शनिवार, 14 जून 2014

केशव की जय - जय : माधव की जय - जय



आलेख
केशव की जय - जय
माधव की जय - जय

- अरविन्द सिसोदिया ( कोटा , राजस्थान )

संघ का एक स्वंयसेवक, नरेन्द्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बन गये हैं , उनकी सरकार ने काम संभाल लिया है, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह श्री सुरेश (भय्याजी) जोशी ने विश्वास व्यक्त किया है कि ” परिवर्तन की आकांक्षा व्यक्त करने वाले करोड़ों देशवासियों की भावनाओं एवं अपेक्षाओं की पूर्ति करने में नव निर्वाचित सरकार सफल सिद्ध होगी।“ निश्चित रूप से संघ को नरेन्द्र मोदी सरकार बनने की प्रशन्नता है और इसके पीछे उनको घोर परिश्रम भी है। कांग्रेस नेतृत्व में देश रसातल में पंहुच चुका था राष्ट्र को अद्योपतन से बाहर निकाने के लिये तो संघ हमेशा ही संकल्पबद्ध रहा है। येशी स्थिति में संघ ही क्या जो भी देश भक्त था वह कांग्रेस नेतृत्व को सिंहासन से उतारने में सक्रीय था , संघ के सरसंघचालक परमपूज्य मोहनजी भागवत ने शतप्रतिशत मतदान का जो आव्हान किया था, उसके कारण मतदान प्रतिशत में भी अभूतपूर्व वृद्धि हुई और इसने भाजपा की विजय को ऐतिहासिक बना दिया। यह संघ ने इसलिये किया कि देश हित हो , समाज हित हो और स्वाभिमान से जीने की स्थितीयां पुनः देश में स्थापित हों।

राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ की शाखाओं पर एक उद्घोष निरंतर होता चला आ रहा है और आगे भी चलता रहेगा ” केशव की जय - जय, माधव की जय - जय“ । इस उद्घोष को पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी ने भी खूब लगाया और उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवानी, मुरलीमनोहर जोशी, हालिया प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह, मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चैहान, मुख्यमंत्री रमनसिंह, नितिन गडकरी और अरूण जेटली सहित एक बहुत बडी फेहरिस्त है, लाखों स्वंयसेवक हैं जो इस उद्घोष को बडे गर्व से लगाते हैं। इस उद्घोष में केशव का अर्थ संघ के संस्थापक एवं प्रथम सरसंघचालक परम पूज्य डाॅ0 केशवबलीराम हेडगेवार से है तथा माधव से संघ के द्वितीय सरसंघचालक परमपूज्य माधव सदाशिवराव गोलवलकर अर्थात गुरूजी से है, जिनकी प्रेरणाा से जनसंघ जो अब भाजपा है सहित अनेकानेक राष्ट्रवादी संगठनों का जन्म हुआ।

संघ की शाखाओं में सबसे पहले भारत के अनादी काल से चले आ रहे संस्कृतिक एवं सभ्यता के उद्घोषक ध्वज, भगवाध्वज को ध्वज प्रणाम होता है, भारतमाता की वंदना प्रार्थना से होती है, भारतीय संस्कृति के युगो - युगों से ध्वज वाहक रहे महापुरूषों को प्रातः स्मरण से याद किया जाता है। देश के एकात्म का चिन्तन होता है, भारतीय सभ्यता के संरक्षण, उत्थान और चुनौतियों पर विमर्श होता हे। शारीरिक और मानसिक व्यायाम होता है। कुल मिला कर ” भला हो देश का वह काम तुम किये चलो “ के ध्येय पथ पर चलते रहने की संकल्पना होती है, शिक्षण होता है।

संघ कार्य राजनैतिक नहीं है बल्कि उससे भी बहुत बड़ा और व्यापक , बहुआयामी है जो निरंतर भारतीय संस्कृति के हितों की चिन्ता करता है, उसके स्वर्णिम अध्यायों का पुर्नस्मरण करवाता है। स्वदेशी, स्वाभिमानी और समुन्नत भारत बनाने के लिये सक्रीयता को क्रियान्वित करता है। भारत को पुनः विश्व के सिंहासन पर आरूढ़ करने के लिये निरंतर प्रयत्नशील है। लाखों - लाखों स्वंयसेवक समाज के विविधक्षैत्रों में सक्रीय रहते हुये ” तेरा वैभव अमर रहे मां हम दिन चार रहें न रहें “ की भावना से अपना जीवन दिये हुये हैं।

भारत के पुर्नजागरण में लगा यह संगठन व्यक्तिवादी न होकर, ध्येयवाद के आधार पर निरंतर अग्रसर रहते हुये विश्व का सबसे बडा सामाजिक संगठन है। इस संगठन के संस्थापक सरसंघचालक परमपूज्य डा0 केशवबलीराम हेडगेवार के स्वप्न को पूरा करने में अनेकों पीढि़यों से लाखांे - लाखों तपस्वी स्वंयसेवक प्रचारक या गृहस्थ के रूप में जुटे हुये है।

स्वामी विवेकानंद के स्वाभिमान से ओतप्रोत इस संगठन ने एक से बढ़ कर एक व्यक्तित्वों को भारतीय समाज को दिये हैं। चार नाम लेना ही बहुत होगा जनसंघ के संस्थापक महामंत्री पं0 दीनदयाल उपाध्याय और पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी और भारतीय मजदूर संघ के संस्थापक दतोपंत थेगेडी विश्व हिन्दू परिषद के अन्र्तराष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंहल , जो समाज-जीवन के विविधक्षैत्रों में राष्ट्रवादी विचारों से ओतप्रोत संगठनों और विचारों के वाहक रहे हैं।

संघ स्वंय राजनीति नहीं करता मगर वह देशहित से आंख भी नहीं मूंदता है। जब राष्ट्रचिन्तन होगा तो उसमें समाज जीवन भी होगा और राजनैतिक चर्चायें भी होंगी, कमजोरियों और आवश्यकताओं पर विचार भी होगा, सुझाव भी होगा। उनका विमर्श सावचेतना है मार्गदर्शन हे। चीन युद्ध के संकट काल में संघ के स्वंयसेवकों ने पंण्डित जवाहरलाल नेहरू की सरकार को कंधे से कंधा मिला कर सहयोग किया और जवाहरलाल नेहरू ने गणतंत्र दिवस 1963 की परेड में संघ के स्वंयसेवको को राष्ट्रीय परेड में सम्मिलित होने आमंत्रित किया और वे सम्मिलित भी हुये।

आजादी के साथ ही पाकिस्तानी सेना ने कबाईली वेष में कश्मीर पर आक्रमण कर दिया स्वंयसेवकों के रातदिन मेहनत कर भारतीय सेना के लिये हवाई पट्टि बनाई । कोई भी विपदा हो , कोई भी संकट हो सबसे पहले संघ का स्वंयसेवक सहायता को खडा हुआ मिलता है।

हम देखते हैं कि कश्मीर के विलय को पूर्ण बनाने के लिये भारतीय जनसंघ के संस्थापक डाॅ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी अपना बलिदान दे देते हैं। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी की सरकार हो, भाषण हो वाद विवाद संभाषण हो, कविताये हों, राष्ट्रवाद की सरिता निरंतर बहती रही हे। लालकृष्ण आडवाणी श्रीराम जन्म भूमि की स्वतंत्रता के लिये रथ लेकर निकल पड़ते हैं। मुरलीमनोहर जोशी श्रीनगर में भारतीय स्वाभिमान का ध्वज्य फहराने के लिये एकता यात्रा के साथ श्रीनगर पहुच कर, तिरंगा झंडा फहराते हैं। नरेन्द्र मोदी इन दानों यात्राओं में अग्रसर के रूप में सहयोगी थे। वे भयानकतम भ्रष्टाचार एवं प्राणलेवा मंहगाई से जूझ रहे देश को अधोपतन से बाहर निकालने में जुटते हैं पूरे देश में परिश्रम की पराकाष्ठा कर जनजागरण करते हैं।

देश पर विपदा हो संघ और उसका स्वंयसेवक चुप बैठ जाये यह हो ही नहीं सकता , इसीलिये एक बार परमपूज्य सरसंघचालक मोहन भागवत जी ने कहा था कि हम भाजपा को राख में से भी खडा कर देंगें। यह पूरा भी हुआ अब भारत भाजपा मय हो गया हैं ।

संघ की विचारधारा की जरूरत सिर्फ समाज में हो इतने भर से काम नहीं चलता है बल्कि यह विचारधारा जो भारत का निर्माण करती है, इसकी जरूरत तो राजनीति को ही कहीं अधिक है। यही कारण है कि जनसंघ स्थापना से लेकर आज तक निरंतर संर्घष करता रहा हो मगर वह जनशक्ति में हमेशा प्रिय रहा, हर बार चुनौती में आगे - आगे ही बढता गया, राजनैतिक यात्रा में उसका नामकरण भाजपा भी हो गया मगर विचारधारा जो उसकी पहचान है, उसने उसे 2 सीटों से चलाकर 282 तक पहुंचा दिया। भाजपा की यह विजय यात्रा व्यक्ति की नहीं विचारधारा की है। मगर विचारधारा व्यक्ति का निर्माण करती है । इसलिये विचारधारा और योग्य व्यक्ति दोनों ही एक सिक्के के दो पहलू हैं।

देश तीन हजार साल से विदेशी आक्रमणकारियों का सामना कर रहा है और हम अपने जीवट से जिन्दा है। मगर स्वतंत्रता के बावजूद गत यूपीए सरकार ने विदेशी हितों की चिन्ता में ही 10 साल बिता दिये। कहीं भी राष्ट्रीय स्वाभिमान के दर्शन नहीं हुये, सैनिकों के सिर सीमा पर कट गये मगर संसद में कायरता की भाषा सुनी गई। चीन ने भारतीय सीमाओं को घूमने फिरने का पार्क बना लिया। रूपये का अवमूल्यन रोकने के बजाये सरकार उसे और धक्का देती नजर आई ताकि विदेशी डालर को फायदा होता रहै। आयात निर्यात में देशहित की चिन्ता विषय ही नहीं रहा, अमरीका के राष्ट्रपति ने मनमोहनसिंह की सराहना इसीलिये की है कि उनके शासन में भारत पर व्हाईट हाउस की नीतियां हावी रहीं।

कांग्रेस ने कभी नहीं सोचा कि द्वितीय विश्वयुद्ध में धूलधूसरित हुये जापान , इटली, जर्मनी और ब्रिटेन तथा हमारे बाद स्वतंत्र चीन, सैन्य और औद्योगिक उन्नती में हमसे हजारों गुना आगे कैसे निकल गये और हम सोते रहे। चीन अमरीका को टक्कर दे रहा है। हम अमरीका से याचना कर रहे हैं। क्यों कि एक विदेशी मूल के व्यक्ति के द्वारा स्थापित कांग्रेस में कभी भी राष्ट्रीय स्वाभिमान नहीं आया। यूपीए का नेतृत्व भी विदेशी मूल की राजनेता के हाथ में था सो उसमें जो भी हुआ भारत और भारतीय संस्कृति को नुकसान पहुचाने वाला ही हुआ। मंहगाई ने हर दिन आम आदमी को मारा, मंहगाई से पीडि़त व्यक्ति हिन्दू ही नहीं मुस्लिम भी था इसाई भी था । महिलाओं ने मंहगाई और रसोई गैस सिलेण्डरों के जो आंसू पिये वह यूपीए को जन विरोधी सरकार करार देने के लिये काफी था। लोकशक्ति ने लोकतंत्र के हित के लिये वर्तमान सत्तारूढ़ कांग्रेस और उसको समर्थन दे रहे मुलायमसिंह, मायावती , लालूप्रसाद, करूणानिधि, शरद पंवार और फारूख अब्दुल्ला सहित ज्यादातर दलों को हांसिये पर डाल दिया।

जब देश और देश की जनशक्ति पर परोक्ष अत्याचार हो रहे हों , शोषण की कोई सीमा ही नहीं बची हो, येशे में एक स्वंयसेवक चुप रह जाये यह संभव नहीं था। अत्याचार का प्रतिकार तो 1948 में भी संघ ने ही किया था, 1952 में जनसंघ ने राष्ट्रहित के लिये पहली बली श्यामाप्रसाद मुखर्जी के रूप में कश्मीर में दी थी। संघ पर तीन प्रतिबंध लगे , आपातकाल लगा , हमेशा ही स्वंयसेवकों ने अन्याय का प्रतिकार किया। जनसंघ का जन्म ही अन्याय के विरूद्ध न्याय पाने के लिये हुआ था। वर्तमान स्थितियों में देश को अन्यायाी सरकार के विरूद्ध न्याय की जरूरत थी।

नरेन्द्र मोदी के रूप में राजनैतिक क्षैत्र में कार्यरत एक स्वंयसेवक सिर पर संकल्प का साफा बांध कर निकला और पूरी तरह विफल हो चुकी सरकार को सिंहासन से च्युत करके ही दम लेता है। आज विचारधारा की इस विजययात्रा पर सहज ही मन कहता है। केशव की जय जय - माधव की जय जय । केशव माधव की जय जय । देश के लोकतंत्र में भगवा वातावरण इस तरह का है कि कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक , अरूणाचल से लेकर राजस्थान तक हर ओर भाजपा ही भाजपा जीत लिये हुये खडी है। संघ की शाखाओं में एक गीत ओर भी सुनाई देता है तो उसके मार्गदर्शी परमपूज्य संस्थापक डाॅ केशवबलीराम हेडगेवारजी को सर्मपित है। केशव माधव की दिखाई डगर ने ही यह ऐतिहासिक सुअवसर भारत को प्रदान किया है।

हमें वीर केशव मिले आप जबसे,
नयी साधना की डगर मिल गयी है ॥

भवदीय
अरविन्द सिसोदिया, जिला उपाध्यक्ष भाजपा
जिला कोटा देहात।
09509559131 एवं 09414180151



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