मंगलवार, 3 दिसंबर 2013

1984 के सिख नरसंहार दंगा मामले में सज्जन को सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं


कोंग्रेस यह बताये कि १९८४ के सिख नरसंहार के लिए किसी एक को भी सजा क्यों नहीं हुई……


1984 दंगा मामले में सज्जन कुमार को सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं
Updated on: Tue, 03 Dec 2013
नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। सिख दंगा मामले में आरोपी वरिष्ठ कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने सज्जन कुमार की आरोप निरस्त करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। कुमार ने ट्रायल कोर्ट और हाई कोर्ट से निराश होने के बाद सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। याचिका खारिज होने के बाद साफ हो गया है कि सज्जन कुमार पर सुल्तानपुरी थाने में दर्ज मुकदमा चलता रहेगा। उन्हें अब अदालत में ट्रायल के दौरान गवाह और सुबूत पेश कर अपने को निर्दोष साबित करना होगा।

न्यायमूर्ति एके पटनायक की अध्यक्षता वाली पीठ ने सज्जन कुमार के साथ ही दूसरे अभियुक्तों वेद प्रकाश और ब्रह्मनंद गुप्ता की याचिकाएं भी खारिज कर दी हैं। इन दोनों ने भी निचली अदालत के आरोप तय करने के आदेश के सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने वरिष्ठ कांग्रेस नेता की आरोप निरस्त करने की मांग खारिज करते हुए कहा था कि अगर अदालत को पहली निगाह में लगता है कि अभियुक्त ने अपराध किया है तो अदालत उस पर आरोप तय कर सकती है।

हालांकि हाई कोर्ट ने सज्जन कुमार व अन्य के खिलाफ अपराध की साजिश रचने के अतिरिक्त आरोप तय करने से इन्कार कर दिया था। हाई कोर्ट का कहना था कि अभियुक्तों के आपस में मंत्रणा करने के कोई सुबूत नहीं दिखते। सज्जन कुमार के खिलाफ सुल्तानपुरी का यह मामला 84 दंगों की जांच कर रहे नानावती आयोग की रिपोर्ट आने के बाद दर्ज हुआ था।

सज्जन कुमार की अर्जी पर फैसला सुरक्षित
पूर्वी दिल्ली : सुल्तानपुरी सिख दंगा मामले में नौ गवाहों के नाम को हटाने को लेकर सज्जन कुमार की ओर से दाखिल अर्जी पर अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। जिला जज जेआर आर्यन की अदालत इस अर्जी पर 11 दिसंबर को फैसला सुनाएगी। इस मामले में सज्जन कुमार व तीन अन्य आरोपी है।

इसके पहले सीबीआइ ने कहा था कि आरोप पत्र छह लोगों की हत्या से संबंधित है लेकिन इसे केवल सुरजीत सिंह की हत्या तक सीमित रखा गया है क्योंकि अन्य मृतकों के मामले में सुनवाई हो चुकी है। सज्जन कुमार और तीन अन्य आरोपियों ने गवाहों को हटाने की मांग करते हुए कहा कि वे अप्रसांगिक हैं। कुमार के वकील ने कहा था कि सीबीआइ ने तीन अलग- अलग प्राथमिकी और अभियोजन के नौ गवाहों को मिलाकर एक ही आरोप पत्र दायर कर दिया, जो सुरजीत सिंह की हत्या से संबंधित नहीं हैं। जिससे इन्हें हटाया जाना चाहिए। सीबीआइ ने कुमार की अर्जी विरोध करते हुए कहा कि एजेंसी को निर्णय करना है कि कौन गवाह प्रासंगिक है और कौन अप्रासंगिक। कुमार की याचिका का दंगा पीड़ितों के अधिवक्ता एचएस फुल्का ने भी विरोध किया। उन्होंने कहा कि नौ गवाह काफी महत्वपूर्ण हैं और इन्हें हटाए जाने से न्याय प्रभावित होगा।
* 2010 में सुल्तानपुरी थाने में दर्ज मामले में लूटपाट और सुरजीत नामक व्यक्ति की हत्या का आरोप लगाया गया है। मामले की सुनवाई कर रही कड़कड़डूमा अदालत ने सज्जन कुमार व अन्य अभियुक्तों पर आरोप तय किए हैं।

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