शनिवार, 30 मई 2015

केदारनाथ में लोग मरते रहे, और अधिकारी उड़ा रहे थे चिकन-मटन...





उत्तराखंड त्रासदी भ्रष्टाचार: राज्य सरकार ने दिए जांच के आदेश
aajtak.in [Edited by: चंदन कुमार] | नई दिल्ली, 30 मई 2015
साल 2013 में केदारनाथ में आई आपदा में एक ओर जहां हजारों लोग अपनी जान बचाने के लिए जूझ रहे थे, वहीं राहत और बचाव में लगे अधिकारी भ्रष्टाचार के जरिये अपनी काली कमाई में मशगूल थे. एक आरटीआई आवेदन के जरिए यह खुलासा हुआ है. ऐसे संवेदनशील मामलों में भी भ्रष्टाचार की इस घटना से घिरी मुख्यमंत्री हरीश रावत की सरकार ने मुख्य सचिव को जांच के आदेश दिए हैं.
केदारनाथ आपदा के बाद तब के सीएम विजय बहुगुणा को अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी थी. 200 से अधिक पेजों के आरटीआई रिकॉर्ड से यह बात सामने आई है कि आपदा के बाद राहत और बचाव के दौरान एक ओर जहां लोग खुले आसमान के नीचे भूख से परेशान थे, वहीं बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित रूद्रप्रयाग जिले में अधिकारियों ने रोजाना 900 रुपये प्रति व्यक्ति सिर्फ खाने पर खर्च किया था.

आरटीआई से पता चला है कि लोगों को राहत पहुंचाने के लिए ड्यूटी पर तैनात अधिकारी चिकन-मटन और दूध-घी उड़ा रहे थे. इतना ही नहीं अधिकारियों ने इस दौरान होटल के जो कमरे किराए पर लिए थे, उनकी कीमत साढ़े 7 हजार रुपये दिखाई थी. आधे किलो दूध की कीमत 195 रुपये तक दिखाई गई थी.

उत्तराखंड के भीषण प्राकृतिक आपदा की चपेट में रहने के दौरान हुई इन कथित अनियमितताओं का संज्ञान लेते हुए राज्य के सूचना आयुक्त अनिल शर्मा ने सीबीआई जांच की सिफारिश की है. शिकायतकर्ता और नेशनल एक्शन फोरम फॉर सोशल जस्टिस के सदस्य भूपेंद्र कुमार की शिकायत पर सुनवाई करते हुए जारी 12 पन्नों के आदेश में शर्मा ने आरटीआई आवेदनों के जवाब में विभिन्न जिलों द्वारा उपलब्ध कराए गए बिलों का संज्ञान लिया है.
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केदारनाथ में लोग मरते रहे, और अधिकारी मौज करते रहे!
May 30, 2015 आईबीएन-7

नई दिल्ली। केदारनाथ त्रासदी के बाद चलाए गए राहत कार्यों में बड़े घोटाले का खुलासा एक आरटीआई से हुआ है। ये सच सामने आया है कि हादसे के बाद यहां ड्यूटी पर लगाए गए एक-एक अधिकारी एक दिन में 900 रुपए का खाना खा गए, दिखाए गए खर्च के मुताबिक कोई दिन ऐसा नहीं था जब अधिकारियों ने चिकन- मटन खाने का बिल ना लगाया हो। होटलों में रहने का बिल एक दिन का 7-7 हजार रुपए का है।
केदारनाथ में जून 2013 में आई आपदा अफसरों के लिए कमाई का जरिया बन गई। लोग मरते रहे, मदद के लिए चीखते रहे लेकिन अफसर मौज करते रहे। लोग एक टुकड़ा रोटी और बूंद- बूंद पानी के लिए तरस रहे थे। तमाम लोग भूखे मर गए, किसी के सिर पर छत नहीं थी तो कोई ठंड से मर गया। लेकिन मदद के लिए भेजे गए अफसर इस त्रासदी को पिकनिक समझ बैठे थे।

अधिकारियों को लग रहा था कि मौज मस्ती का वक्त आ गया है और हुआ भी यही। जिस आपदा के लिए अफसरों को पैसा दिया गया वो अफसर इस पैसे से नॉनवेज खा रहे थे। होटलों में आराम फरमा रहे थे। हैरानी की बात ये है कि जिस पहाड़ पर स्कूटर से चढ़ना तो दूर की बात सोचना भी नामुमकिन है उस पहाड़ पर अधिकारी स्कूटर से लोगों को राहत पहुंचा रहे थे। जी हां यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है आरटीआई के जरिए।
आरटीआई से ये भी खुलासा हुआ है कि राहत कार्यों में इस्तेमाल एक हेलीकॉप्टर का बिल 90 लाख का है और सबसे ज्यादा अचंभे वाली बात है कि डीजल के जो बिल दिए गए उनमें दर्ज वाहनों के नंबर, स्कूटर के नंबर निकले जबकि स्कूटरों में डीजल भरवाया नहीं जा सकता और पहाड़ों पर उससे राहत सामग्री पहुंचाई नहीं जा सकती। राज्य सूचना आयोग ने इस मामले में करोड़ों के घपले की आशंका जाहिर की है।
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उत्तराखंड त्रासदी : राहत कार्य का काला सच, लोग तिल-तिल को मोहताज थे और अधिकारी उड़ा रहे थे चिकन-मटन
NDTVIndia, Last Updated: मई 30, 2015
नई दिल्ली: उत्तराखंड में जून 2013 में आई विनाशकारी बाढ़ से मची तबाही के दौरान हज़ारों लोग बिना खाए-पिए जहां दिन गुज़ारने को मजबूर थे, उस वक्त राहत के काम में जुटे राज्य सरकार के अफसर मटन, चिकन और बेहतरीन खाने का लुत्फ उठा रहे थे। RTI के जरिए हुए इस सनसनीखेज खुलासे में कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं।

आरटीआई में यह भी खुलासा हुआ है कि वहां अफ़सर 7 हज़ार रुपये रोज़ाना के किराए पर होटल में ठहरकर राहत व बचाव कार्य देख रहे थे। आरटीआई के जरिए राहत और बचाव कार्य में बड़े वित्तीय घोटाले की बात का भी खुलासा हुआ है। उत्तराखंड के सूचना आयुक्त अनिल शर्मा ने इस मामले में सीबीआई जांच की सिफारिश की है।

आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार सिर्फ आधे लीटर दूध के लिए 194 रुपये की कीमत वसूली गई। यही नहीं, धांधली का असली खेल तो ये है कि दो पहिया वाहनों को डीजल की सप्लाई की गई और एक ही व्यक्ति को दो-दो बार राहत दी गई। एक ही दुकान से सिर्फ तीन दिनों में 1800 रेन कोट की खरीद की गई। राहत के काम में लगे हेलिकॉप्टर में ईंधन भरने के लिए 98 लाख रुपये का भुगतान किया गया।

केदारनाथ त्रासदी के नाम पर जबरदस्त लूट मची और फर्जी बिलों के जरिए भुगतान कराया गया। अचंभे की बात ये है कि त्रासदी 16 जून 2013 को आयी तो जाहिर है राहत कार्य इसके बाद ही शुरू होना चाहिए था, लेकिन पिथौरागढ़ में 22 जनवरी 2013 को यानी करीब 115 दिन पहले ही शुरू हो गई थी। कई जगहों पर तो उल्टी गंगा बहाते हुए अधिकारियों ने घटना के करीब साढ़े 6 महीने बाद यानी 28 दिसंबर 2013 को राहत व बचाव कार्य शुरू किया और राहत कार्य शुरू होने से 43 दिन पहले ही 16 नवंबर 2013 को पूरा भी कर लिया।

नेशनल एक्शन फोरम फॉर सोशल जस्टिस से जुड़े भूपेंद्र कुमार की शिकायत पर उत्तराखंड के सूचना आयुक्त ने 12 पेज के अपने आदेश में कहा है, 'अपीलकर्ता की ओर से पेश रिकॉर्ड को देखकर लगता है कि उनकी शिकायत उत्तराखंड के मुख्य सचिव के पास भेजी जानी चाहिए। साथ ही यह निर्देश दिया जाता है कि मुख्यमंत्री को इस बारे में जानकारी दी जाए, ताकि वे सीबीआई जांच करवाने को लेकर फैसला ले सकें।'

गौरतलब है कि उत्तराखंड में 16 जून, 2013 को आई भीषण बाढ़ में 3000 से ज्यादा लोग मारे गए थे और हजारों लापता हो गए थे। कई लोगों के बारे में तो आज तक भी पता नहीं चल पाया है।

गुरुवार, 28 मई 2015

लोकलुभावन रास्ते की बजाय अधिक कठिन मार्ग चुना :मोदी


लोकलुभावन रास्ते की बजाय अधिक कठिन मार्ग चुना :मोदी
नई दिल्ली, एजेंसी 28-05-15

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि उन्होंने जानबूझ कर लोकलुभावन रास्ता नहीं चुना और उसकी बजाय त्रुटिपूर्ण सरकारी मशीनरी को ठीक करने के लिए अधिक कठिन मार्ग को अपनाया। यह पूछे जाने पर कि उनकी सरकार के एक साल पूरे होने पर क्या उन्हें लगता है कि वह कुछ अलग कर सकते थे, उन्होंने कहा कि उनके पास दो विकल्प थे।
   
एक विकल्प था सरकारी मशीनरी को लामबंद करने, व्यवस्था में आई कई त्रुटियों और खराबियों को दूर करने के लिए प्रक्रियात्मक रूप से (मथाडिकली) काम किया जाए जिससे कि देश को लंबे समय तक स्वच्छ, कुशल और निष्पक्ष शासन के रूप में लाभ दिया जा सके।
   
दूसरा विकल्प यह था कि जनादेश का उपयोग करते हुए नई लोकलुभावन योजनाएं घोषित की जाएं और जनता को बेवकूफ बनाने के लिए मीडिया के जरिए ऐसी घोषणाओं की बमबारी करदी जाए।। यह रास्ता आसान है और लोग इसके आदी हैं।
   
मोदी ने कहा कि हालांकि, मैंने इसे नहीं चुना और इसके बजाय शांत और व्यवस्थित ढंग से त्रुटिपूर्ण सरकारी मशीनरी को ठीक करने का अधिक कठिन मार्ग अपनाया। अगर मैंने लोकलुभावन विकल्प चुना होता, तो वह मुझपर जनता द्वारा जताए गए विश्वास का उल्लंघन होता।
   
सरकार के काम करने के तरीकों को बदले जाने के लिए उनके द्वारा उठाए गए कदमों के बारे में पूछे जाने पर प्रधानमंत्री ने कहा कि हमने सरकारी सेवकों को यह याद दिलाने का प्रयास किया कि वे जन सेवक हैं और केन्द्र सरकार के अधिकारियों में अनुशासन को बहाल किया।
   
मैंने एक छोटा सा काम किया, ऐसा जो बाहर से देखने में छोटा लगता है। मैं नियमित रूप से चाय पर अधिकारियों से बातचीत करता हूं।, यह मेरे काम काज के तरीके का हिस्सा है। मोदी ने दार्शनिक अंदाज में कहा कि वह महसूस करते हैं कि देश तभी प्रगति करेगा जब वे एक टीम की तरह काम करेंगे।
   
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री एक टीम हैं। कैबिनेट मंत्री और राज्यों के मंत्री अन्य टीम हैं। केन्द्र और राज्यों के लोकसेवक भी एक अन्य टीम हैं। यही एक तरीका है जब हम देश को सफलतापूर्वक विकसित कर सकते हैं।
   
इसके लिए हमने कई सारे कदम उठाए और योजना आयोग को समाप्त किया और उसकी जगह नीति आयोग गठित किया जिसमें राज्य बराबर के पार्टनर हैं। प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए इंटरव्यू का मूलपाठ इस प्रकार है:
   
प्रश्न : प्रधानमंत्री के रूप में आपने एक साल पूर किया है। कपया क्या अपने अनुभवों को बता सकते हैं?
उत्तर : जब मैंने पद संभाला, लोकसेवा पूरी तरह हतोत्साहित थी और निर्णय लेने से डरती थी। बाहर से संविधानेतर प्राधिकारियों और भीतर से मंत्रियों के समूहों के कारण कैबिनेट व्यवस्था भी जीर्णावस्था में थी। राज्यों और केन्द्र के बीच गहरी खाई और गहरा अविश्वास था। विदेशी और भारतीय दोनों भारतीय शासन से हताश थे। उस निराशा के वातावरण को बदलना बहुत बड़ी चुनौती थी और हालात को सुधारने तथा विश्वास एवं उम्मीद बहाली करने में मैंने कई कठिनाइयों का सामना किया।

प्रश्न : प्रधानमंत्री बनने के तत्काल बाद, आपने कहा था कि चूंकि यहां नये हैं और दिल्ली को समझने का प्रयास कर रहे हैं। क्या आपने दिल्ली को समझ लिया?
उत्तर : जब मैं दिल्ली की बात करता हूं तब मेरा आशय केंद्र सरकार से है। मेरा अनुभव यह है कि दिल्ली उसी तरह से चलती है जो रास्ता नेतृत्व तय करता है। हमारी टीम दिल्ली में कामकाज की संस्कृति में बदलाव लाने की दिशा में काम कर रही है ताकि सरकार को और सक्रिय तथा पेशेवर बनाया जा सके। जब मैंने पदभार संभाला, मैंने पाया कि दिल्ली में सत्ता के गलियारे विभिन्न तरह के एजेंटों से भरे हुए थे। सत्ता के गलियारों को साफ करने का कार्य महत्वपूर्ण था ताकि सरकार के तंत्र खुद बेहतर बन सके। सुधार और साफ करने की प्रक्रिया में थोड़ा समय लगा लेकिन इससे स्वच्छ एवं निष्पक्ष शासन के संदर्भ में दीर्घकालीन लाभ होगा।
   
प्रश्न : और आपने क्या समझा
उत्तर : एक बात मैं समझने में विफल रहा कि कैसे कुछ दलों की राज्य सरकारें भूमि अधिग्रहण कानून में बदलाव की मांग करती हैं लेकिन जब वे दल दिल्ली में बैठते हैं तब संशोधनों का विरोध करते हैं।
   
प्रश्न : पिछले एक वर्ष पर नजर डालें तब क्या आप सोचते हैं कि कुछ ऐसी चीजें जो आपने कीं, उसे दूसरी तरह से कर सकते थे या किया जाना चाहिए था।
उत्तर : मेरे पास दो विकल्प थे। एक विकल्प था सरकारी मशीनरी को लामबंद करके, व्यवस्था में आई कई त्रुटियों और खराबियों को दूर करने के लिए प्रक्रियात्मक रूप से (मथाडिकली) काम किया जाए जिससे कि देश को लंबे समय तक स्वच्छ, कुशल और निष्पक्ष शासन के रूप में लाभ दिया जा सके।
   
दूसरा विकल्प यह था कि जनादेश का उपयोग करते हुए नयी लोकलुभावन योजनाएं घोषित की जाएं और जनता को बेवकूफ बनाने के लिए मीडिया के जरिए ऐसी घोषणाओं की बमबारी कर दी जाए।। यह रास्ता आसान है और लोग इसके आदी हैं।

बुधवार, 27 मई 2015

दुनिया को मोदी जैसे और नेताओं की जरूरत : वर्ल्ड बैंक प्रमुख


दुनिया को मोदी जैसे और नेताओं की जरूरतः वर्ल्ड बैंक प्रमुख
एजेंसियां| May 27, 2015

नई दिल्ली
केंद्र में सरकार का एक साल पूरा करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जबर्दस्त तारीफ मिली है। यह तारीफ की है विश्व बैंक के अध्यक्ष जिम यॉन्ग किम ने। किम ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनकी सरकार के कार्यकाल का एक साल पूरा होने पर बधाई देते हुए कहा कि दुनिया को 'आपके जैसे और नेताओं की जरूरत है।' किम ने प्रधानमंत्री को एक साल में गरीबी समाप्त करने के लिए उठाए गए दूरदृष्टि वाले कदमों के लिए बधाई दी।
विश्व बैंक प्रमुख ने ट्वीट किया, 'भारत में गरीबी समाप्त करने के लिए एक साल के दूरदृष्टि वाले कदमों के लिए बधाई। दुनिया को आप जैसे और नेताओं की जरूरत है।'

मोदी ने उनके इस संदेश पर धन्यवाद दिया। प्रधानमंत्री ने ट्वीट किया, 'जिम किम को धन्यवाद। हम सभी को दुनिया को रहने के लिए बेहतर स्थान बनाने को मिलकर काम करना होगा। विशेष रूप से गरीबी समाप्त करने के लिए।'

बिजनस लीडर्स ने बांधे मोदी की तारीफों के पुल
इकनॉमिक टाइम्स| Jan 12, 2015
गांधीनगर

वाइब्रेंट गुजरात का मकसद इन्वेस्टर्स से मुलाकात करना है, लेकिन 2003 में समिट की शुरुआत के बाद से बिजनस लीडर्स इस मौके पर नरेंद्र मोदी की तारीफ करते आए हैं। रविवार को सातवां वाइब्रेंट गुजरात सम्मेलन शुरू हुआ और इस बार भी मोदी के मुरीद खुलकर उनकी तारीफ कर रहे हैं।

देश के सबसे अमीर बिजनसमैन मुकेश अंबानी ने कहा, 'कृष्ण, महात्मा गांधी, सरदार पटेल और अब हमारे प्यारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्रभाई मोदी की धरती पर आपका स्वागत है। वह एक वर्ल्ड लीडर हैं, जिन पर भारत को नाज है।' अंबानी ने कहा, 'मोदी की पावरफुल लीडरशिप के चलते दुनिया की जानी-मानी कंपनियां गुजरात आई हैं। उनके 'मेक इन इंडिया' और 'डिजिटल इंडिया' कैंपेन ने भारत और यहां की कंपनियों में जान डाल दी है।'


वहीं, आदित्य बिड़ला ग्रुप के चेयरमैन कुमारमंगलम बिड़ला ने कहा कि गुजरात आज भारत में इन्वेस्टमेंट के लिए सबसे पसंदीदा जगह है। उन्होंने बताया, 'हम गुजरात सरकार के प्रो-ऐक्टिव अप्रोच से खुश हैं...मेरा इसके प्रति खास लगाव है।' उन्होंने कहा कि राज्य ने नरेंद्र मोदी की लीडरशिप में 15 साल तक तरक्की की। पॉजिटिव पॉलिसी और गवर्नेंस फ्रेमवर्क बनाने में उनका अहम रोल रहा। मुख्यमंत्री रहने के दौरान मोदी ने स्पष्ट नीतियां बनाईं और प्रॉजेक्ट्स को तेजी से मंजूरियां दिलाईं।

वहीं, वर्ल्ड बैंक के प्रेजिडेंट जिम यंग किम ने कहा कि भारत की जीडीपी ग्रोथ 2015 में 6.4 पर्सेंट रह सकती है। किम ने कहा, 'नरेंद्र मोदी सरकार ने जो कदम उठाए हैं, उनसे देश की इकनॉमिक ग्रोथ तेज होगी।' उन्होंने कहा कि दुनिया के कई देश मुश्किलों का सामना कर रहे हैं और उनके बीच भारत ने उम्मीद की रोशनी दिखाई है।

वाइब्रेंट समिट में जापान से शामिल होने आए मिनिस्टर योसुके टाकागी ने कहा कि पिछले साल मोदी ने जब उनके देश की यात्रा की थी, तब ट्रेड और इकॉनमी मिनिस्ट्री के साथ मीटिंग में उन्होंने एक भारतीय मुहावरे का इस्तेमाल किया था। मोदी ने कहा था- अगर यह देखना है कि चावल पका है या नहीं, तो एक ही दाना काफी होता है। वैसे ही भारत की तरक्की का पता गुजरात की यात्रा करके लग जाता है। इंडस्ट्री और ग्लोबल लीडर्स जब प्रधानमंत्री की तारीफ कर रहे थे, तब उनका चेहरा गंभीर था। वह सिर्फ तभी मुस्कुराए, जब कोई हल्की-फुल्की बात कही गई।
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2015 में भारत का विकास दर 6.4 प्रतिशत रहने का अनुमान: वर्ल्ड बैंक
भाषा| Jan 11, 2015,

वर्ल्ड बैंक के अध्यक्ष जिम योंग किम ने रविवार को कहा कि नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली एनडीए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के बल पर भारत का आर्थिक विकास दर 2015 में 6.4 प्रतिशत रहने और अगले साल इसमें और तेजी आने की संभावना है। वाइब्रेंट गुजरात समिट के दौरान उन्होंने कहा कि वर्ल्ड बैंक भारत की अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में उत्प्रेरक की भूमिका निभाने को तैयार है और इस संबंध में हमारे पास आशावादी होने के बहुत अधिक कारण हैं।

उन्होंने कहा, 'हमारा अनुमान है कि दुनिया में दूसरे देश जहां औसत दर्जे का प्रदर्शन कर रहे हैं, वहीं भारत का प्रदर्शन शानदार होगा। हमारे अनुमान के मुताबिक, भारत की अर्थव्यवस्था इस साल 6.4 प्रतिशत और अगले साल इससे भी तेज गति से बढ़ेगी।'

वर्ल्ड बैंक के अध्यक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार तेज वृद्धि के लिए तेजी से आधार तैयार कर रही है। इसके साथ ही मोदी सरकार राष्ट्रीय नियामकीय ढांचे को दुरुस्त कर रही है और सामाजिक समावेश को प्रोत्साहन भी दे रही है।

पिछले दो वित्त वर्षों के दौरान पांच प्रतिशत से नीचे रहने के बाद अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत आने शुरू हो गए हैं और 2014-15 की दूसरी और तीसरी तिमाहियों में विकास दर क्रमश: 5.7 प्रतिशत व 5.3 प्रतिशत रही।


अगर सिर्फ whatsapp और फेसबुक पे जोक सुन सुन के मोदी जी की विदेश दौरों का पता है तो मुर्ख हो । इन उपलब्दियों के बारे में भी पता होना चाहिए ...

1. मोदी जी ने सऊदी अरब को “On-Time Delivery” प्रीमियम चार्जेज ऑन क्रूड आयल के लिए मना लिया है ।

2. India भूटान में 4 Hydropower stations Dams बनाएगा । जिससे Green energy मिलेगी ।

3. India नेपाल में सबसे बड़ा hydro dam बनाएगा जिस से 83% Green energy इंडिया को मिलेगी। (इसके लिए china कब से लगा हुआ था )

4. जापान के साथ समझोता हुआ. वो भारत में 10 लाख करोड़ invest करेंगे और bullet train चलाने में मदद करेंगे। (कांग्रेस के टाइम में ये समझोता सिर्फ 1000 करोड़ का था)

5. Vietnam के साथ रिश्ते सुधारे हैं और अब भारत को आयल देने और आयल रिफानरी में भारत के लिए मदद करेगा। कोंग्रेश के समय उसने मना कर दिया था।

6. इरान अब डॉलर की जगह रूपये में आयल देने को राजी हो गया है । इस से खाफी बचत होगी ।

7. मोदी जी 28 साल के बाद औस्ट्रेलिया जाने वाले प्रधनमंत्री बने । और वहां दोस्ती के रिश्ते बनाये । अब वहां से Uranium मिलेगा जिससे बिजली बनाने के लिए काफी मदद मिलेगी।

8. मोदी जी इस साल श्री लंका गये और टूटी हुई दोस्ती सुधारी। जो कांग्रेश ने श्री लंका ना जाके बिगाड़ ली थी।

9. China के सामान india में बहुत बिक रहे हैं , इसके लिए बोल दिया की या तो इंडिया में invest करो नही तो गैर क़ानूनी माना जाएगा । अब China $20 billion Invest करेगा।

11. भारत ने North East and around India china border पे रोड बनाना शुरू कर दिया है ताकि हमारी आर्मी को जाने में दिक्कत न हो। कांग्रेश इसे बनाने में डरती रही।

12. India यमन से 4000+ Indians को लाने में सफल रही ।ये सब मोदी और सऊदी अरब किंग की दोस्ती की वजह से संभव हो पाया।

13. India की एयर फ़ोर्स की ताकत कमजोर हो गयी थी। इसके लिए आते ही फ़्रांस से 36 Rafale fighter Jets खरीदने के लिए डील की है।

14. 42 साल के बाद कनाडा भारत को Uranium देने के लिए राजी हो गया है । इस से बिजली की समस्या से निपटने में मदद मिलेगी ।

15. Canada अब भारतीयों को On-Arrival visa देगा।

16. अब तक हम अमेरिक और रूस से ही Nuclear Reactor खरीद सकते थे । मगर अब फ़्रांस भारतीय कम्पनी के साथ यही बनाएगी ।

17. बराक ओबामा से दोस्ती की और अमेरिका अब भारत में 16 Nuclear power plant लगाने में मदद करेगा । जिस से भारत में बिजली की दिक्कत ख़तम हो जाएगी ।

स्मृति ईरानी : राहुल गांधी को घर में घेरा



स्मृति ईरानी ने अमेठी से राहुल गांधी के छुड़ाए पसीने
नवभारतटाइम्स.कॉम |      May 27, 2015

अमेठी
2017 में उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव को देखते हुए अत्यंत महत्वपूर्ण सीट अमेठी पर राजनीतिक संघर्ष तेज हो गया है। इसकी वजह क्या है? बीजेपी ने 2014 के आम चुनाव में उत्तर प्रदेश में 80 में से 71 सीटों पर जीत दर्ज की थी। अमेठी में राहुल गांधी की जीत में वोटों को अंतर भी कम हुआ था। बीजेपी अमेठी में राहुल के वोट बैंक में सेंध लगाने में कामयाब रही थी।

अमेठी की लड़ाई बीजेपी और कांग्रेस के बीच नाक की बन गई है। स्मृति ईरानी ने गांधी-नेहरू परिवार पर हमला करते हुए मंगलवार को कहा था कि वर्षों के खोखले वादों के बाद अमेठी और रायबरेली में अब विकास दिख रहा है। ईरानी के इस हमले पर प्रियंका गांधी ने जवाबी हमला बोला है। प्रियंका ने पूछा कि अमेठी में आईआईआईटी क्यों नहीं खुल रही। उन्होंने पूछा कि स्मृति ईरानी एचआरडी मंत्री हैं और उन्हें जवाब देना चाहिए। प्रियंका ने कहा कि यहां के युवा समस्याओं से जूझ रहे हैं और ईरानी कुछ नहीं कर रहीं।

2014 लोकसभा इलेक्शन में राहुल गांधी ने अमेठी से बीजेपी की स्मृति ईरानी को 1.07 लाख वोटों से हराया था। राहुल की यह जीत 2009 के मुकाबले बेहद छोटी थी। 2009 में राहुल 3.70 वोटों के अंतर से जीते थे।

केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार बनने के बाद से अमेठी में एक दूसरे को मात देने का राजनीतिक खेल शिखर पर है। पिछले साल आम चुनाव में कांग्रेस बुरी तरह से हारी थी। तब से ही बीजेपी ने निशाने पर अमेठी है।

फूड पार्क का कैंसल होना
कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने संसद में महत्वाकांक्षी शक्तिमान मेगा फूड पार्क कैंसल करने का मुद्दा उठाया था। इसके बाद केंद्रीय मानव संसाधन और विकास मंत्री स्मृति ईरानी अमेठी के गांवों में गईं और वहां उन्होंने किसान पंचायत आयोजित की। उन्होंने कहा कि मैं यहां से भले हार गई हूं लेकिन एनडीए सरकार आपके साथ है।

राहुल ने मोदी सरकार पर हमला बोला था और उन्होंने कई मोर्चों पर नाकाम रहने का आरोप लगाया था। बीजेपी ने राहुल को बैकफुट पर लाने के लिए अमेठी की राह को चुना। यह बीजेपी की रणनीतिक चाल है कि राहुल को उनके घर में ही घेरा जाए। राहुल बीजेपी पर अटैक करते हैं तो बीजेपी अमेठी में अपनी गतिविधि तेज कर देती है।

2017 में उत्तर प्रदेश का विधानसभा चुनाव
किसानों के मुद्दों पर राजनीतिक दलों में हितैषी दिखने की होड़ उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के कारण है। इसकी शुरुआत बीजेपी ने अमेठी से शुरू कर दी है। स्मृति ईरानी का इस महीने दो बार अमेठी जाना महज संयोग नहीं है। अमेठी में बीजेपी के सीनियर नेता उमा शंकर पांडे ने कहा कि ईरानी का दौरा किसानों की समस्याओं पर फोकस है। उन्होंने कहा कि पार्टी कार्यकर्ता 2017 के विधानसभा चुनाव को लेकर उत्साह में हैं। 2012 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस अमेठी में महज दो विधानसभा सीटों (तिलोई और जगदीशपुर) पर जीत दर्ज कर पाई थी। 2014 के आम चुनाव के बाद से कांग्रेस पार्टी कैडर को संगठित करने में जुटी है।

एक सीनियर कांग्रेस नेता ने कहा, 'फूड पार्क और किसानों की समस्याओं पर राहुल ने आवाज उठाई है। राहुल गांधी लोगों के संपर्क बनाने में कामयाब हो रहे हैं। पार्टी कार्यकर्ता आशावादी हैं। राज्य भर में कांग्रेस लोगों बीच जाकर अपनी बात कह रही है। राहुल गांधी 2017 के विधानसभा चुनाव को लेकर संगठन को मजबूत करने में जुटे हैं।'

स्मृति ईरानी का अमेठी दौरा
हालांकि राहुल ने ईरानी के अमेठी दौरे पर कोई टिप्पणी नहीं की। उन्होंने आशंका जताई कि एनडीए सरकार अमेठी से और प्रॉजेक्ट के दूसरी जगह शिफ्ट कर सकती है। तिलोई से कांग्रेस विधायक मोहम्मद मुस्लिम ने कहा, 'इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ इंन्फर्मेशन टेक्नॉलजी (आईआईआईटी) से डिस्कवरी पार्क को रद्द कराने के पीछे स्मृति ईरानी ही हैं। ईरानी आईआईआईटी को इलाहाबाद शिफ्ट करने की साजिश रच रही हैं।


बीजेपी का राहुल पर हमला
अमेठी के बीजेपी नेता राहुल गांधी पर हमलावर हो गए हैं। ये आरोप लगा रहे हैं कि यूपीए के 10 साल के शासन में अमेठी का विकास नहीं हुआ। बीजेपी नेता उमाशंकर पांडे ने कहा कि राहुल गांधी पर अमेठी के लोगों का भरोसा खत्म हो रहा है। उन्होंने कहा, 'वह पिछले तीन दिनों के दौरे में किसानों की बात करते रहे लेकिन आज तक कुछ किया नहीं। ईरानी अमेठी के हेडक्वॉर्टर गरीगंज के पास कटरा लालगंज में मिट्टी जांच प्रयोगशाल स्थापित करने जा रही हैं। इसके साथ ही उन्होंने अपनी जेब से अमेठी के 25 हजार लोंगों का इंश्योरेंस कराने का फैसला किया है।'

मंगलवार, 26 मई 2015

मोदी ने देश का गौरव बहाल किया : अमित शाह


देश में विजिबल सरकार, मोदी ने PMO का गौरव बहाल किया : शाह
Last Updated: Tuesday, May 26, 2015

दिल्ली : नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार को सक्रिय और काम करती दिखने वाली करार देते हुए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने आज जोर देकर कहा कि सरकार के एक वर्ष के कार्यकाल में देश को नीतिगत पंगुता से बाहर निकालने, भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने, विश्वास की कमी को दूर करने और प्रधानमंत्री कार्यालय के सम्मान को बहाल करने का काम किया गया है।

राजग सरकार के एक वर्ष के कामकाज के दौरान उठाये गए कदमों का जिक्र करते हुए अमित शाह ने यहां संवाददाताओं से कहा कि सरकार ने संघीय ढांचे को मजबूत करने और विदेश में भारत की स्थिति को बेहतर बनाने का काम किया है, साथ ही वह कालाधन वापस लाने और देश को तेज गति से विकास के पथ पर अग्रसर करने को प्रतिबद्ध है।

भाजपा अध्यक्ष ने कहा, ‘ पूर्ववर्ती सरकार के विपरीत यह सरकार दिख रही है जबकि पिछली सरकार कहीं नहीं दिखती थी। हमने प्रधानमंत्री कार्यालय के सम्मान को भी बहाल किया है। सरकार नीतिगत पंगुता से बाहर आई है। विश्वास की कमी दूर हो गई है और दुनिया अब भारत की प्रगति को स्वीकार कर रही है।’ उन्होंने कहा, ‘ हम भ्रष्टाचार को समाप्त करने को प्रतिबद्ध थे और हमने भ्रष्टाचार मुक्त शासन प्रदान किया है। हमारे विरोधी भ्रष्टाचार का कोई भी आरोप लगा नहीं पाए। मैं समझता हूं कि यह इस सरकार की एक बड़ी उपलब्धि है।’

कांग्रेस पर निशाना साधते हुए अमित शाह ने कोयला और टूजी स्पेक्ट्रम घोटाले में ‘शून्य नुकसान’ की परिकल्पना पेश करने वाले नेताओं को जनता के समक्ष इसकी फिर से व्याख्या करने की चुनौती दी। भाजपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि संप्रग सरकार ने झूठ को सच बनाकर पेश करने में महारथ हासिल की थी। शाह ने यह भी कहा कि देश में जब भी कांग्रेस सरकार रही , देश की वृद्धि दर नीचे गिरी है लेकिन जब भाजपा सत्ता में आती है तब यह उपर उठती है।

उन्होंने सवाल किया, ‘ आजादी के बाद से 60 साल के शासनकाल में कांग्रेस ने कालाधन पर लगाम लगाने के लिए क्या किया। ’ उन्होंने जोर दिया कि भाजपा कालाधन को वापस लाने के लिए कानूनी कदम उठाने को प्रतिबद्ध है। भाजपा अध्यक्ष ने कहा, ‘ किसी को नहीं बख्शा जायेगा और इसलिए विदेशों में जमा बिना हिसाब के कालेधन के लिए इस सरकार ने नया कानून बनाया है। मैं आपको आश्वस्त कर सकता हू्ं कि अब से कोई धन इस देश से बाहर नहीं जायेगा।’ शाह ने उन लोगों पर भी निशाना साधा जो विदेशों में बिना हिसाब वाला धन जमा करने वालों के नाम जानना चाहते हैं और ऐसे लोगों को कालाधन सृजित करने वालों का वकील बताया क्योंकि नाम उजागर करने से अंतरराष्ट्रीय संधियों का उल्लंघन होगा।

अमित शाह ने कहा कि मोदी सरकार के तहत संघीय ढांचा मजबूत हुआ है और प्रधानमंत्री देश को ‘टीम इंडिया’ के माध्यम से प्रगति की दिशा में आगे ले जा रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘ पूर्वी भारत के अनेक राज्यों में भाजपा के सत्ता में नहीं होने के बावजूद हम अपने वादे के अनुरूप क्षेत्र के विकास के लिए काम कर रहे हैं। इससे देश के संघीय ढांचा और मजबूत बनेगा।’ भाजपा अध्यक्ष ने कहा, ‘मोदी ने टीम इंडिया का नया विचार पेश किया है जहां केंद्र और राज्य एक ही टीम का हिस्सा हों।’’ आर्थिक मोर्चे पर सरकार के कामकाज की सराहना करते हुए शाह ने कहा कि सत्ता में एक वर्ष रहने के बाद वृद्धि दर 5.7 प्रतिशत हो गयी है।

उन्होंने कहा, ‘ जब कांग्रेस सत्ता में आती है, वृद्धि दर नीचे आती है लेकिन जब भाजपा सत्ता में आती है तब यह बढ़ता है।’ इस संबंध में उन्होंने वाजपेयी के नेतृत्व वाली राजग सरकार, संप्रग और वर्तमान सरकार के समय के आंकड़ों का जिक्र भी किया। शाह ने दावा किया कि राजकोषीय घाटा नियंत्रण में है, कारोबार बढ़ा है, विदेशी मुदा्र भंडार 10 वषरे में सर्वोच्च है और कीमतों को नियंत्रण में लाया गया है।

पिछले एक वर्ष में गरीबी के संबंध में सरकार की ओर से उठाये गए कदमों का जिक्र करते हुए भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि जनधन योजना के तहत 15 करोड़ लोगों , विशेष तौर पर गरीबों , के खाते खुले और उन्हें देश की वित्तीय व्यवस्था से जोड़ा गया।

अमित शाह ने प्रत्यक्ष नकद अंतरण के जरिये भ्रष्टाचार में कमी आने का जिक्र किया, साथ ही कहा कि मुद्रा बैंक से छोटे कारोबारियों को रिण सुविधा प्राप्त करने में मदद मिलेगी। उन्होंने सरकार की मेक इन इंडिया पहल के जरिये रोजगार के अधिक अवसर सृजित करने और अधिक बिजली पैदा करने के साथ 2019 तक देश के सभी गांवों को बिजली प्रदान करने का भी जिक्र किया।

भाजपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती संप्रग सरकार ने डब्ल्यूटीओ में किसानों के हितों को बेचने का काम किया लेकिन राजग ने यह सुनिश्चित किया कि उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य मिले। उन्होंने कहा कि हमने सुरक्षा एजेंसियों को एकजुट करने का काम किया और देश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाया। प्रधानमंत्री ने अपने संवाद के जरिये भारत की स्वीकार्यता बढ़ाई है।

बहुमत हासिल होने के मद्देनजर अनुच्छेद 370 और राम मंदिर जैसे मुद्दों के बारे में पार्टी की योजनाओं के बारे में पूछे जाने पर शाह ने कहा कि इनके लिए 370 सांसदों और दो तिहाई बहुमत की जरूरत होती है। उन्होंने कहा, ‘ हमारे पास इन मुद्दों के लिए (लागू करने) जरूरी बहुमत अभी भी नहीं है।’ मोदी सरकार की एक वर्ष की उपलब्धियों को लोगों तक पहुंचाने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा एक जून तक 4413 रैलियां आयोजित करेगी।

उन्होंने कहा कि हमारे कार्यकर्ता जून, जुलाई और अगस्त में आठ करोड़ घरों तक पहुंचने का पूरा प्रयास करेंगे। शाह ने कहा कि मोदी सरकार ने आधारभूत ढांचे के विकास पर विशेष जोर दिया है। भाजपा अध्यक्ष ने इस अवसर पर सरकार की उपलब्धियों का जिक्र करने वाली पुस्तिका को भी जारी किया जिसे 12 भाषाओं में लाया गया है।

भाषा
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मंगलवार, 26 मई 2015
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह जी द्वारा पत्रकार वार्ता में दिए गए वक्तव्य के मुख्य बिंदू

केंद्र की मोदी नेतृत्व वाली सरकार एक विजिबल सरकारः अमित शाह
आज हमारे विरोधी भी इस केंद्र सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप नहीं लगा सकतेः अमित शाह
मोदी जी ने प्राकृतिक आपदा से किसानों को हुए नुकसान की मुआवजा राशि में डेढ़ गुना वृद्धि कर एवं फसलों के नुकसान का मापदंड 50 प्रतिशत से घटाकर 33 प्रतिशत करके किसानों को राहत दी है: अमित शाह
कृषि पर निर्भरता कम करने और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए हमने मुद्रा बैंक की योजना शुरू की: अमित शाह
संघीय ढांचे को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने मजबूत कदम उठाये हैंः अमित शाह
हमारी प्राथमिकता गरीबों को विकास की अग्रिम पंक्ति में लाना हैः अमित शाह
केंद्र सरकार के प्रति जनता का विश्वास बढ़ा हैः अमित शाह
आज केंद्र में एक निर्णायक सरकार हैः अमित शाह
आज 26 मई, 2015 को भारतीय जनता पार्टी की श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में जो सरकार बनी उसका ठीक एक साल आज समाप्त होने जा रहा है। देश के लोकतंत्र के इतिहास के लिए और भाजपा के लिए भी गत साल कई मायनों में नए रिकार्ड स्थापित करने वाला रहा। तीस साल के बाद इस महान देश में किसी पार्टी को बहुमत देने का फैसला 2014 के चुनाव में इस देश की जनता ने किया। एक निर्णायक जनादेश किसी एक पार्टी को 30 वर्षों बाद मिला। इस देश की जनता ने आजादी के बाद पहली बार किसी गैर-कांग्रेसी दल को पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनाने का मौका दिया। ये दोनों चीजें देश के लोकतंत्र के इतिहास में बहुत महत्वपूर्ण है।
भाजपा के लिए यह गौरव की बात है कि देश की जनता ने जो पहली बार किसी गैर-कांग्रेसी दल को सरकार बनाने का मौका दिया वो भाजपा को दिया। और देश के सभी हिस्सों से करीब-करीब भाजपा और एनडीए का प्रतिनिधित्व आज संसद में, इस सरकार में आज साझीदार है। अरूणाचल में भाजपा का सांसद है तो कच्छ में भी भाजपा का सांसद है। लेह लद्दाख में भाजपा का सांसद है तो कन्याकुमारी में भी भाजपा का सांसद है। पूर्व-पश्चिम, उत्तर-दक्षिण चारों ओर भाजपा को इस देश की प्रजा ने सम्मानित किया है और हमें सरकार बनाने का मौका दिया है और आज यह सरकार एक वर्ष समाप्त कर रही है।
इस देश में सरकार के प्रति अविश्वास का जो संकट पैदा हुआ था उसको इस सरकार ने समाप्त किया है। पहले देश की सरकार पर इस देश की जनता को भरोसा नहीं था कि यह सरकार देश को कहां पर ले जाएगी। देश के प्रधानमंत्री को देश की कैबिनेट पर भरोसा नहीं था और ब्यूरोक्रेसी को प्रधानमंत्री पर भरोसा नहीं था। आज वो विश्वास का संकट टल गया है। दुनिया भी बड़े भरोसे से आनंद और आश्चर्य से भारत की प्रगति को देख रही है। हर क्षेत्र में इस सरकार ने नई-नई पहल की है और परिणाम भी पाए हैं।
यह सरकार विजि़बल सरकार रही है। पहले सरकार को ढूंढना पड़ता था। अब शायद मीडिया से भी आगे आकर सरकार प्रोएक्टिव होकर जनता की दिक्कत के समय में जनता के साथ दिखाई पड़ रही है। जम्मू-कश्मीर में बाढ़ आती है तो कुछ ही घंटों में वहां मंत्री और प्रधानमंत्री दिखाई पड़ते हैं। पड़ोसी देश नेपाल में अगर भूकंप आता है तो तुरंत ही सरकार प्रोएक्टिव होकर नेपाल में दिखाई देती है। तमिलनाडु में यदि भारतीय मछुआरों पर संकट आता है, फांसी दी जाती है तो भारत सरकार हस्तक्षेप करती है। किसी क्रिश्चन पादरी को अफगानिस्तान में अगवा किया जाता है तो भारत सरकार दखल करके उसको छुड़ाकर लाती है।
इस सरकार ने प्रधानमंत्री कार्यालय की गरिमा को पुनः स्थापित किया है। एक जमाना था जब हर मंत्री दस साल तक अपने मंत्रालय का प्रधानमंत्री होता था। और प्रधानमंत्री को कोई प्रधानमंत्री ही नहीं मानता था। भाजपा इस स्थिति में परिवर्तन लाई है। आज हरेक मंत्री स्वतंत्रतापूर्वक अपने मंत्रालय का काम कर रहे हैं, फैसले ले रहे हैं। उन पर कोई मंत्री समूह नहीं थौपे गए हैं। मंत्रियों को काम करने की स्वतंत्रता दी गई है। प्रधानमंत्री कार्यालय का गौरव पुनः स्थापित हुआ है। यह सरकार पाॅलिसि पैरालिसिसि से बाहर आई है। जैसे ही समस्या सामने आती है इसके निवारण के लिए यह सरकार तुरंत प्रोएक्टिव होकर अगर जरूरी है तो नीतियों में परिवर्तन करने के लिए तत्पर रहती है और इसके अच्छे परिणाम हमें मिले हैं।
10 वर्षों तक देश की जनता किसी एक चीज से अगर सबसे ज्यादा त्रस्त थी तो वह भ्रष्टाचार था। 10 वर्षों तक हर महीने कोई न कोई घपला या घोटाला, लाखों करोड़ों रूपयों के भ्रष्टाचार जनता के सामने आते था, जो जनता के आत्मविश्वास को हिलाकर रख देता थे। और दुनिया में भी हिन्दुस्तान की साख इन घोटालों के कारण दिन-प्रतिदिन गिरती जा रही थी। लोकसभा चुनाव के वक्त हमने वचन दिया था कि हम भ्रष्टाचार को इस व्यवस्था से उखाड़कर फेंक देंगे। मुझे बताते हुए बहुत आनंद हो रहा है कि एक वर्ष में हमारे विरोधी भी इस सरकार पर भ्रष्टाचार का कोई आरोप नहीं लगा सकते।ये भाजपा की मोदी सरकार की बहुत बड़ी उपलब्धि है।
यूपीए के कुछ मंत्रियों द्वारा जीरो लाॅस की थ्योरी बार-बार प्रतिस्थापित की जाती रही कि कोयला में कोई नुकसान नहीं हुआ, स्पेक्ट्रम में कोई नुकसान नहीं हुआ। आज भाजपा की मोदी सरकार ने 220 खदानें जो कांग्रेस ने आबंटित की थी जिसको सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया उसमें से 29 खादानों की पारदर्शी नीलामी करके दो लाख करोड़ से ज्यादा भारत के खजाने में इज़ाफा किया है। इससे स्पष्ट होता है कि कैग ने नुकसान को कुछ कम ही आंका था। एक-तिहाई क्षमता वाले स्पैक्ट्रम की नीलामी भाजपा की मोदी सरकार ने की और एक लाख नौ हजार करोड़ रूपया देश की तिजोरी में जमा हुआ। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि कैग ने नुकसान को कुछ कम ही आंका था। आज एक वर्ष के बाद मैं भारतीय जनता पार्टी की ओर से मांग करता हूं कि कांगे्रस के नेता फिर से एक बार जरा जीरो लाॅस वाली थ्योरी को देश के सामने रखने का साहस करें।
काले धन पर बार-बार भाजपा पर कांग्रेस के नेता निशाना लगाते हैं कि कालेधन में ये नहीं हुआ वो नहीं हुआ। मैं पूछना चाहता हूं कि 68 वर्ष की आजादी में 60 वर्षों तक कांग्रेस का राज रहा, कांग्रेस ने कालेधन की रोकथाम के क्या काम किया? सुप्रीम कोर्ट का आदेश के बावजूद डेढ़ साल तक कांग्रेस की सरकार ने एसआईटी बनाने का काम नहीं किया था। भाजपा की मोदी सरकार बनने के बाद पहली ही कैबिनेट का पहला ही फैसला कालेधन की जांच के लिए एसआईटी बनाने का हुआ। यह मोदी सरकार की प्रतिबद्धता दिखाता है कि हम कालेधन की रोकथाम के लिए कितने प्रतिबद्ध हैं। तीन साल से दुनियाभर के देशों से जो सूचनाएं आकर पड़ी थी उन सूचनाओं पर कोई कार्यवाही नहीं होती थी। हमारी सरकार बनने के बाद 45 दिनों में करीब-करीब 700 सूचनाओं को हमने एसआईटी को जांच के लिए दे दिया और आज एसआईटी उस पर जांच कर रही है। भाजपा की सरकार कटिबद्धता से कालेधन पर जो वैश्विक समाधान हुए इस पर कानूनी रूप से कार्यवाही करने के लिए कटिबद्ध है। और इसीलिए देश की संसद में वित्तीय अनियमित्ताओं के लिए पहली बार सजा का प्रावधान वाला कानून लेकर मोदी सरकार आई है। आजादी के बाद पहली बार एक कानून ऐसा बना है जिसमें वित्तीय अनियमित्ताओं के लिए सजा का प्रावधान किया गया है। यह कानून बनने के बाद यह बात गारंटी से कही जा सकती है कि इस देश में से फूटी कोड़ी भी कालेधन के रूप में बाहर जाने का रास्ता भाजपा की सरकार ने बंद कर दिया है।
संघीय ढांचे को मजबूत करने के लिए मोदी सरकार ने जितना किया उतना शायद आजादी के बाद किसी सरकार ने नहीं किया। योजना आयोग भंग कर नीति आयोग में राज्यों के सीएम को शामिल किया गया जिससे योजनाएं राज्यों की आवश्यकता के अनुरूप बने। इससे विकास और कल्याणकारी जो भी योजनाएं बनेंगी उसे वास्तविक रूवरूप देने से जनता को फायदा होगा। खदानों की पारदर्शी निलामी से आने वाली पूरी रकम राज्यों के विकास के लिए देने का निर्णय एक महत्वपूर्ण कदम है। संघीय ढांचे के अनुरूप राज्यों को साथ लेकर चलने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए 14वें वित्त आयोग की सिफारिशों के तहत केंद्रीय करों के लाभांश में 10 फीसदी वृद्धि करते हुए राज्यों का हिस्सा 32 फीसदी से बढ़ाकर 42 प्रतिशत कर दिया गया। कोयला खदान की नीलामी से जितनी भी राशि आएगी वह बिना किसी पक्षपात के शत-प्रतिशत राज्यों को जाएगी। यह संघीय ढांचे को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण कदम है। इस प्रकार टीम इंडिया की भावना को मोदी सरकार ने देश के समक्ष रखा है।
जब अटल जी को विरासत में 4.4 प्रतिशत विकास दर वाली अर्थव्यवस्था मिली थी तो 6 साल बाद विकास दर को 8.4 प्रतिशत तक पहुंचा कर यूपीए के हाथ में सत्ता सौंपा था। 10 साल बाद 4.4 प्रतिशत विकास दर वाली अर्थव्यवस्था मोदी जी को मिला। 1 साल में हमने जीडीपी को 5.7 फीसदी तक पहुंचाने में सफलता पाई। यह आंकड़े साबित करती है कि कांग्रेस की सरकार जब आती है तो विकास दर गिरता है और भाजपा की सरकार जब आती है तो विकास दर बढ़ता है। बजट घाटा नियंत्रण, व्यापार घाटा नियंत्रण, एफडीआई में वृद्धि-सभी पैमानों पर भाजपा की सरकार अच्छा प्रदर्शन कर रही है।
लोकसभा चुनाव के समय हमने कहा था कि हमारी प्राथमिकता गरीबों को विकास की अग्रिम पंक्ति में लाना है। हमने जनधन योजना के तहत 15 करोड़ गरीब परिवारों का अकाउंट खुलवाकर उन्हें अर्थतंत्र से जोड़ा। उन्होंने कहा कि इस बजट के अंदर मोदी सरकार दो नई योजनाएं लेकर आई है, पहला साल के 12 रूप्ये प्रीमियम पर 2 लाख का दुर्घटना बीमा और दूसरा 330 रूप्ए पर 2 लाख का जीवन बीमा योजना।
यदि बेरोजगारी का समाधान कर लेते हैं तो गरीबी अपने आप दूर हो जाएगी। बेरोजगारी दूर करने के लिए मोदी सरकार ने अनेक प्रयास किए हैं। ‘मेक इन इंडिया’ और ‘स्किल डेवलपमेंट’ जैसी पहल बेरोजगारी दूर करने में बेहद कारगर साबित होंगी। ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम को विश्व के अन्य देशों से अच्छा रिस्पापंस मिला है। कृषि पर निर्भरता कम करने और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए हमने मुद्रा बैंक की योजना शुरू की। मुद्रा बैंक के जरिए 10 हजार से 10 लाख रूपये का लोन उपलब्ध कराने की योजना है।
बुनियादी ढांचे के अंतर्गत यूपीए के समय सड़क 5.3 प्रतिशत की रफ्तार से बन रही थी, अब 10.1 प्रतिशत बन रही है। यूपीए के समय बिजली उत्पादन 6 फीसदी थी अब बढ़कर 8.5 फीसदी हो गई है यानी 2.5 फीसदी की वृद्धि। दीनदयाल ग्रामीण ज्योती योजना के तहत 44,000 करोड़ दिए गए ताकि राज्यों को 24 घंटे बिजली मिले।
‘पहल योजना’ के तहत ़ लोगों को उनकी एलपीजी सब्सिडी की रकम सीधे उनके खाते में पहुंचाने की व्यवस्था शुरू कर दी गई है और प्रधानमंत्री के आग्रह पर 2.5 लाख लोगों ने सब्सिडी वाले एलपीजी कनेक्शन छोड़ दिया है।
प्रधानमंत्री सिंचाई योजना के तहत 14 प्रतिशत असिंचित भूमि को सिंचन के दायरे में लाया जाएगा। पहले कुदरती आपदा आती थी तो किसानों को सही मुआवजा नहीं मिलता था। हमने पहले के 50 फीसदी नुकसान के साथ-साथ 33 फीसदी नुकसान पर भी मुआवजा देना तय किया है।  मुआवजे का दायरा एक हेक्टेयर से बढ़ाकर दो हेक्टेयर कर दिया गया है। मिट्टी हेल्थ कार्ड के तहत कौन सी खाद कितनी मात्रा में डालनी है, खेत में कितना पानी कितने अंतराल पर डालनी है, कौन सा फसल अधिकतम फायदा देगा इसकी सलाह दी जाती है। राजस्थान में इसके लिए पायलट प्रोजेक्ट की शुरूआत हुई है। यूपीए के समय डब्ल्यूटीओ में एक समझौता हुआ था कि किसानों को एमएसपी नहीं दे पाएंगे। लेकिन हमने दृढ़तापूर्वक अपनी बात रखते हुए कहा कि किसानों के हितों को नजरअंदाज नहीं कर सकते। डब्ल्यूटीओ में हमारी जीत हुई। राजनीतिक इच्छाशक्ति का यह बेहतरीन उदाहरण है।
सुरक्षा, सम्मान, समृद्धि, संवाद और संस्कृति के आधार पर विदेश नीति तय करते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र भाई मोदी ने सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण देशों की यात्राएं कीं। केंद्र की मोदी सरकार ने एक ठोस रक्षा नीति बनाई है। हमने तीनों सेनाओं के साधनों के लिए 10 साल का एक रोडमैप तैयार कर उन्हें आश्वस्त किया है कि आप निश्ंिचत होकर सीमा की सुरक्षा करें।
   
(इंजी. अरूण कुमार जैन)

कार्यालय सचिव

नरेंद्र मोदी: 'शून्‍य' से 'शिखर' तक का सफर...




नरेंद्र मोदी: 'शून्‍य' से 'शिखर' तक का सफर...
साल 1950 में वाडनगर, मेहसाना, गुजरात में बेहद साधारण परिवार में जन्‍मे नरेंद्र मोदी भारी मतों से भारत के प्रधानमंत्री बने. एक चाय बेचने वाले कभी देश का पीएम भी बनेगा ये किसी ने सोचा नहीं था. मोदी ने राजनीति शास्त्र में एमए किया. बचपन से ही उनका संघ की तरफ खासा झुकाव था और गुजरात में आरएसएस का मजबूत आधार भी था. वे 1967 में 17 साल की उम्र में अहमदाबाद पहुंचे और उसी साल उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सदस्यता ली. इसके बाद 1974 में वे नव निर्माण आंदोलन में शामिल हुए. इस तरह सक्रिय राजनीति में आने से पहले मोदी कई वर्षों तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक रहे.

980 के दशक में जब मोदी गुजरात की भाजपा ईकाई में शामिल हुए तो माना गया कि पार्टी को संघ के प्रभाव का सीधा फायदा होगा. वे वर्ष 1988-89 में भारतीय जनता पार्टी की गुजरात ईकाई के महासचिव बनाए गए. नरेंद्र मोदी ने लाल कृष्ण आडवाणी की 1990 की सोमनाथ-अयोध्या रथ यात्रा के आयोजन में अहम भूमिका अदा की. इसके बाद वो भारतीय जनता पार्टी की ओर से कई राज्यों के प्रभारी बनाए गए.

मोदी को 1995 में भारतीय जनता पार्टी का राष्ट्रीय सचिव और पांच राज्यों का पार्टी प्रभारी बनाया गया. इसके बाद 1998 में उन्हें महासचिव (संगठन) बनाया गया. इस पद पर वो अक्‍टूबर 2001 तक रहे. लेकिन 2001 में केशुभाई पटेल को मुख्यमंत्री पद से हटाने के बाद मोदी को गुजरात की कमान सौंपी गई. उस समय गुजरात में भूकंप आया था और भूकंप में 20 हजार से ज्यादा लोग मारे गए थे.

मोदी के सत्ता संभालने के लगभग पांच महीने बाद ही गोधरा रेल हादसा हुआ जिसमें कई हिंदू कारसेवक मारे गए. इसके ठीक बाद फरवरी 2002 में ही गुजरात में मुसलमानों के खिलाफ़ दंगे भड़क उठे. इन दंगों में सरकार के मुताबिक एक हजार से ज्यादा और ब्रिटिश उच्चायोग की एक स्वतंत्र समिति के अनुसार लगभग 2000 लोग मारे गए. इनमें ज्यादातर मुसलमान थे. जब तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने गुजरात का दौर किया तो उन्होंनें उन्हें 'राजधर्म निभाने' की सलाह दी जिसे वाजपेयी की नाराजगी के संकेत के रूप में देखा गया.

मोदी पर आरोप लगे कि वे दंगों को रोक नहीं पाए और उन्होंने अपने कर्तव्य का निर्वाह नहीं किया. जब भारतीय जनता पार्टी में उन्हें पद से हटाने की बात उठी तो उन्हें तत्कालीन उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी और उनके खेमे की ओर से समर्थन मिला और वे पद पर बने रहे. गुजरात में हुए दंगों की बात कई देशों में उठी और मोदी को अमरीका जाने का वीजा नहीं मिला. ब्रिटेन ने भी दस साल तक उनसे अपने रिश्ते तोड़े रखे.

मोदी पर आरोप लगते रहे लेकिन राज्य की राजनीति पर उनकी पकड़ लगातार मजबूत होती गई. मोदी के खिलाफ दंगों से संबंधित कोई आरोप किसी कोर्ट में सिद्ध नहीं हुए हैं. हालांकि, खुद मोदी ने भी कभी दंगों को लेकर न तो कोई अफसोस जताया है और न ही किसी तरह की माफी मांगी है. महत्वपूर्ण है कि दंगों के चंद महीनों के बाद ही जब दिसंबर 2002 के विधानसभा चुनावों में मोदी ने जीत दर्ज की थी तो उन्हें सबसे ज्यादा फायदा उन इलाकों में हुआ जो दंगों से सबसे ज्यादा प्रभावित थे.

इसके बाद 2007 के विधानसभा चुनावों में उन्होंने गुजरात के विकास को मुद्दा बनाया और फिर जीतकर लौटे. फिर 2012 में भी नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा गुजरात विधानसभा चुनावों में विजयी रहे और अब केंद्र में अपने नेतृत्‍व में सरकार चला रहे हैं.

क्या आप जानते हैं, गुजरात में अपना जादू बिखेरने वाले नरेंद्र मोदी कभी साधु बनना चाहते थे? इतना ही नहीं एक वक्त था जब उन्होंने चाय की दुकान भी लगाई. मोदी के जीवन में इसी तरह के कई उतार-चढ़ाव आए. तो जानिए उनके जीवन से जुड़े दिलचस्प प्रसंग...

नरेंद्र मोदी बचपन में आम बच्चों से बिल्कुल अलग थे. काम भी अलग तरह का कर जाते थे. एक बार वो घर के पास के शर्मिष्ठा तालाब से एक घड़ियाल का बच्चा पकड़कर घर लेकर आ गए. उनकी मां ने कहा बेटा इसे वापस छोड़ आओ, नरेंद्र इस पर राजी नहीं हुए. फिर मां ने समझाया कि अगर कोई तुम्हें मुझसे चुरा ले तो तुम पर और मेरे पर क्या बीतेगी, जरा सोचो. बात नरेंद्र को समझ में आ गई और वो उस घड़ियाल के बच्चे को तालाब में छोड़ आए.

नरेंद्र मोदी को हम कई तरह के गेट अप में देखते हैं. दरअसल स्टाइल के मामले में मोदी बचपन से ही थोड़े अलग थे. कभी बाल बढ़ा लेते थे तो कभी सरदार के गेट अप में आ जाते थे. रंगमंच उन्हें खूब लुभाता था. नरेंद्र मोदी स्कूल के दिनों में नाटकों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे और अपने रोल पर काफी मेहनत भी करते थे.

नरेंद्र मोदी वड़नगर के भगवताचार्य नारायणाचार्य स्कूल में पढ़ते थे. पढ़ाई में नरेंद्र एक औसत छात्र थे, लेकिन पढ़ाई के अलावा बाकी गतिविधियों में वो बढ़चढ़कर हिस्सा लेते थे. एक तरफ जहां वो नाटकों में हिस्सा लेते थे, वहीं उन्होंने एनसीसी भी ज्वाइन किया था. बोलने की कला में तो उनका कोई जवाब नहीं था, हर वाद विवाद प्रतियोगिता में मोदी हमेशा अव्वल आते थे

बचपन में नरेंद्र मोदी को साधु संतों को देखना बहुत अच्छा लगता था. मोदी खुद संन्यासी बनना चाहते थे. संन्यासी बनने के लिए नरेंद्र मोदी स्कूल की पढ़ाई के बाद घर से भाग गए थे और इस दौरान मोदी पश्चिम बंगाल के रामकृष्ण आश्रम सहित कई जगहों पर घूमते रहे और आखिर में हिमालय पहुंच गए और कई महीनों तक साधुओं के साथ घूमते रहे.

नरेंद्र मोदी बहुत मेहनती कार्यकर्ता थे. आरएसएस के बड़े शिविरों के आयोजन में वो अपने मैनेजमेंट का कमाल भी दिखाते थे.
आरएसएस नेताओं का ट्रेन और बस में रिजर्वेशन का जिम्मा उन्हीं के पास होता था. इतना ही नहीं गुजरात के हेडगेवार भवन में आने वाली हर चिट्ठी को खोलने का काम भी नरेंद्र मोदी को ही करना होता था.

नरेंद्र मोदी का मैनेजमेंट और उनके काम करने के तरीके को देखने के बाद आरएसएस में उन्हें बड़ी जिम्मेदारी देने का फैसला लिया गया. इसके लिए उन्हें राष्ट्रीय कार्यालय नागपुर में एक महीने के विशेष ट्रेनिंग कैंप में बुलाया गया.

90 के दशक में नरेंद्र मोदी ने आडवाणी की सोमनाथ से अयोध्या रथ यात्रा में बड़ी भूमिका निभाई थी.
रेंद्र मोदी की स्टाइल सारे प्रचारकों से जुदा थी. वो दाढ़ी रखते थे और ट्रिम भी करवाते

90 के दशक में नरेंद्र मोदी ने आडवाणी की सोमनाथ से अयोध्या रथ यात्रा में बड़ी भूमिका निभाई थी. इसके बाद उन्हें उस वक्त के बीजेपी अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी की एकता यात्रा का संयोजक बनाया गया. ये यात्रा दक्षिण में तमिलनाडु से शुरू होकर श्रीनगर में तिरंगा लहराकर खत्म होनी थी.

2001 में जब गुजरात में भूकंप के आने से 20,000 लोग मारे गए तब राज्य में राजनीतिक सत्ता में भी बदलाव हुआ. दबाव के चलते तत्कालीन मुख्यमंत्री केशुभाई पटेल को अपना पद छोड़ना पड़ा. पटेल की जगह नरेंद्र मोदी को राज्य की कमान सौंपी गई और इसके बाद मोदी ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा.

वर्ष 2002 में गुजरात ही नहीं पूरे देश के इतिहास में वो काला अध्याय जुड़ गया जिसके बारे में किसी ने सोचा नहीं था. गोधरा में एक ट्रेन में सवार 50 हिंदुओं के जलने के बाद पूरे गुजरात में जो दंगे भड़के उसका कलंक मोदी आज तक नहीं धो पाए हैं.

दंगों में धूमिल हुई छवि के बावजूद वर्ष 2002 में हुए विधानसभा चुनाव में भी मोदी की जीत हुई.

गोधरा में एक ट्रेन में सवार 50 हिंदुओं के जलने के बाद पूरे गुजरात में जो दंगे भड़के उसका कलंक मोदी आज तक नहीं धो पाए हैं.

मुस्लिम विरोधी दंगों में करीब 1000 से 2000 लोग मारे गए. मोदी पर इल्जाम लगा कि उन्होंने दंगों को भड़काने का काम किया.
आरोप ये भी लगा कि वह चाहते तो दंगे रोक सकते थे लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया.
2012 में उन्हीं की मंत्री माया कोडनानी समेत 30 अन्य को 28 साल जेल की सजा सुनाई गई.
वर्ष 2005 में मोदी को अमेरिका ने वीजा देने से इनकार कर दिया.
हालांकि नरेंद्र मोदी इससे बिलकुल भी विचलित नहीं हुए.
नरेंद्र मोदी की राजनीतिक ताकत में लगातार इजाफा होता रहा.
बीजेपी के अग्रणी नेताओं में नरेंद्र मोदी की गिनती लंबे समय से होती रही है.
मोदी ने सत्ता संभालने के साथ ही खुद को राजनीतिक संगठन मजबूत करने और राज्‍य के विकास के कामों में लगा दिया.
उद्योग की बात हो या कृषि की, मोदी ने लोगों के सामने एक बेहतर विकल्‍प देने की कोशिश की. नतीजा यह रहा कि कई सरकारी और गैर-सरकारी संस्‍थाओं ने उनके काम की तारीफ की.
नरेंद्र मोदी बचपन से ही आरएसएस से जुड़े हुए थे. 1958 में दीपावली के दिन गुजरात आरएसएस के पहले प्रांत प्रचारक लक्ष्मण राव इनामदार उर्फ वकील साहब ने नरेंद्र मोदी को बाल स्वयंसेवक की शपथ दिलवाई थी. मोदी आरएसएस की शाखाओं में जाने लगे. लेकिन जब मोदी ने चाय की दुकान खोली तो शाखाओं में उनका आना जाना कम हो गया.
2007 में विधानसभा चुनाव में फिर मोदी की जीत हुई और वह दूसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री बने.
नरेंद्र मोदी शाकाहारी हैं. सिगरेट, शराब को कभी हाथ नहीं लगाया. वो आम तौर पर अपने आधी बाजू के कुर्ते में नजर आते हैं, लेकिन जब मौज में आते हैं तो सूट बूट में निकलते हैं किसी हीरो की तरह.

नरेंद्र मोदी तकनीक का इस्‍तेमाल भी बखूबी करते हैं. अगर आज फेसबुक और ट्विटर पर देखें तो सबसे ज्‍यादा उनके फॉलोअर्स मिल जाएंगे. इंटरनेट पर पॉपुलर नेताओं की सूची में वो अव्‍वल हैं.

वर्ष 2008 में मोदी ने टाटा को नैनो कार संयंत्र खोलने के लिए आमंत्रित किया. अब तक गुजरात बिजली, सड़क के मामले में काफी विकसित हो चुका था.
वर्ष 2008 में मोदी ने टाटा को नैनो कार संयंत्र खोलने के लिए आमंत्रित किया. अब तक गुजरात बिजली, सड़क के मामले में काफी विकसित हो चुका था. देश के धनी और विकसित राज्यों में उसकी गिनती होने लगी थी. मोदी ने अधिक से अधिक निवेश को राज्य में आमंत्रित किया.
नरेंद्र मोदी को पतंगबाजी का भी शौक है. सियासत के मैदान की ही तरह वो पतंगबाजी के खेल में भी अच्छे-अच्छे पतंगबाजों की कन्नियां काट डालते हैं.
नरेंद्र मोदी की सियासी शालीनता का भी कोई जवाब नहीं...
नरेंद्र मोदी परंपरागत परिधानों से हटकर मॉडर्न ड्रेस भी आजमा चुके हैं.
वर्ष 2012 तक मोदी का बीजेपी में कद इतना बड़ा हो गया कि उन्हें पार्टी के पीएम उम्मीदवार के रूप में देखा जाने लगा.
जब नरेंद्र मोदी ने एक खास तरह की टोपी पहनने से इनकार कर दिया, तो यह चर्चा का विषय बन गया.

31 अगस्त, 2012 को मोदी ने ऑनलाइन तरीके से वैब कैम के जरिए जनता के सवालों के जवाब दिए. ये सवाल देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी पूछे गए
22 अक्टूबर, 2012 को ब्रिटिश उच्चायुक्त ने मोदी से मिलकर गुजरात की तारीफ की और वहां निवेश किए जाने की बात की. इसके साथ दंगों के बाद बाधित हुए ब्रिटेन और गुजरात के संबंध फिर से बहाल हो गए.
22 अक्टूबर, 2012 को ब्रिटिश उच्चायुक्त ने मोदी से मिलकर गुजरात की तारीफ की और वहां निवेश किए जाने की बात की. इसके साथ दंगों के बाद बाधित हुए ब्रिटेन और गुजरात के संबंध फिर से बहाल हो गए.
20 दिसंबर, 2012 को मोदी ने फिर बहुमत हासिल किया और राज्य में तीसरी बार अपनी सत्ता का डंका बजाया.
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आपके लिए लिखी खास चिट्ठी, पढ़ी क्या ?




प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आपके लिए लिखी खास चिट्ठी, पढ़ी क्या ?
टीम डिजिटल मंगलवार, 26 मई 2015
अमर उजाला, नई दिल्ली

केंद्र की सत्‍ता में एक वर्ष पूरे होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को एक पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने अपनी सरकार की उप‌ल‌ब्धियां गिनाई हैं। लोकसभा चुनावों में स्पष्ट बहुमत पाने के बाद नरेंद्र मोदी ने पिछले वर्ष आज ही के दिन प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी।

भाजपा समेत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने पिछले वर्ष नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चुनाव लड़ा था। 30 सालों बाद किसी पार्टी ने स्पष्ट बहुमत पाया और राजग को 300 से अधिक सीटे मिलीं।

पिछले एक साल में कई वादों को पूरा न कर पाने और काला धन वापस लाने जैसे वादों को जुमला बता देने के कारण मोदी सरकार की आलोचना भी होती रही। हालांकि मोदी सरकार ने उन अलोचनाओं को दरकिनार अपनी उप‌ल‌ब्धियां गिनाने का 'मेगा प्लान' बनाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का देशवासियों के नाम लिखा पत्र उसी मेगा प्लान का हिस्सा है।

मोदी ने गिनाई एक साल की उप‌ल‌ब्धियां

मेरे प्यारे देशवासियों,
पिछले वर्ष आज के दिन जनता-जनार्दन के आशीर्वाद से मुझे प्रधानमंत्री का दायित्व मिला। मैं स्वंय को 'प्रधान सेवक' मानकर अपनी जिम्मेदारी इसी भावना से निभा रहा हूं। अंत्योदय हमारे राजनैतिक दर्शन का मूल मंत्र है। प्रमुख फैसले लेते समय हमेशा वंचित, गरीब, मजदूर और किसा न हमारी आंखों के सामने रहते हैं। जन-धन योजना में हर परिवार का बैंक खाता और प्रधानमंत्री जीवन-ज्योति बीमा योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना एवं अटल पेन्शन योजना इसी का प्रमाण हैं।

'अन्न दाता सुखी भवः' हमारी सर्वोच्‍च प्राथमिकता है। हमारे किसान अथक मेहनत कर देश को खाद्य सुरक्षा प्रदान करते हैं। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, सॉइल हेल्थ कार्ड, बिजली की बेहतर उपलब्धता, नई 'यूरिया नीति', कृषि विकास के लिए हमारी प्रतिबद्धता है। बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से पीड़ित किसानों के साथ हम मजबूती से खड़े रहे। सहायता राशि को डेढ़ गुना किया।

भ्रष्टाचारमुक्त, पारदर्शी, नीति-आधारित प्रशासन एवं शीघ्र निर्णय हमारे मूलभूत सिद्धांत हैं। पहले प्राकृतिक सम्पदा जैसे कोयला या स्पैक्‍ट्रम का आबंटन मनमानी से, चहेते उद्यो गपतियों को होता था। किन्तु देश के संसाधन देश की सम्पत्ति हैं। सरकार का मुखिया होने के नाते मैं उसका ट्रस्टी हूं। इसीलिए हमने निर्णय लिया कि इनका आबंटन नीलामी से होगा। कोयले के अब तक हुए आबंटन से लगभग तीन लाख करोड़ रुपए और स्पैक्ट्रम से लगभग एक लाख करोड़ रुपये की आमदनी होगी!

सुदृढ़ अर्थव्यवस्था के लिए भरोसेमंद सरकार आवश्यक होती है। जब हमारी सरकार बनी उस समय आर्थिक स्थिति डावांडोल थी। महंगाई तेजी से बढ़ रही थी। मुझे खुशी है कि हमारे प्रयासों से विगत वर्ष में भारत विश्व की तीव्रतम विकास वाली अर्थव्यवस्था बनी, महंगाई नियंत्रित हुई और पूरे वातावरण में नए उत्साह का संचार हुआ।

विश्वस्तर पर भारत की प्रतिष्‍ठा बढ़ी है। पूंजी निवेश बढ़ा है। 'मेक इन इंडिया' और 'स्किल इंडिया' अभियान का उद्देश्य हमारे युवाओं को रोजगार प्रदान कराना है। हमने मुद्रा बैंक की स्थापना की जिससे छोटे-छोटे रोजगार चलाने वाले भाई-बहनों को दस हजार रुपए से दस लाख रुपए तक के बैंक-ऋण सुलभ होंगे। हमने कालाधन वापस लाने का वादा किया था। सरकार बनते ही पहला निर्णय कालेधन पर एसआईटी गठन करने का था। फिर हमने विदेशों में कालाधन रखने वालों को कड़ी सजा देने के लिए कानून बनाया।

'स्वच्छ भारत अभियान' की सोच है कि बहू-बेटी को खुले में शौच न जाना पड़े पड़े, शौचालय के अभाव में बेटियां स्कूल न छोड़े और गंदगी से मासूम बच्चे बार-बार बीमार न पड़ें। बालकों की तुलना में बालिकाओं की गिरती संख्या बहुत चिंता का विषय है, इसलिए हमने ''बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ'' अभियान चलाया।

बताया गंगा सफाई के लिए क्या किया
सदियों से हमारी आस्था का केन्द्र जीवनदायिनी मां गंगा प्रदूषण-मुक्त हो इसलिए हमने 'नमामि गंगे' कार्यक्रम शुरू किया। हमारा इरादा है कि गांव की तस्वीर बदले और मूलभूत सुविधाएं जैसे प्रत्येक परिवार के लिए पक्का घर, चौबीस घंटे बिजली, पीने का शुद्ध पानी, शौचालय, सड़क और इंटरनेट की व्यवस्था हो जिससे लोगों का जीवनस्तर बेहतर हो। इन सबकी सफलता के लिए आपकी भागीदारी आवश्यक है।

हमने जोड़ने का काम किया है- देश की सीमाओं, बंदरगाहों और पूरे भारत को एक कोने से दूसरे कोने तक जोड़ने के लिए सड़कें और रेलवे को नया जीवन देने का प्रयास। लोगों को जोड़ ने के लिए 'डिजिटल इंडिया' कनेक्टिविटी। सभी मुख्यमंत्रियों के साथ 'टीम इंडिया' की अवधारणा भी दूरियां मिटाने की कोशिश है।

प्रथम वर्ष में विकास यात्रा की मजबूत नींव से देश ने खोया विश्वास पाया है। मुझे भरोसा है कि हमारे प्रयासों ने आपकी जिंदगी को छुआ होगा। यह मात्र शुरूआत है। देश आगे बढ़ने के लिए तैयार है। आइये… हम सब संकल्प लें कि हमारा हर कदम देशहित में आगे बढ़ें।

आपकी सेवा में समर्पित, जय हिन्द!
नरेन्द्र मोदी

शुक्रवार, 22 मई 2015

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह के भाषण के मुख्य बिन्दु

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह के भाषण के मुख्य बिन्दु

मैं सबसे पहले राजस्थान भाजपा अध्यक्ष और राजस्थान की नेता हमारी मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे जी को हृदय से बधाई देना चाहता हूं कि राजस्थान 75 लाख के सदस्यता के आंकडे को पार कर गया है। और इस समय कार्यकर्ताओं का समूह जो मैं सामने देख रहा हूं मुझे भरोसा है कि आने वाले वर्षों तक भारतीय जनता पार्टी के अलावा यहां किसी की कोई जगह नहीं होगी। 75 लाख के आंकड़े को यहां के गांव-गांव और कूचे-कूचे में फैले हुए हमारे लाखों कार्यकर्ताओं ने कठिन परिश्रम करके इस कार्य को सिद्ध किया है। मुझे मालूम है कि कितना कठिन काम था मगर जिस तरह का परिश्रम भाजपा के कार्यकर्ता ने किया है उसको दो हाथ जोड़कर वंदन करने के अलावा कोई पुरस्कार नहीं दिया जा सकता। मैं मंच से भाजपा राजस्थान के सबसे छोटे से छोटे कार्यकर्ता को मंच से वंदन करता हूं।

आज देश में भारतीय जनता पार्टी की पूर्ण बहुमत की सरकार बनी है। और मुझे कहने में कोई झिझक नहीं है कि राजस्थान की जनता के आशीर्वाद से ही पूर्ण बहुमत मिला है। राजस्थान में 25 की 25 सीटें राजस्थान की जनता ने भाजपा की झोली में डालकर भाई नरेन्द्र मोदी को देश का प्रधानमंत्री बनाने का रास्ता प्रशस्त किया है। एनडीए सरकार जो देश में बनी है वो सरकार एक ऐसे समय पर बनी जब देश के अंदर पीड़ा और हताशा का माहौल था। देश के अंदर दस साल के हर महीने में एक घोटाले था। कभी 2जी घोटाला, कभी सीडब्ल्यूजी घोटाला कभी सबमरीन खरीदने में घोटाला, कभी विमान खरीदने में घोटाला, कहीं एयरपोर्ट बनाने में घोटाला, कहीं टैंक खरीदने में घोटाला और अंत में तो कोयले का भी घोटाला आ गया था। चारो ओर घपलों और घोटालों की सरकार बनी थी। और उस घपलों और घोटालों की सरकार को देश की जनता ने बड़ी सूझबूझ से रास्ता दिखा दिया और एक सूझबूझ वाली सरकार बनाने का काम इस देश की जनता ने किया जो पूर्ण बहुमत की भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी है।

तीस साल के बाद देश के लोकतांत्रिक इतिहास के अंदर एक पूर्ण बहुमत की सरकार बनी है। और आजादी के बाद पहली बार गैर-कांग्रेसी पूर्ण बहुमत की सरकार बनी है। आज मई महीनें में सरकार का एक वर्ष पूरा होने जा रहा है। सरकार का एक वर्ष पूरा होने तक सरकार ने काफी काम कर लिए है। हमने इस तरफ भी ध्यान दिया है कि हमारे विरोधी हमारे विरूद्ध दुष्प्रचार का माहौल बना रहे है मगर मैं कार्यकर्ताओं से कहना चाहता हूं कि इन भ्रान्तियों में मत पडि़ए इस सरकार ने एक भी ऐसा काम नहीं किया कि भाजपा के कार्यकर्ता का सर नीचा हो जाए हर काम ऐसा किया है कि कार्यकर्ता गौरव के साथ लोगों के बीच जाए। जो सवाल उठाते हैं उनसे में पूछना चाहता हूं कि एक वर्ष होने जा रहा है एक घोटाला, एक घपला बता दीजिए तब तो मानेंगे कि आपकी बात सही है। भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने पिछले एक वर्ष के अंदर देश के कामकाज के अंदर से भ्रष्टाचार को निर्मूल करने का काम किया है बिना घपलो, घोटालों वाली सरकार देने का काम किया है। हमें कहते है कि कार्पोरेट घरानों की सरकार है मैं आपसे पूछना चाहता हूं सोनिया जी, आपके जमाने में 59 हजार करोड़ रूपये का कोयला किसने कार्पोेरेट घरानों को दे दिया था। दर्डा और जिंदल को किसने कोयला दे दिया था। भाजपा की सरकार ने नहीं दिया था आपकी सरकार ने दिया था। भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने तो पारदर्शिता से नीलामी की और 220 खदानें उसमें से भी 30 खदानों की नीलामी अभी हुई है और 2 लाख करोड़ रूपए देश के खजाने में जमा हुए है। अगर हम कार्पोरेट के हितैषी होते तो ये 2 लाख करोड़ रूपये कार्पोरेट से लेकर गरीबों की सेवा के लिए देश के खजाने में जमा नहीं करते। 2जी का आबंटन आपने घोटाले करके किया था हमने पारदर्शिता से किया 1 लाख 9 हजार करोड़ रूपये आज देश के खजाने में आ गया है, जो देश के किसान के काम आने वाला है।

मित्रों, इस सरकार ने आते ही एक साथ कई योजनाओं को शुरू करने का काम किया है। देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्रभाई ने 15 अगस्त को लालकिले की प्राचीर से भाषण करते हुए जन-धन योजना की घोषणा की थी। देश की 68 साल की आजादी के बाद जब भाजपा की सरकार बनी तब तक देश के 60 करोड़ लोग ऐसे थे जिनके परिवार में एक भी बैंक अकाउंट नहीं था। इन गरीबों की चिंता कांग्रेस ने नहीं की। उन गरीबों की चिंता भाजपा के नेता नरेन्द्र मोदी ने की है। और यह सरकार जन-धन योजना लेकर आई और 11 महीने के अंदर 14 करोड़ लोगों के घर में बैंक अकाउंट पहुंचाने का काम इस सरकार ने कर दिया। 14 करोड़ परिवार में अर्थतंत्र के साथ जुड़ने का काम इस सरकार ने किया। और इसके साथ ही वो हर जन-धन बैंक अकाउंट होल्डर को 12 रूपए में 2 लाख रूपए का एक्सीडेंट बीमा और 330 रूपए में लाइफ इश्योरेंस बीमा देने का काम भी भाजपा की सरकार ने किया है। यह सरकार गरीबों की सरकार रही है।

मित्रों, महंगाई को भी इस सरकार ने काफी हद तक कम किया है। भाजपा की सरकार ने पेट्रोल और डीज़ल के दामों में भारी कटौती की है। और महंगाई का थोक सूचकांक जो 7 प्रतिशत के आस-पास घूमता था उसको माइनस में ले जाने का काम ये भाजपा की मोदी सरकार ने किया है। मेक इन इंडिया के माध्यम से दुनियाभर के उद्योगपतियों को हिन्दुस्तान में उत्पादन करने के लिए एक प्लेटफार्म देने का काम भारतीय जनता पार्टी सरकार ने किया है। और इसके द्वारा बेरोजगार युवा को रोजगार मिलने वाला है। बेरोजगारी हटती है तो गरीबी अपने आप हटती है। और भाजपा की सरकार स्किल डेवलप्मेंट और मेक इन इंडिया के माध्यम से गरीबी हटाने में लगी हुई है।

मित्रों, काले धन का मसला वर्षों से चला आ रहा है। कोई कुछ नहीं करता। यूपीए की सरकार के पास ढाई साल से 600 से ज्यादा बैंक अकाउंट की सूचनाएं थी। उसकी जांच के लिए एसआईटी बननी थी। भाजपा की सरकार ने सरकार बनते ही पहली की कैबिनेट का पहला ही प्रस्ताव काले धन की जांच के लिए एसआईटी बनाने का किया। और वो सारी सूचनाएं एसआईटी को दे दी और आज उस पर जांच हो रही है। संसद में भाजपा की सरकार एक कानून लेकर आई है। काला धन ले जाने वाले, विदेश में रखने वाले, विदेश में संपत्ति बसाने वाले उनके लिए सजा का कोई प्रोविजन और प्रावधान नहीं था। नरेन्द्र मोदी सरकार ने उनको जेल के पीछे डालने का प्रावधान करके काले धन को विदेश ले जाने का रास्ता हमेशा के लिए बंद कर दिया है।

मित्रों, सीमा सुरक्षा वर्षों से हम देखते थे भारत इतना बड़ा देश है सवा सौ करोड़ की जनता का दुनिया में कितना सम्मान होना चाहिए। छोटे-छोटे देश हमारी सीमाओं के साथ छेड़खानी करते थे। आज मैं गर्व से कहना चाहता हूं कि किसी की हिम्मत नहीं है कि आंख उठाकर हिन्दुस्तान की सीमा पर देखे। शुरू-शुरू में थोड़ा प्रयास किया गया। पाकिस्तान की सरहद पर गोलीबारी हुई। पहले कुछ नहीं होता था। और अब यहां नरेन्द्र मोदी की भाजपा की सरकार है। यहां मूड बदला है वहां से गोली आती है यहां से गोला जाता है ईंट का जवाब पत्थर से दिया जाता है। और उसी का कारण है कि आज देश की सीमाएं सुरक्षित है। किसी की हिम्मत नहीं है कि देश की सीमाओं की तरह आंख उठाकर देख सके। यह भाजपा की सरकार ने किया है। हमारी सरकार ने आदर्श ग्राम की योजना लाकर गांव के विकास के लिए एक नया अध्याय शुरू किया है।

मित्रों, इस देश को दुनिया में 10 साल के अंदर सम्मान मिलना ही बंद हो गया था। आपको याद होगा 10 साल तक हमारे पूर्व प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह जी विदेश जाते थे तो क्या आपको पता चलता था क्या ? अभी श्री नरेन्द्र भाई विदेश जाते है, अमेरिका जाते है, जापान जाते है, भूटान जाते है लंका जाते है, नेपाल जाते है आस्ट्रेलिया, जापान, जर्मनी जहां-जहां गए। हजारो-हजारों के हुजूम ने भाजपा के इस नेता का विदेश की धरती पर स्वागत हुआ है। यही बताता है कि दुनिया में हिन्दुस्तान का सम्मान कितना बढ़ा है। और जब नरेन्द्र भाई यूएन एसेम्बली के अंदर और अमेरिका के स्टेडियम के अंदर हजारों की संख्या में देश की राष्ट्रभाषा हिन्दी में दुनिया को संबोधित करते है तो हिन्दुस्तान की छाती गज-गज फूल जाती है। पूरी दुनिया हिन्दुस्तान का सम्मान करती है। 21वीं शताब्दी हिन्दुस्तान की शताब्दी है वो दुनिया भूल गई थी यह 11 महीनों में भाजपा ने याद करा दिया है कि हमें कोई कम नहीं आंक सकता 21वीं शताब्दी भारत की शताब्दी है। हम दुनिया को नेतृत्व देने के लिए प्रस्तुत है। यह बात हमारी सरकार ने की है। विकास के लिए भाजपा की सरकार ने चहुंमुखी कार्य किए हैं। जब अटल जी की सरकार थी। जब सरकार आई पहले 4.1 प्रतिशत विकास दर था अटल जी 8.4 प्रतिशत छोड़कर गए थे। यूपीए ने फिर से 4.4 प्रतिशत करके हमें दे दिया है। 11 महीनों के अंदर 4.4 प्रतिशत विकास दर को 5.7 प्रतिशत तक पहुंचाने का काम भाजपा की सरकार ने किया है। इस सरकार ने सभी क्षेत्रों में विकास हो इसके लिए काम किए हैं। किसानों के लिए प्रधानमंत्री ऋण किसान योजना अभी राजस्थान के अंदर ही सोइल हेल्प कार्ड की योजना शुरू की जो देशभर के अंदर राजस्थान से शुरू होकर जाने वाली है। इसके माध्यम से किसान का खाद भी बचने वाला है पानी भी बचने वाला है और उर्जा भी बचने वाली है। किसानों को जब ऊपर से मुसीबत आती है तो काई रास्ता नहीं सूझता। नरेन्द्रभाई ने अतिवृष्टि और औलावृष्टि के लिए जो 50 प्रतिशत नुकसान का मानदंड था उसको कम करके 33 प्रतिशत पर लाने का काम किया है और मुआवजा भी डेढ़ गुना कर दिया है। जो अनाज खराब हो गया भारत सरकार ने उसको भी खरीदने का निर्णय लेकर किसानों के बुरे वक्त में भी साथ खड़े रहने का निर्णय लिया है। आज वसुंधरा जी ने भी राजस्थान के किसानों के लिए काफी अच्छी सहायता की घोषणा की और यही परिचायक है कि भाजपा की सरकारें किसानों के प्रति कितनी संवेदनशील है।

मित्रों, राजस्थान के अंदर वसुंधरा जी की सरकार पर राजस्थान की जनता ने बहुत कृपा की। आजादी के बाद भारतीय जनता पार्टी को सबसे ज्यादा 163 सींट वसुंधरा जी के नेतृत्व में इस बार मिली है। और उसके बाद सरकार ने लोगों की आकांक्षाओं के अनुरूप काम करना जारी रखा। और एक के बाद एक जन-समर्थन सिद्ध करने के मौके आए। लोकसभा आई 100 में से 100 प्रतिशत परिणाम 25 में से 25 सीटें भाजपा को मिली। स्थानीय निकायों के चुनाव आए 100 में से 75 प्रतिशत परिणाम भाजपा जीती। सब जगह विजय ही विजय हुई। जब जनता समर्थन करती है तो इसका मतलब है कि सरकार अच्छे से ही नहीं चल रही बल्कि बहुत अच्छे से चल रही है तभी जनता जाकर समर्थन देती है। कई नई जरूरते वसुंधरा जी की सरकार ने की भामाशाह योजना के माध्यम से महिलाओं का सशक्तिकरण, रोजगारी के डेवल्पमेंट के लिए स्किल डेवल्पमेंट, औद्योगिक विकास के लिए विशेष प्रयास आदि किये है। अब राजस्थान के अंदर विकास की शुरूआत हो गई है।

मित्रों, हर पंचायत में तालाब को एक आदर्श तालाब बनाने की योजना मैं देश में जहां भी जाता हूं हर सरकार को कहता हूं यह करने जैसा कार्य है राजस्थान सरकार कर रही है आप भी कीजिए।

मित्रों, अभी-अभी कुछ समय पहले भारतीय जनता पार्टी की चाहे प्रदेश की सरकार हो या देश की सरकार हो इसके खिलाफ हमारी विपक्षी पार्टियां अलग-अलग प्रकार के अनर्गल आरोप मढ़ रही है कांग्रेस पार्टी कहती है कि हम किसानों का ध्यान नहीं रखते मैं कांग्रेस के नेताओं को कहना चाहता हूं कि आपके परिवारजनों ने राजस्थान और हरियाणा के किसानों की अरबो-खरबों की जमीनें हड़प कर ली। आपको किसान के लिए एक शब्द भी बोलने का अधिकार नहीं है। क्या कहते हैं आप ? जिन्होंने किसानों की जमीनें ले ली वो बोलते हैं। भाजपा की सरकारें चाहे केन्द्र की सरकार हो चाहे राजस्थान की सरकार हो, चाहे देश में फैली हुई 13 राज्यों की सरकारें हो, किसानों के दिक्कत में भारतीय जनता पार्टी की सरकारें किसानों से कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी रहेंगी। भाजपा का कार्यकर्ता इन बातों में न आए, इन भ्रामक प्रचार में न फंसे घर-घर जाए। इस महासंपर्क अभियान का उपयोग करके फैल जाइए पूरे राजस्थान के अंदर और गौरव से कहिए चाहे देश की सरकार हो, प्रदेश की सरकार हो एक भी भ्रष्टाचार का आरोप इस सरकार पर आज तक नहीं हुआ, भ्रष्टाचारविहीन सरकार भारतीय जनता पार्टी की सरकार है। भाजपा की सरकार ने देश और दुनिया में भारत का सम्मान बढ़ाने का काम किया है। औद्योगिक विकास को बढ़ावा दिया है, रोजगारी को बढ़ावा दिया है, गरीबी को दूर करने के लिए काम किया है, महंगाई को कम किया है, कोई ऐसी बात नहीं जिसके कारण भाजपा के कार्यकर्ता को झिझकना पड़े।

मित्रों, दुनिया का सबसे लोकप्रिय नेतृत्व आज भारतीय जनता पार्टी के पास है। नरेन्द्रभाई दुनिया में जहां भी जाते हैं, जिस प्रकार का स्वागत होता है वो दिखाता है कि हमारे पास दुनिया का सबसे लोकप्रिय नेतृत्व है। दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी हम हैं। आत्मविश्वास से लैस होकर लोगों में फैल जाइए। घर-घर जाकर संपर्क करिए और आने वाले दिनों के लिए एक मजबूत भारतीय जनता पार्टी की नींव रखिए।

मित्रों, देश में नरेन्द्रभाई के नेतृत्व में और यहां वसुंधरा जी के नेतृत्व में हमने जो नारा दिया था कांग्रेस मुक्त भारत और कांग्रेस मुक्त राजस्थान उसे साकार करके हमारे कार्यकर्ता ने एक कदम और चला है। अब समय है पार्टी का विस्तार करने का 75 लाख कार्यकर्ताओं की फौज अगर हम ढंग से संगठित कर लेते हैं तो लंबे अर्से तक भाजपा को कोई परास्त नहीं कर सकता।

मित्रों, आज मैं इस विशाल कार्यकर्ता समागम में इतना ही कहना चाहता हूं कि हम सब भारतीय जनता पार्टी के सिद्धांतों को लेकर भारतीय जनता पार्टी की योजनाओं को लेकर और भारतीय जनता पार्टी की सरकारों के अच्छे कामों को लेकर लोगों के बीच में जाए। 1 मई से तीन महीनें तक लोकसंपर्क का जो अभियान है उसे आप सफल बनाइए। और एक लंबे समय तक भाजपा के माध्यम से राजस्थान को देश का उत्कृष्ट प्रदेश बनाने के लिए हम सब कार्यरत हो।

भारत माता की जय! भारत माता की जय!

!वंदे मातरम्!

कांग्रेस के दस वर्ष के मुकाबले मोदी का एक वर्ष बेहतर

मोदी सरकार का एक वर्ष


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पिछले एक साल में मोदी सरकार ने दुनिया भर में बढ़ाया भारत का मान: जेटली
केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने शुक्रवार को यहां कहा कि पिछले एक साल में देश में शासन में आमूलचूल बदलाव देखा गया है। यह बदलाव सिर्फ निर्णायक रूप से ही नहीं, बल्कि तेजी, स्पष्टता और पारदर्शिता के संदर्भ में भी है, जिससे वैश्विक स्तर पर देश को सम्मान मिला है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के पूरे होने जा रहे एक वर्ष के मौके पर आयोजित संवाददाता सम्मेलन में जेटली ने कहा कि विकास और वृद्धि दर बढ़ाने के लिए लगभग रोजाना और साप्ताहिक आधार पर फैसले किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले साल 26 मई को पदभार संभाला था।

उन्होंने कहा,'विरोध की स्थिति में भी निर्णय लेने की क्षमता मोदी सरकार की विशेषता है। सरकार को किस दिशा में आगे बढ़ना है, उसके बारे में पूरी स्पष्टता है और यह रास्ता वृद्धि और विकास की ओर जाता है।'

उन्होंने कहा कि रेलवे, बिजली, कोयला, खनन, ग्रामीण सड़कें, दूरसंचार, राजमार्ग, शहरी विकास, वित्तीय सेवाएं, सब्सिडी और पेट्रोलियम जैसे क्षेत्रों में पारदर्शी तरीके से कुछ तेज और दूरगामी फैसले किए गए हैं।

जेटली के मुताबिक,'इस सरकार की मुख्य विशेषता भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन, निर्णय लेने की क्षमता और पारदर्शी तंत्र और बिना किसी विसंगति के फैसला लेना है। इन सभी चीजों से देश का कारोबारी सूचकांक ऊपर बढ़ रहा है। '

जेटली ने कहा,'आज हम विश्व की सबसे तेजी से विकसित हो रही अर्थव्यवस्था हैं। लेकिन हमारे लिए यही पर्याप्त नहीं है। उन्होंने आगे कहा, "लोग अब यह पूछने लगे हैं कि हम आठ प्रतिशत से अधिक तेजी से विकास क्यों नहीं कर रहे हैं? तीव्र विकास की यही बेचैनी भारत की वास्तविक संभावना है।'

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मोदी सरकार का पहला वर्ष, देश के विकास में मील का पत्थर – मुख्यमंत्री
Posted On: May 20, 2015
जयपुर, 20 मई। मुख्यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार का एक वर्ष कामयाबी भरा रहा है। इस एक वर्ष में केन्द्र सरकार द्वारा उठाये गये कदम देश के विकास में मील के पत्थर साबित हुए हैं। उन्होंने कहा कि मोदी जी की एनडीए सरकार का एक वर्ष पूरा होने के उपलक्ष्य में 26 से 31 मई तक जनकल्याण पर्व पूरे प्रदेश में मनाया जायेगा। इस पर्व के माध्यम से एनडीए सरकार के एक वर्ष के कार्यकाल की उपलब्धियों को जन-जन तक पहुंचाया जायेगा। इस कार्यक्रम में प्रदेश के सभी कार्यकर्ता और सभी जनप्रतिनिधि भाग लेंगे।

श्रीमती राजे मोदी सरकार के 26 मई को एक वर्ष पूर्ण होने पर प्रदेश में आयोजित होने वाले कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर भाजपा प्रदेश कार्यालय में बुलाई गई बैठक को सम्बोधित कर रही थीं।

मुख्यमंत्री हर शुक्रवार को कार्यकर्ताओं से मिलेंगी
मुख्यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे ने कहा कि वे प्रत्येक शुक्रवार कार्यकर्ताओं एवं जनप्रतिनिधियों से मिलेंगी। उन्होंने कहा कि प्रत्येक शुक्रवार को वह अपने सरकारी आवास 13 सिविल लाइंस पर दोपहर पूर्व संगठन के कार्यकर्ताओं तथा दोपहर बाद संगठन से जुडे़ जनप्रतिनिधियों से मिलेंगी।

उन्होंने कहा कि जनसुनवाई के लिए उनकी सरकार ने पहली बार स्थानीय स्तर पर व्यवस्था की है, जो ब्लाॅक और जिला स्तर पर की जा रही है। राजस्थान सम्पर्क पोर्टल और हैल्पलाइन के माध्यम से भी आमजन की समस्याओं के शीघ्र और सरल समाधान की व्यवस्था की गई है, जिससे आम लोगों को राजधानी के चक्कर नहीं लगाने पड़ें और उनका समय व पैसा भी बर्बाद न हो। जनसुनवाई की व्यवस्था मुख्यमंत्री आवास पर भी है, जहां अधिकारी लोगों के अभाव-अभियोग सुनकर त्वरित निस्तारण करते हैं। इसके अलावा कार्यकर्ताओं की जनसुनवाई के लिए पार्टी कार्यालय में मंत्री नियमित रूप से जनसुनवाई कर रहे हैं।

सभी चुनाव हों एक साथ
मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकसभा, विधानसभा, पंचायतीराज और नगरीय निकायों के चुनाव अलग-अलग समय पर होने के कारण काफी समय आचार संहिता लगी रहती है। बार-बार चुनाव होने के कारण राजकोष पर अधिक भार पड़ता है। साथ ही सरकारों को काम करने का भी समय कम मिलता है। इसलिये देश में सभी चुनाव एक साथ होने चाहिए।

जनकल्याण पर्व को लेकर प्रदेश भाजपा कार्यालय में आयोजित इस बैठक को पार्टी के राष्ट्रीय सहसंगठन मंत्री श्री सौदान सिंह, प्रदेशाध्यक्ष श्री अशोक परनामी तथा गृहमंत्री श्री गुलाबचंद कटारिया ने भी सम्बोधित किया।

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कांग्रेस के दस वर्ष के मुकाबले मोदी का एक वर्ष बेहतर : बराला
चंडीगढ़।
हरियाणा प्रदेश भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अध्यक्ष सुभाष बराला ने आज कहा कि केंद्र की मोदी सरकार का मात्र एक वर्ष का प्रदर्शन पिछली कांग्रेस सरकार के 10 वर्षों से कहीं बेहतर रहा है। श्री बराला ने यहां जारी एक बयान में कहा कि केंद्र सरकार ने एक वर्ष के भीतर अनेक अहम निर्णय लिये और कई महत्वपूर्ण योजनाएं शुरू की जिनमें स्मार्ट सिटी कार्यक्रम, डिजि़टल इंडिया, मेक इन इंडिया, स्वच्छ भारत मिशन, स्किल इंडिया, आदर्श ग्र्राम योजना, सुशासन, जन धन योजना, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, विभिन्न बीमा योजनाएं और शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि मेक इन इंडिया और डिजि़टल इंडिया कार्यक्रमों से देश विश्व के अग्रणी देशों की पंक्ति में जगह बनाने जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि मोदी सरकार की नीतियों एवं कार्यक्रमों से जहां देश की जनता का सरकार में विश्वास वहीं विश्व में देश की साख भी बढ़ी है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के इस एक वर्ष के दौरान 47 विधेयक पारित कर संसदीय कार्यप्रणाली में एक अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल की है। सरकार ने विदेश नीति के मामले में भी नये आयाम स्थापित किये हैं। 

मंगलवार, 19 मई 2015

भाजपा ने कांग्रेस पर देश को लूटने का आरोप लगाया

19 May 2015 05:05:35 PM IST    
भाजपा ने कांग्रेस पर देश को लूटने का आरोप लगाया

       
भाजपा ने कांग्रेस पर देश को लूटने का आरोप लगाया
कांग्रेस पर हमला बोलते हुए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने पूर्व संप्रग सरकार पर आरोप लगाया कि उसने घोटालों के जरिए देश को ‘लूटने’ का काम किया.

उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार ने अपने एक साल के शासन में बड़ी मात्रा में राजस्व जुटाया है.
शाह ने कहा, ‘‘संप्रग सरकार ने जहां 76 घोटाले कर देश के 10 लाख करोड़ रूपये लूटे, वहीं नरेंद्र मोदी नीत राजग सरकार ने 230 खदानों की नीलामी कर दो लाख करोड़ रूपये और स्पेक्ट्रम आवंटन से एक लाख करोड़ रूपये का राजस्व जुटाया है.’’
  
वह शासन में कथित भ्रष्टाचार को लेकर यूडीएफ सरकार के खिलाफ पार्टी के आंदोलन के तहत भाजपा के ‘सचिवालय घेराव’ कार्यक्रम की शुरूआत कर रहे थे.शहर में भारी बारिश के बावजूद बैठक हुई.
  
प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं पर कांग्रेस के ताने के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि मोदी को विदेश यात्राओं के दौरान मिला सम्मान किसी खास व्यक्ति या भाजपा के लिए नहीं, बल्कि देश के लोगों के लिए है. उन्होंने कहा, ‘‘यह सम्मान किसी खास व्यक्ति या भाजपा सरकार के लिए नहीं है, बल्कि देश के 125 करोड़ लोगों के लिए है.’’
  
यह उल्लेख करते हुए कि पिछले एक साल में भारत विभिन्न देशों के साथ संबंध सुधारने में सफल हुआ, उन्होंने कहा कि पहले जब कोई प्रधानमंत्री विदेश जाता था, तो उसे बहुत से लोग नहीं जानते थे. शाह ने कहा, ‘‘लेकिन अब, यदि नरेंद्र मोदी अमेरिका, जर्मनी, फिजी, या भूटान, अथवा जहां भी जाते हैं, हजारों की भीड़ उनका स्वागत करती है.’’

रविवार, 17 मई 2015

लुप्त हो चुकी प्राचीनतम सरस्वती नदी की जलधारा बह निकली'

14 मई 2015
लुप्त हो चुकी प्राचीनतम सरस्वती नदी की जलधारा बह निकली'
लुप्त हो चुकी प्राचीनतम सरस्वती नदी की जलधारा बह निकली'
यमुनानगर के मुगलवाली गांव के पास खुदाई में मिला जल प्रवाह
डा. गणेश दत्त (हरियाणा)
प्राचीनतम और हजारों साल पहले लुप्त हो चुकी सरस्वती नदी अपने उद्गम स्थल से फिर जलधारा के रूप में उस समय बह निकली, कई दिनों से नदी के उद्गम स्थल आदिबद्री क्षेत्र में गांव मुगलवाली के पास चल रही खुदाई में गत दिवस अचानक जलधारा फूट पडी।


खुदाई का शुभारंभ हरियाणा विधानसभा के अध्यक्ष कंवरपाल ने 21 अप्रैल कोशुरू किया था। जल प्रवाह  निकलने का समाचार मिलते ही जिला उपायुक्त डा.एस.एस. फुलिया सहित जिला प्रशासन के अन्य अधिकारी भी मौके पर पहुंचे।

यहां उपायुक्त की उपस्थिति में एक अन्य स्थान पर खुदाई की गई। वहां भी 8-9 फुट पर पानी निकला, सरस्वती नदी जिसे अब तक सैटलाइट के माध्यम से ही देखा जा रहा था और हजारों साल पहले धरा से लुप्त हो चुकी माना जाता रहा। लेकिन इसकी उपस्थिति की पुष्टि पुराणों में स्पष्ट बताई गई कि सरस्वती नदी का वजूद है।




लेकिन उस समय यह सपना साकार हो गया जब यह जलधारा अचानक बह निकली। अब यह
शोध का विषय भी बन गया है कि क्या सरस्वती नदी की जलधारा स्वयं भी कुछ ऊपर
उठ रही है? क्योंकि कुछ जगह थोडी खुदाई में ही सरस्वती का जल बहने लगता है।

यमुनानगर के आदिबद्री क्षेत्र सरस्वती का उद्ग्म स्थल माना जाता है। वहां से पांच किलोमीटर दूर रूलाहेडी से इस नदी की खुदाई शुरू की गई थी। माना जा रहा था कि यहां एक बडा जलाशय बनाया जाएगा और पहाडों पर होने वाली बरसात और सोम नदी के पानी को यहां इक्टठा कर सरस्वती नदी को एक बडी नदी के रूप में प्रवाहित किया जाएगा। लेकिन आज इस पावन धरती पर करिश्मा ही देखने को मिला।

जब रूलाहेडी और मुगलवाली के बीच जब खुदाई हो रही थी, तो नरेगा के तहत जो मजदूर लगे थे जब सात फुट गहरा खोदा जाने के बाद एक फावडा जमीन पर मारा तो  नीचे से सरस्वती के पावन जल की धाराएं फूट पडी। इस बात को देख मजदूर हैरान हो गए और उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को भी मौके पर बुला लिया।


लेकिन जब अधिकारियों ने यह करिश्मा देखा तो उनसे रहा नही गया और उन्होंने स्वयं यहां नतमस्तक होकर  सरस्वती की खुदाई में अपना योगदान देते हुए खुदाई की। जिसमें उपायुक्त डा.एस एस फुलिया व अन्य  प्रशासनिक अधिकारी भी शामिल रहे। प्रत्यक्षदर्शियों की माने तो ज्यों-ज्यों खुदाई हुई त्यों त्यों जल की धाराएं जमीन से फूटनी शुरू हो गई। इस कार्य में समाज के हर वर्ग ने बिना किसी भेदभाव के सहयोग किया है और महज 15 दिनों में ही यह खुदाई अढाई से तीन किलोमीटर तक पहुंच गई थी और खुदाई कार्य निरंतर जारी है।

जल प्रवाह से पहले इक्का दुक्का जगह पानी की कुछ बूंदे जरूर टपकी थी। लेकिन जब सरस्वती धरातल पर फुट पडी तो जिला प्रशासन गदगद होता नजर आया। जानकारी के अनुसार यमुनानगर के 42 गांवों में इसका सर्वें किया गया है। इसके बाद सरस्वती की धारा कुरुक्षेत्र जिला से होते हुए कई स्थानों से गुजरती हुई आगे निकलती है।


8 फुट पर सरस्वती धारा और 85 फुट इलाके का भू-जल स्तर बता दें कि इस इलाके में भू-जल स्तर काफी नीचे है। लेकिन यह एक करिश्मा ही है कि जहां पर सरस्वती नदी है उसके आस पास कई पानी के टयूबवैल भी लगे हुए हैं और उनमें उनमें भूमिगत जलस्तर 85 फुट से नींचे है। लेकिन सरस्वती खुदाई स्थल पर महज 7 फुट पर ही पानी मिला, जिससे सरस्वती विराजमान होने की पुष्टि हुई। इलाके के लोगों में उत्साह के साथ एक विश्वास पैदा हो गया कि यहां सरस्वती के बारे में सुनते थे अब उन्हें सरस्वती के साक्षात दर्शन भी हो गए हैं।

सरस्वती शोध संस्थान भगीरथ की भूमिका में, भाजपा सरकार ने दिखाई तत्परता

सरस्वती  नदी शोध संस्थान के अध्यक्ष दर्शनलाल जैन ने सरस्वती नदी के महत्व को समझा और इसे धरा पर लाने का संकल्प लिया। यह काम अपने हाथ में लिया था।

उन्होंने 1999 के दौरान जब केन्द्र में एन डी ए की सरकार थी और जगमोहन पर्यटन मंत्री थे तो करोडों रुपया  खर्च करके देश के कई भागों में सरस्वती की खोज में खुदाई का काम हुआ था। लेकिन यूपीए की सरकार ने इस नेक कार्य को रद्दी की टोकरी में डाल दिया। जिससे एक सार्थक कार्य ही नहीं रुक गया बल्कि करोड़ों रुपए खर्च हुए भी बेकार हो गए। अब केन्द्र व प्रदेश में सरकार बदली तो काम फिर शुरू हुआ और उसके सार्थक परिणाम निकले हैं। इस संबंध में दर्शन लाल जैन ने कहा कि यह पहला कदम है। अभी काफी काम होना है। उन्होंने कहा कि सरस्वती नदी संजीवनी बनेगी, पानी की कमी पूरी होगी, बरसात के दिनों में बाड़ का प्रकोप कहर नहीं भरपा पाएगा। इससे इलाका ही खुशहाल नहीं होगा

देश भी समृद्ध बनेगा। उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की कार्यशैली की सराहना की।


राजस्व रिकॉर्ड में मौजूद है नदी
सरस्वती नदी कोलेकर किए गए सर्वें में कई आश्चर्यजनक तथ्य भी सामने आए हैं। जिला उपायुक्त डा.एसएस फुलिया ने बताया कि सरस्वती नहीं को धरातल पर लाने के चलते जब राजस्व रिकार्ड खंगाला गया तो रिकाॅर्ड में सरस्वती नदी के बहने का स्थान मौजूद मिला। सर्वें में राजस्व विभाग, पंचायती विभाग, सिंचाई विभाग की मदद
ली गई। इसके अलावा सेटेलाइट व अन्य तकनीकी सुविधाओं से भी जमीन को खंगाला गया। इस दौरान रिकाॅर्ड में पाया गया कि जिले के कईं गांवों में आज भी रास्ता छोड़ा गया है। जहां से पुराने समय में सरस्वती नदी निकलती थी।

उन्होंने बताया कि सरस्वती नदी को धरातल मिलने से जिले का सौंदर्यकरण बढ़ेगा वहीं पर्यटन की दृष्टि से भी जिले का नाम होगा। जिला पंचायत अधिकारी ने बताया कि सरस्वती नदी का सर्वें उद्म स्थल से जिला यमुनानगर के कुरुक्षेत्र के साथ लगते अंतिम गांव तक किया गया है।

जमीन के नीचे बहता है जल : इसरो
 इसरो के मुताबिक मां सरस्वती की जलधारा अब भी जमीन के नीचे बहती है, जिसका नक्शा सैटेलाईट
के माध्यम से गूगल पर देखा जा सकात है। इसी के आधार पर अब हरियाणा ने देहरादून की एक लैब से संपर्क कर सरस्वती के जल को जमीन के ऊपर लाने के लिए प्रयास शुरु कर दिए हैं।
साभार: न्यूज़ भारती 

मंगलवार, 12 मई 2015

नकारात्मक पत्रकारिता समाज के लिए घातक- केतकर



देश के समग्र विकास के लिये मीडिया का सकारात्मक होना आवश्यक – जे नंद कुमार जी
मेरठ (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख जे नंद कुमार जी ने कहा कि देश के समग्र विकास के लिये मीडिया का सकारात्मक होना अत्यंत आवश्यक है. तथ्यों के साथ कोई छेड़छाड़ न हो पत्रकार को समाचार लेखन के दौरान इसका विशेष ध्यान रखना चाहिये. जे नंद कुमार जी विश्व संवाद केंद्र मेरठ द्वारा नारद जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित पत्रकार सम्मान समारोह में संबोधित कर रहे थे.

उन्होंने कहा कि आज पत्रकारिता के क्षेत्र में कुछ लोग जिम्मेदारी का निर्वहन ठीक प्रकार से कर रहे हैं, वहीं कुछ लोग समाचार को तोड़ मरोड़कर केवल टीआरपी के लिये ही लेखन एवं वाचन कर रहे हैं जो राष्ट्रहित एवं पत्रकारिता के लिये ठीक नहीं है. आज देश के एक बड़े वर्ग को मीडिया से अपेक्षा है कि मीडिया उनके लिये समाज प्रहरी का कार्य करेगा. उन्होंने कहा कि नारद जी इस दृष्टि से बहुआयामी व्यक्तित्व वाले सृष्टि के प्रथम संवाददाता थे. वे सर्वश्रेष्ठ सम्प्रेषणकर्ता माने गये हैं. वे सर्वत्र संचार करते थे तथा सर्वत्र ही विश्वसनीय थे. वर्तमान समय में भी पत्रकार को नारद जी की तरह बहुआयामी तथा सबके लिये विश्वसनीय होना पड़ेगा.

इससे पूर्व राष्ट्रदेव के सम्पादक अजय मित्तल ने कहा कि ज्येष्ठ कृष्ण द्वितीया 1826 ईस्वी में हिन्दी पत्रकारिता का उदय हुआ. उदन्तमार्तण्ड भारत का पहला हिन्दी समाचार पत्र है, जो नारद जयन्ती के दिन ही प. जुगलकिशोर जी ने शुरु किया था. आजादी के आंदोलन में तत्कालीन पत्रकारों एवं समाचार पत्रों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. कहा कि समाचार पत्र और पत्रकारों का सर्वोपरि कार्य समाज का हित देखना है. इसी के अनुसार समाचारों का लेखन एवं प्रसारण होना चाहिये.
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विश्व संवाद केन्द्र के प्रमुख एवं राष्ट्रदेव के प्रबन्ध सम्पादक सुरेन्द्र सिंह ने आद्य् सम्वाददाता नारद जी जीवन चरित्र पर प्रकाश डाला. कार्यक्रम में जनवाणी के उपसम्पादक पुष्पेन्द्र कुमार, चौ. चरण सिंह विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के प्रवक्ता डॉ मनोज कुमार श्रीवास्तव, वरिष्ठ पत्रलेखक श्याम सिंह माछरा तथा दैनिक भास्कर के छायाकार आशीष कन्नौजिया को सम्मानित किया गया. कार्यक्रम के अध्यक्ष मयंक अग्रवाल ने पत्रकारिता के महत्व की चर्चा की. कार्यक्रम का संचालन डॉ. प्रशान्त कुमार ने किया. धन्यवाद ज्ञापन विश्व संवाद केन्द्र न्यास के अध्यक्ष आनन्द प्रकाश अग्रवाल ने किया.
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अर्ध सत्य दिखाना देश, समाज के साथ धोखा: डॉ कृष्ण गोपाल
नई दिल्ली, मई 10: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ कृष्ण गोपाल ने कहा कि अर्ध सत्य दिखाना देश व समाज के साथ धोखा है और समाचार जगत ने इससे बचना चाहिए। कार्यक्रम में मानुषी की संस्थापक संपादक मधु पूर्णिमा किश्वर, फोटो जर्नलिस्ट संकर्शन मलिक, टीवी रिपोर्टर यतेंद्र शर्मा, सोशल मीडिया एक्टिविस्ट प्रवीण शुक्ला को नारद सम्मान 2015 से सम्मानित किया गया।


संघ के सह सरकार्यवाह इंद्रप्रस्थ विश्व संवाद केंद्र दिल्ली द्वारा कांस्टीट्यूशन क्लब में नारद जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित पत्रकार सम्मान समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में सेंट्रल यूरोपियन न्यूज के इंडिया एडिटर शांतनु गुहा रॉय विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे।

कृष्ण गोपाल ने कहा की वर्तमान में पत्रकारिता का क्षेत्र सुनामी के दौर से गुजर रहा है। समाचार जगत में मान-सम्मान, चकाचौंध सबकुछ है, पर, इसमें यथार्थ और सत्यता को भी टिकाए रखना है। वर्तमान समय में समाचार को सनसनीखेज बनाने की कोशिश करते हैं, आधे सत्य पर पर्दा डालकर आधा सत्य दिखाने से द्वेष की भावना बढ़ती है, देश की छवि को नुकसान पहुंचता है, यह देश और समाज के साथ धोखा भी है। समाचार में सनसनी पैदा करना समाचार की पवित्रता के भी विपरीत है।


कृष्ण गोपाल ने कहा कि समाचार जगत त्याग, परिश्रम, निष्ठा, समर्पण की भूमिका से खड़ा होता है। देश में अनेक महानुभावों ने अपने योगदान, बलिदान से समाचार जगत को यशस्वी बनाया है। कीर्तिमान स्थापित किए हैं। देश में समाचार पत्रों की महान परंपरा रही है। पराधीनता के दौर में भी सत्य के अन्वेषण के लिये अनके लोग खड़े हुए। सत्य को जनता के समक्ष लाने, सत्य के अन्वेषण को सर्वोच्च स्थान प्रदान किया। उन्होंने अंग्रेजों की लूट का देशहित में निर्भीकता के साथ खुलासा किया। मदन मोहन मालवीय, गणेश शंकर विद्यार्थी, सरीखे अन्य व्यक्तित्व देश हित में सोचते थे, उनमें सत्य के अन्वेषण का जुनून था, परिश्रम और बलिदान के लिये हमेशा तैयार रहते थे। अंग्रेज सरकार अत्याचार करती थी, लेकिन समाचार जगत का स्तंभ प्रामाणिकता के साथ देश में खड़ा रहा। सूची में एक नाम नहीं, कई बड़े नाम शामिल हैं, समाचार पत्रों के संपादकों ने जेल की यात्रा की, अत्याचार सहन किए। देश हित में, सत्य के अन्वेषण के लिये कुछ लोगों ने अपनी संपत्ति बेचकर समाचार पत्र निकाला, कमाई करने या संपत्ति बनाने के लिये नहीं।

डॉ कृष्ण गोपाल जी ने उदाहरण देते हुए कहा कि मीडिया ने चार चर्चों पर हमले के मामलों को बढ़ा- चढ़ाकर प्रस्तुत किया, जिससे विश्व में भारत की छवि अल्पसंख्यकों के प्रति नकारात्मक रूप में सामने आई, मानों अल्पसंख्यकों के साथ बुरा हो रहा हो। मीडिया ने समाचार में आधा सत्य छिपाया, पुलिस के अनुसार इसी अवधि के दौरान 458 मंदिरों, 25 मस्जिदों पर भी हमले हुए, मीडिया को इन आंकड़ों को भी सामने रखना चाहिए था। इसी प्रकार मीडिया में महिलाओं के प्रति अत्याचारों को भी बढ़ा चढ़ाकर दिखाया जाता है, सनसनी फैलाने के लिये जाति का उल्लेख किया जाता है, मानो पूरा समाज ही बुरा हो। यूरोपीय देशों में महिलाओं के प्रति अत्याचारों का प्रतिशत हमसे काफी अधिक है, लेकिन वहां का मीडिया सनसनी नहीं फैलाता, इससे हमें सीख लेने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि महर्षि नारद पत्रकार जगत के आदि पुरुष हैं। किसी भी लोभ-लालच से दूर, संपत्ति संचयन से दूर, निस्वार्थ भाव, हर व्यक्ति से संबंध, निरंतर भ्रमणशील, और सभी को खबर देने का कार्य करते थे। वर्तमान में आदर्श समाचार पत्रों में नारद जी के यह गुण विद्यमान होते हैं। पत्रकारिता लोभ-लालच से दूर, निस्वार्थ होनी चाहिए।

इस अवसर पर डॉ। कृष्ण गोपाल ने इन्द्रप्रस्थ विश्व संवाद केंद्र के नये वेब पोर्टल “” का उद्घाटन किया।
उन्होंने कहा कि सकारात्मक व सत्यता पर आधारित समाचारों से समाज का विश्वास भी बढ़ता है, समाचार जगत की पवित्रता की श्रेष्ठता भी बनी रहती है। क्षेत्र की चुनौतियों के समाधान पर मिलकर कार्य करना है, साथ ही समाचार की महत्ता, सत्यता पर विवेक के साथ विचार करना है।

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि एवं इंडिया एडिटर सेंट्रल यूरोपियन न्यूज के शान्तनु गुहा रॉय ने कहा कि हम खबर की खोज में काफी पीछे छूट गए हैं, खबर खूंढने, तलाशने का काम कम कर दिया है। उन्होंने कहा कि मीडिया का गलत उपयोग कहीं न कहीं मालिक ही करते हैं, रिपोर्टर नहीं। हमारा मीडिया एग्रेसिव व प्रोग्रेसिव है, लेकिन हम बेलेंस क्रिएट नहीं कर पा रहे हैं।

कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार प्रभु चावला, पूर्व प्रधानमंत्री वाजपयी के मीडिया सलाहकार रहे अशोक टंडन, भारत के समाचार पत्रों के पंजीयक एसएम खान, आईटीएमएन के संपादक विक्रम बहल, आगरा विश्व विद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. के एन त्रिपाठी, इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय की प्रो वाइस चांसलर डॉ. पुष्पा त्रिपाठी, भारत प्रकाशन के प्रबंध निदेशक विजय कुमार, पाञ्चजन्य के संपादक हितेश शंकर, ऑर्गनाइजकर के संपादक प्रफुल्ल केतकर सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित थे
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नकारात्मक पत्रकारिता समाज के लिए घातक- केतकर
जयपुर, 10 मई। अंग्रेजी साप्ताहिक पत्रिका आर्गेनाइजर के संपादक प्रफुल्ल केतकर ने कहा कि नकारात्मक पत्रकारिता समाज के लिए घातक है। इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता है, इसके खिलाफ सोशल मीडिया में इसकी प्रतिक्रिया दिखाई देती है। उन्होंने पत्रकारों का आह्वान करते हुए कहा कि नारद जी के आदर्शों को अपनाते हुए सत्यांवेशी, राष्ट्रवादी और सबके मन में नारद जगाने वाली पत्रकारिता की आवश्यकता है। वे रविवार को विश्व संवाद केन्द्र की ओर से पिंक सिटी प्रेस क्लब में आयोजित नारद जयंती एवं पत्रकारिता सम्मान समारोह में बोल रहे थे।

केतकर ने कहा कि नारद जी को लेकर गलत अवधारणाएं प्रतिस्थापित की गई है, उन्हें बदलने की आवश्यकता है। नारद सूक्त की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि मतों में विभिन्नता व अनेकता है, यही पत्रकारिता का मूल सिद्धांत है। किसी भी मत को मानने से पहले स्वयं उसकी अनुभूति करना आवश्यक है। नकारात्मक पत्रकारिता की बढ़ती प्रवृति पर चिंता व्यक्त करते हुए केतकर ने कहा कि इसे सभी विद्वानों ने नकारा है, इसकी भूमिका समाज में विष के समान होती है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता का मूल उद्देश्य लोक शिक्षण और सत्य की खोज होना चाहिए। आज पत्रकारिता के माध्यम से सूचनाओं का सही ढंग से प्रचार करते हुए सही बिंदुओं को जोड़ते हुए उनका भाष्य करने की आवश्यकता है।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पंजाब केसरी के संपादक एवं सांसद अश्विनी कुमार ने कहा कि बॉलिवुड ने नारद के चरित्र को ठीक ढंग से प्रस्तुत नहीं किया। नारद जी ने स्पष्टवादिता की पत्रकारिता की है। वे सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में भ्रमण करते हुए उचित स्थान पर सूचनाएं देते थे। आज की पत्रकारिता पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि पहले पत्रकारिता मिशन हुआ करती थी, लेकिन अब यह व्यवसाय बन गई है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र, निडर, न्यायप्रियता जैसे सिंद्धांत लोकतंत्र के चौथे स्तंभ से उड़ने लगे हैं। उन्होंने पत्रकारिता के लिए अपने परिवार द्वारा दिए गए बलिदानों का भी जिक्र किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ पत्रकार एवं राजस्थान पत्रिका के पूर्व संपादक विजय भंडारी ने कहा कि पत्रकारिता एक पवित्र कार्य है, यह व्यवसाय नहीं है। इसे पूरे मनोयोग से एक मिशन की तरह करना चाहिए। राजस्थानी कहावत दूध भी रहे और दूधिया भी रहे का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आज के दौर में मालिक को भी नुकसान नहीं हो और जनता की आवाज भी समाज तक पहुंचे ऐसी पत्रकारिता की आवश्यकता है। पत्रकार को वर्तमान परिस्थितियों में पतली गली से निकलकर अपना काम करना चाहिए।

इस मौके पर पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले पत्रकार अरविन्द सिंह शक्तावत (राजस्थान पत्रिका), योगेश शर्मा (दैनिक भास्कर),दिनेश शर्मा (ई टीवी), प्रकाश चौहान (दैनिक नव ज्योति), संतोष शर्मा (फ़ोटो जॉर्नलिस्ट), टीना शर्मा (राजस्थान पत्रिका समूह) और जयपुर नेशनल यूनिवर्सिटी से बीजेएमसी में प्रथम स्थान पाने वाली कु. हर्षिता और आईसीजी से बीजेएमसी में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली कु. अंकिता सक्सेना को भी सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की शुरूआत में विश्व संवाद केन्द्र के सचिव विवेक कुमार ने विश्व संवाद केन्द्र का वार्षिक प्रतिवेदन रखा और अंत में विश्व संवाद केन्द्र के अध्यक्ष प्रताप राव ने आभार प्रकट किया।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया , सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी तीन योजनाओं का उद्घाटन




कोलकाता. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी तीन योजनाओं का उद्घाटन कर दिया। ये योजनाएं हैं-प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना और अटल पेंशन योजना। प्रधानमंत्री ने इस मौके पर कहा, 'इन तीनों योजनाओं की औपचारिक शुरुआत एक जून से होनी है। लेकिन औपचारिक शुरुआत से पहले ही बैंकों ने इन योजनाओं को लागू कर दिया है। मैं आपको बताना चाहूंगा कि इस साल एक मई से 7 मई के बीच ही 5 करोड़ 5 लाख लोगों ने इन तीनों योजनाओं का लाभ उठा लिया है।' पीएम ने कहा कि देश में जन धन योजना के तहत 15 करोड़ बैंक खाते खोले गए। देश के 115 शहरों में इन योजनाओं का एक साथ लॉन्च किया गया। इसके लिए एनडीए सरकार के 10 मंत्री बिहार और सात मंत्री उत्तर प्रदेश में मौजूद रहे। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मुंबई में इसकी शुरुआत की।
इन योजनाओं पर नजर डालिए:
प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY)
कौन ले सकता है फायदा? 
जो लोग 18 से 50 साल के हैं और जिनके पास बैंक खाते हैं। इसके तहत 55 साल की उम्र तक बीमा कवर रहेगा।
प्रीमियम 
330 रुपए सालाना। एक किश्त में बचत खाते से राशि काट ली जाएगी।
रिस्क कवर  
किसी भी वजह से मौत होने पर दो लाख की राशि परिवार को दी जाएगी।
प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY)
कौन ले सकता है फायदा?
जो लोग 18 साल से 70 साल की उम्र के हैं और जिनके पास बैंक खाता है।
प्रीमियम
12 रुपए सालाना।
रिस्क कवरेज
दुर्घटना में मौत होने या हादसे में दोनों आंखें या दोनों हाथ या दोनों पैर खराब होने पर दो लाख रुपए मिलेंगे। एक आंख या एक हाथ या एक पैर खराब होने पर एक लाख रुपए मिलेंगे।
कैसे होगा प्रीमियम का भुगतान
बीमा लेने वाले आवेदक के बैंक खाते से प्रीमियम की राशि अपने आप कट जाएगी।
दोनों बीमा योजनाओं की तुलना कीजिए:
खासियतPMJJBYPMSBY
किसे होगा फायदा18-50 साल के बैंक खाताधारक18-70 साल के बैंक खाताधारक
प्रीमियम330 रुपए/सालाना12 रुपए/सालाना
रिस्क कवरमौत होने पर दो लाखहादसे में मौत पर दो लाख
प्रीमियम का भुगतानसाल में एक बार बैंक खाते सेसाल में एक बार बैंक खाते से

सोमवार, 11 मई 2015

पोखरण 2 : प्रधानमंत्री वाजपेयी का देश को दिया सुरक्षा कबच

पोखरण 2 भारत के परमाणु परीक्षण


प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी ने पूरे विश्व  की चुनौती तथा प्रतिबंधों  की चिंता किये बिना परमाणु परिक्षण कर देश को स्वाभिनं और सुरक्षा प्रदान की  

भारत ने सन् १८ मई, १९७४ में पोखरण में पहला परमाणु परीक्षण किया। दूसरा परमाणु परीक्षण सन् 1998 में पोखरन में ही हुआ। उस समय भारत सरकार ने घोषणा की थी कि भारत का परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण कार्यो के लिये होगा और यह परीक्षण भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिये किया गया है। बाद में ११ और १३ मई, १९९८ को पाँच और भूमिगत परमाणु परीक्षण किये और भारत ने स्वयं को परमाणु शक्ति संपन्न देश घोषित कर दिया। इनमें ४५ किलोटन का एक तापीय परमाणु उपकरण शामिल था जिसे प्रायः पर हाइड्रोजन बम के नाम से जाना जाता है। ११ मई को हुए परमाणु परीक्षण में १५ किलोटन का विखंडन उपकरण और ०.२ किलोटन का सहायक उपकरण शामिल था।

भारत ने मई 11 और मई 13, 1998 को राजस्थान के पोरखरण परमाणु स्थल पर पांच परमाणु परीक्षण किये थे जिनमें 45 किलोटन का एक तापीय परमाणु उपकरण शामिल था जिसे आमतौर पर हाइड्रोजन बम के नाम से जाना जाता है. मई 11 को हुए परमाणु परीक्षण में 15 किलोटन का विखंडन उपकरण और 0.2 किलोटन का सहायक उपकरण शामिल था.

इसी प्रकार 13 मई 1998 को भी 0.5 किलोटन और 0.3 किलोटन के उपकरण का परीक्षण किया था. तत्कालीन रक्षा मंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार कलाम के अलावा उस समय परमाणु उर्जा आयोग के अध्यक्ष आर चिदंबरम और भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र के निदेशक रहे अनिल काकोडकर ने पोखरण-2  परमाणु परीक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.
पोखरण.दो परमाणु परीक्षण पर उठे विवाद पर विराम लगाने की कोशिश के तहत पूर्व राष्ट्रपति ए पी जे अब्दुल कलाम ने कहा कि परीक्षण पूरी तरह से सफल थे और इससे वांछित परिणाम मिले. कलाम ने कहा कि परीक्षण के बाद दो प्रयोगात्मक परिणामों (1) मौके और इसके आसपास भूकंपीय मापन और (2) परीक्षण स्थाल पर परीक्षण के बाद रेडियोधर्मिता के मापन के आधार पर विस्तृत समीक्षा की गई. डीआरडीओ के तत्कालीन महानिदेश रहे कलाम ने कहा कि इन आंकड़ों से परियोजना दल इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि तापीय परमाणु परीक्षण के वांछित डिजाइन लक्ष्य को प्राप्त कर लिया गया है.

पोखरण-2 परीक्षण सफल थे: प्रधानमंत्री   Published: Saturday, August 29, 2009,
          रामसर। पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे.अब्दुल कलाम के बाद अब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी पोखरण-2 परमाणु परीक्षण को सफल बताया है। उनके अनुसार वर्ष 1998 के परमाणु परीक्षणों पर "अनावश्यक विवाद" खड़ा किया जा रहा है। प्रधामनंत्री ने कहा कि "पूर्व राष्ट्रपति ए.पी.जे.अब्दुल कलाम पहले ही स्पष्टीकरण देते हुए इसे सफल करार दे चुके हैं। पोखरण परीक्षणों के बारे में अनावश्यक विवाद खड़ा किया जा रहा है।" रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) के वैज्ञानिक के. संथानम के पोखरण-2 परमाणु परीक्षणों के विफल रहने के दावे पर बाड़मेर से 20 किलोमीटर दूर रामसर में राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना शिविर के दौरे के दौरान टिप्पणी करते हुए प्रधानमंत्री ने पत्रकारों से यह कहा।

रविवार, 11 मई, 2008
'परमाणु परीक्षण ने देश को मज़बूत किया'

पोखरण : इसी स्थान पर परमाणु परीक्षण किए गए थे
भारत में 1998 में किए गए परमाणु परीक्षणों के दस साल पूरे होने पर पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने कहा है कि परमाणु हथियारों से देश मज़बूत हुआ है. उड़ीसा की यात्रा पर गए डॉक्टर कलाम ने कहा कि परमाणु परीक्षण करने का फ़ैसला बहुत महत्वपूर्ण था.

उन्होंने कहा, "11 मई को परमाणु परीक्षण करने का भारत सरकार का फ़ैसला बहुत ही अहम था जिसने देश को मज़बूती दी." डॉक्टर कलाम उस समय रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) के प्रमुख थे और तत्कालनी प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के वैज्ञानिक सलाहकार भी. डॉक्टर कलाम ने 11 और 13 मई को हुए परीक्षणों में मुख्य भूमिका निभाई थी. 11 मई को परमाणु परीक्षण करने का भारत सरकार का फ़ैसला बहुत ही अहम था जिसने देश को मज़बूती दी


एपीजे अब्दुल कलाम
पूर्व राष्ट्रपति ने उस समय को याद करते हुए कहा कि परमाणु परीक्षणों के बाद कई देशों ने भारत के ख़िलाफ़ प्रतिबंध लगा दिए लेकिन इससे भारत और शक्तिशाली ही बना.

पोखरण पर राजनीति
पोखरण परमाणु परीक्षण की दसवीं वर्षगांठ पर राजनीति भी तेज़ हो गई है. पोखरण परीक्षण के समय देश के गृह मंत्री रहे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता लालकृष्ण आडवाणी ने सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी पर आरोप लगाया है कि वो इस ऐतिहासिक मौके को अहमियत नहीं दे रही है.
उन्होंने कहा कि ऐसा करके कांग्रेस पार्टी पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का अपमान कर रही है जिन्होंने पहली बार वर्ष 1974 में पोखरण में परमाणु परीक्षण करने का फ़ैसला किया था. भाजपा नेता ने कहा कि सरकार का फ़ैसला रक्षा बलों और देश के वैज्ञानिकों का अपमान है.