गुरुवार, 30 अप्रैल 2015

BJP बनी दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी



अमित शाह का दावा, BJP बनी दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी
आईबीएन-7 | Apr 30, 2015

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बन गई है। ये ऐलान आज बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने किया। उनके मुताबिक सदस्यता अभियान के आखरी दिन पार्टी के कुल 10 करोड़ 43 लाख सदस्य बन गए हैं। बीजेपी एक महासंपर्क अभियान के तहत इन सदस्यों को कार्यकर्ता बनाएगी। अब तक चीन की कम्युनिस्ट पार्टी साढ़े सात करोड़ सदस्यों के साथ सबसे बड़ी पार्टी मानी जाती थी।
फिलीपींस की आबादी से ज्यादा, ऑस्ट्रेलिया की आबादी के चार गुना से ज्यादा भारतीय जनता पार्टी के सदस्यों की संख्या हैं। बीजेपी का दावा है वो दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बन गई है। उसके सदस्यों की संख्या 10 करोड़ 43 लाख के पार पहुंच गई है। बीजेपी के 10 करोड़ी होने के अवसर पर दिल्ली में पार्टी मुख्यालय पर खूब जश्न मनाया गया।
बीजेपी से पहले चीन की कम्युनिस्ट पार्टी दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी थी। आंकड़ों के मुताबिक चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के साढ़े 7 करोड़ से भी ज्यादा सदस्य हैं। लेकिन अब बीजेपी उससे बहुत आगे निकल चुकी है। हालांकि बीजेपी पर ये आरोप भी लग रहे हैं कि कुछ लोगों को बिना मिस्ड कॉल दिए ही सदस्य बना दिया गया। विपक्ष ने भी बीजेपी के 10 करोड़ सदस्यों के दावे को फर्जी बताया है। हालांकि पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने इन सभी आरोपों को गलत बताया है। अमित शाह ने कहा कि ये सारे आरोप तब लगे थे जब 10 करोड़ का आंकड़ा पार हो गया था। उससे पहले किसी ने कुछ नहीं कहा।
बीजेपी के मुताबिक सबसे ज्यादा सदस्य यूपी में बने हैं जहां आंकड़ा एक करोड़ पार कर चुका है। साथ ही दक्षिण भारत के सात राज्यों में जहां बीजेपी कमजोर मानी जाती है वहां पर भी पिछले अभियान के मुकाबले इस बार तीन से सात गुणा ज्यादा सदस्य बने हैं। बीजेपी ने पिछले साल नवंबर में सदस्यता अभियान शुरू किया था। मिस्ड कॉल के जरिए सदस्य बनाने की मुहिम शुरू की गई थी। जिसे लोगों का अच्छा रिस्पॉन्स मिला। 6 महीने तक चलने वाला ये सदस्यता अभियान 30 अप्रैल को खत्म हो रहा है।
अब बीजेपी के नए सदस्यों का सत्यापन किया जाएगा। उन्हें पार्टी के विचारों और सिद्धांतों की जानकारी दी जाएगी। नए सदस्यों में से 15 लाख लोगों को चुनकर उन्हें जुलाई से कार्यकर्ता बनने की ट्रेनिंग दी जाएगी। जिन कार्यकर्ताओं ने 100 या उससे ज्यादा सदस्य बनाने में मदद की है उन्हें सक्रिय कार्यकर्ता माना जाएगा।

विदेश से चंदा लेने वाले एनजीओ पर कड़ी कार्रवाई : नौ हज़ार लाइसेंस रद्द




सरकार ने 8,975 एनजीओ के लाइसेंस किए रद्द

Vishal Kasaudhan's picture Tue, 28/04/2015

लाइव इंडिया डिजिटल
विदेश से चंदा लेने वाले एनजीओ पर एक और कड़ी कार्रवाई की गई है। सरकार ने विदेशी चंदा विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) का उल्लंघन करने वाली 8,975 एनजीओ के पंजीकरण रद्द कर दिए हैं।

गृह मंत्रालय ने अपने एक आदेश में कहा है कि साल 2009-10, 2010-11 और 2011-12 के लिए सालाना रिटर्न नहीं भरने वाले 10,343 एनजीओ को नोटिस जारी किए गए थे। पिछले साल 16 अक्टूबर को जारी किए गए इन नोटिसों में कहा गया था कि वे एक माह के भीतर अपने-अपने सालाना रिटर्न दाखिल करें। इसमें उन्हें यह भी बताना था कि विदेश से उन्हें कितना चंदा मिला। चंदे का स्रोत और इसे लेने के पीछे उद्देश्य क्या था। साथ ही यह जानकारी भी देनी थी कि एनजीओ ने इस चंदे का क्या उपयोग किया।

रविवार को गृह मंत्रालय से जारी अधिसूचना के अनुसार, 10,343 एनजीओ में से महज 229 ने ही अब तक जवाब दिए हैं। इससे पहले, सरकार ग्रीनपीस इंडिया का एफसीआरए लाइसेंस निरस्त कर चुकी है। साथ ही कथित रूप से कई कानूनों का उल्लंघन करने पर उसके सात बैंकों के खाते फ्रीज कर दिए गए हैं।

पिछले सप्ताह सरकार ने अपने आदेश में कहा था कि कोई भी बैंक, गृह मंत्रालय से आवश्यक अनुमति लिए बगैर, अमेरिका की फोर्ड फाउंडेशन से प्राप्त होने वाली किसी भी राशि को, किसी भी भारतीय एनजीओ के खाते में जारी नहीं करे।
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नौ हज़ार NGO पर गाज, लाइसेंस रद्द

नई दिल्ली ( टीम डिजिटल) : सरकार ने विदेश से चंदा ले रहे गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) पर गाज गिराते हुए कड़ी कार्रवाई की है। सरकार ने फॉरेन कंन्ट्रिब्यूशन रेग्युलेशन एक्ट (एफसीआरए) का उल्लंघन करने वाली 9,000 गैर सरकारी संस्थाओं के पंजीकरण को रद्द कर दिया है।

गृह मंत्रालय ने साल 2009-10, 2010-11 और 2011-12 के लिए वार्षिक रिटर्न नहीं भरने वाले 10,343 एनजीओ को नोटिस जारी किया था। मंत्रालय के मुताबिक 16 अक्टूबर 2014 को सभी संगठनों को नोटिस जारी किए गए जिसके मुताबिक उन्हें एक माह के भीतर अपने-अपने वार्षिक रिटर्न को दाखिल करना था।

साथ ही उन्हें इस बात की भी जानकारी देनी थी कि उन्हें विदेश से कितना चंदा मिला है, यह चंदा कहां से मिला है, चंदा लेने के पीछे उनका क्या उद्देश्य था और साथ ही उन्होनें इस चंदे का उपयोग किस तरह से किया है।

गृह मंत्रालय ने जानकारी देते हुए बताया कि 10,343 एनजीओ में से मात्र 229 ने ही नोटिस का जवाब दिया था। रविवार को गृह मंत्रालय ने बताया कि बाकी एनजीओ से जवाब नहीं मिलने पर एफसीआरए के तहत जारी उनके पंजीकरण को रद्द कर दिया गया है। जिन 8975 एनजीओ का पंजीकरण रद्द किया गया है उनमें से 510 ऐसे एनजीओ भी शामिल हैं जिन्हें नोटिस तो भेजा गया लेकिन उनके नोटिस वापस लौट आए थे।

सरकार ने इससे पहले भी कडा रुख अपनाते हुए ग्रीनपीस इंडिया का एफसीआरए लाइसेंस रद्द कर दिया था और साथ ही कानूनों का उल्लंघन करने पर उनके सात बैंक खाते भी फ्रीज कर दिए थे।

बता दें कि सरकार ने पिछले सप्ताह आदेश देते हुए कहा था कि कोई भी बैंक, गृह मंत्रालय से अनुमति लिए बिना अमेरिका की फोर्ड फाउंडेशन से प्राप्त होने वाली राशि को किसी भी भारतीय एनजीओ के खाते में जारी नहीं करेगा।

पाकिस्तान ने नेपाल को भेजा गौ मांस : मचा हंगामा



पाकिस्तान ने नेपाल को भेजा ‘बीफ मसाला’ ( गौ मांस ), मचा हंगामा
ibnkhabar.com | Apr 30, 2015

काठमांडू। 25 अप्रैल को आए भूकंप की त्रासदी के बाद सभी देश नेपाल को अपनी तरफ से हरसंभव मदद भेजने में लगे हैं। भारत ने तो अपने सभी संसाधन नेपाल के लिए खोल दिए हैं और तेजी से राहत-बचाव कार्य के अंजाम दिया जा रहा है।लेकिन इस बीच नेपाल को पाकिस्तान ने राहत पैकेज में ऐसी चीज भेजी है जिसे देख सभी लोग हैरान हैं और कोई भी इसे हाथ लगाने को तैयार नहीं है।
दरअसल पाकिस्तान की ओर से भेजी गई राहत सामग्री में 'बीफ मसाला' के पैकेट हैं। नेपाल में गोवध पर पूरी तरह प्रतिबंध है। ऐस में पाकिस्तान से इस तरह की सामग्री आने से लोगों में हैरत है। अब कोई भी इन पैकेट को छूने को तैयार नहीं है। बीफ मसाला भरे कई पैकेट ट्रकों में ही पड़े हुए हैं।
काठमांडू के अस्पताल में तैनान भारतीय डॉक्टरों ने अंग्रेजी वेबसाइट से बातचीत में बताया कि मंगलवार को पाकिस्तान की ओर से भेजी गई राहत सामग्री में बीफ मसाला के पैकेट्स हैं। भारत की ओर से 34 सदस्यीय चिकित्सा दल नेपाल भेजा गया है। इन्हीं में शामिल डॉ. बलविंदर सिंह ने कहा कि जब हम खाद्य सामग्री लेने एयरपोर्ट पहुंचे तो देखा कि पाकिस्तान से आई राहत सामग्री में बीफ मसाले के पैकेट भी हैं। तबसे हमने इसे छुआ तक नहीं है।
बता दें कि नेपाल कुछ साल पहले तक एक हिंदू राष्ट्र था। यहां की बहुसंख्यक आबादी हिंदू है और भारत की तरह यहां गाय को बेहद पवित्र माना जाता है। डॉ. सिंह ने कहा कि बीफ मसाला भेजकर पाकिस्तान ने नेपाल की धार्मिक भावनाओं का मजाक उड़ाया है। यह बेहद शर्मनाक है कि पाकिस्तान मामले की गंभीरता को नहीं समझ रहा है।
वहीं नेपाल सरकार के एक आला अधिकारी का कहना है कि इन पैकेट्स के बारे में प्रधानमंत्री सुशील कोइराला और खुफिया प्रमुख को जानकारी दे दी गई है। रिपोर्ट में अगर यह बात साफ हो जाती है कि इन पैकेट्स में वाकई बीफ मसाला था, तो कूटनीतिक स्तर पर पाकिस्तान के सामने इस मुद्दे को उठाया जाएगा।

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पाकिस्‍तान ने नेपाल को राहत सामग्री में भेजा 'बीफ मसाला', मचा हंगामा
Publish Date:Thu, 30 Apr 2015
काठमांडू। 25 अप्रैल को आए भूकंप की त्रासदी के बीच अस्तित्व बचाने के लिए जूझ रहे नेपाल को पाकिस्तान ने राहत पैकेज में ऐसी चीज भेजी है जिसे देख सभी लोग हैरान हैं और इसे कोई भी हाथ लगाने को तैयार नहीं है। पाकिस्तान से भेजी गयी राहत सामग्री में 'गोमांस मसाला' के पैकेट हैं। नेपाल एक हिंदू राष्ट्र है और यहां गोबध प्रतिबंध है। नेपाल की इस राहत सामग्री से नेपाल में सब सन्न हैं, कोई भी इसे हथ लगाने को तैयार नहीं है।पाकिस्तान की यह कारस्तानी दक्षिण एशियाई संगठन (सार्क) के सदस्य देशों के बीच राजनयिक कटुता को बढ़ाने की क्षमता रखता है।
काठमांडू के बीर अस्पताल में तैनान भारतीय डॉक्टरों के एक समूह ने एक अंग्रेजी वेबसाइट से बात करते हुए बताया कि मंगलवार को पाकिस्तान की ओर से जो राहत सामग्री भेजी गई, उसमें बीफ मसाला के पैकेट्स हैं। भारत की ओर से 34 सदस्यीय चिकित्सा दल नेपाल भेजा गया है। इस दल में राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल, सफदरजंग अस्पताल और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के डॉक्टर भी शामिल हैं।
34 सदस्यीय डॉक्टरों के दल में शामिल डॉ. बलविंदर सिंह ने कहा कि जब हम खाद्य सामग्री लेने एयरपोर्ट पहुंचे तो हमने पाया कि पाकिस्तान से आये सामग्री में इनमें बीफ मसाले के पैकेट भी हैं। उन्होंने बताया कि हमने पाकिस्तान से आई सामग्री को छुआ तक भी नहीं।
एक अन्य डॉक्टर ने नाम नहीं प्रकाशित करने की शर्त पर अंग्रेजी वेबसाइट को बताया कि अधिकतर स्थानीय लोगों को इस बारे में जानकारी नहीं है, लेकिन जब उन्हें यह बात का पता चला, तो सभी ने इससे बचने की कोशिश की। उन्होंने आगे बताया कि पाकिस्तान ने बीफ मसाला भेजकर नेपाल की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई है।
नेपाल सरकार के एक अधिकारी ने बताया कि हमने इस बात की जानकारी प्रधानमंत्री सुशील कोइराला और खुफिया प्रमुख को दे दी है। हम तथ्यों को सत्यापित करने के लिए एक आंतरिक जांच शुरू करने वाले हैं। अगर रिपोर्ट में यह बात स्पष्ट होती है तो हम राजनयिक स्तर पर पाकिस्तान के साथ इस मुद्दे को उठाएंगे। भारत हमारा प्रमुख साथी है, इसलिए इस घटनाक्रम के बारे में भारत को भी अवगत करवाया जाएगा।
वहीं, पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता तसनीम असलम ने अपना बचाव करते हुए कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। मैं ऐसे किसी डिस्पैच के लिए उत्तरदायी भी नहीं हूं। राहत सामग्री राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा भेजी जाती है।

बुधवार, 29 अप्रैल 2015

क्लिंटन फाउंडेशन और अमर सिंह के बीच क्या पका ..?





क्लिंटन फाउंडेशन को अमर सिंह के दान पर उठे सवाल

Publish Date:Wed, 29 Apr 2015
वाशिंगटन। रूसी चंदे पर घिंरी हिलेरी क्लिंटन को 2016 में अमेरिकी राष्ट्रपति पद की दावेदार के दौरान मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। इस बीच, एक अमेरिकी अखबार ने एक नया खुलासा किया है। जिसके मुताबिक, 2008 के भारत-अमेरिका परमाणु समझौते के दौरान एक भारतीय राजनीतिज्ञ अमर सिंह की ओर से क्लिंटन फाउंडेशन को पांच करोड़ रुपये दान प्राप्त हुआ था। गौरतलब है कि उस समय अमर सिंह समाजवादी पार्टी (सपा) के महासचिव थे।
अखबार ने एक किताब का हवाला देते हुए सवाल किया है कि अमर सिंह के पास इतनी अधिक धनराशि कहा से आई। अमर सिंह का नाम उन दानदाताओं की श्रेणी में है, जिन्होंने दस लाख से 50 लाख डालर तक दान दिया है। यानी पांच करोड़ से लेकर 25 करोड़ रुपये। लेकिन अमर सिंह ने उस वक्त इंकार करते हुए कहा था कि उन्होंने क्लिंटन फाउंडेशन को ऐसी बड़ी राशि दान दी है।
उनके मुताबिक, उनके पास तो इतना पैसा ही नहीं कि वे दान दें। अमर सिंह लाख मना करें, लेकिन हिंदुस्तान किसी दूसरे अमर सिंह को नहीं जानता जिसके क्लिंटन से संबंध हों।
कौन भूल सकता है कि उत्तर प्रदेश मुलायम सिंह के मुख्यमंत्री रहते बिल क्लिंटन लखनऊ आए थे और अमर सिंह उनकी अगवानी की थी। इसके बाद अमर सिंह ने वाशिंगटन जाकर हिलेरी क्लिंटन से मुलाकात भी की थी।क्लिंटन फाउंडेशन गरीबी मिटाने, एड्स व कई दूसरे सामाजिक सरोकारों से जुडे़ कार्यक्रम चलाता है।
इधर, एक अखबार में अमेरिका के कुल यूरेनियम उत्पादन के पांचवें हिस्से के उत्पादन के लिए रूसी नियंत्रण वाली कंपनी से समझौता पर क्लिंटन फाउंडेशन को 'धन मिलने' की रिपोर्ट प्रकाशित की गई थी। वहीं, हिलेरी के चुनाव अभियान के प्रवक्ता ने कहा कि किसी ने यह सबूत नहीं दिया कि हिलेरी ने विदेश मंत्री रहते क्लिंटन ने फाउंडेशन के दानकर्ताओं के हितों का समर्थन किया। उनका कहना था कि अमेरिकी सरकार की कई एजेंसियों और कनाडा सरकार ने यह समझौता किया। ऐसे मामले विदेश मंत्री स्तर से नीचे के अधिकारी देखते हैं।

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                               सवालों के घेरे में हिलेरी क्लिंटन का राष्ट्रपति चुनाव अभियान
Published : 28-04-2015 

वाशिंगटन। हिलेरी क्लिंटन का राष्ट्रपति अभियान सवालों के घेरे में घिरता नजर आ रहा है। हिलेरी क्लिंटन की संस्था क्लिंटन फाउंडेशन पर भारतीय दवा कंपनी रैनबैक्सी द्वारा एड्स मरीजों के लिए तैयार की गई अनुपयोगी दवा का वितरण करने का आरोप लगा है। इसके साथ ही टि्वटर पर हिलेरी के फोलोअर्स की प्रामाणिकता भी सवाल उठने लगे हैं।

कंजरवेटिव पार्टी की न्यूज वेबसाइट वर्ल्डनेटडेली (डब्लूएनडी) पर सोमवार को प्रकाशित रपट में आरोप लगाया गया है कि हिलेरी के परिवार की संस्था क्लिंटन हेल्थ किड्स इनिशिएटिव (सीएचएआई) ने विकासशील देशों में एड्स की घटिया व अनुपयोगी दवाओं के वितरण के लिए भारतीय दवा कंपनी रैनबैक्सी के साथ काम किया है। रपट में क्लिंटन परिवार को संयुक्त राष्ट्र समूह यूएनआईटीएआईडी द्वारा चलाए गए एयरलाइन टिकट वसूली कार्यक्रम से व्यक्तिगत रूप से लाभ पहुंचने का आरोप भी लगाया गया है।

वॉल स्ट्रीट पत्रिका के एक विश्लेषक का हवाला देते हुए डब्लूएनडी ने कहा है कि सीएचएआई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और उपाध्यक्ष इरा मैगेजिनर ने इस सौदे पर चर्चा के लिए 2002 में रैनबैक्सी से बात की थी। विश्लेषक ने 2013 में प्रकाशित किताब एड्स ड्रग्स फॉर ऑल का हवाला देते हुए कहा कि सीएचएआई ने रैनबैक्सी को प्रस्ताव दिया कि वे दवाओं की खरीदारी के लिए विकासशील देशों को एक साथ ला सकते हैं।

इस दौरान, फोर्ब्स पत्रिका ने सोमवार को बताया कि अमेरिका की पूर्व विदेश मंत्री के लगभग 62 प्रतिशत टि्वटर फोलोअर या तो फर्जी हैं या निष्क्रिय हैं। उन्होंने कहा, इस तरह से हिलेरी के लगभग 34 लाख टि्वटर फोलोअरों में से 21 लाख ने कभी भी उनके ट्वीट नहीं पढे। फोर्ब्स का कहना है कि रोचक बात यह है कि हिलेरी कुछ चुनिंदा लोगों को ही फॉलो करती हैं और उनके ट्वीट की संख्या भी कम ही है। हालांकि, रविवार को फाउंडेशन ने स्वीकार किया कि अपने विदेशी दानदाताओं की जानकारी देने में उनसे गलती हुई है।

इस पारिवारिक फाउंडेशन की स्थापना पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने 2001 में की थी। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि दानदाताओं की विस्तृत जानकारी और विदेश सरकार योगदान नीति पहले से अधिक सशक्त है। फाउंडेशन की कार्यवाहक सीईओ मॉरा पैली ने अपने ब्लॉग में कहा, हां, हमसे गलती हुई। हमारे जैसे कई संगठनों से गलतियां हो जाती हैं। लेकिन हम इन्हें ठीक करने के लिए तेजी से काम कर रहे हैं, ताकि इस तरह की गलतियां भविष्य में नहीं हों। उन्होंने कहा, जब से हिलेरी क्लिंटन ने राष्ट्रपति चुनाव लडने का फैसला किया है। हम तिमाही आधार पर अपने सभी दानदाताओं की जानकारी साझा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। (IANS)
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2008 में भारत-अमेरिका परमाणु करार के समय अमर सिंह ने क्लिंटन फाउंडेशन को दिया था 50 लाख डॉलर का चंदा?

Last Updated: Wednesday, April 29, 2015

वॉशिंगटन : आने वाली एक किताब में सवाल उठाया गया है कि क्या समाजवादी पार्टी के पूर्व नेता अमर सिंह भारत-अमेरिका परमाणु करार को मंजूरी दिलाने के लिए हो रही मशक्कत के समय भारत में प्रभावशाली हितों को तो नहीं साध रहे थे क्योंकि उन्होंने तथा कुछ संगठनों ने 2008 में क्लिंटन फाउंडेशन में चंदा दिया था।


न्यूयॉर्क पोस्ट अखबार ने ‘क्लिंटन कैश’ किताब का उल्लेख करते हुए कहा कि क्लिंटन फांडेशन को 2008 में सिंह की ओर से 10 लाख डॉलर से 50 लाख डॉलर के बीच चंदा मिला था। पोस्ट ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि सिंह ने 2008 में ऐसे समय में चंदा दिया था जब अमेरिकी कांग्रेस में ऐतिहासिक भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु करार पर मुहर लगने के संबंध में चर्चा हुई थी। सीनेट इंडिया कॉकस की तत्कालीन सह-अध्यक्ष और प्रतिष्ठित सीनेटर हिलेरी क्लिंटन ने विधेयक का समर्थन किया था जिसे कांग्रेस ने बहुमत से पारित किया था।

किताब के लेखक पीटर श्वाइजर ने सवाल उठाया है कि क्या सिंह परमाणु करार के लिए जोर देते हुए भारत में अन्य प्रभावशाली हितों के लिहाज से वाहक तो नहीं थे। द पोस्ट के अनुसार श्वाइजर ने किताब में लिखा है, अगर यह सच है तो इसका मतलब है कि सिंह ने अपने पूरे नेट वर्थ का 20 से 100 प्रतिशत के बीच क्लिंटन फाउंडेशन को दिया था। नयी दिल्ली में सिंह ने किसी तरह की गड़बड़ी की बात को खारिज किया और दावा किया कि वह अनुमानों और अफवाहों के शिकार हैं।

अमर सिंह ने कहा, मैं अनुमानों और अफवाहों का शिकार हूं। मैं अनुमानों और अटकलों पर टिप्पणी नहीं करना चाहता। सिंह ने कहा, मैं कानून का पालन करने वाला नागरिक हूं जिसने देश के किसी कानून का उल्लंघन नहीं किया। मैं हाई-प्रोफाइल आदमी हूं जिसकी कलकत्ता और इलाहाबाद उच्च न्यायालयों, कानपुर सत्र अदालत, उत्तर प्रदेश पुलिस तथा ईडी ने कानूनी तरीके से और प्रशासनिक तरीके से जांच पड़ताल की है। लेकिन कोई मेरे खिलाफ कुछ साबित नहीं कर सका। क्लिंटन फाउंडेशन और उनके प्रचार विभाग दोनों ने किसी तरह की गड़बड़ी की बात को पूरी तरह खारिज किया और कहा है कि फाउंडेशन के सार्वजनिक मकसदों के लिए चंदा प्राप्त करने में पारदर्शिता बरती गयी।

क्लिंटन फाउंडेशन की ओर से मौरा पल्ली ने कहा, फाउंडेशन का प्रभाव बढ़ा है तो पारदर्शिता के प्रति उसकी प्रतिबद्धता भी बढ़ी है। विदेश विभाग और व्हाइट हाउस ने क्लिंटन फाउंडेशन को मिलने वाले चंदे से संबंधित विवाद पर और इससे जुड़े सवालों पर टिप्पणी करने से मना कर दिया।

हिलेरी क्लिंटन द्वारा हाल ही में राष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवारी की घोषणा किये जाने के बाद न्यूयॉर्क टाइम्स ने खबर छापी थी कि अमेरिका में संपूर्ण यूरेनियम उत्पादन की क्षमता के पांचवें हिस्से का नियंत्रण रूसी लोगों को देने वाले एक करार के दौरान क्लिंटन फाउंडेशन में धन आया था।

भाषा 

मंगलवार, 28 अप्रैल 2015

किसान खुदकुशी केसः चश्मदीदों ने बताया गजेंद्र को उकसाया गया





किसान खुदकुशी केसः चश्मदीदों ने बताया गजेंद्र को उकसाया गया
Publish Date:Mon, 27 Apr 2015

नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस ने सोमवार को किसान गजेंद्र सिंह खुदकुशी मामले की रिपोर्ट मजिस्ट्रेट को सौंप दी। रिपोर्ट में गजेंद्र की मौत को हादसा बताया गया है। लेकिन इस मामले की तफ्तीश के दौरान दिल्ली पुलिस को दो अहम चश्मदीद मिले हैं। चश्मदीदों ने यह दावा किया है कि पेड़ पर चढ़ने के लिए कुछ लोग गजेंद्र सिंह को उकसा रहे थे। माना जा रहा है कि दिल्ली पुलिस इन दोनों चश्मदीदों को गवाह बना सकती है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार दिल्ली पुलिस ने वीडियो फुटेज के आधार पर यह रिपोर्ट तैयार की है। यह वीडियो फुटेज उसे विविध न्यूज चैनलों से प्राप्त हुए थे जो उस वक्त जंतर-मंतर पर आम आदमी पार्टी की किसान रैली को कवर कर रहे थे। पुलिस को किसान गजेंद्र की पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी मिल गई है। जिसमें उसकी मौत का कारण दम घुटना बताया गया है।
गौरतलब है कि 22 अप्रैल को आम आदमी पार्टी की जंतर-मंतर पर भूमि अधिग्रहण के खिलाफ आयोजित रैली के दौरान एक किसान ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। रैली में उस समय दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल मौजूद थे। इस किसान की पहचान गजेंद्र सिंह के रूप में हुई है। वह जंतर-मंतर पर आप नेताओं की मौजूदगी में पेड़ पर चढ़ गया और गमछे से खुद को फांसी लगा ली।

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'गजेंद्र की आत्‍महत्‍या आप द्वारा रचित नाटक, जो त्रासदी मेें बदल गया'
Publish Date:Sun, 26 Apr 2015

नई दिल्ली । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने आरोप लगाया है कि राजस्थान के गजेन्द्र सिंह नामक किसान की आत्महत्या आम आदमी पार्टी द्वारा रचित एक 'नाटक' था, जो सचमुच की त्रासदी में बदल गया। संघ ने पार्टी को इस घटना से सबक लेने की सलाह देते हुए कहा है कि आप की किसान रैली राजनीति के 'निम्नतम स्तर' को छू गई और ऐसी गंदी राजनीति से बाज आना चाहिए। आप के 'अलग ढंग की पार्टी' होने के दावे पर प्रहार करते हुए संघ ने अपने मुखपत्र 'ऑर्गेनाइजर' में कहा है- 'आप ने भारतीय राजनीति में जिस प्रकार का मनोरंजन का पुट जो़ड़ा है वह विचित्र है। अराजकतावादी इस संगठन ने मीडिया का ध्यान खींचने का हर मौका भुनाया है। वैसे तो राजनीति में कुछ नौटंकी, नारेबाजी और नेतृत्व की तिकड़मबाजी तो हमेशा ही चलती है।' पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के 'गरीबी हटाओ' और नरेंद्र मोदी के 'अच्छे दिन' जैसे नारों का उल्लेख करते हुए कहा गया कि ऐसे आकर्षक शब्द आम मतदाताओं के मन को छूते हैं। लेकिन आम आदमी पार्टी ने किसान रैली के नाम पर जो किया वह राजनीति का निम्नतम स्तर छू जाना था। केंद्र को शर्मिंदा करने की कोशिश में 'आप' ने एक नाटक रचा जो त्रासदी में बदल गया। आप नेतृत्व पर आरोप लगाया गया कि चुनावी राजनीति में उसने हमेशा तिक़़डमों का इस्तेमाल किया। पार्टी ने मीडिया के जरिए जनता का ध्यान खींचने के प्रयास में कुछ तथाकथित किसानों को आत्महत्या का नाटक करने के लिए उकसाया और इस गंदी राजनीति में एक आदमी की सचमुच में जान चली गई। इस राजनीति का पूरी तरह त्याग किया जाना चाहिए। भारतीय राजनीति में आप के उदय को देश की मौजूदा राजनीतिक संस्कृति से हटकर देखने पर भी संपादकीय में टिप्पणी की गई है। कहा गया है कि 2013 में दिल्ली में अल्पावधि की सरकार चलाने के बाद लोकसभा चुनाव में वाराणसी से चुनाव लड़ने पर कई लोगों ने यह कहना शुरू कर दिया था आप भी अन्य पार्टियों की तरह बदल रही है। लेकिन राष्ट्रीय राजधानी में फिर से प्रचंड बहुमत से वापसी के बाद अलग ही रास्ता पकड़ा। संपादकीय में भूमि अध्यादेश पर भाजपा का बचाव करते हुए कांग्रेस पर किसान हितों से खिलवाड़ करने का आरोप लगाया गया है। 

सोमवार, 27 अप्रैल 2015

बाबा साहब के संदेश आज भी उतने ही प्रासंगिक - दुर्गादास जी






बाबा साहब के संदेश आज भी उतने ही प्रासंगिक - दुर्गादास जी

बीकानेर।  १४ अप्रैल २०१५. समरसता मंच बीकानेर द्वारा वेटेरीनरी प्रेक्षागृह मे समरसता समागम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन महानायक भीमराव अंबेडकर की 125 जयंती के अवसर पर किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र प्रचारक दुर्गादास थे। उन्होने अपने उद्बोधन मे कहा कि इस युग मे जिन महापुरुषों ने राष्ट्र की एकता और अखंडता के लिए अपना जीवन लगाया है, उनमे डॉ  अंबेडकर एक अग्रणी महापुरुष हैं। डॉ  अंबेडकर ने अपने व्यक्तित्व और कृतित्व से समाज के सबसे पिछड़े तबके को आगे लाने के लिए जो प्रयास किया वही एक समर्थ राष्ट्र की नींव स्थापित हुआ।

 उन्होने जिन विपरीत परिस्थितियों मे आगे बढ़कर संविधान और नीति निर्माण के प्रयास किए वे अतुलनीय हैं। अंबेडकर का जीवन ही अपने आप मे प्रेरणास्पद और स्मरणीय है। उनका संदेश समरसता के माध्यम से एकता और अखंडता रहा। वे अखंड भारत के पक्षधर तो थे ही, भारत की प्राचीन और सनातन संस्कृति के अध्येता और उपासक भी रहे। उन्होने भारत की जड़ों से जुड़े विकास पर बल दिया जिसमे रूढ़ियोंए जातिवाद और भेदभाव का कोई स्थान न हो। उन्होने कहा कि आज का समय परिवर्तन और नवाचार का है, ऐसे मे बाबा साहब के संदेश आज भी उतने ही प्रासंगिक और उनका दिखाया मार्ग उतना ही श्रेष्ठ है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता स्वामी केशवानन्द कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति बीण् आरण् छींपा ने की। उन्होने कहा कि बाबा साहब सामाजिक चेतना के अग्रदूत थे। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि जिला कलक्टर आरती डोगरा थीं। विशिष्ट अतिथि उष्ट्र अनुसंधान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ बी एल चिरानिया थे। कार्यक्रम का संचालन विक्रम जीत ने किया।

मंगलवार, 21 अप्रैल 2015

इटैलियन मूल की कांग्रेसी बनाम राष्ट्र गौरव





जिस पार्टी की नेता ही विदेशी इटैलियन मूल की हो उसे विश्वख्याति पा रही भारत की कोई गौरव गाथा क्यों अच्छी लगेगी.?
इनदिनों युद्धग्रस्त यमन में पानी की तरह बरस रहे बमों की वर्षा के मध्य अपनी वायुसेना जलसेना तथा एयर इंडिया द्वारा लगभग 4800 भारतीयों के अतिरिक्त अमेरिका जापान जर्मनी स्पेन रूस ब्राज़ील और स्वीडन सहित दुनिया के 48 देशों के लगभग 2000 नागरिकों की प्राणरक्षा कर के भारत समस्त विश्व से सराहना और सम्मान प्राप्त कर रहा है.
भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने आज जब भारतीय संसद के माध्यम से देश के नागरिकों को भारत की इस गौरव गाथा से विस्तार से परिचित कराना प्रारम्भ किया तो कांग्रेसी सांसदों ने इसके विरोध में संसंद के भीतर गज़ब का हल्ला हुड़दंग करके इसका जबरदस्त विरोध किया और सुषमा स्वराज को ऐसा करने से रोकने का भरपूर प्रयास किया. अपने इस दुष्प्रयास में वे सफल भी रहे क्योंकि कांग्रेसी सांसदों के भयंकर हल्ले और हुड़दंग के कारन सुषमा स्वराज का सम्बोधन सुन पाना लगभग असम्भव हो गया.
मित्रों कांग्रेसी सांसदों के इस आचरण पर हमको आपको आश्चर्य नहीं करना चाहिए क्योंकि जिस पार्टी के नेताओं ने अपनी पार्टी का नेतृत्व करने के लिए पिछले 17 वर्षों में किसी भी भारतीय को विदेशी इटली मूल की एक अल्प शिक्षित औरत से अधिक योग्य नहीं समझा है उस पार्टी के सांसदों को पूरी विश्व की सराहना और सम्मान बटोर रही भारतीय गौरव गाथा यदि रास नहीं आई तो इसमें आश्चर्य कैसा.?

सोमवार, 20 अप्रैल 2015

भूमि अधिग्रहण बिल की बड़ी बातें



भूमि अधिग्रहण बिल की छह बड़ी बातें
Publish Date:Mon, 20 Apr 2015

भूमि अधिग्रहण अध्यादेश को मोदी सरकार जहां विकास का पर्याय मान रही है वहीं विपक्ष इस अध्यादेश को किसान विरोधी बता रहा है। आखिर क्या है इस अध्यादेश में खास। इसके पक्ष में क्या है भाजपा के तर्क।

1- किसानों को अपनी जमीन की जायज कीमत मिलेगी। यह मूल्य बाजार भाव का चार गुना होगा। साथ ही किसान विकास के बाद विकास और अधिग्रहण लागत का भुगतान करके मूल भूमि का 20 फीसद प्राप्त कर सकते हैं। मिसाल के तौर पर, एक किसान जिसके पास 20 एकड़ जमीन है और जिसकी बाजार कीमत 2 लाख रुपये प्रति एकड़ है, उसे अपनी भूमि के लिए 1.6 करोड़ रुपये मिलेंगे। इसके अलावा विकास कार्य के बाद उसके पास अविकसित भूमि की कीमत पर ही बुनियादी सुविधाओं से परिपूर्ण दो एकड़ जमीन खरीदने का विकल्प रहेगा।

2 - भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया यदि आसान होगी तो कॉलेजों, अस्पतालों, रेलवे आदि सुविधाओं का विस्तार होगा और विकास भी। इससे निश्चित तौर पर किसानों को भी प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।

3 - निजी उद्देश्यों (होटल निर्माण, इमारत बनाने, कल कारखानों) के लिए ली जाने वाली जमीन किसानों से उनकी शर्तों पर खरीदनी होगी।

4 - भूमि अधिग्रहण के लिए 70 फीसद किसानों की सहमति को खत्म कर दिया गया है। इसे अव्यवहारिक माना गया।

5 - पांच साल के भीतर परियोजना के पूरा नहीं होने के बावजूद जमीन खरीददार के पास ही रहने का प्रावधान रखा गया है। इसके पीछे तर्क यह है कि कई बड़ी परियोजनाओं को पूरा करने के लिए लंबी अवधि की जरूरत होती है। उदाहरण के तौर पर परमाणु ऊर्जा संयंत्र को पूरा करने के लिए पांच से अधिक साल लग सकते हैं। यदि यह पांच साल में पूरा नहीं हो सका तो क्या हमें इसका कार्य बीच में ही छोड़ देना चाहिए?

6 - संबंधित परियोजनाओं के लिए स्पेशल इम्पैक्ट असेसमेंट को हटा दिया गया है, लेकिन जमीन के मालिकों को सभी प्रकार की सहायता, पुनर्वास और मुआवजा दिया जाएगा।

रविवार, 19 अप्रैल 2015

कांग्रेस की संधियों के कारण देश में 3500 से कुछ अधिक विदेशी बहुराष्ट्रीय कम्पनियाें की लूट जारी है





http://rajivdixit.in/Books/makadjal.pdf
बहुराष्ट्रीय कम्पनियों का भारत में प्रवेश

भारत में विदेशी कम्पनियाँ तीन तरीके से कम कर रही है। पहला, सीधे अपनी शाखायें स्थापित करके, दूसरा अपनी सहायक कम्पनियों के माध्यम से, तीसरा देश की अन्य कम्पनियों के साथ साझेदार कम्पनी के रूप में।
जून 1995 तक प्राप्त आंकड़ों के अनुसार 3500 से कुछ अधिक विदेशी बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ, अपनी शाखाओं या सहायक कम्पनियों के रूप में देश में घुसकर व्यापार कर रही हैं। 20,000 से अधिक विदेशी समझौते देश में चल रहे हैं। औसतन 1000 से अधिक नये विदेशी समझौते प्रतिवर्ष देश में होते हैं।
सन् 1972 के अन्त तक देश में कुल 740 विदेशी कम्पनियाँ थीं। जिनमें से 538 अपनी शाखायें खोलकर व 202 अपनी सहायक कम्पनियों के रूप में काम कर रही थीं। इनमें सबसे अधिक कम्पनियाँ ब्रिटेन की थीं। लेकिन आज सबसे अधिक कम्पनियाँ अमेरिका की हैं। समझौते के अन्तर्गत काम करने वाली सबसे अधिक कम्पनियाँ जर्मनी की हैं। 1977 में विदेशी कम्पनियों की संख्या 1136 हो गयी।
आजादी के पूर्व सन् 1940 में 55 विदेशी कम्पनियाँ देश में सीधे कार्यरत थीं। आजादी के बाद सन् 1952 में किये गये एक सर्वेक्षण के अनुसार ब्रिटेन की 8 विशालकाय कम्पनियों के सीधे नियन्त्रण में 701 कम्पनियाँ भारत में व्यापार कर रही थीं। ब्रिटेन की अन्य 32 कम्पनियाँ, भारतीय कम्पनियों के साथ किये गये समझौतों के तहत कार्यरत थीं। ये 8 विशालकाय ब्रिटिश कम्पनियाँ सन् 1853 से ही भारत में घुसना शुरू हो गयी थीं। ईस्ट इण्डिया कम्पनी द्वारा सोची समझी रणनीति के तहत लायी गयी ये कम्पनियाँ सन् 1860 तक ईस्ट इण्डिया कम्पनी के भारतीय उपमहाद्वीप के शोषण के लिये धारदार हथियार बन चुकी थी। भारतीय उपमहाद्वीप में स्थापित हो जाने के बाद ये कम्पनियाँ दुनिया के अन्य दूसरे देशों में शोषण करने चली गयीं।
ये 8 ब्रिटिश कम्पनियाँ निम्न थीं:-
1.            एन्ड्रयूल एण्ड कम्पनी
2.            मेक्लाइड एण्ड कम्पनी
3.            मार्टिन एण्ड कम्पनी
4.            बर्न एण्ड कम्पनी
5.            डंकन ब्रदर्स एण्ड कम्पनी
6.            आक्टेवियस स्टील एण्ड कम्पनी
7.            गिलैण्डर अर्बुदनाट एण्ड कम्पनी
8.            शा वालेस एण्ड कम्पनी

भारत में जैसे-जैसे विदेशी पूँजी का निवेश बढ़ता गया वैसे-वैसे विदेशी कम्पनियों की संख्या बढ़ती गयी। इसके साथ जुड़ा हुआ एक आश्चर्यजनक सत्य यह है कि जिन विदेशी कम्पनियों ने भारत में पूँजी निवेश किया उनमें से अधिकांश कम्पनियों ने अपने निवेश करने के अगले वर्षों में ही अपनी निवेश की हुयी पूँजी के बराबर या उससे अधिक पूँजी कमा ली। बाकी अन्य कम्पनियों ने अधिकतम 5 वर्षों में अपनी निवेश की हुई पूँजी को कमा लिया। हर क्षेत्र में घुसी हैं बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ
आज देश का छोटा-बड़ा प्रत्येक क्षेत्र इन विदेशी बहुराष्ट्रीय कम्पनियों का गुलाम है। जीवन के किसी भी क्षेत्र में आने वाली कोई भी चीज ऐसी नहीं हैं, जिसे ये कम्पनियाँ न बनाती हों। दैनिक उपयोग के सामानों का उत्पादन करके ये विदेशी कम्पनियाँ घर-घर में घुसी हुयी हैं। खेती के काम में आने वाले जहरीले कीटनाशकों, खादों अन्य उपकरणों का उत्पादन करके इन विदेशी कम्पनियों ने हमारी आत्मनिर्भर खेती को अपना गुलाम बना लिया है। उद्योगों के क्षेत्र में रद्दी तकनीकी का इस्तेमाल करके वातावरण को विषैला कर दिया है। हवा, पानी और मिट्टी भी अब प्रदूषण से मुक्त नहीं हैं।
नीचे उन क्षेत्रों की सूची दी गयी है जिनमें घुसकर इन विदेशी कम्पनियों में हमारी आर्थिक व्यवस्था को पंगु बना दिया है-
कुछ प्रमुख उत्पादन के क्षेत्र, जिनमें विदेशी कम्पनियाँ घुसी हुई हैं।
1.            दैनिक उपभोग की सामग्री के क्षेत्र में
2.            दवा उद्योग के क्षेत्र में
3.            खाद, कीटनाशक, दवायें व खेती उपकरणों के क्षेत्र में
4.            रासायनिक पदार्थों के उत्पादन में
5.            मोटर-गाड़ियों के उपकरणों के उत्पादन के क्षेत्र में
6.            भारी इंजीनियरिंग सामानों के उत्पादन के क्षेत्र में
7.            इलेक्ट्रानिकी व इलैक्ट्रीकल सामानों के उत्पादन के क्षेत्र में
8.            सैनिक रक्षा सामग्री के क्षेत्र में
9.            फूड प्रोसेसिंग व प्लांटेशन (चाय, कॉफी, डिब्बाबन्द खाद्य पदार्थ, चॉकलेट)
10.          वैज्ञानिक रक्षा अनुसंधान में
11.          सीमेन्ट उद्योग में
12.          तेल शोधन व उत्पादन के क्षेत्र में
13.          धातुओं के खनन तथा निष्कर्षण क्षेत्र में
14.          जूट उद्योग में
15.          सिले हुये (रेडीमेड) कपड़ों के उत्पादन क्षेत्र में
16.          जूते व अन्य खेल सामानों के उत्पादन क्षेत्र में
17.          रबर इन्डस्ट्रीज के क्षेत्र में
18.          बच्चों के खिलौने व अन्य प्लास्टिक सामानों के उत्पादन में

आपातकाल के मीसा, डीआईआर बंदियों का जेलों में रिकॉर्ड नहीं



आपातकाल के मीसा, डीआईआर बंदियों का जेलों में रिकॉर्ड नहीं
आनंद चौधरी|  May 13, 2014,
जयपुर. आपातकाल (1975 -77) के दौरान जेलों में यातना सहने वाले आधे से ज्यादा मीसा और डीआईआर बंदियों को नियम के फेर में पेंशन से महरूम रहना पड़ सकता है। दरअसल, पेंशन के लिए उन्हीं को पात्र माना गया है जो प्रदेश के मूल निवासी हैं और यहां की जेलों में बंद रहे। आवेदन के साथ जेल में बंद रहने का सर्टिफिकेट मांगा है, लेकिन कई जेलों में रिकॉर्ड नहीं है। जेल प्रशासन का कहना है कि 40 साल पुराना मामला होने से रिकॉर्ड जर्जर हैं। फटे-पुराने कागजों को जोड़कर सर्टिफिकेट दिए गए हैं। पूर्व सांसद रघुवीर सिंह कौशल, सवाई माधोपुर के नेता गिर्राज किशोर शर्मा का रिकॉर्ड भी नहीं है। कौशल को तो आरटीआई के तहत भी रिकॉर्ड हासिल नहीं हो पाया।  आपातकाल में सैकड़ों नेताओं की प्रदेश में गिरफ्तारी हुई थी। नियमों के तहत ये पेंशन से वंचित हो सकते हैं। यूपी, उत्तराखंड और एमपी में मीसा बंदियों को स्वतंत्रता सेनानी का दर्जा देकर 15 हजार पेंशन दी जा रही है, लेकिन राजस्थान के नेताओं की पेंशन में नियम रुकावट बने हैं।

शुरुआत में 850 को पेंशन
2222 नेता राज्य के आपातकाल के दौरान मेंटेनेंस ऑफ इंटरनल सिक्योरिटी एक्ट (मीसा), डिफेंस ऑफ इंडिया रूल्स (डीआईआर), धारा 151 और 107 के तहत विभिन्न जेलों में बंद रहे 850 को ही पेंशन मिल पाएगी शुरू में। ये वो नेता हैं, जिन्होंने प्रदेश की जेलों में बंद रहने का रिकॉर्ड दे दिया है | 40 साल में आधे से ज्यादा नेताओं की मौत हो चुकी है, तो कुछ नेता रिकॉर्ड नहीं मिल पाने के कारण आवेदन नहीं कर पाए।

इन जेलों में रिकॉर्ड नहीं
टोंक, झालावाड़, बाड़मेर, चित्तौडग़ढ़, जैसलमेर, कोटा, उदयपुर बांसवाड़ा आदि। कौशल किशोर जैन बताते हैं कि जेल प्रशासन की दलील है कि 10-15 साल पुराना रिकॉर्ड नहीं है, तो 40 साल पुराना रिकॉर्ड कहां से लाएं?

सरकार गई, योजना बंद
पूर्ववर्ती वसुंधरा सरकार ने 1 अप्रैल  2008 को मीसा बंदियों के लिए पेंशन करने की घोषणा की थी, दिसंबर 2008 में सरकार बदलते ही योजना पर रोक लगा दी गई। वसुंधरा ने फिर सत्ता में आते ही इसे लागू करने का मानस बनाया है। बंदियों को प्रति माह 12 हजार रु. पेंशन,1200 रु. चिकित्सा भत्ता दिया जाएगा। जिन बंदियों की मृत्यु हो चुकी है उनकी पत्नी पेंशन की हकदार होगी।

॥राजस्थान के मूल निवासी और प्रदेश की जेल में बंद रहने वाले ही पेंशन के दायरे में आएंगे। 30 अप्रैल तक बंदियों के आवेदन मांगे हैं। 
- राकेश श्रीवास्तव, अतिरिक्त मुख्य सचिव सामान्य प्रशासन विभाग 


॥मीसा बंदियों का रिकॉर्ड जर्जर हो गया है। फटे-पुराने कागजों को जोड़कर सर्टिफिकेट दिए गए हैं। कागज इतने पुराने हैं कि रिकॉर्ड खंगालने में पांच दिन लग गया। 
- राकेश भार्गव, अधीक्षक, अजमेर कारागार 

॥ सरकार चाहे तो आपातकाल में बंद रहे कैलाश मेघवाल, घनश्याम तिवाड़ी और गुलाबचंद कटारिया की कमेटी बनाकर फैसला कर ले कि कौन लोग जेलों में रहे।
- कौशल किशोर जैन, मीसा बंदी, पूर्व एमएलए और लोकतंत्र रक्षा मंच राजस्थान के संस्थापक अध्यक्ष

शुक्रवार, 17 अप्रैल 2015

भूमि अधिग्रहण विधेयक खुली बहस को तैयार: नितिन गडकरी



भूमि  अधिग्रहण  विधेयक  पर किसी भी मंच पर
खुली बहस को तैयार: नितिन गडकरी

भूमि अध्ािग्रहण विध्ोयक खेतों, खलिहानों मंे काम करने वालों और किसानों को समृह् बनानेवाला
कानून है, इसलिए गांवों में विकास के लिए इस विध्ोयक का साथ देने को लेकर 19 मार्च को केंद्रीय परिवहन और राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी ने विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं को पत्र लिखा। प्रस्तुत है पूरा पाठ:

बदलावों को करते हुए हमने मुआवजे और पुनर्वास से कोई समझौता नहीं किया है। जिन
विषयों को हमने इस सूची में शामिल किया है, उसमें से एक भी किसानों के विरोध में नहीं है,
बल्कि यह विषय उन्हें समृ(िशाली बनाने वाले हैं। इंडस्ट्रियल कोरीडोर दिल्ली या फिर किसी महानगर में नहीं बनेगा। यह ग्रामीण इलाकों से होकर गुजरेगा। इसके तहत अगर ग्रामीण इलाकों में उद्योग लगते हैं तो इसका सीधा फायदा किसानों को होगा।
बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा।

प्रध्ाानमंत्री श्री नरेनर््ी मोदी की सरकार ने ग्रामीण विकास और किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए वर्तमान भूमि अध्ािग्रहण कानून में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। लेकिन कुछ राजनीतिक दल और संगठन राजनीतिक कारणों से इसका विरोध्ा कर रहे हैं। हमारी सरकार गांव, गरीब, किसान और मजदूरों के हित में काम करने वाली सरकार है।
यूपीए सरकार ने जो भूमि अध्ािग्रहण, पुनर्वास और पुनरूस्थापन अध्ािनियम, 2013 बनाया था, उसमें 13 कानूनों को सोशल इंपैक्ट और कंसेंट क्लाज से बाहर रखा गया था। इनमें सबसे प्रमुख तो कोयला क्षेत्र अध्ािग्रहण और विकास कानून 1957 और भूमि अध्ािग्रहण ;खदानद्ध कानून 1885 और राष्टन्न्ीय राजमार्ग अध्ािनियम 1956 है। इसके अलावा एटमी ≈र्जा कानून 1962, इंडियन टन्न्ामवेज एक्ट 1886, रेलवे एक्ट 1989 जैसे कानून प्रमुख हैं। हमने इसमें कुछ और महत्वपूर्ण विषयों को जोड़ा है। जिससे आप सहमत नहीं हैं। यह आपका अध्ािकार है। लेकिन हम आपसे पूछना चाहते हैं, क्या किसानों के खेतों को पानी नहीं मिलना चाहिए? क्या गांवों में समृह् िनहीं आनी चाहिए? क्या देश की सुरक्षा महत्वपूर्ण नहीं है? हमने जो बदलाव किए हैं वो इन्ही विषयों से संबंध्ाित हैं। ग्रामीण विकास, सिंचाई परियोजनाओं और देश की सुरक्षा को
ध्यान में रखते हुए हमने बदलाव किए हैं। रक्षा, ग्रामीण बिजली, सिंचाई परियोजनाएं, गरीबों के लिए घर और औद्योगिक कारीडोर जैसी परियोजनाओं के लिए भूमि अध्ािग्रहण को सोशल इंपैक्ट और कंसेंट क्लाज से बाहर रखे गए कानूनों की सूची में जोड़ा है। बदलावों को करते हुए हमने मुआवजे और पुनर्वास से कोई समझौता नहीं किया है। जिन विषयों को हमने इस सूची में शामिल किया है, उसमें से एक भी किसानों के विरोध्ा में नहीं है, बल्कि यह विषय उन्हें समृह्शिाली बनाने वाले हैं। इंडस्टिन्न्यल कोरीडोर दिल्ली या फिर किसी महानगर में नहीं बनेगा। यह ग्रामीण इलाकों से होकर गुजरेगा। इसके तहत अगर ग्रामीण इलाकों में उद्योग
लगते हैं तो इसका सीध्ाा फायदा किसानों को होगा। बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा। किसानों के फसलों को उनकी फसलों का सही दाम मिलेगा। जहां कच्चा माल मिलेगा वहां उससे संबंध्ाित उद्योग आने की ज्यादा संभावना है। क्या हमारे ग्रामीण युवाओं को रोजगार देना ठीक
नहीं है?

हमने सिंचाई परियोजनाओं के लिए कानून में बदलाव किए हैं। हम सिंचाई के लिए व्यवस्था करना चाहते हैं। यह बदलाव खेतों को पानी उपलब्ध्ा कराने के लिए हैं। जब तक किसानों को पानी नहीं मिलेगा तब तक हम उन्हें आत्मनिर्भर नहीं बना पाएंगे। 2000 एकड़ में अगर हम एरिगेशन प्रोजेक्ट लगाते हैं तो 3 लाख हेक्टेअर खेतों को हम पानी उपलब्ध्ा करा सकते हैं। यह कहां से किसान विरोध्ाी है? 80 फीसदी भूमि सिंचाई के लिए अध्ािग्रहीत की जाती है। इस पूरे कानून में कोई भी ऐसी बात नहीं है जो किसानों के विरोध्ा में हो। यही नहीं, जमीन मालिक के अलावा भी उस पर निर्भर लोग मुआवजे के हकदार होंगे। पूरा मुआवजा मिलने के बाद ही जमीन से विस्थापन होगा। इन बदलावों में न्यायसंगत मुआवजे के अध्ािकार और पारदर्शिता पर खास जोर दिया गया है। इसी के आसपास भूमिध्ाारी समुदाय के हक-हकूक के मसलों को
कानून में रेखांकित किया गया है। अब मुआवजा एक निधर््ाारित खाते में ही जमा होगा। मुकम्मल पुनर्वास इस कानून का मूल आध्ाार है। बिना उसके कोई भी जमीन किसी भी किसान से देश के किसी भी हिस्से में किसी भी कीमत पर नहीं ली जा सकेगी। इसके अलावा अब दोषी अफसरों पर अदालत में कार्रवाई हो सकेगी। इसके साथ ही किसानों को अपने जिले में ही शिकायत या अपील का अध्ािकार होगा। देश की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भी हमने कुछ बदलाव किए। आज देश के लोगों की गाढ़ी कमाई विदेशों से हथियार मंगाने पर खर्च होती है। क्या हमें इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर नहीं होना चाहिए? क्या ये देशहित में नहीं है?

आपके मन में अध्यादेश लाने को लेकर भी सवाल हैं। हम कहना चाहते हैं,किसानों के हित में अध्यादेश लाना जरूरी था। यदि हम अध्यादेश नहीं लाते तो किसानों को उनकी जमीन का बाजार भाव से चार गुना मुआवजा नहीं दे सकते थे।

इस अध्यादेश की बदौलत ही हम किसानों को उनकी जमीन का चार गुना मुआवजा दे पाए। केवल राजमार्ग मंत्रालय और उर्जा मंत्रालय ने किसानों को 2000 करोड़ का मुआवजा दिया। यह इसलिए हो सका क्योंकि हम अध्यादेश लेकर आए।

विपक्षी दलों से बातचीत के बगैर कानून में बदलाव का आरोप आप लगा रहे हैं, यह भी ठीक नहीं है। हमने विज्ञान भवन में सभी राज्य सरकारों के मंत्रियों की बैठक बुलाई थी। जिस बैठक में करीब सभी राज्य सरकारों के प्रतिनिध्ाि मंत्री शामिल हुए। इस विषय में उन राज्य सरकारों के मुख्यमंत्रियों के पत्र भी हमारे पास हैं। हमने जो बदलाव किए उन्ही सरकारों के सुझाव पर किए। इसमें आपकी राज्य सरकारें भी शामिल हैं।

यह कानून खेतों, खलिहानों में काम करने वालों और किसानों को समृह् िबनाने वाला कानून है, गावों में विकास के लिए इस विध्ोयक का साथ दें। हम इस विध्ोयक पर आपसे किसी भी मंच पर खुली बहस को तैयार हैं।




भाजपा के 35 वर्ष : 2 से 282 तक की यात्रा...


                                         भाजपा स्थापना दिवस 6 अप्रैल पर विशेष

                             भाजपा के 35 वर्ष : 2 से 282 तक की यात्रा...

जनसंघ के बाद भाजपा गठन को 6 अप्रैल 2015 को 35 वर्ष हो जाएंगे। 2 से चले थे और
आज लोकसभा में 282 तक पहुंचे हैं। भाजपा का यह राजनीतिक सफर संगठन की जीवंतता
का एक अनुपम उदाहरण है। यह अवसर है उन अनाम कार्यकर्ताओं को प्रणाम करने का, जो बिना
लाग-लपेट, बिना लोभ-लालच के, अहर्निश बिना कहे, संगठन के काम में लगे रहते हैं। भारतीय
राजनीति में भाजपा ही एक ऐसा दल है जिसे सामाजिक और आध्यात्मिक राजनैतिक दल कहा जा
सकता है। दर्शनहीन राजनीतिक दलों के बीच दर्शन से पूर्ण एक दल है, जिसका नाम भारतीय जनता
पार्टी है।
दोहरी सदस्यता के नाम पर जनता पार्टी के तत्कालीन अध्यक्ष चन्द्रशेखर ने जनसंघ को जनता पार्टी
से अलग कर दिया। अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, डाॅ. मुरली मनोहर जोशी, सुंदर
सिंह भंडारी, कुशाभा≈ ठाकरे, जगन्नाथ राव जोशी, राजमाता विजयाराजे सिंध्ािया, भैरो सिंह शेखावत,
जना कृष्णमूर्ति, के.एल. शर्मा, यज्ञदत्त शर्मा, जे.पी. माथुर सहित अनेक लोग तनिक भी घबराएं नहीं।
वे जानते थे कि संगठन ही शक्ति है। संगठन सिर्फ जनसंघ के पास है, सबने इसे माना।
दिल्ली में एकत्रित हुए और 6 अप्रैल 1980 को भाजपा का गठन किया। जनसंघ के सबसे लाडले
नेता अटल बिहारी वाजपेयी को पहला अध्यक्ष बनाया गया। मुम्बई में पहला महाध्ािवेशन हुआ। इसमें
अटलजी ने समुद्र के किनारे प्रतिनिध्ाियों का आह्वान करते हुए कहा- ‘‘सूरज निकलेगा, अंध्ोरा छंटेगा
और कमल खिलेगा।’’ कारवां बढ़ता गया। कार्यकर्ता एड़ी-चोटी का जोर लगाते रहे। एक स्थिति यहां
तक आई कि इंदिरा गांध्ाी के देहावसान के बाद हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा मात्र 2 सीटों पर सिमटकर
रह गई। भाजपा के महानायक अटलजी तक चुनाव हार गए। क्षणभर के लिए निराश हुए। पर संगठन
शक्ति भाजपा के पास थी। गांव-गांव में कार्यकर्ता थे। इसलिए निराशा की काई बहुत जल्दी दूर हुई।
अटलजी, आडवाणीजी और डाॅ. जोशीजी ने कमान संभाली। भारत का भ्रमण किया। देश में यात्राओं
का दौर शुरू हुआ। डाॅ. जोशी ने जहां एकात्मता यात्रा से भारत को जोड़ने का काम किया, वहीं गुजरात
के सोमनाथ से भगवान श्री रामजन्मभूमि अयोध्या तक की यात्रा पर स्वयं लालकृष्ण आडवाणी निकले।
जन-मानस में एकात्मता का विचार जन्म लेना शुरू हुआ। देश के हर कोने में सांस्कृतिक राष्टन्न्वाद
को समर्थन मिला। ध्ार्मनिरपेक्षता की कांग्रेसी नकाब को लोगों ने पंथनिरपेक्षता से परास्त किया।
सर्वध्ार्मसमभाव की ओर देश बढ़ने लगा। आरोप-प्रत्यारोप के दौर चले लेकिन भारतीय जनता पार्टी
का उत्तरोत्तर विस्तार होने लगा। देश में राजनैतिक परिवर्तन का यह अद्भुत दौर था। दक्षिण से लेकर
उत्तर तक, पूरब से लेकर पश्चिम तक भाजपा का जबरदस्त विस्तार हुआ। जहां हम 2 पर रुक गए,
वहां हम 85 पर पहुंचे। फिर निरंतर बढ़ते गए।

जहां हमें लोगों ने अलग करके रखा था, वहीं ध्ाीरे-ध्ाीरे राजनीति का ध्ा्रुवीकरण हुआ। एक तरफ
लोग कांग्रेस के साथ जुड़े तो दूसरी तरफ लोग भाजपा के साथ जुड़े। आडवाणीजी ने अटलजी को
भावी प्रध्ाानमंत्री के रूप में प्रस्तुत किया। लोगों में आशा की किरण जगी। विपक्ष के सबसे चहेते
नेता अटलजी को प्रध्ाानमंत्री बनने का सपना देश देख रहा था। भाजपा के सहयोगी दलों की संख्या
बढ़ती गई। 1 से 2, 2 से 5 और 5 से 24 दलों का साथ उसे मिला। इसी तरह 1984 में 2 थे तो
महज 12 साल बाद ही 1996 में 161 सीट पाकर भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनी और पहली बार अटलजी
के नेतृत्व में केंद्र में 13 दिन की सरकार बनी। अटलजी ने जोड़-तोड़ से सरकार बनाने में विश्वास नहीं जताया। सरकार गिर गई। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि एक नहीं, सौ-सौ सरकार न्योछावर कर दूंगा पर जोड़-तोड़ से प्रध्ाानमंत्री बनना मुझे स्वीकार्य नहीं होगा। 1998 में वह अवसर आया जब भाजपा ने 182 प्राप्त कर अटलजी के नेतृत्व में एनडीए सरकार बनाई। यह सरकार 13 महीने चली, फिर गिरी। 1999 में आम चुनाव हुए। भाजपा को फिर 182 सीटें मिलीं। अटलजी ने 24 दलों के नेता के रूप में 5 वर्ष तक कुशलतापूर्वक सरकार चलाई।
भारतीय राजनीति में गठबंध्ान का वह अद्भुत दौर था। संघर्ष की एक नई गाथा लिखी गई थी। कार्यकर्ताओं ने परिश्रम की पराकाष्ठा दिखाई थी। मध्यप्रदेश, राजस्थान, महाराष्टन्न्, गुजरात, छत्तीसगढ़, पंजाब, झारखण्ड, बिहार, उत्तर प्रदेश सहित अनेक राज्यों में भाजपा गठबंध्ान की सरकारें चलने लगी। देश में विकास ने र∂तार पकड़ी। परमाणु विस्फोट जैसे एतिहासिक कदम अटलजी के नेतृत्व में लिए गए। कारगिल के समर को पाकिस्तान के विरुह् भारत ने जीता। स्वर्णिम चतुर्भुज योजना,नदी जोड़ने का फैसला इन्हीं दिनों लिया गया। अंत्योदय को साकार करने का सपना पूरा हुआ। महंगाई पर लगाम लगी।
किसान क्रेडिट कार्ड और फसल बीमा योजना ने देश के किसानों को संबल प्रदान किया। एक नहीं अनेक ऐसे फैसले हुए जो भारतीय राजनीतिक इतिहास में स्वर्णाक्षरों में लिखा गया।
दक्षिण भारत में संगठन का विस्तार हुआ। दक्षिण भारत के जना कृष्णमूर्तिजी, बंगारूजी, वेंकैयाजी भाजपा के राष्टन्न्ीय अध्यक्ष बने। आडवाणीजी ने अध्यक्ष के नाते एक नहीं, अनेक यात्राएं निकालकर भारत को जोड़ने और भाजपा को बढ़ाने हेतु जबरदस्त प्रयास किए। वे वैचारिक योह्ा के रूप में उभरे।
गुजरात की भाजपा सरकार, जो नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में चल रही थी, ने भारत में अमिट छाप छोड़ी। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ ने विशिष्ट पहचान बनाई। राजस्थान के रेगिस्तान में वैचारिकता की फसलें बोई र्गइं, जो ध्ाीरे-ध्ाीरे लहलहाने लगीं।
देश में द्वितीय पंक्ति के नेताओं की कतार खड़ी हुई। अटलजी, आडवाणीजी और राजमाताजी ने पूरे देश में प्रत्येक राज्यों में नेताओं की ९ाृंखलाएं खड़ी कीं।
भाजपा ने सदैव अपने को जीवंत बनाए रखा। अच्छा काम करने के बाद भी 2004 के चुनाव में निराशा हाथ लगी। परंतु भाजपा के पग रुके नहीं, थके नहीं। पग बढ़ते गए। जहां-जहां भाजपा राज्यों में सरकार में थी, वहां-वहां की सरकार ने अपनी राष्टन्न्ीय छवि बनाई। ध्ाीरे-ध्ाीरे जनता में यह विश्वास होने लगा कि भाजपा को पुनः देश में लाना चाहिए।
2004 से 2014 तक 10 वर्षों तक भाजपा ने बहुत ध्ौर्य और ध्ार्म से काम किया। अपने विचारों से टस से मस नहीं हुई। ध्ाीरे-ध्ाीरे गुजरात एक माॅडल के रूप में उभरने लगा। गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी आशा की किरण बनकर उभरने लगे। यूपीए की सरकार गत वर्षों में देश को रसातल में ले गई। घनघोर निराशा के बीच से भारत गुजरने लगा। हर दिन घोटालों के पर्दाफाश का दिन हुआ करता था। भारत ने अपनी साख और ध्ााक दोनों खो दी थी। तत्कालीन प्रध्ाानमंत्री मनमोहन सिंह मौन थे, पर सोनियाजी और राहुलजी के इशारे पर कांग्रेसी और उनके सहयोगी दल देश लूट रहे थे। घोटालों के काले कारनामे जनता के सामने आने शुरू हुए। स्थिति इतनी भयावह हो गई कि तिरंगे की अस्मिता का सवाल खड़ा हो गया। संसद लजाने लगा। संविध्ाान सिहरने लगा। सेना और सीमाएं सिकुड़ती र्गइं। सेना का मनोबल टूटने
लगा। संसद की गरिमा तार-तार होने लगी। संवैध्ाानिक ढांचा चरमराना लगा। देश का प्रत्येक नागरिक छटपटाने लगा।
परिवर्तन की आहट भाजपा ने सुनी। गोवा में भाजपा कार्यकारिणी में ऐतिहासिक फैसला हुआ। राजनाथ सिंहजी की अध्यक्षता में नरेन्द्र मोदीजी के नेतृत्व में चुनाव लड़ने का फैसला किया गया। इन निर्णयों में भाजपा को कुछ खट्टे-मीठे अनुभव भी आए। लेकिन सबने मिल-जुलकर देश को सामने रखकर दल के फैसले को स्वीकार किया। देश परिवर्तन और नरेन्द्र मोदी का नेतृत्व चाह रहा था। फिर भाजपा ने फैसला लिया कि हमारे प्रध्ाानमंत्री के उम्मीदवार नरेंद्र मोदीजी होंगे। देश उमंग से झूम उठा। नेतृत्व के प्रति आस्था बढ़ी। परिवर्तन की इस आहट को राजनीतिक पुरोध्ाा नरेंद्र मोदीजी ने भी भांप लिया। उन्होंने अनथक परिश्रम शुरू किया। गुजरात को नापा ही था अब भारत को नापने में लग गए। 500 के करीब आम सभाएं कर पूरा संगठन जागृत कर दिया। देश में व्याप्त हताशा-निराशा दूर हुई। अपने अनथक परिश्रम से नरेंद्र मोदीजी ने विश्वास की टमटमाती लौ को अखंड ज्योति में बदल दिया। वे विरोध्ाियों पर टूट पड़े। इतना ही नहीं गुजरात
में उपजे जन-विश्वास का फैलाव भारत में होने लगा। भाजपा संगठन और भारत के नागरिकों ने गुजरात के नायक को भारत का महानायक बनाने में अग्रणी भूमिका निभाना शुरू कर दिया।
चुनाव समाप्त हुआ। 16 मई परिणाम का दिन था। भाजपा ने 30 वर्ष का रिकाॅर्ड तोड़ा। जनसंघ से लेकर भाजपा तक की यात्रा में भाजपा ने स्पष्ट बहुमत की सरकार कभी नहीं बनाई थी। सूर्यास्त होने तक चुनाव परिणाम 282 के आंकड़े तक पहुंच गया था। भारतीय राजनीतिक क्षितिज पर 282 सिर्फ आंकड़ा नहीं था, बल्कि एक विचारध्ाारा का बहुमतीय उदय हो रहा था। विनम्रता से भाजपा ने भारत के इस जनादेश को स्वीकार किया और कहा कि लोकतंत्र में ध्ौर्य ही ध्ार्म है और कर्म ही पूजनीय है।
संगठन की शक्ति से, नेतृत्व के बल से जनमानस के सपने को साकार किया जा सकता है। गत 35 वर्षों की यात्रा के पश्चात् आज हम देश में स्पष्ट बहुमत की सरकार चला रहे हैं, वहीं देश के अनेक राज्यों में हमारी गठबंध्ान की सरकारें चल रही हैं। देश से मिला यह अटूट विश्वास कायम रखने के लिए हमें आराम से नहीं बैठना होगा। सरकार के अच्छे फैसले को संगठन के माध्यम से गांव-गांव तक ले जाना होगा। अभी यात्रा अध्ाूरी है। पूरी होना बाकी है। सांस्कृतिक राष्टन्न्वाद की विचारध्ाारा से युक्त भारत के लिए निरंतर मेहनत करनी होगी। हमें अपने नेतृत्व पर, कुशल कार्यकर्ताओं पर, अपनी नीति पर और नीयत पर कोई शंका नहीं है। हमने राजनीतिक कार्य को ईश्वरीय कार्य माना है। अतः ईश्वर से प्रार्थना है कि वह हमें सबल बनाते हुए सफलता की ओर ले जाएं। „

गुरुवार, 16 अप्रैल 2015

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने नरेंद्र मोदी की तारीफ में लेख लिखा



               ओबामा ने की पीएम मोदी की तारीफ, बताया 'रिफॉर्मर-इन-चीफ'

ibnkhabar.com | Apr 16, 2015

वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ में लेख लिखा है। लेख में ओबामा ने मोदी की जी खोलकर तारीफ की है और उन्हें भारत का रिफॉर्मर-इन-चीफ करार दिया है। ओबामा ने ये लेख दुनिया के 100 सबसे प्रभावशाली शख्सियतों की लिस्ट निकालने के मौके पर लिखा है।

ओबामा ने लिखा है कि नरेंद्र मोदी बचपन में अपने परिवार के जीवकोपार्जन के लिए चाय बेचने में पिता का हाथ बंटाया करते थे। आज वो दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के मुखिया हैं और एक गरीब किशोर से प्रधानमंत्री बनने तक की उनकी कहानी उभरते भारत के जोश और क्षमताओं को प्रदर्शित करती है।
ओबामा ने लिखा है कि देश को आगे ले जाने के लिए दृढ़संकल्पित मोदी का मकसद गरीबी को कम करना, शिक्षा को बढ़ावा देना, महिलाओं और लड़कियों का सशक्तिकरण है। भारत की तरह, वो आधुनिकता और परंपरा के समागम हैं। जो योग के लिए समर्पित हैं और भारतीय नागरिकों से ट्विटर के जरिए जुड़ते है व डिजिटल इंडिया का सपना देखते हैं।

ओबामा ने लिखा है कि जब वे वॉशिंगटन आए तो नरेंद्र और मैं डॉक्टर मार्टिन लूथर किंग जूनियर के स्मारक पर गए थे। हमने गांधी और किंग की शिक्षाओं को याद किया कि कैसे हमारे देश में पृष्ठभूमि और आस्था की विविधता एक ताकत है जिसकी हमें रक्षा करनी है। भारत में एक अरब से भी ज्यादा भारतीय साथ-साथ रह रहे हैं और आगे बढ़ रहे हैं, ये पूरी दुनिया के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल हो सकता है।

भाजपा : कोटा शहर में सक्रीय सदस्यता अभियान प्रारम्भ




कोटा शहर में सक्रीय सदस्यता अभियान  प्रारम्भ
वरिष्ठ कार्यकर्ताओं को युवा कार्यकर्ता सक्रीय सदस्य बनाने में सहयोग करें - पंचारिया

कोटा 15 अप्रेल । भाजपा के प्रदेश महामंत्री, सदस्यता अभियान के प्रदेश संयोजक एवं राज्यसभा सांसद नारायण पंचारिया ने कोटा सर्किट हाउस में सायं 4 बजे, कोटा शहर जिला के सदस्यता अभियान के जिला एवं मण्डलों के सदस्या प्रमुखों की बैठक ली तथा निर्देश दिये कि भाजपा के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं को सक्रीय सदस्य बनाने में युवा कार्यकर्ता सहयोग करें। उन्होने कहा नई तकनीक से हो रही सदस्यता में अनेकों वरिष्ठ कार्यकर्ता 100 साधारण सदस्य नहीं बना पाये हैं। किन्तु पार्टी के संविधान के अनुसार अब 100 साधारण सदस्य बनाये बिना सक्रीय सदस्य बन नहीं सकता । उन्होने कहा 30 अप्रेल साधारण सदस्यता अभियान की अंतिम तिथि है इससे पहले - पहले सभी को सदस्य बन जाना चाहिऐ।

उन्होने कहा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह जी ने बहुत सोच समझ कर प्रमाणित पद्यती से पार्टी हित में सदस्यता की नई विधि को अपनाया और इससे हम अब चीन की कम्युनिष्ट पार्टी के विश्व रिकार्ड को तोड़ कर, उससे आगे निकल गये और विश्व की सबसे बडी संख्यावाली राजनैतिक पार्टी बन गये हैं।

पंचारिया ने कहा भाजपा के सभी वरिष्ठ कार्यकर्ताओं को सक्रीय सदस्य बनानें में युवा कार्यकर्ता सहयोग करें और जिन पर भी सदस्यता का फार्म हैं वे 30 अप्रेल की जैसा भी है वैसा जमा जरूर करवाये। अधूरा है तो भी उसे जमा करवाया जाना आवश्यक है।

उन्होने कहा प्रदेश में भाजपा का सक्रीय सदस्यता अभियान प्रारम्भ हो गया है। जिन - जिन कार्यकर्ताओं ने 100 - 100 सदस्य बना लिये हैं। उन्हे दो - दो सौ रूपये की रसीद देकर सक्रीय सदस्य बनाया जायेगा। इसमें सौ रूपये पार्टी की सदस्यता के और सौ रूपये पार्टी की पत्रिका मरू कमल दर्पण के हैं।

जिला अध्यक्ष हेमन्त विजयवर्गीय ने बताया कि भाजपा कोटा शहर ने 1500 सक्रीय सदस्य बनानें का लक्ष्य रखा है। इससे पूर्व कोटा शहर जिले में लगभग 800 सक्रीय सदस्य थे। अभी तक करीब - करीब 850 से अधिक कार्यकर्ताओं ने सक्रीय सदस्य बन जानें की पात्रता प्राप्त करली है।


सदस्यता अभियान प्रभारी अमित शर्मा ने कोटा में का सक्रीय सदस्यता अभियान शीघ्र ही उत्सव पूर्वक प्रारम्भ करने की घोषणा की है।  बैठक में वरिष्ठ भाजपा नेता अरविन्द सिसोदिया ने धन्यवाद दिया ।

 बैठक में युवा मोर्चा के सदस्यता अभियान जिला संयोजक हितेन्द्रसिंह हाड़ा ने भरे हुये सदस्यता अभियान फार्म पंचारियाजी को दिये।

बैठक में वरिष्ठ भाजपानेता अरविन्द सिसोदिया, सदस्यता अभियान संयोजक अमित शर्मा, सह संयोजक अमित दाधीच , युवा मोर्चा के सदस्यता अभियान जिला संयोजक हितेन्द्रसिंह हाड़ा, मण्डल प्रवासी दिनेश सोनी मण्डल अध्यक्ष बृजेश शर्मा, प्रग्नेश खत्री, हरीहर गौतम, संजय गर्ग,चन्द्रप्रकाश नागर, उमेश शर्मा, शिवनारायण शर्मा मण्डल सदस्यता अभियान संयोजक वीरेन्द्र सिंह भानावत, सह संयोजक शिवनारायण शर्मा एवं सह संयोजक अवधेश अजमेरा आदी ने विचार व्यक्त किये।


भवदीय
अरविन्द सिसोदिया,कोटा
9414180151


1 मई, 2015 से प्रारंभ होगा भाजपा का महासंपर्क अभियान




भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह द्वारा दिए गए भाषण के मुख्य अंश
दस करोड़ सदस्यों से संपर्क करेंगे भाजपा कार्यकर्ता
01 मई, 2015 से प्रारंभ होगा भाजपा का महासंपर्क अभियान
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दस सदस्यों से मिलकर बनी पार्टी आज 10 करोड़ सदस्यों की पार्टी बन गई है: अमित शाह
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भाजपा ही वह पार्टी है, जिसने पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र को बनाए रखा है: अमित शाह
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संगठन पर्व का यह वर्ष भाजपा के लिए महत्वपूर्ण वर्ष: अमित शाह
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सदस्यता अभियान के माध्यम से भाजपा का काम सर्वस्पर्शी और सर्वसमावेशक हुआ है: अमित शाह
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सबसे लोकप्रिय नेतृत्व हमारे पास है और सबसे लोकप्रिय सरकार हमारे पास है: अमित शाह
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संपर्क और संवाद संगठन के प्राण: अमित शाह
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विचारधारा के परिचय के लिए ही है हमारा महासंपर्क अभियान: अमित शाह
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सरकार के अच्छे कार्यों को जनता तक पहुंचाना और भ्रांतियों को दूर करने का कार्य भी करेगा हमारा महासंपर्क अभियान: अमित शाह

    मित्रों, सदस्यता अभियान का काम अभी रूका नहीं है और पार्टी ने महासंपर्क सदस्यता अभियान की शुरूआत कर दी है। अलग से टीम बनाकर थोड़ा प्रयास किया है कि उन्हीं लोगों पर बोझ ना आए जिन्होंने सदस्यता अभियान में इतना काम किया है। मगर पार्टी में कहीं न कहीं जिम्मेदारी तो आती ही है।
    एक के बाद एक तीन अभियान आने वाले है। सदस्यता अभियान अब समाप्ती की ओर है। बाद में महासंपर्क अभियान 3 मई से शुरू होगा। और 1 अगस्त से प्रशिक्षण शुरू होगा और उसके ठीक बाद संगठनात्मक चुनाव शुरू होंगे। ये चारों प्रक्रियाएं हमें समाप्त करनी है क्योंकि ये हमारे संगठनात्मक चुनाव का हिस्सा है।
    सबसे पहले यहां उपस्थित सभी कार्यकर्ताओं को मैं हृदय से बधाई देना चाहता हूं कि सदस्यता अभियान में देशभर के कार्यकर्ताओं ने आप सबके नेतृत्व में जो अथक परिश्रम किया है उसके कारण 10 सदस्यों से जनसंघ से जो हमारी जो यात्रा शुरू हुई थी आज हमारा वो करीब-करीब 10 करोड़ लोगों का परिवार बन चुका है। इसके लिए देशभर के कार्यकर्ता अभिनंदन के अधिकारी है।
    मित्रों, संगठन पर्व का यह वर्ष भाजपा के लिए बहुत महत्वपूर्ण वर्ष है। क्योंकि जिस देश में 1600 पार्टियों का जमघट है उसमें सिर्फ भाजपा ही एक ऐसी पार्टी है, जिसने पार्टी का आंतरिक लोकतंत्र को बनाए रखा है। हर दो साल में नई सदस्यता और हर 6 साल में सदस्यता का नवीनीकरण और हर दो साल में संगठन के चुनाव। यह चुनाव संगठन की प्रक्रिया का हिस्सा है।
    सामान्य कार्यकर्ताओं को संगठन का प्लेटफार्म देकर राजनीतिक क्षेत्र में बड़े योगदान देने वाले एक बड़े नेता के रूप में परिवर्तित करने की जो प्रक्रिया है वह संगठन का चुनाव है। देशभर के भाजपा के नेताओं का बैकग्राउंड देख लीजिए कहीं न कहीं उन्होंने अपनी राजनीतिक पारी की शुरूआत जिले, तहसील और बूथ से की है। मेरे जैसे कार्यकर्ता ने बूथ से शुरूआत की है और बूथ से लेकर अध्यक्ष तक पहुंचने की स्वतंत्रता और व्यवस्था यदि कोई एक पार्टी में है तो निश्चित रूप से गौरव के साथ कह सकते हैं कि वह भाजपा में है और किसी अन्य पार्टी में नहीं। और हम सभी की जिम्मेदारी है कि 50 वर्षों से इस व्यवस्था को जिन्होंने बनाकर, संजोकर रखा है और जिन्होंने आगे बढ़ाया है, हम इसको और मजबूत करके आगे बढ़ाये और देश के सामान्य जन को भाजपा के माध्यम से देश की सेवा करने का मौका दे, और इसीलिए यह संगठन पर्व आयोजित किए जाते हैं।
    इस बार संगठन पर्व को हमने एक नए स्वरूप के साथ शुरू करने का प्रयास किया है। आमतौर पर कार्यकर्ता सदस्य बनाने के लिए जाता है पर कार्यकर्ता को भी मालूम नहीं होता कि भाजपा के साथ कौन जुड़ना चाहता है। इस बार हमने एक नई प्रणाली को स्वीकार किया, जिसके माध्यम से मिस्ड काॅल देकर पार्टी का सदस्य बनाना था। और देशभर के भाजपा के शुभेच्छकों को आह्वान किया कि आपके पास कार्यकर्ता पहंुच पाए या न पहुंच पाए आप एक मिस्ड काॅल देकर भाजपा का सदस्य बनने का गौरव हासिल करें।
    17 करोड़ वोट प्राप्त करने वाली पार्टी ने 10 करोड़ के करीब लोगों को सदस्य बनाने का गौरव हासिल किया है । इसमें हमने जो नई प्रणाली शुरू की उसका बहुत योगदान रहा। हम कह सकते है कि सदस्यता अभियान के माध्यम से भाजपा का काम सर्वस्पर्शी और सर्वसमावेशक हुआ है। आज इसी प्रयास के फलस्वरूप कामरूप से लेकर गुजरात तक और कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक एक सच्चे अर्थ में अखिल भारतीय स्वरूप धारण कर 10 करोड़ का एक बड़ा परिवार बनने मे सफल हुआ है।
    मगर हमने जब यह प्रक्रिया शुरू की तब हमारे जैसे कई कार्यकर्ताओं और कई वरिष्ठ कार्यकर्ता, जिन्होंने पार्टी का वर्षों से मार्गदर्शन किया है के मन में यह चिंता थी कि यह एक तकनीकी प्रक्रिया है, जिसमें संपर्क और संवाद नहीं है और संपर्क व संवाद के बिना संगठन नहीं चलता। तब हमने कहा था कि इससे आगे भी एक प्रक्रिया है, जिसमें संपर्क भी है और संवाद भी होगा। जनसंघ से लेकर आज तक हमारी पार्टी की जो नींव मजबूत हुई है उसका कारण संपर्क और संवाद ही रहा है। यदि संपर्क को हम गंवा देते हंै तो संगठन का प्राण चला जाता है। सदस्यता अभियान की जो मैक्निक-इलेक्ट्राॅनिक व्यवस्था थी जिसमें संपर्क नहीं था उसकी क्षति-पूर्ति के लिए हमने संपर्क अभियान निश्चित किया।
    आज मिस्ड काॅल के द्वारा जो सदस्य बना है वह पार्टी का शुभेच्छु है न की कार्यकर्ता। इन्हें शुभेच्छु से कार्यकर्ता बनाने की यात्रा संपर्क अभियान और बाद में प्रशिक्षण अभियान से शुरू होने वाला है। तभी जाकर लंबे समय तक विचारधारा की तत्वनिष्ठा के आधार पर योगदान देने वाले कार्यकर्ता निर्मित कर पाएंगे। आज भाजपा विश्व की सबसे बड़ी पार्टी बन गई है, देश में सबसे ज्यादा सांसद और विधायक भाजपा के हैं, देश में सबसे ज्यादा सरकारें हमारी हैं और देश में सबसे अच्छा काम करने वाली सरकारें देने का गौरव भाजपा को प्राप्त है और इसका एकमात्र कारण है कि हम विचारधारा के आधार पर चलने वाले हैं। इस विचारधारा के परिचय के लिए हमारा संपर्क अभियान है। जो शुभेच्छक हमारा सदस्य बना है उन्हें हमारी विचारधारा का, पार्टी का और हमारी सरकारें कैसे चलती है व किस लिए चलती है, इसका परिचय देना है।
    संपर्क अभियान के तहत जब हमारे कार्यकर्ता संपर्क के लिए जाएंगे तो उनके हाथ में तीन चीजें होंगी - एक पार्टी की संपूर्ण यात्रा का सिंहावलोकन होगा, जिसमें श्री श्याम प्रसाद मुखर्जी से लेकर नरेन्द्र मोदी तक पार्टी की यात्रा इसको चार पेज में संक्षिप्त रूप से समाहित करके आपको देंगे। ये पत्रक लेकर आपको कार्यकर्ता के पास जाना है। उसको बताना है कि पार्टी की यात्रा कैसी रही बहुत रोमांचक और संघर्षपूर्ण यात्रा भारतीय जनता पार्टी की रही है। कई कार्यकर्ताओं ने अपनी जान का बलिदान दिया है। हमारे दो राष्ट्रीय अध्यक्ष शहीद हुए है। केरल बंगाल यहां तक कि तमिलनाडु और देश के कई प्रांतों में हमारे कार्यकर्ता काम करते-करते इस विचार के लिए शहीद हुए है। तब जाकर पार्टी और पार्टी के कार्यकर्ताओं को सम्मान मिला है उनकी बलिदान की नींव पर पार्टी बनी है।
    सत्ता प्राप्ति के लिए इस पार्टी के कार्यकर्ताओं ने काम नहीं किया है। पार्टी के कार्यकर्ताओं ने देश की विकास यात्रा सही रास्ते पर हो, देश की आजादी के बाद का रास्ता सही हो इसकी माटी की सुंगध के आधार पर देश की नीतियों का निर्माण हो और इस देश की नीति का निर्माण करने वाले लोग इस देश की संस्कृति और परंपरा से जुड़े हो इसके लिए संघर्ष किया था।
    आज नरेन्द्र भाई के नेतृत्व में जब सरकार चल रही है तब देश हमारी विचारधारा के रास्ते पर प्रशस्त होकर विश्व में अपना सम्मानजनक स्थान बनाने में इन 10 महीनों में ही सफल हुआ है। इन 10 महिनों में दुनिया बड़ी आशा के साथ इस देश को देख रही है। इस बात को लेकर हमें नए कार्यकर्ता के पास जाना है।
    उसके साथ में एक दूसरा पत्रक होगा उस पत्रक के अंदर इस पार्टी के सिद्धांतों का परिचय होगा। पार्टी क्यों बनी ? बनाने का क्या कारण था ? किस सिद्धांत के आधार पर पार्टी चलना चाहती है ? एकात्म मानववाद क्या है ? अंत्योदय क्या है ? पार्टी की सरकारें बनती है। हम सत्ता में आते है। चाहे तहसील पंचायत हो, जिला पंचायत हो, नगरपालिका हो प्रांत की सरकार हो या केन्द्र की सरकार हो। अगर हम सत्ता में आते है तो किस विचारधारा के साथ शासन चलाते है। हम इस देश में कल्याणकारी राज्य की स्थापना करना चाहते है। विकास की इस प्रक्रिया में अंतिम पंक्ति पर खड़े व्यक्ति को हम प्रथम पंक्ति में लाना ही अंत्योदय का सिद्धांत है जिस पर हमारी सरकार काम कर रही है।
    इन सिद्धांतों का परिचय कराने के लिए भी एक सिद्धांतों की पुस्तिका हमारे पास होगी। साथ ही राज्य सरकार और केन्द्र सरकार के अच्छे कार्यों की सूची भी इसके साथ होगी। ये तीनों कार्य लेकर हम नए कार्यकर्ता के पास जाएंगे। उसको ये तीनों चीजें अध्ययन करने का आग्रह करेंगे और बातचीत के माध्यम से भी उसे समझाने का प्रयास करेंगे तथा उसका एक पूर्ण परिचय लेने का प्रयास करेंगे। जो कार्यकर्ता बन रहा है उसका पूर्ण परिचय पार्टी के पास होगा।
    10 करोड़ कार्यकर्ताओं का विवरण डीजीटाइजेशन किया जाएगा। गांव-गांव, गली-गली और घर-घर में संपर्क अभियान चले तभी जाकर इसके तार्किक लक्ष्य को प्राप्त कर सकेंगे। डीजीटल डाटा बनने से पार्टी को एक नई मजबूती मिलेगी और देश को एक नई दिशा मिलेगी। यह संपर्क अभियान एक तरह का समुद्र मंथन है, जिसके जरिए पार्टी को एक नए मुकाम तक पहुंचाना है।
    15 लाख नए-पुराने कार्यकर्ताओं को अलग कर देश का सबसे बड़ा राजनैतिक प्रशिक्षण अभियान चलाया जाएगा, जो 1 अगस्त से आरंभ होगा। और जब यह प्रक्रिया पूरी होगी और अक्टूबर में जब नया संगठन चुनाव होंगे तो उस समय तक हमारे पार्टी कार्यालय के पास 15 लाख नए और मंजे हुए कार्यकर्ताओं की सूची होगी और ये कार्यकर्ता पार्टी की नींव बनेगें और जो 10 करोड़ सदस्य हमारे साथ जुडे़ हैं वे हमारी विचारधारा की यात्रा को संपन्न करेंगे।
    श्री मोदी जी के नेतृत्व में देश नई प्रगति कर रहा है। हमारी सरकार और हमारे काम के खिलाफ भ्रांतियां फैलाने की साजिश हो रही है। हम महासंपर्क अभियान के माध्यम से इन भ्रांतियों को दूर करके रहेंगे। समाज के बीच सरकार के कार्यों के खिलाफ फैलाई जा रही भ्रांतियों का जवाब भी हमारा यह महासंपर्क अभियान होगा।
    1950 से लेकर 1914 तक पार्टी कई उतार-चढ़ाव के बाद आज इस मुकाम पर पहुंची है जिसका एकमात्र कारण संगठन और विचारधारा है। जिस प्रकार संगठन पर्व को हमने सफल बनाया है, उसी प्रकार महासंपर्क अभियान को सफल बनाना है। हम इलेक्ट्राॅनिक तरीके से बने सदस्यों की क्राॅस चैकिंग भी करेंगे।
    मैं और माननीय श्री रामलाल जी श्री मोदी जी से संपर्क कर इस महासंपर्क अभियान की शुरूआत करेंगे। इसके बाद इस अभियान को देश भर में पहुंचाएंगे। इससे संबंधित जो कार्यशाला राज्य, जिला और मंडल स्तर पर हो, वह समयबद्ध तरीके से हो इसका ध्यान रखा जाएगा और महासंपर्क अभियान को सदस्यता अभियान की तरह सफल बनाया जाएगा।
    सफल सदस्यता अभियान के लिए आप सभी कार्यकर्ताओं के माध्यम से देश के करोड़ों कार्यकर्ताओं को लाख-लाख अभिनंदन करता हूं।

बुधवार, 15 अप्रैल 2015

भाजपा कोटा शहर : जनसंघ कालिक पांच कार्यकर्ताओ का सम्मान किया

            
अरविन्द सिसोदिया
9414180151/ 9509559131



                       
                                               जनसंघ कालिक पांच कार्यकर्ताओ का सम्मान किया
                                  अमितशाह अमरूदों के बाग जयपुर मे सम्बोधित करेगे 25 अप्रैल को
                                     भाजपा कोटा शहर की जिला बैठक एवं सम्मान समारोह सम्पन्न
                                     पार्टी कार्य की कर्मठता ही कार्यकर्ता की पहचान - पंचारिया
                                                       पार्टी के विस्तार में जुटजायें - बिरला

जनसंघ कालिक कार्यकर्ता वैद्य देवीशंकर शर्मा, एडवोकेट बजरंगलाल वर्मा, एडवोकेट प्रेमचन्द जैन दमदमा वाले, व्यवासाही चांदमल विजय दानमलजी का आहता वाले और नारायणलाल खण्डेलवाल रामपुरा वालों को सम्मानित किया गया । सम्मान में माल्यापर्ण कर साफा बंधवाया गया, शाल उढ़ाया गया, श्रीफल भेंट किया गया और एक एक अभिनंदन पत्र दे कर सम्मान किया गया ।

कोटा 14 अप्रैल। हमारी पार्टी आज की नहीं हम 21 अक्टूबर 1951 से राजनैतिक यात्रारत हैं। हमारा बहुत गहरा अनुभव है और लम्बा सफर है। कार्यकर्ताओं के घोर परिश्रम से हम 2 से प्रारम्भ कर 282 तक पहुंच गये है। भाजपा में कार्यकर्ता की पहचान ही उसका कर्मठ होना है। उन्होने कहा आज हम अपने जनसंघ कालिक कार्यकर्ताओं का सम्मान करके स्वंय सम्मानित हो रहे हैं। युवाकार्यकर्ताओं को इनके कार्यकौशल एवं संर्घष से प्रेरणा लेना चाहियें। 

उन्होने बताया कि डॉ0 श्यामाप्रसाद मुखर्जी, पं0 दीनदयाल उपाध्याय, अटलबिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी से प्रारम्भ यह रथ निरंतर आगे बड़ता हुआ, विश्व की नम्बर एक पार्टी के रूप में भारतमाता को परम वैभव के सिंेहासन पर बिठानें के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। जो अमरीका बीजा नहीं देता था वह आज पलक पावडे़ बिछाये रहता है। यह सब भाजपा के कर्मठ कार्यकर्ताओं और उनके द्वारा अर्जित जन विश्वास से हुआ है। कार्यकर्ता स्वाभिन के साथ जन जन के मध्य जाये पूरे विश्व में भारत और भाजपा का ढंका बज रहा है।

कार्यक्रम के मध्य में जनसंघ कालिक कार्यकर्ता वैद्य देवीशंकर शर्मा, एडवोकेट बजरंगलाल वर्मा, एडवोकेट प्रेमचन्द जैन दमदमा वाले, व्यवासाही चांदमल विजय दानमलजी का आहता वाले और नारायणलाल खण्डेलवाल रामपुरा वालों को सम्मानित किया गया । सम्मान में माल्यापर्ण कर साफा बंधवाया गया, शाल उढ़ाया गया, श्रीफल भेंट किया गया और एक एक अभिनंदन पत्र दिया गया है। संचालन कर रहे भाजपा के वरिष्ठनेता अरविन्द सिसोदिया ने बताया कि ये सभी जनसंघ के समय से सक्रीय रहते हुये अभी तक पार्टी के बूथों को संभालने वाले कार्यकर्ता हैं। अनकेां बार जेल यात्रायें की निरंतर पार्टी के आन्दोलनों में भाग लेने वाले हैं।


कोटा के सांसद ओम बिरला ने कहा हमें अपनी पार्टी को देश के कोने - कोने में और सभी वर्गो में पहुंचाना है। सदस्यता अभियान के द्वारा पार्टी का विस्तार अभियान चल रहा है। इस महती कार्य में सभी को जुटना चाहिये, जो अभी तक सदस्य नहीं बनें हैं उन्हे तुरंत बन जाना चाहियें। कोटा में जनसंघ का कार्य इतना मजबूत था कि इसे गढ़ कहा जाता था। हम इसे गढ़ बनाने वाले कार्यकर्ताओं को सम्मानित करके स्वंय गौरवान्वित हैं।

भाजपा जिला अध्यक्ष हेमन्त विजयवर्गीय ने कहा भाजपा के स्थापना दिवस पर किन्ही कारणों से सम्मान समारोह एवं पार्टी को विश्व में नम्बर 1 बनने का उत्सव स्थगित हो गया था। उसे इस कार्यक्रम के द्वारा सम्पन्न गया है। साथ ही 30 अप्रेल को समाप्त हो रहे सदस्यता अभियान एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की जयपुर में 25 अप्रेल को अमरूदों के बाग में होने वाले कार्यकर्ता सम्मेलन के लिये भी यह बैठक है।

विधायक संदीप शर्मा ने कहा पार्टी का कार्य जितना मजबूत होता है, पार्टी की नींव उतनी मजबूत होती है। कोटा में हमारी पीढी को मजबूत नींव देने वाले वरिष्ठ कार्यकर्ताओं का सम्मान कर पार्टी अभिभूत हैं। महापौर महेश विजय ने कहा वरिष्ठ जनसंघ कालिक कार्यकर्ताओं के सम्मान से आगे की पीढ़ी को प्रेरणा मिलेगी।

बैठक में उपमहापौर सुनीता व्यास, पूर्व महापौर सुमन श्रृंगी , पूर्व जिला अध्यक्ष मनमोहन जोशी, श्याम शर्मा मंचस्थ थे। सदस्यता अभियान के जिला संयोजक अमित शर्मा ने वृत प्रस्तुत किया । कार्यक्रम का संचालन अरविन्द सिसोदिया ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन रामबाबू सोनी ने किया।


जटाशंकर शर्मा, रविन्द्र सिंह निर्भय, अशोक चौधरी, किसन पाठक, अमित दाधीच, पुरूषोतम अजमेरा, नेता खण्डेलवाल, अलका मेवाडा, कृष्णा खण्डेलवाल, रविन्द्रसिंह हाडा, हितेन्द्रसिंह हाडा, सुयश गौतम, सचिन मिश्रा, मनीश चौधरी, रिरिराज गौतम, चन्द्रशेखर नरवाल, केवलकृष्ण बांगड, श्याम गौड,गिरिराज गौतम,अर्थपाल सिंह,सुनील शर्मा,गिरिश भार्गव, गोपाल सोनी




सम्मानित किये गए पांचो वरिष्ठ कार्यकर्ताओं का जीवन परिचय ............

01 - वैद्य देवीशंकर जी शर्मा
 
जन्म तिथि - 5/3/1919  आप आयुर्वेद रत्न हैं ।
आपका जुड़ाव 1945 में संघ से हुआ, संघ की प्रथम शाखा में आप स्वंय सेवक रहे हैं। जनसंघ में अनेकों स्तरों पर कार्य करते रहे। भाजपा से भी लगातार जुड़ाव रहा । कोटा नगर में डॉ0 दयाकृष्ण विजय एवं ईश्वरलाल साहू के साथ आप संयुक्त मंत्री पद पर रहे। जनसंघ के कोटा में हुऐ राष्ट्रीय अधिवेशन में भोजन प्रमुख का भार आपने ही संभाला था। आपने आपातकाल में लोकतंत्र रक्षा के लिये महत्वपूर्ण भूमिका निभाई हे। आपका जीवन कार्यकर्ता के रूप में अनुकरणीय है।

02 - बजरंगलाल जी वर्मा एडवोकेट





 जन्म तिथि - 8/10/1939  आप अधिवक्ता  हैं ।
आपका जुड़ाव 1952 में संघ से हुआ, संघ शिक्षावर्ग में द्वितीय वर्ष किया हे। 1954 से जनसंघ में अनेकों स्तरों पर कार्य करते रहे। कश्मीर बचाओ आंदोलन में आप दिल्ली में गिरिफतार किये गये, गौ हत्या विरोधी आंदोलन में भी सक्रीय भेमिका निभाई। आपने केशोरायपाटन में जनसंघ के टिकिट पर पार्षद का चुनाव लडा जीते और नेताप्रतिपक्ष भी रहे। जनसंघ के प्रांतीय प्रतिनिधि भी आप रहे। आपातकाल में आप ने भूमिगत रहते हुये लोकतंत्र रक्षा के जिले प्रभावी कार्य किया। भाजपा में भी लगातार जुड़ाव रहा । वरिष्ठ लोक अभियोजक एवं अंशकालीन व्याख्याता भी रहे हें। आपका जीवन कार्यकर्ता के रूप में अनुकरणीय है।

03 - प्रेमचंदजी जैन ( अग्रवाल) एडवोकेट, दमदमावाले




जन्म तिथि - 12/05/1936  आप अधिवक्ता  हैं ।
आपका जुड़ाव 1950 में संघ से हुआ। 1952 से जनसंघ की स्थापना के साथ ही आप जनसंघ से जुड़ गये। अनेकों स्तरों पर कार्य करते रहे, जेल यात्रा भी की। आपने कोटा नगर परिषद में जनसंघ के टिकिट पर पार्षद का चुनाव लड़ा जीते और प्रखर पार्षद की भेमिका निभाई।  जनसंघ के प्रांतीय अधिवेशनों में आप शामिल होते रहे।  आपातकाल में आप ने भूमिगत रहते हुये लोकतंत्र रक्षा के जिले प्रभावी कार्य किया। भाजपा की स्थापना के पश्चात मुम्बई में हुये प्रथम अधिवेशन में भी आपने भाग लिया । अभी भी आप मतदान के दिन बूथ पर पूरे दिन बैठ कर पार्टी के कार्य को अंजाम देते हैं। आपका जीवन कार्यकर्ता के रूप में अनुकरणीय है।


04 - चांदमलजी विजय  





जन्म तिथि - 20/02/1936 आप व्यवसायी  हैं ।
आपका जुड़ाव 1952 में संघ से हुआ। 1955 में आप जनसंघ से जुड़ गये। अनेकों स्तरों पर कार्य करते रहे। आपने कोटा नगर परिषद में जनसंघ के टिकिट पर पार्षद का चुनाव लड़ा जीते और दाऊदयालजी जोशी के साथ प्रभावी भूमिका निभाई।  जनसंघ के प्रांतीय अधिवेशनों में आप शामिल होते रहे।  आपातकाल में लोकतंत्र रक्षा के लिये जेल गये। कम से कम पांचवार आप पार्टी के जनसंघर्षों के कारण जेल में बंदी रहे।  भाजपा की स्थापना के पश्चात मुम्बई में हुये प्रथम अधिवेशन में भी आपने भाग लिया । अभी भी आप मतदान के दिन बूथ पर पूरे दिन बैठ कर पार्टी के कार्य को अंजाम देते हैं।
हाल ही में आपने अपनी विधवा पुत्र वधु का विवाह पिता बन करवाया जो कि समाज को एक नई दिशा देता है। आपका जीवन कार्यकर्ता के रूप में अनुकरणीय है।

05 नारायणलाल जी खण्डेलवाल



जन्म तिथि - 13/12/1944 आप व्यवसायी  हैं ।
आप 1955 में जनसंघ से जुड़ गये। अनेकों स्तरों पर कार्य करते रहे। प्रभावी संगठन भूमिका निभाई, जिला मंत्री भी रहे।  जनसंघ के प्रांतीय अधिवेशनों में आप शामिल होते रहे।  आपातकाल में लोकतंत्र रक्षा के लिये दो बार आप जेल गये। आप पार्टी के सभी जनसंघर्षों में सम्मिलित हुये हें और जेल में बंदी रहे है।  भाजपा की स्थापना के पश्चात मुम्बई में हुये प्रथम अधिवेशन में भी आपने भाग लिया । आज भी कोई व्यक्ति नारायणजी के सामने पार्टी की आलोचना नहीं कर सकता हैं। आपका जीवन कार्यकर्ता के रूप में अनुकरणीय है।