शनिवार, 24 अक्तूबर 2015

मानव कल्याण ही अंतिम उद्देश्य : माननीय सरकार्यवाह श्री सुरेश भय्या जी जोशी



मानव कल्याण ही हमारा अंतिम उद्देश्य – माननीय श्री  सुरेश भय्या जी जोशी
ठाणे (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह माननीय श्री सुरेश भय्या जी जोशी ने कहा कि नैतिक, धार्मिक, तथा मानव कल्याण के लिए भारत को विश्व का नेतृत्व करना आवश्यक है. जिसके लिए समाज का नेतृत्व करने वाले सामर्थ्यवान व्यक्तियों का निर्माण करने, तथा जागृत, निस्वार्थ, संगठित समाज खड़ा करने के लिए संघ निरंतर प्रयास कर रहा है. विश्व गुरू के पद पर विराजमान होने के लिए भारत को अभी बहुत मार्ग तय करना है. जिसके लिए संघ का प्रयास सही दिशा में आगे बढ़ रहा है, ऐसे संकेत भी मिल रहे हैं. हमारे भारत देश को परम वैभव तक ले जाकर मानव कल्याण करना, यही हमारा अंतिम उद्देश्य है. सरकार्यवाह ठाणे में विजयादशमी के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में स्वयंसेवकों को संबोधित कर रहे थे. मंच पर उनके साथ जैनाचार्य सुरेश्वर मुनि, विभाग संघचालक मधुकर बापट, जिला संघचालक विवेकानंद जी, ह.भ.प. सद्गिर महाराज, इस्कॉन संस्था, चिन्मय मिशन तथा ज्यू समाज के प्रतिनिधि उपस्थित थे.

उन्होंने कहा कि संघ स्थापना की 90वीं सालगिरह यह कोई छोटा या बड़ी कालावधि नहीं है. अभी भी मंजिल तक पहुंचने के लिए लंबा रास्ता तय करना है. लेकिन अब संघ कार्य योग्य पथ पर है, ऐसे संकेत मिलने शुरू हुए हैं. कई देशों में संस्कृत श्लोक उद्घृत कर कार्यक्रमों का शुभारंभ करना, विश्व के 180 देशों का योग दिवस मनाना, भारतीय आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति को विश्व भर में मान्यता मिलना, यह एक अनूठी पहल है. वर्चस्ववादी मानसिकता के राष्ट्रों से अपने बचाव के लिए विश्व के कई देश भारत की ओर बड़ी आशा से देख रहे हैं. प्रकृति के साथ अनुकूल व्यवहार यह हमारी सभ्यता है, भारत देने वालों का देश है, न कि लेने वालों का. हमने अपने देश की सीमाओं के विस्तार के लिए कभी भी किसी पर आक्रमण नहीं किया. और इसीलिए अपनी और दूसरो की स्वतंत्रता का सम्मान भी हिन्दुत्व ही कर सकता है. हमारी हिंदू परंपरा और संस्कृति हजारों साल में विकसित हुई है. इस परिवर्तनकारी प्रक्रिया से दूर हमारी संस्कृति में कुछ दोष भी आए हैं, इस प्रक्रिया को कुछ अवांछनीय अभ्यास ने कुछ समय के लिए बाधित किया था. उन्होंने कहा कि सब जाति भेद मिटें, एक प्रांत खड़ा हो. धार्मिक समुदाय के बीच अंतर नहीं होना चाहिए. इसके लिए समाज सुधारकों को पहल करनी चाहिए. समाज से दोषों को दूर करने के लिए पहल करनी चाहिए. डॉ. बाबासाहेब आम्बेडकर,बालासाहेब देवरस, पं. दीनदयाल उपाध्याय, एकनाथ रानाडे,नानाजी देशमुख और अन्य हस्तियों के वैचारिक मार्गदर्शन पर अपना देश खड़ा है.

जैनाचार्य सुरेश्वर मुनि जी ने कहा कि हमारे देश में बहादुरी और वीरता की कमी है. लेकिन समाज बंटा होने के कारण विदेशी आक्रामक हमारी स्वतंत्रता छीन सके. आज भी भाषा और प्रांत भेद की आड़ में समाज को विघटित करने का प्रयास जारी है. लेकिन समग्र हिन्दू समाज के संगठन के लिए तथा भारत मां की सेवा के लिए संघ कार्य कर रहा है और इसीलिए यह विशेष कार्य है.

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