गुरुवार, 6 फ़रवरी 2014

असीमानंद के इंटरव्यू : अविश्वसनिय और बकबास



अविश्वसनिय और बकबास
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असीमानंद के इंटरव्यू पर बवाल, मगर जानकारों ने उठाए सवाल
आईबीएन-7 | Feb 06, 2014
http://khabar.ibnlive.in.com/news/115784/12
नई दिल्ली। कैरावन मैगजीन में छपे एक इंटरव्यू में समझौता एक्सप्रेस और मालेगांव ब्लास्ट के आरोपी असीमानंद ने एक सनसनीखेज खुलासा किया है। असीमानंद के मुताबिक इन धमाकों को आरएसएस की मंजूरी के बाद अंजाम दिया गया था। कैरावन का दावा है कि अंबाला जेल में एक इंटरव्यू के दौरान असीमानंद ने उसकी संवाददाता गीता रघुनाथ को बताया कि समझौता और मालेगांव ब्लास्ट को खुद मौजूदा आरएसएस चीफ मोहन भागवत ने मंजूरी दी थी। इस प्रक्रिया में संघ के बड़े पदाधिकारी इंद्रेश कुमार भी शामिल थे।

कैरावन के मुताबिक गीता ने 2 साल में कुल 4 बार असीमानंद का इंटरव्यू किया, जिसके आधार पर ये दावा किया गया है। मैगजीन ने अपने दावे को पुख्ता करने के लिए अपनी वेबसाइट पर गीता रघुनाथ और असीमानंद के इंटरव्यू के 2 ऑडियो भी जारी किए हैं। लेकिन जानकार इस इंटरव्यू पर सवाल उठा रहे हैं। सवाल ये भी कि अगर असीमानंद ने वाकई ऐसा कहा भी है तो उसकी बात को कितनी गंभीरता से लिया जाए? चुनावी माहौल में अक्सर सामने आने वाले सनसनीखेज खुलासों की एक कड़ी ही इसे क्यों न माना जाए?

सीएनएन-आईबीएन के नेशनल एडिटर भूपेंद्र चौबे के मुताबिक असीमानंद कह रहे हैं कि डांग में 2005 में मीटिंग हुई थी। नदी के किनारे एक टैंट लगा हुआ था। उस मीटिंग में इंद्रेश जी भी मौजूद थे और मोहन भागवत भी। चौबे के मुताबिक महत्वपूर्ण बात ये है कि 2011 में अपने कबूलनामे में भी असीमानंद ने इस मीटिंग का जिक्र किया था। तब उन्होंने मोहन भागवत के बारे में कुछ नहीं कहा। तब कहा था कि हम टैंट में गए। हमारे साथ सुनील जोशी थे, कुछ और साथी थे और वहां हमें इंद्रेश जी मिले। यानी 2011 में उसी मीटिंग के बारे में असीमानंद ने कुछ और कहा और अब वो कुछ और कह रहे हैं। ऐसे में उनकी बात पर भरोसा कैसे किया जाए।

आईबीएन7 के खास कार्यक्रम एजेंडा में भूपेंद्र चौबे ने कहा कि मैगजीन की संवाददाता ने चार किस्तों में और दो साल में ये इंटरव्यू किया है। भला ऐसा कैसा इंटरव्यू है क्योंकि इंटरव्यू तो एक ही बार में और एक साथ ही होता है। दो साल इंटरव्यू चला और चुनाव के ठीक पहले प्रकाशित हुआ। ऐसे में इसके पीछे राजनीति भी नजर आती है।

इसी शो में यूपी के पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह ने कहा कि असीमानंद ने कई बार बयान बदले हैं। उनके वकील ने भी कई बार बयान बदले हैं। 2011 में जब वे गिरफ्तार हुए तो तीस हजारी कोर्ट में सीआरपीसी की धारा 164 के तहत मैजिस्ट्रेट के सामने उन्होंने बयान दिया था और ये उनकी गिरफ्तारी के महज दो दिन के बाद ही दिया गया। उस वक्त अगर 42 पेज के अपने बयान में उन्होंने इसका जिक्र नहीं किया है जबकि उस वक्त तो उनपर कोई दबाव भी नहीं हो सकता था। वैसे भी 164 के तहत बयान निर्भीक होता है।

भूपेंद्र चौबे के मुताबिक असीमानंद ने ही कहा था कि जयपुर में एक गेस्ट हाउस में उनकी कुछ और लोगों से मुलाकात हुई। मीटिंग का संचालन इंद्रेश जी ने किया था। इंद्रेश जी को दो बार बुलाकर सीबीआई पूछताछ कर चुकी है लेकिन सीबीआई, एनआईए और इंटेलिजेंस एजेंसी ने उनको क्लीन चिट दे दी है। अब जब असीमानंद द्वारा मुख्य आरोपी करार दिए गए व्यक्ति को ही क्लीन चिट मिल गई है तो उसकी किसी अन्य के बारे में कही गई बात पर क्या जांच होगी। अगर मैगजीन द्वारा जारी ऑडियो में असीमानंद की आवाज हो भी, तो उसपर कितना भरोसा किया जाए।

भूपेंद्र चौबे के मुताबिक पिछले साल पूर्व गृह सचिव आर के सिंह(जो कि अब बीजेपी में शामिल हो चुके हैं) ने कहा था कि उनकी खुद की जांच में संदिग्ध गतिविधियों वाले ऐसे करीब दस व्यक्ति सामने आए हैं जो आरएसएस या आरएसएस से जुड़ी संस्थाओं से जुडे हैं और अलग-अलग बम धमाकों में उनकी कहीं न कहीं भूमिका थी। इन दस लोगों में संदीप डांगे, साध्वी प्रज्ञा ठाकुर, सुनील जोशी, असीमानंद, इंद्रेशजी, लोकेश शर्मा, देवेंद्र गुप्ता शामिल हैं लेकिन इनमें से किसी के खिलाफ केस नहीं बना। इनके खिलाफ एनआईए तक के पास कोई सबूत नहीं हैं इसलिए न चार्जशीट हुई और न मुकदमा चला।

उधर धमाकों की तफ्तीश करने वाली एनआईए ने भी कहा है कि उनकी जांच के दौरान असीमानंद ने मोहन भागवत का कभी नाम नहीं लिया। इन मामलों से जुड़े मुकदमे शुरू हो चुके हैं लिहाजा असीमानंद चाहें तो अदालत में अपना बयान दे सकते हैं।

कुल मिलाकर कैरावन पत्रिका में छपा ये कथित इंटरव्यू कई सवाल जरूर खड़े करता है।

सवाल 1: अगर ये इंटरव्यू पिछले दो सालों से कई किस्तों में किया गया तो आखिर आम चुनाव से कुछ वक्त पहले ही इसे क्यों जारी किया गया?

सवाल 2: क्या चुनावी माहौल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक के नाम को बदनाम करने की किसी साजिश के तहत ऐसा किया गया?

सवाल 3: असीमानंद कई बार अपने बयान बदल चुका है, ऐसे में उसके इस इंटरव्यू की सत्यता की गारंटी कौन करेगा?

सवाल 4: क्या इस कथित इंटरव्यू के आधार पर संघ प्रमुख मोहन भागवत की गिरफ्तारी की मांग जायज है?

सवाल 5: कैरावन पत्रिका की ओर से जारी इंटरव्यू के ऑडियो की क्वालिटी काफी खराब है। क्या असीमानंद की आवाज से उसका मिलान हो सकेगा?

सवाल 6: खुद असीमानंद के वकील का दावा है कि असीमानंद ने ऐसे किसी भी इंटरव्यू से इनकार किया है, ऐसे में अब जांच कैसे होगी?
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असीमानंद के दो साल पुराने साक्षात्कार पर छिड़ा घमासान
Thu, 06 Feb 2014
http://www.jagran.com
नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। आतंकी गतिविधियों को हरी झंडी देने के आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के खिलाफ असीमानंद के कथित खुलासे पर राजनीतिक घमासान शुरू हो गया है। कांग्रेस, बसपा और लोजपा ने इस खुलासे को गंभीर बताते हुए जांच की मांग की है। वहीं भाजपा, आरएसएस और शिवसेना ने असीमानंद के साक्षात्कार पर सवालिया निशान लगाते हुए इसे चुनाव के पहले असली मुद्दे से ध्यान हटाने की सरकार की साजिश करार दिया है। असीमानंद समझौता एक्सप्रेस, अजमेर शरीफ और मालेगांव में बम विस्फोट का आरोपी है और पिछले कई सालों से जेल में बंद है।

गौरतलब है कि एक पत्रिका ने दो साल पहले लिए गए असीमानंद के एक साक्षात्कार में आतंकी हमलों के लिए संघ प्रमुख मोहन भागवत की हरी झंडी मिलने का दावा किया है। बम विस्फोटों के पीछे मोहन भागवत का नाम आते ही राजनीतिक पार्टियों ने भाजपा और संघ पर हमला तेज कर दिया।

विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद और संसदीय कार्य राज्यमंत्री राजीव शुक्ला ने असीमानंद के आरोपों को गंभीर बताते हुए इसकी सच्चाई सामने लाने की मांग की। वहीं बसपा प्रमुख मायावती ने इसकी सीबीआइ से जांच की जरूरत बताई। गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने कहा कि यदि असीमानंद ने कुछ खुलासा किया है, तो वह सही हो सकता है।

वहीं भाजपा, शिवसेना और आरएसएस ने असीमानंद के साक्षात्कार पर ही सवाल उठा दिया है। भाजपा के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने कथित खुलासे को बकवास करार देते हुए कहा कि असीमानंद के वकील ने ऐसे किसी साक्षात्कार से इन्कार किया है। दो साल पहले लिए साक्षात्कार के खुलासे के समय से इसके उद्देश्य का संकेत मिल जाता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का डर्टी ट्रिक्स डिपार्टमेंट चुनाव के पहले ऐसे झूठे खुलासे कर जनता का ध्यान असली मुद्दों से हटाने से कोशिश कर रहा है। वहीं आरएसएस के वरिष्ठ नेता राम माधव ने असीमानंद के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया।

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