सोमवार, 14 मार्च 2016

देश में 58477 स्थानों पर संघ की शाखाएं लगती हैं

नागौर में हुई संघ की अ.भा.प्रतिनिधि सभा बैठक में
अनुकूल परिस्थिति का लाभ उठाने का आह्वान

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वीर भूमि राजस्थान के इतिहास में 36 राजवंशों का उल्लेख मिलता है। इनमें मेवाड़ का सीसोदिया वंश तो विश्व-विख्यात है, किन्तु साहस, शौर्य और पराक्रम में चौहानों का भी कोई सानी नहीं रहा। दिल्ली और अजमेर के सम्राट पृथ्वीराज चौहान अपने समय के अग्रणी योद्धा थे। पुराणों में बताया गया है कि ॠषियों ने दैत्यों का सामना करने के लिये एक यज्ञ कुण्ड निर्मित किया। उसमें बारी-बारी से चार योद्धा प्रकट हुए। पहले तीन तो दैत्यों से पराजित हुए। चौथे योद्धा का नाम चौहान (चाह-मान अर्थात् चार भुजाओं वाला) रखा गया और उसने दैत्यों को पराजित किया। ऐसे महा-पराक्रमी चौहानों की एक शाखा नाडौल में थी। नाडौल में तैनात वीरवर पज्जूनराय ने मोहम्मद गोरी को धूल चटाई थी।

यही नाडौल आज-कल नागौर के नाम से प्रसिद्ध है। इस ऐतिहासिक नगरी में 11,12 तथा 13 मार्च को रा.स्व.संघ की अ.भा.प्रतिनिधि सभा की बैठक हुई। अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा संघ की सर्वोच्च नीति-नियामक इकाई है। तीन साल में एक बार होने वाले चुनावों में चुने गये प्रतिनिधि इसमें आते है। उनके अतिरिक्त देश के सभी प्रांतों व क्षेत्रों की कार्यकारिणी तथा समान विचार वाले संगठनों के प्रमुख राष्ट्रीय पदाधिकारी भी इसमें रहते हैं। संघ की रीति-नीति सम्बन्धी सभी निर्णय तीन दिनों की इस बैठक में होते है। नागौर की इस बैठक में देश के कोने-कोने से आये लगभग बारह सौ कार्यकर्ता सम्मिलित हुये।
11 मार्च को प्रातःकाल इस बैठक की विधिवत् शुरुआत हुई, जिसमें सरकार्यवाह भैयाजी जोशी ने गत एक वर्ष की गतिविधियों का विवरण प्रतिवेदन के रुप में प्रस्तुत किया। इसमें संगठन की एक वर्ष में हुई प्रगति, प्रमुख कार्यक्रम एवं वर्तमान परिस्थितियों का उल्लेख था। प्रारम्भ में गत एक वर्ष में दिवंगत हुए जाने-माने महानुभावों को श्रद्धांजलि दी गई। संघ एवं समान विचार वाले अन्य संगठनों के प्रमुख कार्यकर्ता तथा राजनीति, कला साहित्य आदि से जुड़े दिवंगत महानुभावों का आदर पूर्वक स्मरण किया गया । जयपुर प्रांत के पूर्व संघ-चालक श्री बीरेन्द्र प्रसाद अग्रवाल, भारतीय मजदूर संघ-राजस्थान के संगठन मंत्री रामदौर सिंह तथा विहिप के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष श्री जगन्नाथ गुप्ता को भी भाव-भीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। बाढ़ में अकाल काल-कलवित हुए चेन्नई-वासियों तथा सियाचिन में ग्लेसियर की आपदा का शिकार बने सुरक्षा-बल के जवानों को भी श्रद्धा-सुमन अर्पित किये गये।

सरकार्यवाह भैय्या जी जोशी ने प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए कहा कि पठानकोट स्थित वायु-सेना की छावनी पर हुआ आतंकी हमला चिंताजनक है तथा सीमाओं की सुरक्षा में अधिक सावधानी की आवश्यकता है। माल्दा में दिखे साम्प्रदायिक उन्माद पर भी उन्होंने चिन्ता जताई और राजनैतिक पार्टियों से तुष्टीकरण की नीति त्यागने का आग्रह किया। कतिपय विश्वविद्यालयों में बढ़ती राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों और कुछ राजनैतिक दलों का इनको समर्थन को भैय्याजी ने अनुचित बताया और ऐसे तत्वों पर कड़ी कार्रवाई किये जाने की जरूरत बताई।

महिलाओं के मन्दिर प्रवेश को लेकर उठे विवादों को सरकार्यवाह ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया और ऐसे मामलों का राजनीति-करण न करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि ऐसे मामले आपसी बात-चीत से हल किये जाने चाहिये। इसी प्रकार आरक्षण की माँग के समर्थन में होने वाले हिंसक आन्दोलनों को उन्होंने सामाजिक सौहार्द्र में बाधक बताया। इसी के साथ उन्होंने देश के उज्ज्वल भविष्य की ओर भी संकेत किया। उन्होंने कहा-
“वैश्विक स्तर पर बहुसंख्य देशों द्वारा ‘योग-दिवस’ की स्वीकार्यता भारतीय आध्यात्मिक चिन्तन एवं जीवन शैली की स्वीकार्यता ही प्रकट करती है।” देश में संघ-कार्य के प्रति बढ़ती अनुकूलता का लाभ उठाने का आह्वान भी उन्होंने किया।
तीन दिन की बैठक में शिक्षा, स्वास्थ्य एवं सामाजिक समरसता पर विस्तार से चर्चा हुई तथा तीन प्रस्ताव भी पारित किये गये।
इस बार 1 लाख 37 हजार को प्रशिक्षण
वर्ष 2015 में पूरे देश में 1 लाख 37 हजार 351 स्वयंसेवकों ने विभिन्न प्रशिक्षण वर्गों में संघ की रीति-नीति का शिक्षण प्राप्त किया। इनमें से 1 लाख 12 हजार 520 स्वयंसेवकों ने सात दिनों के प्राथमिक वर्ग में शिक्षण लिया तथा 24 हजार 831 कार्यकर्ताओं ने प्रथम, द्वितीय तथा तृतीय वर्ष का प्रशिक्षण प्राप्त किया। संघ-शिक्षण लेने वाले उक्त कार्यकर्ताओं में केवल 2400 कार्यकर्ता ही 45वर्ष से अधिक की आयु के थे।
देश में अट्ठावन हजार स्थानों पर संघ की शाखा
प्रतिनिधि सभा की बैठक में एकत्रित हुए आँकड़ों के अनुसार इस समय देश के 36867 नगरों, कस्बों एवं ग्रामों में 56859 शाखाएं लग रही हैं। इनके अतिरिक्त लगभग 14 हजार स्थानों पर साप्ताहिक शाखा लगती है तथा आठ हजार ग्रामों में महीनें में एक-दो बार हिन्दुत्व के विचार से प्रभावित लोगों की बैठकें होती हैं। इस प्रकार इस समय देश में 58477 स्थानों पर संघ की शाखाएं लगती हैं।

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