शुक्रवार, 1 मई 2015

मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने कांगेस झूठ पकड़ा

कांगेस जब भी सत्ता से उतर जाती है तभी झूठ का सहारा लेकर भाजपा की सरकारों को बदनाम करने में जूट जाती हैं ! उनका एक झूठ हल ही में जबलपुर न्यायलय ने पकड़ा है !!

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अरे अरे ये क्या हुआ ? 

उच्च न्यायालय ने तो दिग्विजय सिंह जी को जालसाज करार दे दिया !


कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह को आज मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की जबलपुर खंड पीठ ने तगड़ा झटका दिया है | दिग्विजय सिंह ने मध्यप्रदेश के मुख्य मंत्री शिवराज सिंह चौहान पर आरोप लगाया था कि भ्रष्टाचार के पर्याय बन चुके व्यापम घोटाले में उनकी संलिप्तता है | इसके प्रमाण स्वरुप दिग्विजय सिंह ने एक एक्सेल स्प्रेडशीट भी कोर्ट को सोंपी थी |
ये दस्तावेज प्रस्तुत करते हुए दिग्विजयसिंह ने आरोप लगाया था कि 2007 और 2013 के बीच चिकित्सा और अन्य विभागों के लिए हुई भर्ती परीक्षा में रिश्वत लेकर भर्तियाँ की गईं | किन्तु आज उच्च न्यायालय ने न केवल इन आरोपों को सिरे से नकार दिया, बल्कि दिग्विजय सिंह द्वारा प्रस्तुत किये गए दस्तावेजों को कूट रचित माना | स्मरणीय है कि उक्त घोटाले की जांच उच्च न्यायालय की निगरानी में ही की जा रही थी | मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने दिग्विजय सिंह के आरोपों को जालसाजी के रूप में आज स्वीकार कर लिया ।
फरवरी में दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया ने एक संयुक्त प्रेस वार्ता में आरोप लगाया था कि मुख्य मंत्री के इशारे पर पुलिस ने महत्वपूर्ण सबूतों के साथ छेड़छाड़ की | उन्होंने लगाए गए आरोपों की सीबीआई द्वारा जांच किये जाने की भी मांग की थी | सबूत के तौर पर उन्होंने एक कंप्यूटर की हार्ड डिस्क पर लोड एक्सेल स्प्रेडशीट प्रस्तुत की थी, जिसमें उम्मीदवारों की सिफारिश करने वालों में शिवराज सिंह चौहान का भी नाम बताया था | अदालत ने उनके द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज, हार्ड डिस्क व पेन ड्राइव को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा था | फोरेंसिक रिपोर्ट में अदालत को बताया गया कि वे सब कूट रचित जालसाजी से तैयार किये गए हैं ।
सरकार के प्रवक्ता श्री नरोत्तम मिश्र ने उच्च न्यायालय के निर्णय का स्वागत किया है, वहीँ प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नंदकुमार सिंह ने दिग्विजय सिंह पर जालसाजी का मुक़दमा दायर करने की मांग की है | 

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