शुक्रवार, 28 मार्च 2014

नरेंद्र मोदी के टुकड़े-टुकड़े कर दूंगा: कांग्रेस प्रत्याशी

कांग्रेस बोखला चुकी है , यह भाषा हिषंसक के साथ घोर साम्प्रदायिक है । 

नरेंद्र मोदी के टुकड़े-टुकड़े कर दूंगा: कांग्रेस प्रत्याशी
Friday, March 28, 2014,
ज़ी मीडिया ब्यूरो
http://zeenews.india.com/hindi/lok-sabha-elections-2014/congress-candidate-threatens-to-chop-narendra-modi-into-pieces/205546


नई दिल्ली: यूपी के सहारनपुर से कांग्रेस के उम्मीदवार इमरान मसूद ने नरेंद्र मोदी को लेकर विवादास्पद बयान दिया है। अपने कार्यकर्ताओं के बीच इमरान मसूद ने भड़काऊ भाषण देते हुए मोदी के लिए मारने और काटने जैसे आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया। उनके भाषण का एक विडियो सामने आया है, जिसमें वह भीड़ के सामने दावा कर रहे हैं कि मोदी को कड़ा सबक सिखाएंगे और बोटी-बोटी कर देंगे। चुनाव आयोग ने इमरान के भाषण का ब्योरा तलब किया है।

इस वीडियो में बीजेपी के पीएम पद के उम्मीदवार मोदी के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल करते हुए मसूद ने कार्यकर्ताओं से कहा कि मोदी यूपी को गुजरात समझ रहे हैं तो उन्हें यहां सबक सिखाया जाएगा। यूपी में मुस्लिमों की आबादी बताते हुए मसूद ने कहा कि यूपी गुजरात नहीं हैं। उन्होंने कहा कि गुजरात में मुस्लिम 4 फीसदी है जबकि यूपी में 22 फीसदी। उन्होंने कहा कि मैं उसके खिलाफ लड़ूंगा क्योंकि मैं जानता है कि उसे कैसे माकूल जवाब दिया जा सकता है। हालांकि बाद में इमरान मसूद अपने दिये बयान से पलट गए। उन्होंने कहा कि मैंने तो मोदी को सबक सिखाने की बात कही थी।

इमरान कांग्रेस के इस इलाके से दिग्गज नेता रशीद मसूद के भतीजे हैं। पहले उन्हें समाजवादी पार्टी ने उम्मीदवार बनाया था लेकिन बाद में रशीद मसूद ने उनका वहां से टिकट कटवा दिया तो वह कांग्रेस के टिकट पर मैदान में उतर गए। समाजवादी पार्टी के टिकट पर सहारनपुर से रशीद मसूद के पुत्र शाजान मसूद मैदान में हैं।

(एजेंसी इनपुट के साथ )

गुरुवार, 27 मार्च 2014

नरेन्द्र मोदी - एक अद्वितीय व्यक्तित्व



नरेन्द्र मोदी - एक अद्वितीय व्यक्तित्व 
- गिरीश दाबके
http://www.hindivivek.org/diwali/r8.html
"नरेन्द्रायण - व्यक्ति से समष्टि : एक आकलन" नरेन्द्र मोदी पर प्रकाशित चरित्र ग्रन्थ है। यह चरित्र ग्रन्थ अत्यन्त प्रसिद्ध और लोकप्रिय भी हुआ। किन्तु आज भी ऐसा लगता है कि लेखक कुछ कहने से रह गये हैं कारण कि चरित्र ग्रन्थ की एक मर्यादा होती है। ग्रन्थ लिखते समय लेखक के मन में आए हुए भाव इस लेख मे प्रकाशित किए गए हैं।

सूर्य को दु:ख है कि उसके प्रेम में व्याकुल रात्रि को वह कभी देख नहीं पाता। सोने को दु:ख है कि उसे कभी-भी सन्तों की संगति का लाभ नहीं मिलता और लेखक को दु:ख है कि वह जो कहना चाहता है, समग्र रूप से उसे कह नहीं पाता। इस उक्ति का अनुभव हरेक लेखक को सदैव होता रहता है। इसका कारण है कि खूब प्रयोग में आनेवाले शब्द कई बार सांकेतिक हो जाते हैं। शब्द प्रतीकात्मक हो जाते हैं और वे प्रतीक के रूप में भिन्न अर्थ व्यक्त करते हैं। शब्द के व्यक्त अर्थ से अलग एक भाव लेखक के मन में होता है। वह भाव कभी-भी अभिव्यक्ति मेंनहीं बदलता है। लेखक के मन के भाव अनेक बार केवल सांकेतिक रूप में व्यक्त होते हैं।
""नरेन्द्रायण - व्यक्ति से समष्टि : एक आकलन"" नरेन्द्र मोदी पर प्रकाशित चरित्र ग्रन्थ है। यह चरित्र ग्रन्थ अत्यन्त प्रसिद्ध और लोकप्रिय भी हुआ। किन्तु आज भी ऐसा लगता है कि मोदीजी कुछ कहने से रह गये हैं कारण कि चरित्र ग्रन्थ की एक मर्यादा होती है। वह एक इतिहास होता है। उसकी घटनाएं असम्भव लगती हैं। बहुत सी घटनाएं व्यवस्थित करनी होती हैं। आज के इस छोटे से लेख में हम नरेन्द्र मोदी के जीवन के बीते हुए पल को प्रस्तुत करने का प्रयत्न करेंगे। इस प्रस्तुति में हम उनके जीवन की कुछ सर्वज्ञात घटनाओं का विश्लेषण करेंगे। उनकी कविताओं की चर्चा करेंगे।
नरेन्द्र मोदी का जन्म सन् 1950 ई. में हुआ। उनका निम्न मध्यमवर्गीय आर्थिक स्थिति का परिवार था। जीवन के आर्थिक संघर्ष कोबालक नरेन्द्र मोदी भलीभांति जान गये थे। वे अपने पिताजी की चाय की छोटी सी दूकान पर उनकी सहायता सदैव करते रहते थे। दूकान पर कार्य से समय मिलते ही वे पढने लगते। अध्ययन और इच्छानुसार खेलना उनका दैनिक कार्य था। पढते-खेलते हुए नरेन्द्र मोदी की हिमालय की ऊँची चोटियों, गिरि कन्दराओं में जाकर विचरण और अनुसंधान की ललक अचानक जाग उठती। सच में यह प्रेरणा इतनी प्रबल होती कि घर-बार का मोह छोडकर वे उच्च हिमालय की गोद में चले जाते। यह क्रम पाँच-छह वर्ष तक चलता रहा। उनके भीतर ऐसी प्रेरणा कहाँ से उत्पन्न होती? क्यों उत्पन्न होती? वह एकाएक क्यों उत्पन्न होती? उस प्रेरणा के उत्पन्न होने से उनकी मानसिक स्थिति कैसी होती? घर-परिवार, माँ, मित्र मंडली का स्नेह, मिलने वाले सुख-वैभव इत्यादि एक क्षण में ही अरुचिकर क्यों लगने लगते? मनुष्य वास्तव में क्या खोजना चाहता है? क्या पाना चाहता है? उसे खोजने के लिए हिमालय की ऊँची चोटियां कैसी लगती हैं? यह सब नरेन्द्र मोदी के सन्दर्भ में गम्भीरता से विचारणीय है। हिमालय की गोद में जाकर विचरण और खोज करनेवाले नरेन्द्र मोदी पहले व्यक्ति नहीं थे। स्वामी विवेकानन्द,अरविन्द घोष, नेताजी सुभाषचन्द्र बोस, प.पू. श्री गुरुजी इत्यादि अनेक महापुरुषों ने यह मार्ग अपनाया था। एक साधक साधना करता है, किन्तु प्रामाणिक रूप से वह क्या करता है? इस प्रश्न का हल नहीं मिला है। साधना का मंगल निरामय विश्व त्याग करके एक साधक पुन: सांसारिक होने आये और "विश्व के सर्वमंगल" की आशा के साथ सामाजिक कार्य में लग जाये, ऐसा प्राय: देखने में कम ही आता है। सामाजिक कार्य अलग है और साधना अलग है, ऐसा विचार लोगों के मन में आता है। इस सन्दर्भ में समर्थ गुरु रामदास का कथन उल्लेखनीय है। वे कहते हैं, "यदि कार्य साधक बुरा है तो परमार्थ का कार्य भी बुरा ही होता है।"
चाहे शब्दों का अंबार लगा दें और अलंकारिक भाषा का प्रयोग करें, किन्तु मन की भावना को पूरी तरह से व्यक्त करना कठिन होता है। सभी घटनाओं को एक सिलसिलेवार क्रम से बैठाना पडता है। नरेन्द्र मोदी को किसी समय हिमालय में जाने की इच्छा हुई होगी और घर-बार छोडकर वहां गये होंगे। यह घटना बहुत से लोगों को ज्ञात भी नहीं होगी। उनके विषय में तरह-तरह की बातें लिखने वाले पत्रकारों- लेखकों और उनके व्यक्तित्व,कृतित्व पर परिचर्चा आयोजित करनेवाले प्रसार माध्यमों को उनके बारे में ऐसी कल्पना भी हुई होगी। क्योंकि वे सही तथ्यों की खोज करते ही नहीं, वे तो केवल अनर्गल टीका-टिप्पणी में ही रुचि लेते हैं।
नरेन्द्र मोदी के जीवन के बारे में मैं जब-जब विचार करता हूँ, तो मुझे आश्चर्य होता है। व्यक्ति प्रचारक क्यों बनता है? संघ के लिए, हिन्दुत्व के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित करने की प्रेरणा कैसे उत्पन्न होती है? प्रचारक बनने का निर्णय लेते समय कौन से संस्कार जागृत होते हैं? सारा जीवन संघकार्य में समर्पित करने की इच्छा कैसे जागती होगी? ऐसे अनेक प्रश्न मन में उठते हैं। संघ का कार्य करते हुए कार्यकर्ता का जयकार नहीं होता। उसे स्तुति- सुमन अर्पित नहीं किये जाते। संन्यास धारण करने की व्यवस्था अलग ही है। संन्यासी को मान मिलता है, बहुत सी नजरें सन्यासी के कदमों में झुक जाती हैं, व्यक्ति का अहंकार नष्ट हो जाता है, किन्तु प्रचारक के जीवन मेंऐसा भी नहीं होता। संघ के प्रत्येक प्रचारक ज्ञानी और उच्चशिक्षा प्राप्त होते हैं। वे जीविकोपार्जन के लिए प्रचारक नहीं बनते स्वार्थ जैसा क्षुद्र विचार उनके मन में आता भी नहीं है। व्यक्ति का स्वभाव है कि वह अपनी उपलब्धियों पर गर्व करता है। किन्तु संघ का कार्यकर्ता अपने "स्व" का त्याग करके सामाजिक कार्य करने का संकल्प लेता है। मन में यह भी प्रश्न उठता है कि वे इतना बडा निर्णय कैसे लेते हैं और अपने संकल्प पर जीवन पर टिके कैसे रहते हैं?
नरेन्द्र मोदी संघ के प्रचारक थे। सन् 1970 ई. में वे प्रचारक बने। भाजपा में वे बाद में सन् 1989 में गये। भाजपा में अनेक पदों पर कार्य करने का अनुभव उन्हें मिला। वे इस समय गुजरात के मुख्यमंत्री हैं। संघ का प्रचारक बनने से भाजपा में आने तक पूरे बीस वर्षों का सामाजिक कार्य का अनुभव उनके पास था। भाजपा में भी बारह वर्षों तक अनेक प्रकार के दायित्व को सम्भाला। उसके उपरान्त उनके ऊपर शासन की जिम्मेदारी आयी। इस जिम्मेदारी को भी उन्होंने आज्ञा का पालन करने के भाव से स्वीकार किया। संघ-कार्य और राज-कार्य में इकतीस वर्षों का कालखंड व्यतीत हुआ है। आज सन् 2010 ई. में संघ-कार्य बहुत व्यापक हो गया है। उसकी समाज में प्रतिष्ठा है। भारत वर्ष के सात राज्यों में भाजपा की सरकारें होने से राजनीति के क्षेत्र में भाजपा देश की अग्रगण्य पार्टी बन चुकी है। यह वर्ष 2010 का चित्र है। सन् 1970 ई. में ऐसा नहीं था। उस समय संघ के विरोधियों ने कल्पना भी नहीं की थी कि संघ विचारधारा के राजनीतिक दल को कभी केन्द्र व राज्य की सत्ता प्राप्त होगी। सत्तर के दशक में संघ का प्रचारक बनने के पीछे कोई राजकीय लिप्सा नहीं थी। सत्ता-प्राप्ति का स्वप्न भी नहीं था। वह समाज के प्रति समर्पण की शुद्ध भावना है। अत्यन्त प्रामाणिक तथा शपथपूर्वक स्वीकार करने का कार्य है। उस कार्य में सेवा- समर्पण- सामाजिक परिवर्तन का तीन सूत्र ही है। लेकिन ऐसा विचार करके कोई विश्लेषण नहीं करता है। राजनीतिक नेताओं के विषय में तुच्छतापूर्ण ह्ष्टिकोण से लिखने का चलन हो गया है। दुर्दैव से पवित्र तथा तटस्थ भाव से लिखने की पद्धति का लोप हो गया है। राजकार्य की मीमांसा इतने सरल तरीके से नहीं की जा सकती है, क्योंकि राजकार्य मूलत: समाजकार्य होता है। लेखकों की एक विशेषता होती है कि वे राजनीति पर लिखते-लिखते तात्कालिक सत्ता संघर्ष पर लिखने लगते हैं। राजनीति में सत्ता प्राप्त करना अपरिहार्य है, किन्तु सत्ता प्राप्त करना राजनीति का एक पक्ष है, महत्वपूर्ण है, आवश्यक है। नरेन्द्र मोदी के जीवन में सकारात्मक कार्य हेतु राजनीतिक धागा गूंथा गया है। सामाजिक परिवर्तन, हिन्दुत्व का सांस्कृतिक आधार और भारत वर्ष का परम वैभव हिन्दुत्व का ध्येय है। विगत् कई वर्षों से हिन्दुत्व पर केवल आरोप ही लगाया जाता रहा है और अपना दुर्दैव ऐसा है कि बहुत से लेखक हिन्दुत्व के पराभव की मीमांसा करने लगे। किंतु मेरा ऐसा सौभाग्य है कि नरेंद्र मोदी के जीवन चरित्र के निमित्त हिन्दुत्व की यशोगाथा बताने का अवसर प्राप्त हुआ। वर्तमान मूल्यहीन राजनीति और सामाजिक कार्य की पृष्ठभूमि पर एक तत्वनिष्ठ और स्वच्छ छवि वाले पुरुष की कथा कहने का सुयोग मेरी साहित्यिक कुंडली में था। यह सारा भाव नरेन्द्र मोदी की कविता में बडी अच्छी तरह व्यक्त हुआ है।
इस कविता में नि:स्पृह करुणा शब्द बहुत महत्वपूर्ण है। करुणा सकारण होती है। यह व्यवहार में होता है कि स्नेह प्रदर्शन के पीछे आत्मिक लाभ का भाव रहता है, यह जग की रीति है। किन्तु जब करुणा अकारण उपजती है तो उसका स्वामी स्वभावत: कर्तव्य करने लगता है।
नरेन्द्र मोदी के सन्दर्भ में प्रचार माध्यम निम्न स्तर तक उतर आये। एक उदाहरण बताता हूं, कुछ पत्रकारों ने लिखा कि मोदी का दोहरा व्यक्तित्व है। एक ओर वे कम्प्यूटर युग में प्रगति का स्वप्न देखते हैं और ऐसे समय में वे हिन्दुत्व की अनदेखी करते हैं। जो भी मन में आता है लिखने वाले खिलते हैं किन्तु यह किसने कहा कि हिन्दुत्व में विज्ञान का विरोध है। स्वा. वीर सावरकरजी ने सन् 1930 ई. में ही कहा था कि हिन्दू समाज को विज्ञाननिष्ठ होना चाहिए। जो कुछ भी वैज्ञानिक है, उसे स्वीकार करना चाहिए।
आज गुजरात को एक ऐसा नेता मिला है जिसकी प्रशासन पर मजबूत पकड है और जो कवि हृदय और आध्यात्मिक स्वभाव का होने के कारण सामाजिक समरसता के आधार पर समग्र विकास के लिए सदैव तत्पर रहता है। हाल ही में नरेन्द्र मोदी की प्रशासनिक क्षमता का सम्मान करते हुए संयुक्त राष्ट्र संघ ने भी उनको एक प्रशस्तिपत्र दिया है। इन दिनों एक नया शब्द "रेशनल" अर्थात तार्किक प्रचलन में है। ऐसा माना जाता है कि जो "रेशनल" है वह धार्मिक वृत्ति का नहीं हो सकता। वस्तुत: श्रद्धा का मतलब अज्ञानता नहीं है। ज्ञान जब परिपक्व हो जाता है तब वह श्रद्धा में परिवर्तित होता है। केवल मोदी जी ही नहीं, अपितु अनेक श्रेष्ठ कर्तव्यशील व्यक्ति श्रद्धावान होते हैं, धार्मिक प्रवृत्ति के होते हैं।
इस वृत्तांत को लिखने के सन्दर्भ में नरेन्द्र मोदीजी से हमारी तीन बार भेंट हुई। मैंने उनसे पुस्तक के स्वरूप के बारे मेंहल्की फुल्की बात की। उन्होंने बडे चाव से पूरी बात को सुना और बडी आत्मीयता से दाद दी। पिछले वर्ष जब हमारी भेंट हुई, उस समय मेरे घर में दु:खद निधन हुआ था। मोदीजी को यह मालूम था। भेंट के समय सबसे पहले उन्होंने यही पूछा, ""आपके घर में दु:खद घटना घटी थी, क्या हुआ था?"" इससे हमें घरेलू सम्बन्ध प्राप्त हुआ। नरेन्द्र मोदी ने उस भेंट के समय मुझे दो पुस्तकें उपहार में दी थीं। उन पुस्तकों के बारे में बात करते हुए वे मुख्यमंत्री न होकर एक लेखक थे, एक कवि थे। सावरकर साहित्य का गहन अध्ययन करने के उपलक्ष्य में हमने उन्हें अभिनन्दन पत्र दिया था। सम्मान पत्र ग्रहण करते हुए उन्होंने कहा, "यह सम्मान पत्र नहीं है, यह आशीर्वाद पत्र है।" नरेन्द्र मोदी के भव्य मुख्यमंत्री आवास में केवल दो लोग रहते हैं - वे स्वयं तथा उनका रसोइया। मोदीजी को जो कुछ भी उपहार स्वरूप प्राप्त होता है, उसे वे कन्याओं के पालन-पोषण, शिक्षा-दीक्षा, विकास एवं संरक्षा के निमित्त दान कर देते हैं। उनके द्वारा आज तक पाँच करोड से अधिक निधि उपलब्ध करायी गयी है। मोदीजी के बंगले के द्वार पर "दया परमो धर्म:" के स्थान पर "शूरता परमो धर्म:" वाक्य लिखा हुआ है।
सचमुच में एक महान व्यक्ति के साथ लगभग डेढ वर्ष तक संगति का लाभ मुझे मिला। यह चरित्र लिखते हुए मैं कुछ अर्थों में मोदी जैसा होने का प्रयास कर रहा था। परकाया प्रवेश के बिना लेखन सम्भव नहीं है।
इस निमित्त मोदी के साथ मानसिक जुडाव का लाभ मिला। ऐसा सौभाग्यशाली भला कौन हो सकता है?
नरेन्द्र मोदीजी कहते थे, "मैं मुख्यमंत्री रहूं या न रहूं, किन्तु मैं कवि जरूर हूं और कवि जरूर रहूंगा।" मोदीजी के सिर पर राजमुकुट है, परन्तु उसमें एक मोरपंख भी है। राजमुकुट कर्तव्य का प्रतीक है और मोरपंख प्रतिभा का प्रतीक है। भविष्य में राजमुकुट अधिक प्रभावी एवं व्यापक हो, किन्तु उस समय देखना यह है कि कविता का मोरपंख उसी तरह चमचमाता रहे। ऐसा होगा यह हमें विश्वास है।

नरेंद्र मोदी : कविता




नरेंद्र मोदी  कविता
नवभारतटाइम्स.कॉम | Feb 20, 2014
अहमदाबाद
http://navbharattimes.indiatimes.com
गुरुवार को अहमदाबाद की रैली में नरेंद्र मोदी ने बहुत ही शायराना भाषा का इस्तेमाल किया। मोदी के हाथ में छोटी-छोटी बहुत सारी पर्चियां हैं। उन्हें पहले कभी किसी रैली में इस तरह कागज देखते नहीं देखा। उन्होंने रैली में कविता भी सुनाई। पढ़िए रैली में मोदी द्वारा सुनाई गई कविता...

सौगंध मुझे इस मिट्टी की
मैं देश नहीं मिटने दूंगा
मैं देश नहीं झुकने दूंगा

मेरी धरती मुझसे पूछ रही
कब मेरा कर्ज चुकाओगे
मेरा अंबर पूछ रहा
कब अपना फर्ज निभाओगे
मेरा वचन है भारत मां को
तेरा शीश नहीं झुकने दूंगा
सौगंध मुझे इस मिट्टी की
मैं देश नहीं मिटने दूंगा

वे लूट रहे हैं सपनों को
मैं चैन से कैसे सो जाऊं
वे बेच रहे हैं भारत को
खामोश मैं कैसे हो जाऊं
हां मैंने कसम उठाई है
मैं देश नहीं बिकने नहीं दूंगा
सौगंध मुझे इस मिट्टी की
मैं देश नहीं मिटने दूंगा

वो जितने अंधेरे लाएंगे
मैं उतने उजाले लाऊंगा
वो जितनी रात बढ़ाएंगे
मैं उतने सूरज उगाऊंगा
इस छल-फरेब की आंधी में
मैं दीप नहीं बुझने दूंगा
सौगंध मुझे इस मिट्टी की
मैं देश नहीं मिटने दूंगा

वे चाहते हैं जागे न कोई
बस रात का कारोबार चले
वे नशा बांटते जाएं
और देश यूं ही बीमार चले
पर जाग रहा है देश मेरा
हर भारतवासी जीतेगा
सौगंध मुझे इस मिट्टी की
मैं देश नहीं मिटने दूंगा

मांओं बहनों की अस्मत पर
गिद्ध नजर लगाए बैठे हैं
मैं अपने देश की धरती पर
अब दर्दी नहीं उगने दूंगा
मैं देश नहीं रुकने दूंगा
सौगंध मुझे इस मिट्टी की
मैं देश नहीं मिटने दूंगा

अब घड़ी फैसले की आई
हमने है कसम अब खाई
हमें फिर से दोहराना है
और खुद को याद दिलाना है
न भटकेंगे न अटकेंगे
कुछ भी हो इस बार
हम देश नहीं मिटने देंगे
सौगंध मुझे इस मिट्टी की
मैं देश नहीं मिटने दूंगा।
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कांग्रेस, 'हर हर मोदी' नारे के खिलाफ





कांग्रेस को कौन समझाये कि हिन्दू संस्कृति में भगवान इंसान के रूप में ही अवतार लेते हें ।
कांग्रेस हमेशा ही हिन्दू विरोधी दृष्टिकोंण अपनाती रही हे इसलिए वह क्या जानें कि भारतीय संस्कृति क्या है ॥
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27 Mar 2014

'हर हर मोदी' नारे के खिलाफ कांग्रेस, पहुंची चुनाव आयोग
http://www.samaylive.com/nation-news-in-hindi
बीजेपी के वाराणसी में 'हर हर मोदी' के नारे का इस्तेमाल किये जाने के खिलाफ कांग्रेस ने गुरुवार को चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाया है.कांग्रेस ने कहा कि धर्म का इस्तेमाल करना चुनाव आचार संहिता के प्रावधानों के खिलाफ है.

कांग्रेस ने चुनाव आयोग से बीजेपी की मान्यता समाप्त करने की मांग करते हुए कहा कि मुख्य विपक्षी दल इस बात से इंकार कर रही है कि 'हर हर मोदी घर घर मोदी' उसका अधिकृत नारा है लेकिन इसके बावजूद वाराणसी में पार्टी कार्यकर्ता इसका इस्तेमाल लगातार कर रहे हैं.
   
कांग्रेस ने कहा कि मोदी ने वाराणसी में एक जनसभा को संबोधित किया जहां मंच पर पीछे भगवान शिव का चित्र लगाया गया था जिसकी चुनाव आचार संहिता के तहत इजाजत नहीं है.
   
कांग्रेस के कानूनी प्रकोष्ठ के प्रमुख के सी मित्तल के हस्ताक्षर से दाखिल किये गये ज्ञापन में कहा गया है कि भगवान शिव या महादेव और बनारस में काशी विश्वानाथ मंदिर को पूरी दुनिया में धार्मिक पवित्रता प्राप्त है.
     
हिन्दू और भगवान महादेव को मानने वाले सभी श्रद्धालु भगवान का आर्शीवाद प्राप्त करने के लिए पूरी श्रद्धा के साथ ‘‘हर हर महादेव और घर घर महादेव’’ का जप करते हैं. इस भजन में कोई मानव भगवान महादेव का स्थान नहीं ले सकता.

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि लगता है कि भाजपा द्वारा इस नारे का इस्तेमाल मोदी को भगवान महादेव के रूप में पेश करने की रणनीति का हिस्सा है ताकि चुनावी फायदे के लिए लोगों की धार्मिक भावनाओं का दोहन किया जा सके.
   
अखबारी खबरों का उल्लेख करते हुए ज्ञापन में कहा गया कि भाजपा ने 'हर हर मोदी घर घर मोदी' के नारों के साथ एलसीडी टीवी युक्त 400 मोबाइल वैन की व्यवस्था की है.

उसने कहा कि भाजपा अब एक नया नारा लेकर आई है ‘‘दिल में मोदी, घर में मोदी, काशी के कण कण में मोदी’’.
   
ज्ञापन में कहा गया है कि इस नये नारे का भी उद्देश्य लोगों की धार्मिक भावनाओं को भड़काना है. कण कण में भगवान एक जाना माना भजन है.
   
ज्ञापन में यह भी दावा किया गया कि भाजपा के इस नारे 'अबकी बार मोदी सरकार' को भी इस्तेमाल नहीं किया जा सकता क्योंकि यह असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक है.

भारतीय लोकतंत्र में किसी व्यक्ति को नहीं अकेले राजनीतिक दलों को सरकार बनाने को कानूनी अधिकार है.

संगठन गढ़े चलो, सुपंथ पर बढ़े चलो



Sangathan Gadhe Chalo
संगठन गढ़े चलो

संगठन गढ़े चलो, सुपंथ पर बढ़े चलो ।
भला हो जिसमें देश का, वो काम सब किए चलो ॥ध्रु॥

युग के साथ मिल के सब कदम बढ़ाना सीख लो ।
एकता के स्वर में गीत गुनगुनाना सीख लो ।
भूल कर भी मुख में जाति-पंथ की न बात हो ।
भाषा-प्रांत के लिए कभी ना रक्तपात हो ।
फूट का भरा घड़ा है फोड़ कर बढ़े चलो ॥१॥

आ रही है आज चारों ओर से यही पुकार ।
हम करेंगे त्याग मातृभूमि के लिए अपार ।
कष्ट जो मिलेंगे मुस्कुरा के सब सहेंगे हम ।
देश के लिए सदा जिएंगे और मरेंगे हम ।
देश का ही भाग्य अपना भाग्य है ये सोच लो ॥२॥

संगठन गढ़े चलो, सुपंथ पर बढ़े चलो ।
भला हो जिसमें देश का, वो काम सब किये चलो ॥

!! भारत माता की जय !!

बुधवार, 26 मार्च 2014

मुजफ्फरनगर दंगों को रोकने में , यूपी सरकार ने बरती लापरवाही : सुप्रीम कोर्ट




मुजफ्फरनगर दंगों को रोकने में यूपी सरकार ने बरती लापरवाही : सुप्रीम कोर्ट
Wednesday, March 26, 2014,
ज़ी मीडिया ब्यूरो

नई दिल्ली: मुजफ्फरनगर दंगों के मसले पर यूपी सरकार को बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इस मामले पर सुनवाई करते हुए कहा कि यूपी सरकार की लापरवाही से यह दंगा हुआ। कोर्ट ने यूपी की अखिलेश सरकार को फटकार लगाते हुए कहा राज्य में हालात बिगड़ने के लिए पूरी तरह प्रशासन जिम्मेदार रहा। कोर्ट ने कहा कि यूपी सरकार दंगों को रोकने में पूरी तरह नाकाम रही।

साथ ही कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में सितम्बर 2013 में हुए दंगों की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) या विशेष जांच दल (एसआईटी) से कराने का अनुरोध खारिज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश पी. सतशिवम की अध्यक्षता वाली पीठ ने कड़े शब्दों में कहा कि यदि केंद्र और राज्य की खुफिया एजेंसियों ने समय रहते इस बारे में पता लगा लिया होता तो दंगों को रोका जा सकता था।

दंगों की जांच सीबीआई या एसआईटी से कराने की याचिका खारिज करते हुए न्यायालय ने हालात से निपटने के लिए राज्य पुलिस की ओर से उठाए गए कदमों पर भी नाराजगी जताई। न्यायालय ने कहा कि राज्य सरकार लोगों के मौलिक अधिकारों के उल्लंघन को रोकने में विफल रही, जबकि लोगों के अधिकारों की रक्षा करना उसकी जिम्मेदारी है। कोर्ट ने दंगों में प्रभावित परिवारों को पुलिस सुरक्षा मुहैया कराने के लिए कहा है। कोर्ट ने राज्य सरकार के इस तर्क को नकार दिया कि लोगों के भारी विरोध की वजह से वह शुरू में आरोपियों को नहीं गिरफ्तार कर पाई।

दंगे के केवल मुसलमान पीड़ितों को ही राहत एवं सहायता मुहैया कराने के राज्य सरकार के एक परिपत्र के संबंध में न्यायालय ने निर्देश देते हुए कहा कि राहत एवं सहायता पीड़ितों के धार्मिक उपनाम के आधार पर नहीं, बल्कि सभी वास्तविक दंगा पीड़ितों को उपलब्ध कराए जाने चाहिए। पिछले साल सितंबर में मुजफ्फनगर और शामली में हुए दंगों में 48 लोगों की मौत हो गई थी और सैकड़ों परिवार बेघर हुए थे।

(एजेंसी इनपुट के साथ)

पाकिस्तान के तीन एजेंट : मोदी



पाकिस्तान के तीन एजेंट, उनमें से एक केजरीवालः मोदी

बुधवार, 26 मार्च 2014
अमर उजाला, दिल्ली
आज पहली बार अरविंद केजरीवाल पर हमला बोलते हुए मोदी ने कहा कि तीन AK पाकिस्तान को मिले हैं। भारत में पाकिस्तान के तीन एजेंट हैं। एके-47, एके एंटोनी और एके-49।
उन्होंने कहा कि ये एके-49 ही हैं जिनकी पार्टी की वेबसाइट पर भारत का नक्शा गलत है, उनकी पार्टी ने तो अपनी वेबसाइट पर कश्मीर, पाकिस्तान को दे दिया है। मोदी ने आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल को पाकिस्तान का एजेंट बता दिया
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हीरानगर/बुलंदशहर/नई दिल्ली। नरेंद्र मोदी ने बुधवार को जम्मू के हीरानगर, उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर और नई दिल्ली के सीलमपुर में चुनावी सभा को संबोधित किया। हीरानगर में उन्होंने आक्रामक तरीके से अरविंद केजरीवाल और कांग्रेस पर निशाना साधा। बुलंदशहर में कहा कि विरोधी जान गए हैं कि 16 मई के बाद उनका क्या हाल होगा।

केजरीवाल पर पहली बार निशानात्नमोदी ने केजरीवाल का नाम लिए बिना उन्हें एके-49 कहा। उन्हें पाकिस्तान का एजेंट तक बता डाला। पहला मौका था जब मोदी केजरीवाल पर कुछ बोले। कहा- लोकपाल के नाम पर जो दाएं-बाएं करते हैं उनके दिमाग में यह बात क्यों नहीं आती कि जम्मू कश्मीर में यह कानून लागू क्यों नहीं हुआ?


अटलजी का जिक्र - मोदी ने कहा कि अटलजी ने कश्मीर के नौजवानों में विश्वास पैदा किया था। उन्हें पांच साल और मिलते तो जम्मू कश्मीर की सूरत बदल जाती। इन मुद्दों पर पुरानी बातत्न'कांग्रेस को साठ साल दिए, मुझे ६० महीने दो, शहजादे कहते हैं कि कांग्रेस एक सोच है। लेकिन कांग्रेस सोच में पड़ गई है कि एक चायवाला कहां से आयाÓ जैसी बातें मोदी ने दोहराईं।



पहला पड़ाव: वैष्णोदेवी मंदिर
मोदी घोड़े की सवारी कर सबसे पहले मां वैष्णादेवी मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचे। वहां किसी सवाल के जवाब नहीं दिए। मोदी खुद अपने लिए नारा नहीं लगाने की अपील कर चुके हैं। लेकिन मंदिर के बाहर समर्थकों ने फिर 'हर-हर मोदी' के नारे लगाए।

दूसरा पड़ाव: हीरानगर
मोदी ने 185 चुनावी सभाओं की भारत विजय रैली की शुरुआत जम्मू के हीरानगर से की। मंच पर आते ही बोले कि भाजपा की सभाओं में कितने लोग जुटते हैं, यह खुद उमर अब्दुल्ला जम्मू रैली के वक्त ट्वीट कर बता चुके हैं। बोले- जितना प्यार यहां मिलेगा, उतना ब्याज सहित विकास कर लौटाऊंगा। नेशनल कॉन्फ्रेंस सहित कांग्रेस पर निशाना साधा कि वंशवाद-परिवारवाद देश को बर्बाद कर रहा है। फिर जवानों और किसानों का मुद्दा उठाया। कहा- कांग्रेस ने शास्त्रीजी के जय जवान-जय किसान के नारे को बदल दिया। अब कांग्रेस ने नारा दिया है- मर जवान-मर किसान। मोदी ने कहा कि पाकिस्तान को तीन 'एके' के रूप में सिपहसालार मिल गए। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के कारण कश्मीरियत पर हमला हो रहा है।


तीसरा पड़ाव: बुलंदशहर

उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में मोदी ने कहा कि धर्मनिरपेक्षता की बात कर कांग्रेस मुस्लिम युवकों का जीवन बर्बाद कर रही है। प्रधानमंत्री और शहजादे ने मुस्लिम युवकों को कर्ज और रोजगार की बात कही थी। लेकिन एक रुपया मुहैया नहीं कराया गया।

चौथा पड़ाव: दिल्ली

सीलमपुर की सभा में मोदी ने कहा कि दिल्ली की जनता जान गई है कि यहां सरकार बनाने वाली पार्टी कांग्रेस की बी टीम है। कांग्रेस का भला करना ही उनका मकसद है। राजनीति में गलतियां माफ कर दी जाती हैं, लेकिन विश्वासघात कोई माफ नहीं करता।


...और ट्वीट

मोदी ने आखिर में ट्वीट कर कहा कि कांग्रेस का घोषणा-पत्र पूरी तरह मजाक है।

आधार कार्ड को हर काम का आधार न बनाएं सरकार: सुप्रीम कोर्ट




आधार कार्ड को हर काम का आधार न बनाएं सरकार: सुप्रीम कोर्ट
By  एजेंसी / मंगलवार, २५ मार्च २०१४

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को उसके इस आदेश को न मानने पर फटकार लगाई कि 'आधार कार्ड नहीं होने से किसी भी व्यक्ति को सरकारी सेवा हासिल करने से वंचित न किया जाए.' कोर्ट ने साथ ही निर्देश दिया कि आधार कार्ड धारकों के बायोमेट्रिक आंकड़े किसी भी जांच एजेंसी या सरकारी विभाग को नहीं दिए जाएं.

जस्टिस बी.एस. चौहान और न्यायमूर्ति जे. चेलामेस्वर की पीठ ने बंबई हाई कोर्ट की गोवा बेंच के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) को दुष्कर्म के एक आरोपी की फिंगर प्रिंट केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को देने के लिए कहा गया था.

बेंच ने यूआईडीएआई को यह निर्देश दिया कि आधार कार्ड धारक की अनुमति लिए बिना वह अपने पास मौजूद कार्ड धारक की कोई सूचना या आंकड़ा किसी भी एजेंसी या विभाग को न दे.

अदालत ने महाधिवक्ता मोहन परासरण से कहा कि वह उस अधिसूचना को रद्द करे जिसमें खास सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए आधार कार्ड होना अनिवार्य किया गया है.
न्यायमूर्ति चौहान ने कहा, "आप उस अधिसूचना को वापस लेने के लिए निर्देश जारी कीजिए, जिसमें किसी भी सेवा का लाभ उठाने के लिए आधार कार्ड को अनिवार्य किया गया है."

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 24 सितंबर को निर्देश दिया था कि सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए आधार कार्ड अनिवार्य नहीं है.

बेंच ने अदालत के निर्देश का पालन नहीं किए जाने पर नाराजगी जताते हुए कहा कि उसे कई शिकायतें मिली हैं कि आधार कार्ड नहीं होने के कारण किसी की शादी रजिस्टर्ड नहीं हो रही है, तो किसी की संपत्ति का रजिस्ट्रेशन नहीं हो रहा.

बेंच ने यूआईडीएआई की याचिका की सुनवाई कर रही थी, जिसमें बंबई उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती दी गई थी. हाई कोर्ट ने यूआईडीएआई को दुष्कर्म के आरोपी के बायोमीट्रिक विवरण जांच एजेंसी को देने का निर्देश दिया था.

सोमवार, 24 मार्च 2014

भाजपा सत्ता में आने पर स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करेगी



उपज को कितना समर्थन देता है, समर्थन मूल्य ?

http://bhoomeet.blogspot.in/2012/06/blog-post_13.html

किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए झा कमेटी की सिफारिश के आधार पर वर्ष 1965 में कृषि मूल्य व लागत आयोग का गठन किया गया था। मण्डी में किसानों की फसल को बिचौलिये कम कीमत पर खरीद लेते हैं, इसे ध्यान में रखते हुए ही सरकार आयोग की सिफारिश पर रबी और खरीफ की करीब 21 फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा करती है। एफसीआई और सीसीआई जैसी सरकारी एजेंसियां उन समर्थन मूल्यों पर खरीद भी करती हैं। पिछले सात साल से करीब सभी अनाजों का समर्थन मूल्य दोगुना हो गया है। धान का समर्थन मूल्य 2004-05 की तुलना में 560-590 रुपए से बढ़कर 1,250 रुपए और गेहूं का समर्थन मूल्य 640 रुपए से बढ़कर 1,285 रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच गया। इस दौरान गन्ने का मूल्य भी 74.5 रुपए से बढ़कर 139. 12 क्विंटल प्रति टन पर पहुंच गया। सरकार ने दालों का उत्पादन बढ़ाने के लिए इस साल चने और मसूर का समर्थन मूल्य 2,800 रुपए प्रति क्विंटल कर दिया है।
पहली नजर में यह नीति किसानों के लिए लाभदायक लगती है, किन्तु हकीकत बिल्कुल उलट है। बाजरा, ज्वार, मक्का, जौ जैसे मोटे अनाजों में आजतक कुल उपज का 1 प्रतिशत भी कभी खरीदा नहीं गया। इसी तरह चना, मूंग, उड़द आदि दलहनी फसलों के लिए भी समर्थन मूल्य घोषित तो किए जाते हैं, किन्तु उनकी खरीद की कोई व्यवस्था नहीं की जाती। आश्चर्य तो तब होता है जब यही दालें विदेशों से आयात करली जाती हैं और किसान को बाज़ार के भरोसे छोड़ दिया जाता है। आयातित अनाज आयोग के क्षेत्राधिकार में नहीं है, इसलिए आयोग इस पर कोई टिप्पणी भी नहीं करता। कमोबेश यही स्थिति बाकी फसलों की भी है, कपास की खरीद भी तब होती है जब विदेशों से खरीद के आदेश मिले होते हैं, अन्यथा सीसीआई हाथ पर हाथ रखे बैठी रहती है। इसका ताजा उदाहरण है इस वर्ष सीसीआई द्वारा राजस्थान से साढ़े 23 हजार, पंजाब से 65 हजार क्विंटल कपास की खरीद की जबकि हरियाणा में खरीद ही नहीं हुई। इसकी तुलना में गत वर्ष राजस्थान से 3 लाख, पंजाब से 5 लाख और हरियाणा से करीब 4 लाख क्विंटल कपास खरीदी गई थी।
दरअसल अभी तक केन्द्रीय कृषि आयोग के आधे-अधूरे ढांचे में सिर्फ प्रशासनिक अधिकारी तथा राजनीतिक लोग ही शामिल हैं। इसमें कृषि विशेषज्ञों, किसानों तथा प्रदेशों का समुचित प्रतिनिधित्व नहीं है। कहने को इसमें एकाध किसान प्रतिनिधि भी होते हैं लेकिन वे या तो फार्म-संस्कृति वाले होते हैं या राजनेताओं के चहेते। आयोग की समितियों पर दूसरा गम्भीर आरोप यह है कि ये कभी भी मुख्यालयों से 150-200 किलोमीटर दूर जाकर सीमांत किसानों से उनका दु:ख-दर्द और कृषि लागत पूछने की जहमत नहीं उठाती। आवश्यकता इस बात की है कि सरकार अगर किसान को उसकी जोत पर न्यूनतम आमदनी की गारंटी नहीं दे सकती तो उसे चाहिए कि कम से कम 10 साल पहले के किसी भी कालखंड मूल्य को मानक मान ले और जिस अनुपात में आवश्यक वस्तुओं के बाजार भाव बढ़े हैं, उसी के अनुरूप किसानों के उत्पाद के भी दाम तय किए जाएं।
किसान अपनी दैनिक जरूरत की कुछ ही चीजें तो पैदा कर पाता है बाकी तो उसे भी बाजार से ही खरीदनी पड़ती है। प्रसंगवश यह जानकरी चौंकाने वाली होगी कि वर्ष 1967 में एक क्विंटल गेंहू के बदले 121 लीटर डीजल आ जाता था लेकिन वर्तमान में यह सिर्फ 24 से 28 लीटर ही मिल पाता है। उस वक्त ढाई क्विंटल गेंहू में एक तोला सोना खरीदा जा सकता था लेकिन आज देश का 95 प्रतिशत किसान अपना सारा गेंहू बेचकर भी एक तोला सोना खरीदने के बारे में नहीं सोच सकता। यह हाल तब है जब शुरु से ही उपज का दाम लगाने की जिम्मेदारी सरकार ने ले रखी है। आयोग की सिफारिशों के आधार भी परस्पर विरोधी हैं।
आयोग समर्थन मूल्य की घोषणा जिन आधारों पर करता है वे कुछ इस तरह हैं- (क) उत्पादन की लागत, (ख) उत्पादन के आदान मूल्यों में परिवर्तन, (ग) बाजार में मूल्यों की स्थिति, (घ) उपज की मांग व आपूर्ति, (ड) उद्योगों पर होने वाले नकारात्मक/सकारात्मक प्रभाव, (च) सामान्य मूल्य स्थिति पर प्रभाव, (छ) किसान द्वारा चुकाए गए और प्राप्त किए गए मूल्यों का अनुपात, (ज) अंतरराष्ट्रीय मूल्य स्थिति, (झ) आम लोगों के जीवनयापन पर मूल्यों पर प्रभाव।  सिफारिश के ये आधार परस्पर विरोधी, बिखरे हुए एवं अस्पष्ट हैं। आयोग इनमें से किन्हीं भी बिन्दुओं को अधिक महत्त्व देकर अपनी सिफारिश कर सकता है। इन कृषि मूल्यों को निश्चित करने के लिए कृषि उत्पादन हेतु किए जाने वाले श्रम के पारिश्रमिक, प्रयुक्त उपकरणों व उनकी घिसावट पर किए जाने वाले खर्च, कृषि में लगने वाली पूंजी तथा भू-पूंजी और इन दोनों के ब्याज की ओर ध्यान नहीं दिया गया। आयोग तब तक कृषि उपजों का सही आकलन कर ही नहीं सकता, जब तक प्राकृतिक प्रकोप जैसे सूखा, बाढ़, ओले, बीमारियां, बेमौसमी बरसात आदि जोखिमों के सम्बंध में विचार कर लागत का लेखा तैयार नहीं किया जाता। वास्तविकता तो यह है कि आयोग इन आपातकालिक आपदाओं को महत्त्व ही नहीं देता। ऊपर से उत्पादन लागत के आंकड़े भी दो वर्ष पुराने होते हैं, इस बीच लागत काफी बढ़ चुकी होती है।
समर्थन मूल्य की सिफारिश करते समय किसान को लागत पर कितना प्रतिशत लाभ दिया जाए, इसके लिए भी कोई ठोस दिशा-निर्देश आयोग के पास नहीं है। उदाहरण के लिए देखें कि आयोग ने 1967-68 में गेहूं की लागत 50.02 रुपए प्रति क्विंटल मानकर 76.00 रुपए प्रति क्विंटल का मूल्य तय किया जिसमें किसान को करीब 52 प्रतिशत लाभ था। जो बाद के वर्षों में घटकर 1975-76 में 5.68 प्रतिशत, 1977-78 में 3 प्रतिशत, 1980-81 में 4.25 प्रतिशत तथा 1983-84 में 10 प्रतिशत रह गया। गत वर्ष 2010-11 के लिए गेहूं का समर्थन मूल्य 1100 रुपए से बढ़ाकर 1120 रुपए किया गया था, जिसमें किसान को लाभ मात्र 1.81 प्रतिशत ही है, जबकि इस वर्ष कृषि में प्रयुक्त होने वाली सामग्री के मूल्य में वृद्धि 10 प्रतिशत से अधिक हो चुकी थी। आयोग द्वारा सिफारिश के आधार पर घोषित समर्थन मूल्य सामान्यतया बाजार भाव से नीचे ही रहते हैं। गजब तब होता है जब समर्थन मूल्य से दो गुने या उससे भी अधिक मूल्यों पर अनाजों का विदेशों से आयात किया जाता है।
इस ढांचे में सुधार के लिए हर प्रदेश के गैर-सरकारी कृषि विशेषज्ञों को, जिनकी संख्या कुल संख्या की एक तिहाई हो तथा पंजीकृत किसान संगठनों के प्रतिनिधियों की संख्या भी कुल संख्या की एक तिहाई तथा शेष सरकार द्वारा नामांकित व्यक्तियों को मिलाकर मूल्य आयोग के गठन किए जाने पर लागत मूल्य का निर्धारण वास्तविकता के निकट होने की संभावना बनेगी। सरकार किसी भी एक वर्ष को आधार वर्ष मानकर सभी प्रकार की उपजों का लागत मूल्य सभी प्रभावित पक्षों को सुनवाई का अवसर देकर तय करे, फिर उस लागत को मूल्य सूचकांक के साथ जोड़ दे, जिससे प्रतिवर्ष न्याय-संगत समर्थन मूल्य घोषित करने की कारगर पहल हो सके।
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इस खबर से संबंधित फोटो फाइल संख्या 26आरईडब्ल्यूपी. 17 में है।
-हुड्डा कमेटी की रिपोर्ट जनता के बीच रखेगी भाजपा
-राहुल गाधी के दौरे के बाद जोर पकड़ेगा मुद्दा
मुख्य संवाददाता, रेवाड़ी : लोकसभा चुनाव पास आते ही स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट बहस का मुद्दा नहीं बल्कि चुनावी मुद्दा बन गई है। भाजपा जहा कुछ दिन पहले इस मुद्दे पर साकेतिक रेल रोको आदोलन कर चुकी है, वहीं राहुल गाधी की तीन दिन पूर्व हुई किसान संसद के बाद भाजपा इस मुद्दे को अधिक धार देने की तैयारी में है।
भाजपा किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश धनखड़ खुद इस बात को मानते है कि स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू न करना काग्रेस को महगा पड़ेगा। बुधवार को रेवाड़ी आए धनखड़ ने पार्टी के कुछ नेताओं के साथ रिपोर्ट को लेकर मंत्रणा भी की। धनखड़ ने किसानों से जुडे़ 17 अहम बिंदुओं को सूचीबद्ध करके पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को भी भेजा है।
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क्या है स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट
स्वामीनाथन आयोग ने वर्ष 2006 में अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। रिपोर्ट में किसानों को फसल की उत्पादन लागत जमा 50 प्रतिशत मूल्य देने की संस्तुति की थी।
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क्या है हुड्डा कमेटी की रिपोर्ट
केंद्र सरकार ने मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की अध्यक्षता में चार राज्यों के मुख्यमंत्रियों की एक कमेटी गठित की थी। इस कमेटी में बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार, पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल व पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य शामिल थे। इसे ही भाजपा हुड्डा कमेटी कह कर केंद्र पर हमला कर रही है। हुड्डा कमेटी ने अपनी सिफारिश में स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू करने के साथ ही एक कदम आगे बढ़ाते हुए यह भी कहा था कि प्राकृतिक आपदा में फसल बर्बाद होने पर किसानों को 10 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजा दिया जाए। यह रिपोर्ट दिसंबर 2010 में सौंपी गई थी।
भाजपा के दोनो हाथों में लड्डू
भाजपा दोनों हाथों में लड्डू रखकर चल रही है। बेशक काग्रेस शासित राज्य के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की अध्यक्षता वाली कमेटी खुद आगे बढ़कर स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट की पैरवी कर चुकी है, परतु भाजपा चित व पट दोनों अपनी मानकर चल रही है। भाजपा का मानना है कि यदि काग्रेस इस रिपोर्ट को लागू करती है तो इसे पार्टी खुद के दबाव का परिणाम बताकर प्रचारित करेगी तथा यदि काग्रेस इसे लागू नहीं करती है तो भाजपा इस मुद्दे को लोकसभा चुनाव में काग्रेस को घेरने के लिए इस्तेमाल करेगी।
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'भाजपा सत्ता में आने पर स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करेगी। यह हैरत की बात है कि कृषि लागत एवं मूल्य आयोग जिस आधार पर मूल्य निर्धारित करता है, उसमें किसान की लागत का आधार ही शामिल नहीं है। हम सरकार को आगाह करते है कि बिना देरी के स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करे। राहुल गाधी हरियाणा का दौरा करके गये है, लेकिन उनका हाथ किसानों के लिए खाली रहा है। '
- ओम प्रकाश धनखड़, राष्ट्रीय अध्यक्ष किसान मोर्चा

महिलाओं पर अत्याचार, शासन चुप क्यों

महिलाओं पर अत्याचार, शासन चुप क्यों

महिलाओं को घर की इज्जत माना जाता है, उनकी सुरक्षा को इज्जत का प्रश्न माना जाता हे।
यह महिला सुरक्षा के लिये बेहद जरूरी है। तब सरकार चलाने वाले राजनैतिक दल और प्रशासन तंत्र के अधिकारीगण इसे अपनी इज्जत का सवाल क्यों नहीं बनाते ? कम ज्यादा यह प्रश्न सभी जगह है और इस तरह के कृत्यों पर सांठगांठ नहीं वरन कठोर सजा कीे उदाहरण प्रस्तुत किये जानें चाहिये ! कानून में नहीं सरकार चलाने वालों की कमजोरी से यह सब हो रहा ह।।


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देह व्यापार से मना करने पर महिला के स्तन काटे
Sun, 23 Mar 2014
http://www.jagran.com/news/national-cuted-woman-breast-after-refusing-prostitution-11179595.html
थाणे, [महाराष्ट्र]। स्तब्ध कर देने वाली एक घटना में 24 वर्षीय एक महिला के देह व्यापार से मना करने पर उसके स्तन काट दिए गए। कुंभरवाड़ा-भिवंडी के पुलिस इंस्पेक्टर राजन सास्ते ने बताया, 'पीड़ित महिला को गुजरात से भिवंडी लाकर एक वेश्यालय में बेच दिया गया। उससे जबरदस्ती देह व्यापार कराने की कोशिश की गई।'जब उस महिला ने वेश्यालय की महिला संचालक की बात नहीं मानी तो उसके स्तन काट डाले गए। पुलिस के अनुसार, महिला के शरीर पर कई जगह लोहे की छड़ से दागे जाने के भी निशान हैं, आरोपियों ने उसके दांत भी तोड़ दिए। बाद में कुछ लोगों ने महिला को बचाया और शहर के आईजीएम अस्पताल ले गए। उसे अब थाणे के जिला अस्पताल स्थानांतरित कर दिया गया है। पीड़िता बोलने की स्थिति में नहीं है।

वेश्यालय की महिला संचालक 34 वर्षीय रूबी को दो पुरुषों के साथ गिरफ्तार कर लिया गया है। दोनों पुरुषों पर पहले से कई मामले दर्ज हैं।
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नौकरी का झांसा दे महिला फैशन डिजाइनर से कराई गई वेश्यावृत्ति
Tue, 07 Jan 2014
http://www.jagran.com/news/national-prostitution-by-a-woman-named-of-job-in-dubai-10992088.html
अकेला (मिड-डे), मुंबई। दुबई में नौकरी का झांसा देकर एक महिला फैशन डिजाइनर से 25 दिनों तक वेश्यावृत्ति कराई गई। पीड़िता ने मुंबई के खार और दुबई के दिएरा पुलिस स्टेशन में इसकी शिकायत दर्ज कराई है।
बेंगलूर की रहने वाली पीड़िता मुंबई के गोरेगांव इलाके में रहती है। एक नामी रीयल एस्टेट कंपनी में काम करने वाली पीड़िता ने फैशन डिजायनिंग में डिप्लोमा भी कर रखा है। लिहाजा, वह फैशन जगत में भी भाग्य आजमा रही थी। शिकायत के मुताबिक, 13 मई, 2013 को एक दोस्त के माध्यम से पीड़िता की मुंबई के खार इलाके में 'मेमसाब' के नाम से बुटीक चलाने वाली अंजलि अग्रवाल से मुलाकात हुई थी। अंजलि ने पीड़िता को बताया कि दुबई में भी उनका एक बुटीक है, जहां उन्हें एक असिस्टेंट मैनेजर की जरूरत है। अंजलि ने पीड़िता को इस काम के लिए कथित तौर पर चार लाख रुपये प्रति महीने वेतन देने का प्रस्ताव दिया। महिला दुबई जाने के लिए राजी हो गई। आरोप है कि अंजलि ने पीड़िता से वीजा, एयर टिकट और वहां रहने पर आने वाले खर्च के तौर पर 10 लाख रुपये भी झटक लिए।
पीड़िता अंजलि के साथ 1 जून, 2013 को दुबई पहुंची, जहां से दोनों को हयात अपार्टमेंट (होटल) ले जाया गया। 3 जून को उसके साथ एक व्यक्ति ने दुष्कर्म किया। इसके बाद 27 जून तक उससे 11 अलग-अलग लोगों ने दुष्कर्म किया। पीड़िता ने अंजलि पर मारपीट करने का भी आरोप लगाया है। पीड़िता के वकील ने हयात होटल से सीसीटीवी फुटेज मांगे हैं। अंजलि ने हालांकि आरोपों को बकवास बताया है।

मुंबई की स्टेज डांसर से हैदराबाद में सामूहिक दुष्कर्म
शिवा देवानाथ। महानगर की एक स्टेज डांसर से हैदराबाद में सामूहिक दुष्कर्म का मामला सामने आया है। पीड़िता ने एक गैरसरकारी संस्था की मदद से वर्सोवा थाने में इसकी शिकायत दर्ज कराई है।
अंधेरी निवासी पीड़िता ने बताया कि गत 30 दिसंबर को उनके इवेंट कोऑर्डिनेटर ने हैदराबाद में शो करने की बात कही। इसके अगले दिन वह हैदराबाद के लिए रवाना हुई, जहां हवाई अड्डे पर उन्हें लेने के लिए चार व्यक्ति आए थे। आरोप है कि चारों उन्हें किसी अंजान जगह पर ले गए और शीतल पेय में नशीला पदार्थ मिलाकर पिला दिया। अचेत अवस्था में सभी ने उसके साथ दुष्कर्म किया और बाद में उसी हालत में मुंबई जाने वाली एक बस में बिठा दिया। पुलिस बस का टिकट बुक कराने वाले इस्माइल शेख की तलाश में जुटी है।



रविवार, 23 मार्च 2014

हमारा नववर्ष हमारे राष्ट्र का राष्ट्रीय गौरव है - डॉ0 प्रमोद कुमार शर्मा



नवसंवतसर पर प्रबुद्धजन विचार गोष्ठि सम्पन्न
चैत्र शुक्ला एकम् को उत्सव पूर्वक मनाने का आग्रह
हमारा नववर्ष हमारे राष्ट्र का राष्ट्रीय गौरव है - डॉ0 प्रमोद कुमार शर्मा

कोटा 23 मार्च। ”भारतीय कालगणना सबसे पुरानी एवं पूर्ण वैज्ञानिक है। यह हमारे राष्ट्र का गौरव एवं स्वाभिमान है। जिस तरह किसी राष्ट्र की पहचान उसकी संस्कृति, भूमि, इतिहास, भाषा, वेशभूषा, ध्वज, राष्ट्रगान इत्यादि से होती है, ठीक उसी प्रकार उस राष्ट्र की कालगणना (केलेण्डर ) भी राष्ट्र की पहचान होती है। हमारा संवतसर हमारे राष्ट्र की पहचान है। क्योंकि इस कालगणना से हमें अपने राष्ट्र का गौरवशाली अतीत का ज्ञान होता है। “ यह कथन मुख्यवक्ता डॉ0 प्रमोद कुमार शर्मा ने ” भारतीय नववर्ष की वैज्ञानिकता “ विषय पर ”नववर्ष उत्सव आयोजन समिति, कोटा महानगर के द्वारा आयोजित प्रबुद्धजन विचार गोष्ठि में व्यक्त किये। गोष्ठि की अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष रामकुमार मेहता तथा विशिष्ट अतिथी समीति के मंत्री युधिष्ठर सिंह एवं संचालन सहमंत्री राजेश कुमार टेलर ने किया। धन्यवाद ज्ञापन सहमंत्री पन्नालाल शर्मा ने किया।

मुख्यवक्ता डॉ0 शर्मा ने अपने सम्बोधन में भारतीय संवत पद्यती को विभिन्न उद्ध्रणों के द्वारा सटीक वैज्ञानिकता और पुरातनता को सिद्ध करते हुये बताया कि संवतसर का उत्सव चिर पुरातन एवं नित्य नूतन के संगम का स्मरण दिलाता है। उन्हांेने कालगणना के महत्व को बताते हुये कहा ‘‘काल बोध के जागरण से, आयु बोध का जागरण होता है, जिससे विस्मृति का विनाश होकर स्मृति वापस मिलेगी, जिससे हमारा राष्ट्रीय स्वाभिमान जागृत होगा, भारत जागृत होगा और फिर से अपनी वैश्विक भूमिका का निर्वहन करेगा।“

डॉ0 शर्मा ने कहा जब चीन, जापान, इण्डोनेशिया, इजराइल, नेपाल सहित अन्य देशों ने अपनी मूल कालगणना को ही स्वीकार किया है, तो हम क्यों नहीं अपनी मूल कालगणना को स्वीकार कर सकते हैं। उन्होने कहा  हमारा नववर्ष चैत्र शुक्ल एकम् अर्थात वर्ष प्रतिपदा से प्रारम्भ होता है, इसे हम राष्ट्रीय स्वाभिमान और आत्म गौरव के रूप में मनायें। यह दिन अनेकों कारणों से पवित्र पावन होते हुये भी राष्ट्रीय स्वाभिमान और सम्मान का उत्सव दिवस है।

समिति के अध्यक्ष रामकुमार मेहता ने बताया कि ” भारतीय काल गणना की संवत पद्धति पूर्णतः वैज्ञानिक एवं सत्य है इसी कारण सम्पूर्ण ब्रम्हाण्ड के शुभ-अशुभ प्रभावों के अनुमान लगाने में यह सक्षम है। भारतीय संवत्सर अनुसंधान हमारी पृथ्वी ही नहीं, वरन् सम्पूर्ण सौर मण्डल के नवग्रहों, हमारी आकाशगंगा के 27 नक्षत्रों, आकाशीय 12 राशियों के क्षेत्रों सहित ब्रम्हाण्ड में कौन कहां गतिमान है, किस भ्रमण पथ पर हैं, किस पर कितना प्रभाव है, यह तक हमारा अध्ययन बताता है। इसी कारण से हमारे समाज जीवन का हजारों - लाखों वर्षों से यह अभिन्न अंग बना हुआ है।’’
समीति के मंत्री युधिष्ठर सिंह ने बताया कि समीति का प्रयास रहेगा कि भारतीय नववर्ष के पवित्र पावन उत्सव को समाज स्वस्फूर्त मनाये।इस  हेतू समीति प्रेरक के रूप में बहु आयामी प्रयास कर रही है।

कार्यक्रम में समिति के संरक्षक चन्द्रदेव प्रसाद, अवधेश मिश्रा, गिरिश शर्मा, राधावल्लभ शर्मा, रामचरण मेहता, बाबूलाल रैनवाल प्रचार प्रमुख अरविन्द सिसोदिया, केवलकृष्ण बांगड़, श्याम गौड़, रमेश विजय, प्रकाश पाठक, सतीश गुप्ता, मुकुट बिहारी गुप्ता, श्रीनाथ सर्राफ, छगन माहुर, हरिनारायण शुक्ला, विजय सेन, गुरमीत सिंह रंधावा, जगदीश वधवा, छुट्टन शर्मा, श्रीकिशन गुप्ता आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किये।



भवदीय
अरविन्द सिसोदिया,
समिति का प्रचार प्रमुख, 9414180151

मोदी पर हमले की साजिश : इंडियन मुजाहिदीन नाकाम



मोदी पर हमले की साजिश नाकाम
Sun, 23 Mar 2014
http://www.jagran.com/news/national-four-im-terrorist-including-wakas-arrested-11178645.html?src=NN-SHE-ART
नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल व राजस्थान पुलिस ने बड़ी आतंकी साजिश को नाकाम करते हुए इंडियन मुजाहिदीन के चार आतंकियों को गिरफ्तार किया है। इनके निशाने पर मुख्य रूप से भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी थे। आतंकियों ने वाराणसी में उनके नामांकन के दौरान हमले की व्यूहरचना की थी, इसके लिए वाराणसी के जिलाधिकारी कार्यालय की रेकी भी की गई थी। मोदी के अलावा आइएम के निशाने पर कांग्रेस व भाजपा के कई अन्य दिग्गज नेता भी थे। गिरफ्तार आतंकियों में आइएम सरगना यासीन भटकल के सहयोगी वकास सहित तीन अन्य शामिल हैं। इनमें से दो आतंकी इंजीनियरिंग के छात्र हैं। दिल्ली के जामिया नगर इलाके से भी कुछ इंजीनियरिंग छात्रों को हिरासत में लिया गया है।

दिल्ली के विशेष पुलिस आयुक्त एसएन श्रीवास्तव ने बताया कि गत 22 मार्च की सुबह पाकिस्तानी नागरिक जियाउर रहमान उर्फ वकास को अजमेर स्टेशन से दबोचा गया। वह साथियों से मिलने मुंबई से ट्रेन द्वारा यहां पहुंचा था। आइएम सरगना यासीन भटकल के साथी वकास ने खुलासा किया कि राजस्थान में आतंकी गुट का नया मॉड्यूल बना है। वह लोकसभा चुनाव में आतंकी हमलों की साजिश और इसके लिए तैयार विस्फोटकों का जायजा लेने यहां आया था। वकास की निशानदेही पर रविवार तड़के जयपुर से महरूफ एवं वकार को जबकि साकिब को जोधपुर से पकड़ा गया। आतंकियों ने राजस्थान मॉड्यूल की मदद से जनसभाओं के दौरान धमाकों की सभी तैयारियां पूरी कर ली थी। उनकी साजिश वाराणसी अथवा दिल्ली में मोदी की सभा में विस्फोट करने की थी। इसके अलावा जयपुर और अजमेर दरगाह क्षेत्र में भी विस्फोट की फिराक में थे। आतंकियों के पास से 25 किलो विस्फोटक, 400 डेटोनेटर, 10 घड़ियां, साढ़े पांच सौ ग्राम बॉल बियरिंग, दो तैयार सर्किट, सौ ग्राम छोटी कील, 10 सर्किट प्लेट, बैट्री, मैग्नीशियम सल्फेट, सोडियम क्लोराइड, ट्रांजिट सर्किट साहित दो लैपटॉप, पेन ड्राइव व जेहादी दस्तावेज जब्त किए गए हैं।

स्पेशल सेल उपायुक्त संजीव यादव के अनुसार, वर्ष 2010 में नेपाल के रास्ते भारत आए वकास की दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मुंबई व हैदराबाद बम धमाकों में तलाश थी। पाकिस्तान में आतंकी गुट लश्कर-ए-तैयबा व जैश-ए-मोहम्मद के शिविरों में प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके वकास को बम बनाने में महारथ हासिल है। उस पर दस लाख रुपये का इनाम भी घोषित था। वकास पटना में नरेंद्र मोदी की रैली में विस्फोट और बोधगया धमाकों के मास्टरमाइंड तहसीन अख्तर उर्फ मोनू के साथ बड़ी आतंकी वारदात की तैयारी में था। तहसीन अभी फरार है।

मकान मालिक को नहीं हुआ शक
जयपुर से गिरफ्तार दो इंजीनियरिंग के छात्र जिस मकान में रहते थे, उसके मालिक सेवानिवृत्त शिक्षक अहमद ने बताया कि युवकों की गतिविधियां देख उन्हें कभी शक नहीं हुआ। वकार और महरूफ सुबह घर से निकल रात 10 बजे वापस आते थे। वे सुबह शाम नमाज भी पढ़ते थे।

उच्च शिक्षा प्राप्त हैं सभी आतंकी
1. जिया उर रहमान उर्फ वकास
उम्र- 25 वर्ष
पता- मुस्तफाबाद, जिला टोबा टेक सिंह, पाकिस्तान।
शिक्षा-फैसलाबाद स्थित कॉलेज से फूड टेक्नोलॉजी में डिप्लोमा।
2. मुहम्मद महरूफ
उम्र- 21 वर्ष
पता- जयपुर
शिक्षा- जयपुर में जगतपुरा स्थित विवेकानंद इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से इंजीनियरिंग का छात्र।
3. मुहम्मद वकार अजहर उर्फ हनीफ
उम्र-21 वर्ष
पता- जयपुर
शिक्षा- जयपुर में सीतापुरा स्थित ग्लोबल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से इंजीनियरिंग का छात्र।
4. साकिब अंसारी उर्फ खालिद
उम्र-25
पता- जोधपुर
शिक्षा- कंप्यूटर कोर्स
पेशा- कंप्यूटर डीटीपी व डिजाइन प्रिंटिंग का काम।

आइएम के निशाने पर आइपीएल मैच भी था
मुंबई। राजस्थान में गिरफ्तार आइएम आतंकी वकास ने खुलासा किया कि वर्ष 2011 में मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेला गया आइपीएल का मैच भी उनके निशाने पर था। इसकी रेकी के लिए वकास ने मुंबई इंडियंस व पुणे वरियर के बीच खेला गया मैच भी देखा था। लेकिन मुंबई पुलिस की सख्त सुरक्षा व्यवस्था के चलते वे कामयाब नहीं हो सके। हालांकि हमले को आगे बढ़ाते हुए 13 जुलाई को मुंबई में तीन सिलसिलेवार धमाके किए जिसमें 21 लोगों की मौत हो गई जबकि 141 लोग घायल हुए थे।

मोदी को खतरा नहीं, सुरक्षा बढ़ाई गई: शिंदेमुंबई। भारतीय जनता पार्टी की चिंताओं को दूर करते हुए गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने रविवार को कहा कि भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के जीवन को किसी तरह का कोई खतरा नहीं है और उनकी सुरक्षा को बढ़ाया गया है।

मोदी सहित भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं पर संभावित खतरे के संबंध में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, भाजपा के एक शिष्टमंडल ने मुझसे मुलाकात की। मैंने बताया कि उन्हें कोई खतरा नहीं है। नरेंद्र मोदी की पटना रैली के बाद मैंने स्वयं उनकी सुरक्षा का स्तर बढ़ा दिया था। शिंदे ने कहा, मोदी को कोई खतरा नहीं है। हमने सभी तरह की सुरक्षा व्यवस्थाएं कर दी हैं। चाहें भाजपा हो या सोशलिस्ट पार्टी या बसपा या कांग्रेस। जिन लोगों के जीवन को खतरा है, उन्हें हमने सुरक्षा मुहैया कराई है। गौरतलब है कि रवि शंकर प्रसाद के नेतृत्व में भाजपा के एक शिष्टमंडल ने गत शुक्रवार को शिंदे से मुलाकात कर लोकसभा चुनाव के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया था। प्रसाद ने कहा था कि कुछ अराजक तत्व चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करना चाहते हैं।

गुरुवार, 20 मार्च 2014

केंद्र में बीजेपी की अगुवाई में बनेगी अगली सरकार-मूडीज



मूडीज का अनुमान, केंद्र में बीजेपी की अगुवाई में बनेगी अगली सरकार
भाषा [Edited By: पीयूष शर्मा] | नई दिल्‍ली, 20 मार्च 2014

यूपीए सरकार के सत्ता से बाहर होने का अनुमान जताते हुए शोध कंपनी मूडीज एनालिटिक्स ने आज अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि आम चुनावों के बाद अगली सरकार बीजेपी की बन सकती है.

'एशिया-प्रशांत परिदृश्य: वर्ष की धीमी शुरुआत' शीषर्क से जारी रिपोर्ट में मूडीज एनालिटिक्स ने कहा है कि मौजूदा कांग्रेसनीत सरकार निराशाजनक रहे दूसरे कार्यकाल के बाद सत्ता से बाहर हो सकती है. अर्थव्यवस्था कमजोर है और व्यापार विश्‍वास तथा निवेश उस स्तर से काफी नीचे है जो वास्तव में होना चाहिए.

रिपोर्ट के अनुसार नई सरकार बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी की अगुवाई में बन सकती है. नौ चरणों में होने वाला लोकसभा चुनाव सात अप्रैल को शुरू होकर 16 मई को मतों की गिनती का काम होने के साथ पूरा होगा. मौद्रिक नीति का जिक्र करते हुए मूडीज एनालिटिक्स ने कहा कि भारत और इंडानेशिया ने चालू खाते के घाटे को पूरा करने और अपनी मुद्रा के समर्थन में ब्याज दरों में वृद्धि की है.

ये कदम काफी हद तक सफल रहे हैं. रिपोर्ट के अनुसार भारत का मौद्रिक कार्यक्रम ज्यादा सफल है. सोने के आयात पर पाबंदी के साथ उच्‍च ब्याज दर से चालू खाते के घाटे को नियंत्रित करने में सफलता मिली है.

देश का चालू खाते का घाटा 2013-14 की चौथी तिमाही में घटकर जीडीपी का 0.9 प्रतिशत रहा, जो एक वर्ष पूर्व इसी तिमाही में 6.5 प्रतिशत रहा था.

मंगलवार, 18 मार्च 2014

प्रशिद्ध होली के फिल्मी गीत



प्रशिद्ध होली के फिल्मी गीत
1 ‘होली के दिन दिल खिल जाते हैं, रंगों में रंग मिल जाते हैं।’ शोले का सुपरहिट गीत
2 ‘होली आई रे कन्हाई’ मदर इंडिया का सुपरहिट गीत
3 ‘आज ना छोड़ेंगे’ कटी पतंग  का सुपरहिट गीत
4  अंग से अंग लगाना सजन .. डर का सुपरहिट गीत
5  होली खेले रघुबीरा.. बागबान का सुपरहिट गीत
6  अरे जा रे हट नटखट- नवरंग का सुपरहिट गीत
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* 'मदर इंडिया' का 'होली आई रे'।

* 'फागुन' का 'पिया संग खेलो होरी व फागुन आयो रे'

* 'कटी पतंग' का 'आज न छोड़ेंगे'।

* 'जख्मी' फिल्म का 'आई-आई रे होली'।

* 'नवरंग' का 'आया होली का त्योहार'।

* 'कोहिनूर' का 'तन रंग लो ली आज मन रंग लो।'

* 'आपकी कसम' का 'जय-जय शिवशंकर'।

* 'आखिर क्यों' का 'सात रंग में खेल रही है।'

* 'शोले' का 'होली के दिन दिल खिल जाते हैं।'

* 'सिलसिला' फिल्म का 'रंग बरसे भीगे चुनरवाली रंग बरसे'।


बिना रंग और भांग के तो होली होती ही नहीं और जब होली के जोश, उमंग, हुड़दंग और अबीर-गुलाल में फिल्मी गानों का रस घुल जाता है  तो यह और भी रंगीन हो जाती है। हिन्दी फिल्मों में होली गानों की भरमार है। याद करते जाएं तो खूब सारे गाने याद आ जाएंगे। आज भी कुछ ऐसे गीत हैं जो होली पर जरूर बजते हैं, जिनकी ताल पर लाल-पीले-हरे-नीले-गुलाबी रंगों में रंगे लोग जब नाचते हैं तो होली का मजा कई गुना बढ़ जाता है। रूपहले पर्दे पर रंग और उमंग के त्योहार होली के गीतों ने सिने प्रेमियों के दिलों पर अपनी अमिट छाप छोड़ी है। आईए, याद करते हैं होली के अवसर पर उन गानों को।

1. होली के गीतों में लीजेंड ऑफ हिंदी सिनेमा शोले के गीत ‘होली के दिन दिल खिल जाते हैं रंगों में रंग मिल जाते हैं ..’ के बिना कोई होली पूरी नहीं होती। जिसमे धर्मेंद्र-हेमा समेत पूरा गांव मस्ती में झूमते हुए गाते हैं। इस गाने की धुन और बोल आज भी लोगों को काफी लोकप्रिय हैं।

होली के दिन दिल खिल जाते हैं रंगों में रंग मिल जाते हैं
गिले शिकवे भूल के दोस्तो दुश्मन भी गले मिल जाते हैं।
होली के दिन दिल ...
फिल्म: शोले (1975)

2.  फिल्मों में होली का रंग बिखेरने वाले अभिनेताओं में बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन का नाम कोई कैसे भूल सकता है। अमिताभ बच्चन और रेखा पर फिल्माए फिल्म ‘सिलसिला’ के गीत ‘रंग बरसे भीगे चुनरवाली रंग बरसे...’ के बगैर होली के त्यौहार का मजा पूरा नहीं हो पाता। इसमें अमिताभ ने भांग का इतना नशा भरा कि लोग आज भी इसे बड़े चाव से सुनते हैं।

रंग बरसे भीगे चुनरवाली, रंग बरसे
ओ रंग बरसे भीगे चुनरवाली, रंग बरसे ...
फिल्म: सिलसिला (1981)

3 . अमिताभ बच्चन और हेमा मालिनी पर फिल्म ‘बागवान’ में फिल्माया गीत ‘होली खेलें रघुवीरा अवध में...’ होली गीतों में अपना विशिष्ट मुकाम रखता है।
होली खेलें रघुवीरा अवध में होली खेलें रघुवीरा
फिल्म: बागवान (2003)

4. फिल्मी पर्दे पर छेड़-छाड़ वाली होली को लोग खासा पसंद करते हैं। फिल्म ‘डर’ का गीत जिसमें शाहरुख खान होली के रंगों से चेहरा छिपाए ढोल बजाते हुए होली समारोह में बिन बुलाए चले आते हैं, आज भी लोगों को गुदगुदाता है। इस गाने के बोल हैं ‘अंग से अंग लगाना पिया हमें ऐसे रंग लगाना’।

अरे जो जी में आए, तुम आज कर लो
चाहो जिसे इन बांहों में भर लो
फिल्म: डर (1993)

5. होली पर एक गाना जो हर चौराहे, गली-मोहल्ले में बजता सुनाई है वह है फिल्म ‘कटी पतंग’  में राजेश खन्ना और आशा पारेख पर फिल्माया गीत ‘आज ना छोड़ेंगे बस हमजोली, खेलेंगे हम होली...’। यह गीत लोगों को प्रेमरस में डूबने को मजबूर कर देता है।

हे...
आज न छोड़ेंगे...
होली, होली है...
फिल्म: कटी पतंग (1970)

6. फिल्म ‘फाल्गुन’ का गीत ‘फागुन आयो रे...’ ने जिस कलात्मकता से होली को पेश किया, वह बेजोड़ है। यह एक ऐसा गीत है, जिसने कई कीर्तिमान स्थापित किए हैं।  यह गीत आज भी होली की मस्ती में चार चांद लगा देता है।

पिया संग खेलूं होली
पिया संग खेलूं होली ,फागुन आयो रे
फिल्म: फाल्गुन (1973)


7. होली का किाक्र हो और महबूब खान की फिल्म ‘मदर इंडिया’ के गीत ‘होली आई रे कन्हाई रंग छलके सुना दे बांसुरी’ की बात ना हो, ऐसा कभी नहीं हो सकता। सुनील दत्त, नरगिस, राजकुमार, हीरालाल और अन्य कलाकारों के साथ फिल्माया गया था। इस गाने की धुन और बोल आज भी लोगों को अच्छे लगते हैं।

होली आई रे कन्हाई,रंग छलके सुना दे बासुरी
होली आई रे होली आई रे..
फिल्म: मदर इंडिया (1957)

8. वी शांताराम की फिल्म ‘नवरंग’ में भी होली का एक बेहद खूबसूरत गीत था, ‘जा रे नटखट ना खोल मेरा घूंघट पलट के दूंगी आज तुझे गाली रे, मोहे समझो ना तुम भोली भाली रे’। इसमें संध्या ने पर्दे पर नायक और नायिका दोनों का किरदार इतनी खूबसूरती से निभाया था कि आज भी यह गीत जब भी बजता है तो सारा नकाारा आंखों के सामने आ जाता है।

अरे जा रे हट नटखट,ना खोल मेरा घूंघट,पलट के दूंगी आज तुझे गाली रे।
मुझे समझो ना तुम भोली-भाली रे।
.फिल्म: नवरंग (1959)

9. फिल्म ‘कोहिनूर’ में ट्रेजिडी किंग दिलीप कुमार और मीना कुमारी ने जब ‘तन रंग लो जी आज मन रंग लो’ गाया तो लगा होली को एक नयी अभिव्यक्ति मिली। इस गीत के बिना होली गीत की कल्पना ही नहीं की जा सकती है।

तन रंग लो जी अजी मन रंग लो तन रंग लो...
तन रंग लो जी अजी मन रंग लो तन रंग लो...
फिल्म: कोहिनूर (1960)

10. विपुल शाह की फिल्म ‘वक्त’ में अक्षय कमार व प्रियंका चोपड़ा के चुलबुले अभिनय और अमिताभ बच्चन के धमाल से ‘डू मी ए फेवर, लेट्स प्ले होली’ गीत यादगार बन गया। यह गीत होली पर युवाओं की खास पसंद रहता है और इसकी धुन पर होली पर वे खूब नाचते हैं।

डू मी ए फेवर लेट्स प्ले होली,
रंगों में है प्यार की बोली
फिल्म: वक्त (रेस अगेंस्ट टाइम) (2005)

रविवार, 16 मार्च 2014

भक्त प्रहलाद : Bhagat Prhlad





भक्त प्रहलाद जी : Bhagat Prhlad

आदिकाल में दैत्य तथा देवता भारतवर्ष में नवास करते थे| उत्तराखण्ड में श्री राम चन्द्र के अवतार से पूर्व भक्त प्रहलाद का जन्म अत्याचारी दैत्य राजा हिरनाक्श के शासनकाल में हुआ| इस भक्त की महिमा अपरंपार है| गुरुबाणी में अनेक ऐसी तुकें हैं जिनमें भक्त प्रहलाद का नाम विद्यमान है| वह राम नाम का सिमरन करता था| उस समय 'राम' का अर्थ-ईश्वर सर्व शक्तिमान है, से जाना जाता था जिसकी महिमा वेद भी गाते हैं|

प्रहलाद की कथा जिसका वर्णन पुराणों में भी आता है, उसका वर्णन इस तरह है-एक कश्यप नाम ऋषि था| वह घोर तपस्या करता था| घने जंगलों में तपस्या करने के बाद उसका मन जंगल छोड़कर मानव जीवन की तृष्णाओं की ओर आकर्षित हुआ| सामजिक बंधनों की लालसा में घूमते हुए उसका मन 'दिती' नाम की सुन्दर और नव-यौवन कन्या को देखकर डोल गया| उसने दिती से विवाह करने का प्रस्ताव रखा, जिसे दिती ने स्वीकार कर लिया| अपने माता-पिता की स्वीकृति से दिती ने कश्यप ऋषि से विवाह रचा लिया|

कुछ समय के बाद दिती के गर्भ से दो पुत्रों और एक पुत्री का जन्म हुआ| पुत्रों का नाम हिरण्यकशिप तथा हिरनाक्श और पुत्री का नाम होलिका था| बड़े होने पर दोनों पुत्रों ने तीनों लोकों में हाहाकार मचाकर राज कायम कर लिया| एक दिन हिरण्यकशिप के अत्याचार को देखकर श्री विष्णु भगवान ने विराट रूप में हिरण्यकशिप का वध कर दिया| उसकी मृत्यु से डरकर उसके भाई हिरनाक्श ने सोचा कि विराट भगवान कहीं उसका भी वध न कर दें, इसलिए वह काफी भयभीत हो गया| विराट क्योंकि देवता तथा हिरनाक्श दैत्य था, देवताओं से मुकाबला करना बड़ा कठिन था लेकिन अपने भाई हिरण्यकशिप के वध का प्रतिशोध लेने के लिए हिरनाक्श क्रोधित होकर मार्ग ढूंढने लगा| अन्त में उसने ब्रह्मा जी को प्रसन्न करके वर प्राप्ति के लिए घोर तप आरम्भ कर दिया| आंधी, वर्षा, बर्फ, गर्मी आदि सहन करते हुए तप भी इतना कठिन किया कि इन्द्र जैसे देवता घबरा गए|

इन्द्र ने हिरनाक्श की राजधानी पर हमला करके लूटमार मचा दी, जिनमें अनेक दैत्य मारे गए और हिरनाक्श की गर्भवती पत्नी किआधू को लेकर इन्द्र देवता स्वर्ग लोक चल पड़ा| जब इन्द्र हिरनाक्श की पत्नी किआधू को लेकर जा रहा था तो मार्ग में नारद मुनि जी उसको मिल गए| नारद मुनि जी त्रिकालदर्शी थे, उन्होंने अपनी दिव्य दृष्टि से देखा कि किआधू ऐसे बालक की मां बनने वाली है जिसका सितारा बहुत ही उज्ज्वल है और वह भक्त बनेगा| नारद मुनि ने इन्द्र को कहा-हे देवराज! लड़ाई तो पुरुषों से होती है, स्त्री पर हाथ उठाना उचित नहीं है| यह स्त्री निर्दोष है, निर्दोष स्त्री को कष्ट देना भगवान का अपमान करना है, इसलिए तुम इसको छोड़ दो|

पहले तो इन्द्र बेकार की बातें करने लगा, फिर उसको नारद मुनि की महिमा और दिव्य दृष्टि का ध्यान आया तो उसने हिरनाक्श की पत्नी किआधू को छोड़ दिया| नारद मुनि किआधू को अपने आश्रम में ले गए और अपनी पुत्री की तरह उसकी देखभाल की|

दैत्य कन्या और हिरनाक्श दैत्य की पत्नी किआधू नारद मुनि के आश्रम में रही तो उसका जीवन आचरण बिल्कुल ही बदल गया, वह भक्ति और हरिनाम का जाप करने लगी| नारद मुनि भी उसको ज्ञान की बातें सुनाया करते थे| नारद मुनि के ज्ञान का प्रभाव हिरनाक्श की पत्नी के गर्भ में पल रहे बच्चे पर भी पड़ा| कुछ दिनों के बाद किआधू ने नारद मुनि के आश्रम में ही एक सुन्दर पुत्र को जन्म दिया| जिसका नाम प्रहलाद रखा गया| इस बारे भाई गुरदास जी फरमाते हैं :-

घरि हरणाखस दैत दे कलरि कवलु भगतु प्रहिलादु|
पढ़न पठाइआ चाटसाल पांधे चित होआ अहिलादु|
सिमरै मन विचि राम नाम गावै सबदु अनाहदु नादु|
भगति करनि सभ चाटढ़ै पांधे होइ रहे विसमादु|
राजे पासि रुआइआ दोखी दैति वधाइआ वादु|
जल अगनी विचि घतिआ जलै न डुबै गुर परसादि|
कढ़ि खड़गु सदि पुछिआ कउणु सु तेरा है उसतादु|
थंम पाड़ परगटिआ नर सिंघ रूप अनूप अनादि|
बेमुख पकड़ि पछाड़िअनु संत सहाई आदि जुगादि|
जै जै कार करनि ब्रहमादी |२|

भाई गुरदास जी के वचन अनुसार वीराने में कंवल का फूल खिला, दैत्य के घर भक्त पैदा हुआ|

हिरनाक्श दैत्य ने घोर तप किया तो उसके घोर तप को देखकर ब्रह्मा जी प्रगट हुए और उसके कान में कहा-'तप प्रवान' मांग लो जो वार मांगना है|

यह सुनकर हिरनाक्श ने अपनी आंखें खोलीं और ब्रह्मा जी को अपने समक्ष खड़ा देखकर कहा-'प्रभु! मुझे केवल यही वर चाहिए कि मैं न दिन में मरूं, न रात को, न अंदर मरूं, न बाहर, न कोई हथियार काट सके, न आग जला सके, न ही मैं पानी में डूब कर मरूं, सदैव जीवित रहूं|'

ब्रह्मा, हिरनाक्श दैत्य की यह बात सुनकर बड़े आश्चर्यचकित हुए| उन्होंने सोचा कि यह दैत्य है इसको अगर ऐसा वर दे दिया तो यह विपरीत बुद्धि वाला बड़ी ही खलबली मचाएगा| पर अब क्या करें? वचन किया था और उसका तप भी पूरा हो गया है| इसलिए उन्हें वर देना ही पड़ा| 'तथास्तु' कह कर ब्रह्मा जी अन्तर्ध्यान हो गए| हिरनाक्श उठकर खड़ा हो गया, उसे अहंकार हो गया| उसके अहंकार से सारा देव लोक घबरा गया|

वार प्राप्त करके हिरनाक्श अपनी राजधानी में पहुंचा| उसी समय नारद मुनि जी भी उसकी पत्नी किआधू और पुत्र प्रहलाद को लेकर वहां पहुंचे| नारद मुनि ने हिरनाक्श को सारी बात बताई कि इन्द्र देव ने उसकी राजधानी पर हमला करके लूट मार की है और उसको तहस-नहस कर दिया है| नारद मुनि की बात सुनकर हिरनाक्श को बहुत क्रोध आ गया| उसने अपने सारे दैत्यों को जो छिपे हुए थे एकत्रित किया और उनको अपने तप की कथा सुनाई| हिरनाक्श से यह सुनकर दैत्यों का साहसबढ़ गया| हिरनाक्श ने कहा-चलो! हम सब दैत्य एकत्रित होकर देवताओं से बदला लेंगे| तुम में से जो भी मर जाएगा वह मेरी तप शक्ति से जीवित हो जाएगा|

तब हिरनाक्श ने अपने सब दैत्यों को लेकर देव लोक पर अपनी सेना लेकर देव लोक पर अपनी सेना लेकर देवताओं की पुरियों पर हमला कर दिया| सबसे बड़ा हमला इन्द्रपुरी पर किया गया| इन्द्र देव हिरनाक्श का मुकाबला न कर सका और अपनी रानियों तथा देव दासियों सहित ब्रह्म लोक की तरफ भाग गया| हिरनाक्श ने सारी इन्द्रपुरी उजाड़ दी| देवताओं की ऐसी मार-काट की, जैसी कि किसी ने देखा न हो| अनेक देवताओं को अंगहीन कर दिया गया| इन्द्र की सेना को नष्ट करके, इन्द्र पुरी को लूट कर, अनेक अप्सराओं को अपने कब्जे में करके हिरनाक्श अपनी राजधानी में लौट आया| उसने आते ही अपने राजधानी में ढिंढोरा पिटवा दिया कि कोई भी स्त्री-पुरुष किसी देवता या भगवान का नाम न ले - बस केवल यहीं जाप किया जाए कि - "जले हिरनाक्श! हरे हिरनाक्श! थले हिरनाक्श! सब शक्तियों के मालिक हिरनाक्श ही हिरनाक्श!"

सभी देवता घबरा कर भयभीत हो गए| उनकी बर्बादी का समय आ गया| सारे प्रमुख देवता भगवान विष्णु जी के पास फरियाद लेकर गए और जा कर पुकार की-हे प्रभु! आपकी महिमा तो अलोप हो रही है| सभी देवी-देवताओं का नाम मिटाया जा रहा है| विचार कीजिए इस तरह धर्म और नेकी अलोप हो जाएगी तथा अधर्म, पाप और शैतानी शक्तियां प्रबल हो जाएंगी| कोई उपाय सोचो| दैत्य हिरनाक्श को वर देकर ब्रह्मा जी ने ठीक नहीं किया | सभी देवता मारे जाएंगे|'

विष्णु जी ने ब्रह्मा जी को बुलाया और पूछा कि आप ने हिरनाक्श को ऐसा वर क्यों दिया? सभी देवता भयभीत हैं| तब ब्रह्मा जी ने कहा-'हिरनाक्श ने कठोर तप करके मुझ से ऐसा वर प्राप्त किया है| अब उसकी मृत्यु का कोई उपाय भगवान ही बताएं|'

बहुत सोच-विचार कर विष्णु जी ने कहा, हे देवताओं! घबराओ मत, धर्म ही प्राय: राज करता है, अधर्म की शक्ति राज नहीं करती| हिरनाक्श की मृत्यु का कारण उसका अधर्म तथा अहंकार होगा| हिरनाक्श के घर प्रहलाद नाम का पुत्र हुआ है, उस बालक के हृदय में राम-नाम का प्रकाश होगा| यही विधि हिरनाक्श की मृत्यु का कारण बनेगी, चिंता मत करो| धर्म और अधर्म की लड़ाई आरम्भ हो जाएगी|' यह सुनकर सभी देवता प्रसन्न हो गए| वह अपने-अपने स्थानों की ओर चले गए| उनके जीवन का अंधकार दूर हो रहा था|

विष्णु भगवान ने हिरनाक्श को मारने के लिए अपने प्रयत्न आरम्भ कर दिए| उन्होंने बालक प्रहलाद के हृदय में ज्ञान और भक्ति के दैवी गुण प्रगट कर दिए| जब प्रहलाद छ: वर्ष का हुआ तो उसे पाठशाला पढ़ने के लिए भेजा गया| उस पाठशाला में और भी बहुत से लड़के पढ़ते थे|

पाठशाला के मुख्य अध्यापक  प्रसन्न हुआ कि राजपुत्र प्रहलाद के पढ़ने आने के कारण उसकी बहुत शोभा होगी, उसको बहुत कुछ मिला करेगा तथा उसके जन्म-जन्मांतर की भूख दूर हो जाएगी| उसने बड़ी खुशी-खुशी प्रहलाद को पढ़ाना शुरू किया | आरम्भिक शिक्षा शुरू की | बुनियादी अक्षर पढ़ाने से पहले अध्यापक ने सब बालकों से कहा - सभी कहो कि हिरनाक्श महाराज की जय|

सब ने कहा - 'हिरनाक्श महाराज की जय|'

परन्तु बालक प्रहलाद खड़ा देखता ही रहा| वह चुप रहा| इस तरह कुछ दिन बीत गए| प्रहलाद के अध्यापक ने देखा कि प्रहलाद हिरनाक्श का नाम नहीं लेता| वह नाम लेने के समय चुप कर जाता है| यह सब विष्णु भगवान की ही प्रेरणा थी, उसने लीला खेलनी थी, सो खेलने लग पड़ा|

अध्यापक ने प्रहलाद से प्रेम से कहा-प्रहलाद बेटा! श्री हिरनाक्श महाराज जी का नाम लो|

प्रहलाद बोला गुरु जी! हिरनाक्श तो मेरे पिता जी का नाम है| भला मैं अपने पिता जी का नाम कैसे ले सकता हूं? ऐसा कैसे हो सकता है?

अध्यापक ने कहा - 'यह ठीक है कि वह तुम्हारे पिता हैं, तुम बड़ी तकदीर वाले हो| पर उन्होंने तपस्या के बल पर सभी देवी-देवताओं को जीत लिया है, वह अमर हो गए हैं और कभी मर नहीं सकते| यह उनका ही आदेश है कि भगवान का नाम न लेकर उनका ही नाम लिया जाए - 'श्री हिरनाक्श-जले थले हिरनाक्श|'

यह सुनकर प्रहलाद मुस्करा दिया| विष्णु जी की कृपा से उसकी आत्मा एक वृद्ध ऋषि की तरह ज्ञान प्रकाशमान हो गई| उसको सच्चे धर्म का ज्ञान हो गया और उसकी जुबान पर एक ही नाम आया - "राम नाम......जले थले अग्नि हवा सब में राम-राम......भगवान राम|"

'गुरु जी! देवताओं से ऊपर भी एक भगवान है.....राम को पिता जी ने विजय नहीं किया| इसलिए सब का दाता राम है|' प्रहलाद के मुख से यह बातें सुनकर अध्यापक की आत्मा डर गई, उसने जान लिया कि यह अवश्य ही कोई अवतारी बालक है, भला छ: सात वर्ष का बालक और बातें करे आत्मिक ज्ञान की?

अध्यापक ने प्रहलाद को समझाने का बहुत यत्न किया, मगर प्रहलाद न माना| वह राम नाम जपता रहा| उसने पाठशाला के दूसरे लड़कों को भी राम नाम में लगा दिया| जोर-जोर से राम नाम जपने की धुनें गाई जाने लगीं| प्रभु ने ऐसी लीला रची जिससे हिरनाक्श राजा का ऐसा अपमान हुआ कि अध्यापक डर के मारे तड़प उठा, उसका शरीर थर-थर कांपने लग गया| वह हिरनाक्श दैत्य के क्रोध से डरता था| उसने हिरनाक्श का क्रोध देखा हुआ था, वह किसी की जान तक नहीं बक्शता| उसे पूछने वाला कोई नहीं था| प्रहलाद उसका कहना नहीं मानता था, अध्यापक ने प्रहलाद को मारा-पीटा और डराया-धमकाया, बातों के साथ बहुत समझाया| अंत में एक गुस्से-भरी आवाज़ जो किसी मर्द की लगती थी उसमें अध्यापक को उत्तर मिला-गुरु जी! कुछ भी हो सब राम ही राम है, राम से बड़ा कोई ओर नहीं, राम ने ही दैत्यों को मारना है|

अध्यापक सिर पर पैर रख कर तेज़ी के साथ भाग गया| हिरनाक्श के दरबार में पहुंच कर झुककर प्रणाम करके उसने हाथ जोड़कर कहा, 'महाराज! मैं विवश हूं कहने के लिए, छोटा मुंह और बड़ी बात है, आपका राजपुत्र आपका नाम नहीं लेता, वह तो राम-राम कहता है|'

भगवान की ऐसी लीला हुई कि उस समय अध्यापक के मुंह से निकला 'राम' शब्द हिरनाक्श के दरबार में इतना गूंजा कि उसे अपने कानों में उंगली डालनी पड़ी| उसे क्रोध आ गया| वह क्रोधित हो कर बोला - 'यह नहीं हो सकता......कोई भी मेरे नाम के अतिरिक्त किसी और का नाम न जपे| यदि ऐसा हुआ तो वह जीवित नहीं रहेगा| प्रहलाद से मैं स्वयं पूछूंगा|'

हिरनाक्श के इन शब्दों के साथ दरबार गूंज पड़ा| सब दरबारी और सेवक डर गए और डर से कांप उठे| उनको ऐसा प्रतीत हुआ जैसे भूचाल आया था और दरबार हिल गया| हिरनाक्श ने अपने पुत्र प्रहलाद को बुलाया| उस समय क्रोध से उसका मुंह लाल सुर्ख हुआ पड़ा था| प्रहलाद! तुम्हारे अध्यापक ने शिकायत की है कि तुम मेरा नाम नहीं लेते? हिरनाक्श ने अपने पुत्र प्रहलाद से पूछा|

प्रहलाद ने उत्तर दिया-'आप मेरे पिता हो, पिता जी आप का नाम लेता क्या मुझे शोभा देता है? पिता जी का तो आदर करना चाहिए|' प्रहलाद मुस्कराता हुआ बोलता जा रहा था| वह निर्भय था| वास्तव में प्रहलाद के माध्यम से जगत की महान शक्ति भगवान विष्णु मुस्करा रहे थे|
'यह बात नहीं|' हिरनाक्श बोला|

'और कौन-सी बात है पिता जी?' प्रहलाद ने फिर प्रश्न किया| उसकी छोटी-छोटी आंखों ने दैत्य की मलीन आत्मा की तरफ देखा, काली आत्मा क्रोध और अहंकार से भरी हुई थी|

हिरनाक्श ने फिर कहा - 'राम नाम मत लो| मेरा नाम लो, हिरनाक्श के नाम की माला फेरो|'

यह सुनकर प्रहलाद हंस पड़ा| इतनी जोर से हंसा जैसे कोई बड़ा पुरुष हंसता है, जिसे त्रिलोक का ज्ञान होता है| वह बोला - 'हे राजन! यह आपका अहंकार है| आपने घोर तप करके भगवान से वर लिया है, जिससे आप ने वर लिया है, वही तो मेरे भगवान राम हैं| जिन्हें तीनों लोकों का ज्ञान है|'

'यह नाम मत लो| मैं तुम्हें मार दूंगा|' हिरनाक्श बोला| उसके शरीर को जैसे झटका लगा हो| उसकी जुबान से बड़ी मुश्किल से ही 'राम' शब्द निकल रहा था| पर प्रहलाद खुश था उसके मन में मृत्यु का बिल्कुल भी भय नहीं था| वह प्रसन्नचित खड़ा रहा|

प्रहलाद ने कहा - 'मैं राम का नाम क्यों न लूं! नारद मुनि के आश्रम में ही मैंने यह शिक्षा ली थी, उस समय मैं अपनी माता के गर्भ में था| राम का नाम तो मेरे रोम रोम में बसा हुआ है जिसे मैं कभी नहीं भूल सकता| राम ही सर्वोपरि हैं मेरे लिए|'

'ले जाओ! इसे यहां से ले जाओ| दरिया में डूबा कर मार दो!' हिरनाक्श ने आदेश दिया| अपने ही पुत्र को हिरनाक्श ने शत्रु समझ लिया था|

जब प्रहलाद को हिरनाक्श के दरबारियों ने पकड़ा तो उसका दरबार डोल गया| सभी दरबारी बड़े हैरान हुए| प्रहलाद की मां ने बहुत प्रार्थना की, मगर हिरनाक्श ने उसकी एक भी न सुनी| सारे दरबार में सन्नाटा छा गया, गम की लहर सब ओर फैल गई, मगर प्रहलाद फिर भी मुस्करा रहा था, उसके नेत्रों में अनोखी चमक आ गई|

दैत्य प्रहलाद को पकड़ कर चल पड़े| लेकिन हिरनाक्श के भय से कोई ऊंची सांस भी नहीं लेता था, मगर सबका दिल रो रहा था, क्योंकि मासूम प्रहलाद सबको प्रिय था| वह प्यारी-प्यारी बातें करके सबको अपनी तरफ आकर्षित करता था|

 नदी, जिसे आजकल सतलुज दरिया कहा जाता है, उस समय मुलतान शहर के पास से ही गुजरती थी, मुलतान ही हिरनाक्श का शहर था| वह आधे पंजाब का राजा था|

हाथ-पांव बांधे बिना ही दैत्यों ने प्रहलाद को नदी में फैंक दिया| ऐसे फैंका जैसे कोई भारी पत्थर फैंका हो|

मगर धन्य है प्रभु! प्रहलाद का राम जो अदृश्य है, सर्वशक्तिमान हैं, सर्वव्यापक हैं, वह पहले ही वहां पहुंच गए| उन्होंने अपने भक्त को हाथों में उठा लिया और उसके प्राणों की रक्षा की|

'जुग जुग भक्त उपाइआ, पैज रखता आया राम राजे|'

प्रहलाद बच गया और किनारे पर आ गया| प्रहलाद को किनारे पर आया देखकर दैत्य उसकी तरफ दौड़े| प्रहलाद मुस्कराया| दुष्ट हिरनाक्श को मारने के लिए ही भगवान ने यह कौतुक रचा|

मासूम बालक समझ कर दैत्यों ने सर्व शक्तिमान भगवान को फिर पकड़ लिया| उसके शरीर से भारी पत्थर बांध कर फिर दरिया में डुबोया| प्रहलाद पहले नीचे गया, फिर तुरन्त ही ऊपर आ गया, उस समय उसके शरीर के साथ कोई पत्थर नहीं था| वह टूट कर नीचे ही रह गया| दैत्य हैरान हो गए| वह भयभीत हो गए| वे समझ गए कि यह सब किसी मायावी शक्ति का खेल है| उनको कुछ ऐसा ही दिखाई दिया जैसे अनोखी शक्तियां उन्हें डरा रही थीं| वह प्रहलाद को छोड़ कर भाग गए| हिरनाक्श को जाकर सारी बात बताई कि - वह पानी में नहीं डूब रहा, पत्थर से भी तैर जाता है| राम! राम! बोलता जाता है|

हिरनाक्श ने दैत्यों को बहुत डांटा तथा दूसरे दैत्यों को आदेश दिया कि जाओ इसे उंचे पर्वत से नीचे गिरा दो| मैं तुम्हें शक्ति देता हूं| उसे उठा कर ले जाओ|

उन दैत्यों ने ऐसा ही किया| वह उसे उठा कर पर्वत पर ले गए| जब उसे पर्वत की चोटी से नीचे गिराने लगे तो प्रहलाद ने 'राम' कहा| 'राम' का नाम लेते ही प्रहलाद को ऐसा प्रतीत हुआ कि जैसे वह हवा में झूल रहा हो| वह धीरे-धीरे नीचे आया और धरती से ऊपर अपने पैरों के बल खड़ा हो गया| उसे तनिक भी चोट न आई| राम ने अपने भक्त की फिर से लाज रख ली|

पर्वत में ऐसी बिजली की शक्ति उत्पन्न हुई कि वहां पर खड़े दैत्य वहीं पर गिर कर राख हो गए| राम का प्यारा भक्त प्रहलाद अपने पांव पर चलता हुआ अपनी राजधानी में आ गया| वह फिर राम नाम का गुणगान करने लगा| अब तो वह और भी ऊंचे स्वर में गाता| सारा शहर, पशु-पक्षी और वहां की ईमारतें भी 'राम नाम' का गुणगान करने लगी| हिरनाक्श अब भयभीत हो गया| उसने क्रोध में आ कर प्रहलाद को पकड़ कर पीटना शुरू कर दिया| पर प्रहलाद मुस्कराता रहा| उसको तनिक भी क्रोध न आया, न ही उसे कोई दर्द हुआ|

'होलिका' हिरनाक्श की बहन थी| उसे वर प्राप्त था कि अग्नि उसे जला नहीं सकेगी| उसको मायावी शक्ति देकर हिरनाक्श ने कहा - 'इस बालक को गोद में लेकर चिता में बैठ जाओ, चिता में आग लगेगी और प्रहलाद जल जाएगा, मगर तुम मायावी शक्ति के कारण नहीं जलोगी| ऐसी औलाद से तो बे-औलाद होना अच्छा है|'

होलिका ने ऐसा ही किया| वह प्रहलाद को गोद में लेकर चिता में बैठ गई| जब चिता को आग लगाई गई तो आग ने उल्टा उसे ही पकड़ लिया| होलिका अग्नि की लपटों से चिल्लाने लगी| प्रहलाद पर अग्नि का कोई प्रभाव न पड़ा और वह हंसता रहा| वह जैसे-जैसे हंसता गया वैसे-वैसे ही अग्नि की लपटें तेज होती गईं| जैसे-जैसे अग्नि तेज होती गई होलिका आग में चिल्लाती रही| जलती आग से वह बाहर न आ सकी| होलिका अग्नि में जल कर राख हो गई| दैत्य और देवता सब हैरान हो गए| धर्म का ऐसा खेल देखकर भक्त अत्यंत प्रसन्न हुए| प्रहलाद आग की लपटों में से बचकर कुशलपूर्वक निकल आया|

कढि खड़ग सद पुछिआ कउण सु तेरा है उस्ताद||
थंम पाड़ प्रगटिआ नरसिंघ रूप अनूप अनाद||

दैत्य हिरनाक्श अपनी बहन होलिका के जलने पर बड़ा दुखी हुआ और उसकी कोई पेश न चल सकी| पापी, दुष्ट, अहंकारी हिरनाक्श ने आग बबूला होकर राम के भक्त प्रहलाद को लोहे के तपते हुए खम्भे के साथ बांध दिया| तपते खम्भे से भक्त प्रहलाद पर कोई असर न हुआ और वह मुस्कराने लगा| गुस्से से हिरनाक्श लाल-पीला हो गया, उसी तरह जैसे डूबता सूर्य लाल होता है| उसका अंतिम समय आ चुका था|

'बताओ तुम्हारा कौन रक्षक है?' हिरनाक्श ने प्रहलाद से पूछा|

'मेरा रक्षक राम है' प्रहलाद ने उत्तर दिया|

कहां है?

'मेरे पास, मेरे साथ, वह सदा रहता है.....घाट-घाट में बसता है| जरा होश करो, तुम्हारी मृत्यु आई है|'

'मेरी मृत्यु नहीं! तुम्हारी मृत्यु.....आई है! यह कह कर हिरनाक्श तलवार उठाने ही लगा था कि खम्भा फट गया| उस खम्भे में से विष्णु भगवान नरसिंघ का रूप धारण करके जिसका मुख शेर का तथा धड़ मनुष्य का था, प्रगट हुए| भगवान नरसिंघ अत्याचारी दैत्य हिरनाक्श को पकड़ कर हिरनाक्श का पेट चीर कर उसकी आंतड़ियां बाहर निकाल दीं|

भगवान नरसिंघ ने कहा-अहंकारी दैत्य! तुम्हारे पापों का घड़ा भर चुका है| देख तू न दिन को मर रहा है और न ही रात को| इस समय दिन अन्दर बाहर है| धरती के ऊपर भी नहीं मर रहा| प्रभु ने कहा-न तू किसी अस्त्र-शस्त्र से मर रहा है| हाथों पर उठा कर घुटनों के ऊपर रखा हुआ है| नरसिंघ भगवान ने यह कह कर हिरनाक्श की इहलीला समाप्त कर दी| हिरनाक्श के वध पर प्रहलाद एवं अन्य भक्त जन भगवान नरसिंघ का क्रोध जब शांत हुआ तो उन्होंने भगवान विष्णु के रूप में दर्शन देकर भक्तों को कृतार्थ कर दिया| उन्होंने भक्त प्रहलाद की भक्ति पर प्रसन्न होकर राज पाठ प्रदान किया और धर्म का राज करने का उपदेश दिया| सारे ब्रह्माण्ड में जै जैकार होने लगी|

हे जिज्ञासु जनों! जो भी मनुष्य इस धरती रूपी ब्रह्माण्ड में जन्म लेता है, यदि वह प्रभु का सिमरन एवं भक्ति करता है तो अपना जन्म सफल करके मोक्ष प्राप्त करता है|

जैसा कि सतिगुरु जी महाराज फरमाते हैं :-

जपि मन माधो मधुसूदनु हरि श्री रंगो परमेसरो सति परमेसरोप्रभु अंतरजामी||
 सभ दूखन को हंता सभ सूखन को दाता हरि प्रतिम गुन गाओ||२|| रहाउ ||

विष्णु के दस अवतारों में से एक : ' नरसिंह अवतार '



भक्ति की शक्ति का परिणाम है ' नरसिंह अवतार '

 3  मई 2013

भगवान नरसिंह अवतार जगतगुरु विष्णु के दस अवतारों में से एक है। भक्ति पर आघात और धर्म पर जब भी संकट की स्थिति चरम पर होती है, तब-तब भगवान विष्णु को इनकी रक्षा के लिए आना पड़ता है। यह अवतार भी उन्हीं घटनाओं में से एक है। महर्षि कश्यप की दूसरी पत्नी दिति से हिरण्याक्ष नामक महादैत्य उत्पन्न हुआ। वह पाताल में निवास करता था। वह महान तपस्वी दैत्य एक बार पृथ्वी को लेकर पाताल में चला गया। जब भगवान् विष्णु की योग निद्रा टूटी तो उन्हें आश्चर्य हुआ कि पृथ्वी कहां है। योग बल से देखा तो चौंक गये कि अरे यह दैत्य तो पृथ्वी को लेकर रसातल में चला गया है। फिर पृथ्वी के उद्धार के लिए नारायण ने दिव्य वराह शरीर धारण किया और हिरण्याक्ष का वध करके पृथ्वी को पुन: यथास्थान पर स्थापित किया। अपने भाई के वध का बदला लेने के लिए दूसरे भाई हिरण्यकशिपु ने जल में निवास करते हुए निराहार और मौन रहते हुए ग्यारह हजार वर्षो तक घोर तपस्या की।
इस अवधि में उनकी तपस्या में यम-नियम, शांति, इन्द्रिय निग्रह और ब्रह्मचर्य से संतुष्ट हो भगवान ब्रह्मा वरदान हेतु उपस्थित हुए और मनोवांछित वर मांगने को कहा। फिर हिरण्यकशिपु ने कहा, यदि आप मुझ पर प्रसन्न हैं तो मुझे अमरता का वरदान दें। इस पर ब्रह्मा जी ने असमर्थता जताई और कोई दूसरा वर मांगने को कहा। फिर दैत्य ने कहा कि यदि आप मुझ पर प्रसन्न हैं तो मुझे ऐसा वरदान दें, जिसके प्रभाव से देवता, असुर, गन्धर्व, यक्ष, सर्प, राक्षस, मनुष्य, पिशाच ये सब मुझे मार न सकें – न अस्त्र से, न शस्त्र से, न पर्वत से, न वृक्ष से, न किसी सूखे या गीले पदार्थ से, न दिन में, न रात में। कभी भी मेरी मृत्यु न हो। इस प्रकार के अनेक वरदान प्राप्त कर इस दैत्य ने अत्याचार कर स्वर्गलोक पर नियन्त्रण कर लिया। उसके भय से सभी स्वर्गलोकवासी अपना वेश बदल कर पृथ्वी पर विचरने लगे। देवताओं की चिंता देख देवगुरु बृहस्पति ने सलाह दी कि सभी देव क्षीरसागर तट पर जाकर भगवान विष्णु का स्तवन करें। उसी समय भगवान् शंकर भी विष्णु के दिव्य नामों का स्तवन करने लगे। नारायण प्रसन्न हुए और सबको इस समस्या से मुक्ति दिलाने का आश्वासन देते हुए हिरण्यकशिपु के वध का संकल्प लिया। अपनी माया से उसकी पत्नी कयाधू के गर्भ में स्थित पुत्र को देवऋषि नारद द्वारा ओम नमो नारायणाय के मन्त्र श्रवण करा कर गर्भ में ही शिशु को नारायण भक्त बना दिया, जो जन्म लेने के समय से ही विष्णु भक्त प्रहलाद के नाम से विख्यात हुआ। अपने ही पुत्र को ओम नमो नारायणाय का जप करते देख पिता हिरण्यकशिपु अति क्रोधित हुआ। प्रहलाद को विष्णु भक्ति त्यागने के लिए बहुत समझाया, यातनाएं देने लगा, किन्तु प्रहलाद किंचित मात्र भी विचलित नहीं हुआ। फिर उसने प्रहलाद को समुद्र में फिकवा दिया, जहां बालक प्रहलाद को विष्णु के दर्शन हुए। मृत्यु हेतु तरह-तरह के वध के षड्यंत्रों से प्रहलाद के बच जाने के कारण सभी दैत्य स्तब्ध रह जाते। अंतत: जब स्वयं वह अपने पुत्र भक्तिअवतार प्रहलाद को चंद्रहास तलवार से मारने दौड़ा तो क्रोधातुर होकर चिल्लाया, अरे मूर्ख! कहां है तेरा विष्णु? कहां है तेरा विष्णु? बोल तुझे बचा ले। तू कहता है कि वो सर्वत्र है तो दिखाई क्यों नहीं देता। पास के खम्भे की ओर इशारा करते हुए बोला कि क्या इस खम्भे में भी तेरा विष्णु है? पिता के द्वारा ऐसी बातें सुन कर प्रहलाद ने परमेश्वर का ध्यान किया और कहा कि हां पिता जी इस खम्भे में भी विष्णु हैं। उस दैत्य ने कहा, मैं इस खम्भे को काट देता हूं! जैसे ही हिरण्यकशिपु ने खम्भे पर तलवार चलायी, भगवान् विष्णु नरसिंह अवतार के रूप में प्रकट हो गए। इनमें संसार की समस्त शक्तियों का दर्शन हो रहा था। प्रभु ने पलभर में दैत्यसेना का संहार कर दिया। नारायण के आधे मनुष्य और आधा सिंह शरीर देख कर असुरों में खर, मकर, सर्प, गिद्ध, काक, मुर्गे और मृग जैसे मुख वाले राक्षस अपनी योनियों से मुक्ति पाने के लिए प्रभु के हाथों मरने के लिए आगे आ गये और वधोपरांत राक्षस योनि से मुक्त हो गए। अंत मे हिरण्यकशिपु भी युद्ध के लिए आया। उस समय समस्त जगत अन्धकार में लीन हो गया। भगवान नरसिंह ने ब्रह्मा जी के वरदान का मान रखते हुए सायंकालीन प्रदोष वेला में अपनी जंघा पर रख कर उसका हृदय विदीर्ण कर देवताओं और मानवजाति को दैत्य के भय से मुक्त कर दिया। कश्यप पत्नी दिति के दोनों पुत्रों हिरण्याक्ष और हिरण्यकशिपु के वध के लिए भगवान् को वाराह और नरसिंह अवतार लेने पड़े। इनकी आराधना हमें भयमुक्त करते हुए भक्ति मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करती है।

RSS announces new national team



RSS announces new national team, RSS 3-day meet ABPS-2014 Concludes at Bangalore

 source: http://samvada.org/?p=20705
Bangalore March 09, 2014:  RSS announced its new national team with few changes, on the final day of its highest apex body meet, Akhil Bharatiya Pratinidhi Sabha(ABPS) which concluded today at Bangalore. There are no major changes in the list of office bearers.
The new list as follows:
Sarasanghachalak- Dr Mohan Rao Bhagwat
Sarakaryavah/General Secretary – Suresh Bhaiyyaji Joshi
Sahasarakaryavah/Joint Gen Sec – Dattatreya Hosabale
Sahasarakaryavah/Joint Gen Sec – Suresh Soni
Sahasarakaryavah/Joint Gen Sec – Dr Krishna Gopal
Akhil Bharatiya Boudhik Pramukh- Bhagayya
Akhil Bharatiya Saha Boudhik Pramukh- Mahavir
Akhil Bharatiya Sharirik Pramukh- Anil Oak
Akhil Bharatiya Sah Sharirik Pramukh- Jagadish Prasad
Akhil Bharatiya Sampark Pramukh- Hasthimal
Akhil Bharatiya Sah Sampark Pramukh – Ram Madhav
Akhil Bharatiya Sah Sampark Pramukh- Arun Kumar
Akhil Bharatiya Sah Sampark Pramukh – Aniruddh Deshapande
Akhil Bharatiya Seva Pramukh – Suhas Hiremath
Akhil Bharatiya Saha Seva Pramukh -Ajith Mahapatra
Akhil Bharatiya Saha Seva Pramukh -Gunavanth Kothari
Akhil Bharatiya Vyavastha Pramukh- Sankal Chand Bagrecha
Akhil Bharatiya Saha Vyavastha Pramukh- Mangesh Bhende
Akhil Bharatiya Saha Vyavastha Pramukh- Balakrishna Tripathi
Akhil Bharatiya Prachar Pramukh- Dr Manmohan Vaidya
Akhil Bharatiya Saha Prachar Pramukh -J Nanda Kumar
Akhil Bharatiya Pracharak Pramukh – Suresh Chandra
Akhil Bharatiya Saha Pracharak Pramukh- Vinod Kumar
Members, Central Executive Council: Madan Das Devi, Indresh Kumar, Madhubhai Kulakarni, Shankar Lal, Dr Dinesh, Mukunda Rao Panashikar, Sethu Madhavan, R Vanyarajan, TV Deshmukh, Dr Ashok Rao Kukade, Srikrishna Maheshwari, Purushottham Paranjape, Bajarangalal Gupta, Darshan Lal Aroda, Dr Ishwar Chandra Gupta, Siddhanath Simha, Ranendralal Banerjee and Aseema Kumar Goswamy.
Invited Members; Central Executive Council:
Ashok Bheri, Sri Krishna Mothalagh and Sunilpad Goswamy.
All Kshethreeya Sanghachalaks will be invited members of Central Executive Council.
Other Changes:
1. Sri Da Ma Ravindra, senior RSS Pracharak who was Dakshin-Madhya Kshetreeya Pracharak Pramukh relieved from responsibilities due to health reasons. His headquarters will be Shimoga in Karnataka.
2. Sri Sundar Reddy will be new Pranth Sah Sanghachalak of Paschim Anhdra.
3. Sri Ashok Soni will be new Sanghachalak of Madhya Kshetra
4. Sri Prashanth Sing will be new Sanghachalak of Mahakoshal Pranth.
5. Sri Vijay Kumar will be Uttra Kshetra’s Karyavah. He was earlier serving as Pranth Karyavah of Delhi.
6. Sri Bharat Bhushan will be Delhi’s new Pranth Karyavah and Sri Vinay ji will be new Sah Prant Karyavah.
7. Sri Prakash ji will be having new responsibility in Laghy Udyog Bharati. He was earlier Kshetra Sah Sampark Pramuk in Rajasthan.
8. Sri Pramod ji will be new Sah Prant Pracharak of Punjab
9. Sri Yuddhaveer will be new Sah Prant Pracharak of Uttarakhand
10. Sri Gouraji and Sri Sumanth ji will be new Sah Pranth Pracharaks of Uttara Assam.
11. Adhivakta Parishat’s Sri Kamalesh ji will be having new responsibility in Hindu Jagaran Manch.

नरेन्द्र मोदी वाराणसी से, राजनाथ सिंह लखनऊ से चुनाव लड़ेंगे


मोदी वाराणसी से, राजनाथ लखनऊ से चुनाव लड़ेंगे
भाजपा ने केंद्रीय चुनाव समिति की मैराथन बैठक के बाद पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी को उत्तर प्रदेश के वाराणसी से , पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह से , सांसद मुरली मनोहर जोशी कानपुर से ,वरिष्ठ नेता अरुण जेटली को अमृतसर से, उम्मीदवार पार्टी ने 12 राज्यों के 55 उम्मीदवारों के नाम को अंतिम रूप दिया। पटना साहिब से वर्तमान सांसद शत्रुन सिन्हा को उम्मीदवार बनाया गया है। भाजपा की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष हर्षवर्धन को पार्टी ने चांदनी चौक से टिकट दिया गया है जबकि पीलीभीत से मेनका गांधी, सुल्तानपुर से वरुण गांधी, झांसी से उमा भारती, गोरखपुर से योगी आदित्यनाथ को उम्मीदवार बनाया है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मेरठ से राजेंद्र अग्रवाल, बागपत से मुंबई के पूर्व कमिश्नर सत्यपाल सिंह, कैराना से हुकुम सिंह, गौतमबुद्धनगर से शहर के विधायक और मशहूर डॉक्टर महेश शर्मा और एटा से राजबीर सिंह|
बीजेपी संसदीय बोर्ड की बैठक दिल्ली में बैठक हुई. इसके बाद बीजेपी चुनाव समिति की बैठक हुई. इस बैठक में यूपी और दिल्ली के उम्मीदवार तय किए जाने वाले हैं. बैठक में खुद नरेंद्र मोदी भी मौजूद हैं. दिल्ली के उम्मीदवार चांदनी चौक - डॉ. हर्षवर्धन नॉर्थ ईस्ट - मनोज तिवारी पूर्वी दिल्ली - महेश गिरी नई दिल्ली - मिनाक्षी लेखी नॉर्थवेस्ट - उदित राज पश्चिमी दिल्ली - प्रवेश वर्मा दक्षिणी दिल्ली - रमेश विधूड़ी अमृतसर से अरूण जेटली नरेंद्र मोदी के वाराणसी से चुनाव लड़ने की आधिकारिक घोषणा हुई। राजनाथ सिंह - लखनऊ। मुरली मनोहर जोशी - कानपुर। अरुण जेटली - अमृतसर। सहारनपुर - राघव लखनपाल। इटावा - अशोक दोहरे। कैराना - हुकुम सिंह। मुजफ्फरनगर - डॉ. संजीव बलियान। बिजनौर - राजेंद्र सिंह मुरादाबाद - कुंवर सर्वेश सिंह. रामपुर - डॉ. नेपाल सिंह। मेरठ - राजेंद्र अग्रवाल बागपत - सतपाल सिंह नोएडा - महेश शर्मा अलीगढ़ - सतीश गौतम आगरा - रामशंकर कटारिया फिरोजाबाद - एसपी सिंह बघेल. मैनपुरी - बीएसएस चौहान। एटा - राजवीर सिंह बरेली - संतोष गंगवार पीलीभीत - मेनका गांधी खीरी - अजय मिश्रा सीतापुर - रमेश वर्मा हरदोई - अंशुल वर्मा मिसरिख - अंजू बाला उन्नाव - साक्षी महाराज मोहनलाल गंज - कौशल किशोर सुल्तानपुर - वरुण गांधी फर्रुखाबाद - मुकेश राजपूत कन्नौज - सुब्रत पाठक झांसी - उमा भारती फतेहपुर - निरंजन ज्योति कौशांबी - विनोद सोनकर बाराबंकी - प्रियंका रावत फैजाबाद - लल्लू सिंह बहराइच - सावित्री बाई फूले श्रावासत् - दद्न चौधरी गोरखपुर - योगी आदित्यनाथ बांसगांव - कमलेश पासवान आजमगढ़ - रमाकांत यादव घोषी - ह रिनारायण राजभर बलिया - भरत सिंह राबर्ट्सगंज - छोटेलाल खरवार बस्ती - हरीश द्रविदी देवरिया - कलराज मिश्र. जौनपुर - केपी सिंह चंदौली - महेंद्र नाथ पांडेय

शुक्रवार, 14 मार्च 2014

गांधीजी को भुनाने से बाज आएं राहुल : महात्मा गांधी के प्रपौत्र श्रीकृष्ण कुलकर्णी



 नई दिल्ली।। आरएसएस को महात्मा गांधी का हत्यारा बताने पर कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी को फटकार मिली है. कांग्रेस के युवराज को यह फटकार सुनाई है राष्‍ट्रपिता के परपोते श्रीकृष्‍ण कुलकर्णी ने.कुलकर्णी ने सोशल मीडिया पर एक पत्र लिखकर राहुल गांधी को जबर्दस्‍त फटकार लगाई है. उन्होंने फेसबुक पर लिखा है कि महात्मा जी की हत्या बहुत पुरानी बात हो चुकी है और उनका परिवार उस घटना से अब काफी दूर जा चुका है. कुलकर्णी ने लिखा है कि यह कहना कि आरएसएस ने महात्मा गांधी की हत्या की, कुछ इस तरह से होगा कि कहा जाए कि आपके पिता की हत्या तमिलों ने की थी. ऐसा कहना मिथ्या नहीं होगा क्या? दो लोगों के मिलने से ही एक समुदाय नहीं बन जाता है. उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह अपने स्वार्थों के लिए गांधी के नाम का इस्तेमाल कर रही है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस को विभिन्न आयोगों के फैसलों को स्वीकार कर लेना चाहिए. इसलिए इस पहेली को यहीं खत्म कर देना चाहिए. कुलकर्णी ने यह भी कहा कि कांग्रेस को गांधी के नाम का फायदा उठाने की कोशिश करना बंद कर देनी चाहिए. उन्‍होंने लिखा है, 'आप लोग गांधी परिवार से नहीं है। 
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Pravin Kayath | Published: March 11, 2014
गांधीजी को भुनाने से बाज आएं राहुल

नई दिल्ली [प्रणय उपाध्याय]। महात्मा गांधी की हत्या के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ [आरएसएस] को जिम्मेदार ठहराने वाले कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के बयान पर अब राष्ट्रपिता के परिवार ने भी एतराज जता दिया है। महात्मा गांधी के प्रपौत्र श्रीकृष्ण कुलकर्णी ने खुला खत लिखकर राहुल को सियासी फायदे के लिए गांधीजी के नाम को भुनाने से बाज आने को कहा है।

पेशे से आइटी इंजीनियर श्रीकृष्ण कुलकर्णी का कहना है कि उनके नाना और महात्मा गांधी के तीसरे पुत्र रामदास गांधी ने तत्कालीन गृह मंत्री सरदार पटेल को पत्र लिख नाथूराम गोडसे को फांसी न देने का आग्रह किया था। बेंगलूर में बसे श्रीकृष्ण ने सोशल नेटवर्किग साइट फेसबुक पर नत्थी किए अपने पत्र में कहा है कि 1969 में जब उनके नाना रामदास गांधी मरणासन्न थे, तो नाथूराम गोडसे के छोटे भाई गोपाल गोडसे भी उनसे मिलने आए थे। ऐसे में परिवार के लिए गांधी हत्याकांड अब अतीत का बंद अध्याय है। श्रीकृष्ण ने कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी से आग्रह किया है कि महात्मा गांधी की हत्या पर बने जांच आयोगों के नतीजों का सम्मान किया जाए और सियासी फायदे के लिए इसे भुनाना बंद किया जाए। श्रीकृष्ण कुलकर्णी के मुताबिक चुनावी फायदे के लिए गांधी हत्याकांड को उछालने की कोशिशों के बीच यह जरूरी हो गया था कि महात्मा गांधी के परिवार का ही कोई सदस्य इस मुद्दे पर विराम लगाए। श्रीकृष्ण ने गांधी हत्याकांड के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को दोष देने पर भी तीखा एतराज जताया। उनके मुताबिक किसी एक व्यक्ति की गलती के लिए पूरे समूह या समाज को गलत नहीं ठहराया जा सकता।

राष्ट्रपिता की पौत्री सुमित्रा के बेटे हैं श्रीकृष्ण

महात्मा गांधी के तीसरे बेटे रामदास गांधी की शादी निर्मला गांधी से हुई थी। इनके तीन बच्चे हुए सुमित्रा, कानू और ऊषा। बेटी सुमित्रा आइएएस अधिकारी थीं और इंदिरा गांधी के आग्रह पर 1972-78 के बीच कांग्रेस से राज्यसभा सदस्य भी रहीं। हालांकि, आपातकाल के दौरान उन्होंने कांग्रेस की सदस्यता छोड़ दी थी। सुमित्रा की शादी प्रोफेसर गजानन कुलकर्णी से हुई। गजानन आइआइएम अहमदाबाद में फैकल्टी संस्थापक रहे हैं। अभी बेंगलूर में रहते हैं। इन दोनों के तीन बच्चे हुए। जुड़वां बेटे रामचंद्र कुलकर्णी व श्रीकृष्ण कुलकर्णी और बेटी सोनाली कुलकर्णी। गांधीजी की हत्या से जुड़े राहुल गांधी के बयान पर खुला पत्र जारी करने वाले यही श्रीकृष्ण कुलकर्णी हैं।

‘परिवार के लिए महात्मा गांधी हत्याकांड एक बंद अध्याय है। अब राहुल गांधी अपने राजनीतिक फायदे के लिए इस नाम का इस्तेमाल करना बंद कर दें। किसी एक की गलती के लिए पूरे समूह को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।’

-श्रीकृष्ण कुलकर्णी, महात्मा गांधी के प्रपौत्र

सर्वे ने खोली आम आदमी पार्टी की पोल : सिर्फ चार सीटें


सर्वे ने खोली आम आदमी पार्टी की पोल
2014-03-14

नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव से पहले सामने आ रहे सर्वे से आम आदमी पार्टी की उम्मीदें टूटती हुई दिखाई दे रही हैं। 12 राज्यों में 319 सीटों का खाका सामने रखने वाले एनडीटीवी-हंसा रिसर्च सर्वे पर भरोसा किया जाए, तो आम आदमी पार्टी का कोई खास प्रदर्शन नहीं रहने वाला। लेकिन अरविंद केजरीवाल दावा कर रहे हैं कि उन्हें आगामी चुनावों में सौ से ज्यादा सीटें मिलेंगी और वो कांग्रेस को पीछे छोड़ देगी।


भले ही आम आदमी पार्टी देश भर में 300 से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ कर यह दावा करे कि वह  सौ से ज्यादा सीटें जीतने में कामयाब रहेगी, लेकिन यह आभास मिल रहा है कि दिल्ली के अलावा दूसरे किसी भी राज्य में वो कई बड़ा करिशमा करते नहीं दिख रहे। इस सर्वे में आम आदमी पार्टी को चार सीटें दी गई हैं, जो सभी दिल्ली से हैं। यहां की सात सीटों में से दो भाजपा और एक कांग्रेस के खाते में जाने की संभावना जताई गई हैं। इस सर्वे ने तमिलनाडु में डीएमके को झटका दिया है। इसके मुताबिक वहां 39 लोकसभा सीटों में से 27 एआईडीएमके के खाते में जाएंगी, जबकि सिर्फ दस डीएमके के खाते में दी गई हंै।

सर्वे में 319 सीटों में से एनडीए को 166, यूपीए को 52 और अन्य को 85 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है। सर्वे में कहा गया है कि महाराष्ट्र में भाजपा-शिवसेना गठबंधन 48 सीटों में से 33 जीतने में कामयाब रहेगा, जबकि कांग्रेस 12 पर सिमट सकती है। सर्वे में अनुमान लगाया गया है कि राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना को भी आगामी लोकसभा चुनावों में एक सीट मिल सकती है। गुजरात में भाजपा को 26 में से 23 सीटें मिलने की उम्मीद जताई गई है और कर्नाटक में वह 28 में से 21 पर जीत हासिल कर सकती है।

मध्य प्रदेश में भाजपा को 29 में से 24 सीटें मिलने की उम्मीद है और कांग्रेस को केवल चार सीट मिलने की संभावना जताई गई है। बिहार में ‌नीतीश को झटका देते हुए भाजपा-एलजेपी 40 में से 23 सीट जीत सकती हैं। कांग्रेस-आरजेडी को 11 और जेडी यू को केवल 5 सीट मिल सकती हैं। ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस को पश्चिम बंगाल में 42 में से 32 सीट मिलने की उम्मीद है। राज्य में वाम दलों को 9 सीट और कांग्रेस को एक सीट मिल सकती है। सर्वे में 42 फीसदी लोगों ने अगले प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी को चुना। दूसरे पायदान पर कांग्रेस के राहुल गांधी रहे, जिन्हें 27 फीसदी लोगों ने अपनी पसंद बताया।

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Manish Arora · University of Delhi
AAJ TAK NAAM NAHI LIYA JISPE SHAHID BHAGAT SINGH KI SHAHADAT KA SODA KAR RAHA THA, DUNIA NE DEKHA OR SUNA HAI - PER HAD SE JAYADA GIRA OR BESHARAM HO TO USKA KUCH NAHI KAR SAKTE. YE LOGO KE VIVEK OE EMOTION SE KHELKAR FAYADA UTHANE WALI PARTY HAI " JITNE MOKA PRAST THAI WO BHAR LIYE, JINE SUCH PATA CHAL GAYA WO CHOR KEHKE NIKAL DIYE

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AAP नेताओं ने उजागर किए बिकाऊ चैनलों के नाम
http://www.punjabkesari.in/news/article-226809
Friday, March 14, 2014
नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय सिंह और आशुतोष की आज हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में काफी हंगामा हुआ। इस दौरान उन्होंने उन टीवी चैनलों के नाम भी उजागर कर दिए, जिन पर पार्टी पैसे लेकर नरेंद्र मोदी के पक्ष में खबरें प्रसारित करने का आरोप लगा रही है। पार्टी नेताओं संजय सिंह और आशुतोष ने तीन समाचार चैनलों को 'पेड मीडिया घराने ' बताते हुये कहा कि हम इन तीनों के खिलाफ सबूत के साथ चुनाव आयोग से संपर्क करेंगे।

इससे पहले पार्टी संयोजक अरविंक केजरीवाल ने कहा था कि कुछ चैनल बिके हुए हैं और हम सत्ता में आए तो उनके खिलाफ जांच कर उन्हें जेल में डाल देंगे। आज जब मीडियावालों ने उन चैनलों के नाम उजागर करने को कहा, जो पैसा लेकर केजरीवाल के खिलाफ खबरें दिखा रहे हैं, तो संजय सिंह ने बताया कि जी न्यूज, इंडिया टीवी, इंडिया न्यूज और टाइम्स नाउ ऐसा कर रहे हैं और पार्टी इनकी शिकायत चुनाव आयोग से करेगी।

वहीं, आम आदमी पार्टी ने भारतीय प्रेस परिषद से 'पेड मीडिया' से सबंधित रिपोर्टों की जांच कराने की मांग की है। संजय सिंह ने कहा कि केजरीवाल ने पूरी मीडिया के बारे में नहीं कहा था बल्कि उन्होंने कहा था कि मीडिया का एक हिस्सा बिका हुआ है। इसके अलावा वह इसमें यह भी जोडऩा चाहते हैं कि कई पत्रकार एवं संपादक ईमानदार है और अच्छा काम कर रहे हैं लेकिन हम पेड मीडिया की जांच कराये जाने की मांग करते हैं।

गौरतलब है कि एक टेलीविजन चैनल ने केजरीवाल के एक बयान की वीडियो प्रसारित किया है जिसमें केजरीवाल को यह कहते हुये दिखाया गया है कि सारी मीडिया बिकी हुई है और अगर उनकी सरकार आयी तो इसकी जांच करायी जायेगी और मीडिया के लोगों को जेल भेजा जाएगा। हालांकि वीडियो के सार्वजनिक होने के बाद केजरीवाल ने कहा कि उन्होंने ऐसा कुछ नहीं कहा।  इस बीच केजरीवाल के विवादास्पद बयान को लेकर मीडिया, सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारे में तीव्र प्रतिक्रिया का दौर शुरू हो गया है।

अरविंद केजरीवाल ने मीडियावालों को जेल भेजने की धमकी दी है






..तो मीडियावालों को जेल भेज दूंगा: केजरीवाल
ibnkhabar.com | Mar 14, 2014
http://khabar.ibnlive.in.com/news/117438/12
नई दिल्ली।दिल्ली के पूर्व मुख्यमत्री अरविंद केजरीवाल ने मीडियावालों को जेल भेजने की धमकी दी है। नागपुर में एक डिनर समारोह के दौरान केजरीवाल का मीडिया के खिलाफ गुस्सा नजर आया। केजरीवाल ये यहां तक कहा कि अगर उनकी सरकार बनी तो मीडियावालों की जांच करवाएंगे और उन्हें जेल भेज देंगे।
इस समारोह के दौरान केजरीवाल ने आरोप लगाया कि कई मीडियावाले मोदी से पैसा लेकर प्रचार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मीडियावाले मोदी की रट लगाए बैठे हैं। एक साल से लगातार मोदी की खबरें दिखाई जा रही हैं। और उनके राज्य में जो किसान खुदकुशी कर रहे हैं उसे नहीं दिखाया जा रहा है। मेरी छोटी सी चीज को बार-बार दिखाया जाता है, लेकिन मोदी की बुराई नहीं दिखाई जाती है।
केजरीवाल ने मोदी पर हमला करते हुए कहा कि गुजरात में 10 सालों में क्या हुआ है इसकी असली तस्वीर मीडिया वाले नहीं दिखाएंगे। ये सारे मीडियावाले मिलकर साजिश कर रहे हैं और मेरी सरकार बनी तो मैं इनकी जांच कराऊंगा। और दोषियों को जेल भेजूंगा।
केजरीवाल के इस बयान की दूसरी पार्टी के नेताओं ने भी आलोचना की है। कांग्रेस नेता जेपी अग्रवाल ने कहा है कि केजरीवाल को खुद के अलावा सब भ्रष्ट लगते हैं उनका ये बयान अजीब है। वहीं बीजेपी नेता राजीव प्रताप रुडी का कहना है कि आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल मोदी और बीजेपी के खिलाफ कुछ भी अनाप-शानाप बोलते रहते हैं।
नई दिल्ली।दिल्ली के पूर्व मुख्यमत्री अरविंद केजरीवाल ने मीडियावालों को जेल भेजने की धमकी दी है। नागपुर में एक डिनर समारोह के दौरान केजरीवाल का मीडिया के खिलाफ गुस्सा नजर आया। केजरीवाल ये यहां तक कहा कि अगर उनकी सरकार बनी तो मीडियावालों की जांच करवाएंगे और उन्हें जेल भेज देंगे।
इस समारोह के दौरान केजरीवाल ने आरोप लगाया कि कई मीडियावाले मोदी से पैसा लेकर प्रचार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मीडियावाले मोदी की रट लगाए बैठे हैं। एक साल से लगातार मोदी की खबरें दिखाई जा रही हैं। और उनके राज्य में जो किसान खुदकुशी कर रहे हैं उसे नहीं दिखाया जा रहा है। मेरी छोटी सी चीज को बार-बार दिखाया जाता है, लेकिन मोदी की बुराई नहीं दिखाई जाती है।
केजरीवाल ने मोदी पर हमला करते हुए कहा कि गुजरात में 10 सालों में क्या हुआ है इसकी असली तस्वीर मीडिया वाले नहीं दिखाएंगे। ये सारे मीडियावाले मिलकर साजिश कर रहे हैं और मेरी सरकार बनी तो मैं इनकी जांच कराऊंगा। और दोषियों को जेल भेजूंगा।
केजरीवाल के इस बयान की दूसरी पार्टी के नेताओं ने भी आलोचना की है। कांग्रेस नेता जेपी अग्रवाल ने कहा है कि केजरीवाल को खुद के अलावा सब भ्रष्ट लगते हैं उनका ये बयान अजीब है। वहीं बीजेपी नेता राजीव प्रताप रुडी का कहना है कि आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल मोदी और बीजेपी के खिलाफ कुछ भी अनाप-शानाप बोलते रहते हैं।

गुरुवार, 13 मार्च 2014

नेताजी की रहस्यमय मौत : क्यों ऊँगली उठती हे रूस कि तरफ ?


जब  भी बात सुभाष चन्द्र बोस की चलती हे , तब ही यह बात आती है कि हबाई हादसा हुआ ही नहीं और फिर बात रूस की तरफ बड़ कर समाप्त होती है । ज्यादातर मौकों पर ऐशा ही क्यों होता है ?

यह समाचार I B N से है !



नेताजी की रहस्यमय मौत पर एक और सनसनीखेज खुलासा
वार्ता | Jan 29, 2013
http://khabar.ibnlive.in.com/news/90711/1

कोलकाता। नेताजी सुभाषचंद्र बोस की रहस्यम मृत्यु पर एक और सनसनीखेज खुलासा करते हुए रूस में रामकृष्ण मिशन के प्रमुख मंहत ने कहा है कि नेताजी की मौत विमान दुर्घटना में नहीं बल्कि रूस की एक जेल में हुई थी।

रूस में पिछले दो दशक से रामकृष्ण मिशन के अध्यक्ष रहे ज्योतिरानंद ने अपनी हाल की असम यात्रा के दौरान एक टेलीविजन साक्षात्कार में यह बात कही। उन्होंने कहा कि भारत सरकार का यह दावा गलत है कि नेताजी 18 अगस्त 1945 को ताईवान में ताईहोकू हवाई अड्डे पर विमान दुर्घटना में मारे गए थे।

उन्होंने कहा कि सच्चाई यह है कि उन्हे रूसियों ने पकड़ लिया था और ओमस्क की जेल मे कैद कर दिया था जहां काफी समय बाद उन्होंने अंतिम सांस ली थी। ओमस्क रूस के साइबेरिया क्षेत्र का एक छोटा शहर है। उन्होंने कहा कि इस बात की पूरी संभावना है कि नेताजी ने इसी जेल मे अपनी अंतिम सांस ली होगी।

मास्को में रामकृष्ण मिशन की सचिव लिलियाना मालकोवा ने ज्योतिरानंद के इस सनसनीखेज खुलासे को सही बताया है। मंहत ने कुछ दस्तावेजों और रूस में भारत की तत्कालीन राजदूत विजय लक्ष्मी पंडित के बयान का हवाला देते हुए बताया कि जब पंडित को नेताजी के ओमस्क जेल में होने की खबर लगी तो वह उनसे मिलने वहां गई थीं लेकिन रूसी अधिकारियों ने उन्हें नेताजी से नहीं मिलने दिया।

ज्योतिरानंद ने कहा कि पंडित जब जेल से बाहर निकल ही रहीं थीं कि उन्होंने हूबहू नेताजी से मिलते जुलते शक्ल वाले एक कैदी को वहां देखा। वह कैदी काफी थकाहारा दिखाई पड़ रहा था। ऐसा लगता था कि उसे जेल में काफी यातना दी गई है जिससे उसका मानसिक संतुलन बिगड़ गया है।

मंहत ज्योतिरानंद के मुताबिक पंडित यह सबदेख कर बहुत व्यथित हुई थीं और फौरन नई दिल्ली पहुंच कर उन्होंने इस बात की जानकारी कांग्रेस के तत्कालीन बड़े नेताओं को दी थी। लेकिन इस पर कोई कार्रवाही नहीं की गयी।

इस बीच नेताजी पर शोध कर रहे एक शेाधर्कता अनुज धर ने सोमवार को कोलकाता में विदेश मंत्रालय के 12 जनवरी 1996 के एक ऐसे गोपनीय दस्तावेज का हवाला दिया जिसमें मंत्रालय की ओर से रूस की मीडिया में लगातार आ रही उन खबरों पर गहरी चिंता जताई गई थी जिनमें कहा गया था कि नेताजी की मौत 1945 के बाद रूस की एक जेल में हुई थी। इस दस्तावेज पर मंत्रालय के तत्कालीन संयुक्त सचिव आर एल नारायणन के हस्ताक्षर है और साथ ही इसमें एक पूर्व विदेश सचिव की टिप्पणी भी संलग्न है।