शनिवार, 24 मई 2014

ये है गुजरात का नरेन्द्र मोदी पब्लिक डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम



ये है गुजरात का पब्लिक डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम, भूखा नहीं सोता कोई इंसान
dainikbhaskar.com| May 21, 2014

http://business.bhaskar.com/article-bb/BIZ-ART-gujarat-public-distribution-system-is-the-best-model-4620895-PHO.html?seq=1

गुजरात में नरेन्द्र मोदी ने अपने कार्यकाल के दौरान सरकारी योजनाओं में कई ऐसे महत्पूर्ण सुधारों को लागू किया, जो पूरे देश के लिए एक मॉडल के तौर पर उभरा। ऐसा ही एक मॉडल देश में खाद्य सुरक्षा की गारंटी देने में कारगर है, जिसे गुजरात और छत्तीसगढ़ की सरकार ने प्रदेश की टार्गेटेड पब्लिक डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम को प्रभावी बनाने के लिए इजात किया।

खाद्य वितरण प्रणाली की खामियों को दूर करने की मोदी सरकार की पहल की सराहना सुप्रीम कोर्ट और वर्ल्ड बैंक फूड प्रोग्राम ने भी की। इसके बाद 2011 में केन्द्र सरकार ने उसे एक प्रभावी मॉडल मानते हुए सभी प्रदेशों को भी इसे अपनाने की सलाह दी। केन्द्र सरकार ने कहा कि वह भी जल्द से जल्द गुजरात और छतीसगढ़ के मॉडल का अनुसरण करते हुए देश में खाद्य सुरक्षा गारंटी को सुनिश्चित करें।

क्या हैं खाद्य वितरण प्रणाली में समस्याएं
इस प्रणाली के तहत राज्यों को केन्द्र की मदद से आर्थिक तौर पर कमजोर तबके को बाजार से कम कीमत पर जरूरी रसद सामग्री नियमित रुपए से उपलब्ध कराने का प्रावधान है, लेकिन वास्तविकता में इस कार्यक्रम में बड़े पैमाने पर अनियमितता देखने को मिलती है। सरकारी कर्मचारियों और वितरण केंद्रों को ठेकेदारों की मिलीभगत से सस्ता गल्ला खुले बाजार में बेंच दिया जाता है औऱ जरूरतमंद लोगों को इसका लाभ नहीं मिलता।
गुजरात ने कैसे बनाया अपना मॉडल
प्रदेश की भाजपा सरकार ने इस समस्या से निपटने के लिए केन्द्र से मदद की गुहार लगाने के बजाए सीधे राज्य की वितरण प्रणाली को दुरुस्त करने पर जोर दिया।
गुजरात के मुख्यमंत्री ने सामाज में बदलाव लाने के लिए पांच प्रमुख शक्तियों की परिकल्पना की जैसे- रक्षा शक्ति, जल शक्ति, उर्जा शक्ति, ज्ञान शक्ति और जन शक्ति। इनमें से कई शक्तियों का प्रयोग करते हुए गुजरात सरकार नें प्रदेश की खाद्य वितरण प्रणाली को दुरुस्त करने में लगाया।

हर गांव में बिजली और कम्प्यूटर की सुविधा
·        गुजरात सरकार ने उर्जा शक्ति अभियान के तहत पहले हर गांव में बिजली सुनिश्चित किया।
·        उसके बाद ई-ग्राम की स्थापना की, जिसमें हर गांव को ब्रॉडबैंड के जऱिए इंटरनेट से जोड़ा।
·        हर गांव में कम्प्यूटर, प्रिंटर, वेब कैमरा, बार कोड स्कैनर और बॉयोमीट्रिक डिवाइस उपलब्ध कराए गए।
·    
गांव के एक स्थाई व्यक्ति को कम्प्यूटर की ट्रेनिंग दी।
ट्रेनिंग देने के बाद उस व्यक्ति को टार्गेटेड पीडीएस कार्यक्रम का उपभोक्ता और सुपरवाइजर नियुक्त किया गया।
इस विस्तृत कार्यक्रम और मजबूत इच्छाशक्ति के चलते गुजरात सरकार ने पारंपरिक वितरण प्रणाली को नागरिक-सरकार साझा कार्यक्रम से परिवर्तित करने में सफलता पाई। इस नए ढांचे से जहां बड़ी संख्या में लोगों को इस कार्यक्रम का लाभ उठाने के लिए जोड़ा गया, वहीं पूरे प्रदेश में खाद्य सुरक्षा की गारंटी को भी लागू किया गया।

बार कोड युक्त राशन कार्ड
ई-ग्राम की स्थापना के साथ ही गुजरात में बार कोड युक्त राशन कार्ड बनाने के काम में तेजी आई है। कार्यक्रम लागू करने के महज दो साल के अंदर लगभग सोलह लाख राशन कार्ड को बार कोड युक्त किया जा चुका है। इन नए राशन कार्ड में उपभोक्ता को पिक्चर आई या फिर यूआईडी से जोड़ने का काम तेजी से चल रहा है।

इस नए कार्ड की मदद से राज्य में फर्जी कार्डों पर भी काबू पाने के काम में तेजी आई है। इसके साथ ही गुजरात में कार्ड धारकों को उनकी आर्थिक स्थिति के अनुसार सरकार से कूपन मुहैया कराए जाते हैं, जिसके बदले उन्हें नजदीकी फेयर प्राइस दुकानदारों से खाद्य सामग्री मिलती है। इन कूपनों को फिर दुकानदार ई-ग्राम केन्द्र पर बायोमीट्रिक वेरिफेशन कराने के बाद अपना पैसा ले लेता है।

फेयर प्राइस दुकानदारों के लिए अधिक मुनाफा
राज्य सरकार ने इस स्कीम को सुचारू रूप से चलाने के लिए फेयर प्राइस दुकानदारों के लिए भी कई रियायतें दी हैं। कूपन के जरिए ज्यादा सामान बेचने पर दुकानदारों को अधिक भुगतान का प्रावधान है। ऐसे दुकानदारों को खाद्य सामग्री लेने के लिए कहीं जाना नहीं पड़ता और सरकार उनकी दुकान पर ही गल्ला भिजवाने का काम करती है। साथ ही दुकानदार अपना मुनाफा बढ़ा सकें, इसलिए उन्हें अपनी दुकान से पीडीएस स्कीम के बाहर का सामान बेचने की भी अनुमति है।  

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