सोमवार, 31 अगस्त 2015

देश को सशक्त तकनीकी राष्ट्रवाद की आवश्यकता : डाॅ. भगवती प्रकाश शर्मा




आज देश को सशक्त तकनीकी राष्ट्रवाद की आवश्यकता है: डाॅ. भगवती प्रकाश शर्मा

जोधपुर 22 अगस्त . स्वदेशी जागरण मंच जोधपुर प्रांत द्वारा ‘‘भारतीय औद्योगिक विकास के लिए स्वदेशी अवधारणा’’ विषय पर जोधपुर इण्डस्ट्रीज एसोसिएशन सभागार में प्रांतीय संगोष्ठी आयोजित की गयी।
    संगोष्ठी में क्षेत्रीय संघचालक राजस्थान व अखिल भारतीय सह संयोजक स्वदेशी जागरण मंच के डाॅ. भगवती प्रकाश शर्मा ने बताया कि देश के उद्योगो को बढाने के लिए तकनीकी राष्ट्रवाद की आवश्यकता है। अमेरीका, चीन इसी राष्ट्रवाद के कारण वैश्वीकरण के लीडर है। देश में उद्यमता को अनुकूल वातावरण देने की जरूरत है। तभी हम विश्व के अगुवा राष्ट्र बन पायेगे। आज विश्व की कुल जीडीपी में हमारा योग मात्र 2.04 प्रतिशत है जबकि 1500 वर्ष पहले 32 प्रतिशत था। उस समय हमारे देश में सभी उद्योग फलफूल रहे थे। राजाओं द्वारा उन्हें प्राश्रय देने की आवश्यकता है। इसके लिए जोधपुर में भी अलग-अलग उद्योग सहायता समूह बनाकर आर एण्ड डी विकसित करने की जरूरत है। सोलर ऊर्जा, स्टील उद्योग, ग्वारगम, हैण्डीक्राफ्ट आदि में इसके द्वारा जोधपुर देश का शीर्ष औद्योगिक शहर बनने की क्षमता रखता है। केवल इनकी उचित ब्रांडिग की आवश्यकता है। इसके लिए तकनीकी लोगो के सहयोग की आवश्यकता है। उन्होने कहा कि हम चीनी माल खरीद कर अपनेदेश को नुकसान पहुंचा रहे है। 1917 में एक रूपये में  13 डाॅलर आता था आज 63 रूपये में 1 डाॅलर आता है। इसका मुख्य कारण विदेशी व्यापार घाटा है। इसको हम स्वदेशी वस्तुओं को अपनाकर रोक सकते है। 1947 से 1991 तक समाजवाद के कारण हमारी कम्पनीयें का विकास अवरूद्ध हो गया। आज भी विभिन्न लाइसन्सों के द्वारा यह अवरूद्ध है। इसको हटाने की आवश्यकता है।

     संगोष्ठी में मुख्य अतिथि कश्मीरी लाल अखिल भारतीय संगठक स्वदेशी जागरण मंच ने बताया कि राजस्थान की धरती के अन्दर सोना है और यहां की गर्मी आने वाले दिनों में सोलर ऊर्जा द्वारा पूरे देश को रोशन करेगी। उन्होने उद्यमियों को कहा कि उन्हें आर एण्ड डी में अधिक निवेश की आवश्यकता है। नयी-नयी तकनीकों को अपनाकर ही हम विश्व की एक मजबूत आर्थिक ताकत बन सकते है। सरकार का भी दायित्व है कि उनहे खुला वातावरण प्रदान करे तथा रिसर्च के लिए वास्तविक छूट प्रदान करे। उन्होने कहा कि आज विश्व के कई देशो को हमारे फार्मा, सोलर, आईटी सेक्टरो से ईष्र्या है तथा इसको रोकने के लिए कई अवैध प्रतिबिम्बों का सहारा ले रही है। स्वदेशी जागरण मंच ऐसे बौद्धिक लोगो का समूह है जो राष्ट्रवादी राजनेता व उद्योगेपतियों के साथ लेकर किस प्रकार देश को समृद्ध बना सकता है और सभी वर्गो को समान रूप से इसका लाभ मिले। इसके लिए चिन्तन व प्रयास करता है।

    संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए डीआडीओ के पूर्व अध्यक्ष प्रो. रामगोपाल ने बताया कि स्वदेशी, स्वालंबी व स्वाभिमानी लोगो के द्वारा ही एक आदर्श देश का निर्माण होता है और मंच ऐसे ही लोगो का समूह व संगठन है जो कि देश निर्माण के लिए आम लोगो, युवा व बच्चो को जागृत कर रहा है। इसके लिए मंच के लोग अनेको कार्यो के द्वरा लोगो को प्रशिक्षित कर रहा है। उन्होने कहा कि अच्छा उत्पाद वही है जिसमें ग्राहक का लाभ छिपा हो। हमारी स्वदेशी कम्पनियां इसी ध्येय से उत्पाद बनाती है। इसके लिए हमें जीरो डिफेक्ट प्रबन्धन करना पड़ेगा व टोटल क्वालिटि मेंटेन करनी पड़ेगी। यदि आज यह हसंकल्प ले कि हम चाईनीज वस्तुओं को काम में न ले तो कुछ ही वर्षो में चाइना टूट जायेगा।
    संगोष्ठी के विशिष्ट अतिथि जेआइए के उपाध्यक्ष रमेश गांधी ने बताया कि आज लघु कुटीर उद्योगो को बचाने की जरूरत है। और विदेशी उत्पादों के कारण जो धन देश से बाहर जा रहा है इसको स्वदेशी अपनाकर रोकना है। जिससे सभी को रोजगार प्राप्त होगा।

राष्ट्रीय सम्मेलन के पोस्टर का विमोचन - संगोष्ठी में दिसम्बर माह के 25, 26, 27 तारीख को प्रस्तावित स्वदेशी राष्ट्रीय सम्मेलन के पोस्टर का विमोचन भगवती प्रकाश शर्मा, कश्मीरी लाल, सतीश कुमार भागीरथ चौधरी  द्वारा किया गया।

अभ्यास वर्ग सम्पन्न - स्वदेशी जागरण मंच के जोधपुर प्रांत का जेआईए सभागार में फलौदी, बीकानेर, पाली, सिरोही, बाड़मेर आदि जिलो से आये कार्यकर्ताओं का अभ्यास वर्ग आयोजित किया गया। इसमें विभिन्न सत्र हुआ जिसमें डाॅ. भगवती प्रकाश शर्मा ने कार्यकर्ताओं को विभिन्न उदाहरणो को देते हुए स्वदेशी अवधारणा को समझाया।
    मंच के अखिल भारत के संगठक कश्मीरीलाल ने बताया कि कार्यकर्ताओं को जागरूक रहने की आवश्यकता है तभी वह समाज को जागृत कर सकेगा। मंच के उत्तरी भारत के संगठक सतीश कुमार राष्ट्रीय सम्मेलन के लिए कार्यकर्ताओं को कमर कसने को कहा तथा स्वदेशी विचारधारा को समाज के सभी वर्गो तक पहुंचाने की आवश्यकता है।

    इस संगोष्ठी में मंच के राजस्थान के संयोजक भागीरथ चैधरी, सह संयोजक धर्मेन्द्र दुबे, मंच के प्रवक्ता संदीप काबरा, राष्ट्रीय सह संपर्क प्रमुख डाॅ. रणजीत सिंह, राष्ट्रीय परिषद सदस्य देवेन्द्र डागा व लूणाराम, जिला संयोजक अनिल माहेश्वरी, सहसंयोजक मनोहर चारण, अनिल वर्मा, रोहिताष पटेल, विनोद मेहरा, मिथिलेश कुमार झा, महेश गौड़, प्रमोद पालीवाल, महेश जांगिड़, लक्ष्मीकांत, राजेश दवे आदि अनेक जिलो से आये दायित्ववान कार्यकर्ता उपस्थित थे।

रविवार, 23 अगस्त 2015

बहन की सुरक्षा के लिये भाई रक्षाबंधन पर प्रधानमंत्री जीवन रक्षा बीमा पालिसी भेट करें



बहन की सुरक्षा के लिये भाई रक्षाबंधन पर प्रधानमंत्री जीवन रक्षा बीमा पालिसी भेट करें।
मात्र 12 रूपये प्रीमियम या 210 में आजीवन !!

रक्षा बंधन पर बीमा योजना का उपहार दें : नरेंद्र मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से अपील की है कि वे इस बार रक्षा बंधन के पहले ग़रीब महिलाओं को प्रधानमंत्री जन सुरक्षा बीमा योजना का उपहार दें. उन्होंने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में कहा कि ऐसा करने से करोड़ों महिलाओं को बीमा का फ़ायदा मिलेगा और उनका जीवन सुरक्षित हो जाएगा.

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस साल रक्षा बंधन के मौके को महिलाओं की सुरक्षा के लिहाज से खास बनाने का खाका तैयार कर लिया है। उन्होंने कहा है कि इस मौके पर लोग समाज की महिलाओं को सुरक्षा बीमा योजना भेंट करें। उनकी इस अपील के बाद अब आम लोगों के साथ ही भाजपा विधायकों व सांसदों से लेकर मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों की ओर से भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं।
सुरक्षा बीमा
योग दिवस की सफलता के बाद अब प्रधानमंत्री अगले दो महीने महिलाओं की सामाजिक सुरक्षा के लिए विशेष अभियान चलाना चाहते हैं। पिछले महीने उन्होंने 'प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना' शुरू की है। सिर्फ 12 रुपये के सालाना प्रीमियम वाली इस बीमा योजना के तहत दुर्घटना में होने वाली मौत या अपंगता पर दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता का प्रावधान है। अब प्रधानमंत्री ने इसे खास तौर पर महिलाओं तक पहुंचाने का विशेष अभियान छेड़ा है।
रविवार को रेडियो पर प्रसारित अपने 'मन की बात' कार्यक्रम में उन्होंंने कहा कि अगस्त महीने में रक्षाबंधन त्योहार है। क्यों न हम सभी देशवासी रक्षाबंधन के पहले एक जबरदस्त जन आंदोलन खड़ा करें और हमारे देश की माताओं -बहनों को जन सुरक्षा योजना का लाभ दें।
उन्होंने अपील की है कि इस दिन लोग अपने परिवार की महिलाओं से ले कर घरेलू आया तक को यह बीमा पालिसी भेट करें। सुरक्षा बीमा योजना के अलावा उन्होंने 'प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना' का विकल्प भी बताया है। जीवन ज्योति का प्रीमियम 330 रुपये सालाना है। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री की अपील के बाद अब भाजपा ने अपने विधायकों, सांसदों, मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों को ही नहीं पार्टी के अधिकारियों को भी इस पर अमल करने को कहा है। रक्षाबंधन के दिन ये लोग समाज की महिलाओं को आमंत्रित कर उन्हें यह भेट देंगे।

रक्षा बंधन पर दें जीवन सुरक्षा उपहार चेक, PM मोदी की योजना
August 10, 2015 02:04 PM
रक्षा बंधन पर दें जीवन सुरक्षा उपहार चेक, PM मोदी की योजना
रक्षा बंधन त्योहार को भुनाने के इरादे से सरकार की उपहार चैक तथा विशेष जमा जैसे अनूठे कार्यक्रमों के जरिये अपनी प्रमुख सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को गति देने के लिये सुरक्षा बंधन अभियान शुरू करने की योजना बनाई है.वित्त मंत्रालय की इस योजना के मुताबिक आगामी रक्षा बंधन त्योहार के मौके पर भागीदार बैंकों तथा बीमा कंपनियों द्वारा अगस्त-सितंबर के दौरान विशेष नामांकन अभियान शुरू किया जाएगा.रक्षा बंधन के दिन भाई अपनी बहनों को उपहार देते हैं और उनकी रक्षा का संकल्प लेते हैं. रक्षा बंधन 29 अगस्त को है. वित्त मंत्रालय के अनुसार इसी प्रकार, सुरक्षा बंधन अभियान के तहत लोगों को अपने प्रियजन को सामाजिक सुरक्षा योजना उपहार देने को प्रोत्साहित किया जाएगा.मंत्रालय की इस नई मुहिम का मकसद देश में खासकर गरीब और वंचित तबकों को सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा प्रणाली तैयार करने के सरकार के लक्ष्य को आगे बढ़ाना है.
351 रुपये में मिलेगा उपहार चेक
इस मुहिम के तहत जीवन सुरक्षा उपहार चैक जारी किया जाएगा जिसे संबंधित व्यक्ति बैंक शाखाओं से 351 रुपये देकर खरीद सकता है. यह प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (पीएमजेजेबीवाई) तथा प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (पीएमएसबीवाई) दोनों के लिये एक साल का प्रीमियम है. उपहार चेक प्राप्त करने वाला 342 रुपये (12 रुपये जमा 330 रुपये) प्राप्त करने के लिये उसे अपने बैंक खाते में जमा करेगा ताकि पीएमजेजेबीवाई तथा पीएमएसबीवाई के एक साल का प्रीमियम कवर हो सके. बचे हुए 9 रुपये जारीकर्ता बैंक सेवा शुल्क के रूप में अपने पास रखेगा.
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नयी दिल्ली (ब्यूरो)। भाई-बहनों का सबसे बड़ा त्योहार राखी पर सरकार एक स्पेशल गिफ्ट लांच करने की योजना में है। जी हां रक्षा बंधन पर सरकार ने उपहार चैक तथा विशेष जमा जैसे अनूठे कार्यक्रमों के जरिये अपनी प्रमुख सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को गति देने के लिये सुरक्षा बंधन अभियान शुरू करने की योजना बनाई है। इस अभियान के जरिए गिफ्ट चेक और स्‍पेशल डिपॉजिट के जरिए अपने परिजनों को केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई सोशल सिक्‍युरिटी के तहत बीमा और पेंशन प्‍लान गिफ्ट करने का प्रावधान किया जा रहा है। वित्त मंत्रालय की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि इस योजना के मुताबिक आगामी रक्षा बंधन त्योहार के मौके पर भागीदार बैंकों तथा बीमा कंपनियों द्वारा अगस्त-सितंबर के दौरान विशेष नामांकन अभियान शुरू किया जाएगा। आपको बताते चलें कि रक्षा बंधन के दिन भाई अपनी बहनों को उपहार देते हैं और उनकी रक्षा का संकल्प लेते हैं। रक्षा बंधन 29 अगस्त को है। वित्त मंत्रालय के अनुसार इसी प्रकार, 'सुरक्षा बंधन' अभियान के तहत लोगों को अपने प्रियजन को 'सामाजिक सुरक्षा' योजना उपहार देने को प्रोत्साहित किया जाएगा। कैसे खरीदा जा सकेगा यह गिफ्ट इस अभियान को जीवन सुरक्षा गिफ्ट चेक के जरिए बल मिलेगा, जिसे महज 351 रुपए की कीमत पर बैंकों की ब्रांच से खरीदा जा सकता है। और इस गिफ्ट को प्रधानमंत्री जीवन ज्‍योति बीमा योजना (पीएमजेजेबीवाई) और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (पीएमएसबीवाई) के लिए एक साल के प्रीमियम के तौर पर जमा किया जा सकता है। 351 रुपए की खरीद कीमत में से 9 रुपए बैंक सर्विस चार्ज के रूप में अपने पास रख लेगा।

जिंदा सबूत से भागा पाकिस्तान




दोटूक बोलीं सुषमा : बातचीत नहीं, 
Aug 23, 2015  विशेष प्रतिनिधि, नई दिल्ली

भारत-पाकिस्तान के बीच राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) स्तर की बातचीत होने की उम्मीद शनिवार को उस समय लगभग टूट गई, जब विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने दोटूक कहा कि पाकिस्तान अगर कश्मीर पर चर्चा पर दबाव बनाएगा और कश्मीरी अलगाववादियों से संपर्क करेगा तो बातचीत नहीं हो पाएगी। इससे पहले, पाकिस्तानी एनएसए सरताज अजीज ने इस्लामाबाद में कहा कि कश्मीर पर चर्चा के बिना भारत के साथ कोई गंभीर वार्ता संभव नहीं है।
दोनों तरफ से साफ संकेत दिए गए कि मौजूदा हालात में वार्ता संभव नहीं है, लेकिन खबर लिखे जाने तक किसी ने वार्ता रद्द करने का ऐलान नहीं किया। अगर सरताज आए तो आज दोपहर करीब 3 बजे दिल्ली उनका प्लेन दिल्ली में उतरेगा। शाम को पाकिस्तानी उच्चायोग में रिसेप्शन होगा। कल सुबह 10 बजे उनकी भारतीय एनएसए अजीत डोभाल से वार्ता प्रस्तावित है।
शनिवार दोपहर को सरताज अजीज ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि वह दिल्ली जाने को तैयार हैं, लेकिन भारत कोई शर्त न लगाए। भारत उनके रिसेप्शन की गेस्ट लिस्ट को सीमित करना चाह रहा है। हुर्रियत जैसी छोटी बात का बहाना लगाकर बातचीत रद्द करना चाहता है। इसके करीब तीन घंटे बाद सुषमा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि पाकिस्तान को दो मुद्दों पर स्पष्ट आश्वासन देने की जरूरत है। पहला, शिमला समझौते के अनुरूप आपसी विवादों के हल के लिए सीधे बातचीत करे और किसी तीसरे पक्ष को बीच में न लाए। दूसरा, रूस के उफा में दोनों प्रधानमंत्रियों के बीच बनी सहमति के अनुसार एनएसए वार्ता में सिर्फ आतंकवाद पर चर्चा करे। सुषमा से पूछा गया कि अगर पाकिस्तान ने यह बात नहीं मानी तो क्या होगा? उनका साफ कहना था कि तब बातचीत नहीं होगी। विदेश मंत्री ने कहा कि हम शनिवार रात 12 बजे तक जवाब का इंतजार करेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि वह बातचीत के लिए कोई शर्त नहीं लगा रही हैं। एनएसए स्तर की बातचीत समग्र वार्ता का हिस्सा नहीं है, इसलिए इसमें कश्मीर जैसे मुद्दों पर बात नहीं होगी। किसी तीसरे देश में भारत-पाक बातचीत करने की बात को उन्होंने सिरे से खारिज कर दिया। बाद में, पाकिस्तान के सूचना मंत्री ने कहा कि अजीज भारत जाने को तैयार हैं।
जिंदा डॉजियर : पाकिस्तान में भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ की कथित भूमिका पर डॉजियर (दस्तावेज) सौंपने के अजीज के बयान पर सुषमा ने कहा कि वह कागजी डॉजियर देंगे तो हम उन्हें जिंदा डॉजियर देंगे। उनका इशारा उधमपुर हमले मामले में जिंदा पकड़े गए पाकिस्तानी आतंकवादी नावेद की तरफ था।
घरेलू दबाव : सुषमा ने कहा कि पाकिस्तानी नेतृत्व घरेलू दबाव में एनएसए वार्ता रद्द करने की कोशिश कर रहा है। उफा बयान (से कश्मीर गायब होने) को लेकर नवाज शरीफ की पाकिस्तान में जबर्दस्त आलोचना हुई थी। तभी से ही कोशिश की जा रही है कि एनएसए वार्ता न हो पाए।
भारत नहीं, पाकिस्तान बातचीत से भाग रहा है। अगर वह हुर्रियत नेताओं को अलग रखे और आतंकवाद के अलावा अन्य मुद्दों पर जोर न दे तो अजीज का स्वागत है।
- सुषमा स्वराज, विदेश मंत्री
सरताज अजीज भारत जाएंगे, बशर्ते भारत उन्हें नहीं रोके। अजीज का बैग, फाइलें और टिकट सब तैयार है।
- परवेज राशिद, पाक सूचना मंत्री
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जिंदा सबूत से भागा पाकिस्तान, रद्द की एनएसए वार्ता
Written by जनसत्ता ब्यूरो and भाषा | इस्लामाबाद/नई दिल्ली |August 23, 2015 

तमाम अटकलों को विराम देते हुए पाकिस्तान ने शनिवार रात भारत व पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की वार्ता को रद्द कर दिया। इससे पहले भारत ने साफ कर दिया था कि उसे वार्ता में कश्मीर पर चर्चा और अलगाववादियों से मुलाकात स्वीकार्य नहीं है। पाकिस्तान विदेश विभाग ने एक बयान में कहा कि एनएसए स्तरीय वार्ता भारत की ओर से तय की गई पूर्व शर्तों के आधार पर नहीं हो सकती।
पाकिस्तान की इस घोषणा से इस सस्पेंस का पटाक्षेप हो गया है कि पहले कौन वार्ता रद्द करने की पहल करता है। दोनों पक्षों के बीच पिछले दो दिन से चली आ रही तनातनी के चलते वार्ता का भविष्य पहले ही स्पष्ट नजर आ रहा था लेकिन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने पाकिस्तान को यह वस्तुत: अल्टीमेटम दिया था कि वह आधी रात तक स्पष्ट प्रतिबद्धता जाहिर करे कि वह अलगाववादियों से मुलाकात नहीं करेगा। वार्ता रद्द करने के एलान के साथ ही पाकिस्तान ने रविवार को नई दिल्ली स्थित उच्चायोग में पाकिस्तानी उच्चायुक्त की तरफ से दिए जाने वाले उस भोज को भी रद्द कर दिया है जिसमें हुर्रियत नेताओं को बुलाया गया था।
भारत ने पाकिस्तान के इस कदम को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और जोर देकर कहा कि उसने कोई ‘पूर्व शर्त’ नहीं रखी थी जैसा कि पड़ोसी देश दावा कर रहा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने कहा कि भारत ने केवल यह दोहराया था कि इस्लामाबाद, शिमला और उफा समझौतों की भावना का सम्मान करे जिसके लिए वह अपनी प्रतिबद्धता पहले ही जता चुका था। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का फैसला दुर्भाग्यपूर्ण है। भारत ने कोई पूर्व शर्त नहीं लगाई थी।
पाकिस्तानी विदेश विभाग ने देर रात एक बयान में कहा कि पाकिस्तान ने सुषमा स्वराज की प्रेस कांफ्रेंस पर ‘सावधानीपूर्वक गौर’ किया है। इसमें कहा गया है कि हम इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि अगर सुषमा की ओर से रखी गई शर्तों के आधार पर वार्ता होती है तो इससे कोई मकसद हल नहीं होगा। बयान में सुषमा के बयान का जिक्र करते हुए कहा गया कि वे इस बात को स्वीकार करती हैं कि दोनों देशों के बीच स्थायी शांति सुनिश्चित करने के लिए सभी लंबित मुद्दों पर बातचीत की जरूरत है, उसके बाद वे एकतरफा रूप से एजंडे को केवल दो चीजों तक सीमित कर देती हैं : आतंकवाद मुक्त माहौल का निर्माण और नियंत्रण रेखा पर समरसता।
इसमें कहा गया है, ‘ इस बात को ध्यान में रखते हुए कि कई आतंकवादी घटनाएं जिनका आरोप शुरू में भारत ने पाकिस्तान पर मढ़ा, वे अंतत: फर्जी निकलीं। इसका सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है कि भारत एक दो घटनाओं को गढ़कर और नियंत्रण रेखा पर तनाव बनाए रखकर बहाल हुई वार्ता को अनिश्चितकाल तक लटकाए रख सकता है। यह याद रखना भी उतना ही अहम है कि आतंकवाद हमेशा से आठ सूत्री समग्र वार्ता का हिस्सा रहा है और गृह सचिवों के बीच हमेशा अन्य मुद्दों के साथ इस पर विचार विमर्श किया गया है। अब भारत के लिए यह सही नहीं है कि वह एकतरफा रूप से यह अनुमान लगा ले कि अब से आगे अन्य मुद्दों पर आतंकवाद पर विचार विमर्श और उसे समाप्त करने के बाद ही चर्चा की जाएगी।
इससे पहले विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने अपनी प्रेस कांफ्रेंस में कहा था कि पाकिस्तान को दो मुद्दों पर स्पष्ट आश्वासन देने की जरूरत है। ये दो मुद्दे हैं, कश्मीर पर चर्चा का दबाव नहीं बनाना और कश्मीरी अलगाववादियों से बात नहीं करना। यह पूछे जाने पर कि पाकिस्तान ने अगर अलगाववादियों से नहीं मिलने और कश्मीर का मुद्दा नहीं उठाने की बात नहीं मानी तब क्या होगा, सुषमा ने दो टूक कहा कि बातचीत नहीं होगी।
सुषमा ने बार-बार कहा कि वे अजीज और उनके भारतीय समकक्ष अजीत डोभाल के बीच सोमवार को होने वाली बातचीत के लिए कोई पूर्व शर्त नहीं रख रही हैं। वे केवल शिमला समझौते की भावना की याद दिला रही है जिसमें दोनों देशों ने मुद्दों को द्विपक्षीय आधार पर निपटाने की प्रतिबद्धता जताई है। साथ ही उन्होंने हाल ही में उफा में हुई सहमति की भी याद दिलाई जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके पाकिस्तानी समकक्ष नवाज शरीफ इस बात पर सहमत हुए थे कि दोनों देश के एनएसए केवल आतंकवाद पर चर्चा के लिए मिलेंगे।
सुषमा ने इस्लामाबाद में अजीज की प्रेस कांफ्रेंस के लगभग तीन घंटे बाद यहां मीडिया से बात की। अजीज ने अपनी प्रेस वार्ता में कहा था कि वे बिना किसी पूर्व शर्त के बातचीत के लिए दिल्ली जाने को तैयार हैं। अजीज ने भारत सरकार के उस रुख की कड़ी आलोचना की कि जिसमें कहा जा रहा है कि उन्हें नई दिल्ली में कश्मीरी अलगाववादियों से मुलाकात नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसा कहना पाकिस्तान उच्चायोग की ओर से रविवार को आयोजित किए जाने वाले समारोह के मेहमानों की सूची को नियंत्रित किए जाने जैसा है।
सुषमा ने पाकिस्तान पर आरोप लगाया कि भारत के साथ बातचीत का विरोध करने वाली पाकिस्तान की ज्ञात शक्तियों के दबाव में उसने एनएसए वार्ता को दरकिनार करने का रास्ता ढूंढना शुरू किया क्योंकि उफा से लौटने के बाद नवाज शरीफ की अपने ही देश में तीखी आलोचना शुरू हो गई थी। विदेश मंत्री ने गेंद पाकिस्तान के पाले में डालते हुए कहा कि भारत नहीं बल्कि ये पाकिस्तान है जो बातचीत से भाग रहा है। अगर हुर्रियत नेताओं को अलग रखा जाए और अजीज अगर आतंकवाद के अलावा अन्य मुद्दों पर जोर नहीं दें तो उनका स्वागत है।
बातचीत का विरोध करने वाली पाकिस्तान की ज्ञात शक्तियों के संदर्भ में सुषमा ने कहा कि भारत का राजनीतिक नेतृत्व दबाव को झेल लेता है लेकिन पाकिस्तान का नेतृत्व ऐसा नहीं कर पाता है। उन्होंने कहा कि उफा के बाद 91 बार संघर्षविराम का उल्लंघन करने पर पाकिस्तान के साथ एनएसए वार्ता को रद्द करने का विपक्ष द्वारा भारतीय नेतृत्व पर दबाव पड़ा। इसके बाद गुरदासपुर और उधमपुर में हुए आतंकी हमलों के बाद भी ऐसा दबाव बना लेकिन सरकार उस दबाव को भी झेल गई क्योंकि वह चाहती है कि बातचीत का सिलसिला चले और मुद्दों का समाधान हो।
सुषमा ने भारत पाकिस्तान की वार्ताओं को किसी तीसरे देश में आयोजित किए जाने की बात को भी सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने बताया कि उफा में दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों के मध्य भारत और पाक के बीच तीन तरह की बैठकें आयोजित करने पर सहमति बनी जिसमें आतंकवाद पर एनएसए स्तरीय, सीमा पर शांति के बारे में बीएसएफ और पाकिस्तानी रेंजर्स के महानिदेशकों के स्तर की बैठक और संघर्षविराम के उल्लंघन के विषय पर डीजीएमओ स्तर की वार्ता शामिल है।
उन्होंने कहा कि यहां तक कि एनएसए स्तर की बातचीत की तिथियों की पुष्टि के बारे में भारत को जवाब देने में देरी की गई। हमने बातचीत के लिए प्रस्तावित तारीख के संबंध में उन्हें एक पत्र 23 जुलाई को लिखा लेकिन इसका जवाब 22 दिन बाद 14 अगस्त को आया। पाकिस्तान ने अब तक डीजीएमओ स्तर की बैठक की तारीख के बारे में नहीं बताया। बीएसएफ और पाकिस्तानी रेंजर्स के महानिदेशकों के बीच बैठक के बारे में यह सहमति बनी थी कि इसे जल्द से जल्द आयोजित किया जाए। पाकिस्तान ने छह सितंबर की तारीख का सुझाव शायद इस सोच के साथ दिया कि एनएसए स्तर की बातचीत नहीं होगी।
यह पूछे जाने पर कि अगर बातचीत रद्द होती है तब क्या भारत को निराशा होगी, सुषमा ने कहा कि जाहिर है, अगर आप दोस्ती की दिशा में कदम उठाते हैं और यह नहीं होती है तब निराशा सामान्य बात है। अगर बातचीत नहीं होती है, तो इससे संबंध समाप्त नहीं होंगे। भारत-पाक संबंध ऐसी सड़क की तरह है जो गड्ढों से भरी हुई है। इसमें झटके लगेंगे लेकिन आप कुछ समय में वापस आ जाएंगे। उन्होंने हालांकि स्पष्ट कर दिया कि एनएसए स्तर की बातचीत कोई समग्र वार्ता का हिस्सा नहीं है बल्कि यह उसका माहौल बनाने के लिए उफा में बनी सहमति का हिस्सा है।
यह याद दिलाए जाने पर कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने हुर्रियत नेताओं और तत्कालीन पाकिस्तानी राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के बीच भारत में मुलाकात की अनुमति दी थी, विदेश मंत्री ने कहा कि बीती ताहि बिसार दे।
बहाने न बनाए पाक: सुषमा
* बातचीत की कोई पूर्व शर्त नहीं रख रहे, बस पाकिस्तान को शिमला समझौते में और उफा में उनकी ओर से जताई गई प्रतिबद्धता की याद दिला रहे हैं।
* राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की मुलाकात कोई समग्र वार्ता नहीं है जिसमें कश्मीर और दुनियाभर के मुद्दों पर चर्चा हो। यह सिर्फ आतंकवाद पर चर्चा के लिए थी।
* भारत का राजनीतिक नेतृत्व दबाव को झेल लेता है लेकिन पाकिस्तान का नेतृत्व ऐसा नहीं कर पाता है। हम जानते हैं कि वे किसके दबाव में पीछे हट रहे हैं।
* अजीज अगर डॉजियर के डर की बात कर रहे हैं तो हमारा कहना है कि वे आएं, ङम उनके सामने आतंक का जिंदा सबूत (नवेद) पेश करने को तैयार हैं।

शनिवार, 22 अगस्त 2015

पाकिस्तान के लिए 10 कड़े संदेश : सुषमा स्वराज



हुर्रियत से मिलना या कश्‍मीर पर बात करनी है, तो न आएं पाक NSA : सुषमा

Reported by NDTVKhabar.com team , Last Updated: शनिवार अगस्त 22, 2015
नई दिल्‍ली: भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाली NSA वार्ता पर छाए संशय के बादल आज और गहरा गए। भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्‍वराज ने पाकिस्तान को आज रात तक का वक्त देते हुए उससे हुर्रियत से मुलाकात या कश्‍मीर पर बात ना करने का आश्वासन मांगा। इसके साथ ही उन्होंने साफ किया कि पाक अगर इन दो मुद्दों पर आश्वासन नहीं देता, तो राजधानी दिल्ली में रविवार को होने अहम वार्ता नहीं होगी। वहीं पाकिस्तान सरकार से जुड़े सूत्रों का कहना है कि भारत की बताई शर्तों के बाद बातचीत गई सी हो गई है।

सुषमा स्वराज ने कहा, 'अगर शिमला समझौते और उफा में बनी सहमति की भावना का सम्‍मान करते हुए पाकिस्‍तान आतंकवाद पर बातचीत चाहता है और हुर्रियत से बातचीत न करे, तो भारत वार्ता को राजी है। अगर पाक ये दोनों शर्तें मानता है तो वह आज रात तक जवाब दे। इसके बाद कल से पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत बातचीत शुरू हो जाएगी।' भारत के इस सवाल के बाद अब पाकिस्‍तान की तरफ से जवाब का इंतजार है।

भारतीय विदेश मंत्री ने स्‍पष्‍ट कहा, 'पाकिस्‍तान के NSA सरताज अजीज शिमला समझाैते की भावना का सम्‍मान करते हुए हुर्रियत या किसी अन्‍य को पक्षकार न बनाए और उफा सहमति का सम्‍मान करते हुए बातचीत का दायरा आतंकवाद से आगे न बढ़ाए। अगर वे इसके लिए राजी हैं, तो बातचीत के लिए जरूर आएं, लेकिन अगर हुर्रियत से मिलना चाहते हैं और कश्‍मीर पर बातचीत करना चाहते हैं तो पाकिस्‍तान के NSA सरताज अजीज न आएं। हालांकि अगर वे इन दोनों मुद्दों राजी हैं तो आज रात तक जवाब दे दें, बातचीत कल से ही शुरू हो जाएगी और इसका नतीजा जरूर निकलेगा। विदेश मंत्री ने सरताज अजीज के उस आरोप को भी नकारा, जिसमें उन्‍होंने मीडिया के जरिए कूटनीति करने की बात कही थी।

पाकिस्‍तान के राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकार सरताज अजीज द्वारा रुख स्‍पष्‍ट करने और बातचीत के लिए गेंद भारत के पाले में डालने के बाद भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्‍वराज ने भी प्रेस कॉन्‍फ्रेंस कर भारत का पक्ष रखा। उन्‍होंने साफ कहा, भारत-पाक के बीच होने वाली हर बातचीत को वार्ता नहीं कहा जा सकता। कंपोजिट डायलॉग ही वार्ता है। वार्ता के 8 मुद्दों में एक सियाचीन और कश्‍मीर भी है और हर मुद्दे पर बातचीत के लिए अलग-अलग लोग तय हैं।

विदेश मंत्री ने कहा, 'उफा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नवाज शरीफ के बीच कोई कंपोजिट डायलॉग की बात तय नहीं हुई। उनके बीच आतंकवाद, फायरिंग और सीमा के उल्‍लंघन के मुद्दे पर बातचीत को लेकर सहमति बनी। यह बातें मौखिक नहीं, बल्कि लिखित हुई थीं।'

उन्‍होंने आरोप लगाया कि 'NSA स्‍तरीय बातचीत से पाकिस्‍तान बचना चाह रहा है। हमने 23 जुलाई को बातचीत होने का पत्र भेज दिया था, जिसका उनकी तरफ से जवाब 14 अगस्‍त‍ को आया और एक एजेंडा भी भेजा। पाकिस्‍तान ने भारत को 22 दिन का इंतजार करवाया।'

उन्‍होंने कहा, 'पाकिस्तान ने आतंक को गहराया है। उफा के बाद से अब तक 91 बार पाकस्तान की तरफ से संघर्षविराम का उल्‍लंघन हुआ। इसके बाद गुरदासपुर हमला और उधमपुर की घटना हुई और एक पाकिस्‍तानी आतंकी भी जिंदा पकड़ा गया। इसके बाद हम पर राजनीतिक दलों की तरफ से NSA स्‍तरीय वार्ता को रद्द करने का दबाव भी आया, लेकिन हमने इसे रद्द नहीं किया, क्‍योंकि हम आतंकवाद के मुद्दे पर बातचीत करना चाहते थे। हमने पहले ही पाकिस्‍तान को साफ कर दिया था कि इस वार्ता में आतंकवाद पर बातचीत होती।'

उन्‍होंने सरताज अजीज द्वारा भारत पर बातचीत से भागने का आरोप लगाए जाने पर जवाब देते हुए कहा कि 'भारत किसी भी मुद्दे पर बातचीत से भाग नहीं रहा, बल्कि वो वह माहौल बनाना चाहता है, जिसमें बातचीत हो सके। शिमला समझौते की भावना को बनाए रखते हुए इस बातचीत में हुर्रियत या किसी अन्‍य को तीसरा पक्षकार मत बनाइये।'

उन्‍होंने साफ किया कि जब तक माहौल आतंक और हिंसा से मुक्‍त नहीं होगा, तब तक कश्‍मीर पर बातचीत नहीं होगी। भारत ने कोई पूर्व शर्त नहीं रखी है। उन्‍होंने पाकिस्‍तान से आह्वान करते हुए कहा, उन ताकतों के दबाव से मुक्‍त हो जाइए, जो इसे रद्द करना चाहते हैं। उन्‍होंने सरताज अजीज से कहा, अगर आप आना चाहते हैं तो केवल आतंकवाद पर बातचीत करने आइए।

पाकिस्‍तान द्वारा भारत को डॉजियर दिए जाने के सरताज अजीज के कथन पर सुषमा ने कहा कि वो हमें डॉजियर क्‍या देंगे, हम तो उधमपुर में जिंदा पकड़ा गया आतंकी नवेद दे देंगे।

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इन 10 मुद्दों पर सुषमा ने PAK को घेरा

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने संवाददाता सम्मेलन कर NSA बातचीत को कश्मीर के मुद्दे पर खींचने की कोशिश कर रहे पाकिस्तान को आड़े हाथों लिया. हम यहां आपको बता रहे हैं कि सुषमा स्वराज की प्रेस कॉन्फ्रेंस में पाकिस्तान के लिए 10 बड़े संदेश क्या रहे जिसने पाकिस्तान को आईना दिखा दिया.

1. हर बातचीत वार्ता नहीं, अलग-अलग मुद्दों पर बातचीत के लिए अलग-अलग लोग तय.

2. जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर विदेश सचिव ही करेंगे बात.

3. उफा को लेकर सरताज अजीज के दावे गलत, उफा में समग्र वार्ता बहाली पर कोई फैसला नहीं हुआ.

4. आगरा में वार्ता पर पाकिस्तान ने ही अड़ंगा लगाया.

5. मुंबई में हुए हमलों के बाद वार्ता पटरी से उतरी, उसमें पाकिस्तानी आतंकियों की सीधी संलिप्तता.

6. NSA वार्ता के न्योते पर 22 दिन में पाकिस्तान से मिला जवाब, ये दिखाता है पाकिस्तान कितना गंभीर है.

7. सीमा पर हरकतें जारी, उफा में प्रधानमंत्रियों की मुलाकात से लेकर अबतक 91 बार हुआ सीजफायर उल्लंघन.

8. सीजफायर पर DGMO वार्ता के प्रस्ताव पर अभी तक पाकिस्तान की ओर से जवाब नहीं.

9. शिमला समझौते के अनुसार चले पाक, बातचीत में हुर्रियत की कोई भूमिका नहीं, भारत-पाक बातचीत में कोई भी तीसरा पक्ष स्वीकार्य नहीं.

10. आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते, केवल आतंकवाद के मुद्दे पर ही होनी है NSA वार्ता.

बुधवार, 19 अगस्त 2015

सुषमा स्वराज के एक दाव से कांग्रेस पस्त - साप्ताहिक पाञ्चजन्य



आवरण कथा - 

सुषमा स्वराज के एक दाव से कांग्रेस पस्त 

तारीख: 14 Aug 2015
12 अगस्त। पूरा देश लोकसभा की कार्यवाही को एकटक देखता रहा। जो नहीं देख रहे थे, उन्हें उनके मित्र-संबंधी फोन करके टीवी देखने की सलाह दे रहे थे। सुषमा स्वराज स्वयं पर लगे आरोपों का उत्तर दे रही थीं। कैमरा सुषमा स्वराज का भाषण दिखाते हुए अचानक सोनिया गांधी की ओर चला जाता है। सुषमा स्वराज ने उस समय सवाल उठाए थे- एंडरसन को भागने में मदद किसने की? क्वात्रोकी को भागने में मदद किसने की?
टीवी स्क्रीन पर सोनिया गांधी की भंगिमाएं दिख रही हैं। चेहरा अचानक उतरा हुआ, प्रकट तौर पर हल्की चिंता, सामान्य दिखने की जबरदस्त कोशिश, लेकिन नाकाम। पीछे कांग्रेस सदस्य लगातार शोर कर रहे हैं, सिर्फ इस कोशिश में कि सुषमा स्वराज की आवाज को जहां तक हो सके, दबाया जा सके। आवाज नहीं दबी।
इस एक क्षण को देश और देश का लोकतंत्र हमेशा याद रखेगा। कांग्रेस के प्रथम परिवार के कारनामे इस देश में कई लोग जानते हैं। लेकिन लोग अक्सर इन्हें दबे सुरों में कहने के आदी हो चुके थे। निस्संदेह डॉ. सुब्रह्मण्यम स्वामी ने बहुत बार बहुत बेलाग शब्दों में इस परिवार पर बहुत गंभीर आरोप लगाए हैं। लोग उनके लगाए आरोपों पर विश्वास भी करते हैं, लेकिन आम लोगों के पास इस तरह के दस्तावेजी, लिखित या स्पष्ट साक्ष्य नहीं होते हैं, जिनके बूते वे इन आरोपों को खुलकर दोहरा सकें। अब, सुषमा स्वराज के भाषण के बाद, उनके पास उद्धृत करने के लिए एक आधार बिन्दु है। सारी बात लोकसभा के रिकार्ड में दर्ज है, सोनिया गांधी और राहुल गांधी की मौजूदगी में कही गई , और कांग्रेस का प्रथम परिवार इसका कोई उत्तर न सदन में दे सका, न सदन के बाहर।
उस एक क्षण पर, सोनिया गांधी के मन में क्या चला होगा?  शायद यह कि काश, कांग्रेस सदस्य इतना शोर मचा पाते कि सुषमा स्वराज का कहा हुआ एक भी शब्द किसी को सुनाई न दे पाता?  या शायद यह घबराहट कि पता नहीं सुषमा स्वराज अगले वाक्य में क्या कहेंगी। कोई संदेह नहीं कि कई सवाल अभी भी बाकी हैं। कुछ भी हो सकता था। जैसे यह कि आदिल शहरयार को छुड़वाने के लिए राजीव गांधी ने, वायरलेस पर संदेश भिजवा कर, भोपाल की हत्यारी यूनियन कार्बाइड के तत्कालीन चेयरमैन वॉरेन एंडरसन को रिहा करवाया था। लेकिन आदिल शहरयार से राजीव गांधी का आखिर ऐसा क्या रिश्ता था? या जैसे यह कि ओतावियो क्वात्रोकी को भागने में कांग्रेस सरकार ने मदद की थी, लेकिन क्वात्रोकी का कांग्रेस के प्रथम परिवार से आखिर ऐसा क्या रिश्ता था?
अब ये सारे सवाल उठेंगे और अपने जवाब तक पहुंचने तक उठते रहेंगे।
यह भी हो सकता है कि उस एक क्षण पर सोनिया गांधी मन ही मन उस क्षण को कोस रही हों, जब कांग्रेस ने बहस की मांग करने का फैसला किया था, काम रोको प्रस्ताव की जिद की थी। अगर रोज की तरह रोजमर्रा का हंगामा होता तो कांग्रेस को यह दिन नहीं देखना पड़ता। कांग्रेस के प्रथम परिवार पर हमला? कांग्रेस के लिए यह कुफ्र जैसी स्थिति है।
वास्तव में सुषमा स्वराज ने सिर्फ कांग्रेस के प्रथम परिवार का पर्दाफाश नहीं किया। उन्होंने उस मीडिया जमात का भी भांडा फोड़ दिया, जो कांग्रेस के इशारों पर नाचने की जल्दबाजी में या मोदी विरोध की अहंतुष्टि में, अर्धसत्य और झूठ के बीच टहलती रहती है, चीखती और कराहती रहती है। ललित मोदी को 'भगोड़ा' कहने वाला  देश का मूलत: अंग्रेजी और कुछ अन्य मीडिया ही था, सुषमा स्वराज ने और अरुण जेटली ने लोकसभा में स्पष्ट किया कि ललित मोदी को आज तक देश की किसी भी अदालत ने भगोड़ा घोषित नहीं किया है। चिट्ठी ललित मोदी के लिए लिखी गई, यह आभास पैदा करने वाला भी इसी मीडिया का यही हिस्सा था,आज यह झूठ भी खुल गया। ललित मोदी की पत्नी, जो पिछले कई वर्ष से कैंसर से पीडि़त हैं, चिट्ठी उनके लिए लिखी गई थी। उन पर न तो कोई आरोप है और न ही वह किसी भी तरह से विवादित हैं।    
निशाने पर तीर
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की सपाट सी घोषणा थी-जब तक सुषमा स्वराज इस्तीफा नहीं देंगी, संसद नहीं चलने दी जाएगी। लेकिन 12 अगस्त को मल्लिकार्जुन खडगे ने काम रोको प्रस्ताव रख कर सबको चौंका दिया।
प्रश्न- क्या यह कांग्रेस में किसी नई सोच का परिणाम था? क्या कांग्रेस किसी कारण से दबाव महसूस कर रही थी?
उत्तर-नई सोच का सवाल ही नहीं था। मल्लिकार्जुन खडगे से राहुल गांधी की खींची लकीर से आगे जाने का साहस दिखाने की अपेक्षा कोई नहीं रखता।
ऐसे में शायद कांग्रेस के रणनीतिकारों को यह उम्मीद रही होगी कि काम रोको प्रस्ताव की उनकी मांग खारिज कर दी जाएगी और लिहाजा यह मांग उठाने में कोई हर्ज नहीं है।
अगर ऐसा नहीं हुआ, तो वे प्रस्ताव की शब्दावली के आधार पर भाजपा को भड़काने का काम करेंगे, इससे सदन न चलने देने का दोष भी भाजपा पर मढ़ना सरल हो जाएगा।
लेकिन सुषमा स्वराज ने प्रस्ताव को, किसी भी शब्दावली में, तुरंत स्वीकार करने की मांग करके उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
कांग्रेस ने आखिरी पत्ता फेंका। वह (अपने ही लाए काम रोको प्रस्ताव पर) बहस करने के लिए तैयार थी, लेकिन इस पर भी उसकी शर्त थी- पहले प्रधानमंत्री को बुलाया जाए।
अब कांग्रेस की चिढ़ या अहंकार साफ था। उसे सिर्फ अहंतुष्टि करनी थी। बहस की औपचारिकता में मल्लिकार्जुन खडगे सिर्फ एक मोहरे साबित होने जा रहे थे, हालांकि सुषमा स्वराज ने उन्हें बख्श कर और सीधे राजपरिवार पर हमला करके इस आखिरी पत्ते को भी भोथरा कर दिया। उधर कांग्रेस की ओर से कोई नहीं जानता था कि अगर एक बार बहस शुरू  हो गई, तो कांग्रेस किस बिन्दु का क्या जवाब देगी। कांग्रेस अपने मुंह की खाने की पटकथा खुद लिख कर आई थी।
दूसरा पहलू। सदन में कांग्रेस अकेली पड़ती जा रही थी। समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव ने कांग्रेस राजदरबार को उनके 'तू सेवेंती तू' वाले क्षण की याद दिला दी थी, जब मुलायम सिंह यादव ने सोनिया गांधी को प्रधानमंत्री नहीं बनने दिया था। कांग्रेस के बाकी 'नैसर्गिक सहयोगी'  पहले ही मैदान छोड़ चुके थे। कांग्रेस के साथ आने के लिए पूरा विपक्ष भी राजी नहीं था। यहां तक कि वह राजद भी सदन चलने देने के पक्ष में खड़ी हो गई, जो बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की गठबंधन भागीदार बनने जा रही है। खीझे हुए कांग्रेस सदस्यों ने सोनिया गांधी के नेतृत्व में सदन में मुलायम सिंह को न बोलने देने के लिए चीख-चीख कर जमीन-आसमान एक कर दिया। हालांकि जब उसी विषय पर राजद  के सांसद बोल रहे थे, तो कांग्रेस उस पर बिल्कुल चुप रही।
तीसरा पहलू। सीआईआई की पहल पर एक ऑनलाइन याचिका शुरू की गई, जिसमें दिखावे के लिए सभी पार्टियों से और वास्तव में कांग्रेस-सीपीएम गठजोड़ से अपील की गई थी कि वे सदनों को काम करने दें। इस याचिका पर देश के १५ हजार शीर्ष उद्योगपति हस्ताक्षर कर चुके थे।
कांग्रेस को उद्योग जगत की यह हुकुमउदूली जरा भी रास नहीं आई। कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने ट्वीट करके इस बात पर ही आपत्ति कर दी कि उद्योग जगत आखिर बोल क्यों रहा है। लेकिन मनीष तिवारी यह भूल गए कि हाल ही में कांग्रेस ने अपने सर्वोच्च, यानी कि उपाध्यक्ष के स्तर पर, आर्थिक दबाव होने की बातकही थी और चंदे की मांग की थी।
चौथा पहलू। कांग्रेस 25 सदस्यों का निलंबन देख चुकी थी। कोई संदेह नहीं कि इसके अति नाटकीय विरोध की तस्वीरें अखबारों में छपी थीं। लेकिन जाहिर तौर पर एक ही तस्वीर बार-बार नहीं छप सकती थी।  लोकसभा अध्यक्ष  सुमित्रा ताई महाजन अपनी नाराजगी बहुत साफ शब्दों में जता चुकी थीं, और अब कांग्रेस के पास खोने के लिए बहुत कुछ नहीं बचा था।
सुषमा स्वराज के हमलों का तीसरा निशाना बने पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम। सुषमा स्वराज ने सरेआम कहा कि मल्लिकार्जुन खडगे जो कुछ पढ़ कर सुना रहे हैं, उन्हें वह पी. चिदम्बरम ने लिखकर दिया है और यह पूरा मामला निजी शत्रुता का षड्यंत्र है। कांग्रेस के पास इसका कोई उत्तर नहीं था, जैसे उसकी चोरी पकड़ी गई हो।
सुषमा स्वराज ने पी. चिदम्बरम पर फिर हमला बोला। उन्होंने चिदम्बरम के वित्त मंत्री रहते हुए उनकी पत्नी नलिनी चिदम्बरम के आयकर विभाग की ओर से वकील होने का मामला उठाया। कांग्रेस ने चिदम्बरम का बचाव करने की कोई जरूरत नहीं समझी।
यहां तक आते आते कांग्रेस लगभग पस्त हो चुकी थी। इतनी पस्त कि जब सुषमा स्वराज ने सोनिया, राहुल और राजीव गांधी पर हमले किए, तो भी कांग्रेस हताश भाव से देखती रही। सोनिया गांधी तब जाकर आसन के आगे आईं, जब भाजपा के एक सांसद सतीश गौतम ने सोनिया गांधी की बहन एलेक्जांद्रा उर्फ अनुष्का के लिए पूछ लिया- राहुल की मौसी को कितना पैसा मिला ललित मोदी से? इस आरोप ने सोनिया, राहुल और बाकी कांग्रेस में नई जान फूंक दी। पूरी कांग्रेस सदन के गर्भ में उतर आई, और सदन एक घंटे के लिए स्थगित होने के बाद ही हटी। बाद में घोषणा की गई कि यह टिप्पणी रिकार्ड में नहीं है।
कांग्रेस के प्रथम परिवार का, प्रथम परिवार के लिए, प्रथम परिवार की ओर से अहंकार को दबे शब्दों में एक अभिव्यक्ति दी मल्लिकार्जुन खडगे ने। उन्होंने मांग की कि सुषमा स्वराज के भाषण को नियम ३५२ के तहत पूरा का पूरा खारिज किया जाए। तर्क नहीं, सीधा खारिज करने का फरमान। निष्ठावान फर्ज। जब वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि इस नियम के तहत तो खुद खडगे का भी भाषण खारिज हो जाएगा, तो खडगे बैठ गए।  कांग्रेस का यह अंतिम तर्क था।      -ज्ञानेन्द्र बरतरिया
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आवरण कथा - यूं लगा कांग्रेस के मुंह पर ताला

तारीख: 14 Aug 2015


नई दिल्ली। लोकसभा में यूं तो भ्रष्टाचार और दूसरे मुद्दों पर बहस पहले भी हुई है लेकिन मानसून सत्र में ललित मोदी प्रकरण को लेकर हुई बहस में केंद्रीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने जिस आक्रामकता और प्रामाणिकता के साथ कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को कांग्रेस और गांधी परिवार के चोरी छिपे कारनामों की याद दिलाई तो कांग्रेस तिलमिला उठी। इतनी कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी खुदे नारे लगाते हुए सदन के बीचोंबीच आ गईं। लेकिन सुषमा स्वराज ने कांग्रेस को उसके भ्रष्ट कारनामों का आइना दिखाने में कोई कसर बाकी नहीं रखी। सुषमा स्वराज ने भोपाल गैस कांड में हजारों लोगों की मौत के लिए दोषी एंडरसन को भगाने से लेकर बोफ र्स तोप सौदे में दलाली प्रकरण में शामिल होने के आरोपी क्वात्रोकी के राज खोलना शुरू किए तो सोनिया गांधी ने अपने हाथ कानों पर ऐसे रख लिए जैसे वे सच को सुनना नहीं चाहतीं। आखिर सच कड़वा जो होता है और सुषमा सदन में सच बोल रही थीं।
सुषमा स्वराज ने एंडरसन और क्वात्रोकी मामले में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की भूमिका का तथ्यों और दस्तावेजों के साथ उल्लेख किया तो सोनिया और राहुल गांधी के चेहरों पर तनाव साफ नजर आने लगा। कारण, एंडरसन और क्वात्रोकी को लेकर कांग्रेस खुद सवालों के घेरे में आ गई। रही सही कसर केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पूरी कर दी। लिहाजा कांग्रेस जेटली की बात सुने बिना ही संसद का मैदान छोड़ गई। सत्ताधारी भाजपा नेताओं ने ललित मोदी प्रकरण में सुषमा स्वराज पर सवाल खड़े कर मोदी सरकार की छवि खराब करने की कांग्रेस की रणनीति को भी पूरी तरह विफल कर उल्टा उसे कटघरे में खड़ा कर दिया। कारण ललित मोदी, एंडरसन और क्वात्रोकी भारत से बाहर गए या भागे तो कांग्रेस के शासन में गए। इसलिए जवाब अब कांग्रेस को देना होगा।
असल में तो कांग्रेस की रणनीति भी यही थी लेकिन कांग्रेस को इस बात की उम्मीद नहीं थी कि जिस ललित मोदी प्रकरण को लेकर उसने संसद की कार्यवाही ठप करके रखी थी उस पर जब चर्चा होगी तो सदन में उल्टा घिर जाएगी। कांग्रेस को उम्मीद थी कि सत्तापक्ष कार्य स्थगन प्रस्ताव के तहत चर्चा के लिए तैयार नहीं होगा। लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने प्रश्नकाल चलने देने और नियमों का हवाले देते हुए एक बार तो कांग्रेस का कार्य स्थगन प्रस्ताव नामंजूर कर दिया पर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कांग्रेस को लगभग ललकारते हुए लोकसभा अध्यक्ष से निवेदन किया कि कांग्रेस जिस नियम के तहत और जिस शब्द के साथ चर्चा करना चाहती है उसकी अनुमति प्रदान कर दे, उन्हें कोई आपत्ति नहीं। बस एक शर्त है कि जब वह बोलें तो कांग्रेस उनकी बात सुने, सदन से बहिर्गमन न करे। लिहाजा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने पक्ष और विपक्ष की बात सुनने के बाद कांग्रेस और अन्य विपक्षी सदस्यों के कार्यस्थगन प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए चर्चा शुरू करा दी। कांग्रेस की ओर से उसके नेता मल्लिकार्जुन खडगे ने चर्चा की शुरुआत की। उन्होंने ललित मोदी प्रकरण को लेकर सुषमा स्वराज और सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए।
सुषमा स्वराज शांति के साथ खडगे के भाषण को सुनती रहीं लेकिन जब सुषमा स्वराज बोलने के लिए खड़ी हुई तो कांग्रेस के सदस्य प्रधानमंत्री को बुलाने की मांग करते हुए नारेबाजी और हंगामा करने लगे। कांग्रेस की रणनीति थी कि शोर-शराबे के चलते सदन नहीं चल पाएगा और सुषमा स्वराज को अपनी बात रखने का या तो मौका नहीं मिलेगा या फिर सुषमा स्वराज की बात शोर शराबे में दब कर रह जाएगी। लेकिन सुषमा स्वराज ने जैसे जैसे एक एक कर कांग्रेस के आरोपों का जवाब देना शुरू किया उनका भाषण कांग्रेसी सदस्यों की नारेबाजी पर भारी पड़ने लगा। करीब तीस मिनट के सुषमा स्वराज के पूरे भाषण के दौरान कांग्रेसी सदस्य नारे लगाते रहे लेकिन सुषमा नहीं रुकीं। सुषमा स्वराज ने मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे अर्जुन सिंह की आत्मकथा वाली किताब निकाल कर भोपाल गैस कांड में हजारों लोगों की मौत के लिए दोषी एंडरसन को देश से भगाने के मामले में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की भूमिका और बदले में अमरीकी जेल में बंद एक अपराधी आदिल शहरयार को इसलिए छुड़वाने का चिट्ठा खोलना शुरू किया क्योंकि आदिल का परिवार गांधी परिवार का नजदीकी माना जाता था। उसे सुनकर सोनिया और राहुल गांधी सहित पूरा सदन सन्न रह गया। और जब सुषमा स्वराज ने क्वात्रोकी का मामला उठाते हुए राहुल गांधी से अपनी मां से यह पूछने को कहा कि उनसे पूछें कि क्वात्रोकी को भगाने के लिए कितने पैसे लिए गए? तो सोनिया और राहुल के साथ समूची कांग्रेस को जोर का झटका लगा। लिहाजा कांग्रेसी सदस्यों ने इस झटके से ध्यान हटाने के लिए और जोर जोर से नारे लगाने शुरू कर दिए। पर सुषमा स्वराज जैसे ठान के आई थीं कि अपनी शब्द वाणी से कांग्रेस को मानसून सत्र में धो डालेंगी और उन्होंने ऐसा किया भी।
सुषमा स्वराज ने जहां एंडरसन से लेकर क्वात्रोकी मामले में कांग्रेस को आइना दिखाया वहीं ललित मोदी प्रकरण में भी उन्होंने कांग्रेस को कटघरे में खड़ा कर दिया। सुषमा स्वराज ने ललित मोदी को मदद देने से लेकर अपने परिजनों को बदले में कोई रकम मिलने के आरोप से भी साफ इंकार कर दिया। स्वराज ने पूर्व वित्तमंत्री पी. चिदंबरम और उनकी पत्नी का जिक्र करते हुए हितों के टकराव का उदाहरण दिया और कहा कि ललित मोदी मामले को लेकर हितों के टकराव का जो आरोप कांग्रेस उन पर लगा रही है उसमें कहीं कोई दम नहीं है। सुषमा स्वराज ने सिलसिलेवार कांग्रेस के हर सवाल का उत्तर दिया। तो सत्ताधारी भाजपा और राजग घटकों के सभी सदस्यों ने हर बार मेजें थपथपा कर सुषमा का समर्थन किया। चर्चा के दौरान भाजपा और उसके सहयोगी दल जहां एकजुट टीम के रूप में नजर आ रहे थे वहीं विपक्ष बिखरा हुआ नजर आ रहा था। कई गैर कांग्रेसी दलों ने सदन को ठप करने और काम न होने देने के लिए अप्रत्यक्ष रूप से कांग्रेस पर निशाना भी साधा। तो भाजपा और राजग सदस्यों ने ललित मोदी प्रकरण को लेकर सदन में कोई कामकाज न होने देने के लिए कांग्रेस को आड़े हाथों लिया। लिहाजा कांग्रेस के आचरण को लेकर कई सवाल और खड़े हो गए।
सुषमा स्वराज के भाषण से भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी खासे प्रभावित हुए और उन्होंने स्वराज की पींठ थपथपाते हुए उन्हें बधाई दी। वित्त मंत्री अरुण जेटली, आडवाणी और सुषमा सहित भाजपा खेमे में जहां जीत जैसा नजारा था वहीं कांग्रेस खेमे में मायूसी। लिहाजा केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली जैसे ही बोलने खडे़ हुए तो कांग्रेस और उसके सहयोगी दल सदन से बहिर्गमन कर गए। भाजपा सदस्यों ने चुटली लेते हुए कहा भी कि मैदान छोड़ कर कहां जा रहे हो, चर्चा अभी बाकी है। बहरहाल, ललित मोदी प्रकरण में सुषमा स्वराज और अरुण जेटली ने जिस प्रकार संसद के भीतर कांग्रेस को घेरा उसे देख-सुन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने अंदाज में दोनों को सार्वजनिक रूप से बधाई देने में देर नहीं लगाई।     -मनोज वर्मा

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मिनट दर मिनट उड़ी धज्जियां

तारीख: 14 Aug 2015
12 अगस्त को संसद के दोनों सदनों में हुई कार्रवाई का मिनटवार ब्योरा
11:05    लोकसभा में सुषमा स्वराज का वक्तव्य आरंभ, कहा, वे चर्चा के लिए तैयार हैं।
11:06    सुषमा-मैं मल्लिकार्जुन खडगे द्वारा लाए गए स्थगन प्रस्ताव पर बिना बदलाव किए उसी भाषा में बहस के लिए तैयार हूंं।
11:06    सुषमा स्वराज ने अध्यक्ष से मल्लिकार्जुन खडगे के स्थगन प्रस्ताव पर बहस कराने की विनती की।
11:07    सुषमा- मैं अध्यक्ष जी से बहस शुरू करने का अनुरोध करती हूं जिसमें सिर्फ विपक्षी सदस्य ही बोलेंगे। मैं इसके लिए तैयार हूं पर एक ही विनती है कि जब मैं बोलूं तो मुझे बोलने दिया जाए।
11:07    मल्लिकार्जुन खडगे ने अध्यक्ष से सभी कार्यवाही निरस्त करके प्रधानमंत्री को बहस में बुलाने की अपील की।
11:08     मल्लिकार्जुन ने मांग की कि प्रधानमंत्री को बहस के लिए सदन में आना चाहिए।
    मल्लिकार्जुन-प्रधानमंत्री अपने मंत्री के खिलाफ कार्यवाई कैसे करेंगे अगर वे उनके खिलाफ आरोप ही न सुनें।
11:09     विपक्षी नेताओं ने भाजपा मंत्रियों के इस्तीफे की मांग करते हुए नारे लगाए।
11:10    वेंकैया नायडू- सरकार स्थगन प्रस्ताव के तहत लोकसभा में ललित मोदी के मुद्दे पर बहस कराने को तैयार है।
11:11    सुमित्रा महाजन- मुझे प्रश्नकाल के बाद स्थगन प्रस्ताव की अनुमति देने में कोई आपत्ति नहीं है।
11:13    लोकसभा अध्यक्ष ने स्थगन प्रस्ताव पर बहस के लिए प्रश्नकाल स्थगित करने की विपक्ष की मांग ठुकरा दी।
11:14    अरुण जेटली ने विपक्ष पर संसद को बाधित करने का आरोप लगाया।
11:16    विपक्ष ने सदन चलाने की इंडिया  इन्कारपोरेशन केंपेन की मांग पर आपत्ति की। राज्यसभा में नारे लगाए गए।
11:17    विपक्ष ने राज्यसभा में मोदी सरकार के खिलाफ नारे लगाए-'मोदी शाही की सरकार, नहीं चलेगी नहीं चलेगी'।
11:18    विपक्ष ने कालाधन मुद्दे पर मोदी सरकार पर आरोप लगाए, कहा-15 लाख का क्या हुआ, क्या हुआ।
11:18    राज्यसभा उपसभापति कुरियन-यह लोकतंत्र पर जनमत है। यह बहुत खेदजनक है।
11:18    राज्यसभा 12 बजे तक के लिए स्थगित।
12:04    सीताराम येचुरी- हमने पहली बार सुना कि व्यवसायी सदन चला रहे हैं। हमें अच्छा लगा कि लोग सदन की कार्यवाही में रुचि दिखा रहे हैं लेकिन वे इसमें दखलंदाजी नहीं कर सकते।
12:05    मल्लिकार्जुन खडगे ललित मोदी विवाद पर बहस के लिए नोटिस लाए। अध्यक्ष ने अस्वीकार करते हुए कहा-स्वीकृत नोटिस गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया था।
12:05    येचुरी-पीएम ने खुद को प्रधानमंत्री नहीं एक सेवक बताया था, इसलिए नियम सबके लिए एक जैसे रहने दीजिए। हम सब लोकसभा में मतदान की तरह सदन में बहस चाहते हंै।
12:06    शरद यादव-सदन भारत के लोगों ने चुना है और व्यवसायी हमें सदन चलाने का निर्देश नहीं दे सकते।
12:07    सुषमा स्वराज ने अध्यक्ष से खडगे के स्थगन प्रस्ताव को स्वीकार करने की विनती की।
12:07    लोकसभा दोपहर 12:30 बजे तक स्थगित
12:45    लोकसभा ललित मोदी विवाद पर बहस के लिए तैयार हुई, कागज प्रस्तुत करने के बाद बहस शुरू होने के आसार
12:47    खडगे- मुझे खुशी है कि मेरा स्थगन प्रस्ताव स्वीकार कर लिया गया।
12:47    राहुल गांधी अपने साथ हाथ से लिखा भाषण लेकर आए।
12:48    लोकसभा स्थगन प्रस्ताव पर बहस के लिए तैयार हुई। अध्यक्ष ने बहस के लिए 150 मिनट निर्धारित किए।
12:48    खडगे ने स्थगन प्रस्ताव प्रस्तुत किया।
12:54    खडगे-प्रधानमंत्री को सदन में उपस्थित होना चाहिए क्योंकि यह एक मंत्री द्वारा एक भगोड़े को मदद करने के बारे में है और केवल वे हमारे आरोपों पर कार्यवाई कर सकते हैं।
12:56    खडगे-प्रधानमंत्री को सदन या बाहर बात करना पसंद नहीं है। वे सिर्फ रेडियो या टीवी या विज्ञापनों में बात करना पसंद करते हैं। हम पूरे मुद्दे पर प्रधानमंत्री से उनकी राय जानना चाहते हैं।
12:57    खडगे- मैं अध्यक्ष से अनुरोध करता हूं कि हम मंत्री से बार-बार जवाब नहीं चाहते। हम सिर्फ प्रधानमंत्री से जवाब चाहते हैं।
12:58    खडगे ने मांग की कि प्रधानमंत्री बहस का
जवाब दें। उन्होंने मांग की बहस नियम 56 के तहत ही हो।
1:04    खडगे-सुषमा स्वराज का परिवार ललित
मोदी मामले में वकील था। इसीलिए उसे बचाया गया था।
1:11    खडगे- सुषमा स्वराज को नैतिक आधार पर इस्तीफा दे देना चाहिए।
1:24    खडगे ने पूछा, ललित मोदी की जांच सार्वजनिक क्यों नहीं की गई? ललित मोदी को यूके उच्चायोग में क्यों नहीं बुलाया गया?
1:43    लोकसभा अध्यक्ष ने खडगे को अपना भाषण समाप्त करने के लिए कहा।
1:44    सोनिया गंाधी पार्टी नेताओं के साथ अध्यक्ष के आसन के सामने विरोध करने आईं।
1:48    लोकसभा 2 बजे तक के लिए स्थगित।
2:54    लोकसभा अध्यक्ष ने सुषमा स्वराज को बोलने के लिए कहा।
2:56    सुषमा स्वराज ने बोलना शुरू किया, विपक्ष ने शोरगुल मचाया।
2:59    सुषमा- अगर मुझे बोलने नहीं दिया जायेगा तो न्याय कैसे हो सकता है।
3:03    सुषमा- मेरे पति कभी ललित मोदी की तरफ से पासपोर्ट मामले में पेश नहीं हुए।
3:03    सुषमा- मेरी बेटी पासपोर्ट मामले में नौवें नम्बर की वकील थी। उसे इस मामले में एक पैसा भी नहीं मिला।
3:05    सुषमा स्वराज ने कहा, पूर्व वित्तमंत्री चिदम्बरम ने अपनी पत्नी नलिनी की मदद की थी और  उन्हें आई टी विभाग में सलाहकार भी नियुक्त किया था।
3:10    सुषमा ने राहुल गांधी पर पटलवार किया, कहा-राजीव गंाधी सरकार ने ओतावियो क्वात्रोकी को  भारत से भाग निकलने में मदद की थी। हमने कोई चीज छुपकर नहीं की।
3:19    सुषमा ने राहुल को कहा- छुट्टियों पर जाओ और क्वात्रोकी से एंडरसन तक की मदद करने का कांग्रेस का इतिहास पढ़ो और अपनी मां से सवाल पूछो- मम्मा, पापा ने क्वात्रोकी को क्यों छुड़ाया?
3:24    सुषमा- यूके सरकार ने प्रत्यावर्तन का अनुरोध किया था, लेकिन चिदम्बरम ने कुछ नहीं किया।
3:29    सुषमा- मैं 38 साल से राजनीति में हूं और मेरे खिलाफ कभी किसी गलत काम के आरोप नहीं लगे हैं।
3:30    सुषमा- चिदम्बरम अपनी व्यक्तिगत शत्रुता की वजह से ललित मोदी के विरुद्ध थे।
6:08    अरुण जेटली- राहुल गांधी को कोई जानकारी नहीं, फिर भी विशेषज्ञ हैं।

मंगलवार, 18 अगस्त 2015

यूएई में मंदिर बनाने का वादा लेकर दिल्ली लौटे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी



PM मोदी के UAE दौरे की सबसे खास बातें

एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में भारत और संयुक्त अरब अमीरात ने आतंकवाद और कट्टरता के सभी रूपों के खिलाफ मिल कर लड़ने का संकल्प लिया है। इसमें आतंकवाद को सही ठहराने के लिए धर्म का इस्तेमाल करने वालों और दूसरे देशों के खिलाफ आतंकवाद को प्रश्रय देने वालों का विरोध भी शामिल है। इसे पाकिस्तान के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूएई के शहजादे मोहम्मद बिन जायद अल नहयान की वार्ता के बाद जारी साझा बयान में ये बातें कही गई हैं।

दोनों देशों ने चरमपंथ को खारिज करते हुए आतंकवाद के धर्म से संबंध की बात को भी खारिज किया। इसमें कहा गया है कि दोनों देश आतंकवाद को जायज ठहराने के लिए धर्म के इस्तेमाल के प्रयास का, किसी देश द्वारा ऐसी कोशिश करने का, किसी देश के खिलाफ किसी अन्य देश द्वारा आतंकवाद को बढ़ावा देने की कोशिशों का विरोध करते हैं।

संयुक्त बयान के तमाम बिंदुओं को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने ट्वीट के जरिए बताया है। उन्होंने टूगेदरआनटेरर हैशटैग का इस्तेमाल किया है। संयुक्त बयान में कहा गया है कि भारत और संयुक्त अरब अमीरात आतंकवाद विरोधी कार्रवाइयों में और इस बारे में खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान के बारे में सहयोग बढ़ाएंगे।

दोनों देशों ने कट्टरवाद को बढ़ावा देने के लिए इस्तेमाल होने वाले फंड पर निगाह रखने और इससे जुड़ी जानकारियां एक दूसरे को देने पर भी सहमति जताई। यूएई ने भारत के उस प्रस्ताव पर साथ देने का भी वादा किया जिसमें संयुक्त राष्ट्र में समग्र अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद संधि की बात कही गई है।

दोनों देशों के बीच साइबर सुरक्षा, मादक पदार्थो, कालेधन पर लगाम लगाने और प्रत्यर्पण के मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी। दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हर छह महीने में मुलाकात करेंगे। दोनों देशों की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद में भी संवाद होगा।

आतंकवाद पर साझा बयान की बातों से साफ है कि यूएई ने पाकिस्तान के रुख से दूरी बनाई है। इससे दाऊद इब्राहीम जैसे आतंकियों के यूएई के जमीन के इस्तेमाल पर भी अंकुश लगेगा। दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने पर समझौता हुआ।

साझा बयान में व्यापार और निवेश का भी काफी जिक्र है। दोनों देशों ने अगले पांच साल में अपने बीच के व्यापार को 60 फीसदी तक बढ़ाने पर सहमति जताई है।

दोनों देशों के बीच निवेश बढ़ाने पर भी समझौता हुआ है। 75 अरब अमेरिकी डालर से यूएई-भारत आधारभूत निवेश फंड बनाया जाएगा। इससे भारत में रेलवे, बंदरगाहों, सड़कों, हवाई अड्डों, औद्योगिक गलियारों का विकास किया जाएगा।

महत्वपूर्ण ऊर्जा क्षेत्र में रणनीतिक भागीदारी को बढ़ाने पर भी दोनों देशों में सहमति बनी। भारत में तेल के संरक्षित क्षेत्रों के विकास में यूएई भूमिका निभाएगा।

दोनों देश अंतरिक्ष के क्षेत्र में भी सहयोग करेंगे। इनमें उपग्रह प्रक्षेपण भी शामिल है। परमाणु ऊर्जा के सुरक्षा, सेहत, विज्ञान-तकनीक, कृषि के क्षेत्र में शांतिपूर्ण इस्तेमाल पर भी सहमति बनी।

मोदी ने संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी सदस्यता के दावे को समर्थन देने के लिए यूएई का आभार जताया। प्रधानमंत्री ने अबु धाबी में मंदिर के लिए जमीन देने पर भी यूएई के शहजादे का आभार जताया।

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दुबई में एक बार फिर मेडिसन स्क्वायर जैसा जलवा दिखा। खचाखच भरे दुबई के क्रिकेट स्टेडियम में नरेंद्र मोदी जमकर दहाड़े। मोदी ने बात तो शुरु की दुबई कनेक्शन से लेकिन पूरे भाषण पर आंतकवाद का मुद्दा छाया रहा। मोदी ने आतंकवाद पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि गुड तालिबान बेड तालिबान जैसा कुछ नहीं होता, आतंक तो बस आतंक होता है। मोदी ने कहा कि ये भी कहा कि यूएई ने आतंक पर भारत के रुख का समर्थन किया है। मोदी ने अपने भाषण में क्षेत्रीय सहयोग के मामलें में भारत की पहल का भी उल्लेख किया। यूएई और भारत के द्विपक्षीय संबंधों की बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि यूएई ने भारत में 4.5 लाख करोड़ रुपए के निवेश का करार किया है जो भारत पर बढ़ते भरोसे को दिखाता है। इसके अलावा यूएई ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की दावेदारी का समर्थन किया है। पीएम मोदी ने कहा कि कोई भारतीय पीएम यूएई में 34 साल बाद आया है। इसके बावजूद उनका जोरदार स्वागत हुआ और कोई नाराज़गी तक नहीं जाहिर की गई।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत में संभावनाएं हैं और यूएई आर्थिक शक्ति है और अगर भारत-यूएई साथ आएं तो 21 सदीं को एशिया की सदी बनाने का सपना पूरा होगा। भारत की संभावनाएं और यूएई की शक्ति जुड़ जाएं तो आगे की सोच और योजनाओं पर आगे बढ़ा जा सकता है। पीएम मोदी ने कहा कि यूएई और भारत अगर मिलकर काम करें तो 21वीं सदी पूरी तरह से एशिया की सदी होगी। उन्होंने कहा कि एशिया के विकास के लिए यूएई मुख्य आर्थिक धारा के केंद्र में होना चाहिए।

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कल यूएई के साथ आर्थिक सहयोग बढ़ाने के लिए समझौतों पर हस्ताक्षर किए। यूएई ने भारत में निवेश बढ़ाकर 75 अरब डॉलर करने का करार किया, जिसमें एक इंफ्रास्ट्रक्चर फंड के माध्यम से होने वाला निवेश भी शामिल है। साथ ही दोनों देशों ने द्विपक्षीय कारोबार अगले पांच में 60 परसेंट बढ़ाने का भी समझौता किया। इसके अलावा  न्यूक्लीयर पॉवर, एनर्जी, डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग और आंतरिक्ष के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच समझौते हुए। दुबई पहुंचने से पहले मोदी ने मसदर शहर का दौरा किया और वहां अबू धाबी चैंबर्स ऑफ कॉमर्स में उन्होंने यूएई और भारतीय मूल के कारोबारियों से मुलाकात की।

भारत, यूएई के बीच 7500 करोड़ डॉलर का इंफ्रा इन्वेस्टमेंट फंड बनाने पर समझौता हुआ है। साथ ही यूएई भारत, यूएई न्यूक्लियर एनर्जी के शांतिपूर्ण इस्तेमाल पर सहयोग करेंगे। यूएई एनर्जी सेक्टर में भारत, यूएई के बीच स्ट्रैटेजिक करार हुए हैं और यूएई के साथ 5 साल में व्यापार बढ़ाकर 60 फीसदी करने पर भारत, यूएई में समझौता हुआ है। यूएई भारत-यूएई स्पेस में ज्वाइंट डेवलपमेंट, सैटेलाइट लॉन्च को बढ़ावा देंगे। दोनों देश डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग के जरिए रक्षा संबंध मजबूत करेंगे।
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4.5 लाख करोड़ इन्वेस्टमेंट, यूएई में मंदिर बनाने का वादा लेकर दिल्ली लौटे मोदी
dainikbhaskar.comAug 18, 2015,
दुबई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूएई दौरे के आखिरी दिन दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में करीब एक घंटे तक भारतीय समुदाय को संबोधित किया। उन्होंने भारतीयों को नमन कर स्पीच की शुरुआत की। कहा-'मैं एक लघु भारत के दर्शन कर रहा हूं। आपकी वजह से ही भारत गौरव महसूस करता है। भारत में अगर बारिश होती है, तो दुबई के मेरे देशवासी छाता निकाल लेते हैं।" उन्होंने कहा कि अगर भारत पर कोई विपदा आती है, यहां बैठा भारतवंशी चैन से नहीं सोता। बता दें कि मोदी को सुनने के लिए करीब 50 हजार लोग पहुंचे। उनके भाषण से पहले पहले रंगारंग कार्यक्रम हुआ। इसमें इंटरनेशनल कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति दी।

2.30AM: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली लौटे।

PM का कांग्रेस पर निशाना, कहा- विरासत में मुश्किलें ही मिलीं, पर भागूंगा नहीं
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11.0PM : दौरा समाप्त, प्रधानमंत्री दिल्ली के लिए रवाना हुए।
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10.09 PM: भारत सरकार ने ई-माइग्रेट पोर्टल शुरू किया।
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10.08 PM: वीजा समस्या में मदद नाम से ऑनलाइन सुविधा शुरू हुई है।
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10.08 PM: पूर्वी भारत में विकास की ज्यादा जरूरत: मोदी
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10.07 PM: हमारी खेती में दूसरी हरित क्रांति हो। पांच साल में देश में 24 घंटे बिजली देंगे।: पीएम
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10.07 PM: 'आज सार्क देशों में सहयोग का नया दौर है। 2016 में सार्क देशों के लिए सेटेलाइट छोड़ेंग'
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10.07 PM: '1 अगस्त को भारत-बांग्लादेश सीमा विवाद सुलझा दिया'
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10.07 PM: नेपाल में आए भूकंप के चंद मिनटों बाद हम वहां पहुंच गए: पीएम
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10.06 PM: 'हमने मालदीव की जलसंकट में मदद की जहाज और स्टीमर से पानी पहुंचाया'
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10.06 PM: 'अफगानिस्तान के संकट में हम हमेशा उसके साथ रहे'
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10.05 PM: अड़ोस-पड़ोस की समस्या का हल भी बातचीत से हो: मोदी
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10.04 PM: 'फैसला करने का वक्त आ गया है, आप किस ओर हैं'
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10.00 PM: आतंकवाद के खिलाफ यहां एकता का स्वर उठा। अमीरात ने भारत का समर्थन किया है: पीएम
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9.41 PM: गुड तालिबान, बैड तैलिबान अब नहीं चलेगा: मोदी
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9.40 PM: आतंकवाद के खिलाफ भारत-UAE एक
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9.40 PM: 'ये बदलाव मोदी के कारण नहीं, बल्कि सवा सौ करोड़ देशवासियों की वजह से आया है'
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9.40 PM: ये बदले हुए भारत का सम्मान है: मोदी
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9.39 PM: 'क्राउन प्रिंस आतंकवाद पर भारत के रुख के साथ'
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9.39 PM: UN में हमारी स्थाई सदस्यता का समर्थन किया: पीएम
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9.38 PM: क्राउन प्रिंस ने भारत में 4.5 लाख करोड़ रुपए के निवेश का संकल्प लिया: मोदी
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9.36 PM: मोदी ने केरलवासियों को दी मलयाली नववर्ष की बधाई
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9.36 PM: 'अबु धाबी में मंदिर बनाने की जगह दी, क्राऊन प्रिंस को स्टैंडिंग ओवेशन दीजिए'
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9.35 PM: ये मेरा सम्मान नहीं, सवा सौ करोड़ भारतीयों का सम्मान है: पीएम मोदी
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9.35 PM: क्राउन प्रिंस ने पांचों भाइयों के साथ मेरी अगवानी की: मोदी
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9.35 PM: दुबई की सरकार ने मुझपर प्यार की बारिश की: पीएम
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9.34 PM: मोदी ने लोगों से पूछा- देरी से आने पर नाराजगी का हक बनता है कि नहीं।
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9.34 PM: 'भारतीय प्रधानमंत्री को यहां आने में 34 साल लगे'
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9.25 PM: दुबई अब एक लघु विश्व बन गया है: पीएम
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9.24 PM: दुनिया के कई देशों के लोग दुबई में रहते हैं: मोदी
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9.24 PM: 'चुनावी नतीजों पर दुबई भी नाच रहा था'
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9.23 PM: मैं एक लघु भारत के दर्शन कर रहा हूं- मोदी
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9.23 PM: हिंदुस्तान के कोने कोने से आए देशवासियों को मैं नमन करता हूं।-पीएम
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(PM का कांग्रेस पर निशाना, कहा- विरासत में मुश्किलें ही मिलीं, पर भागूंगा नहीं)
बड़े पैमाने पर इंतजाम
- ऑर्गनाइजर्स के मुताबिक, मोदी की स्पीच सुनने के लिए 15 हजार लोग तो सिर्फ स्पेशल बसों के जरिए स्टेडियम पहुंचे थे। दुबई रोड ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी ने मोदी के प्रोग्राम के लिए खास तौर पर 30 बसें लगाई थीं।
- स्टेडियम कैम्पस में 4 हजार कारों की पार्किंग के इंतजाम किए गए। 1000 टैक्सियों का भी अरेंजमेंट किया गया। 40 हजार फूड पैकेट्स और 2.5 लाख कप पानी का इंतजाम किया गया।
- लोगों को गर्मी न लगे इसके लिए 40 हजार कार्डबोर्ड हैंड फैन डिस्ट्रिब्यूट किए गए।
- स्टेडियम के अंदर 35 डॉक्टरों की टीम और 55 लोगों का नर्सिंग स्टाफ मौजूद था। स्टेडियम के बाहर 3 बड़ी एंबुलेंस थीं।
- यूएई की न्यूज वेबसाइट एमिरेट्स 24/7 के मुताबिक, उन कंपनियों ने एम्प्लॉइज़ को हाफ-डे या फ्लेक्जिबल वर्किंग आवर्स का ऑप्शन दिया था जहां इंडियंस ज्यादा काम करते हैं।
- मोदी के प्रोग्राम के मद्देनजर दुबई अथॉरिटी ने मेट्रो के टाइमिंग्स रात 10.30 से बढ़ाकर 12 बजे तक कर दिए थे। स्टेडियम से करीबी मेट्रो स्टेशंस के बीच शटल बसें अलग से चलाई गईं।

बिहार की प्रगति ही एकमात्र लक्ष्य है - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी



बिहार की प्रगति ही एकमात्र लक्ष्य है - प्रधानमंत्री नरेंद्र  मोदी

भारत माता की जय
ये जो कोई ऊपर हैं, अगर आप में से कोई नीचे गिरा तो मेरा क्या होगा। मैं देख रहा था कि एयरपोर्ट से यहाँ तक पूरे रास्ते भर ऐसा ही लोगों का हुजूम जमा था  गया वालों से मेरी एक शिकायत है। शिकायत करूं, आप बुरा नहीं मानोगे न। पक्का नहीं मानोगे। मैं गया लोकसभा के चुनाव के समय भी आया था, इसी मैदान में आया था और करीब-करीब इसी समय आया था और चुनाव पीक पर थे तब आया था। मैं ख़ुद चुनाव लड़ रहा था, लोकसभा का चुनाव था, प्रधानमंत्री बनाने का निर्णय करना था लेकिन उस सभा में तो इससे आधे लोग भी नहीं आये थे और आज उससे डबल से भी ज्यादा मैं देख रहा हूँ। हवा का रुख़ मुझे पता चल रहा है। लेकिन मेरी ये शिकायत प्यार की है, नाराजगी की नहीं है। ये शिकायत आपको अभिनंदन करने के लिए है, आपको बधाई देने के लिए है। कमाल कर दिया है आज गया वालों ने। ये हमारे जीतन राम जी की कर्मभूमि है ना।  
मंच पर विराजमान भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमान अमित भाई शाह, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष श्रीमान मंगल पांडेय जी, केंद्र में मंत्रिपरिषद के मेरे वरिष्ठ साथी श्रीमान राम विलास पासवान जी, हम पार्टी के संस्थापक और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री श्रीमान जीतन राम मांझी जी, केन्द्रीय मंत्री एवं रालोसपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमान उपेन्द्र कुशवाहा जी, बिहार विधानमंडल के नेता श्रीमान सुशील कुमार मोदी जी, बिहार विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता श्रीमान नंद किशोर यादव जी, केंद्र में मंत्रिपरिषद के मेरे साथी श्री अनंत कुमार, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव श्री भूपेन्द्र यादव जी, पूर्व मंत्री और हम सबके मार्गदर्शक श्रीमान डॉ. सी पी ठाकुर जी, केंद्र में मेरे साथी मंत्री श्रीमान राधामोहन सिंह जी, श्री रविशंकर प्रसाद जी, श्रीमान राजीव प्रताप रूडी जी, श्री गिरिराज जी, श्री राम कृपाल यादव जी, हम पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्रीमान शकुनी चौधरी जी, रालोसपा के प्रदेश अध्यक्ष और मेरे मित्र डॉ. अरुण जी, राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीमान शाहनवाज़ हुसैन जी, मंच पर विराजमान सभी वरिष्ठ महानुभाव और विशाल संख्या में पधारे हुए गया के मेरे प्यारे भाईयों और बहनों।
चुनाव बहुत जल्द आ रहे हैं और मैं साफ देख रहा हूँ जनता ने दो फैसले कर लिये हैं। बिहार की जनता ने दो निर्णय कर लिये हैं - एक निर्णय बिहार के जीवन में, बिहार के विकास में, बिहार का भाग्य बदलने के लिए एक आधुनिक ताकतवर नया बिहार बनाने का निर्णय कर लिया है और दूसरा निर्णय बिहार की जनता ने कर लिया है, बिहार में परिवर्तन का। 25 साल से जिनको झेला है, जिनके हर ज़ुल्म को झेला है, जिनके अहंकार को झेला है, जिनकी धोखाधड़ी को झेला है, इन सबसे मुक्ति का पर्व ये चुनाव आने वाला है भाईयों। और ये चुनाव बिहार को जंगलराज से मुक्ति का पर्व बनने वाला है, ये चुनाव बिहार में अहंकारी हुकूमत से मुक्ति का पर्व बनने वाला है।
भाईयों-बहनों, 25 साल हो गए, इन्हीं लोगों ने बिहार पर राज किया है। आप मुझे बताईये, आज जैसे 25 साल बीते हैं, अगर आने वाले 5 साल भी ऐसे बीते तो नौजवान बर्बाद हो जाएगा कि नहीं हो जाएगा? आपका भविष्य तबाह हो जाएगा, आपको बिहार छोड़कर रोजी-रोटी के लिए कहीं जाना पड़ेगा, बूढ़े मां-बाप को छोड़ना पड़ेगा, क्या हम ऐसा बिहार चाहते हैं? क्या बिहार में परिवर्तन चाहिए? बिहार का भला करने वाली सरकार चाहिए? लोकतंत्र में विश्वास करने वाली सरकार चाहिए? अहंकार से मुक्त सरकार चाहिए? जंगलराज के सपनों को चूर-चूर करना चाहिए? इसलिए भाईयों-बहनों, आज मैं बिहार की जनता के पास आया हूँ। मैं आपका आशीर्वाद लेने आया हूँ। क्या करके रख दिया बिहार को? आज भी हिन्दुस्तान के सांस्कृतिक इतिहास की चर्चा कोई करेगा तो उस चर्चा की शुरुआत बिहार के भव्य भूतकाल से होती है। आज भी विश्व में अहिंसा के संदेश की कोई चर्चा करता है तो भगवान बुद्ध का स्मरण करता है तो बात बिहार से प्रारंभ होती है। सत्ता के लिए संघर्ष के बाद जनता की भलाई के लिए सत्य को छोड़ने का महाप्रयास, इसकी भी चर्चा होगी तो यही बिहार से चर्चा होती है। विज्ञान हो, संस्कृति हो, इतिहास हो, वीरता हो, पराक्रम हो, कोई ऐसा विषय नहीं है, हिन्दुस्तान जब भी उसकी चर्चा करे तो चर्चा का प्रारंभ बिहार से होता है।
ऐसी ये महान भूमि, ऐसी ये पवित्र भूमि, उसके सपनों को सत्ता के नशे में बैठे लोगों ने चूर-चूर कर दिए। आधुनिक भारत में भी बिहार ने देश को जितना दिया है, शायद ही हिन्दुस्तान का कोई राज्य इसका दावा कर सकता है जितना बिहार ने देश को दिया है। जब बिहार देश को उत्तम मानव संसाधन दे सकता है आज हिंदुस्तान का कोई राज्य ऐसा नहीं होगा जिस राज्य में बिहार का नौजवान आईएएस बनकर न बैठा हो, कोई राज्य नहीं होगा। भारत के कोने-कोने में बिहार का नौजवान जिस पद पर बैठा है उस राज्य को विकास के नई ऊंचाईयों पर ले जाने का पराक्रम करके दिखाता है। ये बिहार के नौजवानों की ताकत है, ये बिहार के लोगों की ताकत है लेकिन क्या कारण है कि बिहार आगे बढ़ नहीं पा रहा है। क्या कारण है? बिहार को किसने बर्बाद किया? बिहार के सपनों को किसने चूर-चूर किया? बिहार में जंगलराज कौन लाया? बिहार में जंगलराज लाने का और प्रयास कौन कर रहा है? क्या फिर से बिहार को उन 25 साल की बर्बादी की ओर ले जाना है क्या? फिर से उस दोज़ख में जाना है क्या? क्या बिहार बचाना है? क्या नया बिहार बनाना है? क्या बिहार को आगे ले जाना है? तो भाईयों-बहनों, हम कंधे से कंधे मिलाकर चलने के लिए तैयार हैं। अब दिल्ली बिहार के साथ है। अब दिल्ली बिहार का भाग्य बदलने के लिए आपकी सेवा में तैनात है और इसलिए भाईयों-बहनों, आज मैं आपके पास आया हूँ बिहार के जीवन को बदलने के लिए, एक अच्छी सरकार चुनने के लिए आपसे प्रार्थना करने के लिए आया हूँ। बिहार की जनता ने पिछले लोकसभा के चुनाव में मुझपर इतना प्यार बरपाया, इतना प्यार बरपाया कि मैं उस प्यार को ब्याज समेत लौटाना चाहता हूँ, विकास करके लौटाना चाहता हूँ लेकिन जो विकास के लिए प्रतिबद्ध हो, ऐसी सरकार यहाँ होना जरुरी है।
भाईयों-बहनों, गंगाजी तो बहती है लेकिन अगर हम उल्टा लोटा लेकर जाएंगे तो कोई एक बूँद भी पानी नहीं ले पाएंगे। दिल्ली से विकास की गंगा तो बह रही है लेकिन यहाँ के शासकों का अहंकार उल्टा लोटा पकड़े हुए है ताकि दिल्ली के विकास की गंगा बिहार के गाँव-गली में ना पहुंचे। पिछले दिनों जब मैं बिहार आया था, अनेक योजनाओं का शिलान्यास किया। 10-10 साल से रुकी पड़ी थी, कोई देखने को तैयार नहीं था। यही लोग दिल्ली की सरकार को चलाते थे और आज वही लोग साथ मिलकर के बिहार के लोगों को फिर से एकबार जंगलराज की ओर घसीटने के लिए, अपने निजी स्वार्थ के लिए तैयार बैठे हैं। आप मुझे बताईए, ये जो राजनीतिक लाभ लेने के लिए गठबंधन हुआ है, क्या चुनाव के बाद भी ये गठबंधन चलेगा क्या? ये जो जहर अभी पीया गया है, चुनाव के बाद जहर उगलेंगे कि नहीं उगलेंगे। ये जहर पीने वाले चुनाव के बाद जब जहर उगलेंगे तो वो जहर किसकी थाली में जाकर पड़ेगा? जनता की थाली में पड़ेगा कि नहीं पड़ेगा? जनता मरेगी कि नहीं मरेगी? जनता बर्बाद होगी कि नहीं होगी? जिन्होंने जहर पीया है, उनको जहर उगलने का मौका देना चाहिए क्या? ये जहर पीने वालों की जरुरत है क्या? जहर पिलाने वालों की जरुरत है क्या? मुझे तो पता ही नहीं चल रहा, ये बिहार में भुजंग प्रसाद कौन है और चंदन कुमार कौन है? नए भुजंग प्रसाद, नए चंदन कुमार, पता नहीं कौन किसको जहर पिला रहा है, कौन किसका जहर पी रहा है लेकिन इतना मुझे पता है कि चुनाव समाप्त होते ही ये जहर उगलना शुरू करेंगे। बिहार को बर्बाद करने में अब जंगलराज के साथ जहरीला वातावरण भी आने वाला है और इसलिए बिहार को बचाना समय की मांग है।
अब देखिए, भाजपा की सरकार क्यों बनानी चाहिए, एनडीए की सरकार क्यों बनानी चाहिए। जीतन राम मांझी, राम विलास पासवान, उपेन्द्र कुशवाहा, सुशील मोदी, ये सारे अनुभवी लोग, इनके नेतृत्व में बिहार में नई सरकार क्यों बनानी चाहिए। मैं अनुभव से बताता हूँ, हमारे देश में कई वर्षों से ये चर्चा चली, बीमारू राज्य है। बीमारू राज्य शब्द का प्रयोग चल पड़ा। आर्थिक विकास के पैमानों के आधार पर चल पड़ा और उस बीमारू राज्य में बिहार का भी नाम, उत्तरप्रदेश का भी नाम, मध्यप्रदेश का भी नाम, राजस्थान का भी नाम, ये बीमारू राज्य में गिने जाते हैं। लेकिन जब मध्यप्रदेश की जनता ने भाजपा की सरकार बनाई, अभी तो वहां 15 साल का भी सेवा करने का समय पूरा नहीं हुआ, अभी तो 10-12 साल हुए हैं लेकिन 10-12 साल के अन्दर-अन्दर मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में भाजपा ने मध्यप्रदेश को बीमारू राज्य से बाहर निकाल लिया है। भाईयों-बहनों, क्या बिहार को बीमारू से बाहर निकालना है? पक्का निकालना है? मध्यप्रदेश को निकाला भाजपा ने, बिहार को कौन निकालेगा? राजस्थान को बीमारू राज्य कहा जाता था। वसुंधरा राजे के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनी और विकास की नई ऊंचाईयों को पार किया। आज राजस्थान बीमारू राज्य से बाहर निकाल आया है तो भाईयों-बहनों, क्या बिहार बीमारू राज्य से बाहर आ सकता है? क्या हम ला सकते हैं? आप मदद करोगे? आप आशीर्वाद दोगे? मैं आपसे वादा करता हूँ कि 5 साल के भीतर-भीतर हम बिहार को बीमारू राज्य से बाहर निकाल देंगे।
दुनिया में कई देशों में मुझे जाने का सौभाग्य मिला, एशिया के कई देशों में जाने का सौभाग्य मिला और वहां पर बड़े से बड़े राजनेता को मिलना हुआ हो, वहां के उद्योगपतियों से मिलना हुआ हो, वहां के साहित्यकारों से मिलना हुआ हो, वहां के छोटे-मोटे व्यापारियों से मिलना हुआ हो, वहां के सरकारी अफसरों से मिलना हुआ हो, हर किसी ने मुझसे एक बात कही। जिन-जिन देशों में बौद्ध धर्म का प्रभाव है, बौद्ध परंपरा का प्रभाव है, उन सभी देशों के मुखिया ने कहा कि एक बार तो बोधगया जाने की इच्छा है। दुनिया का हर व्यक्ति जो बौद्ध परंपरा से जुड़ा हुआ है, कम्युनिस्ट विचारधारा के नेता भी मिले, वो भी मुझे कहते हैं कि एक बार बोधगया के दर्शन के लिए जाएंगे। जितने यात्री ताजमहल देखने के लिए आते हैं, उससे ज्यादा यात्री बोधगया में माथा टेकने के लिए तैयार हैं। मुझे बताईये, क्या हमें बोधगया को ऐसा बनाना चाहिए कि नहीं चाहिए? बोधगया से ऐसा विकास हो टूरिज्म का ऐसा क्षेत्र बने ताकि दुनियाभर में बुद्ध को मानने वाले लोगों को बोधगया आने की व्यवस्था मिले और इतनी बड़ी संख्या में अगर यात्री आएंगे तो इस इलाके में कभी गरीबी रहेगी क्या।
टूरिज्म एक ऐसा उद्योग है, टूरिज्म एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ कम से कम पूँजी से ज्यादा से ज्यादा लोगों को रोजगार मिलता है। अगर एक बार बोधगया में विश्वभर के यात्रियों के आने का सिलसिला चालू हो जाए और बहुत बड़ी संख्या में हो जाए तो इस इलाके के किसी नौजवान को बेरोजगार रहने की नौबत नहीं आएगी। इतनी ताकत है उसमें और गरीब से गरीब आदमी कमाता है, ऑटो रिक्शावाला भी कमायेगा, बिस्कुट बेचने वाला भी कमायेगा, चने मुरमुरे बेचने वाला भी कमायेगा, खिलौने बेचने वाला भी कमायेगा, फूल बेचने वाला कमायेगा, अरे चाय बेचने वाला भी कमायेगा। लेकिन भाईयों-बहनों, इनकी राजनीति वोट-बैंक की राजनीति इतनी है कि उन्होंने बोधगया का विकास करने की दिशा में कोई प्रयास नहीं किया। इतना ही नहीं, जब यहाँ पर बम धमाका हुआ तो पूरे विश्व को बहुत बड़ा सदमा पहुंचा। विश्वभर में बौद्ध परंपरा को निभाने वाले सभी देशों के लोगों को सदमा पहुंचा लेकिन वोट बैंक की राजनीति में डूबे हुए लोग, उनको इसकी कोई परवाह नहीं थी। उनके लिए ऐसी घटनाएं आती है, जाती है। भाईयों-बहनों, मुझे यह स्थिति बदलनी है।
मुझे बोधगया को पूरे एशिया में तीर्थ-क्षेत्र के रूप में परिवर्तित करना है और मुझे आगे बढ़ाना है। ये गया पितृ तर्पण का स्थल है। हिन्दुस्तान का हर युवक, हर बेटा-बेटी, जब पितृ तर्पण की बात आती है तो उसका एक सपना रहता है कि उसके पिता का तर्पण मैं गया जी में जाकर करूँ। हिंदुस्तान भर के लोगों का ये सपना है कि नहीं है? पितृ तर्पण के लिए लोग आते हैं कि नहीं आते हैं? सवा सौ करोड़ का देश, हर वर्ष करोड़ों बड़ी आयु के लोग स्वर्ग सिधारते हैं, उनके संतान पितृ गया में आ करके तर्पण करना चाहते हैं। करोड़ों लोग आने के लिए तैयार बैठे हैं लेकिन यहाँ का समाचार सुनते हैं और इसके लिए आते नहीं हैं वो पितृ भी नाराज होते हैं और यहाँ के लोगों की रोजी-रोटी का भी नुकसान होता है। मुझे बताईये, हर हिन्दुस्तानी का पितृ तर्पण का सपना पूरा हो, ये व्यवस्था अच्छी होनी चाहिए कि नहीं होनी चाहिए? यहाँ के लोगों को रोजगार मिलना चाहिए कि नहीं मिलना चाहिए?
आप मुझे बताईये, विकास करने की दिशा में अगर आगे बढ़ना है। भाईयों-बहनों, लेकिन अगर जंगलराज पार्ट-2, ये अगर आ गया फिर तो सब बर्बाद हो जाएगा। कोई व्यक्ति जेल जाता है तो क्या सीख कर आता है भाई? कोई अच्छी चीज़ें सीख कर आता है क्या? बुरी-बुरी चीज़ें सीख कर के आता है ना जितनी बुराईयां हैं सब लेकर के आता है कि नहीं आता है? जंगलराज पार्ट-1 में जेल का अनुभव नहीं था, जंगलराज पार्ट-2 में अब जेल का अनुभव जुड़ गया है और इसलिए बर्बादी की संभावना ज्यादा बढ़ गई है। इसलिए पिछली बार जब मैं आया था, तब मैंने कहा था आरजेडी का सीधा-सीधा मतलब है – रोजाना जंगलराज का डर और जो लोग उनके साथ जुड़ गए हैं; आपने देखा होगा कि अभी पटना में सवेरे-सवेरे भाजपा के कार्यकर्ता को गोलियों से भून दिया गया, मौत के घाट उतार दिया गया, पटना में हुआ और इनकी नाक के नीचे हुआ। भाईयों-बहनों, ये जंगलराज की शुरुआत है कि नहीं है? और ये जो जंगलराज पार्ट-2 आ रहा है, जंगलराज और जेल का अनुभव जुड़ रहा है, जंगलराज और जहर उगलने का अवसर खड़ा किया जा रहा है तो उस समय एक तरफ रोजाना जंगलराज का डर और दूसरी तरफ जनता का दमन और उत्पीड़न। जेडीयू - जनता का दमन और उत्पीड़न, जनता – जे, दमन – डी और उत्पीड़न – यू। आप बताईये, बिहार को ऐसे लोगों के हाथ में सौंपा जा सकता है, 25 साल जिन्होंने बर्बाद किया, उनको मौका दिया जा सकता है?
भाईयों-बहनों, आपको हैरानी होगी, पूरे हिन्दुस्तान में ये लालटेन वालों ने आपको अँधेरे में रखा है। बिजली आती है? बिजली मिलती है? परीक्षा का समय हो, अगर पढ़ना है तो बिजली मिलती है क्या? अँधेरे में गुजारा करना पड़ता है? मिट्टी के तेल पर गुजारा करना पड़ता है। पिछले चुनाव में यहाँ के नेता ने आपको वादा किया था कि आपको बिजली देंगे। बिजली देने का वादा किया था, बिजली नहीं मिलेगी तो वोट नहीं मांगूंगा, ऐसा कहा था? बिजली मिली? धोखा किया? फिर से वोट मांगने आए, दूसरा धोखा किया। ये बार-बार धोखा हो रहा है। आप इनके झांसे में आ जाएंगे क्या? आज हिन्दुस्तान में प्रति व्यक्ति कम से कम बिजली की खपत कहीं पर है तो दुर्भाग्यशाली मेरे बिहार के भाई-बहन हैं। उनके भाग्य को इन्होंने अंधकारमय बना दिया है। हिन्दुस्तान में औसत प्रति व्यक्ति करीब-करीब एक हजार किलोवाट बिजली की खपत है जबकि बिहार में 150 किलोवाट भी नहीं है। कहाँ हजार और कहाँ ढेढ़ सौ, छठवां हिस्सा है आपका! इतना ही नहीं, बिहार से भी छोटा राज्य सिक्किम के लोगों की छह गुना ज्यादा खपत है। बिहार से निकला हुआ झारखंड, 10 साल के अंदर-अंदर झारखंड का नागरिक बिहार से 5 गुना ज्यादा बिजली का खपत करता है। आपको अँधेरे में रखने वाला पाप किसने किया है? 25 साल की दो सरकारों ने किया है कि नहीं किया है? 25 साल के दो मुख्यमंत्रियों ने किया है कि नहीं किया है? और इसलिए जिन्होंने आपको बर्बाद किया है, उनको दोबारा भार नहीं दिया जा सकता है।
शिक्षा के क्षेत्र में आज हिन्दुस्तान में कोई भी टीवी चैनल उठा लीजिए, आपको दो-चार बिहार के तेजस्वी नौजवान उस टीवी चैनल के माध्यम से देश को संबोधित करते नजर आएंगे। ऐसे तेजस्वी लोगों की यह भूमि है लेकिन यहाँ के नौजवानों को अवसर नहीं दिया जाता है। टेक्निकल एजुकेशन में आज बिहार का क्या हाल है। अगर हमें नौजवानों को रोजगार देना है तो उनको टेक्निकल एजुकेशन देना होगा, स्किल डेवलपमेंट कराना होगा, इंजीनियरिंग कॉलेज में शिक्षा दिलाना होगा डिग्री इंजीनियरिंग, डिप्लोमा इंजीनियरिंग करानी पड़ेगी, सर्टिफिकेट कोर्स करना पड़ेगा। बिहार के अन्दर नौजवानों को शिक्षा मिलनी चाहिए। आज मुझे दुःख के साथ कहना पड़ता है, आज बिहार का हाल क्या है शिक्षा में।
17-20 साल उम्र के 80 लाख से ज्यादा नौजवान बिहार में हैं। इन 80 लाख बच्चों के मां-बाप के सपने हैं कि उनके बच्चों को डिप्लोमा करने का मौका मिले, डिग्री करने का मौका मिले, सर्टिफिकेट कोर्स करने का मौका मिले लेकिन बिहार में ये सारा होने के बावजूद भी बिहार में इंजीनियरिंग की सीटें कितनी हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि बिहार में सिर्फ़ 25,000 सीट है। 80 लाख नौजवान पढ़ना चाहते हैं उसमें से 5-10 लाख तो इंजीनियरिंग में जाना चाहते होंगे कि नहीं लेकिन सिर्फ़ 25,000 सीट है और ये जिम्मेवारी बिहार सरकार की है। 25 साल हो गए और सिर्फ़ 25,000 सीट।
इतना बड़ा बिहार और दूसरी तरफ देखिये हिन्दुस्तान के और राज्यों का हाल। मैं बताना चाहता हूँ जो बिहार से बहुत छोटे हैं... हिमाचल प्रदेश, पूरे पटना की जितनी जनसंख्या है, पूरे हिमाचल की जनसंख्या उतनी ही है लेकिन हिमाचल प्रदेश में इंजीनियरिंग में पढने के लिए सीटों की संख्या है - 24,000। इतने छोटे हिमाचल में 24,000 और इतने बड़े बिहार में 25,000। क्या होगा यहाँ के नौजवानों का! उड़ीसा, हमारे बगल में है, पिछड़ा राज्य माना गया लेकिन उस उड़ीसा में इंजीनियरिंग की सीटें कितनी हैं, आप कल्पना नहीं कर सकते कि उड़ीसा जैसा बिहार से भी छोटा प्रदेश, वहां इंजीनियरिंग की सीटें हैं -  1 लाख 13 हजार से भी ज्यादा। इस स्थिति के लिए कौन जिम्मेवार है? पंजाब बहुत ही छोटा राज्य है और पंजाब में सीटें हैं - 1 लाख 4 हजार। पंजाब बिहार का एक-चौथाई भी नहीं है और वहां 1 लाख सीटें हैं और बिहार में 25 हजार है। कौन जिम्मेवार है? जंगलराज जिम्मेवार है कि नहीं है? ये दोबारा जंगलराज लाना है? उत्तराखंड बहुत छोटा राज्य है, पटना की जितनी जनसंख्या है, उत्तराखंड की उससे ज्यादा नहीं है, पटना से भी कम जनसंख्या और उसके बावजूद भी उत्तराखंड में इंजीनियरिंग की सीटें हैं – 40,000 से ज्यादा। अब मुझे बताईये कि बिहार के नौजवानों के साथ अन्याय है कि नहीं? बिहार के नौजवानों का भाग्य बर्बाद किया जा रहा है कि नहीं किया जा रहा है? क्या बिहार के नौजवानों को इंजीनियरिंग में पढने का हक होना चाहिए कि नहीं होना चाहिए? उनको ये सुविधा मिलनी चाहिए कि नहीं मिलनी चाहिए? जिन्होंने यह सुविधा नहीं दी है, उन्हें जाना चाहिए कि नहीं जाना चाहिए? उनको भगाना चाहिये कि नहीं चाहिए?
इसलिए मैं आज यह कहने आया हूँ कि अगर बिहार के नौजवानों का भाग्य बदलना है तो शिक्षा में बदलाव लाने की जरुरत है और शिक्षा में बदलाव एनडीए की सरकार ला सकती है, बिहार का भाग्य बदल सकती है। हर वर्ष, बिहार के जिन मां-बाप के पास कुछ पैसे हैं वे अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए बिहार से बाहर भेजते हैं। करीब 4-5 लाख नौजवान बिहार छोड़कर के, अपने मां-बाप को छोड़कर के, यार-दोस्तों को छोड़कर के कहीं न कहीं पढने के लिए जाते हैं और हर साल एक-एक युवक के पढने के पीछे खर्चा करीब-करीब एक लाख रूपया आता है। मुझे बताईये, चार लाख लोग बिहार से बाहर जाएं, हर वर्ष एक लाख रूपया साथ-साथ चला जाए तो बिहार का चार हजार करोड़ का नुकसान होता है कि नहीं होता है? ये बिहार का चार हजार करोड़ रूपया बचना चाहिए कि नहीं चाहिए? अगर बिहार का चार हजार करोड़ रूपया बचाना है तो बिहार के नौजवान को यहाँ पढने के लिए सुविधा मिलनी चाहिए। ये बिहार सरकार भाजपा की सरकार बनाईए, एनडीए की बनाईए और हम बना कर रहेंगे। इसलिए मैं आपसे आग्रह करने आया हूँ कि हमें विकास के लिए वोट चाहिए, बिहार को जंगलराज से मुक्त कराने के लिए वोट चाहिए, धोखेबाजी से बिहार को मुक्त कराने के लिए वोट चाहिए। मैं आपको भरोसा दिलाने आया हूँ कि मैं बिहार की विकास यात्रा में कंधा से कंधा मिलाकर चलूँगा। अगर आप एक कदम चलेंगे तो मैं सवा कदम चलूँगा, मैं ये विश्वास दिलाने आया हूँ। चुनाव के समय भारी मतदान करके परिवर्तन लाकर के रहिये, बिहार का भाग्य बदल के रहिये। 
बहुत बहुत धन्यवाद!     

सोमवार, 17 अगस्त 2015

स्वतंत्रता दिवस 2015 : प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के भाषण का मूल पाठ

स्वतंत्रता दिवस 2015 के अवसर पर प्रधानमंत्री के भाषण का मूल पाठ




 प्रधानमंत्री जी श्री नरेन्‍द्र मोदी ने स्‍वतंत्रता दिवस 2015 के अवसर पर लाल किले के प्राचीर से देश को संबोंधित किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री के संबोधन का मूल पाठ इस प्रकार है -

भारत के सवा सौ करोड़ मेरे प्‍यारे देशवासियों,

आजादी के पावन पर्व पर आप सबको हृदय से बहुत-बहुत शुभकामनाएं। 15 अगस्‍त का यह सवेरा मामूली सवेरा नहीं है। यह विश्‍व के सबसे बड़े लोकतंत्र का स्‍वातंत्र्य पर्व का सवेरा है। यह सवेरा, सवा सौ करोड़ देशवासियों के सपनों का सवेरा है। यह सवेरा सवा सौ करोड़ देशवासियों के संकल्‍प का सवेरा है और ऐसे पावन पर्व पर जिन महापुरूषों के बलिदान के कारण, त्‍याग और तपस्‍या के कारण सदियों तक भारत की अस्मिता के लिए जूझते रहे, अपने सर कटवाते रहे, जवानी जेल में खपाते रहे, यातनाएं झेलते रहे, लेकिन सपने नहीं छोड़े, संकल्‍प नहीं छोड़े। ऐसे आजादी के स्‍वतंत्रता सेनानियों को मैं आज कोटि-कोटि वंदन करता हूं। पिछले दिनों हमारे देश के अनेक गणमान्‍य नागरिकों ने, अनेक युवकों ने, साहित्‍यकारों ने, समाजसेवियों ने, चाहे वो बेटा हो या बेटी हो, विश्‍वभर में भारत का माथा ऊंचा करने का अभिनंदनीय कार्य किया है। अननिगत वो लोग हैं, जिनको मैं आज लालकिले के प्राचीर से भारत का माथा ऊंचा करने के लिए हृदय से बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं, अभिनंदन करता हूं। विश्‍व के सामने भारत की विशालता, भारत की विविधता इसके गुणगान होते रहते हैं। लेकिन जैसे भारत की अनेक विशेषताएं हैं, भारत में अनेक विविधताएं हैं, भारत की विशालता है, वैसे ही भारत के जन-जन में सरलता भी है और भारत के कोने-कोने में एकता भी है। यही हमारी पूंजी है, यह हमारे राष्‍ट्र की शक्ति है। हमारे देश की शक्ति को सदियों से संजोया गया है। हर युग में उसे नया निखार देने का प्रयास हुआ है। समय की आवश्‍यकता के अनुसार, भविष्‍य के सपनों को साकार करने की आवश्‍यकता के अनुसार उन्‍हें ढाला गया है, उन्‍हें पनपाया गया है और उससे चिर पुरातन परंपराओं के बीच, नित्‍य नूतन संकल्‍पों के साथ यह देश आज यहां पहुंचा है। हमारी एकता, हमारी सरलता, हमारा भाई-चारा, हमारा सद्भाव यह हमारी बहुत बड़ी पूंजी है। इस पूंजी को कभी दाग नहीं लगना चाहिए, कभी उसे चोट नहीं पहुंचनी चाहिए। अगर देश की एकता बिखर जाए, तो सपने भी चूर-चूर हो जाते हैं। और इसलिए चाहे जातिवाद का जहर हो, सम्‍प्रदायवाद का जुनून हो, उसे हमें किसी भी रूप में जगह नहीं देनी, पनपने नहीं देना है। जातिवाद का जहर हो, सम्‍प्रदायवाद का जुनून हो, उसे हमें विकास के अमृत से मिटाना है, विकास की अमृतधारा पहुंचानी है और विकास की अमृतधारा से एक नई चेतना प्रकट करने का प्रयास करना है। भाइयों-बहनों यह देश टीम इंडिया के कारण आगे बढ़ रहा है। और ये Team India, सवा सौ करोड़ देशवासियों की बृहत Team है। क्या कभी दुनिया ने सोचा है कि सवा सौ करोड़ देशवासियों की ये Team, जब टीम बनकर के लग जाती है तो वो राष्ट्र को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाते हैं, वे राष्ट्र को बनाते हैं, वो राष्ट्र को बढ़ाते हैं, वे राष्ट्र को बचाते भी हैं, और इसलिए हम जो कुछ भी कर रहे हैं, हम जहां पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं, वह ये सवा सौ करोड़ की Team India के कारण है और टीम इंडिया के आभारी हैं।

लोकतंत्र में जनभागीदारी, ये सबसे बड़ी पूंजी होती है, अगर सवा सौ करोड़ देशवासियों की भागीदारी से हम देश को चलाएंगे तो देश हर पल सवा सौ करोड़ कदम आगे चलता चला जाएगा और इसलिए, Team इंडिया के इस रूप में जनभागीदारी को बल दिया गया है, प्राथमिकता दी गई है। चाहे Electronic के platform के माध्यम से mygov.in हो, चाहे नागरिकों से लगातार आते रहे लाखों पत्र हो, चाहे मन की बात हो, चाहे नागरिकों के साथ संवाद हो। इसी मार्ग से दिनों-दिन जनभागीदारी बढ़ती चली जा रही है। बहुत बड़ी मात्रा में हर काम में, दूर-सुदूर गांवों में बैठे हुए लोगों के भी सुझाव हमें मिलते रहे हैं और यही, Team India की ताकत है। मेरे प्यारे देशवासियों, ये बात निश्चित है इस Team India का एक ही जनादेश है और वो जनादेश है हमारी सारी व्यवस्थाएं, हमारी सारी योजनाएं इस देश के गरीब के काम आनी चाहिए। अगर हम गरीब को गरीबी की मुक्ति की लड़ाई में बल प्रदान करते हैं, उसे सामर्थ्य प्रदान करते हैं, तो देश का कोई गरीब, गरीबी में गुजारा करना नहीं चाहता है, वह भी गरीबी से जंग लड़ना चाहता है और इसलिए शासन व्यवस्था की सार्थकता इस बात में है कि हमारी व्यवस्थाएं, हमारे संसाधन, हमारी योजनाएं, हमारे कार्यक्रम गरीबों के कल्याण के लिए किस प्रकार से उपयोग आते हैं।

भाईयों-बहनों, गत 15 अगस्त को मैंने आपके सामने कुछ विचार रखे थे, तब मैं नया था। अब मैंने जो शुरू-शुरू में देखा था, उसको मैंने, कोई लाग-लपेट के बिना खुले मन से सवा सौ करोड़ देशवासियों के सामने रख दिया था लेकिन आज, एक वर्ष के बाद, उसी लालकिले की प्राचीर से पवित्र तिरंगे झंडे की साक्षी से, मैं देशवासियों को विश्वास दिलाता हूं कि एक साल में Team India, सवा सौ करोड़ देशवासी, एक नए विश्वास के साथ, नए सामर्थ्य के साथ परिश्रम की पराकाष्ठा करते हुए समय-सीमा में सपनों को साकार करने में जुट गए हैं। एक नया विश्वास का माहौल पैदा हुआ। मैंनें गत 15 अगस्त को प्रधानमंत्री जन-धन योजना इसकी घोषणा की। देश में साठ साल बीते, गरीबों के लिये बैंको का राष्ट्रीयकरण किया गया लेकिन इसके बावजूद भी साठ साल से भी अधिक समय के बाद गत 15 अगस्त को देश के चालीस प्रतिशत लोग बैंक खातों से वंचित थे। गरीब के लिये बैंकों के दरवाजे बंद थे। हमने संकल्प किया कि इस कलंक को मिटाना है और विश्व में Financial Inclusion की बातें होती हैं, उस Financial Inclusion को एक मजबूत धरातल पर लाना है तो देश के गरीब से गरीब व्यक्ति को आर्थिक गतिविधि की मुख्य धारा में जोड़ना पड़ेगा और Bank account, ये उसका एक प्रारम्भ बिंदु है। हमने तय किया था, ''करेंगे, करते हैं, सोचते हैं, देखते हैं'' ऐसा नहीं, हमने कहा था- 26 जनवरी को जब देश फिर एक बार तिरंगे झंडे के सामने खड़ा होगा तब तक समय सीमा में काम पूरा करेंगे। मेरे देशवासियों मैं आज गर्व से कहता हूं कि हमने समय सीमा पर काम पूरा किया। 17 करोड़ लोगों ने प्रधानमंत्री जन-धन योजना के अंतर्गत खाते खुलवाए। हमने तो कहा था, गरीबों को अवसर देना था इसलिए कहा था- एक भी रूपया नहीं होगा, एक नया पैसा भी नहीं होगा, तो भी बैंक का accounts खोलेगें। बैंकों को खोलने की कागज़ पट्टी का खर्चा होगा तो होने देंगे। आखिर बैंक किसके लिए हैं! गरीब के लिए होना चाहिए, और इसलिए जीरो बैलेंस से हमने अकाउंट खोलने का संकल्‍प किया था। लेकिन, मेरे देश के अमीरों को हमने देखा है, और इस बार देश ने गरीबों को भी देखा है और गरीबों की अमीरी को देखा है। मैं इन गरीबों की अमीरी को आज लालकिले के प्राचीर से शत-शत नमन करना चाहता हूं, सलाम करना चाहता हूं क्योंकि जीरो बैलेंस से अकाउंट खोलने का कहने के बावजूद भी इन गरीबों ने बीस हजार करोड़ रुपया बैंक के खातों में जमा करवाया।

अगर ये गरीबों की अमीरी न होती तो कैसे संभव होता और इसलिये गरीबों की अमीरी के बलबूते ये टीम इंडिया आगे बढ़ेगी, ये मेरा विश्‍वास आज प्रकट हो रहा है। भाइयों-बहनों हमारे देश में कहीं पर एक बैंक का ब्रांच खुल जाए या बैंक का नया मकान बन जाए तो इतनी बड़ी चर्चा होती है कि वाह! बहुत बड़ा काम हो गया, बड़ा विकास हो रहा है, बड़ी प्रगति हो रही है क्‍योंकि 60 साल तक हमने इन्‍हीं मानदंडों से देश के विकास को नापा है। वो नापने की पट्टी यही रही है कि एक बैंक का ब्रांच खुल जाए, बहुत बड़ी वाहवाही हो जाती है, बहुत बड़ा जय-जयकार हो जाता है। सरकार की बल्‍ले-बल्‍ले बात हो जाती है। लेकिन मेरे प्‍यारे देशवासियों, बैंक का ब्रांच खोलना मुश्‍किल काम नहीं है। सरकारी तिजोरी से वो काम हो जाता है। लेकिन 17 करोड़ देशवासियों को बैंक के दरवाजे तक लाना ये बहुत बड़ा कठिन काम होता है, बहुत बड़ा परिश्रम लगता है। जी-जान से जुटना पड़ता है, पल-पल हिसाब मांगना पड़ता है। और मैं टीम इंडिया के मेरे महत्‍वपूर्ण साथी, टीम इंडिया के इस महत्‍वपूर्ण साथी बैंक के कर्मचारियों का, बैंकों का हृदय से अभिनंदन करता हूं कि उन्‍होंने बैंक को गरीबों के सामने ला करके रख दिया और ये चीज आने वाले दिनों में बहुत बड़ा बदलाव लाने वाली है।

दुनिया में आर्थिक चिंतनधाराओं में एक चिन्‍तनधारा ये भी है कि financial inclusion यह हमेशा अच्‍छा नहीं होता है और उसके कारण गरीबी का बोझ व्‍यवस्‍थाओं पर पड़ता है। मैं इस विचार से सहमत नहीं हूं। भारत जैसे देश में अगर विकास का Pyramid हम देखें। तो Pyramid के जो सबसे नीचे की सतह होती है, वो सबसे चौड़ी होती है। अगर वो मजबूत हो तो विकास का सारा Pyramid मजबूत होता है। आज विकास के Pyramid में हमारे देश का दलित, पीड़ित, शोषित, वंचित, उपेक्षित, वो वहां पर बैठा हुआ है। हमें विकास की Pyramid की इस नींव को मजबूत करना है ताकि, financial inclusion के द्वारा अगर वो ताकतवर होगा तो विकास का Pyramid कभी हिलेगा नहीं। कितने ही झोंके क्‍यों न आए, उसे कोई संकट नहीं आएगा और विकास का ये Pyramid आर्थिक मजबूती पर खड़ा होगा तो उनकी खरीद शक्‍ति बहुत बढ़ेगी और जब समाज के आखिरी इंसान की खरीद शक्‍ति बढ़ती है तो इस economy को आगे बढ़ने से कोई रोक नहीं सकता। वो बहुत तेज गति से देश को विकास की नई उंचाइयों पर ले जाता है और इसलिए हमारी कोशिश यह है कि हम उस पर बल दें। हमने सामाजिक सुरक्षा पर बल दिया है। गरीबों की भलाई पर बल दिया है।

प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, अटल पेंशन योजना और जीवन-ज्‍योति योजना, हमारे देश में करोड़ों-करोड़ों लोग हैं जिनको सुरक्षा का कवच नहीं है। Insurance का लाभ हमारे देश में निम्‍न मध्‍यम वर्ग को भी नहीं पहुंचा है गरीब की बात तो छोड़ो। हमने योजना बनाई एक महीने का एक रुपया, ज्‍यादा नहीं एक महीने का एक रुपया। 12 महीने का 12 रुपया और आप प्रधानमंत्री सुरक्षा-बीमा के हकदार बन जाइए। अगर आपके परिवार में कोर्इ आपत्ति आई तो दो लाख रुपया आपके परिवार को मिल जाएगा। अर्थतंत्र को कैसे चलाया जाता है। हम प्रधानमंत्री जीवन-ज्‍योति बीमा लाये। एक दिन के 90 पैसे, एक रुपए से भी कम, सालभर का 330 रुपया। आपके परिवार के स्‍वास्‍थ्‍य के लिए, आपके परिवार की सुरक्षा के लिए 2 लाख रुपयों का बीमा सिर्फ 90 पैसे दो रोज के, हमने किया। भाइयो-बहनों भूतकाल में योजनाएं तो बनती रहीं, कौन सरकार होगी जो योजना नहीं बनाती होगी। हर कोई बनाता है, कौन सरकार होगी जो घोषणाएं नहीं करती होगी हर कोई करती है। कौन सरकार होती है जो उद्घाटन दीये न जलाती हो, फीता न काटती हो, सब कोई करते हैं, लेकिन कसौटी इस बात की होती है कि हम जिन बातों को कहते हैं, उसको पूरा करते हैं कि नहीं करते हैं। हमने एक नये Work culture पर दबाव डाला है, हमने एक नई कार्य-संस्‍कृति पर दबाव डाला है। और भाइयो-बहनों हमारे देश की कई योजनाएं जो 40 साल पुरानी हैं, 50 साल पुरानी हैं, 5 करोड़, 7 करोड़ लोगों से आगे नहीं पहुंच पाती हैं। इस योजना को अभी तो 100 दिन पूरे हुए है, 100 दिन। 100 दिन में 10 करोड़ नागरिकों ने इसका लाभ लिया है, 10 करोड़ नागरिकों ने। हमारे देश में ये 10 करोड़ नागरिक मतलब कि 10 करोड़ परिवार हैं। इसका मतलब ये हुआ कि देश में जो 30-35 करोड़ परिवार हैं उसमें से 100 दिन के भीतर-भीतर 10 करोड़ परिवार इस योजना में शरी‍क हो गए हैं। भाइयों-बहनों, हमारी सरकार की Team India की पिछले एक साल की जो विशेषता है, Team India का जो पराक्रम है, Team India सवा सौ करोड़ देशवासी टीम इंडिया हैं। उन्‍होंने जो सबसे बड़ा काम किया है समय-सीमा में निर्धारित कामों को पूरा करना। मैंने पिछली बार लाल किले पर से शौचालय की बात की थी, स्‍वच्‍छता की बात की थी। देश के लिए पहले घंटे-दो घंटे अजूबा लगा कि कैसे प्रधानमंत्री है कि लाल किले पर शौचालय बनाने में किसलिए समय खपा रहा है। लेकिन आज पूरे देश में जितने भी सर्वे होते हैं, हर सर्वे में एक बात उजागर आती है कि इस Team India की सबसे महत्‍वपूर्ण जन-जन को छूने वाली कोई बात है तो वो स्‍वच्‍छता का अभियान है। भाइयो-बहनों हमने स्‍वच्‍छता अभियान को आगे बढ़ाने के लिए समाज के लोगों का आह्वान करते रहते थे 9-9 लोगों का नाम अंकित करते थे एक दौर चल पड़ा था। लेकिन आज इस Team India को मुझे बधाई देनी है चाहे celebrity हो, चाहे राजनयिक हो, चाहे समाज सेवक हो, शिक्षाविद् हो, संप्रदायी जीवन से जुड़े हुए, आध्‍यात्‍मिक जीवन से जुड़े हुए महानुभाव हो, चाहे हमारे media के मित्र हो, सबने किसी की आलोचना किए बिना, बुराइयों को खोजने के बिना, जन-सामान्‍य को प्रशिक्षित करने का एक बहुत बड़ा बीड़ा उठाया है। मैं, जिन्‍होंने इस काम को किया है उन सबका आज ह्दय से अभिनंदन करता हूं। लेकिन सबसे ज्‍यादा एक बात मुझे कहनी है ये स्‍वच्‍छ-भारत के अभियान को ये सबसे बड़ी ताकत कहां से मिली है। उसके सबसे बड़े Brand Ambassador कौन है। आपका ध्‍यान नहीं गया होगा लेकिन आप अपने परिवार में याद कीजिए क्‍या हुआ था। हिन्‍दुस्‍तान में ऐसे कोटि-कोटि परिवार है जिन परिवारों में 5 साल के 10 साल के 15 साल के बालक इस स्‍वच्‍छ भारत अभियान के सबसे बड़े Ambassador बने है। ये बालक घर में कोई कूड़ा-कचरा करता है तो बच्‍चे मां-बाप को रोकते है कि नहीं, गंदगी मत करो, कूड़ा-कचरा मत फेकों, किसी पिता को गुटखा खाने की आदत है और कार का शीशा खोलता है तो बच्‍चा रोक देता है कि दादा बाहर थूकना नहीं, भारत स्‍वच्‍छ रहना चाहिए ये कार्यक्रम की सफलता उन छोटे-छोटे बालकों के कारण है। मैं, मेरे देश के भविष्‍य के प्रति, उन बालकों के प्रति अपना सर झुकाना चाहता हूं। सर झुका करके नमन करना चाहता हूं। जो बात बड़े-बड़े लोगों को समझने में देर लगती है वो भोले-भाले निर्मल मन के बालकों ने तुरंत पकड़ लिया है। और मुझे विश्‍वास है जिस देश का बालक इतना सजग हो, स्‍वच्‍छता के लिए प्रतिबद्ध हो वह देश स्‍वच्‍छ होकर रहेगा। गंदगी के प्रति नफरत पैदा होकर रहेगी।

2019, महात्‍मा गांधी की 150वीं जयंती हम मनाने वाले हैं और महात्‍मा गांधी की 150वीं जयंती स्‍वच्‍छ भारत को हमें उन्हे अर्पित करना है। महात्‍मा गांधी को 150वीं जयंती पर इससे बड़ी कोई श्रद्धांजलि नहीं हो सकती। और इसलिए अभी तो काम शुरू हुआ है लेकिन मुझे इसको आगे बढ़ाना है। इसको रोकना नहीं है, संतोष मानना नहीं है। मैंने trial के लिए, क्‍या ये काम टीम इं‍डिया कर पाती है कि नहीं कर पाती? इसके ट्रायल के लिए, एक जिसको नाप सकूं, ऐसे कार्यक्रम को मैंने यहां से घोषित किया था। किसी से सलाह-मशविरा करके घोषित नहीं किया था। जिलों से, गांवों से, जानकारियां प्राप्त कर-करके घोषित नहीं किया था। बस मेरे दिल में आया था और मैंने कह दिया था कि अगली 15 अगस्‍त तक हमारे विद्यालयों में हमारे स्‍कूलों में लड़के और लड़कियों के लिए अलग शौचालय बना देंगे और बाद में जब हमने काम शुरू किया, टीम इंडिया ने अपनी जिम्‍मेदारी को समझा, ध्‍यान में आया कि इस देश में 2 लाख 62 हजार विद्यालय ऐसे थे, जिसमें सवा चार लाख से ज्‍यादा toilet बनवाने थे। ये आंकड़ा इतना बड़ा था कि कोई भी सरकार सोचती- नहीं साहब! इसके लिए समय बढ़ा दीजिए, लेकिन टीम इंडिया का संकल्‍प देखिए किसी ने भी समय बढ़ाने की मांग नहीं की और आज 15 अगस्‍त को, मैं उस टीम इंडिया का अभिनंदन करता हूं कि उन्‍होंने भारत के तिरंगे झंडे का सम्‍मान करते हुए, इस सपने को पूरा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी और करीब-करीब सारे toilet बनाने के काम में टीम इंडिया ने सफलता पाई है।

मैं इसके लिए राज्‍य सरकारों को अभिनंदन देता हूं, जिला इकाई में बैठे हुए सरकारी अफसरों को अभिनंदन करता हूं, शिक्षा संस्‍था में बैठे हुए नीति निर्धारक हो या संचालक हो, उन सबका अभिनंदन करता हूं। ये मुद्दा सवा चार लाख toilet बनने का नहीं है। ये मुद्दा, जो निराशा का माहौल है कुछ हो नहीं सकता है, कैसे होगा, कैसे करेंगे, ये जो माहौल है, उस माहौल के सामने यह आत्‍मविश्‍वास पैदा कर सकता है। हम भी कुछ कम नहीं हैं, टीम इंडिया पीछे नहीं हट सकती है, टीम इंडिया सफलता लेके रह सकती है, ये इसमें से संकेत मिल रहा है और इसलिए राष्‍ट्र चलता है आत्‍मविश्‍वास के भरोसे। राष्‍ट्र चलता है नए-नए संकल्‍पों की पूर्ति कर-करके, राष्‍ट्र चलता है, नए-नए सपनों को संजो करके। हम कहीं बंद नहीं हो सकते, हमें निरंतर आगे बढ़ना होता है। और इसलिए

भाइयों- बहनों हमारे देश का मजदूर, हमने योजना बनाई श्रमेव जयते। भारत में गरीब मजदूर के प्रति देखने का रवैया हमें शोभा नहीं देता है। हम कोई कोट, पैंट, टाई पहना हुआ महापुरूष मिल जाए, लम्‍बा कुर्ता जैकेट पहन करके कोई महापुरूष मिल जाए तो खड़े होकर उसका बड़ा अभिवादन करते हैं। लेकिन कोई ऑटो-रिक्‍शा वाला आ जाए, कोई पैडल रिक्‍शा वाला आ जाए, कोई अखबार बेचने वाला आ जाए, कोई दूध बेचने वाला आ जाए, इन गरीबों के प्रति हमारा देखने का भाव ठीक नहीं है। राष्‍ट्र की इस कमी को सवा सौ करोड़ देशवासियों ने अपने मन के संकल्‍प से मिटाना है। जिनके कारण हम अच्‍छे दिखते हैं, जिनके कारण हमारा अच्‍छा काम होता है, उससे बड़ा हमारा कोई हितैषी नहीं होता है। और इसलिए dignity of labour, श्रमिकों का सम्‍मान, श्रमिकों का गौरव,ये हमारा राष्‍ट्रीय कर्तव्य होना चाहिए यह हमारा राष्‍ट्रीय स्‍वभाव होना चाहिए। यह जन-जन की प्रवृति होनी चाहिए, यह जन-जन की वृत्ति होनी चाहिए। पिछले दिनों कुछ योजनाओं के तहत जो unorganised labour हैं, उनको विशेष पहचान पत्र देने का हमने अभियान प्रारंभ किया। उस पहचान पत्र के द्वारा उसको कई सुरक्षा की योजनाओं का लाभ मिलने वाला है। इन असंगठित मजदूरों की तरफ कभी देखा नहीं जाता था, उसी प्रकार से हमारे देश के मजदूरों ने अपनी मेहनत से सरकार की तिजोरी में अपना हिस्‍सा जमा करवाया। धीरे-धीरे यह रकम 27 हजार करोड़ रुपये पहुंची। लेकिन वो मजदूर बेचारा 6-8 महीने नौकरी करके कहीं और चला जाता है। फिर साल दो साल के बाद कहीं और चला जाता है। आगे जहां पैसे कटवा करके आया है, उसका कोई हिसाब-किताब रहता नहीं। पूंजी भी इतनी कम होती है कि मन नहीं करता है कि चलो 200 रुपये किराया खर्च करके फिर वापस जाकर पैसा ले आऊं। और इसके कारण 27 हजार करोड़ रुपया मेरे देश के गरीबों का, मेरे देश के मजदूरों का, उनकी पसीने की कमाई का सरकार की तिजोरी में सड़ रहा है। हमने उपाय खोजा, हमने मजदूरों को, श्रमिकों को एक special पहचान कार्ड नम्‍बर दे दिया। और उनको कहा कि अब आपका तबादला कहीं पर भी होगा, आप एक नौकरी छोड़कर कहीं पर भी चले जाएंगे, एक कारखाना छोड़कर दूसरे कारखाना चले जाएंगे, एक राज्‍य छोड़कर दूसरे राज्‍य चले जाएंगे यह नम्‍बर आपके साथ-साथ चलेगा और वो रुपये भी आपके साथ-साथ चलते जाएंगे। आपका एक रुपया कोई हजम नहीं कर पाएगा। 27 हजार करोड़ रूपया गरीबों को वापस करने की दिशा में हमने प्रयत्‍न किया।

हमारे देश में एक फैशन हो गया है। हर चीज में कानून बनाते रहो, हर चीज में कानून बनाते रहो और हमारे न्‍यायालयों को busy रखते रहो। एक कानून से दूसरा कानून उल्‍टी बात बताता हो, लेकिन एक ही विषय का कानून हो। confusion create करना यही काम हमारे यहां चलता रहा। Good Governance के लिए अच्‍छी निशानी नहीं है। और इसलिए कानून स्‍पष्‍ट हो, कानून सटीक हो, कानून कालबाह्य नहीं होना चाहिए। समाज तभी तो गति करता है। हमारे मजदूरों के लिए भिन्‍न-भिन्‍न प्रकार के 44 कानूनों के ढ़ेर, उसमें से बेचारा मजदूर अपने हित की बात कहां खोजेगा। हमने उसमें बदलाव लाया है। 44 कानूनों को चार आचार संहिताओं में समेट करके.. गरीब से गरीब, अनपढ़ से अनपढ़ मजदूर भी अपने हित की बात को पकड़ सकें, इस योजना को हमने बल दिया है।

भाइयों-बहनों हमारे देश में भ्रष्‍टाचार को ले करके बहुत बातें होती हैं। आपने देखा होगा बीमार व्‍यक्ति भी, दूसरे को स्‍वस्‍थ कैसे रहना चाहिए, उसकी Tips देने का आदत रखता है। खुद तो अपने आप को संभालता नहीं है, लेकिन हर इंसान का स्‍वभाव होता है.. तुम ऐसा करो ठीक हो जाओगे, तुम वैसा करो ठीक हो जाओगे। ये corruption भी ऐसा है, जो इसमें लिप्त है, वो भी सलाह देता है, जो इसके कारण परेशान है, वो भी सलाह देता है और एक प्रकार से एक-दूसरे को सलाह देना, यही चला है।

भाईयों-बहनों मैंने कभी ये घोषणा नहीं की है, लेकिन आज मैं हिसाब देना चाहता हूं, मैं देशवासियों को विश्वास दिलाना चाहता हूं, मैं सवा सौ करोड़ देशवासियों की Team India को कहना चाहता हूं कि ये देश भ्रष्टाचार से मुक्त हो सकता है। अनुभव के आधार पर कह रहा हूं, ऊपर से शुरू करना होता है।

साथ-साथ भ्रष्टाचार हमारे देश में दीमक की तरह लगा हुआ है और दीमक ऐसे फैलती चली जाती है, पहले तो दिखती नहीं है लेकिन जब Bedroom तक जुड़ जाए, कपड़े जहां लगे हो उस cupboard तक पहुंच जाए तब पता चलता है और जब दीमक से मुक्ति लेनी है तो हर square meter जमीन पर injection लगाने पड़ते हैं दवाइयों के, घर में एक जगह पर injection लगाने से काम नहीं बनता है, दीमक को अगर खत्म करना है तो हर square meter में हर महीने injection लगाते रहना पड़ता है तब जाकर के, सालों प्रयास करने के बाद दीमक से मुक्ति मिलती है। इतने बड़े देश में भी भ्रष्टाचार रूपी दीमक से मुक्ति के लिए अनेक प्रकार के कोटि-कोटि प्रयासों की आवश्यकता है और उसे किया भी जा सकता है।

कभी-कभी, मैं अगर ये कहता कि मैं LPG Gas subsidy 15 हजार करोड़ रूपया cut करने वाला हूं तो मैं दावे से कहता हूं हिंदुस्तान में इस सरकार की वाहवाही के सैंकड़ों लेख लिखे गए होते कि ये मोदी बड़ा दम वाला है कि उसने 15 हजार करोड़ रूपए की गैस की सब्सिडी को बंद कर दिया, ये आदमी है, जो बड़े कठोर निर्णय़ कर सकता है और अगर वो नहीं किया तो यार कुछ होता नहीं है, कुछ दिखता नहीं है। कभी-कभी कुछ लोगों को निराशा के गर्त में डूबने का शौक होता है, जब तक वो चार लोगों के बीच निराशा की बातें न करें, उनको रात को नींद नहीं आती है, ये उनका एक व्यसन होता है। कुछ बीमार लोग होते हैं, जिनको कोई बीमारी के लिए पूछे तो पसंद नहीं आता है, वो चाहते नहीं है कि बीमारी का पता चले और कुछ बीमार ऐसे होते हैं वो इंतजार करते हैं, यार वो आया नहीं, वो पूछने नहीं आया और फिर उसको घंटे भर वर्णन करते हैं कि ऐसा हुआ-ऐसा हुआ है, मैं देख रहा हूं कुछ लोग होते हैं जो निराशा ढूंढ़ते रहते हैं, निराशा फैलाते रहते हैं और जितनी ज्यादा निराशा फैले, उतनी उनको ज्यादा गहरी नींद आती है। ऐसे लोगों के लिए न योजनाएं होती हैं, न कार्यकलाप होते हैं और न ही सवा सौ करोड़ देशवासियों की Team India इनके लिए भी समय invest करने के लिए तैयार है लेकिन होता कैसे है। एलपीजी की सब्सिडी हमने Direct benefit transfer की scheme लाए, जन-धन account का फायदा लिया, आधार कार्ड का फायदा लिया और ग्राहकों के खाते में सीधी सब्सिडी पहुंचाई और इसके कारण जो दलाल थे, उनकी दुकान बंद हो गई, जो बिचौलिए थे, उनकी दुकान बंद हो गई, जो कालाबाजारी थे, उनकी दुकान बंद हो गई। सही व्यक्ति को सही लाभ, किसी का एक रुपया काटा नहीं है। बड़ी वाहवाही हो, ऐसी घोषणाएं नहीं की, व्यवस्था में सुधार किया और मैं आज मेरे सवा सौ करोड़ देशवासियों की Team India को कहना चाहता हूं, इसके कारण करीब-करीब 15 हजार करोड़ रुपया, हर साल का 15 हजार करोड़ रुपया जो कि गैस सिलेंडर के नाम से चोरी होता था, वो बंद हो गया, भ्रष्टाचार चला गया मेरे देशवासियों। लगता होगा, काम कैसे होते हैं मेरे भाइयों-बहनों 15 हजार करोड़ रुपया भारत जैसे देश के लिए सामान्य बात नहीं होती और वो हमने करके दिखाया है और हमने खुली website बनाई, डीलरों का यहां board लगवाया। इसके बावजूद भी किसी की भी शिकायत है तो आधी रात को उसको गैस सिलेंडर मिल जाएगा लेकिन देश को लूटने वालों के लिए इजाजत नहीं है, गरीबों के पैसे लूटने वालों के लिए इजाजत नहीं है क्या ये काम भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई का काम नहीं, है कि नहीं? मेरे भाइयों-बहनों देश से एक request की थी मैंने मेरे देशवासियों से, कि अगर आप आर्थिक रूप से संपन्न हैं तो आप एलपीजी सब्सिडी क्यों लेते हैं, ये 500-700 रुपया आपके लिए क्या जरूरत है। 500-700 रुपया तो आप चाय-पान में एक दिन में खर्च करने वाले लोग हैं। मैंने अभी बात शरू की है, अभियान नहीं चलाया है क्योंकि Team India पर मेरा भरोसा है जैसे-जैसे बात पहुंचेगी परिणाम मिलता जाएगा लेकिन आज मैं गर्व से कहता हूं कि एलपीजी गैस सिलेंडर की सब्सिडी give it up का movement चलाया। अब तक 20 लाख लोगों ने गैस सब्सिडी छोड़ दी भाइयों। ये आंकड़ा छोटा नहीं है, ये छोटा आंकड़ा नहीं है। हम मंदिर में भी प्रसाद की कतार में भी खड़े रहते हैं तो कभी मन करता है कि छोटे भाई के लिए भी और एक प्रसाद दे दे, ये हमारी प्रकृति है लेकिन और ये 20 लाख कोई अमीर घराने के लोग नहीं हैं, सामान्य मध्यम वर्ग, कोई शिक्षक, पेंशन पर गुजारा करता है लेकिन जब उसने सुना कि ये सिलेंडर किसी गरीब परिवार को जाने वाला है उसने अपनी सब्सिडी छोड़ दी। मेरे भाइयों-बहनों गरीबों के कल्याण के लिए जब 20 लाख गैस सिलेंडर उस गरीब परिवार में पहुंचेंगे, जहां का रसोड़ा kitchen धुंए से भरा हुआ रहता है, आप मुझे बताइए उस मां को कितना सुख मिलेगा, छोटे-छोटे बच्चे धुंए के कारण रोते रहते हैं, उनको कितना सुख मिलेगा। काम सही दिशा में करने से परिणाम मिलता है। भाइयों-बहनों अगर मैं कोयले की चर्चा करूंगा तो कुछ political पंडित उसको राजनीति की तराजू से तोलेंगे, ये जगह उस काम के लिए नहीं है और इसलिए मैं सभी political पंडितों को प्रार्थना करता हूं कि मैं जिस कोयले की चर्चा करने जा रहा हूं, उसको राजनीति की तराजू से कृपा करके मत तोलिए। ये राष्ट्र की संकल्प शक्ति का तकाजा है। जब CAG ने कहा कि कोयले पर्ची से कोयला की खदान देने के कारण 1 लाख 76 हजार करोड़ का नुकसान हुआ है। हम भी चुनाव में बोलते थे लेकिन मन में रहता था कि यार इतना तो नहीं हुआ होगा, बोलते तो थे लेकिन मेरे भाइयों-बहनों हमने समय-सीमा के अंदर तय किया कि कोयला हो, Spectrum हो और कोई खनिज हो अब उसकी नीलामी की जाएगी, auction किया जाएगा और मेरे प्यारे देशवासियों ये Team India का पराक्रम देखिए, सवा सौ करोड़ देशवासियों की Team India का संकल्प देखिए, समय-सीमा में कोयले का Auction हुआ और करीब-करीब 3 लाख करोड़ रुपया देश के खजाने में आएंगे। भाइयों-बहनों आप अपनी आत्मा से पूछिए, क्‍या भ्रष्‍टाचार गया कि नहीं गया, दलालों का ठेका गया कि नहीं गया, हिन्‍दुस्‍तान की संपत्‍ति को लूटने वालों के दरवाजे बंद हुए कि नहीं हुए? मैंने कोई भाषण नहीं दिया था, करके दिखाया।

Spectrum में वहीं हुआ। अभी एफएम रेडियो का auction चल रहा है, बड़े-बड़े लोग परेशान है। मुझ पर बहुत दबाव डाला गया कि मोदी जी, एफएम रेडियो, रेडियो तो सामान्‍य व्‍यक्‍ति को काम आता है, कोई कमाई नहीं होती है। आप एफएम रेडियो का auction क्‍यों करते हैं। बहुत दबाव डाला गया था। हर प्रकार से मेरा ध्‍यान आकर्षित करने का प्रयास हुआ था। लेकिन हमने कहा, सवा सौ करोड़ देशवासियों की टीम इंडिया transparency चाहती है, पारदर्शिता चाहती है और अभी एफएम रेडियो के करीब-करीब 80-85 शहरों का auction चल रहा है। परसों जब मैंने पूछा auction में हजार करोड़ रुपयों से भी ऊपर चला गया था। ये पैसा गरीब के काम आने वाला है। भाइयों-बहनों, देश को ठेकेदारों ने कैसे चलाया, कैसे लूटा, नीतियों पर प्रभाव पैदा किया। हमारे देश में कैसा कारोबार किया गया है। विदेश से जो कोयला आता है, वो कोयला समुद्री तट के बिजली के कारखानों को नहीं दिया जाता है। उसको जहां कोयले की खदानें हैं, उसके अगल-बगल के कारखानों को देने के लिए वहां से transport किया जाता है और कोयले की खदानों का कोयला है उसको transport करके समुद्र तट के कारखानों तक ले जाया जाता है। इस देश के छोटे बालक को भी समझ आ सकता है कि भाई इधर का माल उधर और उधर का माल उधर के बजाए, जिसका जहां है वहां लगाओ। भाइयों-बहनों हमने निर्णय बदल दिया है। कारखाने के नजदीक में जो है उसका लाभ सबसे पहले उसे मिले और मैं कहना चाहूंगा कि एक छोटे से इस निर्णय ने दलालों की दुकानें बंद की और सरकार की तिजोरी में 1100 करोड़ रुपया जमा हो गया मेरे भाइयों और बहनों, और ये हर वर्ष होगा।

भ्रष्‍टाचार एक प्रकार से व्‍यवस्‍था का हिस्‍सा बन गया है। जब तक व्‍यवस्‍था के हिस्‍सों से उसे उकाटा नहीं जाएगा, भाइयों और बहनों मैं आज तिरंगे झंडे की साक्षी से बोल रहा हूं, लाल किले की प्राचीर से बोल रहा हूं। सवा सौ करोड़ देशवासियों के सपनों को समझ करके बोल रहा हूं। 15 महीने हो गए, आपने दिल्‍ली में जो सरकार बैठाई है, उस सरकार पर एक नए पैसे के भ्रष्‍टाचार का आरोप नहीं है और मैं, मेरे देशवासियों, आपने, आपने मुझे जिस काम के लिए बैठाया है इस काम को पूरा करने के लिए हर जुर्म को सहता रहूंगा, हर अवरोधों को झेलता रहूंगा। लेकिन आपके आशीर्वाद को लेकर के भ्रष्‍टाचार मुक्‍त भारत के सपने को साकार करके रहूंगा, ये आपको मैं कहने आया हूं। लेकिन मैंने कहा था, ये दीमक है। सिर्फ दिल्‍ली सरकार से भ्रष्‍टाचार जाए इससे बात बनने वाली नहीं है। अभी-भी छोटे-छोटे स्‍थान पर परेशानियां हो रही हैं। गरीब आदमी इन छोटे लोगों की परेशानी से परेशान है। इसके लिए, हमारी एक राष्‍ट्रीय चेतना को जगाने की आवश्‍यकता है। हमने भ्रष्‍टाचार के इस रूप से भली-भांति उसको समझ करके, जन-जन को उसकी मुक्‍ति के लिए जोड़ना है और तब जाकर के इस कलंक को हम मिटा सकते हैं।

भाइयों-बहनों, मुझे ये भी कहना है, काला धन। काले धन के लिए इतने कम समय में हमने एक के बाद, अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण कदम उठाए हैं। सरकार बनने के पहले दिन सुप्रीम कोर्ट मार्गदर्शन में SIT बना दी। तीन साल से लटका हुआ काम हमने पहले ही सप्‍ताह में पूरा कर दिया, वो SIT आज काम कर रही है। मैं जी-20 समिट में गया, दुनिया के वो देश वहां मौजूद थे, जिनकी मदद से काला धन वापस आ सकता है। जी-20 समिट में भारत के आग्रह पर काले धन के खिलाफ प्रस्‍ताव किया गया और हर देश एक-दूसरे को मदद करेगा, काला धन देशों को वापस पहुंचाने के लिए, इसका संकल्‍प लिया गया। अमेरिका के साथ FATCA का कानून, हमने नाता जोड़ दिया। हमने विश्‍व के उन देशों के साथ उस प्रकार की संधियां की है, ताकि वो देश, अपने पास इस प्रकार का कोई भारतीय नागरिक का धन हो तो उसकी जानकारियां हमें real time में देता रहे। एक के बाद एक कदम उठाते रहे। भाइयों-बहनों हमने एक कठोर कानून पारित किया। अब जब कानून पारित हो गया, तो हर हफ्ते कोई न कोई हमारी सरकार का संपर्क करता है और कहता है आपकी सरकार ने बड़ा जुल्‍म किया है। ऐसा कठोर कानून बना दिया, कोई कहता है कि ऐसा काला कानून बना दिया। इसके कारण अफसरों का जुल्‍म बढ़ जाएगा। भाइयों-बहनों कभी-कभार जब बीमारी बड़ी भयानक होती है तो ऐसे इंजेक्‍शन की जरूरत पड़ती है और जब इंजेक्‍शन लेते हैं, तो डॉक्‍टर भी कहता है कि side effect होगा। लेकिन यह बीमारी इतनी भयंकर है कि side effect झेलने के बाद भी इसी दवा से मुक्ति मिलेगी। मैं जानता हूं यह काला धन का हमने कानून बनाया है, उसके कारण बहुत लोग परेशान हैं, बहुत लोगों को मुसीबत दिखाई दे रही है। काला धन थोड़ा dilute हो, थोड़ा नियमों में छूट आ जाए, इसके लिए हमारे तक संदेश पहुंचाए जाते हैं। मैं इन Team India सवा सौ करोड़ देशवासी मैं आज कहना चाहता हूं, वो side effect की तैयारी के साथ भी काले धन के खिलाफ कठोरता से काम लेने के दिशा में हम आगे बढ़े और बढ़ेंगे और इतना हो गया है काला धन वापस लाने की एक लम्‍बी प्रक्रिया चल रही है, लेकिन इतना तो हो गया है कि अब कोई काला धन बाहर भेजने की हिम्‍मत नहीं करता है। यह तो फायदा हुआ ही हुआ है। कोई माने या न माने। इतना ही नहीं, अभी कुछ दिनों में जब यह समय दिया है कि आप अपना घोषित कर सकते हो। मैं आज कह सकता हूं करीब 65 सौ करोड़ रुपया अब अघोषित आय। लोगों ने आकर के घोषित सामने से करना शुरू कर दिया। यह पैसा हिंदुस्‍तान की तिजोरी में आएगा। भारत के गरीब के काम आएगा। और भाइयों-बहनों आपको जो मैंने विश्‍वास दिया है, उसे पूरा करने के लिए पूरे संकल्‍प के साथ हम आगे बढ़ेंगे।

भाइयों-बहनों सीबीआई के द्वारा हमारी सरकार बनने के पहले एक वर्ष में भ्रष्‍टाचार के सिर्फ 800 केस हुए थे। 800.. भाइयों-बहनों हमने सत्‍ता में आने के बाद हम तो नये हैं.. अब तक One Thousand Eight Hundred – 1800 केस हम दर्ज करा चुके हैं और अफसरों के खिलाफ हमने कार्रवाई शुरू की है। सरकार के मुलाजिमों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है। आप कल्‍पना कर सकते हैं हमारे आने से पहले एक साल में 800 और हमारे बाद 10 महीने के भीतर-भीतर 1800, यह बताता है कि भ्रष्‍टाचार के खिलाफ लड़ने का हमारा माद्दा कैसा है। ये दिखाता है कि हमारी भ्रष्‍टाचार के खिलाफ लड़ने की प्रतिबद्धता, press conference करके हमने नहीं जताई है हमने धरती पर कदम उठा करके जताई है और हमने परिणाम पाया है। हमने व्‍यवस्‍थाओं को बदलने की कोशिश की है, मनरेगा, सीधा जनधन एकाउंट में पैसा कैसे जाए, बच्‍चों की स्‍कॉलरशिप, सीधा पैसा बैंक के एकाउंट में कैसे जाए, कम से कम दलाली कैसे हो, उस दिशा में हमने काम प्रारंभ किया है और मुझे विश्‍वास है कि इन कामों के कारण देश, उन बातों को पूर्ण कर पाएगा। मेरे किसान भाइयों-बहनों, गत वर्ष वर्षा का संकट हुआ था, जितनी मात्रा में वर्षा चाहिए नहीं हुई थी, देश के अर्थतंत्र को भी नुकसान हुआ था और किसानों को भी नुकसान हुआ था। उसके बावजूद भी महंगाई को नीचे लाने में हम सफल हुए। ये मानना पड़ेगा कि हमारे आने से पहले महंगाई double digit थी, दो अंकों में चलती थी। हमारे आने के एक के बाद एक प्रयासों के कारण बारिश कम होने के बावजूद भी, किसान परेशान हुआ, उसके बावजूद भी, महंगाई को दो अंकों से नीचे लाते-लाते, करीब 3-4 percent तक लाने में हम सफल हो गए। उसको और नीचे लाए जाने का प्रयास हमारा जारी रहेगा क्‍योंकि गरीब से गरीब की थाली में संतोषजनक खाना मिले, इन सपनों को ले करके हम चल रहे हैं।

लेकिन हमारे देश के कृषि जीवन को एक बहुत बड़े बदलाव की आवश्‍यकता है। जमीन कम होती जा रही है, परिवारों में जमीन बंटती चली जा रही है, टुकड़े छोटे हो जा रहे हैं। हमारी जमीन की उपजाऊ ताकत बढ़ानी पड़ेगी, productivity बढ़ानी पड़ेगी, किसान को पानी चाहिए, किसान को बिजली चाहिए। उस सपने को पूरा करने की दिशा में हम काम कर रहे हैं। पचास हजार करोड़ रुपया, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के लिए हमने लगाने का तय किया है और खेत तक पानी कैसे पहुंचे और पानी बचाना भी होगा। save water, save energy, save fertilizer, इस मंत्र को ले करके हमने हमारे कृषि जीवन में आंदोलन खड़ा करना है और इसलिए हम उस काम को आगे बढ़ाने के लिए per drop more crop एक-एक बूंद से अधिकतम फसल और सफल किसान इस काम का आगे बढ़ाने की दिशा में, ये धन खर्च करने की दिशा में आगे बढ़े हैं। पिछले दिनों जब ओले गिरे, हमने 50 प्रतिशत उसको जो क्षति हुई थी, उस क्षति पूर्ति में वृद्धि कर दी। 60 साल में इतना बड़ा jump कभी लगा नहीं, इतना ही नहीं पहले अगर कभी नुकसान होता था तो 50 प्रतिशत नुकसान हो, तभी वो मुआवजे के दायरे में आता था, हमने इसको कम करके 30 प्रतिशत कर दिया। इससे बड़ा किसान को मदद का काम, पिछले 60 साल में कभी हुआ नहीं है। किसान को urea चाहिए, हमने नीम कोटिंग urea, मैं फिर एक बार कहता हूं भ्रष्‍टाचार के खिलाफ कैसे लड़ाई लड़ी जा सकती है, नीम कोटिंग, नीम कोटिंग ये कोई मोदी के दिमाग की पैदावार नहीं है, ये वैज्ञानिकों से सुझाया हुआ विचार है, और ये विचार सिर्फ मेरी सरकार के सामने आया ऐसा नहीं, पहले भी सरकारों के सामने आया है।

हमारे देश में किसानों के नाम urea जाता है, अरबों-खरबों का urea जाता है, लेकिन वो यूरिया 15%, 20%, 25% chemical की फैक्‍ट्ररियों में चला जाता है, raw material के रूप में। नाम किसान का होता है, दलालों के माध्‍यम से चोरी होती है। नीम coating शत-प्रतिशत किये बिना यह चोरी रोकी नहीं जा सकती। और इसलिए हमने सरकार की तिजोरी पर बोझ पड़े तो भी, यूरिया का 100% नीम coating करने का काम पूरा कर दिया। और इसके कारण अब यह यूरिया खेती के सिवा किसी काम नहीं आ सकता। कोई chemical फैक्‍ट्री इसमें से कुछ नहीं निकाल सकती। और इसलिए किसान को जितना यूरिया चाहिए, उतना मिलेगा और नीम coating होने के कारण उसको जो nutrition value चाहिए जमीन में 10% कम यूरिया उपयोग करते हुए भी उसको इसका लाभ मिलने वाला है, आने वाले season में मेरे देश के किसानों को यूरिया का एक नया लाभ। और मैं तो सभी किसानों को कहता हूं, कोई गलती से भी बिना नीम coating का यूरिया आपको दिखाता है, तो आप मान लेना कि वो सरकार के द्वारा अधिकृत नहीं है। किसी ने पीले रंग का कोई पाऊडर आपको दे दिया है, आप हाथ मत लगाना।

भाइयों-बहनों, पिछले दिनों मैं कहता हूं कि भारत का अगर विकास करना है तो पूर्वी हिंदुस्‍तान के विकास के बिना भारत विकसित नहीं हो सकता। भारत का पश्चिमी छोर, यही अगर आगे बढ़ेगा, तो हिंदुस्‍तान कभी आगे नहीं बढ़ सकता। हिंदुस्‍तान तब आगे बढ़ेगा, जब हमारा पूर्वी उत्‍तर प्रदेश ताकतवर बने, हमारा बिहार ताकतवर बने, हमारा पश्चिम-बंगाल ताकतवर बने, हमारा असम, हमारा ओडि़शा, हमारा north east, यह भू-भाग हिंदुस्‍तान का, यह ताकतवर बनना चाहिए। और इसलिए infrastructure का मामला हो, Rail connectivity का मामला हो, Digital Connectivity का मामला हो, हमने हर बात में पूर्वी भारत में ध्‍यान केंद्रित किया है और पूर्वी भारत में ध्‍यान करने में, हम गैस की पाइप-लाइन लगा रहे हैं। किसी ने सोचा होगा कि जिन राज्‍यों में kitchen में पीने का पानी अभी Tap से आना मुश्किल लगता है, वहां गैस का पाइप तक पहुंचाने की दिशा में हम काम कर रहे हैं। और चार यूरिया Fertilizer के कारखाने जो पूर्वी भारत में बंद पड़े थे, वहां के नौजवान बेरोज़गार हुए थे, वहां का किसान परेशान हो रहा था। हमने नई यूरिया नीति बनाई, हमने गैस supply की नई नीति बनाई और उसका परिणाम है कि गोरखपुर हो, बरेली हो, तालचेर हो, सिंदरी हो, यह सारे पूर्व से जुड़े हुए, इनके Fertilizer के कारखानों को पुनर्जीवित करके नौजवानों को रोज़गार देना और किसानों को Fertilizer देना, उसकी दिशा में हम काम कर रहे हैं। भाइयों-बहनों देश में सेना के जवानों के लिए, जवानों के कल्‍याण के लिए विभाग होता है। लेकिन इस देश में जितना माहात्म्य जवान का है, उतना ही माहात्म्य किसान का है। 60 साल में हमने क्‍या किया है, हमने कृषि के आर्थिक पहलू पर बल दिया है। हमारी कृषि अच्‍छी हो, कृषि का विकास हो, और सरकार के मंत्रालय का नाम भी कृषि मंत्रालय रहा। भाइयों-बहनों कृषि मंत्रालय का जितना महत्‍व है, उतना ही महत्‍वपूर्ण समय की मांग है, किसान कल्‍याण का भी महत्‍व है। अकेले कृषि विकास यह बात, ग्रामीण जीवन के लिए, कृषि जीवन के लिए अधूरी है, वो पूर्ण तब होगी जब किसान-कल्‍याण को भी जोड़ा जाए। और इसलिए भाईयों-बहनों अब भारत सरकार का जो मंत्रालय कृषि मंत्रालय के रूप में जाना जाता था, वो कृषि मंत्रालय एवं किसान कल्‍याण मंत्रालय के रूप में जाना जाएगा और आने वाले दिनों में कृषि के लिए जैसे योजना बनेगी, वैसे ही किसान कल्‍याण की भी योजना बनेगी, ताकि मेरे किसान को जो व्‍यक्तिगत जीवन में समस्‍याएं झेलनी पड़ती हैं, मुसीबतों से गुजरना पड़ा है, तो सरकार एक स्‍थायी व्‍यवस्‍था के रूप में उसको मदद करने की दिशा में प्रयास करेगी। भाईयों-बहनों आने वाले दिनों में एक काम की ओर मैं ध्‍यान देना चाहता हूं, आजादी के इतने वर्ष हो गए लेकिन आज भी हमारे देश में करीब साढ़े 18 हजार, 18,500 गांव ऐसे हैं कि जहां बिजली का तार नहीं पहुंचा है, बिजली का खंभा नहीं पहुंचा है। आजादी का सूरज, आजादी का प्रकाश, आजादी के विकास की किरणें, 18500 गांव वंचित हैं। अगर पुराने तरीके से चलते रहे तो शायद इन 18,500 गावों में खंभा पहुंचाते-पहुंचाते, बिजली का तार पहुंचाते-पहुंचाते, 10 साल लग जाएंगे। देश, 10 साल इंतजार करने के लिए तैयार नहीं है। मैंने सरकार के मुलाजिमों की meeting ली, मैंने उनको पूछा, क्या करोगे तो कोई कहता है साहब 2019 तक कर देंगे, कोई कहता है 2022 तक कर देंगे। बोले घने जंगलों में है। फलानी जगह पर है, पहाड़ों में है, बर्फीली प्रदेश में है, कैसे पहुंचे?

सवा सौ करोड़ देशवासियों की Team India का संकल्प है, इन 18500 गांवों में 1000 दिन के अंदर बिजली का खंभा, बिजली का तार और बिजली पहुंचे ये काम पूरा करके दिया जाएगा और मैं राज्यों से आग्रह करता हूं कि हम इसको करके दिखाएं और सब राज्यों में ये बाकी नहीं है, कुछ ही राज्यों में ज्यादा बाकी है। अगर मैं उन राज्यों का नाम दूंगा तो फिर मेरी बात को political तराजू से तौला जाएगा, राजनीतिक छींटाकशी होगी और इसलिए मैं उस चक्कर में पड़ना नहीं चाहता और इसलिए मैं कहता हूं सवा सौ करोड़ देशवासियों की Team India, लालकिले से ये संकल्प करती है कि राज्यों के सहयोग से, स्थानीय इकाइयों के सहयोग से, आने वाले 1000 दिन में 18500 गांवों में हम बिजली पहुंचाने का काम करेंगे।

हमारे देश में जैसे किसान कल्याण एक चिंता का विषय मैंने हाथ लगाया है, उसी प्रकार से जहां से देश को ताकत मिलती है, जहां से खनिज संपदा निकलती है। चाहे कोयला निकलता हो, चाहे बॉक्साइट निकलता हो, चाहे और खनिज संपदा निकलती हो लेकिन वहां का जो क्षेत्र है, उसके विकास के प्रति उदासीनता रहती है। आप वहां के लोगों का जीवन देखो, हमारे देश को तो वो समृद्ध बनाने के लिए पसीना बहाते हैं लेकिन उस क्षेत्र का विकास नहीं होता है और इसलिए हमने जहां से खनिज निकलती है, वहां के मजदूरों के विकास के लिए, वहां के किसानों के विकास के लिए एक विशेष योजना बनाई है और हर वर्ष करीब-करीब 6 हजार करोड़ रुपया उन-उन इलाकों के लिए खर्च किया जाएगा जो ज्यादातर मेरे आदिवासी भाइयों के इलाके में है, मेरे आदिवासी क्षेत्रों में है। कोयला कहां है, आदिवासियों के बीच में है, वहां का विकास हो उस पर हमने काम शुरू किया है।

भाईयों-बहनों, 21वीं सदी में देश को आगे बढ़ाने में हमारी युवा शक्ति का महत्व है और आज मैं घोषित करना चाहता हूं। पूरे विश्व की तुलना में हमें आगे बढ़ना है तो हमारे युवकों को हमें प्रोत्साहित करना होगा, उनको अवसर देना होगा। हमारे युवक नए उद्योगकार कैसे बने, हमारे युवक, नए उत्पादक कैसे बने, पूरे देश में इन नए उद्यमियों के द्वारा एक Start up का पूरा Network कैसे खड़ा हो? हिंदुस्तान का कोई जिला, हिन्‍दुस्‍तान का कोई ब्लॉक ऐसा न हो जहां आने वाले दिनों में नए Start up शुरु न हुए हों। क्या भारत यह सपना नहीं देख सकता कि हम दुनिया में, Start up की दुनिया में भारत नंबर एक पर पुहंचेगा, आज हम नहीं हैं। भाईयों और बहनों इस Start up को मुझे बल देना है और इसलिए मेरा संकल्प है आने वाले दिनों में Start up India और देश के भविष्य के लिये Stand Up India! Start Up India! Stand up India… यह Start Up India! Stand Up India! इस काम को जब मैं आगे लेकर जाना चाहता हूं तब मेरे भाइयों-बहनों हमारे देश में पिछले एक साल में बैंक के लोगों ने बहुत बड़ा पराक्रम किया.. और जब आप अच्छा करते हो तो मेरी जरा अपेक्षाएं भी ज्यादा बढ़ जाती है। मेरे बैंक के मित्रों बाबा साहब आंबेडकर की सवा सौवीं जयंती का वर्ष 125वीं जयंती का वर्ष, सवा लाख बैंक की ब्रांच हैं। क्या हमारे बैंक की ब्रांच.. ये जो मेरा Start Up India का कार्यक्रम है, उसकी और कोई योजनाएं बनेंगी.. लेकिन हर ब्रांच यह संकल्प करे और आने वाले दिनों में इसको पूरा करे कि अपने बैंक के ब्रांच के इलाके में हर ब्रांच जहां, Tribal बस्ती हो वहां मेरे आदिवासी भाई को जहां, आदिवासी बस्ती नहीं हैं वहां मेरे दलित भाई को और हर ब्रांच एक दलित को या एक आदिवासी को Start Up के लिये लोन दें Financial मदद करें औऱ एक साथ देश में सवा लाख मेरे दलित उद्योगकार पैदा हों। इस देश में Tribal बस्ती में मेरे आदिवासी उद्योगकार पैदा हों। ये काम हम कर सकते हैं Start Up को एक नया Dimension दे सकते हैं। और दूसरा ये सवा लाख ब्रांच.. क्या विशेष योजना.. महिला उद्यमी के लिये बना सकती हैं। सवा लाख ब्रांच, सवा लाख महिला उद्यमी उनके Start Up को Promote करें उनको मदद करें। आप देखिए, देखते ही देखते हिन्दुस्तान के कोने कोने में Start Up का जाल बिछ जाएगा। नये उद्योगकार तैयार होंगे। कोई एक कोई दो कोई कोई चार को नौकरी देगा और देश के आर्थिक जीवन में बदलाव आएगा। भाइयों बहनों देश में जब पूंजी निवेश होता है तो हम एक बात पर आग्रह रखते हैं कि Manufacturing का काम हो और ज्यादा से ज्यादा Export हो और उसके लिये पूंजी निवेश करने वालों को सरकार का आर्थिक विभाग अनेक नई - नई स्कीम देता है। इसका अपना महत्व है इसको बनाए रखना है। लेकिन आज मैं एक नई बात लेकर करे आगे बढ़ना चाहता हूं। हमारे देश में जो पूंजी निवेश हो, Manufacturing Sector में पूंजी निवेश हो, उसमें सरकार की मदद के जो Parameter है उसमें एक महत्वपूर्ण Parameter यह रहेगा कि आप जिस उद्योग को ला रहे हो उसमें आप अधिकतम - अधिकतम लोगों को अगर रोज़गार देंगे तो आपको आर्थिक Package अलग प्रकार का मिलेगा। सरकार की सहायता रोज़गार के साथ जोड़कर के नई इकाइयों के लिये सरकार अब योजना बनाएगी। देश में रोज़गार के अवसर बढ़ें, उस पर हम बल देना चाहते हैं। Skill India, Digital India इन सपनों को पूरा करने की दिशा में हम बहुत आगे बढ़ चुके हैं। भाइयों-बहनों, भ्रष्टाचार का एक क्षेत्र है नौकरी। गरीब से गरीब व्यक्ति चाहता है कि बेटे को नौकरी मिले। और हमने देखा है जब नौकरी के लिये Interview का कॉल आता है तो नौजवान किसी को ढूंढता है कि मेरा रेलवे में Interview आया है, टीचर में Interview आया है, टूल का Interview आया है, ड्राइवर का Interview आया है, कोई सिफारिश के लिये किसके पास जाऊं विधवा मां भी सिफारिश के लिये जगह सोचती है। क्‍यों, क्‍योंकि हमारे यहां merit से भी ज्‍यादा interview के कारण व्‍यक्‍ति के साथ न्‍याय और अन्‍याय के खेल खेले जाते हैं और कहा जाता है कि interview में फेल हो गए। मैंने अभी तक ऐसे मनोवैज्ञानिक नहीं देखे हैं कि दो मिनट का interview करें और मनुष्‍यों को पूरा जांच लें। भाइयों-बहनों, मेरे मन में कई दिनों से चल रहा है एक गरीब मां का बेटा है। कम शिक्षा पाया हुआ व्‍यक्‍ति, जिसे छोटी-छोटी नौकरियों की जरूरत है। क्‍या उसको interview देना जरूरी है। क्‍या बिना interview के नौकरी नहीं मिल सकती है। क्‍या online उसकी मार्कशीट के आधार पर, ऑनलाइन उसकी मार्कशीट के आधार पर यह तय हो कि हमें 500 लोगों की जरूरत, पहले 500 लोग कौन है। हमें 2000 की जरूरत है, पहले 2000 कौन है। हां, जहां पर physical fitness की testing है, उसके दायरे अलग हो, उसकी पद्धति अलग हो। जहां ऊपर की नौकरियां है, जहां पर personality का महत्‍व रहता है, appearance का महत्‍व रहता है, लेकिन छोटी-छोटी। मैं तो देख रहा हूं रेलवे की नौकरी के लिए नागालैंड, मिजोरम से लोग exam देने के लिए, interview देने के लिए मुंबई तक बेचारे दौड़ते हैं। ये मुझे बीमारी बंद करनी है। मैं आग्रह करता हूं राज्‍य सरकारों को, मैं आग्रह करता हूं सरकार के मेरे सभी साथियों को कि हम छोटी-छोटी नौकरियों से ये interview हो सके उतना जल्‍द बंद करें। merit के आधार पर दें। देश में से भ्रष्‍टाचार जो गरीब आदमी को परेशान करता है, उसे उसको मुक्‍ति मिलेगी और उसको हमें पूरा करने की दिशा में प्रयास करना चाहिए, ये मेरा आग्रह है।

मेरा देश चैन से सोता है। सवा सौ करोड़ देशवासी चैन की नींद सोते हैं। उसका कारण हमारे देश के जवान सीमा पर अपने आप को बलि चढ़ाने के लिए प्रति पल तैयार रहते हैं। कोई देश, अपनी सेना का मूल्‍यांकन कम नहीं आंक सकता है। सवा सौ करोड़ देशवासियों की टीम इंडिया, उनके लिए भी मेरे देश का हर फौजी, हर जवान, हर सैनिक एक राष्‍ट्र की शक्‍ति है, राष्‍ट्र की संपत्‍ति है, राष्‍ट्र की ऊर्जा है।

कई वर्षों से कई सरकारें आई और चली गई। one rank one pension ये विषय हर सरकारों के सामने आया है। हर सरकारों के सामने प्रस्‍ताव रखे गए हैं। हर सरकारों ने छोटे-मोटे वचन भी दिए हैं, वादे भी किए हैं, लेकिन समस्‍या का समाधान नहीं हुआ है। मेरे आने के बाद भी अभी तक मैं इसको कर नहीं पाया। मैं आज मेरे सेना के सभी जवानों को विश्‍वास फिर से एक बार दे रहा हूं और ये बात, एक व्‍यक्‍ति नहीं बोल रहा है। सवा सौ करोड़ टीम इंडिया की तरफ से मैं कह रहा हूं, तिरंगे की छत्रछाया में कह रहा हूं। लाल किले की प्राचीर से कह रहा हूं। मेरे सेना के जवानों, सिद्धांतत: one rank, one pension हमने स्‍वीकार किया हुआ है। लेकिन इसके संगठनों से बातचीत का दौर चल रहा है। हम चाहते हैं अंतिम दौर में ये जहां तक पहुंची है। संपूर्ण राष्‍ट्र के विकास को ध्‍यान में रखते हुए हर किसी को न्‍याय मिले। इस बात को ध्‍यान में रखते हुए 20-20, 25-25 साल से लटकी हुई समस्‍या का हमने रास्‍ता खोजना है। मुझे विश्‍वास है कि जिस विश्‍वास के साथ वार्ता चल रही है, मैं सुखद परिणाम की आशा करता हूं और इसलिए मैं फिर एक बार विश्‍वास दिलाता हूं कि सिद्धांतत: इस सरकार ने one rank , one pension की बात को स्‍वीकार किया है। उसकी Nitty gritty को देख करके लागू कैसे किया जाए, उसके लिए संबंधित लोगों से बातचीत करके हमारी बात को आगे हम बढ़ा रहे हैं।

भाइयो-बहनों, 2022, भारत की आजादी के 75 साल हो रहे हैं। भारत की आजादी के 75 साल, 2022, 15 अगस्‍त को मना करके चुप नहीं होना है। आज ही, आज इसी 15 अगस्‍त को, 2022, 15 अगस्‍त के लिए हमें संकल्‍प लेना है। हिन्‍दुस्तान के 6 लाख गांव, हर गांव एक सपना तय करे, संकल्‍प तय करे कि 2022 को हमारे गांव को इस समस्‍या से हम मुक्‍त कर देंगे।

सवा सौ करोड़ देशवासी अपने जीवन में, 2022 भारत की आजादी के 75 साल हम भी एक संकल्‍प करें, हर नागरिक एक संकल्‍प करे कि मैं देश की भलाई के लिए, समाज की भलाई के लिए इस काम को करुंगा। एक बार मेरे सवा सौ करोड़ देशवासी एक संकल्‍प ले करके आगे बढ़ें तो 2022 का जब सवेरा होगा 15 अगस्‍त का, हमारे देश के लिए मर-मिटने वाले आजादी के सैनिकों, उनकी आत्‍मा जब देखेगी तो देश ने सवा सौ करोड़ संकल्‍पों को पूरा किया होगा। 6 लाख गांव ने 6 लाख सपनों को पूरा किया होगा। शहरों ने, महानगरों ने, सरकार के हर विभाग ने, सरकार की हर इकाई ने एक-एक संकल्‍प ले करके अभी से जुट जाना है और अब हमारा कोई literature ऐसा न हो, हमारी कोई बात ऐसी न हो जिसमें 2022, 15 अगस्‍त को दोहराया न जाए। जिसमें आजादी के 75 साल का संकल्‍प को दोहराया न जाए। एक momentum खड़ा करना चाहिए।

आजादी का आंदोलन, भाइयो-बहनों, दशकों तक चला, आजादी सामने नहीं दिखती थी तो 1910 में भी कोई आजादी की बात करता था, बीस में करता था, तीस में भी करता था। दशकों तक एक बात को दोहराया गया तब आजादी प्राप्‍त हुई। स्‍वाभिमानी, गौरवशाली, समृद्ध राष्‍ट्र के लिए हमें सक्षम-भारत बनाना है, समृद्ध-भारत बनाना है, स्‍वस्‍थ-भारत बनाना है, सुसंस्कृत-भारत का सपना हमें पूरा करना है। स्‍वाभिमानी भारत बनाना है, श्रेष्‍ठ भारत बनाना है। 2022 तक इस देश में कोई गरीब बिना घर के न रहे। 24 घंटे बिजली पहुंचाने की दिशा में हमें सफल होना है। हमारा कृषक सबल हो, हमारा श्रमिक संतुष्‍ट हो, हमारी महिलाएं सशक्‍त हों, हमारे युवा स्‍वाबलंबी हों, हमारे बुजुर्ग सकुशल हों, और हमारे गरीब सम्‍पन्‍न हों, समाज में कोई पिछड़ा न रहे। हमारे हर किसी के अधिकार समान हो, और पूरे भारतीय समाज में समरसता का माहौल हो, इसी सपने के साथ मैं फिर एक बार आजादी के पावन-पर्व पर आजादी की 75वीं वर्षगांठ एक निश्चित role में आपके साथ, आगे बढ़ाने की तैयारी के साथ सवा सौ करोड़ देशवासियों को हृदय से बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं।

मेरे साथ पूरी ताकत से बोलेंगे-

भारत माता की जय, भारत माता की जय, भारत माता की जय।

वंदे मातरम्, वंदे मातरम्, वंदे मातरम्।

जय हिंद, जय हिंद, जय हिंद।


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