शनिवार, 6 जून 2015

गोधरा में कैसे गुम हो गए सैकड़ों पाकिस्तानी ? - आईबीएन-7

बड़ा खुलासा: गोधरा में कैसे गुम हो गए सैकड़ों पाकिस्तानी?
June 05, 2015  नवज्योत आईबीएन-7
नई दिल्ली।
आईबीएन 7 ने एक वर्ल्ड एक्सक्लूसिव खुलासा किया है इस खुलासे की कहानी का एक सिरा जुड़ा है पाकिस्तान से और दूसरा गुजरात के गोधरा से। आप ये जानकर हैरान रह जाएंगे कि अचानक गोधरा आने वाले पाकिस्तानी नागरिकों की गिनती 10 गुना बढ़ गई। 2014 में कुल 2026 पाकिस्तानियों ने गोधरा का रुख किया यानी हर दिन औसतन 6 पाकिस्तानी नागरिक गोधरा पहुंचे।
सवाल उठता है क्यों? दरसअल, गोधरा में 13 साल पहले जो कुछ हुआ,  उसका  जिक्र भी नहीं करना चाहते यहां के लोग। उस दशहत को भुला देना चाहते हैं यहां के लोग जो कभी इस शहर की तकदीर बन चुकी थी।
बड़ा खुलासा: गोधरा में कैसे गुम हो गए सैकड़ों पाकिस्तानी? 2014 में कुल 2026 पाकिस्तानियों ने गोधरा का रुख किया यानी हर दिन औसतन 6 पाकिस्तानी नागरिक गोधरा पहुंचे।

लेकिन कोई है जो वे नाजुक जज्बात फिर कुरेदना चाहता है और उन लोगों का रिश्ता है हमारे उस पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान से है। ये खबर पहले भी आती रही हैं कि 2002 के गोधरा दंगों को पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई ने हवा दी थी। लेकिन अब एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने देश की खुफिया एजेंसियों को भी चौंका दिया है।

आखिर क्या हो रहा है गोधरा में, आखिर कैसे पाकिस्तान टू गोधरा का एक नया चौंकाने वाला रूट तैयार हो रहा है? 2012 में 105 पाकिस्तानी नागरिक गोधरा आए थे। 2013 में ये आंकड़ा 876 तक पहुंच गया यानी करीब आठ गुना बढ़ गया। वहीं 2014 में गोधरा आने वाले पाकिस्तानियों की गिनती बढ़कर हो गई 2026 तक यानी दोगुनी से भी ज्यादा।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक हर दिन करीब 6 पाकिस्तानी नागरिक गोधरा आते रहे। इन आंकड़ों को देखकर आपके जेहन में भी कई सवाल खड़े हो रहे होंगे। आखिर अचानक गोधरा में पाकिस्तानी नागरिकों की दिलचस्पी कैसे और क्योंकर बढ़ गई, आखिर पाकिस्तानी नागरिकों ने भारत आने के लिए गोधरा को ही इतना क्यों चुना, क्या ये महज इत्तेफाक था या फिर कुछ और?
जाहिर है गोधरा में पाकिस्तानी नागरिकों की तेजी से बढ़ती तादाद 2012 में 105 से लेकर 2014 में 2026 होने ने देश की खुफिया एजेंसियों को भी चकरा दिया, चौंका दिया। लिहाजा देश की कई एजेंसियां इस कहानी का सिरा तलाशने में जुट गईं।
पंचमहल के एसपी राघवेंद्र वत्स के मुताबिक ये एक बड़ा स्कैंडल चल रहा है। जांच करने पर पता चला कि पाकिस्तानी विजिटर्स की संख्या इतनी बढ़ गई। गहरी जांच के बाद पता चला कि पाकिस्तानी विजिटर्स अपने फायदे के लिए हमारे प्रोसीजर का बेजा इस्तेमाल कर रहे हैं।
पाकिस्तानी नागरिकों का यूं बेहद संवेदनशील शहर गोधरा में यूं दिलचस्पी लेना गंभीर था। सो इसकी जांच गुजरात पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप को सौंपी गई। लंबी-चौड़ी पड़ताल के बाद जांच एजेंसी के हाथ एक बड़ा सुराग लगा। ये सुराग एक गहरी साजिश की ओर इशारा कर रहा था। ये बता रहा था कि आखिर पाकिस्तान से गोघरा आने के लिए कानून से खिलवाड़ तक किया जा रहा था लेकिन अब भी दिमाग में ये प्रश्न जरूर कौंध रहा होगा कि आखिर ये पाकिस्तानी गोधरा क्यों आ रहे हैं, गोधरा ही क्यों?
सवाल बड़ा है कि आखिर ये पाकिस्तानी नागरिक गोधरा ही क्यों आए? लेकिन उस सवाल ये भी बड़ी है वो साजिश, जो इन पाकिस्तानियों ने भारत आने के लिए रची। सच ये है कि इनमें से ज्यादातर पाकिस्तानी नागरिकों के दस्तावेज फर्जी थे। उन्होंने गोधरा में जिन लोगों से पहचान का दावा किया था, वो भी फर्जी था। उनके दस्तावेजों में जिन भारतीय अधिकारियों के दस्तखत थे, जिन सरकारी दफ्तरों की मुहर थी। वो भी फर्जी थी।
आखिर साल 2014 में गोधरा आने वाले 2 हजार से ज्यादा पाकिस्तानियों में क्या कुछ ऐसे भी चेहरे हैं जिनके इरादे नेक नहीं थे। बदनीयत से गुजरात के इस शहर में आने का मकसद क्या था? खुफिया एजेसियों की जांच आगे बढ़ती जा रही थी।
इस साजिश की पहली कड़ी खुली, एक पाकिस्तानी नागरिक से जो फर्जी स्पॉन्सरशिप के सहारे गोधरा आया था। उसके स्पॉन्सरशिप लेटर पर गेजेटेड अफसर के साइन फर्जी पाए गए और ये साइन गोधरा के ही एक सरकारी स्कूल के प्रिंसिपल ने किए थे। इस अवैध लैटर के दम पर ही उस पाकिस्तानी नागरिक ने भारत का वीजा लिया था।
जांच आगे बढ़ी तो पांच चेहरे पकड़ में आए। गोधरा पुलिस ने पांच लोगों को धर दबोचा  और इसी के साथ गोधरा आए पाकिस्तानियों के दस्तावेज खंगालने का सिलसिला शुरू हो गया। इस जांच में एक और चौंका देने वाला सच सामने आया, एक पाकिस्तानी नागरिक के स्पॉन्सरशिप लैटर पर शहर के एसडीएम के साइन थे। बाकायदा स्टैम्प भी लगा हुआ था, लेकिन एसडीएम ने बताया कि उन्होंने ऐसा कोई दस्तावेज साइन किया ही नहीं था।
पंचमहल के एसपी राघवेंद्र वत्स ने इस मामले पर  प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि ये एक गंभीर मामला है  खासकर राष्ट्रीय सुरक्षा को देखते हुए। पिछले सालों से मैं विजिटर्स की संख्या में जो उछाल आया है। वो फर्जी दस्तावेज की वजह से है।
धीरे-धीरे पाकिस्तान टू गोधरा पर पड़ी धुंध छंटती जा रही थी। ये साफ हो चला था कि कुछ पाकिस्तानियों ने भारत और खास तौर पर गोधरा आने के लिए फर्जी दस्तावेज तक बनवाए, भारतीय कानून की आंखों में धूल झोंकी। मगर वो गोधरा क्यों आना चाहते थे, क्या ये सिरा पूरी साजिश का सिर्फ ट्रेलर मात्र था?
अब सवाल ये है कि आखिर ये सब क्यों किया गया, क्यों उन पाकिस्तानी नागरिकों को भारत आने के लिए फर्जी दस्तावेज देने पड़े? साफ है कि उनमें से ज्यादातर पाकिस्तानियों की नीयत में खोट था। जांच एजेंसियों की मानें तो 2014 में गोधरा पहुंचे 2026 पाकिस्तानी नागरिकों में करीब 1500 नागरिकों के दस्तावेज फर्जी थे। बेशक बिना जांच पड़ताल उन पाकिस्तानी नागरिकों को भारत की वीजा देना, इस्लामाबाद के भारतीय दूतावास की लापरवाही है लेकिन ये भी सच है कि ये पूरी साजिश पाकिस्तान से रची गई। सैकड़ों नागरिकों के फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए।
साजिश ये नहीं है कि पाकिस्तानी नागरिक भारत आ रहे हैं। ये भी नहीं है कि वो नागरिक गोधरा पहुंच रहे हैं बल्कि साजिश ये है कि उनमें से ज्यादातर नागरिक अवैध दस्तावेजों के सहारे हिन्दुस्तान पहुंच रहे हैं।
जांच एजेंसियों के मुताबिक 2014 में 2026 पाकिस्तानी नागरिक गोधरा पहुंचे। जिसमें से करीब 1500 पाकिस्तानियों के दस्तावेज फर्जी थे। अब सवाल ये उठता है कि आखिर वो फर्जी दस्तावेज बने कैसे, भारत आने में उनकी मदद किसने की? ये समझने से पहले, ये देखना जरूरी है कि पाकिस्तानी नागरिकों के भारत आने के लिए नियम क्या हैं?
इस्लामाबाद में भारतीय दूतावास की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक नियम कुछ ऐसे हैं। पाकिस्तानी नागरिकों को एक स्पॉन्सरशिप सर्टिफिकेट की जरूरत होती है जो ऑनलाइन मिल जाता है। इस फॉर्म में भारत आने वाले शख्स को अपनी तस्वीर के साथ अपनी पूरी जानकारी देनी पड़ती है। उसके बाद स्पॉन्सर को अपने शहर के किसी क्लास वन ऑफीसर यानी डीएम, एसएसपी, एसडीएम जैसे अधिकारियों अपनी पहचान का सबूत देना होता है, जिससे ये साबित हो कि स्पॉन्सर उसी शहर का रहने वाला है।
नियम के मुताबिक पाकिस्तान में भारतीय दूतावास ऐसे तमाम आवेदनों की जांच करता है। फिर पाकिस्तानी नागरिक को तय समय के लिए भारत का वीजा दिया जाता है, लेकिन गोधरा आए सैकड़ों पाकिस्तानियों ने इन नियमों की धज्जियां कैसे उड़ाईं?
जांच एजेंसियों को ऐसे कई पाकिस्तानी नागरिकों के दस्तावेज मिले। जिनमें न उनके स्पॉन्सर की तस्वीर थी, न अधिकारियों के साइन थे और न सरकारी दफ्तर की स्टैंप। खुफिया एजेंसियां लगातार ये इनपुट दे रही हैं कि आतंकी अपने मंसूबों को पूरा करने के लिए किसी महिला का इस्तेमाल कर सकते हैं।
पाकिस्तान से गोधरा आई मारिया की कहानी ने पुलिस के भी होश उड़ा दिए। पंचमहल एसपी राघवेंद्र वत्स ने कहा है कि जो गलत तरीके से आए थे, उनमें से दो तीन लोगों ने शादी करने की कोशिश भी की। उस आधार पर एलटीवी के लिए एप्लाई भी किया। ये जांच विषय है आने वाले दिनों में तस्वीर साफ होगी।
अब सवाल ये उठता है कि आखिर उन पाकिस्तानी नागरिकों को भारतीय अधिकारियों के स्टैंप और दस्तखत कैसे मिले, कैसे उन लोगों ने फर्जी दस्तावेज तैयार किए। इस मामले में गिरफ्तार हुए कुछ लोगों से पूछताछ में पता लगा कि पाकिस्तान में एक बड़ा रैकेट काम कर रहा है जो भारतीय अधिकारियों के फर्जी स्टैंप मुहैय्या कराया है। पूछताछ में अनवर कंवल नाम के एक पाकिस्तानी शख्स का भी खुलासा हुआ, जिसने कई लोगों को भारतीय अधिकारियों के फर्जी स्टैंप दिए थे।
मतलब ये कि ज्यादातर पाकिस्तानी नागरिक फर्जी तरीके से गोधरा पहुंचे। अब सवाल ये है कि आखिर पाकिस्तान में भारतीय दूतावास ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर उन्हें वीजा क्यों दिया, क्यों दूतावास के अधिकारियों ने दस्तावेजों की पड़ताल की जरूरत नहीं समझी।
इस बड़े खुलासे पर पर बात करने के लिए आईबीएन7 के साथ रॉ के पूर्व डायरेक्टर ए के वर्मा, सुरक्षा विशेषज्ञ आलोक बंसल,  यूपी के पूर्व डीजीपी बृज लाल,  पाकिस्तान के इस्लामाबाद से स्काइप पर डॉन न्यूज के वरिष्ठ पत्रकार इफ्तिशार शिराजी जुड़े। 

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