मंगलवार, 16 जून 2015

सुषमा स्वराज ने नए मार्ग नाथू ला दर्रे के के जरिए कैलाश मानसरोवर यात्रा को हरी झंडी दिखाई

सुषमा स्वराज ने नए मार्ग के जरिए कैलाश मानसरोवर यात्रा को हरी झंडी दिखाई
 Tuesday, June 16, 2015



नई दिल्ली : विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने आज नए मार्ग नाथू ला दर्रे के जरिए कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए तीर्थयात्रियों के पहले जत्थे को हरी झंडी दिखाई । इस नए मार्ग की घोषणा चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने सितंबर में अपनी भारत यात्रा के दौरान घोषणा की थी ।
उत्तराखंड में लिपुलेख दर्रे के जरिए होने वाली यात्रा के मौजूदा रास्ते की तुलना में समुद्र तल से 4,000 मीटर की उंचाई पर स्थित हिमालय का नाथू ला दर्रा भारतीय तीर्थयात्रियों, खासकर बुजुर्गों के लिए बसों के जरिए अधिक आरामदायक यात्रा सुनिश्चित करेगा ।
सुषमा ने कहा, ‘मैं आज कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए तीर्थयात्रियों के जत्थे को झंडी दिखाकर दो कारणों से खुश हूं । पहला, यह कि मैंने बुजुर्ग लोगों को यात्रा करने में सक्षम बनाने का पिछले साल जो वायदा किया था, वह पूरा हो रहा है और दूसरा यह कि मुझे इन लोगों के चेहरों पर खुशी दिखाई दे रही है जो अन्यथा यात्रा करने में सफल नहीं होते ।’ ब्रिटेन से यात्रा दस्तावेज हासिल कराने में आईपीएल के पूर्व आयुक्त ललित मोदी की मदद को लेकर रविवार को उठे विवाद के बाद से सुषमा का यह पहला सार्वजनिक कार्यक्रम है ।
मौजूदा रास्ते के जरिए कुल 18 जत्थे कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाएंगे । प्रत्येक जत्थे में करीब 60 तीर्थयात्री होंगे । नए मार्ग के जरिए पांच जत्थे कैलाश मानसरोवर पहुंचेंगे । प्रत्येक जत्थे में 50 तीर्थयात्री होंगे ।
सुषमा ने कहा, ‘जब मैंने विदेशमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला था तो मैंने वायदा किया था कि हम कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए एक वैकल्पिक मार्ग विकसित करने के लिए चीन से चर्चा कर रहे हैं जो पूरी तरह वाहनचालित होगा ।’’ उन्होंने कहा कि सरकार तीर्थयात्रियों की गतिविधि पर नजर रखेगी, ताकि जरूरत पड़ने पर मदद उपलब्ध कराई जा सके। तीर्थयात्रियों के साथ दो अधिकारी भी मौजूद रहेंगे ।
‘हमने इस पर तब चर्चा की थी जब चीनी विदेश मंत्री वांग यी भारत आए थे । हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ मुद्दा उठाया था और मार्ग को अंतिम रूप मिल गया । सुषमा ने कहा, ‘जब मैं चीन गई तो इस संबंध में पत्रों का आदान प्रदान हुआ और जब प्रधानमंत्री चीन गए तो उन्होंने चिनफिंग को धन्यवाद दिया ।’’ मंत्री ने कहा कि इस मार्ग को खोला जाना भारत और चीन के बीच कूटनीतिक संबंधों में महत्वपूर्ण मील का पत्थर है ।
उन्होंने कहा, ‘कूटनीति में लोगों से लोगों के संपर्क का प्रमुख महत्व होता है तथा यदि यह तर्थयात्रा के जरिए हो तो यह और भी महत्वपूर्ण हो जाता है ।’ विदेश मंत्री ने कहा, ‘मुझे विश्वास है कि इस जत्थे में बुजुर्ग लोग चीन का धन्यवाद करेंगे क्योंकि अन्यथा वे इस अनुभव से वंचित रहते ।’ सालाना यात्रा के तहत सुषमा ने उत्तराखंड में लिपुलेख दर्रे के जरिए मौजूदा मार्ग से तीर्थयात्रियों के पहले जत्थे को गत 11 जून को हरी झंडी दिखाई थी ।
भाषा

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