शुक्रवार, 15 नवंबर 2013

एक साल में प्याज 278% और टमाटर 122% महंगा


एक साल में प्याज 278% और टमाटर 122% महंगा
नई दिल्ली Ethindi.com | Nov 15, 2013,
सब्जियों की महंगाई के चलते होलसेल इन्फ्लेशन अक्टूबर में 8 महीने के पीक पर पहुंच गया। इससे चुनावी सीजन में माहौल और गर्म हो गया है। अक्टूबर में सब्जियों की थोक कीमतें एक साल पहले की तुलना में 78.38 फीसदी ऊंची रही। इनमें प्याज ने सबसे अधिक रुलाया, जो 278.21 फीसदी महंगा रहा। टमाटर भी 122 फीसदी महंगा रहा।
होलसेल इन्फ्लेशन अक्टूबर में बढ़ कर 7 फीसदी हो गया, जो सितंबर में 6.46 पर्सेंट था। यह चालू फाइनैंशल इयर में इसका उच्चतम स्तर है। गुरुवार को जारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक खाद्य उत्पादों का इन्फ्लेशन अक्टूबर में 18.19 फीसदी रहा।
अंडा, मांस और मछली जैसे प्रोटीनयुक्त उत्पादों की महंगाई दर अक्टूबर में 17.47 प्रतिशत रही, जबकि इससे पिछले महीने इस वर्ग की मंहगाई दर 13.37 प्रतिशत थी।
इस महीने रीटेल इन्फ्लेशन 10.09 पर्सेंट रहा था। एचएसबीसी में आसियान और भारत के चीफ इकनॉमिस्ट लाइफ एस्केसेन ने नोट में लिखा है, 'महंगाई अब भी सता रही है। सरकार को इसे कम करने के लिए तुरंत स्ट्रक्चरल रिफॉर्म करने चाहिए। महंगाई के खिलाफ आरबीआई का कड़ा रुख भी जरूरी है।' ज्यादातर एक्सपर्ट्स इस बात से सहमत हैं, लेकिन किसी को यकीन नहीं है कि 18 दिसंबर के मॉनेटरी पॉलिसी रिव्यू में इंटरेस्ट रेट बढ़ेगा।
राजन ने बुधवार को इशारा किया था कि उन्हें रेपो रेट बढ़ाने की जल्दबाजी नहीं है। आरबीआई गवर्नर बनने के बाद वह दो बार रेपो रेट 0.25-0.25 पर्सेंट बढ़ा चुके हैं। राजन ने यह भी कहा था कि आरबीआई को ग्रोथ की भी फिक्र है।
उन्होंने कहा था, 'रिजर्व बैंक को कमजोर इकॉनमी के साथ हायर इन्फ्लेशन की चिंता है।' राजन ने कोर इन्फ्लेशन में कमी पर खुशी का भी इजहार किया था। उन्होंने कहा था कि आरबीआई डेटा पर करीबी नजर बनाए रखेगा।
देश की जीडीपी ग्रोथ पिछले फाइनैंशल इयर में 5 पर्सेंट थी, जो 10 साल में सबसे कम है। इस फाइनैंशल इयर के पहले क्वॉर्टर में ग्रोथ 4.4 पर्सेंट रही। हाल में जो इकनॉमिक डेटा आए हैं, उनसे लगता है कि ग्रोथ फाइनैंशल इयर के आखिर के 6 महीने में ही तेज होगी। सितंबर क्वॉर्टर का जीडीपी डेटा 29 नवंबर को आएगा।
इन्फ्लेशन डेटा आने के बाद प्लैनिंग कमिशन के डिप्टी चेयरमैन मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने कहा, 'फूड प्रॉडक्ट्स के दाम ज्यादा हैं। इस वजह से महंगाई दर हायर लेवल पर है। हालांकि, कोर इन्फ्लेशन अब भी काफी कम है। मुझे लगता है कि फूड इन्फ्लेशन में आगे कमी आनी चाहिए।'

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