भगवान भोलेनाथ ने त्रिपुरासुर नामक महाभयानक असुर का अंत किया था और वे त्रिपुरारी के रूप में पूजित हुए थे. ऐसी मान्यता है कि इस दिन कृतिका नक्षत्र में शिव शंकर के दर्शन करने से सात जन्म तक व्यक्ति ज्ञानी और धनवान होता है. इस दिन चन्द्र जब आकाश में उदित हो रहा हो उस समय शिवा, संभूति, संतति, प्रीति, अनुसूया और क्षमा इन छ: कृतिकाओं का पूजन करने से शिव जी की प्रसन्नता प्राप्त होती है.

    मान्यता यह भी है कि इस दिन पूरे दिन व्रत रखकर रात्रि में वृषदान यानी बछड़ा दान करने से शिवपद की प्राप्ति होती है. जो व्यक्ति इस दिन उपवास करके भगवान भोलेनाथ का भजन और गुणगान करता है उसे अग्निष्टोम नामक यज्ञ का फल प्राप्त होता है. इस पूर्णिमा को शैव मत में जितनी मान्यता मिली है उतनी ही वैष्णव
    कार्तिक पूर्णिमा व्रत कथा महात्मय

    मत में भी.

    वैष्णव मत में इस कार्तिक पूर्णिमा को बहुत अधिक मान्यता मिली है क्योंकि इस दिन ही भगवान विष्णु ने प्रलय काल में वेदों की रक्षा के लिए तथा सृष्टि को बचाने के लिए मत्स्य अवतार धारण किया था. इस पूर्णिमा को महाकार्तिकी (Maha kartiki Purnima) भी कहा गया है. यदि इस पूर्णिमा के दिन भरणी नक्षत्र हो तो इसका महत्व और भी बढ़ जाता है. अगर रोहिणी नक्षत्र हो तो इस पूर्णिमा का महत्व कई गुणा बढ़ जाता है. इस दिन कृतिका नक्षत्र पर चन्द्रमा और बृहस्पति हों तो यह महापूर्णिमा कहलाती है. कृतिका नक्षत्र पर चन्द्रमा और विशाखा पर सूर्य हो तो “पद्मक योग” बनता है जिसमें गंगा स्नान करने से पुष्कर से भी अधिक उत्तम फल की प्राप्ति होती है.
    कार्तिक पूर्णिमा विधि विधान (Kartik Poornima Vidhi Vidhan)

    कार्तिक पूर्णिमा (Kartik Purnima) के दिन गंगा स्नान, दीप दान, हवन, यज्ञ करने से सांसारिक पाप और ताप का शमन होता है. अन्न, धन एव वस्त्र दान का बहुत महत्व बताया गया है इस दिन जो भी आप दान करते हैं उसका आपको कई गुणा लाभ मिलता है. मान्यता यह भी है कि आप जो कुछ आज दान करते हैं वह आपके लिए स्वर्ग में सरक्षित रहता है जो मृत्यु लोक त्यागने के बाद स्वर्ग में आपको प्राप्त होता है.

    शास्त्रों में वर्णित है कि कार्तिक पुर्णिमा (Kartik Poornima) के दिन पवित्र नदी व सरोवर एवं धर्म स्थान में जैसे, गंगा, यमुना, गोदावरी, नर्मदा, गंडक, कुरूक्षेत्र, अयोध्या, काशी में स्नान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है. महर्षि अंगिरा ने स्नान के प्रसंग में लिखा है कि यदि स्नान में कुशा और दान करते समय हाथ में जल व जप करते समय संख्या का संकल्प नहीं किया जाए तो कर्म फल की प्राप्ति नहीं होती है. शास्त्र के नियमों का पालन करते हुए इस दिन स्नान करते समय पहले हाथ पैर धो लें फिर आचमन करके हाथ में कुशा लेकर स्नान करें, इसी प्रकार दान देते समय में हाथ में जल लेकर दान करें. आप यज्ञ और जप कर रहे हैं तो पहले संख्या का संकल्प कर लें फिर जप और यज्ञादि कर्म करें.

    कार्तिक पूर्णिमा का दिन सिख सम्प्रदाय के लोगों के लिए भी काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि इस दिन सिख सम्प्रदाय के संस्थापक गुरू नानक देव का जन्म हुआ था. सिख सम्प्रदाय को मानने वाले सुबह स्नान कर गुरूद्वारों में जाकर गुरूवाणी सुनते हैं और नानक जी के बताये रास्ते पर चलने की सगंध लेते हैं.
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कार्तिक पूर्णिमा व्रत पर विशेष
पं. केवल आनंद जोशी 

कार्तिक पूर्णिमा बड़ी ही पवित्र तिथि है। इस तिथि को ब्रह्मा, विष्णु, शिव, अंगिरा और आदित्य आदि ने महापुनीत पर्व प्रमाणित किया है। अतः इसमें स्नान, दान, होम, यज्ञ, उपासना आदि करने का अनन्त फल मिलता है। इस दिन गंगा-स्नान तथा सायंकाल दीपदान का विशेष महत्त्व है। इसी पूर्णिमा के दिन सायंकाल भगवान का मत्स्यावतार हुआ था। इस कारण इस दिन किए गए दान, जप आदि का दस यज्ञों के समान फल मिलता है।
वैदिक काल में कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नामक दैत्य का वध किया था, इसलिए इसे त्रिपुरी पूर्णिमा भी कहते हैं। कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही भगवान विष्णु का मत्स्यावतार भी हुआ था। इस दिन ब्रह्मा जी का ब्रह्मसरोवर पुष्कर में अवतरण भी हुआ था। अतः कार्तिक पूर्णिमा के दिन पुष्कर स्नान, गढ़गंगा, कुरुक्षेत्र, हरिद्वार और रेणुकातीर्थ में स्नान दान का विषेश महत्व माना जाता है। इस दिन अगर भरणी-सा कृतिका नक्षत्र पड़े, तो स्नान का विशेष फल मिलता है। इस दिन कृतिका नक्षत्र हो तो यह महाकार्तिकी होती है, भरणी हो तो विशेष स्नान पर्व का फल देती है और यदि रोहिणी हो तो इसका फल और भी बढ़ जाता है। इस बार 17 नवम्बर को कृतिका नक्षत्र है। जो व्यक्ति पूरे कार्तिक मास स्नान करते हैं उनका नियम कार्तिक पूर्णिमा को पूरा होता है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन प्रायरू श्री सत्यनारायण व्रत की कथा सुनी जाती है। सायंकाल देव-मंदिरों, चैराहों, गलियों, पीपल के वृक्षों तथा तुलसी के पौधों के पास दीपक जलाए जाते हैं और गंगाजी को भी दीपदान किया जाता है। कार्तिकी में यह तिथि देव दीपावली-महोत्सव के रूप में मनाई जाती है। चान्द्रायणव्रत की समाप्ति भी आज के दिन होती है। कार्तिक पूर्णिमा से आरम्भ करके प्रत्येक पूर्णिमा को व्रत और जागरण करने से सकल मनोरथ सिद्ध होते हैं। कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा नदी आदि पवित्र नदियों के समीप स्नान के लिए सहस्त्रों नर-नारी एकत्र होते हैं, जो बड़े भारी मेले का रूप बन जाता है। इस दिन गुरु नानक देव की जयन्ती भी मनाई जाती है।

महत्त्व
आषाढ़ शुक्ल एकादशी से भगवान विष्णु चार मास के लिए योगनिद्रा में लीन होकर कार्तिक शुक्ल एकादशी को उठते हैं और पूर्णिमा से कार्यरत हो जाते हैं। इसीलिए दीपावली को लक्ष्मीजी की पूजा बिना विष्णु, श्रीगणेश के साथ की जाती है। लक्ष्मी की अंशरूपा तुलसी का विवाह विष्णु स्वरूप शालिग्राम से होता है। इसी खुशी में देवता स्वर्गलोक में दिवाली मनाते हैं इसीलिए इसे देव दिवाली कहा जाता है।

सफलता का मंत्र
ऊँ पूर्णमदः पूर्णमिदम...पूर्णात, पूर्णमुदच्यते
पूर्णस्य पूर्णमादाय.....पूर्णमेवावशिष्यते
!!!!

विधि
गंध, अक्षत, पुष्प, नारियल, पान, सुपारी, कलावा, तुलसी, आंवला, पीपल के पत्तों से गंगाजल से रूजन करें। पूजा गृह, नदियों, सरोवरों, मन्दिरों में दीपदान करें। घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में मिट्टी का दीपक अवश्य जलाएं। इससे हमेशा संतति सही रास्ते पर चलेगी। धन की कभी भी कमी नहीं होगी। सुख, समृद्धि में बढ़ोतरी होगी। जीवन में ऊब, उकताहट, एकरसता दूर करने का अचूक उपाय। व्रत से ऐक्सिडेंट-अकाल मृत्यु कभी नहीं होंगे। बच्चे बात मानने लगेंगे। परिवार में किसी को पानी में डूबने या दुर्घटनाग्रस्त होने का खतरा नहीं होगा। बुरे वक्त में लिया कर्ज उतर जाएगा। आकस्मिक नेत्र रोग से बचाव होगा। नव���न मकान, वाहन आदि खरीदने के योग बनेंगे।

जीवन में सफलता के लिए क्या करें?
सर्व प्रथम लगातार परिश्रम, प्रार्थना, प्रतीक्षा करें।
सदैव प्रसन्न रहें। सबके प्रति विनम्रता बनाए रखें।
हर संकट में धैर्य रखें।
नियमित रूप से मन्दिर जाएं।
रोज सायंकाल के समय तुलसी के सामने दीपक जलाएं।
मधुर वाणी के साथ-साथ मितभाषी बनें।
घर परिवार और बाहर सबका सम्मान करें।
हो सके तो पूर्णिमा एकादशी तिथि में व्रत करें। सात्विक आहार करें।
सपरिवार संध्या आरती करें। जितना हो सके दान करें।

व्यवसाय की सफलता के लिए क्या न करें?
व्यापार स्थल पर दिन में न सोयें। गद्दी में बैठकर किसी की निंदा न करें।
विशेष परिस्थिति जब तक न हो, उधार न ही दें और न ही लें।
उधार की रकम न मिलने पर किसी का अपमान न करें।
लेद-देन के दौरान क्रोध बिल्कुल न करें। कामकाजी व्यक्ति/नौकर पर काम न छोड़ें।
लाभ कमाने के लिए खराब सामान बेचने का प्रयास न करें।
पुराने अनुभव पर आधारित काम न छोड़ें।

शनिवार, 16 नवंबर 2013

क्रिकेट से अलविदा :सचिन तेंदुलकर को 'भारत-रत्न'




सबसे कम उम्र के 'भारत रत्न' बनेंगे सचिन
ibnkhabar.com | Nov 16, 2013

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने शनिवार को महान क्रिकेट खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर को देश के सर्वोच्च सम्मान 'भारत रत्न' से सम्मानित करने की घोषणा की। शनिवार को ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने वाले तेंदुलकर यह सम्मान पाने वाले पहले खिलाड़ी हैं। पीएमओ ने तेंदुलकर को जीवित किंवदंती बताया, जो देश के करोड़ों लोगों के प्रेरणास्रोत बने।
पीएमओ द्वारा जारी वक्तव्य के अनुसार 16 वर्ष की आयु में खेलना शुरू करने वाले तेंदुलकर ने पिछले 24 वर्षों में पूरी दुनिया में क्रिकेट खेलकर देश को अनेक गौरवों से नवाजा। वक्तव्य में आगे कहा गया है कि वह (तेंदुलकर) खेलों में भारत के सच्चे दूत रहे। क्रिकेट में उनकी उपलब्धियां अतुलनीय हैं। उन्होंने जो कीर्तिमान स्थापित किए वे अद्वितीय हैं, तथा जिस खेल भावना का परिचय उन्होंने दिया वह अनुकरणीय है।
पीएमओ ने अपने वक्तव्य में आगे कहा कि तेंदुलकर को अनेक सम्मान प्राप्त हो चुके हैं, जो एक खिलाड़ी के रूप में उनकी असाधारण प्रतिभा का परिचायक है। विश्व के महानतम बल्लेबाजों में शुमार तेंदुलकर ने शनिवार को वेस्टइंडीज के साथ मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में अपने 200वें टेस्ट मैच के साथ ही क्रिकेट को अलविदा कह दिया।

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'महाविदाई' पर तेंदुलकर को बड़ा 'तोहफा', दिया जाएगा भारत का सर्वोच्च सम्मान 'भारत-रत्न'
आज तक ब्यूरो [Edited By: नमिता शुक्ला] | नई दिल्ली, 16 नवम्बर 2013 |
मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर को इंटरनेशनल क्रिकेट से उनकी 'महाविदाई' पर सबसे बड़ा तोहफा भारत सरकार ने दिया. तेंदुलकर को देश के सर्वोच्च सम्मान 'भारत रत्न' से नवाजा जाएगा. पीएमओ ने शनिवार को इसकी औपचारिक घोषणा की. तेंदुलकर इस प्रतिष्ठित सम्मान के लिए चुने जाने वाले पहले खिलाड़ी हैं.
राष्ट्रपति भवन के प्रवक्ता वेणु राजामोनी की एक संक्षिप्त बयान जारी करके कहा कि राष्ट्रपति ने तेंदुलकर को भारत रत्न देने का फैसला किया है जिन्होंने आज इंटरनेशनल क्रिकेट को अलविदा कहा. तेंदुलकर ने सबसे सफल बल्लेबाज के रूप में इंटरनेशनल क्रिकेट को अलविदा कहा. उन्होंने 200 टेस्ट में 15,921 रन बनाने के अलावा 463 वनडे मैचों में 18426 रन भी बनाए.

'मां को समर्पित किया भारत रत्न'
सचिन तेंदुलकर ने भारत रत्न अपनी मां को समर्पित किया है. सचिन ने मेसेज के जरिए ये जानकारी दी. सचिन ने मेसेज में लिखा, 'I dedicate this award to my mother :).'

शतकों का शतक लगाने वाला एकमात्र बल्लेबाज
तेंदुलकर इंटरनेशनल क्रिकेट में शतकों का शतक जड़ने वाले एकमात्र बल्लेबाज हैं. वह वनडे मैचों में दोहरा शतक जड़ने वाले पहले बल्लेबाज भी हैं.
'महाविदाई' का तोहफा है 'भारत रत्न'
यह पुरस्कार तेंदुलकर को विदाई का सर्वश्रेष्ठ तोहफा है, जिनके 24 साल के इंटरनेशनल करियर ने उन्हें क्रिकेटरों की पूरी पीढ़ी के लिए प्रेरणा बनाया. तेंदुलकर को भारत रत्न देने की मांग लंबे समय से चल रही थी और पिछले साल इस पुरस्कार की पात्रता में भी संशोधन किया गया जिससे कि खिलाड़ियों को भी इसकी योग्यता सूची में शामिल किया जा सके.
प्रोफेसर सीएनआर राव को भी मिलेगा 'भारत रत्न'
पिछले साल राज्य सभा का सदस्य बनने वाले पहले सक्रिय खिलाड़ी बने तेंदुलकर को यह सम्मान प्रोफेसर सीएनआर राव के साथ दिया गया है, जिन्होंने भारत के पहले मंगल अभियान में अहम भूमिका निभाई है. सरकार ने कई सालों बाद भारत रत्न पुरस्कार दिए हैं. पिछली बार यह पुरस्कार पंडित भीमसेन जोशी को दिया गया था.
किसी खिलाड़ी को पहली बार मिलेगा 'भारत रत्न'
सचिन तेंदुलकर देश के पहले ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्हें 'भारत रत्न' से सम्मानित किया जाएगा. इससे पहले देश का सर्वोच्च सम्मान खिलाड़ियों को नहीं दिया जाता था. तेंदुलकर के साथ ये नया ट्रेंड शुरू हो रहा है. सचिन को सबसे कम उम्र (40 वर्ष) में भारत रत्न मिल रहा है.
'स्वर कोकिला' लता मंगेशकर ने भी की थी मांग
देश की कई दिग्गज हस्तियां सचिन को भारत रत्न देने की मांग कर चुकी हैं. खुद 2001 में भारत रत्न से सम्मानित हुईं स्वर कोकिला लता मंगेशकर ने भी ये मांग की थी. उन्होंने तेंदुलकर को भारत रत्न का हकदार बताया था.

शुक्रवार, 15 नवंबर 2013

क्रांतिकारी केसरी सिंह बारहठ



केसरी सिंह बारहट
http://hi.wikipedia.org/s/19c7

    1 क्रांतिकारी कवि केसरी सिंह बारहठ
        1.1 जीवन परिचय
        1.2 शिक्षा प्रसार हेतु योजनाएं
    2 'अक्षर' के स्वरूप पर शोध-कार्य
        2.1 सशस्त्र क्रांति के माध्यम से देश की स्वतंत्रता-प्राप्ति का प्रयास
        2.2 राजद्रोह का मुकदमा
        2.3 जेल से छूटने के बाद
        2.4 उत्तर-जीवन
        2.5 चेतावनी रा चूंग्ट्या
    3 बाहरी कड़ियाँ

क्रांतिकारी कवि केसरी सिंह बारहठ
जीवन परिचय

जिन लोगों ने समाज और राष्ट्र की सेवा में अपना सर्वस्व ही समर्पित कर डाला हो , ऐसे ही बिरले पुरुषों का नाम इतिहास या लोगों के मन में अमर रहता है | सूरमाओं, सतियों,और संतों की भूमि राजस्थान में एक ऐसे ही क्रांतिकारी, त्यागी और विलक्षण पुरुष हुए थे - कवि केसरी सिंह बारहठ, जिनका जन्म २१ नवम्बर १८७२ में श्री कृष्ण सिंह बारहठ के घर उनकी जागीर के गांव देवपुरा रियासत शाहपुरा में हुआ| केसरी सिंह की एक माह की आयु में ही उनकी माता का निधन हो गया, अतः उनका लालन-पालन उनकी दादी-माँ ने किया | उनकी शिक्षा उदयपुर में हुई | उन्होंने बांगला,मराठी,गुजराती आदि भाषाओँ के साथ इतिहास, दर्शन (भारतीय और यूरोपीय) मनोविज्ञान,खगोलशास्त्र,ज्योतिष का अध्ययन कर प्रमाणिक विद्वत्ता हासिल की | डिंगल-पिंगल भाषा की काव्य-सर्जना तो उनके जन्मजात चारण-संस्कारों में शामिल थी ही,बनारस से श्री गोपीनाथ जी नाम के पंडित को बुला कर इन्हें संस्कृत की शिक्षा भी दिलवाई गई| केसरी सिंह के स्वध्याय के लिए उनके पिता कृष्ण सिंह का प्रसिद्ध पुस्तकालय " कृष्ण-वाणी-विलास " भी उपलब्ध था | राजनीति में वे इटली के राष्ट्रपिता मैजिनी को अपना गुरु मानते थे | मैजिनी की जीवनी वीर सावरकर ने लन्दन में पढ़ते समय मराठी में लिख कर गुप्त रूप से लोकमान्य तिलक को भेजी थी क्योंकि उस समय मैजिनी की जीवनीपुस्तक पर ब्रिटिश साम्राज्य ने पाबन्दी लगा रखी थी | केसरी सिंह जी ने इस मराठी पुस्तक का हिंदी अनुवाद किया था
शिक्षा प्रसार हेतु योजनाएं

केसरी सिंह जी ने समाज खास कर क्षत्रिय जाति को अशिक्षा के अंधकार से निकालने हेतु कई नई-नई योजनाएं बनाई ताकि राजस्थान भी शिक्षा के क्षेत्र में दूसरे प्रान्तों की बराबरी कर सके | उस समय राजस्थान के अजमेर के मेयो कालेज में राजाओं और राजकुमारों के लिए अंग्रेजों ने ऐसी शिक्षा प्रणाली लागू कर रखी थी जिस में ढल कर वे अपनी प्रजा और देश से कट कर अलग-थलग पड़ जाएँ | इसीलिये सन १९०४ में नेशनल कालेज कलकत्ता की तरह, जिसके प्रिंसिपल अरविन्द घोष थे, अजमेर में 'क्षत्रिय कालेज' स्थापित करने की योजना बनाई, जिस में राष्ट्रीय -भावना की शिक्षा भी दी जा सके | इस योजना में उनके साथ राजस्थान के कई प्रमुख बुद्धिजीवी साथ थे | इससे भी महत्वपूर्ण योजना राजस्थान के होनहार विद्यार्थियों को सस्ती तकनीकी शिक्षा के लिए सन १९०७-०८ में जापान भेजने की बनाई। क्यों कि उस सदी में जापान ही एकमात्र ऐसा देश था, जो रूस और यूरोपीय शक्तियों को टक्कर दे सकता था | अपनी योजना के प्रारूप के अंत में उन्होंने बड़े ही मार्मिक शब्दों में जापान का सहयोग करने के लिए आव्हान किया - "जापान ही वर्तमान संसार के सुधरे हुए उन्नत देशों में हमारे लिए शिक्षार्थ आदर्श है ; हमारे साथ वह देश में देश मिला कर (एशियाटिक बन कर), रंग में रंग मिला कर, (यहाँ रंग से मतलब Racial Colours से है जैसे व्हाइट, रेड, ब्लैक) दिल में दिल मिला कर , अभेद रूप से , उदार भाव से, हमारे बुद्ध भगवान के धर्मदान की प्रत्युपकार बुद्धि से- मानव मात्र की हित-कामना-जन्य निस्वार्थ प्रेमवृत्ति से सब प्रकार की उच्चतर महत्वपूर्ण शिक्षा सस्ती से सस्ती देने के लिए सम्मानपूर्वक आव्हान करता है |" अपनी इस शिक्षा योजना में उन्होंने ऐसे नवीन विचार पेश किये, जो उस समय सोच से बहुत आगे थे जैसे "अब जमाना " यथा राजा तथा प्रजा " का न हो कर "यथा प्रजा तथा राजा" का है |"

शिक्षा के माध्यम से केसरी सिंह जी ने सुप्त क्षात्रधर्म को जागृत करने हेतु क्षत्रिय और चारण जाति को सुशिक्षित और सुसंगठित कर उनके वंशानुगत गुणों को सुसंस्कृत कर देश को स्वतन्त्रता दिलाने का एक भगीरथ प्रयत्न प्रारंभ किया था | इनकी इस योजना में सामाजिक और राजनैतिक क्रांति के बीज थे | केसरी सिंह ने इस विस्तृत योजना में 'क्षात्र शिक्षा परिषद्' और छात्रावास आदि कायम कर मौलिक शिक्षा देने की योजना बनाई और सन १९११-१२ में "क्षत्रिय जाति की सेवा में अपील " निकाली | यह अपील इतनी मार्मिक थी कि बंगाल के देशभक्त विद्वानों ने कहा कि यह अपील सिर्फ क्षत्रिय-जाति के लिए ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण भारतीय जातियों के नाम निकलनी चाहिए थी |
'अक्षर' के स्वरूप पर शोध-कार्य

शिक्षा के प्रसार के साथ ही वैज्ञानिक खोज का एक बिलकुल नया विषय केसरी सिंह जी ने सन १९०३ में ही " अक्षर स्वरुप री शोध " का कार्य आरम्भ किया | कुछ वर्ष पहले जब इस प्रारम्भिक शोध के विषय पर केसरी सिंह जी के एक निकट सम्बन्धी फतहसिंह 'मानव' ने राजस्थान विश्वविद्यालय केभौतिकी विभाग के विभागाध्यक्ष से बात की तो उन्होंने बताया कि अमेरिका की एक कंपनी Bell Company ने लाखों डालर 'अक्षर के स्वरूप की शोध' में खर्च कर दिए, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली | उन्होंने आश्चर्य व्यक्त किया कि राजस्थान जैसे पिछडे प्रदेश में, और उसमे भी शाहपुरा जैसी छोटी रियासत में रहने वाले व्यक्ति के दिमाग में अक्षर के स्वरूप की शोध की बात कैसे आई?
सशस्त्र क्रांति के माध्यम से देश की स्वतंत्रता-प्राप्ति का प्रयास

उन्नीसवीं शताब्दी के प्रथम दशक में ही युवा केसरी सिंह का पक्का विश्वास था कि आजादी सशस्त्र क्रांति के माध्यम से ही संभव है | अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महज़ ज्ञापनों भर से आजादी नहीं मिल सकती | सन १९०३ में वायसराय लार्ड कर्जन द्वारा आहूत दिल्ली दरबार में शामिल होने से रोकने के लिए उन्होंने उदयपुर के महाराणा फतह सिंह को संबोधित करते हुए " चेतावनी रा चुंगटिया " नामक सोरठे लिखे, जो उनकी अंग्रेजों के विरूद्ध भावना की स्पष्ट अभिव्यक्ति थी | सशस्त्र क्रांति की तैयारी के लिए प्रथम विश्वयुद्ध (१९१४) के प्रारम्भ में ही वे इस कार्य में जुट गए; अपने दो रिवाल्वर क्रांतिकारियों को दिए और कारतूसों का एक पार्सल बनारस के क्रांतिकारियों को भेजा व रियासती और ब्रिटिश सेना के सैनिकों से संपर्क किया | एक गोपनीय रिपोर्ट में अंग्रेज सरकार ने कहा कि केसरी सिंह राजपूतरेजिमेंट से संपर्क करना चाह रहा था | उनका संपर्क बंगाल के विप्लव-दल से भी था और वे महर्षि श्री अरविन्द से बहुत पहले १९०३ में ही मिल चुके थे। महान क्रान्तिकारी रास बिहारी बोस व शचीन्द्र नाथ सान्याल , ग़दर पार्टी के लाला हरदयाल और दिल्ली के क्रान्तिकारी मास्टर अमीरचंद व अवध बिहारी बोस से घनिष्ठ सम्बन्ध थे | ब्रिटिश सरकार की गुप्तचर रिपोर्टों में राजपुताना में विप्लव फैलाने के लिए केसरी सिंह बारहठ व अर्जुन लाल सेठी को खास जिम्मेदार माना गया था |
राजद्रोह का मुकदमा

केसरी सिंह पर ब्रिटिश सरकार ने प्यारेलाल नाम के एक साधु की हत्या और अंग्रेज हकूमत के खिलाफ बगावत व केन्द्रीय सरकार का तख्तापलट व ब्रिटिश सैनिकों की स्वामिभक्ति खंडित करने के षड़यंत्र रचने का संगीन आरोप लगा कर मुकदमा चलाया गया | इसकी जाँच के लिए मि. आर्मस्ट्रांग आई.पी.आई.जी., इंदौर को सौंपी गई, जिसने २ मार्च १९१४ को शाहपुरा पहुँच शाहपुरा के राजा नाहर सिंह के सहयोग से केसरी सिंह को गिरफ्तार कर लिया | इस मुकदमे में स्पेशल जज ने केसरी सिंह को २० वर्ष की सख्त आजन्म कैद की सजा सुनाई और राजस्थान से दूर हजारी बाग़ केन्द्रीय जेल बिहार भेज दिया गया | जेल में उन्हें पहले चक्की पीसने का कार्य सौपा गया जहाँ वे दाल व अनाज के दानों से क ख ग आदि अक्षर बना कर अनपढ़ कैदियों को अक्षर-ज्ञान देते और अनाज के दानों से ही जमीन पर भारत का नक्शा बना कर कैदियों को देश के प्रान्तों का ज्ञान भी कराते थे | केसरी सिंह का नाम उस समय कितना प्रसिद्ध था उसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उस समय श्रेष्ठ नेता लोकमान्य तिलक ने अमृतसर कांग्रेस अधिवेशन में केसरी सिंह को जेल से छुडाने का प्रस्ताव पेश किया था|
जेल से छूटने के बाद

हजारी बाग़ जेल से छूटने के बाद अप्रेल १९२० में केसरी सिंह ने राजपुताना के एजेंट गवर्नर जनरल (आबू ) को एक बहुत सारगर्भित पत्र लिखा जिस में राजस्थान और भारत की रियासतों में उतरदायी शासन-पद्धति कायम करने के लिए सूत्र रूप से एक योजना पेश की | इसमें "राजस्थान महासभा" के गठन का सुझाव था जिस में दो सदन (प्रथम) भूस्वामी प्रतिनिधि मंडल (जिस में छोटे बड़े उमराव,जागीरदार) और "द्वितीय सदन" सार्वजनिक प्रतिनिधि परिषद् (जिसमें श्रमजीवी,कृषक,व्यापारी ) रखने का प्रस्ताव था | महासभा के अन्य उद्देश्यों के साथ एक उद्देश्य यह भी था :- "राज्य में धार्मिक,सामाजिक,नैतिक,आर्थिक,मानसिक,शारीरिक और लोक-हितकारी शक्तियों के विकास के लिए सर्वांगीण चेष्टा करना |"

इस पत्र में उनके विचार कितने मौलिक थे उसका अंदाज उनके कुछ वाक्यांशों को पढ़ने से लगता है , " प्रजा केवल पैसा ढालने की प्यारी मशीन है और शासन उन पैसों को उठा लेने का यंत्र " ....... शासन शैली न पुरानी ही रही न नवीन बनी , न वैसी एकाधिपथ्य सत्ता ही रही न पूरी ब्यूरोक्रेसी ही बनी | ........ अग्नि को चादर से ढकना भ्रम है -खेल है- या छल है मेरी समझ यही साक्षी देती है |" जिस ज़माने में ब्रिटिश सत्ता को कोई खास चुनौती नहीं थी और रियासतों में नरेशों का एकछत्र शासन था, उस समय सन १९२०-२१ में उनके विचारों में प्रजा की शक्ति का कितना महत्व था कि उन्होंने रियासतों के राजाओं के लिए लिखा - " भारतीय जनशक्ति के अतिरिक्त भारत में और कोई समर्थ नहीं , अतः उससे सम्बन्ध तोड़ना आवश्यक नहीं " |
उत्तर-जीवन

सन १९२०-२१ में सेठ जमनालाल बजाज द्वारा आमंत्रित करने पर केसरी सिंह जी सपरिवार वर्धा चले गए, जहाँ विजय सिंह 'पथिक' जैसे जनसेवक पहले से ही मौजूद थे | वर्धा में उनके नाम से " राजस्थान केसरी " साप्ताहिक शुरू किया गया, जिसके संपादक विजय सिंह 'पथिक' थे | वर्धा में ही केसरी सिंह का महात्मा गाँधी से घनिष्ठ संपर्क हुआ | उनके मित्रों में डा. भगवानदास (पहले 'भारतरत्न'), राजर्षि बाबू पुरुषोत्तम दास टंडन,गणेश शंकर 'विद्यार्थी', चंद्रधर शर्मा 'गुलेरी', माखनलाल चतुर्वेदी राव गोपाल सिंह खरवा, अर्जुनलाल सेठी जैसे स्वतंत्रता के पुजारी शामिल थे | देश की स्वतंत्रता के लिए अपना सब कुछ होम कर देने वाले क्रान्तिकारी कवि केसरी सिंह ने १४ अगस्त १९४१ को " हरी ॐ तत् सत् " के उच्चारण के साथ अंतिम साँस ली |
चेतावनी रा चूंग्ट्या

1903 में लार्ड कर्जन द्वारा आयोजित दिल्ली दरबार मे सभी राजाओं के साथ हिन्दू कुल-सूर्य मेवाड़ के महाराणा का जाना भी शेखावाटी के क्रान्तिकारियों को अच्छा नहीं लग रहा था, इसलिये उन्हें रोकने के लिये शेखावाटी के मलसीसर के ठाकुर भूरसिंह ने ठाकुर करणसिंह जोबनेर व राव गोपालसिंह खरवा के साथ मिल कर महाराणा फ़तहसिंह को दिल्ली जाने से रोकने की जिम्मेदारी केशरी सिंह बारहठ को दी | केसरी सिंह बारहठ ने "चेतावनी रा चूंग्ट्या " नामक सोरठे रचे जिन्हें पढ़ कर महाराणा अत्यधिक प्रेरित हुए और उन्होंने दिल्ली दरबार में न जाने का निश्चय किया |
पग पग भम्या पहाड, धरा छांड राख्यो धरम |
(ईंसू) महाराणा'र मेवाङ, हिरदे बसिया हिन्द रै ||1||

घणा घलिया घमसांण, (तोई) राणा सदा रहिया निडर |
(अब) पेखँतां, फ़रमाण हलचल किम फ़तमल ! हुवै ||2||

गिरद गजां घमसांणष नहचै धर माई नहीं |
(ऊ) मावै किम महाराणा, गज दोसै रा गिरद मे ||3||

ओरां ने आसान , हांका हरवळ हालणों |
(पणा) किम हालै कुल राणा, (जिण) हरवळ साहाँ हंकिया ||4||

नरियंद सह नजरांण, झुक करसी सरसी जिकाँ |
(पण) पसरैलो किम पाण , पाणा छतां थारो फ़ता ! ||5||

सिर झुकिया सह शाह, सींहासण जिण सम्हने |
(अब) रळनो पंगत राह, फ़ाबै किम तोने फ़ता ! ||6||

सकल चढावे सीस , दान धरम जिण रौ दियौ |
सो खिताब बखसीस , लेवण किम ललचावसी ||7||

देखेला हिंदवाण, निज सूरज दिस नह सूं |
पण "तारा" परमाण , निरख निसासा न्हांकसी ||8||

देखे अंजस दीह, मुळकेलो मनही मनां |
दंभी गढ़ दिल्लीह , सीस नमंताँ सीसवद ||9||

अंत बेर आखीह, पताल जे बाताँ पहल |
(वे) राणा सह राखीह, जिण री साखी सिर जटा ||10||

"कठिण जमानो" कौल, बाँधे नर हीमत बिना |
(यो) बीराँ हंदो बोल, पातल साँगे पेखियो ||11||

अब लग सारां आस , राण रीत कुळ राखसी |
रहो सहाय सुखरास , एकलिंग प्रभु आप रै ||12||

मान मोद सीसोद, राजनित बळ राखणो |
(ईं) गवरमेन्ट री गोद, फ़ळ मिठा दिठा फ़ता ||13||
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क्रांतिकारी कवि केसरी सिंह बारहट



मानव जीवन में जिन लोगों ने समाज और राष्ट्र की सेवा में अपना सर्वस्व समर्पित किया ऐसे बिरले पुरुषों का नाम ही इतिहास या लोगो के मन में अमर रहता है | सूरमाओं,सतियों,और संतो की भूमि राजस्थान में एक ऐसे ही क्रांतिकारी,त्यागी और विलक्षण पुरुष हुए कवि केसरी सिंह बारहट | जिनका जन्म २१ नवम्बर १८७२ में चारण जाति के श्री कृष्ण सिंह बारहट के घर उनकी जागीर के गांव देवपुरा रियासत शाहपुरा में हुआ | केसरी सिंह की एक माह की आयु में ही उनकी माता का निधन हो गया अतः उनका लालन-पालन उनकी दादी माँ ने किया | उनकी शिक्षा उदयपुर में हुई | उन्होंने बंगला,मराठी,गुजराती आदि भाषाओँ के साथ इतिहास,दर्शन (भारतीय और यूरोपीय) मनोविज्ञान,खगोल शास्त्र,ज्योतिष का अध्ययन कर प्रमाणिक विद्वता हासिल की | डिंगल- पिंगल भाषा की काव्य सृजना तो उनके जन्म जात संस्कारों में शामिल थी ही साथ ही बनारस से श्री गोपीनाथ जी नाम के पंडित को बुलाकर इन्हें संस्कृत भाषा की शिक्षा दिलवाई गई | केसरी सिंह के स्वध्याय के लिए उनके पिता कृष्ण सिंह का प्रसिद्ध पुस्तकालय " कृष्ण वाणी विलास " तो उपलब्ध था ही |
राजनीती में वे इटली के राष्ट्रपिता मैजिनी को अपना गुरु मानते थे | मैजिनी की जीवनी वीर सावरकर ने लन्दन में पढ़ते समय मराठी में लिखकर गुप्त रूप से लोकमान्य तिलक को भेजी थी क्योंकि उस समय मैजिनी की जीवनी पुस्तक पर ब्रिटिश साम्राज्य ने पाबन्दी लगा रखी थी | केसरी सिंह जी ने इस मराठी पुस्तक का हिंदी अनुवाद किया था |
शिक्षा प्रसार हेतु योजनाएं :-
केसरी सिंह जी ने समाज खास कर क्षत्रिय जाति को अशिक्षा के अंधकार से निकालने हेतु कई नई-नई योजनाएं बनाई ताकि राजस्थान भी शिक्षा के क्षेत्र में दुसरे प्रान्तों की बराबरी कर सके | उस समय राजस्थान के अजमेर में मेयो कालेज में राजाओं और राजकुमारों के लिए अंग्रेजों ने ऐसी शिक्षा प्रणाली लागु कर रखी थी जिसमे ढल कर वे अपनी प्रजा और देश से कट कर अलग-थलग पड़ जाए | इसीलिय सन १९०४ में नेशनल कालेज कलकत्ता की तरह जिसके प्रिंसिपल अरविन्द घोष थे अजमेर में क्षत्रिय कालेज स्थापित करने की योजना बनाई जिसमे जिसमे राष्ट्रिय भावना की शिक्षा दी जा सके | इस योजना में उनके साथ राजस्थान के कई प्रमुख बुद्धिजीवी साथ थे | इससे भी महत्वपूर्ण योजना राजस्थान के होनहार विद्यार्थियों को सस्ती तकनीकी शिक्षा के लिए सन १९०७-०८ में जापान भेजने की बनाई क्योकि उस सदी में जापान ही एक मात्र एसा देश था जो रूस और यूरोपीय शक्ति को टक्कर दे सकता था |अपनी योजना के प्रारूप के अंत में उन्होंने बड़े ही मार्मिक शब्दों में जापान का सहयोग करने के लिए आव्हान किया -
"जापान ही वर्तमान संसार के सुधरे हुए उन्नत देशों में हमारे लिए शिक्षार्थ आश्रणीय है ; हमारे साथ वह देश में देश मिलाकर (एशियाटिक बनकर) ,रंग में रंग मिलाकर, (यहाँ रंग से मतलब Racial Colours से है जैसे व्हाइट,रेड ब्लैक) दिल में दिल मिलाकर , अभेद रूप से , उदार भाव से, हमारे बुद्ध भगवान के धर्मदान की प्रत्युपकार बुद्धि से- मानव मात्र की हित-कामना-जन्य निस्वार्थ प्रेमवृति से सब प्रकार की उच्चतर महत्वपूर्ण शिक्षा सस्ती से सस्ती देने के लिए सम्मान पूर्वक आव्हान करता है |"
इस स्कीम में उन्होंने ऐसे नवीन विचार पेश किये जो उस समय सोच से बहुत आगे थे कि अब जमाना " यथा राजा तथा प्रजा " का न होकर "यथा प्रजा तथा राजा" का है |

शिक्षा के माध्यम से केसरी सिंह जी ने सुप्त क्षात्रधर्म को जागृत करने हेतु क्षत्रिय और चारण जाति को सुशिक्षित और सुसंगठित कर उनके वंशानुगत गुणों को सुसंस्कृत कर देश को स्वत्तन्त्रता दिलाने का एक भगीरथ प्रयत्न प्रारंभ किया था | इनकी इस योजना में सामाजिक और राजनैतिक क्रांति के बीज थे | केसरी सिंह ने इस विस्तृत योजना में क्षात्र शिक्षा परिषद् और छात्रावास आदि कायम कर मौलिक शिक्षा देने की योजना बनाई और सन १९११-१२ में "क्षत्रिय जाति की सेवा में अपील " निकाली | यह अपील इतनी मार्मिक थी कि बंगाल के देशभक्त विद्वानों ने कहा कि यह अपील सिर्फ क्षत्रिय जाति के लिए ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण भारतीय जाति के नाम निकालनी चाहिए थी |
अक्षर के स्वरूप पर शोध कार्य
शिक्षा के प्रसार के साथ ही वैज्ञानिक खोज का एक बिलकुल नया विषय केसरी सिंह जी ने सन १९०३ में ही " अक्षर स्वरुप री शोध " का कार्य आरम्भ किया | कुछ वर्ष पहले इस प्रारम्भिक शोध के विषय पर केसरी सिंह जी के एक निकट सम्बन्धी फतह सिंह मानव ने राजस्थान विश्वविद्यालय के फिजिक्स के विभागाध्यक्ष से बात करी तो उन्होंने बताया कि अमेरिका की एक कंपनी Bell Company ने लाखों डालर अक्षर के स्वरूप की शोध में खर्च कर दिए लेकिन सफलता नहीं मिली | उन्होंने आश्चर्य व्यक्त किया कि राजस्थान जैसे पिछडे प्रदेश में और उसमे भी शाहपुरा जैसी छोटी रियासत में रहने वाले व्यक्ति के दिमाग में अक्षर के स्वरूप की शोध की बात कैसे आई |
शस्त्र क्रांति के माध्यम से देश की स्वतंत्रता प्राप्ति का प्रयास :
उन्नीसवी शताब्दी के प्रथम दशक में ही युवा केसरी सिंह का पक्का विश्वास इसी सिद्धांत पर था कि आजादी सशस्त्र क्रांति के माध्यम से ही संभव है | अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के ज्ञापनों से आजादी नहीं मिल सकती | सन १९०३ में वायसराय लार्ड कर्जन द्वारा आहूत दिल्ली दरबार में शामिल होने से रोकने के लिए उन्होंने उदयपुर के महाराणा फतह सिंह को संबोधित करते हुए " चेतावनी रा चुंगटिया " नामक सौरठे लिखे जो उनकी अंग्रेजो के विरूद्व भावना की स्पष्ट अभिव्यक्ति थी | सशस्त्र क्रांति की तैयारी के लिए प्रथम विश्व युद्ध (१९१४) के प्रारम्भ में ही वे इस कार्य में जुट गए और अपने दो रिवाल्वर क्रांतिकारियों को दिए और कारतूसों का एक पार्सल बनारस के क्रांतिकारियों को भेजा व रियासती और ब्रिटिश सेना के सैनिको से संपर्क किया | एक गुप्त रिपोर्ट में अंग्रेज सरकार ने कहा कि केसरी सिंह राजपूत रेजिमेंट से संपर्क करना चाह रहा था |
उनका संपर्क बंगाल के विप्लव दल से भी था और वे श्री अरविन्द से बहुत पहले १९०३ में ही मिल चुके थे तथा महान क्रान्तिकारी रास बिहारी बोस व शचीन्द्र नाथ शान्याल,ग़दर पार्टी के लाला हरदयाल और दिल्ली के क्रान्तिकारी मास्टर अमीरचंद व अवध बिहारी से घनिष्ठ सम्बन्ध थे | ब्रिटिश सरकार की गुप्त रिपोर्टों में राजपुताना में विप्लव फैलाने के लिए केसरी सिंह बारहट व अर्जुन लाल सेठी को खास जिम्मेदार माना गया |
राजद्रोह का मुकदमा :
केसरी सिंह पर ब्रिटिश सरकार ने प्यारे लाल नाम के एक साधू की हत्या और अंग्रेज हकुमत के खिलाफ बगावत व केन्द्रीय सरकार का तख्ता पलट व ब्रिटिश सैनिकों की स्वामिभक्ति खंडित करने के षड़यंत्र रचने का संगीन आरोप लगाकर मुकदमा चलाया गया | इसकी जाँच के लिए मि. आर्मस्ट्रांग आई.पी.आई. जी. इंदौर को सौंपी गई जिसने २ मार्च १९१४ को शाहपुरा पहुँच शाहपुरा के राजा नाहर सिंह के सहयोग से केसरी सिंह को गिरफ्तार कर लिया | इस मुकदमे में स्पेशल जज ने केसरी सिंह को २० वर्ष की सख्त आजन्म सजा सुनाई और राजस्थान से दूर हजारी बाग़ केन्द्रीय जेल बिहार भेज दिया गया | जेल में उन्हें पहले चक्की पिसने का कार्य सौपा गया जहाँ वे दाल व अनाज के दानो से क ख ग आदि अक्षर बना कर अनपढ़ कैदियों को अक्षर ज्ञान देते और अनाज के दानो से ही जमीन पर भारत का नक्शा बना कर कैदियों को देश के प्रान्तों का ज्ञान कराते थे | केसरी सिंह का नाम उस समय कितना प्रसिद्ध था उसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उस समय श्रेष्ठ नेता लोकमान्य तिलक ने अमृतसर कांग्रेस अधिवेशन में केसरी सिंह को जेल से छुडाने का प्रस्ताव पेश किया था |
जेल से छूटने के बाद :
हजारी बाग़ जेल से छूटने के बाद अप्रेल १९२० में केसरी सिंह ने राजपुताना के एजेंट गवर्नर जनरल (आबू ) को एक बहुत सारगर्भित पत्र लिखा जिसमे राजस्थान और भारत की रियासतों में उतरदायी शासन पद्धति कायम करने के लिए सूत्र रूप से योजना पेश की | इसमें "राजस्थान महासभा" के गठन का सुझाव था जिसमे दो सदन (प्रथम) भूस्वामी प्रतिनिधि मंडल (जिसमे छोटे बड़े उमराव,जागीरदार) और "द्वितीय सदन" सार्वजनिक प्रतिनिधि परिषद् (जिसमे श्रमजीवी,कृषक,व्यापारी ) का प्रस्ताव था | महासभा के अन्य उद्देश्यों के साथ एक उद्देश्य यह भी था :-
"राज्य में धार्मिक,सामाजिक,नैतिक,आर्थिक,मानसिक,शारीरिक और लोक हितकारी शक्तियों के विकास के लिए सर्वांगीण चेष्ठा करना |" इस पत्र में उनके विचार कितने मौलिक थे उसका अंदाज उनके कुछ वाक्यांशों को पढने से लगता है , " प्रजा केवल पैसा ढालने की प्यारी मशीन है और शासन उन पैसों को उठा लेने का यंत्र " ....... शासन शैली ना पुरानी ही रही ना नवीन बनी , न वैसी एकाधिपथ्य सत्ता ही रही न पूरी ब्यूरोक्रेसी ही बनी | ........ अग्नि को चादर से ढकना भ्रम है -खेल है- या छल है मेरी यही शाक्षी देती है | जिस ज़माने में ब्रिटिश सत्ता को कोई खास चुनौती नहीं थी और रियासतों में नरेशों का एक छत्र शासन था उस समय सन १९२०-२१ में उनके विचारों में प्रजा की शक्ति का कितना महत्व था कि उन्होंने रियासतों के राजाओं के लिए लिखा - " भारतीय जन शक्ति के अतिरिक्त भारत में और कोई समर्थ नहीं,अतः उससे सम्बन्ध तोड़ना आवश्यक नहीं" |
उत्तर जीवन :
सन १९२०-२१ में सेठ जमनालाल बजाज द्वारा आमंत्रित करने पर केसरी सिंह जी सपरिवार वर्धा चले गए | जहाँ विजय सिंह पथिक जैसे जन सेवक पहले से ही मौजूद थे | वर्धा में उनके नाम से " राजस्थान केसरी " साप्ताहिक शुरू किया गया जिसके संपादक विजय सिंह पथिक थे | वर्धा में ही केसरी सिंह का महात्मा गाँधी से घनिष्ठ संपर्क हुआ | उनके मित्रो में डा.भगवानदास (पहले भारत रत्न) ,राजर्षि बाबू पुरुषोतम दास टंडन,गणेश शंकर विद्यार्थी , चंद्रधर शर्मा , माखनलाल चतुर्वेदी राव गोपाल सिंह खरवा ,अर्जुनलाल सेठी जैसे स्वतंत्रता के पुजारी शामिल थे |
देश की स्वतंत्रता के लिए अपना सब कुछ होम कर देने वाले क्रान्तिकारी कवि केसरी सिंह ने १४ अगस्त १९४१ को " हरी ॐ तत् सत् " के उच्चारण के साथ अंतिम साँस ली |

महाराणा फतह सिंह को दिल्ली दरबार में जाने से रोकने के लिए रचे सौरठे "चेतावनी रा चुंगटिया " और लार्ड कर्जन की कोटा यात्रा के समय कोटा के राजकीय कवि की हैसियत से कर्जन को भेंट (द्विअर्थी )लघु काव्य "कुसुमांजलि" के बारे में चर्चा अगले लेख में |

पिछली गांव यात्रा के दौरान केसरी सिंह जी के बारे में जानकारी मांगने पर आदरणीय श्री सोभाग्य सिंह जी ने अपनी वर्द्धावस्था के बावजूद जागती जोत मासिक पत्रिका का नवम्बर १९९६ का अंक ढूंढ़ कर मुझे दिया | इस अंक में केसरी सिंह जी के जीवन पर फतह सिंह मानव जो केसरी सिंह जी निकट रिश्तेदार है (शायद दामाद ) के द्वारा राजस्थानी भाषा में काफी लम्बा आलेख छपा था जिसे मैंने हिंदी में अनुवाद कर संक्षिप्त रूप से यहाँ पेश किया है |