बुधवार, 31 अगस्त 2016

आजाद हिंद फौज का फंड पाक के साथ बांटने पर राजी थे नेहरू



नेताजी की फाइलों से खुलासा : 1953 में आजाद हिंद फौज का फंड 

PAK के साथ बांटने पर राजी हुई थी नेहरू सरकार

dainikbhaskar.com | Aug 31, 2016,
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नई दिल्ली. नेताजी सुभाष चंद्र बोस की डिक्लासिफाइड फाइल्स से खुलासा हुआ है कि भारत ने 1953 में इंडियन नेशनल आर्मी (INA) और इंडियन इंडिपेंडेंस लीग (IIL) का फंड पाकिस्तान के साथ शेयर करने पर सहमति जताई थी। जवाहर लाल नेहरू ने वेस्ट बंगाल के तब के सीएम को लेटर लिखा था, "बातचीत में सहमति बनी है कि फंड को भारत-पाक के बीच 2:1 के रेशो में बांट दिया जाए।" सोमवार को नेताजी से जुड़ी 25 फाइल्स को डिक्लासिफाई किया गया था। नेहरू के लेटर से ही पता चली थी पाक को फंड देने की बात...

- नेताजी के संगठनों (INA और IIL) के फंड्स को पाक को दिए जाने का पता नेहरू के लेटर से चला है।
- नेहरू ने ये लेटर 18 अक्टूबर, 1953 को वेस्ट बंगाल के तब के सीएम बीसी रॉय को लिखा था। इसमें नेहरू ने बंगाल सरकार की ओर से पास किए एक रेजोल्यूशन का जवाब दिया था।
- रेजोल्यूशन के मुताबिक, 'बंगाल सरकार ने नेताजी और उनकी आजाद हिंद सरकार के छोड़े गए फंड्स के बारे में केंद्र सरकार से जांच करने के लिए कहा था।'
नेहरू ने अपने नोट में क्या लिखा था?
- नोट के मुताबिक, "सुदूर पूर्व में अंतिम वॉर खत्म होने के बाद गोल्ड, ज्वेलरी और कुछ अन्य चीजें अफसरों ने सीज की थीं। ये चीजें साउथ ईस्ट एशियन कंट्रीज में INA और IIL से जुड़ी थीं।"
- "सिंगापुर इसका कस्टोडियन ऑफ प्रॉपर्टी (संपत्ति का संरक्षक) था। 1950 में सिंगापुर सरकार ने इस संपत्ति की वैल्यू आंकी। संपत्ति की कीमत 1 लाख 47 हजार 163 स्ट्रेट डॉलर पाई गई।" स्ट्रेट डॉलर ब्रिटेन के मलक्का स्ट्रेट पर किए सेटलमेंट के लिहाज से करंसी थी।
- नोट में ये भी कहा गया, "रिवैल्यूलेशन के मुताबिक संपत्ति की कीमत का सही आकलन करना मुश्किल है।"
- "पाकिस्तान के साथ लंबी बातचीत चली। अंत में सहमति बनी कि संपत्ति को भारत-पाकिस्तान के बीच 2:1 के रेशो में बांट दिया जाए।"
- हालांकि, फंड रिलीज किए जाने का मामला संपत्ति के बतौर कस्टोडियन माने जाने वाले सिंगापुर की लेजिस्लेटिव काउंसिल में पेश किया गया। इसके मुताबिक, रकम को किसी भी शख्स या बॉडी को देने का राइट नहीं था।
कल्चर मिनिस्ट्री ने डिक्लासिफाई कीं फाइल्स
- 30 अगस्त को कल्चर सेक्रेटरी एनके सिन्हा ने 25 फाइलों के 7th बैच को जारी किया। ये फाइलें 1951 से 2006 के बीच की हैं।
- नरेंद्र मोदी ने इसी साल 23 जनवरी को नेताजी की 119th जयंती के मौके पर पहली बार 100 फाइल्स को डिक्लासिफाई किया था।
- इसके बाद मार्च में 50 फाइलें जारी की गईं और बाद के महीनों में 25-25 फाइलें जारी हुईं।
क्या है नेताजी का रहस्य?
- 70 साल पहले नेताजी का गायब होना आज भी रहस्य बना हुआ है।
- इसकी जांच के लिए दो कमीशन बनाए गए थे। दोनों ने अपनी रिपोर्ट में ताइपे (ताइवान) में 18 अगस्त, 1945 को एक प्लेन क्रैश में नेताजी के मारे जाने की बात कही थी।
- इसके बाद मामले की जांच के लिए जस्टिस एमके मुखर्जी की अगुआई में तीसरा कमीशन बनाया गया।
- मुखर्जी आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा, 'प्लेन क्रैश में नेताजी बच गए थे।'

30 अगस्त को कल्चर सेक्रेटरी ने नेताजी से जुड़ी 25 फाइलें डिक्लासिफाई की।

जवाहर लाल नेहरू ने नेताजी की संपत्ति के सिलसिले में वेस्ट बंगाल के तब के सीएम बीसी रॉय को लेटर लिखकर जानकारियां दी थीं। (फाइल)

हिन्दुओं को सामर्थ्य सम्पन्न बनना चाहिए - परमपूज्य डॉ. मोहन भागवत जी




हिन्दुत्व की विचारधारा किसी के विरोध में नहीं है – डॉ. मोहन भागवत जी


लखनऊ (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के परमपूज्य सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि हिन्दुत्व की विचारधारा किसी के विरोध में नहीं है. किसी का द्वेष और विरोध हिन्दुत्व नहीं है, बल्कि सबके प्रति प्रेम, सबके प्रति विश्वास और आत्मीयता यही हिन्दुत्व है. हम देश के लिए काम करते हैं. हिन्दुत्व कोई कर्मकांड भी नहीं है. यह अध्यात्म व सत्य पर आधारित दर्शन है. उन्होंने कहा कि भारत की एकता अखण्डता को अक्षुण्ण रखते हुए भारत को परम वैभव पर पहुँचाने के अलावा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को कुछ नहीं करना है. हम दुनिया में भारत माता की जय-जयकार कराने के लिए काम कर रहे हैं. लेकिन भारत माता की पूजा में विचारों की अपवित्रता नहीं आनी चाहिए. सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी रविवार 28 अगस्त को निरालानगर स्थित सरस्वती कुंज माधव सभागार में लखनऊ विभाग के कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे.

सरसंघचालक जी ने कहा कि केवल दुर्बल रहना भी हिन्दुत्व नहीं है. हिन्दुओं को सामर्थ्य सम्पन्न बनना चाहिए. सबको अपनापन, सबको ऊपर उठाना, लेकिन कट्टरता नहीं, ऐसा समाज चाहिए. उन्होंने कहा कि ‘‘समाज हमारा भगवान है. हम समाज की सेवा करने वाले लोग हैं. मुझे इसके बदले में क्या मिलेगा, इसके बारे में सोचना भी नहीं. हम हिन्दू राष्ट्र के सम्पूर्ण विकास के लिए कार्य करेंगे. हम यह काम कर रहे हैं, यह अभिमान भी हममें नहीं आना चाहिए.’’ डॉ. भागवत जी ने कहा कि हमें प्रतिक्रिया में कोई काम नहीं करना है. धर्म स्थापना के लिए ही महाभारत का युद्ध हुआ. भगवान बुद्ध ने सम्पूर्ण करुणा और अहिंसा का उपदेश दिया. भगवान राम और भगवान कृष्ण ने भी सब धर्म के लिए किया. इसलिए प्रत्येक कार्यकर्ता को सकारात्मक सोच के आधार पर कार्य करना पड़ेगा.

उन्होंने कहा कि हमारे लिए भारत एक गुणवाचक शब्द है. अध्यात्म के आधार पर विचार करते हुए हमारे पूर्वजों ने जिस विचारधारा के आधार पर भारत को बनाने का काम किया है, वही हिन्दुत्व है. संघ हिन्दू समाज का संगठन करने के अलावा कुछ नहीं करेगा, लेकिन संघ के स्वयंसेवक कुछ नहीं छोड़ेंगे. हिन्दू धर्म संस्कृति व समाज के लिए जो कुछ भी उपयोगी होगा, वह सब संघ के स्वयंसेवक करेंगे. संघ के कार्यकर्ता अपने को संघ विचार के अनुरूप ढालने का प्रयास करें. हम संघ के स्वयंसेवक हैं. संघ हिन्दू समाज का संगठन है.

सरसंघचालक जी ने कहा कि जो परिवर्तन समाज में आना चाहिए, उसके लिए पहले स्वयंसेवकों को अपने जीवन अर्थात् कृतित्व में उतारना होगा. उन्होंने सभी स्वयंसेवकों से कहा कि अपनी आजीविका में भी पहले समाज को सर्वोपरि रखकर उनकी आत्मीयता के आधार पर सेवा करें. संघ जैसा प्रत्येक कार्यकर्ता को बनना पड़ेगा, तभी संघ का काम बढ़ेगा.

सभी संस्कृतियों का आदर करने से समृद्ध होगा विश्व : परमपूज्य श्री भागवत जी



सभी संस्कृतियों का आदर करने से समृद्ध होगा विश्व : परम पूज्य श्री भागवत जी 


लंदन, अगस्त 01: हिन्दू स्वयंसेवक संघ-यूके की ओर से यहाँ आयोजित तीन दिवसीय संस्कृति महाशिविर का रविवार देर शाम समापन हो गया। इस अवसर पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि हमें सभी धर्म और संस्कृतियों का आदर करना चाहिए और ऐसा करने पर ही विश्व और ज्यादा समृद्ध होगा ।

भागवत ने कहा कि हिन्दू धर्म नहीं बल्कि जीवन पद्धति है। हम विश्व बंधुत्व को मानने वाले हैं और वसुधैव कुटंबकम पर विश्वास रखते हैं। उन्होंने कहा कि हमें सभी धर्म और संस्कृतियों का आदर करना चाहिए और ऐसा करने पर ही विश्व और ज्यादा समृद्ध होगा ।

उन्होंने कहा कि पर्यावरण के साथ मनुष्य किस प्रकार संतुलन बनाकर रह सकता है, भारतीय संस्कृति में इन प्रश्नों का उत्तर है। उन्होेने कहा कि एक स्वस्थ समाज के लिए जरूरी है कि वह नियमित व्यायाम और उचित आहार लेते हुए एक संयमित जीवन जिये।

हिन्दू स्वयंसेवक संघ की ओर से लंदन से नजदीक हर्टफोर्डशायर में कंट्री शो मैदान में लगे इस शिविर में ब्रिटेन के एचएसएस से जुड़े 2200 कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। 1966 में ब्रिटेन में संगठन की स्थापना की गई थी। इस वर्ष इसकी स्वर्ण जयंती मनाई जा रही है।

29 जुलाई को श्री भागवत ने तीन दिवसीय कैंप का उद्घाटन किया जिसमें सहसरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले और एचएसएस यूके इकाई के राम वैद्य सहित अन्य संगठन के वरिष्ठ जनों ने भाग लिया। इस शिविर की थीम `संस्कार, सेवा और संगठन` थी।

इस दौरान लंदन के उपमहापौर बिजनेस राजेश अग्रवाल ने एचएसएस के शीर्ष बिजनेस नेताओं से शुक्रवार को मुलाकात की। इस दौरान पिछले 50 वर्षों मेे एचएसएस की उपलब्धियों को लेकर एक प्रदर्शनी भी लगाई गई।
संघ से प्रेरित एचएसएस-यूके ब्रिटेन में काम करने वाला एक सामाजिक संगठन है जो समय-समय पर दान, आध्यात्म तथा सामाजिक गतिविधियों में शामिल रहता है जिसकी सराहना ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री डेविड कैमरून और मार्गेट थैचर कर चुके हैं।

मंगलवार, 30 अगस्त 2016

मुलायम मायावती !!! शैम शैम !!


मुलायम मायावती !!! शैम शैम !!

मुलायम सिंह कह रहे है कि ओर कारसेवकों को मारता !
मायावति अपनी करारी हार देख कह रहीं हैं मोदी चुनाव के लिये पाकिस्तान से युद्ध कर सकते है।
याद रखिये माया मुलायम आप जैसे लोगों के कारण ही पाकिस्तान की हिम्मत इतनी बढ़ जाती है। 
देश में आतंकी दंश के लिये आपकी राष्ट्रघाती वोट राजनीति ही जिम्मेवार हे।





अयोध्या कांड पर बोले मुलायम- 

16 की जगह 30 कारसेवक मारे जाते तो भी हम पीछे नहीं हटते 

अनूप श्रीवास्तव [Edited By: अमित दुबे] @anoupsrivastava लखनऊ, 27 अगस्त 2016 |

लखनऊ में मुलायम सिंह यादव ने शनिवार को अयोध्‍या गोली कांड पर बड़ा बयान देते हुए कहा कि उस दौरान अगर 16 के बजाए 30 कारसेवकों की भी जान जाती तब भी वो उससे पीछे न हटते. मुलायम ने कहा कि उनको देश की एकता के लिए अयोध्या में कारसेवकों पर गोली चलवानी पड़ी थी. उन्होंने कहा कि अगर उस समय गोली नहीं चलती तो मुसलमानों का देश से विश्वास उठ जाता. इसके साथ ही मुलायम ने कहा कि उस वक्त इस मुद्दे पर सदन में भी उनकी जमकर आलोचना हुई थी, और उन्हें मानवता का हत्यारा कहा जाता था.

देश में लोग भूख से कर रहे हैं आत्महत्या
मुलायम ने उस काण्ड पर अफसोस जताते हुए कहा कि उनको इस गोली कांड पर बहुत अफसोस है और हमेशा रहेगा. मुलायम सिंह यादव ने खुद पर लिखी गई पुस्‍तक का विमोचन करने के लिए एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे. मुलायम सिंह यादव ने कहा कि देश के सामने बहुत गंभीर समस्या है, यहां पर गरीबी अमीरी की खाई है. उन्होंने कहा कि आजादी के समय गरीबी-अमीरी की खाई थी लेकिन आज उससे ज्यादा है. आज ये हालत है कि लोग भूख से मर रहे हैं और भूख के कारण लोग आत्महत्या कर रहे हैं. गरीबी अमीरी के कारण अमीर को सम्मान और गरीब को अपमान मिल रहा है.

यूपी में विकास पर भी जाहिर की चिंता 
मुलायम ने यूपी पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि हिन्दुस्तान में पानी, सड़क, पत्थर और लकड़ी कहीं भी ज्यादा है तो वह सबसे ज्यादा यूपी में है. मुलायम ने कहा कि हमारे पास सब कुछ होने के बावजूद भी हम पीछे हैं. इसके लिए हमें सोचना पड़ेगा. हम इसलिये पीछे हैं क्योकिं हमारे यहां लोगों की इच्छाशक्ति नहीं है. मुलायम सिंह यादव के जीवन पर आधारित पुस्तक 'बढ़ते गए साहसिक कदम' का लोकार्पण करने के लिए मुलायम सिंह यादव लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में शिरकत करने पहुंचे, यह पुस्तक ललितकान्त पांडेय ने लिखी है.

विपक्ष का मुलायम पर हमला 
बीजेपी नेता मनोज मिश्र ने कहा कि मुलायम ने जो कदम उस समय उठाए थे वो बेहद निंदनीय थी, लेकिन आज फिर उसे वो जीवित कर विधानसभा चुनाव में फायदा उठाना चाहते हैं. मुलायम में हमेशा से यूपी में तुष्टीकरण की राजनीति करते आए हैं. लोकसभा चुनाव के दौरान भी मुजफ्फरनगर के दंगे को तूल देने का काम किया, लेकिन अब यूपी की जनता इनकी चाल समझ गई है. वहीं कांग्रेस नेता अशोक सिंह ने कहा कि अयोध्या मामला अदालत में है और इस पर बयानबाजी गलत है, उन्होंने कहा कि मुलायम सिंह यादव को यूपी में सियासी जमीन खिसकने का आभाष हो गया है, इसलिए वो फिर से हिंदू-मुस्लिम मुद्दे को उछाल रहे हैं. जबकि जेडीयू नेता केसी त्यागी ने कहा कि मुलायम ने उस समय सही कदम उठाया था, लेकिन अब जो यूपी में हो रहा है वो बेहद खराब है. मुजफ्फरनगर और दादरी मुद्दे पर जिस तरह यूपी सरकार का रवैया रहा उससे अल्पसंख्यकों में असुरक्षा की भावना पैदा हुई.

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पाक से युद्ध करवा सकते हैं पीएम मोदी: मायावती

on Aug. 28, 2016,

आजमगढ़ (28 अगस्त):यूपी में 2017 विधानसभा चुनावों की तैयारों में लगी बसपा सुप्रीमो मायावती बीजेपी और राज्य की एसपी सरकार पर जमकर बरसीं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर पाकिस्तान से युद्ध करवाने का भी आरोप लगाया।

मायावती ने कहा, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पक्के मकान का वादा किया था, लेकिन मैं समझती हूं कि एक भी व्यक्ति को पक्का मकान नहीं मिला। दो साल तक उन्हें गोरखपुर में एम्स बनाने का ख्याल नहीं आया। दो साल से खाद बनाने का कारखाना बंद था। उत्तर प्रदेश की जनता ने इन्हें लोकसभा चुनाव में काफी सीटें जिताई लेकिन 10 फीसदी वादे भी पूरे नहीं किए गए।'

पाकिस्तान से युद्ध करा सकते हैं मोदी...
- बीजेपी प्रदेश में सत्ता से बहुत दूर है, इसलिए दूसरे मुद्दों की ओर बढ़ गई है।

- हाल ही में कश्मीर में तिरंगा यात्रा निकाली गई। प्रधानमंत्री लाल किले से पाकिस्तान को ललकार रहे हैं।

- मैं जनता को सतर्क करना चाहती हूं कि ऐसी चर्चा चल रही है कि लोगों का ध्यान बांटने के लिए मोदी कश्मीर, आतंकवाद को मुद्दा बना पाकिस्तान से युद्ध करवा सकते हैं।



प्रखर राष्ट्रवाद को प्रगट किया नरेन्द्र मोदी प्रेरित तिरंगा यात्रा नें




  भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ की उस पाठशाला के वि़द्यार्थि रहे हैं जहां सबसे पहले राष्ट्र ही सिखाया जाता है। भारतमाता के सपूत मोदी का यह सौभाग्य रहा है कि वे भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष मुरलीमनोहर जोशी के नेतृत्व में श्रीनगर में तिरंगा फहरानें की एकता यात्रा के प्रबंधक भी रहे और श्रीनगर के लाल चौक पर जोशी जी के साथ उन्होने भी तिरंगा  फहराया था । 
हमारे देश में लगातार मीडिया का एक वर्ग राष्ट्रविरोधी तत्वों का साथ दे रहा है। देश के कुछ जिम्मेवार दल भी वोट बैंक की राजनीति में राष्ट्रविरोधी तत्वों के पालनहार बन जाते हैं। विदेशी हितों के तहत देश विरोधी ताकतों को मजबूत करने की एक मुहिम लगातार प्रभाव डालने वाले वर्ग से हो रही थी। अनचाही आराजकतायें खडी की जा रहीं हैं।
लोकतंत्र में हर सवाल का जबाव आम जनमत होता है। संभवतः प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ध्यान में ये ही उच्च विचार रहे होंगें। उन्होने आजादी के 70 वे साल के अवसर पर देश की आजादी दिलानें में शहीद हुये और संर्घर्ष करने वाले तमाम वीरों को स्मरण करने और उनके प्रतिमा स्थलों पर श्र्द्धा सुमन चढ़ानें का संकल्प लिया ओर पूरे देश में तिरंगायात्राओं को करने का आव्हान किया । 
पूरे देश में तिरंगा हाथ में लिये नौजवान लगातार आठ दस दिनों तक स्वतंत्रा के संघर्षों को न केवल याद करता रहा बल्कि उसने स्वतंत्रा को अक्क्षुण्य बनाये रखनें के संकल्प भी लिये। देश को तोडने वाली , देश में आराजकता फैलानें वाली ताकतों को यह सबसे माकूल जबाव हो सकता था और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इसके लिये धन्यवाद के पात्र हैं कि उन्होने वो कर दिखाया जिसकी कल्पना भी राष्ट्र विरोधी नहीं कर सके थे। 









प्रखर राष्ट्रवाद को प्रगट किया नरेन्द्र  मोदी प्रेरित तिरंगा यात्रा नें 


  • देशप्रेम और राष्ट्रवाद को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशभर में तिरंगा यात्रा निकालने का ऐलान किया है. स्वतंत्रता दिवस पर शुरू होने वाली यह यात्रा हैदराबाद में लिबरेशन डे के मौके पर संपन्न होगी.
  • पीएम मोदी ने इसके लिए पार्टी नेताओं को विस्तार से बताया. निर्देश कुछ इस तरह हैं :-
  • सांसदों और विधायकों को तिरंगा लेकर दोपहिया वाहनों पर निकलना है.
  • तिरंगा कम से कम 8 फीट ऊंचा होना चाहिए, ताकि इससे लोगों के बीच देशप्रेम और राष्ट्रवाद की भावना का विकास हो सके.
  • जिन जगहों पर बीजेपी के सांसद या विधायक नहीं हैं, वहां बीजेपी के स्थानीय पदाधिकारी यात्रा का नेतृत्व करेंगे.
  • मोदी के मुताबिक, आजादी की 70वीं सालगिरह पर यात्रा के साथ बड़े पैमाने पर जश्न मनाया जाए.
  • देश के गुमनाम साहसी लोगों की आजादी की गाथाओं को सामने लाकर उन्हें लोगों तक पहुंचाए.
  • वेंकैया नायडू के नेतृत्व में एक कमेटी का गठन किया गया है, जो यात्रा का ब्लू प्रिंट बनाएगी.
  • पहले भी निकली हैं इस तरह की यात्राएं
  • 1991 में बीजेपी अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी ने कन्याकुमारी से एक यात्रा निकाली थी, जो श्रीनगर के लालचौक पर तिरंगा फहराकर खत्म की गई थी. मोदी उस समय इस यात्रा के प्रबंधकों में से एक थे.
  • 2011 में अनुराग ठाकुर ने भी युवा मोर्चा के नेतृत्व में एक यात्रा निकाली थी, लेकिन उसे श्रीनगर में प्रवेश नहीं करने दिया था.








शुक्रवार, 26 अगस्त 2016

'आजादी 70 साल: ज़रा याद करो कुर्बानी'

स्वतंत्रता संग्राम के भुला दिये गये वीरों को याद करानें में सफल रही तिरंगा यात्रा ,प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को कोटिष: धन्यवाद एवं आभार !!


**** आजादी 70 साल ज़रा याद करो कुर्बानी *****

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने देश की जनता से आह्वान किया था कि आजादी के 70 वर्ष पूरे होने के इस पावन मौके पर हम हर जिला, हर तहसील, हर गाँव में जाएँ और भुला दिए गए आजादी के हर दीवानों की कुर्बानियों को याद करें। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्त्व में केंद्र की भाजपा.गठबंधन सरकार के हर मंत्री, भारतीय जनता पार्टी के हर पदाधिकारी, हर कार्यकर्ता देश भर में तिरंगा यात्रा निकाली और शहीदों के सम्मान में आयोजित कार्यक्रमों में हिस्सा लिया, ताकि देश की युवा पीढ़ी वीर शहीदों के बलिदान से अवगत हो सकें और उनका स्मरण कर सकें।




  1. भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह ने आज, शनिवार को तिरंगा यात्रा के तहत देश भर में चलाये जा रहे ’आजादी 70 साल: ज़रा याद करो कुर्बानी' कार्यक्रम के अंतर्गत उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक काकोरी में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के वीर शहीदों को याद करते हुए ‘काकोरी कांड' के वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर उन्होंने एक विशाल जनसभा को संबोधित किया और तिरंगा यात्रा का आगाज किया।
  2. भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि 1857 में शुरू हुई आजादी की पहली लड़ाई से लेकर 1947 तक अनगिनत वीर सपूतों ने देश की आजादी के लिए अपना तन-मन-धन सर्वस्व अर्पित कर दिया चाहे वह मंगल पण्डे, बहादुरशाह जफ़र, रानी लक्ष्मीबाई, वीर कुंअर सिंह और तात्या टोपे जैसे वीर सपूतों के नेतृत्त्व में शुरू हुई आजादी की पहली लड़ाई हो, या चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, सुखदेव, रामप्रसाद बिस्मिल, ठाकुर रोशन सिंह, अशफाकउल्ला खां, खुदीराम बोस, मदनलाल धींगरा जैसे आजादी के परवानों के नेतृत्त्व में देश की आजादी के लिए सशस्त्र क्रान्ति की शुरुआत हो, या सुभाषचंद्र बोस के नेतृत्त्व में देश की आजादी के लिए आजाद हिंद फ़ौज का प्रयास हो या फिर महात्मा गांधी, बाल गंगाधर तिलक और पूज्य गोखले के नेतृत्त्व में भारत की स्वतंत्रता के लिए चलाये गए आन्दोलन हों।
  3. श्री शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने देश की जनता से आह्वान किया है कि आजादी के 70 वर्ष पूरे होने के इस पावन मौके पर हम हर जिला, हर तहसील, हर गाँव में जाएँ और भुला दिए गए आजादी के हर दीवानों की कुर्बानियों को याद करें। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्त्व में केंद्र की भाजपा-गठबंधन सरकार के हर मंत्री, भारतीय जनता पार्टी के हर पदाधिकारी, हर कार्यकर्ता देश भर में तिरंगा यात्रा निकालेंगें और शहीदों के सम्मान में आयोजित कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगें ताकि देश की युवा पीढ़ी वीर शहीदों के बलिदान से अवगत हो सकें और उनका स्मरण कर सकें।
  4. भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति देनेवाले भारत माँ के वीर सपूतों के दो ही लक्ष्य थे, पहला लक्ष्य था देश को अंग्रेजों की गुलामी से मुक्त कराना और दूसरा स्वतंत्रता के बाद देश के गरीब से गरीब व्यक्ति के घर में भी दो वक्त की रोटी, बिजली और रोजगार पहुंचाना। उन्होंने कहा कि आजादी के 70 सालों में से लगभग 55 वर्षों से अधिक समय तक देश में कांग्रेस पार्टी के एक परिवार का शासन रहा लेकिन यह दुर्भाग्य की बात है कि उत्तर प्रदेश में आजादी के 70 साल बाद भी न तो युवाओं के पास रोजगार है, न यहाँ के लोगों को शुद्ध पीने का पानी उपलब्ध है, न दवाई और एम्बुलेंस की व्यवस्था है और न ही हर घर बिजली अभी तक पहुँची है। उन्होंने कहा कि क्या इसी दिन के लिए भारत माँ के वीर सपूतों ने अपना बलिदान दिया था?
  5. श्री शाह ने कहा कि काकोरी में चंद्रशेखर आजाद, रामप्रसाद बिस्मिल,अशफाक उल्ला खान, राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी और ठाकुर रोशन सिंह ने अंग्रेज सरकार को हिला देने वाले पराक्रम को अंजाम दिया था। उन्होंने कहा कि उन्होंने एक ट्रेन नहीं लूटी थी बल्कि देश की आजादी के लिए अंग्रेजों के खजाने को लूटा था। उन्होंने कहा कि देश के वीर सपूतों न तो अपने बारे में सोचा, न अपने परिवार के बारे में, सोचा तो बस अपने देश के बारे में और सर पर कफ़न बांधकर देश की आजादी के लिए मर मिटे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्त्व में केंद्र की भाजपा सरकार काकोरी को देश के एक बड़े पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए हरसंभव प्रयास करेगी ताकि देश की युवा पीढ़ी सालों तक इससे प्रेरणा, चेतना और देशभक्ति के संस्कार की शिक्षा ले सकें।
  6. भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि हम देश के लिए फांसी के तख्ते पर हँसते-हँसते झूल जानेवाले वीर शहीदों का ऋण कभी नहीं चुका सकते पर हम आजाद भारत में पैदा हुए हैं, हमारे पास मौक़ा है उनके लिए कुछ करने का। उन्होंने कहा कि हम यदि आज यह संकल्प लें कि आज से हम अपना सारा जीवन देश के लिए जियेंगें तो यही उन वीर शहीदों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्त्व में हमें भारत को विश्वगुरु के पद पर आसीन करना है, गरीब, पिछड़े, दलित और किसानों की भलाई के लिए काम करना है और देश को विकास के पथ पर अग्रसर करना है।
  7. श्री शाह ने कहा कि मैं यह दावे के साथ कह सकता हूँ कि उत्तर प्रदेश के विकास के बिना देश के विकास की कल्पना नहीं की जा सकती लेकिन यूपी में सपा-बसपा के रहते विकास संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा के रहते न तो बुलंदशहर और मथुरा कांड जैसी घटनाएं रुक सकती हैं, न भ्रष्टाचार और गुंडाराज रुक सकता है, न युवाओं को रोजगार मिल सकता है और न ही राज्य में उद्योग और कल-कारखाने लग सकते हैं। उन्होंने कहा कि केवल केंद्र में श्री नरेन्द्र मोदी जी की सरकार बनने से ही यूपी का विकास नहीं हो सकता बल्कि इसके लिए प्रदेश में भी भाजपा की विकासोन्मुखी और लोक-कल्याणकारी सरकार बनानी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि अभी भी काम अधूरा है। उन्होंने कहा कि मोदी जी ने देश के गरीब, दलित, पिछड़े, किसान और युवाओं के बेहतर भविष्य के लिए अनगिनत लोक-कल्याणकारी योजनाओं की नींव डाली है लेकिन उत्तर प्रदेश की अखिलेश सरकार इन योजनाओं का लाभ राज्य की जनता तक पहुँचने नहीं देती। श्री शाह ने कहा कि यूपी का विकास सपा-बसपा नहीं कर सकती, सपा जब सत्ता में आती है तो केवल एक जाति विशेष का विकास करती है और जब बसपा प्रदेश में सत्ता में आती है तो बहनजी केवल अपना विकास करती हैं। उन्होंने कहा कि केवल भारतीय जनता पार्टी ही उत्तर प्रदेश का विकास कर सकती है क्योंकि हम ’सबका साथ - सबका विकास’ की नीति पर काम करते हैं।
  8. (महेंद्र पांडेय)  कार्यालय सचिव



भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह द्वारा उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक काकोरी में तिरंगा यात्रा के तहत 'आजादी 70 साल: ज़रा याद करो कुर्बानी' कार्यक्रम के अवसर पर आयोजित रैली में दिए गए भाषण के मुख्य अंश

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने देश की जनता से आह्वान किया है कि आजादी के 70 वर्ष पूरे होने के इस पावन मौके पर हम हर जिला, हर तहसील, हर गाँव में जाएँ और भुला दिए गए आजादी के हर दीवानों की कुर्बानियों को याद करें: अमित शाह
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देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति देनेवाले भारत माँ के वीर सपूतों के दो ही लक्ष्य थे, पहला लक्ष्य था देश को अंग्रेजों की गुलामी से मुक्त कराना और दूसरा स्वतंत्रता के बाद देश के गरीब से गरीब व्यक्ति के घर में भी दो वक्त की रोटी, बिजली और रोजगार पहुंचाना: अमित शाह
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यह दुर्भाग्य की बात है कि उत्तर प्रदेश में आजादी के 70 साल बाद भी न तो युवाओं के पास रोजगार है, न शुद्ध पीने का पानी है, न दवाई और एम्बुलेंस की व्यवस्था है और न ही बिजली है। क्या इसी दिन के लिए भारत माँ के वीर सपूतों ने अपना बलिदान दिया था: अमित शाह
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काकोरी में चंद्रशेखर आजाद, रामप्रसाद बिस्मिल,अशफाक उल्ला खान, राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी और ठाकुर रोशन सिंह ने अंग्रेज सरकार को हिला देने वाले पराक्रम को अंजाम दिया था: अमित शाह
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देश के वीर सपूतों न तो अपने बारे में सोचा, न अपने परिवार के बारे में, सोचा तो बस अपने देश के बारे में और सर पर कफ़न बांधकर देश की आजादी के लिए मर मिटे: अमित शाह
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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्त्व में केंद्र की भाजपा सरकार काकोरी को देश के एक बड़े पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए हरसंभव प्रयास करेगी ताकि देश की युवा पीढ़ी सालों तक इससे प्रेरणा, चेतना और देशभक्ति के संस्कार की शिक्षा ले सकें: अमित शाह
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हम यदि आज यह संकल्प लें कि आज से हम अपना सारा जीवन देश के लिए जियेंगें तो यही उन वीर शहीदों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी: अमित शाह
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उत्तर प्रदेश के विकास के बिना देश के विकास की कल्पना नहीं की जा सकती लेकिन यूपी में सपा-बसपा के रहते विकास संभव नहीं है: अमित शाह
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यूपी का विकास सपा-बसपा नहीं कर सकती, सपा जब सत्ता में आती है तो केवल एक जाति विशेष का विकास करती है और जब बसपा सत्ता में आती है तो बहनजी केवल अपना विकास करती हैं: अमित शाह
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उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा के रहते न तो बुलंदशहर और मथुरा कांड जैसी घटनाएं रुक सकती हैं, न भ्रष्टाचार और गुंडाराज रुक सकता है, न युवाओं को रोजगार मिल सकता है और न ही राज्य में उद्योग और कल-कारखाने लग सकते हैं: अमित शाह
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केवल केंद्र में श्री नरेन्द्र मोदी जी की सरकार बनने से ही यूपी का विकास नहीं हो सकता बल्कि इसके लिए प्रदेश में भी भाजपा की विकासोन्मुखी और लोक-कल्याणकारी सरकार बनानी पड़ेगी: अमित शाह
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मोदी जी ने देश के गरीब, दलित, पिछड़े, किसान और युवाओं के बेहतर भविष्य के लिए अनगिनत लोक-कल्याणकारी योजनाओं की नींव डाली है लेकिन उत्तर प्रदेश की अखिलेश सरकार इन योजनाओं का लाभ राज्य की जनता तक पहुँचने नहीं देती: अमित शाह
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केवल भारतीय जनता पार्टी ही उत्तर प्रदेश का विकास कर सकती है क्योंकि हम ’सबका साथ - सबका विकास’ की नीति पर काम करते हैं: अमित शाह
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सोमवार, 1 अगस्त 2016

Lord Shiva : The Most Mysterious Hindu God

http://www.indiadivine.org/lord-shiva-mysterious-hindu-god

Lord Shiva – The Most Mysterious Hindu God
Of all the deities in the Hindu pantheon, by far the most complex and mysterious to me is Śiva. Devotees and scholars alike have attempted to pierce the shrouds of textual and archaeological history to understand his origin, nature and evolution. Yet he continues to defy comprehension and definition.

Some, following John Marshall, have sought him in the phallic emblems, baetyls, seals and sculptures of the Indus Valley Civilisation. Others like Doris Srinivasan place his origins firmly in the early Vedic fold, and in the Vedic deity Rudra. Still others like Phyllis Granoff point to the textual and iconographic chasm between the Vedic Rudra and the classical Śiva, indicating a need for serious contemplation and research to understand how, if indeed they are one and the same deity, the transition and transformation came about.
Rudra’s nature from the early Vedic to the late Vedic period embodies continuities and differences. We find that his benign aspect increasing gradually while his destructive aspect declines, though remains. Rudra of the Ṛgveda is a minor deity, a storm god with just three hymns dedicated to him: 1.114, 2.33 and 6.46. (He appears along with Soma in 1.43 and 6.74). His dual nature is already evident. Prone to anger and quick to dispatch weapons especially arrows against those who enrage him, he is also a deity with healing remedies and a provider of good luck. He is the flame-red boar of heaven, youthful with braided hair, powerful lips, merciful hands, tender-hearted and easy to invoke. Father of the Maruts, dazzling like the bright sun, powerful like a wild beast, swift, with the destructive power of lightning, storm and fire, he is lord of the sacrifice, of song and the physician of physicians. One of the adjectives used for him is indeed śiva (auspicious), but not exclusively. It is used for Agni and Indra and is also the name of a people in the Ṛgveda (7.18.7) The classical iconography (candra, Gaṅgā, liṅga) so familiar to us today is completely absent.
By the time of the composition of the Yajurveda saṃhitas, Rudra has grown tremendously in stature. His importance and physical appearance in the minds of the ṛṣis has changed. Now he is clad in skin, dwells in the mountains, is aged and has a thousand eyes. Ambika is mentioned for the first time in the Vedic corpus at this stage, not as his wife, but as his sister. In what J Bruce Long calls the “embodiment of divine ambivalence”, both the auspicious (śiva) as well as malevolent (rudra) aspects are developed in the renowned Śatarudriya prayer which occurs in the kṛṣṇa Yajurveda and with some modification in the śukla Yajurveda. From being a minor atmospheric deity in the Ṛg saṃhita, he has become Viśvarūpa and his presence can be felt in streams, ponds, banks, on the road, on barren land, in the cow pen, in the heart the whirlpool, in the dust and mist.
Now addressed as Nīlagrīva, Śitikanṭha, Giriśaya (mountain dweller), Viṣāpaharaṇa (one on whom the deadliest poison has no effect), and Paśupati, he is the lord of the forests, trees, fields and plants. In the Śatarudriya is also evident his all-inclusive divinity which is extended to wanderers, thieves, tricksters, robbers and pilferers. His Rudras/gaṇapatis are the lords of carpenters, potters, blacksmiths, fishermen, hunters and the Niṣādas, a non-Vedic tribe. While the Śatarudriya becomes a central text in the worship of the Purāṇic Śiva centuries later, there are just as many features that are unfamiliar (as are familiar) to the devotee who reads it for the first time. For instance, Rudra as Rathapati (lord of chariots), Harikeśa (one who has green hair/green leaves as hair), Kūpya (of the well) and Avaṭya (of the pit/hole).
The Atharvaveda represents a further stage of elevation for the Vedic Rudra. Book XV of this saṃhita identifies him with all of creation in a language which is distinctly Vedic but addresses the deity as Eka-vrātya, vrātyas being not of the ārya community. (Read the first few hymns, or the whole book in translation here. He becomes Mahādeva and holds the bow of Indra, erstwhile chief of the Vedic gods. The texts speak of seven attendants of this deity including Bhava, Īśāna, Paśupati, Śarva, Ugra, Rudra and Mahādeva. They are apart, yet a part of him – a theme which Phyllis Granoff takes up in her research on later developments in the persona of Śiva. Rudra/Mahādeva/Eka-Vrātya is fond of strong sura and shares a special relationship with a puṁścalī (a harlot, lit one who goes after men) but also becomes one with all that the ārya hold pure. Varuṇa, Soma and the seven ṛṣis follow him; hymns like rathantara and brihat follow him, as do the ādityas, and viśvedevas. Mahadev Chakravarti posits the theory that Vedic Rudra is not of ārya origin and that the Atharvaveda represents his increased acceptance by the custodians of the ārya belief system.
The brāhmaṇas progress this continual and by now seemingly unstoppable ascent of Rudra. AB Keith says even the gods are afraid of him by this stage. By the time of the composition of the Śvetāśvatara Upaniṣad (see ŚU 6.18) Rudra has become the one god, the one who creates brahman and bestows the Veda upon him/it. At ŚU 3.2 we encounter a familiar theme: “There is only one Rudra; he has not tolerated a second who would reign over these worlds by his sovereign powers. After drawing in all beings he stands as the protector at the end of time, turning West towards men” Clearly by this period, a cult of Rudra (widely accepted today as a precursor to Śaivism) has been established. Further evidence is to be found in Patañjali’s Mahābhāṣya. Commenting on Pāṇini’s sutra V.2.76, he talks of discreet followers of the deity – Śiva-bhāgavatas, who were āyaḥśūlika (possessing iron spears/lances) and daṇḍājinaka (holders of a staff and wearing animal skin). Patañjali is dated circa second century BCE, while the Śvetāśvatara Upaniṣad is thought to have been composed between the sixth and the fourth century BCE.
He remains connected to the Vedic ritual as can be seen in the śrauta and gṛhya sutras. Over and above that it is recommended that he be adored in practically all walks of life. Śāṅkhāyana gṛhyasutra prescribes Rudra worship to sick people. The Pāraskara gṛhyasutra directs “adoration” when crossing a path, approaching a cross road, swimming across a river, getting into a boat, entering a forest or climbing a mountain, passing by a burial ground or a cow pen. For Rudra clearly has come to inhabit the universe. The Hiraṇyakeśī gṛhyasutra recommends the same if one chances upon a cattle dung heap, is plunged into a river, is near a creeping snake, by a sacrificial site or a big old tree.
So far we have touched upon the trajectory of Rudra in the early and late Vedic texts. As yet there is no consensus as to the origin of this deity. Was he pre-ārya? Was he contemporary but external to the ārya? Was he a mountain or a forest god? A malevolent force of nature? Or was he clearly as ārya as Agni, Vāyu and Soma, as Doris Srinivasan would have us believe? Did he gain all his epithets by absorbing the gods of smaller autochthonous cults? What were the stories that led to his names in the Śatarudriya? We have traversed close to two thousand years of textual history and as yet we haven’t even reached the part where he becomes unequivocally Śiva or Śankara. I urge all to learn Sanskrit, read the Vedic corpus and find your own answers!