रविवार, 28 दिसंबर 2014

अंग्रेजी राजा जोर्ज पंचम के गुणगान में गाया गया था : जन गण मन अधिनायक

 

राष्ट्र गान या गुलामी का गीत (जन गण मन की कहानी)

पोस्टेड ओन: 9 Nov, 2011
http://roshni.jagranjunction.com
सन 1911 तक भारत की राजधानी बंगाल हुआ करता था। सन 1905 में जब बंगाल विभाजन को लेकर अंग्रेजो के खिलाफ बंग-भंग आन्दोलन के विरोध में बंगाल के लोग उठ खड़े हुए तो अंग्रेजो ने अपने आपको बचाने के लिए के कलकत्ता से हटाकर राजधानी को दिल्ली ले गए और 1911में दिल्ली को राजधानी घोषित कर दिया। पूरे भारत में उस समय लोग विद्रोह से भरे हुए थे तो अंग्रेजो ने अपने इंग्लॅण्ड के राजा को भारत आमंत्रित किया ताकि लोग शांत हो जाये। इंग्लैंड का राजा जोर्ज पंचम 1911 में भारत में आया। रविंद्रनाथ टैगोर पर दबाव बनाया गया कि तुम्हे एक गीत जोर्ज पंचम के स्वागत में लिखना ही होगा।

उस समय टैगोर का परिवार अंग्रेजों के काफी नजदीक हुआ करता था, उनके परिवार के बहुत से लोग ईस्ट इंडिया कंपनी के लिए काम किया करते थे, उनके बड़े भाई अवनींद्र नाथ टैगोर बहुत दिनों तक ईस्ट इंडिया कंपनी के कलकत्ता डिविजन के निदेशक (Director) रहे। उनके परिवार का बहुत पैसा ईस्ट इंडिया कंपनी में लगा हुआ था। और खुद रविन्द्र नाथ टैगोर की बहुत सहानुभूति थी अंग्रेजों के लिए। रविंद्रनाथ टैगोर ने मन से या बेमन से जो गीत लिखा उसके बोल है “जन गण मन अधिनायक जय हे भारत भाग्य विधाता”। इस गीत के सारे के सारे शब्दों में अंग्रेजी राजा जोर्ज पंचम का गुणगान है, जिसका अर्थ समझने पर पता लगेगा कि ये तो हकीक़त में ही अंग्रेजो की खुशामद में लिखा गया था।

इस राष्ट्रगान का अर्थ कुछ इस तरह से होता है “भारत के नागरिक, भारत की जनता अपने मन से आपको भारत का भाग्य विधाता समझती है और मानती है। हे अधिनायक (Superhero) तुम्ही भारत के भाग्य विधाता हो। तुम्हारी जय हो ! जय हो ! जय हो ! तुम्हारे भारत आने से सभी प्रान्त पंजाब, सिंध, गुजरात, मराठा मतलब महारास्त्र, द्रविड़मतलब दक्षिण भारत, उत्कल मतलब उड़ीसा, बंगाल आदि और जितनी भी नदिया जैसे यमुना और गंगा ये सभी हर्षित है, खुश है, प्रसन्न है , तुम्हारा नाम लेकर ही हम जागते है और तुम्हारे नाम का आशीर्वाद चाहते है। तुम्हारी ही हम गाथा गाते है। हे भारत के भाग्य विधाता (सुपर हीरो ) तुम्हारी जय हो जय हो जय हो। ”

जोर्ज पंचम भारत आया 1911 में और उसके स्वागत में ये गीत गाया गया। जब वो इंग्लैंड चला गया तो उसने उस जन गण मन का अंग्रेजी में अनुवाद करवाया। क्योंकि जब भारत में उसका इस गीत से स्वागत हुआ था तब उसके समझ में नहीं आया था कि ये गीत क्यों गाया गया और इसका अर्थ क्या है। जब अंग्रेजी अनुवाद उसने सुना तो वह बोला कि इतना सम्मान और इतनी खुशामद तो मेरी आज तक इंग्लॅण्ड में भी किसी ने नहीं की। वह बहुत खुश हुआ। उसने आदेश दिया कि जिसने भी ये गीत उसके (जोर्ज पंचम के) लिए लिखा है उसे इंग्लैंड बुलाया जाये। रविन्द्र नाथ टैगोर इंग्लैंड गए। जोर्ज पंचम उस समय नोबल पुरस्कार समिति का अध्यक्ष भी था।

उसने रविन्द्र नाथ टैगोर को नोबल पुरस्कार से सम्मानित करने का फैसला किया। तो रविन्द्र नाथ टैगोर ने इस नोबल पुरस्कार को लेने से मना कर दिया। क्यों कि गाँधी जी ने बहुत बुरी तरह से रविन्द्रनाथ टेगोर को उनके इस गीत के लिए खूब डांटा था। टैगोर ने कहा की आप मुझे नोबल पुरस्कार देना ही चाहते हैं तो मैंने एक गीतांजलि नामक रचना लिखी है उस पर मुझे दे दो लेकिन इस गीत के नाम पर मत दो और यही प्रचारित किया जाये क़ि मुझे जो नोबेल पुरस्कार दिया गया है वो गीतांजलि नामक रचना के ऊपर दिया गया है। जोर्ज पंचम मान गया और रविन्द्र नाथ टैगोर को सन 1913 में गीतांजलि नामक रचना के ऊपर नोबल पुरस्कार दिया गया।

रविन्द्र नाथ टैगोर की ये सहानुभूति ख़त्म हुई 1919 में जब जलिया वाला कांड हुआ और गाँधी जी ने लगभग गाली की भाषा में उनको पत्र लिखा और कहा क़ि अभी भी तुम्हारी आँखों से अंग्रेजियत का पर्दा नहीं उतरेगा तो कब उतरेगा,तुम अंग्रेजों के इतने चाटुकार कैसे हो गए, तुम इनके इतने समर्थक कैसे हो गए ? फिर गाँधी जी स्वयं रविन्द्र नाथ टैगोर से मिलने गए और बहुत जोर से डाटा कि अभी तक तुम अंग्रेजो की अंध भक्ति में डूबे हुए हो ? तब जाकर रविंद्रनाथ टैगोर की नीद खुली। इस काण्ड का टैगोर ने विरोध किया और नोबल पुरस्कार अंग्रेजी हुकूमत को लौटा दिया। सन 1919 से पहले जितना कुछ भी रविन्द्र नाथ टैगोर ने लिखा वो अंग्रेजी सरकार के पक्ष में था और 1919के बाद उनके लेख कुछ कुछ अंग्रेजो के खिलाफ होने लगे थे।

रविन्द्र नाथ टेगोर के बहनोई, सुरेन्द्र नाथ बनर्जी लन्दन में रहते थे और ICS ऑफिसर थे। अपने बहनोई को उन्होंने एक पत्र लिखा था (ये 1919 के बाद की घटना है) । इसमें उन्होंने लिखा है कि ये गीत ‘जन गण मन’ अंग्रेजो के द्वारा मुझ पर दबाव डलवाकर लिखवाया गया है। इसके शब्दों का अर्थ अच्छा नहीं है। इस गीत को नहीं गाया जाये तो अच्छा है। लेकिन अंत में उन्होंने लिख दिया कि इस चिठ्ठी को किसी को नहीं दिखाए क्योंकि मैं इसे सिर्फ आप तक सीमित रखना चाहता हूँ लेकिन जब कभी मेरी म्रत्यु हो जाये तो सबको बता दे। 7 अगस्त 1941 को रबिन्द्र नाथ टैगोर की मृत्यु के बाद इस पत्र को सुरेन्द्र नाथ बनर्जी ने ये पत्र सार्वजनिक किया, और सारे देश को ये कहा क़ि ये जन गन मन गीत न गाया जाये।

 कांग्रेस पार्टी थोड़ी उभर चुकी थी। लेकिन वह दो खेमो में बट गई। जिसमे एक खेमे के समर्थक बाल गंगाधर तिलक थे और दुसरे खेमे में मोती लाल नेहरु थे। मतभेद था सरकार बनाने को लेकर। मोती लाल नेहरु चाहते थे कि स्वतंत्र भारत की सरकार अंग्रेजो के साथ कोई संयोजक सरकार (Coalition Government) बने। जबकि गंगाधर तिलक कहते थे कि अंग्रेजो के साथ मिलकर सरकार बनाना तो भारत के लोगों को धोखा देना है। इस मतभेद के कारण लोकमान्य तिलक कांग्रेस से निकल गए और उन्होंने गरम दल बनाया। कोंग्रेस के दो हिस्से हो गए। एक नरम दल और एक गरम दल।

गरम दल के नेता थे लोकमान्य तिलक जैसे क्रन्तिकारी। वे हर जगह वन्दे मातरम गाया करते थे। और नरम दल के नेता थे मोती लाल नेहरु (यहाँ मैं स्पष्ट कर दूँ कि गांधीजी उस समय तक कांग्रेस की आजीवन सदस्यता से इस्तीफा दे चुके थे, वो किसी तरफ नहीं थे, लेकिन गाँधी जी दोनों पक्ष के लिए आदरणीय थे क्योंकि गाँधी जी देश के लोगों के आदरणीय थे)। लेकिन नरम दल वाले ज्यादातर अंग्रेजो के साथ रहते थे। उनके साथ रहना, उनको सुनना, उनकी बैठकों में शामिल होना। हर समय अंग्रेजो से समझौते में रहते थे। वन्देमातरम से अंग्रेजो को बहुत चिढ होती थी। नरम दल वाले गरम दल को चिढाने के लिए 1911 में लिखा गया गीत “जन गण मन” गाया करते थे और गरम दल वाले “वन्दे मातरम”।

नरम दल वाले अंग्रेजों के समर्थक थे और अंग्रेजों को ये गीत पसंद नहीं था तो अंग्रेजों के कहने पर नरम दल वालों ने उस समय एक हवा उड़ा दी कि मुसलमानों को वन्दे मातरम नहीं गाना चाहिए क्यों कि इसमें बुतपरस्ती (मूर्ति पूजा) है। और आप जानते है कि मुसलमान मूर्ति पूजा के कट्टर विरोधी है। उस समय मुस्लिम लीग भी बन गई थी जिसके प्रमुख मोहम्मद अली जिन्ना थे। उन्होंने भी इसका विरोध करना शुरू कर दिया क्योंकि जिन्ना भी देखने भर को (उस समय तक) भारतीय थे मन,कर्म और वचन से अंग्रेज ही थे उन्होंने भी अंग्रेजों के इशारे पर ये कहना शुरू किया और मुसलमानों को वन्दे मातरम गाने से मना कर दिया। जब भारत सन 1947 में स्वतंत्र हो गया तो जवाहर लाल नेहरु ने इसमें राजनीति कर डाली। संविधान सभा की बहस चली। संविधान सभा के 319 में से 318 सांसद ऐसे थे जिन्होंने बंकिम बाबु द्वारा लिखित वन्देमातरम को राष्ट्र गान स्वीकार करने पर सहमति जताई। बस एक सांसद ने इस प्रस्ताव को नहीं माना। और उस एक सांसद का नाम था पंडित जवाहर लाल नेहरु। उनका तर्क था कि वन्दे मातरम गीत से मुसलमानों के दिल को चोट पहुचती है इसलिए इसे नहीं गाना चाहिए (दरअसल इस गीत से मुसलमानों को नहीं अंग्रेजों के दिल को चोट पहुंचती थी)। अब इस झगडे का फैसला कौन करे, तो वे पहुचे गाँधी जी के पास। गाँधी जी ने कहा कि जन गन मन के पक्ष में तो मैं भी नहीं हूँ और तुम (नेहरु ) वन्देमातरम के पक्ष में नहीं हो तो कोई तीसरा गीत तैयार किया जाये। तो महात्मा गाँधी ने तीसरा विकल्प झंडा गान के रूप में दिया “विजयी विश्व तिरंगा प्यारा झंडा ऊँचा रहे हमारा”। लेकिन नेहरु जी उस पर भी तैयार नहीं हुए।

नेहरु जी का तर्क था कि झंडा गान ओर्केस्ट्रा पर नहीं बज सकता और जन गन मन ओर्केस्ट्रा पर बज सकता है। उस समय बात नहीं बनी तो नेहरु जी ने इस मुद्दे को गाँधी जी की मृत्यु तक टाले रखा और उनकी मृत्यु के बाद नेहरु जी ने जन गण मन को राष्ट्र गान घोषित कर दिया और जबरदस्ती भारतीयों पर इसे थोप दिया गया जबकि इसके जो बोल है उनका अर्थ कुछ और ही कहानी प्रस्तुत करते है,और दूसरा पक्ष नाराज न हो इसलिए वन्दे मातरम को राष्ट्रगीत बना दिया गया लेकिन कभी गया नहीं गया। नेहरु जी कोई ऐसा काम नहीं करना चाहते थे जिससे कि अंग्रेजों के दिल को चोट पहुंचे, मुसलमानों के वो इतने हिमायती कैसे हो सकते थे जिस आदमी ने पाकिस्तान बनवा दिया जब कि इस देश के मुसलमान पाकिस्तान नहीं चाहते थे,जन गण मन को इस लिए तरजीह दी गयी क्योंकि वो अंग्रेजों की भक्ति में गाया गया गीत था और वन्देमातरम इसलिए पीछे रह गया क्योंकि इस गीत से अंगेजों को दर्द होता था।

बीबीसी ने एक सर्वे किया था। उसने पूरे संसार में जितने भी भारत के लोग रहते थे, उनसे पुछा कि आपको दोनों में से कौन सा गीत ज्यादा पसंद है तो 99 % लोगों ने कहा वन्देमातरम। बीबीसी के इस सर्वे से एक बात और साफ़ हुई कि दुनिया के सबसे लोकप्रिय गीतों में दुसरे नंबर पर वन्देमातरम है। कई देश है जिनके लोगों को इसके बोल समझ में नहीं आते है लेकिन वो कहते है कि इसमें जो लय है उससे एक जज्बा पैदा होता है।

तो ये इतिहास है वन्दे मातरम का और जन गण मन का। अब ये आप को तय करना है कि आपको क्या गाना है ?

इतने लम्बे पत्र को आपने धैर्यपूर्वक पढ़ा इसके लिए आपका धन्यवाद्। और अच्छा लगा हो तो इसे फॉरवर्ड कीजिये, आप अगर और भारतीय भाषाएँ जानते हों तो इसे उस भाषा में अनुवादित कीजिये अंग्रेजी छोड़ कर।

जय हिंद |
(ये कहानी मुझे ईमेल से श्रीमान योगेश जी द्वारा मिली .. मुझे लगा की ये जानकारी हम सब को होनी चाहिए इसलिए अपने junction दोस्तों के साथ साँझा कर रही हूँ … आप के पास भी अगर कोई जानकारी हो तो यहाँ जरुर दे )
आभार

शनिवार, 27 दिसंबर 2014

अटल बिहारी वाजपेयी और मदन मोहन मालवीय को भारत रत्न





पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी और मदन मोहन मालवीय को जन्म दिन पर भारत रत्न का तोहफा
By  एबीपी न्यूज़   Thursday, 25 December 2014

नई दिल्ली: आज भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और मदन मोहन मालवीय का जन्मदिन है. जन्मदिन से पहले भारत सरकार ने दोनों को भारत रत्न दिए जाने का एलान किया है. वाजपेयी और मदन मोहन मालवीय को गणतंत्र दिवस यानि 26 जनवरी के मौके पर देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया जाएगा.
अटल बिहारी वाजपेयी आज 90 साल के हो जाएंगे तो वहीं काशी हिंदू विश्वविधालय के संस्थापक पंडित मदनमोहन मालवीय का आज 153वां जन्मदिन है.
बुधवार को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने ट्वीट कर यह जानकारी दी.   राष्ट्रपति  प्रणब मुखर्जी ने अपने ट्विटर अकाउंट पर ट्वीट कर भारत रत्न दिए जाने का एलान किया. लोकसभा चुनावों के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने बीएचयू की स्थापना करने वाले मालवीय को भारत रत्न देने का वादा किया था.

आपको बता दें कि अटल बिहारी वाजपेयी एनडीए के शासन काल में प्रधानमंत्री थे. मई 1996 में वाजपेयी 13 दिन के लिए पीएम बने थे फिर 1998 में 13 महीने के लिए पीएम बने. इसके बाद 1999 से 2004 तक पांच साल तक भारत के प्रधानमंत्री रहे. वाजपेयी के ही कार्यकाल में भारत ने परमाणु परीक्षण किया और देश को परमाणु शक्ति वाले देश के रूप में पहचान दिलाई.
अब तक कुल 43 लोगों को भारत रत्न  से सम्मानित किया गया है. अब मदन मोहन मालवीय और अटल बिहारी वाजपेयी को भी यह सम्मान दिया जाएगा और इस तरह इसे सम्मान को पाने वालों की संख्या 45 हो जाएगी.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 दिसंबर यानी कल वाराणसी में मदन मोहन मालवीय के जन्म दिवस पर आयोजित एक कार्यक्रम में भाग लेने जाने वाले हैं.
मालवीय ने की हिंदू महासभा की स्थापना थी. मदन मोहन मालवीय भारत के पहले और अन्तिम व्यक्ति थे जिन्हें महामना की सम्मानजनक उपाधि से विभूषित किया गया था.

नीतीश ने भी जताई सहमति
जेडीयू के वरिष्ठ नेता और बिहार के पूर्व सीएम नीतीश कुमार ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को भारत रत्न से सम्मानित किए जाने का पुरजोर समर्थन करते हुए कहा कि यह तो उन्हें यूपीए शासनकाल के दौरान दे दिया जाना चाहिए था.
नीतीश ने कहा, "अटल जी भारत रत्न पाने के पूरे हकदार हैं और उन्हें इससे सम्मानित किए जाने का वह पुरजोर समर्थन करते हैं. यह उन्हें यूपीए शासनकाल के दौरान उन्हें दे दिया जाना चाहिए था."
नीतीश का कहना है कि अटल जी का व्यक्तित्व विशाल था. वह उदार विचारधारा को मानते थे और किस तरह से गठबंधन चलाया जाता है, इसका उन्होंने उदाहरण पेश किया था. किसी का दिल नहीं दुखाते थे.

सोनिया गांघी ने भी किया फैसले का स्वागत
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और दिवंगत स्वतंत्रता सेनानी मदन मोहन मालवीय को भारत रत्न से नवाजे जाने के सरकार के फैसले का आज रात स्वागत किया.

उन्होंने कहा, ‘‘मैं अटल बिहारी वाजपेयी और मदन मोहन मालवीय को भारत रत्न दिए जाने के फैसले का स्वागत करती हूं.’’ राजनीतिक जगत में आम सहमति वाली राजनीति के लिए स्वीकार्य वाजपेयी और मालवीय को आज देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाजे जाने का फैसला किया गया.

भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है 'भारत रत्न'




नई दिल्ली। भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है 'भारत रत्न'। यह सम्मान राष्ट्रीय सेवा के लिए दिया जाता है। इन सेवाओं में कला, साहित्य, विज्ञान, सार्वजनिक सेवा और खेल शामिल है। इस सम्मान की स्थापना 2 जनवरी 1954 में भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति श्री राजेंद्र प्रसाद द्वारा की गई थी।

अन्य अलंकरणों के समान इस सम्मान को भी नाम के साथ पदवी के रूप में प्रयुक्त नहीं किया जा सकता। प्रारम्भ में इस सम्मान को मरणोपरांत देने का प्रावधान नहीं था, यह प्रावधान 1955 में बाद में जोड़ा गया। तत्पश्चात 12 व्यक्तियों को यह सम्मान मरणोपरांत प्रदान किया गया। सुभाष चन्द्र बोस को घोषित सम्मान वापस लिए जाने के उपरान्त मरणोपरान्त सम्मान पाने वालों की संख्या 11 मानी जा सकती है। एक वर्ष में अधिकतम तीन व्यक्तियों को ही भारत रत्न दिया जा सकता है।

पदक
मूल रूप में इस सम्मान के पदक का डिजाइन 35 मिमि गोलाकार स्वर्ण मैडल था। जिसमें सामने सूर्य बना था, ऊपर हिन्दी में भारत रत्न लिखा था और नीचे पुष्प हार था। और पीछे की तरफ राष्ट्रीय चिह्न था। फिर इस पदक के डिजाइन को बदल कर तांबे के बने पीपल के पत्ते पर प्लेटिनम का चमकता सूर्य बना दिया गया। जिसके नीचे चांदी में लिखा रहता है 'भारत रत्न' और यह सफेद फीते के साथ गले में पहना जाता है।

अब तक 43 व्यक्तियों को इस रत्न से सम्मानित किया जा चुका है।

1. डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन - 1954

2. चक्रवर्ती राजगोपालाचारी- 1954

3. डॉक्टर चन्द्रशेखर वेंकटरमण- 1954

4. डॉक्टर भगवान दास- 1955

5. सर डॉ. मोक्षगुंडम विश्वेक्ष्वरय्या- 1955

6. पं. जवाहर लाल नेहरु- 1955

7. गोविंद वल्लभ पंत- 1957

8. डॉ. धोंडो केशव कर्वे - 1958

9. डॉ. बिधन चंद्र रॉय- 1961

10. पुरुषोत्तम दास टंडन- 1961

11. डॉ. राजेंद्र प्रसाद- 1962

12. डॉ. जाकिर हुसैन- 1963

13. डॉ. पांडुरंग वामन काणे- 1963

14. लाल बहादुर शास्त्री- 1966

15. इंदिरा गांधी- 1971

16. वराहगिरी वेंकट गिरी- 1975

17. के.कामराज - 1967

18. मदर टेरेसा- 1980

19. आचार्य विनोबा भावे- 1983

20. खान अब्दुल गफ्फार खान - 1987

21. एम जी आर- 1988

22. डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर- 1990

23. नेल्सन मंडेला- 1990

24. राजीव गांधी- 1991

25. सरदार वल्लभ भाई पटेल- 1991

26. मोरारजी देसाई - 1991

27. मौलाना अबुल कलाम आजाद- 1992

28. जेआरडी टाटा- 1992

29. सत्यजीत रे- 1992

30. अब्दुल कलाम- 1997

31. गुलजारी लाल नंदा- 1997

32. अरुणा आसफ अली- 1997

33. एम एस सुब्बुलक्ष्मी- 1998

34. सी सुब्रामनीयम- 1998

35. जयप्रकाश नारायण- 1998

36. पं. रवि शंकर- 1999

37. अमृत्य सेन- 1999

38. गोपीनाथ बोरदोलोई- 1999

39. लता मंगेशकर- 2001

40. उस्ताद बिस्मिल्लाह खां- 2001

41. पं.भीमसेन जोशी- 2008

42. सी.एन.आर.राव- 2013

43. सचिन तेंदुलकर- 2013

2014 के सम्मानित व्यक्तित्व होंगे


44 . अटल बिहारी वाजपेयी

45. मदन मोहन मालवीय

आज अटलजी से बेहतर भारत रत्न कौन : डा. वेदप्रताप वैदिक



आज अटलजी से बेहतर भारत रत्न कौन !

लेखक - डा0 वेदप्रताप वैदिक 
नया इंडिया, 25 दिसंबर 2014: आज के दिन भारत रत्न के लिए श्री अटलबिहारी वाजपेयी से बेहतर उम्मीदवार कौन हो सकता था और उनको यह सम्मान कॉंग्रेस सरकार देती तो उससे बेहतर क्या होता? लेकिन यह श्रेय मोदी सरकार को ही मिलना था। अब तक कॉंग्रेसी अटल बिहारी वाजपेयी को ‘गलत पार्टी में सही आदमी’कहते रहे| उन्होंने वह मौका खो दिया, कि वे इस ‘सही आदमी’ के सिर पर ताज़ रख देते| अटलजी अभी भाजपा में हैं या नहीं, इसका कोई खास मतलब नहीं रह गया है और अब वे सक्रिय राजनीति करेंगे, इसकी भी कोई संभावना नहीं रह गई है| ऐसे में कॉंग्रेस अपने पुराने व्यंग्य को उलट सकती थी| वह कह सकती थी कि ‘सही आदमी सही जगह’ पर है याने अटलजी भारत-रत्न हैं|
वैसे भी आज देश में जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी के कद का कोई नेता नहीं है| इन दोनों महान नेताओं का कोई सच्चा उत्तराधिकारी है तो वह अटलबिहारी वाजपेयी ही है| नेहरू की पहचान लोकतंत्र से और इंदिरा गॉंधी की पहचान शक्ति-पूजा से है| अटलजी नेहरू के गहरे प्रशंसक रहे और इंदिरा गॉंधी को बांग्लादेश के बाद उन्होंने दुर्गा कहा था| स्वयं नेहरू युवा अटल बिहारी को बहुत पसंद करते थे| अटलजी ने भारत में लोकतंत्र और शक्ति-संधान का अनुपम कार्य किया है|
 अटलबिहारी वाजपेयी स्वभाव से ही लोकतांत्रिक हैं| राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की छाया में काम करते रहकर अटलजी ने अपना स्वतंत्र अस्तित्व बनाए रखा और उसे शीर्ष तक पहुॅंचा दिया, यह अपने आप में चमत्कार है|  ऐसा चमत्कार कर दिखाना नेहरू, इंदिरा या लोहिया के लिए असंभव था| जयप्रकाश तो यह बिल्कुल नहीं कर पाते| जिस अटलबिहारी का बचपन और युवावस्था आर्यसमाज और संघ में बीता, उसकी यह हिम्मत कि वह मुसलमानों को अपने खून का खून और अपने मांस का मांस कहे,क्या यह कोई छोटी-मोटी बात है? गुजरात में चल रहे नर-संहार के दौरान वहॉं जाना और शरणार्थियों के शिविर में बुजुर्ग प्रधानमंत्री  का रो पड़ना, अपने आप में असाधारण घटना है| यह वही स्वयंसेवक-प्रधानमंत्री था, जिसने बार-बार कहा था कि गुजरात में राजधर्म का पालन नहीं हो रहा है| समस्त नागरिकों के प्रति अभेद दृष्टि रखना ही सच्ची लोकतांत्रिकता है|
 यह लोकतांत्रिकता अनेक रूपों में प्रकट होती रही| अपने प्रधानमंत्रित्व काल में अटलजी ने विरोधी दलों या नेताओं के प्रति कभी किसी प्रकार का प्रतिशोधात्मक कदम नहीं उठाया| सत्ता ने उन्हें कभी मतांध नहीं किया|  लगभग 50 साल प्रतिपक्ष में रहने के बावजूद अटलजी के भाषणों या लेखों में कभी कटुता दिखाई नहीं पड़ी, हालॉंकि उन्होंने सरकारी नीतियों की आलोचना करने या मज़ाक उड़ाने में कभी कोताही नहीं की| किसी भी लोकतंत्र के लिए यह गर्व की बात हो सकती है कि कोई नेता60-70 साल राजनीति करे और उसके पूरे राजनीतिक जीवन में से ऐसा एक भी उदाहरण आप न बता सकें, जो कटुता या मर्यादाहीनता का पर्याय माना जा सके|  प्रतिपक्ष में रहते हुए सत्तापक्ष के उजले को उजला कहने की उदारता कितने नेताओं में होती है? यदि भारतीय संसद ने उन्हें ‘सर्वश्रेष्ठ सांसद’ की उपाधि दी है तो उस उपाधि का ही सम्मान बढ़ा है| प्रतिपक्ष के नेता की उनकी भूमिका,प्रधानमंत्री की भूमिका से काफी लंबी रही है और वह भारत ही नहीं, दुनिया के सभी लोकतांत्रिक देशों के नेताओं के लिए ‘मॉडल’ के तौर पर मानी जा सकती है| अटल बिहारी वाजपेयी ने करोड़ों भारतीयों को अपने रसीले भाषणों से जिस तरह मंत्र-मुग्ध किया है, क्या देश के किसी अन्य नेता ने किया है?एक भारत रत्न तो उनकी वाग्मिता के लिए ही उन्हें दिया जा सकता है|
 उनकी अपनी पार्टी में अटलजी लोकतांत्रिक प्रणाली को प्रोत्साहित करते रहे, वैचारिक और संगठनात्मक, दोनों स्तर पर| जब वे अध्यक्ष बने तो उन्होंने गॉंधीवादी समाजवाद का नारा दिया,अल्पसंख्यकों के लिए पार्टी के दरवाज़े खोले और अपने आलोचकों को भी उन्होंने पार्टी-पदों पर प्रतिष्ठित किया| पार्टी के आंतरिक विवादों में उन्होंने निर्णायक भूमिका निभाई लेकिन प्रो. बलराज मधोक और कल्याणसिंह जैसे नेताओं के तेजाबी हमलों का उन्होंने कभी भी कटुतापूर्ण उत्तर नहीं दिया| कल्याणसिंह को उन्होंने पार्टी में वापस भी ले लिया| सुब्रहमण्यम स्वामी और गोविंदाचार्य ने उनसे मुठभेड़ की और स्वयं ही पार्टी से बाहर हो गए लेकिन अटलजी ने अपने इन विरोधियों की कभी सार्वजनिक आलोचना तक नहीं की| पार्टी में गुटबाजी चलाना, किसी पार्टी-अध्यक्ष को नीचा दिखाना या कोई पद हथियाना जैसी हरकतें, जो आम नेता करते ही हैं, उनसे भी अटलजी ऊपर उठे रहे| अगर ऐसा नहीं होता तो लालकृष्ण आडवाणी अपनी लगी हुई थाली अटलजी के आगे क्यों सरकाते ! राजनीति में कमल की तरह रहना कोई सीखे तो अटलबिहारी वाजपेयी से सीखे|
 सबसे बड़ी बात तो यह कि अटलबिहारी वाजपेयी ऐसे पहले भारतीय प्रधानमंत्री रहे, जिन्होंने भारतीय लोकतंत्र को गठबंधन-धर्म सिखाया| पूरी अवधि से भी अधिक तक सरकार चलाना और दो दर्जन दलों को जोड़कर चलाना किसी जादूगरी से कम नहीं है| जिन खास मुद्दों पर जनसंघ और भाजपा लड़ती रहीं, उन्हें दरकिनार करने के लिए अपनी पार्टी को पटा लेना किसी मायावी नेता के ही बस की बात है| गठबंधन सरकार तो डॉ. मनमोहन सिंह के जमाने में भी चलती रही लेकिन कई बार उसकी सॉंस भरती-सी, रूकती-सी, अटकती-सी लगती रही। डॉं. मनमोहन सिंह जैसे सरल और बेदम व्यक्ति के प्रधानमंत्री रहते हुए भी गठबंधन में जो खरखराहट सुनाई पड़ती थी और खींचतान होती रहती थी, वह अटलजी के कार्यकाल में कभी सुनाई नहीं पड़ी| दूसरे शब्दों में अटलबिहारी का गठबंधन वैसा ही चला,जैसा जवाहरलाल का एक पार्टी-राज ! नेहरू की खूबियॉं, नेहरू से भी ज्यादा वाजपेयी में नहीं होतीं तो क्या वह गठबंधन चल पाता? यदि अटलजी के स्वभाव में लोकतांत्रिकता नहीं होती तो क्या फारूक अब्दुल्ला, चंद्रबाबू नायडू, ममता बेनर्जी और चौटाला जैसे स्वयंभू नेताओं को एक ही जाजम पर बिठाए रखा जा सकता था? यदि अटलबिहारी वाजपेयी जैसा व्यक्तिव देश को उस समय उपलब्ध नहीं होता तो क्या संघ के स्वयंसेवकों के साथ जॉर्ज फर्नाडीस और शरद यादव जैसे नेता कदम-ताल कर पाते?तरह-तरह के व्यक्तियों और विचारों के बीच जुगलबंदी चलाए रखने का ही दूसरा नाम लोकतंत्र है|अटलबिहारी वाजपेयी को भारत रत्न देकर मोदी सरकार लोकतंत्र के मूल सिद्घांतों को मजबूत करेगी|उन्होंने विदेशमंत्री के तौर पर विदेश नीति में सर्वसम्मति का नारा दिया| उन्होंने बड़े पड़ौसी चीन और छोटे पड़ौसी पाकिस्तान जैसे देशों के साथ सुलह का हाथ बढ़ाया| उन्हें पूरे दक्षिण एशिया के गठबंधन को मजबूत बनाने का रास्ता खोला| प्रधानमंत्री बनने पर वे अटल बिहारी वाजपेयी से भी आगे निकल गए। संघ और भाजपा के प्रिय तो रहे ही, पूरे देश के प्रेमभाजन बन गए। इसीलिए मैंने दो-ढाई साल पहले लिखा था कि नरेंद्र मोदी को यदि भारत का प्रधानमंत्री बनना है और बनकर सफल होना है तो मोदी के शरीर में अटलजी की आत्मा का प्रवेश जरुरी है। अटलजी के व्यक्तिव में भारत के सभी श्रेष्ठ प्रधानमंत्रियों का सुंदर समन्वय है।
 जहां तक इंदिरा गॉंधी का सवाल है, उनके सच्चे वारिस तो अटलबिहारी वाजपेयी ही हैं| अटलजी ने जब बम विस्फोट किया तो मेरे लेख का शीर्षक था – ‘इंदिरा का ताज अटल के माथे पर|’ अटलजी को यह शीर्षक पसंद नहीं आया लेकिन मेरा तर्क यह था कि जो काम राजीव गॉंधी और नरसिंहरावजी को करना था, वह वे नहीं कर सके| उसी काम को, इंदिरा गॉंधी के अधूरे काम को अंजाम दिया अटलजी ने | तो उन्हें उसी परंपरा का बेहतर संस्करण क्यों नहीं माना जाए? यदि पॉंच सौ साल बाद भी कोई भारत का इतिहास लिखेगा तो क्या वह यह नहीं लिखेगा कि वाजपेयी ने भारत को परमाणु महाशक्ति बनाया|  बांग्लादेश का निर्माण करके इंदिरा गॉंधी ने भारत को क्षेत्रीय महाशक्ति बनाया तो अटलजी ने बम-विस्फोट करके भारत को विश्व-शक्ति की दहलीज पर ला खड़ा किया| अटलजी का परमाणु विस्फोट भारत की संप्रभुता का शंखनाद था। प्रधानमंत्री के तौर पर अटलजी ने अनेक उल्लेखनीय और कुछ आलोच्य काम भी किए लेकिन एक राजनैतिक नेता के तौर पर उन्होंने भारतीय लोकतंत्र के चित्त में जैसे मधुर और मनभावन रंग भरे और भारत को जैसी शक्ति से ओत-प्रोत किया, अनेक भारत-रत्नों ने नहीं किया| अटलजी को भारत-रत्न देकर भारत ने खुद को और भारत-रत्न को सम्मानित किया है।

मंगलवार, 23 दिसंबर 2014

पाकिस्तान तो भारत भूमि ही है - परम पूजनीय सरसंघचालक श्री मोहन भागवतजी





राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के परम पूजनीय सरसंघचालक श्री मोहन भागवत जी ने कलकत्ता में विश्व हिन्दू परिषद् के स्वर्ण जयंती वर्ष समारोह के अन्तरगत आयोजित सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि हमने पूरी दुनिया का मंगल करने का संकल्प किया है |

उन्होंने कहा कि हिन्दू समाज जब-जब मन से संकल्प करता है, उस संकल्प को अवरुद्ध करने की शक्ति दुनिया में किसी की नहीं होती | क्योंकि हिन्दू समाज का संकल्प सत्य संकल्प होता है | सबका मंगल करने वाला संकल्प होता है | किसी के विरोध में वह संकल्प नहीं होता है | अपने पवित्र हिन्दू धर्म, हिन्दू संस्कृति व् हिन्दू समाज के संरक्षण तथा उसकी सर्वांगींण उन्नति का वह संकल्प होता है | और इतिहास साक्षी है, कि जब-जब हिन्दू समाज की उन्नति हुई है, तब-तब सब प्रकार के संत्राशो से आसमानिया सुलतानी संकटो से त्रस्त दुनिया को सुख-शांति का नया रास्ता मिला है |

हम लोगो ने आज जो संक्ल्प लिया है वो सत्य संकल्प है | हम लोग संकल्प करते है, उल्टी-सीधी चर्चा करने वाले दुनिया में लोग है | उससे अपने मन में शंका नहीं लाना | यहाँ पर हम लोग सम्मलेन कर रहे है | हमारे कार्यकर्तागन हमारे लिए दिग्दर्शन दे रहे है | हमारे संतगण हमारे लिए संकल्प दे रहे है | उसमे सब के कल्याण की भावना है और वह भावना शुद्ध है, सत्य है और उस संकल्प के पीछे हम सब लोगो के दृढसंकल्प का और बाहुओ के बल का पुरुषार्थ खड़ा है |

हिन्दू समाज जाग रहा है | सज्जनों को हर्षित करने वाली और दुर्जनों को भयकंपित करने वाली बात अब प्रत्यक्ष हो रही है | हम लोगो को उस संकल्प पर पक्का रहना पड़ेगा | प्रत्येक को पक्का रहना पड़ेगा | हमे किसी प्रकार का भय करने की आवश्यकता नहीं है | किस बात का भय करना है ? हम अपने देश में है | हम कही दूसरी जगह से यहाँ पर घुस कर नहीं आये, घुसपैठ करके नहीं आये | हम बाहर से यहाँ बसने के लिए भी नहीं आये | हम यहीं पर जन्मे, इसी मिटटी में पले, इसी देश के उत्थान में लगे पूर्वजो के वंशज है | यह हमारा देश है | यह हमारा हिन्दू राष्ट्र है | हिन्दू भागेगा नहीं | हिन्दू अपनी भूमि, अपनी जगह छोड़ेगा नहीं | जो कुछ पहले की हमारी निद्रा के कारण गया है, उसको वापस लाने का पुरुषार्थ अब हम करेंगे | सपूर्ण दुनिया की भलाई के लिए हिन्दू जाग रहा है | उसके जागने से किसी को डरना नहीं चाहिए | डरेंगे वहीं जो स्वार्थी होंगे या दुष्ट होंगे और इसलिए हिन्दू समाज के जागरण के विरुद्ध में उठने वाली आवाजें केवल उन्ही लोगो की होती है जिनके स्वार्थ को खतरा होता है या जिनकी दुष्टता पर प्रतिबन्ध आता है | हिसाब करले दुनिया | कभी हिन्दू समाज ने किसी और को दबाने की बात की नहीं है | आज भी नहीं करता है | इतने अपराध पाकिस्तान करता है, इतने अपराध घुशपैठी बंगलादेशीयो की तरफ़ा से होते है | हिन्दू अभी तक केवल सेहन करता आ रहा है | लेकिन हमारे भगवान् सिखाते है कि १०० अपराधो के बाद सहन भी मत करो | अब १०० अपराध पुरे हो गये है | अब और क्या होना बाकि है ? कितना सहन करना है? केवल हमको सहन नहीं करना पड़ता | इनको तो दुनिया को सहन करना पड़ रहा है | और दुनिया के पास उपाय नहीं है | हमारे पास उपाय है | हम जानते है अगर हम खड़े हो जाते है तो फिर कोई दुष्ट ताकत, कोई स्वार्थी ताकत हमारे सम्मिलित संगठित शक्ति के सामने खड़ी नहीं रह सकती | लड़ने की बात तो और है |

एक बार शंकर जी विष्णु जी को मिलने गये | अपना-अपना वाहन लेके | विष्णु जी गये शंकर जी के कैलाश पर दर्शन के लिए | शिवजी ने आशीर्वाद दिया, शुभकामनायें दी, दोनों की बात होने लगी | तो शंकर जी के गले में सांप था | उसने देखा विष्णु जी गरुड़ पर बैठे है | गरुड़ के आगे सांप रहता नहीं भागता है | लेकिन अब शिवजी के गले में था इसलिए हिम्मत करके बोला, 'क्यों गरुड़ जी सब हाल-चाल ठीक है ना' | तो गरुड़ जी ने कहा हाल-चाल तब तक ठीक है तब तक तुम शिवजी के गले में हो | जरा भूमि पर उतर आओ फिर हाल-चाल बताता हूँ |

अब हिन्दू का यहीं कहना है कि शिवजी के गले में बैठे हो तब तक तुम्हारा ठीक है | अब जमीन पर उतरने की भूल मत करना | क्योंकि अब हिन्दू जाग रहा है | हिन्दू जागा है | हिन्दू अपनी सुरक्षा कर लेगा | हिन्दू अपनी उन्नति कर लेगा | और इतना ही नहीं दुनिया के सब संत्रस्त लोगो को हिन्दू अभय प्रदान करेगा | सारी दुनिया में सुख-शांति पूर्ण लोकजीवन चलता रहे ऐसा कल्याणकारक पथ अपने पथ से सारी दुनिया को हिन्दू समाज बताएगा | लाउडस्पीकर पर इतने जोर से मै बोल रहा हूँ, हमेशा नहीं बोलता | किसके भरोसे बोल रहा हूँ ? आप लोगो के भरोसे बोल रहा हूँ | आप लोगो ने संकल्प लिया है ये देख कर बोल रहा हूँ | इतनी बड़ी मात्रा में यहाँ पर लोग उपस्थित है यह देखकर बोल रहा हूँ | हम इकट्ठा होंगे, हम संकल्प लेंगे, हम उसपर दृढ रहेंगे, हम उस संकल्प के योग्य अपने आप को बनायेंगे और मिलकर चलेंगे केवल हमारा ही नहीं सारी दुनिया के भले लोगो का कल्याण होगा और सारी दुनिया के दुष्ट लोगो को अपना मुंह छिपाने के लिए अँधेरे कोने की तलास करनी पड़ेगी |

ये हमको करना है और ये पूरा होने तक अपने स्वार्थ का विचार नहीं करना | मेरा क्या होगा इससे डरना नहीं | हमारे स्वातंत्र्य योद्धा डरे नहीं | फांसी चढ़ रहे थे खुदीराम बोस | पब्लिक प्लेस में फांसी हो रही थी | सारा जनसमुदाय इकट्ठा हुआ, उसमे उनकी माता भी थी | माता की आँखों में आंशु थे लेकिन खुदीराम बोस डरे नहीं | खुदीराम बोस ने माता को कहा के हे माता धीरज रखो | अभी तो मै जा रहा हूँ लेकिन मेरा काम अभी पड़ा है अभी अधुरा | तो ९ महीने में वापिस आना है | तुम्हारे ही उदर में जन्म लूँगा और जन्म लेके काम पूरा करूँगा | देशभक्त हिन्दू का, सत्यभक्त हिन्दू का ऐसा चरित्र होता है | मेरे नौजवान भाइयो हमे उस चरित्र का परिचय फिर से देना पड़ेगा | हम केवल अपनी सुरक्षा के लिए नहीं लड़ रहे | केवल अपनी उन्नति के लिए नहीं लड़ रहे | हम तो अगर अपनी उन्नति और सुरक्षा की बलि देकर दुनिया का कल्याण होता है तो वो भी देने को तैयार रहने वाले है | दुनिया के कल्याण के लिए हलाहल कालकूट प्रासंग करने वाले शिवजी के हम वंसज है | शिवजी ने दुनिया को बचाने के लिए विष पी लिया था | आज दुनिया को बचाने के लिए सम्पूर्ण हिन्दू समाज फिर से अमृतसंजीवनी लेकर खड़ा हो इसकी आवश्यकता है और इसलिए उस हिन्दू समाज को खड़ा कर रहे है | हम सब लोग मिलकर खड़ा कर रहे है |

जो भूले भटके बिछड़ गये उनको वापस लायेंगे | हमारे से ही गये है | खुद नहीं गये | लोभ, लालच, जबरदस्ती से लूट लिए गये | अब हमसे जो लूट लिए गये, तो चोर पकड़ा गया, उसके पास मेरा माल है | दुनिया जानती है वो मेरा माल है तो मै उसको वापस लेता हूँ इसमें क्या बुराई है? पसंद नहीं तो कानून बनाओ | संसद ने कानून बनाने के लिए कहा है | कानून बनाने के लिए तैयार नहीं तो क्या करेंगे ? हमको किसी को बदलना नहीं है | हिन्दू किसी को बदलना है इसमें विश्वास नहीं करता | हिन्दू कहता है परिवर्तन अन्दर से होता है | लेकिन हिन्दू को परिवर्तन नहीं करना है तो हिन्दू का भी परिवर्तन नहीं करना चहिये | इस पर हिन्दू आज अड़ा है | खड़ा होगा और अड़ेगा | ये सारे संकल्प अभी इसी क्षण से अपने नित्य आचरण में लाना और उनपर अड़े रहना, खड़े रहना | आज के युग में हिन्दू धर्म के आचरण के लिए उसके प्राथमिक आचरण का यह साल है | उस पहले पायदान पर हम सबको रहना है | इस साल को देना नहीं है |

गुरु तेग बहादुर जी का बलिदान हुआ | आरी से उनको चीरा गया, उनका सर धड से अलग कर दिया आरी से | मुंह से एक सिसकारी नहीं निकली दर्द की | गर्दन काटने के बाद लोगो ने देखा रीड की हड्डी पर कोई कागज़ लपेटा है | उसपर लिखा था ' सर दिया लेकिन सार नहीं दिया ' | हमने आज हमको जो करना है उसका सारांश संकल्प रूप में ग्रहण किया है | हम सर दे देंगे सार नहीं देंगे | और सर भी नहीं देंगे सर बचायेंगे | सर काटने वालो से कटने वालो के सर बचायेंगे | सारी दुनिया को अभय देने वाला अपने आप में स्व-सुरक्षित, जिसकी और टेढ़ी आँख करके देखने की दुनिया के दुष्टों की हिम्मत नहीं होगी, ऐसा हिन्दू हम खड़ा करेंगे और हिन्दू के नाते सम्पूर्ण दुनिया को फिर से एक बार युगानुकुल मानव संस्कृति की दीक्षा देंगे | उस संकल्प के पूरा करने की और जाने के लिए ये जो छोटे-छोटे ९-११ संकल्प आपको दिए है, उंनका आचरण शुरू करना, इसी क्षण से प्रारंभ करना | जिसको जितना तुरंत संभव है उतना अपने रोज के आचरण में लागू करना, क्योंकि इस देश का हिन्दू इस देश के भाग्य के लिए उत्तरदायी है |

हम जब कहते है भारत मेरा देश है तो हम ये नहीं कि कहते हम भारत के मालिक है | हम कहते है ये मातृभूमि है, मै उसका पुत्र हूँ | माता के लिए मेरा जन्म है | हम इसके उत्तरदायी है | जितने जल्दी हिन्दू समाज खड़ा हो जायेगा उतने जल्दी भारतभूमि पर बसने वाले हर एक का, वो किसी की भी पूजा करता हो, हर एक कल्याण होगा | और जब तक भारत भूमि में हिन्दू खड़ा नहीं है तब किसी का कल्याण नहीं है | क्या है, पाकिस्तान तो भारत भूमि ही है न | ये तो ४७ में कुछ हुआ इसलिए अभी वहां गयी है | परमानेंट थोड़े ही है | लेकिन आप देखिये वहां हिन्दू को खड़ा होने लायक नहीं रखा | उस दिन से आज तक पाक सुख में है या दुःख में? थोडा बहुत हिन्दू भारत में खड़ा है तो भारत पाकिस्तान से ज्यादा सुख में है कि दुःख में ? यही है, जो भारत था उसमे हिन्दू जब तक खड़ा है, भारत के सब लोगो का कल्याण है | भारत में हिन्दू अगर उत्तरदायी होकर खड़ा नहीं होता,संगठित होकर खड़ा नहीं होता, शक्तिसंपन्न होकर खड़ा नहीं होता तो भारतवर्ष में रहने वाले प्रत्येक को दुःख का ही सामना करना पड़ेगा | हम अपना दुःख दूर कर रहे है उससे दुनिया का दुःख दूर होने वाला है | ये समझे कि हम खड़े हो रहे है | जिनकी स्वार्थ की दूकान बंद होगी, जिनकी दुष्टता चल नहीं सकेगी, वो विरोध करने का थोडा बहुत प्रयास करेंगे | संघर्ष थोडा बहुत होगा | लेकिन संघर्ष करते समय भी हमको पता है कि ये तो हमारा दुष्टों की दुष्टता के खिलाफ संघर्ष है | स्वार्थी लोगो के स्वार्थ के खिलाफ संघर्ष है | हम किसी का द्वेष नहीं करते |

एक राजकुमार को पूछा युद्धविद्या सीखने के बाद कि कितना सीखे हो ? कितने लोगो से लड़ सकते हो ? उसने उत्तर दिया कि मैं लड़ता नहीं हूँ किसी से, मै किसी से दुश्मनी नहीं करता क्योंकि कोई मेरा दुश्मन नहीं है | लेकिन मैं जानता हूँ कि दुनिया दुष्ट है और उसमे दुश्मनी करने वाले लोग है | तो ऐसे दुश्मनों से अपने आप को और अपनी प्रजा को मै बचा सकता हूँ, इतना लड़ना मै जानता हूँ | हिन्दू भी इतना लड़ना जानता है, और हिन्दू इतना ही लड़ता है, इससे ज्यादा नहीं लड़ता |

हिन्दू के प्रति किसी प्रकार की शंका करने का कोई कारण नहीं | हम हिन्दू है, हम हिन्दू रहेंगे और हिंदुत्व के जो काल सुसंगत शास्वत तत्व है, जो सारी दुनिया पर लागू होते है, जिनके आधार पर चलने से दुनिया का कल्याण होगा, उन तत्वों को अपने आचरण से हम सारी दुनिया को देने वाला हिन्दुस्थान खड़ा करना चाह रहे है | और उसको हम खड़ा करके रहेंगे | आज के सम्मलेन का अंतिम वृहत संकल्प यहीं है | हिन्दुस्थान में परम वैभव संपन्न हिन्दू राष्ट्र और सुखी सुन्दर मानवता संपन्न दुनिया बनाने वाला विश्व गुरु हिन्दुस्थान, इसको खड़ा करने के लिए हमने संकल्प लिया है 'प्रारंभिक संकल्प' | हमे उसके आचरण पर पक्का रहना है | देखिएगा ज्यादा समय नहीं लगेगा | यहाँ बैठे हुए जवानों की जवानी पार होने के पहले जो परिवर्तन आप जीवन में चाहते हो, उस परिवर्तन को होता हुआ आप अपनी आँखों से देखोगे | एक शर्त है, आज जो संकल्प आपने लिए उनपर आपको हर कीमत पर पक्का रहना पड़ेगा | और इसलिए इन संकल्पों का स्मरण नित्य मन में रखिये और अपना आचरण उस स्मरण के अनुसार कीजिये | आईटीआई एक ही बात मै आपके सामने रखता हूँ | और निर्भय होकर, आश्वस्त होकर अंतिम विजय की निश्चिंती मन में लेकर हम सब लोग चलना प्रारंभ करे इतना आह्वान करता हूँ |

शनिवार, 20 दिसंबर 2014

Vande Mataram: Language of every Bhartiya's heart-Param Poojniya SarSanghchalak Shri Mohan Bhagwat ji






Param Poojniya SarSanghchalak Shri Mohan Bhagwat ji releasing the book "Samagra Vande Matram". The book is a detailed account of Bankim Chandra Chatterjee's works.         

"We should definitely read this book. We keep the Bhagwad Gita at home. Similarly this tome should also be kept at home and read daily," said Bhagwat ji. He added that Vande Mataram is not merely two words rather a mantra which remained on the lips of our freedom fighters till their end. "Vande Mataram is a term that denotes the language of every Bhartiya's heart. And this is why everyone understands it," he said.

Bankim Chandra's descendant Shantanu Chattopadhyay was honoured on the occasion.


चित्तौड़गढ़ दुर्ग को बचाने की मांग




                                   चित्तौड़गढ़ दुर्ग को बचाने की मांग

तारीख: 20 Dec 2014
हिन्दू जागरण मंच के एक प्रतिनिधिमंडल ने गत दिनों जयपुर में राजस्थान के विधि मंत्री राजेन्द्र सिंह राठौड़, खनन मंत्री राजकुमार रिणवा और धरोहर संरक्षण संस्थान के अध्यक्ष औंकारसिंह लखावत से मिलकर विश्व संरक्षित धरोहर चित्तौड़गढ़ दुर्ग को बचाने की मांग की है।
मंच के प्रदेश उपाध्यक्ष प्रतापभानु सिंह शेखावत ने बताया कि दुर्ग के चारों ओर अबाध गति से खनन हो रहा है। खनन में भारी मशीनरी और बेहताशा विस्फोटक के उपयोग से हो रहे कम्पन से दुर्ग की दीवारों में जगह-जगह दरारें आ गई हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से यदि तत्काल खनन नहीं रोका गया तो ऐतिहासिक दुर्ग कुछ वषोंर् में पूरी तरह से ढह सकता है। चित्तौड़गढ़ दुर्ग करीब एक हजार वर्ष पुराना है। इसी दुर्ग में कई शौर्य एवं पराक्रम की गाथाएं लिखी गई हैं। यह मेवाड़ के महानायक जैसे-महाराणा हमीर, महाराणा सांगा, महाराणा प्रताप, पन्ना धाई, मीरा बाई इत्यादि की कर्मभूमि रहा है।

भारत की जमीन है पाकिस्तान - संघ प्रमुख परमपूज्य मोहनजी भागवत




     भारत की जमीन है पाकिस्तान- आरएसएस प्रमुख परमपूज्य मोहन जी भागवत

aajtak.in [Edited By: रंजीत सिंह] | कोलकाता, 20 दिसम्बर 2014
http://aajtak.intoday.in/story/rss-top-boss-adds-fuel-to-the-conversion-fire-mohan-bhagwat
धर्मांतरण पर संघ की ओर से अब तक का सबसे बड़ा बयान आया है. आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने घर वापसी को सही ठहराया. उन्होंने पाकिस्तान को भारत की जमीन बताया और कहा कि पाकिस्तान परमानेंट नहीं है. केंद्र द्वारा प्रस्तावित धर्मांतरण विरोधी बिल की वकालत करते हुए भागवत ने विपक्षी दलों से कहा कि अगर वे धर्म परिवर्तन पसंद नहीं करते तो संसद में कानून बनाने में सहयोग करें. उन्होंने कहा कि अगर कोई हिंदू नहीं बनना चाहता तो इसी तरह हिंदुओं का भी धर्म परिवर्तन नहीं किया जाना चाहिए.

भागवत ने यहां एक हिंदू सम्मेलन में कहा, 'हम हिंदू समाज बनाने का प्रयास कर रहे हैं. जो लोग भटक गए हैं वे खुद से नहीं गए. उन्हें लालच दिया गया और उन्हें जबरन ले जाया गया. जब चोर पकड़ा जा रहा है और मेरी संपत्ति बरामद हो गई है, जब मैं अपनी संपत्ति वापस ले रहा हूं तो इसमें नया क्या है?' उन्होंने कहा, 'अगर आप इसे पसंद नहीं करते तो इसके खिलाफ कानून बनाइए. आप इसे नहीं लाना चाहते. अगर आप हिंदू नहीं बनना चाहते तो आपको भी हिंदुओं का धर्म नहीं बदलना चाहिए. हमारा रुख दृढ़ है.'

भागवत ने कहा, 'डरने की जरूरत नहीं है. हम अपने देश में हैं. हम घुसपैठिया नहीं हैं. यह हमारा देश है, हमारा हिंदू राष्ट्र. कोई हिंदू अपनी जमीन नहीं छोड़ेगा. पहले जो हम खो चुके हैं उसे हम वापस लाने का प्रयास करेंगे. हिंदुओं के उत्थान से किसी को भी डरने की जरूरत नहीं है. जो लोग हिंदुओं के उत्थान के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं वे स्वार्थी हैं और उनके निहित स्वार्थ हैं.

आरएसएस प्रमुख ने ने कहा कि हिंदू समाज किसी को दबाने में विश्वास नहीं करता है. भागवत ने कहा, 'बांग्लादेश या पाकिस्तान की तरफ से किए जा रहे अपराधों को हिंदू बर्दाश्त करते रहे हैं. हमारे भगवान कहते हैं कि सौ अपराधों के बाद हिंदुओं के खिलाफ अपराध को बर्दाश्त मत करो.' उन्होंने कहा कि बंटवारे से पहले पाकिस्तान भी भारत का हिस्सा था और वहां हिंदुओं की ज्यादा उपस्थिति नहीं है इसलिए पाकिस्तान शांति से नहीं रह सकता.

भागवत ने कहा, 'जब तक हिंदू यहां भारत में हैं, तब तक वह देश है. अगर वहां हिंदू नहीं होते तो यहां रहने वाला हर आदमी कष्ट में होता.' उन्होंने कहा कि अपनी संपति और गरिमा बचाने के लिए हिंदू काफी मजबूत हैं. उन्होंने कहा, 'पूरी दुनिया की बेहतरी के लिए मजबूत हिंदू समाज की जरूरत है.'

(भाषा से इनपुट)
---------------------------

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के परमपूजनीय सरसंघचालक श्री मोहन भागवत जी ने आज कोलकाता में विश्व हिन्दू परिषद् द्वारा आयोजित सम्मेलन में कहा कि दुनिया को बचाने के लिए सम्पूर्ण हिन्दू समाज फिर से अमृतसंजीवनी लेकर खड़ा हो इसकी आवश्यकता है |


उन्होंने कहा कि जब-जब हिन्दू समाज की उन्नति हुई तब सब प्रकार के संकट से ग्रस्त दुनिया को सुख का रास्ता मिला है | पाकिस्तान भी कभी भारत भूमि थी लेकिन आप देखिये वहां हिन्दू को खड़ा होने लायक नहीं रखा | अब पाक सुख में है या दुःख में ?

आज हिन्दू समाज जाग रहा है | सज्जनों को हर्षित करने वाली और दुर्जनों को भयकंपित करने वाली बात अब प्रत्यक्ष हो रही है | हम अपने देश में है, हमे किसी प्रकार का भय करने की आवश्यकता नहीं है | हम कही दूसरी जगह से यहाँ पर घुस कर नहीं आये, घुसपैठ करके नहीं आये | हम बाहर से यहाँ बसने के लिए भी नहीं आये | हम यहीं पर जन्मे, इसी मिटटी में पले, इसी देश के उत्थान में लगे पूर्वजो के वंशज है | यह हमारा देश है | यह हमारा हिन्दू राष्ट्र है | हिन्दू भागेगा नहीं | हिन्दू अपनी भूमि, अपनी जगह छोड़ेगा नहीं | जो कुछ पहले की हमारी निद्रा के कारण गया है, उसको वापस लाने का पुरुषार्थ अब हम करेंगे |

उन्होंने कहा कि सपूर्ण दुनिया की भलाई के लिए हिन्दू जाग रहा है | उसके जागने से किसी को डरना नहीं चाहिए | डरेंगे वहीं जो स्वार्थी होंगे, दुष्ट होंगे और इसलिए हिन्दू समाज के जागरण के विरुद्ध में उठने वाली आवाजें केवल उन्ही लोगो की होती है जिनके स्वार्थ को खतरा होता है या जिनकी दुष्टता पर प्रतिबन्ध आता है | आज दुनिया को बचाने के लिए सम्पूर्ण हिन्दू समाज फिर से अमृतसंजीवनी लेकर खड़ा हो इसकी आवश्यकता है, और इसलिए उस हिन्दू समाज को हम सब लोग मिलकर खड़ा कर रहे है |

जो भूले भटके बिछड़ गये उनको वापस लायेंगे | हमारे से ही गये है | खुद नहीं गये | लोभ, लालच, जबरदस्ती से लूट लिए गये | अब हमसे जो लूट लिए गये, तो चोर पकड़ा गया, उसके पास मेरा माल है | दुनिया जानती है वो मेरा माल है तो मै उसको वापस लेता हूँ इसमें क्या बुराई है? पसंद नहीं तो कानून बनाओ | संसद ने कानून बनाने के लिए कहा है | कानून बनाने के लिए तैयार नहीं तो क्या करेंगे ? हमको किसी को बदलना नहीं है | हिन्दू किसी को बदलना है इसमें विश्वास नहीं करता | हिन्दू कहता है परिवर्तन अन्दर से होता है | लेकिन हिन्दू को परिवर्तन नहीं करना है तो हिन्दू का भी परिवर्तन नहीं करना चहिये | इस पर हिन्दू आज अड़ा है | खड़ा होगा और अड़ेगा | दुनिया में दुष्ट भी है और उसमे दुश्मनी करने वाले लोग है | तो ऐसे दुश्मनों से अपने आप को और अपनी प्रजा को मै बचा सकता हूँ, इतना लड़ना मै जानता हूँ | हिन्दू भी इतना लड़ना जानता है, और हिन्दू इतना ही लड़ता है, इससे ज्यादा नहीं लड़ता |

हिन्दू के प्रति किसी प्रकार की शंका करने का कोई कारण नहीं | हम हिन्दू है, हम हिन्दू रहेंगे और हिन्दू के जो काल सुसंगत शास्वत तत्व है, जो सारी दुनिया पर लागू होते है, जिनके आधार पर चलने से दुनिया का कल्याण होगा, उन तत्वों को अपने आचरण से हम सारी दुनिया को देने वाला हिन्दुस्थान खड़ा करना चाह रहे है | और उसको हम खड़ा करके रहेंगे | आज के सम्मलेन का अंतिम संकल्प यहीं है | हिन्दुस्थान में परम वैभव संपन्न हिन्दू राष्ट्र और सुखी सुन्दर मानवता संपन्न दुनिया बनाने वाला विश्व गुरु हिन्दुस्थान, इसको खड़ा करने के लिए हमने संकल्प लिया है 'प्रारंभिक संकल्प' | हमे उसके आचरण पर पक्का रहना है | देखिएगा ज्यादा समय नहीं लगेगा |

उन्होंने कहा यहाँ बैठे हुए जवानों की जवानी पार होने के पहले जो परिवर्तन आप जीवन में चाहते हो, उस परिवर्तन को होता हुआ आप अपनी आँखों से देखोगे | एक शर्त है, आज जो संकल्प आपने लिए उनपर आपको हर कीमत पर पक्का रहना पड़ेगा | और इसलिए इन संकल्पों का स्मरण नित्य मन में रखिये और अपना आचरण उस स्मरण के अनुसार कीजिये और निर्भय होकर, आश्वस्त होकर अंतिम विजय की निश्चिंती मन में लेकर हम सब लोग चलना प्रारंभ करे इतना आह्वान करता हूँ |

पंडित मदनमोहन मालवीय - अनिता शर्मा


                                    पंडित मदनमोहन मालवीय  - अनिता शर्मा 

http://www.achhikhabar.com_madan-mohan-malviya
अनेक महापुरुषों एवं विभूतियों ने भारतवर्ष को अपने श्रेष्ठ कार्यों एवं सद्व्यवहार से गौरवान्वित किया है।
युगपुरुष मदन मोहन मालवीय उन्ही में से एक महापुरूष, अपनी विद्वता, शालीनता, और विनम्रता की असाधारण छवी के कारण जन-जन के नायक थे। अंग्रेज जज तक उनकी तीव्र बुद्धि पर आश्चर्य प्रकट करते थे। अपने जीवन-काल में पत्रकारिता, वकालत, समाज-सुधार, मातृ-भाषा तथा भारतमाता की सेवा में अपना जीवन अर्पण करने वाले महामना, मदन मोहन मालवीय जी इस युग के आदर्श पुरुष थे। उनकी परिकल्पना ऐसे विद्यार्थियों को शिक्षित करके देश सेवा के लिए तैयार करने की थी, जो देश का मस्तक गौरव से ऊचा कर सकें।

ऐसी महान विभूती पंडित महामना मदनमोहन मालवीय का जन्म भारत के उत्तरप्रदेश के इलाहाबाद शहर में २५ दिसम्बर सन १८६१ को एक साधारण परिवार में हुआ था। इनके पिता का नाम ब्रजनाथ और माता का नाम भूनादेवी था। चूँकि ये लोग मालवा के मूल निवासी थे, अतः मालवीय कहलाए। राष्ट्रीय नेताओं में अग्रणी मालवीय जी को शिक्षक वर्ग भी श्रद्धा और आदर से आज भी याद करते हैं।
मालवीय जी ने सन् 1893 में कानून की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। ‘‘वकालत के क्षेत्र में मालवीयजी की सबसे बड़ी सफलता चौरीचौरा कांड के अभियुक्तों को फाँसी से बचा लेने की थी। । चौरी-चौरा कांड के 170 भारतीयों को फाँसी की सजा सुनाई गई थी, किंतु मालवीय जी के बुद्धि-कौशल ने अपनी योग्यता और तर्क के बल पर 151 लोगों को फाँसी से छुड़ा लिया था। देश में ही नहीं, अपितु सम्पूर्ण विश्व में इस अद्भुत केस की ख्याती फैल गई।
राष्ट्र की सेवा के साथ ही साथ नवयुवकों के चरित्र-निर्माण के लिए और भारतीय संस्कृति की जीवंतता को बनाए रखने के लिए मालवीयजी ने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की स्थापना की।’’मालवीय जी का विश्वास था कि राष्ट्र की उन्नति तभी संभव है, जब वहाँ के निवासी सुशिक्षित हों। बिना शिक्षा के मनुष्य पशुवत् माना जाता है। मालवीय जी नगर-नगर की गलियों तथा गाँवों में शिक्षा का प्रचार-प्रसार में जुटे थे। वे जानते थे की व्यक्ति अपने अधिकारों को तभी भली भाँति समझ सकता है, जब वह शिक्षित हो। संसार के जो राष्ट्र आज उन्नति के शिखर पर हैं, वे शिक्षा के कारण ही हैं।

ऐसा कहा जाता है कि, पं. मदनमोहन मालवीय जी ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना का संकल्प जब कुंभ मेले में त्रिवेणी संगम पर भारत भर से आयी जनता के बीच दोहराया तभी वहीं एक वृद्धा ने मालवीय जी को इस कार्य के लिए सर्वप्रथम एक पैसा चंदे के रूप में दिया था।
विश्वविद्यालय के निर्माण के समय पं. मदन मोहन मालवीय जी के जीवन में एक खास घटना हुई, जब दान के लिये मालवीय जी हैदराबाद के निजाम के पास गये तो, निजाम ने मदद करने से साफ इंकार कर दिया। मगर मालवीय जी इतनी जल्दी हार मानने वाले इंसान तो थे नही। वो उचित क्षणं का इंतजार कर रहे थे।
इत्तफाक से उसी समय एक सेठ का निधन हो गया। शव-यात्रा में घर वाले पैसों की वर्षा करते हुए चल रहे थे। तभी मालवीय जी को एक उपाय सुझा और वो भी शव-यात्रा में शामिल हो गये तथा पैसा बटोरने लगे। महामना को ऐसा करते देख सभी को आश्चर्य हुआ, तभी एक व्यक्ति ने पूछ ही लिया कि “आप ये क्या कर रहे हैं!” ऐसा सुनते ही मालवीय जी ने कहा “भाई क्या करु ? तुम्हारे निजाम ने कुछ भी देने से इनकार कर दिया और जब खाली हाँथ बनारस लौटूँगा तो लोगों के पूछने पर कि हैदराबाद से क्या लाये तो क्या कहूँगा कि खाली हाँथ लौट आया? भाई, निजाम का दान न सही, शव-विमान का ही सही।“
ये बात जब निजाम को पता चली वो बहुत शर्मिदा हुआ और महामना से माफी माँगते हुए विश्वविद्यालय के लिये काफी अनुदान दिया। ये कहना अतिश्योक्ति न होगी कि मालवीय जी के मृदव्यवहार एवं दृणइच्छा शक्ती का ही परिणाम है, काशी हिंदू विश्वविद्यालय। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय भारतीय स्वाधीनता संग्राम में भी अपनी भूमिका निभा चुका है। विश्व में अपनी श्रेष्ठ पहचान लिये काशी हिन्दु विश्वविद्यालय भारत का गौरव है। श्री सुंदरलाल, पं. मदनमोहन मालवीय, डॉ. एस. राधाकृष्णन् (भूतपूर्व राष्ट्रपति), डॉ. अमरनाथ झा, आचार्य नरेंद्रदेव, डॉ. रामस्वामी अय्यर, डॉ. त्रिगुण सेन (भूतपूर्व केंद्रीय शिक्षामंत्री) जैसे विद्वान यहाँ के कुलपति रह चुके हैं।

मालवीय जी संस्कृत, हिंदी तथा अंग्रेजी तीनों ही भाषाओं के ज्ञाता थे। महामना जी का जीवन विद्यार्थियों के लिए एक महान प्रेरणा स्रोत है। जनसाधारण में वे अपने सरल स्वभाव के कारण प्रिय थे, कोई भी उनके साथ बात कर सकता था। मानों वे उनके पिता, बन्धु अथवा मित्र हों।

मित्रों, महामना जी के जीवन की एक घटना आपको बताना चाहेंगे-
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की स्थापना के कुछ ही समय की बात है, यदा-कदा अध्यापक उद्दंड छात्रों को उनकी गलतियों के लिए आर्थिक दंड दे दिया करते थे, मगर छात्र उस दंड को माफ कराने मालवीय जी के पास पहुंच जाते और महामना उसे माफ भी कर देते थे। यह बात शिक्षकों को अच्छी नहीं लगी और वह मालवीय जी के पास जाकर बोले, ‘महामना, आप उद्दंड छात्रों का आर्थिक दंड माफ कर उनका मनोबल बढ़ा रहे हैं। इससे उनमें अनुशासनहीनता बढ़ती है। इससे बुराई को बढ़ावा मिलता है। आप अनुशासन बनाए रखने के लिए उनके दंड माफ न करें।’

मालवीय जी ने शिक्षकों की बातें ध्यान से सुनीं फिर बोले, ‘मित्रो, जब मैं प्रथम वर्ष का छात्र था तो एक दिन गंदे कपड़े पहनने के कारण मुझ पर छह पैसे का अर्थ दंड लगाया गया था। आप सोचिए, उन दिनों मुझ जैसे छात्रों के पास दो पैसे साबुन के लिए नहीं होते थे तो दंड देने के लिए छह पैसे कहां से लाता। इस दंड की पूर्ति किस प्रकार की, यह याद करते हुए मेरे हाथ स्वत: छात्रों के प्रार्थना पत्र पर क्षमा लिख देते हैं।’ शिक्षक निरुत्तर हो गए।

गाँधी जी मालवीय जी को नवरत्न कहते थे और अपने को उनका पुजारी। महामना जी, को छात्रों के साथ तो लगाव था ही। इसके अलावा विश्वविद्यालय से भी बहुत लगाव था। एक बार की बात है कि, महामना जी, छात्रावास का निरीक्षण कर रहे थे तभी उन्होने देखा कि एक छात्र ने दिवार के कोने में कुछ लिख रखा था।
मालवीय जी ने उसे समझाया-“ मेरे दिल में तुम्हारे प्रति जितनी ममता और लगाव है, उतना ही लगाव विश्वविद्यालय की प्रत्येक ईंट से है। मैं आशा करता हुँ कि भविष्य में तुम ऐसी गलती फिर न करोगे।“
तद्पश्चात महामना जी ने जेब से रूमाल निकालकर दिवार को साफ कर दिया। विश्वविद्यालय के प्रति मालवीय जी के दृष्टीकोण को जानकर छात्र लज्जा से झुक गया।

मित्रों, कितनी शालीनता से महामना जी ने उस छात्र को बिना सजा दिये उसके मन में सभी के प्रति आदर का भाव जगा दिया। यकीनन दोस्तों, यदि आज हम महामना मालवीय जी के आचरण को जीवन में आपना लें तो स्वयं के साथ समाज को भी सभ्य और सुन्दर बना सकते हैं। महामना पंडित मदनमोहन मालवीय जी का विद्यार्थियों को दिये उपदेश के साथ कलम को विराम देते हैं।

सत्येन ब्रह्मचर्येण व्यायामेनाथ विद्यया।
देशभक्त्याऽत्यागेन सम्मानर्ह: सदाभव।।

अथार्त सत्य, ब्रह्मचर्य, व्यायाम, विद्या, देशभक्ति, आत्मत्याग द्वारा अपने समाज में सम्मान के योग्य बनो।

जयहिन्द

रविवार, 14 दिसंबर 2014

'ड्रग्स फ्री इंडिया' - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी



पीएम ने की 'ड्रग्स फ्री इंडिया' अभियान चलाने की अपील

नवभारतटाइम्स.कॉम | Dec 14, 2014
नई दिल्ली

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को आकाशवाणी पर 'मन की बात' में ड्रग्स का मुद्दा उठाया। उन्होंने 'ड्रग्स फ्री इंडिया' का आह्वान करते हुए कहा कि नशे की लत से परिवार के साथ-साथ समाज भी बर्बाद हो रहा है। पीएम कहा कि नशे की रोकथाम के लिए एक हेल्पलाइन भी बनाई जाएगी। उन्होंने ड्रग्स के तीन नुकसान बताए -  D-डिस्ट्रक्शन, डिवस्टेशन और डार्कनेस लेकर आता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि अक्सर नशा करने वाले बच्चों को खराब इंसान मान लिया जाता है, लेकिन असल में बच्चों में कोई कमी नहीं होती। कुछ विशेष कारणों के चलते वे नशे की गिरफ्त में चले जाते हैं। प्रधानमंत्री ने अभिभावकों को सलाह दी कि बच्चा अगर नशा कर रहा है तो उसे फटकार लगाने के बजाय प्यार से समझाएं।

आतंकियों के पास जाता है ड्रग्स का पैसा
पीएम ने कहा, 'नशे की हालत में युवाओं को कुछ देर के लिए जरूर सुकून का अहसास होता होगा। लेकिन क्या आपने यह सोचा है कि ड्रग्स का यह पैसा कहां जाता है। यह पैसा आतंकवादियों के हथियार खरीदने में जाता है। उनकी गोलियों से हमारे जवान शहीद होते हैं। यानी आपकी ड्रग्स की आदत के चलते हमारे जवान शहीद हो जाते हैं। आप भी देश से प्यार करते हो, फिर अपने ही जवानों के नुकसान में भागीदार क्यों बनते हो?'

बच्चों से दोस्ती करें माता-पिता
पीएम मोदी ने कहा 'जिसके जीवन में कोई लक्ष्य नहीं है, वहां ड्रग्स का प्रवेश होता है। लोग अपने बच्चों को सपना दिखाएं ताकि ड्रग्स उनके जीवन में जगह न बना पाए। मैं मां-बाप से निवेदन करता हूं कि वह अपने बच्चों से भावनात्मक मामलों पर भी चर्चा करें। केवल उनकी परीक्षा, उनके मार्क्स आदि की ही चर्चा न करें। यदि बच्चे मां-बाप के साथ घुलेंगे तो दिल की बात सामने आएगी। बच्चे अचानक नहीं बिगड़ते इसलिए लगातार उनके साथ रहें।'

अभिभावकों को पीएम की सलाह
पीएम ने कहा कि हमारे यहां कहा जाता है, '5 वर्ष लौ लीजिये, दस लौं ताड़न देई, सुत ही सोलह वर्ष में, मित्र सरिज गनि देई।' यानी बच्चे की 5 वर्ष की आयु तक माता-पिता प्रेम और दुलार का व्यवहार रखें। इसके बाद जब पुत्र 10 वर्ष का होने को हो तो उसके लिये अनुशासन होना चाहिए। जब बच्चा 16 साल का जब हो जाए तो उसके साथ मित्र जैसा व्यवहार होना चाहिए।

सिलेब्स और खिलाड़ी करें पहल
मोदी ने कहा कि आने वाले दिनों में सिलेब्स और खिलाड़ियों से आग्रह करूंगा कि कि वे भी ड्रग्स फ्री इंडिया के अभियान को आगे बढ़ाएं। मोदी ने कहा, 'मैं सोशल मीडिया पर भी लोगों से आग्रह करता हूं कि वे #DrugsFreeIndia के साथ ट्वीट करें।'


जम्मू-कश्मीर और योग पर भी की बात
मोदी ने रणजी मैच में जम्मू कश्मीर के मुंबई को हराने का जिक्र करते हुए कहा, 'पिछले दिनों बाढ़ से जूझने वाले जम्मू-कश्मीर ने कठिनाईयों के बीच में, बुलंदी के हौसलों के साथ जो विजय हासिल की है वह शानदार है। जम्मू कश्मीर के युवकों ने देश को दिखाया है कि कैसा विपरीत परिस्थितियों में भी कामयाब हुआ जा सकता है।' मोदी ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर यूएन की सहमति का जिक्र भी अपने संबोधन में किया।

रविवार, 7 दिसंबर 2014

लोंगेवाला पोस्ट पर 2000 पाकिस्तानी सैनिकों पर भारी पड़े थे 120 भारतीय जवान




1971: लोंगेवाला पोस्ट पर 2000 पाकिस्तानी सैनिकों पर भारी पड़े थे 120 भारतीय जवान
dainikbhaskar.com | Dec 07, 2014

नई दिल्ली: 1971 में भारत और पाकिस्तान के बीच छिड़ी जंग में राजस्थान के लोंगेवाला पोस्ट पर हुआ संघर्ष एक टर्निंग प्वाइंट माना जाता है। भारत ने पाकिस्तान को यहां ऐसी धूल चटाई, जिसका दूरगामी असर उसके मनोबल पर पड़ा था। राजस्थान के थार के रेगिस्तान में भारत और पाकिस्तानी सेनाओं के बीच यह संघर्ष 4-5 दिसंबर को हुआ। लोंगेवाला पोस्ट आज 'इंडो पाक पिलर 638' के नाम से जाना जाता है। पाकिस्तान ने यहां सीमा से घुसने की कोशिश तो की, लेकिन कामयाब नहीं हो सका। इस जंग को 1997 की ब्लॉकबस्टर फिल्म 'बॉर्डर' में भी दिखाया गया है। इस फिल्म में सनी देओल ने जंग के हीरो रहे मेजर कुलदीप सिंह चांदपुरी का किरदार निभाया था। कुलदीप सिंह चांदपुरी को उनकी बहादुरी के लिए महावीर चक्र से सम्मानित किया गया। इस जंग में भारतीय पक्ष से 2 जवान शहीद हुए, जबकि पाकिस्तान को अपने 200 सैनिक गंवाने पड़े। इसके अलावा, उसके 34 टैंक और 500 से ज्यादा हथियारबंद वाहन बर्बाद हो गए।

2000 सैनिकों के साथ पाक ने की थी चढ़ाई
2 हजार से ज्यादा पाकिस्तानी सैनिक 'लोंगेवाला में नाश्ता, रामगढ़ में लंच और जोधपुर में डिनर' का सपना लिए आधी रात को भारतीय सीमाओं की ओर बढ़े थे। हालांकि, सुबह भारतीय एयरफोर्स की जवाबी कार्रवाई के बाद पाकिस्तान अपने कदम पीछे खींचने को मजबूर हो गया था। पंजाब रेजिमेंट के 120 जवानों के अलावा बीएसएफ के कुछ सुरक्षाकर्मियों ने 2 हजार से ज्यादा पाकिस्तानियों को खदेड़ दिया।

चमत्कार से कम नहीं थी जीत
इस पोस्ट पर भारत को मिली जीत किसी चमत्कार से कम नहीं थी। मेजर कुलदीप सिंह चांदपुरी यहां पंजाब रेजिमेंट की 23वीं बटालियन के साथ जमे हुए थे। पाकिस्तान की ओर से हमला हुआ तो उन्होंने हेडक्वॉर्टर से बैकअप मांगा, लेकिन सुबह से पहले मदद आने की कोई उम्मीद नहीं थी। ऐसे में एक बटालियन ने पूरी की पूरी पाकिस्तानी सेना को रात भर रोके रखा। 

दिखाया अद्भुत साहस
मेजर चांदपुरी के सामने दो विकल्प थे। या तो वह पोजिशन पर बने रहते या कंपनी के साथ पीछे हट जाते। उन्होंने रूकने का फैसला किया। वह एक बंकर से दूसरे बंकर तक जाकर अपने सैनिकों का हौसला बढ़ाते रहे। मेजर चांदपुरी ने हवाई सपोर्ट मांगा था, लेकिन उस वक्त हमारे फाइटर जेट रात में उड़ने की क्षमता वाले नहीं थे। सुबह एयरफोर्स के विमानों ने वहां पहुंचकर पाकिस्तानी पक्ष में भारी तबाही मचा दी।

हल्के हथियारों से लिया टैंक से मोर्चा
पाकिस्तानी सैनिकों के पास 50 से ज्यादा टैंक थे। वहीं भारतीय पक्ष के पास हल्की क्षमता वाले सीमित हथियार थे। इसके बावजूद, उन्होंने पाकिस्तानी सेना को 6 घंटे तक सीमा पर रोके रखा, जब तक कि मदद के लिए भारतीय एयरफोर्स के विमान नहीं पहुंचे। इसके बाद, पाकिस्तानी सैनिकों को जान बचाकर भागने के लिए मजबूर होना पड़ा।

शनिवार, 6 दिसंबर 2014

अब रामलला को आजाद देखना चाहता हूं - हाशिम अंसारी



बाबरी के मुकदमे से हटे मुद्दई हाशिम अंसारी


नवभारत टाइम्स| Dec 3, 2014,

फैजाबाद

बाबरी मस्जिद मुकदमे के पैरोकार और मुद्दई हाशिम अंसारी अब केस की पैरवी नहीं करेंगे। उन्होंने मंगलवार को यह कहते हुए सबको चौंका दिया कि वह रामलला को आजाद देखना चाहते हैं। हाशिम ने यह भी साफ कर दिया कि वह छह दिसंबर को मुस्लिम संगठनों द्वारा आयोजित यौमे गम (शोक दिवस) में भी शामिल नहीं होंगे। वह छह दिसंबर को दरवाजा बंद कर घर में रहेंगे।

हाशिम बाबरी मस्जिद पर हो रही सियासत से दुखी हैं। उन्होंने कहा कि रामलला तिरपाल में रह रहे हैं और उनके नाम की राजनीति करने वाले महलों में। लोग लड्डू खाएं और रामलला इलायची दाना यह नहीं हो सकता...अब रामलला को आजाद देखना चाहता हूं। हालांकि, बाबरी मस्जिद ऐक्शन कमिटी के संयोजक और यूपी के अपर महाधिवक्ता जफरयाब जिलानी को भरोसा है कि वह अंसारी को मना लेंगे।

हाशिम ने कहा, 'बाबरी मस्जिद ऐक्शन कमिटी बनी थी मुकदमे की पैरवी के लिए। आजम खां तब साथ थे, अब वे सियासी फायदा उठाने के लिए मुलायम के साथ चल रहे हैं। मुकदमा हम लड़ें और फायदा आजम उठाएं! क्या जरूरत थी आजम को यह कहने की, जब मंदिर बन गया है तो मुकदमे की क्या जरूरत है? इसलिए मैं अब मुकदमे की पैरवी नही करूंगा। अब पैरवी आजम खां करें।'

उन्होंने कहा कि जब मैंने सुलह की पैरवी की थी तब हिन्दू महासभा सुप्रीम कोर्ट चली गई। महंत ज्ञानदास ने पूरी कोशिश की थी कि हम हिंदुओं और मुस्लिमों को इकट्ठा करके मामले को सुलझाएं, लेकिन अब मुकदमे का फैसला कयामत तक नहीं हो सकता है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को लेकर सभी नेता अपनी रोटियां सेक रहे हैं....बहुत हो गया अब।

रामजन्म भूमि के मुख्य पक्षकार पुजारी रामदास ने कहा कि अंतिम बेला में अंसारी ने अच्छा निर्णय लिया है। उन्होंने कहा, 'अंसारी से मुस्लिम पक्ष को सीख लेनी चाहिए। अंसारी का बयान तब आया है जब बाबरी ऐक्शन कमिटी छह दिसंबर को काला दिवस मनाने जा रही है। रामलला हिंदुओं की आस्था के प्रतीक हैं, मंदिर का निर्माण किया जाना चाहिए।'

जफरयाब जिलानी को भरोसा है कि वह हाशिम को मना लेंगे। उन्होंने कहा, 'अंसारी पहले भी इस तरह के बयान देते रहे हैं। 2010 में जब बाबरी मस्जिद पर फैसला आया था, तब भी उन्होंने काफी बात की थी। हम उन्हें फिर मना लेंगे।' इसके साथ ही जिलानी कहते हैं अगर अंसारी मुकदमे की पैरोकारी नहीं करेंगे, तब भी केस पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा, 'मुकदमे में छह वादी और भी मौजूद हैं। इनमें सुन्नी वफ्फ बोर्ड भी वादी है। यह रिप्रेजेन्टिव मुकदमा है, इसमें पार्टी के हटने से मुकदमे पर कोई असर नहीं पड़ता है।'
--------------------

मोदी मुस्लिमों की मदद करने वाले सबसे अच्छे इंसान: हाशिम अंसारी

नवभारत टाइम्स| Dec 3, 2014

फैजाबाद, मनोज पांडे
बाबरी मस्जिद मुकदमे के मुस्लिम पैरोकार और मुद्दई हाशिम अंसारी ने अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की है। उन्होंने मोदी को सियासी फायदा न उठाने वाला और कौम की मदद करने वाला अच्छा इंसान बताया है। इससे पहले हाशिम ने बाबरी मस्जिद मुकदमे की पैरवी नही करने और रामलला को आजाद देखने की ख्वाहिश जाहिर करते हुए खलबली मचा दी थी।

हाशिम ने कहा कि मोदी इसलिए अच्छे हैं, क्योंकि उन्होंने बनारस में अंसारियों के लिए बहुत किया है और बहुत कुछ कर रहें हैं। उन्होंने कहा कि मोदी जिसकी मदद कर रहे हैं, वह भी अंसारी हैं और मैं भी अंसारी हूं। इसीलिए अंसारी मोदी का साथ दे रहे हैं। उनकी वजह से मैं भी मोदी का साथ दूंगा। मोदी हमारी कौम के लिए फिक्रमंद हैं और उनका फायदा चाहते हैं।

92 वर्षीय हाशिम अंसारी पिछले 65 साल से बाबरी मस्जिद का मुकदमा लड़ रहे हैं। उनकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इस मुकदमे में वह मुस्लिम पक्ष की तरफ से सबसे दमदार पैरोकार माने जाते हैं।

हाशिम ने कहा कि राजनीति करने वाले हुकूमत का पैसा लेकर अपना सियासी फायदा उठाते हैं, मगर पीएम मोदी अपने एमपी, एमएलए से एक-एक पैसे का हिसाब मांगते हैं। वह कहते हैं कि जो रुपया ले गए हो, पहले उसका हिसाब दो। इसके बाद दूसरा रुपया मिलेगा।

हाशिम ने कहा कि एमपी, एमएलए हुकूमत से पैसा ले जाते हैं, लेकिन देश पर खर्च नहीं करते हैं। मोदी उनसे हिसाब तो मांग रहे हैं। इसलिए मोदी सबसे खूबसूरत आदमी हैं और मैं उनका समर्थन करता हूं।

बता दें कि 1949 में जब विवादित स्थल से मूर्तियां बरामद हुई थीं, उस समय जिन लोगों को अरेस्ट किया गया था, उनमें हाशिम भी थे। 1961 में जब वक्फ बोर्ड ने मुकदमा दायर किया था, उसमें भी हाशिम मुद्दई बनाए गए थे।
--------------------

रामलला का दर्शन करें आजम खान: हाशिम अंसारी

आईएएनएस| Dec 3, 2014,

लखनऊ/अयोध्या
उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले के मुख्य मुद्दई हाशिम अंसारी ने बुधवार को इस मुद्दे के राजनीतिकरण को लेकर अपनी पीड़ा जाहिर की और कोर्ट में मामले की पैरवी न करने की घोषणा की। लेकिन उनके इस बयान पर भी राजनीति शुरू हो गई है। अंसारी ने बुधवार को कहा कि वह अब बाबरी मस्जिद मुकदमे की पैरवी नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा अब राजनीति का अखाड़ा बन गया है और सभी इस मुद्दे का इस्तेमाल अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने में कर रहे हैं।

हाशिम ने कहा, 'मुकदमा हम लड़ें और राजनीतिक फायदा आजम खान उठाएं। इसलिए मैं अब बाबरी मस्जिद मुकदमे की पैरवी नहीं करूंगा। इसकी पैरवी आजम खान करें।' हाशिम अंसारी ने कहा कि आजम खान चित्रकूट में छह मंदिरों का दर्शन कर सकते हैं, तो अयोध्या दर्शन करने क्यों नहीं आते? भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने हाशिम के बयान का स्वागत किया। विश्व हिन्दू परिषद (वीएचपी) ने हाशिम के बयान का अपने तरीके से अर्थ निकाला और कहा कि उन्होंने सच स्वीकारने में बहुत देर लगा दी।

पिछले 64 वर्षों से इस मुकदमे की पैरवी कर रहे हाशिम ने दुख और आक्रोश के साथ मीडियाकर्मियों से कहा, 'बाबरी मस्जिद हो या राम जन्मभूमि, यह राजनीति का अखाड़ा है। मैं हिंदुओं या मुसलमानों को बेवकूफ बनाना नहीं चाहता। अब हम किसी कीमत पर बाबरी मस्जिद मुकदमे की पैरवी नहीं करेंगे।'
--------------

विवादित ढांचे को ढहाए जाने की तिथि 6 दिसंबर, जो कि करीब आ पहुंची है, का जिक्र करते हुए हाशिम ने कहा, 'छह दिसंबर को मुझे कोई कार्यक्रम नहीं करना है, काला दिवस जैसे किसी कार्यक्रम में शामिल नहीं होना है। बल्कि अपना दरवाजा बंद करके घर के अंदर रहना है।' वयोवृद्ध अंसारी ने कहा कि बाबरी मस्जिद का मुकदमा 1950 से चल रहा है। सारे नेता चाहे वह हिंदू हों या मुसलमान, मंदिर-मस्जिद के नाम पर अपनी रोटियां सेंक रहे हैं। 

इस मुद्दे के राजनीतिकरण से नाराज हाशिम ने सूबे के कैबिनेट मंत्री आजम खान का नाम लेकर कहा कि अब वही इसकी पैरवी करें। हाशिम ने कहा कि बाबरी मस्जिद की पैरवी के लिए ऐक्शन कमिटी बनी थी, लेकिन आजम खान उसके संयोजक बना दिए गए। अब सियासी फायदा उठाने के लिए वह मुलायम के साथ चले गए। ऐक्शन कमिटी के जितने नेता थे, उनको पीछे छोड़ दिया गया।

लेकिन वीएचपी और बीजेपी कब सच स्वीकारेगी, इस पर वे कुछ नहीं बोल पाए। बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक ने हाशिम के बयान को सकारात्मक बताया। बकौल पाठक, 'हाशिम के बयान के बाद अब इस मामले से जुड़े अन्य पक्षकारों को भी सोचना चाहिए। हाशिम अंसारी ने अपने बयान में जिस व्यक्ति पर सवाल खड़े किए हैं, उनको भी इसका जवाब देना चाहिए। जहां तक पार्टी का सवाल है तो यह हमारे लिए श्रद्धा और आस्था का विषय है। उनका बयान स्वागत योग्य है।'

लेकिन पाठक इस दौरान यह भूल गए कि हासिम ने मंदिर की राजनीति करने वालों की भी खिंचाई की है। हाशिम के बयान के बाद वीएचपी के प्रदेश प्रवक्ता शरद शर्मा ने कहा कि हाशिम ने सचाई स्वीकार करने में बड़ी देर लगा दी। अब तक वह कट्टरपंथियों के हाथों में खेलते रहे हैं। लेकिन वीएचपी भी कभी सचाई स्वीकारेगी, इस पर वह कुछ नहीं बोल पाए। सूबे में सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी (एसपी) राम मंदिर निर्माण मुद्दे पर बीजेपी पर निशाना साधा।

एसपी नेता डॉ. सी. पी. राय ने आईएएनएस से कहा कि जो व्यक्ति पिछले 64 सालों से इस मुद्दे को लड़ता आ रहा है, वह इस तरह का बयान नहीं दे सकता। राय ने कहा, 'मुझे लगता है कि अभी हमें और इंतजार करना चाहिए। जब मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है तो इसका फैसला भी अदालत के माध्यम से ही होगा।'

बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) के प्रदेश अध्यक्ष रामअचल राजभर ने कहा कि यह मुद्दा फिलहाल अदालत में विचाराधीन है। इस मुद्दे पर किसी तरह की प्रक्रिया देना ठीक नहीं है। कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने भी कहा कि यह मामला कोर्ट में विचाराधीन है, लिहाजा अब इस मामले में किसी के पैरवी करने या न करने का कोई सवाल ही नहीं है। उल्लेखनीय है कि राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद का यह मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।


रविवार, 23 नवंबर 2014

World Hindu Congress : RSS sarasanghchalak Shree Mohan Bhagwat Jii



World Hindu Congress begins today, Mohan Bhagwat,Dalai Lama, Ashok Singhal in opening cermony
21 Nov 2014
New Delhi, November 21: RSS sarasanghchalak Mohan Bhagwat, Tibetan spiritual leader the Dalai Lama and VHP patron Ashok Singhal at World Hindu Congress, 2014 in New Delhi on Friday
Emphasising that Indic tradition was, is and will always relevant to the world, Rashtriya Swayamsevak Sangh sarasanghchalak Mohan Bhagwat on Friday called upon the Hindu society to arise in unison.
Addressing the inaugural ceremony of the three-day-long World Hindu Congress, 2014 in New Delhi, Bhagwat said, “The world has always needed Hindu thought or Indic tradition and will always continue to do so. It is the responsibility of Hindus to teach and guide the world.”
Explaining the word ‘Hindu’, the RSS sarasanghchalak said, “Hindu is someone who sees unity in all human diversity.”
Invoking Swami Vivekananda’s message — ‘Arise, awake and not stop till the goal is reached’ — Bhagwat said, “Hindus must get organised. Let’s arise in unison as Hindu society, a society having rich values, a society which depicts those values in its endeavors in all walks of life.”
Mohan Bhagwat said, “Let’s awake to the plight and achievement of the Hindus world over. Let’s extend our helping hand everywhere.”
The RSS chief said, “India had a tradition and task to teach the world. It’s time, the Hindus start works in all walks of life, be it in academia, media, economics or politics.”
In his speech, Bhagwat emphasised that leadership based on Hindu vales and tradition is essential for the world. “Let’s provide the world such leadership. Let’s demonstrate it not as a capable person, but collectively as that of the Hindus,” he said.
Addressing the World Hindu Congress, Tibetan spiritual leader the Dalai Lama said there is a need to remember the ‘sameness of humanity’ and develop the ‘knowledge of mind’.
VHP patron Ashok Singhal said, “It’s time to create a Hindu mahashakti (super power) in the world. It’s time for an indomitable Hinduism for the welfare of the entire world.”
Referring to Narendra Modi leading a landslide victory in the 2014 Lok Sabha election, Singhal said power had returned to a Hindu swabhimani in Delhi after 800 years.
“Eight hundred years after the power at Delhi went away form Prithviraj Chauhan, it did not come into the hands of a proud Hindu. It has happened after 800 years,” Singhal said.
The theme of World Hindu Congress, organised by World Hindu Foundation, is envisioned on the principle of ‘Sangachchhadhwam Samvadadhwam’ (Step Together, Express Together).
Around 1,500 delegates from over 40 different countries of the world are participating in the event.
A statement by the organisers of the conclave reads:
“The World Hindu Congress aims to take the movement for Hindu solidarity to the next level and this task needs to be undertaken with a single minded focus of rebuilding the spiritual and material heritage of Hindus.”
The three-day conference will see deliberation on several subjects relevant to Hindu society. There is a Hindu Educational Conference on the theme of Creating and Networking Educational Resources for Civilisational Re-emergence. Besides, there will be a Hindu Youth Conference on the theme Together Towards Tomorrow, a Hindu Media Conference on the theme Truth is Supreme and a Hindu Women Conference on the theme of ‘Increasing the Role of Women in Hindu Resurgence’.
The conference delegates include people of accomplishment and achievement, committed to working for Hindu rise and resurgence, and academicians, scientists, educationists, founder of universities, managing trustees, chancellors, vice-chancellors, prominent industrialists, businessmen from diverse industries and business, bankers, economists, business association leaders, parliamentarians, legislators, youth leaders, leading journalists, editors and leaders of Hindu organisations.

बुधवार, 29 अक्तूबर 2014

राष्ट्रीय ध्वज में परिवर्तन के लिए न्यूजीलैंड में जनमत संग्रह





राष्ट्रीय ध्वज में परिवर्तन के लिए न्यूजीलैंड में जनमत संग्रह

By Live News Desk | Publish Date:29 Oct 2014

वेलिंगटन : राष्‍ट्रीय ध्‍वज में परिवर्तन को लेकर न्यूजीलैंड में जनमत संग्रह कराया जाएगा. प्रधानमंत्री जॉन की ने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज में परिवर्तन किया जाए या नहीं, इस मुद्दे पर वर्ष 2016 में जनमत संग्रह कराया जाएगा.

* जॉन की वर्तमान ध्वज को बदलने के प्रबल समर्थक
प्रधानमंत्री जॉन की वर्तमान ध्वज को बदलने के प्रबल समर्थक हैं. इस ध्वज के एक कोने पर पूर्व औपनिवेशिक शक्ति ब्रिटेन का यूनियन जैक अंकित है. की ने एक बयान में कहा हमारा ध्वज हमारी राष्ट्रीय पहचान का सबसे महत्वपूर्ण प्रतीक है और मेरा मानना है कि न्यूजीलैंड वासियों के लिए यह सही समय है कि वह ध्वज का डिजाइन इस तरह बदलने पर विचार करें जिससे एक आधुनिक, स्वतंत्र राष्ट्र के तौर पर हमारी पहचान बेहतर तरीके से जाहिर हो.

पूर्व में की कह चुके हैं कि वह चाहेंगे कि नये ध्वज में काली पृष्ठभूमि में चांदी की तरह चमकीला एक पौधा हो. न्यूजीलैंड की कई टीमों ने ऐसे बैनर का उपयोग किया है. पिछले महीने हुये आम चुनाव में तीसरी बार जीत दर्ज करने के बाद की ने कुछ वर्गों के विरोध के बावजूद प्रेस के सामने ध्वज बदलने के योजना की घोषणा की थी.
---------

                             न्यू जीलैंड में झंडे में बदलाव के लिए होगा जनमत संग्रह
एएफपी| Oct 29, 2014

वेलिंगटन
न्यू जीलैंड के पीएम जॉन की ने बुधवार को कहा कि नैशनल फ्लैग में बदलाव किया जाए या नहीं, इस मुद्दे पर साल 2016 में जनमत संग्रह कराया जाएगा।

हालांकि जॉन की झंडे को बदलने के प्रबल समर्थक हैं। इस झंडे के एक कोने पर ब्रिटेन का यूनियन जैक बना हुआ है।

की ने एक बयान में कहा कि हमारा झंडा हमारी राष्ट्रीय पहचान का सबसे महत्वपूर्ण प्रतीक है। मेरा मानना है कि न्यूजीलैंड वासियों के लिए यह सही समय है कि वह झंडे का डिजाइन इस तरह बदलने पर विचार करें, जिससे एक आधुनिक, स्वतंत्र राष्ट्र के तौर पर हमारी पहचान बेहतर तरीके से जाहिर हो।

पूर्व में की कह चुके हैं कि वह चाहेंगे कि नए झंडे में काले बैकग्राउंड में चांदी की तरह चमकीला एक पौधा हो। न्यूजीलैंड की कई टीमों ने ऐसे बैनर का इस्तेमाल किया है।

मंगलवार, 28 अक्तूबर 2014

राजस्थान में नगरीय निकायों के चुनाव 22 नवंबर 2014 को



 राजस्थान में नगरीय निकायों के चुनाव 22 नवंबर 2014 को

जयपुर। जयपुर नगर निगम सहित प्रदेश के 46 नगरीय निकायों में चुनाव के लिए मतदान 22 नंवबर को होगा। मतगणना जिला मुख्यालयों पर 25 नवंबर को होगी। राज्य निर्वाचन आयोग दोपहर में निकाय चुनाव का विस्तृत कार्यक्रम जारी कर दिया। इस बार निकाय प्रमुख के अप्रत्यक्ष रीति से करवाएं जाएंगे। निकायों का प्रमुख सीधी जनता नहीं, पार्षद चुनेंगे। चुनाव की घोषणा के साथ ही चुनाव वाले निकायों में आचार संहिता लागू हो गई। वर्तमान बोर्ड का कार्यकाल 26 नवंबर, 2014 को पूरा हो रहा है।

निकाय चुनाव के लिए जहां भाजपा और कांग्रेस ने चुनावी तैयारियां कर ली हैं, वहीं निर्वाचन विभाग ने भी निकाय चुनाव की तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है। निर्वाचन विभाग के कार्यक्रम के अनुसार 22 नवंबर को मतदान और उसके बाद जिला स्तर पर मतगणना 25 नवंबर को होगी। मतगणना के बाद 26 नवंबर को निकाय अध्यक्ष के चुनाव होंगे।

नगरीय निकाय में जयपुर नगर निगम के साथ ही जोधपुर, कोटा, बीकानेर और पहली बार गठित उदयपुर, भरतपुर नगर निगम के चुनाव हो रहे हैं। इसी के साथ 9 नगर परिषद और 31 नगर पालिकाओं के लिए मतदान होगा। निकाय चुनाव में प्रदेश में मुख्य मुकाबला कांग्रेस और भाजपा के बीच माना जा रहा है। दोनों दलों ने निकायों के टिकट वितरण और चुनाव लड़ाने के लिए कवायद शुरू कर दी है।

रूक जाएगा तबादलों को दौर
निकाय चुनाव की आचार संहिता के साथ ही चुनाव वाले क्षेत्रों में तबादलों पर पाबंदी लग गई। अजमेर को छोड़ कर सभी नगर निगम क्षेत्रों सहित 46 निकायों में कर्मचारी और अधिकारियों के तबादलों पर रोक रहेगी।

ये हैं नगर निगम 
जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, कोटा, उदयपुर, भरतपुर।

ये हैं नगर परिषद-नगर पालिका 
ब्यावर, पुष्कर, अलवर, भिवाड़ी, बांसवाड़ा, छबड़ा, मांगरोल, बाड़मेर, बालोतरा, चित्तौड़गढ़, निम्बाहेड़ा, रावतभाटा, चूरू, राजगढ़, श्रीगंगानगर, सूरतगढ़, हनुमानगढ़, जैसलमेर, भीनमाल, जालौर, बिसाऊ, झुंझुनंू, पिलानी, फलौदी, कैथून, सांगोद, डीडवाना, मकराना, पाली, सुमेरपुर, अमेट, नाथद्वारा, नीमकाथाना, सीकर, माउंट आबू, पिंडवाड़ा, शिवगंज, सिरोही, टोंक, कानोड़।

रविवार, 26 अक्तूबर 2014

प्रधान मंत्री मोदी की चाय पार्टी में शिवसेना भी हुई शामिल,



                                               प्रधान मंत्री मोदी की चाय पार्टी में शिवसेना भी हुई शामिल,
                                                      मोदी ने गरीबों की मदद पर दिया जोर

aajtak.in [Edited By: स्वपनल सोनल] |
नई दिल्ली, 26 अक्टूबर 2014


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के घर रविवार को आयोजित एनडीए सांसदों की चाय पार्टी खत्म हो चुकी है. इस पार्टी में शिवसेना के सांसद भी मौजूद थे. पीएम ने पार्टी के दौरान अपने भाषण में स्वच्छ भारत अभियान की तारीफ की. मोदी ने कहा कि हमें गरीबों के हालात सुधारने की कोशिश करनी चाहिए. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने जनधन योजना पर रिपोर्ट पेश की. बैठक का संचालन वेंकैया नायडू ने किया, जबकि आडवाणी ने भी सरकार के कामकाज की तारीफ की.

अगले महीने होने वाले संसद के शीतकालीन सत्र से पहले प्रधानमंत्री की इस बैठक में सबसे खास नाराज चल रहे शिवसेना के सदस्यों का जुटना रहा. दिवाली के मौके पर बुलाई गई इस बैठक में शिवसेना के सदस्यों के आने से महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर बीजेपी और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली इस पार्टी के बीच सहयोग की उम्मीदें बढ़ती दिख रही हैं.

लगभग दो घंटे चली बैठक में प्रधानमंत्री ने अपनी महत्वाकांक्षी 'स्वच्छ भारत अभियान' योजना की महत्ता के बारे में सत्तारूढ़ सांसदों को अवगत कराया और उनसे इसमें बढ़चढ़कर सहयोग करने की अपील की. उन्होंने कहा कि सरकार की सभी योजनाओं को गरीबों को केंद्रित करके बनाया जाना चाहिए. पीएम ने विश्वास जताया कि इस तरह से सरकार गरीबी को कम करने में सक्षम हो सकती है.

वित्त मंत्री अरूण जेटली ने सरकार की एक अन्य महत्वपूर्ण जनधन योजना के बारे में सांसदों को जानकारी दी और ग्रामीण विकास मंत्री नितिन गडकरी ने हाल ही प्रधानमंत्री द्वारा घोषित आदर्श ग्राम योजना के बारे में सांसदों बताया.

--------------

चाय पार्टी: मंत्रियों ने दिए प्रेजेंटेशन, मोदी ने दिए सांसदों को निर्देश
नवभारतटाइम्स.कॉम| Oct 26, 2014,
नई दिल्ली

पीएम नरेंद्र मोदी ने रविवार शाम को एनडीए के सांसदों के साथ 'चाय पर चर्चा' की। इस चाय पार्टी में सरकार की महत्वकांक्षी योजनाओं पर जहां मंत्रियों ने चर्चा की, वहीं सरकार के काम से जनता को रू-ब-रू कराने की रणनीति भी बनाई गई। चाय की चुस्कियों के बीच मोदी सरकार के 7 मंत्रियों ने डीटेल प्रेजेंटेशन दिए। मोदी ने भी सांसदों से सीधा संवाद किया। उन्होंने एनडीए के सांसदों को निर्देश दिया कि वे सरकार की योजनाओं के बारे में जनता को बताएं। मोदी की इस चाय पार्टी में एनडीए के अन्य सहयोगियों के साथ शिव सेना के सांसद भी शामिल हुए, लेकिन महाराष्ट्र पर कोई चर्चा नहीं हुई।

क्या हुआ मोदी की इस चाय पार्टी में
एनडीए के सांसदों के लिए मोदी की यह टी पार्टी करीब दो घंटे तक चली। बैठक में मोदी सरकार के सात मंत्रियों ने एक-एक कर अपने मंत्रालय की महत्वकांक्षी योजनाओं के बारे में प्रेजेंटेशन दिए। सबसे पहले वित्त और रक्षा मंत्री अरुण जेटली ने जनधन योजना पर प्रेजेंटेशन दिया। उन्होंने कोल ऑर्डिनेंस पर बोला। इसके बाद नितिन गडकरी ने सांसद आदर्श ग्राम योजना के बारे में बताया। फिर स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने स्वास्थ्य मंत्रालय की महत्वकांक्षी योजनाओं की जानकारी दी। इसके बाद पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने गैस कीमतों पर जानकारी दी। प्रधान ने बताया कि नेचरल गैस की कीमतों में बढ़ोतरी का क्या असर पड़ सकता है। इसके बाद लेबर मिनिस्टर नरेंद्र सिंह तोमर ने प्रेजेंटेशन दिया। उन्होंने मिनिमम पेंशन स्कीम की जानकारी दी। और सबसे आखिर में संसदीय कार्य मंत्री एम वेंकैया नायडू ने अपनी बात रखी।नायडू ने एनडीए के सभी सांसदों से संसद के शीतकालीन सत्र में हमेशा उपस्थित रहने और चर्चाओं में बढ़चढ़ कर हिस्सा लेने की अपील की।

बीजेपी नेता राजीव प्रताप रूडी ने बताया कि टी पार्टी के दौरान प्रधानमंत्री ने सभी सांसदों से सीधा संवाद किया।उन्होंने सांसदों के सामने सफाई और स्वच्छता को लेकर अपना नजरिया रखा और बताया कि वह इस पर क्या कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह बैठक बेहद कामयाब रही। वहीं बीजेपी सांसद कीर्ति आजाद ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी के विचार हमेशा जनता के हित के लिए होते हैं। चाय पार्टी में भी उन्होंने यही विचार रखे कि हमें जनता के सेवक के तौर पर काम करना चाहिए। सूत्रों के मुताबिक बैठक में मोदी ने सभी सांसदों से कहा कि वह राजनीतिक फायदे-नुकसान से ऊपर उठकर काम करें।


आडवाणी बोले, 'यह दिवाली बड़ी शुभ है' इस अवसर पर वरिष्ठ बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कहा कि बीजेपी के लिए यह बहुत शुभ दिवाली है, क्योंकि पार्टी पहली बार अपने बूते बहुमत में आई है।
प्रधानमंत्री की ओर से आयोजित यह दिवाली मिलन खास था, क्योंकि यह महाराष्ट्र में सरकार के गठन के पहले आयोजित हो रहा है । वहां बीजेपी-शिव सेना के संभावित गठबंधन को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि एनडीए के कुछ सहयोगी इस कार्यक्रम में उपस्थित नहीं हुए, क्योंकि इनमें से कुछ दलों का एक भी निर्वाचित सांसद नहीं है।

रक्षा क्षेत्र में 80 हजार करोड़ की परियोजनाएं मंजूर


        यू पी ए ने सेना को बहुत कमजोर कर दिया था, उन्हे रक्षा संसाधन ही नहीं दिये। आधुनिक रक्षा उपकरणों की खरीद ही नहीं की !! जिससे रक्षा मामले में भारत आस पडौस से पिछडा हुआ था। मोदी सरकार के इस निर्णय से भारतीय सेनायें रक्षा के मामले में आत्म निर्भर हो सकेगीं।

रक्षा क्षेत्र में भी ‘मेक इन इंडिया’, 80 हजार  करोड़ की परियोजनाएं मंजूरaajtak.in [Edited By: महुआ बोस] | मुंबई, 25 अक्टूबर 2014


             केन्द्र सरकार ने शनिवार को 80 हजार करोड़ रुपये की रक्षा परियोजनाओं को मंजूरी दे दी. लेकिन यहां भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ आह्वान का ध्यान रखा गया है. सरकार ने तय किया है कि छह पनडुब्बियों का स्वदेशी स्तर पर निर्माण किया जाएगा, जबकि 8000 इस्राइली टैंक रोधी गाइडेड मिसाइल और 12 उन्नत डोरनियर निगरानी विमान खरीदे जाएंगे.

इन निर्णयों से पहले रक्षा मंत्री अरुण जेटली के नेतृत्व में रक्षा खरीद परिषद की दो घंटे से ज्यादा देर तक बैठक चली, जिसमें रक्षा सचिव, तीनों सेनाओं के प्रमुखों, डीआरडीओ प्रमुख एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया. अधिकतर निर्णय नौसेना के अनूकुल रहे जो अपग्रेडेशन एवं क्षमता विस्तार की भारी कमी महसूस कर रही है. बड़ा निर्णय बाहर से खरीदने के बजाय 50 हजार करोड़ रुपये की लागत से भारत में छह पनडुब्बियों का निर्माण करने का है.

एक अन्य महत्वपूर्ण फैसला भारतीय सेना के लिए अमेरिका से जेवलिन मिसाइल खरीदने के बजाय 3200 करोड़ रुपये में इस्राइल से 8356 टैंक रोधी मिसाइल खरीदना है. सेना मिसाइलों के लिए 321 लांचर भी खरीदेगी. हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड 1850 करोड़ रुपये की लागत से उन्नत सेंसरों वाले 12 डोरनियर निगरानी विमान खरीदेगा. डीएसी ने 662 करोड़ रुपये में मेदक के आयुध कारखाना बोर्ड से 36 इंफेट्री फाइटिंग व्हेकिल खरीदने का निर्णय किया है.

देश में छह पनडुब्बियां बनाने के निर्णय का ब्यौरा देते हुए आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि अब रक्षा मंत्रालय एक समिति का गठन करेगा. यह समिति अगले 6.8 सप्ताह में निजी एवं सार्वजनिक गोदियों का अध्ययन करेगी. इसके बाद अध्ययन के आधार पर मंत्रालय विशिष्ट बंदरगाह को प्रस्ताव का अनुरोध (आरएफपी) जारी करेगा. पनडुब्बी एयर इंडिपेंडेंट संचालन (एआईपी) क्षमता से लैस होगी, जिससे यह पारंपरिक पनडुब्बी की तुलना में अधिक समय तक पानी के भीतर रह सकेगी. इसके अलावा इसकी चलने की गति भी तेज हो जाएगी.

आपको बता दें कि नौसेना के पास इस समय परिचालनरत 13 पनडुब्बी हैं. 1999 में यह लक्ष्य तय किया गया था कि 2030 तक इनकी संख्या 24 होनी चाहिए. पूर्ववर्ती यूपीए सरकार ने छह स्कार्पियन पनडुब्बियों को मंजूरी दी थी और पहली पनडुब्बी की आपूर्ति 2016 तक होने की संभावना है. भारत में पनडुब्बी निर्माण करने का निर्णय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ आह्वान के अनुरूप है. इस पनडुब्बी में जमीनी हमला करने वाली क्रूज मिसाइल को लगाने की क्षमता होगी.

बैठक में भाग लेने वाले अधिकारियों को संबोधित करते हुए जेटली ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा सरकार के लिए सर्वोच्च चिंता का विषय है. उन्होंने कहा कि खरीद प्रक्रिया में सभी बाधाओं एवं अड़चनों पर शीघ्रता से ध्यान दिया जाना चाहिए ताकि खरीद की गति बाधित न हो. डीएसी ने नौसेना के विशेष अभियानों के लिए उपकरणों की खरीद को मंजूरी दी, लेकिन इनकी जानकारी को गोपनीय रखा गया है.

सूत्रों ने बताया कि यह बुनियादी तौर पर नौसेना की प्रतिष्ठित कमांडो शाखा मार्कोस के लिए है. सूत्रों ने बताया कि स्कार्पियन पनडुब्बी के लिए तारपीडो तथा हैवी कैलिबर गन खरीदने का निर्णय तकनीकी आधार पर टाल दिया गया. उन्होंने कहा कि उसके बारे में जल्द ही कोई फैसला किया जाएगा. डीएसी का गठन 2001 में कारगिल युद्ध के बाद रक्षा क्षेत्र में सुधार के तहत किया गया था.

शनिवार, 25 अक्तूबर 2014

हिन्दु जगे तो विश्व जगेगा,मानव का विश्वास जगेगा


हिन्दु जगे तो विश्व जगेगा, यू टियूब लिंक
https://www.youtube.com/watch?v=nLOEruUaWls



हिन्दु जगेगा देश जगेगा


हिन्दु जगे तो विश्व जगेगा मानव का विश्वास जगेगा
भेद भावना तमस ह्टेगा समरसता अमर्त बरसेगा
हिन्दु जगेगा विश्व जगेगा

हिन्दु सदा से विश्व बन्धु है जड चेतन अपना माना है
मानव पशु तरु गीरी सरीता में एक ब्रम्ह को पहचाना है
जो चाहे जिस पथ से आये साधक केन्द्र बिंदु पहुचेगा ॥१॥

इसी सत्य को विविध पक्ष से वेदों में हमने गाया था
निकट बिठा कर इसी तत्व को उपनिषदो में समझाया था
मन्दिर मथ गुरुद्वारे जाकर यही ज्ञान सत्संग मिलेगा ॥२॥

हिन्दु धर्म वह सिंधु अटल है जिसमें सब धारा मिलती है
धर्म अर्थ ओर काम मोक्ष की किरणे लहर लहर खिलती है
इसी पुर्ण में पुर्ण जगत का जीवन मधु संपुर्ण फलेगा

इस पावन हिन्दुत्व सुधा की रक्षा प्राणों से करनी है
जग को आर्यशील की शिक्षा निज जीवन से सिखलानी है
द्वेष त्वेष भय सभी हटाने पान्चजन्य फिर से गूंजेगा ॥३॥

'जब मैं कुर्सियां लगाता था' - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी



'जब मैं कुर्सियां लगाता था', पत्रकारों से बेबाक बोले पीएम मोदीSat, 25 Oct 2014 

नई दिल्ली। भाजपा कार्यालय में दिवाली मिलन कार्यक्रम के दौरान संपादकों और भाजपा कवर करने वाले पत्रकारों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि 'मैं भी पहले कभी लोगों के इंतजार में यहीं पर कुर्सियां लगाया करता था। कुछ साल पहले तक मीडिया से हमारा नाता रहता था। वो दिन कुछ और थे, खुलकर बातचीत होती थी। इसका हमें सीधा लाभ गुजरात में मिला।'

मोदी ने कहा, 'मैं कुछ रास्ता खोज रहा हूं कि मीडिया से हमारा रिश्ता कैसे गहरा हो। मोदी ने कहा कि मीडिया से कई जानकारी भी मिलती है और विजन भी मिलता है। मीडिया की हर घटना पर पैनी नजर होती है। पत्रकारों से पहले बहुत सारी बातें होती थीं, लेकिन अब मौका नहीं मिल पाता है।'

साथ ही स्वच्छता अभियान पर मीडियाकर्मियों के सहयोग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सफाई पर जो कालम लिखे जा रहे हैं, वे अभूतपूर्व हैं। इसके पहले ऐसे कॉलम कभी नहीं लिखे गए। जितना स्वास्थ्य जरूरी है, उतना ही जरूरी है स्वास्थ्य के प्रति जागरुकता। लोगों को एक साथ काम करने के लिए मीडिया ने बहुत बड़ी भूमिका निभाई है। मोदी ने कहा कि आपने तो कलम को ही झाड़ू बना लिया। इसके साथ ही उन्होंने सभी पत्रकारों को दिवाली की शुभकामनाएं दीं।

सभी को संबोधित करने के बाद प्रधानमंत्री ने व्यक्तिगत तौर पर पहले संपादकों से मुलाकात की और फिर भाजपा कवर करने वाले पत्रकारों से मुलाकात कर सेल्फी भी खिंचवाई।

इसके पूर्व भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने सभा में मौजूद तमाम लोगों को दिवाली की शुभकामनाएं दी और बताया कि यह दिवाली भाजपा के लिए बहुत शुभ है। उन्होंने कहा कि हमारे कुशल नेतृत्व के ऊपर देश ने भरोसा जताया है जिसकी वजह से हाल ही में हमें दो राज्यों में सफलता मिली है।

भारत बनायेगा , चीन सीमा पर 54 नई चौकियां



भारत ने चीन को दिखाया ठेंगा, सीमा पर बनेंगी 54 नई चौकियां

 24 Oct 2014

जागरण न्यूज नेटवर्क, ग्रेटर नोएडा। अरुणाचल प्रदेश से लगती सीमा पर सड़क निर्माण को लेकर चीन की आपत्तियों को दरकिनार करते हुए भारत ने इस सीमांत राज्य में 54 नई चौकियां बढ़ाने का एलान किया है। इसके अलावा सीमा पर अन्य निर्माण कार्यो के लिए 175 करोड़ रुपये के पैकेज की भी घोषणा की है। गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि भारत पड़ोसी मुल्कों से मधुर रिश्ते रखना चाहता है। इस दिशा में केंद्र सरकार ने मजबूती से कदम आगे बढ़ाए हैं। अगर चीन और पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आए तो उन्हें मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।

भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आइटीबीपी) के 53वें स्थापना दिवस पर शुक्रवार को आयोजित समारोह में राजनाथ सिंह ने कहा कि विश्व शांति के लिए भारत बातचीत के जरिये चीन के साथ सीमा विवाद को सुलझाने का प्रयास करता रहा है। एक बार फिर पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि पड़ोसी देश लगातार संघर्ष विराम का उल्लंघन कर रहा है। दिवाली के दिन भी सीमा पर घुसपैठ की कोशिश व गोलीबारी की गई, लेकिन सीमा सुरक्षा बल के जवानों ने मुंहतोड़ जवाब देते हुए उन्हें पीछे हटने पर मजबूर कर दिया।

चीनी सैनिक भी भारतीय सीमा में घुसने का प्रयास करते हैं। कोई पीठ पर गोली चलाएगा तो हम भी मुंहतोड़ जवाब देना जानते हैं। हम इस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र संघ में उठाएंगे ताकि दोनों देशों पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाया जा सके। कुछ दिन पूर्व चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के भारत दौरे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सीमा विवाद मामले को प्रमुखता से उठाया था। चीन की तरफ से सीमा के नजदीक एयरफील्ड बनाने और रडार लगाने संबंधी रिपोर्टो पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए गृहमंत्री ने कहा कि सीमा विवाद से जुड़े सारे मसले सिर्फ बातचीत के माध्यम से ही सुलझाए जाने चाहिए।

---------------------------

चीन-पाक से सभी मुद्दे बातचीत के जरिए सुलझाना चाहता है भारत

Publish Date:Fri, 24 Oct 2014

नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि भारत अपने दोनों पड़ोसी देश चीन और पाकिस्तान के साथ सभी विवादित मुद्दों को बातचीत के जरिए सुलझाने का पक्षधर है। गृहमंत्री ने साफतौर पर कहा कि पाकिस्तान से बातचीत तभी संभव है जब वह सीमा पार से हो रही गोलीबारी को बंद कर शांति बहाली की तरफ कदम बढ़ाए।
राजनाथ का यह बयान पाकिस्तान के उस कदम के बाद आया है जिसमें उसकी संसद में भारत के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाया गया था। इस प्रस्ताव में पाकिस्तान ने भारत पर सीमा उल्लंघन का आरोप लगाते हुए निंदा की थी। भारत के खिलाफ लाए गए इस निंदा प्रस्ताव में कश्मीर का मुद्दा भी लाया गया। पाकिस्तान की संसद इस प्रस्ताव को पास कर भारत को चेतावनी दी है वह पाकिस्तान की परेशानियों का नाजायज फायदा उठाने की कोशिश न करे।
इस बाबत सवाल पूछे जाने पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पाकिस्तान से बातचीत तभी संसद है जब वह सीमा पार से हो रही गोलीबारी को बंद करेगा।

शुक्रवार, 24 अक्तूबर 2014

विश्व की सबसे ऊंची सैन्य चोटी पर मोदी ने जवानों संग मनाई दिवाली





विश्व की सबसे ऊंची सैन्य चोटी पर मोदी ने जवानों संग मनाई  दिवाली

24 Oct 2014 


नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सियाचिन के सैनिकों और कश्मीर के बाढ़ पीड़ितों के बीच दिवाली मनाई। विश्व की सबसे ऊंची व दुर्गम सैन्य चोटी पर तैनात सेना के जवानों को संबोधित किया और मिठाई बांटी। वे करीब एक घंटे तक सियाचिन में जवानों के बीच रहे। यहां से वे श्रीनगर गए, जहां उन्होंने बाढ़ पीड़ितों से मुलाकात की।
सियाचिन स्थित बर्फ की ऊंची चोटियों से मोदी ने दीपावली के मौके पर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को बधाई दी। मैं समझता हूं कि प्रणब दा को मिली बधाई में यह अनोखी होगी। उन्होंने कहा कि शायद पहली बार किसी प्रधानमंत्री को दिवाली के शुभ दिन हमारे जवानों के साथ समय बिताने का अवसर मिला है। देश के प्रहरियों की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि चाहे ऊंचाई हो या भीषण ठंड, हमारे सैनिकों को कोई नहीं रोक सकता। वे वहां खड़े हैं और देश की सेवा कर रहे हैं। वे हमें सही मायने में गौरवान्वित कर रहे हैं।
उमर ने मांगी उदार मदद
सियाचिन से प्रधानमंत्री श्रीनगर पहुंचे। एयरपोर्ट पर राज्यपाल एनएन वोहरा व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने उनकी अगवानी की। उमर ने प्रधानमंत्री से राज्य के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्वास के लिए उदार वित्तीय मदद मांगी। सितंबर में आई भयावह बाढ़ के बाद मोदी की जम्मू-कश्मीर की यह दूसरी यात्रा थी। पहले वे राज्य के लिए 1 हजार करोड़ का राहत पैकेज घोषित कर चुके हैं। राज्य सरकार बाढ़ पीड़ितों के पुनर्वास के लिए 44 हजार करोड़ मांग रही है।
*****
पूरा देश आपके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने को तैयार है। सियाचिन के जवानों के साथ दिवाली मनाना गर्व की बात है। पूरा देश चैन से सोता है क्योंकि आप जागते हैं। आपके परिवारों का प्रतिनिधि बनकर आया हूं। आपके कारण देश के 125 करोड़ लोग खुशी से दिवाली मनाते हैं। आप दुश्मनों को खतरा और अपनों को जीवन देते हैं।
-नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री

गुरुवार, 23 अक्तूबर 2014

Diwali : "Row of Lights." - Swami Chidanand Saraswati



 Diwali : "Row of Lights." 

The time of Diwali is one of the most festive and beautiful times of the year. Diwali literally means a "Row of Lights." It is a time filled with light and love; a time when Indians all over the world rejoice. Diwali is celebrated on the thirteenth/fourteenth day in the dark half of Kartik (October - November); it is also known as Krishna Chaturdashi. It is the darkest night of the darkest period, yet it is a celebration of light! Diwali is heralded as the triumph of good over evil.

The meanings of Diwali, its symbols and rituals, and the reasons for celebration are innumerable. Diwali celebrates Lord Rama's glorious and long-awaited return to his Kingdom of Ayodhya after his fourteen long years of exile in the forests. It commemorates Lord Krishna's victory over the demon Narakaasura who had kidnapped and terrorized the gopis of Vrindavan. When the evil Naraka was finally killed by Bhagwan Krishna and Satyabhaama, he begged pitifully for mercy; thus, upon his entreaties, it was declared that this day of his death would be celebrated with great joy and festivity. It is also celebrated as the day Bhagwan Vishnu married Maha Lakshmi.


Diwali is also associated with the story of the fall of Bali - a demon king who was conquered by Lord Vishnu. Lord Vishnu appeared to the demon king Bali in the form of a dwarf and requested only three steps of land. The evil and egotistic Bali granted the drawf's meager request of only three feet. Suddenly, Lord Vishnu took on His grand size and placed one foot on the Earth, another on the Heavens and His third on the head of the evil Bali.

In general, Diwali signifies the triumph of good over evil, of righteousness over treachery, of truth over falsehood, and of light over darkness.

Additionally, Diwali is the holy time in which we offer our prayers to Maha Lakshmi and we worship Her with piety and devotion. Maha Lakshmi is the goddess of wealth and prosperity, bestowing these abundantly upon her devotees.


Diwali is a holiday of joy; it is the time when we gather with loved ones, celebrating our family, our friends and the prosperity God has bestowed upon us.

However it is also a holiday that is widely misunderstood and misrepresented, especially in the West. I have heard that in the West Diwali is referred to as "The Indians' Christmas" and that it is celebrated with frivolity and decadence. Let us talk about what Diwali really means, about why we celebrate it and about why we worship Goddess Lakshmi on this day.

Celebration of Light
There are three main aspects of this holiday called Diwali. The first is the celebration of light. We line our homes and streets with lanterns; we explode fireworks; children play with sparklers.

However, Diwali is not a festival of light in order that we may burn candles, fireworks and sparklers. Sure, these are wonderful ways of expressing our gaiety. But, they are not the only or true meaning of "light." Diwali is a festival of the light which dispels the darkness of our ignorance; it is a festival of the light which shows us the way on our journey through life. The purpose is not to glorify the light of the candle, or the light of the firecracker. The purpose is to glorify the light of God. It is He who bestows the real light, the everlasting light upon the darkness of this mundane world. A candle burns out. A firework is a momentary visual experience. But, the candle of a still mind and the fireworks of a heart filled with bhakti are divine and eternal; these are what we should be celebrating.

We decorate our homes with lanterns; but why? What is the symbolism behind that? Those lanterns signify God's light, penetrating through the ignorance and sin of our daily lives. They signify the divine light, shining its way through this mundane world. A home bathed in light is a home in which anger, pain, and ignorance are being dispelled; it is a home that is calling to God. However, too many people turn this into a domestic beauty contest, spending days and a great deal of money to purchase the newest dias, the most beautiful candles. "We had 75 candles burning last night," we gloat. This is only the light of glamour. It is not the light of God, and thus the true meaning of the holiday is lost…

The light of Diwali should be within us. It should symbolize the personal relationship between God and our families. It should not be so we attract attention from passing cars, or so we are the envy of the neighborhood. Let the light penetrate inward, for only there will it have lasting benefit. One piece of cotton soaked in ghee, lit with a pure heart, a conscious mind and an earnest desire to be free from ignorance is far "brighter" than 100 fashion deepaks, lit in simple unconscious revelry.

A Fresh Start
Diwali also marks the new year. For some, the day of Diwali itself is the first day of the new year, and for others the new year's day is the day following Diwali. But, for all this season is one of heralding in the New Year.

In the joyous mood of this season, we clean our homes, our offices, our rooms, letting the light of Diwali enter all the corners of our lives. We begin new checkbooks, diaries and calendars. It is a day of "starting fresh."

On this day we clean every room of the house; we dust every corner of the garage, we sweep behind bookshelves, vacuum under beds and empty out cabinets. But, what about our hearts? When was the last time we swept out our hearts? When did we last empty them of all the dirt and garbage that has accumulated throughout our lives?

That is the real cleaning we must do. That is the real meaning of "starting fresh." We must clean out our hearts, ridding them of darkness and bitterness; we must make them clean and sparkling places for God to live. We must be as thorough with ourselves as we are with our homes. Are there any dark corners in our hearts we have avoided for so long? Are we simply "sweeping all the dirt under the rug?" God sees all and knows all. He knows what is behind every wall of our hearts, what is swept into every corner, and what is hidden under every rug. Let us truly clean out our hearts; let us rid ourselves of the grudges, pain, and anger that clutter our ability to love freely. Let us empty out every nook and cranny, so that His divine light can shine throughout.

Additionally, on Diwali, we begin a new checkbook; we put last year's accounts to rest. But, what about our own balance sheets? When was the last time we assessed our minuses and plusses, our strengths and our weaknesses, our good deeds and selfish deeds? How many years' worth of grudges and bitterness and pain have we left unchecked?

A good businessman always checks his balance sheet: how much he spent, how much he earned. A good teacher always checks the progress of her students: how many are passing, how many are failing. And they assess themselves accordingly: "Am I a good businessman?" "Am I a good teacher?" In the same way we must assess the balance sheets of our lives. Look at the last year. Where do we stand? How many people did we hurt? How many did we heal? How many times did we lose our temper? How many times did we give more than we received? Then, just as we give our past checkbooks and the first check of our new one to God, let us give all our minus and plus points to Him. He is the one responsible for all our good deeds. And our bad ones are due only to ignorance. So, let us turn everything over to Him, putting our strengths, our weaknesses, our wins and our losses at His holy feet. And then, let us start afresh, with a new book, unadulterated by old grudges and bitterness.

Maha Lakshmi
The third, and perhaps most important, aspect of Diwali is the worship of Maha Lakshmi. Maha Lakshmi is the goddess of wealth and prosperity, bestowing these abundantly upon her devotees. On Diwali we pray to her for prosperity; we ask her to lavish us with her blessings. However, what sort of prosperity are we praying for? All too often, we infer wealth to mean money, possessions, material pleasures. This is NOT the true wealth in life; this is not what makes us prosperous. There is almost no correlation between the amount of money we earn, the number of possessions we buy and our sense of inner bliss and prosperity.


It is only God's presence in our lives which makes us rich. Look at India. People in small villages, in holy towns, in ancient cities have very little in terms of material possessions. Most of them live below the Western standards of poverty. Yet, if you tell them they are poor, they won't believe you, for in their opinion they are not. This is because they have God at the center of their lives. Their homes may not have TV sets, but they all have small mandirs; the children may not know the words to the latest rock and roll song, but they know the words to Aarti; they may not have computers or fancy history text books, but they know the stories of the Ramayana, the Mahabharata and other holy scriptures; they may not begin their days with newspapers, but they begin with prayer.

If you go to these villages you may see what looks like poverty to you. But, if you look a little closer, you will see that these people have a light shining in their eyes, a glow on their faces and a song in their hearts that money cannot buy.

On Diwali, we must pray to Maha Lakshmi to bestow real prosperity upon us, the prosperity that brings light to our lives and sparkle to our eyes. We must pray for an abundance of faith, not money; we must pray for success in our spiritual lives, not a promotion at work; we must pray for the love of God, not the love of the beautiful girl (or boy) in our class.

There is another point about Maha Lakshmi that is important. We tend to worship only her most prominent of aspects - that of bestowing prosperity upon her devotees. However, she is a multi-faceted goddess, filled with symbols of great importance. As we worship her, let us look more deeply at her divine aspects. First, according to our scriptures, she is the divine partner of Lord Vishnu. In Hindu tradition, there is almost always a pair - a male and a female manifestation of the Divine, and they play interdependent roles. In this way it is said that Maha Lakshmi provides Lord Vishnu with the wealth necessary in order to sustain life. He sustains, but through the wealth she provides.

Therefore, in its highest meaning, Maha Lakshmi provides wealth for sustenance, not for indulgence. Our material wealth and prosperity should only sustain us, giving us that which is necessary to preserve our lives. All surplus should be used for humanitarian causes. She does not give wealth so that we may become fat and lazy; yet, that is what we tend to do with the wealth we receive. Let us remember that Maha Lakshmi's material wealth is meant for sustenance and preservation, not for luxury and decadence.
Additionally, we worship Maha Lakshmi who is the divine symbol of purity and chastity. Yet, in our celebration of her, we frequently indulge in frivolity and hedonism. How can we worship her while engaging in the opposite of what she represents? We must re-assess how we pay tribute to this holy Goddess!

The last point I want to mention is that she is typically portrayed wearing red. What does this mean? Red is the color of action, and she is the goddess of prosperity. This means that in order to obtain the true prosperity in life, we must engage in action. Most people think that in order to be spiritual, or to obtain "spiritual prosperity" one must be sitting in lotus posture in the Himalayas. This is not the only way. In the Bhagavad-Gita, Lord Krishna teaches about Karma Yoga, about serving God by doing your duty. We must engage ourselves in active, good service; that is truly the way to be with Him.


Let our inner world be filled with devotion to Him, and let our outer performance be filled with perfect work, perfect action. I once heard a story about a man who spent 40 years meditating so he could walk on water. He thought that if he could walk on water, then he had truly attained spiritual perfection. When I heard this story, I thought, "Why not spend 40 cents instead for a ride in the motorboat across the river, and spend the 40 years giving something to the world?" That is the real purpose of life.

So, on this holy day, let us fill our entire beings with the light of God. Let us clean out our minds and hearts, making a true "fresh start." Let us pray to Maha Lakshmi to bestow the divine gifts of faith, purity and devotion upon us. With those, we will always be always rich, always prosperous, and always fulfilled. Let us celebrate Diwali this year as a true "holy day," not only as another frivolous "holiday."


May God bless you all.
In the service of God and humanity,
Swami Chidanand Saraswati