गुरुवार, 9 जुलाई 2015

स्वयंसेवक के लिए प्रेरणा पुंज थे श्रद्धेय सोहन सिंह जी - मुरलीधर जी, प्रान्त प्रचारक जोधपुर प्रान्त

स्वयं के लिए कठोर, कार्यकर्त्ता के लिए निर्मल

स्वयंसेवक के लिए प्रेरणा पुंज थे श्रद्धेय सोहन सिंह जी - मुरलीधर जी, प्रान्त प्रचारक जोधपुर प्रान्त  


जोधपुर 7 जुलाई 2015.  स्वयं के लिए कठोर और कार्यकर्त्ता के लिए निर्मल ह्रदय रहता था श्रद्धेय सोहन सिंह जी का।  अपनी कठोर दिनचर्या से प्रत्येक स्वयंसेवक के लिए वे एक आदर्श थे , स्वयंसेवक के लिए प्रेरणा पुंज थे।  व्यवस्था एवं स्वच्छता के प्रति वे अत्यंत सवेंदनशील थे. जहा कुछ कमी से लगती वे स्वयं उस काम को करने लग जाते थे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जोधपुर प्रान्त के प्रान्त प्रचारक मुरलीधर जी  जोधपुर महानगर द्वारा श्रद्धेय सोहन सिंह को श्रद्धांजलि सभा  में अपने साथ के उनके संस्मरण बतलाते हुए  श्रद्धा सुमन अर्पित कर रहे थे।

माननीय सत्यपाल जी हर्ष विभाग संघ चालक जी ने विस्तार से बताया कि कार्यक्रम के प्रत्येक भाग की चिंता और व्यवस्था करते थे परम पूजनीय गुरूजी ने जो स्वयंसेवक के लक्षण बताये है वो सभी माननीय सोहन सिंह जी के जीवन में थे एक एक संघ के कार्यकर्त्ता को उन्होंने गढ़ा था एक एक स्वयंसेवक को नियोजित कर काम में लगाया था.  वे कहा करते थे कि -अपने आप  से प्रश्न पूछे की संघ की प्रार्थना  तो नित्य होती है??भारत माता की जय तो होती है??  श्रद्धेय सोहन सिंह जी ने प्रत्येक कार्यकर्त्ता के गुणों को पहचान कर उसके अनुसार कार्य में लगाया था.

महानगर संघ चालक खूबचन्द जी  ने अपने उध्बोधन में कहा कि श्रद्धेय सोहन सिंह जी  प्रवास करते समय परिवार के प्रत्येक सदस्य से  वार्तालाप कर जीवन्त सम्पर्क बना लेते थे।स्वयं को चाहे कितना भी कष्ट हो कभी भी किसी से नहीं कहते थे।

 श्रद्धांजलि सभा  गणगौर पार्क हल्दी घाटी, संघ स्थान में सायं ६.३० बजे रखी गयी थी । सभा में प्रान्त समरसता प्रमुख शांति प्रसाद जी ने दिवंगत सोहन सिंह जी का जीवन वृत्त बताया। श्रद्धेय सोहन  सिंह जी 1943 में संघ के प्रचारक बनें और 2004 तक अहर्निश प्रचारक जीवन की साधना की। 2004 में अस्वस्थता के कारण दिल्ली संघ कार्यलय में ही रहने लगे।उनके जीवन में अनुशासन और व्यवस्था मुख्य थे। । प्रात काल ब्रह्ममूर्त से भी पहले उठ जाते और प्रवास रचना के पत्र तैयार करते थे।

उनके जीवन का जो सार है  -

जीवन पुष्प चढ़ा चरणों पर
मांगे मातृभूमि से यह वर
तेरा वैभव अमर रहे माँ
हम दिन चार रहे या न रहे

अंत मे स्वयंसेवको और नागरिक गणों ने श्रद्धेय  सोहन सिंह को पुष्पांजलि अर्पित की। श्रद्धांजलि सभा में प्रान्त संघचालक ललित जी शर्मा, राज्य सभा सांसद नारायण पंचारिया , विधायक कैलाश भंसाली,विधायक बाबूसिंह राठौड़, महापौर घनश्याम ओझा,उप महापौर देवेन्द्र सालेचा,अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद्  के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत घोष, तथा भाजपा अध्यक्ष देवेन्द्र जी जोशी आदि उपस्थित रहे।

----व्यक्ति निर्माण की कार्यशाला थे  सोहन सिंह जी - मुरलीधर जी, प्रान्त प्रचारक


श्रद्धेय सोहन सिंह जी को श्रद्धांजलि सभा

बालोतरा ६ जुलाई २०१५ ।  राजस्थान के पूर्व प्रान्त प्रचारक रहे श्रद्धेय सोहन सिंह जी को श्रद्धा सुमन अर्पित करने हेतु श्रद्धांजलि सभा का आयोजन आज प्रातः किया गया।

जोधपुर प्रान्त के प्रान्त प्रचारक मुरलीधर जी ने कहा कि  श्रद्धेय सोहन सिंह जी डॉ. हेडगेवार और गुरूजी की प्रतिमूर्ति थे।  वे व्यक्ति निर्माण की कार्यशाला थे सच्चे शिल्पी थे.  उनकी कार्यशैली का अनुसरण करना ही सच्ची श्रद्धांजलि होगी.

सभा में विश्व हिन्दू परिषद के पुरुषोत्तम सिंहल ने उनके बौद्धिक मार्गदर्शन की विशिष्टता के बारे में बतलाया।

श्रद्धेय सोहन सिंह जी के साथ प्रचारक रहे बंशीलाल जी परमार ने उनके कठोर अनुशासन की चर्चा करते हुए कहा की वे स्वयं अपने जीवन से सीखने वाले शिक्षक जैसे थे।

स्व. सोहन सिंह जी के सन्निकट रहे वरिष्ठ प्रचारक शिवकुमार जी ने कहा की वे वज्र से कठोर और पुष्प से कोमल थे, सामूहिक जीवन में अनुशासन का कठोर आग्रही परन्तु व्यक्तिगत स्नेह की प्रतिमूर्ति थे.उन्होंने कहा कि  जो भी उनके संपर्क में आया वो उनके स्नेह का प्रतिभागी बना।

अंत में जिला संघचालक सुरंगीलाल जी ने उनके आदर्शो को  जीवन में ढालने का आव्हान करते हुए कहा  कि   उन्होंने जिस काम को अपना जीवन कार्य बनाया हम उसे गति प्रदान करे.

श्रद्धांजलि सभा में दो मिनट का मौन रखा गया  एवं सभी ने "ध्येय साधना अमर रहे"  गीत के साथ साथ श्रद्धेय सोहन सिंह जी को पुष्पांजलि अर्पित की।

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