बुधवार, 7 मई 2014

नरेंद्र मोदी पर अपने चुनाव क्षेत्र में लगी प्रचार पर पाबंदी



मोदी पर अपने चुनाव क्षेत्र में लगी प्रचार पर पाबंदी
Wednesday,May 07,2014

वाराणसी [आशुतोष झा]। प्रारंभ से ही हाई वोल्टेज रहा वर्तमान लोकसभा चुनाव अंतिम चरण में पहुंचते पहुंचते सारी सीमाएं तोड़ गया है। नरेंद्र मोदी ने अपने प्रत्याशियों को जिताने के लिए जहां तीन लाख किलोमीटर की यात्रा कर छह महीने में लगभग तीन सौ रैलियां कर डाली हों, उन्हें अपने ही चुनाव क्षेत्र वाराणसी में प्रचार की अनुमति नहीं मिली। हालांकि देर रात उन्हें शाम में गंगा आरती में शामिल होने की, बुद्धिजीवियों के साथ सभा करने इत्यादि की अनुमति जिला प्रशासन ने दे दी।
वाराणसी से लेकर दिल्ली तक पार्टी नेता व कार्यकर्ता धरने पर होंगे। ऐसे में गुरुवार को मोदी वाराणसी तो आएंगे लेकिन जनता तक जाने की बजाय पार्टी कार्यालय जाएंगे और फिर दूसरे क्षेत्रों में प्रचार करने। जाहिर है, अब अगले कुछ दिनों तक वाराणसी ही नहीं पूरे पूवरंचल में भी यह एक बड़ा मुद्दा होगा।
यूं तो आखिरी दौर का चुनाव कई मायनों में अहम हो जाता है लेकिन इस बार एक नई इबारत लिखी जा सकती है। पटकथा की शुरुआत हो गई है। यह शायद पहला मौका हो जबकि प्रत्याशी को ही प्रचार की अनुमति नहीं है। गौरतलब है कि गुरुवार को मोदी बेनियाबाग में रैली करने वाले थे। इसके बाद एक होटल मे बुद्धिजीवियों के साथ चर्चा की योजना थी फिर गंगा पूजन। बुधवार को भारी असमंजस के बाद आखिरकार स्थानीय प्रशासन ने खुफिया जानकारी का हवाला देते हुए तीनों पर रोक लगा दी। ध्यान रहे आप संयोजक अरविंद केजरीवाल ने अपनी पहली सभा बेनियाबाग मे की थी। उन्होंने स्नान भी किया था और गंगा पूजन में शामिल होकर प्रचार भी किया था।
वाराणसी में कमान संभाले बैठे पार्टी नेता अरुण जेटली ने भी नाराजगी जाहिर करने मे कोई लिहाज नहीं किया। प्रदेश प्रभारी अमित शाह के साथ उन्होंने सीधा आरोप लगा दिया कि जानबूझकर मोदी को प्रचार से रोका जा रहा है। उनकी जानकारी के अनुसार खुफिया विभाग ने भी गड़बड़ी की कोई रिपोर्ट नहीं दी है।
रिटर्निग आफिसर पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने आयोग से पूछा कि इतनी महत्वपूर्ण सीट पर ऐसे व्यक्ति को कैसे बैठाया गया है। इसके खिलाफ जेटली और दूसरे नेता लंका गेट पर धरना देंगे तो दिल्ली में केद्रीय नेता चुनाव आयोग से नाराजगी जताएंगे। इसी बीच गुरुवार को मोदी बीएचयू के हैलीपैड पर उतरेंगे और सीधे भाजपा कार्यालय जाएंगे। वहां से एयरपोर्ट और फिर दूसरे क्षेत्रों मे प्रचार के लिए उड़ जाएंगे।
यह स्पष्ट हो गया है कि अब जबकि प्रचार में महज तीन दिन बाकी हैं तो आखिरी दौर के चुनाव का रुख बदल गया है। चाहे अनचाहे इसकी प्रतिक्रिया दूसरे क्षेत्रों में भी दिख सकती है। यह सवाल भी उठेगा कि अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्र बेनियाबाग में रैली की इजाजत न देने के बाद गंगा पूजन से क्यों रोका गया। खासतौर पर तब जबकि वाराणसी के ही दूसरे प्रत्याशी को इसकी अनुमति मिली थी। मोदी के चुनाव प्रचार मे गंगा के बुलावे का जिक्र है।
जेटली ने यह कहकर कार्यकर्ताओं और जनता के बीच यह संदेश भी दे दिया है कि बिना खुफिया जानकारी के ही सिर्फ मोदी को रोकने की मंशा से उनपर पाबंदी लगाई गई है।
भाजपा-प्रशासन के लिए तनाव भरा दिन
बेनियाबाग में गुरुवार को प्रस्तावित सभा की अनुमति के लिए बुधवार को भाजपा व जिला प्रशासन के बीच जबरदस्त तनाव बना रहा जिला प्रशासन व सुरक्षा एजेंसियों की बैठक जारी है। आखिर हुआ क्या-
-मंगलवार रात नौ बजे भाजपा के विद्यासागर राय द्वारा नरेंद्र मोदी की बेनियाबाग व रोहनिया में होने वाली जनसभा के बाबत जिला प्रशासन को अनुमति के लिए पत्र दिया गया।
-बुधवार सुबह दस बजे कार्यालय खुलते ही रिटर्निग अफसर ने पुलिस से अनुमति के बाबत रिपोर्ट मांगी।
-दो बजकर पचपन मिनट पर जिला प्रशासन को एसपी सिटी ने रिपोर्ट सौंपी जिसमें सुरक्षा कारणों से अनुमति न देने का आग्रह किया गया।
-तीन बजकर सत्रह मिनट पर जिला प्रशासन ने भाजपा की स्थानीय इकाई को सूचित किया कि बेनिया में सभा और गंगा आरती के लिए अनुमति नहीं दी जा सकती।
-विद्यासागर राय की ओर से कैंट थाना क्षेत्र स्थित एक मैदान में सभा की अनुमति मांगी गई लेकिन वरिष्ठ नेताओं के इंकार करने पर प्रार्थना पत्र वापस ले लिया गया।
-शाम छह बजे अरुण जेटली व अमित शाह ने प्रेस कांफ्रेंस कर जिला निर्वाचन अधिकारी पर लगाए आरोप। धरना-प्रदर्शन की चेतावनी। दूसरी ओर जिला निर्वाचन अधिकारी के आवास पर पुलिस व इंटेलिजेंस अधिकारियों की बैठक शुरू।
-देर शाम छह बजकर तीस मिनट पर शहर दक्षिणी के विधायक श्यामदेव राय चौधरी जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय के समीप जिला रायफल क्लब के बाहर धरने पर बैठे।

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