सोमवार, 29 फ़रवरी 2016

गांव, गरीब , किसान , महिलायें और युवा समर्थक है इस बार का बजट : प्रधानमंत्री


गांव, गरीब और किसान समर्थक है इस बार का बजट: प्रधानमंत्री
पीटीआई-भाषा संवाददाता 17:34 HRS IST
नयी दिल्ली, 29 फरवरी :भाषा: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज कहा कि इस बार का बजट गांव, गरीब और किसान समर्थक है जिसमें देश में गुणवत्तापूर्ण बदलाव लाने और कई समयबद्ध कार्यक्रमों के जरिए गरीबी उन्मूलन पर जोर दिया गया है । वित्त वर्ष 2016-17 के बजट पर टिप्पणी करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इसमें कृषि, ग्रामीण बुनियादी संरचना, स्वास्थ्य देखभाल, रोजगार पैदा करने और दलित उद्यमिता पर विशेष ध्यान दिया गया है ।मोदी ने कहा, ‘‘यह बजट गांव, गरीब और किसान समर्थक है । देश में गुणवत्तापूर्ण बदलाव लाने पर पूरा ध्यान दिया गया है । इससे आम लोगों की जिंदगी में बड़ा बदलाव आएगा ।’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि बजट ने समयबद्ध तरीके से गरीबी उन्मूलन का खाका पेश किया है ।
उन्होंने कहा, ‘‘किसानों के लिए कई कदम उठाए गए हैं । सबसे अहम प्रधानमंत्री कृषि योजना है ।’’ मोदी ने कहा कि बिजली और सड़कें गांवों के लिए काफी अहम हैं । उन्होंने कहा कि 2019 तक देश के सभी गांव सड़कों से जुड़ जाएंगे जबकि सभी गांवों में 2018 तक बिजली आपूर्ति मुहैया करा दी जाएगी ।प्रधानमंत्री ने कहा कि मनरेगा के लिए सबसे ज्यादा आवंटन किया गया है ।
आवास क्षेत्र के बाबत मोदी ने कहा कि हर गरीब आदमी अपना मकान होने का सपना देखता है । उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र को मजबूत करने की कोशिशें की जाएंगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि गरीबों का सपना साकार हो सके ।प्रधानमंत्री ने कहा कि किराए के मकान में रहने वालों को भी रियायतें दी गई हैं !
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गरीबी से मुक्ति दिलाने के लिए समयबद्ध और व्यापक  बजट - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

इस बजट के लिए हमारे वित्त मंत्री श्रीमान अरुण जेटली जी को हृदयपूर्वक बहुत बहुत बधाई देता हूँ| गाँव, गरीब, किसान, महिलायें और युवा इस बजट का हमारा सबसे बड़ा फोकस है | इनके जीवन में qualitative change लाने के लिए इस बजट में कई योजनायें रखी गयी हैं|
यह बजट गरीबी से मुक्ति दिलाने के लिए समयबद्ध और व्यापक रूपरेखा प्रस्तुत करता है | किसानों की आया को दोगुना करने की दिशा में इस बजट में कई अहम कदम उठाये गए हैं| उनमें से एक महत्वपूर्ण कदम है – प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना जिसके तहत निवेश में अभूतपूर्व बढ़ोतरी की गयी है और हर खेत को पानी पहुंचाने की दिशा में एक बहुत बड़ा प्रयास है |
गाँव के विकास में बिजली और सड़क …इस महत्व को मैं और आप हम सब जानते हैं | इस बजट में 2019 देश के हर गाँव को सड़क से जोड़ने का एक बहुत बड़ा अहम् संकल्प है| प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में अब तक की सबसे बड़ी धनराशि का आवंटन किया गया है साथ ही साथ 2018 तक हर गाँव में बिजली की सुविधा देने की व्यवस्था भी इस बजट में स्पष्ट रूप से है |
इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नयी ऊर्जा मिलेगी , गति मिलेगी, और सामान्य मानविकी जीवन में बहुत बड़ा बदलाव आएगा| हम यह साफ़ जानते हैं गरीब से गरीब को पूछो, सामान्य से सामान्य व्यक्ति को पूछो उसका एक सपना होता है अपना घर| हर गरीब का सपना है अपना घर | मिडल क्लास हो निओ मिडल क्लास हो उसका सपना कैसे पूरा करेंगे| सरकार की मदद के बिना यह संभव नहीं है और इसलिए इस बजट में वह सारे प्रावधान किये गए हैं जिसके कारण हाउसिंग सेक्टर को बल देगा और सामान्य से सामान्य मानवी को घर देगा|
इसके अलावा, किराए के घर में रह रहे लोगों को किराए की राशि के ऊपर भी इनकम टैक्स में छूट में बढ़ोतरी की गए है| पाँच लाख तक की आय वाले व्यक्तियों के लिए आयकर में कमी हुई है|
हमारे देश में गरीबों के नाम पर राजनीति बहुत हुयी| आप यह जानकर के चौंक जायेंगे कि एक गरीब माँ अपने बच्चों का खाना बनाने के लिए जो चूल्हा जलाती है उसके कारण उसके और उसके बच्चों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा पैदा होता है| जो इस विषय के एक्सपर्ट हैं, जानकार लोग हैं उनका कहना है कि चूल्हे के कारण, उस धुंए के कारण गरीब महिला के शरीर में एक दिन में 400 सिगरेट का जो धुंआ होता है उतना धुंआ उसके शरीर में जाता है| ऐसे गरीबी की रेखा के नीचे जीने वाले करोड़ों परिवारों को इस से मुक्ति दिलानी है और इसलिए ऐसे गरीब परिवारों को मुफ्त में गैस कनेक्शन देने का एक बड़ा ही महतवपूर्ण निर्णय हमने किया है |
5 करोड़ गरीब परिवार जो आज चूल्हा जलाते हैं उन्हें धुंए से मुक्ति मिलेगी| गरीब के स्वास्थ्य को लाभ होगा औ पर्यावरण की भी सुरक्षा होगी| स्वास्थ्य के क्षेत्र में हमारी सरकार कई महत्वपूर्ण कदम उठा रही है|
कभी कभी एक आध बीमारी भी माध्यम वर्गीय परिवार, नव माध्यम वर्गीय परिवार और गरीब की जिन्दगी तबाह कर देती है और इसलिए बीमारी के समय उस परिवार के साथ खड़े रहने का इस सरकार ने निर्णय किया है | खासकर के सीनियर सिटिजन्स , वरिष्ठ नागरिक जिनको इसकी सबसे ज्यादा आवश्यकता होती है हमने उसके लिये भी योजनाएं प्रस्तुत की हैं | हमारा देश सुरक्षित रहे हर देशवासी सुरक्षा का एहसास करे , इन बातों को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा क्षेत्र में हमारी सेना सक्षम बने, सैनिक सबल बनें और आधुनिक सुरक्षा संसाधनों से लैस हों, रिटायरमेंट के बाद वन रैंक वन पेंशन मिले | भारत के अन्दर defence manufacturing को और बल मिले और सेना को आधुनिक बनाने की दिशा में अनेक महत्वपूर्ण काम हों वह इस बजट में स्पष्ट किया गया है |
इस बजट में आपने देखा होगा कि infrastructure में करीब करीब दो लाख करोड़ रूपये से भी अधिक प्रावधान किया गया है |उसका फायदा जो सीमावर्ती क्षेत्र हैं जहाँ हमारे सेनायें तैनात हैं , उनको जरूर मिलेगा| भारत का युवा आगे बढ़ रहा है | उसके रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए दो नयी पहल formalizing the informal और employing the unemployed. इसे हम शुरू करने जा रहे हैं | साथ ही साथ starts ups क्योंकि मेरा तो मंत्र है Start Up India-Stand Up India. Starts ups के लिए एक अनुकूल ecosystem तैयार करने के लिए taxes में प्रावधान रखे गए हैं | हमारे देश का दलित, आदिवासी अब entrepreneur बनना चाहता है| उसके सपने हैं वह Job Seeker नहीं job Creator बनना चाहता है | उस सपने को साकार करने के लिए सरकार ने एक विशेष entrepreneur hub स्थापित करने का निर्णय किया है | देश का युवा वैश्विक चुनौतियों का सामना करे और उसे शिक्षा और तालीम के क्षेत्र में वैश्विक स्तर के अवसर मिलें इसके लिए पुराने कानूनों के नियमों को और बंधनों से हमारी शिक्षा दब गयी है| उसे ऊपर उठाकर सरकारी और निजी क्षेत्र में 10-10 institutions को वैश्विक स्तर पर लाने के लिए एक चैलेन्ज रूट के द्वारा चुना जाएगा| शिक्षा और higher के क्षेत्र में यह बहुत बड़ा अहम् सुधार है | उनको आर्थिक मदद भी दी जायेगी और एक बार उच्च शिक्षा संस्थान का competition का माहौल बनेगा, आप कल्पना कर सकते हैं कि कितना बड़ा परिवर्तन आएगा|
लेकिन साथ साथ प्राथमिक शिक्षा इसका भी उतना ही महत्व है | इतने सालों तक ज्यादातर सरकारों का प्राथमिक शिक्षा के प्रसार की तरफ ध्यान रहा जो आवश्यक भी था लेकिन आज की चुनौतियों का अगर सामना करना है तो शिक्षा के प्रसार के साथ-साथ शिक्षा में गुणात्मक परिवर्तन लाने की आवश्यकता है| गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले , दूर सुदूर गाँव में रहने वाले बालकों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले उस पर हम बल दे रहे हैं और उसके लिए इस बजट में गुणवत्ता पर बल देने वाले विषयों को प्राथमिकता दी गयी है| हमारी सरकार हमेशा देश की जनता पर भरोसा रखने के पक्ष में रही है| हमें देश के नागरिकों पर आशंकाएं नहीं करनी चाहिए| इनकम टैक्स विभाग के लोगों ने उनके प्रति सम्मान का भाव रखना चाहिए और इसलिए इनकम टैक्स विभाग की जटिल प्रक्रियाओं से सामान्य नागरिक को जो गुजरना पड़ता है , उस से उसको मुक्ति मिलनी चाहिए| व्यापारियों और प्रोफ़ेशनल्स को जो तकलीफ हो रही है उससे हमें मुक्ति दिलानी है | इस बजट में सामान्य आय वाले इस वर्ग को turn over पर presumptive tax भरने से इन प्रक्रियाओं से मुक्ति मिल जायेगी | यह एक बहुत बड़ा सरलीकरण है इस बजट में किया गया है |
मैं फिर एक बार श्रीमान अरुण जेटली जी को बधाई देता हूँ, और देशवासियों को विश्वास दिलाता हूँ कि यह बजट आपके सपनों के करीब है| आपके सपनों को साकार करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को पूरी ताकत के साथ , योजना के साथ प्रस्तुत किया है |
बहुत बहुत धन्यवाद

शुक्रवार, 26 फ़रवरी 2016

अरुण जेटली : क्या हम ऐसे लोगों को समर्थन दे रहे हैं, जिनकी सोच ही इस देश के टुकड़े करने की है




क्या हम ऐसे लोगों का समर्थन कर रहे हैं जिनकी सोच देश के टुकड़े करने की है : जेटली
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NDTVKhabar.com team , Last Updated: गुरुवार फ़रवरी 25, 2016
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नई दिल्ली: केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली और माकपा नेता सीताराम येचुरी ने गुरुवार को राज्यसभा में जेएनयू विवाद और हैदराबाद में रिसर्च स्कॉलर रोहित वेमुला की खुदकुशी के मामले में बहस में भाग लिया।

केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने राष्ट्रवाद पर हुई बहस में सवाल किया कि क्या हम ऐसे लोगों को समर्थन दे रहे हैं, जिनकी सोच ही इस देश के टुकड़े करने की है। क्या कोई कह सकता है कि मकबूल बट और अफजल गुरु को फांसी दिए जाने वाले दिन को याद करते हुए उनका शहीदी दिवस मनाया जाए। एचसीयू और जेएनयू में जिस तरह के कार्यक्रम आयोजित किए गए, हमें उन्हें लेकर अपनी सोच स्पष्ट करनी चाहिए।

जेटली ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा, जेएनयू जाने से पहले आपको सोचना चाहिए था, आप तो काफी समय तक सत्ता में रहे हैं। हम तो नए-नए आए हैं। आपके दो नेताओं को आतंकवादियों ने मारा है, आपको इस मामले में हमसे ज्यादा संवेदशील होना चाहिए।

जेटली के एक आरोप पर जवाब देते हुए सीताराम येचुरी ने कहा- मंत्री ने देश के टुकड़े करने की बात करने वालों के समर्थन की बात कही, जबकि हमने अल्ट्रा लेफ्टिज्म को मेन स्ट्रीम में लाने में मदद की।

कुछ गुंडे देशभक्ति सिखा रहे हैं : डीपी त्रिपाठी
एनसीपी नेता डीपी त्रिपाठी ने संसद में हुई बहस के दौरान कहा, मेरी नजर में रोहित वेमुला की मौत संस्थागत हत्या है। एक केंद्रीय मंत्री लिखते हैं कि वह विश्वविद्यालय देश विरोधी गतिविधियों का अड्डा बन चुका है। राष्ट्रीय एकता और भारत की संप्रभुता के लिए पूरी तरह से सहमत होते हुए कहना चाहता हूं कि भय, नफरत और कहल के माहौल के कारण ही ऐसी समस्याएं शुरू होती हैं।

उन्होंने कहा, 'एबीवीपी की रैली में क्या हुआ? दिल्ली विश्वविद्यालय में छात्रसंघ के अध्यक्ष जो एबीवीपी सदस्य हैं ने कहा कि हम उस कैंपस में घुसकर धोखेबाजों को गोली मारेंगे। क्या यह नफरत फैलाने वाला बयान नहीं है?' त्रिपाठी ने आगे कहा, 'आज हम ऐसी स्थिति में पहुंच गए हैं, जहां अपराधी देशभक्ति सिखा रहे हैं और उनका सम्मान भी हो रहा है।'

जेएनयू की छवि को धूमिल करने की कोशिश हो रही है...
त्रिपाठी ने कहा, 'जेएनयू ने हमेशा से सांप्रदायिक और फासीवादी विचारधारा का विरोध किया है। सत्ता पक्ष के लोग 9 फरवरी की घटना को संस्थान की छवि को नुकसान पहुंचाने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। जब बीजेपी एकता और राष्ट्रवाद की बात करती है तो ऐसा लगता है, जैसे कालनेमी हनुमान चालिसा पढ़ रहा हो।'

जेएनयू से केवल राष्ट्रविरोधी खबरें ही क्यों आती हैं?
बीजेपी सांसद तरुण विजय ने कहा, 'ऐसे समय में जब देश में सभी की आंखें सियाचिन में अपनी जान गंवाने वाले वीर सैनिकों के लिए नम थी, तब जेएनयू में कुछ लोगों के ग्रुप ने राष्ट्रविरोधी नारे लगाए। मैं पूछना चाहता हूं कि जेएनयू जब भी सुर्खियों में आता है तो सिर्फ राष्ट्र विरोधी हरकतों के लिए क्यों आता है। न्यायपालिका पर हमला करना उनकी परंपरा बन गई है।'

केसी त्यागी ने स्मृति ईरानी को दिया जवाब
जेडीयू नेता केसी त्यागी ने मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी के बुधवार के भाषण पर बोलते हुए कहा, आप कहती हैं आपसे किसी ने आपकी जाति नहीं पूछी। आप सही हैं। किसी ने मुझसे भी नहीं पूछी। डीपी त्रिपाठी, नरेश अग्रवाल और राजीव शुक्ला से भी किसी ने नहीं पूछी। लेकिन अंबेडकर से पूछी गई, जगजीवन राम से पूछी गई, कर्पूरी ठाकुर से भी पूछी गई और पीएल पूनिया व कुमारी शैलजा से पूछी गई। यही नहीं मायावती से भी पूछी गई।
स्मृति ईरानी ने केसी त्यागी को जवाब देते हुए कहा, मैंने कभी जातिवादी बयान नहीं दिया। ये गलत बयान है।


विचारों में इतनी असहनशीलता क्यों दिख रही है
बहस में हस्तक्षेप करते हुए जेटली ने कहा, 'इस बारे में कोई विवाद नहीं है जब आप कहते हैं कि यूनिवर्सिटी में स्वतंत्र विचारों की इजाजत होनी चाहिए लेकिन इसके साथ वैचारिक दृष्टिकोण भी है। इस वैचारिक दृष्टिकोण के तहत इस स्तर की असहनशीलता क्‍यों दिखाई जा रही है।' वे येचुरी के भाषण पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे थे।

इससे पहले येचुरी ने बहस की शुरुआत करते हुए जेएनयू विवाद में मोदी सरकार पर पक्षपातपूर्ण हस्तक्षेप का आरोप लगाया। यूनिवर्सिटी परिसर में आयोजित एक कार्यक्रम में देश विरोधी नारेबाजी के बाद कुछ छात्रों पर देशद्रोह का आरोप लगाया गया है। येचुरी ने कहा कि राष्ट्रवाद  के नाम पर यूनिवर्सिटी को दंडित किया जा रहा है। मेरी राय में यह बेहद  दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्‍होंने कहा कि आप हमें देशभक्ति का पाठ नहीं पढ़ाएं।

राजनाथ ने निर्दोष छात्रों को परेशान न करने का दिया भरोसा
इससे पहले राजनाथ सिंह ने बुधवार को लोकसभा में बहस में हिस्‍सा लेते हुए सदन का भरोसा दिलया था कि किसी भी निर्दोष छात्र को प्रताड़ि‍त नहीं किया जाएगा। उन्‍होंने कहा था कि यदि देशद्रोह के आरोप सही हैं तो कोर्ट इसे बरकरार रख सकता है और यदि ये गलत है तो खत्म कर सकता है, लेकिन हमें इस मामले में पहले कोर्ट को राय तो जाहिर करने दीजिये।

स्‍मृति ईरानी ने विपक्ष पर साधा निशाना
मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी ने दोनों मामलों में विपक्ष पर जवाबी हमला बोला था। उन्‍होंने बुधवार को कहा था, 'अपने कर्तव्य का निर्वाह करने के लिए मैं माफी नहीं मांगूंगी। उन्‍होंने कहा कि 20 माह के अपने कार्यकाल में मैंने बिना किसी भेदभाव के देश की और लोगों की सेवा की है। ईरानी ने कहा कि उन्हें हजारों की संख्या में लोगों से अर्जियां मिली हैं और उन्होंने इसका निपटारा किया और किसी से यह नहीं पूछा कि उनकी जाति या धर्म क्या है।

कांग्रेस के आरोपों पर स्मृति ने कहा कि मुझ पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि हैदराबाद विश्वविद्यालय को पत्र क्यों लिखा। कांग्रेस सांसद हनुमंथ राव के कई पत्र मुझे मिले और इसमें कहा गया कि हैदराबाद विश्वविद्यालय में न्याय होना चाहिए। उनकी नीयत में कोई खोट नहीं थी और इस कारण पत्र लिखा। देशद्रोह के आरोपी जेएनयू के छात्रों के समर्थन के मसले पर उन्होंने कांग्रेस उपाध्‍यक्ष राहुल गांधी पर भी जमकर निशाना साधा।


करदाता का पैसा, देश के खिलाफ भड़काने के लिए खर्च नहीं किया जा सकता : अनुराग सिंह ठाकुर




श्री अनुराग सिंह ठाकुरः यह कांग्रेस पार्टी को तय करना होगा कि वह जान लेने वालों के साथ हैं
या जान बचाने वालों के साथ हैं। आज देश यही जवाब मांगना चाहता है। जे॰एन॰यू॰ की ग्राण्ट
पिछले डेढ़ साल में कम नहीं हुई। लेकिन देश के करदाता का पैसा किसी को देश के खिलाफ
भड़काने के लिए खर्च नहीं किया जा सकता हैं यदि करदाता पूछता है कि पैसा मेरा काटते हो,
सब्सिडी वहां पर देते हो, लेकिन तिरंगे झंडे को अपमानित करने वाले, देश के सैनिकों को
अपमानित करने वालों को क्या हम वहां इकट्ठा करके रखोगे। यह नहीं चलेगा और यही नहीं, वहां
पर नारे क्या लगे थे, नारे लगे ‘कश्मीर की आजादी तक, जंग रहेगी। भारत की बर्बादी तक, जंग
रहेगी। अगर इसी को अभिव्यक्ति की आजादी कहा जाता है तो दुर्भाग्य है, यह अभिव्यक्ति की
आजादी नहीं है। कोई भी अपने देश को तोड़ने के लिए, ऐसी देशविरोधी ताकतों को आगे आने को
कोई मौका नहीं देंगे। मैं कहना चाहता हूं कि भारत सरकार और भारत में अंतर है। भारत सरकार
की आलोचना कीजिए। हमारी सरकार की नीतियों और हमारे कार्यक्रमों की आलोचना कीजिए
लेकिन हमारे भारत की आलोचना मत कीजिए। वर्ष 2010 में दांतेवाड़ा में सीआरपीएफ के 76
जवान शहीद हुए लेकिन यही डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स यूनियन और ये बाकी कम्युनिस्ट संगठन पर
जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी में इसका जश्न मना रहे थे। क्या यही सहिष्णुता है? आप माओवादी
सोच को, अलगावादी सोच को, जेएनयू में समर्थन करते हैं। आप उन देशद्रोहियों के साथ हो या
देशभक्तों के साथ हो। हम माओवादियों के साथ कभी नहीं हैं। जो आतंकवादी हैं, उसे शहीद का
दर्जा दिया जाता है। कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है लेकिन जेएनयू का छात्रसंघ कहता है कि नहीं
है। उसके साथ जाकर आप खड़े होते हैं। हम सत्ता में सेवा करने के लिए आए है। आप देश के टुकड़े
करने पर आ गए हैं, हमें इस बात का दुःख है।

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लोकसभा: जेएनयू में राष्ट्रद्रोह के नारे पर खूब घमासान मचा

नई दिल्ली। संसद में बजट सत्र के दूसरे दिन बुधवार को राज्यसभा में भारी हंगामे के बाद लोकसभा में भी दलित छात्र रोहित वेमुला खुदकुशी मामला और जेएनयू में राष्ट्रद्रोह के नारे पर खूब घमासान मचा। रोहित वेमुला पर सदन में दोपहर करीब तीन बजे बहस शुरू हुई। कांग्रेस ने रोहित के अलावा जेएनयू के मुद्दे पर भी मोदी सरकार को घेरा। कांग्रेस के आरोपों का भाजपा सांसदों ने जोरदार तरीके से जवाब भी दिया।
भाजपा ने कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस के लिए परिवार पहले, पार्टी दूसरे एवं देश अंतिम नंबर पर है। साथ ही कहा कि देशद्रोही नारेबाजी करने वाले छात्रों का विरोध करने के बजाय राहुल गांधी द्वारा जेएनयू परिसर में जाकर कन्हैया कुमार की गिरफ्तारी का विरोध करना उनकी पार्टी की इस विचारधारा को सही साबित करता है। बजट सत्र के दूसरे दिन भाजपा नेता एवं सांसद अनुराग ठाकुर ने बुधवार को लोकसभा में कहा कि जेएनयू उनके दादा एवं देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु के नाम से है लेकिन राहुल गांधी ने जेएनयू परिसर में जाकर देशद्रोही नारेबाजी करने वाले छात्रों के प्रदर्शन को संबोधित कर यह साबित किया है कि कांग्रेस पार्टी के लिए परिवार पहले, पार्टी दूसरे और देश अंतिम ही उनकी प्राथमिकता में है। हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर से सांसद ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस उपाध्यक्ष को यह साबित करना होगा कि राहुल और उनकी पार्टी की विचारधारा किस ओर है।  राहुल संसद हमले में फांसी पाए अफजल गुरु के साथ है या संसद एवं लोकतंत्र के साथ। देश उनके इस जवाब का इंतजार कर रहा है।
कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने राहुल गांधी की आलोचना वाले भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर पर पलटवार करते हुए केन्द्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि भाजपा सांसद ऐसा कर रिकार्ड को मिटाने की कोशिश कर रहे है। सिंधिया ने केन्द्रीय मंत्री द्वारा जेएनयू जैसे विश्वस्तरीय संस्थान को बंद करने की मांग पर रोष जताते हुए केन्द्र सरकार से पूछा कि संस्थान ने शुरु से ही बुद्दिजीवी वर्ग देश को दिया है, लेकिन सरकार इसे देशद्रोही का केन्द्र बताकर संस्थान को बंद करने की साजिश कर रही है जो कि गलत है।
जेएनयू मामले में आतंकी हाफिज सईद का समर्थन मिलने वाले बयान पर केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह पर निशाना साधते हुए कांग्रेस सांसद ने कहा कि गृह मंत्री को ऐसा बयान देने से पहले पुख्ता सबूत एवं जांच करनी चाहिए थी, जो उन्हें नहीं किया। इससे  साबित होता है कि केन्द्र सरकार देश की सुरक्षा के प्रति सतर्क नहीं है। कांग्रेस सांसदों ने जेएनयू मामले में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा चुप्पी साधे पर भी केन्द्र सरकार पर निशाना साधा है।


गुरुवार, 25 फ़रवरी 2016

आम नागरिक के लिए सुरेश प्रभु का रेल बजट


सुरेश प्रभु का रेल बजट 2016 : आम आदमी के लिए 10 बड़ी घोषणाएं
NDTVKhabar.com team , गुरुवार 25 फ़रवरी  2016  

नई दिल्ली: रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने गुरुवार को रेल बजट 2016 पेश करते हुए यात्रियों के लिए कई घोषणाएं कीं, और कहा, "हमारी सरकार हमेशा आम आदमी के बारे में ही सोचती है..." सो आइए पढ़ते हैं, उनकी 10 बड़ी घोषणाओं के बारे में..." रेल बजट 2016 में आम आदमी के लिए 10 बड़ी घोषणाएं


०१- चार नई ट्रेनें शुरू होंगी - 'हमसफर', 'तेजस', 'उदय' और 'अंत्योदय'... 'हमसफर' पूर्णतः वातानुकूलित ट्रेन होगी, जिसमें वैकल्पिक भोजन की भी व्यवस्था होगी... 'तेजस' हाई-स्पीड ट्रेन होगी... 'उदय' डबल-डेकर ट्रेन होगी... 'अंत्योदय' पूरी तरह अनारक्षित ट्रेन होगी...
०२- 'क्लीन माई कोच' सेवा के जरिये यात्री सफर के दौरान ही सिर्फ एक एसएमएस भेजकर डिब्बे की सफाई करवा सकेंगे...
०३- बार-कोडयुक्त टिकटों तथा स्कैनरों की मदद से टिकटहीन यात्रा में आसानी होगी, तथा यात्रियों की दिक्कतें भी कम होंगी...
०४- जल्द ही व्यवस्था की जाएगी, ताकि हेल्पलाइन 139 पर फोन के जरिये भी टिकट कैंसल हो सकेगी... देशभर में 1,780 ऑटोमैटिक टिकट मशीनें भी लगाई जाएंगी...
०५- स्टेशनों में विकलांगों के अनुकूल टॉयलेट बनाए जाएंगे...
०६- पायलट आधार पर ट्रेनों में बच्चों के लिए विशेष मैन्यू की व्यवस्था की जाएगी... स्टेशनों पर गर्म दूध, पानी तथा बच्चों के खाने की चीज़ें उपलब्ध होंगी...
०७- सामान्य डिब्बों में भी मोबाइल चार्जिंग की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी...
वरिष्ठ नागरिकों के लिए नीचे की बर्थ आरक्षित करवाना सरल होगा...
०८- 400 रेलवे स्टेशनों पर वाई-फाई सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी, जिनमें से 100 पर इसी साल वाई-फाई सुविधा मिलेगी... 
०९- पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के जरिये 400 स्टेशनों का पुनर्निर्माण भी करवाया जाएगा...
१०- सभी स्टेशनों पर सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की व्यवस्था होगी...

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किराया नहीं बढ़ा, सुविधाओं पर ध्यान, बजट की 50 खास बातेंनई दिल्ली, एजेंसियां 25-02-2016

http://www.livehindustan.com

       रेल बजट 2016-17 में यात्री किराया और माल भाड़े में कोई बदलाव न करते हुए रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने यात्री सुविधा पर विशेष ध्यान देकर इसे लोक लुभावन बनाने की कोशिश की है। लोकसभा में गुरुवार को 68 मिनट के रेल बजट भाषण में उन्होंने रेलवे के लिए एक स्वतंत्र नियामक की जरूरत बताई।
     प्रभु ने विकास परियोजनाओं के लिए योजनागत व्यय को बढ़ाकर 1.21 लाख करोड़ रुपये कर दिया। उन्होंने कहा कि इस साल हमारा निवेश पिछले वर्षो के औसत का लगभग दोगुना होगा। पहले कभी ऐसा नहीं हुआ था।
      उन्होंने रेलगाड़ियों में 65 हजर अतिरिक्त बर्थ, 2,500 वाटर वेंडिंग मशीन, रेल डिब्बों में 17 हजार जैविक शौचालय, 1,780 ऑटोमेटिक टिकटिंग मशीन, एक बार में 1,20,000 उपयोगकर्ताओंको ई-टिकट देने की सुविधा और 408 स्टेशनों पर ई-कैटरिंग सुविधा देने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि प्रत्येक रेलगाड़ी में वरिष्ठ नागरिकों के लिए लोवर बर्थ का कोटा 50 फीसदी बढ़ाकर 120 किया जाएगा और वरिष्ठ नागरिकों तथा विकलांग यात्री योजना के दायरे में और अधिक स्टेशनों को शामिल किया जाएगा और तेजस नाम से नई ट्रेन शुरू की जाएगी।

उन्होंने कहा कि आज हम सर्वाधिक चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रहे हैं। यह बजट लाखों लोगों को सेवा देकर बदलाव और हमारे देश की यात्रा का दस्तावेज तैया करेगा।

संचालन अनुपात के बारे में उन्होंने कहा कि सातवें वेतन आयोग के प्रभाव के कारण 2016-17 में हमें 92 फीसदी संचालन अनुपात रहने की उम्मीद है, जबकि वर्तमान वित्त वर्ष में यह 90 फीसदी रहने का अनुमान है। उन्होंने वर्तमान वित्त वर्ष के लिए संचालन अनुपात का लक्ष्य 88.5 फीसदी रखा था।

उन्होंने कहा कि रेलवे का प्रदर्शन सुधारने के लिए त्रिस्तरीय रणनीतिक चिंतन प्रक्रिया अपनाई जाएगी- आय जुटाने के नए तरीके, खर्च के नए मानक और परियोजनाओं और कार्यक्रमों के कार्यान्वयन के लिए नई संरचना।

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक भारत का 64,460 किलोमीटर का रेल मार्ग दुनिया में चौथा सबसे बड़ा है। इससे आगे अमेरिका, रूस और चीन हैं। देश में कुल लगभग 21 हजार रेलगाड़ियां रोजाना 2.3 करोड़ यात्रियों को यात्रा सेवा और 30 लाख टन माल ढुलाई सेवा देती हैं।

खास बातें
वर्ष 2016-17 के लिए आज पेश रेल बजट में यात्री किराए और माल भाड़े में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। रेलवे ने तीन नयी सुपरफास्ट ट्रेनें शुरू करने और वर्ष 2019 तक समर्पित उत्तर-दक्षिण, पूरब-पश्चिम और पूर्वी तटीय माल ढुलाई गलियारा बनाने की घोषणा की। सुरेश प्रभु द्वारा गुरुवार को लोकसभा में पेश रेल बजट की 100 खास बातें इस प्रकार हैं :

1-रेल बजट 2016-17 में तीन नयी सुपरफास्ट रेल गाड़ियां चलाने की घोषणा की गई है।
2-हमसफर नाम की गाड़ियां पूरी तरह से वातानुकूलित 3एसी के डिब्बों वाली होंगी जिनमें भोजन का भी विकल्प होगा।
3-तेजस नाम से चलाई जाने वाली नयी गाड़ियां 130 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलेंगी।
4-इन दोनों ट्रेनों के परिचालन की लागत किराए के साथ साथ दूसरे तरीकों से वसूली जाएगी।
5-तीसरी प्रकार की ट्रेन उदय नाम से चलाई जाएगी जो डबल डेकर होगी।
6-उत्कृष्ट नाम से वातानुकूलित दो तला गाड़ियां चलाने की घोषणा की गई है। ये दोतला गाड़ियां व्यस्त मार्गों पर चलाने की योजना है।
7-बजट में अनारक्षित यात्रियों की सुविधा का भी ध्यान रखा गया है।
8-सुपरफास्ट अंत्योदय एक्सप्रेस सेवा शुरू करने की घोषणा।
9-ऐसे यात्रियों के लिए दीन दयालु अनारक्षित डिब्बे लगाए जाएंगे जिनमें पेयजल और मोबाइल चार्जिंग की सुविधा होगी।
10-रेल विकास प्राधिकरण के गठन की घोषणा। रेल विकास प्राधिकरण सेवाओं की दरों के निर्धारण में रेलवे की मदद करेगा ताकि देश की यह सबसे बड़ी परिवहन प्रणाली अपनी प्रतिस्पर्धा क्षमता बनाए रख सके। साथ ही इसके ग्राहकों के हितों की भी रक्षा हो और सेवा की दक्षता, मानक स्तर की हो।
11-रेलमंत्री ने कहा कि माल ढुलाई के मामले में मौजूदा वस्तुओं की सूची के विस्तार के लिए अपने मौजूदा दृष्टिकोण से बढ़कर सोचना होगा। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि हमें भाड़ा फिर से मिले।
12-वर्ष 2016-17 में भारतीय रेलवे के लिए 1,21 लाख करोड़ रुपये के योजना व्यय का प्रस्ताव किया।
13-योजनाओं के लिए धन की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए वित्त पोषण की मिली-जुली व्यवस्था करने का प्रस्ताव।
14-अगले वित्त वर्ष में रेलवे को यातायात कारोबार से सकल राजस्व प्राप्ति 1.84 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। वर्ष के दौरान यात्री किराए से 51,012 करोड़ रुपये की आय का लक्ष्य रखा गया है जो चालू वित्त वर्ष के बजट से 12.4 प्रतिशत अधिक होगा।
15-रेलवे ने 2016-17 में 5 करोड़ टन अतिरिक्त माल ढुलाई का लक्ष्य रखा है और उम्मीद की है कि बुनियादी क्षेत्र के स्वस्थ विकास से यह लक्ष्य हासिल हो जाएगा। माल ढुलाई से 1.17 लाख करोड़ रुपये की आमदनी होने का अनुमान है।
16-कोचिंग और छोटी मोटी सेवाओं से रेलवे को अगले वित्त वर्ष में क्रमश: 6,185 करोड़ रुपये और 9,590 करोड़ रुपये की आय होने का अनुमान है।
17-आगामी वित्त वर्ष में रेलवे को पेंशन पर 45,500 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं।
18-चालू वित्त वर्ष में रेलवे के वित्तीय कारोबार में 8,720 करोड़ रुपये की बचत दिखाई गई है।
19-सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने से रेलवे पर अगले वित्त वर्ष में दबाव बढ़ने और इस कारण परिचालन अनुपात (कुल आय के मुकाबले परिचालन खर्च) बिगड़ने का अनुमान है।
20-बजट में वर्ष 2016-17 के दौरान परिचालन अनुपात बढ़कर 92 प्रतिशत पहुंचने का अनुमान लगाया गया है जो चालू वित्त वर्ष में 90 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
21-रेलवे ने अनुमान लगाया है कि वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने के बावजूद उसके साधारण खर्च में वृद्धि 11.16 प्रतिशत तक सीमित रहेगी। इसके लिए उसने डीजल और बिजली की खपत में कटौती की योजना बनाई है।
22-तीन नए मालगाड़ी मार्ग बनाए जाएंगे जिनमें एक उत्तर दक्षिण गलियारा दिल्ली से चेन्नई के बीच होगा, जबकि दूसरा पूरब पश्चिम गलियारा खड़गपुर से मुंबई और तीसरा पूर्वी तटीय गलियारा खड़गपुर को विजयवाड़ा से जोड़ेगा।
23-इन तीन परियोजनाओं को उच्च प्राथमिकता देने का प्रस्ताव है ताकि इन परियोजना प्रस्तावों को तैयार करने, उनका ठेका देने और उन पर अमल करने का काम समय पर सुनिश्चित हो सके।
24-इन तीनों परियोजनाओं के लिए धन की व्यवस्था पीपीपी (निजी सरकारी भागीदारी) मॉडल सहित नए तरीकों से की जाएगी।
25-इन परियोजनाओं में चालू वित्त वर्ष की समाप्ति से पहले सिविल इंजीनियरिंग काम के सारे ठेके दिए भी जा चुके होंगे।
26-प्रभु ने कहा कि उनके रेल मंत्रालय संभालने के बाद से 24,000 करोड़ रुपये के ठेके दिए जा चुके हैं, जबकि उससे पहले के छह साल में कुल मिलाकर 13,000 करोड़ रुपये के ठेके दिए गए थे।
27-2,800 किलोमीटर तक रेल पटरी को बड़ी लाइन में बदलने का प्रावधान।
28-2016-17 में रोजाना सात किलोमीटर तक नई बड़ी लाइन पर संचालन शुरू।
29-2018-19 तक रोजाना 19 किलोमीटर नई बड़ी लाइन पर संचालन शुरू करने का लक्ष्य।
30-अगले पांच साल में 8.8 लाख करोड़ रुपये अवसंरचना पर होंगे खर्च।
31-सरकार से 40 हजार करोड़ रुपये बजटीय सहयोग की उम्मीद।
32-पारदर्शिता बढ़ाने के लिए सोशल मीडिया के उपयोग को बढ़ावा।
33-रिटायरिंग रूम की ऑनलाइन बुकिंग हो सकेगी।
34-मौजूदा वित्त वर्ष की समाप्ति तक 17 हजार अतिरिक्त जैविक शौचालय चालू होंगे।
35-मेक इन इंडिया पहल के तहत दो नए लोको कारखाने की बोली पूरी।
36-इस साल 100 और स्टेशनों पर और अगले वर्ष 400 स्टेशनों पर वाई-फाई सुविधा।
37-रेलवे स्टेशनों पर स्थानीय कला शैली को तरजीह।
38-वडोदरा स्थिति अकादमिक संस्थान को विश्वविद्यालय का दर्जा।
39-रेलवे 2017-18 में नौ करोड़ श्रम दिवस रोजगार पैदा करेगा। 2018-19 में 14 करोड़ श्रम दिवस का लक्ष्य।
40-वरिष्ठ नागरिकों के लिए लोवर बर्थ का कोटा 50 फीसदी बढ़ेगा।
41-एलआईसी पांच साल में करेगी 1.5 लाख करोड़ रुपये निवेश।
42-मुंबई उपनगरीय रेल नेटवर्क पर चर्चगेट और सीएसटी के बीच दो उपरिगामी रेल मार्गो का निर्माण होगा।
43-पूरे देश के लिए दिन-रात चालू रहने वाली महिला हेल्पलाइन।
44-व्यस्त मार्गो पर पूरी तरह अनारक्षित रेलगाड़ियों का संचालन।
45-नए शोध एवं विकास (आरएंडडी) संगठन होंगे स्थापित।
46-रेल कर्मचारियों के स्टार्ट-अप में होगा 50 करोड़ रुपये का निवेश।
47-रेल यात्रियों के लिए पसंदीदा स्थानीय व्यंजन होंगे उपलब्ध।
48-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपने को साकार करने की पूरी कोशिश।
49-रेल नेटवर्क के आधुनिकीकरण का काम पटरी पर रखने के लिए राजस्व के नए स्रोत तलाशे जाएंगे, खर्च घटाए जाएंगे और परिचालन का नया ढांचा लागू किया जाएगा।
50-यात्री किराए में और न ही माल भाड़े की दरों में कोई छेड़छाड़।

इंदिरा के बेटे ने नहीं किया था देशद्रोहियों का सपोर्ट - स्मृति ईरानी

स्मृति का राहुल पर निशाना- इंदिरा के बेटे ने नहीं किया था देशद्रोहियों का सपोर्ट
dainikbhaskar.comFeb 24, 2016,

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बुधवार को लोकसभा में स्मृति ईरानी।
नई दिल्ली.बजट सेशन के दूसरे दिन बुधवार को राज्यसभा-लोकसभा में रोहित वेमुला सुसाइड केस और जेएनयू में देश विरोधी नारेबाजी के मुद्दे पर हंगामेदार बहस हुई। पहले राज्यसभा में स्मृति ईरानी और मायावती आमने-सामने हो गईं। शाम को लोकसभा में स्मृति कई बार इमोशनल हो गईं। कहा- ‘मैं इस मुद्दे को पर्सनली ले रही हूं।’ जेएनयू स्टूडेंट्स का सपोर्ट कर रहे राहुल के लिए कहा, ‘‘सत्ता तो इंदिरा गांधी ने भी खोई थी। लेकिन उनके बेटे ने कभी भारत की बर्बादी के नारों का समर्थन नहीं किया था।’’ इन 8 मौकों पर स्मृति ने साधा कांग्रेस-राहुल पर सीधा निशाना...
1.हैदराबाद यूनिवर्सिटी में रोहित के दलित स्टूडेंट होने की वजह से उसे टारगेट किए जाने के कांग्रेस के आरोपों पर स्मृति ने कहा, ‘मेरा नाम स्मृति ईरानी है। मैं किसी को भी चैलेंज करती हूं कि मेरी जाति बताए।’
2.स्मृति ने कहा- राहुल कहते, ‘आओ स्मृति ईरानी! हम चलकर जेएनयू स्टूडेंट्स से कहें कि जिस भारत के विरोध में तुम नारे दे रहे हो, जिस तिरंगे को लहराने में तुम्हे शर्म आती है, उसी भारत के लिए जेएनयू के भी कुछ स्टूडेंट्स ने अपनी कुर्बानी दी है, उनके खिलाफ नारे मत लगाओ’ तो कुछ बात होती।
3.स्मृति ने जेएनयू स्टूडेंट्स का सपोर्ट कर रहे राहुल के लिए कहा-‘‘सत्ता तो इंदिरा गांधी ने भी खोई थी। लेकिन उनके बेटे ने कभी भारत की बर्बादी के नारों का समर्थन नहीं किया था।’’
4.एचआरडी मिनिस्टर ने कहा- ‘600 स्टूडेंट्स तेलंगाना मूवमेंट में मारे गए। राहुल क्या कभी गए? कभी नहीं गए। लेकिन इस केस में उन्हें राजनीतिक मौका नजर आया। इस केस का राजनीतिक फायदे के लिए आप लोगों ने इस्तेमाल किया।’
5.कांग्रेस के वॉकआउट पर कहा, ‘‘आपकी इच्छा जवाब सुनने की थी ही नहीं, नीयत में खोट थी।’’
6.बयान देते वक्त इमोशनल हुईं स्मृति ने कहा- ‘‘मैं इसे (कांग्रेस के आरोपों को) पर्सनली ले रही हूं। मैं बताती हूं क्यों। जैसे ही मुझे घटना (रोहित के सुसाइड) की खबर मिली कि केसीआर जी को मैंने फोन किया। मैंने उनसे कहा कि लॉ एंड ऑर्डर की सिचुएशन ना हो, मदद कीजिए। मुझे कहा गया कि साहब बिजी हैं। उनकी बेटी से भी बात हुई। मुझे आज तक उनके फोन का इंतजार है।’’
7.भगवाकरण के आरोपों पर स्मृति ने कहा, ‘‘राहुल अमेठी जाकर कहते हैं कि सभी वीसी आरएसएस के हैं। मैं कहना चाहती हूं कि किसी भी सेंट्रल यूनिवर्सिटी का वाइस चांसलर आकर यह कह दे कि मैंने भगवाकरण किया है तो मैं राजनीति छोड़ दूंगी।’’
8.मंत्री ने कहा, ‘क्या मुझे इसलिए टारगेट किया जा रहा है, क्योंकि मैंने अमेठी में राहुल को चुनौती दी थी।’
जानिए, दिनभर में संसद की कार्यवाही के अपडेट्स...
7:46 PM :‘‘राहुल कहते कि ‘आओ स्मृति ईरानी! हम चलकर जेएनयू स्टूडेंट्स से कहें कि जिस भारत के विरोध में तुम नारे दे रहे हो, जिस तिरंगे को लहराने में तुम्हे शर्म आती है, उसी भारत के लिए जेएनयू के भी कुछ स्टूडेंट्स ने अपनी कुर्बानी दी है, उनके खिलाफ नारे मत लगाओ’ तो कुछ बात होती।’’
7:44 PM :‘‘राहुल अमेठी जाकर कहते हैं की सभी वीसी आरएसएस के हैं। मैं कहना चाहती हूं कि किसी भी सेंट्रल यूनिवर्सिटी का वाइस चांसलर आकर यह कह दे कि मैंने भगवाकरण किया है तो मैं राजनीति छोड़ दूंगी।’’
7:42 PM :‘‘सत्ता तो इंदिरा गांधी ने भी खोई थी। लेकिन उनके बेटे ने कभी भारत की बर्बादी के नारों का समर्थन नहीं किया था।’’
7:32 PM : स्मृति ने कहा- ‘‘जिन्हें उन लोगों ने जल्लाद कहा था, आज उनके घर ही (सुप्रीम कोर्ट में बेल के लिए) दस्तक देना पड़ी है। यही मेरे लोकतंत्र की ताकत है।’’
7:30 PM : ‘‘जेएनयू का एक और पोस्टर कहता है- सुप्रीम कोर्ट जज, फासिस्ट इंडिया और स्टेट याकूब मेमन से डर रहे थे। हमें इस ज्यूडिशियल मर्डर के खिलाफ होना चाहिए।’
7:29 PM : ‘‘जेएनयू में क्या होता है- उसका उदाहरण देती हूं। दो प्रोफेसरों ने कश्मीर सॉलिडैरिटी रैली जेएनयू में निकाली थी। तब यूपीए की सरकार थी।’’
7:28 PM : कांग्रेस सदन से वॉकआउट कर चुकी है।
7:23 PM :स्मृति ने कहा- कैंपस में दो प्रोफेसरो ने कश्मीर सॉलिडेट्री रैली निकाली थी।
7:23 PM :स्मृति ने कहा- वीसी को हमने नहीं अप्वाइंट किया। राष्ट्रपति ने उन्हें अप्वाइंट किया।
7:22 PM : स्मृति ने कहा- ‘‘यूनिवर्सिटी सिक्युरिटी डिपार्टमेंट के 35 गार्ड और 3 महिला गार्ड मौके पर थे। उन्होंने 11 फरवरी 2016 को बयान में कहा कि वहां भीड़ बढ़ने लगी। उमर खालिद, अनिर्बान मौजूद थे। वहां अफजल गुरु के नारे लग रहे थे। कहा जा रहा था- ‘जिस कश्मीर को खून बंदूक से लेंगे आजादी। गो इंडिया गो बैक। इंडियन आर्मी मुर्दाबाद।’ दो-तीन और लोग थे मुंह पर कपड़ा लगाए।’’
7:22 PM :‘‘जेएनयू के बारे में बताती हूं। उमर खालिद ने यूनिवर्सिटी से प्रोग्राम इजाजत मांगी। यूनिवर्सिटी ने पूछा- क्यों जगह चाहिए? उमर ने लिखा- पोएट्री रीडिंग के लिए। यूनिवर्सिटी ने पूछा- और कुछ चाहिए? उमर ने लिखा- हां, माइक के लिए इलेक्ट्रिसिटी चाहिए।’’
7:21 PM :स्मृति ईरानी ने खालिद मामले में जवाब देना शुरू किया।
7:20 PM :‘600 स्टूडेंट्स तेलंगाना मूवमेंट में मारे गए। राहुल क्या कभी गए? कभी नहीं गए। लेकिन इस केस में उन्हें राजनीतिक मौका नजर आया। इस केस का राजनीतिक फायदे के लिए आप लोगों ने इस्तेमाल किया।’
7:18 PM :अगले दिन सुबह 6.30 बजे तक किसी ने डॉक्टर को उसके (रोहित वेमुला के) पास जाने की इजाजत नहीं दी। बच्चे की बॉडी का छिपे हुए पॉलिटिकल टूल के लिए इस्तेमाल हुआ। जो नारे लगा रहे थे, वे इंसाफ नहीं, राजनीति चाहते थे।’
7:10 PM : ‘हाईकोर्ट में पुलिस ने कहा कि सूचना शाम को मिली। कमरा खुला था। बॉडी फंदे से उतार ली गई थी। हाथ से लिखा नोट मिला था। उसमें किसी को मौत के लिए जिम्मेदार नहीं उठाया गया था।’
7:08 PM : स्मृति ने कांग्रेस की तरफ इशारा कर कहा- ‘आपकी इच्छा जवाब सुनने की थी ही नहीं, नीयत में खोट थी।’
7:05 PM : ‘हनुमंत रावजी ने मुझे लिखा कि कांग्रेस के कार्यकाल में जिस वीसी का अप्वाइंटमेंट हुआ, उनके कार्यकाल में आत्महत्या हुई।’
7:04 PM : बयान देते वक्त इमोशनल हुईं स्मृति ने कहा- ‘मैं इसे पर्सनली ले रही हूं। मैं बताती हूं क्यों। जैसे ही मुझे घटना (रोहित के सुसाइड) की खबर मिली कि केसीआर जी को मैंने फोन किया। मैंने उनसे कहा कि लॉ एंड ऑर्डर की सिचुएशन ना हो, मदद कीजिए। मुझे कहा गया कि साहब बिजी हैं। उनकी बेटी से भी बात हुई। मुझे आज तक उनके फोन का इंतजार है।’
7:02 PM : ‘मुझे सूली पर चढ़ाया जा रहा है क्योंकि मेरे विभाग ने पत्र लिखा था?’
7:00 PM :स्मृति ईरानी रोहित वेमुला मामले में जवाब दे रही हैं। (ये भी पढ़ें- जब मायावती से बोलीं स्मृति ईरानी- सिर कलम कर आपके चरणों में रख देंगे)
3: 58 PM:अनुराग ने कहा- ''कांग्रेस के पूर्व मंत्री ने कहा था कि दिल्ली के बटला हाउस एनकाउंटर के बाद सोनिया जी खूब रोईं थीं। ये मैं नहीं उनके मंत्री ही कह चुके हैं। लेकिन उस दौरान शहीद होने वाले पुलिस वाले के घर नहीं गए। आज उन्हें तय करना होगा कि वे अफजल के सपोर्ट में हैं, देशभक्तों के साथ हो।''
3: 55 PM:लोकसभा में अनुराग ठाकुर ने कहा,''कांग्रेस का स्लोगन है- पहले फैमिली, दूसरे नंबर पर पार्टी, अंतिम में देश।''
3: 50 PM:ठाकुर ने कहा,''ये फ्रीडम ऑप स्पीच की बात करते हैं। इमरजेंसी में क्या हुआ था। ये लोग फ्रीडम ऑफ स्पीच की बात करते हैं तो दुख होता है। आज ब्लैक आउट करने वाले इमरजेंसी के वक्त शायद कुछ नहीं देखा।''
3: 46 PM:राज्यसभा में हंगामा जारी।
3: 45 PM:''जिस यूनिवर्सिटी का नाम जवाहर लाल नेहरू के नाम पर है उसी में उनके परिवार के एक सदस्य जाता है और देशविरोधी ताकतों के साथ खड़ा होता है।''
3: 40 PM:ठाकुर ने कहा, ''2010 जुलाई में मुझे तिरंगा फहराने के लिए अरेस्ट किया गया। ऐसे कांग्रेसी नेता क्या कश्मीर की बात करेंगे।''
3: 35 PM:बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के पंपोर में शहीद होने वाले कैप्टन के पास भी जेएनयू की डिग्री थी। कांग्रेस के नेता उनके घर क्यों नहीं गए।
3: 05 PM:लोकसभा में रोहित वेमुला केस पर बोल रहे हैं कांग्रेस के सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया।
2: 35 PM:राज्यसभा में हंगामा जारी। दलित स्टूडेंट्स मौत मामले पर चर्चा कराने को लेकर अड़ीं मायावती।
12: 38 PM:राज्यसभा पांचवीं बार दो बजे तक के लिए स्थगित।
12: 36 PM:संसदीय कार्य राज्य मंत्री मुख्तार नकवी ने कहा, ''ऐसे हाउस चलना ठीक नहीं है। नारेबाजी बंद हो जाए तो हम चर्चा के लिए तैयार हैं।''
12: 34 PM:नारेबाजी कर रहे बीएसपी सांसदों से अंसारी ने कहा- अपनी सेहत का ख्याल रखें। बैठ जाइए।
12: 29 PM:राज्यसभा की कार्यवाही शुरू हुई। अपोजिशन मेंबर्स की नारेबाजी जारी।
12: 13 PM:दोबारा कार्यवाही शुरू। होती रही नारेबाजी। अंसारी ने सदन को फिर 15 मिनट के लिए स्थगित कर दिया।
12: 03 PM:अंसारी ने कहा कि हंगामा कर प्रश्न पूछने के सांसदों के विशेषाधिकार का हनन न करें। इसके बाद उन्होंने कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित कर दी।
12: 00 PM : राज्यसभा के शुरू होते ही सभापति हामिद अंसारी ने कहा प्रश्नकाल यानी प्रश्नकाल होता है।
11: 40 AM : लोकसभा में अभी प्रश्नकाल चल रहा है।
11: 38 AM :हंगामा नहीं थमा और सभापति पीजी कुरियन ने कार्यवाही 12 बजे तक स्थगित कर दी।
11: 35AM :एचआरडी मिनिस्टर स्मृति ईरानी ने कहा - उपसभापति जी आप तुरंत चर्चा कराएं, क्योंकि यहां कुछ लोग दलित स्टूडेंट की मौत पर राजनीतिक रोटियां सेंक रहे हैं।
11: 32AM :लेफ्ट के नेता सीताराम येचुरी और रेणुका चौधरी ने भी सरकार से सफाई मांगी।
11: 31AM :मंत्री नकवी ने कहा कि सरकार टुकड़ों में जवाब नहीं देगी। आप चाहें तो अभी चर्चा शुरू करा लें।
11: 30AM :मायावती ने कहा कि सरकार यह बताए कि वह जांच कराएगी या नहीं।
11: 28AM: अपोजिशन ने सरकार से जवाब देने की डिमांड करते हुए नारेबाजी शुरू की।
11: 18AM: हंगामा थमते न देख राज्यसभा के उपसभापति पीजी कुरियन ने 10 मिनट के लिए कार्यवाही स्थगित की।
11:15 AM :मायावती ने कहा चर्चा तो हम करेंगे, लेकिन सरकार पहले इसका जवाब दे।
11:13 AM :संसदीय कार्य राज्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा सरकार को रोहित के सुसाइड मुद्दे पर चर्चा से आपत्ति नहीं है। सदन चाहे तो अभी चर्चा शुरू हो सकती है।
11:11 AM :राज्यसभा में बीएसपी चीफ मायावती ने कहा कि हैदराबाद यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट रोहित वेमुला को सुसाइड के लिए उकसाया गया था।
11:02 AM :संसदीय कार्य मंत्री एम वेंकैया नायडू ने लोकसभा में कहा कि सरकार हर मुद्दे पर चर्चा को राजी है। कृपया प्रश्नकाल होने दें।
11:00 AM :लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि हम देश के अहम मुद्दों पर चर्चा चाहते हैं।
10:45 AM : जेएनयू मुद्दे पर बुधवार को संसद परिसर में हंगामा हो गया। बजट सेशन के दूसरे दिन की कार्यवाही से पहले लेफ्ट-जेडीयू के राज्यसभा मेंबर्स ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
10:35 AM :पीएम मोदी ने सीनियर कैबिनेट मिनिस्टर्स के साथ मीटिंग की।
सामने आनी चाहिए हमारी कमियां : PM
- मंगलवार को संसद पहुंचे पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा, ''औपचारिकता से ऊपर उठकर विचार-विमर्श करना होगा। हमें सार्थक चर्चा करने का एक अवसर मिला है।"
- "इस सत्र में देश के नागरिकों की चिंताओं पर गहन चिंतन होगा। आज से शुरू हो रहे सेशन में उसका आभास देशवासियों को जरूर होगा। सरकार की कमियां उजागर होनी चाहिए।''
16 मार्च तक चलेगा पहला फेज
- सेशन दो फेज में होगा। पहला -23 फरवरी से 16 मार्च और दूसरा- 25 अप्रैल से 13 मई तक।
- 25 फरवरी को रेल बजट, 26 फरवरी को इकोनॉमिक सर्वे और 29 फरवरी को आम बजट पेश किया जाएगा।
संसद में फंसे हैं ये अहम बिल
- बजट सेशन में 32 बिल लाए जाने हैं।
- जीएसटी बिल, व्हिसल ब्लोअर्स प्रोटेक्शन बिल (संशोधित) और इंडस्ट्रीज (डेवलपमेंट एंड रेग्युलेशन) संशोधन बिल मुख्य हैं।
- इसके अलावा कंज्यूमर प्रोटेक्शन बिल, इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड, बेनामी ट्रांजैक्शन्स (संशोधित) बिल, लैंड एक्विजिशन बिल और प्रिवेंशन ऑफ करप्शन (संशोधित) बिल जैसे अहम बिल संसद में अटके हुए हैं।

मंगलवार, 23 फ़रवरी 2016

आतंकवादी की बरसी बनाम मौलिक कर्तव्य Fundamental Duties


- अरविन्द सिसोदिया, जिला महामंत्री,  भाजपा, कोटा, राजस्थान ।
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में जो कुछ हुआ वह आतंकवाद की पाठशाला से कम नहीं , आश्चर्य ही है कि विश्वविद्यालय प्रशासन भारत की संसद पर आतंकी हमले के लिये जिम्मेदार आतंकवादी की बरसी मनाने की इजाजत कैस दे देता हे। यह कृत्य भारतीय संविधान के मौलिक कर्तव्यों  का उल्लंघन तो है ही। अन्य कानून की बहुत सी धाराओं के अनुसार अपराध भी है।

एक बहुत ही सामन्य सी बात है, जो भी नागरिक संविधान के मूल कर्तव्यों की पालना नहीं करता , वह संविधान विरोधी तो हो ही गया। जो संविधान विरोधी है उसे भारत में रहने का हक क्या हे। 

 मेरा बहुत स्पष्टमत है कि धार्मिक , सरकारी और गैर सरकारी तथा व्यक्तिगत तक की शिक्षाओं में कोई भी भारत विरोधी शिक्षा भारत में देता है या इस तरह के कृत्य के अवसर प्रदान करता है। तो उसकी मान्यता तत्काल निरस्त की जाये और उन चिन्हित व्यक्तियों के विरूद्ध प्रभावी आपराधिक कार्यवाही की जाये।

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मौलिक कर्तव्य Fundamental Duties


सामान्य परिचय
अनुच्छेद 51 (क) के अंतर्गत व्यवस्था है कि, प्रत्येक भारतीय नागरिक का यह कर्तव्य होगा कि,
वह संविधान का पालन करे और उसके आदर्शोँ, संस्थाओं, राष्ट्रध्वज तथा राष्ट्र गान का आदर करे।
स्वतंत्रता के लिए राष्ट्रीय आंदोलन को प्रेरित करने वाले आदर्शोँ को ह्रदय मेँ संजोए तथा उनका अनुपालन करे।
भारत की संप्रभुता एकता, तथा अखंडता की रक्षा करे तथा उसे बनाए रखे।
देश की रक्षा करे तथा बुलाये पर राष्ट्र की सेवा करे।
मूल कर्तव्य 42वेँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा डॉ. स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश पर संविधान मेँ शामिल किए गए।
धर्म, भाषा और प्रबंध या वर्ग पर आधारित सभी भेदभाव से परे भारत के लोगोँ मेँ समरसता और समान भातृत्व की भावनाओं का निर्माण करे, स्त्रियोँ के सम्मान के विरुद्ध प्रथाओं का त्याग करेँ।
हमारी सामूहिक संस्कृति की गौरवशाली परंपरा का महत्व समझेँ और उसका परिक्षण करे।
प्राणिमात्र के लिए दयाभाव रखे तथा प्रकृति पर्यावरण जिसके अंतर्गत झील, वन, नदी और वन्य जीव हैं, की रक्षा का संवर्धन करे।
मानववाद, वैज्ञानिक दृष्टिकोण तथा ज्ञानार्जन एवं सुधार की भावना का विकास करे।
हिंसा से दूर रहें तथा सार्वजनिक संपत्ति सुरक्षित रखेँ।
सामूहिक तथा व्यक्तिगत गतिविधियो के सभी क्षेत्रोँ मेँ उत्कर्ष की ओर बढ़ने का सतत् प्रयास करे, जिससे राष्ट्र निरंतर बढ़ते हुए प्रयत्न तथा उपलब्धियों की नई ऊंचाइयोँ को छू ले।

आवश्यक तथ्य
1976 मेँ किए गए 42वें संवैधानिक संशोधन द्वारा पहली बार भारतीय संविधान मेँ एक नया अध्याय 4(क) मूल कर्तव्य शीर्षक के अधीन छोडा गया है, जिसमें नागरिकोँ के 10 मूल कर्तव्योँ का उल्लेख किया गया है।

मौलिक कर्तव्योँ मेँ वृद्धि
86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा संविधान के अनुछेद 51ए मेँ संशोधन करके (ट) के बाद नया अनुक्षेद (उ) जोड़ा गया है, “जिसमेँ 14 साल तक के बच्चे के माता-पिता को अपने बच्चे को शिक्षा दिलाने के लिए अवसर उपलब्ध कराने का प्रावधान है।

मूल कर्तव्योँ का समावेश डॉ. स्वर्ण सिंह समिति (1974) की सिफारिशों के आधार पर किया गया था।
भारतीय संविधान मेँ नागरिकोँ के लिए मूल कर्तव्योँ की प्रेरणा पूर्व सोवियत संघ के संविधान से मिली थी।
मूल कर्तव्यों के पालन न किए जाने पर दंड की कोई व्यवस्था न होने पर मूल कर्तव्योँ को न्यायालय मेँ वाद योग्य नहीँ बनाया जा सकता है।
मूल कर्तव्यों को भंग करने के लिए यद्यपि संविधान में कोई व्यवस्था नहीं की गयी है लेकिन संसद को यह शक्ति प्राप्त है की वह कानून बनाकर मूल कर्तव्यों के उल्लंघन की दशा मेँ दोषी व्यक्तियो के लिए दंड की व्यवस्था करे।
मूल कर्तव्य सभी कम्युनिस्ट देशों विशेषकर चीन, रुस के संविधान मेँ मिलता है।
भारत के अतिरिक्त दूसरा प्रजातांत्रिक देश जापान है, जहाँ मूल कर्तव्यों को संविधान मेँ उल्लेखित किया गया है।
राष्ट्र गान मेँ प्रयुक्त शब्द सिंध पर विवाद
एशियाई खेलोँ मेँ भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले एथलीट संजीव भटनागर की याचिका मेँ उन्होंने तर्क दिया की देश के बंटवारे के बाद जब सिंध प्रांत पाकिस्तान का हिस्सा हो चुका है तो इस शब्द को राष्ट्रगान से हटा देना चाहिए। उनका कहना था कि अंतर्राष्ट्रीय संबंधों मेँ परिवर्तन होने पर दुनिया के कई देशोँ ने अपने राष्ट्रगान मे परिवर्तन कर नए राष्ट्रगान अपनाए हैं। सोवियत संघ का राष्ट्रगान इसका ज्वलंत उदाहरण है। सर्वोच्च यायालय ने इस जनहित याचिका को खारिज करते हुए वादी को केंद्र सरकार से संपर्क करने को कहा, जिसमें बाद मेँ गृहमंत्रालय ने संजीव भटनागर को भेजे गए पत्र मेँ बताया कि आधुनिक भारत के निर्माण मेँ सिंधी समुदाय के योगदान को देखते हुए सिंध शब्द को राष्ट्र गान से निकालना उचित नहीँ है। राष्ट्रगान के किसी भी शब्द मेँ बदलाव के प्रयास के बाद इसमें विभिन्न धर्म, संस्कृति अथवा ऐसे अन्य हितों के आधार पर नए शब्दोँ के शामिल करने तथा कुछ को इससे निकालने की मांग उठ सकती है, जो उचित नहीँ होगा।

झंडा विवाद तथा नवीन ध्वज संहिता
पुरानी ध्वज संहिता, जिसमें प्राचीन कालीन प्रावधानोँ की एक लंबी सूची थी, मेँ झंडा फहराने का अधिकार कुछ ही व्यक्तियोँ का विशेषाधिकार था।
वर्ष 2002 मेँ जिंदल समूह के उपाध्यक्ष नवीन जिंदल ने झंडा फहराने के अपने अधिकार पर प्रतिबंध को चुनौती देते हुए दिल्ली उच्च यायालय मेँ जनहित याचिका दायर की।
दिल्ली उच्च यायालय के आदेश की तिरंगा फहराना मौलिक अधिकार है तथा इसके बाद ध्वज संहिता के उदारीकरण के प्रश्नोँ के परिरक्षण हेतु समिति गठित करने के सर्वोच्च नयायालय की अनुशंसा के पश्चात सरकार ने समिति गठित की। समिति की अनुशंसा के आधार पर केंद्रीय मंत्रिमंडल ने तिरंगा फहराने से संबंधित अनावश्यक कठोर नियमो मेँ छूट देने का निर्णय लिया है।

नवीन ध्वज संहिता
कोई भी व्यक्ति केवल सूर्योदय से सूर्यास्त तक ही झंडा फहरा सकता है।
झंडे की चौड़ाई व लम्बाई का अनुपात 2:3 होना चाहिए।
इसे वस्त्र गद्दे या नैपकिन पर प्रिंट नहीँ करना चाहिए।
अंत्येष्टि के कफन के रुप मेँ इसका प्रयोग न करेँ। वाहनों पर झंडा न लपेटें।
इसका उपरी भाग नीचे (अर्थात उल्टा) करके न फहराएँ व इसे जमीं से स्पर्श नहीं करना चाहिए।
सयुंक राष्ट्र व अन्य देशों के झंडों को छोड कर इसे सभी झंडो से ऊंचा फहराना चाहिए।
क्षतिग्रस्त झंडे को न फहराएं।
संशोधित संहिता 26 जनवरी, 2003 से लागू की गई।

कर्तव्यों का क्रियान्वयन
42वेँ संविधान संशोधन द्वारा संविधान मेँ जिन कर्तव्यों को सम्मिलित किया गया है, सांविधिक कर्तव्य (statutory duties) हैं और वे विधि द्वारा (enforceable law) होंगे।
उन कर्तव्योँ के अनुपालन मेँ विफल होने पर दंड का आरोपण करने के लिए संसद विधि द्वारा दंड विधान करेगी।
हालांकि इस प्रावधान की सफलता बहुत हद तक उस तरीके पर निर्भर करेगी, जिस पर तथा जिन व्यक्तियोँ के ऊपर इन कर्तव्योँ को लागू किया गया है।
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संविधान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर 6 तरह के प्रतिबंध लगाता है! 
आप किसे मूर्ख बना रहे रवीश-राजदीप?                                              

मैं कल संविधान में अभिव्यक्ति की आजादी की व्याख्या पढ़ रहा था। अनुच्छेद 19(2) में स्पष्ट तौर पर 6 बाध्यताएं आरोपित की गई हैं, जो अभिव्यक्ति की आजादी को प्रतिबंधित करती हैं।
जेएनयू के देशद्रोहियों द्वारा लगाए गए नारे अभिव्यक्ति की आजादी के तहत नहीं आते हैं, यह संविधान में स्पष्ट है।
अनुच्छेद 19(2) साफ कहता है राष्ट्र की सुरक्षा को जिस भाषण से खतरा हो।
अब सुनिए- ‘भारत की बर्बादी तक जंग रहेगी’,  ‘भारत तेरे टुकड़े होंगे, इंशाअल्लाह’। क्या इस भाषण में देश को नष्ट करने की गूंज नहीं है?
अनुच्छेद 19(2) साफ कहता है उच्च व सर्वोच्च अदालत की अवमानना।
अब सुनिए- ‘अफजल हम शर्मिन्दा हैं, तेरे कातिल जिंदा हैं’। अब बताइए अफजल को फांसी की सजा देने वाला सुप्रीम कोर्ट कातिल बताया जा रहा है, अफजल को क्षमादान न देने वाले राष्ट्रपति को कातिल बताया जा रहा है और यह पूरी कानूनी प्रक्रिया जिस संविधान पर टिका है, उसे भी कातिल कहा जा रहा है!
क्या यह देश की कानूनी प्रक्रिया को खुली चुनौती नहीं है? उमर खालिद ने तो टीवी स्टूडियो में बैठ कर सुप्रीम कोर्ट को चुनौती देते हुए कहा है- कुछ जज मिलकर कोई फैसला नहीं कर सकते! यह साफ तौर पर देश के कानून का मजाक उड़ाया जा रहा है!
अनुच्छेद 19(2) साफ कहता है राष्ट्र की अखंडता और संप्रभुता पर हमला। अब सुनिए- ‘कश्मीर की आजादी तक जंग रहेगी’, ‘केरल की आजादी तक, जंग रहेगी’। क्या यह भारत के टुकड़े करने की सोच देश की संप्रभुता पर प्रहार नहीं है?
अब बताइए क्या राहुल गांधी, अरविन्द केजरीवाल, सीताराम येचुरी, डी राजा, केसी त्यागी, रवीश कुमार, राजदीप सरदेसाई आदि देशद्रोहियों के ये साथी क्या संविधान से अनभिज्ञ हैं?
जी नहीं, ये संविधान से अनभिज्ञ नहीं हैं, बल्कि देश की सरकार और कानून व्यवस्था को बंधक बनाने के लिए दबाव की राजनीति कर रहे हैं, जिसमें वो काफी हद तक सफल हो चुके हैं! आप देखिए जेएनयू को उमर खालिद व उसके साथी एक आतंक स्थल के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं और देश की कानून व्यवस्था को खुली चुनौती दे रहे हैं!

न ये लोग अफजल पर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को मानने को तैयार हैं और न भारत की कानून व्यवस्था के सम्मुख प्रस्तुत हो खुद को निर्दोष साबित करने को तैयार हैं! उल्टा कह रहे हैं कि हमलोगों से पंगा लेना इन्हें महंगा पड़ेगा! देश को खुली चुनौती और किसे कहते हैं?
भिंडरावाले से ये किस प्रकार अलग हैं?
रवीश कुमार और राजदीप सरदेसाई जैसे वामपंथी पत्रकारों ने जनता को देशद्रोह जैसे मूल मुद्दे से भटकाने का प्रयास किया है!
आप देखिए मूढमति लोग आज क्या बात करने लगे हैं- पटियाला हाउस के वकीलों की गुंडागर्दी, भाषण के वीडियो से छेड़छाड़, कश्मीर में भाजपा-पीडीपी सरकार, संघ की साजिश? इनसे पूछिए क्या सारा देश भाजपा या संघ है?
देशद्रोहियों का विरोध क्या इस देश की स्वतंत्र जनता नहीं कर सकती है?
कमाल है! इससे बड़ी फासिस्ट सोच और क्या होगी कि जनता की स्वतंत्र सोच को किसी पार्टी व संगठन की सोच से जोड़ दिया जाए ताकि देशद्रोहियों पर जनता बात करना ही बंद कर दे?
आप देखिए ये ‘लाल सलाम‘ वाले लोग देशद्रोहियों के लिए तो कह रहे हैं कि देशद्रोह के मामले इनसे हटाया जाए( बिना न्यायिक प्रक्रिया से गुजरे) और पटियाला हाउस के वकीलों व वीडियो टेप को लेकर ये सीधे जजमेंटल होकर निर्णय सुना रहे हैं!

देश के कानून और संविधान को जिस तरह से उमर व उसके साथी चुनौती दे रहे हैं, रवीश व राजदीप जैसे वामपंथी भी बौद्धिक चासनी में लपेट कर उसी तरह संविधान की धज्जियां उड़ा रहे हैं! दोगलपन-पाखंड और किसे कहते हैं?  जरा वामपंथी हिप्पोक्रेट मुझे समझा दें!

सोमवार, 22 फ़रवरी 2016

संसद पर हमला :13 दिसंबर 2001: मुख्य आरोपी अफजल गुरु : जेएनयू

भारत की संसद पर हमले के आरोपी की बरसी मनाने वाले अपने आप को देश भक्त कैसे कह सकते हैं ?  कोई भी विश्व विद्यालय देश विरोधियों को अनुमति कैसे दे सकता ?? और देशविरोधी का साथ देने को सिर्फ और सिर्फ देशद्रोही  कहा जाता हे !  अभिव्यक्ती की स्वतंत्रता का नाम लेकर देश से गद्दारी नही की जा सकती !!


संसद पर हमले की पूरी कहानी...

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13 दिसंबर 2001 को जैश-ए-मोहम्मद के पांच आतंकवादियों ने संसद पर हमला किया था। उस दिन एक सफेद एंबेसडर कार में आए इन आतंकवादियों ने 45 मिनट में लोकतंत्र के सबसे बड़े मंदिर को गोलियों से छलनी करके पूरे हिंदुस्तान को झकझोर दिया था 


यह पाकिस्तान की भारत के लोकतंत्र के मंदिर को नेस्तनाबूद करने की साजिद थी, लेकिन हमारे सुरक्षाकर्मियों ने अपनी जान की परवाह न करते हुए इन आतंकियों के मंसूबों पर पानी फेर दिया। जानिए संपूर्ण घटनाक्रम जानिए !

कैसे हुआ था हमला- तारी‍ख 13 दिसंबर, सन 2001, स्थान- भारत का संसद भवन। लोकतंत्र का मंदिर जहां जनता द्वारा चुने सांसद भारत की नीति-नियमों का निर्माण करते हैं। आम दिनों में जब संसद भवन के परिसर कोई सफेद रंग की एंबेसेडर आती है तो कोई ध्यान नहीं देता, लेकिन उस दिन उस सफेद रंग की एंबेसेडर ने कोहराम मचा दिया।

संसद भवन के परिसर में अचानक गृह मंत्रालय का कार पास लगी एक सफेद एंबेसेडर से आए 5 आतंकवादियों ने 45 मिनट तक लोकतंत्र के इस मंदिर पर गोलियों-बमों से थर्रा कर रख दिया था। आतंक के नापाक कदम उस दिन लोकतंत्र के मंदिर की दहलीज तक पहुंच गए थे। अचानक हुए हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया।

जांबाजी से किया मुकाबला : संसद परिसर के अंदर मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने अचानक हुए हमले का बड़ी ही वीरता से सामना किया। लोकतंत्र के इस मंदिर में कोई आंच न आए, इसलिए उन्होंने अपनी जान की बाजी लगा दी।

सुरक्षाकर्मियों ने बड़ी ही वीरता से सभी आतंकियों को मार गिराया। आतंकियों का सामना करते हुए दिल्ली पुलिस के पांच जवान, सीआरपीएफ की एक महिला कांस्टेबल और संसद के दो गार्ड शहीद हुए। 16 जवान इस दौरान मुठभेड़ में घायल हुए।

हमले के मास्टर माइंड को फांसी: संसद पर हमले की घिनौनी साजिश रचने वाले मुख्य आरोपी अफजल गुरु को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया। संसद पर हमले की साजिश रचने के आरोप में सुप्रीम कोर्ट ने 4 अगस्त 2005 को अफजल गुरु को फांसी की सजा सुनाई थी।

कोर्ट ने आदेश दिया था कि 20 अक्टूबर 2006 को अफजल को फांसी के तख्ते पर लटका दिया जाए। तीन अक्टूबर 2006 को अफजल की पत्नी तब्बसुम ने राष्ट्रपति के पास दया याचिका दाखिल कर दी।

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने अफजल की दया याचिका खारिज कर दी और सरकार ने उसे फांसी देकर हमले में शहीद हुए बहादुरों को सही मायने में श्रद्धांजलि दी।

मामला विचाराधीन : मुंबई हमले के आरोपी अजमल कसाब को फांसी पर लटकाए जाने के बाद अफजल गुरु को फांसी देने की मांग उठने लगी। राष्ट्रपति ने इस दया याचिका पर गृह मंत्रालय से राय मांगी। मंत्रालय ने इसे दिल्ली सरकार को भेज दिया जहां दिल्ली सरकार ने इसे खारिज करके गृह मंत्रालय को वापस भेजा।

गृह मंत्रालय ने भी दया याचिका पर फैसला लेने में वक्त लगाया लेकिन मंत्रालय ने अपनी फाइल राष्ट्रपति के पास भेज दी है। फांसी पर अंतिम फैसला देश के राष्ट्रपति को ही लेना है।
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2001 में संसद पर हुए हमले की पूरी कहानी

December 13, 2013 आईबीएन-7

नई दिल्ली। कहत हैं कुछ तारीखें अपने साथ इतिहास लेकर आती हैं। 13 दिसंबर 2001 की तारीख भी इतिहास में दर्ज हो जाने के लिए आई। भारतीय लोकतंत्र को थर्रा देने के लिए आई। पूरा देश भौचक था कि आखिर संसद पर हमला कैसे हो सकता है।
गोलियों की आवाज, हाथों में एके-47 लेकर संसद परिसर में दौड़ते आतंकी, बदहवास सुरक्षाकर्मी, इधर से उधर भागते लोग, कुछ ऐसा ही नजारा था संसद भवन का। जो हो रहा था वो उस पर यकीन करना मुश्किल हो रहा था। लेकिन ये भारतीय लोकतंत्र की बदकिस्मती थी कि हर तस्वीर सच थी।

सुबह 11 बजकर 20 मिनट
उस रोज उस वक्त, लोकसभा और राज्यसभा दोनों ही ताबूत घोटाले पर मचे बवाल के चलते स्थगित हो चुकी थीं। वक्त था 11 बजकर 20 मिनट। इसके बाद तमाम सांसद संसद भवन से बाहर निकल गए। कुछ ऐसे थे जो सेंट्रल हॉल में बातचीत में मशगूल हो गए। कुछ लाइब्रेरी की तरफ बढ़ गए, कुल मिलाकर सियासी तनाव से अलग माहौल खुशनुमा ही था।
किसी को अंदाजा नहीं था कि आगे क्या होने जा रहा है। उधर दूर एक सफेद रंग की एंबैसेडर कार संसद मार्ग पर दौड़ी चली जा रही थी। घनघनाती हुई लाल बत्ती और सायरन की आवाज। किसी को शक की गुंजाइश ही नहीं थी। ये कार विजय चौक से बाएं घूमकर संसद की तरफ बढ़ने लगी। इस बीच संसद परिसर में मौजूद सुरक्षा कर्मियों के वायरलेस सेट पर एक आवाज गूंजी। उप राष्ट्रपति कृष्णकांत घर के लिए निकलने वाले थे, इसलिए उनकी कारों के काफिले को आदेश दिया गया कि तय जगह पर खड़ी हो जाएं। ये जगह थी संसद भवन के गेट नंबर 11 के सामने।
चंद ही सेकेंड में सारी गाड़ियां करीने से आकर गेट नंबर 11 के सामने लग गईं। उप राष्ट्रपति किसी भी वक्त बाहर आने वाले थे। तब तक सफेद एंबेसडर कार लोहे के दरवाजों को पार करते हुए गेट नंबर 12 तक पहुंच चुकी थी। इसी गेट से राज्यसभा के भीतर के लिए रास्ता जाता है। कार इस दरवाजे से उधर की ओर आगे बढ़ गई जहां उप-राष्ट्रपति की कारों का काफिला खड़ा था।
11 बजकर 35 मिनट
दिल्ली पुलिस के असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर जीतराम उप राष्ट्रपति के काफिले में एस्कॉर्ट वन कार पर तैनात थे। जीतराम को सामने से आती हुई सफेद एंबेसडर दिखाई दी। सेकेंडों में ये कार जीतराम के पास तक आ गई। उसकी कार के चलते रास्ता थोड़ा संकरा हो गया था। एंबेसेडर की रफ्तार धीमी होने के बजाय और तेज हो गई। वो कार की तरफ देखता रहा, अचानक ये कार बाईं ओर मुड़ गई।
जीतराम को कार के ड्राइवर की ये हरकत थोड़ी अजीब लगी जब कार पर लाल बत्ती है। गृह मंत्रालय का स्टीकर है तो फिर वो उससे बचकर क्यों भागी। जीतराम ने जोर से चिल्ला कर उस कार को रुकने को कहा। एएसआई की आवाज सुनकर वो कार आगे जाकर ठिठक गई। लेकिन वहीं इंतजार करने के बजाय उसके ड्राइवर ने कार पीछे करनी शुरू कर दी। अब जीतराम तेजी से उसकी तरफ भागा। इसी हड़बड़ी में वो कार उप राष्ट्रपति के काफिले की मुख्य कार से टकरा गई।
सेना की वर्दी पहनकर आए थे आतंकी
जब गाड़ी खड़ी थी तभी आतंकियों की गाड़ी ने उनकी कार में टक्कर मारी। इसके बाद विजेंदर सिंह ने गाड़ी में बैठे आतंकी का कॉलर पकड़ा और कहा कि दिखाई नहीं दे रहा, तुमने उपराष्ट्रपति की गाड़ी को टक्कर मार दी।
सुरक्षाकर्मियों के हल्ला मचाने के बावजूद कार में बैठे आतंकी रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। जीतराम समेत बाकी लोग उस पर चिल्लाए कि तुम देखकर गाड़ी क्यों नहीं चला रहे हो। इस पर गाड़ी में बैठे ड्राइवर ने उसे धमकी दी कि पीछे हट जाओ वर्ना तुम्हें जान से मार देंगे। अब जीतराम को यकीन हो गया कि कार में बैठे लोगों ने भले सेना की वर्दी पहन रखी है, लेकिन वो सेना में नहीं हैं। उसने तुरंत अपनी रिवॉल्वर निकाल ली। जीतराम को रिवॉल्वर निकालता देख संसद के वॉच एंड वार्ड स्टाफ का जेपी यादव गेट नंबर 11 की तरफ भागा। एक ऐसे काम के लिए जिसके शुक्रगुजार हमारे सांसद आज भी हैं।
कार चला रहे आतंकी ने अब कार गेट नंबर 9 की तरफ मोड़ दी। इसी गेट का इस्तेमाल प्रधानमंत्री राज्यसभा में जाने के लिए करते हैं। कार चंद मीटर बढ़ी लेकिन आतंकी उस पर काबू नहीं रख पाए, कार सड़क किनारे लगे पत्थरों से टकरा कर थम गई। तब तक जीतराम भी दौड़ता हुआ कार तक पहुंच गया। उसके हाथ में रिवॉल्वर देख पांचों आतंकी तेजी से बाहर निकल आए। उतरते ही उन्होंने कार के बाहर तार बिछाना और उससे विस्फोटकों को जो़ड़ना शुरू कर दिया।
लेकिन तब तक जीतराम को यकीन हो गया कि ये आतंकवादी हैं। उसने बिना देर किए एक पर गोली दाग दी जो उसके पैर पर लगी। जवाब में उस आतंकी ने भी जीतराम पर फायर कर दिया। गोली उसके पैर में जाकर धंस गई और वो वहीं गिर गया। इस वक्त तक सरकार में ऊपर से लेकर नीचे तक किसी को अंदाजा नहीं था कि संसद की सुरक्षा में कितनी बड़ी सेंध लग चुकी है।
आतंकियों ने की ताबड़तोड़ फायरिंग
उधर, कार में धमाका कर पाने में नाकाम आतंकियों ने ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। गेट नंबर 11 पर तैनात सीआरपीएफ की कॉन्सटेबल कमलेश कुमारी भी दौ़ड़ते हुए वहां आ पहुंची। संसद के दरवाजे बंद करवाने का अलर्ट देकर जेपी यादव वहां आ गया। दोनों ने आतंकियों को रोकने की कोशिश की, लेकिन आतंकियों ने ताबड़तोड़ फायरिंग करते हुए उन्हें वहीं ढेर कर दिया।
आजाद देश के सबसे बड़े आतंकी हमले की शुरुआत करने के बाद अब आतंकी गोलियां चलाते और हैंड ग्रेनेड फेंकते हुए गेट नंबर 9 की तरफ भागे।
संसद परिसर में ताबड़तोड़ गोलियां की आवाज ने सुरक्षाकर्मियों में हड़कंप मचा दिया। उस वक्त सौ से ज्यादा सांसद मेन बिल्डिंग में ही मौजूद थे। पहली फायरिंग के बाद कई सांसदों को इस बात पर हैरत थी कि आखिर कोई कैसे संसद भवन परिसर के नजदीक पटाखे फोड़ सकता है। वो इस बात से पूरी तरह बेखबर थे कि संसद पर आतंकी हमला हुआ है।
लेकिन तब तक संसद की सुरक्षा में लगे लोग पूरी तरह हरकत में आ चुके थे। गहरे नीले रंग के सूट पहने हुए ये सुरक्षाकर्मी परिसर के भीतर और बाहर फैल गए। वो सांसदों और मीडिया के लोगों को लगातार अपनी जान बचाने के लिए चिल्ला रहे थे। उस वक्त तक ये भी तय नहीं था कि आतंकी सदन के भीतर तक पहुंच गए हैं या नहीं। इसलिए तत्कालीन गृह मंत्री लाल कृष्ण आडवाणी और कैबिनेट के दिग्गज मंत्रियों को संसद भवन में ही एक खुफिया ठिकाने पर ले जाया गया।
वहीं जो सांसद परिसर से बाहर निकल रहे थे उन्होंने देखा कि हर तरफ अफरातफरी मच गई है। पुलिस की वर्दी पहने हुए लोग इधर से उधर भाग रहे हैं। हर तरफ से गोलियों और हेंड ग्रैनेड दागे जाने की आवाज आ रही थीं। ये वो वक्त था जब पहली बार सही मायने में लोगों को एहसास हुआ कि दरअसल हुआ क्या है। फिर तो इसके बाद गोलियों की तड़तड़ाहट में एक और आवाज गूंज उठी, आतंकवादी, आतंकवादी।
संसद परिसर में मची अफरातफरी
संसद में फायरिंग और बम धमाके की कान फाड़ देने वाली आवाज के बीच शुरुआती मिनटों में पूरे परिसर में जबरदस्त अफरातफरी मची रही। कई सांसदों को संसद के वॉच एंड वार्ड स्टाफ के लोग सुरक्षित बाहर निकालकर ले गए। संसद के भीतर मचे हड़कंप के बीच पांचों आतंकवादी अंधाधुंध गोलियां दागते हुए गेट नंबर 9 की तरफ भागे जा रहे थे। गेट नंबर 9 और उनके बीच की दूरी कुछ ही मीटर की थी, लेकिन तब तक गोलियों की आवाज सुनकर गेट नंबर 9 को बंद कर दिया गया था।
आतंकियों पर जबरदस्त जवाबी फायरिंग भी जारी थी। सुरक्षाबलों की गोली से तीन आतंकी जख्मी थे, लेकिन वो लगातार आगे बढ़ते जा रहे थे। उन्होंने एक छोटी सी दीवार फांदी और गेट नंबर 9 तक पहुंच ही गए। लेकिन वहां पहुंचकर उन्होंने देखा कि उसे बंद किया जा चुका है। इसके बाद वो दौड़ते हुए, बंदूकें लहराते हुए आगे बढ़ने लगे। तभी पहली मंजिल पर मौजूद एक पुलिस अफसर अपने साथियों पर चिल्लाया कि एक-एक इंच पर नजर रखो। कोई आतंकी सदन के भीतर ना पहुंचने पाए कोई आतंकी यहां से भाग ना पाए। तुरंत ही सुरक्षाकर्मियों ने उन नेताओं और पत्रकारों को संसद के भीतर धकेलना शुरू कर दिया जो इतनी फायरिंग और हैंड ग्रेनेड के धमाकों के बाद भी दरवाजों के आसपास खड़े थे।
हमला होते ही काटे गए फोन
नेताओं को सेंट्रल हॉल तक ले जाने के बाद सुरक्षाकर्मी तमाम संवाददाताओं को उस कमरे में ले गए जहां से अहम सरकारी दस्तावेज बांटे जाते थे। इस कमरे का दरवाजा बंद कर दिया गया और कमरे में पहुंचते ही संवाददाता वहां के फोन की तरफ भागे। लेकिन कमरे में लगे सभी फोन ने काम करना बंद कर दिया था। ये फोन हमला शुरू होने के तुरंत बाद ही काट दिए गए थे। मकसद ये कि कोई आतंकी संसद भवन के संचार तंत्र पर कब्जा ना कर ले।
संसद के भीतर की इस हलचल के बीच आतंकी गेट नंबर 9 से आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे थे। 4 आतंकी गेट नंबर 5 की तरफ लपके भी, लेकिन उन 4 में से 3 को गेट नंबर 9 के पास ही मार गिराया गया। हालांकि एक आतंकवादी गेट नंबर 5 तक पहुंचने में कामयाब रहा। ये आतंकी लगातार हैंड ग्रेनेड भी फेंक रहा था। इस आतंकी को गेट नंबर पांच पर कॉन्टेबल संभीर सिंह ने गोली मारी। गोली लगते ही चौथा आतंकी भी वहीं गिर पड़ा।
पांचवां आतंकी मचाता रहा कोहराम
चार आतंकियों को मार गिराने की कार्रवाई के बीच एक आतंकी गेट नंबर 1 की तरफ बढ़ गया। ये आतंकी फायरिंग करते हुए गेट नंबर 1 की तरफ बढ़ता जा रहा था। गेट नंबर 1 से ही तमाम मंत्री, सांसद और पत्रकार संसद भवन के भीतर जाते हैं। ये आतंकी भी वहां तक पहुंच गया। फायरिंग और धमाके की आवाज सुनने के तुरंत बाद इस गेट को भी बंद कर दिया गया था। इसलिए पांचवां आतंकी गेट नंबर 1 के पास पहुंचकर रुक गया। तभी उसकी पीठ पर एक गोली आकर धंस गई। ये गोली इस आत्मघाती हमलावर की बेल्ट से टकराई। इसी बेल्ट के सहारे उसने विस्फोटक बांध रखे थे। गोली लगने के बाद पलक झपकते ही विस्फोटकों में धमाका हो गया। उस आतंकी के शरीर के निचले हिस्से की धज्जियां उड़ गईं। खून और मांस के टुकड़े संसद भवन के पोर्च की दीवारों पर चिपक गए। जले हुए बारूद और इंसानी शरीर की गंध हर तरफ फैल गई।
पांचों आतंकियों के ढेर होने के बावजूद इस वक्त तक ना तो सुरक्षाकर्मियों की पता था और ना ही मीडिया को कि आखिर संसद पर हमला कितने आतंकियों ने किया है। अफरातफरी के बीच ये अफवाह पूरे जोरों पर थी कि एक आतंकी संसद के भीतर घुस गया है। इसकी एक वजह ये भी थी कि मारे गए पांचों आतंकियों ने जो हैंड ग्रेनेड चारों तरफ फेंके थे, उनके में कुछ आतंकियों को मारे जाने के बाद फटे।
संसद के भीतर और बाहर मचे घमासान के बीच सुरक्षाकर्मियों को कुछ वक्त लगा ये तय करने में कि क्या खतरा वाकई टल गया है। आधे घंटे के भीतर सभी आतंकियों के मारे जाने के बावजूद वो कोई रिस्क नहीं लेना चाहते थे। तब तक सुरक्षाबल के जवान संसद और आसपास के इलाके को बाहर से भी घेर चुके थे। गोलियों की आवाज, हैंड ग्रेनेड के धमाके की जगह अब एंबुलेंस के सायरन ने ले ली थी।
हमला नाकाम करने में लगे 30 मिनट
संसद पर हमले को नाकाम करने में तीस मिनट लगे। लेकिन इन तीस मिनटों ने जो निशानी हमारे देश को दी वो आज भी मौजूद है। पांचों आतंकियों को ढेर करने के बाद कुछ वक्त ये तय करने में लगा कि सारे आतंकी मारे गए हैं। कोई सदन के भीतर नहीं पहुंचा। तब तक एक-एक करके बम निरोधी दस्ता, एनएसजी के कमांडो वहां पहुंचने लगे थे। उनकी नजर थी उस कार पर जिससे आतंकी आए थे और हरे रंग के उनके बैग जिसमें गोला-बारूद भरा हुआ था।
तलाशी के दौरान आतंकियों के बैग से खाने-पीने का सामान भी मिला, यानी वो चाहते थे कि संसद पर हमले को दौरान सासंदों को बंधक भी बनाया लिया जाए। वो ज्यादा से ज्यादा वक्त तक संसद में रुकने के लिए तैयार होकर आए थे। अब जाकर सरकार को एहसास हुआ कि अगर आतंकी भीतर घुस जाते तो उसका अंजाम कितना खतरनाक होता।
विस्फोटकों को किया नाकाम
बम निरोधक दस्ते ने वहां पहुंचने के बाद विस्फोटकों को नाकाम करना शुरू किया। उन्हें परिसर से दो जिंदा बम भी मिले थे। जिस कार से आतंकी आए थे, उसमें 30 किलो आरडीएक्स था। आप अंदाजा लगा सकते हैं कि अगर आतंकी इस कार में धमाका करने में कामयाब हो गए होते तो क्या होता।
सुरक्षाबलों को पूरी तरह तसल्ली करने में काफी देर लगी। वो अब किसी तरह का रिस्क नहीं लेना चाहते थे। हर किसी की एक बार फिर जांच की गई। संसद परिसर से निकलने वाली हर कार की भी तलाशी ली जा रही थी। जिन कारों पर संसद का स्टीकर लगा था उन्हें भी पूरी छानबीन करके ही बाहर जाने की इजाजत दी जा रही थी। एक-एक आदमी का आईकार्ड चेक किया जा रहा था। जब सुरक्षा में जुटे लोग पूरी तरह संतुष्ठ हो गए कि अब खतरा नहीं है, तब संसद सांसदों और मीडिया के लोगों को एक-एक करके बाहर निकालने का काम शुरू हुआ।
दोपहर साढ़े ग्यारह बजे के करीब हुए हमले के बाद मचे हड़कंप को थमते-थमते शाम हो गई। पूरा देश अब तक इस हमले को जज्ब नहीं कर पाया था। सत्ता के गलियारों में बैठक पर बैठक पर हो रही थी कि इस हालात का मुकाबला कैसे किया जाए। उधर इतिहास में 13 दिसंबर की तारीख को हमेशा के लिए दर्ज कराकर सूरज भी धीरे-धीरे डूबने लगा था।
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जेएनयू विवाद : इस पूरे मामले में अब तक क्या हुआ, जानें महत्वपूर्ण बातें

NDTVKhabar.com सोमवार फ़रवरी 22, 2016

देश की प्रतिष्ठित जवाहर लाल यूनिवर्सिटी में एक कार्यक्रम और उसके बाद पनपे तीखे विवाद में दिनोंदिन नए मोड़ आ रहे हैं। अब जेएनयू के टीचर एसोसिएशन ने मांग की है कि सभी निलंबित छात्रों का निलंबन समाप्त किया जाए। वहीं स्टूडेंट्स का कहना है कि वे सरेंडर नहीं करेंगे, पुलिस उन्हें अरेस्ट कर ले। आइए जानें, इस पूरे मामले में अब तक क्या हुआ, इससे जुड़ी सिलेसिलेवार जानकारी :
०१ -9 फरवरी को लेफ़्ट विंग के कुछ छात्रों ने जेएनयू में कार्यक्रम आयोजित किया। यह कार्यक्रम कथित तौर पर अफ़ज़ल और मक़बूल भट्ट की याद में कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसे छात्रों ने कल्चरल इवेंट का नाम दिया।
०२ - एबीवीपी के विरोध के बाद JNU प्रशासन ने कार्यक्रम की इजाज़त नहीं दी। इजाज़त नहीं मिलने के बावजूद वहां कुछ छात्र जमा हुए जहां कुछ छात्रों ने देश विरोधी नारे लगाए।
०३ - नारेबाज़ी के बाद एबीवीपी और लेफ़्ट समर्थक छात्रों के बीच झड़प हो गई। 10 फ़रवरी को नारेबाज़ी का वीडियो सामने आया जिसके बाद हंगामा हो गया।
०४ - 12 फ़रवरी को देश विरोधी नारेबाज़ी के आरोप में छात्रों पर देशद्रोह का मुक़दमा दर्ज
०५ - 16 लोगों को पुलिस ने आरोपी बनाया, छह को मुख्य आरोपी  बनाया
०६ - जिन छह छात्रों को मुख्य आरोपी बनाया गया, उनके नाम हैं : कन्हैया, उमर ख़ालिद, आशुतोष कुमार, रामा नागा, अनिर्बान भट्टाचार्य, अनंत प्रकाश नारायण
०७ - 12 फरवरी को जेएनयू छात्र संघ का अध्यक्ष कन्हैया गिरफ़्तार किया गया जोकि फिलहाल जेल में है।
०८ - कन्हैया कुमार की 12 फरवरी को गिरफ्तारी के बाद से बाकी मुख्य आरोपी लापता हो गए थे।
०९ - उमर खालिद समेत इन पांचों छात्रों को 21 फरवरी देर रात और फिर 22 फरवरी की सुबह यूनिवर्सिटी कैंपस में देखा गया। छात्रों ने कहा कि उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया बल्कि ‘डॉक्टर्ड वीडियो’ का इस्तेमाल कर उन्हें फंसाया गया।
१०  - बीच प्रशासनिक भवन के पास छात्रों की भीड़ के बीच उमर ख़ालिद ने भाषण दिया और आरएसएस व केन्द्र सरकार पर निशाना साधा। आज सुबह तक खबर आ रही थी इस विवाद के चलते देशद्रोह का आरोप झेल रहे पांच छात्र आज सरेंडर कर सकते हैं लेकिन अब खबर है कि आरोपी छात्र कह रहे हैं कि वे आत्म समर्पण नहीं करेंगे और पुलिस उन्हें गिरफ्तार करे।


साम्यवादी सोच का सच : आशुतोष मिश्र

साम्यवादी सोच का सच ( दैनिक जागरण )

Editor, Sampadkiya February 22, 2016

लेखक - आशुतोष मिश्र, लखनऊ विश्व विद्यालय राजनीती शास्त्र के विभागाध्यक्ष  

जेएनयू से भारत की बर्बादी तक जंग जारी रखने के ऐलान को सुनकर सारा देश सदमे में है। इस जंग को जीतने के लिए हर घर से अफजल निकलने और अफजल के हत्यारों को जिंदा न छोड़ने का संकल्प सार्वजनिक हो गया है। जेएनयू का चालीस साल पुराना छात्र होने के नाते मेरे लिए इसमें कुछ नया नहीं है। कम्युनिस्ट क्रांतिकारिता और इस्लामी कट्टरवादिता की दुस्साहसी दुरभिसंधि की कहानी उससे भी तीस साल पुरानी है जब अधिकारी थीसिस के आधार पर मार्क्‍सवादियों ने मुस्लिम लीग के साथ मिलकर पाकिस्तान बनाने का आंदोलन चलाया था। इसका औपचारिक आरंभ तो उससे भी पच्चीस साल पहले अगस्त 1920 में हुआ जब एमएन रॉय ने डीकॉलोनाइजेशन थीसिस के जरिये भारत के साम्यवादियों को आजादी के आंदोलन से अलग रखने की कोशिश की। आजादी के बाद दोबारा देश के कम्युनिस्ट नेताओं को मॉस्को बुलाकर स्टालिन ने फटकारा। इस वजह से मजबूरी में हमारे कम्युनिस्ट नेताओं ने माना कि भारत देश थोड़ा आजाद हुआ है और यहां थोड़ा जनतंत्र है।

जेएनयू कांड भारतीय मार्क्‍सवादियों की उसी मानसिकता की एक मिसाल मात्र है जिसमें भारत को कभी राष्ट्र ही नहीं माना गया। सौ साल से उन्होंने भारत को अधिक से अधिक राष्ट्रीयताओं का एक संघ ही माना है। इनकी पार्टियों को भारतीय होने में शर्म लगती थी इसलिए वे अपने को भारतीय नहीं, बल्कि भारत की कम्युनिस्ट पार्टी कहती थीं। साम्यवादियों के मन में भारत के लिए हिकारत का यह भाव बहुत आसानी से हिन्दू धर्म के लिए घृणा के भाव में दिखाई दिया। भारतीय राष्ट्र और हिन्दू धर्म को शोषक शक्ति मानने की इसी साम्यवादी सैद्धांतिक समझ ने कम्युनिस्टों की निगाह में हर भारत-विरोधी, हंिदूू-विरोधी भावना को प्रगतिशील बना दिया। जेएनयू का साबरमती ढाबा साम्यवादियों की इस सौ साल की यात्र का एक पड़ाव भर है। 1पिछले चालीस सालों में जेएनयू में केवल इतना बदलाव आया है कि पहले कम्युनिस्ट क्रांतिकारिता सीनियर सहयोगी थी, अब मुस्लिम कट्टरपंथ ने उसको अपने अधीन कर लिया है। इस धार्मिक आतंकवाद को साम्यवादियों से एक मार्क्‍सवादी मुखौटा और जेएनयू जैसी वीआइपी जगहों पर जमने का मौका मिल जाता है। साम्यवादियों के कई गुटों को मुस्लिम अलगाववाद से समस्या है, लेकिन कई वजहों से उन्होंने इसे स्वीकार कर लिया है।

शायद इन साम्यवादियों को अंदाज नहीं था कि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के इस जमाने में साबरमती ढाबे जैसे आयोजन छिपाए नहीं जा सकते। भारत के किसी भी साम्यवादी दल को मुस्लिम लीग जैसे सांप्रदायिक संगठनों से समस्या नहीं है, जो भले ही मुस्लिम कट्टरपंथ की राजनीति करते हों लेकिन फिर भी कुछ पर्दादारी करते हों। आखिर साम्यवादियों के शीर्षस्थ नेता नंबूदरीपाद ने ही मुस्लिम लीग से गठबंधन की नींव रखी थी। इसके बावजूद सीपीआइ और सीपीएम को भारत की बर्बादी तक जंग जारी रखने के ऐलान से परेशानी होगी। साफ है कि वे अपने ही बनाए जाल में फंस गए हैं। कन्हैया कुमार का पितृ संगठन सीपीआइ इसकी एक मिसाल है। कम से कम इस साम्यवादी संगठन ने भारतीय राष्ट्रीय बुर्जुवा के कुछ प्रगतिशील पक्षों को स्वीकार किया था। उसे भारतीय होने में असुविधा नहीं थी। सीपीएम और माओवादियों की बात अलग है। सीपीआइ और उसके आनुषंगिकों द्वारा धार्मिक अलगाववाद की स्वीकृति बताती है कि साम्यवादियों का सारा संसार ही देश से अलग हो चुका है।



इस पतन की पराकाष्ठा की एक मिसाल और है। जेएनयू में इस संगठन के एक पुराने छात्र नेता और अब शिक्षक नेता को पाकिस्तानी आइएसआइ के आतिथ्य में अमेरिका जाने में भी कोई संकोच नहीं हुआ। अमेरिका में आइएसआइ एजेंट गुलाम नबी फई की गिरफ्तारी से इसका पर्दाफाश हुआ। 1जेएनयू कांड से सबसे बड़ा सवाल यह सामने आया है कि आखिर किन वजहों से हंिदूुस्तान के लगभग सभी कम्युनिस्ट संगठन मुस्लिम अलगाववाद के ही नहीं, बल्कि आतंकवाद तक के इतने सक्रिय समर्थक बन गए। इसकी पहली वजह यह है कि 1980 के दशक में चीन के पूंजीवादी बनने और 1990 में सोवियत साम्यवाद के समापन के बाद कम्युनिस्ट पार्टियों के संसाधन और शक्ति का संप्रभु स्नोत सूख गया। आधी दुनिया से साम्यवाद साफ हो गया। इसी सहारे से अब तक कम्युनिस्ट पार्टियों का भारतीय राजनीति पर असर बना हुआ था। एक समय में सीपीआइ और सीपीएम को क्रमश: कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंदिरा और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ मोरारजी कहा जाता था।

कुमारमंगलम थीसिस लेकर कांग्रेस में घुसे कम्युनिस्ट पहले से ही वैभव-विलासिता के आदी हो चुके थे। सीपीआइ को सरकारी ट्रेड यूनियन से थोड़ी ऑक्सीजन मिली। इन संगठनों को सबसे बड़ा लाभ उन भीमकाय शासकीय शैक्षिक-बौद्धिक-सांस्कृतिक संगठनों से मिला जिन्हें इंदिरा गांधी के समय से ही इन साम्यवादियों को सौंप दिया गया था। इंदिरा गांधी ने इसी पैकेज में जेएनयू को साम्यवादियों को गिफ्ट किया था। जेएनयू के एक विशेष प्रावधान का दुरुपयोग कर के भारी संख्या में अर्हता न रखने वाले कामरेडों की नियुक्ति कर दी गई। इस गिफ्ट के बदले उपकृत हुए ज्यादातर साम्यवादी बुद्धिजीवी सरकारी दरबारी बन गए। इस सरकारी सुविधावादिता की वजह से दोनों बड़े साम्यवादी दल समाप्त होते गए। 1यह संयोग था कि साम्यवादियों के पराभव के समय ही पश्चिमी साम्राज्यवादी देश एनजीओ का तंत्र खड़ा कर रहे थे। नाटो देशों ने इस एनजीओ तंत्र के सहारे तीसरी दुनिया पर नकेल कसने की योजना बना रखी थी। भारत में एनजीओ के इस खतरनाक खेल को सबसे पहले सीपीएम ने समझा। इसके बावजूद सुख-सुविधा को सुरक्षित करने के लिए कम्युनिस्टों की एक बड़ी फौज इस एनजीओ तंत्र में शामिल हो गई।

कम्युनिस्टों का अमेरिकी साम्राज्यवाद से रिश्ता पक्का हो गया। एक शीर्ष कम्युनिस्ट नेता ने अमेरिका से मोदी को वीजा न देने का निवेदन किया। कम्युनिस्टों और पश्चिमी साम्राज्यवादी एनजीओ के इस महामिलन से माओवाद का जन्म हुआ। पश्चिमी साम्राज्यवादी संरक्षण की वजह से माओवादी युवा संगठनों ने जेएनयू कांड में भाग ही नहीं लिया, बल्कि इसका पूरा नेतृत्व किया। माओवादियों ने स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की हत्या करके बता दिया है कि उन्हें ईसाई मिशनरियों के लिए स्वामी की हत्या करने और जेएनयू में मुस्लिम आतंकवाद के लिए भारत तेरे टुकड़े होंगे का रणघोष करने में कोई परेशानी नहीं है। इस मामले में तिरुपति से पशुपति का माओवादी संकल्प बहुत कल्पनिक नहीं लगता है। आखिर नेपाल में भी माओवादियों ने ईसाई धर्मातरण तथा मुस्लिम उग्रवाद को पूरा प्रोत्साहन दिया है। यह भी संयोग नहीं है कि नेपाल के शीर्ष माओवादी नेता और दो भारतीय मध्यस्थ जेएनयू के ही हैं। यह सिर्फ संयोग नहीं है कि तमाम विखंडनवादी विध्वंसक गतिविधियों के सूत्र जेएनयू से जुड़े हुए दिखते हैं।

सोमवार, 15 फ़रवरी 2016

कांग्रेस अध्यक्षा श्रीमती सोनिया गाँधी और उपाध्यक्ष राहुल गाँधी देश से मांफी मांगे - अमित शाह



क्या यही है कांग्रेस की राष्ट्रभक्ति की नई परिभाषा ? - अमित शाह , राष्ट्रिय अध्यक्ष भाजपा

केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार की सफलता से निराशा और हताश कांग्रेस गहरे अवसाद से ग्रस्त है। पार्टी और उसके नेता यह समझ नहीं पा रहे हैं कि इस अवसाद की अवस्था में वो देश के समक्ष कैसे एक जिम्मेदार राजनीतिक दल की भूमिका निभायें।

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी तो इस हताशा में देश विरोधी और देश हित का अंतर तक नहीं समझ पा रहे हैं। जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू ) में जो कुछ भी हुआ उसे कहीं से भी देश हित के दायरे में रखकर नहीं देखा जा सकता है। देश के एक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय में देश विरोधी नारे लगें और आतंकवादियों की खुली हिमायत हो, इसे कोई भी नागरिक स्वीकार नहीं कर सकता। लेकिन कांग्रेस उपाध्यक्ष और उनकी पार्टी के अन्य नेताओं ने जेएनयू जाकर जो बयान दिए हैं उसने एक बार फिर साबित कर दिया है कि उनकी सोच में राष्ट्रहित जैसी भावना का कोई स्थान नहीं है।

जेएनयू में वामपंथी विचारधारा से प्रेरित कुछ मुट्ठीभर छात्रों ने निम्नलिखित राष्ट्रविरोधी नारे लगाए:

“पाकिस्तान जिंदाबाद”
“गो इंडिया गो बैक”
“भारत की बरबादी तक जंग रहेगी जारी”
“कश्मीर की आजादी तक जंग रहेगी जारी”
“अफ़ज़ल हम शर्मिन्दा है तेरे कातिल ज़िंदा हैं”
“तुम कितने अफजल मरोगे, हर घर से अफ़ज़ल निकलेगा”
“अफ़ज़ल तेरे खून से इन्कलाब आयेगा”
इन छात्रों को सही ठहराकर राहुल गांधी किस लोकतांत्रिक व्यवस्था की वकालत कर रहे हैं? क्या राहुल गांधी के लिए राष्ट्रभक्ति की परिभाषा यही है? देशद्रोह को छात्र क्रान्ति और देशद्रोह के खिलाफ कार्यवाही को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर कुठाराघात का नाम देकर उन्होंने राष्ट्र की अखण्डता के प्रति संवेदनहीनता का परिचय दिया है। मैं उनसे पूंछना चाहता हूँ कि इन नारों का समर्थन करके क्या उन्होंने देश की अलगाववादी शक्तियों से हाथ मिला लिया है ? क्या वह स्वतंत्रता की अभिवक्ति की आड़ में देश में अलगाववादियों को छूट देकर देश का एक और बंटवारा करवाना चाहते हैं?

देश की राजधानी में स्थित एक अग्रणी विश्वविद्यालय के परिसर को आतंकवाद और अलगाववाद को बढ़ावा देने का केंद्र बना कर इस शिक्षा के केंद्र को बदनाम करने की साजिश की गयी। मैं राहुल गांधी से पूंछना चाहता हूँ कि क्या केंद्र सरकार का हाथ पर हाथ धरे बैठे रहना राष्ट्रहित में होता? क्या आप ऐसे राष्ट्रविरोधियों के समर्थन में धरना देकर देशद्रोही शक्तियों को बढ़ावा नहीं दे रहे हैं?

जेएनयू में राहुल गांधी ने वर्त्तमान भारत की तुलना हिटलर के जर्मनी से कर डाली। इतनी ओछी बात करने से पहले वह भूल जाते है कि स्वतंत्र भारत की हिटलर के जर्मनी से सबसे निकट परिकल्पना सिर्फ श्रीमती इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए 1975 के आपातकाल से की जा सकती है।

स्वतंत्रता की अभिव्यक्ति तो दूर, आपातकाल में विरोधियों को निर्ममता के साथ जेल में ठूंस दिया गया था। वामदलों के नेता जिनकी वह आज हिमायत करते घूम रहे है, वह भी इस बर्बरता की शिकार हुए थे। हिटलरवाद सिर्फ कांग्रेस के डी.एन.ए. में है, भाजपा को राष्ट्रवाद और प्रजातंत्र के मूल्यों की शिक्षा कांग्रेस पार्टी से लेने की जरूरत नहीं है। हमारे राजनैतिक मूल्य भारतवर्ष की समृद्ध संस्कृति से प्रेरित है और भारत का संविधान हमारे लिए शासन की निर्देशिका है। मैं राहुल गांधी से जानना चाहता हूँ कि 1975 का आपातकाल क्या उनकी पार्टी के प्रजातांत्रिक मूल्यों को परिभाषित करता है और क्या वह श्रीमती इंदिरा गांधी की मानसिकता को हिटलरी मानसिकता नहीं मानते?

देश की सीमाओं की रक्षा और कश्मीर में अलगाववाद को नियंत्रित करते हुए हमारे असंख्य सैनिक वीरगति को प्राप्त हो चुके हैं। 2001 में देश की संसद में हुए आतंकवादी हमले में दिल्ली पुलिस के 6 जवान, 2 संसद सुरक्षाकर्मी और और एक माली शहीद हुए थे। इसी आतंकी हमले के दोषी अफ़ज़ल गुरू का महिमा मंडल करने वालों और कश्मीर में अलगाववाद के नारे लगाने वालों को समर्थन देकर राहुल गांधी अपनी किस राष्ट्रभक्ति का परिचय दे रहे हैं? मैं उनसे पूंछना चाहता हूँ कि अभी हाल में सियाचिन में देश की सीमा के प्रहरी 9 सैनिकों जिनमे लांस नायक हनुमंथप्पा एक थे, के बलिदान को क्या वह इस तरह की श्रद्धांजली देंगें?

भाजपा के केंद्र की सत्ता में आने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से कश्मीर में भी देश विरोधी भावनाओं को नियंत्रित करने में सफलता मिल रही है। लेकिन प्रमुख विपक्षी दल होने के बावजूद कांग्रेस इस काम में सरकार को सहयोग करने के बजाए जेएनयू में घटित शर्मनाक घटना को हवा दे रही है। प्रगतिशीलता के नाम पर वामपंथी विचारधारा का राष्ट्रविरोधी नारों को समर्थन किसी भी रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

मैं कांग्रेस अध्यक्षा श्रीमती सोनिया गाँधी और उपाध्यक्ष राहुल गाँधी से ऊपर उल्लेखित सवालों का 125 करोड़ देशवासियों की ओर से जवाब मांगता हूँ और यह भी मांग करता हूँ कि राहुल गाँधी अपने इस कृत्य के लिए देश से मांफी मांगे।

देशद्रोही गतिविधियों को सहन नहीं किया जा सकता : अमित शाह





भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह द्वारा दिए गए प्रेस टिप्पणी के मुख्य अंश
 देश की जमीन पर या इसके किसी भी हिस्से पर इस तरह की देशद्रोही गतिविधियों को सहन नहीं किया जा सकता: अमित शाह
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देश की जनता यह जानना चाहती है कि आखिर अभिव्यक्ति की आजादी की कांग्रेस की व्याख्या क्या है: अमित शाह
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देश की जनता यह जानना चाहती है कि कांग्रेस देश के सर्वोच्च अदालत के फैसले को मानती है या नहीं: अमित शाह
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भारतीय जनता पार्टी देश की रक्षा करने वाले शहीद जवानों और उनके परिवारों के साथ खड़ी है और हर राष्ट्रभक्त व्यक्ति एवं संस्थाओं को देश की सुरक्षा करनेवाले जवानों के संवेदनाओं की चिंता करना चाहिए: अमित शाह
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अगर कांग्रेस उपाध्यक्ष, अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर इन राष्ट्रविरोधी नारों कासमर्थन कर रहे हैं तो इससे बड़ा देशद्रोह का सबूत और क्या हो सकता है: अमित शाह
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आज भी कांग्रेस के प्रवक्ता आतंकी अफज़ल गुरु को अफज़ल गुरु 'जी' कहकर सम्बोधित कर रहे हैं: अमित शाह
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क्या कांग्रेस पार्टी राहुल गांधी द्वारा जेएनयू परिसर में देशद्रोही नारे लगाने वालों के समर्थन में दिए गए बयानों का समर्थन करती है: अमित शाह
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कांग्रेस अध्यक्षा श्रीमती सोनिया गांधी और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को देशवासियों से अविलंब माफी मांगनी चाहिए: अमित शाह
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कुछ दिन पहले जवाहरलाल यूनिवर्सिटी (जेएनयू) परिसर में जिस तरह से राष्ट्रविरोधी नारे लगाए गए, भारतीय जनता पार्टी उसकी कड़ी निंदा करती है और इस प्रकार की गतिविधियों पर चिंता भी व्यक्त करती है। भारतीय जनता पार्टी का मानना है कि देश की जमीन पर या इसके किसी भी हिस्से पर इस तरह की देशद्रोही गतिविधियों को सहन नहीं किया जा सकता। कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री राहुल गांधी ने जेएनयू जाकर जिस तरह से इस घटना का समर्थन किया है, वह सबसे बड़ा चिंता का विषय है। भारतीय जनता पार्टी देश की रक्षा करने वाले शहीद जवानों और उनके परिवारों के साथ खड़ी है और हमारा मानना है कि हर राष्ट्रभक्त व्यक्ति एवं संस्थाओं को देश की सीमा की सुरक्षा करनेवाले जवानों के संवेदनाओं की चिंता करना चाहिए।

लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद देश के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा संसद पर हमला करनेवाले आतंकी अफज़ल गुरु को फांसी की सजा दी गई। उसके बाद आतंकी अफज़ल गुरु के समर्थन में देेश को तोड़ने के लिए 'पाकिस्तान जिंदाबाद', 'भारत की बर्बादी तक जंग रहेगी - जंग रहेगी', 'अफज़ल हम शर्मिन्दा हैं तेरे कातिल ज़िंदा हैं', 'हर घर में अफज़ल होंगे - भारत तेरे टुकड़े होंगे', जैसे जो नारे लगाए गए, अगर कांग्रेस उपाध्यक्ष, अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर इसका समर्थन कर रहे हैं तो मैं कांग्रेस पार्टी से पूछना चाहता हूँ कि इससे बड़ा देशद्रोह का सबूत और क्या हो सकता है। इतना होने के बावजूद, न तो कांग्रेस अध्यक्षा, न कांग्रेस उपाध्यक्ष और न ही कांग्रेस का कोई प्रवक्ता इस घटना के लिए माफी मांगने को तैयार है। आज भी कांग्रेस के प्रवक्ता आतंकी अफज़ल गुरु को अफज़ल गुरु 'जी' कहकर सम्बोधित कर रहे हैं।

मैं कांग्रेस पार्टी से पूछना चाहता हूँ कि क्या वह राहुल गांधी द्वारा जेएनयू परिसर में देशद्रोही नारे लगाने वालों के समर्थन में दिए गए बयानों का समर्थन करती है? कांग्रेस पार्टी को इसपर जवाब देना चाहिए। मैं श्रीमान राहुल गांधी से यह भी पूछना चाहता हूँ कि क्या आपको देशद्रोही गतिविधियों का समर्थन करते वक्त देश की संसद की सुरक्षा करनेवाले शहीद जवानों और उनके परिवारों की संवेदनाओं का ख़याल नहीं आया? आखिर कब तक वोट बैंक की राजनीति की खातिर आप देश के जवानों की शहादत का मजाक उड़ाते रहेंगें? क्या आपको इस बात की चिंता है कि आप अभिव्यक्ति की आजादी की आड़ में देशद्रोही प्रवृत्तियों को प्रश्रय देने से भी नहीं चूक रहे? इस पूरे मामले पर कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस अध्यक्षा श्रीमती सोनिया गांधी को अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।

देश की जनता यह जानना चाहती है कि आखिर अभिव्यक्ति की आजादी की कांग्रेस की व्याख्या क्या है। देश की जनता यह जानना चाहती है कि अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर छात्रों को अपनी बात कहने देने का मतलब हिन्दुस्तान को टुकड़े करना है क्या? देश की जनता यह जानना चाहती है कि अभिव्यक्ति की आजादी का मतलब आतंकी अफज़ल गुरु का समर्थन करना है क्या? देश की जनता यह जानना चाहती है कि कांग्रेस देश के सर्वोच्च अदालत के फैसले को मानती है या नहीं? भारतीय जनता पार्टी यह मांग करती है कि कांग्रेस पार्टी को इन सब बातों का स्पष्टीकरण देना चाहिए। यदि कांग्रेस के दिल में शहीदों के परिवारों के प्रति थोड़ी सी भी संवेदना है और उसे यदि लगता है कि देशद्रोहियों का समर्थन नहीं करना चाहिए तो कांग्रेस अध्यक्षा श्रीमती सोनिया गांधी और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को देशवासियों से अविलंब माफी मांगनी चाहिए।

(इंजी. अरुण कुमार जैन)
कार्यालय सचिव

सनातन धर्म की रक्षा कर रही मोदी सरकार : अमित शाह

सनातन धर्म की रक्षा कर रही मोदी सरकार : अमित शाह
Mon, 08 Feb 2016


लखनऊ। मथुरा में धर्म के मंच से भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने सरकार की उपलब्धियों में धर्म और अध्यात्म को भी जोड़ दिया। सोमवार को वृंदावन में प्रियाकांतजू मंदिर के महोत्सव में पहुंचे शाह ने कहा कि मोदी सरकार दुनिया भर में भारत के वैभव का तो परचम फहरा ही रही है, यहां के अध्यात्म का प्रभावशाली संदेश देकर सनातन धर्म की रक्षा भी कर रही है।
शाह ने कहा कि गुजरात और वृंदावन के बीच अटूट नाता है। यह रिश्ता भगवान श्रीकृष्ण के जरिए बना था। वृंदावन के प्रति यह दुनिया भर के लोगों की आस्था ही है कि श्रीकृष्ण के जन्मदिवस पर बगैर किसी निमंत्रण के ही दौड़े चले आते हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया में जब भौतिकवादी रास्ते रुक जाते हैं, तब भगवान श्रीकृष्ण के गीता में दिए संदेश ही रास्ता दिखाते हैं।
भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि जनता के समर्थन से केंद्र में ऐसी सरकार आ गई है, जो दुनिया में अध्यात्म का संदेश भी दे रही है। संयुक्त राष्ट्र संघ की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय योग का प्रभावशाली वर्णन किया, जिससे दुनिया भर के 170 देश इसके मुरीद हो गए। संयुक्त राष्ट्र संघ को भी योग दिवस घोषित करना पड़ा। हरियाणा के राज्यपाल कप्तान ङ्क्षसह सोलंकी ने कहा कि श्रीकृष्ण की लीलास्थली वृंदावन संत-महंतों के लिए दुनियाभर में सबसे बड़ा आस्था का केंद्र है।
समारोह में केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह  तोमर, सांसद हेमामालिनी, सांसद मीनाक्षी लेखी आदि भी उपस्थित रहीं। अतिथियों का स्वागत भागवताचार्य देवकीनंदन ठाकुरजी ने किया। इससे पूर्व विधि-विधान से श्रीप्रियाकांतजू मंदिर का उद्घाटन किया गया। महोत्सव 17 फरवरी तक चलेगा।

"भारत में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के महत्वपूर्ण योगदान" : ज्ञानेंद्र नाथ बरतरिया





"भारत में आरएसएस के 10  योगदान"
( ज्ञानेंद्र नाथ बरतरिया वरिष्ठ पत्रकार )

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ 90 साल का हो चुका है. 1925 में दशहरे के दिन डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की थी.सांप्रदायिक हिंदूवादी, फ़ासीवादी और इसी तरह के अन्य शब्दों से पुकारे जाने वाले संगठन के तौर पर आलोचना सहते और सुनते हुए भी संघ को कम से कम 7-8 दशक हो चुके हैं. दुनिया में शायद ही किसी संगठन की इतनी आलोचना की गई होगी. वह भी बिना किसी आधार के. संघ के ख़िलाफ़ लगा हर आरोप आख़िर में पूरी तरह कपोल-कल्पना और झूठ साबित हुआ है.कोई शक नहीं कि आज भी कई लोग संघ को इसी नेहरूवादी दृष्टि से देखते हैं.हालांकि ख़ुद नेहरू को जीते-जी अपना दृष्टि-दोष ठीक करने का एक दुखद अवसर तब मिल गया था,जब 1962 में देश पर चीन का आक्रमण हुआ था.तब देश के बाहर पंचशील और लोकतंत्र वग़ैरह आदर्शों के मसीहा जवाहरलाल न ख़ुद को संभाल पारहे थे, न देश की सीमाओं को. लेकिन संघ अपना काम कर रहा था. संघ के कुछ
उल्लेखनीय कार्य
1) कश्मीर सीमा पर निगरानी, विभाजन पीड़ितों को आश्रय संघ के स्वयंसेवकों ने अक्टूबर 1947 से ही कश्मीर सीमा पर पाकिस्तानी सेना की गतिविधियों पर बगैर किसी प्रशिक्षण के लगातार नज़र रखी. यह काम न नेहरू-माउंटबेटन सरकार कर रही थी, न हरिसिंह सरकार. उसी समय, जब पाकिस्तानी सेना की टुकड़ियों ने कश्मीर की सीमा लांघने की कोशिश की, तो सैनिकों के साथ कई स्वयंसेवकों ने भी अपनी मातृभूमि की रक्षा करते हुए लड़ाई में प्राण दिए थे. विभाजन के दंगे भड़कने पर, जब नेहरू सरकार पूरी तरह हैरान-परेशान थी, संघ ने पाकिस्तान से जान बचाकर आए शरणार्थियों के लिए 3000 से ज़्यादा राहत शिविर लगाए थे.
2) 1962 का युद्ध सेना की मदद के लिए देश भर से संघ के स्वयंसेवक जिस उत्साह से सीमा पर पहुंचे, उसे पूरे देश नेदेखा और सराहा. स्वयंसेवकों ने सरकारी कार्यों में और विशेष रूप से जवानों की मदद में पूरी ताकत लगा दी – सैनिक आवाजाही मार्गों की कसी,प्रशासन की मदद, रसद और आपूर्ति में मदद, और यहां तक कि शहीदों के परिवारों की भी चिंता. जवाहर लाल नेहरू को 1963 में 26 जनवरी की परेड में संघ को शामिल होने का निमंत्रण देना पड़ा.परेड करने वालों को आज भी महीनों तैयारी करनी होती है, लेकिन मात्र दो दिन पहले मिले निमंत्रण पर 3500 स्वयंसेवक गणवेश में उपस्थित हो गए.निमंत्रण दिए जाने की आलोचना होने पर नेहरू ने कहा- “यह दर्शाने के लिए कि केवल लाठी के बल पर भी सफलतापूर्वक बम और चीनी सशस्त्र बलों से लड़ा सकता है, विशेष रूप से 1963 के गणतंत्रदिवस परेड में भाग लेने के लिए आरएसएस को आकस्मिक आमंत्रित किया गया.”
3) कश्मीर का विलय
कश्मीर के महाराजा हरि सिंह विलय का फ़ैसला नहीं कर पा रहे थे और उधर कबाइलियों के भेस में पाकिस्तानी सेना सीमा में घुसती जा रही थी, तब नेहरू सरकार तो - हम क्या करें वाली मुद्रा में - मुंह बिचकाए बैठी थी. सरदार पटेल ने गुरु गोलवलकर से मदद मांगी.गुरुजी श्रीनगर पहुंचे, महाराजा से मिले. इसके बाद महाराजा ने कश्मीर के भारत में विलय पत्र का प्रस्ताव दिल्ली भेज दिया. क्या बाद में महाराजा हरिसिंह के प्रति देखी गई नेहरू की नफ़रत की एक जड़ यहां थी ?
4) 1965 के युद्ध में क़ानून-व्यवस्था संभाली पाकिस्तान से युद्ध के समय लालबहादुर शास्त्री को भी संघ याद आया था. शास्त्री जी ने क़ानून-व्यवस्था की स्थिति संभालने में मदद देने और दिल्ली का यातायात नियंत्रण अपने हाथ में लेने का आग्रह किया, ताकि इन कार्यों से मुक्त किए गए पुलिसकर्मियों को सेना की मदद में लगाया जा सके. घायल जवानों के लिए सबसे पहले रक्तदान करने वाले भी संघ के स्वयंसेवक थे. युद्ध के दौरान कश्मीर की हवाई पट्टियों से बर्फ़ हटाने का काम संघ के स्वयंसेवकों ने किया था.
5) गोवा का विलय :
दादरा, नगर हवेली और गोवा के भारत विलय में संघ की निर्णायक भूमिका थी. 21 जुलाई 1954 को दादरा को पुर्तगालियों से मुक्त कराया गया,28 जुलाई को नरोली और फिपारिया मुक्त कराए गए और फिर राजधानी सिलवासा मुक्त कराई गई. संघ के स्वयंसेवकों ने 2 अगस्त 1954 की सुबह पुतर्गाल का झंडा उतारकर भारत का तिरंगा फहराया, पूरा दादरा नगर हवेली पुर्तगालियों के कब्जे से मुक्त करा कर भारत सरकार को सौंप दिया. संघ के स्वयंसेवक 1955 से गोवा मुक्ति संग्राम में प्रभावी रूप से शामिल हो चुके थे. गोवा में सशस्त्र हस्तक्षेप करने से नेहरू के इनकार करने पर जगन्नाथ राव जोशी के नेतृत्व में संघ के कार्यकर्ताओं ने गोवा पहुंच कर आंदोलन शुरू किया,जिसका परिणाम जगन्नाथ राव जोशी सहित संघ के कार्यकर्ताओं को दस वर्ष की सजा सुनाए जाने में निकला. हालत बिगड़ने पर अंततः भारत को सैनिक हस्तक्षेप करना पड़ा और 1961 में गोवा आज़ाद हुआ.
6) आपातकाल
1975 से 1977 के बीच आपातकाल के ख़िलाफ़ संघर्ष और जनता पार्टी के गठन तक में संघ की भूमिका की याद अब भी कई लोगों के लिए ताज़ा है.सत्याग्रह में हजारों स्वयंसेवकों की गिरफ्तारी के बाद संघ के कार्यकर्ताओं ने भूमिगत रह कर आंदोलन चलाना शुरु किया. आपातकाल के खिलाफ पोस्टर सड़कों पर चिपकाना, जनता को सूचनाएं देना और जेलों में बंद विभिन्न राजनीतिक र्यकर्ताओं –नेताओं के बीच संवाद सूत्र का काम संघ कार्यकर्ताओं ने संभाला. जब लगभग सारे ही नेता जेलों में बंद थे, तब सारे दलों का विलय करा कर जनता पार्टी का गठन करवाने की कोशिशें संघ की ही मदद से चल सकी थीं.
7) भारतीय मज़दूर संघ
1955 में बना भारतीय मज़दूर संघ शायद विश्व का पहला ऐसा मज़दूर आंदोलन था, जो विध्वंस के बजाए निर्माण की धारणा पर चलता था. कारखानों में विश्वकर्मा जयंती का चलन भारतीय मज़दूर संघ ने ही शुरू किया था. आज यह विश्व का सबसे बड़ा, शांतिपूर्ण और रचनात्मक मज़दूर संगठन है.
8) ज़मींदारी प्रथा का ख़ात्मा जहां बड़ी संख्या में ज़मींदार थे उस राजस्थान में ख़ुद सीपीएम को यह कहना पड़ा था कि भैरों सिंह शेखावत राजस्थान में प्रगतिशील शक्तियों के नेता हैं. संघ के स्वयंसेवक शेखावत बाद में भारत के उपराष्ट्रपति भी बने. भारतीय विद्यार्थी परिषद, शिक्षा भारती, एकल विद्यालय, स्वदेशी जागरण मंच, विद्या भारती,वनवासी कल्याण आश्रम, मुस्लिम राष्ट्रीय मंच की स्थापना. विद्या भारती आज 20 हजार से ज्यादा स्कूल चलाता है, लगभग दो दर्जन शिक्षक प्रशिक्षण कॉलेज, डेढ़ दर्जन कॉलेज, 10 से ज्यादा रोजगार एवं प्रशिक्षण संस्थाएं चलाता है. केन्द्र और राज्य सरकारों से मान्यता प्राप्त इन सरस्वती शिशु मंदिरों में लगभग 30 लाख छात्र- छात्राएं पढ़ते हैं और 1 लाख से अधिक शिक्षक पढ़ाते हैं. संख्या बल से भी बड़ी बात है कि ये संस्थाएं भारतीय संस्कारों को शिक्षा के साथ जोड़े रखती हैं. अकेला सेवा भारती देश भर के दूरदराज़ के और दुर्गम इलाक़ों में सेवा के एक लाख से ज़्यादा काम कर रहा है. लगभग 35 हज़ार एकल विद्यालयों में 10 लाख से ज़्यादा छात्र अपना जीवन संवार रहे हैं. उदाहरण के तौर पर सेवा भारती ने जम्मू कश्मीर से आतंकवाद से अनाथ हुए 57 बच्चों को गोद लिया है जिनमें 38 मुस्लिम और 19 हिंदू बच्चे हैं.
9) सेवा कार्य
1971 में ओडिशा में आए भयंकर चंक्रवात से लेकर भोपाल की गैस त्रासदी तक, 1984 में हुए सिख विरोधी दंगों से लेकर गुजरात के भूकंप, सुनामी की प्रलय, उत्तराखंड की बाढ़ और कारगिल युद्ध के घायलों की सेवा तक - संघ ने राहत और बचाव का काम हमेशा सबसे आगे होकर किया है. भारत में ही नहीं, नेपाल, श्रीलंका और सुमात्रा तक में...!!!

10) पूर्णतः छूआछूत रहित - संघ एक इस तरह का संगठन है जहां वास्तविक तौर पर अश्पृश्यता  छूआछूत नही हे। संघ में सभी एक दूसरे को भाई साहब कह कर सम्बोधन करते हैं वहां जाती पूछी ही नहीं जाती। एक साथ बैठ कर भोजन करना , एक साथ सोना , खेलना , उठना रहना होता हे। सम्पूर्ण समाज को एकात्म बनानें के लक्ष्य से कार्यरत यह संगठन सामाजिक समरसता के मामले में अद्वितीय है। सर्व श्रैष्ठ है।
( मुझे ज्ञानेंद्र नाथ बरतरिया वरिष्ठ पत्रकार के लेख में 10 वां नहीं मिला , संभबतः टाइपिंग मिस्टेक के कारण रह गया होगा , इस लिए 10 वां मैनें मेरे ज्ञान के आधार पर जोड़ा है । अरविन्द सिसोदिया 9414180141    / 95095 5 9131 )
पर दुख इस बात का है कि ऐसे देशभक्त संगठन को अपने ही नासमझ लोग वोट के स्वार्थ मे गाली देके जाने अनजानेे मे खुद की कब्र खोदके समाज को डुबोने का काम करते है। देश के बाहरी सीमा की रक्शा सेना करती है पर देश के अन्दर सुरक्षा व सन्तुलन का काम इनसे होता है।जिस दिन ये संघ खतम हो गया तो यहां भी मालदा,कश्मीर, सिरीया व इराक की तरह बेगुनाहों को बेघर होते समय नही लगेगा। जाती पंथ आैर वोट बेंक का बिखराव हमारा विनाश का कारण बनेगा।