बुधवार, 30 अप्रैल 2014

भला हो जिसमें देश का, वो काम सब किए चलो



संगठन गढ़े चलो सुपंथ पर बढे चलो
यह कविता हमारे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ परिवार की एक बार का  मासिक गान है ।

संगठन गढ़े चलो, सुपंथ पर बढ़े चलो ।
भला हो जिसमें देश का, वो काम सब किए चलो ॥ध्रु॥

युग के साथ मिल के सब कदम बढ़ाना सीख लो ।
एकता के स्वर में गीत गुनगुनाना सीख लो ।
भूल कर भी मुख में जाति-पंथ की न बात हो ।
भाषा-प्रांत के लिए कभी ना रक्तपात हो ।
फूट का भरा घड़ा है फोड़ कर बढ़े चलो ॥१॥

आ रही है आज चारों ओर से यही पुकार ।
हम करेंगे त्याग मातृभूमि के लिए अपार ।
कष्ट जो मिलेंगे मुस्कुरा के सब सहेंगे हम ।
देश के लिए सदा जिएंगे और मरेंगे हम ।
देश का ही भाग्य अपना भाग्य है ये सोच लो ॥२॥

संगठन गढ़े चलो, सुपंथ पर बढ़े चलो ।
भला हो जिसमें देश का, वो काम सब किये चलो ॥


सोमवार, 28 अप्रैल 2014

आंकड़ों ने दर्शाया हिन्दुओं पर संकट


आंकड़ों ने दर्शाया हिन्दुओं पर संकट
राजेन्द्र चड्ढा

सात सितम्बर, 2004 को भारत के जनगणना आयुक्त ने जनगणना, 2001 के अन्तर्गत प्राप्त पंथों के आंकड़ों को सार्वजनिक किया। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि अहिन्दू मतावलंबियों की बढ़ती जनसंख्या और उनकी अत्यधिक जनसंख्या वृद्धि दर से देश में सामरिक, राजनीतिक और सामाजिक खतरा पैदा होने की आशंका हो गई है। इस पृष्ठभूमि में यह याद रखना आवश्यक है कि देश में जहां भी हिन्दू जनसंख्या में कमी आई है, उस क्षेत्र-विशेष में भारत से अलगाव बढ़ा है और प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से वहां विखंडन की प्रवृत्ति ने जोर पकड़ा है।

पंथ पर आधारित जनगणना 2001 के आंकड़ों के अनुसार, देश की कुल जनसंख्या में 80.5 प्रतिशत हिन्दू, 13.4 प्रतिशत मुसलमान, 2.3 प्रतिशत ईसाई हैं। जबकि पिछली जनगणना में हिन्दू 82 प्रतिशत, मुसलमान 12.1 प्रतिशत और 2.3 प्रतिशत ईसाई थे। इन आंकड़ों को देखने पर पहली नजर में तो कोई बड़ा परिवर्तन दिखाई नहीं देता है पर अगर हम देश में विभिन्न मतावलंबियों की दशकीय जनसंख्या वृद्धि दर, प्रजनन दर जैसे विशुद्ध अकादमिक पहलुओं सहित मतांतरण और विदेशी घुसपैठ के संदर्भ में इन आंकड़ों पर नजर डालें तो पूरी सूरत ही बदल जाती है। पर राजनीतिक पारे के चढ़ने के बाद महापंजीयक एवं जनगणना कार्यालय ने आनन-फानन में (जाहिर है इस बार दबाव में) जम्मू और कश्मीर तथा असम को निकालकर दूसरी बार पंथाधारित जनगणना के आंकड़ों को जारी किया। इससे केन्द्र में कांग्रेस के नेतृत्व और वामपंथी समर्थित संप्रग सरकार का पंथनिरपेक्षता के नाम पर ओढ़ा मुस्लिम तुष्टीकरण का मुखौटा उजागर हो गया।

मुस्लिम जनसंख्या का प्रतिशत (1951-2001) राज्य 1951 1961 1971 1981 1991 2001

कर्नाटक 10.05 9.87 11.62 11.05 11.64 12.2

केरल 17.53 17.91 19.5 21.25 23.33 24.7

महाराष्ट्र 7.61 7.67 8.4 9.25 9.66 10.6

गोवा 1.61 1.89 3.33 4.1 5.25 6.8

बिहार 11.28 12.45 13.48 14.12 14.81 16.5

उ.प्र. 14.28 14.63 15.48 15.93 17.33 18.5

दिल्ली 5.71 5.85 6.47 7.75 9.44 11.7

हरियाणा 3.38 3.83 4.04 4.05 4.64 5.8

चण्डीगढ़ - 1.22 1.45 2.02 2.72 3.9

पंजाब 0.8 0.8 0.84 1 1.18 1.6

प. बंगाल 19.46 20 20.45 21.51 23.61 25.2

असम 24.68 25.3 25.56 - 28.43 30.9

पिछले एक दशक में मुसलमानों के जनसांख्यिकीय स्वरूप का प्रादेशिक स्तर पर आकलन करने पर उनकी जनसंख्या में बढ़ोत्तरी साफ नजर आती है। पिछले दशक (1991) के पंथाधारित आंकड़ों का 2001 के ताजा आंकड़ों से तुलनात्मक अध्ययन करने से पता चलता है कि जहां 1991 में जम्मू और कश्मीर में मुसलमान कुल जनसंख्या का 64.19 प्रतिशत थे वहीं सन् 2001 में उनका प्रतिशत बढ़कर 67 हो गया। इसी तरह दिल्ली में मुसलमानों की जनसंख्या 9.44 प्रतिशत से बढ़कर 11.7 प्रतिशत, उत्तर प्रदेश में 17.33 प्रतिशत से बढ़कर 18.5 प्रतिशत, बिहार में 14.81 प्रतिशत से बढ़कर 16.5 प्रतिशत, असम में 28.43 प्रतिशत से बढ़कर 30.9 प्रतिशत, पश्चिम बंगाल में 23.61 प्रतिशत से बढ़कर 25.2 प्रतिशत, महाराष्ट्र में 9.66 प्रतिशत से बढ़कर 10.6 प्रतिशत और गोवा में 5.25 प्रतिशत से बढ़कर 6.8 प्रतिशत हो गई। यह भी उल्लेखनीय है कि इस दशक (1991-2001) में मुसलमानों की दशकीय जनसंख्या वृद्धि दर सबसे ज्यादा रही। सन् 1991 में मुसलमानों की जनसंख्या वृद्धि दर 34.5 प्रतिशत (पहली बार में जारी आंकड़ों के अनुसार) थी जो कि 2001 में बढ़कर 36 प्रतिशत हो गई। जबकि इसके उलट, हिन्दुओं की जनसंख्या वृद्धि दर 1991 के 25.1 प्रतिशत की तुलना में 2001 में घटकर 20.3 प्रतिशत रह गई। जबकि दूसरी बार जारी आंकड़ों में सन् 2001 के लिए मुसलमानों की वृद्धि दर 29.3 प्रतिशत और सन् 1991 में 32.9 दर्शायी गई। ताजा जनगणना में मुसलमानों की कमतर वृद्धि दर का एक मतलब यह भी है कि 80 के दशक में मुसलमानों की वृद्धि दर और भी अधिक थी।

1991 में हिन्दुओं की वृद्धि दर 22.8 प्रतिशत और 2001 में 20 प्रतिशत बताई गई। जहां पहले जारी किए गए आंकड़ों में मुसलमानों की वृद्धि दर हिन्दुओं से 15.7 प्रतिशत अधिक है तो दूसरी बार में भी मुसलमानों की वृद्धि दर हिन्दुओं की तुलना में 9.3 प्रतिशत अधिक है।

राष्ट्रीय स्तर पर मुसलमानों से सम्बंधित आंकड़ों का गहराई से अध्ययन करने से साफ होता है कि देश के दूसरे मतावलंबियों की तुलना में उनमें प्रजनन की दर अधिक है। 0-6 वर्ष की आयु वाले बच्चों (जो कि प्रजनन का संकेतक माना जाता है) के वर्ग पर नजर डालें तो पता चलेगा कि यहां भी मुसलमानों का प्रतिशत सर्वाधिक (18.7) है जो कि हिन्दुओं के 15.6 प्रतिशत से कहीं अधिक है। इन प्राकृतिक कारणों के अलावा बंगलादेशी मुसलमानों की अवैध रूप से घुसपैठ और दूसरी तरफ पाकिस्तानी नागरिकों के वैध रूप से भारत आने और फिर लापता हो जाने जैसे गैरकानूनी तौर-तरीके भी मुसलमानों की जनसंख्या बढ़ने के प्रमुख कारण हैं। केवल इस्लाम ही नहीं, ईसाइयत ने भी भारत की हिन्दू जनसंख्या के स्वरूप और चरित्र को बदलने में कोई कसर नहीं छोड़ी है, ईसाइयों की जनसंख्या वृद्धि दर को देखने पर यह बात साफ नजर आती है। पिछली जनगणना (1991) में ईसाइयों की जनसंख्या वृद्धि दर 17 प्रतिशत थी जो कि 2001 में बढ़कर 22.1 प्रतिशत हो गई यानी 5.1 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी। प्रादेशिक स्तर पर, विशेषकर देश के पूर्वोत्तर भाग में ईसाइयों की जनसंख्या में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। यह वृद्धि स्वाभाविक रूप से न होकर मतांतरण के माध्यम से हुई है, जिसके पीछे चर्च की संगठित शक्ति है।

ईसाई जनसंख्या का प्रतिशत (1951-2001)

राज्य 1951 1961 1971 1981 1991 2001

असम 2 2.43 2.61 - 3.32 3.7

अरुणाचल - 0.51 0.79 4.32 10.29 18.9

मणिपुर 11.84 19.49 26.03 29.68 34.12 34

मेघालय 24.66 35.21 46.98 52.61 64.58 70.3

मिजोरम 90.52 86.63 86.07 83.81 85.73 87

नागालैण्ड 40.05 52.98 66.77 80.22 87.47 90

त्रिपुरा 0.82 0.88 1.01 1.21 1.69 3.2

सिक्किम 0.22 1.73 0.79 2.22 3.3 6.7

उड़ीसा 0.79 1.15 1.73 1.82 2.1 2.4

म.प्र.(छ.ग.) 0.31 0.58 0.69 0.67 0.64 0.3अ1.9(छ.ग.)

पंजाब 0.62 1.25 1.2 1.1 1.2 1.9

अरुणाचल प्रदेश की कुल जनसंख्या में ईसाइयों का हिस्सा 10.29 प्रतिशत (1991) से बढ़कर 18.7 (2001) हो गया है। जहां 1971 में अरुणाचल प्रदेश में कुल 364 ईसाई थे, वहीं आज उनकी जनसंख्या 2,05,548 हो गई है। मेघालय में भी ईसाई 64.58 प्रतिशत से बढ़कर 70.3 प्रतिशत, मिजोरम में 85.73 प्रतिशत से बढ़कर 87 प्रतिशत, नागालैण्ड में 87.47 प्रतिशत से बढ़कर 90 प्रतिशत, त्रिपुरा में 1.69 प्रतिशत से बढ़कर 3.2 प्रतिशत हो गया है। यहां तक कि उड़ीसा और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में भी ईसाइयों की जनसंख्या बढ़ी है। जहां 1951 में उड़ीसा की कुल आबादी में ईसाइयों का प्रतिशत 0.97 था वह 1991 में 2.1 और 2001 में बढ़कर 2.4 गया है। मध्य प्रदेश में ईसाइयों की जनसंख्या 1951 में 0.31 प्रतिशत से बढ़कर 1991 में 0.64 हो गई। जबकि 2001 के ताजा आंकड़ों के अनुसार छत्तीसगढ़ में ईसाई कुल जनसंख्या का 1.9 प्रतिशत हो चुके हैं। इन राज्यों में ईसाइयों की जनसंख्या में लगभग दोगुनी से अधिक वृद्धि हुई है।

सन् 1998 में असम के तत्कालीन राज्यपाल और अब जम्मू और कश्मीर के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (से.नि.) एस.के.सिन्हा ने असम में व्यापक स्तर पर हो रही बंगलादेशी घुसपैठ पर तत्कालीन राष्ट्रपति श्री के.आर. नारायणन को 42 पृष्ठों की एक विस्तृत रपट भेजी थी। इस रपट में उन्होंने बंगलादेश द्वारा असम और पूर्वोत्तर राज्यों में अपने अधिक से अधिक नागरिकों को भेजकर एक दिन इस क्षेत्र को बंगलादेश में मिलाने और उपमहाद्वीप में एक बड़ा इस्लामी देश बनाने की षडंत्रकारी योजना का खुलासा किया था। सिन्हा ने अपनी बहुचर्चित रपट में असम के निचले हिस्से में स्थित धुबरी और ग्वालपाड़ा जैसे जिलों में अवैध बंगलादेशियों के जनसांख्यिकीय आक्रमण के कारण भविष्य में इन जिलों के बंगलादेश में विलय करने की मांग उठने की आशंका भी प्रकट की थी। सिन्हा ने अपनी रपट में इन अवैध घुसपैठियों से दूसरे राज्यों की तुलना में असम और पश्चिम बंगाल के लिए अधिक खतरनाक होने और इनकी वजह से सामरिक और आर्थिक संकट पैदा होने की बात रेखांकित की थी। पर कांग्रेस और असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई इस सम्बंध में अपनी आंख-कान बंद रखना चाहते हैं। इसका कारण साफ है। असम में बड़ी संख्या में बंगलादेशियों ने अपने नाम मतदाता सूची में दर्ज करवा लिए हैं और वे सभी कांग्रेसी वोट बैंक का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

बंगलादेश से जनसंख्या का दबाव इस कदर बढ़ा है कि लगभग दो करोड़ बंगलादेशी मुसलमान अवैध रूप से भारत में घुसपैठ कर चुके हैं। इतने बड़े पैमाने पर हुई अवैध घुसपैठ का ही नतीजा है कि असम के 23 में से 10 जिले मुस्लिम बहुल हो बन चुके हैं। पश्चिम बंगाल के नौ सीमांत जिलों में से दो-तीन को छोड़कर सभी जिले मुस्लिम बहुल हो चुके हैं। पश्चिम बंगाल के 56 विधानसभा क्षेत्रों में मुसलमान चुनाव की स्थिति में निर्णायक हैं। सन् 2001 में पश्चिम बंगाल में मुसलमान कुल आबादी का 25.20 पर प्रतिशत हो गए हैं जबकि सन् 1951 में उनका प्रतिशत 19.46 था। सन् 1991-2001 में यहां मुसलमानों की वृद्धि दर 25.98 थी जबकि हिन्दुओं की मात्र 14.22।

बंगलादेशी मुसलमानों की अवैध घुसपैठ के जरिए भारत के एक और विभाजन की मंशा पूरी तरह से जिहाद की इस्लामी अवधारणा के अनुरूप है, जो कि ताकत और विभाजन की बजाय जनसंख्या वृद्धि के माध्यम से अधिक सफल रहा है।

नागालैण्ड, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश में भी बंगलादेशी बड़ी संख्या में मौजूद हैं। इस क्षेत्र में बंगलादेशियों की उपस्थिति से न केवल जनसांख्यिकीय संतुलन बिगड़ा है, अपितु इसके राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक दुष्परिणाम सामने आए हैं। इन राज्यों के अलावा देश की राजधानी दिल्ली भी बंगलादेशी मुस्लिम घुसपैठिए से अछूती नहीं है। इस स्थिति का देखते हुए सितम्बर, 2004 के तीसरे सप्ताह में दिल्ली उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को तीन सप्ताह के भीतर एक सर्वेक्षण करके राजधानी में अवैध रूप से रह रहे बंगलादेशी मुसलमानों की वास्तविक संख्या के बारे में सूचित करने का आदेश दिया। दिल्ली पुलिस के अनुमान के अनुसार, वर्तमान में राजधानी के यमुना पार क्षेत्रों में हो रहे साठ फीसदी अपराधों के पीछे बंगलादेशी घुसपैठियों का हाथ है।

पर विडम्बना यह है कि बंगलादेश की सरकार इस खुले तथ्य की अनदेखी कर रही है। उसके अनुसार, भारत में उनका कोई भी नागरिक अवैध रूप से नहीं रह रहा है। अगर भारत ने इस जनसंख्याकीय आक्रमण पर समय रहते पर्याप्त ध्यान नहीं दिया तो स्थिति विस्फोटक हो जाएगी, यह भारतीय सुरक्षा को भी खतरे में डाल सकती है।

यह ऐतिहासिक सत्य है कि सन् 1900 में असम में पूर्वी बंगाल (जो बाद में पूर्वी पाकिस्तान बना) से धान उगाने वाले किसानों के रूप में घुसपैठियों के प्रवाह ने असम की कुल जनसंख्या को इस हद तक प्रभावित किया कि अगली जनसंख्या रपट में इस बात को रेखांकित किया गया। पिछली शताब्दी में सभी भारतीय राज्यों की तुलना में वर्तमान असम राज्य में हिन्दुओं की जनसंख्या में सबसे अधिक गिरावट दर्ज की गई है। सन् 1905 में जहां इस प्रदेश में हिन्दुओं की जनसंख्या 84.55 प्रतिशत थी, वहीं 1991 में घटकर 68.25 प्रतिशत रह गई है। इस दौरान बंगलादेश से होने वाली घुसपैठ के कारण मुसलमानों की जनसंख्या 15.03 प्रतिशत से बढ़कर 28.43 प्रतिशत हो गई। ऐसे ही घुसपैठ का नतीजा सन् 1881 और सन् 1931 में हुई जनगणना के दौरान सामने आया था, तब असम में मुसलमानों की जनसंख्या में 109 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई थी। याद रखना चाहिए कि ऐसी ही घुसपैठ के कारण क्षेत्र और जनसंख्या के हिसाब से असम का सबसे बड़ा जिला सिलहट मुस्लिम बहुल बना और अंतत: पूर्वी पाकिस्तान का हिस्सा बना।

पश्चिम बंगाल के सीमांत क्षेत्रों में मदरसों की संख्या में भी तीन सौ प्रतिशत की दर से बढ़ोत्तरी हुई है। सीमा सुरक्षा बल के सूत्रों के अनुसार अधिकतर नए मदरसों के लिए कराची स्थित एक ट्रस्ट ने पैसा दिया है, जिसने विदेशी सहायता नियामन कानून के अनुरूप कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया। 1981-91 के दशक में पश्चिम बंगाल के छह जिलों-कूच बिहार, जलपाईगुड़ी, दार्जिलिंग, मिदनापुर, बांकुड़ा और चौबीस परगना में मुसलमानों की वृद्धि दर हिन्दुओं से दोगुनी दर्ज की गई। सन् 2003 में सीमा प्रबंधन पर केन्द्रीय गृह मंत्रालय के केन्द्रीय कार्यदल की रपट में भारत-नेपाल और भारत-बंगलादेश सीमा द्वारा भारतीय क्षेत्र में जनसांख्यिकीय आक्रमण पर गहरी चिंता प्रकट की गई थी। रपट में कहा गया कि पिछले कुछ समय में बिहार और पश्चिम बंगाल के सभी जिलों में अल्पसंख्यकों के साथ-साथ मस्जिदों और मदरसों की संख्या में की अप्रत्याशित वृद्धि देखने को मिली है। रपट में सीमा के दोनों ओर मदरसों और मस्जिदों की तेजी से बढ़ती संख्या पर भी चिंता प्रकट की गई।

सन् 2003 में केन्द्रीय मंत्रियों के एक समूह के अध्ययन में पाया गया था कि देश के बारह सीमांत प्रदेशों के 11,453 मदरसे चल रहे थे। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आई.एस.आई. द्वारा हवाला के जरिए इन मदरसों को अवैध धन मुहैया करवाने के भी कई मामले प्रकाश में आने की रपट भी थी। राजस्थान में भारत-पाकिस्तान सीमा पर बीकानेर, अनूपगढ़, सूरतगढ़ और श्रीगंगानगर के संवेदनशील क्षेत्रों में करीब पचास मदरसों और मजारों के बनने से भी भारतीय सुरक्षा एजेंसियां सकते में हैं। सन् 2003 में करवाए गए एक आधिकारिक सर्वेक्षण से पता चला है कि राजस्थान के सीमांत क्षेत्रों में मदरसों के बढ़ने से मजहबी पहचान एवं प्रतीकों के प्रति आग्रह बढ़ रहा है। पिछली जनगणना (1991) के अनुसार, राजस्थान के पश्चिम में पाकिस्तान के सीमा से सटे जैसलमेर में मुसलमानों की जनसंख्या का अनुपात प्रदेश में सर्वाधिक है। सन् 1951-91 के कालखंड में राजस्थान के पाकिस्तान के साथ सटे चार सीमांत जिलों को छोड़कर प्रदेश के लगभग सभी जिलों में मुसलमानों की जनसंख्या के अनुपात में खासी बढ़ोत्तरी और भारतीय पंथ के अनुयायियों की जनसंख्या में गिरावट देखने को मिली है। इस दौरान प्रदेश में मुसलमानों की जनसंख्या में 41.46 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इस दौरान, मुसलमानों की वृद्धि दर हिन्दुओं से 13.37 प्रतिशत और कुल जनसंख्या वृद्धि दर से 13.02 प्रतिशत अधिक रही। आश्चर्य की बात यह है कि प्रदेश की राजधानी जयपुर सहित सत्रह जिलों में मुसलमानों की वृद्धि दर हिन्दुओं से कहीं अधिक थी।

एक तथ्य यह भी है कि अविभाजित भारत और भारतीय गणराज्य की हर जनगणना में कुल जनसंख्या में मुसलमानों की जनसंख्या में वृद्धि और हिन्दुओं की जनसंख्या में गिरावट दर्ज की गई। जहां सन् 1881 में कुल जनसंख्या में मुसलमानों की संख्या 20 प्रतिशत से बढ़कर 1941 में 69.4 हो गई वहीं हिन्दुओं की जनसंख्या 1881 में 75.1 प्रतिशत से घटकर 1941 में 69.4 प्रतिशत रह गई थी। यहां तक कि स्वतंत्र भारत में सन् 1951 में देश की कुल जनसंख्या में मुसलमानों का प्रतिशत 9.9 था जो कि सन् 1991 में 12.1 हो गया, जबकि कुल जनसंख्या में हिन्दुओं का प्रतिशत 84.9 से घटकर 82.0 रह गया। पी.एम. कुलकर्णी ने भारत में 1981-91 के दौरान हिन्दुओं और मुसलमानों की जनसंख्या वृद्धि में अंतर नामक अपने अध्ययन में राष्ट्रीय स्तर के अलावा बड़े राज्यों में मुसलमानों की हिन्दुओं की तुलना में उच्च वृद्धि दर के लिए मुख्य रूप से उनकी प्रजनन की अधिक दर, नवजातों की निम्न मृत्यु दर और कुछ हद तक सीमा पार से मुसलमानों की घुसपैठ को जिम्मेदार बताया है। यहां तक कि केरल जैसे अधिक साक्षरता वाले राज्य में भी मुसलमानों की प्रजनन दर हिन्दुओं से अधिक है। अगर सरकार और समाज ने समय रहते मुसलमानों की उच्च प्रजनन दर पर नियंत्रण, बंगलादेशी घुसपैठ और चर्च के मतांतरण अभियानों को रोकने के लिए प्रभावी कदम न उठाए तो वह दिन भी देखना पड़ सकता है जब हिन्दू अपने ही देश में अल्पसंख्यक होकर रह जाएंगे।

सेक्युलरिज्म हमारी रगों में है - नरेंद्र मोदी


फारुख को मोदी का जवाब, सेक्युलरिज्म हमारी रगों में है
ibnkhabar.com | Apr 28, 2014
http://khabar.ibnlive.in.com/news/119731/12
नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री फारुख अब्दुल्ला के बयान मोदी को वोट देने वाले को समुद्र में डूब जाना चाहिए, पर एनडीए के पीएम कंडीडेट नरेंद्र मोदी ने जमकर निशाना साधा है। मोदी ने एक टीवी चैनल को दिए अपने इंटरव्यू में कहा कि फारुख को सेक्युलरिज्म की बातें नहीं करनी चाहिए क्योंकि कश्मीर में सबसे पहले कम्यूनल का जहर उनके परिवार ने ही घोला था। मोदी ने कहा कि भारत सेक्युलर है, इसलिए नहीं क्योंकि हमारे संविधान में इस शब्द को रखा गया है। बल्कि इसलिए क्योंकि हजारों सालों से यह भारतीय संस्कृति का हिस्सा रहा है। मोदी ने कहा कि सेक्युलरिज्म केवल हमारे संविधान में ही नहीं बल्कि हमारी रगों में भी है।
फारुख पर बरसते हुए मोदी ने आगे कहा कि बीजेपी को वोट देने वालों को दरिया में डुबाने की बात करने वाले फारुख, उनके पिताजी शेख अब्दुल्ला और बेटे उमर ने कश्मीर की राजनीति को सारी दुनिया में कौमी रंग देने का पाप किया है। मोदी ने कहा, कि अगर डूबना है तो किसको डूबना चाहिए जरा दर्पण में देखिए।

कश्मीर में डॉ. अब्दुल्लाह के परिवार पर कम्मूनलाइजिंग राजनीति का आरोप लगाते हुए नरेंद्र मोदी ने कहा कि फारुख अब्दुल्लाह और उनके पिता की वजह से कश्मीर से पंडित धीरे-धीरे पलायन कर गए। उनकी राजनीति ने कश्मीर के जमीन को कम्यूनल बना दिया। अब फारुख कहते हैं कि मोदी को वोट देने वाले को समुद्र में फेंक दो।

मोदी ने कहा कि अगर हम सेक्युलरिज्म के बारे में बात करते हैं तब मैं कहना चाहता हूं कि हम सेक्यूलर है, क्यों नहीं संविधान में एक शब्द जोड़ दिया जाए। हम ‘सर्व पंथ संभव’ में विश्वास करते हैं। हम सत्य में विश्वास करते हैं, सत्य चाहे जिस रास्ते से आए।

मोदी ने कहा कि भारत ऐसा देश है जिसमें सभी लोगों के बारे में सोचा जाता है। हम किसी दूसरे की संस्कृति पर कभी हमला नहीं करते है। इस तरह की विस्तारवादी मानसिकता हमारे खून में नहीं है। हम धर्मनिरपेक्षता पर इस तरह के सबक को बर्दाश्त नहीं कर सकते हैं।

रविवार, 27 अप्रैल 2014

दामाद जी की दौलत, दुनियाभर में चर्चा


दामाद जी की दौलत, दुनियाभर में चर्चा

अमरीकी पत्रिका वॉल स्ट्रीट जर्नल ने संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद राबर्ट वाड्रा पर देश में सोलहवीं लोकसभा के लिए जारी चुनावों के बीच शिकंजा कसते हुए असंख्य भूमि विवादों पर बड़े खुलासे किए हैं।
वॉॅल स्ट्रीट जर्नल ने कई महीनों के गहन अध्ययन, विश्लेषण, अपनी रपटों के निष्कर्षों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर राबर्ट वाड्रा को दुनियाभर के मीडिया के सम्मुख कटघरे में ला खड़ा किया है।
इस संबंध में प्रकाशित रपट की शुरुआत ही इस वाक्य से हुई है कि दसवीं पास 44 वर्ष के वाड्रा अचानक 325 करोड़ से भी अधिक की सम्पत्ति के मालिक कैसे हो गए, जबकि 5 वर्ष पूर्व वाड्रा ने मात्र एक लाख रुपए के निवेश से यह व्यवसाय शुरू किया था। रपट ने राजस्थान में महेश नागर नामक व्यक्ति को वाड्रा के लिए और बाद में राहुल गांधी के लिए जमीनी सौदे करवाने की बात कही गई है। वाड्रा द्वारा किए गए जमीनों के ऐसे राजसी सौदे भारत में ही नहीं विदेशों में भी चर्चित हैं। कहीं से भी ऐसा प्रतीत नहीं हुआ कि गांधी परिवार का यह दामाद, जो मात्र कृत्रिम सस्ते गहनों का व्यवसाय करता था, रियल एस्टेट की दुनिया का चर्चित बादशाह बन जाएगा। पत्रिका में ब्योरेवार जानकारी दी गई है कि 2004 से पूर्व वाड्रा का व्यवसाय बहुत ही सामान्य एवं अज्ञात था, वे सस्ते गहनों का व्यापार करते थे। 2007 में रियल एस्टेट के धंधे में कदम रखते हुए मां मौरीन वाड्रा के साथ स्काई लाइट हास्पिटेलिटी प्रा. लि. कंपनी शुरू करने के साथ नार्थ इंडिया आईटी पार्क्स प्रा. लि., रियलअर्थ एस्टेट्स प्रा. लि. और स्काई लाइट रियलिटी प्रा. लि. इत्यादि रियलिटी व्यवसायों की श्रृंखला खड़ी कर हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली और हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस सरकारों की मिलीभगत से जमीनों का व्यापक कारोबार शुरू कर दिया।

भारत में अति विशिष्ट व्यक्ति की सुविधाएं भोगने वाले राबर्ट वाड्रा को वर्ष 2004 में संप्रग-1 सरकार के गठन के बाद 26 सितम्बर 2005 को सरकार ने विशेष फरमान जारी कर एयरपोर्ट पर व्यक्तिगत जांच से विशेष छूट दे दी थी। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री सहित पूर्व राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री, एस.पी.जी. सुरक्षा प्राप्त विशिष्ट लोगों को यह सुविधा मिलती है। वाड्रा के साथ इस विशेष बर्ताव के लिए उनकी एसपीजी सुरक्षा प्राप्त पत्नी प्रियंका वाड्रा का तर्क दिया जाता है।

राबर्ट वाड्रा की रुचियों, उनके कारनामों और महत्वाकांक्षाओं की खबरें बराबर मीडिया में आती रही हैं। जमीनों के अंधाधुंध सौदों पर खूब छपता रहा है। अक्तूबर 2012 में भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ाई लड़ने वाले अरविन्द केजरीवाल ने भी राजनीति में आने से पूर्व वाड्रा के जमीन घोटालों पर बड़े खुलासे किए हालांकि अब वे ठंडे पड़ गए हैं और भ्रष्टाचार से बड़ा उन्हें साम्प्रदायिकता का रोग दिखाई देने लगा है। अलग-अलग राज्यों में अपने रसूख के बल पर वाड्रा ने संबंधित राज्यों के पूरे के पूरे भू-अधिग्रहण और नियमन कानून ही बदलवा डाले थे, भू उपयोग को बदलवाकर किसानों को धोखा देकर अपनी जमीनों की कीमतें बढ़वा दीं और ज्यादा विवाद होने पर जांच करने वाले आईएएस अधिकारी अशोक खेमका को निलंबित करवाने के साथ ही प्रधानमंत्री कार्यालय से भी स्वयं को क्लीन चिट दिलवा दी। हजारों एकड़ जमीन के मालिक वाड्रा ने जब देखा कि सूचना अधिकार अधिनियम के तहत लोग उनकी पड़ताल करने लगे तो वर्ष 2012 के बाद के सौदों के कोई दस्तावेज सार्वजनिक नहीं दिखाई देते। जिस हरियाणा में 27 एकड़ कृषि भूमि ही खरीदी जा सकती थी, वहां 46 एकड़ जमीन सारे नियमों को ताक पर रखकर वाड्रा की कंपनी ने ले ली। जिस राजस्थान में कानून के तहत रेगिस्तानी और अर्द्ध रेगिस्तानी क्षेत्रों में 125 से 175 एकड़ तक ही भूमि खरीद की सीमा निर्धारित थी वहां वाड्रा की कंपनियों ने 321 एकड़ तक भूमि खरीद ली। बीकानेर में कांग्रेस की गहलोत सरकार ने सौर ऊर्जा केन्द्र वहीं बनाना सुनिश्चित किया जहां वाड्रा ने जमीन खरीदी थी।

डीएलएफ से 65 करोड़ के व्याज मुक्त ऋण और कार्पोरेशन बैंक के 7.94 करोड़ के ओवरड्राफ्ट का रहस्य अब भी रहस्यमय ही है और 2009 में उत्तर प्रदेश के सल्तानपुर लोकसभा से चुनाव लड़ने के दबाव का दावा करने वाले वाड्रा जो कुछ कर रहे हैं उनसे बेशक सोनिया और राहुल आंख मूंदे रखने का ढकोसला कर रहे हों, लेकिन दादी की पोशाक और प्रतिछाया का स्मरण दिलाने वाली प्रियंका वाड्रा भी क्या अनभिज्ञ हैं, देश की जनता वास्तविकता जान चुकी है और कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने भी शायद इसी सत्य का आभास पाकर प्रियंका को पिछले कई वर्षों से इसी कारण से रायबरेली और अमेठी तक सिमटा रखा है। ल्ल
मुझे पीड़ा हुई है
देश ने मेरी मां को बहू स्वीकारा है, इसके बावजूद उनके मूल पर सवाल उठाए जा रहे हैं। आप टीवी देखें तो पाएंगे- उस पर मेरे परिवार को लेकर भद्दी बातें कही जा रही हैं। मेरे पति के बारे में बहुत सी बातें कही जा रही हैं। मुझे इससे पीड़ा होती है। उस व्यक्ति को भी पीड़ा होती है जिसके बारे में सच नहीं बोला जा रहा है। रोजाना मैं अपने बच्चों से कहती हूं कि सच छिपाया जा रहा है। इस चुनाव में जैसी राजनीति हो रही है उससे मुझे दुख है। यदि पति पर हमला जारी रहा तो मजबूती से लड़ाई लड़ूंगी, दादी इंदिरा से ऐसी स्थिति का सामना करना सीखा है। इसका मजबूती से कैसे सामना करना चाहिए, मुझे पता है। -प्रियंका वाड्रा

30 अप्रैल को होगी सुनवाई
दिल्ली उच्च न्यायालय ने राबर्ट वाड्रा के जमीन विवादों पर एक जनहित याचिका को स्वीकार कर लिया है। इस याचिका में मांग की गई है कि न्यायालय की निगरानी में राबर्ट वाड्रा की भागीदारी वाली विभिन्न कम्पनियों द्वारा अलग-अलग समय पर किए गए जमीन सौदों की सीबीआई जांच की जाए। याचिका में विशेष रूप से वाड्रा की कंपनियों द्वारा हरियाणा के गुड़गांव क्षेत्र में क्रय की गई कृषि भूमि के भूमि उपयोग बदलाव के लिए प्रस्तुत किए गए लाइसेंस की जांच की मांग करने के साथ सरकारी खजाने को हुए नुकसान की जांच की भी मांग की गई है। मुख्य न्यायाधीश जी. रोहिणी की अगुआई वाली पीठ 30 अप्रैल को इस मामले की सुनवाई करेगी।

वाड्रा की संपत्ति का राज क्या है?
यह एक गंभीर खुलासा है। नरेन्द्र मोदी पर कीचड़ उछालने वाले राहुल गांधी और सोनिया गांधी को इस बात का उत्तर देना चाहिए कि 6 महीने या सालभर में कुछ लाख रुपयों का निवेश करने वाले वाड्रा 300 करोड़ रुपए से भी अधिक की संपत्ति के मालिक कैसे बन गए।
-रविशंकर प्रसाद, वरिष्ठ भाजपा नेता

अब कैसे जगी प्रियंका की संवेदना
वाड्रा जब भारत को बनानां  रिपब्लिक और यहां के लोगों को  मैंगो पीपुल  कह रहे थे, तब प्रियंका की संवेदनाएं कहां थीं? अब सही बातें बोले जाने पर बुरा लग रहा है।
-निर्मला सीतारमण, भाजपा प्रवक्ता
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जब हमारा क्षेत्र सौर ऊर्जा केन्द्र के तहत आ गया तो हमने पाया कि वाड्रा ने किसानों से सारी भूमि बहुत सस्ते दामों पर खरीद ली। क्षेत्र में सौर ऊर्जा कंपनी के आने से भूमि की कीमत में जोरदार उछाल आया। वाड्रा की स्काई लाइट हास्पिटेलिटी ने 2010 में खरीदी गई जमीन जनवरी 2012 में बेच दी जिसमें 94 एकड़ भूमि का अधिकांश हिस्सा भी शामिल था। कोलायत भूमि कार्यालय के रिकार्ड के अनुसार, इस जमीन की बिक्री कीमत खरीद मूल्य की तुलना में दस गुना अधिक थी। वाड्रा ने राजस्थान में खरीदी गई कुल भूमि का करीब एक तिहाई हिस्सा यानी 700 एकड़ भूमि 27 लाख डालर में बेच दिया जो राजस्थान में उनके द्वारा खरीदी गई कुल भूमि की कीमत का लगभग तीन गुना था। इस बिक्री के बाद भी वाड्रा की कंपनियों के पास 1200 एकड़ भूमि बची थी जिसकी कीमत 40 लाख डालर से अधिक थी। -अर्जुन राम मेघवाल, भाजपा सांसद

याद करें वाड्रा पर केजरीवाल की पत्रकार वार्ता

इन दिनों प्रियंका जी बहुत ज्यादा गुस्से मेन हैँ , उनकी पति ने बड़ी मुसकिल से तो कमाई की है और दूसरे दल उसे भष्टाचार बतानें मेँ  लगे हैँ ! प्रियंका गुस्सा करें या तूफां खडा करेँ , बड़ा सवाल है कि डीएलएफ़  ने उन्हें ही फायदा क्यों पहुचाया ? डीएलएफ़ का यह तरीका राजनैतिक रिश्बत के अतिरिक्त क्या है ! आश्चर्य यह है कि डीएलएफ़  पर अभी तक कार्यवाही क्यों नहीं हुई ! आज केजरीवाल भले ही चुप हो मगर ये आरोप उनके द्वारा भी  लगाये गये हैं ! 

याद करें वाड्रा पर केजरीवाल की पत्रकार वार्ता

वाड्रा पर केजरीवाल के आरोप : किसने क्या कहा
शनिवार, 6 अक्तूबर, 2012
http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2012/10/121006_robert_vadra_arvind_kejriwal_ms.shtml

जनलोकपाल के आंदोलन के रास्ते  राजनीति में कूदे अरविंद केजरीवाल और प्रशांत भूषण के सोनिया गाँधी के दामाद राबर्ट वाड्रा पर सैकड़ों करोड़ रुपए की रिश्वत लेने के क्लिक करें आरोपों ने राजनीतिक बयानबाज़ी तेज़ कर दी है.

अरविंद केजरीवाल, प्रशांत भूषण और उनके पिता शांति भूषण ने शुक्रवार को दिल्ली में हुई एक पत्रकारवार्ता में कुछ दस्तावेज़ पेश करते हुए आरोप लगाया कि उत्तर भारत के एक बड़े रियल एस्टेट डेवलपर डीएलएफ़ समूह ने गलत तरीकों से रॉबर्ट वाड्रा को 300 करोड़ रुपयों की संपत्तियाँ कौड़ियों के दामों में दे दीं.

इसके बाद कांग्रेस ने पूरा ज़ोर लगाकर इन आरोपों को ख़ारिज किया है. एक नज़र इस पूरे विवाद में अब तक कौन क्या कह चुका है-

अरविंद केजरीवाल
पूरी बात यह है कि डीएलएफ़ वाले वाड्रा को 300 करोड़ रुपए देना चाहते थे. डीएलएफ़ ने वो 300 करोड़ रुपए छह कंपनियों में कुछ लेन-देन कर के दे दिया. सभी लाभ पाने वाली कंपनियों में रॉबर्ट वाड्रा और उनकी माँ निदेशक हैं. एक समय तक इन कंपनियों में प्रियंका गाँधी भी निदेशक थीं लेकिन उन्होंने बाद में इन कंपनियों से हाथ झाड़ लिया.

प्रशांत भूषण, वकील
डीएलएफ़ इनको पैसा दे-देकर अपनी ही सैकड़ों करोड़ की संपत्तियां कौड़ियों में दे रहा है. रॉबर्ट वाड्रा की कंपनियों में इनकी मूल पूँजी केवल 50 लाख रुपए लगी है. सवाल यह है कि कोई कंपनी किसी एक आदमी को इस तरह के लाभ क्यों दे रही है? डीएलएफ़ ने रॉबर्ट वाड्रा को बिना ब्याज के इतना क़र्ज़ क्यों दिया और इतनी संपत्तियां वाड्रा को अपने ही पैसे से कौड़ियों के दाम पर क्यों दीं? हरियाणा सरकार ने वजीराबाद में डीएलएफ़ को किसानों से अधिगृहीत कर के ज़मीन डीएलएफ़ को सौंप दी है. इस ज़मीन को सार्वजनिक इस्तेमाल के लिए अधिगृहीत किया गया था.


रॉबर्ट वाड्रा पर लगे इस तरह के आरोपों के बाद कांग्रेस ने पूरा दम लगाकर उनका बचाव किया है


प्रशांत भूषण और अरविंद केजरीवाल के आरोपों ने राजनीतिक माहौल को काफ़ी गर्म कर दिया


सलमान ख़ुर्शीद, क़ानून मंत्री- भारत सरकार
ये लोग एक पैदाइश से ही मरी हुई पार्टी के घोषणा पत्र के लिए दिवालिया विचार वाले लोग हैं. इसी तरह से वे अपनी पार्टी का इस तरह का घोषणा पत्र तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं. जाँच की माँग करने के लिए उन्हें पुख़्ता चीज़ों के साथ सामने आना पड़ेगा. किसी भी व्यक्ति का संदेह क़ानून के नियमों का आधार नहीं बन सकता. अब वो वक़्त आ गया है जब इन लोगों को बता दिया जाए कि उन्हें कहाँ ये सब बंद कर देना चाहिए.

डीएलएफ़ ग्रुप
डीएलएफ़ ग्रुप का रॉबर्ट वाड्रा के साथ व्यावसायिक संबंध उनके निजी उद्यमी के रूप में हैं और ये पूरी तरह से पारदर्शी रूप में है. डीएलएफ़ की मंशा उनके नाम या उनसे जुड़ाव का किसी भी तरह इस्तेमाल करने की नहीं है और व्यावसायिक संबंध उच्च मानकों के और पूरी तरह पारदर्शी रखे गए हैं.

रवि शंकर प्रसाद, भाजपा नेता
काफ़ी अहम सवाल उठे हैं. ये लाभ पहुँचाने का सीधा सा मामला दिखता है. इस बात की भी संभावना दिखती है कि राज्य सरकारों ने डीएलएफ़ को फ़ायदा पहुँचाया हो.

मनीष तिवारी- कांग्रेस प्रवक्ता
कांग्रेस नेतृत्त्व को 1970-1980 के दशक में बदनाम करने की जिन ताक़तों ने कोशिश की वे नए अवतार में फिर से सामने आ गई हैं. अरविंद केजरीवाल का संवाददाता सम्मेलन न सिर्फ़ एक राजनीतिक षड्यंत्र है बल्कि बेहद घटिया राजनीतिक छल है.

भूपिंदर सिंह हूडा- मुख्यमंत्री, हरियाणा
हमने किसी के साथ कोई पक्षपात नहीं किया है. हमने किसी को भी एक इंच ज़मीन तक आवंटित नहीं की है. हमने पारदर्शी तरीक़े से अंतरराष्ट्रीय बोली के ज़रिए ज़मीन उस व्यक्ति को दी जसने सबसे बड़ी बोली लगाई थी.

अंबिका सोनी, सूचना एवं प्रसारण मंत्री
केजरीवाल ने एक राजनीतिक दल बनाया है और वह दिल्ली से चुनाव लड़ना चाहते हैं. अपनी छवि सुधारने के लिए वह बिना किसी सबूत के आरोप लगा रहे हैं और आप (मीडिया) इस तरह के आरोपों को दिखाकर उनकी मदद कर रहे हैं. सार्वजनिक जीवन में हमें बेहद सावधान होना पड़ता है. हम बिना किसी सबूत के आरोप नहीं लगा सकते. अगर आरोप लगा रही आपकी उंगली सामने वाले की ओर है तो ध्यान रखिए कि बाक़ी तीन आपके ख़ुद की ओर इशारा कर रही हैं.

राजीव शुक्ला, संसदीय कार्य राज्य मंत्री
इस तरह का कोई सबूत नहीं है जिससे पता चले कि डीएलएफ़ को कोई फ़ायदा पहुँचाया गया. इसमें परस्पर लाभ की कोई बात नहीं है.

राशिद अल्वी, कांग्रेस प्रवक्ता
ये सिर्फ़ इत्तेफ़ाक की बात नहीं है कि केजरीवाल की ओर से ये आधारहीन आरोप तभी लगाए गए हैं जब कांग्रेस ने भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी का पर्दाफ़ाश कर दिया है.

पीके त्रिपाठी, मुख्य सचिव- दिल्ली सरकार
दिल्ली सरकार निजी संगठनों को ज़मीन आवंटन नहीं करती. ये आरोप कि दिल्ली सरकार ने डीएलएफ़ को ज़मीन आवंटित की तथ्यात्मक रूप से ग़लत है. ये आरोप दिल्ली सरकार

शनिवार, 26 अप्रैल 2014

बनारस में ‘मोदी नाम केवलम्’ का चक्रवात



‘मोदी नाम केवलम्’ का चक्रवात
Apr 26 2014

।।  डॉ बुद्धिनाथ मिश्र ।।  (वरिष्ठ साहित्यकार)
इन दिनों कोयल के बोलने का मौसम है. कोई और साल होता, तो अप्रैल की सुबह केवल कोयल बोलते. मगर इस बार अप्रैल में कोयल और काग एक साथ बोल रहे हैं. एक कोयल पर बीस काग. लगभग यही अनुपात है. जो लोग सुबह तड़के जागने के अभ्यस्त हैं, उनके दिन का श्रीगणोश कोयल की मीठी बोली सुन कर होती है. उसके बाद शुरू हो जाता है, चुनाव का कौवारोर, जो सड़कों-गलियों से होते हुए टीवी चैनलों तक पहुंचता है. अखबारों में भी वही नेताओं का अनर्गल प्रलाप. स्थिति यहां तक आ गयी है कि प्रात: भ्रमण करने निकलिए, तो रास्ते में सड़कछाप प्रत्याशी लार टपकाते मिल जायेंगे. एक नवोदित पार्टी ने तो ईमानदार नेताओं की फौज ही खड़ी कर दी है. लोगों की शिकायत थी कि नेता बेईमान हो गये हैं, तो उसने सस्ती दर पर थोक के भाव में नेताओं का उत्पादन शुरू कर दिया. परिणाम यह हुआ कि गली-गली में नकली क्रांतिकारी पैदा हो गये हैं. मेरे मुहल्ले का एक असफल कवि, जो कविता से ज्यादा शराब का सेवक था, इस बार चुनाव में उठ खड़ा हुआ. मगर जब यथार्थ सामने आया, तो वीरतापूर्वक पीछे हट गया. आजकल आचार संहिता को लेकर रो रहा है, जिसके कारण सारे सरकारी कवि सम्मेलन बंद हैं. एक और कवि सात साल पहले मेरी पश्मीना शाल ले उड़ा था. वह भी अब नेता हो गया है. उसने सिद्ध कर दिया कि साहित्यकार यदि राजनीति का मैला सिर पर ढोने की हिम्मत कर सके, तो उसके लिए राजनीति में अब भी संभावना है.

चाहे शहर हो, गांव हो या कस्बा हो, हर जगह प्रत्याशी मतदाता को देखते ही मक्खियों की तरह भिनभनाने लगते हैं. उनके लिए एक मतदाता एक रोटी के बराबर है. वह रोटी, जो किसी को सात दिन भूखा रहने के बाद मिले. महाभारत में अकाल के समय विश्वामित्र ने भूख से कुलबुला कर मरे हुए कुत्ते का मांस खाया था. वोट वह भीख है, जो दुर्भिक्ष के दिनों में जड़ पदार्थो से भी मिलने की आशा लेकर छुटभैये नेता घूम रहे हैं. ताव में आकर ट्रेन से टकरा गये. अब लस्त-पस्त होकर शिकायत कर रहे हैं-जबरा मारे, रोवे न दे. किसी के पास मोदी के अलावा कोई मुद्दा नहीं है. देश के मतदाताओं ने अभी मन बनाया नहीं है, मगर सारी पार्टियां मोदी को प्रधानमंत्री बनाने में लगी हैं. भारतीय राजनीति क्या इतनी दिवालिया हो गयी है कि सभी दल एक स्वर से ‘मोदी नाम केवलम्’ जप रहे हैं! उस एक आदमी को पटकने के लिए भाइयों ने क्या-क्या नहीं किया. यहां तक कि उसकी पत्नी के प्रति भी हमदर्दी जता आये. न भाषा की मर्यादा रही, न संबंधों की. बड़े-बड़े नेता जहर उगल रहे हैं और मीडिया उसे सोने की थाल में रख कर लोगों के सामने परोस रहा है. जो राजनीतिक संवाद समाज या देश के लिए अशुभ है, क्या मीडिया उसे अपने विवेक से खारिज नहीं कर सकता? मीडिया को दासबुद्धि से मुक्त होना चाहिए.

सोचा था कि अब देश में लोकतंत्र वयस्क हो गया है, अबकी बार चुनाव में देश के भविष्य को संवारने के लिए सभी पार्टियां अपने-अपने संकल्प देश के मतदाताओं के समक्ष रखेंगी. मगर ऐसा कुछ नहीं हुआ. बल्कि इस बार सबके होठों पर एक ही शब्द, एक ही संज्ञा- मोदी. व्याकरण की एक संज्ञा देखते-देखते, जाने-अनजाने सर्वनाम हो गयी. इतना तो स्वयं मोदी ने भी नहीं सोचा होगा. मोदी देश का प्रधानमंत्री हो न हो, वह पूरे देश में छा गया. बिहार के एक गांव में मैंने स्वयं यह देखा. एक लड़का मोदी का अभिनय कर रहा था और टोले की तमाम स्त्रियां और बच्चे उसे घेर कर नयी रामलीला देख रहे थे.

मुङो याद आया 1971 का लोकसभा चुनाव, जब जनसंघ एक दीन-हीन पार्टी की भांति चुनाव लड़ रही थी. उसके पास चुनाव-प्रचार के लिए आर्थिक साधन नहीं होते थे. जनसंघ के प्रत्याशी इसी तरह मुहल्ले के बच्चों को बटोर कर उन्हें गुड़-चना बांटते थे और छोटे-छोटे झंडे देकर उन्हें गली-गली घूमने को कहते थे. राजनीतिक दंगल में उसकी कोई औकात नहीं थी. आज वही जनसंघ भाजपा के नाम से इतनी बड़ी पार्टी हो गयी है कि एक ओर सारी पार्टियां और दूसरी ओर अकेले यह. देश की राजधानी दिल्ली के नेतागण हर साल रावण का पुतला जलाने के अभ्यस्त हैं. बहुत संभव है, उन्हें मोदी में भी रावण दिखायी दे रहा हो. किसी ने कहा भी कि यह गुब्बारा है, चुनाव के बाद फट जायेगा. हो सकता है कि उसकी बात में दम हो. मगर, चुनाव के परिणाम एक तरफ और मोदी की अपार जनप्रियता एक तरफ. मानना पड़ेगा कि मोदी का जादू चल गया है. अब चुनाव-परिणाम कई कारणों से प्रभावित होते हैं. इसलिए प्रधानमंत्री कोई भी बनेगा, सिक्का मोदी का ही चलेगा.

इसका सबसे बड़ा सबूत है, 24 अप्रैल को बनारस में नरेंद्र मोदी को देखने के लिए उमड़ी भीड़, जिसकी कल्पना शायद भाजपा के संयोजकों ने भी नहीं की थी. किसी ‘बाहरी’ राजनेता के स्वागत में पूरा शहर ही नहीं, आसपास के गांव भी उमड़ आये थे. जो लोग बनारस को नहीं जानते, बाहरी-भीतरी परिकल्पना उनके संकीर्ण मस्तिष्क की उपज है. बनारस एक ऐसा शहर है, जो बाहरी प्रतिभाओं को मांज कर चमकाने में विश्वास रखता है. इसके घाट देश की विभिन्न रियासतों ने बनवाये हैं. बिस्मिल्ला खां से लेकर हजारी प्रसाद द्विवेदी तक सभी बाहर से आकर बनारसी हो गये. यहां तक कि जिसे बाहर के लोग बनारसी पान कहते हैं, वह भी मगध से आता है, और बनारसी चौरसिया के हाथ फेरते ही सोने के रंग का हो जाता है. बनारस की संस्कृति में न कोई हिंदू है, न मुसलिम. वह सिर्फ बनारसी है. बनारस के शायर नजीर बनारसी ने जिस अंदाज में काशी के घाटों, गंगा की आरती, सुबह-ए-बनारस, भांग और बाबा विश्वनाथ को अपनी शायरी में उकेरा है, वैसा किसी से संभव नहीं हुआ. भाजपा के लोग साहित्य की समझ थोड़ी कम रखते हैं, वरना मोदी के प्रस्तावकों में नजीर साहब के परिवार को शामिल करना चाहिए था.

मोदी के विरोधी नेता आपनी-अपनी अकल भर लोगों को कितना ही भड़काएं, मगर काशी के मतदाता यह जानते हैं कि उनका वोट किसी सांसद के लिए नहीं, बल्कि देश के प्रधानमंत्री बनाने के लिए है. इससे पहले बनारस के लाल बहादुर शास्त्री प्रधानमंत्री बने थे, मगर बहुत थोड़े दिनों के लिए. वह समय भी भारत-पाकिस्तान युद्ध के हवाले हो गया. काशी के लोगों को यह विश्वास है कि मोदी के आने से बनारस अपनी अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा के अनुरूप विकास के अवसर पा सकेगा. नजीर साहब यदि आज जीवित होते, तो पांडेय हवेली में अपने नगर के प्रत्याशी नरेंद्र मोदी को बीच राह में रोक कर शायद यही कहते :

शुक्रवार, 25 अप्रैल 2014

लूट के लिए नहीं होता है सरकारी धन : दिल्ली हाईकोर्ट




लूट के लिए नहीं होता है सरकारी धन : हाईकोर्ट
 Friday, April 25, 2014,

नई दिल्ली : दिल्ली हाईकोर्ट ने आज केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह उत्तर प्रदेश में अपनी राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना (आरएसबीवाई) के गलत इस्तेमाल के कारण करोड़ों रूपए के ‘दुरूपयोग’ को रोके। अदालत ने केंद्र को यह निर्देश देते हुए कहा कि ‘सरकारी धन लूट के लिए नहीं होता।’ न्यायमूर्ति मनमोहन ने केंद्र को यह चेतावनी भी दी कि 11 नवंबर को अगली सुनवाई की तारीख तक यदि दुरूपयोग पर लगाम नहीं लगाई गई तो स्वास्थ्य सचिव के खिलाफ अवमानना कार्यवाही शुरू की जाएगी।

अदालत ने कहा, ‘आपकी (केंद्र सरकार की) योजना का गलत इस्तेमाल हो रहा है। आप अपनी आंखें मूंद कर नहीं रख सकते। धन की बर्बादी मत होने दीजिए। यदि आप इसे (योजना को) संभाल नहीं सकते तो वापस ले लीजिए।’ पीठ ने कहा, ‘करोड़ों रूपए गलत हाथों में जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश सरकार के सुझाव के मुताबिक केंद्र सरकार और बीमा कंपनियों को लीकेज रोकने के लिए कदम उठाने होंगे।’

न्यायमूर्ति मनमोहन ने कहा, ‘स्वास्थ्य सचिव को यह बता दीजिए। यदि सुनवाई की अगली तारीख तक दुरूपयोग बंद नहीं हुआ तो मैं उन्हें व्यक्तिगत तौर पर अदालत में पेश होने का आदेश दूंगा और उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करूंगा। सरकारी धन इस तरह लूटने के लिए नहीं होते।’

अदालत ने यह आदेश तब दिया जब उत्तर प्रदेश सरकार ने बताया कि अदालत के पहले के निर्देशों के मुताबिक उसने घोटाले की जांच के लिए एक समिति गठित की और समिति ने पाया कि योजना को लागू कराने में जमकर ‘अनियमितता’ हो रही है। (एजेंसी)

गुरुवार, 24 अप्रैल 2014

कालेधन पर केंद्र की कांग्रेस सरकार को, सर्वोच्च न्यायालय ने फिर फटकारा




कालेधन पर केंद्र को फिर फटकार
Apr 24 2014

सर्वोच्च न्यायालय ने जर्मनी के लिचेंस्टीन बैंक में कालाधन जमा करनेवाले भारतीयों के नाम नहीं बताने पर केंद्र सरकार को फिर कड़ी फटकार लगायी है. न्यायालय ने चार जुलाई, 2011 के एक आदेश में सरकार को जर्मन सरकार से प्राप्त भारतीय खाताधारकों की सूची जमा कराने और इस मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल गठित करने का आदेश दिया था.

इस आदेश का पालन नहीं होने को न्यायालय ने अदालत की अवमानना माना है और 29 अप्रैल को सूची जमा कराने का आदेश देते हुए यह भी बताने को कहा है कि सरकार को अदालती आदेश मानने में क्या अड़चनें हैं. तीन न्यायाधीशों- जस्टिस एचएल दत्तू, रंजना देसाई और मदन लोकुर- की खंडपीठ ने अब तक जांच दल का गठन नहीं हो पाने पर भी नाराजगी जतायी.

सुनवाई की पिछली तारीख को भी अदालत ने इस महत्वपूर्ण मसले पर केंद्र की लापरवाही पर टिप्पणी की थी. देश में बीते कुछ सालों से भ्रष्टाचार व कालेधन  की वापसी के मसले राजनीतिक विमर्श और गतिविधियों के केंद्र में हैं, लेकिन कई वायदों व बयानों के बावजूद सरकारी स्तर पर किसी गंभीर कार्रवाई के कोई संकेत नहीं हैं. 2011 में वित्त मंत्रलय ने कालेधन के अध्ययन के लिए एक आयोग का गठन किया था, जिसने अपनी रिपोर्ट जुलाई, 2012 में दे दी थी, लेकिन आज तक इसे सार्वजनिक नहीं किया गया है.

इस रिपोर्ट के विवरण से सिर्फ वित्त मंत्री और कुछ वरिष्ठ अफसरशाह ही वाकिफ हैं. अपुष्ट रिपोर्टो के अनुसार, इस आयोग में शमिल एक विशेषज्ञ संस्था ने अनुमान लगाया है कि 2010 के मानक मूल्यों के हिसाब से लगभग 30 लाख करोड़ रुपये कालेधन की शक्ल में हैं, जो देश के सकल घरेलू उत्पादन का तकरीबन 17 फीसदी है. बाजार-वाणिज्य के जानकर यह भी कहते रहे हैं कि विदेशों में जमा कालेधन का एक हिस्सा वापस देश में निवेश होता है.

इनके मुताबिक बीते कुछ महीनों में ही शेयर में निवेश, सोने की तस्करी और हवाला के जरिये 1,500 से 5,000 करोड़ रुपये देश में आने का अनुमान है. यह आशंका भी जतायी जा रही कि बड़े पैमाने पर कालाधन अप्रत्यक्ष रूप से मौजूदा आम चुनाव में भी खर्च हो रहा है. देखना यह है कि सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी का केंद्र सरकार पर कितना असर होता है.

मां गंगा ने बुलाया है : नरेंद्र मोदी




यहां मां गंगा ने बुलाया है :मोदी
हिन्दुस्तान टीम 24-04-14
http://www.livehindustan.com
बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी आज अपना नामांकन दाखिल करने वाराणसी पहुंचे हैं। काशी में मोदी ने कहा, 'मैं काशी को प्रणाम करता हूं, मेरे मन में विचार पहले यह विचार आया कि भाजपा ने मुझे यहां भेजा, फिर मैंने सोचा कि मैं काशी जा रहा हूं, पर अब मैं कहता हूं कि न मुझे भेजा गया और न ही मैं यहां आया, बल्कि मां गंगा ने मुझे यहां बुलाया। परमात्मा मुझे शक्ति दे कि मैं यहां के लोगों की सेवा करूं। मैं मां की गोद में वाराणसी में वापस आया हूं। उन्होंने कहा कि मैं शक्ति मिल के बुनकर भाइयों के लिये काम करूंगा। मां गंगा मुझे आर्शीवाद दें। उन्होंने कहा कि मैं यहां ऐसा काम करूंगा कि सारे विश्व में मां गंगा की और काशी की जय जयकार होगी।'

नामांकन दाखिल करने से पहले मोदी ने सुरक्षा घेरे में पार्टी कार्यककर्ताओं और समर्थकों के हुजूम के साथ रोड शो किया। यह रोड शो नदेसर से कचहरी इलाके तक हुआ।

गाड़ी पर सवार नरेंद्र मोदी को मलदहिया से जिला मुख्यालय के बीच लगभग ढाई किलोमीटर की दूरी पूरा करने में ज्यादा वक्त लगा क्योंकि यात्रा मार्ग पर भारी जनसैलाब था। भारी भीड़ के कारण मोदी का रोड शो धीरे-धीरे जिला मुख्यालय की तरफ बढ़ा। मोदी के वाहन को आगे बढ़ाने में पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी थी। उत्साही लोग भाजपा का झंडा और मोदी के नाम वाली टोपी पहनकर बीच सड़क पर हैं। नरेंद्र मोदी ने मिंट हाउस चौराहे पर स्वामी विवेकानंद की मूर्ति पर फूल अर्पित किये। इसके बाद मोदी उपस्थित लोगों को संबोधित करेंगे। यह रोड शो का अंतिम पड़ाव है। इसके बाद वह नामांकन करने जाएंगे।

मोदी के नामांकन के लिए जनसैलाब उमड़ा है। अमित शाह, मुखतार नक्वी, रविशंकर प्रसाद, लक्ष्मीकांत वाजपयी, आरएसएस के इंद्रेश कुमार साथ में हैं। मोदी ने बीएचयू के सिंहद्वार के पास मालवीय प्रतिमा पर पुष्पार्पण करके चारों तरफ जुटे हजारों लोगों को हाथ जोड़कर और पूरी तरह झुककर अभिवादन किया। काशीवासियों ने हर-हर महादेव का उदघोष कर उनका स्वागत किया।

चार घंटे की इस रोड शो का इंतजार बनारस की गलियों, घाट, शिक्षण संस्थानों से लेकर भगवान बुद्ध की तपोस्थली तक लोग बेसब्री से कर रहे थे। मोदी विशेष वायुयान से 24 अप्रैल को लालबहादुर शास्त्री एयरपोर्ट पहुंचे। वहां से हेलीकॉप्टर के जरिए बीएचयू के हेलीपैड उतरे। विद्यापीठ में लैडिंग के बाद सुरक्षा घेरे में कार से मलदहिया स्थित सरदार वल्लभ भाई पटेल की प्रतिमा तक गए थे। यहां से मोदी खुली जीप में सवार होकर नामांकन स्थल को रवाना हुए।



रोड शो की तैयारियों में समन्वयक की भूमिका निभा रहे नवरत्न राठी ने कहा, 'इन लोगों से आग्रह किया गया है कि वे अपने पारंपरिक लिबास में आएं ताकि इस रोड शो में मिनी इंडिया की झलक पेश की जा सके'।

काशी की गलियों में गुजरात के विकास की गाथा गा रहे मुस्लिम बंधुओं का दल नामाकंन जुलूस में सबसे आगे होगा। ढोल-मजीरा और शंख के साथ साधु-संतों की टोली होगी तो कुर्ता पायजामा और गले में केसरिया दुपट्टा पहने युवकों का समूह। नमो ब्रैंड वाली साड़ियों में महिला कार्यकर्ता नजर आएंगी। शहर के विभिन्न इलाकों में बसने वाले अन्य प्रांतों के कार्यकर्ता अपनी पारंपरिक वेशभूषा में नजर आएंगे। मोदी के नामांकन को भव्य बनाने के लिए शहर के प्रतिष्ठित वकील, डॉक्टर, उद्यमी भी शामिल होंगे। भाजपा ने मलदहिया से लेकर मिंट हाउस तक कदम-कदम पर सड़क किनारे अपने उन कार्यकर्ताओं को टोली के रूप में खड़ा करेगी जो गुलाब की पंखुड़ियों से उन पर बारिश करेंगे।

मिंट हाउस पर भाजपा के पीएम उम्मीदवार का अपने आदर्श यानी स्वामी विवेकानंद से मिलन होगा। मिंट हाउस पर विवेकानंद की मूर्ति पर माल्यार्पण के बाद कार्यकर्ताओं का आभार प्रकट कर मोदी काफिले के साथ अंबेडकर चौराहा पहुंचेंगे। वहां डॉ. भीमराव अंबेडकर की मूर्ति पर माल्यार्पण के बाद नामांकन स्थल की ओर बढ़ेंगे। माना जा रहा है कि 11:30 से 12 के बीच वह अपना पर्चा भरेंगे। नामांकन के बाद मोदी सीधे पुलिस लाइन पहुंचेंगे और वहां से हेलीकॉप्टर के जरिए रवाना हो जाएंगे।

गौरतलब है कि वाराणसी से मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ रहे 'आप' संयोजक अरविंद केजरीवाल ने बुधवार को ही पर्चा दाखिल किया था।

नामांकन भरने के बाद नरेंद्र मोदी रैली के लिए बिहार के दरभंगा के लिए रवाना हो जाएंगे। वाराणसी लोकसभा क्षेत्र में नामांकन दाखिल करने की आखिरी तिथि 24 अप्रैल। यहां आगामी 12 मई को मतदान होना है। गुजरात के मुख्यमंत्री मोदी के खिलाफ आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल चुनाव लड़ रहे हैं और कांग्रेस से अजय राय चुनावी मैदान में हैं।
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नरेंद्र मोदी के प्रस्तावक
वाराणसी में लोकसभा चुनाव के प्रत्याशी के रूप में नरेंद्र मोदी के चार प्रस्तावक है. ऊपर जो तस्वीर दिख रही है इसमें बैठे लोगों में से चार लोग मोदी के नामांकन का प्रस्ताव रख रहे हैं. दाएं से बाएं: सफेद कुर्ता में गिरिधर मालवीय, शास्त्रीय गायक छन्नू लाल मिश्र, नाविक भद्रा प्रसाद निषाद और बुनकर अशोक कुमार. तस्वीर में दाएं से दूसरा व्यक्ति प्रस्तावक नहीं है.



तेरा वैभव अमर रहे माँ, हम दिन चार रहें न रहे।




ध्येय साधना अमर रहे।
ध्येय साधना अमर रहे।

अखिल जगत को पावन करती
त्रस्त उरों में आशा भरती
भारतीय सभ्यता सिखाती
गंगा की चिर धार बहे।

इससे प्रेरित होकर जन-जन
करे निछावर निज तन-मन-धन
पाले देशभक्ति का प्रिय प्रण
अडिग लाख आघात सहे।

भीती न हमको छू पाये
स्वार्थ लालसा नहीं सताये
शुद्ध ह्नदय ले बढते जायें
धन्य-धन्य जग आप कहे।

जीवन पुष्प चढा चरणों पर
माँगे मातृभूमि से यह वर
तेरा वैभव अमर रहे माँ।
हम दिन चार रहें न रहे।

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English :-
dhyeya sādhanā amara rahe |
dhyeya sādhanā amara rahe |

akhila jagata ko pāvana karatī
trasta uroṁ meṁ āśā bharatī
bhāratīya sabhyatā sikhātī
gaṁgā kī cira dhāra bahe |

isase prerita hokara jana-jana
kare nichāvara nija tana-mana-dhana
pāle deśabhakti kā priya praṇa
aḍiga lākha āghāta sahe |

bhītī na hamako chū pāye
svārtha lālasā nahīṁ satāye
śuddha hnadaya le baḍhate jāyeṁ
dhanya-dhanya jaga āpa kahe|

jīvana puṣpa caḍhā caraṇoṁ para
māge mātṛbhūmi se yaha vara
terā vaibhava amara rahe mā |
hama dina cāra raheṁ na rahe |

नरेंद्र मोदी के इंटरव्यू की प्रमुख बातें



नई दिल्ली: एबीपी न्यूज़ के लोकप्रिया कार्यक्रम घोषणापत्र में बीजेपी के पीएम पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने गुजरात के 2002 दंगों, कश्मीर का हल, संघ और संविधान के टकराव, अपनी प्लानिंग के साथ ही अपनी निजी ज़िंदगी से जुड़े सवाल के जवाब दिए.
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आइए जानते हैं कि मोदी के इंटरव्यू की बड़ी-बड़ी बातें:

1. संघ नही संविधान

सवाल: अभी राजीव ने सवाल पूछा आरएसएस के बारे में आपका बचपन से जुड़ाव है आरएसएस के साथ, जाहिर है आपकी सोच पर, आपके जो क्रिया कलाप हैं उसपर आरएसएस की छाप होगी. अगर आप प्रधानमंत्री बनते हैं तो प्रधानमंत्री की हैसियत से आप जो करेंगे आप जो सोचेगें, उस पर भी संघ की छाप होगी क्या?

नरेंद्र मोदी: पहली बात है मुझे सरकार चलानी है, सरकार चलती है संविधान के तहत और मैं मानता हूं सरकार का एक ही रिलीजन होता है, इंडिया फर्स्ट. सरकार की एक ही होली बुक होती है अवर कॉन्सटीट्यूशन, सरकार की एक ही भक्ति होती है, भारत भक्ति, सरकार की एक ही कार्यशैली होती है, सबका साथ सबका विकास.

2. गुजरात दंगों की नैतिक जिम्मेदारी पर

नरेंद्र मोदी: डे वन से ली है. मेरे विधानसभा भाषण हैं, मेरे सब इंटरव्यू में है, available है. बस मेरी प्रार्थना है रिसर्च कर दीजिए. सब कुछ available है आप जो चाहते हैं वो जवाब उसी शब्दों मे है.

नरेंद्र मोदी: सब कुछ बोलता हूं… ऐसा नहीं है झूठ बोल रहे हैं आप मेहरबानी कीजिए..ये भाषा ठीक नहीं है आपकी . मैं 2007 तक हर व्यक्ति को हर सवाल का हर समय जवाब दिया है,  प्रिंट मीडिया में पड़ा है..इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पड़ा है,  आप लोग इसको रिसर्च कीजिए आप को बुरा लगे भला लगे और आप चाहो कि मैं आपसे दब जाऊं तो होने वाला नहीं है.

सवाल: नहीं मैं ये कह रहा…

नरेंद्र मोदी: आप चाहो मुझे नोच लो नहीं कर पाओगे, नहीं कर पाओगे हां 2009 में जब दोबारा यूपीए बना और उन्होंने षड़यंत्र करके कोर्ट, कचहरियों में मुझे सुप्रीम कोर्ट तक मुझे घसीट के फिर मुझे लगा कि अब मुझे कुछ नहीं बोलना चाहिए क्योंकि सूप्रीम कोर्ट को इनफ्लुएंस नहीं होना चाहिए, सुप्रीम कोर्ट को स्वतंत्र करना चाहिए. आज तक हिंदुस्तान के किसी मुख्यमंत्री को नौ घंटे किसी पुलिस वाले ने ग्रिल किया है? ये मुख्यमंत्री है जिसको नौ घंटे तक पुलिस अफसरों ने ग्रिल किया था , सुप्रीमकोर्ट के कहने पर किया था और सुप्रीम कोर्ट ने उसको वीडियो रिकॉर्डिंग करके देखा था..ये सब कसौटियों से निकला हूं और आगे भी..आगे भी हर कसौटी के लिए तैयार हूं. लेकिन झूठ और राजनीतिक इरादों को सरेंडर कोई करे तो मोदी होने वाला नहीं है .

3. पिंक रेवल्यूशन के मुद्दे पर

मोदी: मुझे बहुत बड़ा दुख होता है कि मेरे देश के इतने बुद्धिमान पत्रकार मेरे सामने बैठे हैं इतने पढ़े लिखे. कोई मुझे समझाए कि  पिंक रिवेल्यूशन शब्द में सांप्रदायिकता कहां आई. कोई मुझे समझाए . आप मेरे पास एक नौजवान आया बड़ा highly qualified लड़का है वो एक सर्वे लेकर आया कि जैसे गांव के किसान की अगर जमीन  जाए और वो बर्बाद होता है वैसे ही पशु जाना उसकी पूरी इकोनॉमी को खत्म कर रहा है . कष्टों में भी वो पशु को पालेगा..खैर अच्छी स्थिति नहीं होगी तो चार लीटर दूध नहीं देगा तो डेढ़ लीटर दूध देगा लेकिन घर चल पाएगा . आज  हिंदुस्तान के कई राज्यों के गांव के गांव किसान मर रहा है पशु उसके जा रहे हैं . जा रहे क्यों? तो तत्कालीन लोभ में आकर के वो दे देता है . ये पूरी तरह मुद्दा आर्थिक विषय है जैसे किसान की जमीन लेना वो पाप है वो बिन सांप्रदायिकता, सांप्रदायिकता का मुद्दा नहीं है वैसे ही पशु ये उसकी बड़ी संपत्ति है . और भारत ने seriously सोचना पड़ेगा और आवश्यकता है कि देश में मैं तो कहने वाला हूं भई कुछ लोग स्टडी करिए अगर इस प्रकार से पशु विहीन हमारी अवस्था बन जाएगी तो आगे वाले..अच्छा आज भारत को मिल्क प्रोडक्टिविटी बढ़ाने की चिंता करने की जरूरत है . हमारे यहां कैटल की संख्या की तुलना में मिल्क प्रोडक्टिविटी बहुत कम है उसके साइंटेफिक तौर तरीकों पर सोचने की जरूरत है अब जैसे गुजरात में मैं कैटल कैंप लगाता हूं और कोशिश करता हूं एक पशु को तीन किलोमीटर से ज्यादा दूर जाना न पड़े ताकि उसकी ….मैं करता हूं . और मैं इस विषय में इतना सेंसिटिव हूं, हिंदुस्तान में मनुष्य के कैटेरैक्ट के ऑपरेशन आज भी कई जगह पर दिक्कत है, कोई एनजीओ कैंप लगाए तो होते हैं . गरीब आदमी को कैटेरैक्ट का ऑपरेशन भी मुश्किल है मेरे राज्य में पशु का भी मैं कैटेरैक्ट ऑपरेशन करता हूं जी, मेरे यहां पशु की डेंटल ट्रीटमेंट होती है इतना ही नहीं मैंने अभी मेरे यहां से वैटेनरी डॉक्टरों की एक ट्रिप अमेरिका भेजी,इसलिए भेजी कि आजकल बड़े घर के लोग इनको खून निकल न जाए इसलिए लेजर टेक्निक से ऑपरेशन होता है मैंने कहा ये मेरे पशुओं को लाभ मिल सकता है क्या? मेरे गुजरात के वेटेनरी डॉक्टर अमेरिका जाकर के पढ़ कर के आए और आज मैंने कई सेंटर्स में पशु के ऑपरेशन लेजर स्टैटिक से कर रहा हूं . मैं मानता हूं कि ये देश की बहुत बड़ी संपत्ति है, गांव की इकोनॉमी का एक बहुत बड़ा आधार है इसको हम निगलेक्ट न करें इस पर हम बल दें . इसको अगर कोई सांप्रदायिक के रंग से रंग देगा तो मेरे देश का इतना बड़ा दुर्भाग्य होगा .भगवान ऐसे न्यूज ट्रेडर्स से बचाए .

सवाल: आप ने जो बात कही उसके जवाब में आप कत्ल खानों की बात करते हैं तो एक समुदाय विशेष की रोजीरोटी भी उससे जुड़ी है दूसरी बात ये कि एनडीए के कार्यकाल में भी मीट एक्सपोर्ट बड़े पैमाने पर हुआ तो उस समय आप की सरकार ने क्यों नहीं किया कुछ ?

मोदी: मैं देखूंगा उस समय उनके क्या प्रॉब्लम थे. मैं देखूंगा, लेकिन इन दिनों स्थिति गंभीर होती गई उस समय हो सकता है शुरू में मेरे पास डिटेल नहीं है..उस समय  हो सकता है कि हमारे पास दूध न देने वाले पशुओं की संख्या एक्सेस हुई हो उस वजह से एक विचार बना हो लेकिन ये आपकी जानकारी सही नहीं है कि कोई एक कम्युनिटी इस बिजनेस में है. ऐसा नहीं है जी मेरे कई जैन मित्र हैं जो इस व्यापार में हैं, इसको किसी कम्युनिटी से मत जोड़िए. मुद्दा उस…अब जैसे enviornment का प्रॉब्लम होता है तो किसी का कारखाना बंद हो जाता है तो उसकी जाति देखते हैं क्या . enviornment के कारण किसी ने अगर हो हल्ला किया और किसी का कारखाना बंद हो गया तो कारखाना बंद होने की जाति देखते हैं क्या ? कि enviornment की चिंता करते हैं  उसी प्रकार से रूरल इकोनॉमी को देखेगें कि कारखाना किसका बंद हुआ उस रंग से रंगेगें. तो ये देश का प्रॉब्लम मोदी नहीं है ये घिसी पिटी परवर्टेड सोच का परिणाम है. कि उसको हर चीज उसी एक कॉर्नर में ले जाने की कोशिश होती है.

4. मुस्लिम समुदाय के संपर्क स्थापित करने के सवाल पर

नरेंद्र मोदी: पहली बात है मेरी जिम्मेवारी है गुजरात के मुख्यमंत्री के नाते 6 करोड़ नागरिकों से जितना जुड़ सकूं उतना जुड़ना चाहिए .  और इन दिनों मुझे देश की जिम्मेवारी मिली है तो एड़ी चोटी का जोर लगा करके सवा सौ करोड़ तक पहुंचने की कोशिश करता हूं . ये मेरी पार्ट ऑफ my responsibility है, and i must do it. हो सकता है 100 कदम चलना हो 3 चल पाऊं, 5 चल पाऊं, 7 चल पाऊं वो अलग विषय है लेकिन ये मेरी जिम्मेवारी है कि मेरे देश के हर किसी व्यक्ति तक, मेरे राज्य के हर व्यक्ति तक पहुंचने का मुझे प्रामाणिक प्रयास करना चाहिए .

सवाल: उसमें मुस्लिम समुदाय भी शामिल है ?

मोदी: मैं..ये आपकी टर्मिनोलॉजी है. मैं इस टर्मिनोलॉजी में कभी जाने वाला नहीं हूं . आप रस्सी बांध करके मुझे ले जाओगे तो भी नहीं ले जा पाओगे .मैं मेरे देशवासियों को मिलूंगा.  मैं एक ही भाषा समझता हूं ये मेरे भारतवासी हैं, ये मेरे भाई हैं ये आप जिस कलर से देखना है आप की मर्जी मोदी उस कलर में जाने वाला नहीं है ये काम..कल अगर मुझे चुनाव हार जाऊं तो हार जाऊं मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है लेकिन देश को तबाह कर दिया इस भाषा ने, बर्बाद कर दिया है आप लोगों की सोच ने उस सोच को मैं कभी भी ओन नहीं करूंगा और आप मेहरबानी करके मेरी स्वतंत्रता पर इस प्रकार के हमले करना बंद कर दीजीए .

5. बिहार बीजेपी के नेता गिरिराज सिंह के बयान पर

नरेंद्र मोदी: कोई सहमत नहीं हो सकता है.

6. शहजादा शब्द के इस्तेमाल पर

सवाल: लेकिन मोदी जी आपकी जो भाषा है भाषणों में..दिल्ली सल्तनत, शहजादा उसे भी बोला जाता है कि एक विशेष समुदाय को टार्गेट करके बोलते हैं आप ?

नरेंद्र मोदी: कमाल हो भइया . ये शहजादा शब्द हमारे यहां इतिहास में हम पढ़ते थे जी, शहजादा शब्द पढ़ते थे. अभी एक दिन कांग्रेस के लोगों ने

सवाल: लोग बोल रहे हैं  आप राजकुमार नहीं बोल…

नरेंद्र मोदी: कांग्रेस ने चार पांच साल पहले की बात है सोनिया जी को राजमाता करके बोला था जी. काफी देर तक राजमाता कहते थे . अब मैं कोई कांग्रेस वालों को कहने जाऊं क्या.. कि भई अब ये राजा रजवाड़े चले गए राजमाता क्यों बोला? ठीक है बोल दिया उन्होंने .

7. राबर्ट वाड्रा पर

सवाल: आपने जो जीजाजी कहा रॉबर्ट वाड्रा को ये उसी विनोद का व्यंग का हिस्सा है ?

नरेंद्र मोदी: नहीं नहीं देखिए पहचान तो करनी पड़ेगी न, पहचान कैसे करोगे बताइए. जो घटना घटी है… घटना घटी है तो एक परिवार का संबंध है संबंध इसी शब्दों में है मुझे और किसी शब्दों का तो मालूम नहीं है कोई और होता तो मैं वो बोलता

सवाल: लेकिन अगर आप की निजी जिंदगी में अगर कोई झांकता है आप भी तो सार्वजनिक जीवन में हैं आप का जीवन भी उसी तरह से  पारदर्शी है तो आप पर आरोप लगते हैं तो क्या वो सही हैं ?

नरेंद्र मोदी: मैंने ये कहां कहा कि भई मेरे ऊपर जो आरोप लगे हैं वो गलत है और सही है या मैं आरोप लगाता हूं वो गलत है और सही है उसके लिए तो देश  है देखता है.. देश देखेगा इसमें क्या है .

सवाल: इस पर मतभेद है लगता है पार्टी में कि रॉबर्ट वॉड्रा पर कारवाई होगी या नहीं होगी ?

मोदी: ये मैं समझता हूं कि बहुत ही गंदा सवाल है , बहुत गंदा सवाल है.. एक तरफ देखें तो कोई कानून से परे नहीं है मान लीजिए नरेंद्र मोदी पर कोई इल्जाम हो और कल मानो नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बन गया तो क्या उस पर केस चलने चाहिए कि नहीं चलने चाहिए चूंकि मैं प्रधानमंत्री बन गया तो इसलिए  नहीं नहीं सब बंद करो ऐसा तो नहीं होना चाहिए. मैं किसी से परे तो हूं नहीं  मैं मेरी बात बताता हूं मैं जिनके लिए आपने पूछा मैं उनके लिए जबाव नहीं दे रहा हूं इसलिए मिक्सअप मत करना वो न्यूज ट्रेडर वाला खेल आप तो नहीं करेंगे मुझे आप पर भरोसा है लेकिन सरकार में मेरा 14 साल का अनुभव मैं बताता हूं मैंने कभी किसी की फाइल खोली नही किसी की भी नहीं और मेरा ये मत रहा है कि अगर मैं उसमें उलझ जाता तो उसमें घुसता ही चला जाता मैं कोई अच्छा काम नहीं कर पाता लेकिन मैंने वो दरवाजे ये मेरा व्यक्तिगत सोच है इसको मैं सरकारी सोच के रुप में नहीं बता रहा हूं. मैंने अपने आपको इससे अलग कर लिया 14 साल में और मैंने नए पॉजीटीव initiative पर ही बल दिया. मुझे मालूम तक नहीं होता है पुरानी चीजें है चलती होगी चलती होगी वो सरकार जाने सरकार का काम जाने हम पांच साल के लिए आते है पांच साल में ये कूड़ा कचरा लेकर घूमते रहेंगे कि कुछ अच्छा करेंगे. तो व्यक्तिगत मेरा मत है कि मेरी शक्ति ये कूड़े कचरा में न जाए ये मेरा मत है . मेरी शक्ति सकारात्मक कामों में जाए अच्छा करने में जाए वरना पांच साल बहुत कम समय होता है जी इसमें हम उलझे रहेंगे तो देश का भला क्या करेंगे. बाकि कानून कानून का काम करता रहे वो करता रहे.

8. अदाणी और अंबानी पर

नरेंद्र मोदी: राजनीतिक विरोधियों की चलाई गई कथा को लेकर आप घूम रहे हो और मीडिया से ये अपेक्ष नहीं है. आप से अपेक्षा ये है  14 साल गुजरात में मोदी ने कैसे राज चलाया है मोदी कि पहचान ये है कि पहले यहां सरकार चलती थी तो कॉरीडोर में दलाल घूमते थे 14 साल हो गए आज लोग कहते हैं कि यार एक सरकार ऐसी आई है कि कोई दलाल जा नहीं पाता है .  आज भी हिंदुस्तान के कह सकते हैं लोग कि एक सरकार ऐसी है कि जिसको दबाया नहीं जा सकता है, खरीदा नहीं जा सकता, चलाया नहीं जा सकता . 14 साल का मेरा ट्रैक रिकॉर्ड बोलेगा ये राजनीतिक आरोपों को कम से कम आप जैसे मीडिया के लोगों ने ओन नहीं करना चाहिए…here i am using word media.

नरेंद्र मोदी: जी, मेरे पास डिटेल फिगर अभी नहीं है लेकिन मैं चाहूंगा कि आपकी चैनल इस पर एक 15-20 मिनट का समय और निकाले आपके रिपोर्टर को मैं डिटेल दे दूंगा लेकिन मोटी- मोटी डिटेल मैं बता दूं क्यों कि आज कल क्या होता है मैं चार बोलूं और साढ़े चार हो तो तीन दिन तक साढ़े चार की चार पर मोदी क्यों बोले इस पर विवाद होता है इसलिए एक्जैक्ट आंकड़ो.. लेकिन गुजरात में 85- 95 कांग्रेस की सरकार थी उसने जमीन किस दाम में दी और किसको दी इसके आंकड़े अवेलेबल हैं . 97 में शंकर सिंह वाघेला की सरकार थी कांग्रेस के समर्थन से चल रही थी उन्होंने 25 पैसे में जमीन दी है कुछ जमीन तो 5 पैसे में दी है ये ….सरकार भाजपा की ऐसी है कि जिसने पैरामीटर तय किए हैं और आपको देश को ये बताना चाहिए रिसर्च करके बताना चाहिए मैं कहता हूं इसलिए नहीं भारत की सुप्रीमकोर्ट ने कहा है कि जमीन के विषय में गुजरात की नीति और राज्यों ने फॉलो करनी चाहिए ये सुप्रीम…और अभी अभी का है तीन साल पहले का अगर आपको राहुल की बात अच्छी लगती है आपको मुबारक, सुप्रीमकोर्ट की अच्छी लगती है तो आप देश की जनता को बताइए और मैं आज रिक्वेस्ट करता हूं आपको ये सारी चीजें आपके रिपोर्टर को मिल जाएगी मेरी सरकार में से देश के सामने जरा रखे तो सही और ये सिद्ध कीजिए कि नेता झूठ बोल रहे हैं .

9. काले धन पर

नरेंद्र मोदी: एक बात तो सारे देश में चर्चा है कि भई विदेशी बैंकों में हिेंदुस्तान का पैसा है  और बाई इनलार्ज उसमें कोई डिस्प्यूट नहीं है . अब ये जानकारियां सरकार के पास है , हम सरकार में नहीं है, जो सरकार में हैं वो इसका जवाब देते नहीं हैं. तो हमारा स्टैंड ये है कि जब हम सरकार में आएगें तो हमारी ये प्रयॉरिटी रहेगी कि दूध का दूध पानी का पानी करेंगे . अगर मानों नहीं है  तो भी ये हवा बाजी बंद हो जाएगी और अगर है तो हम लाएंगे .

10. शादी और पत्नी के मुद्दे पर

सवाल: लेकिन अगर आप की निजी जिंदगी में अगर कोई झांकता है आप भी तो सार्वजनिक जीवन में हैं आप का जीवन भी उसी तरह से पारदर्शी है तो आप पर आरोप लगते हैं तो क्या वो सही हैं ?

नरेंद्र मोदी: मैंने ये कहां कहा कि भई मेरे ऊपर जो आरोप लगे हैं वो गलत है और सही है या मैं आरोप लगाता हूं वो गलत है और सही है उसके लिए तो देश  है देखता है.. देश देखेगा इसमें क्या है .

सवाल: मेरा ये कहना था कि आपने अापके मन में किस हद तक आरोप हो सकते हैं इसका कुछ तो आपके मन में आकलन होगा लेकिन आपने चुनाव में जब अपना एफिडेबिट दिया और उसके बाद आपके मेरिटल स्टेटस के बारे में जिस  तरह  से आरोप और चर्चा हो गई क्या आपने ये एक्सपेक्ट किया था कि ये भी हो जाएगी इसकी चर्चा ?\

नरेंद्र मोदी: मुझे किसी चीज का आश्चर्य नहीं होता है मेरी जिंदगी में कुछ नहीं है ऐसी भी बातें चलती हैं अब उनके पास कोई है नहीं तो क्या करें.. करते रहेंगे .

सवाल: बंगाल में हर चुनावी क्षेत्र में खुद ममता बनर्जी मुख्यमंत्री जा जा करके आपकी निजी जिंदगी का वो एफिजेविट वाला हिस्सा बता रहे हैं कैसा लग रहा है .

नरेंद्र मोदी: मुझे कुछ नहीं लगता है उनकी मर्जी उनके पास जो शस्त्र हैं वो उसका उपयोग करें , इसके लिए  मन में क्या कटुता, आलोचना क्यों करनी चाहिए .लोगों को जज  करने दीजिए  ऩ

11. राज ठाकरे के समर्थन पर

नरेंद्र मोदी: 16 मई के बाद चुनावों के जो नतीजे आएंगे मेरा पक्का विश्वास है कि सरकार चलाने के लिए कोई भी ऐसे सपोर्ट की जरुरत नहीं पड़ेगी लेकिन देश चलाने के लिए सबके सपोर्ट की जरुरत रहेगी और मेरा ये मत है कि लोकतंत्र में देश चलाने के लिए राजनीती से ऊपर उठकर के हर किसी का सहयोग लेना चाहिए.

12. क्या मोदी के दोस्त हैं लालू?

सवाल: क्या इसमें सच्चाई है कि शरद पवार और आप एक दूसरे के साथ politically जाने की बात हो रही थी

नरेंद्र मोदी: नहीं, नहीं, नहीं… ऐसी कोई बात नहीं है.. ऐसी कोई बात नहीं है.. ऐसी कोई बात नहीं है.. जहां तक दोस्ती का सवाल है आपको हैरानी होगी मेरी लालू जी से भी दोस्ती रहती है जी. हम सार्वजनिक जीवन में हैं, राजनीतिक विचारधारा के कारण हम अपने अपने stand लेते हैं लेकिन ये एक विशाल परिवार है जी… इसमें कोई दुश्मनी थोड़े होती है..

13. ममता बनर्जी पर

नरेंद्र मोदी: नहीं नहीं नहीं.. ममताजी नहीं आएंगी वो पक्का था, उसमें कोई दुविधा हमारे मन में नहीं थी, कोई दुविधा नहीं थी और उसमें हमारे मन में कोई आशंका नहीं है… लेकिन मैं जरूर मानता हूं और उसमें हमारे मन में कोई आशंका नहीं है लेकिन मैं जरूर मानता हूं कि लेफ्ट ने जो हालत करके रखा हुआ है उसको बाहर निकालने में अभी ममता जी को काफी समय मिला है लेकिन वो symptoms नजर नहीं आते तो गुस्से से ज्यादा मेरी निराशा है ममता जी के संबंध में, गुस्सा कम है, निराशा ज्यादा है.

14. अमेरीका जाने के सवाल

सवाल: इसी से जुड़ा एक और सवाल सवाल ये कि क्या आप अमेरीका जाएंगे अगर आप प्रधानमंत्री बनते है तो

नरेंद्र मोदी: ये बड़ा भारी सवाल है, जी ये बड़ा भारी सवाल है देश की जनता ने मुझे देश का काम करने के लिए चुना है.

15. कशमीर पर मोदी

सवाल: क्या ये सही है कि आप की तरफ से कोई पहल हुई थी एक अलगाववादी से बात करने कि.

नरेंद्र मोदी: मैं तो सुनकर तो हैरानी हुई… ये कहां से आया खैर आज तो शायद मैंने मालूम नहीं मैंने मीडिया देखा नहीं पर क्लियर हो गया किसी ने कह दिया कि नहीं नहीं हम कोई मोदी के दूत नहीं है मुझे तो नाम भी मालूम नहीं हैं ऐसे ही कोई खबर चलती है

सवाल: पाकिस्तान के बारे में आपकी पार्टी आरोप लगाती है यूपीए पर कि कमजोर रवैया है पाकिस्तान के प्रति आपकी नजर में मजबूत रवैये की परिभाषा क्या है?

नरेंद्र मोदी: पहली बात ये है हम लोग देश को ऐसे चलाएं, देश को ऐसा बनाएं,  ताकि कोई हमें आंख न दिखाए और हमे भी दुनिया के सामने आंख दिखाकर के व्यवहार नही कर सकते हैं. आंख दिखाकर के भी दुनिया नहीं चल सकती, आंख झुकाकर भी नहीं चल सकती है. बात आंख मिलाके होनी चाहिए  और वो अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में reciprocacy होती है वहीं उत्तम तरीका होता है.

बुधवार, 23 अप्रैल 2014

अब एक मजबूत राष्ट्र बनाने का समय है - नरेंद्र मोदी

भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने बुधवार को प्रियंका गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि उनका 'परिवार पिछले 60 से मजबूत होता जा रहा है' और अब एक मजबूत राष्ट्र बनाने का समय है।


नरेंद्र मोदी ने साधा प्रियंका गांधी वाड्रा पर निशाना, कहा,
60 साल में सिर्फ गांधी परिवार मजबूत हुआ
अप्रैल 23, 2014
http://khabar.ndtv.com
कलोल (गुजरात): भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने बुधवार को प्रियंका गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि उनका 'परिवार पिछले 60 से मजबूत होता जा रहा है' और अब एक मजबूत राष्ट्र बनाने का समय है।

मोदी ने यह हमला ऐसे समय में बोला है कि जब कल ही प्रियंका ने कहा था कि उनके पति रॉबर्ट वाड्रा पर किए जा रहे 'राजनीतिक' हमले से लड़कर वह और भी मजबूत होकर उभरेंगी। गुजरात के गांधीनगर जिले के कलोल कस्बे में एक रैली को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा, 'आप कहते हैं कि हम मजबूत बनेंगे, आप (गांधी परिवार) तो पिछले 10 साल से मजबूत होते जा रहे हैं।' किसी का नाम लिए बगैर मोदी ने कहा, 'पर आज मुद्दा यह है कि देश को कैसे मजबूत बनाएं। आप जहां खुद को मजबूत बनाना चाहते हैं, वहीं हम (भाजपा) एक मजबूत राष्ट्र बनाना चाहते हैं। हमारे लिए लोगों की आवाज से बढ़कर कुछ भी नहीं है।'

मोदी साफ तौर पर प्रियंका के इस बयान की तरफ इशारा कर रहे थे कि विपक्षी भाजपा कथित अनुचित भूमि करारों के मुद्दे पर उनके पति को गलत तरीके से निशाना बना रही है, पर ऐसे हमलों से वह और भी मजबूत होकर उभरेंगी।

प्रियंका ने मंगलवार को रायबरेली में कहा था, 'जब आप टीवी देखते हैं तो आप क्या देखते हैं? कठोर शब्द, मेरे परिवार का अपमान। मेरे पति के बारे में बहुत सारी बातें कही जाती हैं। मुझे इससे दुख होता है। मुझे अपने लिए दुख नहीं होता बल्कि इसलिए कि आप किसी का अपमान कर रहे हैं, सच्चाई नहीं बताई जाती।'

प्रियंका ने कहा था, 'वे जितना ज्यादा मुझे जलील करेंगे, लड़ने का मेरा इरादा मजबूत होता जाएगा। वे जितना ही मुझे नुकसान पहुंचाने का काम करेंगे, मैं उतनी ही मजबूत होती जाऊंगी।' मोदी ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह अनर्गल आरोप लगाकर वास्तविक मुद्दों से लोगों का ध्यान भटका रही है।

भाजपा नेता ने कहा, 'हमने जब भी सवाल उठाए, उन्होंने मुझ पर और आरोप लगा दिए। जब कुछ काम नहीं आया तो कांग्रेस के नेता सीबीआई के गलत इस्तेमाल का मुद्दा ले आए। मेरा मानना है कि कांग्रेस ने मुद्दों के आधार पर लड़ने की अपनी क्षमता खो दी है।'

गुजरात के मुख्यमंत्री मोदी ने गांधी परिवार के अन्य सदस्यों पर भी निशाना साधा। उन्होंने 'मां-बेटे' पर देश को लूटने का आरोप लगाया। मोदी ने रैली में आए लोगों से सवाल किया, 'आपको नहीं लगता कि देश को लूटने के बाद काला धन विदेशी बैंकों में डाल दिया गया? हमें काला धन वापस लाना चाहिए कि नहीं?' इस पर लोगों ने 'हां-हां' में जवाब दिया।
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नरेंद्र मोदी ने साधा प्रियंका पर निशाना,
कहा 60 साल में सिर्फ गांधी परिवार मजबूत हुआ
http://www.samaylive.com
मोदी ने बुधवार को प्रियंका गांधी पर निशाना साधा और कहा ‘‘उनका परिवार पिछले 60 से मजबूत होता जा रहा है’’ और अब एक मजबूत राष्ट्र बनाने का समय है.
मोदी ने यह हमला ऐसे समय में बोला है कि जब मंगलवार को प्रियंका ने कहा था कि उनके पति रॉबर्ट वाड्रा पर किए जा रहे ‘राजनीतिक’ हमले से लड़कर वह और भी मजबूत होकर उभरेंगी.
गुजरात के गांधीनगर जिले के कलोल कस्बे में एक रैली को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा, ‘‘आप कहते हैं कि हम मजबूत बनेंगे...आप (गांधी परिवार) तो पिछले 10 साल से मजबूत होते जा रहे हैं.’’
किसी का नाम लिए बगैर मोदी ने कहा, ‘‘पर आज मुद्दा यह है कि देश को कैसे मजबूत बनाएं.आप जहां खुद को मजबूत बनाना चाहते हैं, वहीं हम (भाजपा) एक मजबूत राष्ट्र बनाना चाहते हैं . हमारे लिए लोगों की आवाज से बढ़कर कुछ भी नहीं है.’’
मोदी साफ तौर पर प्रियंका के इस बयान की तरफ इशारा कर रहे थे कि विपक्षी भाजपा कथित अनुचित भूमि करारों के मुद्दे पर उनके पति को गलत तरीके से निशाना बना रही है पर ऐसे हमलों से वह और भी मजबूत होकर उभरेंगी.
प्रियंका ने कल रायबरेली में कहा था, ‘‘जब आप टीवी देखते हैं तो आप क्या देखते हैं ? कठोर शब्द, मेरे परिवार का अपमान . मेरे पति के बारे में बहुत सारी बातें कही जाती हैं . मुझे इससे दुख होता है . मुझे अपने लिए दुख नहीं होता बल्कि इसलिए कि आप किसी का अपमान कर रहे हैं...सच्चाई नहीं बताई जाती.’’
प्रियंका ने कहा था, ‘‘वे जितना ज्यादा मुझे जलील करेंगे, लड़ने का मेरा इरादा मजबूत होता जाएगा . वे जितना ही मुझे नुकसान पहुंचाने का काम करेंगे, मैं उतनी ही मजबूत होती जाऊंगी.’’
मोदी ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह अनर्गल आरोप लगाकर वास्तविक मुद्दों से लोगों का ध्यान भटका रही है.  
भाजपा नेता ने कहा, ‘‘हमने जब भी सवाल उठाए, उन्होंने मुझ पर और आरोप लगा दिए . जब कुछ काम नहीं आया तो कांग्रेस के नेता सीबीआई के गलत इस्तेमाल का मुद्दा ले आए . मेरा मानना है कि कांग्रेस ने मुद्दों के आधार पर लड़ने की अपनी क्षमता खो दी है.’’
गुजरात के मुख्यमंत्री मोदी ने गांधी परिवार के अन्य सदस्यों पर भी निशाना साधा . उन्होंने ‘मां-बेटे’ पर देश को लूटने का आरोप लगाया.मोदी ने रैली में आए लोगों से सवाल किया, ‘‘आपको नहीं लगता कि देश को लूटने के बाद काला धन विदेशी बैंकों में डाल दिया गया ? हमें काला धन वापस लाना चाहिए कि नहीं ?’’ इस पर लोगों ने ‘‘हां..हां’’ में जवाब दिया.

मंगलवार, 22 अप्रैल 2014

माँ त्रिपुरा सुंदरी के धाम : "निष्प्राण में फूंके प्राण, पीड़ितों का करे परित्राण "


"निष्प्राण में फूंके प्राण, पीड़ितों का करे परित्राण "
माँ त्रिपुरा सुंदरी के धाम

- राजस्थान में बांसवाड़ा से लगभग १४ किलोमीटर दूर तलवाड़ा ग्राम से मात्र ५ किलोमीटर की दूरी पर ऊंची रौल श्रृखलाओं के नीचे सघन हरियाली की गोद में उमराई के छोटे से ग्राम में माताबाढ़ी में प्रतिष्ठित है मां त्रिपुरा सुंदरी। कहा जाता है कि मंदिर के आस-पास पहले कभी तीन दुर्ग थे। शक्तिपुरी, शिवपुरी तथा विष्णुपुरी नामक इन तीन पुरियों में स्थित होने के कारण देवी का नाम त्रिपुरा सुन्दरी पड़ा।

- यह स्थान कितना प्राचीन है प्रमाणित नहीं है। वैसे देवी मां की पीठ का अस्तित्व यहां तीसरी शती से पूर्व का माना गया है। गुजरात, मालवा और मारवाड़ के शासक त्रिपुरा सुन्दरी के उपासक थे। गुजरात के सोलंकी राजा सिद्धराज जयसिंह की यह इष्ट देवी रही। ख्याति लब्ध भूपातियों की इस इष्ट देवी परम्परा को बाबूजी स्व. हरिदेव जोशी प्रणीत उसी परम्परा के संरक्षण को बीड़ा अब वसुन्धरा राजे सिन्धिया ने उठाया है। मां की उपासना के बाद ही वे युद्ध प्रयाण करते थे।

- कहा जाता है कि मालव नरेश जगदेश परमार ने तो मां के श्री चरणों में अपना शीश ही काट कर अर्पित कर दिया था। उसी समय राजा सिद्धराज की प्रार्थना पर मां ने पुत्रवत जगदेव को पुनर्जीवित कर दिया था।

"निष्प्राण में फूंके प्राण, पीड़ितों का करे परित्राण "

- तीनों पुरियों में स्थित देवी त्रिपुरा के गर्भगृह में देवी की विविध आयुध से युक्त अठारह भुजाओं वाली श्यामवर्णी भव्य तेजयुक्त आकर्षक मूर्ति है। इसके प्रभामण्डल में नौ-दस छोटी मूर्तियां है जिन्हें दस महाविद्या अथवा नव दुर्गा कहा जाता है। मूर्ति के नीचे के भाग के संगमरमर के काले और चमकीले पत्थर पर श्री यंत्र उत्कीण है, जिसका अपना विशेष तांत्रिक महत्व हैं । मंदिर के पृष्ठ भाग में त्रिवेद, दक्षिण में काली तथा उत्तर में अष्ट भुजा सरस्वती मंदिर था, जिसके अवशेष आज भी विद्यमान है। यहां देवी के अनेक सिद्ध उपासकों व चमत्कारों की गाथाएं सुनने को मिलती हैं।

* माता रानी सब का कल्याण करे और सभी को सुख एवं समृद्धि प्रदान करे इसी शुभकामना के साथ गुरुकृपा ज्योतिष की तरफ़ से सभी माता के भक्तो को जय माता दी....!

रविवार, 20 अप्रैल 2014

यूपीए सरकार की विदाई का वक्त: नरेंद्र मोदी



अब है यूपीए सरकार की विदाई का वक्त: नरेंद्र मोदी
कटिहार, ज्योति प्रकाश वर्मा 19-04-14

भाजपा के पीएम पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने कहा कि अब तक देश की 232 सीटों पर हुए चुनाव में जनता ने केंद्र की यूपीए सरकार की विदाई पर मुहर लगा दी है। अब तक के रुझान से स्पष्ट है कि देश की जनता को मां (सोनिया)-बेटे(राहुल) की सरकार से मुक्ति मिल गई है। बाकी बचे चुनाव में आप सब की जिम्मेदारी है कि एक मजबूत सरकार का गठन करें। वहीं नरेन्द्र मोदी ने कहा कि भाजपा ने अपने घोषणापत्र में बिहार पर विशेष ध्यान रखा है।

श्री मोदी शनिवार को कटिहार के डीएस कॉलेज मैदान में भाजपा प्रत्याशी निखिल कुमार चौधरी के पक्ष में चुनावी सभा को संबोधित कर रहे थे। लगभग 21 मिनट के संबोधन में वह कांग्रेस के खिलाफ जितना आक्रामक दिखे उतना ही परोक्ष रूप से बिहार की नीतीश सरकार पर भी निशाना साधा।

निर्धारित समय से लगभग डेढ़ घंटा विलंब से शाम 4.27 बजे नरेंद्र मोदी का हेलीकॉप्टर कटिहार में उतरा। वह सीधे मंच पर आ गए और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मंगल पांडेय ने उन्हें संबोधन के लिए आमंत्रित किया। डीएस कॉलेज मैदान में जुटी भीड़ और महिलाओं की खासी तादाद देखकर आादित मोदी ने कहा कि मुङो बिहार से बहुत लगाव है, इसी से बार-बार यहां आने का मन करता है। बिहार से एक अजीब सा रिश्ता जुड़ गया है। चुनाव बाद भी यहां आने का क्रम जारी रहेगा। आप सबका प्यार मुङो बिहार के लिए कुछ करने की हिम्मत देता है। उन्होंने कहा कि शायद इसी रिश्ते से बिहार के लिए कुछ करने के लिए मन में ठाना है। हमारी पार्टी ने अपने घोषणा-पत्र में भी बिहार का विशेष ध्यान देने की बात कही है। बिहार के जिम्मे ही अब देश का भविष्य है। उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि पश्चिम के साथ पूरब भी विकास करेगा तभी देश महान होगा और शक्तिशाली होगा। मन में इच्छा है कुछ करने की कि पूरब और पूवरेत्तर के हर राज्य, जिले और गांव का विकास समान रूप से हो। बिहार और बिहारियों की बात करने के साथ ही उन्होंने अपनी आक्रामक शैली अपनाई और कहा कि देश में अब तक जिन 232 सीटों पर चुनाव हो चुके हैं वहां से जनता का रुझान बता रहा है कि अब मां-बेटे की सरकार की मुक्ति तय है। अब लोगों का जीवन बर्बाद होने से बच जाएगा। लेकिन इसके बाद अब आप सब कि जिम्मेदारी है कि देश में एक मजबूत सरकार देने के लिए एनडीए के प्रत्याशियों को विजय माला पहना कर दिल्ली भेजे। उन्होंने कहा कि अब प्रधानमंत्री के  पूर्व मीडिया सलाहकार संजय

बारू की पुस्तक 
से यह खुलासा हो चुका है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह थे, लेकिन सरकार तो मां और बेटे चला रहे थे। नरेन्द्र मोदी ने एक बार फिर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को निशाने पर लिया और कहा वह गरीबी क्या जानें? वो तो सोने का चम्मच लेकर पैदा हुए है। अगर वो गरीबों के लिए कुछ नहीं कर सकते तो उन्हें गरीबी का मजाक नहीं उड़ाना चाहिए। मोदी ने कहा जैसे लोग दुनिया के अजूबों में शामिल ताजमहल को देखने जाते हैं और फोटो निकलवाकर दिखाते हैं। वैसे ही गरीब राहुल के लिए अजूबा भी है। उन्हें कौतूहल रहता है कि गरीबी क्या होती है? क्या गरीब के भी दो पैर दो आंख होते हैं? वह कैसे खाता है कैसे सोता है? इसीलिए वह जाते हैं और किसी के घर उसका खाते भी हैं और उसके बच्चाे को गोद में लेकर फोटो खिंचवाकर सालभर देश भर में दिखाते हैं। लेकिन जब उनके लिए कुछ करने की बात आती है तो उनके पास कुछ नहीं होता। वास्तव में उन्होने गरीबों को अपने टूरिज्म का हिस्सा मान लिया है।

एके 47 राइफल : कांग्रेस के वाराणसी उम्मीदवार अजय राय


कांग्रेस के घोषित उम्मीदवार की असलियत और यह भी की कांग्रेस किस स्टार तक आतंकवादी प्रेमी है
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एके 47 राइफल मामले में घिरे , कांग्रेस के घोषित उम्मीदवार अजय राय
Saturday,Apr 19,2014
http://www.jagran.com/loksabha-chunaav
नई दिल्ली [जागरण न्यूज नेटवर्क]। वाराणसी में नरेंद्र मोदी के खिलाफ कांग्रेस के घोषित उम्मीदवार विधायक अजय राय के बिहार के बाहुबली नेताओं से नजदीकी रिश्ते रहे हैं। कश्मीर से आई हथियारों की खेप में से चार एके 47 राइफल उन्होंने प्राप्त भी की थीं। यह बात बिहार पुलिस के रिकॉर्ड में है। इतना ही नहीं बिहार के डीजीपी के रूप में डीपी ओझा ने प्रदेश के गृह विभाग को दी रिपोर्ट में बिहार के बाहुबली पूर्व सांसद शहाबुद्दीन और अजय राय के रिश्ते कश्मीरी आतंकियों से लेकर दाउद इब्राहिम तक बताए थे।
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव व उप्र प्रभारी अमित शाह ने एके 47 राइफलों के मामले में शनिवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से जवाब मांगा है। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी से जुड़े इस मामले की जांच की मांग की है।
लखनऊ में भाजपा प्रदेश मुख्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में अमित शाह ने कहा, कांग्रेस के पास स्वच्छ छवि वाले उम्मीदवारों का टोटा है। राय पर एके-47 राइफल सौदे में शामिल होने का आरोप लगाते हुए शाह ने आरोपों पर राहुल गांधी और सोनिया गांधी की चुप्पी पर भी सवाल उठाए।

गृह विभाग में दब गई 2003 में पूर्व डीजीपी की सौंपी रिपोर्ट
पूर्व सांसद शहाबुद्दीन व पूर्व विधायक अजय राय द्वारा आतंकियों से एके 47 जैसे स्वचालित हथियारों की खरीद मामले में 11 वर्ष पहले बिहार के तत्कालीन वरिष्ठ आइपीएस अधिकारी डीपी ओझा ने 87 पन्नों की रिपोर्ट तत्कालीन गृह सचिव को सौंपी थी, जिसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।

ओझा ने कहा कि उस समय अपराधियों की गिरफ्तारी के बदले उनका ही स्थानांतरण कर दिया गया था। पूर्व डीजीपी ओझा ने बताया कि फौजी व दिल्ली की लोदी कॉलोनी थाना क्षेत्र से गिरफ्तार भूपेंद्र त्यागी उर्फ अवधेश त्यागी के इकबालिया बयान के आधार पर ही उन्होंने गृह विभाग को 87 पन्नों की रिपोर्ट सौंपी थी। इस रिपोर्ट में तत्कालीन सांसद शहाबुद्दीन के साथ-साथ तत्कालीन विधायक अजय राय व कुछ अन्य राजनीतिक लोगों के कश्मीरी आतंकियों से लेकर दाउद इब्राहिम तक के संबंध की चर्चा थी।
गृह विभाग से इस रिपोर्ट को केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजने की अनुशंसा की गई थी, ताकि रिपोर्ट में तथ्याें के आधार पर आरोपित किए गए राजनीतिक हस्तियों पर कानूनी कार्रवाई की जा सके। मामले में अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
आरोप साबित करें, छोड़ दूंगा राजनीति: राय
बिहार के बाहुबली मो. शहाबुद्दीन के साथ बारह साल पहले एके-47 हथियार खरीद प्रकरण में नाम सामने आने पर कांग्रेस उम्मीदवार अजय राय ने कहा कि भाजपा या कोई सुरक्षा एजेंसी आरोपी साबित कर दे तो वह राजनीति छोड़ देंगे।
उन्होंने बारह साल पुरानी रिपोर्ट अचानक सामने आने को लेकर सवाल किया कि जब मैं भाजपा में था तब उन्हें यह नहीं दिखा लेकिन अब मैं कांग्रेस में हूं तो मेरे ऊपर बिना ठोस सुबूत के आरोप मढ़ दिए। जब भाजपा की सरकार थी तब इन आरोपों की जांच क्यों नहीं कराई गई।

नरेंद्र मोदी वाराणसी में 24 को करेंगे नामांकन
भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी वाराणसी में 24 अप्रैल को नामांकन करेंगे। सभी अटकलों पर विराम लगाते हुए भाजपा प्रदेश प्रभारी अमित शाह ने बताया कि नरेंद्र मोदी के पर्चा दाखिल करते ही प्रदेश में चल रही मोदी लहर सुनामी में बदल जायेगी। सपा सरकार के खिलाफ जबरदस्त आक्रोश है, जिसके चलते भाजपा अब तक के अपने सभी रिकार्ड तोड़ने जा रही है। परिवर्तन का मूड है। उन्होंने केंद्र में एनडीए के नेतृत्व में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने का दावा किया और यूपीए पर जमकर हमला बोला। उन्होंने यूपीए-1 और यूपीए-2 के शासन काल में सर्वाधिक महंगाई बढ़ने का आरोप लगाया और इसके लिए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को जिम्मेदार बताया।

शुक्रवार, 18 अप्रैल 2014

वाड्रा ने एक लाख से बनाए 325 करोड़ः द वॉल स्ट्रीट जनरल




रॉबर्ट वाड्रा ने एक लाख से बनाए 325 करोड़ः द वॉल स्ट्रीट जनरल
एजेंसियां | Apr 18, 2014,नई दिल्ली !
http://navbharattimes.indiatimes.com
उम्र 44 साल और बस हाईस्कूल पास रॉबर्ट वाड्रा ने महज पांच साल के भीतर एक लाख रुपए के निवेश से 325 करोड़ से अधिक की संपत्ति बनाई है। देश के सबसे ताकतवर राजनीतिक घराने यानी गांधी परिवार के दामाद, प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा के बारे में ये सनसनीखेज खुलासे द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने किए हैं।

द वॉल स्ट्रीट जर्नल एक प्रतिष्ठित अमेरिकी अखबार है। इस रिपोर्ट में प्रॉपर्टी के जानकारों से बातचीत, वाड्रा की कंपनियों की फाइलिंग और जमीन के दस्तावेजों के आधार पर वाड्रा की संपत्ति का यह आकलन किया है। वेबसाइट में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार वाड्रा ने 2007 में एक लाख रुपए से शुरू की गई कंपनी से 2012 में 12 मिलियन डॉलर यानी करीब 72 करोड़ रुपए से ज्यादा की प्रॉपर्टी बेची है।

रिपोर्ट का दावा है कि वाड्रा के पास अभी भी 42 मिलियन डॉलर यानी 253 करोड़ रुपए से ज्यादा की रियल एस्टेट प्रॉपर्टी बची हुई है। साफ है, रिपोर्ट के दावों को मानें तो रॉबर्ट वाड्रा ने महज एक लाख रुपए की लागत से खड़ी की गई कंपनी से पांच साल के भीतर 325 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति बनाई है।

द वॉल स्ट्रीट जर्नल पर प्रकाशित रिपोर्ट का दावा है कि वाड्रा की कंपनियों ने 2012 के बाद रियल एस्टेट से जुड़ी कोई बिक्री की है या नहीं, इसकी जानकारी नहीं है। क्योंकि वाड्रा की कंपनियों से जुड़ी बीते 2 साल की फाइलिंग के रेकॉर्ड सरकारी वेबसाइट्स पर उपलब्ध नहीं हैं।

बीते 7 साल के भीतर वाड्रा एक आम बिजनसमैन से रियल एस्टेट का बड़ा नाम बन गए। वेबसाइट के मुताबिक वाड्रा के पास रियल एस्टेट कारोबार का कोई खास तजुर्बा भी नहीं है। वेबसाइट की मानें तो वाड्रा और गांधी परिवार के लिए महेश नागर नामक व्यक्ति जमीनों के सौदे कराता है। महेश नागर राजस्थान का रहने वाला है और गांधी परिवार से उसके गहरे संबंध हैं। हालांकि नागर इससे इंकार करते हैं।

रिपोर्ट का दावा है कि 2004 में जब सोनिया गांधी के नेतृत्व में यूपीए सत्ता में आई, उस समय सोनिया के दामाद रॉबर्ट वाड्रा सस्ते गहनों के एक्सपोर्ट का छोटा बिजनस करते थे। 2007 में वाड्रा रियल एस्टेट के क्षेत्र में उतरे और स्काई लाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लि. के नाम से एक कंपनी बनाई। मिनिस्ट्री ऑफ कॉर्पोरेट अफेयर्स के रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के मुताबिक इस कंपनी को वाड्रा ने 2000 डॉलर से भी कम यानी करीब एक लाख रुपए की रकम से शुरू किया था।

सोनिया, राहुल के खून में फासीवाद: भाजपा प्रवक्ता मीनाक्षी लेखी





सोनिया और राहुल के खून में फासीवाद: भाजपा प्रवक्ता मीनाक्षी लेखी

ज़ी मीडिया ब्यूरो
http://zeenews.india.com/hindi/news/lok-sabha-elections-2014/sonia-and-rahul-have-fascism-in-their-blood/207303

नई दिल्ली : भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी को बार-बार हिटलर कहे जाने पर भाजपा प्रवक्ता मीनाक्षी लेखी ने कांग्रेस पर जबरदस्त पलटवार किया है। लेखी ने कहा कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खून में फासीवाद है।

गांधी परिवार पर जवाबी हमले में लेखी ने कहा, `फासीवाद सोनिया और राहुल गांधी के खून में है। सोनिया गांधी के पिता स्टेफनो मेनो द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान पूर्वी मोर्चे पर हिटलर का साथ देते हुए सोवियत सेना के खिलाफ लड़े थे। सोनिया के पिता मुसोलिनी और इटली की नेशनल फासिस्ट पार्टी के कट्टर समर्थक थे। मुझे नहीं पता कि वो लोग किस आधार पर नरेंद्र मोदी को हिटलर कह रहे हैं।`

लेखी का यह जवाबी हमला कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी के उस बयान के बाद आया है जिसमें उन्होंने नरेंद्र मोदी की तुलना हिटलर, मुसोलिनी, ईदी अमीन और जिया उल हक से की थी। सिंघवी ने मोदी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा था कि ये सभी तानाशाह जनसाधारण द्वारा निर्वाचित किये जाते थे लेकिन उनके चुनाव का यह मतलब नहीं था कि उन्हें जनसंहार और मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों से छूट मिल गई।

सिंघवी ने कहा था कि किसी भी तरीके से चुनाव में मिला जनादेश किसी के भी नरसंहार या सांप्रदायिकता को जायज नहीं ठहरा सकता। हिटलर और मुसोलिनी दोनों ही बड़े अंतराल से चुनाव जीते थे और ऐसा ही ईदी अमीन और जिया उल हक के साथ भी था।

सिंघवी ने कहा, `जनसाधारण द्वारा चुने गये तानाशाहों में गुजरात में मोदी और युगांडा में ईदी अमीन हैं। इनमें एक चीज समान है कि वे जज हैं, ज्यूरी हैं और अभियोजक भी हैं। सारी भूमिका खुद निभाते हैं। उनके अंदर कोई संवेदना, कोई दया नहीं है। उन्हें लगता है कि वे कभी गलती नहीं करते इसलिए वे कभी माफी नहीं मांगते।
First Published: Friday, April 18, 2014,

बुधवार, 16 अप्रैल 2014

‘महानायक’ और मध्यवर्ग


ये विचार एक वरिष्ठ पत्रकार के हैं , मेरी मान्यता हे की देश में कांग्रेस के वर्त्तमान वहिष्कार का कारण आसमान को भी पार कर गई मंहगाई ही है ।  



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अज्ञान का आनंदलोक और मध्यवर्ग
Apr 15 2014  , ।। उर्मिलेश ।। वरिष्ठ पत्रकार
http://www.prabhatkhabar.com/news/106775-Ignorance-Anandalok-middle-class-Modi.html
नये मध्य वर्ग के सरोकार बिल्कुल सीमित हैं. आज यही ‘खुशहाल’ वर्ग ‘मनमोहन-सोनिया-राहुल एंड कंपनी’ को छोड़ कर मोदी के यशोगान में जुटा है. कुछ समय के लिए इस वर्ग के एक हिस्से ने दिल्ली में अन्ना-केजरी के अभियान का साथ दिया था.

अब तक के चुनाव प्रचार से जो तसवीर उभरी है, उसमें एक बात साफ झलक रही है, कि हिंदी पट्टी में सवर्ण-मध्यवर्ग के बड़े हिस्से, खासकर युवा-अधेड़ ने नरेंद्र मोदी को अपना ‘महानायक’ मान लिया है. उसे अपने महानायक की आलोचना बर्दाश्त नहीं. मोदी की कॉरपोरेट-पक्षी आर्थिक नीति, सांप्रदायिक सोच या ‘एक्सक्लूजन’ बढ़ानेवाले गवर्नेस मॉडल में इस वर्ग को कुछ भी खराबी नहीं दिखती. इस वर्ग ने मान लिया है कि सत्ता में उसके महानायक के आते ही देश की सारी समस्याएं फुर्र हो जायेंगी.

देश इतना ताकतवर हो जायेगा कि पाकिस्तान-बांग्लादेश क्या, अमेरिका-चीन भी थर्राते नजर आयेंगे. 2014 के चुनाव की यह सबसे खास बात है कि उत्तर और मध्य भारत के हिंदीभाषी लोगों, खासकर सवर्ण-मध्यवर्ग के बीच अज्ञान का यह विराट आनंदलोक बुना गया है. इसमें मीडिया, खासकर टीवी चैनलों और मोदी के अपने प्रचार-तंत्र की अहम भूमिका है.

इसकी प्रतिक्रिया में दलित-पिछड़ों-आदिवासियों या अल्पसंख्यकों के बीच यूपीए-2, खासकर कांग्रेस के प्रति कोई हमदर्दी दिख रही हो, ऐसा बिल्कुल नहीं है. इसके उलट, दलित-पिछड़ों के भी एक छोटे हिस्से का भगवाकरण हो रहा है. उन्हें समझाया जा रहा है कि कांग्रेस ने तुम्हारे साथ लगातार नाइंसाफी की है, भाजपा सत्ता में आयेगी तो इंसाफ करेगी. दलित-पिछड़ों के कांग्रेस से दुराव के ठोस और ऐतिहासिक कारण हैं.

कांग्रेस ने उनके साथ हमेशा अन्याय किया. इतिहास की बात छोड़ भी दें, तो तात्कालिक कारण कम अन्यायपूर्ण नहीं हैं. यूपीए-2 में कांग्रेस नेतृत्व ने सौ फीसदी अपने मन की सरकार चलायी. इस दौरान भी दलित-पिछड़े-आदिवासी समुदायों की उपेक्षा हुई. अल्पसंख्यकों के लिए कुछ आंसू तो बहाये गये, पर उनके जीवन में गुणात्मक बदलाव लानेवाला कोई बड़ा कदम नहीं उठाया गया. केंद्रीय मंत्रिमंडल में भी दलित-पिछड़ों की नुमाइंदगी नाममात्र की रही.

राज्यपाल, आयोगों के पदाधिकारियों, राजदूतों, केंद्रीय नौकरशाही में सचिव स्तर की नियुक्तियों, अन्य उच्च पदों, कुलपतियों, पद्म-सम्मानों, साहित्य-कला या दूसरी अकदामियों के सम्मानों आदि में दलित-पिछड़ों-आदिवासियों की घोर उपेक्षा हुई. दलित-पिछड़े या आदिवासी समुदायों की नुमाइंदगी का दावा करनेवाले दलों के नेता भी यूपीए-2, खासकर कांग्रेस नेतृत्व पर अपने समुदायों की नुमाइंदगी को लेकर कोई दबाव नहीं बना सके.

उनमें ज्यादातर अपने निजी या पारिवारिक हितों तक ही सीमित रहे. ‘एक्सक्लूजन’ की इस कांग्रेसी-नीति का नतीजा अब सामने है. कांग्रेस की दुर्दशा पर कोई आंसू बहानेवाला भी नहीं मिल रहा है.

सवर्ण-मध्यवर्ग अधिक फायदा लेने के लिए अब भाजपा की तरफ मुखातिब हो चुका है और दलित-पिछड़े अपने समुदायों की नुमाइंदगी का दावा करनेवाले नेताओं और पार्टियों के बंटवारे और उनके बीच के तीखे अंतर्विरोधों के कारण खुद को हताश महसूस कर रहे हैं. इन समुदायों के सामने ऐसा बड़ा असमंजस पहले कभी नहीं सामने आया था.

उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड सहित कई प्रदेशों में यह स्थिति साफ है. वाराणसी के चुनावी-परिदृश्य की खास स्थिति देखिये, जहां दलित-पिछड़े और अल्पसंख्यक समुदाय अब तक समझ नहीं पा रहे हैं कि वे मोदी को शिकस्त देने के लिए सपा की तरफ जाये, या बसपा या ‘आप’ की तरफ! इंदिरा गांधी बनाम राजनारायण की निर्णायक लड़ाई के दौरान दलित-पिछड़ों-अल्पसंख्यकों के बीच ऐसा असमंजस नहीं था.

बीते पांच सालों के यूपीए-2 शासन का आकलन करें तो पायेंगे कि उसकी आर्थिक एवं सामाजिक नीतियों ने कॉरपोरेट के साथ-साथ खुशहाल सवर्ण-मध्यवर्ग को मजबूती से जोड़ा और ‘ये दिल मांगे मोर’ की तरफ मोड़ा.

इन नीतियों ने सवर्ण-मध्यवर्ग के बीच एक ऐसे ‘इंडिया’ का सपना बुना, जो ‘भारत’ से अलग था- वहां आलीशान मॉल्स थे, ऐशोआराम से सज्जित प्राइवेट बिल्डर्स के बहुमंजिले अपार्टमेंट, महंगी लक्जरी गाड़ियां, साथ में ऐसे उत्पादों की खरीद के लिए सस्ती दरों वाले बैंक-लोन. करप्शन और क्रोनी-पूंजीवादी रास्ते होनेवाले विकास से जुड़े नये-नये सर्विस सेक्टर, रियल एस्टेट और प्रबंधकीय क्षेत्र की तरह-तरह की नौकरियां.

इन क्षेत्रों में सवर्ण-मध्यवर्ग को ही तरजीह मिली. निजी क्षेत्र में आरक्षण या ‘एफर्मेटिव एक्शन’ के अपने वायदे (यूपीए-1 का साझा कार्यक्रम) से यूपीए सरकार ने मुंह मोड़ लिया.

नये मध्य वर्ग के सरोकार सीमित हैं या यूं कहें कि सिर्फ निजी स्वार्थ हैं. समाज के उत्पीड़ित तबकों के जीवन स्तर को ऊपर उठाने और देश के सर्वागीण विकास की सोच के बजाय ‘मनमोहन-आर्थिकी’ ने इस वर्ग में वंचित तबकों के प्रति हिकारत पैदा की. आज यही ‘खुशहाल’ वर्ग ‘मनमोहन-सोनिया-राहुल एंड कंपनी’ को छोड़ कर मोदी के यशोगान में जुटा है.

 कुछ समय के लिए इस वर्ग के एक हिस्से ने दिल्ली में अन्ना-केजरी के भ्रष्टाचार-विरोधी अभियान का साथ दिया था, पर अब यह वर्ग मोदी  के लिए मरने-मारने पर आमादा है. इस राजनीतिक परिघटना और विकासक्रम का श्रेय आरएसएस या भाजपा को नहीं, कांग्रेस को मिलना चाहिए. हिंदी पट्टी में मोदी के उभार के लिए सिर्फ कांग्रेस और उसकी दलित-पिछड़ा-अल्पसंख्यक विरोधी विकास-नीति जिम्मेवार है.

जहां तक नरेंद्र मोदी का सवाल है, उनके एजेंडे में क्रोनी-पूंजीवाद और सांप्रदायिकता, दोनों का बराबर का महत्व है. पहले से संघ-शिक्षित मोदी की सियासी शख्सीयत का निर्माण 2002 के बाद कॉरपोरेट और कट्टर हिंदुत्व के मिश्रित रसायन से हुआ है. ऐसा रसायन, जिसे नवउदारवादी सुधारों के दौर की संघ परिवारी-प्रयोगशाला में विकसित किया गया. बांग्लादेशी शरणार्थियों के खिलाफ बवाल मचानेवाले मोदी ने बाड़मेर की रैली में फरमाया कि पाकिस्तान के हिंदू अगर सरहद पार कर यहां आना चाहें तो उनकी सरकार बनने पर भारत में उनका स्वागत होगा.

इसके साथ उनका मानना है कि कार्य-व्यापार कॉरपोरेट का क्षेत्र है, सरकार का काम तो सिर्फ निगरानी और सहूलियत मुहैया कराने का है. यानी उनकी सरकार देश के बचे खुचे सार्वजनिक उपक्रमों को भी निजी हाथों में सौंपेगी! हमें नहीं भूलना चाहिए कि एनडीए सरकार के कार्यकाल में ही देश को विनिवेश के नाम पर नया मंत्रलय मिला था.

अब भाजपा को मोदी के रूप में एक ‘आदर्श नेता’ मिला है. कॉरपोरेट क्रूरता और सांप्रदायिक कट्टरता के नायाब रसायन में ढली है उनकी शख्सीयत! 21वीं सदी में अमेरिका जैसा ‘इंडिया’ बनाने का सपना देख रहे ‘खुशहाल सवर्ण-मध्यवर्ग’ के बड़े हिस्से को उनकी यही सब बातें पसंद आ रही हैं.

मंगलवार, 15 अप्रैल 2014

मोदी के नेतृत्व में अगली सरकार : सर्वे


एनडीए बनाएगी सरकार, बहुमत के बन रहे आसार: सर्वेक्षण
नई दिल्ली, लाइव हिन्दुस्तान टीम 15-04-2014

चुनाव प्रक्रिया के बीच एनडीटीवी-हंसा रिसर्च ग्रुप की ओर से किए गए एक जनमत सर्वेक्षण के अनुसार भाजपा को अपने सहयोगी दलों के साथ 275 सीटें मिल सकती हैं। सरकार बनाने के लिए 272 सीटों की जरूरत होती है।

भाजपा को अपने बलबूते 226 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है। भाजपा को इतनी सीटें पहले कभी नहीं मिलीं। भाजपा की तुलना में कांग्रेस के खाते में केवल 92 सीटें दिखाई गई हैं। वह सहयोगी दलों के साथ 111 सीटों तक ही पहुंचती दिख रही है।
अगर चुनाव नतीजे इस अनुमान के मुताबिक ही आए तो यह कांग्रेस की सबसे करारी हार होगी। कांग्रेस को इसके पहले सबसे कम 114 सीटें 1999 में मिली थीं। यह जनमत सर्वेक्षण अप्रैल के पहले सप्ताह में किया गया। अभी मतदान के पांच चरण बाकी हैं।
एनडीटीवी की ओर से मार्च में किए गए सर्वेक्षण में भाजपा और सहयोगी दलों को 259 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया था। ताजा सर्वे में भाजपा की बढ़त का कारण उत्तर प्रदेश की 80 में से 51, महाराष्ट्र की 48 में से 37 और बिहार की 40 में से 24 सीटें मिलने का अनुमान है। इसके अलावा सीमांध्र में भाजपा की नई सहयोगी तेदेपा को 15 सीटें मिलना भी है। सर्वे के अनुसार नतीजों में दो फीसद का हेरफेर संभंव है।
सर्वे के मुताबिक कांग्रेस को यूपी में महज पांच सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है, जबकि मुलायम सिंह यादव की सपा को पिछले चुनाव में मिलीं 23 सीटों के मुकाबले इस बार 14 सीट मिलती दिख रही हैं। बसपा को पिछली बार से आधी 10 सीटें मिलने की उम्मीद है।
कर्नाटक में कांग्रेस को बढ़त का अनुमान है। यहां कांग्रेस 14 सीटों पर जीत हासिल कर सकती है, जबकि भाजपा को पिछले लोकसभा चुनाव में मिलीं 19 सीटों के मुकाबले इस बार 12 सीटें ही मिलने का अनुमान लगाया गया है। पंजाब में भाजपा के सहयोगी शिअद को सात और कांग्रेस को छह सीटें मिल सकती हैं। पीएम प्रत्याशी नरेंद्र मोदी के गृहराज्य गुजरात में भाजपा को 22 और कांग्रेस को चार सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है।

मंगलवार, 8 अप्रैल 2014

भगवान श्रीराम का जन्म : रामनवमी


गोस्वामी तुलसीदास के रामचरितमानस के अनुसार चैत्र शुक्ल की नवमी तिथि तथा पुनर्वसु नक्षत्र के चतुर्थ चरण एवं कर्क लग्न में भगवान श्रीराम का जन्म हुआ। ऐसी मान्यता है कि भगवान राम का नाम लेने मात्र से सभी समस्याओं का निदान संभव है। यदि नित्य राम स्तोत्र का पाठ किया जाए तो ऐसी कोई मनोकामना नहीं जिसे भगवान राम पूरी नहीं करते। राम स्त्रोत भगवान राम की उपासना करने बहुत ही सरल व सहज माध्यम है, चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी को प्रभु श्रीराम का जन्म हुआ था। इस दिन जो व्यक्ति सच्चे मन से भगवान राम का स्मरण व पूजा-पाठ करता है उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। इस दिन यदि भगवान श्रीराम को राशि के अनुसार भोग लगाया जाए तो वे बहुत प्रसन्न होते हैं और भक्त के सभी कष्टों का तुरंत निवारण कर देते हैं


भाजपा के घोषणापत्र में विकास आगे



बीजेपी ने जारी किया चुनाव 2014 का घोषणा पत्र;
'ब्रांड इंडिया' तैयार करने का वादा, राम मंदिर मुद्दा भी शामिल

भाजपा के घोषणापत्र में राम मंदिर पीछे, विकास आगे
Mon, 07 Apr 2014
http://www.jagran.com/news/national-bjp-releases-manifesto-for-ls-polls-11216038.html
नई दिल्ली, आशुतोष झा। आम चुनाव के लिए आखिरी समय में भाजपा ने घोषणापत्र जारी कर दिया। इसमें फोकस इरादा और भरोसा पर रहा और मुद्दा विकास। दरअसल घोषणापत्र में ऐसा कुछ नहीं था, जो पिछले पांच-छह महीनों में भाजपा के प्रधानमंत्री उम्मीदवार नरेंद्र मोदी रैलियों में न बोल चुके हों।
पहले चरण के मतदान के साथ ही मोदी ने यह विश्वास दिलाया कि वह व्यक्तिगत रूप से अपने लिए कुछ भी नहीं करेंगे और न ही उनकी सरकार 'बद इरादे' से कुछ करेगी। पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने भरोसा दिलाया कि सरकार बनी तो घोषणापत्र का हर वादा पूरा होगा। संभवत: यही कारण है कि घोषणापत्र में पार्टी ने राम मंदिर जैसे कोर मुद्दे को पीछे छोड़ दिया, जिसे वह पहली सरकार में भी पूरा नहीं कर सकी थी। पार्टी ने इसे सांस्कृतिक विषय करार देते हुए एक पन्ने में निपटा दिया।
घोषणापत्र जारी करने में पिछड़ चुकी भाजपा ने सोमवार को पार्टी स्तर पर पूरी भरपाई कर ली। बीच-बीच में पार्टी के अंदर उभरते रहे मतभेद सोमवार को मंच पर पूरी तरह पाट लिए गए। मंच पर पूरा शीर्ष नेतृत्व मंच पर था। राजनाथ के अगल-बगल बैठे लालकृष्ण आडवाणी और नरेंद्र मोदी आपस में बातचीत कर हंसते दिखे। अंत में आडवाणी ने यह कहकर कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ा दिया मोदी के बाद अब कुछ कहने की आवश्यकता नहीं है। जबकि, सुषमा ने भाजपा के चुनावी नारों की ही दोहराते हुए कहा कि अच्छे दिन आने वाले हैं।
सोमवार को पहले चरण का मतदान संपन्न हो गया। दो दिन बाद भाजपा उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा जैसे उन राज्यों में उतरने वाली है, जहां बहुत कुछ दांव पर लगा है। लिहाजा मोदी और राजनाथ संकेत देने से नहीं चूके। मोदी ने कहा, 'मैं यह विश्वास दिलाता हूं कि मुझे जो जिम्मेदारी दी जाएगी उसका पूरा वहन करूंगा, कभी अपने लिए कुछ नहीं नहीं करूंगा और बद इरादे से कोई काम नहीं किया जाएगा।' जाहिर तौर पर उन्होंने उनको संदेश दिया जो मोदी सरकार बनने पर भेदभाव की आशंका जता रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा का एक ही मूलमंत्र है-सबका साथ, सबका विकास। हम भारत को वह शक्ति बनाना चाहते हैं, जिसके बाद दुनिया आंख न दिखाए बल्कि आंख मिलाना चाहे।
तो राजनाथ ने बतौर अध्यक्ष कहा कि भाजपा अपने घोषणापत्र को संकल्प पत्र मान रही है और यह भरोसा दिलाते हैं कि हर वादा पूरा किया जाएगा। इसीलिए वही वादा किया है जो पूरा किया जा सके।
घोषणापत्र समिति के अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी ने सवालों के जवाब में कहा कि राम मंदिर हमारे लिए संस्कृति से जुड़ा विषय है और संविधान के दायरे में रहकर हर संभावनाएं तलाशी जाएंगी। दरअसल मोदी ने इसका संकेत भी उसी वक्त दे दिया था, जब उन्होंने शिवालय से पहले शौचालय की बात कही थी। रामसेतु, गंगा और गाय भी सांस्कृतिक विषय है। लेकिन समान आचार संहिता पर पार्टी ने स्पष्ट किया कि जबतक यह नहीं किया जाता है, देश में लिंग समानता भी नहीं लाई जा सकती है। लिहाजा, भाजपा इसके लिए प्रयास करेगी। वैसे पार्टी की प्राथमिकताएं विकास से जुड़ी योजनाएं हैं। यही कारण है कि अटल बिहारी वाजपेयी सरकार की नदी जोड़ो योजना से लेकर हर राज्य में एम्स जैसे संस्थान बनाने, तेज रफ्तार रेल नेटवर्क बनाने, मदरसा से भी मांग होने पर विज्ञान और गणित के शिक्षक नियुक्त करने, हर घर में पानी पहुंचाने जैसे उन मुद्दों को छुआ, जो हर घर के लिए मुद्दा हो।
'मैं तीन बातें कहूंगा। जो जिम्मेदारी दी जाएगी उसे निभाऊंगा, अपने लिए कुछ नहीं करूंगा और बद नीयत से कोई काम नहीं होगा।'-नरेंद्र मोदी, भाजपा के पीएम प्रत्याशी
'बतौर अध्यक्ष मैं यह भरोसा दिलाता हूं कि घोषणापत्र में शामिल हर वादा पूरा करेंगे।'-राजनाथ सिंह, भाजपा अध्यक्ष
घोषणापत्र के महत्वपूर्ण बिंदू:
1. महंगाई से निपटने के लिए विशेष फंड
2. दाम स्थिर रखने के लिए विशेष फंड
3. फसल उत्पादन के लिए रियल टाइम डाटा
4. कालेधन को लाने के लिए विशेष कानून
5. कालाबाजारी रोकने के लिए विशेष अदालतें बनेंगी
6. अयोध्या में राममंदिर बनेगा
7. विदेशी किराना खुदरा में नहीं
8. भ्रष्टाचार रोकने के लिए ई-गवर्नेस
9. रोजगार केंद्र को करियर सेंटर बनाया जाएगा
10. आतंकवाद रोकने के लिए कानून बनेगा
11. कर प्रणाली को आसान बनाया जाएगा
12. स्वर्णिम चतुर्भुज बुलेट ट्रेन योजना
13. एफसीआई को तीन भागों में बांटा जाएगा
14. सस्ते घर की योजना शुरू की जाएगी
15. सेटेलाइट नेटवर्क का विकास होगा
16. हर गांव में ऑप्टिकल फाइबर
17. देशभर में गैस ग्रिड की स्थापना
18. किसानों के लिए कृषि रेल मार्ग की स्थापना
19. मनरेगा को कृषि से जोड़ा जाएगा
20. हर घर में नल की योजना
21. नदियों को जोड़ने की योजना
22. कम पानी से ज्यादा उत्पादन के लिए सिंचाई के नए साधन विकसित किए जाएंगे
23. नई स्वास्थ्य नीति बनाएगी जाएगी
24. हर राज्य में एम्स की स्थापना
25. आयुर्वेद के विकास पर खास ध्यान दिया जाएगा
26. छात्रों के लिए नेशनल ई-लाइबेरी बनाई जाएगी
27. छात्रों के विकास के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे
28. शिक्षण संस्थाओं के स्तर को सुधारने पर जोर
29. ई-लर्निग पर विशेष ध्यान दिया जाएगा
30. 100 नए शहर बसाए जाएंगे
31. मदरसों का आधुनिकरण किया जाएगा
32. भाषाओं का विकास किया जाएगा
33. पूर्वी और पश्चिमी भारत में अंतर मिटाया जाएगा
34. हिमालयी राज्यों के विकास के लिए विशेष ध्यान दिया जाएगा
35. समस्या के हिसाब से राज्यों के लिए योजना।
आवरण पृष्ठ भी कुछ कहता है
नई दिल्ली [जाब्यू]। भाजपा के घोषणा पत्र के साथ-साथ उसका आवरण पृष्ठ भी एक संदेश दे रहा है। इस बार के घोषणा पत्र में ऊपर बायीं ओर अटल, आडवाणी के साथ डॉ. मुरली मनोहर जोशी की भी फोटो है, लेकिन उसका क्रम अध्यक्ष राजनाथ सिंह के बाद है। घोषणा पत्र में नरेंद्र मोदी की फोटो प्रमुखता से दिखनी ही थी और वह दिख भी रही है। उनके एक तरफ सुषमा हैं और दूसरी ओर अरुण जेटली। इसके अलावा शिवराज सिंह, रमन सिंह, वसुंधरा राजे सिंधिया और मनोहर पर्रिकर की फोटो को भी आवरण पृष्ठ पर स्थान मिला है। 2014 के घोषणा पत्र के विपरीत 2009 के घोषणा पत्र के आवरण में केवल अटल, आडवाणी और राजनाथ सिंह के फोटो थे। राजनाथ तब भी पार्टी अध्यक्ष थे।
2009 के घोषणा पत्र में सुशासन, विकास के साथ सुरक्षा पर जोर था। इस बार एक भारत श्रेष्ठ भारत नारे के साथ सबका साथ-सबका विकास की बात कही गई है। 2009 में भाजपा का घोषणा पत्र 50 पेज का था। इस बार 60 पेज का है, जबकि कांग्रेस का केवल 25 पेज का, जो 26 मार्च को जारी किया गया था। 2009 में भी कांग्रेस ने भाजपा से पहले अपना घोषणा पत्र जारी कर दिया था। तब भाजपा ने इतनी देर नहीं लगाई थी। उसने पहले चरण के मतदान के 13 दिन पहले ही घोषणा पत्र जारी कर दिया था। इस बार वह घोषणा पत्र तब जारी कर सकी जब पहले चरण का मतदान शुरू हो गया था।
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भाजपा के घोषणापत्र में राम मंदिर जैसे विवादित मुद्दे भी शामिल
Monday, 07 April 2014
http://www.jansatta.com/index.php?option=com_content&view=article&id=64072:2014-04-07-06-21-43&catid=1:2009-08-27-03-35-27
नई दिल्ली। भाजपा ने अपने चुनावी घोषणापत्र में अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण, जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाने और समान नागरिक संहिता जैसे मुद्दों को शामिल करते हुए लोगों से इन्हें पूरा करने का वायदा किया है ।

भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी एवं अन्य नेताओं द्वारा आज यहां पार्टी मुख्यालय में जारी किए गए 52 पन्नों के घोषणापत्र में सुशासन और समेकित विकास देने का भी वायदा किया गया है ।
एक पखवाड़े के विलम्ब से जारी घोषणापत्र में कहा गया है, ‘‘भाजपा अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए संविधान के दायरे में सभी संभावनाओं को तलाशने के अपने रूख को दोहराती है ।’’
राम मंदिर मुद्दे को शामिल करने पर पार्टी के भीतर मतभेदों की खबरों के बारे में पूछे जाने पर घोषणापत्र समिति के अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी ने कहा, ‘‘यदि आप अपनी सोच के हिसाब से कुछ लिखना चाहते हैं तो आप ऐसा करने को स्वतंत्र हैं ।’’

9 चरण में हो रहे लोकसभा चुनाव के पहले दिन घोषणापत्र जारी करने के लिए उसके विरोधी दलों ने आलोचना की है ।
ऐसी अटकलें थीं कि जोशी द्वारा तैयार किए गए मसौदे के कुछ बिन्दुओं पर मोदी को आपत्ति थी और वर्तमान में प्रचार अभियान में विकास पर मोदी के जोर के मद्देनजर संघ परिवार के पसंदीदा विषय इसमें शामिल नहीं होंगे ।
यह पूछे जाने पर कि क्या पार्टी राम मंदिर के मुद्दे को शामिल कर मतदाताओं को भ्रमित करने की कोशिश कर रही है और क्या इसे हिन्दुत्व के मुद्दे को फिर से उठाना कहा जा सकता है, जोशी ने कहा, ‘‘इसका हिन्दुत्व या किसी अन्य चीज से कोई लेना देना नहीं है । यह केवल विकास के कार्यक्रम का वायदा है ।’’
उन्होंने कहा कि हिन्दुत्व कभी भी चुनावी मुद्दा नहीं रहा है और घोषणापत्र विकास तथा सुशासन के मुद्दों पर आधारित है ।
जोशी ने राम मंदिर के वायदे के संदर्भ में कहा, ‘‘हमने इसे ‘‘सांस्कृतिक विरासत’’ के खंड में रखा है । हमारे लिए जो सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण है, वह हमने कहा है ।’’ उन्होंने कहा कि यह मुद्दा पार्टी के पूर्व के घोषणापत्रों में भी शामिल किया जाता रहा है और पार्टी का रूख बदला नहीं है ।
समान नागरिक संहिता के मुद्दे पर घोषणापत्र में कहा गया, ‘‘ संविधान की धारा 44 में समान नागरिक संहिता राज्य नीति के निर्देशक सिद्धांतों के रूप में दर्ज की गई है। भाजपा का मानना है कि जब तक भारत में समान नागरिक संहिता को अपनाया नहीं जाता है, तब तक लैंगिक समानता कायम नहीं हो सकती है। समान नागरिक संहिता सभी महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करती है। भाजपा सर्वश्रेष्ठ परंपराओं से प्रेरित समान नागरिक संहिता बनाने को कटिबद्ध है जिसमें उन परंपराओं को आधुनिक समय की जरूरतों के मुताबिक ढाला जाएगा।’’
जम्मू कश्मीर का उल्लेख करते हुए घोषणापत्र में साफ तौर पर कहा गया कि इस प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने वाली धारा 370 का हटाने के अपने दृष्टिकोण पर पार्टी कायम है और रहेगी।
इसमें कहा गया कि कश्मीरी पंडितों की अपने पर्वूजों की भूमि में ससम्मान, सुरक्षित और सुनिश्चित आजीविका के साथ वापसी सुनिश्चित करना भाजपा के एजेंडे में उच्च स्थान पर रहेगा।
रामसेतु के संदर्भ में घोषणापत्र में कहा गया कि यह देश की सांस्कृतिक विरासत का अंग है और थोरियम भंडारों के कारण इसका सामरिक महत्व भी है। सेतु समु्रदम परियोजना पर निर्णय लेते समय इन तथ्यों पर विचार किया जाएगा।
संप्रग-1 और संप्रग-2 के दस साल के शासनकाल को ‘‘गिरावट का दशक’’ बताते हुए कहा कि इस दौरान भारत में हर प्रकार की समस्याओं से निपटने में गिरावट आई है। चाहे वह शासन हो, आर्थिक स्थिति हो, राजनयिक अपमान हो, विदेश नीति की असफलता हो, सीमापार घुसपैठ हो, भ्रष्टाचार और घोटाले हों या महिलाओें के साथ होने वाले अपराध हों।
इसमें कहा गया, सरकार प्रतिदिन दुविधा में ही पड़ी रही जिसके कारण देश पर निराशा और विनाश के बादल मंडराते रहे जबकि राजग शासन के समय भारत को ‘उभरती हुई महाशक्ति’ कहा जाने लगा था।
इसके अनुसार, संप्रग शासन ने देश के सामने मौजूद महत्वपूर्ण और तात्कालिक स्थिति पर ही नहीं पड़ी बल्कि इससे देश की दीर्घकालिक क्षमताओं पर भी बुरा असर डाला। लोग कुंठित महसूस कर रहे हैं और उनका विश्वास व्यवस्था से हट गया है। भाजपा इन सारे मसलों का हल प्राथमिकता के आधार पर निकालने के लिए त्वरित और निर्णायक कदम उठाएगी।
अल्पसंख्यकों से घोषणापत्र में वादा किया गया कि उनके जीवन स्तर को उच्च्ंचा उठाने और उद्योग के क्षेत्र में उनके लिए सुविधाएं उपलब्ध करायी जाएंगी।
इसमें कहा गया, ‘‘ यह दुर्भाग्य की बात है कि आजादी के इतने बरसों बाद भी अल्पसंख्यकों का एक बड़ा समूह , विशेषकर मुस्लिम समुदाय गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन कर रहा है ।
आधुनिक भारत समान अवसर वाला होना चाहिए । भाजपा यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि भारत के विकास में सभी समुदायों की समान भागीदारी होनी चाहिए।
इसमें कहा गया, ‘‘ हमारा विश्वास है कि अगर कोई समुदाय पीछे छूट गया तो भारत प्रगति नहीं कर सकता ।’’
काले धन के बारे में घोषणापत्र में कहा गया कि भाजपा की सरकार आने पर भ्रष्टाचार की गुंजाइश न्यूनतम करके ऐसी स्थिति पैदा की जाएगी कि काला धन पैदा ही ना होने पाए। इसमें यह वादा भी किया गया कि आने वाली भाजपा सरकार विदेशी बैंकों और समुद्र पार के खातों में जमा काले धन का पता लगाने और उसे वापस लाने के लिए हरसंभव प्रयास करेगी।
उसने वादा किया कि काले धन को वापस भारत लाने के कार्य को प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा।
केंद्र और राज्यों के संबंध में भाजपा ने वादा किया कि एक विविधतापूर्ण देश होने के कारण भारत के अलग अलग क्षेत्रों में रहने वाले विभिन्न समुदायों की अपनी आकांक्षाएं होती हैं । ऐस में केंद्र और राज्यों को ऐसा कार्यतंत्र बनाना होगा जिससे आपसी रिश्ते सद्भावपूर्ण हों और हर राज्य की स्वाभाविक परेशानियां व्यापक रूप से निपटायी जा सकें ।
इसमें कहा गया, ‘‘ टीम इंडिया प्रधानमंत्री के नेतृत्व में दिल्ली में बैठी टीम ही नहीं होगी बल्कि मुख्यमंत्रियों और अन्य अधिकारियों को भी इसमें समान भागीदार बनाया जाएगा।
सत्ता में आने पर भाजपा ने अपने घोषणापत्र में तेज रफ्तार बुलेट ट्रेनों का जाल बिछाने के लिए एक महत्वाकांक्षी ‘हीरक चतुर्भुज रेल परियोजना ’ शुरू करने की घोषणा की।
इसमें कहा गया कि देश की जीवन रेखा भारतीय रेल को यात्रियों की सुविधा और देश की अर्थव्यवस्था के विकास को ध्यान में रखते हुए बनाया जाएगा ना कि राजनीतिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए ।
खुली सरकार और जवाबदेह शासन का वादा करते हुए घोषणापत्र में कहा गया कि प्रशासनिक सुधार भाजपा के लिए प्राथमिकता होंगे । सत्ता में आने पर भाजपा सरकार इसका क्रियान्वयन प्रधानमंत्री कार्यालय के तहत एक उचित संस्था के जरिए करेगी।
इसका उद्देश्य सरकार की निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना होगा।
चुनाव सुधारों की बात करते हुए पार्टी ने कहा कि सत्ता में आने पर वह अपराधियों को राजनीति से बाहर करने और विधानसभाओं तथा लोकसभा के चुनाव एक साथ कराने का तंत्र विकसित करने के लिए दूसरे दलों के साथ विचार विमर्श करेगी। उसका कहना है कि इससे सरकार और राजनीतिक दलों का खर्च कम होगा और राज्य सरकार में थोड़ी स्थिरता भी आएगी।
खाद्य सुरक्षा का भरोसा दिलाते हुए घोषणापत्र में कहा गया कि यह सुनिश्चित किया जाएगा कि इस योजना का लाभ आम आदमी तक पहुंचे और भोजन का अधिकार सिर्फ कागज पर बना एक कानून या राजनीतिक नारा भर न रह जाए।
खेलकूद में भारत के अच्छा प्रदर्शन नहीं करने की शिकायत करते हुए भाजपा ने घोषणापत्र में ‘‘एक राष्ट्रीय खेलकूद प्रतिभा खोज प्रणाली’’ शुरू करने की बात कही। इसमें कहा गया कि इस क्षेत्र को आगे बढ़ाने के लिए संगठित तरीके से निवेश करने की जरूरत है । उसने कहा कि वह सत्ता में आने पर तमाम खेलों, पारंपरिक एवं आधुनिक का समर्थन करेगी।
महिलाओं के सशक्तिकरण और कल्याण को उच्च प्राथमिकता देने की बात कहते हुए घोषणापत्र में कहा गया कि बालिका समृद्धि , लाडली लक्ष्मी और चिरंजीवी योजना जैसी पहले की सफल योजनाओं की सर्वोत्तम बातों को शामिल करके एक व्यापक योजना तैयार की जाएगी जिससे कन्याओं के प्रति परिवारों में सकारात्मक प्रवृति को बढ़ावा मिले ।
घोषणापत्र में हर घर को , हर खेत को और हर कारखाने को पानी उपलब्ध कराने का वादा करते हुए कहा कि हर खेत को पानी देने के उद्देश्य से ‘‘प्रधानमंत्री ग्राम सिंचाई योजना’’ का शुभारंभ किया जाएगा ।
नदियों को जोड़ने के बारे में अपने पिछले रूख में परिवर्तन करते हुए पार्टी ने कहा ,‘‘ व्यावहारिकता के आधार पर नदियों को आपस में जोड़ने पर विचार होगा।’’
संप्रग सरकार की कर नीति को ‘‘टैक्स आतंकवाद’’ का नाम देते हुए भाजपा के घोषणापत्र में कहा गया कि इसने अनिश्चितता बढ़ाने का काम किया है जिसके कारण व्यापारी वर्ग में एक प्रकार की हताशा आयी है और निवेश के वातावरण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है ।
इसके साथ ही इससे देश की साख पर भी बट्टा लगा है । पार्टी ने कहा कि सत्ता में आने पर वह कर प्रणाली को तार्किक और आसान बनाएगी और विवादों के निपटारे के लिए तंत्र विकसित करेगी।
प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के बारे में इसमें कहा गया कि मल्टी ब्रांड खुदरा निवेश में वह एफडीआई का समर्थन नहीं करेगी और एफडीआई की केवल उन्हीं क्षेत्रों में अनुमति दी जाएगी जहां नौकरी और पूंजी का निर्माण हो सके या जहां आधारभूत ढांचे के लिए तकनीकी और विशेषज्ञ ज्ञान की आवश्यकता हो ।
पार्टी ने कहा कि वह छोटे और मंझौले दुकानदारों के हित संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है ।
(भाषा)