बुधवार, 22 जनवरी 2014

रिटेल में एफ डी आई अभिशाप सिध्द होगी - देवेन्द्र शर्मा


रिटेल में एफ डी आई  अभिशाप सिध्द होगी - देवेन्द्र शर्मा
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22 जनवरी 2014
संपादकीय
दैनिक भास्कर, कोटा ।
http://epaper.bhaskar.com/kota/16/22012014/0/1/
सवाल नीतियों में स्थिरता का
खुदरा कारोबार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की अनुमति हो या नहीं, यह भारत में वर्षों से विवादास्पद मुद्दा है। 2012 में यूपीए सरकार ने विभिन्न घोर राजनीतिक मतभेदों के बीच इसके पक्ष में फैसला किया। तब निर्णय लिया गया कि केंद्र का फैसला नीतिगत है। व्यवहार में एफडीआई को इजाजत दी जाए या नहीं, यह राज्य तय करेंगे। सिर्फ 12 राज्यों ने अपने यहां एफडीआई को इजाजत दी। उनमें दिल्ली की कांग्रेस सरकार भी थी, लेकिन पिछले दिनों आम आदमी पार्टी की नई सरकार ने इस निर्णय को पलटने का फैसला किया। इससे आर्थिक मामलों में यह मौलिक प्रश्न खड़ा हुआ कि इस देश में कोई नीतिगत स्थिरता है या नहीं? इसी संदर्भ में यह खबर महत्वपूर्ण है कि केंद्र सरकार ने एफडीआई की इजाजत पर सहमति वापस लेने के दिल्ली सरकार के फैसले को नामंजूर कर दिया है। केंद्र की दलील यह है कि अपने यहां एफडीआई की अनुमति दें या नहीं- इस पर फैसले का हक राज्य सरकारों को है, लेकिन अगर किसी राज्य ने सहमति दे दी तो फिर केंद्रीय उद्योग मंत्रालय उसकी अधिसूचना जारी कर देता है और फिर उसे वापस नहीं लिया जा सकता। अर्थव्यवस्था के व्यापक हित में इस रुख का समर्थन किया जाना चाहिए। भारतीय अर्थव्यवस्था में हाल के वर्षों में आई गिरावट के पीछे नीतिगत अनिर्णय और टैक्स नीतियों में अस्थिरता बड़ी वजह रही हैं। किसी लोकतांत्रिक देश के बारे में अगर यह धारणा बन जाए कि वहां कुछ भी तय नहीं है- सरकार बदलने के साथ आर्थिक नीतियां भी बदल जाती हैं- तो फिर कौन निवेशक वहां अपना पैसा लगाएगा? परिपक्व लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में यह सुस्थापित परंपरा है कि जनादेश प्राप्त सरकार जो निर्णय लेती और जो विदेशी समझौते करती है, भविष्य में बनने वाली सरकारें अतीत के प्रभाव से उन्हें नहीं बदलती हैं। आगे वे अपनी विचारधारा के मुताबिक अवश्य नीतियां या कार्यक्रम लागू करती हैं। भारत में भी ऐसी परंपरा कायम करने की जरूरत है। देश के सामने मुख्य चुनौती आर्थिक विकास एवं सामाजिक कल्याण की है। ऐसे उद्देश्यों को राजनीतिक मतभेदों से ऊपर रखा जाना चाहिए। खुदरा कारोबार में एफडीआई के विरोधियों को समझना चाहिए कि इसके पक्ष में भी एक बड़ा जनमत है।

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