शनिवार, 29 अक्तूबर 2016

पाकिस्तानी जासूसों से,राजनैतिक दल और रक्षा संस्थानों को स्वंय भी सावधान रहना चाहिऐ


पाकिस्तानी जासूसों से , 
प्रत्येक राजनैतिक दल और रक्षा  संस्थानों को स्वंय भी सावधान रहना चाहिऐ !  
- अरविन्द सिसौदिया जिला महामंत्री भाजपा कोटा 



शोएब ने भाजपा कार्यकर्ता बन मंत्रियों के साथ फोटो खिंचवा फेसबुक पर डाले, 
पार्टी ने कहा-सक्रिय मेंबर नहीं


कार्यक्रमों में मंच तक पहुंचा, पर्रिकर और डॉ. हर्षवर्धन के नजदीक रहा
Bhaskar News Network | Oct 29, 2016
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पाकिस्तान हाई कमीशन से चल रहे जासूसी नेटवर्क में पकड़ा गया शोएब अपना रुतबा दिखाने के लिए खुद को भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चे का कार्यकर्ता बताकर बड़े नेताओं से मिलता और उनके साथ फोटो खिंचवा फेसबुक पर अपलोड करता था। वह जयपुर और दिल्ली जाकर भाजपा के कार्यक्रमों में बतौर कार्यकर्ता शामिल हुआ। साथ ही रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर और केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. हर्षवर्धन सहित कई बड़े राष्ट्रीय नेताओं के साथ फोटो खिंचवाकर फेसबुक पर अपलोड किए हैं। नई दिल्ली में 9 अगस्त 2014 को हुए भाजपा राष्ट्रीय परिषद के कार्यक्रम में शामिल होकर मंत्रियों के नजदीक जाकर फोटो खिंचवाए, फिर इन्हें फेसबुक पर डाल दिया ताकि लोग उसे भाजपा कार्यकर्ता ही समझें और नेताओं से नजदीकियाें का फायदा मिल जाए। गौरतलब है कि जोधपुर के खांडा फलसा में रहने वाले 25 वर्षीय शोएब को दिल्ली से जोधपुर आते समय मेड़ता रोड स्टेशन पर सीआईडी ने पकड़ लिया था। शोएब जोधपुर में विधायक सूर्यकांता व्यास के साथ भी बातचीत करते कई कार्यक्रमों में देखा गया। फेसबुक पर उसने सांसद हेमा मालिनी, राज्य के परिवहन मंत्री युनूस खां के साथ खिंचवाए फोटो भी डाल रखे हैं। 

शोएब के पिता मोहम्मद हुसैन का कहना है कि उनका परिवार 25 सालों से पाकिस्तान का वीजा बनाने में दलाली का काम कर रहा है, तीन पीढ़ियों से यही काम कर रहे हैं लेकिन कभी शिकायत नहीं आई। मेरा बेटा भी निर्दोष है। मो. हुसैन ने कहा कि उन्हें कानून पर भरोसा है इसलिए पुलिस उसे खुद वापस घर लेकर आएगी। चढ़वों की गली के पास जटियों के बास में रहने वाले मोहम्मद हुसैन ने बताया कि चार साल पहले नागौर निवासी मौलाना रमजान उनसे मिला था। उसने बताया कि वह भी वीजा बनाता है और कम कमीशन में हमारे लिए भी आसानी से वीजा बनवा देगा। इस पर चार लोगों के वीजा बनाने भी दिए, लेकिन उसने तीन के पैसे हड़प लिए और काम भी नहीं किया। फिर लोगों से पता चला कि वह पाकिस्तान में कुछ गलत गतिविधियों में शामिल हैं तो उससे बात करनी ही बंद कर दी। 

2014 में नई दिल्ली में हुए भाजपा राष्ट्रीय परिषद के कार्यक्रम के शोएब ने ऐसे फोटो फेसबुक पर डाले हैं। 


भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष देवेंद्र जोशी महामंत्री मुकेश लोढ़ा ने संयुक्त रूप से वक्तव्य जारी कर बताया कि जासूसी में पकड़े गए शोएब हुसैन का कभी भी पार्टी से कोई संबंध नहीं रहा और ही वह कभी पार्टी का सक्रिय सदस्य रहा। उन्होंने कहा कि पार्टी राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में लिप्त लोगों को कड़ी से कड़ी सजा देने की पक्षधर है। पार्टी ने शोएब हुसैन को राष्ट्र विरोधी गतिविधि में लिप्त और राष्ट्र के प्रति गद्दारी करने के फलस्वरूप कड़ी सजा देने की मांग की है। 
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पाक हाईकमीशन से कर्मचारी चला रहा था जासूसी का नेटवर्क, 48 घंटे में देश छोड़ने को कहा, जोधपुर-नागौर के 3 जासूस भी गिरफ्तार
Bhaskar News Network | Oct 28, 2016



महमूद के साथ पकड़े गए मौलाना रमजान (बाएं) और सुभाष जांगिड़। 
दोनों बीएसएफ से जुड़ी जानकारी महमूद को दिया करते थे। 

भास्कर न्यूज| नई दिल्ली/जयपुर/जोधपुर/नागौर 
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दिल्लीपुलिस की क्राइम ब्रांच ने गुरुवार को दिल्ली स्थित पाकिस्तानी हाई कमीशन से चल रहे जासूसी के नेटवर्क का खुलासा किया। इस नेटवर्क में हाई कमीशन में नौकरी कर रहे पाक खुफिया एजेंसी आईएसआई के कारिंदे महमूद अख्तर के अलावा नागौर के दो जासूस मौलाना रहमान सुभाष जांगिड़ तथा जोधपुर का शोएब भी पकड़ा गया। चौंकाने वाली बात यह है कि जासूस सुभाष ने नागौर के खींवसर विधानसभा क्षेत्र से पिछला चुनाव लड़ा था। विधायक हनुमान बेनीवाल के खिलाफ उसने निर्दलीय के तौर पर 1939 वोट हासिल किए थे। उसकी जमानत जब्त हो गई थी। इस बात की पुष्टि खुद विधायक बेनीवाल ने की। उधर, हाई कमीशन में नौकरी के बहाने महमूद अख्तर खुफिया सूचनाएं जुटाकर पाक को भेजता था। राजनयिक सुरक्षा के चलते महमूद को पूछताछ के बाद छोड़ना पड़ा। उसे 48 घंटे में देश छोड़ने को कहा गया है। 

खुलासेके फौरन बाद विदेश सचिव एस जयशंकर ने पाक हाई कमिश्नर अब्दुल बासित को तलब कर महमूद अख्तर को अवांछित व्यक्ति घोषित कर दिया। हालांकि, बासित ने अपने कर्मचारी को हिरासत में रखने को जेनेवा समझौते का उल्लंघन बताया। साथ ही जासूसी के आरोपों को भी गलत ठहराया। नागौर और जोधपुर के जासूसों से सरहदी इलाकों के संवेदनशील दस्तावेज और बीएसएफ के मूवमेंट से जुड़े कागजात मिले हैं। 

महमूद हाई कमीशन में ढाई साल से तैनात था। रावलपिंडी निवासी है बलूच रेजीमेंट का हवलदार है। जनवरी 2013 से आईएसआई में डेपुटेशन पर है। महमूद पैसे का लालच देकर लोगों को काम में लगाता था। जांच में हनी ट्रैप का एंगल भी जुड़ रहा है। 
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देश का गद्दार है ये शख्स, 
भारत में ऐसी लग्जरी लाइफ जीता था पाकिस्तानी जासूस
SUNIL CHOUDHARY | Oct 29, 2016



जोधपुर। दिल्ली स्थित पाकिस्तान के दूतावास से संचालित हो रहे जासूसी नेटवर्क की अहम कड़ी माने जा रहे जोधपुर के शोएब हुसैन से पुलिस को कई अहम जानकारी मिली है। शोएब लग्जरी लाइफ जिंदगी जीने का शौकीन था। वह हर चार महीने में नई बाइक खरीदता था। उसने लाखों रुपए खर्च कर अपने घर का रिनोवेशव कराया था। 

छह बार जा चुका है पाकिस्तान...
- लोगों के पासपोर्ट बनवा कर उन्हें पाकिस्तान जाने का वीजा दिलाने में मदद करने वाला शोएब सीधे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के संपर्क में था।
- ननिहाल जाने के नाम पर शोएब छह बार पाकिस्तान का दौरा कर चुका था। जोधपुर में पुलिस ने आज सुबह उसके परिजनों से लंबी पूछताछ की।
- जासूसी के आरोप में पकड़े गए शोएब की मां जीनत बानो पाकिस्तान मूल की है। ऐसे में अपने ननिहाल जाने के नाम पर शोएब छह बार पाकिस्तान घूम आया।
पाकिस्तान में मिलता था इनसे...
- खुफिया एजेंसियों का कहना है कि शोएब पाकिस्तान यात्रा के दौरान सीधे आईएसआई के आकाओं से मुलाकात कर चुका था।
- शोएब ने पश्चिमी सीमा पर सेना व बीएसएफ के प्रत्येक मूवमेंट की जानकारी पाकिस्तान तक पहुंचाई थी। शोएब का मुख्य कार्य नए लोगों को इस काम के लिए जोड़ने का रहा।
- शोएब पाकिस्तान दूतावास के अधिकारी महमूद अख्तर से मिलने के लिए दिल्ली गया हुआ था, लेकिन उसके गिरफ्तार होने की सूचना मिलते ही अपने ससुराल पहुंच गया। 
- अगले दिन वापस जोधपुर आने के दौरान खुफिया एजेंसियों ने उसे मेड़ता रोड रेलवे स्टेशन पर दबोच लिया। उस समय उसके पास कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए।
- ऐसा माना जा रहा है कि ये दस्तावेज वह पाकिस्तानी दूतावास के अधिकारी को सौंपने के लिए ही दिल्ली गया था।

हाई प्रोफाइल लाइफ का शौकीन रहा शोएब
- शोएब के पड़ोसियों का कहना है कि शोएब हाई प्रोफाइल लाइफ का शौकीन रहा है। हमेशा वह ब्रांडेड कपड़े व जूते पहने रहता।
- साथ ही नई-नई मोटर साइकिल का शौकीन रहा शोएब दो-चार माह में अपनी बाइक को बदल देता।
- कलेक्ट्रेट में शोएब सीआईडी कार्यालय के बगल में टेबल-कुर्सी लगाकर पासपोर्ट एजेंट का काम करता था।
- पाकिस्तानी दूतावास में अपने संपर्कों के कारण उसे वीजा शीघ्रता से दिलाने में मास्टरी थी। इस कारण वह काफी प्रसिद्ध हो गया।
- शाम होते ही उसके घर के बाहर पासपोर्ट या वीजा हासिल करने वालों की कतार लगी रहती थी।
- पांच फीट चौड़ी तंग गली में रहने वाले शोएब ने हाल ही अपने मकान में लाखों रुपए लगवा कर रिनोवेशन करवाया।
- मकान के ऊपर सीसीटीवी लगाने को लेकर उसका पड़ोसियों के साथ विवाद भी हुआ। इस मामले में उसके परिवार के खिलाफ मामला भी दर्ज हुआ।

गली में पसरा सन्नाटा
- हमेशा लोगों की चहल-पहल से गुलजार रहने वाली शोएब के मकान की तंग गली में अब सन्नाटा पसरा है।
- उसके पड़ोसी भी उसके बारे में कुछ भी बोलने से कन्नी काट रहे है। बड़ी मुश्किल से एक व्यक्ति कुछ बोलने को तैयार हुआ।
- उसका कहना है कि शोएब की बदलती लाइफ स्टाइल को देख साफ लग रहा था कि घर में पैसों की आवक बढ़ रही है।
- यह आवक कैसे बढ़ी इसका अंदाजा हमें पहले नहीं लगा, लेकिन अब स्थिति स्पष्ट हो गई।
पिता ने बताया निर्दोष
- शोएब के पिता मोहम्मद हुसैन ने पहले बातचीत से साफ इनकार कर दिया, लेकिन बड़ी मुश्किल से वे कुछ बोलने को तैयार हुए।
- उन्होंने इतना ही कहा कि हमारा परिवार बरसों से पासपोर्ट के काम में जुटा है, लेकिन कभी ऐसे काम नहीं किए।
- उन्होंने सारा दोष इस मामले में गिरफ्तार नागौर के मौलाना रमजान पर मढ़ दिया। उनका कहना है कि उन्हें शुरू से ही उस व्यक्ति पर शक रहा।

- हुसैन ने बताया कि दिल्ली में रमजान की गिरफ्तारी के बाद शोएब ने उनसे पूछा भी था कि क्या वह भी सरेंडर कर दे, लेकिन उन्हें उस समय तक मामले की जानकारी नहीं थी। ऐसे में उन्होंने शोएब को पहले जोधपुर लौटने को कहा।
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आइएसआइ के लिए जासूसी में सपा सांसद का पीए गिरफ्तार
Publish Date:Sat, 29 Oct 2016
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली :
http://www.jagran.com
पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आइएसआइ के लिए जासूसी करने के आरोप में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सदस्य मुनव्वर सलीम के निजी सचिव (पीए) फरहत खान को भी गिरफ्तार किया है। मूलरूप से मुजफ्फरनगर के कैराना का रहने वाला फरहत खान पिछले एक साल से मुनव्वर सलीम के निजी सचिव के पद पर तैनात था। सपा सांसद के सचिव होने का फायदा उठाकर वह संसद भवन से गोपनीय दस्तावेज की फोटो स्टेट कराता था और फिर उन्हें आइएसआइ एजेंटों को सौंप देता था। शनिवार को पुलिस ने उसे साकेत कोर्ट में पेश किया, जहां से कोर्ट ने 8 नवंबर तक के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया।

संयुक्त आयुक्त रविंद्र यादव के मुताबिक पिछले दिनों क्राइम ब्रांच ने जासूसी मामले में चिड़ियाघर के पास पाक उच्चायोग के वीजा अफसर महमूद अख्तर, मौलाना रमजान व सुभाष जांगिड़ को गिरफ्तार कर पूछताछ की तो महमूद अख्तर ने बताया था कि उसे फरहत खान भी सेना, बीएसएफ एवं पैरामिलिट्री से जुड़े गोपनीय दस्तावेज और जानकारियां देता है। छानबीन के बाद क्राइम ब्रांच ने फरहत को शनिवार को पूछताछ के लिए चाणक्यपुरी स्थित क्राइम ब्रांच के इंटर स्टेट सेल में बुलाया और फिर गिरफ्तार कर लिया। क्राइम ब्रांच के अनुसार फरहत खान भले ही मुनव्वर सलीम का पीए एक साल पहले बना था लेकिन वह महमूद से पिछले पांच साल से संपर्क में था। पुलिस को अंदेशा है कि सांसद की करीबी का फायदा उठाकर वह संसद भवन से सेना से जुड़े गोपनीय दस्तावेज व जानकारी महमूद अख्तर को देता था। फरहत ऐसा काम क्यों कर रहा था और कब से कर रहा था। वह कौन कौन सी गोपनीय दस्तावेज व जानकारी अख्तर को मुहैया करा चुका है। इस संबंध में क्राइम ब्रांच उससे पूछताछ करेगी। गोपनीय दस्तावेज मुहैया कराने के एवज में उसे कितना पैसा मिलता था इस संबंध में भी पूछताछ की जाएगी। कहा जा रहा है कि वह उत्तर प्रदेश में समाजवादी अल्पसंख्यक मोर्चा का सदस्य भी है।

आरोपियों से पूछताछ जारी

क्राइम ब्रांच मौलाना रमजान, सुभाष जांगिड़ और शोएब से लगातार पूछताछ कर रही है। आरोपियों ने बताया कि वे 25 अक्टूबर को दिल्ली आए थे और तीन अलग-अलग जगहों पर रुके थे। इस दौरान उन्होंने पाक उच्चायोग में तैनात वीजा अफसर महमूद अख्तर से वाट्सएप पर बातें कीं। 26 अक्टूबर की सुबह सुभाष व मौलाना रमजान जब पाक उच्चायोग में तैनात वीजा अफसर महमूद अख्तर से मिलने चिड़ियाघर गए तभी तीनों को दबोच लिया गया।

मुनव्वर सलीम बोले

फरहत को ठीक तरीके से जांचने परखने के बाद साल भर पहले पीए बनाया था। उसके द्वारा आइएसआइ के लिए जासूसी करने के बारे में कोई जानकारी नहीं है। अगर वह जासूसी कर रहा था तो यह बहुत चिंताजनक बात है।

मुनव्वर सलीम, सपा राज्यसभा सदस्य

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1998 से आइएसआइ के संपर्क में है फरहत खान


पुलिस सूत्रों के मुताबिक फरहत खान 1998 से पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आइएसआइ के संपर्क में है। उसने जल, रक्षा, गृह और पेट्रोलियम मंत्रालय से जुड़े बेहद अहम और गोपनीय दस्तावेजों को लीक कर आइएसआइ को सौंपे है। शुरू में हर मीटिग के लिए अख्तर उसे पाच हजार रुपये देता था। वर्तमान में उसे 25 से 30 हजार रुपये तक मिलते थे। इसके अलावा गोपनीय दस्तावेज पाक अधिकारियों को मुहैया करवाने के बदले उसे अलग से मोटी रकम मिलती थी। महीने में एक मीटिग उसकी पाक अधिकारियों के साथ जरूर होती थी। मुनव्वर सलीम का पीए रहने से पूर्व फरहत खान करीब चार अन्य सासदों व मंत्रियों का भी पीए रह चुका है। फरहत ने कबूला है कि महमूद अख्तर से अलावा भी कई आइएसआइ एजेंटों से उसकी जान पहचान रही है। भारत छोड़कर जाते समय पुराने एजेंट नए आइएसआइ एजेंट से उसकी मुलाकात करा देते थे। जिससे उसे कोई दिक्कत नहीं होती थी। पुलिस ने फरहत का मोबाइल फोन कब्जे में ले लिया है। उसकी सीडीआर निकलवाई जा रही है, वहीं उसका लैपटॉप भी कब्जे में लेने का प्रयास किया जा रहा है।




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