रविवार, 7 दिसंबर 2014

लोंगेवाला पोस्ट पर 2000 पाकिस्तानी सैनिकों पर भारी पड़े थे 120 भारतीय जवान




1971: लोंगेवाला पोस्ट पर 2000 पाकिस्तानी सैनिकों पर भारी पड़े थे 120 भारतीय जवान
dainikbhaskar.com | Dec 07, 2014

नई दिल्ली: 1971 में भारत और पाकिस्तान के बीच छिड़ी जंग में राजस्थान के लोंगेवाला पोस्ट पर हुआ संघर्ष एक टर्निंग प्वाइंट माना जाता है। भारत ने पाकिस्तान को यहां ऐसी धूल चटाई, जिसका दूरगामी असर उसके मनोबल पर पड़ा था। राजस्थान के थार के रेगिस्तान में भारत और पाकिस्तानी सेनाओं के बीच यह संघर्ष 4-5 दिसंबर को हुआ। लोंगेवाला पोस्ट आज 'इंडो पाक पिलर 638' के नाम से जाना जाता है। पाकिस्तान ने यहां सीमा से घुसने की कोशिश तो की, लेकिन कामयाब नहीं हो सका। इस जंग को 1997 की ब्लॉकबस्टर फिल्म 'बॉर्डर' में भी दिखाया गया है। इस फिल्म में सनी देओल ने जंग के हीरो रहे मेजर कुलदीप सिंह चांदपुरी का किरदार निभाया था। कुलदीप सिंह चांदपुरी को उनकी बहादुरी के लिए महावीर चक्र से सम्मानित किया गया। इस जंग में भारतीय पक्ष से 2 जवान शहीद हुए, जबकि पाकिस्तान को अपने 200 सैनिक गंवाने पड़े। इसके अलावा, उसके 34 टैंक और 500 से ज्यादा हथियारबंद वाहन बर्बाद हो गए।

2000 सैनिकों के साथ पाक ने की थी चढ़ाई
2 हजार से ज्यादा पाकिस्तानी सैनिक 'लोंगेवाला में नाश्ता, रामगढ़ में लंच और जोधपुर में डिनर' का सपना लिए आधी रात को भारतीय सीमाओं की ओर बढ़े थे। हालांकि, सुबह भारतीय एयरफोर्स की जवाबी कार्रवाई के बाद पाकिस्तान अपने कदम पीछे खींचने को मजबूर हो गया था। पंजाब रेजिमेंट के 120 जवानों के अलावा बीएसएफ के कुछ सुरक्षाकर्मियों ने 2 हजार से ज्यादा पाकिस्तानियों को खदेड़ दिया।

चमत्कार से कम नहीं थी जीत
इस पोस्ट पर भारत को मिली जीत किसी चमत्कार से कम नहीं थी। मेजर कुलदीप सिंह चांदपुरी यहां पंजाब रेजिमेंट की 23वीं बटालियन के साथ जमे हुए थे। पाकिस्तान की ओर से हमला हुआ तो उन्होंने हेडक्वॉर्टर से बैकअप मांगा, लेकिन सुबह से पहले मदद आने की कोई उम्मीद नहीं थी। ऐसे में एक बटालियन ने पूरी की पूरी पाकिस्तानी सेना को रात भर रोके रखा। 

दिखाया अद्भुत साहस
मेजर चांदपुरी के सामने दो विकल्प थे। या तो वह पोजिशन पर बने रहते या कंपनी के साथ पीछे हट जाते। उन्होंने रूकने का फैसला किया। वह एक बंकर से दूसरे बंकर तक जाकर अपने सैनिकों का हौसला बढ़ाते रहे। मेजर चांदपुरी ने हवाई सपोर्ट मांगा था, लेकिन उस वक्त हमारे फाइटर जेट रात में उड़ने की क्षमता वाले नहीं थे। सुबह एयरफोर्स के विमानों ने वहां पहुंचकर पाकिस्तानी पक्ष में भारी तबाही मचा दी।

हल्के हथियारों से लिया टैंक से मोर्चा
पाकिस्तानी सैनिकों के पास 50 से ज्यादा टैंक थे। वहीं भारतीय पक्ष के पास हल्की क्षमता वाले सीमित हथियार थे। इसके बावजूद, उन्होंने पाकिस्तानी सेना को 6 घंटे तक सीमा पर रोके रखा, जब तक कि मदद के लिए भारतीय एयरफोर्स के विमान नहीं पहुंचे। इसके बाद, पाकिस्तानी सैनिकों को जान बचाकर भागने के लिए मजबूर होना पड़ा।

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