मंगलवार, 10 मार्च 2015

क्या उमर अब्दुल्ला सरकार की वजह से हुई मसरत की रिहाई ?




By  एबीपी न्यूज़ Tuesday, 10 March 2015


नई दिल्ली: मसरत आलम की रिहाई पर संसद में आज दूसरे दिन भी हंगामा मचा है. मसरत को लेकर ABP न्यूज की पड़ताल में पता चला है कि रिहाई के लिए उमर अब्दुल्ला सरकार की लेटलतीफी जिम्मेदार है.
मसरत की रिहाई के लिए अभी तक मुफ्ती सरकार को जिम्मेदार ठहराया जा रहा था लेकिन एबीपी न्यूज़ की पड़ताल में पता चला है कि मसरत की रिहाई के लिए उमर लसरकार की लेटलतीफी जिम्मेदार है. मसरत आलम को 7 मार्च को रिहा किया गया था.

ABP न्यूज की पड़ताल के मुताबिक मसरत आलम  की PSA में यानी पब्लिक सेफ्टी एक्ट में हिरासत सितंबर में खत्म हो गई थी लेकिन उसे दोबारा हिरासत में लेने के लिए नियमों के मुताबिक कदम नहीं उठाए गए. इस वजह से सवाल उठ रहा है कि क्या उमर सरकार की ओर से हिरासत को बढ़ाने के लिए क्या माकूल कदम नहीं उठाए गए.

एबीपी न्यूज़ की पड़ताल
दरअसल 30 सितंबर 2014 मसरत की हिरासत की अवधि समाप्त हो रही थी. लेकिन उससे पहले जम्मू के गृह सचिव ने एतिहातन जम्मू के डीएम को चिठ्ठी लिखी जिसमें कहा गया कि मसरत पर पीएसए खत्म हो रहा है.
इसके बाद 26 अक्टूबर को को जम्मू कस्मीर में चुनावों का एलान हुआ इसके साथ ही राज्य में आचार संहिता लागू हो गई. 9 दिसंबर को डजीएम ने गृह सचिव के लिखा कि मसरत की मसरत की हिरासत को मंजूरी मिल गई है.

इसके 4 फरबरी को गृह सचिव ने ने डीएम को जवाब दिया कि मंजूरी देने में ज्या वक्त लगा इसलिए हिरासत को अवैध माना जाएगा. मसरत को इसके बाद हिसरासत में नहीं रखा जा सकता.

4 मार्च को जम्मू के डीएम ने नई सरकार बनने के बाद एसपी को चिठ्ठी लिखी. इस चिठ्ठी में डीएम ने 15 फरबरी और 4 फरबरी का हवाला देकर मसरत को रिहा करने के लिए कहा इसके बाद 7 मार्च को मसरत आलम को रहा कर दिया गया.

इस पूरे घटना क्रम में उमर सरकार की लेटलतीफी साफ नजर आती है. डीएम ने गृह सचिव को जवाब देने में 12 दिन से ज्यादा  का समय लगाया जिसके चलते मसरत आलम को रिहा करना सरकार की मजबूरी बन गई.

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