गुरुवार, 1 मई 2014

बीजेपी बनेगी नंबर वन, मार्केट को नहीं है शक



बीजेपी बनेगी नंबर वन, मार्केट को नहीं है शक
इकनॉमिक टाइम्स | May 1, 2014,
http://navbharattimes.indiatimes.com
राम सहगल, मुंबई
शेयर बाजार ने लोकसभा चुनाव के बाद बीजेपी के सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरने पर दांव लगाया है और उसे अपना दांव सही साबित होने का भरोसा है। मई सीरीज के शुरू होने के बाद से निफ्टी ऑप्शंस में एंप्लॉयड वोलैटिलिटी कम होने से भी इसका पता चलता है। हालांकि चुनाव के नतीजे आने में अभी भी तीन हफ्ते बचे हैं। एंप्लॉयड वोलैटिलिटी ऑप्शन की प्रीमियम प्राइसिंग का अहम पहलू है। इससे पता चलता है कि सूचकांकों या स्टॉक्स को लेकर ट्रेडर्स कितने रिस्क का अंदाजा लगा रहे हैं। ऑप्शन के लिए जो कीमत दी जाती है, उसे प्रीमियम कहते हैं।

एंप्लॉयड वोलैटिलिटी का पता इंडिया वोलैटिलिटी इंडेक्स (विक्स) से लगता है। यह 21 अप्रैल को 52 हफ्ते के पीक 38.4 पर चला गया था। बुधवार को यह 30.6 पर आ गया। 6 ट्रेडिंग सेशंस में इसमें 20.3 पर्सेंट की गिरावट आई है। पिछले साल विक्स अक्सर 15-25 की रेंज में रहा था। डेरिवेटिव एक्सपर्ट्स के मुताबिक, एंप्लॉयड वोलैटिलिटी इस वजह से कम हुई है क्योंकि ट्रेडर्स और इनवेस्टर्स (खासतौर पर एफआईआई) को लग रहा है कि बीजेपी को सबसे ज्यादा सीटें मिलेंगी। इस बारे में इडलवाइज फाइनैंशल सर्विसेज में क्वांटिटेटिव अनालिसिस के हेड योगेश राडके ने कहा, 'एंप्लॉयड वोलैटिलिटी में कमी से पता चलता है कि मार्केट को बीजेपी के 16 मई को सबसे बड़ी पार्टी बनने का भरोसा है।' पिछले कुछ ट्रेडिंग सेशंस में 6,800 स्ट्राइक ऑप्शन की वोलैटिलिटी करीब 2 पर्सेंट गिरकर 30 पर्सेंट के करीब रह गई है। यह मई सीरीज का सबसे ऐक्टिव ऑप्शन है।

शेयर बाजार में मौजूदा उछाल की वजह नरेंद्र मोदी की अगुवाई में बीजेपी सरकार बनने की उम्मीद है। इस बढ़त की शुरुआत फरवरी से हुई थी। 13 फरवरी से 23 अप्रैल के बीच बेंचमार्क सूचकांक (सेंसेक्स और निफ्टी) में 12 पर्सेंट से ज्यादा की मजबूती आई। 23 अप्रैल को ही मार्केट नए लाइफ टाइम हाई लेवल पर गया था। सूचकांकों में मजबूती के साथ विक्स भी बढ़ा। इससे लग रहा था कि ट्रेडर्स चुनावी नतीजे की थाह नहीं ले पा रहे हैं। अमूमन जब मार्केट में तेजी आती है, तब एंप्लॉयड वोलैटिलिटी कम होती है। रिस्क कम होने से ऐसा होता है। हालांकि चुनाव के रिजल्ट जैसे मामलों में यह थियरी काम नहीं करती क्योंकि उसके बारे में पक्का अंदाजा लगाना मुश्किल होता है।

मोतीलाल ओसवाल फाइनैशल सर्विसेज में इक्विटीज के वाइस प्रेसिडेंट रिकेश पारिख ने कहा कि कम प्रीमियम से पता चलता है कि रिस्क कुछ कम हुआ है। मार्केट पार्टिसिपेंट्स इसका फायदा उठाकर स्ट्रैडल सौदे कर सकते हैं। इसमें एक ही स्ट्राइक प्राइस पर कॉल और पुट खरीदा जाता है। इससे मार्केट के किसी भी ओर जाने पर फायदा होने की उम्मीद रहती है। अनालिस्ट रिजल्ट आने से पहले विक्स के बढ़ने से इनकार नहीं कर रहे हैं।

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